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मंगलवार, 25 अक्टूबर 2011

आकर्षण

   एक व्यक्ति अपने मित्र से मिलने उसके शहर गया। मित्र ने उसे अपने शहर का एक सुन्दर भवन दिखाया, किंतु उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखाई। उसकी खामोशी से निराश हो कर मित्र ने पूछा, "क्या यह भवन तुम्हें सुन्दर नहीं लगा?" उसने उत्तर दिया, "नहीं, क्योंकि मैं रोम के भवन देख कर आ रहा हूँ।" क्योंकि वह रोम के भव्य भवन देख चुका था, इसलिए मित्र के शहर के भवन उनके सामने उसे फीके प्रतीत हुए और उसे उन भवनों में कोई रुचि नहीं हुई।

   प्रसिद्ध प्रचारक स्पर्जन ने इस कहानी पर टिप्पणी करते हुए कहा, "हे मसीही विश्वासी, यदि संसार तुम्हें अपने दृश्यों और संभावनाओं द्वारा आकर्षित करता है, तो स्वर्ग के उस दर्शन के समक्ष जो तुम्हें दिया गया है, और जिसे तुम विश्वास द्वारा कभी भी पुनः देख सकते हो, संसार के उन दृश्यों और प्रलोभनों को तुच्छ जानो।"
   जिन विश्वासियों ने परमेश्वर के वचन में विश्वास द्वारा स्वर्ग का स्वाद चख लिया है, और मसीह यीशु में होकर मिलने वाली स्वर्गीय आशीशों को जान लिया है, वे इस संसार के प्रलोभनों से आकर्षित नहीं होते। वे संसार के खोखलेपन और व्यर्थ आकर्षणों की सत्यता को पहचानते हैं और उनसे प्रभावित नहीं होते।

   खरी और अनन्त मूल्य की बातों को पहचान कर वे संसार की क्षणिक और नशवर बातों के लिए कहते हैं, "यह संसार ले लो, और मुझे यीशु दे दो।" - रिचर्ड डी हॉन

यदि मसीह हमें आकर्षित करता है तो संसार हमारा ध्यान भंग नहीं कर सकता।

तुम न तो संसार से और न संसार में की वस्‍तुओं से प्रेम रखो: यदि कोई संसार से प्रेम रखता है, तो उस में पिता का प्रेम नहीं है। - १ युहन्ना २:१५
 
बाइबल पाठ: १ युहन्ना २:१२-१७
    1Jn 2:12  हे बालको, मैं तुम्हें इसलिये लिखता हूं, कि उसके नाम से तुम्हारे पाप क्षमा हुए।
    1Jn 2:13  हे पितरों, मैं तुम्हें इसलिये लिखता हूं, कि जो आदि से है, तुम उसे जानते हो: हे जवानों, मैं तुम्हें इसलिये लिखता हूं, कि तुम ने उस दुष्‍ट पर जय पाई है: हे लड़कों मैं ने तुम्हें इसलिये लिखा है, कि तुम पिता को जान गए हो।
    1Jn 2:14  हे पितरों, मैं ने तुम्हें इसलिये लिखा है, कि जो आदि से है तुम उसे जान गए हो: हे जवानो, मैं ने तुम्हें इसलिये लिखा है, कि बलवन्‍त हो, और परमेश्वर का वचन तुम में बना रहता है, और तुम ने उस दुष्‍ट पर जय पाई है।
    1Jn 2:15  तुम न तो संसार से और न संसार में की वस्‍तुओं से प्रेम रखो: यदि कोई संसार से प्रेम रखता है, तो उस में पिता का प्रेम नहीं है।
    1Jn 2:16  क्‍योंकि जो कुछ संसार में है, अर्थात शरीर की अभिलाषा, और आंखों की अभिलाषा और जीविका का घमण्‍ड, वह पिता की ओर से नहीं, परन्‍तु संसार ही की ओर से है।
    1Jn 2:17  और संसार और उस की अभिलाषाएं दोनों मिटते जाते हैं, पर जो परमेश्वर की इच्‍छा पर चलता है, वह सर्वदा बना रहेगा।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यर्मियाह ६-८ 
  • १ तिमुथियुस ५

