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बुधवार, 2 नवंबर 2011

दीन सेवकाई

   एक जवान युवती अपने माता-पिता के साथ सरकार से मिलने वाले थोड़े से भत्ते पर रहती और अपनी इस दयनीय दशा के कारण सदा निराशा और विषाद से भरी रहती। फिर भी जब मैं ने उस से कुछ काम करने अथवा स्वयंसेवा के कार्यों में हाथ बंटाने का परामर्ष दिया तो उसने इन्कार कर दिया, क्योंकि वह कोई ’छोटा’ कार्य करने के द्वारा लज्जित नहीं होना चाहती थी!

   विश्व-प्रसिद्ध मसीही धर्मशास्त्री ग्रेशम मेकन, प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान YMCA में स्वयंसेवक थे और उन्होंने निम्न स्तर का कार्य स्वीकार किया था - उन्हें सैनिकों की एक भोजनशाला में प्रातः गरम चॉकलेट बना कर देना होता था। यह चॉकलेट प्रातः ७ बजे तैयार चाहिए होता था, इसलिए ग्रेशम तड़के ५ बजे उठकर इस कार्य में लग जाते, और उन्हें अपने प्रातः का नाशता करने के लिए अकसर बहुत देर प्रतीक्षा करनी पड़ती थी। यदि वे चाहते तो भोजनशाला में आकर नाशता करने वाले सैनिकों के लिए वे एक बहुत उपयोगी सलाहकार बन सकते थे, किंतु सलाहकार की आदरणीय श्रेणी की बजाए उन्होंने रसोई में तुच्छ कार्य स्वीकार करके अपने प्रभु की शिक्षा का पालन किया और उसे महिमा दी।

   बाइबल में यीशु पूर्व के पुराने नियम के काल में मन्दिर में लेवियों के लिए ये आदर था कि वे मन्दिर और उसके सामान की देख-रेख और रख-रखाव में शारीरिक परिश्रम करें। इसी प्रकार प्रेरित पौलुस अपनी जीविका कमाने के लिए, बिना किसी लज्जा का अनुभव करे, तंबू बनाता था। हमारे प्रभु यीशु ने अपने चेलों के पांव धोने में कोई छोटापन अनुभव नहीं किया।

   मसीही विश्वासी कोई भी कार्य करें, वे उसमें प्रफुल्लित और आनन्दित रह सकते हैं, क्योंकि कोई भी कार्य छोटा नहीं है यदि वह प्रभु की महिमा के लिए और प्रभु के नाम से किया जाए। प्रत्येक कार्य प्रभु को आदर देने और हमारे विश्वास की वास्तविक्ता को दिखाने का अवसर है। - हर्ब वैण्डर लुग्ट

यदि परमेश्वर उसमें हो तो छोटा भी बड़ा होता है।

क्‍योंकि बड़ा कौन है, वह जो भोजन पर बैठा या वह जो सेवा करता है? क्‍या वह नहीं जो भोजन पर बैठा है? पर मैं तुम्हारे बीच में सेवक की नाईं हूं। - लूका २२:२७
 
बाइबल पाठ: लूका २२:२४-३०
    Luk 22:24  उन में यह वाद-विवाद भी हुआ कि हम में से कौन बड़ा समझा जाता है?
    Luk 22:25  उस ने उन से कहा, अन्यजातियों के राजा उन पर प्रभुता करते हैं, और जो उन पर अधिकार रखते हैं, वे उपकारक कहलाते हैं।
    Luk 22:26  परन्‍तु तुम ऐसे न होना; वरन जो तुम में बड़ा है, वह छोटे की नाईं और जो प्रधान है, वह सेवक की नाईं बने।
    Luk 22:27  क्‍योंकि बड़ा कौन है, वह जो भोजन पर बैठा या वह जो सेवा करता है? क्‍या वह नहीं जो भोजन पर बैठा है? पर मैं तुम्हारे बीच में सेवक की नाईं हूं।
    Luk 22:28  परन्‍तु तुम वह हो, जो मेरी परीक्षाओं में लगातार मेरे साथ रहे।
    Luk 22:29  और जैसे मेरे पिता ने मेरे लिये एक राज्य ठहराया है,
    Luk 22:30  वैसे ही मैं भी तुम्हारे लिये ठहराता हूं, ताकि तुम मेरे राज्य में मेरी मेज पर खाओ-पिओ; वरन सिंहासनों पर बैठ कर इस्‍त्राएल के बारह गोत्रों का न्याय करो।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यर्मियाह २७-२९ 
  • तीतुस ३

