ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

शनिवार, 30 जुलाई 2011

व्यक्तिगत ज़िम्मेदारी

सॉल्मन मछली की नैसर्गिक प्रवृति है कि जिस स्थान पर वह स्वयं पैदा हुई थी, समुंदर और नदियों मे सैंकड़ों मील का सफर तय कर के वे वहीं अपने अंडे देने भी आती हैं। एक तरह से वे एक अदृश्य शक्ति के वशीभूत होकर इस यात्रा और कार्य को पूरा करती हैं। लेकिन मनुष्य जानवरों से भिन्न है। हम अपने व्यवहार के लिए व्यक्तिगत रीति से ज़िम्मेदार हैं और अपने कार्यों के लिए किसी नैसर्गिक प्रक्रिया को दोषी नहीं ठहरा सकते।

अमेरिका में एक अपराधी, जिस पर अनेक हत्याओं का दोष था, मृत्यु दण्ड पाने से पहले बिलकुल अन्तिम समय में सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले से बचाया गया। उसका मानना है कि जानवरों का नैसर्गिक व्यवहार और मनुष्यों व्यवहार एक समान ही हैं। अपने द्वारा करी गई अनेक हत्याओं के विष्य में उसका कहना है कि "वे बस यों ही हो गईं"; उसकी धारणा है कि हत्याओं के लिए कोई अनजानी शक्ति ज़िम्मेदार है, जिसके आधीन उसने बन्दूक चलाई।

लगभग २५०० वर्ष पहले इस्त्राएलियों ने भी अपने अनुचित व्यवहार के लिए परमेश्वर से ऐसा ही बहाना बनाया। उन्होंने एक कहावत को उध्दरित करते हुए अपने व्यवहार का दोष अपने बाप-दादाओं के ऊपर मढ़ना चाहा। लेकिन अपने भविष्यद्वक्ता यहेजकेल द्वारा परमेश्वर ने उन्हें बताया कि वे इन बहानों द्वारा अपनी ज़िम्मेदारी से बच नहीं सकते। परमेश्वर ने उन्हें स्पष्ट कहा कि कोई भला आदमी अपनी दुष्ट सन्तान के कारण दोषी नहीं ठहरेगा और न ही कोई भली सन्तान अपने दुष्ट पिता के पापों के लिए दोषी ठहरेगी। सब को अपनी अपनी ज़िम्मेदारी उठानी पड़ेगी।

हमारी परिस्थिती चाहे कैसी भी क्यों न हो, हम अपने किये के लिए ज़िम्मेदार रहते हैं; संसार के कानून भी इस बात को मानते हैं, इसका पालन करते हैं और इसी आधार पर उन में दण्ड भी निर्धारित किए गए हैं। इसलिए हमारे लिए यही भला है कि हम अपने पापों के लिए परमेश्वर के सामने बहाने बनाने और परिस्थित्यों तथा अन्य लोगों को दोषी ठहराने के बजाए, अपने पापों का अंगीकार कर लें, परमेश्वर प्रभु यीशु से उनके लिए क्षमा माँग लें तथा समय रहते उनके दोष से मुक्त हो जाएं। - हर्ब वैन्डर लुग्ट


अकसर लोग अपनी मूर्खता को ’भाग्य’ कह कर अपनी ज़िम्मेदारी से बचना चाहते हैं।

देखो, सभों के प्राण तो मेरे हैं; जैसा पिता का प्राण, वैसा ही पुत्र का भी प्राण है; दोनों मेरे ही हैं। इसलिये जो प्राणी पाप करे वही मर जाएगा। - यहेजकेल १८:४