सोमवार, 24 अक्टूबर 2011

जीवन तथा आनन्द का आधार

   जो लोग अपने जीवन का आधार भौतिक वस्तुओं की अपेक्षा आत्मिक मूल्यों पर रखते हैं, वे जीवन के उतार-चढ़ाव झेलने के लिए सर्वदा तैयार रहते हैं। अपनी पुस्तक "जीवन की ४५० कहानियां" में गस्ट एन्डरसन कैनडा के एलबर्टा प्रांत में अपने अनुभव के बारे में बताते हैं। जब वे वहां पहुंचे तो पिछले ८ वर्षों से वहां अकाल पड़ा हुआ था, किसानों की अर्थिक स्थिति बदहाल थी; किंतु अपनी गरीबी के बावजूद कई किसान परमेश्वर की स्तुति और आराधना करने के लिए एकत्रित हुआ करते थे। उन में से एक किसान की गवाही ने एन्डरसन को बहुत प्रभावित किया, जब अपने पुराने वस्त्र पहने हुए वह खड़ा हुआ और परमेश्वर के वचन बाइबल से हबक्कुक की पुस्तक के एक खंड को उद्वत किया: "क्योंकि चाहे अंजीर के वृक्षों में फूल न लगें, और न दाखलताओं में फल लगें, जलपाई के वृक्ष से केवल धोखा पाया जाए और खेतों में अन्न न उपजे, भेड़शालाओं में भेड़-बकरियां न रहें, और न थानों में गाय बैल हों, तौभी मैं यहोवा के कारण आनन्दित और मगन रहूंगा, और अपने उद्धारकर्त्ता परमेश्वर के द्वारा अति प्रसन्न रहूंगा।" - हबक्कुक ३:१७-१८

   जो भौतिक वस्तुएं धन द्वारा प्राप्त करी जा सकती हैं उनमें आनदित होना कोई गलत बात नहीं है, लेकिन हमें उन्हें कभी अपने आनन्द का आधार नहीं बनाना चहिए। यदि भौतिक वस्तुएं हमारे आनन्द का आधार बनती हैं, तो किसी कारणवश हमारे जीवन में उनके बने न रहने पर हम टूट जाते हैं, निराश हो जाते हैं। किंतु यदि हमारे आनन्द का आधार हमारा परमेश्वर प्रभु है, तो एसा कुछ भी नहीं है जो हमारे आधार को नष्ट कर सके, आर्थिक संकट भी नहीं। जो अपने परमेश्वर को जानते हैं और उसपर विश्वास रखते हैं वे तंगहाली और कठिनाईयों में भी उसमें आनन्दित रह सकते हैं। - रिचर्ड डी हॉन

खुशी घटनाओं पर आधारित हो सकती है, परन्तु अनन्त आनन्द प्रभु यीशु पर ही आधारित है।

क्योंकि चाहे अंजीर के वृक्षों में फूल न लगें, और न दाखलताओं में फल लगें, जलपाई के वृक्ष से केवल धोखा पाया जाए और खेतों में अन्न न उपजे, भेड़शालाओं में भेड़-बकरियां न रहें, और न थानों में गाय बैल हों, तौभी मैं यहोवा के कारण आनन्दित और मगन रहूंगा, और अपने उद्धारकर्त्ता परमेश्वर के द्वारा अति प्रसन्न रहूंगा। - हबक्कुक ३:१७-१८
 
