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सोमवार, 16 सितंबर 2019

क्रोध प्रबंधन



      मैं अपनी एक सहेली के साथ भोजन कर रही थी, तो उसने बताया कि वह अपने परिवार के एक सदस्य से कितनी खिसिया चुकी थी। परन्तु वह उस सदस्य से कुछ भी कहने से हिचकिचाती थी। मेरी सहेली को उस सदस्य द्वारा लगातार उसकी उपेक्षा करते रहना या उसका मजाक उड़ाते रहना कतई पसन्द नहीं था, परन्तु फिर भी वह ऐसा करता ही रहता था, मेरी सहेली को क्रोध दिलाता रहता था। अनतः जब उसने उस सदस्य से इस समस्या के विषय बात-चीत करनी चाही, तो उस सदस्य ने निन्दापूर्ण आलोचना करने के द्वारा प्रत्युत्तर दिया। इससे मेरी सहेली भड़क उठी और उसपर बहुत क्रुद्ध हुई। परिणामस्वरूप दोनों ही व्यक्तियों ने अपने-अपने रुख और कठोर कर लिए तथा परिवार के मध्य की फूट और बढ़ गई।

      मैं उसके साथ सहानुभूति रखती हूँ, उसकी परिस्थिति को समझ सकती हूँ, क्योंकि मैं भी व्यवहार में उसके समान ही हूँ। मुझे भी लोगों का उनकी गलत बातों के लिए सामना करने में बहुत कठिनाई होती है। यदि कोई परिवार का सदस्य या कोई मित्र आकर कुछ बुरा बोलता अथवा करता है, तो अकसर मैं उसे अपना प्रत्युत्तर देने की भावनाओं को दबाए रखती हूँ; और तब तक दबाए रखती हूँ जब तक कि वही व्यक्ति या कोई और आकर कुछ और अनुचित कह या कर नहीं देता है। मेरे सहने की शक्ति के परे बात जाते ही मैं भी फट पड़ती हूँ।

      संभवतः इसीलिए, परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने इफिसुस के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में लिखा कि “क्रोध तो करो, पर पाप मत करो: सूर्य अस्‍त होने तक तुम्हारा क्रोध न रहे” (इफिसियों 4:26)। अनसुलझी बातों को सुलझाने के लिए एक समय सीमा निर्धारित करने से क्रोध नियंत्रण में रहता है। किसी गलती का पात्र बनने पर उसे लेकर बुड़बुड़ाते और खिसियाते रहने से कडुवाहट ही उत्पन्न होती है। ऐसा करने की बजाए हमें उस बात को लेकर परमेश्वर के पास जाना चाहिए, और परमेश्वर की सहायता से “प्रेम में सच्चाई से चलते हुए, सब बातों में उस में जो सिर है, अर्थात मसीह में बढ़ते जाएं” (इफिसियों 4:15)।

      क्या आज किसी व्यक्ति को लेकर आप किसी समस्या में पड़े हुए हैं? उसे अपने अन्दर दबाए रखने के स्थान पर, उस समस्या को परमेश्वर के सम्मुख खोल दें। परमेश्वर आपके क्रोध और रोष की अग्नि को अपने प्रेम और क्षमा से बुझा सकता है। - लिंडा वॉशिंगटन

क्रोध की अग्नि को बेकाबू हो जाने से पहले ही बुझा दें।

बुराई के बदले किसी से बुराई न करो; जो बातें सब लोगों के निकट भली हैं, उन की चिन्ता किया करो। जहां तक हो सके, तुम अपने भरसक सब मनुष्यों के साथ मेल मिलाप रखो। हे प्रियो अपना पलटा न लेना; परन्तु क्रोध को अवसर दो, क्योंकि लिखा है, पलटा लेना मेरा काम है, प्रभु कहता है मैं ही बदला दूंगा। - रोमियों 12:17-19

