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शनिवार, 22 अक्टूबर 2016

परम मित्र


   मेरी एक मित्र के पति डिमेन्शिया रोग के कारण, जिसमें यादाश्त जाती रहती है तथा मरीज़ अपनी देखभाल, भूख-प्यास का निवारण और साफ-सफाई भी नहीं कर पाता, जीवन के अन्तिम चरणों में थे। उनकी देखभाल करने के लिए एक नर्स नियुक्त करी गई, और जब उनसे उस नर्स की प्रथम मुलाकात करवाई गई तो उन्होंने हाथ बढ़ाकर उसकी बाँह थाम ली, उसे रोका और कहा कि वे उसका परिचय अपने सबसे अच्छे और परम-मित्र से करवाना चाहते हैं, जो उनसे बहुत प्रेम करता है।

   क्योंकि वहाँ और कोई नहीं था, इसलिए उस नर्स को लगा कि अपने मानसिक रोग के कारण वे यूँ ही बड़बड़ा रहे हैं; लेकिन बाद में पता चला कि वे प्रभु यीशु की बात कर रहे थे। वह नर्स उनकी बात से बहुत प्रभावित हुई किंतु एक अन्य मरीज़ की देखभाल करने जाने के कारण वह उनकी पूरी बात सुन नहीं सकी और उसे जाना पड़ा। बाद में जब वह लौट कर उनके पास आई, तब तक वे पुनः अपनी बीमारी के प्रभाव में आ चुके थे, अपने आस-पास का बोध ना होने के अन्धकार में जा चुके थे।

   यद्यपि यह व्यक्ति डिमेन्शिया के अन्धकार में उतर गया था, लेकिन फिर भी उसे यह याद था कि उसका सबसे अच्छा मित्र प्रभु यीशु है, जो उससे बहुत प्रेम करता है। परमेश्वर हम मसीही विश्वासियों के मन की अथाह गहराईयों में निवास करता है। वह हमारे मन के सबसे गहरे अन्धकार को भी बींध कर अपने कोमल प्रेम और देखभाल के आश्वासन का उजियाला हमारे मनों में कर सकता है; कोई भी अन्धकार हमें उस से छुपा नहीं सकता है (भजन 139:12)।

   हम यह तो नहीं जानते कि हमारे अपने लिए या हमारे प्रीय जनों के लिए भविष्य में क्या रखा है। संभव है कि वे या हम भी किसी मानसिक अथवा शारीरिक रोग के कारण किसी अन्धकार में पड़ जाएं। लेकिन हम मसीही विश्वासियों को यह निश्चय और आश्वासन अवश्य है कि हमारे सबसे अच्छे और परम मित्र, हमारे उद्धारकर्ता प्रभु यीशु का साथ, देखभाल और मार्गदर्शन उस परिस्थिति में भी हमारे साथ बना रहेगा, हमें आश्वस्त तथा शान्त रखेगा। उस परम मित्र के प्रेम और व्यक्तिगत देखभाल से हमें कुछ भी, कोई भी, कभी भी अलग नहीं कर सकता है। - डेविड रोपर


प्रभु यीशु मुझ से प्रेम करता है, यह मैंने व्यक्तिगत अनुभव से जाना है।

क्योंकि मैं निश्चय जानता हूं, कि न मृत्यु, न जीवन, न स्वर्गदूत, न प्रधानताएं, न वर्तमान, न भविष्य, न सामर्थ, न ऊंचाई, न गहिराई और न कोई और सृष्टि, हमें परमेश्वर के प्रेम से, जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी| - रोमियों 8:38-39

बाइबल पाठ: भजन 139:7-12
Psalms 139:7 मैं तेरे आत्मा से भाग कर किधर जाऊं? वा तेरे साम्हने से किधर भागूं? 
Psalms 139:8 यदि मैं आकाश पर चढूं, तो तू वहां है! यदि मैं अपना बिछौना अधोलोक में बिछाऊं तो वहां भी तू है! 
Psalms 139:9 यदि मैं भोर की किरणों पर चढ़ कर समुद्र के पार जा बसूं, 
Psalms 139:10 तो वहां भी तू अपने हाथ से मेरी अगुवाई करेगा, और अपने दाहिने हाथ से मुझे पकड़े रहेगा। 
Psalms 139:11 यदि मैं कहूं कि अन्धकार में तो मैं छिप जाऊंगा, और मेरे चारों ओर का उजियाला रात का अन्धेरा हो जाएगा, 
Psalms 139:12 तौभी अन्धकार तुझ से न छिपाएगा, रात तो दिन के तुल्य प्रकाश देगी; क्योंकि तेरे लिये अन्धियारा और उजियाला दोनों एक समान हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 65-66
  • 1 तिमुथियुस 2


शुक्रवार, 21 अक्टूबर 2016

सहायक


   स्वतः साफ हो जाने वाले तन्दूर के आने से बहुत पहले से ही मेरा तन्दूर बहुत साफ रहता था। जब भी घर पर मेहमान खाने के लिए आते तो वे मेरे तन्दूर की सफाई को देखकर प्रशंसा करते और कहते, "तुम्हारा तन्दूर कितना साफ है; बिलकुल नए जैसा लगता है।" मैं इस प्रशंसा को ग्रहण कर लेती यद्यपि मैं जानती थी कि मैं इस प्रशंसा की भागी नहीं हूँ। मेरे तन्दूर के साफ-सुथरे रहने का कारण मेरी उसको रगड़ कर, मांझ कर रखने वाली कोई आदत नहीं थी; वह साफ-सुथरा और नए समान केवल इसलिए रहता था क्योंकि मैं शायद ही कभी उसका उपयोग करती थी!