बाइबल पाठ: २ कुरिन्थियों ४
    2Co 4:1  इसलिये जब हम पर ऐसी दया हुई, कि हमें यह सेवा मिली, तो हम हियाव नहीं छोड़ते।
    2Co 4:2  परन्‍तु हम ने लज्ज़ा के गुप्‍त कामों को त्याग दिया, और न चतुराई से चलते, और न परमेश्वर के वचन में मिलावट करते हैं, परन्‍तु सत्य को प्रगट करके, परमेश्वर के साम्हने हर एक मनुष्य के विवेक में अपनी भलाई बैठाते हैं।
    2Co 4:3  परन्‍तु यदि हमारे सुसमाचार पर परदा पड़ा है, तो यह नाश होने वालों ही के लिये पड़ा है।
    2Co 4:4  और उन अविश्वासियों के लिये, जिन की बुद्धि को इस संसार के ईश्वर ने अन्‍धी कर दी है, ताकि मसीह जो परमेश्वर का प्रतिरूप है, उसके तेजोमय सुसमाचार का प्रकाश उन पर न चमके।
    2Co 4:5  क्‍योंकि हम अपने को नहीं, परन्‍तु मसीह यीशु को प्रचार करते हैं, कि वह प्रभु है; और उसके विषय में यह कहते हैं, कि हम यीशु के कारण तुम्हारे सेवक हैं।
    2Co 4:6  इसलिये कि परमेश्वर ही है, जिस ने कहा, कि अन्‍धकार में से ज्योति चमके; और वही हमारे हृदयों में चमका, कि परमेश्वर की महिमा की पहिचान की ज्योति यीशु मसीह के चेहरे से प्रकाशमान हो।
    2Co 4:7  परन्‍तु हमारे पास यह धन मिट्टी के बरतनों में रखा है, कि यह असीम सामर्थ हमारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर ही की ओर से ठहरे।
    2Co 4:8  हम चारों ओर से क्‍लेश तो भोगते हैं, पर संकट में नहीं पड़ते; निरूपाय तो हैं, पर निराश नहीं होते।
    2Co 4:9  सताए तो जाते हैं, पर त्यागे नहीं जाते; गिराए तो जाते हैं, पर नाश नहीं होते।
    2Co 4:10  हम यीशु की मृत्यु को अपनी देह में हर समय लिये फिरते हैं कि यीशु का जीवन भी हमारी देह में प्रगट हो।
    2Co 4:11  क्‍योंकि हम जीते जी सर्वदा यीशु के कारण मृत्यु के हाथ में सौंपे जाते हैं कि यीशु का जीवन भी हमारे मरणहार शरीर में प्रगट हो।
    2Co 4:12  सो मृत्यु तो हम पर प्रभाव डालती है और जीवन तुम पर।
    2Co 4:13  और इसलिये कि हम में वही विश्वास की आत्मा है, (जिस के विषय मे लिखा है, कि मैं ने विश्वास किया, इसलिये मैं बोला) सो हम भी विश्वास करते हैं, इसी लिये बोलते हैं।
    2Co 4:14  क्‍योंकि हम जानते हैं, जिस ने प्रभु यीशु को जिलाया, वही हमें भी यीशु में भागी जान कर जिलाएगा, और तुम्हारे साथ अपने साम्हने उपस्थित करेगा।
    2Co 4:15  क्‍योंकि सब वस्‍तुएं तुम्हारे लिये हैं, ताकि अनुग्रह बहुतों के द्वारा अधिक होकर परमेश्वर की महिमा के लिये धन्यवाद भी बढ़ाए।
    2Co 4:16  इसलिये हम हियाव नहीं छोड़ते; यद्यपि हमारा बाहरी मनुष्यत्‍व नाश भी होता जाता है, तौभी हमारा भीतरी मनुष्यत्‍व दिन प्रतिदिन नया होता जाता है।
    2Co 4:17  क्‍योंकि हमारा पल भर का हल्का सा क्‍लेश हमारे लिये बहुत ही महत्‍वपूर्ण और अनन्‍त जीवन महिमा उत्‍पन्न करता जाता है।
    2Co 4:18  और हम तो देखी हुई वस्‍तुओं को नहीं परन्‍तु अनदेखी वस्‍तुओं को देखते रहते हैं, क्‍योंकि देखी हुई वस्‍तुएं थोड़े ही दिन की हैं, परन्‍तु अनदेखी वस्‍तुएं सदा बनी रहती हैं।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यर्मियाह ३-५ 
  • १ तिमुथियुस ४