बाइबल पाठ: यहेजकेल १८:१-१८

Eze 18:1 फिर यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा,
Eze 18:2 तुम लोग जो इस्राएल के देश के विषय में यह कहावत कहते हो, कि जंगली अंगूर तो पुरखा लोग खाते, परन्तु दांत खट्टे होते हैं लड़के-बालों के, इसका क्या अर्थ है?
Eze 18:3 प्रभु यहोवा यों कहता है कि मेरे जीवन की शपथ, तुम को इस्राएल में फिर यह कहावत कहने का अवसर न मिलेगा।
Eze 18:4 देखो, सभों के प्राण तो मेरे हैं; जैसा पिता का प्राण, वैसा ही पुत्र का भी प्राण है; दोनों मेरे ही हैं। इसलिये जो प्राणी पाप करे वही मर जाएगा।
Eze 18:5 जो कोई धमीं हो, और न्याय और धर्म के काम करे,
Eze 18:6 और न तो पहाड़ों पर भोजन किया हो, न इस्राएल के घराने की मूरतों की ओर आंखें उठाई हों, न पराई स्त्री को बिगाड़ा हो, और न ऋतुमती के पास गया हो,
Eze 18:7 और न किसी पर अन्धेर किया हो वरन ऋणी को उसकी बन्धक फेर दी हो, न किसी को लूटा हो, वरन भूखे को अपनी रोटी दी हो और नंगे को कपड़ा ओढ़ाया हो,
Eze 18:8 न ब्याज पर रुपया दिया हो, न रुपए की बढ़ती ली हो, और अपना हाथ कुटिल काम से रोका हो, मनुष्य के बीच सच्चाई से न्याय किया हो,
Eze 18:9 और मेरी विधियों पर चलता और मेरे नियमों को मानता हुआ सच्चाई से काम किया हो, ऐसा मनुष्य धमीं है, वह निश्चय जीवित रहेगा, प्रभु यहोवा की यही वाणी है।
Eze 18:10 परन्तु यदि उसका पुत्र डाकू, हत्यारा, वा ऊपर कहे हुए पापों में से किसी का करने वाला हो,
Eze 18:11 और ऊपर कहे हुए उचित कामों का करने वाला न हो, और पहाड़ों पर भोजन किया हो, पराई स्त्री को बिगाड़ा हो,
Eze 18:12 दीन दरिद्र पर अन्धेर किया हो, औरों को लूटा हो, बन्धक न फेर दी हो, मूरतों की ओर आंख उठाई हो, घृणित काम किया हो,
Eze 18:13 ब्याज पर रुपया दिया हो, और बढ़ती ली हो, तो क्या वह जीवित रहेगा? वह जीवित न रहेगा? इसलिये कि उस ने ये सब घिनौने काम किए हैं वह निश्चय मरेगा और उसका खून उसी के सिर पड़ेगा।
Eze 18:14 फिर यदि ऐसे मनुष्य के पुत्र हों और वह अपने पिता के ये सब पाप देख कर भय के मारे उनके समान न करता हो।
Eze 18:15 अर्थात न तो पहाड़ों पर भोजन किया हो, न इस्राएल के घराने की मूरतों की ओर आंख उठाई हो, न पराई स्त्री को बिगाड़ा हो,
Eze 18:16 न किसी पर अन्धेर किया हो, न कुछ बन्धक लिया हो, न किसी को लूटा हो, वरन अपनी रोटी भूखे को दी हो, नंगे को कपड़ा ओढ़ाया हो,
Eze 18:17 दीन जन की हानि करने से हाथ रोका हो, ब्याज और बढ़ी न ली हो, मेरे नियमों को माना हो, और मेरी विधियों पर चला हो, तो वह अपने पिता के अधर्म के कारण न मरेगा, वरन जीवित ही रहेगा।
Eze 18:18 उसका पिता, जिस ने अन्धेर किया और लूटा, और अपने भाइयों के बीच अनुचित काम किया है, वही अपने अधर्म के कारण मर जाएगा।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ५१-५३
  • रोमियों २

शुक्रवार, 29 जुलाई 2011

मुखौटे

हमारा समाज छल और दोगलेपन को प्रोत्साहन देता है। इससे पहले कि हमारे बच्चे स्कूल जाने लायक हों, वे छलावे और दिखावे के व्यवहार की आरंभिक शिक्षा प्राप्त कर चुके होते हैं, तथा कुछ समय और व्यतीत होते होते वे भी इस कला में अपने व्यसक जोड़ीदारों तथा अभिभावकों के समान ही निपुण भी हो जाते हैं।

समाज में इस बात का प्रचलन तो बुरा है ही, लेकिन इससे भी बुरा है जब यह बात और व्यवहार हमारे विश्वास के जीवन में भी दिखाई देने लगती है। जब इतवार को हमें चर्च में होते हैं, तो बड़ी कुशलता से वहाँ हम अपने आचरण को, दूसरे लोगों की अपेक्षा के अनुरूप, ’भले मसीही’ जैसा बना लेते हैं। अपने इस ’रविवारीय व्यवहार’ को बड़ी स्वभाविकता के साथ निभाते हुए हम सबसे अपने अन्दर के स्वार्थी, कंजूस और क्षमाविहीन व्यक्तित्व को सफलता पूर्वक छुपा लेते हैं और लोगों के सामने बड़े धर्मपरायण प्रतीत होते हैं।

प्रसिद्ध मसीही लेखक चार्लस स्विन्डौल ने अपनी एक पुस्तक Improving Your Serve में अपने एक अनुभव का उल्लेख किया। वे एक स्थान पर प्रचारक के रूप में आमंत्रित थे, और वे अपने साथ अपने बच्चों द्वारा उन्हें भेंट में कभी दिया गया रबर से बना एक मुखौटा ले गए। एक शाम जब उनके प्रचार का विष्य था वास्तविकता तथा विश्वसनियता, तो वह उस मुखौटे को लगाकर प्रचार करने लगे। जैसी कि उनकी उम्मीद थी, उपस्थित समूह उनके व्यवहार और प्रचार के विष्य के प्रतिकूल होने के कारण ज़ोर ज़ोर से हंसने लगे। फिर अपने मुखौटे को उतार कर उन्होंने टिप्पणी करी, "कितना विचित्र है कि लोग चेहरे पर लगे वास्तविक मुखौटों की असलियत को तुरंत पहचान लेते हैं, कोई उनसे छला नहीं जा सकता। लेकिन कितना आसान है चेहरों पर नकली तथा अदृश्य मुखौटे लगाए रखना, और लोग उन मुखौटों की वास्तविकता को नहीं पहचान पाते। मसीह के सेवक जिनके हृदय खरे हैं, उन्होंने अपने मुखौटे उतार फेंके हैं और समाज के सामने, अपने उद्धारकर्ता परमेश्वर के समान, अपनी वास्तविकता में जीवन व्यतीत करते हैं। ऐसे सेवकों पर परमेश्वर की विशेष आशीशें बनी रहती हैं।"

हम सब को अपने जीवनों में ढोंग तथा दोगलेपन के साथ संघर्ष करना पड़ता है। अदृश्य मुखौटे लगा कर हम संसार को छल सकते हैं, हृदयों को देखने तथा जाँचने वाले परमेश्वर को नहीं। लेकिन यदि हमारे हृदय खरे होंगे तो हमें अपने चेहरे मुखौटों के पीछे नहीं छुपाने की कोई आवश्यक्ता नहीं होगी। - डेव एग्नर