बाइबल पाठ: इफिसियों 4:15, 26-32
Ephesians 4:15 वरन प्रेम में सच्चाई से चलते हुए, सब बातों में उस में जो सिर है, अर्थात मसीह में बढ़ते जाएं।
Ephesians 4:26 क्रोध तो करो, पर पाप मत करो: सूर्य अस्‍त होने तक तुम्हारा क्रोध न रहे।
Ephesians 4:27 और न शैतान को अवसर दो।
Ephesians 4:28 चोरी करनेवाला फिर चोरी न करे; वरन भले काम करने में अपने हाथों से परिश्रम करे; इसलिये कि जिसे प्रयोजन हो, उसे देने को उसके पास कुछ हो।
Ephesians 4:29 कोई गन्‍दी बात तुम्हारे मुंह से न निकले, पर आवश्यकता के अनुसार वही जो उन्नति के लिये उत्तम हो, ताकि उस से सुनने वालों पर अनुग्रह हो।
Ephesians 4:30 और परमेश्वर के पवित्र आत्मा को शोकित मत करो, जिस से तुम पर छुटकारे के दिन के लिये छाप दी गई है।
Ephesians 4:31 सब प्रकार की कड़वाहट और प्रकोप और क्रोध, और कलह, और निन्‍दा सब बैरभाव समेत तुम से दूर की जाए।
Ephesians 4:32 और एक दूसरे पर कृपाल, और करूणामय हो, और जैसे परमेश्वर ने मसीह में तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 25-26
  • 2 कुरिन्थियों 9



शनिवार, 7 सितंबर 2013

निष्पक्ष एवं ईमानदार

   बेसबॉल में उच्चतम स्तर की प्रतिस्पर्धा के 135 वर्षीय इतिहास में केवल 20 ही ऐसे गेंदबाज़ हुए हैं जिन्होंने सिद्धतम खेल को खेला है। जून 2, 2010 को डिट्रौइट टाइगर्स के अर्माण्डा गलारागा इस ख्याति को पाने वाले 21वें खिलाड़ी बन गए होते लेकिन अम्पायर की गलती से वे इस ख्याति को पाने से चूक गए, उनका सपना पूरा ना हो सका। विडियो रीप्ले पर देखने से अम्पायर की यह गलती साफ दिखाई दी। बाद में अम्पायर ने भी अपनी गलती स्वीकार करी और अर्माण्डा गलागारा से इसकी क्षमा भी मांगी, लेकिन खेल के दौरान हुई यह चूक बदली नहीं जा सकी। इस पूरे प्रकरण में अर्माण्डा शांत बने रहे, उस अम्पायर के प्रति अपनी सहानुभूति भी जताई, और उसकी आलोचना भी नहीं करी। अर्माण्डा के इस व्यवहार और किसी प्रकार का कोई पलटा ना लेने की भावना से उसके प्रशंसकों, साथी खिलाड़ियों और खेल पत्रकारों को बहुत अचरज हुआ।

   यदि हम अपने साथ निष्पक्षता की आशा रखते हैं तो हमारा ऐसी परिस्थितियों में निराश होकर क्रोधित और कुंठित हो जाना संभव है। किंतु यदि हम परमेश्वर के वचन बाइबल की शिक्षाओं के अनुसार चलते हैं तो हमारी मनोभावना अपनी नहीं वरन दूसरों की भलाई का ध्यान रखने की होती है। बाइबल की नीतिवचन नामक पुस्तक में दी गई शिक्षाओं के विषय में पुस्तक के आरंभ ही में लिखा है: "इनके द्वारा पढ़ने वाला बुद्धि और शिक्षा प्राप्त करे, और समझ की बातें समझे, और काम करने में प्रवीणता, और धर्म, न्याय और सीधाई की शिक्षा पाए" (नीतिवचन 1:2-3)। बाइबल टीकाकार और शिक्षक ओस्वॉल्ड चैम्बर्स ने दूसरे लोगों के साथ व्यवहार के संबंध में कहा, "अपने लिए सदा ही न्याय पाते रहने के इच्छुक मत रहो, किंतु दूसरों को सदा ही न्याय देने से कभी मत चूको; प्रभु यीशु में होने के कारण, जीवन की किसी भी परिस्थिति को दूसरों के साथ अपने संबंधों को बिगाड़ने मत दो"।

