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शुक्रवार, 11 अक्टूबर 2013

पवित्र आत्मा

   प्रेरितों के विश्वास वचन को दोहराते समय हम एक वाक्य बोलते हैं, "मैं पवित्र आत्मा में विश्वास करता हूँ"। बाइबल विद्वान और लेखक जे०बी०फिलिप्स ने इस वाक्य के संबंध में कहा, "जब हम यह कहते हैं तो इसका तात्पर्य होता है कि हम यह मानते हैं कि पवित्र आत्मा जीवित परमेश्वर है जो मानव व्यक्तित्व में आने और उसे संवारने की क्षमता तथा इच्छा रखता है"।

   कई बार हम पवित्र आत्मा को एक अव्यैक्तिक शक्ति मान लेते हैं लेकिन यह सही नहीं है। परमेश्वर का वचन बाइबल पवित्र आत्मा को परमेश्वर बताती है। उसमें परमेश्वर के गुण हैं: वह सर्वविद्यमान है (भजन 139:7-8); वह सब कुछ जानता है (1कुरिन्थियों 2:10-11); उसकी शक्ति असीम है (लूका 1:35)। पवित्र आत्मा ऐसे कार्य करता है जो केवल परमेश्वर ही कर सकता है: उत्पन्न करना (उत्पत्ति 1:2), जीवन देना (रोमियों 8:2)। पवित्र आत्मा त्रिएक परमेश्वर में, पिता और पुत्र के साथ तथा उनके बराबर है।

   पवित्र आत्मा एक व्यक्ति है जो हमारे साथ व्यक्तिगत रीति से सम्बंध बनाए रखता है। जब हम पाप करते हैं तो वह दुखी होता है (इफीसियों 4:30); वह हमें सिखाता है (1कुरिन्थियों 2:13); हमारे लिए प्रार्थना करता है (रोमियों 8:26); हमारा मार्गदर्शन करता है (यूहन्ना 16:13); वह हमें आत्मिक वर्दान देता है (1कुरिन्थियों 12:11); और हमें हमारे उद्धार के विषय में आश्वस्त करता है (रोमियों 8:16)।

   यदि हमने पापों से पश्चाताप करके प्रभु यीशु से उनके लिए क्षमा प्राप्त करी है तो पवित्र आत्मा हमारे अन्दर निवास करता है। वह चाहता है कि हमें परिवर्तित करे कि हम और भी मसीह यीशु की समानता में होते चले जाएं। जितना हम परमेश्वर के वचन बाइबल को पढ़ने और परमेश्वर की सामर्थ पर निर्भर करते हुए बाइबल की आज्ञाकारिता में बढ़ते जाएंगे, उतना ही अधिक हम पवित्र आत्मा के साथ सहयोग करते हुए उसे अपने जीवनों में प्रभावी कार्य करने तथा परिवर्तित करने देने वाले बनते चले जाएंगे, प्रभु यीशु की समानता में बदलते चले जाएंगे। - मार्विन विलियम्स


जो मसीही विश्वासी पवित्र आत्मा की अवहेलना करता है वह उस दीपक के समान है जो बिना ऊर्जा स्त्रोत के है।

मनुष्यों में से कौन किसी मनुष्य की बातें जानता है, केवल मनुष्य की आत्मा जो उस में है? वैसे ही परमेश्वर की बातें भी कोई नहीं जानता, केवल परमेश्वर का आत्मा। - 1 कुरिन्थियों 2:11

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 2:6-16
1 Corinthians 2:6 फिर भी सिद्ध लोगों में हम ज्ञान सुनाते हैं: परन्तु इस संसार का और इस संसार के नाश होने वाले हाकिमों का ज्ञान नहीं। 
1 Corinthians 2:7 परन्तु हम परमेश्वर का वह गुप्‍त ज्ञान, भेद की रीति पर बताते हैं, जिसे परमेश्वर ने सनातन से हमारी महिमा के लिये ठहराया। 
1 Corinthians 2:8 जिसे इस संसार के हाकिमों में से किसी ने नहीं जाना, क्योंकि यदि जानते, तो तेजोमय प्रभु को क्रूस पर न चढ़ाते। 
1 Corinthians 2:9 परन्तु जैसा लिखा है, कि जो आंख ने नहीं देखी, और कान ने नहीं सुना, और जो बातें मनुष्य के चित्त में नहीं चढ़ीं वे ही हैं, जो परमेश्वर ने अपने प्रेम रखने वालों के लिये तैयार की हैं। 
1 Corinthians 2:10 परन्तु परमेश्वर ने उन को अपने आत्मा के द्वारा हम पर प्रगट किया; क्योंकि आत्मा सब बातें, वरन परमेश्वर की गूढ़ बातें भी जांचता है। 
1 Corinthians 2:11 मनुष्यों में से कौन किसी मनुष्य की बातें जानता है, केवल मनुष्य की आत्मा जो उस में है? वैसे ही परमेश्वर की बातें भी कोई नहीं जानता, केवल परमेश्वर का आत्मा। 
1 Corinthians 2:12 परन्तु हम ने संसार की आत्मा नहीं, परन्तु वह आत्मा पाया है, जो परमेश्वर की ओर से है, कि हम उन बातों को जानें, जो परमेश्वर ने हमें दी हैं। 
1 Corinthians 2:13 जिन को हम मनुष्यों के ज्ञान की सिखाई हुई बातों में नहीं, परन्तु आत्मा की सिखाई हुई बातों में, आत्मिक बातें आत्मिक बातों से मिला मिला कर सुनाते हैं। 
1 Corinthians 2:14 ​परन्तु शारीरिक मनुष्य परमेश्वर के आत्मा की बातें ग्रहण नहीं करता, क्योंकि वे उस की दृष्टि में मूर्खता की बातें हैं, और न वह उन्हें जान सकता है क्योंकि उन की जांच आत्मिक रीति से होती है। 
1 Corinthians 2:15 आत्मिक जन सब कुछ जांचता है, परन्तु वह आप किसी से जांचा नहीं जाता। 
1 Corinthians 2:16 क्योंकि प्रभु का मन किस ने जाना है, कि उसे सिखलाए? परन्तु हम में मसीह का मन है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 37-38 
  • कुलुस्सियों 3