ढोंगी वह है जिसका ’रविवारीय व्यवहार’ उसके प्रतिदिन के वास्तविक व्यवहार से भिन्न होता है।

इसी रीति से तुम भी ऊपर से मनुष्यों को धर्मी दिखाई देते हो, परन्‍तु भीतर कपट और अधर्म से भरे हुए हो। - मत्ती २३:२८


बाइबल पाठ: मत्ती २३:२५-३३

Mat 23:25 हे कपटी शास्‍त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय, तुम कटोरे और थाली को ऊपर ऊपर से तो मांजते हो परन्‍तु वे भीतर अन्‍धेर असंयम से भरे हुए हैं।
Mat 23:26 हे अन्‍धे फरीसी, पहिले कटोरे और थाली को भीतर से मांज कि वे बाहर से भी स्‍वच्‍छ हों।
Mat 23:27 हे कपटी शास्‍त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय; तुम चूना फिरी हुई कब्रों के समान हो जो ऊपर से तो सुन्‍दर दिखाई देती हैं, परन्‍तु भीतर मुर्दों की हड्डियों और सब प्रकार की मलिनता से भरी हैं।
Mat 23:28 इसी रीति से तुम भी ऊपर से मनुष्यों को धर्मी दिखाई देते हो, परन्‍तु भीतर कपट और अधर्म से भरे हुए हो।
Mat 23:29 हे कपटी शास्‍त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय; तुम भविष्यद्वक्ताओं की कब्रें संवारते और धमिर्यों की कब्रें बनाते हो।
Mat 23:30 और कहते हो, कि यदि हम अपके बाप-दादों के दिनों में होते तो भविष्यद्वक्ताओं की हत्या में उन के साझी न होते।
Mat 23:31 इस से तो तुम अपने पर आप ही गवाही देते हो, कि तुम भविष्यद्वक्ताओं के घातकों की सन्‍तान हो।
Mat 23:32 सो तुम अपने बाप-दादों के पाप का घड़ा भर दो।
Mat 23:33 हे सांपो, हे करैतों के बच्‍चो, तुम नरक के दण्‍ड से क्‍योंकर बचोगे?

एक साल में बाइबल:
  • भजन ४९-५०
  • रोमियों १

गुरुवार, 28 जुलाई 2011

धोखे का मार्ग

आजकल हर कोई अपनी इच्छापूर्ति के लिए अभिनय करने में कुशल है और कई बार सही व्यक्ति और छलावा करने वाले में फर्क बता पाना असंभव हो जाता है। मसीह की मण्डली में भी कई लोग ऐसे होते हैं जो बहुत भक्त और भले होने का व्यवहार करते हैं, इस धारणा में कि वे अपने इस व्यवहार से परमेश्वर को प्रसन्न कर लेंगे।

ऐसी धारणा रखने वाले, एक दन्तकथा वाले उस बकरे के समान हैं जिसे शेर होने का शौक चर्राया और अपनी इस इच्छा की पूर्ति के लिए उस ने अकड़ कर शेर के समान चलना, अपनी छोटी सी पूँछ को बड़ी अदा से हवा में लहराना आदि आरंभ कर दिया। अपनी मिमियाने की आवाज़ को भी उसने शेर की दहाड़ के समान करने का प्रयास किया। अब उसे लगने लगा कि वह भी शेर ही है। एक दिन अपनी इसी अकड़ में जंगल में घूमते हुए उसका सामना असली शेर से हो गया - आगे आप समझदार हैं।

अकसर वे लोग जिन्होंने मसीही विश्वासीयों के समान ही बोलना और व्यवहार करना सीख लिया है, यह मान लेते हैं कि वे भी मसीही विश्वासी हो गए हैं। लेकिन यदि उन्होंने कभी अपना व्यक्तिगत विश्वास मसीह यीशु में नहीं रखा, कभी अपने पापों का अंगीकार और उन से मसीह के नाम में पश्चाताप नहीं किया, कभी अपना जीवन मसीह यीशु को समर्पित नहीं किया, तो उनका विश्वासियों का सा व्यवहार अभिनय मात्र ही है, यथार्त नहीं। वे अभी उस ’निष्कपट विश्वास’ (२ तिमुथियुस १:५) से कोसों दूर हैं केवल जिसके द्वारा ही उद्धार संभव है।

यदि आप अपनी स्वयं निर्धारित धार्मिकता, अपने चर्च में हाज़िरी देने, भक्ति के हाव-भाव और बोलचाल, बाइबल की जानकारी, भले कार्यों आदि पर भरोसा रखकर परमेश्वर को प्रसन्न करने का अपना निश्चय बनाए हुए हैं, तो आप धोखे मे हैं। जैसे वास्तविक शेर का सामना होने पर ही बकरे ने अपनी सच्चाई को पहिचाना, लेकिन तब तक उसके लिए बहुत देर हो चुकी थी, वैसे ही बहुतेरे लोग जब मसीह के न्याय सिंहासन के सामने अपने आप को खड़ा पाएंगे तब ही उन्हें अपनी वास्तविकता का पता चलेगा, लेकिन उनके लिए भी तब बहुत देर हो चुकी होगी।

परमेश्वर के वचन बाइबल की स्पष्ट शिक्षा है कि केवल पापों के अंगीकार और मसीह के नाम में पापों से पश्चाताप और मसीह यीशु में विश्वास तथा समर्पण द्वारा ही हम उसके साथ स्वर्ग में होने के हकदार हो सकते हैं। - डेव एग्नर