   जब हम अन्याय का सामना करें तो मसीह यीशु के अनुयायी होने के कारण यह हमारा कर्तव्य और विशेषाधिकार है कि हम प्रत्युत्तर में बदला लेने की भावना रखने की बजाए निष्पक्ष और ईमानदार होकर वही करते रहें जो उचित, न्यायसंगत और सही है। - डेविड मैक्कैसलैंड


जीवन सदा ही निष्पक्ष नहीं होता, लेकिन हमारा परमेश्वर सदा ही विश्वासयोग्य और सहायक बना रहता है।

बुराई से बैर और भलाई से प्रीति रखो, और फाटक में न्याय को स्थिर करो; क्या जाने सेनाओं का परमेश्वर यहोवा यूसुफ से बचे हुओं पर अनुग्रह करे। - आमोस 5:15

बाइबल पाठ: नीतिवचन 1:1-9
Proverbs 1:1 दाऊद के पुत्र इस्राएल के राजा सुलैमान के नीतिवचन:
Proverbs 1:2 इनके द्वारा पढ़ने वाला बुद्धि और शिक्षा प्राप्त करे, और समझ की बातें समझे,
Proverbs 1:3 और काम करने में प्रवीणता, और धर्म, न्याय और सीधाई की शिक्षा पाए;
Proverbs 1:4 कि भोलों को चतुराई, और जवान को ज्ञान और विवेक मिले;
Proverbs 1:5 कि बुद्धिमान सुन कर अपनी विद्या बढ़ाए, और समझदार बुद्धि का उपदेश पाए,
Proverbs 1:6 जिस से वे नितिवचन और दृष्टान्त को, और बुद्धिमानों के वचन और उनके रहस्यों को समझें।
Proverbs 1:7 यहोवा का भय मानना बुद्धि का मूल है; बुद्धि और शिक्षा को मूढ़ ही लोग तुच्छ जानते हैं।
Proverbs 1:8 हे मेरे पुत्र, अपने पिता की शिक्षा पर कान लगा, और अपनी माता की शिक्षा को न तज;
Proverbs 1:9 क्योंकि वे मानो तेरे सिर के लिये शोभायमान मुकुट, और तेरे गले के लिये कन्ठ माला होंगी।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 1-2 
  • 1 कुरिन्थियों 16


गुरुवार, 18 जुलाई 2013

विजयी

   भजनकार "अहंकारियों के अपमान" से बहुत आहत और परेशान हो गया था (भजन 123:4); संभवतः आप भी हो गए हों। आपके पड़ौस के, दफतर के, या कक्षा के लोग शायद आपके मसीही विश्वास का उपहास करते हों और मसीह यीशु का अनुकरण करने के आपके निर्णय को ठट्ठों में उड़ाते हों। लाठी और पत्थर तो केवल हमारे शरीरों को ही घाव देते और हमारी हड्डियाँ ही तोड़ते हैं, लेकिन शब्दों के घाव और भी गहरे तथा पीड़ादायक होते हैं, और उन उपहास करने वालों के शब्द-बाणों ने आपको गहरे और पीड़ादायक घाव दे रखे हों।

   ऐसे अहंकारियों के उपहास का प्रत्युत्तर देने के दो तरीके हो सकते हैं; या तो हम उन के समान हो जाएं और ईंट का जवाब पत्थर से देने लगें, अन्यथा उनके इस उपहास को अपने लिए आदर की बात और सही मार्ग पर होने का प्रमाण समझें! परमेश्वर का वचन भी हमें यही, दूसरा विकल्प ही सिखाता है: "फिर यदि मसीह के नाम के लिये तुम्हारी निन्‍दा की जाती है, तो धन्य हो; क्योंकि महिमा का आत्मा, जो परमेश्वर का आत्मा है, तुम पर छाया करता है" (1 पतरस 4:14)। हमारे लिए थोड़े समय के लिए यह निन्दा सहना, अनन्तकाल तक क्लेष सहने से कहीं उत्तम है।

