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शनिवार, 17 नवंबर 2018

सेवा



      केरी बहुत प्रयास करती है कि उसे लोगों से प्रशंसा मिले। वह अधिकांश समय प्रसन्न रहने का व्यवहार करती है जिससे कि लोग उसके आनन्दित रहने के रवैये को देखें और उसकी तारीफ़ करें। कुछ लोग उसे समाज में औरों की सहायता करते हुए देख कर उसे सराहते हैं, परन्तु कभी-कभी जब वह अपने मन की बात को खुल कर कहती है तो वह स्वीकार करती है कि “मैं प्रभु से प्रेम तो करती हूँ, परन्तु कुछ बातों में मुझे लगता है कि मेरा जीवन एक दिखावे का जीवन है।” औरों को अच्छा दिखाई देने के उसके प्रयासों के पीछे उसके अन्दर की उसकी असुरक्षा की भावना है, और वह कहती है कि उसे लगने लगा है कि यह सब कर पाने की उसकी सामर्थ्य समाप्त होती जा रही है।

      हम सभी केरी के इस अनुभव के साथ संबंधित हो सकते हैं क्योंकि यह संभव नहीं है कि हमारे सभी उद्देश्य सदा ही सिद्ध भी हों। हम अपने प्रभु परमेश्वर से तथा औरों से भी प्रेम करते हैं, परन्तु मसीही जीवन जीने के लिए हमारे उद्देश्य औरों से महत्व और प्रशंसा पाने के साथ मिले हुए होते हैं।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम प्रभु यीशु की शिक्षाओं में देखते हैं कि उन्होंने औरों को दिखाने के लिए दान करने, प्रार्थनाएं करने और उपवास रखने वालों के विषय सिखाया था (मत्ती 6:1-18)। प्रभु ने अपने अनुयायियों को अपने पहाड़ी उपदेश में सिखाया के वे अपने दान गुप्त रखें, पिता परमेश्वर से एकांत में प्रार्थानाएं करें, और उपवास रखते समय उसे प्रकट न करें (पद 4, 6, 16)।

      अधिकाँशतः सेवा सामाजिक रीति से ही की जाती है, परन्तु सेवा को अप्रत्यक्ष रखकर करना हमें हमारे प्रति परमेश्वर की राय को समझने में सहायक होगा। प्रभु परमेश्वर, जिसने हमें अपने ही स्वरूप में सृजा है, हमें इतना महत्वपूर्ण मानता है कि उसने हमारे लिए अपने पुत्र को बलिदान कर दिया, और अपने प्रेम को प्रतिदिन हम पर प्रकट करता रहता है। - ऐनी सेटास


परमेश्वर को प्रसन्न करने की हमारी इच्छा, 
परमेश्वर के प्रति आज्ञाकारी होने का हमारा सर्वोच्च उद्देश्य होना चाहिए।

मैं यहोवा मन की खोजता और हृदय को जांचता हूँ ताकि प्रत्येक जन को उसकी चाल-चलन के अनुसार अर्थात उसके कामों का फल दूं। - यिर्मयाह 17:10

