ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

वफादार लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
वफादार लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

मंगलवार, 18 अक्टूबर 2016

सच्चा मित्र


   शेन नामक उपन्यास में, अमेरिका के सीमान्त इलाके के एक किसान, जो स्टैरेट और उसके घर आए एक रहस्यमय अनजान व्यक्ति शेन के बीच में मित्रता हो जाती है। इस मित्रता का आरंभ होता है जब वे दोनों मिलकर एक विशाल पेड़ के ठूँठ और जड़ को जो स्टैरेट के फार्म की धरती से निकालते हैं। फिर जब जो स्टैरेट शेन को एक झगड़े में से बचाता है, और जब शेन जो स्टैरेट को उसके फार्म की रक्षा करना तथा बेहतर बनाने के तरीके सिखाता है तो यह मित्रता और गहरी हो जाती है। दोनों व्यक्ति परस्पर आदर और वफादारी की भावना रखने लगते हैं। उनका यह व्यवहार परमेश्वर के वचन बाइबल में कही गई बात, "एक से दो अच्छे हैं, क्योंकि उनके परिश्रम का अच्छा फल मिलता है। क्योंकि यदि उन में से एक गिरे, तो दूसरा उसको उठाएगा; परन्तु हाय उस पर जो अकेला हो कर गिरे और उसका कोई उठाने वाला न हो" (सभोपदेशक 4:9-10) की पुष्टि है।

   बाइबल के दो अन्य पात्रों, दाऊद और राजा शाऊल के पुत्र योनातान ने भी इसी बात को व्यावाहरिक जीवन से दिखाया। वे दोनों मित्र थे, और परिस्थितियों ने उनकी मित्रता को जाँचा; दाऊद को शक था कि राजा शाऊल उसे मरवाना चाहता है, लेकिन योनातान इस बात को नहीं मानता था। तब उन्होंने निर्णय किया कि दाऊद जाकर छुप जाएगा और योनातान अपने पिता राजा शाऊल से इस बारे में बात करेगा और सच्चाई को जानने का प्रयास करेगा। जब योनातान ने जाना कि दाऊद का शक सही था और वास्तव में उसका पिता दाऊद को मारना चाहता था, तो उसने यह बात जाकर दाऊद को बता दी, उसे सुरक्षित निकल जाने के लिए भी कहा और उसके गले लगकर रोया भी तथा योनातान ने दाऊद को जाते-जाते आशीष भी दी।

   यदि आपने उसके पापों की क्षमा, समर्पण तथा उद्धार के निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है तो प्रभु यीशु मसीह में आपके पास एक सच्चा मित्र है जो सदा आपके साथ वफादार बना रहेगा; यदि आप ठोकर खाएं तो आपको संभालेगा, सदा आपका सहायक रहेगा, आपके लिए सदा उपलब्ध रहेगा। उसने अपने प्रेम और मित्रता की वफादारी का प्रमाण आपके लिए कलवरी के क्रूस पर अपने प्राण बलिदान करने के द्वारा दिया है। प्रभु यीशु की मित्रता स्वीकार करना कभी भी किसी भी रीति से हानि का सौदा नहीं है, वरन सभी के लिए अनन्तकालीन लाभ और आनन्द का मार्ग है। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


प्रभु यीशु से बढ़कर सच्चा और वफादार मित्र कोई और नहीं है।

इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे। जो कुछ मैं तुम्हें आज्ञा देता हूं, यदि उसे करो, तो तुम मेरे मित्र हो। - यूहन्ना 15:13-14