   मसीह यीशु ने अपने चेलों को सिखाया "परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि अपने बैरियों से प्रेम रखो और अपने सताने वालों के लिये प्रार्थना करो" (मत्ती 5:44); इसलिए पहला विकल्प - उपहास का वैसा ही प्रत्युत्तर देना, और "ईंट का जवाब पत्थर से देना" हम मसीही विश्वासीयों के लिए नहीं है। इसके विपरीत परमेश्वर का वचन हमें निर्देश देता है कि "अपने सताने वालों को आशीष दो; आशीष दो श्राप न दो" (रोमियों 12:14)। ऐसा करने से ही हम बुराई पर विजयी होने पाएंगे अन्यथा अपना पलटा आप लेने से तो हम बुराई को और बढ़ावा ही देंगे, उसे मिटाने नहीं पाएंगे - क्या मानव जति के इतिहास में आज तक कभी किसी युद्ध या बदले में किए गए वार ने किसी समस्या का अन्त किया है? जो भी समाधान निकले हैं वे आपसी समझौते और परस्पर एक दूसरे को आदर देने से ही संभव हुए हैं, पलटा लेने से नहीं।

   परमेश्वर हमारी हर परिस्थिति को जानता है और वह हर बात में हमारे लिए भलाई भी उत्पन्न करता है। लोगों के उपहास और निन्दा के द्वारा भी: "हे मेरे भाइयों, जब तुम नाना प्रकार की परीक्षाओं में पड़ो तो इसको पूरे आनन्द की बात समझो, यह जान कर, कि तुम्हारे विश्वास के परखे जाने से धीरज उत्पन्न होता है। पर धीरज को अपना पूरा काम करने दो, कि तुम पूरे और सिद्ध हो जाओ और तुम में किसी बात की घटी न रहे" (याकूब 1:2-4)। जब हमारे प्रभु और उद्धारकर्ता को भी इन बातों का सामना करना पड़ा तो हम जो उसके अनुयायी हैं, इन सब से कैसे बच कर रह सकते हैं? लेकिन जैसे मसीह यीशु के लिए, वैसे ही हम मसीही विश्वासियों के लिए भी ये दुख आदर और आशीष का कारण ही बनेंगे: "सो जब कि मसीह ने शरीर में हो कर दुख उठाया तो तुम भी उस ही मनसा को धारण कर के हथियार बान्‍ध लो क्योंकि जिसने शरीर में दुख उठाया, वह पाप से छूट गया। ताकि भविष्य में अपना शेष शारीरिक जीवन मनुष्यों की अभिलाषाओं के अनुसार नहीं वरन परमेश्वर की इच्छा के अनुसार व्यतीत करो" (1 पतरस 4:1-2)।

   बिना युद्ध भूमि में जाए विजय प्राप्त नहीं होती; लेकिन अपने प्रत्येक संतान से परमेश्वर का यह वायदा भी है कि हमें केवल युद्ध भूमि में जाकर खड़ा ही होना है, युद्ध परमेश्वर का है और विजयी सामर्थ भी वही देगा। इसलिए, "बुराई से न हारो परन्तु भलाई से बुराई का जीत लो" (रोमियों 12:21)। - डेविड रोपर


जब औरों के व्यवहार से आप अपने आप को आहत और अपमानित अनुभव करें तो मसीह यीशु की ओर देखिए।

हमारा जीव सुखी लोगों के ठट्ठों से, और अहंकारियों के अपमान से बहुत ही भर गया है। - भजन 123:4 

