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सोमवार, 12 मार्च 2018

उद्देश्य



   परमेश्वर के वचन बाइबल के एक प्रमुख पात्र, दाऊद के जीवन की घटना है; दाऊद अपने साथ 400 योद्धाओं को लेकर नाबाल को ढूँढ कर मार डालने के लिए जा रहा था। नाबाल एक समृद्ध किन्तु विवेकहीन व्यक्ति था, जिसके कर्मचारियों और पशुओं की रक्षा तथा सहायता दाऊद के साथियों ने की थी, परन्तु जब दाऊद ने उससे कुछ सहायता चाही तो नाबाल ने उसका उपहास करते हुए सहायता करने से इनकार कर दिया। दाऊद नाबाल को मार डालता, यदि उसका सामना पहले नाबाल की पत्नि, अबीगैल, से नहीं हुआ होता। नाबाल की करतूत के बारे में सुनकर तुरंत अबीगैल ने विनाश से बचने के लिए एक सेना के लायक पर्याप्त भोजन लिया और दाऊद से मिलने निकल पड़ी। दाऊद से मिलकर अबीगैल ने उसे समझाया, और कहा कि यदि वह बदला लेने की अपनी योजना को कार्यान्वित कर देगा, तो शेष जीवन भर वह इसे लेकर दोषी अनुभव करता रहेगा (1 शमूएल 25:31)। दाऊद को एहसास हुआ कि अबीगैल ठीक कह रही है, और उसने अबीगैल को सही मार्ग दिखाने के लिए आशीष दी।

   दाऊद का क्रोध जायज़ था, उसे भलाई के बदले नाबाल से बुराई मिली थी; परन्तु उसका क्रोध उसे पाप में ले जा रहा था। दाऊद की पहली प्रतिक्रया थी कि वह अपनी तलवार नाबाल के अन्दर उतार दे, यद्यपि वह जानता था कि परमेश्वर बदला लेने और हत्या करने से प्रसन्न नहीं होता है (निर्गमन 20:13; लैव्यवस्था 19:18)।

   जब हमें ठेस पहुँचे तो आवेश में कुछ करने से पहले हमें अपनी ऐच्छित प्रतिक्रया की, मानवीय व्यवहार के लिए परमेश्वर की इच्छा से तुलना कर लेनी चाहिए। हमारी इच्छा लोगों को शब्दों से आहात करने, अपने आप को अलग-थलग कर लेने, या अनेकों तरीकों से बचाव करने की हो सकती है। लेकिन एक अनुग्रहपूर्ण व्यवहार करना का चुनाव करने के द्वारा ही हम बाद के पछतावे से बच सकते हैं और परमेश्वर को प्रसन्न कर सकते हैं, जो और भी अधिक महत्वपूर्ण होता है।

   जब अपने संबंधों में हमारा उद्देश्य परमेश्वर को आदर और महिमा देना होगा, तो वह हमारे शत्रुओं को भी हमारे साथ शान्ति से कर देगा (नीतिवचन 16:7)। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


हम जीवन के अन्यायों को सहन कर सकते हैं, 
क्योंकि हम जानते हैं कि परमेश्वर सभी बातों को सही कर देगा।

जब किसी का चाल चलन यहोवा को भावता है, तब वह उसके शत्रुओं का भी उस से मेल कराता है। - नीतिवचन 16:7