मंगलवार, 1 नवंबर 2011

सेवक अगुवे

   एक मसीही कॉलेज के छात्रावास के कुछ लड़कों ने शरारत करी और छात्रावास की दीवारों को तरह तरह की चीज़ें पोत कर गंदा कर दिया। जब कॉलेज के अध्यक्ष को इस बात का पता चला तो वह सोच में पड़ गया कि इस बात की क्या प्रतिक्रिया करे। वह छात्रावास के उन छात्रों को दिवारें साफ करने के लिए बाध्य कर सकता था, वह यह कार्य सफाई कर्मचारियों द्वार भी करवा सकता था। किंतु उसने ऐसा नहीं किया, वरन स्वयं ही सफाई करने का सामान लिया और दीवारें साफ करने लगा। थोड़ी ही देर में छात्रावास के कमरों के बन्द दरवाज़े खुलने लगे और शरारती युवकों ने बाहर आकर स्वयं सफाई करना आरंभ कर दिया। क्योंकि अध्यक्ष ने सेवक की भूमिका अपनाई इसी कारण वह उन युवकों को एक महत्वपूर्ण शिक्षा दे सका।

   मुझे कभी कभी प्रतीत होता है कि आज के मसीही समाज में सही नेतृत्व की कमी होती जा रही है। ऐसा नहीं है कि समाज में अगुवे नहीं हैं, अगुवे तो बहुत हैं और बहुत लोग अगुवे बनना भी चाहते हैं, लेकिन बहुत ही थोड़े हैं जो परमेश्वर के वचन बाइबल में दिये अगुवे के नमूने को अपनाने और उसको निभाने की इच्छा रखते हैं या प्रयास करते हैं। अगुवे बनने की इच्छा रखने वाले ये नेतागण मत्ती के २० अध्याय और अन्य ऐसे खंडों में दी गई नेतृत्व की मूल शिक्षाओं का पालन बहुत कम किंतु उनकी अवहेलना बहुत अधिक करते हैं।

   प्रभु यीशु द्वारा उनकी मण्डली में नेतृत्व के उदाहरण को एक शब्द में बयान किया जा सकता है - सेवक; प्रभु यीशु ने स्वयं इसे कर के दिखाया जब उसने अपने चेलों के पांव धोये और उन से इस उदाहरण का अनुसरण करने को कहा ( युहन्ना १३:२-१६)।

   जब हम नेतृत्व की स्थिति में हों तो हमें सेवक होने के संबंध में अपने रवैये को मत्ती २० और युहन्ना १३ की शिक्षाओं के परिपेक्ष में जांच लेना चाहिए। शायद नेतृत्व की ज़िम्मेदरी संभालने से पहले हमें सेवक होने का अभ्यास करने की अधिक आवश्यक्ता हो। - डेव एग्नर


सच्चे नेता सदा अपनी सेवा को सुधारते रहते हैं।
 
और जो तुम में प्रधान होना चाहे वह तुम्हारा दास बने। - मत्ती २०:२७
 
बाइबल पाठ: मत्ती २०:२०-२८
    Mat 20:20  जब जब्‍दी के पुत्रों की माता ने अपने पुत्रों के साथ उसके पास आकर प्रणाम किया, और उस से कुछ मांगने लगी।
    Mat 20:21  उस ने उस से कहा, तू क्‍या चाहती है? वह उस से बोली, यह कह, कि मेरे ये दो पुत्र तेरे राज्य में एक तेरे दहिने और एक तेरे बाएं बैठें।
    Mat 20:22  यीशु ने उत्तर दिया, तुम नहीं जानते कि क्‍या मांगते हो जो कटोरा मैं पीने पर हूं, क्‍या तुम पी सकते हो उन्‍होंने उस से कहा, पी सकते हैं।
    Mat 20:23  उस ने उन से कहा, तुम मेरा कटोरा तो पीओगे पर अपने दाहिने बाएं किसी को बिठाना मेरा काम नहीं, पर जिन के लिये मेरे पिता की ओर से तैयार किया गया, उन्हीं के लिये है।
    Mat 20:24  यह सुनकर, दसों चेले उन दोनों भाइयों पर क्रुद्ध हुए।
    Mat 20:25  यीशु ने उन्‍हें पास बुलाकर कहा, तुम जानते हो, कि अन्य जातियों के हाकिम उन पर प्रभुता करते हैं; और जो बड़े हैं, वे उन पर अधिकार जताते हैं।
    Mat 20:26  परन्‍तु तुम में ऐसा न होगा; परन्‍तु जो कोई तुम में बड़ा होना चाहे, वह तुम्हारा सेवक बने।
    Mat 20:27  और जो तुम में प्रधान होना चाहे वह तुम्हारा दास बने।
    Mat 20:28  जैसे कि मनुष्य का पुत्र, वह इसलिये नहीं आया कि उस की सेवा टहल की जाए, परन्‍तु इसलिये आया कि आप सेवा टहल करे और बहुतों की छुडौती के लिये अपने प्राण दे।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यर्मियाह २४-२६ 
  • तीतुस २