बाइबल पाठ: मत्ती 6:1-8
Matthew 6:1 सावधान रहो! तुम मनुष्यों को दिखाने के लिये अपने धर्म के काम न करो, नहीं तो अपने स्‍वर्गीय पिता से कुछ भी फल न पाओगे।
Matthew 6:2 इसलिये जब तू दान करे, तो अपने आगे तुरही न बजवा, जैसा कपटी, सभाओं और गलियों में करते हैं, ताकि लोग उन की बड़ाई करें, मैं तुम से सच कहता हूं, कि वे अपना फल पा चुके।
Matthew 6:3 परन्तु जब तू दान करे, तो जो तेरा दाहिना हाथ करता है, उसे तेरा बांया हाथ न जानने पाए।
Matthew 6:4 ताकि तेरा दान गुप्‍त रहे; और तब तेरा पिता जो गुप्‍त में देखता है, तुझे प्रतिफल देगा।
Matthew 6:5 और जब तू प्रार्थना करे, तो कपटियों के समान न हो क्योंकि लोगों को दिखाने के लिये सभाओं में और सड़कों के मोड़ों पर खड़े हो कर प्रार्थना करना उन को अच्छा लगता है; मैं तुम से सच कहता हूं, कि वे अपना प्रतिफल पा चुके।
Matthew 6:6 परन्तु जब तू प्रार्थना करे, तो अपनी कोठरी में जा; और द्वार बन्‍द कर के अपने पिता से जो गुप्‍त में है प्रार्थना कर; और तब तेरा पिता जो गुप्‍त में देखता है, तुझे प्रतिफल देगा।
Matthew 6:7 प्रार्थना करते समय अन्यजातियों के समान बक बक न करो; क्योंकि वे समझते हैं कि उनके बहुत बोलने से उन की सुनी जाएगी।
Matthew 6:8 सो तुम उनके समान न बनो, क्योंकि तुम्हारा पिता तुम्हारे मांगने से पहिले ही जानता है, कि तुम्हारी क्या क्या आवश्यक्ता है।


एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 5-7
  • इब्रानियों 12



रविवार, 17 जुलाई 2016

स्वरूप


   कार में बैठकर मेरे नए धूप के चश्मे को कुछ देर पहनकर रखने के पश्चात मेरी बेटी ने उन्हें उतारकर मुझे वापस करते हुए कहा, "ये कोई धूप से बचने के चश्मे थोड़े ही हैं, ये तो केवल फैशन के चश्मे  हैं।" फिर मुझे छेड़ने के लिए बोली, "मुझे लगता है कि आपने ये केवल इसलिए खरीदे हैं क्योंकि इन्हें पहनकार आप अच्छे दिखते हैं।" हाँ, मैं मानती हूँ कि मेरी बेटी मुझे पहचानती है; और यह भी कि उस चश्मे को खरीदते समय मैंने उनके सूर्य की किरणों को रोक पाने की क्षमता के बारे में ज़रा भी नहीं विचारा था। बस क्योंकि वे मेरे चेहरे पर अच्छे लग रहे थे, इसीलिए मैंने उन्हें खरीद लिया था।

   प्रायः हम सभी चाहते हैं कि हम अच्छे दिखें। हमें देखकर लोगों को लगे कि हम पूर्ण हैं - हमें ना तो किसी परेशानी और ना ही किसी भय या दुःख को झेलना पड़ रहा है। किंतु हम बाहर से चाहे जो भी दिखाएं, अन्दर की स्थिति तो कुछ और ही होती है; और वास्तविकता छुपती नहीं है, कभी ना कभी बाहर आ ही जाती है।

   इसी प्रकार आत्मिक जीवन में भी सिद्धता का दिखावा करना ना तो हमारे अपने लिए और ना ही हमारे साथ के लोगों के लिए भला होता है। लेकिन मसीह यीशु के विश्वासियों की मंडली में हमें यह आदर है कि हम अपने जीवन और बातें अपने साथ के अन्य विश्वासियों के साथ बाँट सकते हैं, जो हमारे तथा अन्य विश्वासियों दोनों ही के लिए लाभदायक रहता है। जब हम अपने आप को कुछ खुला और पारदर्शी बनाते हैं, तो हमें कुछ और लोग भी मिलते हैं जो हमारे समान ही परिस्थितियों से जूझ रहे हैं, और हम एक दूसरे को सहायता तथा सांत्वना देने वाले हो जाते हैं। मंडली में हम ना केवल परमेश्वर के साथ वरन एक-दूसरे के साथ भी संगति और सहभागिता रखना सीखते हैं, एक दूसरे के साथ आनन्दित होना, एक दूसरे के सहायक होना सीखते हैं। हम अपनी सीमाओं और कमज़ोरियों के प्रति संवेदनशील होकर परमेश्वर की अगुवाई तथा सामर्थ से, अपनी उन अयोग्यताओं की दशा में भी एक दूसरे के लिए तथा परमेश्वर के लिए उपयोगी बनने लगते हैं।