बाइबल पाठ: 1 शमूएल 25:14-33
1 Samuel 25:14 परन्तु एक सेवक ने नाबाल की पत्नी अबीगैल को बताया, कि दाऊद ने जंगल से हमारे स्वामी को आशीर्वाद देने के लिये दूत भेजे थे; और उसने उन्हें ललकार दिया।
1 Samuel 25:15 परन्तु वे मनुष्य हम से बहुत अच्छा बर्ताव रखते थे, और जब तक हम मैदान में रहते हुए उनके पास आया जाया करते थे, तब तक न तो हमारी कुछ हानि हुई, और न हमारा कुछ खोया गया;
1 Samuel 25:16 जब तक हम उन के साथ भेड़-बकरियां चराते रहे, तब तक वे रात दिन हमारी आड़ बने रहे।
1 Samuel 25:17 इसलिये अब सोच विचार कर कि क्या करना चाहिए; क्योंकि उन्होंने हमारे स्वामी की ओर उसके समस्त घराने की हानि ठानी होगी, वह तो ऐसा दुष्ट है कि उस से कोई बोल भी नहीं सकता।
1 Samuel 25:18 अब अबीगैल ने फुर्ती से दो सौ रोटी, और दो कुप्पी दाखमधु, और पांच भेडिय़ों का मांस, और पांच सआ भूना हुआ अनाज, और एक सौ गुच्छे किशमिश, और अंजीरों की दो सौ टिकियां ले कर गदहों पर लदवाई।
1 Samuel 25:19 और उसने अपने जवानों से कहा, तुम मेरे आगे आगे चलो, मैं तुम्हारे पीछे पीछे आती हूं; परन्तु उसने अपने पति नाबाल से कुछ न कहा।
1 Samuel 25:20 वह गदहे पर चली हुई पहाड़ की आड़ में उतरी जाती थी, और दाऊद अपने जनों समेत उसके सामहने उतरा आता था; और वह उन को मिली।
1 Samuel 25:21 दाऊद ने तो सोचा था, कि मैं ने जो जंगल में उसके सब माल की ऐसी रक्षा की कि उसका कुछ भी न खोया, यह नि:सन्देह व्यर्थ हुआ; क्योंकि उसने भलाई के बदले मुझ से बुराई ही की है।
1 Samuel 25:22 यदि बिहान को उजियाला होने तक उस जन के समस्त लोगों में से एक लड़के को भी मैं जीवित छोड़ूं, तो परमेश्वर मेरे सब शत्रुओं से ऐसा ही, वरन इस से भी अधिक करे।
1 Samuel 25:23 दाऊद को देख अबीगैल फुर्ती कर के गदहे पर से उतर पड़ी, और दाऊद के सम्मुख मुंह के बल भूमि पर गिरकर दण्डवत की।
1 Samuel 25:24 फिर वह उसके पांव पर गिरके कहने लगी, हे मेरे प्रभु, यह अपराध मेरे ही सिर पर हो; तेरी दासी तुझ से कुछ कहना चाहती है, और तू अपनी दासी की बातों को सुन ले।
1 Samuel 25:25 मेरा प्रभु उस दुष्ट नाबाल पर चित्त न लगाए; क्योंकि जैसा उसका नाम है वैसा ही वह आप है; उसका नाम तो नाबाल है, और सचमुच उस में मूढ़ता पाई जाती है; परन्तु मुझ तेरी दासी ने अपने प्रभु के जवानों को जिन्हें तू ने भेजा था न देखा था।
1 Samuel 25:26 और अब, हे मेरे प्रभु, यहोवा के जीवन की शपथ और तेरे जीवन की शपथ, कि यहोवा ने जो तुझे खून से और अपने हाथ के द्वारा अपना पलटा लेने से रोक रखा है, इसलिये अब तेरे शत्रु और मेरे प्रभु की हानि के चाहने वाले नाबाल ही के समान ठहरें।
1 Samuel 25:27 और अब यह भेंट जो तेरी दासी अपने प्रभु के पास लाई है, उन जवानों को दी जाए जो मेरे प्रभु के साथ चलते हैं।
1 Samuel 25:28 अपनी दासी का अपराध क्षमा कर; क्योंकि यहोवा निश्चय मेरे प्रभु का घर बसाएगा और स्थिर करेगा, इसलिये कि मेरा प्रभु यहोवा की ओर से लड़ता है; और जन्म भर तुझ में कोई बुराई नहीं पाई जाएगी।
1 Samuel 25:29 और यद्यपि एक मनुष्य तेरा पीछा करने और तेरे प्राण का ग्राहक होने को उठा है, तौभी मेरे प्रभु का प्राण तेरे परमेश्वर यहोवा की जीवनरूपी गठरी में बन्धा रहेगा, और तेरे शत्रुओं के प्राणों को वह मानो गोफन में रखकर फेंक देगा।
1 Samuel 25:30 इसलिये जब यहोवा मेरे प्रभु के लिये यह समस्त भलाई करेगा जो उसने तेरे विषय में कही है, और तुझे इस्राएल पर प्रधान कर के ठहराएगा,
1 Samuel 25:31 तब तुझे इस कारण पछताना न होगा, वा मेरे प्रभु का हृदय पीड़ित न होगा कि तू ने अकारण खून किया, और मेरे प्रभु ने अपना पलटा आप लिया है। फिर जब यहोवा मेरे प्रभु से भलाई करे तब अपनी दासी को स्मरण करना।
1 Samuel 25:32 दाऊद ने अबीगैल से कहा, इस्राएल का परमेश्वर यहोवा धन्य है, जिसने आज के दिन मुझ से भेंट करने के लिये तुझे भेजा है।
1 Samuel 25:33 और तेरा विवेक धन्य है, और तू आप भी धन्य है, कि तू ने मुझे आज के दिन खून करने और अपना पलटा आप लेने से रोक लिया है।


एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 17-19
  • मरकुस 13:1-20



मंगलवार, 19 सितंबर 2017

क्लेष


   उस विशाल पर्दे पर निकट से लिया गया चित्र बड़ा तथा स्पष्ट था, इसलिए हम उस मनुष्य के शरीर के गहरे घावों को देख पा रहे थे। एक सैनिक उसे पीट रहा था, जबकि वहाँ खड़ी क्रुध्द भीड़ उस का उपहास कर रही थी; उस मनुष्य का चेहरा खून से लथपथ था। वह दृश्य इतना सजीव प्रतीत हो रहा था कि मैं उस खुले सिनेमा स्थान की शान्ति में बैठा, ऐसे मूँह बना रहा और कसमसा रहा था कि मानो वह यातना मुझे ही दी जा रही थी। परन्तु यह तो केवल एक फिल्म थी जिसमें हम मनुष्यों के लिए प्रभु यीशु द्वारा सही गई यातना और उठाए गए क्लेष का एक सजीव चित्रण किया गया था।

   प्रभु यीशु मसीह द्वारा हमारे लिए उठाए गए दुःखों को स्मरण करवाते हुए, परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पतरस ने लिखा, "और तुम इसी के लिये बुलाए भी गए हो क्योंकि मसीह भी तुम्हारे लिये दुःख उठा कर, तुम्हें एक आदर्श दे गया है, कि तुम भी उसके चिन्ह पर चलो" (1 पतरस 2:21)। जबकि क्लेष विभिन्न प्रकार और तीव्रता में आते हैं, वे अनपेक्षित नहीं हैं। हो सकता है कि हमारे दुःख उतने तीव्र न हों जैसे पौलुस ने सहे थे, जिसने प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास रखने के लिए बेंतों से पीटा जाना, पत्थरवाह किया जाना, और जलयान के टूट जाने के कारण समुद्र में जान का जोखिम उठाना पड़ा। उसे डाकुओं ने घेरा, तथा उसने भूख और प्यास भी सही (2 कुरिन्थियों 11:24-27)। इसी प्रकार संभव है कि हमें वैसे क्लेष भी न उठाने पड़ें जैसे कि उन देशों में लोग उठाते हैं जहाँ मसीही विश्वास स्वीकार्य नहीं है।

   परन्तु हम मसीही विश्वासियों के लिए किसी न किसी रूप में क्लेष आएंगे; चाहे हमें अपना इन्कार करना पड़े, उत्पीड़न सहना पड़े, अपमान सहना पड़े, या ऐसे कार्यों को करने से इन्कार करना पड़े जो प्रभु यीशु को आदर नहीं देते हैं। जब हम इन और ऐसी अनेकों परिस्थितियों में धैर्य दिखाते हैं, अपना बदला नहीं लेते हैं, दूसरों को क्षमा कर देते हैं, अपने भरसक औरों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने का प्रयास करते हैं, तब हम प्रभु यीशु का अनुसरण कर रहे होते हैं।

   हमें जब भी क्लेषों का सामना करना पड़े, तो कोई भी प्रतिक्रीया देने से पूर्व हम थोड़ा थम कर विचार कर लें कि प्रभु यीशु ने हमारे लिए क्या कुछ और कैसे सहा। वह अपने सताने वालों के साथ क्या कुछ कर सकता था, परन्तु उसने उनके लिए क्या कुछ कर के दे दिया। हमारे क्लेष हमें हमारे प्रभु की समानता में ढालने का माध्यम हैं। - लॉरेंस दरमानी


दुःख की पाठशाला में हम वो पाठ सीखते हैं 
जिन्हें हम अन्य किसी पाठशाला में कभी नहीं सीख सकते हैं।

बुराई के बदले किसी से बुराई न करो; जो बातें सब लोगों के निकट भली हैं, उन की चिन्ता किया करो। जहां तक हो सके, तुम अपने भरसक सब मनुष्यों के साथ मेल मिलाप रखो। हे प्रियो अपना पलटा न लेना; परन्तु क्रोध को अवसर दो, क्योंकि लिखा है, पलटा लेना मेरा काम है, प्रभु कहता है मैं ही बदला दूंगा। - रोमियों 12:17-19