बाइबल पाठ: 1 शमूएल 20:32-42
1 Samuel 20:32 योनातन ने अपने पिता शाऊल को उत्तर देकर उस से कहा, वह क्यों मारा जाए? उसने क्या किया है? 
1 Samuel 20:33 तब शाऊल ने उसको मारने के लिये उस पर भाला चलाया; इससे योनातन ने जान लिया, कि मेरे पिता ने दाऊद को मार डालना ठान लिया है। 
1 Samuel 20:34 तब योनातन क्रोध से जलता हुआ मेज पर से उठ गया, और महीने के दूसरे दिन को भोजन न किया, क्योंकि वह बहुत खेदित था, इसलिये कि उसके पिता ने दाऊद का अनादर किया था।
1 Samuel 20:35 बिहान को योनातन एक छोटा लड़का संग लिये हुए मैदान में दाऊद के साथ ठहराए हुए स्थान को गया। 
1 Samuel 20:36 तब उसने अपने छोकरे से कहा, दौड़कर जो जो तीर मैं चलाऊं उन्हें ढूंढ़ ले आ। छोकरा दौड़ता ही था, कि उसने एक तीर उसके परे चलाया। 
1 Samuel 20:37 जब छोकरा योनातन के चलाए तीर के स्थान पर पहुंचा, तब योनातन ने उसके पीछे से पुकार के कहा, तीर तो तेरी परली ओर है। 
1 Samuel 20:38 फिर योनातन ने छोकरे के पीछे से पुकारकर कहा, बड़ी फुर्ती कर, ठहर मत। और योनातन ने छोकरे के पीछे से पुकार के कहा, बड़ी फुर्ती कर, ठहर मत! और योनातन का छोकरा तीरों को बटोर के अपने स्वामी के पास ल आया। 
1 Samuel 20:39 इसका भेद छोकरा तो कुछ न जानता था; केवल योनातन और दाऊद इस बात को जानते थे। 
1 Samuel 20:40 और योनातन ने अपने हथियार अपने छोकरे को देकर कहा, जा, इन्हें नगर को पहुंचा। 
1 Samuel 20:41 ज्योंही छोकरा चला गया, त्योंही दाऊद दक्खिन दिशा की अलंग से निकला, और भूमि पर औंधे मुंह गिर के तीन बार दण्डवत की; तब उन्होंने एक दूसरे को चूमा, और एक दूसरे के साथ रोए, परन्तु दाऊद को रोना अधिक था। 
1 Samuel 20:42 तब योनातन ने दाऊद से कहा, कुशल से चला जा; क्योंकि हम दोनों ने एक दूसरे से यह कहके यहोवा के नाम की शपथ खाई है, कि यहोवा मेरे और तेरे मध्य, और मेरे और तेरे वंश के मध्य में सदा रहे। तब वह उठ कर चला गया; और योनातन नगर में गया। 

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 53-55
  • 2 थिस्सलुनीकियों 1


गुरुवार, 6 अक्टूबर 2016

सहायक


   मेरे पिता का बचपन एक फार्म पर बीता, जहाँ उन्हें सौंपा गया कार्य था एकत्रित करे गए बचे हुए भोजन और झूठन को सूअरों को डालना। उन्हें यह कार्य बहुत नापसन्द था क्योंकि उनके बाड़े में झूठन लिए हुए घुसते ही सारे सूअर वह खाना खाने के लिए उनकी ओर आते और धक्का-मुक्की करने लगते जिससे मेरे पिता के उनके बीच में गिर जाने का खतरा रहता था। उनके लिए यह कार्य असंभव हो जाता यदि उनके साथ सूअरों के बाड़े में जाने के लिए एक वफादार सहायक ना होता; उनकी सहायक जर्मन शेपर्ड जाति की एक बड़ी सी कुतिया थी जो उनके साथ जाया करती थी और अपने आप को सूअरों और पिताजी के बीच में बनाए रखती थी, जब तक की पिताजी अपना कार्य पूरा करके बाड़े और खतरे से बाहर नहीं आ जाते थे।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में परमेश्वर के एक भविश्यद्वक्ता, यिर्मयाह को भी इस्त्राएलियों को परमेश्वर का वचन पहुंचाने का कठिन कार्य सौंपा गया था। इस ज़िम्मेदारी को पूरा करने के लिए यिर्मयाह को शारीरिक यात्नाएं, निन्दा और बुराई, कैद होना और सबसे अलग किए जा के ’कालापनी’ की सज़ा सहना पड़ा। यिर्मयाह को गहरी निराशा के साथ संघर्ष भी करना पड़ा (यिर्मयाह 20:7), लेकिन यिर्मयाह ने यह भी माना कि इस सारे संघर्ष में परमेश्वर उसका सहायक बनकर सदा साथ बना रहा (यिर्मयाह 20:11), जैसा कि परमेश्वर ने यह ज़िम्मेदारी देते समय उससे वायदा किया था: "वे तुझ से लड़ेंगे तो सही, परन्तु तुझ पर प्रबल न होंगे, क्योंकि बचाने के लिये मैं तेरे साथ हूँ, यहोवा की यही वाणी है" (यिर्मयाह 1:19)।

