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शनिवार, 9 फ़रवरी 2019

सहायक



      जून 1962 में फ्लोरिडा की एक जेल की कोठरी से, क्लैरेंस अर्ल गिडियन ने अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय को दरख्वास्त लिखी कि उसके दण्ड पर पुनःविचार किया जाए क्योंकि उसने अपराध किया ही नहीं था। उसने यह भी लिखा कि उसके पास उसका मुकद्दमा लड़ने के लिए वकील करने के लिए पैसे नहीं हैं।

      एक वर्ष पश्चात, ऐतिहासिक गिडियन बनाम वेनराईट मुकद्दमे में, सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि जो लोग अपने बचाव के लिए वकील कर सकने की आर्थिक स्थिति में नहीं हैं उन्हें सरकार द्वारा वकील दिया जाना चाहिए। इस निर्णय के साथ, और सरकार द्वारा प्रदान किए गए वकील की सहायता से, क्लैरेंस अर्ल गिडियन के मुकद्दमे को पुनः लड़ा गया और वह बरी हो गया।

      परन्तु यदि हम निर्दोष नहीं हों तो क्या? परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने लिखा कि सभी मनुष्य पाप के दोषी हैं; पाप से निर्दोष कोई भी नहीं है। परन्तु स्वर्ग का न्यायालय हमारे लिए एक सहायक प्रदान करता है, जो परमेश्वर द्वारा चुकाई गई कीमत पर हमारी आत्मा को बचाने के लिए कार्य करता है (1 यूहन्ना 2:2)। हमारे स्वर्गीय पिता परमेश्वर की ओर से प्रभु यीशु हमारी सहायता के लिए आता है और एक ऐसी अद्भुत स्वतंत्रता का प्रस्ताव देता है जो पृथ्वी पर कहीं उपलब्ध नहीं है – हृदय और मन की स्वतंत्रता।

      चाहे हम हमारे प्रति, या, हमारे द्वारा किए गए अन्यायों के कारण दुःख उठा रहे हों, प्रभु यीशु मसीह हम सभी की सहायता करने को तैयार है। सर्वोच्च अधिकार के अन्तर्गत वह दया, क्षमा और शान्ति के प्रत्येक निवेदन का उत्तर देता है।

      हमारा सहायक प्रभु यीशु खोई हुई आशा, भय, या पछतावे की कैद को अपनी उपस्थिति तथा आनन्द का स्थान बना सकता है। - मार्ट डीहान


जो हमारे स्थान पर बलिदान हुआ था, वही अब हमारा सहायक बनकर जीवित है।

फिर कौन है जो दण्ड की आज्ञा देगा? मसीह वह है जो मर गया वरन मुर्दों में से जी भी उठा, और परमेश्वर की दाहिनी ओर है, और हमारे लिये निवेदन भी करता है। - रोमियों 8:34

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 1:5-2:2
1 John 1:5 जो समाचार हम ने उस से सुना, और तुम्हें सुनाते हैं, वह यह है; कि परमेश्वर ज्योति है: और उस में कुछ भी अन्धकार नहीं।
1 John 1:6 यदि हम कहें, कि उसके साथ हमारी सहभागिता है, और फिर अन्धकार में चलें, तो हम झूठे हैं: और सत्य पर नहीं चलते।
1 John 1:7 पर यदि जैसा वह ज्योति में है, वैसे ही हम भी ज्योति में चलें, तो एक दूसरे से सहभागिता रखते हैं; और उसके पुत्र यीशु का लोहू हमें सब पापों से शुद्ध करता है।
1 John 1:8 यदि हम कहें, कि हम में कुछ भी पाप नहीं, तो अपने आप को धोखा देते हैं: और हम में सत्य नहीं।
1 John 1:9 यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है।
1 John 1:10 यदि कहें कि हम ने पाप नहीं किया, तो उसे झूठा ठहराते हैं, और उसका वचन हम में नहीं है।
1 John 2:1 हे मेरे बालकों, मैं ये बातें तुम्हें इसलिये लिखता हूं, कि तुम पाप न करो; और यदि कोई पाप करे, तो पिता के पास हमारा एक सहायक है, अर्थात धार्मिक यीशु मसीह।
1 John 2:2 और वही हमारे पापों का प्रायश्‍चित्त है: और केवल हमारे ही नहीं, वरन सारे जगत के पापों का भी।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 6-7
  • मत्ती 25:1-30