अपनी वास्तविक्ता छुपाने के प्रयास में लगे रहने की बजाए, अपनी वास्तविक्ता को मान लेने और उद्धार के लिए परमेश्वर के मार्ग को स्वीकार कर लेने में ही बुद्धिमानी है।

अपने आप को परखो, कि विश्वास में हो कि नहीं; अपने आप को जांचो, क्‍या तुम अपने विषय में यह नहीं जानते, कि यीशु मसीह तुम में है? नहीं तो तुम निकम्मे निकले हो। पर मेरी आशा है, कि तुम जान लोगे, कि हम निकम्मे नहीं। - २ कुरिन्थियों १३:५, ६


बाइबल पाठ: २ कुरिन्थियों १३:१-१०

2Co 13:1 अब तीसरी बार तुम्हारे पास आता हूं: दो या तीन गवाहों के मुंह से हर एक बात ठहराई जाएगी।
2Co 13:2 जैसे मैं जब दूसरी बार तुम्हारे साथ था, सो वैसे ही अब दूर रहते हुए उन लोगों से जिन्‍होंने पहिले पाप किया, और और सब लोगों से अब पहिले से कहे देता हूं, कि यदि मैं फिर आऊंगा, तो नहीं छोडूंगा।
2Co 13:3 तुम तो इस का प्रमाण चाहते हो, कि मसीह मुझ में बोलता है, जो तुम्हारे लिये निर्बल नहीं परन्‍तु तुम में सामर्थी है।
2Co 13:4 वह निर्बलता के कारण क्रूस पर चढ़ाया तो गया, तौभी परमेश्वर की सामर्थ से जीवित है, हम भी तो उस में निर्बल हैं; परन्‍तु परमेश्वर की सामर्थ से जो तुम्हारे लिये है, उसके साथ जीएंगे।
2Co 13:5 अपने आप को परखो, कि विश्वास में हो कि नहीं; अपने आप को जांचो, क्‍या तुम अपने विषय में यह नहीं जानते, कि यीशु मसीह तुम में है? नहीं तो तुम निकम्मे निकले हो।
2Co 13:6 पर मेरी आशा है, कि तुम जान लोगे, कि हम निकम्मे नहीं।
2Co 13:7 और हम अपने परमेश्वर से प्रार्थना करते हैं, कि तुम कोई बुराई न करो; इसलिये नहीं, कि हम खरे देख पड़ें, पर इसलिये कि तुम भलाई करो, चाहे हम निकम्मे ही ठहरें।
2Co 13:8 क्‍योंकि हम सत्य के विरोध में कुछ नहीं कर सकते, पर सत्य के लिये कर सकते हैं।
2Co 13:9 जब हम निर्बल हैं, और तुम बलवन्‍त हो, तो हम आनन्‍दित होते हैं, और यह प्रार्थना भी करते हैं, कि तुम सिद्ध हो जाओ।
2Co 13:10 इस कारण मैं तुम्हारे पीठ पीछे ये बातें लिखता हूं, कि उपस्थित होकर मुझे उस अधिकार के अनुसार जिसे प्रभु ने बिगाड़ने के लिये नहीं पर बनाने के लिये मुझे दिया है, कड़ाई से कुछ करना न पड़े।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ४६-४८
  • प्रेरितों २८

बुधवार, 27 जुलाई 2011

पहले जांचो-परखो, फिर मानो

नीचे दिया गया आज का बाइबल पद प्रभु यीशु के चेले और प्रेरित पतरस के जीवन से संबंधित एक प्रसंग से लिया गया है। पतरस दृढ़ भक्ति से प्रभु यीशु का अनुसरण करने वाला चेला था और गैर यहूदियों में भी प्रभु यीशु के नाम से सेवकाई करता था। उन दिनों में यहूदी समाज के लोग गैर यहूदियों तुच्छ जानते थे और उनसे कोई संबंध अथवा संपर्क नहीं रखते थे। एक समय जब कुछ यहूदी विश्वासी यरुशलेम से पतरस के पास आए तो अपने कुछ संकीर्ण मानसिकता वाले साथियों के कहने में आ कर वह अपने गैर यहूदी मित्रों से अलग हो गया, यह दिखाने को कि अन्य यहूदियों के समान वह भी गौर यहूदियों से कोई मेल-जोल नहीं रखता है। उन दिनों पौलुस प्रेरित भी वहीं पर था, उसे जब इस बात का पता चला तो उसने पतरस को उसके इस दोगलेपन के लिए आड़े हाथों लिया, क्योंकि पौलुस जानता था कि एक खरा और निष्कपट विश्वासी भी गलती कर सकता है और अपनी गलती से मसीह की सेवकाई को बहुत हानि पहुँचा सकता है, जिसे आरंभ में ही सुधारा जाना अनिवार्य है।

ऐसी गलती प्रत्येक मसीही विश्वासी के साथ घटित हो सकती है। आज भी कई मसीह के खरे और निष्कपट सेवक, अपनी कुछ अनुचित धारणाओं के कारण ऐसी ही गलती कर लेते हैं और उनकी इस असावधानी से मसीह के नाम के प्रसार में बाधा भी आ जाती है तथा लोगों का व्यक्तिगत नुकसान भी हो जाता है।

