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शनिवार, 19 जनवरी 2019

खज़ाना



      मार्च 1974 में चीन में कुछ किसानों द्वारा कूँआ खोदते समय एक चौंका देने वाली खोज हुई: मध्य चीन की उस सूखी भूमि में चीन की प्रसिद्ध टेराकोटा सेना छुपी हुई थी – मिट्टी की आदम-कद मूर्तियाँ जिन्हें आग में पका कर मजबूत किया गया था, और जो ईसा-पूर्व तीसरी शताब्दी में बनाई गई थीं। उस अद्भुत खोज में 8000 सैनिकों, 150 अश्वरोही सेना, 130 रथ, जिन्हें 520 घोड़े खींच रहे थे पाए गए। वह टेराकोटा सेना चीन के प्रमुख सैलानी स्थलों में से एक बन गई है, जहाँ दस लाख से भी अधिक सैलानी प्रति वर्ष आते हैं। वह अद्भुत खज़ाना शताब्दियों तक छिपा पड़ा रहा, परन्तु अब उसे सँसार के साथ साझा किया जा रहा है।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने लिखा, कि हम मसीही अनुयायियों में एक खज़ाना उपलब्ध करवाया गया है, जिसे हमें संसार के साथ बाँटना है: “परन्तु हमारे पास यह धन मिट्ठी के बरतनों में रखा है, कि यह असीम सामर्थ हमारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर ही की ओर से ठहरे” (2 कुरिन्थियों 4:7)। हमारे अन्दर रखा गया वह खज़ाना मसीह यीशु के प्रेम और उसमें सँसार के प्रत्येक व्यक्ति को मिल सकने वाली पापों की क्षमा तथा उद्धार का सन्देश है।

      इस खजाने को हमें छिपा कर नहीं रखना है वरन इसे सँसार के साथ बाँटना है जिससे परमेश्वर के प्रेम और अनुग्रह में होकर सँसार के प्रत्येक स्थान के लोग परमेश्वर के परिवार में सम्मिलित हो सकें। आज, हम मसीही विश्वासियों में निवास करने वाली परमेश्वर की पवित्र आत्मा की सहायता से, इस अद्भुत खजाने को किसी के साथ बाँटें। - बिल क्राउडर


औरों को मसीही जीवन की अपनी गवाही को देखने और सुनने दें।

और लोग दिया जलाकर पैमाने के नीचे नहीं परन्तु दीवट पर रखते हैं, तब उस से घर के सब लोगों को प्रकाश पहुंचता है। उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के साम्हने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई करें। - मत्ती 5:15-16

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 4: 1-7
2 Corinthians 4:1 इसलिये जब हम पर ऐसी दया हुई, कि हमें यह सेवा मिली, तो हम हियाव नहीं छोड़ते।
2 Corinthians 4:2 परन्तु हम ने लज्ज़ा के गुप्‍त कामों को त्याग दिया, और न चतुराई से चलते, और न परमेश्वर के वचन में मिलावट करते हैं, परन्तु सत्य को प्रगट कर के, परमेश्वर के साम्हने हर एक मनुष्य के विवेक में अपनी भलाई बैठाते हैं।
2 Corinthians 4:3 परन्तु यदि हमारे सुसमाचार पर परदा पड़ा है, तो यह नाश होने वालों ही के लिये पड़ा है।
2 Corinthians 4:4 और उन अविश्वासियों के लिये, जिन की बुद्धि को इस संसार के ईश्वर ने अन्‍धी कर दी है, ताकि मसीह जो परमेश्वर का प्रतिरूप है, उसके तेजोमय सुसमाचार का प्रकाश उन पर न चमके।
2 Corinthians 4:5 क्योंकि हम अपने को नहीं, परन्तु मसीह यीशु को प्रचार करते हैं, कि वह प्रभु है; और अपने विषय में यह कहते हैं, कि हम यीशु के कारण तुम्हारे सेवक हैं।
2 Corinthians 4:6 इसलिये कि परमेश्वर ही है, जिसने कहा, कि अन्धकार में से ज्योति चमके; और वही हमारे हृदयों में चमका, कि परमेश्वर की महिमा की पहिचान की ज्योति यीशु मसीह के चेहरे से प्रकाशमान हो।
2 Corinthians 4:7 परन्तु हमारे पास यह धन मिट्ठी के बरतनों में रखा है, कि यह असीम सामर्थ हमारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर ही की ओर से ठहरे।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 46-48
  • मत्ती 13:1-30