   होने दें कि परमेश्वर आप पर चढ़े दिखावे के हर आवरण को हटा दे, और आप अपने सच्चे स्वरूप में, "प्रेम, और भले कामों में उक्साने के लिये एक दूसरे की चिन्‍ता किया करें" (इब्रानियों 10:24)। - सिंडी हैस कैस्पर


मसीही विश्वासी तब और भी सामर्थी होते हैं जब वे अकेले खड़े नहीं होते।

निदान हम बलवानों को चाहिए, कि निर्बलों की निर्बलताओं को सहें; न कि अपने आप को प्रसन्न करें। हम में से हर एक अपने पड़ोसी को उस की भलाई के लिये सुधारने के निमित प्रसन्न करे। - रोमियों 15:1-2

बाइबल पाठ: इब्रानियों 10:19-25
Hebrews 10:19 सो हे भाइयो, जब कि हमें यीशु के लोहू के द्वारा उस नए और जीवते मार्ग से पवित्र स्थान में प्रवेश करने का हियाव हो गया है। 
Hebrews 10:20 जो उसने परदे अर्थात अपने शरीर में से हो कर, हमारे लिये अभिषेक किया है, 
Hebrews 10:21 और इसलिये कि हमारा ऐसा महान याजक है, जो परमेश्वर के घर का अधिकारी है। 
Hebrews 10:22 तो आओ; हम सच्चे मन, और पूरे विश्वास के साथ, और विवेक का दोष दूर करने के लिये हृदय पर छिड़काव ले कर, और देह को शुद्ध जल से धुलवा कर परमेश्वर के समीप जाएं। 
Hebrews 10:23 और अपनी आशा के अंगीकार को दृढ़ता से थामें रहें; क्योंकि जिसने प्रतिज्ञा किया है, वह सच्चा है। 
Hebrews 10:24 और प्रेम, और भले कामों में उक्साने के लिये एक दूसरे की चिन्‍ता किया करें। 
Hebrews 10:25 और एक दूसरे के साथ इकट्ठा होना ने छोड़ें, जैसे कि कितनों की रीति है, पर एक दूसरे को समझाते रहें; और ज्यों ज्यों उस दिन को निकट आते देखो, त्यों त्यों और भी अधिक यह किया करो।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 18-19
  • प्रेरितों 20:17-38


बुधवार, 4 जून 2014

अन्दरूनी परिवर्तन


   मुझे नाटकीय मोड़ों और जीवन के लिए बहुमूल्य शिक्षाओं से भरी हुई योना नबी की कहानी बहुत पसन्द है। परमेश्वर के वचन बाइबल में दी गई इस कहानी का नायक, परमेश्वर का नबी योना, परमेश्वर से निर्देश पाता है कि गैरयहूदी और दुष्ट निनवे-वासियों के पास जाए और उन्हें पश्चाताप कर के परमेश्वर की ओर मुड़ने को कहे क्योंकि उनकी दुष्टता बहुत बढ़ गई है और परमेश्वर का न्याय उन पर आने वाला है। योना, जो निनवे-वासियों से बैर रखता था, अपनी ढिठाई में परमेश्वर के निर्देश की अवहेलना करता है, परन्तु परमेश्वर उसे उस ज़िम्मेदारी से भागने नहीं देता और अन्ततः योना निनवे जाकर वहाँ पापों से पश्चाताप और परमेश्वर की ओर मुड़ने का प्रचार करता है। उसके एक ही प्रचार से वहाँ बड़ा परिवर्तन आता है और वहाँ के राजा से लेकर प्रजा तक का हर व्यक्ति पश्चाताप में परमेश्वर के सामने झुक जाता है। उनके इस पश्चाताप को देख कर परमेश्वर उन पर आने वाले दण्ड की अपनी आज्ञा रोक लेता है और उन्हें क्षमा कर देता है।