   मैं विचार करती हूँ कि ऐसे ही ना जाने कितनी बार मैंने अपने "साफ-सुथरे" जीवन के लिए प्रशंसा को ग्रहण तो किया है लेकिन वास्तव में मैं उस प्रशंसा की भागी नहीं रही हूँ। लोगों के सामने यह छवि प्रस्तुत करना कि हम बड़े सदाचारी तथा अच्छे चरित्र के हैं कोई कठिन कार्य नहीं है; इसके लिए केवल इतना ही करना होता है कि आप ऐसा कुछ भी जो कठिन, विवादास्पद, या लोगों को पसन्द ना आने वाला हो कदापि नहीं करें। अपने आप को लोगों से थोड़ा पृथक रखें, और आपकी छवि कभी खराब नहीं होगी।

   लेकिन हम मसीही विश्वासियों से हमारे प्रभु परमेश्वर ने कहा है कि हम उन से भी प्रेम करें जो हम से सहमत नहीं हैं, जो हमारे मानकों को नहीं मानते हैं, जो हमें पसन्द नहीं करते हैं। व्यावाहरिक एवं प्रगट प्रेम की यह माँग है कि हम लोगों के जीवन में सम्मिलित हों, उनकी परेशानियों और अस्त-व्यस्त परिस्थितियों में भी। प्रभु यीशु की अपने समय के धार्मिक अगुवों के साथ अकसर तकरार रहती थी क्योंकि वे अगुवे संसार के सामने अपने आप को स्वच्छ और न्याय-संगत दिखाने के प्रयासों में अधिक संलग्न रहते थे बजाए इसके कि वे उन लोगों की आत्मिक आवश्यकताओं का ध्यान करें जिनके लिए वे ज़िम्मेदार थे। क्योंकि प्रभु यीशु और उसके चेले ऐसे लोगों से मिलते-जुलते और उनके साथ भोजन करते थे जिन्हें ये अगुवे पापी और तुच्छ समझते थे, इसलिए वे प्रभु और उसके चेलों को भी अशुद्ध और नीच मानते थे; जबकि प्रभु और उसके चेले तो केवल विनाश के मार्ग पर चल रहे लोगों को बचाने, सुधारने के प्रयास कर रहे थे (लूका 5:30-31)।

   मसीही विश्वासी, अर्थात मसीह यीशु के सच्चे अनुयायी, वे लोग होने चाहिएं जो पाप में फंसे दूसरे लोगों की सहायता के लिए अपनी प्रतिष्ठा को दाँव पर लगाने को तैयार हों; परेशानियों और परिस्थितियों में पड़े लोगों की सहायता के लिए संसार की धारणाओं के विमुख चलने को तैयार हों। - जूली ऐकैरमैन लिंक


मसीह यीशु ने हमें भेजा है ताकि हम औरों को ले आएं।

क्योंकि मनुष्य का पुत्र खोए हुओं को ढूंढ़ने और उन का उद्धार करने आया है। - लूका 19:10

बाइबल पाठ: लूका 5:27-32
Luke 5:27 और इसके बाद वह बाहर गया, और लेवी नाम एक चुंगी लेने वाले को चुंगी की चौकी पर बैठे देखा, और उस से कहा, मेरे पीछे हो ले। 
Luke 5:28 तब वह सब कुछ छोड़कर उठा, और उसके पीछे हो लिया। 
Luke 5:29 और लेवी ने अपने घर में उसके लिये बड़ी जेवनार की; और चुंगी लेने वालों की और औरों की जो उसके साथ भोजन करने बैठे थे एक बड़ी भीड़ थी। 
Luke 5:30 और फरीसी और उन के शास्त्री उस के चेलों से यह कहकर कुड़कुड़ाने लगे, कि तुम चुंगी लेने वालों और पापियों के साथ क्यों खाते-पीते हो? 
Luke 5:31 यीशु ने उन को उत्तर दिया; कि वैद्य भले चंगों के लिये नहीं, परन्तु बीमारों के लिये अवश्य है। 
Luke 5:32 मैं धर्मियों को नहीं, परन्तु पापियों को मन फिराने के लिये बुलाने आया हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 62-64
  • 1 तिमुथियुस 1


गुरुवार, 20 अक्टूबर 2016

शब्द


   आर्कड्यूक फ्रांसिस फर्डिनैंड और उनकी पत्नि सोफी की हत्या के प्रत्युत्तर में, 28 जुलाई 1914 को ऑसट्रिया तथा हंग्री की सेनाओं ने सर्बिया के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया। इसके 90 दिन के अन्दर ही अन्य यूरोपीय देश अपनी युद्ध संधियों के पालन तथा अपनी महत्वकांक्षाओं की पूर्ति के लिए इस युद्ध में शामिल हो गए; और हत्या की उस एक घटना ने बढ़ कर प्रथम विश्व-युद्ध का रूप ले लिया जो आधुनिक संसार के इतिहास के सबसे विनाशकारी युद्धों में से एक था; युद्ध की त्रासदी और नुकसान हिला देने वाले होते हैं।

