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गुरुवार, 24 जून 2021

आनन्द

 

          हमारा एक बेटा एक हाई-स्कूल की टीम का बास्केटबाल प्रशिक्षक है। एक वर्ष जब उसकी टीम उनके प्रदेश की विभिन्न स्पर्धाओं में खेलती और जीतती जा रही थी, तो कुछ स्थानीय लोगों ने, भली मनसा के साथ उनसे पूछा, “आप सारे वर्ष ऐसे ही जीतते ही चले जाएंगे न?” इन बातों को सुनकर खिलाड़ी और उनका प्रशिक्षक, दोनों ही जीतते रहने के लिए तनाव में आ गए; तब मेरे बेटे ने आदर्श-वाक्य अपने तथा टीम के लिए लागू किया, “आनन्द के साथ खेलो!” – अर्थात केवल जीतते रहने के लिए नहीं, वरन वे सभी खेल का आनन्द लेने के लिए खेलें।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में इफिसुस के अगुवों को प्रेरित पौलुस द्वारा कहे गए अंतिम शब्द थे, “मैं अपनी दौड़ को [प्रेम के साथ] पूरी करूँ” (प्रेरितों 20:24)। उसका उद्देश्य था कि प्रभु यीशु के द्वारा उसे सौंपे गए कार्यों को वह आनन्द के साथ पूरा कर सके। मैंने भी पौलुस की इस बात को अपने जीवन के लिए आदर्श-वाक्य बना लिया है: “मैं अपने जीवन की दौड़ को आनन्द के साथ दौडूँ और पूरी करूँ।” अर्थात, जैसे मेरे बेटे की टीम ने सोच रखा था, “मैं आनन्द के साथ खेलता रहूँ।” और हाँ, उस वर्ष की प्रदेश की चैम्पियनशिप, मेरे बेटे की टीम ने ही जीती।

          हम सभी के पास खिसियाने के उचित कारण होते हैं: निराश करने वाले समाचार, दैनिक जीवन के तनाव, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ, आदि। किन्तु यदि हम प्रभु परमेश्वर में अपना भरोसा बनाए रखें और उससे इन परिस्थितियों के लिए भी आनन्द माँगें, तो वह हमें देगा। वह हमें वही आनन्द देगा जिसे प्रभु यीशु ने “मेरा आनन्द” कहा था (यूहन्ना 15:11)।

          आनन्द पवित्र आत्मा का एक फल भी है (गलातियों 5:22)। इसलिए हमें उससे प्रति प्रातः माँगना चाहिए कि वह हमारी सहायता करे, कि हम उस दिन को आनन्द के साथ व्यतीत कर सकें। लेखक रिचर्ड फ़ॉस्टर ने कहा है, “प्रार्थना करना, परिवर्तन लाने के लिए होता है। परमेश्वर कितना भला है कि उसने हमारे लिए ऐसा मार्ग बना कर दिया है जिससे हम परिवर्तित हो सकते हैं, अनन्त अविनाशी आनन्द में आ सकते हैं। - डेविड एच. रोपर

 

प्रभु, हमारे जीवनों में अपने आनन्द को सर्वदा बनाए रखें।


मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि मेरा आनन्द तुम में बना रहे, और तुम्हारा आनन्द पूरा हो जाए। - यूहन्ना 15:11

बाइबल पाठ: गलातियों 5:22-26

गलतियों 5:22 पर आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, मेल, धीरज,

गलतियों 5:23 और कृपा, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं; ऐसे ऐसे कामों के विरोध में कोई भी व्यवस्था नहीं।

गलतियों 5:24 और जो मसीह यीशु के हैं, उन्होंने शरीर को उस की लालसाओं और अभिलाषाओं समेत क्रूस पर चढ़ा दिया है।

गलतियों 5:25 यदि हम आत्मा के द्वारा जीवित हैं, तो आत्मा के अनुसार चलें भी।

गलतियों 5:26 हम घमण्डी हो कर न एक दूसरे को छेड़ें, और न एक दूसरे से डाह करें।

 

एक साल में बाइबल: 