बाइबल पाठ: रोमियों 12:9-21
Romans 12:9 प्रेम निष्कपट हो; बुराई से घृणा करो; भलाई में लगे रहो।
Romans 12:10 भाईचारे के प्रेम से एक दूसरे पर दया रखो; परस्पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलो।
Romans 12:11 प्रयत्न करने में आलसी न हो; आत्मिक उन्माद में भरो रहो; प्रभु की सेवा करते रहो।
Romans 12:12 आशा में आनन्दित रहो; क्लेश में स्थिर रहो; प्रार्थना में नित्य लगे रहो।
Romans 12:13 पवित्र लोगों को जो कुछ अवश्य हो, उस में उन की सहायता करो; पहुनाई करने में लगे रहो।
Romans 12:14 अपने सताने वालों को आशीष दो; आशीष दो श्राप न दो।
Romans 12:15 आनन्द करने वालों के साथ आनन्द करो; और रोने वालों के साथ रोओ।
Romans 12:16 आपस में एक सा मन रखो; अभिमानी न हो; परन्तु दीनों के साथ संगति रखो; अपनी दृष्टि में बुद्धिमान न हो।
Romans 12:17 बुराई के बदले किसी से बुराई न करो; जो बातें सब लोगों के निकट भली हैं, उन की चिन्ता किया करो।
Romans 12:18 जहां तक हो सके, तुम अपने भरसक सब मनुष्यों के साथ मेल मिलाप रखो।
Romans 12:19 हे प्रियो अपना पलटा न लेना; परन्तु क्रोध को अवसर दो, क्योंकि लिखा है, पलटा लेना मेरा काम है, प्रभु कहता है मैं ही बदला दूंगा।
Romans 12:20 परन्तु यदि तेरा बैरी भूखा हो तो उसे खाना खिला; यदि प्यासा हो, तो उसे पानी पिला; क्योंकि ऐसा करने से तू उसके सिर पर आग के अंगारों का ढेर लगाएगा।
Romans 12:21 बुराई से न हारो परन्तु भलाई से बुराई का जीत लो।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 20-22 
  • प्रेरितों 21:1-17


मंगलवार, 17 अप्रैल 2012

खामोशी

   कभी कभी किसी झूठे दोषारोपण के लिए खामोशी ही सही प्रत्युत्तर होता है, और कभी कभी किसी बात के लिए खामोश रहना अनुचित होता है। 
   जब प्रभु यीशु को धर्मसभा के सामने ला कर खड़ा किया गया और उसपर दोष मढ़े गए तो वह खामोश रहा (मरकुस १४:५३-६१)। वह जानता था कि उस परिस्थिति में अपना बचाव करना व्यर्थ है क्योंकि अधिकारी तो उसे दोषी ठहराकर उस का दण्ड निर्धारित भी कर चुके थे, जो चल रहा था वह उस दण्ड के निर्णय को लागू करने से पहले करी जाने वाली मात्र औपचारिकता थी, वहां उसे अपनी कोई सफाई देने का अवसर नहीं दिया जा रहा था और ना ही दण्ड के बदले जाने की कोई संभावना थी। खामोश रहकर वह यशायाह भविष्यद्वक्ता द्वारा उसके विष्य में करी गई भविष्यवाणी "वह सताया गया, तौभी वह सहता रहा और अपना मुंह न खोला; जिस प्रकार भेड़ वध होने के समय वा भेड़ी ऊन कतरने के समय चुपचाप शान्त रहती है, वैसे ही उस ने भी अपना मुंह न खोला" (यशायाह ५३:७) भी पूरी कर रहा था। किंतु इसी प्रभु यीशु ने, इन्हीं धर्मशास्त्रियों को उनके झूठ और दोषारोपण के लिए लताड़ा भी था, और उन्हें चुनौती भी दी थी कि उसमें कोई पाप साबित कर के दिखा दें (यूहन्ना ८:१३-५९)।

   एक पास्टर ने अपने चर्च के कार्य से इस्तीफा दे दिया क्योंकि चर्च के कुछ सदस्यों ने उसके बारे में गलत बातें चर्च मण्डली में फैलाईं थीं। उस पास्टर का मानना था कि उन परिस्थितियों में उसका अपनी प्रतिरक्षा करना उसके मसीही विश्वास के आचार के विरुद्ध होता। कभी कभी ऐसा होता है, किंतु उस परिस्थिति में बेहतर होता कि वह पास्टर स्वभाव ही से बखेड़ा खड़ा करने वाले उन लोगों का सामना करता, उनके झूठे आरोपों की पोल खोलता और अपना इस्तीफा देने की बजाए उन लोगों को चर्च के सामने गलती मानने या फिर अनुशासन का सामना करने में से एक चुनने को कहता।