होबार्ट फ्रीमैन भी एक ऐसे ही बड़े समर्पित और खरे प्रचारक थे और उनकी सेवकाई द्वारा कई लोगों ने मसीह यीशु को अपना व्यक्तिगत उद्धारकर्ता ग्रहण किया। परमेश्वर और मसीह के प्रति उनके समर्पण तथा सेवाभाव में कोई कमी या कपट नहीं था और ना ही उनके जीवन मे कोई खोट थी। लेकिन उनकी एक गलत धारणा कई लोगों के लिए बहुत कष्ट का कारण भी बनी। वे चिकित्सकों को नापसन्द करते थे, उन्हें ’डाक्टरी देवता’ कहते थे और अपने अनुयायियों से डाक्टरों से चिकित्सा सेवा न ग्रहण करने के लिए कहते थे, जिस कारण उनके कई अनुयायियों को बहुत कष्टों का सामना भी करना पड़ा। उनकी इस धारणा के लिए बाइबल में कोई आधार नहीं है और ना ही ऐसी कोई शिक्षा मसीह यीशु या उनके चेलों ने कभी कहीं दी। यह केवल होबार्ट फ्रीमैन की अपनी धारणा थी जिसे वह अपने साथ जुड़े लोगों पर थोपते थे। कमी न उनके विश्वास में थी न उनके मसीही सेवकाई के प्रति समर्पण में, कमी थी तो एक विशेष बात को लेकर उनके परमेश्वर के वचन की समझ और व्याख्या में।

लोगों के खरे और भले जीवनों से प्रभावित होकर हम हर बात में उन्हें पूर्णतः विश्वास योग्य मान सकते हैं, लेकिन परमेश्वर का वचन बाइबल कभी हमें किसी भी बात के लिए अन्ध विश्वास करने के लिए नहीं कहती। बाइबल की स्पष्ट और खुली शिक्षा है कि, "सब बातों को परखो: जो अच्‍छी है उसे पकड़े रहो" (१ थिस्सुलिनीकियों ५:२१)। यद्यपि लोग बड़े भक्त, खरे और ईमानदार प्रतीत हो सकते हैं और हमें उनके जीवनों में कोई खोट नहीं दिखाई देता हो, लेकिन यह हमारा कर्तव्य है कि उनकी हर शिक्षा को हम पहले परमेश्वर के वचन से जाँचें (प्रेरितों १७:११) और वचनानुसार यदि खरी पाई जाएं तब ही मानें।

खरे लोग भी गलत हो सकते हैं। - हर्ब वैण्डर लुग्ट


गलती अकसर सच्चई के भेस में प्रस्तुत होती है।

पर जब कैफा अन्‍ताकिया में आया तो मैं ने उसके मुंह पर उसका साम्हना किया, क्‍योंकि वह दोषी ठहरा था। - गलतियों २:११


बाइबल पाठ: गलतियों २:११-२१
Gal 2:11 पर जब कैफा अन्‍ताकिया में आया तो मैं ने उसके मुंह पर उसका साम्हना किया, क्‍योंकि वह दोषी ठहरा था।
Gal 2:12 इसलिये कि याकूब की ओर से कितने लोगों के आने से पहिले वह अन्यजातियों के साय खाया करता था, परन्‍तु जब वे आए, तो खतना किए हुए लोगों के डर के मारे उन से हट गया और किनारा करने लगा।
Gal 2:13 और उसके साथ शेष यहूदियों ने भी कपट किया, यहां तक कि बरनबास भी उन के कपट में पड़ गया।
Gal 2:14 पर जब मैं ने देखा, कि वे सुसमाचार की सच्‍चाई पर सीधी चाल नहीं चलते, तो मैं ने सब के साम्हने कैफा से कहा, कि जब तू यहूदी होकर अन्यजातियों की नाईं चलता है, और यहूदियों की नाईं नहीं तो तू अन्यजातियों को यहूदियों की नाईं चलने को क्‍यों कहता है?
Gal 2:15 हम जो जन्म के यहूदी हैं, और पापी अन्यजातियों में से नहीं।
Gal 2:16 तौभी यह जानकर कि मनुष्य व्यवस्था के कामों से नहीं, पर केवल यीशु मसीह पर विश्वास करने के द्वारा धर्मी ठहरता है, हम ने आप भी मसीह यीशु पर विश्वास किया, कि हम व्यवस्था के कामों से नहीं पर मसीह पर विश्वास करने से धर्मी ठहरें; इसलिये कि व्यवस्था के कामों से कोई प्राणी धर्मी न ठहरेगा।
Gal 2:17 हम जो मसीह में धर्मी ठहरना चाहते हैं, यदि आप ही पापी निकलें, तो क्‍या मसीह पाप का सेवक है कदापि नहीं।
Gal 2:18 क्‍योंकि जो कुछ मैं ने गिरा दिया, यदि उसी को फिर बनाता हूं, तो अपने आप को अपराधी ठहराता हूं।
Gal 2:19 मैं जो व्यवस्था के द्वारा व्यवस्था के लिये मर गया, कि परमेश्वर के लिये जीऊं।
Gal 2:20 मैं मसीह के साथ क्रूस पर चढ़ाया गया हूं, और अब मैं जीवित न रहा, पर मसीह मुझ में जीवित है: और मैं शरीर में अब जो जीवित हूं तो केवल उस विश्वास से जीवित हूं, जो परमेश्वर के पुत्र पर है, जिस ने मुझ से प्रेम किया, और मेरे लिये अपने आप को दे दिया।
Gal 2:21 मैं परमेश्वर के अनुग्रह को व्यर्थ नहीं ठहराता, क्‍योंकि यदि व्यवस्था के द्वारा धामिर्कता होती, तो मसीह का मरना व्यर्थ होता।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ४३-४५
  • प्रेरितों २७:२७-४४

