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Wednesday, July 31, 2013

मुफ्त

   आर्थिक कठिनाईयों से जूझ रहे लोगों की सहायाता के लिए, जिस चर्च में मैं जाता हूँ वहां के लोगों ने एक "सब के लिए मुफ्त" दिवस आयोजित किया। हम चर्च के लोगों ने अपने घरों से कम प्रयोग करी हुई वस्तुएं लाकर चर्च में रख लीं और चर्च के दरवाज़े समाज के लिए खोल दिए और कह दिया कि जिसे जो आवश्यकता हो वह अपनी आवश्यकतानुसार बिना कोई दाम दिए ले जाए। जिन वस्तुओं को लाकर चर्च में रखा गया था वे दैनिक पारिवारिक जीवन में काम आने वाली वस्तुएं थीं, जिनके दाम किसी हम पहले ही चुका चुके थे। अब लोगों को अपनी आवश्यकता पहचान कर वांछित वस्तु केवल माँगना भर था और वह माँगी हुई वस्तु उन्हें बिना किसी प्रश्न या दाम के दे दी जाती।

   यह दिन बहुत सफल रहा, केवल इसलिए नहीं क्योंकि बहुत से लोग बहुत सी वस्तुएं ले जा सके, वरन इससे भी बढ़कर इसलिए क्योंकि उस दिन छः नए लोगों ने प्रभु यीशु को अपने निज उद्धारकर्ता के रूप में ग्रहण किया। इन छः लोगों ने केवल मुफ्त मिल रही वस्तुओं का लाभ नहीं लिया, वरन उससे भी अधिक उस मुफ्त मिल रही पापों की क्षमा और उद्धार का भी लाभ उठाया जिसकी कीमत प्रभु यीशु ने उनके लिए अपने बलिदान के द्वारा पहले से ही चुका रखी थी।

   समस्त संसार और समस्त मानवजाति के पापों के दण्ड को अपने ऊपर लेकर और उन के लिए लगभग 2000 वर्ष पहले क्रूस पर अपना बलिदान देकर प्रभु यीशु ने सभी के पापों के दण्ड को चुका दिया, तथा मृत्यु पर जयवन्त होकर तीसरे दिन जी उठने के द्वारा अपने ईश्वरत्व को भी प्रमाणित कर दिया। अब प्रभु यीशु से यह क्षमा और उद्धार सब के लिए मुफ्त में उपलब्ध है, केवल उसके पास जाकर इसे माँगना और स्वीकार करना है "इसलिये कि सब ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं। परन्तु उसके अनुग्रह से उस छुटकारे के द्वारा जो मसीह यीशु में है, सेंत मेंत धर्मी ठहराए जाते हैं। उसे परमेश्वर ने उसके लोहू के कारण एक ऐसा प्रायश्चित्त ठहराया, जो विश्वास करने से कार्यकारी होता है, कि जो पाप पहिले किए गए, और जिन की परमेश्वर ने अपनी सहनशीलता से आनाकानी की; उन के विषय में वह अपनी धामिर्कता प्रगट करे" (रोमियों 3:23-25)।

   संसार के इतिहास में केवल एक प्रभु यीशु ही है जिसने पापियों के उद्धार के लिए अपने प्राण दिए और उनसे पापों की क्षमा का भी वायदा करता है। केवल वही एक मात्र है जो स्वतः ही मृत्यु के तीन दिन के बाद जीवित लौट कर आया है और फिर कभी नहीं मरा। केवल वही एक मात्र है जो किसी जाति या धर्म के आधार पर नहीं वरन सभी के लिए अपने प्रेम के आधार पर व्यवहार करता है और उन्हें ऊँच-नीच, बड़े-छोटे, भले-बुरे, धर्मी-अधर्मी आदि में विभाजित नहीं करता वरन सबको अपने में एक कर लेता है "क्योंकि तुम सब उस विश्वास करने के द्वारा जो मसीह यीशु पर है, परमेश्वर की सन्तान हो। और तुम में से जितनों ने मसीह में बपतिस्मा लिया है उन्होंने मसीह को पहिन लिया है। अब न कोई यहूदी रहा और न यूनानी; न कोई दास, न स्‍वतंत्र; न कोई नर, न नारी; क्योंकि तुम सब मसीह यीशु में एक हो" (गलतियों 3:26-28)।