   योना के इस प्रचार और उसके अद्भुत प्रभाव से निश्चय ही वह अपने समय का सफलतम प्रचारक बन गया होगा, और हर कोई यह आशा रखेगा कि निनवे के लोगों के पश्चाताप और परमेश्वर की ओर मुड़ने तथा परमेश्वर के उन्हें क्षमा कर देने को देख कर योना बहुत प्रसन्न हुआ होगा; लेकिन इसके विपरीत योना परमेश्वर की इस क्षमा को देखकर बहुत खिसिया! यद्यपि योना ने बाहर से परिवर्तित प्रतीत होकर परमेश्वर के निर्देशानुसार सही स्थान पर सही कार्य तो करा, लेकिन उसका व्यवहार दिखाता है कि योना में अन्दरूनी परिवर्तन नहीं हुआ था; वह निनवे के लोगों के प्रति अपने बैर को दबाए नहीं रख सका, और परमेश्वर के महान कार्य को वहाँ होता देख कर भी वह निनवे-वासियों के प्रति अपने बैर में बना ही रहा।

   यदि हम मसीही विश्वासी भी सचेत ना रहें तो हम भी योना के समान ही बाहर से परमेश्वर के आज्ञाकारी दिखने वाले किंतु अन्दर से परमेश्वर से दूर रहने वाले हो सकते हैं। परमेश्वर हमारे बाहरी स्वरूप और कार्यों को नहीं देखता वरन हमारे हृदय की दशा और अन्दरूनी विचार-व्यवहार पर नज़र रखता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखा है कि, "क्योंकि परमेश्वर का वचन जीवित, और प्रबल, और हर एक दोधारी तलवार से भी बहुत चोखा है, और जीव, और आत्मा को, और गांठ गांठ, और गूदे गूदे को अलग कर के, वार पार छेदता है; और मन की भावनाओं और विचारों को जांचता है" (इब्रानियों 4:12); और परमेश्वर अपने इसी वचन से हमारी आत्मिक शल्य-चिकित्सा करता है, हमारे हृदय की गहराइयों में छिपे और बसे लोभ, बेईमानी, घृणा, घमण्ड, स्वार्थ आदि दुर्भावनाओं को प्रकट करता, उन्हें काटता तथा बाहर निकालता है।

   इसलिए जब अगली बार परमेश्वर का वचन आपकी वास्तविकता आपको दिखाए तथा परमेश्वर का पवित्र आत्मा आपको किसी बात के लिए कायल करे तो अपनी आत्मिक-शल्यचिकित्सा के लिए अपने आप को उसे पूर्ण रूप से सौंप दीजिए, उसकी बातों को ध्यान पूर्वक सुनिए और जो कुछ दूर करना है उसे कीजिए जिससे वह अन्दरूनी परिवर्तन के द्वारा आपको वास्तविक रीति से और भी बेहतर एवं आशीशित बना सके। - जो स्टोवैल


जब परमेश्वर आपको अन्दर से नियंत्रित करेगा तब ही आप बाहर से खरे रहेंगे।

हर एक पवित्रशास्‍त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है और उपदेश, और समझाने, और सुधारने, और धर्म की शिक्षा के लिये लाभदायक है। ताकि परमेश्वर का जन सिद्ध बने, और हर एक भले काम के लिये तत्‍पर हो जाए। - 2 तिमिथियुस 3:16-17