गुरुवार, 10 अक्टूबर 2013

स्मरण

   मेरे एक पुराने मित्र ने मुझे लिखे एक पत्र में अपने 90वें जन्म दिन के आस-पास के दिनों के बारे में लिखा, "यह समय था बीते समय के बारे में चिन्तन करने का, बीते हुए जीवन का पुनःअवलोकन करने का, और कई घंटे ’स्मरण कर सकने के अनुग्रह’ में बिताने का। कितना सरल होता है भूल जाना कि प्रभु कैसे हमें अपने साथ सुरक्षित लिए चलता रहा है! ’हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह, और उसके किसी उपकार को न भूलना’ (भजन 103:2)"। यह मनोभावना उस व्यक्ति की विशेषता रही है, जिसे मैं पिछले 50 से भी अधिक वर्षों से जानता हूँ और जिसकी सराहना करता रहा हूँ। बजाए इसके कि वे अपने जीवन की निराशाएं स्मरण करते, उनका पत्र परमेश्वर के लिए धन्यवाद और स्तुति से भरा हुआ था।

   पहले उन्होंने परमेश्वर से मिली पार्थिव आशीषों को स्मरण किया - अच्छा स्वास्थ्य, अच्छा परिवार, अच्छा जीवन साथी और बच्चे, कार्य में मिले आनन्द, सफलता और उन्नति, उनको उठाए रखने और संभालने वाले मित्रगण, परमेश्वर की सेवा के लिए मिले अवसर, आदि। उन्होंने इन सब बातों को परमेश्वर से मिले उपहार माना, जो उन्हें, उनमें से एक के भी योग्य ना होने पर भी, अनुग्रह पूर्वक दे दिए गए और उन्होंने कृतज्ञता से स्वीकार किए, उपयोग किए। इसके बाद उन्होंने परमेश्वर से मिली आत्मिक आशीषों को स्मरण किया - मसीही विश्वासी अभिभावकों के प्रभाव और परमेश्वर की दया तथा अनुग्रह का अनुभव जब किशोरावस्था में उन्होंने प्रभु यीशु को अपना उद्धारकर्ता ग्रहण किया। उन्होंने चर्च मण्डलियों, स्कूलों और मसीही विश्वासी लोगों से मिले प्रोत्साहन और उनकी प्रार्थनाओं के स्मरण के साथ अपने पत्र का अन्त किया।

   मेरे उस मित्र का यह पत्र एक नमूना है, जिसका अनुसरण हमें करते रहना चाहिए और परमेश्वर की आशीषों, देख-भाल तथा दया के आनन्द को सदा अपने सम्मुख रखना चाहिए। बीती बातों में हमारे प्रति परमेश्वर की लगातार बनी विश्वासयोग्यता, आते समय में सदा उपलब्ध रहने वाली उसकी विश्वासयोग्यता के प्रति हमें आश्वस्त करती रहेगी, हमारे विश्वास को दृढ़ बनाए रखेगी और हमें उसके मार्गों से भटकने नहीं देगी: "हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह; और जो कुछ मुझ में है, वह उसके पवित्र नाम को धन्य कहे!" (भजन 103:1)। - डेविड मैक्कैसलैंड


परमेश्वर के उदार उपहारों के लिए उसके धन्यवादी रहें।

हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह, और उसके किसी उपकार को न भूलना। - भजन 103:2