शुक्रवार, 18 जनवरी 2019

प्रभाव



      कई वर्ष पहले की बात है, मेरी पत्नि और मैं इंग्लैंड के एक ग्रामीण इलाके के एक छोटे से होटल में रुके थे, जहाँ चार और ब्रिटिश जोड़े भी रुके हुए थे, किन्तु हम एक दूसरे से पहले कभी नहीं मिले थे। रात्रि के भोजन के पश्चात हम सब बैठे कॉफी पी रहे थे और वार्तालाप हो रहा था, जिसमें हमारे कार्य के बारे में बात उठी। उस समय मैं अमेरिका के शिकागो शहर में मूडी बाइबल इंस्टीट्यूट का अध्यक्ष था, और मुझे लगा कि उन उपस्थित परिवारों में से किसी ने भी मेरे कार्यस्थल का नाम नहीं सुना होगा, और न ही उसके संस्थापक डी. एल. मूडी के विषय वे कुछ जानते होंगे। परन्तु मेरे द्वारा मूडी का नाम लेते ही, उन सबकी तुरन्त प्रतिक्रिया से मैं अचंभित हुआ; एक ने कहा “वह मूडी जो मूडी और सैन्की वाले हैं?” एक अन्य ने कहा, “हमारे पास सैन्की के भजनों की पुस्तक है, और हमारा परिवार बहुधा प्यानों के चारों ओर एकत्रित होकर उसमें से परमेश्वर की स्तुति में भजन गाता है।” मुझे बहुत अचरज हुआ! सुसमाचार प्रचारक ड्वाइट मूडी और उनके साथ की संगीतज्ञा आयरा सैन्की ने ब्रिटेन के इलाकों में 120 वर्ष से भी अधिक पहले सुसमाचार सभाएं संबोधित की थीं, और उनका प्रभाव अभी भी अनुभव किया जा रहा था।

      उस रात्रि, उस कमरे से जाते हुए, मैं सोच रहा था कि हमारे जीवन परमेश्वर के लिए बहुत दूर तक प्रभाव डाल सकते हैं – एक प्रार्थना करने वाले माँ का उसके बच्चों के जीवन पर प्रभाव, एक सहकर्मी द्वारा कहे गए प्रोत्साहन के शब्दों का प्रभाव, एक शिक्षक अथवा परामर्शदाता से मिलने वाली सहायता और चुनौतियों का प्रभाव, एक मित्र के सप्रेम कहे गए सुधारने वाले शब्दों का प्रभाव – सभी बहुत दूर तक जीवन में प्रभाव दिखाते हैं।

      परमेश्वर के आश्वासन, “क्योंकि यहोवा भला है, उसकी करूणा सदा के लिये, और उसकी सच्चाई पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहती है” (भजन 100:5) में होकर उसके लिए कार्य करना एक महान सौभाग्य है। - जो स्टोवैल


केवल वही स्थाई रहेगा जो मसीह यीशु में होकर किया गया है।

इसलिये जान रख कि तेरा परमेश्वर यहोवा ही परमेश्वर है, वह विश्वासयोग्य ईश्वर है; और जो उस से प्रेम रखते और उसकी आज्ञाएं मानते हैं उनके साथ वह हजार पीढ़ी तक अपनी वाचा पालता, और उन पर करूणा करता रहता है; - व्यवस्थाविवरण 7:9

बाइबल पाठ: भजन 100
Psalms 100:1 हे सारी पृथ्वी के लोगों यहोवा का जयजयकार करो!
Psalms 100:2 आनन्द से यहोवा की आराधना करो! जयजयकार के साथ उसके सम्मुख आओ!
Psalms 100:3 निश्चय जानो, कि यहोवा ही परमेश्वर है। उसी ने हम को बनाया, और हम उसी के हैं; हम उसकी प्रजा, और उसकी चराई की भेड़ें हैं।
Psalms 100:4 उसके फाटकों से धन्यवाद, और उसके आंगनों में स्तुति करते हुए प्रवेश करो, उसका धन्यवाद करो, और उसके नाम को धन्य कहो!
Psalms 100:5 क्योंकि यहोवा भला है, उसकी करूणा सदा के लिये, और उसकी सच्चाई पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहती है।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 43-45
  • मत्ती 12:24-50