  • अय्यूब 1-2
  • प्रेरितों 7:22-43


सोमवार, 14 जनवरी 2019

तनाव



      ऐसे संसार की कल्पना कीजिए जिसमें हवा न चलती हो! तब झीलों पर पानी शान्त रहेगा; पेड़ों से गिरने वाले पत्ते इधर से उधर उड़ते नहीं रहेंगे। किन्तु ऐसे शान्त हवा वाले स्थान में किसे अपेक्षा होगी कि  पेड़ अपने आप अचानक ही टूट कर गिर पड़ेंगे? परन्तु ऐसा ही हुआ – एरिज़ोना में स्थित तीन एकड़ भूमि पर काँच से बने अर्ध-गोलाकार बायोस्फीयर 2 नामक प्रयोगशाला के अन्दर। इस विशाल प्रयोगशाला के अन्दर उगाए जा रहे पेड़, एक ऐसे पर्यावरण में बढ़ रहे थे जहाँ हवा बिलकुल नहीं चलती है। वे पेड़ सामान्य से अधिक गाते से बढ़े और एक दिन अचानक ही अपने ही वज़न के कारण टूट कर गिर गए। तब वैज्ञानिकों को समझ में आया कि हवा चलने से जब पेड़ हिलते, झुकते हैं, तो उस तनाव से उनमें मजबूती आती है जिससे फिर वे अपने वज़न और आँधियों में भी स्थिर खड़े रहने पाते हैं।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि प्रभु यीशु ने अपने शिष्यों को आँधी-तूफ़ान में से होकर जाने दिया, जिससे उनका विश्वास दृढ़ हो सके (मरकुस 4:36-41)। रात्रि के समय, परिचित झील के पानी में नाव ले जाते हुए उन अनुभवी मछुआरों के लिए अचानक से उठने वाली आँधी भारी पड़ने लगी। उन्हीं के साथ यीशु नाव के पिछले भाग में सो रहे थे। आँधी और ऊंची उठती लहरों के कारण उन शिष्यों लगने लगा कि नाव डूब जाएगी। घबरा कर उन शिष्यों ने अपने गुरु को उठाया; क्या उसे चिंता नहीं थी कि वे मरने को हैं? वह क्या सोच रहा था? और तब उन्हें कुछ सीखने को मिला; प्रभु यीशु ने खड़े होकर आँधी और लहरों को शांत हो जाने के लिए कहा, और वे हो गईं। फिर उसने अपने शिष्यों की ओर मुड़कर उनसे पूछा, कि अभी तक वे उसमें विश्वास क्यों नहीं रख पा रहे थे?

      यदि वह आँधी का तनाव न होता तो वे शिष्य कभी नहीं पूछते कि “यह कौन है, कि आन्‍धी और पानी भी उस की आज्ञा मानते हैं?” (मरकुस 4:41)और शिष्यों को अपने प्रभु के बारे में वह पता नहीं चलता जो उस तनाव के कारण उन्होंने सीखा।

      आज, हो सकता है कि हमें सुरक्षित बुलबुले में छिप कर जीवन जीना एक अच्छा विचार लगे, किन्तु हमारा विश्वास कितना दृढ़ होने पाएगा, यदि हम अपने जीवनों में प्रभु का व्यावाहारिक अनुभव नहीं करने पाएँगे, उसके द्वारा परिस्थितियों पर जयवंत होना नहीं सीखेंगे, और उसके “शान्त रह, थम जा” की सामर्थ्य को नहीं देखेंगे? - मार्ट डीहान


परमेश्वर कभी नहीं सोता है।

तू जो प्यादों ही के संग दौड़कर थक गया है तो घोड़ों के संग क्योंकर बराबरी कर सकेगा? और यद्यपि तू शान्ति के इस देश में निडर है, परन्तु यरदन के आसपास के घने जंगल में तू क्या करेगा? – यिर्मयाह 12:5

बाइबल पाठ: मरकुस 4:35-41
Mark 4:35 उसी दिन जब सांझ हुई, तो उसने उन से कहा; आओ, हम पार चलें,।
Mark 4:36 और वे भीड़ को छोड़कर जैसा वह था, वैसा ही उसे नाव पर साथ ले चले; और उसके साथ, और भी नावें थीं।
Mark 4:37 तब बड़ी आन्‍धी आई, और लहरें नाव पर यहां तक लगीं, कि वह अब पानी से भरी जाती थी।
Mark 4:38 और वह आप पिछले भाग में गद्दी पर सो रहा था; तब उन्होंने उसे जगाकर उस से कहा; हे गुरू, क्या तुझे चिन्‍ता नहीं, कि हम नाश हुए जाते हैं?
Mark 4:39 तब उसने उठ कर आन्‍धी को डांटा, और पानी से कहा; “शान्‍त रह, थम जा”: और आन्‍धी थम गई और बड़ा चैन हो गया।
Mark 4:40 और उन से कहा; तुम क्यों डरते हो? क्या तुम्हें अब तक विश्वास नहीं?
Mark 4:41 और वे बहुत ही डर गए और आपस में बोले; यह कौन है, कि आन्‍धी और पानी भी उस की आज्ञा मानते हैं?
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 33-35
  • मत्ती 10:1-20