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 11:22-30
2 Corinthians 11:22 क्या वे ही इब्रानी हैं? मैं भी हूं: क्या वे ही इस्त्राएली हैं? मैं भी हूँ: क्या वे ही इब्राहीम के वंश के हैं? मैं भी हूं: क्या वे ही मसीह के सेवक हैं? 
2 Corinthians 11:23 (मैं पागल के समान कहता हूं) मैं उन से बढ़कर हूं! अधिक परिश्रम करने में; बार बार कैद होने में; कोड़े खाने में; बार बार मृत्यु के जोखिमों में। 
2 Corinthians 11:24 पांच बार मैं ने यहूदियों के हाथ से उन्‍तालीस उन्‍तालीस कोड़े खाए। 
2 Corinthians 11:25 तीन बार मैं ने बेंतें खाई; एक बार पत्थरवाह किया गया; तीन बार जहाज जिन पर मैं चढ़ा था, टूट गए; एक रात दिन मैं ने समुद्र में काटा। 
2 Corinthians 11:26 मैं बार बार यात्राओं में; नदियों के जोखिमों में; डाकुओं के जोखिमों में; अपने जाति वालों से जोखिमों में; अन्यजातियों से जोखिमों में; नगरों में के जाखिमों में; जंगल के जोखिमों में; समुद्र के जोखिमों में; झूठे भाइयों के बीच जोखिमों में; 
2 Corinthians 11:27 परिश्रम और कष्‍ट में; बार बार जागते रहने में; भूख-प्यास में; बार बार उपवास करने में; जाड़े में; उघाड़े रहने में। 
2 Corinthians 11:28 और और बातों को छोड़कर जिन का वर्णन मैं नहीं करता सब कलीसियाओं की चिन्‍ता प्रति दिन मुझे दबाती है। 
2 Corinthians 11:29 किस की निर्बलता से मैं निर्बल नहीं होता? किस के ठोकर खाने से मेरा जी नहीं दुखता? 
2 Corinthians 11:30 यदि घमण्ड करना अवश्य है, तो मैं अपनी निर्बलता की बातों पर करूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • सभोपदेशक 1-3
  • 2 कुरिन्थियों 11:16-33


शनिवार, 7 सितंबर 2013

निष्पक्ष एवं ईमानदार

   बेसबॉल में उच्चतम स्तर की प्रतिस्पर्धा के 135 वर्षीय इतिहास में केवल 20 ही ऐसे गेंदबाज़ हुए हैं जिन्होंने सिद्धतम खेल को खेला है। जून 2, 2010 को डिट्रौइट टाइगर्स के अर्माण्डा गलारागा इस ख्याति को पाने वाले 21वें खिलाड़ी बन गए होते लेकिन अम्पायर की गलती से वे इस ख्याति को पाने से चूक गए, उनका सपना पूरा ना हो सका। विडियो रीप्ले पर देखने से अम्पायर की यह गलती साफ दिखाई दी। बाद में अम्पायर ने भी अपनी गलती स्वीकार करी और अर्माण्डा गलागारा से इसकी क्षमा भी मांगी, लेकिन खेल के दौरान हुई यह चूक बदली नहीं जा सकी। इस पूरे प्रकरण में अर्माण्डा शांत बने रहे, उस अम्पायर के प्रति अपनी सहानुभूति भी जताई, और उसकी आलोचना भी नहीं करी। अर्माण्डा के इस व्यवहार और किसी प्रकार का कोई पलटा ना लेने की भावना से उसके प्रशंसकों, साथी खिलाड़ियों और खेल पत्रकारों को बहुत अचरज हुआ।

   यदि हम अपने साथ निष्पक्षता की आशा रखते हैं तो हमारा ऐसी परिस्थितियों में निराश होकर क्रोधित और कुंठित हो जाना संभव है। किंतु यदि हम परमेश्वर के वचन बाइबल की शिक्षाओं के अनुसार चलते हैं तो हमारी मनोभावना अपनी नहीं वरन दूसरों की भलाई का ध्यान रखने की होती है। बाइबल की नीतिवचन नामक पुस्तक में दी गई शिक्षाओं के विषय में पुस्तक के आरंभ ही में लिखा है: "इनके द्वारा पढ़ने वाला बुद्धि और शिक्षा प्राप्त करे, और समझ की बातें समझे, और काम करने में प्रवीणता, और धर्म, न्याय और सीधाई की शिक्षा पाए" (नीतिवचन 1:2-3)। बाइबल टीकाकार और शिक्षक ओस्वॉल्ड चैम्बर्स ने दूसरे लोगों के साथ व्यवहार के संबंध में कहा, "अपने लिए सदा ही न्याय पाते रहने के इच्छुक मत रहो, किंतु दूसरों को सदा ही न्याय देने से कभी मत चूको; प्रभु यीशु में होने के कारण, जीवन की किसी भी परिस्थिति को दूसरों के साथ अपने संबंधों को बिगाड़ने मत दो"।