गुरुवार, 17 जनवरी 2019

जीवन



      रवि के पिता के शब्दों ने रवि के मन में गहरी चोट करी। उसके पिता उस डांट रहे थे, “तुम पूर्णतः असफल रहे हो, परिवार के लिए तुम शर्मिन्दगी का कारण हो।” अपने भाई-बहनों की तुलना में रवि को एक कलंक के रूप में देखा जाता था। उसने खेल-कूद में अच्छे प्रदर्शन करने के प्रयास किए, और वह इसमें सफल भी हुआ, परन्तु फिर भी वह अपने आप को जीवन में असफल अनुभव करता था। वह सोचता था, “मेरा क्या होगा? क्या मैं ऐसे ही पूर्णतः असफल ही बना रहूँगा? क्या कोई विधि है कि मैं जीवन समाप्त कर सकूँ, बिना किसी पीड़ा के?” वह इन विचारों से जूझता तो रहता था परन्तु उन्हें किसी के साथ बाँटता नहीं था; उसकी संस्कृति में ऐसा किया ही नहीं जाता था। उसे तो यही सिखाया गया था कि अपनी व्यक्तिगत समस्याओं को व्यक्तिगत ही रखो; और पने गिरते हुए जीवन को संभाले रखो।”

      इस कारण वह अपनी परेशानी से अकेले ही जूझता रहा, और उसने आत्म-हत्या का प्रयास किया। इस विफल प्रयास से अस्पताल में स्वस्थ होते समय, एक मिलने वाले ने उसे परमेश्वर के वचन बाइबल की एक प्रति दी जो यूहन्ना 14 अध्याय पर खुली हुई थी। रवि की माँ ने उसे बाइबल से पढ़ कर सुनाया, और वहाँ एक स्थान पर प्रभु यीशु ने कहा है, “इसलिये कि मैं जीवित हूं, तुम भी जीवित रहोगे” (पद 19)। रवि को लगा कि उसके लिए यही एकमात्र आशा है, जीवन जीने का एक नया तरीका। जीवन के रचनाकार के द्वारा दी गई जीवन की परिभाषा “मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता” (पद 6); रवि ने परभु यीशु की बात पर विश्वास कर के प्रार्थना की, “यीशु, यदि आप ही हैं जो सार्थक जीवन देते हैं, तो मुझे आप से वह जीवन चाहिए।”

      जीवन में घोर निराशा के पल भी आ सकते हैं; परन्तु हमारी हर परेशानी में हम रवि के समान जीवन के रचियता, प्रभु यीशु मसीह के पास जाकर आशा का संचार प्राप्त कर सकते हैं। परमेश्वर चाहता है कि हम एक अच्छा और संतुष्टि का जीवन जीएँ। - पोह फैंग चिया


केवल प्रभु यीशु ही नया जीवन दे सकता है।

सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं। - 2 कुरिन्थियों 5:17

बाइबल पाठ: यूहन्ना 14:5-14
John 14:5 थोमा ने उस से कहा, हे प्रभु, हम नहीं जानते कि तू हां जाता है तो मार्ग कैसे जानें?
John 14:6 यीशु ने उस से कहा, मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता।
John 14:7 यदि तुम ने मुझे जाना होता, तो मेरे पिता को भी जानते, और अब उसे जानते हो, और उसे देखा भी है।
John 14:8 फिलेप्पुस ने उस से कहा, हे प्रभु, पिता को हमें दिखा दे: यही हमारे लिये बहुत है।
John 14:9 यीशु ने उस से कहा; हे फिलेप्पुस, मैं इतने दिन से तुम्हारे साथ हूं, और क्या तू मुझे नहीं जानता? जिसने मुझे देखा है उसने पिता को देखा है: तू क्यों कहता है कि पिता को हमें दिखा।
John 14:10 क्या तू प्रतीति नहीं करता, कि मैं पिता में हूं, और पिता मुझ में हैं? ये बातें जो मैं तुम से कहता हूं, अपनी ओर से नहीं कहता, परन्तु पिता मुझ में रहकर अपने काम करता है।
John 14:11 मेरी ही प्रतीति करो, कि मैं पिता में हूं; और पिता मुझ में है; नहीं तो कामों ही के कारण मेरी प्रतीति करो।
John 14:12 मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि जो मुझ पर विश्वास रखता है, ये काम जो मैं करता हूं वह भी करेगा, वरन इन से भी बड़े काम करेगा, क्योंकि मैं पिता के पास जाता हूं।
John 14:13 और जो कुछ तुम मेरे नाम से मांगोगे, वही मैं करूंगा कि पुत्र के द्वारा पिता की महिमा हो।
John 14:14 यदि तुम मुझ से मेरे नाम से कुछ मांगोगे, तो मैं उसे करूंगा।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 41-42
  • मत्ती 12:1-23