सोमवार, 31 अक्टूबर 2011

मंच के तानाशाह

   बीते समय के वाद्यवृंद संचालकों में से कुछ बहुत कठोर और तानाशाह थे। उनके विष्य में छपे एक लेख में लेखक रौबर्ट बैक्सटर ने लिखा, "इन लोगों के शीर्ष पर होने का समय था २०वीं सदी के १९३०-४० के दशक। इन दिनों में वाद्यवृंद संचालक आर्थर रौडिन्स्की अपने साथ अभ्यास के समय गोलियों से भरी रिवाल्वर रखता था; आर्ट्यूरो टोस्कनी क्रोधित होकर संचालन वाली अपनी छाड़ी तोड़ देता था, फ्रिट्ज़ रेनियर अपनी पैनी आंखों से घूरकर बजाने वालों को धमकाता था और जॉर्ज स्ज़ेल अपनी उस्तरे जैसी तेज़ ज़बान के वारों से उन्हें घायल करता था। एक बार एक आहत बजाने वाला टोस्कनी के साथ अभ्यास से क्रोधित होकर बुड़्बुड़ाता हुआ उठकर बाहर की ओर चला तो पीछे से टोस्कनी ने ज़ोर से चिल्लाकर उससे कहा ’अब तुम्हें क्षमा मांगने का अवसर भी नहीं है!’" इतनी क्रूरता तथा आपसी संबंधों में इतनी कटुता के होते यह बड़े विस्मय की बात है कि इन तानाशाहों के साथ वाद्य बजाने वाले इतना मधुर संगीत किस तरह बजा लेते थे।

   महान नेताओं को दूसरों से आदर पाने के लिए उन्हें डरा धमका कर रखने की आवश्यक्ता नहीं है। इस संसार के एकमात्र सिद्ध अगुए प्रभु यीशु मसीह ने अगुए होने का इससे बहुत उत्तम मार्ग दिखाया। प्रभु यीशु  का मंच रूपांतर का वह पहाड़ नहीं था जहां उसके इश्वरत्व के दर्शन उसके चेलों ने देखे, उसका मंच था रोमी शास्कों और धर्मे के अगुवों के द्वारा दिया गया उसका वह क्रूस जहां हमारे पापों की सज़ा को उठाकर उसने हमारी सबसे गहरी और अनिवार्य आवश्यक्ता का समाधान किया। क्रूस रूपी उस मंच के सहारे आज भी वह पाप से बिगड़े हुए जीवनों से उद्धार द्वारा मधुर संगीत प्रस्तुत करवाता है। प्रभु यीशु पाप से बिगड़े जीवनों को पहले अपने प्रेम और क्षमा से ढांप देता है, फिर जैसे जैसे हम उसके निर्देशों को समर्पित होते हैं, वह हम में होकर दूसरों तक अपने प्रेम की मधुर धुन को पहुंचाता है।

   प्रभु यीशु ने दिखाया कि नेता होने के लिए तानाशाह होना आवश्यक नहीं है, सेवा द्वार जो शीर्ष स्थान मिलता है वह प्रेम और आदर से भरा तथा चिरस्थाई होता है। - डेनिस डी हॉन

जब तक नेता अपने नेतृत्व में सेवा लेकर नहीं आते तब तक वे सच्चे अगुवे नहीं बन सकते।

जो तुम में बड़ा हो, वह तुम्हारा सेवक बने। - मत्ती २३:११
 
बाइबल पाठ: मत्ती २३:१-१२
    Mat 23:1  तब यीशु ने भीड़ से और अपने चेलों से कहा।
    Mat 23:2  शास्त्री और फरीसी मूसा की गद्दी पर बैठे हैं।
    Mat 23:3  इसलिये वे तुम से जो कुछ कहें वह करना, और मानना; परन्‍तु उन के से काम मत करना, क्‍योंकि वे कहते तो हैं पर करते नहीं।
    Mat 23:4  वे एक ऐसे भारी बोझ को जिन को उठाना कठिन है, बान्‍ध कर उन्‍हें मनुष्यों के कन्‍धों पर रखते हैं, परन्‍तु आप उन्‍हें अपनी उंगली से भी सरकाना नहीं चाहते ।
    Mat 23:5  वे अपने सब काम लोगों को दिखाने के लिये करते हैं: वे अपने तावीजों को चौड़े करते, और अपने वस्‍त्रों की कोरें बढ़ाते हैं।
    Mat 23:6  जेवनारों में मुख्य मुख्य जगहें, और सभा में मुख्य मुख्य आसन।
    Mat 23:7  और बाजारों में नमस्‍कार और मनुष्य में रब्‍बी कहलाना उन्‍हें भाता है।
    Mat 23:8  परन्‍तु, तुम रब्‍बी न कहलाना, कयोंकि तुम्हारा एक ही गुरू है: और तुम सब भाई हो।
    Mat 23:9  और पृथ्वी पर किसी को अपना पिता न कहना, कयोंकि तुम्हारा एक ही पिता है, जो स्‍वर्ग में है।
    Mat 23:10  और स्‍वामी भी न कहलाना, क्‍योंकि तुम्हारा एक ही स्‍वामी है, अर्थात मसीह।
    Mat 23:11  जो तुम में बड़ा हो, वह तुम्हारा सेवक बने।
    Mat 23:12  जो कोई अपने आप को बड़ा बनाएगा, वह छोटा किया जाएगा: और जो कोई अपने आप को छोटा बनाएगा, वह बड़ा किया जाएगा।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यर्मियाह २२-२३ 
  • तीतुस १