   जब हम अन्याय का सामना करें तो मसीह यीशु के अनुयायी होने के कारण यह हमारा कर्तव्य और विशेषाधिकार है कि हम प्रत्युत्तर में बदला लेने की भावना रखने की बजाए निष्पक्ष और ईमानदार होकर वही करते रहें जो उचित, न्यायसंगत और सही है। - डेविड मैक्कैसलैंड


जीवन सदा ही निष्पक्ष नहीं होता, लेकिन हमारा परमेश्वर सदा ही विश्वासयोग्य और सहायक बना रहता है।

बुराई से बैर और भलाई से प्रीति रखो, और फाटक में न्याय को स्थिर करो; क्या जाने सेनाओं का परमेश्वर यहोवा यूसुफ से बचे हुओं पर अनुग्रह करे। - आमोस 5:15

बाइबल पाठ: नीतिवचन 1:1-9
Proverbs 1:1 दाऊद के पुत्र इस्राएल के राजा सुलैमान के नीतिवचन:
Proverbs 1:2 इनके द्वारा पढ़ने वाला बुद्धि और शिक्षा प्राप्त करे, और समझ की बातें समझे,
Proverbs 1:3 और काम करने में प्रवीणता, और धर्म, न्याय और सीधाई की शिक्षा पाए;
Proverbs 1:4 कि भोलों को चतुराई, और जवान को ज्ञान और विवेक मिले;
Proverbs 1:5 कि बुद्धिमान सुन कर अपनी विद्या बढ़ाए, और समझदार बुद्धि का उपदेश पाए,
Proverbs 1:6 जिस से वे नितिवचन और दृष्टान्त को, और बुद्धिमानों के वचन और उनके रहस्यों को समझें।
Proverbs 1:7 यहोवा का भय मानना बुद्धि का मूल है; बुद्धि और शिक्षा को मूढ़ ही लोग तुच्छ जानते हैं।
Proverbs 1:8 हे मेरे पुत्र, अपने पिता की शिक्षा पर कान लगा, और अपनी माता की शिक्षा को न तज;
Proverbs 1:9 क्योंकि वे मानो तेरे सिर के लिये शोभायमान मुकुट, और तेरे गले के लिये कन्ठ माला होंगी।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 1-2 
  • 1 कुरिन्थियों 16


गुरुवार, 18 जुलाई 2013

विजयी

   भजनकार "अहंकारियों के अपमान" से बहुत आहत और परेशान हो गया था (भजन 123:4); संभवतः आप भी हो गए हों। आपके पड़ौस के, दफतर के, या कक्षा के लोग शायद आपके मसीही विश्वास का उपहास करते हों और मसीह यीशु का अनुकरण करने के आपके निर्णय को ठट्ठों में उड़ाते हों। लाठी और पत्थर तो केवल हमारे शरीरों को ही घाव देते और हमारी हड्डियाँ ही तोड़ते हैं, लेकिन शब्दों के घाव और भी गहरे तथा पीड़ादायक होते हैं, और उन उपहास करने वालों के शब्द-बाणों ने आपको गहरे और पीड़ादायक घाव दे रखे हों।

   ऐसे अहंकारियों के उपहास का प्रत्युत्तर देने के दो तरीके हो सकते हैं; या तो हम उन के समान हो जाएं और ईंट का जवाब पत्थर से देने लगें, अन्यथा उनके इस उपहास को अपने लिए आदर की बात और सही मार्ग पर होने का प्रमाण समझें! परमेश्वर का वचन भी हमें यही, दूसरा विकल्प ही सिखाता है: "फिर यदि मसीह के नाम के लिये तुम्हारी निन्‍दा की जाती है, तो धन्य हो; क्योंकि महिमा का आत्मा, जो परमेश्वर का आत्मा है, तुम पर छाया करता है" (1 पतरस 4:14)। हमारे लिए थोड़े समय के लिए यह निन्दा सहना, अनन्तकाल तक क्लेष सहने से कहीं उत्तम है।