बाइबल पाठ: भजन 103:1-14
Psalms 103:1 हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह; और जो कुछ मुझ में है, वह उसके पवित्र नाम को धन्य कहे! 
Psalms 103:2 हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह, और उसके किसी उपकार को न भूलना। 
Psalms 103:3 वही तो तेरे सब अधर्म को क्षमा करता, और तेरे सब रोगों को चंगा करता है, 
Psalms 103:4 वही तो तेरे प्राण को नाश होने से बचा लेता है, और तेरे सिर पर करूणा और दया का मुकुट बान्धता है, 
Psalms 103:5 वही तो तेरी लालसा को उत्तम पदार्थों से तृप्त करता है, जिस से तेरी जवानी उकाब की नाईं नई हो जाती है।
Psalms 103:6 यहोवा सब पिसे हुओं के लिये धर्म और न्याय के काम करता है। 
Psalms 103:7 उसने मूसा को अपनी गति, और इस्राएलियों पर अपने काम प्रगट किए। 
Psalms 103:8 यहोवा दयालु और अनुग्रहकरी, विलम्ब से कोप करने वाला और अति करूणामय है। 
Psalms 103:9 वह सर्वदा वादविवाद करता न रहेगा, न उसका क्रोध सदा के लिये भड़का रहेगा। 
Psalms 103:10 उसने हमारे पापों के अनुसार हम से व्यवहार नहीं किया, और न हमारे अधर्म के कामों के अनुसार हम को बदला दिया है। 
Psalms 103:11 जैसे आकाश पृथ्वी के ऊपर ऊंचा है, वैसे ही उसकी करूणा उसके डरवैयों के ऊपर प्रबल है। 
Psalms 103:12 उदयाचल अस्ताचल से जितनी दूर है, उसने हमारे अपराधों को हम से उतनी ही दूर कर दिया है। 
Psalms 103:13 जैसे पिता अपने बालकों पर दया करता है, वैसे ही यहोवा अपने डरवैयों पर दया करता है। 
Psalms 103:14 क्योंकि वह हमारी सृष्टि जानता है; और उसको स्मरण रहता है कि मनुष्य मिट्टी ही है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 34-36 
  • कुलुस्सियों 2


बुधवार, 9 अक्टूबर 2013

लड़ाई की कीमत

   प्रथम विश्वयुद्ध को, उसके होने के समय, "सभी युद्धों का अन्त कर देने वाला युद्ध" कहा गया था। उस युद्ध पर बने एक लघुचलचित्र में बताया गया कि यदि उस युद्ध में काम आए ब्रिटैन के नागरिकों को चार-चार की पंक्ति में करके लंडन में बने उस युद्ध के स्मारक के सामने से निकलने को कहा जाता तो उस स्मारक के सामने से सभी लोगों को निकल पाने में 7 दिन लग जाते। इस स्तब्ध कर देने वाले तथ्य ने मुझे युद्ध की भयानक कीमत का एहसास दिलाया। यद्यपि युद्ध की कीमत आंकने में वित्तीय खर्चे, संपत्ति का विनाश और अर्थव्यवस्था का नाश सम्मिलित होते हैं, लेकिन कुछ भी युद्ध से होने वाली मानवीय क्षति और उसके दूरगामी प्रभावों का आंकलन नहीं कर सकता। सैनिकों तथा नागरिकों, दोनों को ही यह भारी कीमत चुकानी पड़ती है, और यह कीमत बचे हुए लोगों को होने वाले दुख और पीड़ा से और कई गुणा बढ़ जाती है। लड़ाई वासत्व में एक बहुत बड़ी कीमत मांगती है।

   यह बात केवल देशों की आपसी लड़ाईयों तक ही सीमित नहीं है। जब मसीही विश्वासी आपस में लड़ते हैं, तो इसकी भी एक बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है। परमेश्वर के वचन बाइबल में याकूब ने अपनी पत्री में लिखा: "तुम में लड़ाइयां और झगड़े कहां से आ गए? क्या उन सुख-विलासों से नहीं जो तुम्हारे अंगों में लड़ते-भिड़ते हैं?" (याकूब 4:1)। अपनी स्वार्थसिद्धी के अन्तर्गत हम अनेक बार आपस में लड़ने-भिड़ने लगते हैं, बिना इस बात का ध्यान करे कि इस लड़ाई की कीमत हमारे परस्पर संबंधों तथा मसीह यीशु के लिए हमारी गवाही पर बहुत भारी पड़ेगी। संभवतः इसीलिए याकूब ने यह प्रश्न उठाने से पहले मसीही विश्वासियों के सामने एक चुनौती रखी: "और मिलाप कराने वालों के लिये धामिर्कता का फल मेल-मिलाप के साथ बोया जाता है" (याकूब 3:18)।

   यदि हम मसीही विश्वासियों को संसार के सामने शांति के राजकुमार प्रभु यीशु के गवाह बनना है, तो आपसी रंजिश, विवाद, लड़ाई-झगड़े आदि छोड़कर उस प्रेम को अपने जीवनों से दिखाना होगा जो परमेश्वर ने हमसे दिखाया है और वह सहनशीलता प्रदर्शित करनी होगी जो मसीह यीशु ने हमारे प्रति रखी है। अन्यथा थोड़ी सी प्रतीत होने वाली आपसी लड़ाई के लिए हमें एक बहुत भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। - बिल क्राउडर


जब मसीही विश्वासी आपस में शांति से रहेंगे तब संसार शांति के राजकुमार को स्पष्टता से देख और जान पाएगा।

तुम में लड़ाइयां और झगड़े कहां से आ गए? क्या उन सुख-विलासों से नहीं जो तुम्हारे अंगों में लड़ते-भिड़ते हैं? - याकूब 4:1-10