बुधवार, 26 फ़रवरी 2014

अधिवक्ता


   स्टीफन विन्सेंट बेनेट द्वारा लिखित एक लघु कथा, The Devil and Daniel Webster, में जाबेज़ स्टोन नाम का एक किसान इतनी दयनीय दशा में आ जाता है कि अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए वह अपनी आत्मा शैतान के हाथों में बेच देता है। अन्ततः शैतान जाबेज़ से ऋण वसूलने के लिए आता है। अपने आप को बचाने के लिए जाबेज़ एक सुप्रसिद्ध अधिवक्ता, डैनियल वेब्स्टर की सहायाता लेता है। वह अधिवक्ता अपने कुशल तर्क-वितर्क से जाबेज़ के खिलाफ शैतान के दावे को निराधार प्रमाणित कर देता है और जाबेज़ विनाश से बच जाता है।

   यह तो केवल एक कहानी मात्र ही है, लेकिन परमेश्वर के वचन बाइबल में एक ऐसा दर्शन दर्ज है जहाँ शैतान एक विश्वासी जन पर परमेश्वर के सामने दोष लगाता है। यहोशु, जो एक महापुरोहित है, परमेश्वर के सामने खड़ा है, उसके वस्त्र मैले हैं - जो उसके व्यक्तिगत पाप तथा दोष की दशा को दिखाता है; निकट ही शैतान खड़ा हुआ उस पर दोष लगा रहा है। परन्तु परमेश्वर का दूत शैतान को डाँटता है और यहोशु से कहता है, "तब दूत ने उन से जो साम्हने खड़े थे कहा, इसके ये मैले वस्त्र उतारो। फिर उसने उस से कहा, देख, मैं ने तेरा अधर्म दूर किया है, और मैं तुझे सुन्दर वस्त्र पहिना देता हूं" (ज़कर्याह 3:4)।

   केवल परमेश्वर ही है जो एक पापी को भी अपने समक्ष ग्रहणयोग्य बना सकता है। परमेश्वर का वचन बाइबल हमें आश्वासन देती है कि "यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है" (1यूहन्ना 1:9)।

   क्या आप अपने आप को अपनी पापमय दशा के कारण परमेश्वर की उपस्थिति में आने के अयोग्य पाते हैं? स्मरण करें कि प्रभु यीशु ने संसार के सभी लोगों के सभी पापों के दण्ड को अपने ऊपर ले कर सब को पापों से क्षमा प्राप्त करने का मार्ग बना कर दे दिया है। सच्चे मन से निकली एक विश्वास और पश्चाताप की प्रार्थना आपके सभी पापों को क्षमा कर देगी, आपको अनन्त जीवन और आशीषों का वारिस और परमेश्वर की सन्तान बना देगी, परमेश्वर के सामने कभी भी किसी भी बात के लिए प्रस्तुत होने का मार्ग आपके लिए खोल देगी। यदि आप पाप में भी गिरें तो प्रभु यीशु आपका अधिवक्ता बनकर आपकी सहायता करेगा (1 यूहन्ना 2:1) और शैतान के किसी दोषारोपण को आपके विरुद्ध सफल नहीं होने देगा।

   यदि अभी तक आपने प्रभु यीशु को अपने उद्धारकर्ता के रूप में ग्रहण नहीं किया है तो यही समय है, अभी, इसी समय कर लें और वह आपका सदा का अधिवक्ता बनकर आपको नाश से बचाए रखेगा। - डेनिस फिशर


धर्मी ठहराए जाने का अर्थ है कि परमेश्वर ने अपने महान अनुग्रह में होकर हमारे पाप के दोष मिटा कर प्रभु यीशु की धार्मिकता हमें सेंत-मेंत भेंट में दे दी है।

हे मेरे बालकों, मैं ये बातें तुम्हें इसलिये लिखता हूं, कि तुम पाप न करो; और यदि कोई पाप करे, तो पिता के पास हमारा एक सहायक है, अर्थात धार्मिक यीशु मसीह। - 1 यूहन्ना 2:1