रविवार, 30 अक्टूबर 2011

सेवक का तौलिया

   अपने क्रूस पर दिए गए बलिदान से पहले, प्रभु यीशु ने एक ऊपरी कमरे में अपने चेलों के साथ अन्तिम भोज किया और उन्हें आते समय की उनकी ज़िम्मेदारियों के विष्य में कुछ बहुत महत्वपूर्ण शिक्षाएं दीं। युहन्ना १३ में वर्णन है कि प्रभु ने भोज से उठ कर अपने चेलों के पांव भी धोए और उन्हें एक तौलिए से पोंछा, और अपने चेलों को समझाया कि जैसे उन्होंने चेलों की सेवा करी है, वैसे ही चेलों को भी संसार में सेवक हो कर जाना है, सेवा करवाने वाले हो कर नहीं। इस घटना के ऊपर पास्टर हौवर्ड ओग्डन ने एक सन्देश दिया जिसका शीर्षक था "हाथों में तौलिया लिए परमेश्वर।" प्रभु के हाथ का वह तौलिया इस बात का प्रतीक था कि "जैसे कि मनुष्य का पुत्र, वह इसलिये नहीं आया कि उस की सेवा टहल करी जाए, परन्‍तु इसलिए आया कि आप सेवा टहल करे और बहुतों की छुडौती के लिए अपने प्राण दे" (मत्ती २०:२८)। किंतु आज कितनी सहजता से हम प्रभु के दिए इस क्रम को उलट कर सेवा करने वालों की बजाए लेने वाले बन जाते हैं। इसीलिए हमें सदा प्रभु के इस उदाहरण को अपने समक्ष बनाए रखना चाहिए।

   जब वर्नेन ग्राउन्ड्स डेन्वर के एक बाइबल कॉलेज के अधिपति थे तो १९७३ में स्नातक हो रहे विद्यार्थियों को उन्होंने अपने स्नातक सन्देश में युहन्ना १३ के इस सत्य से चुनौती दी। उन्होंने उतीर्ण हो कर स्नातक होने वाले प्रत्येक विद्यार्थी को एक छोटा प्रतीक दिया, यह कहते हुए कि इससे उन्हें अपने आते समय में सहायता मिलेगी। वह प्रतीक था एक सफेद तौलिए का छोटा सा टुकड़ा। उस दिन के स्नातक होने वाले विद्यार्थियों में से एक ने, जो विदेशों में मिशनरी बनकर कार्य करता है, कहा: "हमें संसार में सेवक हो कर जाने के लिए निर्धारित किया गया था। तौलिए का वह छोटा टुकड़ा, तब से मेरे बटुए में रखा है; वह इतने वर्षों के बाद जीर्ण और मटमैला हो गया है, लेकिन मुझे सदा स्मरण दिलाता रहता है कि संसार में मेरा उद्देश्य क्या है।"

   उस ऊपरी कमरे में जो चुनौती प्रभु यीशु ने अपने चेलों के सामने रखी वह आज भी उसके चेलों को चिताती रहती है और हमें अपने आप को जांचने को उकसाती है कि क्या हम वास्तव में संसार में सेवक का स्वरूप लेकर जीते हैं। संभवतः यह समय है कि हम पहचाने कि प्रभु ने हमें जो सौंपा है वह "सेवक का तौलिया" है। - डेव एग्नर


प्रत्येक मसीही विश्वासी की प्रतिभाएं उसे स्वार्थ लाभ के लिए नहीं, सेवा के लिए सौंपी गईं हैं।
 
यीशु ने उन्‍हें पास बुला कर कहा, तुम जानते हो, कि अन्य जातियों के हाकिम उन पर प्रभुता करते हैं; और जो बड़े हैं, वे उन पर अधिकार जताते हैं। परन्‍तु तुम में ऐसा न होगा; परन्‍तु जो कोई तुम में बड़ा होना चाहे, वह तुम्हारा सेवक बने। - मत्ती २०:२५, २६
 
बाइबल पाठ: मत्ती २०:२०-२८
    Mat 20:20  जब जब्‍दी के पुत्रों की माता ने अपने पुत्रों के साथ उसके पास आकर प्रणाम किया, और उस से कुछ मांगने लगी।
    Mat 20:21  उस ने उस से कहा, तू क्‍या चाहती है? वह उस से बोली, यह कह, कि मेरे ये दो पुत्र तेरे राज्य में एक तेरे दाहिने और एक तेरे बाएं बैठें।
    Mat 20:22  यीशु ने उत्तर दिया, तुम नहीं जानते कि क्‍या मांगते हो जो कटोरा मैं पीने पर हूं, क्‍या तुम पी सकते हो? उन्‍होंने उस से कहा, पी सकते हैं।
    Mat 20:23  उस ने उन से कहा, तुम मेरा कटोरा तो पीओगे पर अपने दाहिने बाएं किसी को बिठाना मेरा काम नहीं, पर जिन के लिये मेरे पिता की ओर से तैयार किया गया, उन्हीं के लिये है।
    Mat 20:24  यह सुनकर, दसों चेले उन दोनों भाइयों पर क्रुद्ध हुए।
    Mat 20:25  यीशु ने उन्‍हें पास बुला कर कहा, तुम जानते हो, कि अन्य जातियों के हाकिम उन पर प्रभुता करते हैं; और जो बड़े हैं, वे उन पर अधिकार जताते हैं।
    Mat 20:26  परन्‍तु तुम में ऐसा न होगा; परन्‍तु जो कोई तुम में बड़ा होना चाहे, वह तुम्हारा सेवक बने।
    Mat 20:27  और जो तुम में प्रधान होना चाहे वह तुम्हारा दास बने।
    Mat 20:28  जैसे कि मनुष्य का पुत्र, वह इसलिये नहीं आया कि उस की सेवा टहल करी जाए, परन्‍तु इसलिये आया कि आप सेवा टहल करे और बहुतों की छुडौती के लिये अपने प्राण दे।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यर्मियाह २०-२१ 
  • २ तिमुथियुस ४

