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रविवार, 4 मार्च 2012

अविनाशी आनन्द और संतुष्टि

   दूसरे विश्वयुद्ध के बाद जापान में हुई आर्थिक प्रगति और विकास के प्रभाव का अध्ययन करने के बाद रिचर्ड ईस्टरलिन का निष्कर्ष था कि हमेशा ही आर्थिक समृद्धि से आनन्द और संतुष्टि नहीं मिलती। परन्तु हाल ही में अर्थशास्त्री बेट्से स्टीवनसन और जस्टिन वुल्फर्स ने १०० से भी अधिक देशों में सर्वेक्षण के बाद निष्कर्ष दिया कि जीवन से संतुष्टि उन देशों में सबसे अधिक थी जहां आर्थिक समृद्धि थी।

   तो अब इन दोनो में से कौन सही है? आईए, परमेश्वर के वचन बाइबल में सभोपदेशक के लेखक की बात देखते हैं, क्योंकि उसे सत्य का पता होना चाहिए। वह लेखक बहुत धनी था (सभोपदेशक २:८) तथा उसके पास संसार की हर बात को जांचने-परखने के साधन थे और उसने जांचा-परखा भी! उसने अपने आप को शारीरिक आनन्द में लिप्त किया (२:१-३); बड़ी बड़ी योजनाएं कार्यान्वित करीं, बहुत भोग-विलास और मनोरंजन में समय बिताया  (२:४-८) तथा कठिन परिश्रम भी किया (२:१०-११)। अपने धन का यथासंभव उपयोग करने और सब कुछ करने के बाद, उसका निष्कर्ष था: "तब मैं ने फिर से अपने हाथों के सब कामों को, और अपने सब परिश्रम को देखा, तो क्या देखा कि सब कुछ व्यर्थ और वायु को पकड़ना है, और संसार में कोई लाभ नहीं" (सभोपदेशक २:११)।

   स्थिर, सदा बना रहने वाला और सच्चा आनन्द एवं संतुष्टि भौतिक उपायों, बैंक में जमा मोटी पूँजी या सांसारिक वस्तुओं की भरमार से नहीं मिलती। संसार में हाल ही में हुई घटनाएं दिखाती हैं कि संसार की हर वस्तु अचानक ही व्यर्थ हो सकती हैं, उसका मूल्य अनायास ही समाप्त हो सकता है। यदि हमें स्थाई और सदा बनी रहने वाली अविनाशी संतुष्टि और आननद चाहिए तो वह अविनाशी स्त्रोत से ही मिलेगा, किसी नाशमान से नहीं; और वह स्त्रोत है हमारा सृष्टिकर्ता और उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह।

   स्तुति गीत के लेखक फ्लौएड हौकिन्स ने अपने एक गीत में लिखा: "मैंने आनन्द का मार्ग पा लिया; मैंने प्रसन्नता प्राप्त कर ली; मुझे उदासी से निकलने की राह मिल गई;...जब मुझे यीशु, मेरा प्रभु मिल गया।"

   केवल यीशु ही वह अविनाशी संतुष्टि और आनन्द दे सकता है, क्योंकि वह स्वयं अविनाशी है, और वह अपने लोगों को अपना आनन्द देता है: "मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि मेरा आनन्‍द तुम में बना रहे, और तुम्हारा आनन्‍द पूरा हो जाए" (यूहन्ना १५:११)। - सी. पी. हिया


सच्चा आनन्द जानना है तो प्रभु यीशु को जान लीजिए।

तब मैं ने फिर से अपने हाथों के सब कामों को, और अपने सब परिश्रम को देखा, तो क्या देखा कि सब कुछ व्यर्थ और वायु को पकड़ना है, और संसार में कोई लाभ नहीं। - सभोपदेशक २:११

बाइबल पाठ: सभोपदेशक २:१-११
Ecc 2:1  मैं ने अपने मन से कहा, चल, मैं तुझ को आनन्द के द्वारा जांचूंगा; इसलिये आनन्दित और मगन हो। परन्तु देखो, यह भी व्यर्थ है।
Ecc 2:2  मैं ने हंसी के विषय में कहा, यह तो बावलापन है, और आनन्द के विषय में, उस से क्या प्राप्त होता है?
Ecc 2:3  मैं ने मन में सोचा कि किस प्रकार से मेरी बुद्धि बनी रहे और मैं अपने प्राण को दाखमधु पीने से क्योंकर बहलाऊं और क्योंकर मूर्खता को थामे रहूं, जब तक मालूम न करूं कि वह अच्छा काम कौन सा है जिसे मनुष्य जीवन भर करता रहे।
Ecc 2:4  मैं ने बड़े बड़े काम किए; मैं ने अपने लिये घर बनवा लिए और अपने लिये दाख की बारियां लगवाईं;
Ecc 2:5  मैं ने अपने लिये बारियां और बाग लगावा लिए, और उन में भांति भांति के फलदाई वृझ लगाए।
Ecc 2:6  मैं ने अपने लिये कुण्ड खुदवा लिए कि उन से वह वन सींचा जाए जिस में पौधे लगाए जाते थे।
Ecc 2:7  मैं ने दास और दासियां मोल लीं, और मेरे घर में दास भी उत्पन्न हुए, और जितने मुझ से पहिले यरूशलेम में थे उन से कहीं अधिक गाय-बैल और भेड़-बकरियों का मैं स्वामी था।
Ecc 2:8  मैं ने चान्दी और सोना और राजाओं और प्रान्तों के बहुमूल्य पदार्थों का भी संग्रह किया; मैं ने अपने लिये गवैयों और गाने वालियों को रखा, और बहुत सी कामिनियां भी, जिन से मनुष्य सुख पाते हैं, अपनी कर लीं।
Ecc 2:9  इस प्रकार मैं अपने से पहिले के सब यरूशलेमवासियों से अधिक महान और धनाढय हो गया, तौभी मेरी बुद्धि ठिकाने रही।
Ecc 2:10  और जितनी वस्तुओं के देखने की मैं ने लालसा की, उन सभों को देखने से मैं न रुका, मैं ने अपना मन किसी प्रकार का आनन्द भोगने से न रोका क्योंकि मेरा मन मेरे सब परिश्रम के कारण आनन्दित हुआ, और मेरे सब परिश्रम से मुझे यही भाग मिला।
Ecc 2:11  तब मैं ने फिर से अपने हाथों के सब कामों को, और अपने सब परिश्रम को देखा, तो क्या देखा कि सब कुछ व्यर्थ और वायु को पकड़ना है, और संसार में कोई लाभ नहीं।
 