बाइबल पाठ: याकूब 4:1-10
James 4:1 तुम में लड़ाइयां और झगड़े कहां से आ गए? क्या उन सुख-विलासों से नहीं जो तुम्हारे अंगों में लड़ते-भिड़ते हैं? 
James 4:2 तुम लालसा रखते हो, और तुम्हें मिलता नहीं; तुम हत्या और डाह करते हो, ओर कुछ प्राप्त नहीं कर सकते; तुम झगड़ते और लड़ते हो; तुम्हें इसलिये नहीं मिलता, कि मांगते नहीं। 
James 4:3 तुम मांगते हो और पाते नहीं, इसलिये कि बुरी इच्छा से मांगते हो, ताकि अपने भोग विलास में उड़ा दो। 
James 4:4 हे व्यभिचारिणयों, क्या तुम नहीं जानतीं, कि संसार से मित्रता करनी परमेश्वर से बैर करना है सो जो कोई संसार का मित्र होना चाहता है, वह अपने आप को परमेश्वर का बैरी बनाता है। 
James 4:5 क्या तुम यह समझते हो, कि पवित्र शास्त्र व्यर्थ कहता है जिस आत्मा को उसने हमारे भीतर बसाया है, क्या वह ऐसी लालसा करता है, जिस का प्रतिफल डाह हो? 
James 4:6 वह तो और भी अनुग्रह देता है; इस कारण यह लिखा है, कि परमेश्वर अभिमानियों से विरोध करता है, पर दीनों पर अनुग्रह करता है। 
James 4:7 इसलिये परमेश्वर के आधीन हो जाओ; और शैतान का साम्हना करो, तो वह तुम्हारे पास से भाग निकलेगा। 
James 4:8 परमेश्वर के निकट आओ, तो वह भी तुम्हारे निकट आएगा: हे पापियों, अपने हाथ शुद्ध करो; और हे दुचित्ते लोगों अपने हृदय को पवित्र करो। 
James 4:9 दुखी होओ, और शोक करा, और रोओ: तुम्हारी हंसी शोक में और तुम्हारा आनन्द उदासी में बदल जाए। 
James 4:10 प्रभु के साम्हने दीन बनो, तो वह तुम्हें शिरोमणि बनाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 32-33 
  • कुलुस्सियों 1


मंगलवार, 8 अक्टूबर 2013

विधि

   "महत्वकांक्षी नहीं है", अवश्य ही इस वाक्यांश को आप अपने संबंध में, अपने कार्य समीक्षा रिपोर्ट पर नहीं देखना चाहेंगे। जहाँ तक कार्य का संबंध है, जो कर्मचारी महत्वकांक्षी नहीं होता वह संस्था में अधिक ऊँचाई तक उठ भी नहीं सकता। जब तक कुछ कर दिखाने की सशक्त अभिलाषा ना हो, कुछ प्राप्त नहीं किया जा सकता। लेकिन महत्वकांक्षा का एक बुरा पहलु भी है। कई बार महत्वकांक्षा हर संभव रीति से अपने आप को बढ़ाने की अधिक और दूसरों के लिए कुछ भला करने के लिए कम होती है।

   यही बुरा पहलु हम इस्त्राएल के अनेक राजाओं के संबंध में भी परमेश्वर के वचन बाइबल में दिए गए उनके वृतांतों में देखते हैं, और यह सिलसिला इस्त्राएल के पहले राजा से ही आरंभ हो गया था। इस्त्राएल के पहला राजा, शाउल, ने परमेश्वर द्वारा उसे दी गई यह ज़िम्मेदारी बड़ी नम्रता और दीनता के साथ आरंभ करी, लेकिन धीरे-धीरे वह इस पद को परमेश्वर का अनुग्रह नहीं वरन अपनी संपत्ति समझने लग गया। वह यह भूल गया कि परमेश्वर ने उसे इसलिए नियुक्त किया जिससे वह परमेश्वर के चुने हुए लोगों, इस्त्राएल का इस प्रकार से नेतृत्व करे जिससे अन्य जातियों के सामने एक उत्तम उदाहरण हो और वे सच्चे परमेश्वर की ओर आकर्षित हो सकें। जब परमेश्वर ने शाउल से यह ज़िम्मेदारी वापस ले ली, तब भी उसके विचार अपने ही लिए थे (1 शमूएल 15:30)।

   इस संसार में जहाँ महत्वकांक्षाएं लोगों को, किसी भी विधि द्वारा, एक दूसरे से शीर्ष होने के लिए उकसाती रहती हैं और जहाँ अनुचित विधियों के प्रयोग द्वारा ऊपर उठना आम देखने में आता है, परमेश्वर अपने लोगों से एक भिन्न मार्ग पर चलने को कहता है - स्वार्थ, विरोध तथा पाप के मार्ग से हटकर: "विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो" (फिलिप्पियों 2:3); "इस कारण जब कि गवाहों का ऐसा बड़ा बादल हम को घेरे हुए है, तो आओ, हर एक रोकने वाली वस्तु, और उलझाने वाले पाप को दूर कर के, वह दौड़ जिस में हमें दौड़ना है, धीरज से दौड़ें" (इब्रानियों 12:1), जिससे वे परमेश्वर की आशीषों के साथ और परमेश्वर द्वारा ऊपर उठ सकें।

   यदि आप वास्तव में शीर्ष पर पहुंचना चाहते हैं, तो दीनता के साथ परमेश्वर से प्रेम तथा उसकी सेवा करने के महत्वकांक्षी हो जाईए, और वह आपको बढ़ाएगा: "इसलिये परमेश्वर के बलवन्‍त हाथ के नीचे दीनता से रहो, जिस से वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए" (1 पतरस 5:6)। मसीही विश्वासी के लिए ऊँचे उठने और बढ़ते जाने की यही सही और सबसे कारगर विधि है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