बुधवार, 16 जनवरी 2019

घाटी



      फ्रांस के कलाकार हेनरी मातिस्से के अनुसार, उनके जीवन के अन्त के समय उनके द्वारा बनाई गई कलाकृतियां उनके जीवन की सब से उत्तम प्रतीक थीं। उस समय में उन्होंने चित्र बनाने की एक नई शैली के साथ प्रयोग किया, विशाल तसवीरें बनाना, रंग के साथ नहीं वरन रंगीन कागज़ का उपयोग करने के द्वारा। उन्होंने अपने कमरे की दीवारों को इन चटकीले रंग की तस्वीरों से सजा लिया था। उनके लिए यह महत्वपूर्ण था, क्योंकि तब वे कैंसर पीड़ित थे और अकसर बिस्तर पर ही रहने के लिए बाध्य होते थे।

      बीमार पड़ना, नौकरी खो देना, किसी दुखद स्थिति से होकर निकलना, आदि ऐसे अनुभव हैं जिन्हें कुछ लोग “घाटी के अनुभव” कहते हैं, जहाँ भय अन्य हर बात पर छाया रहता है। परमेश्वर के वचन बाइबल के पुराने नियम खण्ड में हम देखते हैं कि यहूदा के लोगों ने भी ऐसी ही स्थिति का अनुभव किया जब उन्हें पता चला कि तीन बड़ी जातियां एक संयुक्त सेना बनाकर उन पर चढ़ाई करने के लिए आ रही है (2 इतिहास 20: 1-3)। यहूदा के राजा ने परमेश्वर के आगे अपनी विनती रखी, “हे हमारे परमेश्वर, क्या तू उनका न्याय न करेगा? यह जो बड़ी भीड़ हम पर चढ़ाई कर रही है, उसके साम्हने हमारा तो बस नहीं चलता और हमें हुछ सूझता नहीं कि क्या करना चाहिये? परन्तु हमारी आंखें तेरी ओर लगी हैं” (पद 12); और परमेश्वर ने उन्हें उत्तर दिया कि “इस लड़ाई में तुम्हें लड़ना न होगा; हे यहूदा, और हे यरूशलेम, ठहरे रहना, और खड़े रह कर यहोवा की ओर से अपना बचाव देखना। मत डरो, और तुम्हारा मन कच्चा न हो; कल उनका साम्हना करने को चलना और यहोवा तुम्हारे साथ रहेगा” (पद 17)।

      परमेश्वर के कहे अनुसार यहूदा के राजा ने अपनी सेना को युद्ध-भूमि में भेजा, और वे परमेश्वर की स्तुति करते हुए गए (पड़ 20-21)। उन्होंने पाया कि उन्हें किसी युद्ध में नहीं पड़ना पड़ा, वरन उनके विरुद्ध आई सेना के लोग आपस में ही लड़ मरे, और यहूदा की सेना तीन दिन तक उन पर से लूट को जमा करती रही। उन्होंने उस युद्ध-स्थल का नाम “बराका की तराई,” अर्थात “आशीष” रखा।

      हमारे जीवनों के न्यूनतम बिंदुओं में भी परमेश्वर हमारे साथ होता है। उसके साथ होने से हम अपनी घाटी के अनुभव में भी आशीष को पा सकते हैं। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


परमेश्वर बोझ को भी आशीष में बदल देने में माहिर है।

तुम्हारा स्‍वभाव लोभरिहत हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। इसलिये हम बेधड़क हो कर कहते हैं, कि प्रभु, मेरा सहायक है; मैं न डरूंगा; मनुष्य मेरा क्या कर सकता है। - इब्रानियों 13:5-6