   हम में से प्रत्येक जन किसी ना किसी बात में या आत्मिक रीति से आवश्यकतामन्द है, और हमारी प्रत्येक आवश्यकता की पूर्ति प्रभु यीशु में है। साथ ही संसार के हर जन की आवश्यकता है पापों से क्षमा, उद्धार और अनन्त जीवन, जो केवल प्रभु यीशु में ही उपलब्ध है, और वह भी बिलकुल मुफ्त! क्या आपने इस मुफ्त उपलब्ध उद्धार का लाभ उठा लिया है? - डेव ब्रैनन


पाप क्षमा और उद्धार मुफ्त में उपलब्ध तो हैं, किंतु आपके स्वीकार किए बिना वे आपके लिए कार्यकारी नहीं हो सकते।

अर्थात परमेश्वर की वह धामिर्कता, जो यीशु मसीह पर विश्वास करने से सब विश्वास करने वालों के लिये है; क्योंकि कुछ भेद नहीं। इसलिये कि सब ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं। - रोमियों 3:22-23

बाइबल पाठ: इफिसियों 2:1-9
Ephesians 2:1 और उसने तुम्हें भी जिलाया, जो अपने अपराधों और पापों के कारण मरे हुए थे।
Ephesians 2:2 जिन में तुम पहिले इस संसार की रीति पर, और आकाश के अधिकार के हाकिम अर्थात उस आत्मा के अनुसार चलते थे, जो अब भी आज्ञा न मानने वालों में कार्य करता है।
Ephesians 2:3 इन में हम भी सब के सब पहिले अपने शरीर की लालसाओं में दिन बिताते थे, और शरीर, और मन की मनसाएं पूरी करते थे, और और लोगों के समान स्‍वभाव ही से क्रोध की सन्तान थे।
Ephesians 2:4 परन्तु परमेश्वर ने जो दया का धनी है; अपने उस बड़े प्रेम के कारण, जिस से उसने हम से प्रेम किया।
Ephesians 2:5 जब हम अपराधों के कारण मरे हुए थे, तो हमें मसीह के साथ जिलाया; (अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है।)
Ephesians 2:6 और मसीह यीशु में उसके साथ उठाया, और स्‍वर्गीय स्थानों में उसके साथ बैठाया।
Ephesians 2:7 कि वह अपनी उस कृपा से जो मसीह यीशु में हम पर है, आने वाले समयों में अपने अनुग्रह का असीम धन दिखाए।
Ephesians 2:8 क्योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है, और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर का दान है।
Ephesians 2:9 और न कर्मों के कारण, ऐसा न हो कि कोई घमण्‍ड करे।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 54-56 
  • रोमियों 3


Tuesday, July 30, 2013

संभाल

   एक दिन अपने बेटे के लिए मैं सौर मंडल का एक नमूना खरीद लाया; घर में पुर्ज़े जोड़कर उसे बनाने और लगाने के लिए मुझे सभी ग्रहों को छत से लटकाना था। यह करने के लिए कई बार सीढ़ी चढ़ने-उतरने से मैं थक गया और मुझे कुछ चक्कर भी आने लगे। यह कार्य पूरा होने के कुछ ही घण्टों में हमें कुछ गिरने की आवाज़ आई; जाकर देखा तो सौर मण्डल से बृहस्पति गृह टूट कर नीचे धरती पर गिरा पड़ा था!