यदि महत्वकांक्षा परमेश्वर पर केंद्रित नहीं है तो उसके परिणाम दीर्घकालीन नहीं होंगे।

प्रभु के साम्हने दीन बनो, तो वह तुम्हें शिरोमणि बनाएगा। - याकूब 4:10

बाइबल पाठ: 1 शमूएल 15:17-30
1 Samuel 15:17 शमूएल ने कहा, जब तू अपनी दृष्टि में छोटा था, तब क्या तू इस्राएली गोत्रियों का प्रधान न हो गया, और क्या यहोवा ने इस्राएल पर राज्य करने को तेरा अभिषेक नहीं किया? 
1 Samuel 15:18 और यहोवा ने तुझे यात्रा करने की आज्ञा दी, और कहा, जा कर उन पापी अमालेकियों को सत्यानाश कर, और जब तक वे मिट न जाएं, तब तक उन से लड़ता रह। 
1 Samuel 15:19 फिर तू ने किस लिये यहोवा की वह बात टालकर लूट पर टूट के वह काम किया जो यहोवा की दृष्टि में बुरा है? 
1 Samuel 15:20 शाऊल ने शमूएल से कहा, नि:सन्देह मैं ने यहोवा की बात मानकर जिधर यहोवा ने मुझे भेजा उधर चला, और अमालेकियों को सत्यानाश किया है। 
1 Samuel 15:21 परन्तु प्रजा के लोग लूट में से भेड़-बकरियों, और गाय-बैलों, अर्थात सत्यानाश होने की उत्तम उत्तम वस्तुओं को गिलगाल में तेरे परमेश्वर यहोवा के लिये बलि चढ़ाने को ले आए हैं। 
1 Samuel 15:22 शमूएल ने कहा, क्या यहोवा होमबलियों, और मेलबलियों से उतना प्रसन्न होता है, जितना कि अपनी बात के माने जाने से प्रसन्न होता है? सुन मानना तो बलि चढ़ाने और कान लगाना मेढ़ों की चर्बी से उत्तम है। 
1 Samuel 15:23 देख बलवा करना और भावी कहने वालों से पूछना एक ही समान पाप है, और हठ करना मूरतों और गृहदेवताओं की पूजा के तुल्य है। तू ने जो यहोवा की बात को तुच्छ जाना, इसलिये उसने तुझे राजा होने के लिये तुच्छ जाना है। 
1 Samuel 15:24 शाऊल ने शमूएल से कहा, मैं ने पाप किया है; मैं ने तो अपनी प्रजा के लोगों का भय मानकर और उनकी बात सुनकर यहोवा की आज्ञा और तेरी बातों का उल्लंघन किया है। 
1 Samuel 15:25 परन्तु अब मेरे पाप को क्षमा कर, और मेरे साथ लौट आ, कि मैं यहोवा को दण्डवत करूं। 
1 Samuel 15:26 शमूएल ने शाऊल से कहा, मैं तेरे साथ न लौटूंगा; क्योंकि तू ने यहोवा की बात को तुच्छ जाना है, और यहोवा ने तुझे इस्राएल का राजा होने के लिये तुच्छ जाना है। 
1 Samuel 15:27 तब शमूएल जाने के लिये घूमा, और शाऊल ने उसके बागे की छोर को पकड़ा, और वह फट गया। 
1 Samuel 15:28 तब शमूएल ने उस से कहा आज यहोवा ने इस्राएल के राज्य को फाड़कर तुझ से छीन लिया, और तेरे एक पड़ोसी को जो तुझ से अच्छा है दे दिया है। 
1 Samuel 15:29 और जो इस्राएल का बलमूल है वह न तो झूठ बोलता और न पछताता है; क्योंकि वह मनुष्य नहीं है, कि पछताए। 
1 Samuel 15:30 उसने कहा, मैं ने पाप तो किया है; तौभी मेरी प्रजा के पुरनियों और इस्राएल के साम्हने मेरा आदर कर, और मेरे साथ लौट, कि मैं तेरे परमेश्वर यहोवा को दण्डवत करूं।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 30-31 
  • फिलिप्पियों 4


सोमवार, 7 अक्टूबर 2013

पहचान

   साधारणतया, जब कभी किसी की फोटो खींची जा रही होती है तो उससे मुस्कुराने को कहा जाता है, लेकिन अमेरिका के कुछ क्षेत्रों में, यदि कोई ड्राइविंग लाइसेंस बनावाने जाता है तो उसे फोटो खिंचवाते समय नहीं मुस्कुराने को कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि गलत पहचान प्रमाणों द्वारा लाइसेंस बनवाने को रोका जा सके। लाइसेंस बनाने वाले अधिकारी प्रत्येक फोटो और पहचान प्रमाणों की तकनीकी द्वारा बारीकी से जाँच करते हैं और उनके पास बने हुए फोटो संग्रह के साथ पहचान प्रमाण और फोटो को मिलाकर देखते हैं। यदि कहीं कोई छल या गड़बड़ प्रतीत होती है तो तुरंत लाइसेंस बनाकर देने वाले कर्मचारी को सतर्क कर दिया जाता है। सन 1999 से 2009 तक इस प्रक्रिया की सहायता से छल से लाइसेंस बनवाने के 6000 प्रयासों को विफल किया गया। लेकिन मुस्कुराना क्यों मना किया जाता है? क्योंकि जिस तकनीक का प्रयोग चेहरे और पहचान प्रमाण को जाँचने के लिए किया जाता है, वह उन चेहरों को बेहतर पहचान पाती है जो बिना मुस्कुराहट के होते हैं; इसलिए सही पहचान की संभावना के लिए मुस्कुराना मना किया गया है।