मंगलवार, 26 जुलाई 2011

नैतिकता, धार्मिकता तथा ग्रहणयोग्यता

नैतिक होने से हम धर्मी भी हों, ऐसा अनिवार्य नहीं। परन्तु जो धर्मी होगा, वह अवश्य ही नैतिक भी होगा। संसार तथा कभी कभी मसीही विश्वासी भी यह मान लेते हैं कि क्योंकि संसार की नज़रों में उनका चरित्र और चालचलन किसी भी उलाहना या आलोचना से परे है, इसलिए वे परमेश्वर के सामने भी सही होंगे। लेकिन यह आवश्यक नहीं है, बाइबल बताती है कि मनुष्य परमेश्वर के साथ ठीक हुए बिना भी अपने कार्यों तथा प्रयासों से नैतिक तो हो सकता है लेकिन परमेश्वर को ग्रहण योग्य नहीं, क्योंकि परमेश्वर की धार्मिकता का स्तर मनुष्यों और संसार के स्तर से भिन्न और सिद्ध है।

बाइबल की यह स्पष्ट शिक्षा है कि परमेश्वर को केवल पापों के लिए पश्चाताप, पापों से मन फिराव तथा प्रभु यीशु द्वारा मिलने वाली पापों से क्षमा द्वारा उत्पन्न धार्मिकता ही स्वीकार है; अन्य किसी भी माध्यम से कोई संसार के समक्ष तो नैतिक और धर्मी हो सकता है, परमेश्वर के समक्ष नहीं। परमेश्वर को मनुष्यों से केवल अपनी आज्ञाकारिता चाहिए, उनके ’धर्म के कार्य’ नहीं (निर्गमन १९:५; यर्मियाह ७:२३, होशिया ६:६)। बाइबल हमारे धर्म के कार्यों को "मैले चिथड़ों" की संज्ञा देती है (यशायाह ६४:६)। पौलुस प्रेरित का जीवन इस बात का उत्तम उदाहरण है। पौलुस एक कुलीन यहूदी घराने मे पैदा हुआ, धर्म की शिक्षा उसने अपने समय के सबसे उत्तम गुरू गमलीएल से पाई, धर्म की शिक्षाओं के पालन में उसने कोई कमी नहीं छोड़ी, किसी को दोष देने का कोई अवसर नहीं दिया; किंतु जब प्रभु यीशु मसीह से उसका सामना हुआ तो प्रभु की पवित्रता के सम्मुख उस ने अपने धर्म की नैतिकता की तुच्छता को पहचाना, और अपने कर्मों की नैतिकता को त्याग कर उसने प्रभु से पश्चातप की धार्मिकता को सदा काल के लिए ले लिया। इस बात का विवरण उसने फिलिप्पियों को लिखी अपनी पत्री में किया।

पुराने नियम में अय्युब की पुस्तक में भी अय्युब की कहानी इसी बात को दिखाती है। संसार में अय्युब के समान कोई धर्मी और नैतिक नहीं था (अय्युब १:१), स्वयं परमेश्वर ने दो दफा इस बात को कहा - अय्युब १:८ एवं २:३। लेकिन इसी अय्युब ने जब परमेश्वर का प्रत्यक्ष दर्शन पाया तो वह पुकार उठा, "मैं कानों से तेरा समाचार सुना था, परन्तु अब मेरी आंखें तुझे देखती हैं; इसलिये मुझे अपने ऊपर घृणा आती है, और मैं धूलि और राख में पश्चात्ताप करता हूँ। (अय्युब ४२:५, ६)।

यह जानते हुए कि लोग नैतिक तथा धर्मी तो हो सकते हैं परन्तु परमेश्वर को ग्रहणयोग्य नहीं, हमें अपने जीवनों को जाँचने की आवश्यक्ता है। हम परमेश्वर की धार्मिकता के पैमाने पर कहाँ खड़े हैं? क्या हम "मैले चीथड़ों" द्वारा परमेश्वर को प्रसन्न करने और उसे ग्रहणयोग्य होने की कोशिश में लगे हैं या उसके द्वारा प्रभु यीशु में दीये गए मार्ग पर चलकर उस तक पहुंचने वाले लोग हैं? हम शरीर के किन्ही कार्यों से नहीं केवल आत्मा के समर्पण और परमेश्वर की आज्ञाकारिता से ही उसे ग्रहणयोग्य बन सकते हैं।


मसीह से मिली पवित्रता ही परमेश्वर को ग्रहण्योग्य धार्मिकता का स्त्रोत है।

हम तो सब के सब अशुद्ध मनुष्य के से हैं, और हमारे धर्म के काम सब के सब मैले चिथड़ों के समान हैं। - यशायाह ६४:६