एक साल में बाइबल: 
  • गिनती ३१-३३ 
  • मरकुस ९:१-२९

शनिवार, 3 मार्च 2012

प्रबल प्रवाह

   जब मैं किशोरावस्था में था तो मैं, मेरे पिता और अन्य परिवार के सदस्यों के साथ कलिफोर्निया की सैक्रेमैन्टो नदी के उदगम के निकट ट्राउट मछली पकड़ने गया। उस नदी का उदगम बर्फ पिघलने से होता है इसलिए वहां उसका पानी स्वच्छ, प्रबल प्रवाह वाला और ठंडा होता है। मैं और मेरे परिवार के लोग मछली पकड़ते समय उस पानी में उतरने और तरोताज़ा होने से अपने को रोक नहीं पाए।

   घर वापस लौटते समय, हम एक तालाब के पास भी रुके और नहाने के लिए उसमें उतरे। तालाब का पानी वैस आनन्दायक नहीं था, निश्चल होने के कारण स्वच्छ भी नहीं था तथा उस नदी के पानी की तुलना में वह स्फूर्तिदायक भी नहीं था।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में आमोस भविष्यद्वक्ता ने धार्मिकता द्वारा परिवर्तित होने की सामर्थ को नदी के प्रवाह के प्रभाव द्वारा दर्शाया। इस्त्राएल के प्रभावहीन धार्मिक रीतियों के व्यर्थ पालन और ग़रीबों के शोषण से विस्मित होकर आमोस ने परमेश्वर की ओर से इस्त्राएल में न्याय और धार्मिकता के प्रवाहित होने देने का आवाहन किया (आमोस २:६-८; ५:२१-२७)। उसने कहा कि परमेश्वर के लोग अधर्म और अन्याय के निश्चल और बासी पानी में पड़े हुए हैं जबकि परमेश्वर चाहता है कि वे अपने जीवनों में "न्याय को नदी की नाईं, और धर्म महानद की नाईं बहने दो" (अमोस ५:२४)।

   ना केवल तब के इस्त्राएलियों से वरन आज के लोगों से भी परमेश्वर की यही आशा है कि उनके जीवन में भी न्याय नदी के समान और धर्म महानद के समान बहे, ना कि व्यर्थ रीति-रिवाज़ों और गढ़ी हुई निष्फल धार्मिकता के सहारे लोग अपने आप को सही ठहराने के प्रयास करें। पाप से ग्रसित मन कभी सच्ची धार्मिकता को मन में स्थान पाने नहीं देगा, चाहे कितने भी नियम, कानून, दण्ड, विधि-विधान स्थापित क्यों ना किए जाएं। जब तक मन से पापों का निवारण नहीं होगा, मन स्वच्छ नहीं होगा तब तक उस में न्याय तथा धर्म का स्थिर और अटल स्थान भी नहीं होगा।

   समस्त संसार के हर जन के प्रत्येक पापों के निवारण के लिए कलवरी के क्रूस से प्रभु यीशु के लहु की जीवन दायक धारा ज़ारी है जिसके प्रबल प्रवाह में हर पाप धुल जाता है, और उसमें स्नान करने वाला पापों से शुद्ध होकर निर्मल और स्फूर्तीमान हो जाता है, एक नया जन हो जाता है, परमेश्वर की सन्तान बन जाता है - बस स्वेच्छा और विश्वास से उस धारा में उतरने भर की देर है।

   आज प्रभु यीशु का निमंत्रण संसार के हर एक जन के लिए खुला है कि वह उस प्रबल प्रवाह में धुलकर अपने पापों से स्वच्छ और निर्मल हो जाए। क्या आप ने इस उपल्ब्ध अवसर का लाभ उठाया? - डेनिस फिशर