   प्रभु यीशु ने भी मसीही विश्वासियों की एक पहचान दी थी; उन्होंने अपने चेलों से कहा: "यदि आपस में प्रेम रखोगे तो इसी से सब जानेंगे, कि तुम मेरे चेले हो" (यूहन्ना 13:35)। जैसे मसीही विश्वासियों की आवश्यकताएं और परिस्थितियाँ भिन्न तथा अनेक प्रकार की होती हैं, वैसे ही उनसे प्रेम दिखाने के तरीके भी भिन्न तथा अनेक प्रकार के हो सकते हैं; जैसे, प्रोत्साहन के दो शब्द कहना, मिलने जाना, भोजन पर बुलाना, बुराई या गलती के प्रति सचेत करना, प्रार्थना करना, बाइबल के पद बाँटना, उन्हें दिल खोल कर कहने देना और उनकी सुनना, उनके लिए एक प्रेम भरी मुस्कुराहट आदि।

   प्रेरित यूहन्ना ने लिखा, "हम जानते हैं, कि हम मृत्यु से पार हो कर जीवन में पहुंचे हैं; क्योंकि हम भाइयों से प्रेम रखते हैं: जो प्रेम नहीं रखता, वह मृत्यु की दशा में रहता है" (1 यूहन्ना 3:14)। क्या आज लोग आपको एक मसीही विश्वासी के रूप में पहचानते हैं? क्या आपके जीवन में अन्य लोगों के प्रति मसीह यीशु का सा प्रेम दिखाई देता है? क्या आपने मसीह यीशु का अनुयायी होने की अपनी पहचान सही बना रखी है? - ऐनी सेटास


परमेश्वर के प्रति हमारे प्रेम का एक माप है हमारा उसके बच्चों के प्रति प्रेम।

जो कोई अपने भाई से प्रेम रखता है, वह ज्योति में रहता है, और ठोकर नहीं खा सकता। - 1 यूहन्ना 2:10

बाइबल पाठ: यूहन्ना 1 यूहन्ना 3:11-18
1 John 3:11 क्योंकि जो समाचार तुम ने आरम्भ से सुना, वह यह है, कि हम एक दूसरे से प्रेम रखें। 
1 John 3:12 और कैन के समान न बनें, जो उस दुष्‍ट से था, और जिसने अपने भाई को घात किया: और उसे किस कारण घात किया? इस कारण कि उसके काम बुरे थे, और उसके भाई के काम धर्म के थे। 
1 John 3:13 हे भाइयों, यदि संसार तुम से बैर करता है तो अचम्भा न करना। 
1 John 3:14 हम जानते हैं, कि हम मृत्यु से पार हो कर जीवन में पहुंचे हैं; क्योंकि हम भाइयों से प्रेम रखते हैं: जो प्रेम नहीं रखता, वह मृत्यु की दशा में रहता है। 
1 John 3:15 जो कोई अपने भाई से बैर रखता है, वह हत्यारा है; और तुम जानते हो, कि किसी हत्यारे में अनन्त जीवन नहीं रहता। 
1 John 3:16 हम ने प्रेम इसी से जाना, कि उसने हमारे लिये अपने प्राण दे दिए; और हमें भी भाइयों के लिये प्राण देना चाहिए। 
1 John 3:17 पर जिस किसी के पास संसार की संपत्ति हो और वह अपने भाई को कंगाल देख कर उस पर तरस न खाना चाहे, तो उस में परमेश्वर का प्रेम क्योंकर बना रह सकता है? 
1 John 3:18 हे बालकों, हम वचन और जीभ ही से नहीं, पर काम और सत्य के द्वारा भी प्रेम करें।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 28-29 
  • फिलिप्पियों 3


रविवार, 6 अक्टूबर 2013

चमकते रहिए!

   जहाँ हम रहते हैं वहाँ सड़क के किनारे पर पटरी नहीं बनी है, घर से सड़क पर निकलने वाले रास्ते से सड़क पर आते ही हम सड़क पर चल रहे लोगों और वाहनों में होते हैं, इसलिए यह बाहर निकलना बहुत सावधानी से करना पड़ता है। उस रास्ते को रौशन करने वाले बत्ती के खंबे भी एक दूसरे से काफी दूरी पर हैं, इसलिए यदि एक बत्ती भी खराब हो जाए तो सड़क का कुछ भाग अन्धकार में हो जाता है। मेरे घर के बाहर लगे खंबे की बत्ती खराब हो गई थी और अनेक बार फोन द्वारा उसे ठीक करने के प्रयासों के बावजूद वह ठीक नहीं करी जा रही थी। मुझे भय रहता था कि बहुत तड़के जब मैं अपने गैराज से गाड़ी निकाल कर सड़क पर आता हूँ तो अन्धकार के कारण कहीं स्कूल जाते हुए किसी बच्चे के साथ मेरी टक्कर ना हो जाए। थोड़ी सी भी रौशनी कितनी महत्वपूर्ण और सुरक्षादायक हो सकती है मैंने इस बात को समझ पाया।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में ज्योति से संबंधित शिक्षाएं और विचार अनेक बार पाए जाते हैं। प्रभु यीशु ने कहा कि वे जगत की ज्योति हैं (यूहन्ना 8:12); प्रेरित पौलुस ने पवित्र आत्मा की प्रेर्णा से लिखा: "रात बहुत बीत गई है, और दिन निकलने पर है; इसलिये हम अन्धकार के कामों को तज कर ज्योति के हथियार बान्ध लें" (रोमियों 13:12) और प्रभु यीशु ने अपने चेलों को सिखाया कि "उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के साम्हने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई करें" (मत्ती 5:16)। प्रभु यीशु ने चेलों को यह भी सिखाया कि "और लोग दिया जलाकर पैमाने के नीचे नहीं परन्तु दीवट पर रखते हैं, तब उस से घर के सब लोगों को प्रकाश पहुंचता है" (मत्ती 5:15)।