बाइबल पाठ: फिलिप्पियों ३:१-११
Php 3:1 निदान, हे मेरे भाइयो, प्रभु में आनन्‍दित रहो: वे ही बातें तुम को बार बार लिखने में मुझे तो कोई कष्‍ट नहीं होता, और इस में तुम्हारी कुशलता है।
Php 3:2 कुत्तों से चौकस रहो, उन बुरे काम करने वालों से चौकस रहो, उन काट कूट करने वालों से चौकस रहो।
Php 3:3 क्‍योंकि खतनावाले तो हम ही हैं जो परमेश्वर के आत्मा की अगुवाई से उपासना करते हैं, और मसीह यीशु पर घमण्‍ड करते हैं और शरीर पर भरोसा नहीं रखते।
Php 3:4 पर मैं तो शरीर पर भी भरोसा रख सकता हूं यदि किसी और को शरीर पर भरोसा रखने का विचार हो, तो मैं उस से भी बढ़कर रख सकता हूं।
Php 3:5 आठवें दिन मेरा खतना हुआ, इस्‍त्राएल के वंश, और बिन्यामीन के गोत्र का हूं; इब्रानियों का इब्रानी हूं, व्यवस्था के विषय में यदि कहो तो फरीसी हूं।
Php 3:6 उत्‍साह के विषय में यदि कहो तो कलीसिया का सताने वाला, और व्यवस्था की धामिर्कता के विषय में यदि कहो तो निर्दोष था।
Php 3:7 परन्‍तु जो जो बातें मेरे लाभ की थीं, उन्‍हीं को मैं ने मसीह के कारण हानि समझ लिया है।
Php 3:8 वरन मैं अपने प्रभु मसीह यीशु की पहिचान की उत्तमता के कारण सब बातों को हानि समझता हूं: जिस के कारण मैं ने सब वस्‍तुओं की हानि उठाई, और उन्‍हें कूड़ा समझता हूं, जिस से मैं मसीह को प्राप्‍त करूं।
Php 3:9 और उस में पाया जाऊं; न कि अपनी उस धामिर्कता के साथ, जो व्यवस्था से है, वरन उस धामिर्कता के साथ जो मसीह पर विश्वास करने के कारण है, और परमेश्वर की ओर से विश्वास करने पर मिलती है।
Php 3:10 और मैं उसको और उसके मृत्युंजय की सामर्थ को, और उसके साथ दुखों में सहभागी हाने के मर्म को जानूं, और उस की मृत्यु की समानता को प्राप्‍त करूं।
Php 3:11 ताकि मैं किसी भी रीति से मरे हुओं में से जी उठने के पद तक पहुंचूं।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ४०-४२
  • प्रेरितों २७:१-२६

सोमवार, 25 जुलाई 2011

प्रदर्शित ढोंग

लण्डन शहर के एक प्रसिद्ध पनीर विक्रेता की दुकान पर बहुत से लोग पंक्ति में खड़े थे। विख्यात प्रचारक स्पर्जन भी वहाँ पनीर खरीदने के इरादे से आए। दुकान की खिड़की में एक बहुत अच्छे प्रतीत होने वाले पनीर के पिण्ड को देख कर स्पर्जन उसकी और आकर्षित हुए और उसे टटोलने लगे। उन्होंने अपनी छड़ी से उसपर हलके से थपकी दी, और आश्चर्यजनक रूप से उस पनीर का पिण्ड में से धातु के बने खोखले बर्तन की खनखनाहट सुनाई दी - वह केवल दिखाने मात्र को खिड़की में रखा धातु से बना पनीर के पिण्ड का नमूना था, वास्तविक पनीर का पिण्ड नहीं। स्पर्जन ने बाद में इस घटना का उल्लेख करते हुए कहा, "मेरा निष्कर्ष था कि मैंने एक बहुत आकर्षक और असली दिखने वाले ढोंगी से मुलाकात करी।"

लोग ऐसे ही हो सकते हैं - जैसे वे प्रतीत होते हैं वैसे वे होते नहीं हैं। बहुत से अपने आप को मसीही विश्वासी तो कहते हैं और रविवार की प्रातः सभाओं में वे बहुत आकर्षक भी दिखते हैं, लेकिन परखे जाने पर उन में से खोखलेपन की ध्वनि आती है। कोई व्यक्ति असली विश्वास से बिलकुल परे होकर भी संसार के सामने मसीही विश्वासी होने का ढोंग तो कर सकता है, लेकिन जैसे ही प्रलोभन अथवा आत्मिक ज़िम्मेदारी से आप उसे परखेंगे, उस के विश्वास का खोखलपन और जीवन का ढोंग प्रकट हो जाएगा। जो आत्मिकता उसमें प्रतीत होती थी वह केवल दिखाने की थी निभाने की नहीं।

लेकिन ऐसा तिमुथियुस के साथ नहीं था। उसका विश्वास खरा और वास्तविक था - इतना असली कि उसके बारे में सोचने भर से ही पौलुस आनन्द से भर गया। तिमुथियुस का हृदय भी अपने लिए लिखी गई पौलुस की पत्री को पढ़ कर संतुष्टि तथा आनन्द से भर गया होगा।

हमें भी अपने विश्वास की खराई को लगातार जाँचते रहना चाहिए कि कहीं उसमें संसार की बातों की मिलावट तो नहीं होती जा रही? क्या जिस विश्वास का हम दावा करते हैं, वह परमेश्वर के जाँचे जाने पर उसके सामने खरा निकलेगा? - पौल वैन गोर्डर


बहुत से लोग मसीह को केवल अपना स्वरूप देते हैं, मन नहीं।

मुझे तेरे उस निष्‍कपट विश्वास की सुधि आती है, जो पहिले तेरी नानी लोइस, और तेरी माता यूनीके में था, और मुझे निश्‍चय हुआ है, कि तुझ में भी है। - २ तिमुथियुस १:५