रविवार, 23 अक्टूबर 2011

लक्षय पर दृष्टि

   पौल पोवेल ने एक चित्र का वर्णन लिखा जिसमें पुराने समय के माल तथा यात्रि ले जाने वाली घोड़ा गाड़ियों के एक काफिले को दिखाया गया है। रात्रि का समय है, सुरक्षा के लिए सभी घोड़ा गाड़ियों को गोलाकार खड़ा किया गया है, गोलाकार के मध्य में आग के चारों ओर काफिले के लोग एकत्रित हैं और काफिले का अगुआ उनसे कुछ बात कर रहा है। अगुए के सामने एक नक्षा बिछा हुआ है जिसपर एक टेढ़ी-मेढ़ी रेखा द्वारा उनका अब तब का तय किया हुआ मार्ग अंकित है। उस रेखा के एक सिरे पर अगुए की एक अंगुली रखी हुई है, चेहरे पर दृढ़ निश्चय झलक रहा है और दूसरा हाथ दूर हलके से दिख रहे पर्वत श्रंखला की ओर संकेत कर रहा है। ऐसा प्रतीत होता है जैसे वह कह रहा हो कि चाहे हमें इस ओर से पर्वत श्रंखला से होकर जाना पड़े अथवा दूसरी ओर से बहती नदी में से होकर, लेकिन हमारा लक्षय उधर पश्चिम दिशा की ओर ही रहेगा।

   प्रत्येक मसीही विश्वासी को भी ऐसे ही दृढ़ निश्चय के साथ अपने निशाने की ओर बढ़ना चाहिए। मसीही जीवन यात्रा आसान नहीं है। जो मार्ग हमारे परमेश्वर ने हमारे लिए चुना है उस में पर्वत हो सकते हैं, कठिनाईयां और प्रलोभन हमें मार्ग से भटकाने के लिए सामने आ सकते हैं, किंतु यदि हम अपनी दिशा और लक्षय - प्रभु यीशु मसीह पर अपनी नज़रें लगाए रहें तो हम मार्ग से नहीं भटकेंगे। यदि हम अपने प्रभु के पीछे विश्वासयोग्यता से होकर चलते रहें तो अपने लक्षय तक अवश्य पहुंचेंगे।

   जब कभी मार्ग में प्रलोभन या ध्यान भंग करने वाली बातें हमें मार्ग से भटका कर ले जाएं, तो हम अपनी इस गलती को मान कर उसके लिए प्रभु यीशु से क्षमा मांग सकते हैं और फिर अपनी नज़रें अपने लक्षय की ओर लगा कर आगे बढ़ सकते हैं। जब तक हमारी दृष्टि हमारे प्रभु पर लगी रहेगी, हमारी दृष्टि सही दिशा और लक्षय पर भी लगी रहेगी। - डेव एगनर


यदि दृष्टि लक्ष्य पर टिकी रहे तो कोई बाधा हमें रोक नहीं पाएगी।

...तो आओ, हर एक रोकने वाली वस्‍तु, और उलझाने वाले पाप को दूर करके, वह दौड़ जिस में हमें दौड़ना है, धीरज से दौड़ें। और विश्वास के कर्ता और सिद्ध करने वाले यीशु की ओर ताकते रहें;... - इब्रानियों १२:१, २
 