   हमारे पारस्परिक तथा पारिवारिक संबंधों में भी कुछ ही घृणापूर्ण बातें ऐसी ही विनाशकारी दरारें उत्पन्न कर देती हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में याकूब ने लिखा, "वैसे ही जीभ भी एक छोटा सा अंग है और बड़ी बड़ी डींगे मारती है: देखो, थोड़ी सी आग से कितने बड़े वन में आग लग जाती है" (याकूब 3:5); और नीतिवचन का लेखक वाद-विवाद से उत्पन्न होने वाले झगड़ों से बचे रहने का मार्ग बताता है: "कोमल उत्तर सुनने से जलजलाहट ठण्डी होती है, परन्तु कटुवचन से क्रोध धधक उठता है" (नीतिवचन 15:1)।

   एक छोटी सी टिप्पणी बड़ा झगड़ा आरंभ कर सकती है। जब परमेश्वर के अनुग्रह और सामर्थ से हम अपने शब्दों द्वारा किसी से बदला ना लेने का निर्णय लेते हैं तो हम अपने प्रभु परमेश्वर यीशु मसीह का आदर करते हैं; जिसके जीवन एवं व्यवहार के विषय में यशायाह भविष्यद्वक्ता ने भविष्यवाणी करी थी कि, "वह सताया गया, तौभी वह सहता रहा और अपना मुंह न खोला; जिस प्रकार भेड़ वध होने के समय वा भेड़ी ऊन कतरने के समय चुपचाप शान्त रहती है, वैसे ही उसने भी अपना मुंह न खोला" (यशायाह 53:7); और जीवनपर्यन्त प्रभु यीशु ने अपमान, निन्दा और गाली सुनकर भी कभी किसी को बुरा नहीं कहा, किसी का बुरा नहीं किया।

   बाइबल में नीतिवचन की पुस्तक हम से अनुरोध करती है कि हम सदा सत्य बोलें और अपने शब्दों से भी शान्ति के मार्ग पर ही चलें: "शान्ति देने वाली बात जीवन-वृक्ष है, परन्तु उलट फेर की बात से आत्मा दु:खित होती है" (नीतिवचन 15:4)। - डेविड मैक्कैसलैंड


प्रभु मुझे अपनी शान्ति का माध्यम बनाएं;
जहाँ घृणा है, मैं वहाँ प्रेम बोने पाऊँ।

पर जो ज्ञान ऊपर से आता है वह पहिले तो पवित्र होता है फिर मिलनसार, कोमल और मृदुभाव और दया, और अच्‍छे फलों से लदा हुआ और पक्षपात और कपट रहित होता है। - याकूब 3:17

बाइबल पाठ: नीतिवचन 15:1-23
Proverbs 15:1 कोमल उत्तर सुनने से जलजलाहट ठण्डी होती है, परन्तु कटुवचन से क्रोध धधक उठता है। 
Proverbs 15:2 बुद्धिमान ज्ञान का ठीक बखान करते हैं, परन्तु मूर्खों के मुंह से मूढ़ता उबल आती है। 
Proverbs 15:3 यहोवा की आंखें सब स्थानों में लगी रहती हैं, वह बुरे भले दोनों को देखती रहती हैं। 
Proverbs 15:4 शान्ति देने वाली बात जीवन-वृक्ष है, परन्तु उलट फेर की बात से आत्मा दु:खित होती है। 
Proverbs 15:5 मूढ़ अपने पिता की शिक्षा का तिरस्कार करता है, परन्तु जो डांट को मानता, वह चतुर हो जाता है। 
Proverbs 15:6 धर्मी के घर में बहुत धन रहता है, परन्तु दुष्ट के उपार्जन में दु:ख रहता है। 
Proverbs 15:7 बुद्धिमान लोग बातें करने से ज्ञान को फैलाते हैं, परन्तु मूर्खों का मन ठीक नहीं रहता। 
Proverbs 15:8 दुष्ट लोगों के बलिदान से यहोवा धृणा करता है, परन्तु वह सीधे लोगों की प्रार्थना से प्रसन्न होता है। 
Proverbs 15:9 दुष्ट के चाल चलन से यहोवा को घृणा आती है, परन्तु जो धर्म का पीछा करता उस से वह प्रेम रखता है। 
Proverbs 15:10 जो मार्ग को छोड़ देता, उसको बड़ी ताड़ना मिलती है, और जो डांट से बैर रखता, वह अवश्य मर जाता है। 
Proverbs 15:11 जब कि अधोलोक और विनाशलोक यहोवा के साम्हने खुले रहते हैं, तो निश्चय मनुष्यों के मन भी। 
Proverbs 15:12 ठट्ठा करने वाला डांटे जाने से प्रसन्न नहीं होता, और न वह बुद्धिमानों के पास जाता है। 
Proverbs 15:13 मन आनन्दित होने से मुख पर भी प्रसन्नता छा जाती है, परन्तु मन के दु:ख से आत्मा निराश होती है। 
Proverbs 15:14 समझने वाले का मन ज्ञान की खोज में रहता है, परन्तु मूर्ख लोग मूढ़ता से पेट भरते हैं। 
Proverbs 15:15 दुखिया के सब दिन दु:ख भरे रहते हैं, परन्तु जिसका मन प्रसन्न रहता है, वह मानो नित्य भोज में जाता है। 
Proverbs 15:16 घबराहट के साथ बहुत रखे हुए धन से, यहोवा के भय के साथ थोड़ा ही धन उत्तम है, 
Proverbs 15:17 प्रेम वाले घर में साग पात का भोजन, बैर वाले घर में पाले हुए बैल का मांस खाने से उत्तम है। 
Proverbs 15:18 क्रोधी पुरूष झगड़ा मचाता है, परन्तु जो विलम्ब से क्रोध करने वाला है, वह मुकद्दमों को दबा देता है। 
Proverbs 15:19 आलसी का मार्ग कांटों से रून्धा हुआ होता है, परन्तु सीधे लोगों का मार्ग राजमार्ग ठहरता है। 
Proverbs 15:20 बुद्धिमान पुत्र से पिता आनन्दित होता है, परन्तु मूर्ख अपनी माता को तुच्छ जानता है। 
Proverbs 15:21 निर्बुद्धि को मूढ़ता से आनन्द होता है, परन्तु समझ वाला मनुष्य सीधी चाल चलता है। 
Proverbs 15:22 बिना सम्मति की कल्पनाएं निष्फल हुआ करती हैं, परन्तु बहुत से मंत्रियों की सम्मत्ति से बात ठहरती है। 
Proverbs 15:23 सज्जन उत्तर देने से आनन्दित होता है, और अवसर पर कहा हुआ वचन क्या ही भला होता है! 