जहां सत्य प्रवाहित होगा, वहां धार्मिकता भी होगी।

परन्तु न्याय को नदी की नाईं, और धर्म महानद की नाईं बहने दो। - अमोस ५:२४
 
बाइबल पाठ: अमोस ५:२१-२७
Amo 5:21  मैं तुम्हारे पर्वों से बैर रखता, और उन्हें निकम्मा जानता हूं, और तुम्हारी महासभाओं से मैं प्रसन्न नहीं।
Amo 5:22  चाहे तुम मेरे लिये होमबलि और अन्नबलि चढ़ाओ, तौभी मैं प्रसन्न न हूंगा, और तुम्हारे पाले हुए पशुओं के मेल बलियों की ओर न ताकूंगा।
Amo 5:23  अपने गीतों का कोलाहल मुझ से दूर करो; तुम्हारी सारंगियों का सुर मैं न सुनूंगा।
Amo 5:24  परन्तु न्याय को नदी की नाईं, और धर्म महानद की नाईं बहने दो।
Amo 5:25  हे इस्राएल के घराने, तुम जंगल में चालीस वर्ष तक पशुबलि और अन्नबलि क्या मुझी को चढ़ाते रहे?
Amo 5:26  नहीं, तुम तो अपने राजा का तम्बू, और अपनी मूरतों को चरणपीठ, और अपने देवता का तारा लिए फिरते रहे।
Amo 5:27  इस कारण मैं तुम को दमिश्क के उस पार बंधुआई में कर दूंगा, सेनाओं के परमेश्वर यहोवा का यही वचन है।
 
एक साल में बाइबल: 
  • गिनती २८-३० 
  • मरकुस ८:२२-३८

शुक्रवार, 2 मार्च 2012

परमेश्वर यहीं है

   लेस्ली और उसकी दोनो बेटियाँ घर से बेदखल किए जाकर निकाले जाने वाले थे। यद्यपि लेस्ली का विश्वास था कि परमेश्वर सहायता कर सकता है, लेकिन अभी तक उसने सहायता का कोई संकेत नहीं दिया था; लेस्ली सोच में थी - परमेश्वर कहाँ है? वह जब अदालत जा रही थी तो परमेश्वर से हस्तक्षेप करने की प्रार्थना कर रही थी। रास्ते में उसने कार के रेडियो पर एक गीत सुना, "परमेश्वर यहीं है; खेदित मन वाले आनन्दित हों।" वह सोचने लगी कि क्या यह परमेश्वर की ओर से उसके लिए आश्वासन है?

   अदालत के अन्दर लेस्ली ने न्यायाधीश के सामने अपना पक्ष रखा, उसका निर्णय सुना, कार्यवाही के काग़ज़ों पर हस्ताक्षर किए; किंतु उसकी समस्या का अब तक परमेश्वर से कोई उत्तर उसके पास नहीं आया था।

   वह जब अपनी कार की ओर जा रही थी तो एक ट्रक चालक ने अपना ट्रक उसके पास रोक कर उस से कहा, "महोदया, अदालत के अन्दर मैंने आप की गवाही सुनी है, और मुझे लगता है कि परमेश्वर चाहता है कि मैं आपकी सहायता करूँ।" और उसने सहायता करी। गैरी नामक उस ट्रक चालक ने लेस्ली का संपर्क निकट के चर्च की एक महिला से करवाया और उस महिला ने विवाद के पक्षों के साथ बातचीत करके समस्या का समाधान भी निकाला और लेस्ली के मकान से बेदखल कर के निकाले जाने की प्रक्रिया को पलटवा भी दिया, जिससे वह अपनी बेटियों के साथ अपने घर में बनी रहने पाई।

   जब कोई पूछता है कि "परमेश्वर कहाँ है?" तो उत्तर है, "परमेश्वर यहीं है।" परमेश्वर के कार्य करने के तरीकों में से एक है उसका गैरी जैसे मसीही विश्वासियों में हो कर कार्य करना, जो प्रभु यीशु द्वारा आरंभ किए हुए दुखी लोगों की सहायता करने और उनके ज़ख़मों पर मरहम पट्टी करने के कार्य (भजन १४७:३) को आगे बढ़ाने में संलग्न हैं। - जूली ऐकरमैन लिंक


यदि हम परमेश्वर से प्रेम करते हैं तो लोगों की सेवा भी करेंगे।

वह खेदित मन वालों को चंगा करता है, और उनके शोक पर मरहम-पट्टी बान्धता है। - भजन १४७:३

बाइबल पाठ: लूका ४:१६-२१
Luk 4:16  और वह नासरत में आया, जहां पाला पोसा गया था; और अपनी रीति के अनुसार सब्‍त के दिन आराधनालय में जा कर पढ़ने के लिये खड़ा हुआ।
Luk 4:17  यशायाह भविष्यद्वक्ता की पुस्‍तक उसे दी गई, और उस ने पुस्‍तक खोलकर, वह जगह निकाली जहां यह लिखा था।
Luk 4:18  कि प्रभु का आत्मा मुझ पर है, इसलिये कि उस ने कंगालों को सुसमाचार सुनाने के लिये मेरा अभिषेक किया है, और मुझे इसलिये भेजा है, कि बन्‍धुओं को छुटकारे का और अन्‍धों को दृष्‍टि पाने का सुसमाचार प्रचार करूं और कुचले हुओं को छुड़ाऊं।
Luk 4:19  और प्रभु के प्रसन्न रहने के वर्ष का प्रचार करूं।
Luk 4:20  तब उस ने पुस्‍तक बन्‍द करके सेवक के हाथ में दे दी, और बैठ गया: और आराधनालय के सब लोगों की आंख उस पर लगी थीं।
Luk 4:21  तब वह उन से कहने लगा, कि आज ही यह लेख तुम्हारे साम्हने पूरा हुआ है।
 