बाइबल पाठ: इब्रानियों ११:३२-१२:२
    Heb 11:32  अब और क्‍या कहूँ क्‍योंकि समय नहीं रहा, कि गिदोन का, और बाराक और समसून का, और यिफतह का, और दाऊद का और शामुएल का, और भविष्यद्वक्ताओं का वर्णन करूं।
    Heb 11:33  इन्‍होंने विश्वास ही के द्वारा राज्य जीते; धर्म के काम किए; प्रतिज्ञा की हुई वस्‍तुएं प्राप्‍त की, सिंहों के मुंह बन्‍द किए।
    Heb 11:34  आग की ज्‍वाला को ठंडा किया; तलवार की धार से बच निकले, निर्बलता में बलवन्‍त हुए; लड़ाई में वीर निकले; विदेशियों की फौजों को मार भगाया।
    Heb 11:35  स्‍त्रियों ने अपने मरे हुओं को फिर जीवते पाया; कितने तो मार खाते खाते मर गए और छुटकारा न चाहा; इसलिये कि उत्तम पुनरूत्थान के भागी हों।
    Heb 11:36  कई एक ठट्ठों में उड़ाए जाने, और कोड़े खाने, वरन बान्‍धे जाने और कैद में पड़ने के द्वारा परखे गए।
    Heb 11:37  पत्थरवाह किए गए; आरे से चीरे गए; उन की परीक्षा की गई; तलवार से मारे गए; वे कंगाली में और क्‍लेश में और दुख भोगते हुए भेड़ों और बकिरयों की खालें ओढ़े हुए, इधर उधर मारे मारे फिरे।
    Heb 11:38  और जंगलों, और पहाड़ों, और गुफाओं में, और पृथ्वी की दरारों में भटकते फिरे।
    Heb 11:39  संसार उन के योगय न था: और विश्वास ही के द्वारा इन सब के विषय में अच्‍छी गवाही दी गई, तौभी उन्‍हें प्रतिज्ञा की हुई वस्‍तु न मिली।
    Heb 11:40  क्‍योंकि परमेश्वर ने हमारे लिये पहिले से एक उत्तम बात ठहराई, कि वे हमारे बिना सिद्धता को न पहुंचे।
    Heb 12:1  इस कारण जब कि गवाहों का ऐसा बड़ा बादल हम को घेरे हुए है, तो आओ, हर एक रोकने वाली वस्‍तु, और उलझाने वाले पाप को दूर करके, वह दौड़ जिस में हमें दौड़ना है, धीरज से दौड़ें।
    Heb 12:2  और विश्वास के कर्ता और सिद्ध करने वाले यीशु की ओर से ताकते रहें; जिस ने उस आनन्‍द के लिये जो उसके आगे धरा था, लज्ज़ा की कुछ चिन्‍ता न करके, क्रूस का दुख सहा; और सिंहासन पर परमेश्वर के दाहिने जा बैठा।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यर्मियाह १-२ 
  • १ तिमुथियुस ३

शनिवार, 22 अक्टूबर 2011

दैनिक ताज़गी

   अपनी दैनिक क्रियाओं में हम सब लगभग उन्हीं बातों को दोहराते रहते हैं; हम सब प्रतिदिन खाते-पीते हैं, सोते-उठते हैं, कार्य करते हैं, अपनी सफाई करते हैं, इत्यादि। इसि प्रक्रिया को दोहराते दोहराते कभी कभी मन में विचार उठता है कि अन्ततः इस सब का प्रयोजन क्या है?

   परमेश्वर चाहता है कि हम इसे कुछ फर्क संदर्भ में देखें - बार बार दोहराई जाने वाली बातें भी मसीही विश्वासी के लिए कुछ महत्वपूर्ण रहस्य छिपाए हुए होती हैं। परमेश्वर की योजना का एक भाग है कि बार बार दोहराई जाने वाली बातों में भी उसके मार्गदर्शन को ढूंढें और उसका पालन करें।

   संसार एक मंच के समान है जिस पर अनन्तता का नाटक प्रदर्शित हो रहा है। प्रत्येक दृश्य के लिए मंच के परदे के उठने और गिरने के समान सूर्य भी प्रतिदिन के दृश्य के लिए उदय और अस्त होता है। इस दैनिक दश्य में हम कलाकार अपनी भूमिकाओं और अपने संवाद की पंक्तियों को दोहराने के बारे में निर्णय लेते हैं - या तो हम अधीरता से केवल दश्य की समाप्ति के लिए अपनी भूमिकाएं और पंक्तियां, बिना किसी लगन और अनमने होकर के दोहरा मात्र देते हैं, अथवा उस दृश्य के लिए हम नाटक के निर्देशक की मनसा जान कर के अपनी भूमिका को उसकी इच्छा के अनुसार निभाते हैं। अवश्य ही परिस्थितियां और भूमिकाएं नित्यक्रमानुसार ही हैं, और हमें लग सकता है कि हम यह पहले भी निभा चुके हैं, किन्तु नित्यप्रायः कार्यों में सहर्ष भाग लेना हम में चरित्र का गठन करता है, हमारे विश्वास को मज़बूत करता है, हमारी आशा को बढ़ाता है और हम में सहनशीलता का विकास करता है।