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 59-61
  • 2 थिस्सलुनीकियों 3


बुधवार, 19 अक्टूबर 2016

बुनियाद


   मुझे विरासत में एक पुराना घर मिला था, और मैं उसे ठीक-ठाक करके पुनः उपयोग के योग्य बनवा रहा था। घर बनाने वाले ठेकेदार ने आकर मुझ से कहा, तुम्हारे लिए एक बुरी खबर है; "जब हमने घर के पिछले भाग को आपके दफतर के लिए ठीक करना आरंभ किया तो पता चला कि पिछले भाग का अधिकांश हिस्से की बुनियाद ना के बराबर है, और हमें वह सारा भाग तोड़कर, सही बुनियाद डालकर फिर से बनाना पड़ेगा।" मैंने मन ही मन इस अनेपक्षित नए खर्च का हिसाब जोड़ते हुए उससे पूछा, "क्या यह करना ज़रुरी है? क्या आप ऐसे ही उसकी मरम्मत नहीं कर सकते?" लेकिन ठेकेदार अडिग रहा, और बोला, "यदि हम सही गहराई तक नई बुनियाद नहीं बनाते हैं तो भवन-निर्माण अधिकारी स्वीकृति नहीं देगा। सही बुनियाद होना आवश्यक है।"

   सही बुनियाद एक स्थिर और स्थाई तथा किसी अल्पकालिक निर्माण के बीच का अन्तर है। प्रभु यीशु जानते थे कि चाहे बुनियाद दिखाई नहीं देती है, लेकिन घर की सामर्थ और स्थिरता के लिए वह अति महत्वपूर्ण होती है (मत्ती 7:24-25); विशेषकर घर को प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित रखने के लिए। प्रभु यीशु यह भी जानते थे कि जिन लोगों से वे यह बातें कर रहे हैं, उनके मन कैसे हैं; वे लोग सरल तथा छोटा मार्ग चुन कर उस पर चलने, और कार्यों को आधा-अधूरा करके लक्ष्य प्राप्त करने के प्रयासों में रहते हैं।

   अन्य बुनियादें सरल और शीघ्र बन जाने वाली हो सकती हैं, लेकिन मसीही विश्वास के जीवन की सही बुनियाद प्रभु यीशु और परमेश्वर का वचन बाइबल है, जिस पर निर्माण करना सतत प्रयास और मेहनत माँगता है। लेकिन ऐसे बनाए गए विश्वास के जीवन ही हर संघर्ष और तूफान का सामना बिना कोई नुकसान उठाए कर सकते हैं, हर परिस्थिति में स्थिर खड़े रह सकते हैं। - मेरियन स्ट्राउड


बुद्धिमान व्यक्ति अपना जीवन चट्टान पर ही बनाते हैं।

क्योंकि उस नेव को छोड़ जो पड़ी है, और वह यीशु मसीह है कोई दूसरी नेव नहीं डाल सकता। - 1 कुरिन्थियों 3:11

बाइबल पाठ: मत्ती 7:24-29
Matthew 7:24 इसलिये जो कोई मेरी ये बातें सुनकर उन्हें मानता है वह उस बुद्धिमान मनुष्य की नाईं ठहरेगा जिसने अपना घर चट्टान पर बनाया। 
Matthew 7:25 और मेंह बरसा और बाढ़ें आईं, और आन्‍धियां चलीं, और उस घर पर टक्करें लगीं, परन्तु वह नहीं गिरा, क्योंकि उस की नेव चट्टान पर डाली गई थी। 
Matthew 7:26 परन्तु जो कोई मेरी ये बातें सुनता है और उन पर नहीं चलता वह उस निर्बुद्धि मनुष्य की नाईं ठहरेगा जिसने अपना घर बालू पर बनाया। 
Matthew 7:27 और मेंह बरसा, और बाढ़ें आईं, और आन्‍धियां चलीं, और उस घर पर टक्करें लगीं और वह गिरकर सत्यानाश हो गया।
Matthew 7:28 जब यीशु ये बातें कह चुका, तो ऐसा हुआ कि भीड़ उसके उपदेश से चकित हुई। 
Matthew 7:29 क्योंकि वह उन के शास्‍त्रियों के समान नहीं परन्तु अधिकारी की नाईं उन्हें उपदेश देता था। 

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 56-58
  • 2 थिस्सलुनीकियों 2