शनिवार, 29 अक्टूबर 2011

परमेश्वर का प्रेम

   इलिनौए प्रांत के एक शहर इवैन्सटन में मार्था नामक एक महिला को लकवा हो रखा था और वह अपना कुछ भी कार्य कर सकने में असमर्थ थी। वह यह बात समझ नहीं पाती थी कि एक करुणामय और प्रेम करने वाला परमेश्वर उसे इस तरह के रोग से ग्रस्त कैसे होने दे सकता है। उस शहर की १६ महिलाओं ने परमेश्वर के प्रेम को बहुत सुन्दरता से उसके समक्ष प्रस्तुत किया। उन्होंने अपनी दिनचर्या और ज़िम्मेदारियों के कार्यक्रम में परिवर्तन करके इस तरह से निर्धारित किया कि उन में से कुछ चौबीसों घंटे मार्था के साथ रहती थीं। वे उससे बातें करतीं, उसकी साफ-सफाई करतीं, उसे भोजन करवातीं, हर तरह से उसकी देख-भाल करतीं, उसके लिए प्रार्थना करतीं और उसे परमेश्वर और प्रभु यीशु के बारे में बतातीं थीं। जिस परमेश्वर के प्रेम को मार्था समझ नहीं पा रही थी, वह उसने इन महिलाओं द्वारा पाया, और एक दिन उसने प्रभु यीशु में विश्वास किया और अपना जीवन उसे समर्पित कर दिया। इसके कुछ समय पश्चात मार्था का निधन हो गया। आज वह स्वर्ग में अपने प्रभु के साथ है क्योंकि १६ महिलाओं ने प्रभु यीशु के उदाहरण का अनुसरण करके, परमेश्वर के प्रेम को उसे प्रदर्शित करके दिखाया।

   प्रभु यीशु ने, अपने पृथ्वी के प्रवास के समय, परमेश्वर के प्रेम को अपने जीवन के द्वार दिखाया। जिस नम्र आज्ञाकारिता का बीड़ा उसने स्वर्ग से पृथ्वी पर मानव रूप में आते समय उठाया था, उसने उसे जी कर भी दिखाया। अपने पृथ्वी के समय में उसने मानव स्वरूप की सीमाओं में अपना जीवन व्यतीत किया, विरोधियों की घोर निन्दा सही, किंतु अपनी ईश्वरीय सामर्थ को उसने केवल दूसरों के भले के लिए, बिमारों को चंगा करने, संसार के त्यागे और तुच्छ समझे जाने वाले लोगों की सहायता करने में उपयोग किया। क्रूस पर चढ़ाए जाने से पहले, अपने चेलों के साथ भोजन करते समय, उनके पांव धोकर उसने अपने विनीत स्वभाव का एक और उदाहरण उनके समक्ष रखा और उन्हें उस उदाहरण का अनुसरण करने की आज्ञा दी। उसे एक अपराधी के समान रोमी क्रूस पर चढ़ा कर मार डाला गया। उसका समस्त जीवन परमेश्वर के प्रेम और धीरज का प्रतिबिंब था; उस ने कहा, "जिस ने मुझे देखा है उस ने पिता को देखा है" (युहन्ना १४:९)।

   आज प्रभु यीशु हमारे साथ सदेह पृथ्वी पर नहीं है, वह पिता परमेश्वर के पास हमारे लिए विनती करता है; लेकिन उस स्वर्गीय प्रेम को प्रदर्शित करने का बीड़ा उसने अपने चेलों को सौंपा है। हम जो मसीही विश्वासी हैं, हमारी यह ज़िम्मेदारी है कि हम उसके इस प्रेम को संसार के समक्ष प्रस्तुत करें। - हर्ब वैण्डर लुग्ट


मेरा जीवन मेरे पड़ौसी के सामने मेरे परमेश्वर के स्वरूप को प्रदर्शित करता है।

क्‍योंकि मैं ने तुम्हें नमूना दिखा दिया है, कि जैसा मैं ने तुम्हारे साथ किया है, तुम भी वैसा ही किया करो। - युहन्ना १३:१५