   उस रात को जब मैं सोने के लिए लेटा तो मेरा ध्यान इस घटना की ओर गया और मैं सोचने लगा कि एक सौर मण्डल के नमूने को लगाने भर के लिए मुझे कितना परिश्रम करना पड़ा और फिर कितनी सरलता से सौर मण्डल के उस नमूने से एक गृह टूट कर गिर गया, लेकिन सदियों से हमारा सृष्टिकर्ता और उद्धारकर्ता प्रभु यीशु ना केवल हमारे सौर मण्डल को वरन इस सारी सृष्टि को बिना थके संभाले हुए है, "और वही सब वस्‍तुओं में प्रथम है, और सब वस्तुएं उसी में स्थिर रहती हैं" (कुलुस्सियों 1:17) और एक भी ग्रह या नक्षत्र अपनी निर्धारित दिशा से ज़रा भी इधर-उधर नहीं होता। प्रभु यीशु हमारे संसार और इस सृष्टि को अपने बनाए उन नियमों के द्वारा संभाले रहता है जिनको स्वाभाविक मान कर संसार हल्के में ले लेता है और उसके बारे में परवाह भी नहीं करता। प्रभु यीशु ही है जो अपनी सामर्थ से सब कुछ संभाले रहता है, "... और सब वस्‍तुओं को अपनी सामर्थ के वचन से संभालता है..." (इब्रानियों 1:3)। यह प्रभु यीशु की सामर्थ का उदाहरण है कि वह केवल अपने वचन के द्वारा ही सारी सृष्टि को संभाले रहता है और संचालित करता रहता है।

   यह सब अद्भुत तो है, लेकिन प्रभु यीशु केवल सौर मण्डल-तारों-नक्षत्रों को संभालने वाला ही नहीं है, वह हमारी, अर्थात संसार के प्रत्येक मनुष्य की हर बात कि जानकारी भी रखता है और सब का पालन-पोषण भी करता है: "जिस परमेश्वर ने पृथ्वी और उस की सब वस्‍तुओं को बनाया, वह स्वर्ग और पृथ्वी का स्‍वामी हो कर हाथ के बनाए हुए मन्‍दिरों में नहीं रहता। न किसी वस्तु का प्रयोजन रखकर मनुष्यों के हाथों की सेवा लेता है, क्योंकि वह तो आप ही सब को जीवन और स्‍वास और सब कुछ देता है" (प्रेरितों 17:24-25)।

   चाहे हमारा प्रभु हमें हर मांगी हुई अथवा ऐच्छित वस्तु ना भी दे, लेकिन फिर भी हम चाहे किसी भी परिस्थिति, तंगी, घटी, बीमारी आदि में क्यों ना हों, वह हर पल हर क्षण हमें संभाले रहता है, हमारी आवश्यकताओं को पूरा करता रहता है और हमारी देख-भाल करता रहता है और जो जिस समय हमारे लिए उपयुक्त और आवश्यक है वह उपलब्ध कराता है। उसने इस संसार में हमारे जितने भी दिन निर्धारित किए हैं, हम उसपर पूरा पूरा भरोसा रख सकते हैं कि वह जो सौर मण्डल, तारों, नक्षत्रों को बिना थके संभालता है और कुछ भी ज़रा सा भी इधर-उधर नहीं होने देता, वही उन सभी दिनों के पूरे होने तक उतनी ही परवाह और बारीकी से हमारी व्यक्तिगत संभाल भी करता रहेगा और फिर अनन्तकाल के लिए हम मसीही विश्वासियों को अपने निकट आनन्द की भरपूरी में रख लेगा। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


जो परमेश्वर सृष्टि को संभालता है, वही मुझे भी संभालता है।

और वही सब वस्‍तुओं में प्रथम है, और सब वस्तुएं उसी में स्थिर रहती हैं। - कुलुस्सियों 1:17 