मंगलवार, 18 अक्टूबर 2016

सच्चा मित्र


   शेन नामक उपन्यास में, अमेरिका के सीमान्त इलाके के एक किसान, जो स्टैरेट और उसके घर आए एक रहस्यमय अनजान व्यक्ति शेन के बीच में मित्रता हो जाती है। इस मित्रता का आरंभ होता है जब वे दोनों मिलकर एक विशाल पेड़ के ठूँठ और जड़ को जो स्टैरेट के फार्म की धरती से निकालते हैं। फिर जब जो स्टैरेट शेन को एक झगड़े में से बचाता है, और जब शेन जो स्टैरेट को उसके फार्म की रक्षा करना तथा बेहतर बनाने के तरीके सिखाता है तो यह मित्रता और गहरी हो जाती है। दोनों व्यक्ति परस्पर आदर और वफादारी की भावना रखने लगते हैं। उनका यह व्यवहार परमेश्वर के वचन बाइबल में कही गई बात, "एक से दो अच्छे हैं, क्योंकि उनके परिश्रम का अच्छा फल मिलता है। क्योंकि यदि उन में से एक गिरे, तो दूसरा उसको उठाएगा; परन्तु हाय उस पर जो अकेला हो कर गिरे और उसका कोई उठाने वाला न हो" (सभोपदेशक 4:9-10) की पुष्टि है।

   बाइबल के दो अन्य पात्रों, दाऊद और राजा शाऊल के पुत्र योनातान ने भी इसी बात को व्यावाहरिक जीवन से दिखाया। वे दोनों मित्र थे, और परिस्थितियों ने उनकी मित्रता को जाँचा; दाऊद को शक था कि राजा शाऊल उसे मरवाना चाहता है, लेकिन योनातान इस बात को नहीं मानता था। तब उन्होंने निर्णय किया कि दाऊद जाकर छुप जाएगा और योनातान अपने पिता राजा शाऊल से इस बारे में बात करेगा और सच्चाई को जानने का प्रयास करेगा। जब योनातान ने जाना कि दाऊद का शक सही था और वास्तव में उसका पिता दाऊद को मारना चाहता था, तो उसने यह बात जाकर दाऊद को बता दी, उसे सुरक्षित निकल जाने के लिए भी कहा और उसके गले लगकर रोया भी तथा योनातान ने दाऊद को जाते-जाते आशीष भी दी।

   यदि आपने उसके पापों की क्षमा, समर्पण तथा उद्धार के निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है तो प्रभु यीशु मसीह में आपके पास एक सच्चा मित्र है जो सदा आपके साथ वफादार बना रहेगा; यदि आप ठोकर खाएं तो आपको संभालेगा, सदा आपका सहायक रहेगा, आपके लिए सदा उपलब्ध रहेगा। उसने अपने प्रेम और मित्रता की वफादारी का प्रमाण आपके लिए कलवरी के क्रूस पर अपने प्राण बलिदान करने के द्वारा दिया है। प्रभु यीशु की मित्रता स्वीकार करना कभी भी किसी भी रीति से हानि का सौदा नहीं है, वरन सभी के लिए अनन्तकालीन लाभ और आनन्द का मार्ग है। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


प्रभु यीशु से बढ़कर सच्चा और वफादार मित्र कोई और नहीं है।

इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे। जो कुछ मैं तुम्हें आज्ञा देता हूं, यदि उसे करो, तो तुम मेरे मित्र हो। - यूहन्ना 15:13-14

बाइबल पाठ: 1 शमूएल 20:32-42
1 Samuel 20:32 योनातन ने अपने पिता शाऊल को उत्तर देकर उस से कहा, वह क्यों मारा जाए? उसने क्या किया है? 
1 Samuel 20:33 तब शाऊल ने उसको मारने के लिये उस पर भाला चलाया; इससे योनातन ने जान लिया, कि मेरे पिता ने दाऊद को मार डालना ठान लिया है। 
1 Samuel 20:34 तब योनातन क्रोध से जलता हुआ मेज पर से उठ गया, और महीने के दूसरे दिन को भोजन न किया, क्योंकि वह बहुत खेदित था, इसलिये कि उसके पिता ने दाऊद का अनादर किया था।
1 Samuel 20:35 बिहान को योनातन एक छोटा लड़का संग लिये हुए मैदान में दाऊद के साथ ठहराए हुए स्थान को गया। 
1 Samuel 20:36 तब उसने अपने छोकरे से कहा, दौड़कर जो जो तीर मैं चलाऊं उन्हें ढूंढ़ ले आ। छोकरा दौड़ता ही था, कि उसने एक तीर उसके परे चलाया। 
1 Samuel 20:37 जब छोकरा योनातन के चलाए तीर के स्थान पर पहुंचा, तब योनातन ने उसके पीछे से पुकार के कहा, तीर तो तेरी परली ओर है। 
1 Samuel 20:38 फिर योनातन ने छोकरे के पीछे से पुकारकर कहा, बड़ी फुर्ती कर, ठहर मत। और योनातन ने छोकरे के पीछे से पुकार के कहा, बड़ी फुर्ती कर, ठहर मत! और योनातन का छोकरा तीरों को बटोर के अपने स्वामी के पास ल आया। 
1 Samuel 20:39 इसका भेद छोकरा तो कुछ न जानता था; केवल योनातन और दाऊद इस बात को जानते थे। 
1 Samuel 20:40 और योनातन ने अपने हथियार अपने छोकरे को देकर कहा, जा, इन्हें नगर को पहुंचा। 
1 Samuel 20:41 ज्योंही छोकरा चला गया, त्योंही दाऊद दक्खिन दिशा की अलंग से निकला, और भूमि पर औंधे मुंह गिर के तीन बार दण्डवत की; तब उन्होंने एक दूसरे को चूमा, और एक दूसरे के साथ रोए, परन्तु दाऊद को रोना अधिक था। 
1 Samuel 20:42 तब योनातन ने दाऊद से कहा, कुशल से चला जा; क्योंकि हम दोनों ने एक दूसरे से यह कहके यहोवा के नाम की शपथ खाई है, कि यहोवा मेरे और तेरे मध्य, और मेरे और तेरे वंश के मध्य में सदा रहे। तब वह उठ कर चला गया; और योनातन नगर में गया। 