   मसीह यीशु ने अपने चेलों को सिखाया "परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि अपने बैरियों से प्रेम रखो और अपने सताने वालों के लिये प्रार्थना करो" (मत्ती 5:44); इसलिए पहला विकल्प - उपहास का वैसा ही प्रत्युत्तर देना, और "ईंट का जवाब पत्थर से देना" हम मसीही विश्वासीयों के लिए नहीं है। इसके विपरीत परमेश्वर का वचन हमें निर्देश देता है कि "अपने सताने वालों को आशीष दो; आशीष दो श्राप न दो" (रोमियों 12:14)। ऐसा करने से ही हम बुराई पर विजयी होने पाएंगे अन्यथा अपना पलटा आप लेने से तो हम बुराई को और बढ़ावा ही देंगे, उसे मिटाने नहीं पाएंगे - क्या मानव जति के इतिहास में आज तक कभी किसी युद्ध या बदले में किए गए वार ने किसी समस्या का अन्त किया है? जो भी समाधान निकले हैं वे आपसी समझौते और परस्पर एक दूसरे को आदर देने से ही संभव हुए हैं, पलटा लेने से नहीं।

   परमेश्वर हमारी हर परिस्थिति को जानता है और वह हर बात में हमारे लिए भलाई भी उत्पन्न करता है। लोगों के उपहास और निन्दा के द्वारा भी: "हे मेरे भाइयों, जब तुम नाना प्रकार की परीक्षाओं में पड़ो तो इसको पूरे आनन्द की बात समझो, यह जान कर, कि तुम्हारे विश्वास के परखे जाने से धीरज उत्पन्न होता है। पर धीरज को अपना पूरा काम करने दो, कि तुम पूरे और सिद्ध हो जाओ और तुम में किसी बात की घटी न रहे" (याकूब 1:2-4)। जब हमारे प्रभु और उद्धारकर्ता को भी इन बातों का सामना करना पड़ा तो हम जो उसके अनुयायी हैं, इन सब से कैसे बच कर रह सकते हैं? लेकिन जैसे मसीह यीशु के लिए, वैसे ही हम मसीही विश्वासियों के लिए भी ये दुख आदर और आशीष का कारण ही बनेंगे: "सो जब कि मसीह ने शरीर में हो कर दुख उठाया तो तुम भी उस ही मनसा को धारण कर के हथियार बान्‍ध लो क्योंकि जिसने शरीर में दुख उठाया, वह पाप से छूट गया। ताकि भविष्य में अपना शेष शारीरिक जीवन मनुष्यों की अभिलाषाओं के अनुसार नहीं वरन परमेश्वर की इच्छा के अनुसार व्यतीत करो" (1 पतरस 4:1-2)।

   बिना युद्ध भूमि में जाए विजय प्राप्त नहीं होती; लेकिन अपने प्रत्येक संतान से परमेश्वर का यह वायदा भी है कि हमें केवल युद्ध भूमि में जाकर खड़ा ही होना है, युद्ध परमेश्वर का है और विजयी सामर्थ भी वही देगा। इसलिए, "बुराई से न हारो परन्तु भलाई से बुराई का जीत लो" (रोमियों 12:21)। - डेविड रोपर


जब औरों के व्यवहार से आप अपने आप को आहत और अपमानित अनुभव करें तो मसीह यीशु की ओर देखिए।

हमारा जीव सुखी लोगों के ठट्ठों से, और अहंकारियों के अपमान से बहुत ही भर गया है। - भजन 123:4 