बाइबल पाठ: ज़कर्याह 3:1-5
Zechariah 3:1 फिर उसने यहोशू महायाजक को यहोवा के दूत के साम्हने खड़ा हुआ मुझे दिखाया, और शैतान उसकी दाहिनी ओर उसका विरोध करने को खड़ा था। 
Zechariah 3:2 तब यहोवा ने शैतान से कहा, हे शैतान यहोवा तुझ को घुड़के! यहोवा जो यरूशलेम को अपना लेता है, वही तुझे घुड़के! क्या यह आग से निकाली हुई लुकटी सी नहीं है? 
Zechariah 3:3 उस समय यहोशू तो दूत के साम्हने मैला वस्त्र पहिने हुए खड़ा था। 
Zechariah 3:4 तब दूत ने उन से जो साम्हने खड़े थे कहा, इसके ये मैले वस्त्र उतारो। फिर उसने उस से कहा, देख, मैं ने तेरा अधर्म दूर किया है, और मैं तुझे सुन्दर वस्त्र पहिना देता हूं। 
Zechariah 3:5 तब मैं ने कहा, इसके सिर पर एक शुद्ध पगड़ी रखी जाए। और उन्होंने उसके सिर पर याजक के योग्य शुद्ध पगड़ी रखी, और उसको वस्त्र पहिनाए; उस समय यहोवा का दूत पास खड़ा रहा।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 32-34


गुरुवार, 11 नवंबर 2010

निस्वार्थ वीरता का प्रोत्साहन

अमेरिका के एक अखबार Chicago Tribune में एक रिपोर्ट छपी जिसमें बताया गया कि बहुत से ऐसे अमेरिकी नागरिक है, पादरियों से लेकर वकीलों और कंपनियों के उच्च संचालकों तक जो ऐसे शौर्य के कार्यों के लिये पदकों का दावा कर रहे हैं जो उन्होंने कभी किये ही नहीं! युद्ध के रिकार्डों में हेरा-फेरी और पराक्रम के झूठे दावे हमारी कल्पना से कहीं अधिक प्रचलित हैं। एक व्यक्ति, जिसने जल सेना के शौर्य पदक का झूठा दावा किया, बाद में इस बात के लिये शर्मिंदा हुआ, और कहा कि वास्तविक शूरवीर कभी अपने कार्यों का स्वयं बखान नहीं करते।

वीरता की निशानी होती है दूसरों की भलाई के लिये निस्वार्थ रीति से अपनी जान भी जोखिम में डाल देने की पृवर्ति।

फिलिप्पियों को लिखी अपनी पत्री में पौलुस अपने दो ऐसे साथियों की, उनके विश्वास के सच्चे नायक होने के लिये सराहना करता है, जो समाज में बहुत ही साधारण सा जीवन और स्थान रखते थे किंतु विश्वास में उनकी कर्मठता ने उन्हें परमेश्वर के वचन में सदा काल के लिये उदाहरण बना दिया और असाधारण स्थान दे दिया। तिमुथियुस को, उसके निस्वार्थ और परखे हुआ चरित्र के कारण, पौलुस अपने ऐसे पुत्र की संज्ञा देता है जिसने सुसमाचार प्रचार में उसकी सेवा करी (फिलिप्पियों २:२२)। पौलुस एपाफ्रुदितुस की भी सराहना करता है क्योंकि मसीह के कार्य के लिये उसने अपनी जान जोखिम में डाली, और उसे अपना भाई, सहकर्मी और संगी योद्धा करके संबोधित करता है (फिलिप्पियों २:२५, ३०)। फिलिप्पियों के विश्वासियों को पौलुस ने समझाया कि ऐसे लोगों का बहुत आदर करें (फिलिप्पियों २:२९)।

अपने सहविश्वासियों का, परमेश्वर के प्रति उनकी निस्वार्थ सेवा के लिये आदर करना बाइबल की शिक्षा है। इसका तात्पर्य ऐसे वीरों की पूजा करना नहीं है, वरन एक भला जीवन जीने के लिये उनके प्रति आदर का भाव रखना है।

आज हमारा यह कर्तव्य है कि हम परमेश्वर के लिये निस्वार्थ कार्य करने वालों और उसके नाम की खातिर दूसरों की सहयतार्थ अपना जीवन बिताने वालों का आदर करें और अपने शब्दों द्वारा अथवा किसी ठोस कार्य के द्वारा उन्हें प्रोत्साहित करें। - डेविड मैककैसलैंड


मसीह में विश्वास द्वारा साधारण मनुष्य भी असाधारण नायक बन जाते हैं।

इसलिये तुम प्रभु में उस से बहुत आनन्‍द के साथ भेंट करना, और ऐसों का आदर किया करना। - फिलिप्पियों २:२९