बाइबल पाठ: युहन्ना १३:१-१७
    Joh 13:1  फसह के पर्ब्‍ब से पहिले जब यीशु ने जान लिया, कि मेरी वह घड़ी आ पहुंची है कि जगत छोड़ कर पिता के पास जाऊं, तो अपने लोगों से, जो जगत में थे, जैसा प्रेम वह रखता था, अन्‍त तक वैसा ही प्रेम रखता रहा।
    Joh 13:2  और जब शैतान शमौन के पुत्र यहूदा इस्‍किरयोती के मन में यह डाल चुका था, कि उसे पकड़वाए, तो भोजन के समय।
    Joh 13:3  यीशु ने यह जान कर कि पिता ने सब कुछ मेरे हाथ में कर दिया है और मैं परमेश्वर के पास से आया हूं, और परमेश्वर के पास जाता हूं।
    Joh 13:4  भोजन पर से उठ कर अपने कपड़े उतार दिए, और अंगोछा लेकर अपनी कमर बान्‍धी।
    Joh 13:5  तब बरतन में पानी भर कर चेलों के पांव धोने और जिस अंगोछे से उस की कमर बन्‍धी थी उसी से पोंछने लगा।
    Joh 13:6  जब वह शमौन पतरस के पास आया: तब उस ने उस से कहा, हे प्रभु,
    Joh 13:7  क्‍या तू मेरे पांव धोता है? यीशु ने उस को उत्तर दिया, कि जो मैं करता हूं, तू अब नहीं जानता, परन्‍तु इस के बाद समझेगा।
    Joh 13:8  पतरस ने उस से कहा, तू मेरे पांव कभी न धोने पाएगा: यह सुन कर यीशु ने उस से कहा, यदि मैं तुझे न धोऊं, तो मेरे साथ तेरा कुछ भी साझा नहीं।
    Joh 13:9  शमौन पतरस ने उस से कहा, हे प्रभु, तो मेरे पांव ही नहीं, वरन हाथ और सिर भी धो दे।
    Joh 13:10  यीशु ने उस से कहा, जो नहा चुका है, उसे पांव के सिवा और कुछ धोने का प्रयोजन नहीं; परन्‍तु वह बिलकुल शुद्ध है: और तुम शुद्ध हो परन्‍तु सब के सब नहीं।
    Joh 13:11  वह तो अपने पकड़वाने वाले को जानता था इसी लिये उस ने कहा, तुम सब के सब शुद्ध नहीं।
    Joh 13:12  जब वह उन के पांव धो चुका और अपने कपड़े पहिन कर फिर बैठ गया तो उन से कहने लगा, क्‍या तुम समझे कि मैं ने तुम्हारे साथ क्‍या किया?
    Joh 13:13  तुम मुझे गुरू, और प्रभु, कहते हो, और भला कहते हो, क्‍योंकि मैं वही हूं।
    Joh 13:14  यदि मैं ने प्रभु और गुरू हो कर तुम्हारे पांव धोए तो तुम्हें भी एक दुसरे के पांव धोना चाहिए।
    Joh 13:15  क्‍योंकि मैं ने तुम्हें नमूना दिखा दिया है, कि जैसा मैं ने तुम्हारे साथ किया है, तुम भी वैसा ही किया करो।
    Joh 13:16  मैं तुम से सच सच कहता हूं, दास अपने स्‍वामी से बड़ा नहीं और न भेजा हुआ अपने भेजने वाले से।
    Joh 13:17  तुम तो ये बातें जानते हो, और यदि उन पर चलो, तो धन्य हो।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यर्मियाह १८-१९ 
  • २ तिमुथियुस ३

शुक्रवार, 28 अक्टूबर 2011

सच्चा सहायक

   एक जवान किसान द्वारा आत्महत्या करे जाने के पश्चात उसकी पत्नि ने उसके विष्य में कहा, "उनके लिए खेती केवल एक व्यवसाय नहीं था; वह उनकी पहचान, उनकी राष्ट्रीयता, उनका धर्म था। ज़मीन के साथ मेहनत करने से हम दोनो को ऐसा लगता था मानो हम सर्वशक्तिमान के साथ हैं; लेकिन यह अनुभव उनके लिए अब कड़ुवा होने लगा था और वे इसे सह नहीं पाए।" ऐसे लोगों के बारे में जान कर उनके लिए मेरा दिल भर आता है। इन लोगों के पास परमेश्वर की सृष्टि के लिए गहरी लगन और चाह है और वे उसके लिए कड़ी मेहनत करने को भी तैयार रहते हैं; परन्तु बहुत से लोग एक दुखद अन्त को आ जाते हैं क्योंकि वे गलत ईश्वरों की उपासना में लग जाते हैं। यह उपासना दुष्टों द्वारा शरीर की लालसाओं के कारण अपराध तथा वासना रूपी ईश्वर की भी हो सकती है, या भले लोगों द्वारा अपनी सेहत, शरीर और परिवार की उपेक्षा करके अपने कार्य रूपी ईश्वर की भी हो सकती है।