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 53-55
  • 2 थिस्सलुनीकियों 1


सोमवार, 17 अक्टूबर 2016

सदा विद्यमान


   जब हमारी बेटी कैथरीन बहुत छोटी थी, अभी वह चल या रेंग भी नहीं पाती थी, तब उसने लोगों से अपने आप को छिपाने, या अपने आप को अकेला कर लेने, या अपनी मर्ज़ी करने का मार्ग बना लिया था - वह बस अपनी आँखें बन्द कर लेती थी। कैथरीन को लगता था कि यदि वह किसी को देख नहीं पा रही है तो कोई और भी उसे देख नहीं पा रहा है, और वह अपने आप में एकान्त में है। जब हम उसे कार में लेकर कहीं जाते और कोई नया अनजान व्यक्ति उससे हैलो करता, तब वह यही करती; यदि खाने के समय उसे मेज़ पर से दिए जा रहे भोजन का इन्कार करना होता तब भी वह यही करती और जब हम रात में उससे कहते कि अब उसके सोने का समय हो गया है तो हमें नज़रन्दाज़ करने के लिए भी वह यही करती।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के एक पात्र, योना ने भी अपने आप को परमेश्वर से छुपाने का कुछ ऐसा ही तरीका निकाला था, लेकिन जैसे हमारी बेटी कैथरीन का तरीका सफल नहीं होने पाया, योना का तरीका भी सफल नहीं हुआ। परमेश्वर ने योना से कहा कि वह निनवे जाकर वहाँ के लोगों के मध्य परमेश्वर के नाम से पश्चाताप करने का प्रचार करे क्योंकि उनके पाप के कारण निनवे के लोगों का विनाश आने को था। लेकिन योना निनवे के लोगों से बैर रखता था और वह निनवे जाने की बजाए उसकी विपरीत दिशा में चला गया, अपने आप को परमेश्वर से छिपा लेने का प्रयास करने लगा। लेकिन योना ने शीघ्र ही जान लिया कि वह परमेश्वर से छिप कर कहीं नहीं जा सकता है; ऐसा कोई स्थान नहीं है जहाँ परमेश्वर उसे देख नहीं सकता है। बाइबल ऐसी कहानियों से भरी पड़ी है जिनमें परमेश्वर ने उन लोगों को ढूँढ़ लिया जो उससे छुपना चाहते थे (निर्गमन 2:11-36; 1 राजा 19:1-7; प्रेरितों 9:1-19)।

   हो सकता है कि आपने भी परमेश्वर से छिपने का, यह समझने का प्रयास किया हो कि परमेश्वर आपको देख नहीं सकता है। लेकिन यह जान लीजिए, यदि एक बलवाई भविष्यद्वक्ता योना द्वारा एक विशाल मछली के पेट से करी गई प्रार्थना को परमेश्वर सुन सकता है, तो फिर आप चाहे जहाँ भी हों, उस स्थान से परमेश्वर आप को भी भली-भांति देख और सुन सकता है; जो भी आपने किया या कहा है, परमेश्वर को वह सब पता है।

   लेकिन यह कोई भयभीत होने की नहीं, वरन बड़ी शान्ति और सुख की बात है - वह हर समय हर स्थान पर सदा विद्यमान सर्वज्ञानी परमेश्वर है जो हमारी प्रत्येक बात, प्रत्येक भावना, प्रत्येक बुराई को जानने के बावजुद हम से प्रेम करता है, प्रभु यीशु मसीह में होकर वह हमें अपने साथ ले लेना चाहता है, हमारी देखभाल करना चाहता है और हमारे लिए भलाई ही करना चाहता है। - रैंडी किल्गोर


जब तक परमेश्वर की नज़र हम पर बनी हुई है, हमें अपने आस-पास की
 परिस्थितियों और परेशानियों से घबराने की आवश्यकता नहीं है।

मैं तेरे आत्मा से भाग कर किधर जाऊं? वा तेरे साम्हने से किधर भागूं? यदि मैं आकाश पर चढूं, तो तू वहां है! यदि मैं अपना बिछौना अधोलोक में बिछाऊं तो वहां भी तू है! यदि मैं भोर की किरणों पर चढ़ कर समुद्र के पार जा बसूं, तो वहां भी तू अपने हाथ से मेरी अगुवाई करेगा, और अपने दाहिने हाथ से मुझे पकड़े रहेगा। - भजन 139:7-10