बाइबल पाठ: योना 4:1-11
Jonah 4:1 यह बात योना को बहुत ही बुरी लगी, और उसका क्रोध भड़का। 
Jonah 4:2 और उसने यहोवा से यह कह कर प्रार्थना की, हे यहोवा जब मैं अपने देश में था, तब क्या मैं यही बात न कहता था? इसी कारण मैं ने तेरी आज्ञा सुनते ही तर्शीश को भाग जाने के लिये फुर्ती की; क्योंकि मैं जानता था कि तू अनुग्रहकारी और दयालु परमेश्वर है, विलम्ब से कोप करने वाला करूणानिधान है, और दु:ख देने से प्रसन्न नहीं होता। 
Jonah 4:3 सो अब हे यहोवा, मेरा प्राण ले ले; क्योंकि मेरे लिये जीवित रहने से मरना ही भला है। 
Jonah 4:4 यहोवा ने कहा, तेरा जो क्रोध भड़का है, क्या वह उचित है? 
Jonah 4:5 इस पर योना उस नगर से निकल कर, उसकी पूरब ओर बैठ गया; और वहां एक छप्पर बना कर उसकी छाया में बैठा हुआ यह देखने लगा कि नगर को क्या होगा? 
Jonah 4:6 तब यहोवा परमेश्वर ने एक रेंड़ का पेड़ लगा कर ऐसा बढ़ाया कि योना के सिर पर छाया हो, जिस से उसका दु:ख दूर हो। योना उस रेंड़ के पेड़ के कारण बहुत ही आनन्दित हुआ। 
Jonah 4:7 बिहान को जब पौ फटने लगी, तब परमेश्वर ने एक कीड़े को भेजा, जिसने रेंड़ का पेड़ ऐसा काटा कि वह सूख गया। 
Jonah 4:8 जब सूर्य उगा, तब परमेश्वर ने पुरवाई बहा कर लू चलाई, और घाम योना के सिर पर ऐसा लगा कि वह मूर्च्छा खाने लगा; और उसने यह कह कर मृत्यु मांगी, मेरे लिये जीवित रहने से मरना ही अच्छा है। 
Jonah 4:9 परमेश्वर ने योना से कहा, तेरा क्रोध, जो रेंड़ के पेड़ के कारण भड़का है, क्या वह उचित है? उसने कहा, हां, मेरा जो क्रोध भड़का है वह अच्छा ही है, वरन क्रोध के मारे मरना भी अच्छा होता। 
Jonah 4:10 तब यहोवा ने कहा, जिस रेंड़ के पेड़ के लिये तू ने कुछ परिश्रम नहीं किया, न उसको बढ़ाया, जो एक ही रात में हुआ, और एक ही रात में नाश भी हुआ; उस पर तू ने तरस खाई है। 
Jonah 4:11 फिर यह बड़ा नगर नीनवे, जिस में एक लाख बीस हजार से अधिक मनुष्य हैं, जो अपने दाहिने बाएं हाथों का भेद नहीं पहिचानते, और बहुत घरेलू पशु भी उस में रहते हैं, तो क्या मैं उस पर तरस न खाऊं?

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 31-33


रविवार, 28 जुलाई 2013

उपवास

   कुछ वर्ष पहले हमारे चर्च में हमने परमेश्वर के वचन बाइबल के पुराने नियम में मिलाप वाले तम्बू को विषय बनाकर एक अध्ययन श्रंखला करी थी। जब इस श्रंखला में मेज़ पर रखी भेंट की रोटियों का विषय आया तो मैंने कुछ ऐसा किया जो उससे पहले कभी नहीं किया था - मैंने कई दिनों तक भोजन तज कर उपवास रखा। मैंने उपवास इसलिए रखा क्योंकि मैं परमेश्वर के वचन "...इसलिये कि वह तुझ को सिखाए कि मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं जीवित रहता, परन्तु जो जो वचन यहोवा के मुंह से निकलते हैं उन ही से वह जीवित रहता है" (व्यवस्थाविवरण 8:3) की सच्चाई को व्यक्तिगत रीति से अनुभव करना चाहता था। मैं चाहता था कि मैं किसी विवशता के अन्तर्गत नहीं वरन पूर्ण स्वेच्छा से एक ऐसी वस्तु का इन्कार करूँ जिससे मैं बहुत प्रेम रखता था - भोजन, उसके लिए जिससे मैं और भी अधिक प्रेम रखता हूँ - परमेश्वर।