मंगलवार, 3 जुलाई 2018

प्रतीक्षा



      मैं हवाई यात्रा के लिए यात्रियों के समूह के साथ एयरपोर्ट की बस में बैठा, वायुयान की ओर जा रहा था, कि तभी हमारी बस के चालक को जहाँ वह था, वहीं रुक कर प्रतीक्षा करने के लिए सन्देश मिला और उसने बस रोक दी। हमें लगा के इस विलम्ब के कारण हम वायुयान तक समय से नहीं पहुँच पाएँगे और हमें यह फ्लाईट छोडनी पड़ेगी। हमारे साथ के एक यात्री के लिए यह तनाव सहन करने से बाहर था और वह बस के चालाक पर क्रोधित होकर कहने लगा कि वह उस सन्देश में मिले निर्देशों की अवहेलना कर के बस को चलाए अन्यथा वह यात्री उस पर कानूनी कार्यवाही करेगा। तभी एक एयरलाइन कर्मचारी हाथ में एक ब्रीफकेस लिए हुए दौड़ता हुआ आया, और उस क्रुद्ध यात्री की ओर विजयी भाव से देखते हुए बोला, “आप अपना ब्रीफकेस छोड़ आए थे। मैंने आपकी बात-चीत सुन ली थी कि आप जिस मीटिंग के लिए जा रहे हैं वह आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण है, और मुझे लगा कि आपको इस ब्रीफकेस की आवश्यकता होगी, इसीलिए बस को रुकवा कर इसे देने के लिए भागा आया हूँ।”

      कभी-कभी मैं भी परमेश्वर के साथ ऐसे ही अधीर हो जाता हूँ, विशेषकर उसके पुनःआगमन को लेकर। मुझे लगता है कि अब परमेश्वर किस बात की प्रतीक्षा कर रहा है? हमारे चारों ओर त्रासदियाँ हो रही हैं, हमारे प्रिय जन दुःख और तकलीफों से होकर निकल रहे हैं, और हमारे प्रतिदिन के कार्यों के तनाव उनके सुझाए जा रहे समाधानों से कहीं बड़े लगते हैं। प्रभु कब आएगा? कब तक प्रतीक्षा करवाएगा?

      फिर कोई जन प्रभु के साथ हुए अपने अनुभव को बताता है, या फिर मुझे आभास होता है कि इन सभी गड़बड़ियों में भी परमेश्वर अपना कार्य कर रहा है। यह सब मुझे उस दिन उस एयरपोर्ट बस में सीखे पाठ का स्मरण करवाता है। ऐसी बातें और विवरण हैं जो केवल परमेश्वर जानता है, मैं नहीं। यह मुझे स्मरण करवाता है कि मैं उस पर भरोसा बनाए रखूँ, और यह दृष्टिकोण भी कि यह सब केवल मेरे ही बारे में नहीं है। परमेश्वर उन लोगों को अभी भी अवसर दे रहा है जिन्होंने जगत के उद्धारकर्ता, उसके पुत्र प्रभु यीशु मसीह को अभी तक नहीं जाना है (2 पतरस 3:9); वह उनके पापों की क्षमा एवँ उद्धार पाने की प्रतीक्षा कर रहा है। - रैंडी किल्गोर


जब तक प्रभु यीशु लौट कर न आए प्रतीक्षा करें, और उसकी गवाही देते रहें।

तौभी यहोवा इसलिये विलम्ब करता है कि तुम पर अनुग्रह करे, और इसलिये ऊंचे उठेगा कि तुम पर दया करे। क्योंकि यहोवा न्यायी परमेश्वर है; क्या ही धन्य हैं वे जो उस पर आशा लगाए रहते हैं। - यशायाह 30:18