   जो ज्योति चमकती नहीं है उसकी उपयोगिता जाती रहती है। हम मसीही विश्वासी अपने आप में तो कोई ज्योति नहीं रखते, किंतु प्रभु यीशु में होने के कारण हम ज्योतिर्मय हो गए हैं और यह ज्योति हमारे जीवनों से दिखनी चाहिए: "क्योंकि तुम तो पहले अन्धकार थे परन्तु अब प्रभु में ज्योति हो, सो ज्योति की सन्तान की नाईं चलो" (इफिसियों 5:8); अर्थात हमारे कार्य, व्यवहार, बात-चीत, जीवन शैली इत्यादि ऐसी होनी चाहिए कि हमारे अन्दर की ज्योति से लोग हमारे तथा जगत के उद्धारकर्ता की ओर आकर्षित हो सकें।

   परमेश्वर ने हम सब को एक विशेष वातावरण में रखा है, ऐसे वातावरण में जहाँ हमारी ज्योति सबसे अच्छी तरह चमक सके और हम दूसरों के लिए प्रकाश पहुँचने का कारण हो सकें। शायद आपके आस-पास अन्धकार हो, आपका जीवन या कार्य कुंठाओं से जूझ रहे हों, निराशाओं के अन्धकार आपको घेर रहे हों। हताश मत हों, परमेश्वर ने आपको वहाँ रखा है जहाँ आप उसके लिए सबसे अधिक उपयोगी हैं; उस अन्धकार में रखा है जहाँ आप सर्वोत्तम प्रकाश दे सकें। आपके जीवन का थोड़ा सा भी प्रकाश किसी के लिए अनन्त जीवन का प्रकाश, किसी के लिए चलने को सही मार्ग दिखाने वाला, किसी को मसीह यीशु की ओर आकर्षित करने वाली ज्योति, किसी को खतरे में आने से बचाने वाला हो सकता है। परमेश्वर ने आपको, अर्थात, अपने दीपक को जला कर, दीवट पर रख दिया है, अन्धकार की शक्तियों को उसे ढाँपने और उसके प्रकाश को दबाने ना दें; चमकते रहिए, परमेश्वर के लिए उपयोगी बने रहिए। - जो स्टोवैल


चाहे आप एक कोने में लगी मोमबत्ती हों या किसी चट्टान पर खड़ा प्रकाश-स्तंभ, बस अपने प्रभु के नाम के लिए चमकते रहिए!

तब यीशु ने फिर लोगों से कहा, जगत की ज्योति मैं हूं; जो मेरे पीछे हो लेगा, वह अन्धकार में न चलेगा, परन्तु जीवन की ज्योति पाएगा। - यूहन्ना 8:12

बाइबल पाठ: मत्ती 5:14-16; 1 पतरस 2:9-10
Matthew 5:14 तुम जगत की ज्योति हो; जो नगर पहाड़ पर बसा हुआ है वह छिप नहीं सकता। 
Matthew 5:15 और लोग दिया जलाकर पैमाने के नीचे नहीं परन्तु दीवट पर रखते हैं, तब उस से घर के सब लोगों को प्रकाश पहुंचता है। 
Matthew 5:16 उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के साम्हने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई करें।

1 Peter 2:9 पर तुम एक चुना हुआ वंश, और राज-पदधारी याजकों का समाज, और पवित्र लोग, और (परमेश्वर की) निज प्रजा हो, इसलिये कि जिसने तुम्हें अन्धकार में से अपनी अद्भुत ज्योति में बुलाया है, उसके गुण प्रगट करो। 
1 Peter 2:10 तुम पहिले तो कुछ भी नहीं थे, पर अब परमेश्वर ही प्रजा हो: तुम पर दया नहीं हुई थी पर अब तुम पर दया हुई है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 26-27 
  • फिलिप्पियों 2


शनिवार, 5 अक्टूबर 2013

सही ठिकाना

   आज कल अमेरिका में मकान और ज़मीन खरीदना या बेचना एक जोखिम भरा व्यवसाय बन गया है क्योंकि दाम बहुत गिर गए हैं। यदि आप व्यावासायिक भूमि बेचना चाह रहे हैं तो यह और भी कठिन हो गया है। ऐसे समय में, भूमि और मकान बेचते समय एक पुरानी कहावत स्मरण रखना आवश्यक है: "ज़मीन और मकान बेचते या खरीदते समय, तीन सबसे अधिक महत्वपूर्ण बातें जिनका ध्यान रखना अति आवश्यक है हैं स्थान, स्थान और स्थान!"