बाइबल पाठ: 2 इतिहास 20:1, 12-22
2 Chronicles 20:1 इसके बाद मोआबियों और अम्मोनियों ने और उनके साथ कई मूनियों ने युद्ध करने के लिये यहोशापात पर चढ़ाई की।
2 Chronicles 20:12 हे हमारे परमेश्वर, क्या तू उनका न्याय न करेगा? यह जो बड़ी भीड़ हम पर चढ़ाई कर रही है, उसके साम्हने हमारा तो बस नहीं चलता और हमें हुछ सूझता नहीं कि क्या करना चाहिये? परन्तु हमारी आंखें तेरी ओर लगी हैं।
2 Chronicles 20:13 और सब यहूदी अपने अपने बाल-बच्चों, स्त्रिीयों और पुत्रों समेत यहोवा के सम्मुख खड़े रहे।
2 Chronicles 20:14 तब आसाप के वंश में से यहजीएल नाम एक लेवीय जो जकर्याह का पुत्र और बनायाह का पोता और मत्तन्याह के पुत्र यीएल का परपोता था, उस में मण्डली के बीच यहोवा का आत्मा समाया।
2 Chronicles 20:15 और वह कहने लगा, हे सब यहूदियो, हे यरूशलेम के रहनेवालो, हे राजा यहोशापात, तुम सब ध्यान दो; यहोवा तुम से यों कहता है, तुम इस बड़ी भीड़ से मत डरो और तुम्हारा मन कच्चा न हो; क्योंकि युद्ध तुम्हारा नहीं, परमेश्वर का है।
2 Chronicles 20:16 कल उनका साम्हना करने को जाना। देखो वे सीस की चढ़ाई पर चढ़े आते हैं और यरूएल नाम जंगल के साम्हने नाले के सिरे पर तुम्हें मिलेंगे।
2 Chronicles 20:17 इस लड़ाई में तुम्हें लड़ना न होगा; हे यहूदा, और हे यरूशलेम, ठहरे रहना, और खड़े रह कर यहोवा की ओर से अपना बचाव देखना। मत डरो, और तुम्हारा मन कच्चा न हो; कल उनका साम्हना करने को चलना और यहोवा तुम्हारे साथ रहेगा।
2 Chronicles 20:18 तब यहोशापात भूमि की ओर मुंह कर के झुका और सब यहूदियों और यरूशलेम के निवासियों ने यहोवा के साम्हने गिर के यहोवा को दण्डवत किया।
2 Chronicles 20:19 और कहातियों और कोरहियों में से कुछ लेवीय खड़े हो कर इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की स्तुति अत्यन्त ऊंचे स्वर से करने लगे।
2 Chronicles 20:20 बिहान को वे सबेरे उठ कर तकोआ के जंगल की ओर निकल गए; और चलते समय यहोशापात ने खड़े हो कर कहा, हे यहूदियो, हे यरूशलेम के निवासियो, मेरी सुनो, अपने परमेश्वर यहोवा पर विश्वास रखो, तब तुम स्थिर रहोगे; उसके नबियों की प्रतीत करो, तब तुम कृतार्थ हो जाओगे।
2 Chronicles 20:21 तब उसने प्रजा के साथ सम्मति कर के कितनों को ठहराया, जो कि पवित्रता से शोभायमान हो कर हथियारबन्दों के आगे आगे चलते हुए यहोवा के गीत गाएं, और यह कहते हुए उसकी स्तुति करें, कि यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि उसकी करुणा सदा की है।
2 Chronicles 20:22 जिस समय वे गाकर स्तुति करने लगे, उसी समय यहोवा ने अम्मोनियों, मोआबियों और सेईर के पहाड़ी देश के लोगों पर जो यहूदा के विरुद्ध आ रहे थे, घातकों को बैठा दिया और वे मारे गए।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 39-40
  • मत्ती 11



मंगलवार, 15 जनवरी 2019

सेवा



      मैंने जब अपने अँगरेज़ मंगेतर से विवाह किया था और उसके साथ इंग्लैण्ड आई, तो मेरा विचार था कि यह विदेशी भूमि पर लगभग पाँच वर्ष तक का रोमाँच होगा। मैंने कभी यह कल्पना भी नहीं की थी कि बीस वर्ष पश्चात भी मैं यहीं पर रह रही होऊंगी। न ही मुझे इस बात का बोध था कि अपने पुराने मित्रों, परिवार जनों, और जीवन की परिचित परिस्थियों को छोड़ आने के द्वारा कभी-कभी मुझे ऐसा लगेगा मानों मैंने अपने जीवन को खो दिया है। परन्तु उस पुराने जीवन को खो देने के द्वारा मैंने एक और भी अधिक अच्छे जीवन को पाया है।