   प्रतिदिन के सामन्य कार्यों के द्वारा परमेश्वर हमें सिखाता है कि हमारे पृथ्वी के जीवनों के लिए व्यर्थ दोहराने से बढ़कर कुछ निर्धारित है। दिन-प्रतिदिन परमेश्वर पर भरोसा बनाए रखना दैनिक ताज़गी का मूल मंत्र है। - मार्ट डी हॉन


अगर जीवन सान के पत्थर के समान है, तो उसे अपने चरित्र की धार बनाने के लिए उपयोग कीजिए।
 
जो कुछ हुआ था, वही फिर होगा, और जो कुछ बन चुका है वही फिर बनाया जाएगा; और सूर्य के नीचे कोई बात नई नहीं है। - सभोपदेशक १:९
 
बाइबल पाठ: सभोपदेशक १:१-९
    Ecc 1:1  यरूशलेम के राजा, दाऊद के पुत्र और उपदेशक के वचन।
    Ecc 1:2  उपदेशक का यह वचन है, कि व्यर्थ ही व्यर्थ, व्यर्थ ही व्यर्थ! सब कुछ व्यर्थ है।
    Ecc 1:3  उस सब परिश्रम से जिसे मनुष्य धरती पर करता है, उसको क्या लाभ प्राप्त होता है?
    Ecc 1:4  एक पीढ़ी जाती है, और दूसरी पीढ़ी आती है, परन्तु पृथ्वी सर्वदा बनी रहती है।
    Ecc 1:5  सूर्य उदय होकर अस्त भी होता है, और अपने उदय की दिशा को वेग से चला जाता है।
    Ecc 1:6  वायु दक्खिन की ओर बहती है, और उत्तर की ओर घूमती जाती है; वह घूमती और बहती रहती है, और अपने चक्करों में लौट आती है।
    Ecc 1:7  सब नदियां समुद्र में जा मिलती हैं, तौभी समुद्र भर नहीं जाता; जिस स्थान से नदियां निकलती हैं, उधर ही को वे फिर जाती हैं।
    Ecc 1:8  सब बातें परिश्रम से भरी हैं; मनुष्य इसका वर्णन नहीं कर सकता, न तो आंखें देखने से तृप्त होती हैं, और न कान सुनने से भरते हैं।
    Ecc 1:9  जो कुछ हुआ था, वही फिर होगा, और जो कुछ बन चुका है वही फिर बनाया जाएगा; और सूर्य के नीचे कोई बात नई नहीं है।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह ६५-६६ 
  • १ तिमुथियुस २

शुक्रवार, 21 अक्टूबर 2011

निर्थक और अयोग्य?

   किसी मूर्ख और अयोग्य व्यक्ति को लुप्त हो चुके डोडो पक्षी की संज्ञा दी जाती है। डोडो पक्षी हिन्द महासागर के तीन द्वीपों ही में पाए जाते थे। वे देखने में बहुत भद्दे और भारीभरकम होते थे; पूंछ के नाम पर उनके परों का एक गुच्छा होता था और पंखों के नाम पर ठूंठ जैसे अंग जिन पर तीन या चार काले पर लगे होते थे। उनकी खूंटी जैसी बड़ी सी चोंच और बड़े बड़े बेडौल पैर होते थे। इन पक्षियों के खोजने वालों ने उनके संबंध में लिखा कि "हम इन्हें घृणित पक्षी बुलाते थे क्योंकि जितना अधिक इनके माँस को पकाओ, वह उतना ही अधिक कड़ा और बेस्वाद होता जाता था।" उन द्वीपों पर आकर बसने वालों ने इन निर्थक और अयोग्य लगने वाले असहाय पक्षियों का सफाया कर दिया।