बाइबल पाठ: रोमियों 12:9-21
Romans 12:9 प्रेम निष्कपट हो; बुराई से घृणा करो; भलाई में लगे रहो।
Romans 12:10 भाईचारे के प्रेम से एक दूसरे पर दया रखो; परस्पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलो।
Romans 12:11 प्रयत्न करने में आलसी न हो; आत्मिक उन्माद में भरो रहो; प्रभु की सेवा करते रहो।
Romans 12:12 आशा में आनन्दित रहो; क्लेश में स्थिर रहो; प्रार्थना में नित्य लगे रहो।
Romans 12:13 पवित्र लोगों को जो कुछ अवश्य हो, उस में उन की सहायता करो; पहुनाई करने में लगे रहो।
Romans 12:14 अपने सताने वालों को आशीष दो; आशीष दो श्राप न दो।
Romans 12:15 आनन्द करने वालों के साथ आनन्द करो; और रोने वालों के साथ रोओ।
Romans 12:16 आपस में एक सा मन रखो; अभिमानी न हो; परन्तु दीनों के साथ संगति रखो; अपनी दृष्टि में बुद्धिमान न हो।
Romans 12:17 बुराई के बदले किसी से बुराई न करो; जो बातें सब लोगों के निकट भली हैं, उन की चिन्ता किया करो।
Romans 12:18 जहां तक हो सके, तुम अपने भरसक सब मनुष्यों के साथ मेल मिलाप रखो।
Romans 12:19 हे प्रियो अपना पलटा न लेना; परन्तु क्रोध को अवसर दो, क्योंकि लिखा है, पलटा लेना मेरा काम है, प्रभु कहता है मैं ही बदला दूंगा।
Romans 12:20 परन्तु यदि तेरा बैरी भूखा हो तो उसे खाना खिला; यदि प्यासा हो, तो उसे पानी पिला; क्योंकि ऐसा करने से तू उसके सिर पर आग के अंगारों का ढेर लगाएगा।
Romans 12:21 बुराई से न हारो परन्तु भलाई से बुराई का जीत लो।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 20-22 
  • प्रेरितों 21:1-17


शुक्रवार, 17 मई 2013

प्रतिशोध का विकल्प


   एक इतवार को चर्च में सन्देश देते समय, एक पास्टर पर हमला हुआ और उसे मारा-पीटा गया। पास्टर ने प्रत्युत्तर में उस व्यक्ति को कुछ नहीं कहा, बस अपना सन्देश पूरा किया और फिर उस व्यक्ति के लिए प्रार्थना भी करी। बाद में वह हमलावर पकड़ा गया और उसे हिरासत में रखा गया। जब पास्टर को मालूम पड़ा तो वह पुलिस थाने में उससे मिलने भी गया और उसके लिए प्रार्थना कर के भी आया। संसार में दिखने वाले सामान्य व्यवहार की तुलना में, अपने प्रति अनादार तथा अत्याचार का अनूठा प्रत्युत्तर देने का यह एक अनुपम और आदर्श उदाहरण था।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में परमेश्वर के लोगों को अपना बदला आप ना लेने की शिक्षा दी गई है। आत्म-रक्षा वर्जित नहीं है, किन्तु प्रतिशोध वर्जित है; पुराने नियम में भी और नए नियम में भी। बाइबल में लैव्यवस्था की पुस्तक इस्त्राएल, अर्थात परमेश्वर के लोगों को, परमेश्वर द्वारा दिए गए नियमों की पुस्तक है। इस पुस्तक में एक स्थान पर लिखा है: "अपने मन में एक दूसरे के प्रति बैर न रखना; अपने पड़ोसी को अवश्य डांटना; नहीं तो उसके पाप का भार तुझ को उठाना पड़ेगा। पलटा न लेना, और न अपने जाति भाइयों से बैर रखना, परन्तु एक दूसरे से अपने समान प्रेम रखना; मैं यहोवा हूं" (लैव्यवस्था 19:17-18)। एक अन्य स्थान पर परमेश्वर ने इस्त्राएल को निर्देश दिया कि "पलटा लेना और बदला देना मेरा ही काम है..." (व्यवस्थाविवरण 32:35)। नए नियम में भी प्रभु यीशु मसीह और उनके अनुयायियों की शिक्षाएं पलटा ना लेने और अपना न्याय परमेश्वर के हाथ में छोड़ देने के लिए ही थीं (मत्ती 5:38-45; रोमियों 12:17; 1 पतरस 3:9)।

   यद्यपि पुराने नियम में हम "जैसे को तैसा" के सिद्धांत के नियम भी पाते हैं (निर्गमन 21:23-25; व्यवस्थाविवरण 19:21), लेकिन ये नियम केवल इसलिए थे जिससे प्रत्येक आताताई उचित दण्ड का भागी हो और सब को सही न्याय मिले। ये नियम व्यक्तिगत रीति से बदला लेने के लिए नहीं थे; इन नियमों का उपयोग समाज के निर्धारित न्याय अधिकारीयों को ही करना था। उचित न्याय मिलना सब का अधिकार था, लेकिन न्याय करना या तो परमेश्वर या फिर परमेश्वर के निर्देषों के अनुसार नियुक्त किए गए न्यायियों का ही कार्य था। व्यक्तिगत प्रतिशोध की कोई अनुमति नहीं थी।