      प्रभु यीशु ने अपने शिष्यों से ऐसे ही उलट-पुलट के जीवन की प्रतिज्ञा की थी, जब उसने उनसे कहा कि उसके लिए अपना जीवन खो देने के द्वारा ही वे नया और उत्तम जीवन पाएँगे। परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पाते हैं कि जब प्रभु ने अपने शिष्यों को सुसमाचार प्रचार के लिए भेजा, तो उनसे कहा कि वे उससे अपने माता-पिता, और बच्चों से भी अधिक प्रेम रखें (मत्ती 10:37)। उसने ये शब्द ऐसे समाज और संस्कृति में कहे थे जहाँ परिवार ही समाज की नींव और बहुमूल्य माना जाता था। परन्तु उसने उन्हें यह भी आश्वासन दिया कि यदि वे उसके लिए अपना जीवन खो भी देंगे, तो भी उसे पा लेंगे (पद 39)।

      हमें अपने आप को मसीह यीशु में पा लेने के लिए विदेश जाने के आवश्यकता नहीं है। जैसे उन शिष्यों ने प्रभु के सुसमाचार प्रचार के लिए जाने के प्रति अपनी आज्ञाकारिता और समर्पण को दिखाया, उसकी सेवा के प्रति उसी प्रकार का समर्पण और आज्ञाकारिता रखने के द्वारा हम भी पाएँगे कि प्रभु के लिए हम जितना गंवाएंगे, हमारे प्रति उसके उदार प्रेम और अद्भुत आशीषों में होकर हम उससे भी कहीं अधिक प्रभु से पा लेंगे।

      यह सत्य है कि वह हमसे सदा ही अपार प्रेम करता है, हम चाहे उसकी कितनी भी सेवा करते हों। किन्तु जब हम उसकी आज्ञाकारिता में होकर औरों की सेवा करते हैं तो अपने जीवनों में संतुष्टि, सार्थकता और तृप्ति पाते हैं। - एमी बाउचर पाई


छोड़ी गई प्रत्येक बात के रिक्त स्थान में परमेश्वर अपनी उपस्थिति से कुछ भर देता है।

यीशु ने कहा, मैं तुम से सच कहता हूं, कि ऐसा कोई नहीं, जिसने मेरे और सुसमाचार के लिये घर या भाइयों या बहिनों या माता या पिता या लड़के-बालों या खेतों को छोड़ दिया हो। और अब इस समय सौ गुणा न पाए, घरों और भाइयों और बहिनों और माताओं और लड़के-बालों और खेतों को पर उपद्रव के साथ और परलोक में अनन्त जीवन। - मरकुस 10:29-30

बाइबल पाठ: मत्ती 10:37-42
Matthew 10:37 जो माता या पिता को मुझ से अधिक प्रिय जानता है, वह मेरे योग्य नहीं और जो बेटा या बेटी को मुझ से अधिक प्रिय जानता है, वह मेरे योग्य नहीं।
Matthew 10:38 और जो अपना क्रूस ले कर मेरे पीछे न चले वह मेरे योग्य नहीं।
Matthew 10:39 जो अपने प्राण बचाता है, वह उसे खोएगा; और जो मेरे कारण अपना प्राण खोता है, वह उसे पाएगा।
Matthew 10:40 जो तुम्हें ग्रहण करता है, वह मुझे ग्रहण करता है; और जो मुझे ग्रहण करता है, वह मेरे भेजने वाले को ग्रहण करता है।
Matthew 10:41 जो भविष्यद्वक्ता को भविष्यद्वक्ता जानकर ग्रहण करे, वह भविष्यद्वक्ता का बदला पाएगा; और जो धर्मी जानकर धर्मी को ग्रहण करे, वह धर्मी का बदला पाएगा।
Matthew 10:42 जो कोई इन छोटों में से एक को चेला जानकर केवल एक कटोरा ठंडा पानी पिलाए, मैं तुम से सच कहता हूं, वह किसी रीति से अपना प्रतिफल न खोएगा।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 36-38
  • मत्ती 10:21-42