बाइबल पाठ: फिलिप्पियों २:१९-३०

मुझे प्रभु यीशु में आशा है, कि मैं तीमुथियुस को तुम्हारे पास तुरन्‍त भेजूंगा, ताकि तुम्हारी दशा सुन कर मुझे शान्‍ति मिले।
क्‍योंकि मेरे पास ऐसे स्‍वाभाव का कोई नहीं, जो शुद्ध मन से तुम्हारी चिन्‍ता करे।
क्‍योंकि सब अपने स्‍वार्थ की खोज में रहते हैं, न कि यीशु मसीह की।
पर उसको तो तुम ने परखा और जान भी लिया है, कि जैसा पुत्र पिता के साथ करता है, वैसा ही उस ने सुसमाचार के फैलाने में मेरे साथ परिश्रम किया।
सो मुझे आशा है, कि ज्योंही मुझे जान पड़ेगा कि मेरी क्‍या दशा होगी, त्योंही मैं उसे तुरन्‍त भेज दूंगा।
और मुझे प्रभु में भरोसा है, कि मैं आप भी शीघ्र आऊंगा।
पर मैं ने एपाफ्रदीतुस को जो मेरा भाई, और सहकर्मी और संगी योद्धा और तुम्हारा दूत, और आवश्यक बातों में मेरी सेवा टहल करने वाला है, तुम्हारे पास भेजना अवश्य समझा।
क्‍योंकि उसका मन तुम सब में लगा हुआ था, इस कारण वह व्याकुल रहता था क्‍योंकि तुम ने उस की बीमारी का हाल सुना था।
और निश्‍चय वह बीमार तो हो गया था, यहां तक कि मरने पर था, परन्‍तु परमेश्वर ने उस पर दया की, और केवल उस ही पर नहीं, पर मुझ पर भी, कि मुझे शोक पर शोक न हो।
इसलिये मैं ने उसे भेजने का और भी यत्‍न किया कि तुम उस से फिर भेंट कर के आनन्‍दित हो जाओ और मेरा शोक घट जाए।
इसलिये तुम प्रभु में उस से बहुत आनन्‍द के साथ भेंट करना, और ऐसों का आदर किया करना।
क्‍योंकि वही मसीह के काम के लिये अपने प्राणों पर जोखिम उठा कर मरने के निकट हो गया था, ताकि जो घटी तुम्हारी ओर से मेरी सेवा में हुई, उसे पूरा करे।

एक साल में बाइबल:
  • यर्मियाह ५०
  • इब्रानियों ८

रविवार, 10 अक्टूबर 2010

सत्य पर कायम रहना

अमेरिका में बीसवीं सदी के आरंभ में प्रचलित रंगभेद की पृष्ठभूमि पर लिखित उपन्यास "To Kill a Mockingbird" का एक पात्र, एटिकस फिन्च, १९३० के दशक में दक्षिण अमेरिका के एक छोटे शहर में एक प्रतिष्ठित वकील है। उसे एक मुकद्दमा लड़ना होता है जिसमें एक काले रंगे वाले इमान्दार और सीधे साधे व्यक्ति के विरुद्ध दो कुटिल और बेईमान गोरे खड़े होते हैं। एटिकस जानता है कि उसे पंचों से बहुत पक्षपात का सामना करना पड़ेगा, लेकिन उसका विवेक उसे बाध्य करता है कि कठोर प्रतिरोध के बावजूद वह सत्य को निडरता से साथ प्रस्तुत करे और सत्य पर कायम रहे।

बाइबल के पुराने नियम में भी परमेश्वर ने ढीट और कठोर मन वाली अपनी प्रजा के पास अपने नबी भेजे ताकि वे उन्हें सत्य को बताएं "तौभी उस ने उनके पास नबी भेजे कि उनको यहोवा के पास फेर लाएं, और इन्होंने उन्हें चिता दिया, परन्तु उन्होंने कान न लगाया" (२ इतिहास २४:१९)। सत्य के अपने सन्देश के कारण उन नबीओं को बहुत सताव का सामना करना पड़ा और कई मारे भी गए (इब्रानियों ११:३२-३८)।