   यही बात हम मसीही विश्वासियों द्वारा प्रभु यीशु के लिए जीवन जीने के संबंध में भी लागू होती है - आत्मिक रीति से हम कहाँ हैं हमें यह समझना और स्मरण रखना बहुत आवश्यक है। इस संसार की गिरी हुई दशा में से होकर निकलते समय यदि हमें किसी हानि में पड़ने से बचना है तो हमें अपने आत्मिक ठिकाने के स्मरण को सजीव बनाए रखना होगा। प्रेरित पौलुस ने कुलुस्से के विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में उन्हें स्मरण दिलाया कि मसीह यीशु में विश्वास लाने के द्वारा उनका ठिकाना अब बदल गया है, क्योंकि परमेश्वर "ने हमें अन्धकार के वश से छुड़ाकर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया" (कुलुस्सियों 1:13)। यह स्मरण रखना कि परमेश्वर के महान अनुग्रह के द्वारा अब हमें मसीह यीशु के राज्य में ठिकाना दे दिया गया है बहुत अन्तर लाता है। अब मसीह यीशु हमारे मन-मस्तिषक का स्वामी है, हमारा राजा है और हम उससे मिलने वाले प्रेम, अनुग्रह, द्या और देखभाल के कारण उसके कृतज्ञ सेवक हैं। अब उसकी इच्छा हमारी इच्छा है, उसका आचरण हमारे आचरण के लिए नमूना है और उसके मार्ग हमारे जीवन मार्ग हैं। इस संसार में जब कभी हमारे सामने कोई चुनाव आता है तो हमारी निष्ठा मसीह यीशु ही की ओर है।

   प्रभु यीशु ने हमें पाप के जिस अन्धकार से निकाल कर अपनी ज्योति में स्थान दिया है, जब कभी उस अन्धकार की लालसाएं और प्रलोभन हमारी परीक्षा करें, और हमारे मन-मस्तिषक से उसके राज्य को दूर करने का प्रयास करें तो अपने आप को पुनः स्मरण दिला लें कि अब हमारा ठिकाना संसार और संसार की बातें नहीं वरन स्वर्गीय आशीषों का वह सही ठिकाना है जो प्रभु ने हमारे लिए तैयार किया है और हमें प्रदान किया है। - जो स्टोवैल


मसीही राज्य के निवासियों को मसीही आचरण प्रदर्शित करते रहना चाहिए।

उसी ने हमें अन्धकार के वश से छुड़ाकर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया। - कुलुस्सियों 1:13

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों 1:3-14
Colossians 1:3 हम तुम्हारे लिये नित प्रार्थना कर के अपने प्रभु यीशु मसीह के पिता अर्थात परमेश्वर का धन्यवाद करते हैं। 
Colossians 1:4 क्योंकि हम ने सुना है, कि मसीह यीशु पर तुम्हारा विश्वास है, और सब पवित्र लोगों से प्रेम रखते हो। 
Colossians 1:5 उस आशा की हुई वस्तु के कारण जो तुम्हारे लिये स्वर्ग में रखी हुई है, जिस का वर्णन तुम उस सुसमाचार के सत्य वचन में सुन चुके हो। 
Colossians 1:6 जो तुम्हारे पास पहुंचा है और जैसा जगत में भी फल लाता, और बढ़ता जाता है; अर्थात जिस दिन से तुम ने उसको सुना, और सच्चाई से परमेश्वर का अनुग्रह पहिचाना है, तुम में भी ऐसा ही करता है। 
Colossians 1:7 उसी की शिक्षा तुम ने हमारे प्रिय सहकर्मी इपफ्रास से पाई, जो हमारे लिये मसीह का विश्वास योग्य सेवक है। 
Colossians 1:8 उसी ने तुम्हारे प्रेम को जो आत्मा में है हम पर प्रगट किया। 
Colossians 1:9 इसी लिये जिस दिन से यह सुना है, हम भी तुम्हारे लिये यह प्रार्थना करने और बिनती करने से नहीं चूकते कि तुम सारे आत्मिक ज्ञान और समझ सहित परमेश्वर की इच्छा की पहिचान में परिपूर्ण हो जाओ। 
Colossians 1:10 ताकि तुम्हारा चाल-चलन प्रभु के योग्य हो, और वह सब प्रकार से प्रसन्न हो, और तुम में हर प्रकार के भले कामों का फल लगे, और परमेश्वर की पहिचान में बढ़ते जाओ। 
Colossians 1:11 और उस की महिमा की शक्ति के अनुसार सब प्रकार की सामर्थ से बलवन्‍त होते जाओ, यहां तक कि आनन्द के साथ हर प्रकार से धीरज और सहनशीलता दिखा सको। 
Colossians 1:12 और पिता का धन्यवाद करते रहो, जिसने हमें इस योग्य बनाया कि ज्योति में पवित्र लोगों के साथ मीरास में समभागी हों। 
Colossians 1:13 उसी ने हमें अन्धकार के वश से छुड़ाकर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया। 
Colossians 1:14 जिस में हमें छुटकारा अर्थात पापों की क्षमा प्राप्त होती है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 23-25 
  • फिलिप्पियों 1