बाइबल पाठ: योना 1:1-2:1
Jonah 1:1 यहोवा का यह वचन अमितै के पुत्र योना के पास पहुंचा, 
Jonah 1:2 उठ कर उस बड़े नगर नीनवे को जा, और उसके विरुद्ध प्रचार कर; क्योंकि उसकी बुराई मेरी दृष्टि में बढ़ गई है। 
Jonah 1:3 परन्तु योना यहोवा के सम्मुख से तर्शीश को भाग जाने के लिये उठा, और यापो नगर को जा कर तर्शीश जाने वाला एक जहाज पाया; और भाड़ा देकर उस पर चढ़ गया कि उनके साथ हो कर यहोवा के सम्मुख से तर्शीश को चला जाए।
Jonah 1:4 तब यहोवा ने समुद्र में एक प्रचण्ड आंधी चलाई, और समुद्र में बड़ी आंधी उठी, यहां तक कि जहाज टूटने पर था। 
Jonah 1:5 तब मल्लाह लोग डर कर अपने अपने देवता की दोहाई देने लगे; और जहाज में जो व्यापार की सामग्री थी उसे समुद्र में फेंकने लगे कि जहाज हल्का हो जाए। परन्तु योना जहाज के निचले भाग में उतरकर सो गया था, और गहरी नींद में पड़ा हुआ था। 
Jonah 1:6 तब मांझी उसके निकट आकर कहने लगा, तू भारी नींद में पड़ा हुआ क्या करता है? उठ, अपने देवता की दोहाई दे! सम्भव है कि परमेश्वर हमारी चिन्ता करे, और हमारा नाश न हो।
Jonah 1:7 तब उन्होंने आपस में कहा, आओ, हम चिट्ठी डाल कर जान लें कि यह विपत्ति हम पर किस के कारण पड़ी है। तब उन्होंने चिट्ठी डाली, और चिट्ठी योना के नाम पर निकली। 
Jonah 1:8 तब उन्होंने उस से कहा, हमें बता कि किस के कारण यह विपत्ति हम पर पड़ी है? तेरा उद्यम क्या है? और तू कहां से आया है? तू किस देश और किस जाति का है? 
Jonah 1:9 उसने उन से कहा, मैं इब्री हूं; और स्वर्ग का परमेश्वर यहोवा जिसने जल स्थल दोनों को बनाया है, उसी का भय मानता हूं। 
Jonah 1:10 तब वे निपट डर गए, और उस से कहने लगे, तू ने यह क्या किया है? वे जान गए थे कि वह यहोवा के सम्मुख से भाग आया है, क्योंकि उसने आप ही उन को बता दिया था।
Jonah 1:11 तब उन्होंने उस से पूछा, हम तेरे साथ क्या करें जिस से समुद्र शान्त हो जाए? उस समय समुद्र की लहरें बढ़ती ही जाती थीं। 
Jonah 1:12 उसने उन से कहा, मुझे उठा कर समुद्र में फेंक दो; तब समुद्र शान्त पड़ जाएगा; क्योंकि मैं जानता हूं, कि यह भारी आंधी तुम्हारे ऊपर मेरे ही कारण आई है। 
Jonah 1:13 तौभी वे बड़े यत्न से खेते रहे कि उसको किनारे पर लगाएं, परन्तु पहुंच न सके, क्योंकि समुद्र की लहरें उनके विरुद्ध बढ़ती ही जाती थीं। 
Jonah 1:14 तब उन्होंने यहोवा को पुकार कर कहा, हे यहोवा हम बिनती करते हैं, कि इस पुरूष के प्राण की सन्ती हमारा नाश न हो, और न हमें निर्दोष की हत्या का दोषी ठहरा; क्योंकि हे यहोवा, जो कुछ तेरी इच्छा थी वही तू ने किया है। 
Jonah 1:15 तब उन्होंने योना को उठा कर समुद्र में फेंक दिया; और समुद्र की भयानक लहरें थम गईं। 
Jonah 1:16 तब उन मनुष्यों ने यहोवा का बहुत ही भय माना, और उसको भेंट चढ़ाई और मन्नतें मानीं।
Jonah 1:17 यहोवा ने एक बड़ा सा मच्छ ठहराया था कि योना को निगल ले; और योना उस मच्छ के पेट में तीन दिन और तीन रात पड़ा रहा।
Jonah 2:1 तब योना ने उसके पेट में से अपने परमेश्वर यहोवा से प्रार्थना कर के कहा 

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 50-52
  • 1 थिस्सलुनीकियों 5


रविवार, 16 अक्टूबर 2016

रहस्यमय मार्ग


   मैं और मेरी पत्नि हमारी बेटी से मिलने जाने के लिए 400 मील की सड़क यात्रा पर निकले। चलते समय मैंने बेटी के घर को हमारा गन्तव्य बनाकर जी.पी.एस. को सेट कर दिया जिससे वह हमें रास्ता दिखाता रहे। यात्रा के दौरान, एक स्थान पर आकर जी.पी.एस. ने ना जाने क्यों हमें मुख्य-अन्तर्राज्यमार्ग से हटाकर एक सह-मार्ग पर डाल दिया, जिससे हमें एक शहर के बाहर से चक्कर लगाकर फिर उसी मुख्य-अन्तर्राज्यमार्ग पर लौटकर आना पड़ा। मैं जी.पी.एस. द्वारा हमें दिलाए गए इस चक्कर को लेकर असामंजस में था, कि क्यों हमें एक सही और अच्छे-खासे अन्तर्राज्यमार्ग से पहले हटाया गया और फिर वापस उसी पर लाया गया। मुझे इस बात का उत्तर कभी नहीं मिल पाया, लेकिन हम उसी जी.पी.एस. की सहायता से अपनी बेटी के घर भी पहुँच गए और फिर वापसी की यात्रा में भी उसी जी.पी.एस. के सहारे सही-सलामत अपने घर तक भी आ गए।