बाइबल पाठ: 2 पतरस 3:8-15
2 Peter 3:8 हे प्रियों, यह एक बात तुम से छिपी न रहे, कि प्रभु के यहां एक दिन हजार वर्ष के बराबर है, और हजार वर्ष एक दिन के बराबर हैं।
2 Peter 3:9 प्रभु अपनी प्रतिज्ञा के विषय में देर नहीं करता, जैसी देर कितने लोग समझते हैं; पर तुम्हारे विषय में धीरज धरता है, और नहीं चाहता, कि कोई नाश हो; वरन यह कि सब को मन फिराव का अवसर मिले।
2 Peter 3:10 परन्तु प्रभु का दिन चोर के समान आ जाएगा, उस दिन आकाश बड़ी हड़हड़ाहट के शब्द से जाता रहेगा, और तत्‍व बहुत ही तप्‍त हो कर पिघल जाएंगे, और पृथ्वी और उस पर के काम जल जाऐंगे।
2 Peter 3:11 तो जब कि ये सब वस्तुएं, इस रीति से पिघलने वाली हैं, तो तुम्हें पवित्र चाल चलन और भक्ति में कैसे मनुष्य होना चाहिए।
2 Peter 3:12 और परमेश्वर के उस दिन की बाट किस रीति से जोहना चाहिए और उसके जल्द आने के लिये कैसा यत्‍न करना चाहिए; जिस के कारण आकाश आग से पिघल जाएंगे, और आकाश के गण बहुत ही तप्‍त हो कर गल जाएंगे।
2 Peter 3:13 पर उस की प्रतिज्ञा के अनुसार हम एक नए आकाश और नई पृथ्वी की आस देखते हैं जिन में धामिर्कता वास करेगी।
2 Peter 3:14 इसलिये, हे प्रियो, जब कि तुम इन बातों की आस देखते हो तो यत्‍न करो कि तुम शान्‍ति से उसके साम्हने निष्‍कलंक और निर्दोष ठहरो।
2 Peter 3:15 और हमारे प्रभु के धीरज को उद्धार समझो, जैसे हमारे प्रिय भाई पौलुस न भी उस ज्ञान के अनुसार जो उसे मिला, तुम्हें लिखा है।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 25-27
  • प्रेरितों 12



गुरुवार, 12 दिसंबर 2013

प्रत्यक्ष परिवर्तन


   हाल ही एक हवाई यात्रा के दौरान एक विमान परिचारक ने मुझ से पूछा कि क्या मैं अकसर हवाई यात्रा करता हूँ; और मैंने उत्तर दिया हाँ। तब उसने फिर मुझ से पूछा, क्या आपने पिछले कुछ महीनों में ध्यान किया है कि हवाई यात्रा करने वाले कुछ अधिक आक्रमक और ज़बर्दस्ती करने वाले होते जा रहे हैं? मैंने थोड़ा सा विचार कर के उस से इस बात में सहमति जताई, और हम उन बातों के बारे में बात करने लगे जिन के कारण लोग ऐसा करने लगे हैं - जैसे कि हवाई अड्डों पर बढ़ी हुई सुरक्षा और उससे होने वाली परेशानी, हवाई यात्रा का महंगा और यात्रा में मिलने वाली सुविधाओं का कम होते चले जाना, यात्रा करने में सामान्यता होने वाली असंतुष्टता आदि। हम यह बातें कर ही रहे थे कि, मानो हमारे वार्तालाप की सच्चाई को प्रमाणित करने के लिए, एक यात्री ने बहस आरंभ कर दी क्योंकि वह अपनी निर्धारित सीट पर नहीं वरन किसी दूसरे की सीट पर बैठना चाहता था क्योंकि वह दूसरी सीट उसे अधिक अच्छी लग रही थी।

   जब कभी हमारा सामना क्रोध और आवेश में उत्तेजित किसी जन से होता है तो हम मसीही विश्वासियों के पास अवसर होता है कि हम, अपने प्रभु के समान, शांति लाने वाले बन सकें। प्रेरित पौलुस ने रोम की मसीही मण्डली को लिखी अपनी पत्री में उन्हें लिखा: "जहां तक हो सके, तुम अपने भरसक सब मनुष्यों के साथ मेल मिलाप रखो" (रोमियों 12:18)। इस का क्या अर्थ है? इसका एक अर्थ तो यह हो सकता है कि जो कुछ हम नियंत्रित कर सकते हैं उसे नियंत्रित कर के रखें। हम दूसरों के व्यवहार को निर्धारित नहीं कर सकते, लेकिन अपने प्रत्युत्तर को अवश्य निर्धारित कर सकते हैं।