   लेकिन १९७७ में वैज्ञानिकों ने जाना कि उन्हीं द्वीपों में पाए जाने वाले बहुत ही सुन्दर कल्वेरिया वृक्षों के भी लुप्त होते जाने का कारण डोडो पक्षियों का ना होना है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि कल्वेरिया पेड़ का बीज बहुत सख्त छिलके से ढका होता था, जिसे डोडो पक्षी खाते थे और उनके पेट तथा अंतड़ियों से होकर निकलने से बीज का बाहरी सख्त खोल हट जाता था और उसके पश्चात डोडो से बाहर आने पर बीज अंकुरित हो पाने के योग्य हो पाते थे। अब बाकि बचे हुए केवल १३ सुन्दर कल्वेरिया पेड़ों को बचाने के लिए वैज्ञानिकों ने एक प्रयास किया और डोडो की जाति के समान एक अन्य पक्षी - टर्की को उन द्वीपों में लाया गया; प्रयोग सफल रहा और वे पेड़ लुप्त होने से बच गए।

   जैसे परमेश्वर की प्रकृति में, वैसे ही परमेश्वर की मण्डली में, कुछ भी या कोई भी निर्थक और अयोग्य नहीं है; परमेश्वर कुछ व्यर्थ नहीं रचता। हम में से प्रत्येक उसके लिए आवश्यक है, चाहे हमें यह लगे या ना लगे, लेकिन अपनी मण्डली में उसने प्रत्येक को अपनी योजना के अनुसार तैयार करके रखा है।

   मसीह की देह, उसकी मण्डली में प्रत्येक विश्वासी का अनन्त उद्देश्य है। - मार्ट डी हॉन

जो मनुष्यों की दृष्टि में अयोग्य प्रतीत होते हैं, वे अकसर परमेश्वर की दृष्टि में महान होते हैं।

परन्‍तु सचमुच परमेश्वर ने अंगो को अपनी इच्‍छा के अनुसार एक एक करके देह में रखा है। - १ कुरिन्थियों १२:१८
 
बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों १२:१२-२७
    1Co 12:12  क्‍योंकि जिस प्रकार देह तो एक है और उसके अंग बहुत से हैं, और उस एक देह के सब अंग, बहुत होने पर भी सब मिलकर एक ही देह हैं, उसी प्रकार मसीह भी है।
    1Co 12:13  क्‍योंकि हम सब ने क्‍या यहूदी हो, क्‍या युनानी, क्‍या दास, क्‍या स्‍वतंत्र एक ही आत्मा के द्वारा एक देह होने के लिये बपतिस्मा लिया, और हम एक को एक ही आत्मा पिलाया गया।
    1Co 12:14  इसलिये कि देह में एक ही अंग नहीं, परन्‍तु बहुत से हैं।
    1Co 12:15  यदि पांव कहे: कि मैं हाथ नहीं, इसलिये देह का नहीं, तो क्‍या वह इस कारण देह का नहीं?
    1Co 12:16  और यदि कान कहे कि मैं आंख का नहीं, इसलिये देह का नहीं, तो क्‍या वह इस कारण देह का नहीं?
    1Co 12:17  यदि सारी देह आंख की होती तो सुनना कहां से होता? यदि सारी देह कान ही होती तो सूंघना कहां होता?
    1Co 12:18  परन्‍तु सचमुच परमेश्वर ने अंगो को अपनी इच्‍छा के अनुसार एक एक करके देह में रखा है।
    1Co 12:19  यदि वे सब एक ही अंग होते, तो देह कहां होती?
    1Co 12:20  परन्‍तु अब अंग तो बहुत से हैं, परन्‍तु देह एक ही है।
    1Co 12:21  आंख हाथ से नहीं कह सकती, कि मुझे तेरा प्रयोजन नहीं, और न सिर पांवों से कह सकता है, कि मुझे तुम्हारा प्रयोजन नहीं।
    1Co 12:22  परन्‍तु देह के वे अंग जो औरों से निर्बल देख पड़ते हैं, बहुत ही आवश्यक हैं।
    1Co 12:23  और देह के जिन अंगो को हम आदर के योग्य नहीं समझते हैं उन्‍ही को हम अधिक आदर देते हैं; और हमारे शोभाहीन अंग और भी बहुत शोभायमान हो जाते हैं।
    1Co 12:24  फिर भी हमारे शोभायमान अंगो को इस का प्रयोजन नहीं, परन्‍तु परमेश्वर ने देह को ऐसा बना दिया है, कि जिस अंग को घटी थी उसी को और भी बहुत आदर हो।
    1Co 12:25  ताकि देह में फूट न पड़े, परन्‍तु अंग एक दूसरे की बराबर चिन्‍ता करें।
    1Co 12:26  इसलिये यदि एक अंग दु:ख पाता है, तो सब अंग उसके साथ दु:ख पाते हैं; और यदि एक अंग की बड़ाई होती है, तो उसके साथ सब अंग आनन्‍द मनाते हैं।
    1Co 12:27  इसी प्रकार तुम सब मिलकर मसीह की देह हो, और अलग अलग उसके अंग हो।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह ६२-६४ 
  • १ तिमुथियुस १