सोमवार, 14 जनवरी 2019

तनाव



      ऐसे संसार की कल्पना कीजिए जिसमें हवा न चलती हो! तब झीलों पर पानी शान्त रहेगा; पेड़ों से गिरने वाले पत्ते इधर से उधर उड़ते नहीं रहेंगे। किन्तु ऐसे शान्त हवा वाले स्थान में किसे अपेक्षा होगी कि  पेड़ अपने आप अचानक ही टूट कर गिर पड़ेंगे? परन्तु ऐसा ही हुआ – एरिज़ोना में स्थित तीन एकड़ भूमि पर काँच से बने अर्ध-गोलाकार बायोस्फीयर 2 नामक प्रयोगशाला के अन्दर। इस विशाल प्रयोगशाला के अन्दर उगाए जा रहे पेड़, एक ऐसे पर्यावरण में बढ़ रहे थे जहाँ हवा बिलकुल नहीं चलती है। वे पेड़ सामान्य से अधिक गाते से बढ़े और एक दिन अचानक ही अपने ही वज़न के कारण टूट कर गिर गए। तब वैज्ञानिकों को समझ में आया कि हवा चलने से जब पेड़ हिलते, झुकते हैं, तो उस तनाव से उनमें मजबूती आती है जिससे फिर वे अपने वज़न और आँधियों में भी स्थिर खड़े रहने पाते हैं।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि प्रभु यीशु ने अपने शिष्यों को आँधी-तूफ़ान में से होकर जाने दिया, जिससे उनका विश्वास दृढ़ हो सके (मरकुस 4:36-41)। रात्रि के समय, परिचित झील के पानी में नाव ले जाते हुए उन अनुभवी मछुआरों के लिए अचानक से उठने वाली आँधी भारी पड़ने लगी। उन्हीं के साथ यीशु नाव के पिछले भाग में सो रहे थे। आँधी और ऊंची उठती लहरों के कारण उन शिष्यों लगने लगा कि नाव डूब जाएगी। घबरा कर उन शिष्यों ने अपने गुरु को उठाया; क्या उसे चिंता नहीं थी कि वे मरने को हैं? वह क्या सोच रहा था? और तब उन्हें कुछ सीखने को मिला; प्रभु यीशु ने खड़े होकर आँधी और लहरों को शांत हो जाने के लिए कहा, और वे हो गईं। फिर उसने अपने शिष्यों की ओर मुड़कर उनसे पूछा, कि अभी तक वे उसमें विश्वास क्यों नहीं रख पा रहे थे?

      यदि वह आँधी का तनाव न होता तो वे शिष्य कभी नहीं पूछते कि “यह कौन है, कि आन्‍धी और पानी भी उस की आज्ञा मानते हैं?” (मरकुस 4:41)और शिष्यों को अपने प्रभु के बारे में वह पता नहीं चलता जो उस तनाव के कारण उन्होंने सीखा।

      आज, हो सकता है कि हमें सुरक्षित बुलबुले में छिप कर जीवन जीना एक अच्छा विचार लगे, किन्तु हमारा विश्वास कितना दृढ़ होने पाएगा, यदि हम अपने जीवनों में प्रभु का व्यावाहारिक अनुभव नहीं करने पाएँगे, उसके द्वारा परिस्थितियों पर जयवंत होना नहीं सीखेंगे, और उसके “शान्त रह, थम जा” की सामर्थ्य को नहीं देखेंगे? - मार्ट डीहान


परमेश्वर कभी नहीं सोता है।

तू जो प्यादों ही के संग दौड़कर थक गया है तो घोड़ों के संग क्योंकर बराबरी कर सकेगा? और यद्यपि तू शान्ति के इस देश में निडर है, परन्तु यरदन के आसपास के घने जंगल में तू क्या करेगा? – यिर्मयाह 12:5

बाइबल पाठ: मरकुस 4:35-41
Mark 4:35 उसी दिन जब सांझ हुई, तो उसने उन से कहा; आओ, हम पार चलें,
Mark 4:36 और वे भीड़ को छोड़कर जैसा वह था, वैसा ही उसे नाव पर साथ ले चले; और उसके साथ, और भी नावें थीं।
Mark 4:37 तब बड़ी आन्‍धी आई, और लहरें नाव पर यहां तक लगीं, कि वह अब पानी से भरी जाती थी।
Mark 4:38 और वह आप पिछले भाग में गद्दी पर सो रहा था; तब उन्होंने उसे जगाकर उस से कहा; हे गुरू, क्या तुझे चिन्‍ता नहीं, कि हम नाश हुए जाते हैं?
Mark 4:39 तब उसने उठ कर आन्‍धी को डांटा, और पानी से कहा; “शान्‍त रह, थम जा”: और आन्‍धी थम गई और बड़ा चैन हो गया।
Mark 4:40 और उन से कहा; तुम क्यों डरते हो? क्या तुम्हें अब तक विश्वास नहीं?
Mark 4:41 और वे बहुत ही डर गए और आपस में बोले; यह कौन है, कि आन्‍धी और पानी भी उस की आज्ञा मानते हैं?
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 33-35
  • मत्ती 10:1-20