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों 1:14-23
Colossians 1:14 जिस में हमें छुटकारा अर्थात पापों की क्षमा प्राप्त होती है।
Colossians 1:15 वह तो अदृश्य परमेश्वर का प्रतिरूप और सारी सृष्‍टि में पहिलौठा है।
Colossians 1:16 क्योंकि उसी में सारी वस्‍तुओं की सृष्‍टि हुई, स्वर्ग की हो अथवा पृथ्वी की, देखी या अनदेखी, क्या सिंहासन, क्या प्रभुतांए, क्या प्रधानताएं, क्या अधिकार, सारी वस्तुएं उसी के द्वारा और उसी के लिये सृजी गई हैं।
Colossians 1:17 और वही सब वस्‍तुओं में प्रथम है, और सब वस्तुएं उसी में स्थिर रहती हैं।
Colossians 1:18 और वही देह, अर्थात कलीसिया का सिर है; वही आदि है और मरे हुओं में से जी उठने वालों में पहिलौठा कि सब बातों में वही प्रधान ठहरे।
Colossians 1:19 क्योंकि पिता की प्रसन्नता इसी में है कि उस में सारी परिपूर्णता वास करे।
Colossians 1:20 और उसके क्रूस पर बहे हुए लोहू के द्वारा मेल मिलाप कर के, सब वस्‍तुओं का उसी के द्वारा से अपने साथ मेल कर ले चाहे वे पृथ्वी पर की हों, चाहे स्वर्ग में की।
Colossians 1:21 और उसने अब उसकी शारीरिक देह में मृत्यु के द्वारा तुम्हारा भी मेल कर लिया जो पहिले निकाले हुए थे और बुरे कामों के कारण मन से बैरी थे।
Colossians 1:22 ताकि तुम्हें अपने सम्मुख पवित्र और निष्‍कलंक, और निर्दोष बनाकर उपस्थित करे।
Colossians 1:23 यदि तुम विश्वास की नेव पर दृढ़ बने रहो, और उस सुसमाचार की आशा को जिसे तुम ने सुना है न छोड़ो, जिस का प्रचार आकाश के नीचे की सारी सृष्‍टि में किया गया; और जिस का मैं पौलुस सेवक बना।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 51-53 
  • रोमियों 2


Monday, July 29, 2013

भरपूरी का जीवन

   दार्शनिक चिन्तन करते हैं "भरपूरी का जीवन क्या है और यह कहाँ मिलता है?" जब कभी मैं यह प्रश्न सुनता हूँ, मुझे अपना मित्र रॉय का स्मरण हो आता है। रॉय एक शान्त, नम्र, सुशील व्यक्ति था जो कभी प्रतिष्ठा या सम्मान पाने की लालसा नहीं रखता था। उसे अपनी दैनिक आवश्यकताओं की भी कोई चिन्ता नहीं रहती थी, उसने यह चिन्ता अपने स्वर्गीय परमेश्वर पिता के हाथों में छोड़ी हुई थी। उसे बस एक ही बात की चिन्ता थी - अपने स्वर्गीय परमेश्वर पिता की इच्छा को पूरा करते रहना। उसका दृष्टीकोण स्वर्गीय था और उसे देख कर मुझे सदा स्मरण आता था कि इस पृथ्वी पर हम केवल यात्री ही तो हैं।

   रॉय पिछले पतझड़ में संसार से जाता रहा। उसकी यादगार में रखी गई सभा में बहुत से मित्रों ने अपने जीवन पर उसके जीवन से पड़े प्रभाव के बारे में बताया। बहुत से लोग उसकी दयालुता, निस्वार्थ दान, नम्रता और विनम्र अनुकंपा के बारे में बोले। वह सब के लिए परमेश्वर के निस्वार्थ प्रेम का सजीव उदाहरण था। उस सभा के बाद रॉय का बेटा उसके रहने के स्थान एक वृद्ध-आश्रम पर गया कि अपने पिता की सांसारिक संपत्ति को ले और वह स्थान खाली करके आश्रम को वापस लौटा दे; उसे वहाँ मिले बस दो जोड़ी जूते, कुछ शर्ट और पैन्ट और कुछ छोटा-मोटा सामान। वह यह सब एक स्थानीय धर्मार्थ कार्य करने वाले संगठन को सौंप कर आ गया।