एक साल में बाइबल: 
  • गिनती २६-२७ 
  • मरकुस ८:१-२१

गुरुवार, 1 मार्च 2012

सबसे मनोहर

जब १९ वर्ष की आयु में मैं मसीही विश्वासी बनी और चर्च जाना आरंभ किया तो भक्ति और विश्वास के स्तुति गीत गाने से मुझे तुरंत प्रेम हो गया। मेरा मन आनन्द और धन्यवाद से भर जाता जब हम प्रभु यीशु में होकर हमें मिले परमेश्वर के प्रेम का वर्णन उन गीतों में गाते। शीघ्र ही मेरे सबसे प्रीय गीतों में से एक १७वीं शताब्दी के अन्त के निकट लिखा गया गीत "Fairest Lord Jesus!" बन गया। इस गीत की धुन और उसमें व्यक्त प्रभु यीशु की महिमा मुझे बहुत प्रीय हैं।

   इस गीत का एक छन्द कुछ इस प्रकार से है: "सूर्य का प्रकाश स्वच्छ और सुन्दर है, चाँद की चाँदनी और तारों का झिलमिलाना भी सुन्दर और मनोहर है; किंतु यीशु उन सबसे स्वच्छ, सुन्दर और मनोहर है, वह स्वर्ग के सारे स्वर्गदूतों से भी अधिक पवित्र और सुन्दर है। सुन्दरतम यीशु! राजाओं का राजा! परमेश्वर का पुत्र और मनुष्य का भी! महिमा, आदर, स्तुति, आराधना अब और सदा काल तक आपकी रहे!"

   परमेश्वर का पुत्र, जिसके बारे में इस गीत में हम गाते हैं, इस पृथ्वी पर आया, यहाँ रहते हुए एक सिद्ध जीवन बिताया, हमारे लिए क्रूस पर अपने आप को बलिदान कर दिया (लुका२३:३३), कब्र में से जी उठा (लूका २४:६) और अब परमेश्वर के दाहिने विराजमान है (इब्रानियों १:३)। एक दिन हम हज़ारों हज़ार लोगों के साथ मिलकर उसकी आराधना में सम्मिलित होंगे और कहेंगे "जो सिंहासन पर बैठा है, उसका, और मेम्ने का धन्यवाद, और आदर, और महिमा, और राज्य, युगानुयुग रहे" (प्रकाशितवाक्य ५:१३)। शायद हम वहाँ "Fairest Lord Jesus!" भी गाएंगे।

   लेकिन अब, जब तक वह समय ना आए, तब तक हमें अपने जीवनों में प्रभु यीशु को सर्वोपरि और सर्वोत्तम बनाना है, दिखाना है - उसके वचन से शिक्षा लेकर और उसका अनुसरण करने के द्वारा। - ऐनी सेटास


प्रभु यीशु की करी गई हमारी कितनी भी प्रशंसा उसके प्रेम और मनोहरता के लिए पर्याप्त नहीं है।

और वे ऊंचे शब्‍द से कहते थे, कि वध किया हुआ मेम्ना ही सामर्थ, और धन, और ज्ञान, और शक्ति, और आदर, और महिमा, और धन्यवाद के योग्य है। - प्रकाशितवाक्य ५:१२
 
बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य ५:८-१४
Rev 5:8  और जब उस ने पुस्‍तक ले ली, तो वे चारों प्राणी और चौबीसों प्राचीन उस मेम्ने के साम्हने गिर पड़े, और हर एक के हाथ में वीणा और धूप से भरे हुए सोने के कटोरे थे, ये तो पवित्र लोगों की प्रार्थानाएं हैं।
Rev 5:9  और वे यह नया गीत गाने लगे, कि तू इस पुस्‍तक के लेने, और उसकी मुहरें खोलने के योग्य है, क्‍योंकि तू ने वध होकर अपने लोहू से हर एक कुल, और भाषा, और लोग, और जाति में से परमेश्वर के लिये लोगों को मोल लिया है।
Rev 5:10  और उन्‍हें हमारे परमेश्वर के लिये एक राज्य और याजक बनाया; और वे पृथ्वी पर राज्य करते हैं।
Rev 5:11  और जब मैं ने देखा, तो उस सिंहासन और उन प्राणियों और उन प्राचीनों की चारों ओर बहुत से स्‍वर्गदूतों का शब्‍द सुना, जिन की गिनती लाखों और करोड़ों की थी।
Rev 5:12  और वे ऊंचे शब्‍द से कहते थे, कि वध किया हुआ मेम्ना ही सामर्थ, और धन, और ज्ञान, और शक्ति, और आदर, और महिमा, और धन्यवाद के योग्य है।
Rev 5:13  फिर मैं ने स्‍वर्ग में, और पृथ्वी पर, और पृथ्वी के नीचे, और समुद्र की सब सृजी हुई वस्‍तुओं को, और सब कुछ को जो उन में हैं, यह कहते सुना, कि जो सिंहासन पर बैठा है, उसका, और मेम्ने का धन्यवाद, और आदर, और महिमा, और राज्य, युगानुयुग रहे।
Rev 5:14  और चारों प्राणियों ने आमीन कहा, और प्राचीनों ने गिरकर दण्‍डवत किया।
 