   जब कभी हम क्रोधपूर्ण और आक्रमक व्यवहार अपने आस-पास प्रदर्शित होते हुए देखते हैं, तो उसके प्रति अनुग्रह और शान्ति के व्यवहार द्वारा अपने तथा समस्त संसार के उद्धारकर्ता तथा शान्ति के राजकुमार प्रभु यीशु के चरित्र एवं व्यवहार को अपने जीवन से प्रदर्शित कर सकते हैं। यही वे अवसर होते हैं जब पाप के प्रभाव के कारण आक्रोश और असंतोष से भरा यह संसार उद्धारकर्ता प्रभु यीशु के बारे में व्यावाहरिक रीति से जान सकता है और प्रभु से प्राप्त होने वाले उद्धार द्वारा जीवन में आए परिवर्तन को प्रत्यक्ष देख सकता है। - बिल क्राउडर


आज संसार को वह शान्ति चाहिए जो प्रत्येक गलतफहमी के दुष्प्रभाव पर जयवन्त है।

सब से मेल मिलाप रखने, और उस पवित्रता के खोजी हो जिस के बिना कोई प्रभु को कदापि न देखेगा। - इब्रानियों 12:14

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 4:4-9
Philippians 4:4 प्रभु में सदा आनन्‍दित रहो; मैं फिर कहता हूं, आनन्‍दित रहो। 
Philippians 4:5 तुम्हारी कोमलता सब मनुष्यों पर प्रगट हो: प्रभु निकट है। 
Philippians 4:6 किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं। 
Philippians 4:7 तब परमेश्वर की शान्‍ति, जो समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरिक्षत रखेगी।
Philippians 4:8 निदान, हे भाइयों, जो जो बातें सत्य हैं, और जो जो बातें आदरणीय हैं, और जो जो बातें उचित हैं, और जो जो बातें पवित्र हैं, और जो जो बातें सुहावनी हैं, और जो जो बातें मनभावनी हैं, निदान, जो जो सदगुण और प्रशंसा की बातें हैं, उन्‍हीं पर ध्यान लगाया करो। 
Philippians 4:9 जो बातें तुम ने मुझ से सीखीं, और ग्रहण की, और सुनी, और मुझ में देखीं, उन्‍हीं का पालन किया करो, तब परमेश्वर जो शान्‍ति का सोता है तुम्हारे साथ रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • होशे 9-11 
  • प्रकाशितवाक्य 3


मंगलवार, 23 नवंबर 2010

टूटे संबंधों का खेद

ब्रिटेन के संगीत दल ’माईक और मैकैनिकस’ ने १९८० में एक बहुत प्रभावशाली और लोकप्रीय गीत The Living Years रिकॉर्ड किया। इस गीत में गीतकार अपने पिता की मृत्यु का शोक मनाता है, क्योंकि उनके संबंध तनाव और खामोशी से भरे थे न कि एक दूसरे के साथ अपने मन की बातें बांटने से। गीतकार बहुत दुखी और खेदित मन से कहता है कि "जो कुछ मैं उनसे कहना चाहता था वह न कह सका; काश मैंने उनके जीते जी अपने मन की बातें उनसे कह दी होतीं।"

राज दाउद भी इसी प्रकार अपने बेटे अबसलोम से टूटे संबंधों के कारण खेदित हुआ। अबसलोम क्रोधित था कि उसकी बहिन तमार के बलात्कारी अमनोन को दाउद ने दंड नही दिया, इसलियेअ अबसलोम अम्नोन की हत्या करके भाग गया (२ शमुएल १३:२१-३४)। दाउद का सेनपति योआब जानता था कि दाउद अपने भगोड़े बेटे के लिये तरसता है, इसलिये उसने योजना बनाई और अबसलोम को वापस राज्य में ले आया। लेकिन दाउद और अबसलोम के संबंध कभी ठीक नहीं हो सके। अबसलोम के मन की कड़ुवाहट ने एक ऐसे संघर्ष को जन्म दिया जिसमें बाप-बेटा एक दूसरे के विरोधी हो गए और युद्ध में अबसलोम की मृत्यु हुई (२ शमुएल १८:१४)। राजा दाउद के लिये यह एक कटु विजय थी, जिसमें उसने अपने मरे हुए बेटे और उससे टूटे हुए संबंध के लिये विलाप किया। लेकिन कोई खेद या विलाप दाउद के दुख को कम नहीं कर सकता था। यदि समय रहते संबंध सुधार लिये होते तो यह उसे अब यह समय न देखना पड़ता।