   परमेश्वर अपने वायदे पर अडिग रहा और यिर्मयाह को कभी अकेला या निःसहाय नहीं होने दिया। परमेश्वर का हम मसीही विश्वासियों से भी ऐसा ही वायदा है कि वह हमें कभी नहीं छोड़ेगा, कभी नहीं त्यागेगा (इब्रनियों 13:5)। हमारी सहायता के लिए परमेश्वर ने अपने पवित्र आत्मा को हमें दिया है जो प्रत्येक मसीही विश्वासी के अन्दर निवास करता है: "और मैं पिता से बिनती करूंगा, और वह तुम्हें एक और सहायक देगा, कि वह सर्वदा तुम्हारे साथ रहे। अर्थात सत्य का आत्मा, जिसे संसार ग्रहण नहीं कर सकता, क्योंकि वह न उसे देखता है और न उसे जानता है: तुम उसे जानते हो, क्योंकि वह तुम्हारे साथ रहता है, और वह तुम में होगा" (यूहन्ना 14:16-17)। हमारा यह सहायक हमें आशा देता है (रोमियों 15:13); हमें आत्मिक सत्यों की ओर ले जाता है (यूहन्ना 16:13) और हमारे हृदयों में परमेश्वर का प्रेम उंडेलता है (रोमियों 5:5)।

   हम विश्वास रख सकते हैं कि परमेश्वर हर कठिनाई में हमारी सहायता करता है जिससे कि हम उस परिस्थिति को झेल सकें और यिर्मयाह के समान ही हम भी कह सकें, "परन्तु यहोवा मेरे साथ है, वह भयंकर वीर के समान है; इस कारण मेरे सताने वाले प्रबल न होंगे, वे ठोकर खाकर गिरेंगे। वे बुद्धि से काम नहीं करते, इसलिये उन्हें बहुत लज्जित होना पड़ेगा। उनका अपमान सदैव बना रहेगा और कभी भूला न जाएगा" (यिर्मयाह 20:11)। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


यहां नीचे इस धरती पर हमारी सबसे बड़ी आशा ऊपर हमारे परमेश्वर पिता से है।

परन्तु जब वह अर्थात सत्य का आत्मा आएगा, तो तुम्हें सब सत्य का मार्ग बताएगा, क्योंकि वह अपनी ओर से न कहेगा, परन्तु जो कुछ सुनेगा, वही कहेगा, और आनेवाली बातें तुम्हें बताएगा। - यूहन्ना 16:13 

बाइबल पाठ: यिर्मयाह 20:7-13
Jeremiah 20:7 हे यहोवा, तू ने मुझे धोखा दिया, और मैं ने धोखा खाया; तू मुझ से बलवन्त है, इस कारण तू मुझ पर प्रबल हो गया। दिन भर मेरी हंसी होती है; सब कोई मुझ से ठट्ठा करते हैं। 
Jeremiah 20:8 क्योंकि जब मैं बातें करता हूँ, तब मैं जोर से पुकार पुकारकर ललकारता हूँ कि उपद्रव और उत्पात हुआ, हां उत्पात! क्योंकि यहोवा का वचन दिन भर मेरे लिये निन्दा और ठट्ठा का कारण होता रहता है। 
Jeremiah 20:9 यदि मैं कहूं, मैं उसकी चर्चा न करूंगा न उसके नाम से बोलूंगा, तो मेरे हृदय की ऐसी दशा होगी मानो मेरी हड्डियों में धधकती हुई आग हो, और मैं अपने को रोकते रोकते थक गया पर मुझ से रहा नहीं जाता। 
Jeremiah 20:10 मैं ने बहुतों के मुंह से अपना अपवाद सुना है। चारों ओर भय ही भय है! मेरी जान पहचान के सब जो मेरे ठोकर खाने की बाट जोहते हैं, वे कहते हैं, उसके दोष बताओ, तब हम उनकी चर्चा फैला देंगे। कदाचित वह धोखा खाए, तो हम उस पर प्रबल हो कर, उस से बदला लेंगे। 
Jeremiah 20:11 परन्तु यहोवा मेरे साथ है, वह भयंकर वीर के समान है; इस कारण मेरे सताने वाले प्रबल न होंगे, वे ठोकर खाकर गिरेंगे। वे बुद्धि से काम नहीं करते, इसलिये उन्हें बहुत लज्जित होना पड़ेगा। उनका अपमान सदैव बना रहेगा और कभी भूला न जाएगा। 
Jeremiah 20:12 हे सेनाओं के यहोवा, हे धर्मियों के परखने वाले और हृदय और मन के ज्ञाता, जो बदला तू उन से लेगा, उसे मैं देखूं, क्योंकि मैं ने अपना मुक़द्दमा तेरे ऊपर छोड़ दिया है। 
Jeremiah 20:13 यहोवा के लिये गाओ; यहोवा की स्तुति करो! क्योंकि वह दरिद्र जन के प्राण को कुकमिर्यों के हाथ से बचाता है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 26-27
  • फिलिप्पियों 2