एक साल में बाइबल: 
  • गिनती २४-२५ 
  • मरकुस ७:२३-३७

बुधवार, 29 फ़रवरी 2012

पापों का स्मरण

   हमारे पापों का स्मरण हमारे उद्धार के आनन्द को चुरा सकता है। हो सकता है कि हमने स्वयं कहा हो, या किसी को कहते हुए सुना हो कि "काश मैं अपने आप को अपने किए के लिए माफ कर पाता!" कुछ लोग अपने बीते समय के पापों के दोष से ग्रस्त रहते हैं और सोच सोच कर दुखी होते रहते हैं।

   परमेश्वर के वचन में जब यूसुफ ने अपने भाईयों के सामने अपने आप को प्रकट किया, जिन्होंने कई वर्ष पहले उसे गुलामी में बेच दिया था, तो वे स्तब्ध खड़े रह गए, "वे उसके साम्हने घबरा गए थे" (उत्पत्ति ४५:३)। जो दुख उन्होंने अपने भाई और अपने वृद्ध पिता को दिया था उसके स्मरण ने उन्हें उनके दोष के कारण भयभीत कर दिया। यह देखते हुए यूसुफ ने तुरंत उन्हें आश्वस्त किया, "अब तुम लोग मत पछताओ, और तुम ने जो मुझे यहां बेच डाला, इस से उदास मत हो; क्योंकि परमेश्वर ने तुम्हारे प्राणों को बचाने के लिये मुझे आगे से भेज दिया है" (उत्पत्ति ४५:५)।

   जब हमने दूसरों को दुख दिया हो और पाप किया हो तो हम भी अपने आप को यूसुफ के भाईयों के जैसी स्थिति में पा सकते हैं। किंतु यदि हमने परमेश्वर के सामने अपने पापों का अंगीकार करके उनका पश्चाताप किया है और उससे उनकी क्षमा माँगी है तो हम आश्वस्त हो सकते हैं कि उसने उन्हें क्षमा कर दिया है: "यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है" (१ युहन्ना १:९)। परेशान करते रहने वाला पाप-बोध और हमारे अन्तरात्मा द्वारा हमें दोषी ठहराते रहना परमेश्वर के पवित्र आत्मा का कार्य नहीं है; वरन, परमेश्वर तो कहता है: "मैं ने तेरे अपराधों को काली घटा के समान और तेरे पापों को बादल के समान मिटा दिया है; मेरी ओर फिर लौट आ, क्योंकि मैं ने तुझे छुड़ा लिया है" (यशायाह ४४:२२)।

   परमेश्वर का वचन हमें सिखाता है कि "अपने मन के आत्मिक स्‍वभाव में नये बनते जाओ" (इफिसीयों ४:२३)। अर्थात, हमें अपना ध्यान बीते समय के उन पापों पर नहीं लगाना है जिनकी क्षमा हमें मिल चुकी है, वरन पापों के दोष और दण्ड से विवारण देने वाले अपने उद्धारकर्ता प्रभु यीशु पर लगाए रखना है। हमारे विचार उन बीती बातों पर केंद्रित नहीं होने चाहिएं जो हमने की थीं वरन उस उद्धार के कार्य पर होने चाहिएं जो हमारे लिए हमारे प्रभु यीशु ने कलवरी के क्रूस पर अपना बलिदान दे कर किया है।

   क्योंकि उसने हमारे पाप क्षमा कर दिए हैं, अपने उन पापों को हमें भी स्मरण नहीं करते रहना चाहिए। - डेनिस डी हॉन

पापों के दोष का बोझ वह बोझ है जो हमारा स्वर्गीय परमेश्वर पिता नहीं चाहता कि उसके बच्चे उठाए फिरें।

अब तुम लोग मत पछताओ, और तुम ने जो मुझे यहां बेच डाला, इस से उदास मत हो; क्योंकि परमेश्वर ने तुम्हारे प्राणों को बचाने के लिये मुझे आगे से भेज दिया है। - उत्पत्ति ४५:५
 