   जब मैंने यह उपवास रखा तो प्रभु यीशु मसीह की उपवास से संबंधित शिक्षाओं (मत्ती 6:16-18) का पालन भी किया। इस खंड में प्रभु यीशु ने पहले एक नकारात्मक आज्ञा दी: "जब तुम उपवास करो, तो कपटियों की नाईं तुम्हारे मुंह पर उदासी न छाई रहे, क्योंकि वे अपना मुंह बनाए रहते हैं, ताकि लोग उन्हें उपवासी जानें; मैं तुम से सच कहता हूं, कि वे अपना प्रतिफल पा चुके" (मत्ती 6:16)। फिर एक सकारात्मक आज्ञा दी: "परन्तु जब तू उपवास करे तो अपने सिर पर तेल मल और मुंह धो" (मत्ती 6:17)। इन दोनों आज्ञाओं के द्वारा प्रभु यीशु ने सिखाया कि हमें परमेश्वर के लिए कोई कार्य दूसरों को अपनी ओर आकर्षित करने या उन पर प्रभाव डालने के उद्देश्य से नहीं करना है। हमारे यह कार्य परमेश्वर के प्रति प्रेम और आराधना का एक व्यक्तिगत बलिदान और उपासना हैं जिसमें किसी प्रकार के धार्मिक घमण्ड या किसी विवशता का कोई स्थान नहीं है। यह समझाने के बाद प्रभु यीशु ने इस बात के पालन पर आधारित आशीष की प्रतिज्ञा भी दी: "ताकि लोग नहीं परन्तु तेरा पिता जो गुप्‍त में है, तुझे उपवासी जाने; इस दशा में तेरा पिता जो गुप्‍त में देखता है, तुझे प्रतिफल देगा" (मत्ती 6:18)।

   मसीही विश्वास में उपवास रखना ना कोई विवशता है और ना ही परमेश्वर हमें इसके लिए बाध्य करता है कि उसकी निकटता में आने के लिए हम अपने आप को किसी भोजन वस्तु से वंचित करें। परमेश्वर की इच्छा यही है कि हम अपने जीवनों को उसके निर्देशों और नियमों के अनुसार संचालित करते रहें और संसार के समान जीने से बचे रहें, यही अपने आप में एक उपवास है जिसका परमेश्वर की नज़रों में बड़ा मोल है और जिसका परमेश्वर से प्रतिफल महान है (यशायाह 58:1-14)। - मार्विन विलियम्स


परमेश्वर के निकट आने के लिए संसार की लालसाओं से दूरी बना लेना लाभदायक होता है।

सावधान रहो! तुम मनुष्यों को दिखाने के लिये अपने धर्म के काम न करो, नहीं तो अपने स्‍वर्गीय पिता से कुछ भी फल न पाओगे। - मत्ती 6:1