रविवार, 31 मई 2015

अस्थिर अनुयायी


   लोकमत देखते ही देखते बदल जाता है, समर्थन करने वाले लोग भी अचानक ही विरोधी हो जाते हैं। जब खेल में हमारी मनपसन्द टीम जीत रही होती है, तो हम उसकी प्रशंसा करते हैं, उसके गुणों का बखान करते हैं; परन्तु जब वह एक-दो खेल हार जाए तो उससे विमुख होकर उसकी आलोचना करने में हमें देर नहीं लगती। जब कोई नया और उत्साहवर्धक कार्य आरंभ होता है तो उसके साथ जुड़ने में हमें संकोच नहीं होता, लेकिन कुछ समय में जब उसका वह नयापन जाता रहता है और उसके कार्य नित्यप्रायः लगने लगते हैं तो उसके प्रति हमारे उत्साह का स्तर भी गिरने लगता है।

   प्रभु यीशु ने भी लोकमत की इस अस्थिरता को अनुभव किया। जब वे फसह का पर्व मनाने यरुशालेम में आए तो लोगों ने उसका स्वागत बड़े उत्साह के साथ किया, उसे राजा माना (यूहन्ना 12:13); परन्तु स्पताह का अन्त होते होते वही भीड़ उसे क्रूस पर चढ़ाए जाने की माँग कर रही थी (यूहन्ना 19:15)। यह केवल उस भीड़ का ही बर्ताव नहीं था। जब प्रभु यीशु को पकड़वाया गया तथा क्रूस पर चढ़ाने के लिए ले जाया गया, तो उसके प्रति प्रेम और वफादारी का, तथा उसके लिए अपनी जान भी देने का दावा करने वाले उसके अनुयायी उसे अकेला छोड़ कर भाग गए। यह केवल उन अनुयायियों का ही व्यवहार नहीं था; आज मेरे जीवन में भी यही बात पाई जाती है। जब प्रभु यीशु मेरे भले के लिए कुछ असंभव कर रहे होते हैं तो मुझे उनके साथ खड़ा रहना अच्छा लगता है; परन्तु जब वे मुझे कुछ कठिन या कष्टदायक करने को कहते हैं मैं बचकर निकल लेने के प्रयास करने लगती हूँ। भीड़ की गुमनामी का भाग बनकर प्रभु यीशु का अनुयायी होने का दावा करना सरल है; जब वे चतुर लोगों की चतुराई को व्यर्थ और सामर्थी लोगों की सामर्थ को विफल करते हैं तो उन पर विश्वास रखने का दावा करना सहज है; लेकिन जब वे उस विश्वास के लिए दुख उठाने, बलिदान देने और मृत्यु का सामना करने की बात करते हैं तो उसी विश्वास को असमंजस तथा आनाकानी में बदलेते देर नहीं लगती।