   जब कभी कोई भी चीज़ हमारे जीवन में इतनी महत्वपूर्ण हो जाती है कि उसका स्थान प्रथम और अन्य हर बात का उसके पश्चात हो जाता है, तो वह हमारा ईश्वर बन जाती है; प्रेरित युहन्ना ने चिताया: "तुम न तो संसार से और न संसार में की वस्‍तुओं से प्रेम रखो: यदि कोई संसार से प्रेम रखता है, तो उस में पिता का प्रेम नहीं है। क्‍योंकि जो कुछ संसार में है, अर्थात शरीर की अभिलाषा, और आंखों की अभिलाषा और जीविका का घमण्‍ड, वह पिता की ओर से नहीं, परन्‍तु संसार ही की ओर से है" (१ युहन्ना २:१५, १६)।

   जब हम सच्चे जीवते परमेश्वर से अधिक महत्व किसी भी अन्य को देने लगते हैं, तो यह उसकी उपासना करने के समान है। वह जो भी हो, सदाकाल तक बना नहीं रहेगा; और ना ही जब हमारी योजनाएं विफल होने लगें, स्वास्थ्य बिगड़ने लगे या अन्त समय आ जाए तो वह हमारी कोई सहायता करने पाएगा। केवल परमेश्वर के वचन बाइबल में वर्णित सच्चा जीविता परमेश्वर ही ऐसे में हमारा सहायक हो सकता है। - हर्ब वैण्डर लुग्ट

जो भी प्रभु यीशु के प्रति हमारे प्रेम को ठंडा करता है, वही "संसार" है।

तू अपने परमेश्वर यहोवा से अपने सारे मन, और सारे जीव, और सारी शक्ति के साथ प्रेम रखना। - व्यवस्थाविवरण ६:५
 
बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण ६:१-७
    Deu 6:1  यह वह आज्ञा, और वे विधियां और नियम हैं जो तुम्हें सिखाने की तुम्हारे परमेश्वर यहोवा ने आज्ञा दी है, कि तुम उन्हें उस देश में मानो जिसके अधिकरी होने को पार जाने पर हो
    Deu 6:2  और तू और तेरा बेटा और तेरा पोता यहोवा का भय मानते हुए उसकी उन सब विधियों और आज्ञाओं पर, जो मैं तुझे सुनाता हूं, अपने जीवन भर चलते रहें, जिस से तू बहुत दिन तक बना रहे।
    Deu 6:3  हे इस्राएल, सुन, और ऐसा ही करने की चौकसी कर; इसलिये कि तेरा भला हो, और तेरे पितरों के परमेश्वर यहोवा के वचन के अनुसार उस देश में जहां दूध और मधु की धाराएं बहती हैं तुम बहुत हो जाओ।
    Deu 6:4  हे इस्राएल, सुन, यहोवा हमारा परमेश्वर है, यहोवा एक ही है;
    Deu 6:5  तू अपने परमेश्वर यहोवा से अपने सारे मन, और सारे जीव, और सारी शक्ति के साथ प्रेम रखना।
    Deu 6:6  और ये आज्ञाएं जो मैं आज तुझ को सुनाता हूं वे तेरे मन में बनी रहें;
    Deu 6:7  और तू इन्हें अपने बालबच्चों को समझा कर सिखाया करना, और घर में बैठे, मार्ग पर चलते, लेटते, उठते, इनकी चर्चा किया करना।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यर्मियाह १५-१७ 
  • २ तिमुथियुस २

गुरुवार, 27 अक्टूबर 2011

लालसाएं

   बच्चे को खिलौने वाला ट्रक चहिए था, और उसने स्टोर में उपस्थित प्रत्येक जन को इससे अवगत करा दिया; जब उसकी माँ ने ट्रक खरीदने के उसके आग्रह को नहीं माना तो उस बच्चे ने ज़ोर से रोना और हाथ-पैर मारना आरंभ कर दिया। उसका रोना-चिल्लाना बढ़ता ही गया, जब तक परेशान होकर मँ ने उसे उसका मनपसन्द खिलौना दिलवा नहीं दिया।

   मैं यह सब देख रहा था, और मुझे अपनी माँ की कही बात स्मरण हो आई; वे कहा करती थीं: "वस्तुओं पर अपना मन मत लगाओ।"

   आज के समय में, जब आकर्षक विज्ञापनों का बोल-बाला है, तो अपने आप को वस्तुओं के आकर्षण से अछूता रखना विश्वासियों के लिए भी कठिन होता जा रहा है। पत्रिकाओं में रंगीन चित्र और विज्ञापन, रेडियो पर लुभावने सन्देश, टेलिविज़न पर दिखाई जाने वाली आकर्षक वस्तुएं - यह सब हमें ऐसा प्रतीत करवाती हैं कि मानो हम इन वस्तुओं के बिना रह ही नहीं सकते।