   खामोश रहना गलत करने वालों को गलती करते रहने के लिए प्रोतसाहित भी कर सकता है। किंतु यदि हम केवल अपने आहत अहम के बचाव के लिए या मनुष्यों में अपनी महत्वता को प्रमाणीत करने के लिए ही प्रत्युत्तर देना चाहते हैं, तो मौन रहना और परमेश्वर के समय और न्याय की प्रतीक्षा करना ही बेहतर है।

   क्या आप पर झूठा दोषारोपण किया जा रहा है? यदि आप को लगता है कि प्रत्युत्तर देना व्यर्थ है, या आपका प्रत्युत्तर आपके चोट खाए अहम की रक्षा ही के अन्तर्गत है, तो परमेश्वर से सहने का अनुग्रह मांगें और खामोश रहें। परन्तु यदि आप समझते हैं कि गलत करने वालों को और उनकी गलती को सुधारने या किसी अन्याय को सुधारने का आपके पास उचित अवसर है तो उसके लिए परमेश्वर से सामर्थ और सदबुद्धि मांग कर अवश्य ही अपनी खामोशी तोड़िए और उचित कार्यवाही कीजिए। - हर्ब वैण्डर लुग्ट


खामोशी बहूमूल्य होती है; यदि आप बात को सुधार नहीं सकते तो खामोशी को बनाए रखिए।
तब महायाजक ने बीच में खड़े होकर यीशु से पूछा, कि तू कोई उत्तर नहीं देता ये लोग तेरे विरोध में क्‍या गवाही देते हैं? परन्‍तु वह मौन साधे रहा, और कुछ उत्तर न दिया: महायाजक ने उस से फिर पूछा, क्‍या तू उस परम धन्य का पुत्र मसीह है? - मरकुस १४:६०-६१
बाइबल पाठ: मरकुस १४:५३-६५
Mar 14:53  फिर वे यीशु को महायाजक के पास ले गए, और सब महायाजक और पुरिनए और शास्त्री उसके यहां इकट्ठे हो गए।
Mar 14:54  पतरस दूर ही दूर से उसके पीछे पीछे महायाजक के आंगन के भीतर तक गया, और प्यादों के साथ बैठ कर आग तापने लगा।
Mar 14:55  महायाजक और सारी महासभा यीशु के मार डालने के लिये उसके विरोध में गवाही की खोज में थे, पर न मिली।
Mar 14:56 क्‍योंकि बहुतेरे उसके विरोध में झूठी गवाही दे रहे थे, पर उन की गवाही एक सी न थी।
Mar 14:57  तब कितनों ने उठकर उस पर यह झूठी गवाही दी।
Mar 14:58 कि हम ने इसे यह कहते सुना है कि मैं इस हाथ के बनाए हुए मन्‍दिर को ढ़ा दूंगा, और तीन दिन में दूसरा बनाऊंगा, जो हाथ से न बना हो।
Mar 14:59  इस पर भी उन की गवाही एक सी न निकली।
Mar 14:60 तब महायाजक ने बीच में खड़े होकर यीशु से पूछा, कि तू कोई उत्तर नहीं देता ये लोग तेरे विरोध में क्‍या गवाही देते हैं?
Mar 14:61 परन्‍तु वह मौन साधे रहा, और कुछ उत्तर न दिया: महायाजक ने उस से फिर पूछा, क्‍या तू उस परम धन्य का पुत्र मसीह है?
Mar 14:62  यीशु ने कहा, हां मैं हूं: और तुम मनुष्य के पुत्र को सर्वशक्तिमान की दाहिनी और बैठे, और आकाश के बादलों के साथ आते देखोगे।
Mar 14:63 तब महायाजक ने अपने वस्‍त्र फाड़कर कहा, अब हमें गवाहों का क्‍या प्रयोजन है?
Mar 14:64 तुम ने यह निन्‍दा सुनी: तुम्हारी क्‍या राय है? उन सब ने कहा, वह वध के योग्य है।
Mar 14:65 तब कोई तो उस पर थूकने, और कोई उसका मुंह ढांपने और उसे घूंसे मारने, और उस से कहने लगे, कि भविष्यद्वाणी कर: और प्यादों ने उसे लेकर थप्‍पड़ मारे।
एक साल में बाइबल: 
  • २ शमूएल १-२ 
  • लूका १४:१-२४