   जैसा कुछ लोगों के अनुसार एक भरपूर जीवन होता है, वैसा जीवन रॉय के पास कभी नहीं था, लेकिन उसका जीवन परमेश्वर के प्रति भले कार्यों से भरा हुआ था। जॉर्ज मैकडौन्लड ने लिखा था, "कौन है जो स्वर्ग और पृथ्वी का स्वामी है; वह जिसके पास हज़ार बंगले हैं या वह जिसके पास एक भी रहने का ऐसा स्थान नहीं जिसका वह मालिक हो किंतु ऐसे दस स्थान हों जहाँ जाकर यदि वह द्वार खटखटकाए तो वहाँ तुरंत उल्लास की लहर दौड़ जाए?"

   रॉय के पास सांसारिक संपत्ति तो नहीं थी, लेकिन बेशक रॉय का जीवन भरपूरी का जीवन था और इस का राज़ था परमेश्वर के साथ उसका संबंध जिसने उसके दृष्टिकोण को सांसारिक नहीं स्वर्गीय बना दिया था। परमेश्वर के साथ उसके ऐसे संबंध के कारण ही संसार तथा संसार के लोगों के साथ उसका हर संबंध विलक्षण था, प्रेरित करने वाला था, सकारात्मक था। क्योंकि उसका जीवन परमेश्वर को प्रशंसा देता था, परमेश्वर ने उसे संसार में प्रशंसनीय बना दिया था। जितना वह हर बात के लिए परमेश्वर की ओर देखता रहता था, परमेश्वर ने उतना ही लोगों को उसकी ओर देखने वाला बना दिया।

   रॉय का जीवन उदाहरण है उस भरपूरी का जो परमेश्वर को अपने जीवन में प्रथम स्थान देने से आती है। - डेविड रोपर


परमेश्वर को जाने बिना भरपूरी का जीवन जान पाना संभव नहीं।

और अब, हे इस्राएल, तेरा परमेश्वर यहोवा तुझ से इसके सिवाय और क्या चाहता है, कि तू अपने परमेश्वर यहोवा का भय मानें, और उसके सारे मार्गों पर चले, उस से प्रेम रखे, और अपने पूरे मन और अपने सारे प्राण से उसकी सेवा करे - व्यवस्थाविवरण 10:12

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों 3:1-11
Colossians 3:1 सो जब तुम मसीह के साथ जिलाए गए, तो स्‍वर्गीय वस्‍तुओं की खोज में रहो, जहां मसीह वर्तमान है और परमेश्वर के दाहिनी ओर बैठा है।
Colossians 3:2 पृथ्वी पर की नहीं परन्तु स्‍वर्गीय वस्‍तुओं पर ध्यान लगाओ।
Colossians 3:3 क्योंकि तुम तो मर गए, और तुम्हारा जीवन मसीह के साथ परमेश्वर में छिपा हुआ है।
Colossians 3:4 जब मसीह जो हमारा जीवन है, प्रगट होगा, तब तुम भी उसके साथ महिमा सहित प्रगट किए जाओगे।
Colossians 3:5 इसलिये अपने उन अंगो को मार डालो, जो पृथ्वी पर हैं, अर्थात व्यभिचार, अशुद्धता, दुष्‍कामना, बुरी लालसा और लोभ को जो मूर्ति पूजा के बराबर है।
Colossians 3:6 इन ही के कारण परमेश्वर का प्रकोप आज्ञा न मानने वालों पर पड़ता है।
Colossians 3:7 और तुम भी, जब इन बुराइयों में जीवन बिताते थे, तो इन्‍हीं के अनुसार चलते थे।
Colossians 3:8 पर अब तुम भी इन सब को अर्थात क्रोध, रोष, बैरभाव, निन्‍दा, और मुंह से गालियां बकना ये सब बातें छोड़ दो।
Colossians 3:9 एक दूसरे से झूठ मत बोलí