   आज हम मसीही विश्वासियों को भी अपने परमेश्वर पिता द्वारा दिए गए प्रेमपूर्ण व्यवहार के निर्देषों को अपने जीवन से जी कर दिखाना है। बजाए अत्याचार या अपमान के बदले में वही कड़ुवाहट वापस लौटाने के, अपने अन्दर बसने वाले परमेश्वर के पवित्र आत्मा की सामर्थ से तथा मसीह यीशु के नाम को आदर देने वाले भले विकलपों को अपने प्रत्युत्तर और व्यवहार में प्रदर्शित करना है। जहाँ तक बन पड़े, सब के साथ शान्ति से रहें (रोमियों 12:18) और आपसी विवादों को सुलझाने के लिए एक आत्मिक मध्यस्थ की सहायता लें तथा उसके आधीन रहें (1 कुरिन्थियों 6:1-6), और अपने न्याय को निर्धारित न्याय अधिकारीयों तथा सबसे बढ़कर उस सच्चे और निष्पक्ष न्यायी, अपने परमेश्वर पिता के हाथों में छोड़ दें। - मारविन विलियम्स


अन्तिम न्याय सच्चे और निष्पक्ष न्यायी परमेश्वर के हाथों में ही है।

हे प्रियो अपना पलटा न लेना; परन्तु क्रोध को अवसर दो, क्योंकि लिखा है, पलटा लेना मेरा काम है, प्रभु कहता है मैं ही बदला दूंगा। - रोमियों 12:19

बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण 19:16-21; मत्ती 5:38-45
Deuteronomy 19:16 यदि कोई झूठी साक्षी देने वाला किसी के विरुद्ध यहोवा से फिर जाने की साक्षी देने को खड़ा हो,
Deuteronomy 19:17 तो वे दोनों मनुष्य, जिनके बीच ऐसा मुकद्दमा उठा हो, यहोवा के सम्मुख, अर्थात उन दिनों के याजकों और न्यायियों के साम्हने खड़े किए जाएं;
Deuteronomy 19:18 तब न्यायी भली भांति पूछपाछ करें, और यदि यह निर्णय पाए कि वह झूठा साक्षी है, और अपने भाई के विरुद्ध झूठी साक्षी दी है
Deuteronomy 19:19 तो अपने भाई की जैसी भी हानि करवाने की युक्ति उसने की हो वैसी ही तुम भी उसकी करना; इसी रीति से अपने बीच में से ऐसी बुराई को दूर करना।
Deuteronomy 19:20 और दूसरे लोग सुनकर डरेंगे, और आगे को तेरे बीच फिर ऐसा बुरा काम नहीं करेंगे।
Deuteronomy 19:21 और तू बिलकुल तरस न खाना; प्राण की सन्ती प्राण का, आंख की सन्ती आंख का, दांत की सन्ती दांत का, हाथ की सन्ती हाथ का, पांव की सन्ती पांव का दण्ड देना।
Matthew 5:38 तुम सुन चुके हो, कि कहा गया था, कि आंख के बदले आंख, और दांत के बदले दांत।
Matthew 5:39 परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि बुरे का सामना न करना; परन्तु जो कोई तेरे दाहिने गाल पर थप्पड़ मारे, उस की ओर दूसरा भी फेर दे।
Matthew 5:40 और यदि कोई तुझ पर नालिश कर के तेरा कुरता लेना चाहे, तो उसे दोहर भी ले लेने दे।
Matthew 5:41 और जो कोई तुझे कोस भर बेगार में ले जाए तो उसके साथ दो कोस चला जा।
Matthew 5:42 जो कोई तुझ से मांगे, उसे दे; और जो तुझ से उधार लेना चाहे, उस से मुंह न मोड़।
Matthew 5:43 तुम सुन चुके हो, कि कहा गया था; कि अपने पड़ोसी से प्रेम रखना, और अपने बैरी से बैर।
Matthew 5:44 परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि अपने बैरियों से प्रेम रखो और अपने सताने वालों के लिये प्रार्थना करो।
Matthew 5:45 जिस से तुम अपने स्‍वर्गीय पिता की सन्तान ठहरोगे क्योंकि वह भलों और बुरों दोनों पर अपना सूर्य उदय करता है, और धर्मियों और अधर्मियों दोनों पर मेंह बरसाता है।

एक साल में बाइबल: 

  • 1 इतिहास 1-3 
  • यूहन्ना 5:25-47