प्रभु यीशु की पृथ्वी की सेवकाई के समय भी उसे सत्य पर कायम रहने और सत्य का प्रचार करने के कारण लोगों के क्रोध और बैर का सामना करना पड़ा "ये बातें सुनते ही जितने आराधनालय में थे, सब क्रोध से भर गए। और उठकर उसे नगर से बाहर निकाला, और जिस पहाड़ पर उन का नगर बसा हुआ या, उस की चोटी पर ले चले, कि उसे वहां से नीचे गिरा दें। पर वह उन के बीच में से निकलकर चला गया" (लूका ४:२८-३०)। परन्तु परमेश्वर ने अपनी सार्वभौमिकता में, संसार के हाकिमों द्वारा घोर अन्याय से सत्य पर कायम प्रभु यीशु को क्रूस की मृत्यु दिये जाने को ही समस्त संसार के लिये पापों से मुक्ति पाने और उद्धार का मार्ग बना दिया!

अब, इस संसार में, जीवित प्रभु के प्रतिनिधी होने के कारण उसके अनुयाइयों को यह ज़िम्मेवारी सौंपी गई है कि वे संसार को प्रभु के मार्ग का प्रचार करें तथा न्याय, ईमानदारी और आपसी मेल मिलाप को बढ़ावा दें (मती २८:१८-२०, मीका ६:८, २ कुरिन्थियों ५:१८-२१)। ऐसा करने के लिये उन्हें कई दफा कठोर प्रतिरोध के समक्ष सत्य पर कायम रहना पड़ेगा, और उसकी कीमत चुकानी पड़ेगी (२ तिमुथियुस ३:१२)। सत्य पर कायम रहना और सत्य का प्रचार करना, प्रत्येक मसीही विश्वासी को दी गई ज़िम्मेवारी है, जिसे उन्हें तब तक निभाना है जब तक प्रभु दोबारा आकर सब कुछ ठीक ठाक न कर दे (प्रकाशितवाक्य २०:११-१५)। - डेनिस फिशर


सत्य को दबाकर या छुपाकर संसार में स्थान बनाने की जाने की बजाए, सत्य पर बने रहने के लिये संसार द्वारा तिरिस्कृत होना कहीं बेहतर है।

तौभी उस ने उनके पास नबी भेजे कि उनको यहोवा के पास फेर लाएं, और इन्होंने उन्हें चिता दिया, परन्तु उन्होंने कान न लगाया। - २ इतिहास २४:१९


बाइबल पाठ: २ इतिहास २४:१५-२२

परन्तु यहोयादा बूढ़ा हो गया और दीर्घायु होकर मर गया। जब वह मर गया तब एक सौ तीस वर्ष का था।
और दाऊदपुर में राजाओं के बीच उसको मिट्टी दी गई, क्योंकि उस ने इस्राएल में और परमेश्वर के और उसके भवन के विषय में भला किया था।
यहोयादा के मरने के बाद यहूदा के हाकिमों ने राजा के पास जाकर उसे दणडवत की, और राजा ने उनकी मानी।
तब वे अपने पितरों के परमेश्वर यहोवा का भवन छोड़कर अशेरों और मूरतों की उपासना करने लगे। सो उनके ऐसे दोषी होने के कारण परमेश्वर का क्रोध यहूदा और यरूशलेम पर भड़का।
तौभी उस ने उनके पास नबी भेजे कि उनको यहोवा के पास फेर लाएं, और इन्होंने उन्हें चिता दिया, परन्तु उन्होंने कान न लगाया।
और परमेश्वर का आत्मा यहोयादा याजक के पुत्र जकर्याह में समा गया, और वह ऊंचे स्थान पर खड़ा होकर लोगों से कहने लगा, परमेश्वर यों कहता है, कि तुम यहोवा की आज्ञाओं को क्यों टालते हो? ऐसा करके तुम भाग्यवान नहीं हो सकते, देखो, तुम ने तो यहोवा को त्याग दिया है, इस कारण उस ने भी तुम को त्याग दिया।
तब लोगों ने उस से द्रोह की गोष्ठी करके, राजा की आज्ञा से यहोवा के भवन के आंगन में उसको पत्थरवाह किया।
यों राजा योआश ने वह प्रीति भूलकर जो यहोयादा ने उस से की थी, उसके पुत्र को घात किया। और मरते समय उस ने कहा यहोवा इस पर दृष्टि करके इसका लेखा ले।

एक साल में बाइबल:
  • यशायाह ३४-३६
  • कुलुस्सियों २