   प्रभु के चेले और प्रेरित पतरस ने हमें चिताया: "परन्‍तु प्रभु का दिन चोर की नाईं आ जाएगा, उस दिन आकाश बड़ी हड़हड़ाहट के शब्‍द से जाता रहेगा, और तत्‍व बहुत ही तप्‍त होकर पिघल जाएंगे, और पृथ्वी और उस पर के काम जल जाऐंगे। तो जब कि ये सब वस्‍तुएं, इस रीति से पिघलने वाली हैं, तो तुम्हें पवित्र चालचलन और भक्ति में कैसे मनुष्य होना चाहिए" (२ पतरस २:१०, ११)। क्योंकि संसारिक वस्तुएं नाशमान हैं, इसलिए हमें उन वस्तुओं पर ध्यान लगाना चाहिए जो चिर स्थाई हैं, "पृथ्वी पर की नहीं परन्‍तु स्‍वर्गीय वस्‍तुओं पर ध्यान लगाओ" (कुलुस्सियों ३:२)।

   हमें संसार की वस्तुओं के अर्जित करने की प्रवृति से बचना चाहिए क्योंकि वे ऐसी लालसएं बन जातीं हैं जो हमें प्रभु से दूर कर देती हैं। भौतिक वस्तुएं तो नाशमान हैं, किंतु आत्मिक चिर स्थाई हैं। - रिचर्ड डी हॉन

संसार की वस्तुओं को हलके से, परन्तु स्वर्गीय वस्तुओं को मज़बूती से थामे रहो।

क्‍योंकि जहां तेरा धन है वहां तेरा मन भी लगा रहेगा। - मत्ती ६:२१

बाइबल पाठ: मत्ती ६:१९-३४
    Mat 6:19  अपने लिये पृथ्वी पर धन इकट्ठा न करो जहां कीड़ा और काई बिगाड़ते हैं, और जहां चोर सेंध लगाते और चुराते हैं।
    Mat 6:20  परन्‍तु अपने लिये स्‍वर्ग में धन इकट्ठा करो, जहां न तो कीड़ा, और न काई बिगाड़ते हैं, और जहां चोर न सेंध लगाते और न चुराते हैं।
    Mat 6:21  क्‍योंकि जहां तेरा धन है वहां तेरा मन भी लगा रहेगा।
    Mat 6:22  शरीर का दिया आंख है: इसलिये यदि तेरी आंख निर्मल हो, तो तेरा सारा शरीर भी उजियाला होगा।
    Mat 6:23  परन्‍तु यदि तेरी आंख बुरी हो, तो तेरा सारा शरीर भी अन्‍धियारा होगा; इस कारण वह उजियाला जो तुझ में है यदि अन्‍धकार हो तो वह अन्‍धकार कैसा बड़ा होगा।
    Mat 6:24  कोई मनुष्य दो स्‍वामियों की सेवा नहीं कर सकता, क्‍योंकि वह एक से बैर ओर दूसरे से प्रेम रखेगा, वा एक से मिला रहेगा और दूसरे को तुच्‍छ जानेगा; तुम परमेश्वर और धन दोनो की सेवा नहीं कर सकते।
    Mat 6:25  इसलिये मैं तुम से कहता हूं, कि अपने प्राण के लिये यह चिन्‍ता न करना कि हम क्‍या खाएंगे और क्‍या पीएंगे और न अपने शरीर के लिये कि क्‍या पहिनेंगे क्‍या प्राण भोजन से, और शरीर वस्‍त्र से बढ़कर नहीं?
    Mat 6:26  आकाश के पक्षियों को देखो! वे न बोते हैं, न काटते हैं, और न खत्तों में बटोरते हैं तौभी तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता उन को खिलाता है; क्‍या तुम उन से अधिक मूल्य नहीं रखते?
    Mat 6:27  तुम में कौन है, जो चिन्‍ता करके अपनी अवस्था में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है
    Mat 6:28  और वस्‍त्र के लिये क्‍यों चिन्‍ता करते हो जंगली सोसनों पर ध्यान करो, कि वै कैसे बढ़ते हैं, वे न तो परिश्रम करते हैं, न कातते हैं।
    Mat 6:29  तौभी मैं तुम से कहता हूं, कि सुलैमान भी, अपने सारे वैभव में उन में से किसी के समान वस्‍त्र पहिने हुए न था।
    Mat 6:30  इसलिये जब परमेश्वर मैदान की घास को, जो आज है, और कल भाड़ में झोंकी जाएगी, ऐसा वस्‍त्र पहिनाता है, तो हे अल्पविश्वासियों, तुम को वह क्‍योंकर न पहिनाएगा?
    Mat 6:31  इसलिये तुम चिन्‍ता करके यह न कहना, कि हम क्‍या खाएंगे, या क्‍या पीएंगे, या क्‍या पहिनेंगे?
    Mat 6:32  क्‍योंकि अन्यजाति इन सब वस्‍तुओं की खोज में रहते हैं, और तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता जानता है, कि तुम्हें ये सब वस्‍तुएं चाहिए।
    Mat 6:33  इसलिये पहिले तुम उसे राज्य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्‍तुएं तुम्हें मिल जाएंगी।
    Mat 6:34  सो कल के लिये चिन्‍ता न करो, क्‍योकि कल का दिन अपनी चिन्‍ता आप कर लेगा; आज के लिये आज ही का दुख बहुत है।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यर्मियाह १२-१४ 
  • २ तिमुथियुस १