बाइबल पाठ: उत्पत्ति ४५:१-१५
Gen 45:1  तब यूसुफ उन सब के साम्हने, जो उसके आस पास खड़े थे, अपने को और रोक न सका और पुकार के कहा, मेरे आस पास से सब लोगों को बाहर कर दो। भाइयों के साम्हने अपने को प्रगट करने के समय यूसुफ के संग और कोई न रहा।
Gen 45:2  तब वह चिल्ला चिल्लाकर रोने लगा : और मिस्रियों ने सुना, और फिरौन के घर के लोगों को भी इसका समाचार मिला।
Gen 45:3  तब यूसुफ अपने भाइयों से कहने लगा, मैं यूसुफ हूं, क्या मेरा पिता अब तक जीवित है? इसका उत्तर उसके भाई न दे सके, क्योंकि वे उसके साम्हने घबरा गए थे।
Gen 45:4  फिर यूसुफ ने अपने भाइयों से कहा, मेरे निकट आओ। यह सुनकर वे निकट गए। फिर उस ने कहा, मैं तुम्हारा भाई यूसुफ हूं, जिसको तुम ने मिस्र आनेहारों के हाथ बेच डाला था।
Gen 45:5  अब तुम लोग मत पछताओ, और तुम ने जो मुझे यहां बेच डाला, इस से उदास मत हो; क्योंकि परमेश्वर ने तुम्हारे प्राणों को बचाने के लिये मुझे आगे से भेज दिया है।
Gen 45:6  क्योंकि अब दो वर्ष से इस देश में अकाल है, और अब पांच वर्ष और ऐसे ही होंगे, कि उन में न तो हल चलेगा और न अन्न काटा जाएगा।
Gen 45:7  सो परमेश्वर ने मुझे तुम्हारे आगे इसी लिये भेजा, कि तुम पृथ्वी पर जीवित रहो, और तुम्हारे प्राणों के बचने से तुम्हारा वंश बढ़े।
Gen 45:8  इस रीति अब मुझ को यहां पर भेजने वाले तुम नहीं, परमेश्वर ही ठहरा: और उसी ने मुझे फिरौन का पिता सा, और उसके सारे घर का स्वामी, और सारे मिस्र देश का प्रभु ठहरा दिया है।
Gen 45:9  सो शीघ्र मेरे पिता के पास जाकर कहो, तेरा पुत्र यूसुफ इस प्रकार कहता है, कि परमेश्वर ने मुझे सारे मिस्र का स्वामी ठहराया है, इसलिये तू मेरे पास बिना विलम्ब किए चला आ।
Gen 45:10  और तेरा निवास गोशेन देश में होगा, और तू, बेटे, पोतों, भेड़-बकरियों, गाय-बैलों, और अपने सब कुछ समेत मेरे निकट रहेगा।
Gen 45:11  और अकाल के जो पांच वर्ष और होंगे, उन में मै वहीं तेरा पालन पोषण करूंगा; ऐसा न हो कि तू, और तेरा घराना, वरन जितने तेरे हैं, सो भूखों मरें।
Gen 45:12  और तुम अपनी आंखों से देखते हो, और मेरा भाई बिन्यामीन भी अपनी आंखों से देखता है, कि जो हम से बातें कर रहा है सो यूसुफ है।
Gen 45:13  और तुम मेरे सब वैभव का, जो मिस्र में है और जो कुछ तुम ने देखा है, उस सब को मेरे पिता से वर्णन करना, और तुरन्त मेरे पिता को यहां ले आना।
Gen 45:14  और वह अपने भाई बिन्यामीन के गले से लिपटकर रोया, और बिन्यामीन भी उसके गले से लिपटकर रोया।
Gen 45:15  तब वह अपने सब भाइयों को चूमकर उन से मिलकर रोया : और इसके पश्चात्‌ उसके भाई उस से बातें करने लगे।
 
एक साल में बाइबल: 
  • गिनती २३ 
  • मरकुस ७:१४-२३

मंगलवार, 28 फ़रवरी 2012

वृद्धावस्था का देश

   लेखिका मेरी पाईफर ने अपनी पुस्तक Another Country कई वृद्ध लोगों से जो सत्तर, अस्सी, नव्वे की अवस्थाओं में थे और जीवन की कई परिस्थितियों का सामना कर रहे थे, मुलाकात करके उन अनुभवों के आधार पर लिखी। पाईफर ने बताया कि वे "वृद्धावस्था के देश को समझना चाहतीं थीं।" उन्होंने यह भी कहा कि "हमारा सामाजिक संगठन वृद्ध होने को आसान और आरामदायक होने के लिए प्रबन्धित नहीं है।" उनका निषकर्ष था कि इसका मूल कारण है कि जवान और वृद्ध एक दुसरे से पृथक और दूर हो गए हैं और इससे दोनो ही की हानि हुई है।

   यह सामाजिक प्रवृति जानबूझकर बनाई हुई नहीं है, लेकिन यह भी सत्य है कि बहुत से लोग वृद्धों के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी को नज़रंदाज़ करते हैं, उसे टालते हैं, उससे जी चुराते हैं। यह आज के समाज की प्रवृति भी नहीं है; लगभग २००० वर्ष पूर्व, प्रभु यीशु के दिनों में भी यह प्रवृति उस समय के समाज में देखी जा सकती थी।

   परमेश्वर के वचन में मरकुस ७:९-१३ में प्रभु यीशु द्वारा धर्म के अगुवे फरीसियों द्वारा अपने पारिवारिक दायित्व से बचने के अनूठे तरीके के लिए उनकी भर्त्सना करी। ये फरीसी अपनी सांसारिक संपत्ति परमेश्वर के मन्दिर के नाम "कुर्बान" कर देते थे। अब जो परमेश्वर को दिया गया है, वह परिवार के वृद्धों के लिए कैसे प्रयोग हो सकता था? किंतु क्योंकि ये धर्म के अगुवे परमेश्वर के मंदिर से सम्बंधित थे और उसके लिए कार्य करते थे, इसलिए मंदिर की वस्तुओं का अपने लिए प्रयोग करना उनके लिए "जायज़" माना जाता था। इस प्रकार वे अपने धन को अपने लिए तो प्रयोग करने पाते थे किंतु अपने माता-पिता को उस धन से वंचित कर देते थे। उन लोगों ने अपनी इस परंपरा के मानने से परमेश्वर के वचन में माता-पिता का आदर करने की आज्ञा को तुच्छ किया और उसका उल्लंघन किया।