बाइबल पाठ: २ तिमुथियुस १:१-५

2Ti 1:1 पौलुस की ओर से जो उस जीवन की प्रतिज्ञा के अनुसार जो मसीह यीशु में है, परमेश्वर की इच्‍छा से मसीह यीशु का प्रेरित है।
2Ti 1:2 प्रिय पुत्र तीमुथियुस के नाम। परमेश्वर पिता और हमारे प्रभु मसीह यीशु की ओर से तुझे अनुग्रह और दया और शान्‍ति मिलती रहे।
2Ti 1:3 जिस परमेश्वर की सेवा मैं अपने बापदादों की रीति पर शुद्ध विवेक से करता हूं, उसका धन्यवाद हो कि अपनी प्रार्थनाओं में तुझे लगातार स्मरण करता हूं।
2Ti 1:4 और तेरे आंसुओं की सुधि कर करके रात दिन तुझ से भेंट करने की लालसा रखता हूं कि आनन्‍द से भर जाऊं।
2Ti 1:5 और मुझे तेरे उस निष्‍कपट विश्वास की सुधि आती है, जो पहिले तेरी नानी लोइस, और तेरी माता यूनीके में था, और मुझे निश्‍चय हुआ है, कि तुझ में भी है।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ३७-३९
  • प्रेरितों २६

रविवार, 24 जुलाई 2011

भिन्न मापदण्ड

लोगों को नापने के मापदण्ड में परमेश्वर और संसार में बहुत फर्क है। संसार लोगों को उनकी दौलत, शोहरत और रुतबे के अनुसार नापता है, चाहे उन का नैतिक और आत्मिक स्तर कैसा भी हो। इसकी तुलना में परमेश्वर मनुष्य में दीनता, नम्रता, खराई, निस्वार्थ होना आदि गुण देखता है।

कई बार हम लोगों को गलत समझते हैं क्योंकि हम उनके हृदयों की दशा से अनभिज्ञ होते हैं। यहूदी लोग, अपने समाज में शास्त्रियों को बड़े आदर का स्थान देते थे क्योंकि वे शास्त्री बिना कोई मेहनताना लिए, अपने हाथों से, परमेश्वर के वचन की प्रतिलिपियाँ बनाया करते थे। इस कार्य को करने के कारण लोग उन्हें बड़ा धार्मिक मानते थे। लेकिन प्रभु यीशु उनके मन की वास्तविकता पहचानते थे। उन्हें पता था कि ये शास्त्री समाज में हर जगह अपने आदर्णीय पद का अनुचित लाभ उठाकर अपने स्वार्थसिद्धी के प्रयत्न में रत रहते थे। प्रभु ने मन्दिर में आने वाली एक कंगाल विध्वा के मन की खराई भी देखी, जिसने दो दमड़ी - जो उसका सर्वस्व था, मन्दिर के भंडार में डाल दी, लेकिन किसी मनुष्य ने उसके इस महान त्याग को नहीं पहचाना।

जब हम अपने नापने के स्तर बनाएं और लोगों को उनके अनुसार नापना आरंभ करें तो ध्यान रखें कि परमेश्वर बाहरी स्वरूप को नहीं हृदयों को देखता है। वह हमें भी हमारे हृदय की दशा कि अनुसार ही आँकेगा, संसार के स्तर अथवा मापदण्ड के अनुसार नहीं। उसका प्रतिफल उसके अपने मापदण्ड के अनुसार होगा, हमारे या संसार के मापदण्ड अथवा सिफारिश के अनुसार नहीं।

यदि हम अपने जीवन में परमेश्वर के पवित्र आत्मा की शिक्षाओं के प्रति संवेदनशील रहेंगे, और उसी पर निर्भर होकर, उसी के मार्ग दर्शन में होकर चलेंगे, तो वह हमारे अन्दर एक ऐसा जीवन उत्पन्न करेगा जो परमेश्वर के मापदण्ड पर खरा होगा और अनन्त काल के लिए भले प्रतिफलों से भरा होगा।

यदि हमारे जीवनों में मसीही जीवन का बिगड़ा हुआ स्वरूप है, तो हम ने संसार को अपना जीवन प्रभावित करने दिया है।

...यहोवा का देखना मनुष्य का सा नहीं है? मनुष्य तो बाहर का रूप देखता है, परन्तु यहोवा की दृष्टि मन पर रहती है। - १ शमूएल १६:७


बाइबल पाठ: लूका २०:४५-२१:४

Luk 20:45 जब सब लोग सुन रहे थे, तो उस ने अपके चेलों से कहा।
Luk 20:46 शास्‍त्रियों से चौकस रहो, जिन को लम्बे लम्बे वस्‍त्र पहिने हुए फिरना भाता है, और जिन्‍हें बाजारों में नमस्‍कार, और सभाओं में मुख्य आसन और जेवनारों में मुख्य स्थान प्रिय लगते हैं।
Luk 20:47 वे विधवाओं के घर खा जाते हैं, और दिखाने के लिये बड़ी देर तक प्रार्थना करते रहते हैं: वे बहुत ही दण्‍ड पाएंगे।
Luk 21:1 फिर उस ने आंख उठा कर धनवानों को अपना अपना दान भण्‍डार में डालते देखा।
Luk 21:2 और उस ने एक कंगाल विधवा को भी उस में दो दमडिय़ां डालते देखा।
Luk 21:3 तब उस ने कहा मैं तुम से सच कहता हूं कि इस कंगाल विधवा ने सब से बढ़ कर डाला है।
Luk 21:4 क्‍योंकि उन सब ने अपनी बढ़ती में से दान में कुछ डाला है, परन्‍तु इस ने अपनी घटी में से अपनी सारी जीविका डाल दी है।

एक साल में बाइबल:
  • भजन ३५-३६
  • प्रेरितों २५