रविवार, 13 जनवरी 2019

भरोसा



      हमारा बेटा सात वर्ष तक नशीले पदार्थों के सेवन की लत से जूझता रहा, और उस समय के दौरान मैंने तथा मेरी पत्नि ने कई प्रकार की कठिनाईयों का सामना किया। उसके इस लत से छूटने और स्वस्थ होने की प्रतीक्षा करते हुए हमने छोटी-छोटी विजयों के लिए आनदित होना सीखा। यदि चौबीस-घंटे के समय में कुछ बुरा नहीं होता था, तो हम एक-दूसरे से “आज दिन अच्छा रहा” कहकर आनन्दित होते थे। यह छोटा सा वाक्य हमारे लिए परमेश्वर के प्रति छोटी-से-छोटी बात के लिए धन्यवादी रहने का स्मरण बन गया।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 126:3 में परमेश्वर की कोमल कृपा का एक और भी उत्तम स्मरण-वाक्य मिलता है, जो यह भी ध्यान दिलाता है कि परमेश्वर की करुणा का हमारे लिए अर्थ क्या है: “यहोवा ने हमारे साथ बड़े बड़े काम किए हैं; और इस से हम आनन्दित हैं” यह कितना अच्छा पद है सदा स्मरण रखने के लिए कि प्रभु यीशु ने अपने प्रेम और अनुग्रह में होकर क्रूस पर हमारे तथा सँसार के प्रत्येक जन के लिए क्या किया है। किसी भी दिन की कठिनाईयां इस तथ्य को बदल नहीं सकती हैं कि चाहे कुछ हो जाए, हमारे प्रभु ने अथाह दयालुता दिखाई है, और हमारे प्रति उसका प्रेम सदा बना रहता है।

      हम जब कठिन समयों से निकलकर आते हैं और ध्यान करते हैं कि परमेश्वर हमारे प्रति विश्वासयोग्य बना रहा है, तो यह हमें उस अगले अनुभव के लिए तैयार करता है जब जीवन की परिस्थतियां फिर से कठिन हो सकती हैं। हम चाहे यह नहीं जानने या समझने पाएँ कि प्रभु परमेश्वर उन कठिन परिस्थितियों में से हमें कैसे सुरक्षित निकाल ले जाएगा, परन्तु बीते समय की उसकी कृपा और अनुग्रह हमें आश्वस्त करता है कि आगे भी ऐसा ही होगा – हम उसपर हर बात के लिए सदा भरोसा रख सकते हैं। - जेम्स बैंक्स


हम चाहे परमेश्वर के हाथ को देखने ना पाएँ, 
किन्तु हम उसके हृदय पर भरोसा रख सकते हैं।

यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है, और उसकी करूणा सदा की है। - भजन 136:1

बाइबल पाठ: भजन 126
Psalms 126:1 जब यहोवा सिय्योन से लौटने वालों को लौटा ले आया, तब हम स्वप्न देखने वाले से हो गए।
Psalms 126:2 तब हम आनन्द से हंसने और जयजयकार करने लगे; तब जाति जाति के बीच में कहा जाता था, कि यहोवा ने, इनके साथ बड़े बड़े काम किए हैं।
Psalms 126:3 यहोवा ने हमारे साथ बड़े बड़े काम किए हैं; और इस से हम आनन्दित हैं।
Psalms 126:4 हे यहोवा, दक्खिन देश के नालों के समान, हमारे बन्धुओं को लौटा ले आ!
Psalms 126:5 जो आंसू बहाते हुए बोते हैं, वे जयजयकार करते हुए लवने पाएंगे।
Psalms 126:6 चाहे बोने वाला बीज ले कर रोता हुआ चला जाए, परन्तु वह फिर पूलियां लिये जयजयकार करता हुआ निश्चय लौट आएगा।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 31-32
  • मत्ती 9:18-38