   हमारे बच्चे, हमारा कार्य, चर्च में हमारे कार्य हमें कई ओर खेंच सकते हैं, कई बातों में व्यस्त कर सकते हैं, लेकिन यह माता-पिता की देखभाल करने और उनका आदर करने के हमारे कर्त्वय और परमेश्वर की आज्ञा को अन्देखा करने के बहाने नहीं हो सकते। अपने वृद्ध जनों की यथासम्भव देखभाल करना और उनकी आवश्यक्ताओं को पूरा करने की जवाबदेही से हम बच नहीं सकते; परमेश्वर का वचन हमें चिताता है "पर यदि कोई अपनों की और निज करके अपने घराने की चिन्‍ता न करे, तो वह विश्वास से मुकर गया है, और अविश्वासी से भी बुरा बन गया है" (१ तिमुथियुस ५:८)।

   जब वह समय आए कि हमें "वृद्धावस्था के देश" में पदार्पण करना हो तो ध्यान रहे कि हमने अपने जीवन और अपने कार्यों से अपनी सन्तान के सम्मुख वह श्रेष्ठ उदाहरण रखा है जिसका अब वह अनुसरण करने वाले बनने वाले हैं। - डेनिस फिशर

माता-पिता का आदर करना हम उदाहरण से ही सीखते हैं।
पर यदि कोई अपनों की और निज करके अपने घराने की चिन्‍ता न करे, तो वह विश्वास से मुकर गया है, और अविश्वासी से भी बुरा बन गया है। - १ तिमुथियुस ५:८
 
बाइबल पाठ: मरकुस ७:१-१३
Mar 7:1  तब फरीसी और कई एक शास्त्री जो यरूशलेम से आए थे, उसके पास इकट्ठे हुए।
Mar 7:2  और उन्‍होंने उसके कई चेलों को अशुद्ध अर्थात बिना हाथ धोए रोटी खाते देखा।
Mar 7:3  क्‍योंकि फरीसी और सब यहूदी, पुरिनयों की रीति पर चलते हैं और जब तक भली भांति हाथ नहीं धो लेते तब तक नहीं खाते।
Mar 7:4  और बाजार से आकर, जब तक स्‍नान नहीं कर लेते, तब तक नहीं खाते; और बहुत सी और बातें हैं, जो उन के पास मानने के लिये पहुंचाई गई हैं, जैसे कटोरों, और लोटों, और तांबे के बरतनों को धोना-मांजना।
Mar 7:5  इसलिये उन फरीसियों और शास्‍त्रियों ने उस से पूछा, कि तेरे चेले क्‍यों पुरिनयों की रीतों पर नहीं चलते, और बिना हाथ धोए रोटी खाते हैं?
Mar 7:6  उस ने उन से कहा;. कि यशायाह ने तुम कपटियों के विषय में बहुत ठीक भविष्यद्ववाणी की, जैसा लिखा है, कि ये लोग होठों से तो मेरा आदर करते हैं, पर उन का मन मुझ से दूर रहता है।
Mar 7:7  और ये व्यर्थ मेरी उपासना करते हैं, क्‍योंकि मनुष्यों की आज्ञाओं को धर्मोपदेश करके सिखाते हैं।
Mar 7:8  क्‍योंकि तुम परमेश्वर की आज्ञा को टालकर मनुष्यों की रीतियों को मानते हो।
Mar 7:9  और उस ने उन से कहा, तुम अपनी रीतियों को मानने के लिये परमेश्वर आज्ञा कैसी अच्‍छी तरह टाल देते हो!
Mar 7:10  क्‍योंकि मूसा ने कहा है कि अपने पिता और अपनी माता का आदर कर; ओर जो कोई पिता वा माता को बुरा कहे, वह अवश्य मार डाला जाए।
Mar 7:11  परन्‍तु तुम कहते हो कि यदि कोई अपने पिता वा माता से कहे, कि जो कुछ तुझे मुझ से लाभ पहुंच सकता था, वह कुरबान अर्थात संकल्प हो चुका।
Mar 7:12  तो तुम उस को उसके पिता वा उस की माता की कुछ सेवा करने नहीं देते।
Mar 7:13  इस प्रकार तुम अपनी रीतियों से, जिन्‍हें तुम ने ठहराया है, परमेश्वर का वचन टाल देते हो; और ऐसे ऐसे बहुत से काम करते हो।
एक साल में बाइबल: 
  • गिनती २०-२२ 
  • मरकुस ७:१-१३

सोमवार, 27 फ़रवरी 2012

कमज़ोरी में सामर्थ

   कोई कमज़ोर दिखन नहीं चाहता, इसलिए हम सब किसी न किसी प्रकार से सामर्थी दिखने के प्रयास करते हैं। कोई भावनाओं के आवेश से दूसरों को नियंत्रित करने का प्रयास करता है तो कोई अपने व्यक्तित्व या बुद्धि से। यद्यपि ये बातें सामर्थ का भ्रम उत्पन्न करतीं हैं किंतु वास्तव में ये सब कमज़ोरी की निशानियाँ हैं।