बाइबल पाठ: यशायाह 58:1-14
Isaiah 58:1 गला खोल कर पुकार, कुछ न रख छोड़, नरसिंगे का सा ऊंचा शब्द कर; मेरी प्रजा को उसका अपराध अर्थात याकूब के घराने को उसका पाप जता दे।
Isaiah 58:2 वे प्रति दिन मेरे पास आते और मेरी गति बूझने की इच्छा ऐसी रखते हैं मानो वे धर्मी लोग हैं जिन्होंने अपने परमेश्वर के नियमों को नहीं टाला; वे मुझ से धर्म के नियम पूछते और परमेश्वर के निकट आने से प्रसन्न होते हैं।
Isaiah 58:3 वे कहते हैं, क्या कारण है कि हम ने तो उपवास रखा, परन्तु तू ने इसकी सुधि नहीं ली? हम ने दु:ख उठाया, परन्तु तू ने कुछ ध्यान नहीं दिया? सुनो, उपवास के दिन तुम अपनी ही इच्छा पूरी करते हो और अपने सेवकों से कठिन कामों को कराते हो।
Isaiah 58:4 सुनो, तुम्हारे उपवास का फल यह होता है कि तुम आपस में लड़ते और झगड़ते और दुष्टता से घूंसे मारते हो। जैसा उपवास तुम आजकल रखते हो, उस से तुम्हारी प्रार्थना ऊपर नहीं सुनाई देगी।
Isaiah 58:5 जिस उपवास से मैं प्रसन्न होता हूं अर्थात जिस में मनुष्य स्वयं को दीन करे, क्या तुम इस प्रकार करते हो? क्या सिर को झाऊ की नाईं झुकाना, अपने नीचे टाट बिछाना, और राख फैलाने ही को तुम उपवास और यहोवा को प्रसन्न करने का दिन कहते हो?
Isaiah 58:6 जिस उपवास से मैं प्रसन्न होता हूं, वह क्या यह नहीं, कि, अन्याय से बनाए हुए दासों, और अन्धेर सहने वालों का जुआ तोड़कर उन को छुड़ा लेना, और, सब जुओं को टुकड़े टुकड़े कर देना?
Isaiah 58:7 क्या वह यह नहीं है कि अपनी रोटी भूखों को बांट देना, अनाथ और मारे मारे फिरते हुओं को अपने घर ले आना, किसी को नंगा देखकर वस्त्र पहिनाना, और अपने जातिभाइयों से अपने को न छिपाना?
Isaiah 58:8 तब तेरा प्रकाश पौ फटने की नाईं चमकेगा, और तू शीघ्र चंगा हो जाएगा; तेरा धर्म तेरे आगे आगे चलेगा, यहोवा का तेज तेरे पीछे रक्षा करते चलेगा।
Isaiah 58:9 तब तू पुकारेगा और यहोवा उत्तर देगा; तू दोहाई देगा और वह कहेगा, मैं यहां हूं। यदि तू अन्धेर करना और उंगली मटकाना, और, दुष्ट बातें बोलना छोड़ दे,
Isaiah 58:10 उदारता से भूखे की सहायता करे और दीन दु:खियों को सन्तुष्ट करे, तब अन्धियारे में तेरा प्रकाश चमकेगा, और तेरा घोर अन्धकार दोपहर का सा उजियाला हो जाएगा।
Isaiah 58:11 और यहोवा तुझे लगातार लिये चलेगा, और काल के समय तुझे तृप्त और तेरी हड्डियों को हरी भरी करेगा; और तू सींची हुई बारी और ऐसे सोते के समान होगा जिसका जल कभी नहीं सूखता।
Isaiah 58:12 और तेरे वंश के लोग बहुत काल के उजड़े हुए स्थानों को फिर बसाएंगे; तू पीढ़ी पीढ़ी की पड़ी हुई नेव पर घर उठाएगा; तेरा नाम टूटे हुए बाड़े का सुधारक और पथों का ठीक करने वाला पड़ेगा।
Isaiah 58:13 यदि तू विश्रामदिन को अशुद्ध न करे अर्थात मेरे उस पवित्र दिन में अपनी इच्छा पूरी करने का यत्न न करे, और विश्रामदिन को आनन्द का दिन और यहोवा का पवित्र किया हुआ दिन समझ कर माने; यदि तू उसका सम्मान कर के उस दिन अपने मार्ग पर न चले, अपनी इच्छा पूरी न करे, और अपनी ही बातें न बोले,
Isaiah 58:14 तो तू यहोवा के कारण सुखी होगा, और मैं तुझे देश के ऊंचे स्थानों पर चलने दूंगा; मैं तेरे मूलपुरूष याकूब के भाग की उपज में से तुझे खिलाऊंगा, क्योंकि यहोवा ही के मुख से यह वचन निकला है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 46-48 
  • प्रेरितों 28