दाउद के खेद से हम टूटे संबंधों को समय रहते ठीक करने के विष्य में सीख सकते हैं। बिगड़ी बात को बनाने का प्रयास कुछ समय के लिये कष्टदायी हो सकता है, लेकिन समय रहते कुछ न करने का खेद उससे कहीं अधिक दुखदायी और सारे जीवन सताने वाला होगा।

प्रभु यीशु ने सिखाया: "इसलिये यदि तू अपनी भेंट वेदी पर लाए, और वहां तू स्मरण करे, कि मेरे भाई के मन में मेरी ओर से कुछ विरोध है, तो अपनी भेंट वहीं वेदी के साम्हने छोड़ दे और जाकर पहिले अपने भाई से मेल मिलाप कर तब आकर अपनी भेंट चढ़ा।" (मत्ती ५:२३, २४)

जैसे परमेश्वर ने प्रभु यीशु मसीह में होकर हमारे पापों को क्षमा किया है, यदि प्रभु यीशु का प्रेम हमारे मनों में हो तो वह हमें भी सामर्थ देता है कि हम भी क्षमा कर सकें "सब में श्रेष्‍ठ बात यह है कि एक दूसरे से अधिक प्रेम रखो, क्‍योंकि प्रेम अनेक पापों को ढ़ांप देता है।" ( १ पतरस ४:८) - बिल क्राउडर


टूटे संबंध ठीक किये जा सकते हैं, यदि प्रयास करने को तैयार हों तो।

तब राजा बहुत घबराया, और फाटक के ऊपर की अटारी पर रोता हुआ चढ़ने लगा और चलते चलते यों कहता गया, कि हाय मेरे बेटे अबसलोम ! मेरे बेटे, हाय ! मेरे बेटे अबसलोम ! भला होता कि मैं आप तेरी सन्ती मरता, हाय ! अबसलोम ! मेरे बेटे, मेरे बेटे !! - २ शमुएल १८:३३

बाइबल पाठ: २ शमुएल १८:३१-१९:४

तब कूशी भी आ गया, और कूशी कहने लगा, मेरे प्रभु राजा के लिये समाचार है। यहोवा ने आज न्याय करके तुझे उन सभों के हाथ से बचाया है जो तेरे विरुद्ध उठे थे।
राजा ने कूशी से पूछा, क्या वह जवान अर्थात अबसलोम कल्याण से है? कूशी ने कहा, मेरे प्रभु राजा के शत्रु, और जितने तेरी हानि के लिये उठे हैं, उनकी दशा उस जवान की सी हो।
तब राजा बहुत घबराया, और फाटक के ऊपर की अटारी पर रोता हुआ चढ़ने लगा? और चलते चलते यों कहता गया, कि हाय मेरे बेटे अबसलोम ! मेरे बेटे, हाय ! मेरे बेटे अबसलोम ! भला होता कि मैं आप तेरी सन्ती मरता, हाय ! अबसलोम ! मेरे बेटे, मेरे बेटे !!
तब योआब को यह समाचार मिला, कि राजा अबसलोम के लिये रो रहा है और विलाप कर रहा है।
इसलिये उस दिन की विजय सब लोगों की समझ में विलाप ही का कारण बन गयी, क्योंकि लोगों ने उस दिन सुना, कि राजा अपके बेटे के लिये खेदित है।
और उस दिन लोग ऐसा मुंह चुरा कर नगर में घुसे, जैसा लोग युद्ध से भाग आने से लज्जित होकर मुंह चुराते हैं।
और राजा मुंह ढांपे हुए चिल्ला चिल्ला कर पुकारता रहा, कि हाय मेरे बेटे अबसलोम ! हाय अबसलोम, मेरे बेटे, मेरे बेटे !

एक साल में बाइबल:
  • यहेजेकेल २०, २१
  • याकूब ५