   जो वास्तव में सामर्थी होते हैं वे अपनी सीमाओं को मान लेने से नहीं हिचकिचाते और ना ही अपनी कमज़ोरियों के प्रकट होने से घबराते हैं। उन्हें अपनी सामर्थ के लिए परमेश्वर पर अपने निर्भर होने को बताने में कोई संकोच नहीं होता। इसलिए वास्तविक सामर्थ अकसर संसार को कमज़ोरी प्रतीत होती है। जब प्रेरित पौलुस ने परमेश्वर से प्रार्थना करी कि उसकी व्यथा जो उसे परेशान कर रही थी उससे दूर हो जाए तो परमेश्वर का उत्तर था "...मेरा अनुग्रह तेरे लिये बहुत है, क्‍योंकि मेरी सामर्थ निर्बलता में सिद्ध होती है"; परमेश्वर से इस अप्रत्याशित उत्तर को पाकर पौलुस की प्रतिक्रिया और भी विसमित करने वाली थी; उसने कहा "...इसलिये मैं बड़े आनन्‍द से अपनी निर्बलताओं पर घमण्‍ड करूंगा, कि मसीह की सामर्थ मुझ पर छाया करती रहे। इस कारण मैं मसीह के लि्ये निर्बलताओं, और निन्‍दाओं में, और दरिद्रता में, और उपद्रवों में, और संकटों में, प्रसन्न हूं, क्‍योंकि जब मैं निर्बल होता हूं, तभी बलवन्‍त होता हूं" (२ कुरिन्थियों १२:९-१०)।

   प्रभु यीशु की इस पृथ्वी पर शारीरिक रूप में सेवकाई के अन्त के निकट उनके कुछ चेलों में, आते दिनों और समयों के लिए, प्रमुख स्थान पाने की होड़ लग गई। प्रभु यीशु ने इस बात को लेकर उनके आपसी विवाद को अवसर बनाया उन्हें समझाने का कि उसके राज्य में संसार के राज्य से बात अलग होती है, प्रमुख होने के तरीके भिन्न हैं: प्रभु यीशु ने उन्हें बताया कि परमेश्वर के राज्य में बड़ा वही है जो जानबूझकर कमज़ोरी और निम्नता का स्वरूप ले लेता है (मत्ती २०:२६)।

   यह एक कटु सत्य है और इसे स्वीकार कर लेना आसान नहीं है क्योंकि कमज़ोरी की सच्चाई को मानने कि बजाए सामर्थ के छल को दिखाना ही लोग अधिक पसन्द करते हैं और अपने जीवनों में यही निभाते रहते हैं। किंतु परमेश्वर चाहता है कि हम इस बात का एहसास करें कि सच्ची सामर्थ तभी आती है जब हम लोगों को नियंत्रित करने के प्रयासों की बजाए उनकी सेवा करने के अवसर ढ़ूंढने लगें और प्रयास करने लगें। - जूली एकरमैन लिंक


हमारी सबसे बड़ी कमज़ोरी में परमेश्वर की सबसे बड़ी सामर्थ प्रकट हो सकती है।

परन्‍तु तुम में ऐसा न होगा; परन्‍तु जो कोई तुम में बड़ा होना चाहे, वह तुम्हारा सेवक बने। - मत्ती २०:२६
 
बाइबल पाठ: मत्ती २०:२०-२८
Mat 20:20 जब जब्‍दी के पुत्रों की माता ने अपने पुत्रों के साथ उसके पास आकर प्रणाम किया, और उस से कुछ मांगने लगी।
Mat 20:21 उस ने उस से कहा, तू क्‍या चाहती है? वह उस से बोली, यह कह, कि मेरे ये दो पुत्र तेरे राज्य में एक तेरे दाहिने और एक तेरे बाएं बैठें।
Mat 20:22 यीशु ने उत्तर दिया, तुम नहीं जानते कि क्‍या मांगते हो जो कटोरा मैं पीने पर हूं, क्‍या तुम पी सकते हो? उन्‍होंने उस से कहा, पी सकते हैं।
Mat 20:23  उस ने उन से कहा, तुम मेरा कटोरा तो पीओगे पर अपने दाहिने बाएं किसी को बिठाना मेरा काम नहीं, पर जिन के लिये मेरे पिता की ओर से तैयार किया गया, उन्हीं के लिये है।
Mat 20:24  यह सुनकर, दसों चेले उन दोनों भाइयों पर क्रुद्ध हुए।
Mat 20:25 यीशु ने उन्‍हें पास बुलाकर कहा, तुम जानते हो, कि अन्य जातियों के हाकिम उन पर प्रभुता करते हैं, और जो बड़े हैं, वे उन पर अधिकार जताते हैं।
Mat 20:26 परन्‍तु तुम में ऐसा न होगा; परन्‍तु जो कोई तुम में बड़ा होना चाहे, वह तुम्हारा सेवक बने।
Mat 20:27 और जो तुम में प्रधान होना चाहे वह तुम्हारा दास बने।
Mat 20:28 जैसे कि मनुष्य का पुत्र, वह इसलिये नहीं आया कि उस की सेवा टहल की जाए, परन्‍तु इसलिये आया कि आप सेवा टहल करे और बहुतों की छुडौती के लिये अपने प्राण दे।
 
एक साल में बाइबल: 
  • गिनती १७-१९ 
  • मरकुस ६:३०-५६