   इससे मुझे जीवन के मार्गों में अनेपक्षित आने वाले चक्करों के बारे में सोचने को भी मिला। हमें लगता है कि हम अपनी जीवन यात्रा में एक सुगम और सही मार्ग पर चले जा रहे हैं, और अचानक ही किसी परिस्थिति या घटना के द्वारा परमेश्वर हमें एक अन्य अनजान मार्ग पर मोड़ देता है। यह कोई बीमारी, कार्यस्थल अथवा घर में उत्पन्न होने वाली कोई विषम परिस्थिति, या कोई अनेपक्षित त्रासदी हो सकती है। हमें समझ नहीं आता कि परमेश्वर ने हमारे जीवनों में ये उथल-पुथल क्यों आने दी, या उस उथल-पुथल का उद्देश्य क्या है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के एक प्रमुख नायक अब्राहम से परमेश्वर ने कहा, "यहोवा ने अब्राम से कहा, अपने देश, और अपनी जन्मभूमि, और अपने पिता के घर को छोड़कर उस देश में चला जा जो मैं तुझे दिखाऊंगा" (उत्पत्ति 12:1)। उस समय अवश्य ही अब्राहाम ने सोचा तो होगा कि परमेश्वर उसके अच्छे-खासे घर-परिवार को उखाड़ कर एक रेगिस्तान और बियाबान में क्यों ले जा रहा है; परन्तु उसने परमेश्वर पर तथा परमेश्वर के उद्देश्यों तथा मार्गों पर विश्वास रखा और परमेश्वर के कहे अनुसार निकल पड़ा।

   एक जी.पी.एस. गलतियाँ कर सकता है, परन्तु परमेश्वर नहीं। परमेश्वर के लिए भजनकार ने कहा है, "हमारे पुरखा तुझी पर भरोसा रखते थे; वे भरोसा रखते थे, और तू उन्हें छुड़ाता था" (भजन 22:4)। परमेश्वर हमारे जीवन के हर मार्ग पर, हर पल हमारे साथ रहता है, हमारा मार्गदर्शन करता है और हमारी भलाई के लिए ही प्रत्येक कार्य को करता है, होने देता है; उसके मार्ग रहस्यमय हो सकते हैं परन्तु हमारे लिए सदा सही और लाभदायक भी होते हैं। - डेव ब्रैनन


यदि हम मार्ग को जानने वाले के साथ बने रहें तो फिर हमें मार्ग को जानने की आवश्यकता नहीं है।

यीशु ने उस से कहा, मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता। - यूहन्ना 14:6

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 12:1-10; 13:1
Genesis 12:1 यहोवा ने अब्राम से कहा, अपने देश, और अपनी जन्मभूमि, और अपने पिता के घर को छोड़कर उस देश में चला जा जो मैं तुझे दिखाऊंगा। 
Genesis 12:2 और मैं तुझ से एक बड़ी जाति बनाऊंगा, और तुझे आशीष दूंगा, और तेरा नाम बड़ा करूंगा, और तू आशीष का मूल होगा। 
Genesis 12:3 और जो तुझे आशीर्वाद दें, उन्हें मैं आशीष दूंगा; और जो तुझे कोसे, उसे मैं शाप दूंगा; और भूमण्डल के सारे कुल तेरे द्वारा आशीष पाएंगे। 
Genesis 12:4 यहोवा के इस वचन के अनुसार अब्राम चला; और लूत भी उसके संग चला; और जब अब्राम हारान देश से निकला उस समय वह पचहत्तर वर्ष का था। 
Genesis 12:5 सो अब्राम अपनी पत्नी सारै, और अपने भतीजे लूत को, और जो धन उन्होंने इकट्ठा किया था, और जो प्राणी उन्होंने हारान में प्राप्त किए थे, सब को ले कर कनान देश में जाने को निकल चला; और वे कनान देश में आ भी गए। 
Genesis 12:6 उस देश के बीच से जाते हुए अब्राम शकेम में, जहां मोरे का बांज वृक्ष है, पंहुचा; उस समय उस देश में कनानी लोग रहते थे। 
Genesis 12:7 तब यहोवा ने अब्राम को दर्शन देकर कहा, यह देश मैं तेरे वंश को दूंगा: और उसने वहां यहोवा के लिये जिसने उसे दर्शन दिया था, एक वेदी बनाई। 
Genesis 12:8 फिर वहां से कूच कर के, वह उस पहाड़ पर आया, जो बेतेल के पूर्व की ओर है; और अपना तम्बू उस स्थान में खड़ा किया जिसकी पच्छिम की ओर तो बेतेल, और पूर्व की ओर ऐ है; और वहां भी उसने यहोवा के लिये एक वेदी बनाई: और यहोवा से प्रार्थना की 
Genesis 12:9 और अब्राम कूच कर के दक्खिन देश की ओर चला गया।
Genesis 12:10 और उस देश में अकाल पड़ा: और अब्राम मिस्र देश को चला गया कि वहां परदेशी हो कर रहे -- क्योंकि देश में भयंकर अकाल पड़ा था। 
Genesis 13:1 तब अब्राम अपनी पत्नी, और अपनी सारी सम्पत्ति ले कर, लूत को भी संग लिये हुए, मिस्र को छोड़ कर कनान के दक्खिन देश में आया।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 47-49
  • 1 थिस्सलुनीकियों 4