   मुझे यह सोचना अच्छा लगता है कि यदी मैं वहाँ होती तो प्रभु के चेलों की तरह उन्हें छोड़कर नहीं भागती, वरन उनके साथ क्रूस तक जाती। लेकिन स्वयं मुझे ही अपने बारे में इस में कुछ शंका भी है; आखिरकर जब मैं उनके लिए अपना मूँह वहाँ भी नहीं खोलती जहाँ एक सुरक्षित माहौल है, तो मैं यह कैसे कह सकती हूँ कि उनके विरोधियों की भीड़ के समक्ष मैं उनके पक्ष में आने भी पाऊँगी, ऐसे विरोध भरे माहौल में खड़े होकर उनकी प्रशंसा करना या उनके लिए कुछ कहना तो बहुत दूर की बात है।

   हम मसीही विश्वासियों को और मुझे प्रभु परमेश्वर के प्रति और कितना अधिक धन्यवादी तथा कृतज्ञ रहना चाहिए कि हमारी दशा और व्यवहार को भली भाँति जानने के बावजूद, उसने मुझ जैसे, हम जैसे अस्थिर अनुयायियों के लिए भी अपने प्राण बलिदान किए, वह हमें आज भी अपना मानता है, हमारे साथ बना रहता है, हमारी सहायता करता रहता है जिससे कि हम उसकी संगति में रहकर, उससे सामर्थ पा सकें और उसके वफादार तथा उसे समर्पित अनुयायी बन सकें। - जूली ऐकैरमैन लिंक


मसीह यीशु अपने लिए हमारी योग्यता नहीं, वरन उसके लिए हमारी उपलब्धता और हमारा समर्पण चाहता है।

परन्तु यीशु ने अपने आप को उन के भरोसे पर नहीं छोड़ा, क्योंकि वह सब को जानता था। और उसे प्रयोजन न था, कि मनुष्य उसके विषय में कोई गवाही दे, क्योंकि वह आप ही जानता था, कि मनुष्य के मन में क्या है। - यूहन्ना 2:24-25

बाइबल पाठ: यूहन्ना 12:12-19; 19:14-16
John 12:12 दूसरे दिन बहुत से लोगों ने जो पर्व में आए थे, यह सुनकर, कि यीशु यरूशलेम में आता है। 
John 12:13 खजूर की, डालियां लीं, और उस से भेंट करने को निकले, और पुकारने लगे, कि होशाना, धन्य इस्त्राएल का राजा, जो प्रभु के नाम से आता है। 
John 12:14 जब यीशु को एक गदहे का बच्‍चा मिला, तो उस पर बैठा। 
John 12:15 जैसा लिखा है, कि हे सिय्योन की बेटी, मत डर, देख, तेरा राजा गदहे के बच्‍चा पर चढ़ा हुआ चला आता है। 
John 12:16 उसके चेले, ये बातें पहिले न समझे थे; परन्तु जब यीशु की महिमा प्रगट हुई, तो उन को स्मरण आया, कि ये बातें उसके विषय में लिखी हुई थीं; और लोगों ने उस से इस प्रकार का व्यवहार किया था। 
John 12:17 तब भीड़ के लोगों ने जो उस समय उसके साथ थे यह गवाही दी कि उसने लाजर को कब्र में से बुलाकर, मरे हुओं में से जिलाया था। 
John 12:18 इसी कारण लोग उस से भेंट करने को आए थे क्योंकि उन्होंने सुना था, कि उसने यह आश्चर्यकर्म दिखाया है। 
John 12:19 तब फरीसियों ने आपस में कहा, सोचो तो सही कि तुम से कुछ नहीं बन पड़ता: देखो, संसार उसके पीछे हो चला है।

John 19:14 यह फसह की तैयारी का दिन था और छठे घंटे के लगभग था: तब उसने यहूदियों से कहा, देखो, यही है, तुम्हारा राजा! 
John 19:15 परन्तु वे चिल्लाए कि ले जा! ले जा! उसे क्रूस पर चढ़ा: पीलातुस ने उन से कहा, क्या मैं तुम्हारे राजा को क्रूस पर चढ़ाऊं? महायाजकों ने उत्तर दिया, कि कैसर को छोड़ हमारा और कोई राजा नहीं। 
John 19:16 तब उसने उसे उन के हाथ सौंप दिया ताकि वह क्रूस पर चढ़ाया जाए।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 13-14
  • यूहन्ना 12:1-26