गुरुवार, 20 अक्टूबर 2011

सम्मानजनक कार्य

   चाहे वह कितनी भी छोटी लगे, परमेश्वर की सेवा में उपयोग होना वास्तव में बहुत बड़ा सम्मान है। भजन ८४ का लेखक इस बात को भली भांति जानता था। वह संभवतः परमेश्वर के मन्दिर की सेवकाई को समर्पित लेवी गोत्र का कोई सदस्य था जो, जब उसने यह भजन लिखा तब किसी कारणवश, मन्दिर में नहीं रहता था।
   उसकी अनुपस्थिति का जो भी कारण रहा हो, लेकिन भजन यह बात दर्शाता है कि वह बहुत लालसा से मन्दिर में उपस्थित रहना चाहता था; उसने मन्दिर में घोंसला बना कर रहने वाले पक्षियों के बारे में सोचकर उन्हें धन्य जाना (पद ३, ४); उन तीर्थयात्रियों के विष्य में सोचा जो मन्दिर में दर्शन की यात्रा कर रहे थे और उन्हें धन्य जाना (पद ५-७)। उसने परमेश्वर से प्रार्थना करी और चाहा कि परमेश्वर उसकी सुधि ले और चाहे उसे मन्दिर की डेवढ़ी पर खड़ा रहने वाला द्वारपाल ही बनने दे, तो यह भी उसे दुष्टों के साथ किसी ऊंचे स्थान पर बैठने की अपेक्षा स्वीकार होगा।

   कई वर्षों से परमेश्वर की सेवकाई में लगे लोगों के साथ काम करते करते, मैं ने उन लोगों का बहुत आदर करता हूँ जो परमेश्वर के नाम से और परमेश्वर के लिए छोटे से छोटा काम करने को भी बड़ी बात मानते हैं।  उनके पास जो भी कार्यकुशलता होती है, वे उसे परमेश्वर की सेवकाई में लगा देते हैं; जैसे, परमेश्वर के भवन की मरम्मत करना, किसी बुज़ुर्ग को चर्च लाने के लिए अपनी गाड़ी का उपयोग करना, जो चर्च नहीं आ पाते उनके पास जाकर कारण का पता करना और उनकी सुधि लेना, आदि। अन्य लोग स्वयंसेवक बनकर सौंपे गए किसी भी कार्य को सहर्ष कर देते हैं।

   ये वे समर्पित लोग हैं जो परमेश्वर के लिए, प्रसन्न्ता से कुछ भी करने को तैयार रहते हैं; इनके लिए कोई काम छोटा नहीं है, वरन परमेश्वर के लिए किया गया प्रत्येक कार्य सम्मानजनक है, तथा उनके लिए आदर की बात है। - हर्ब वैण्डर लुग्ट


परमेश्वर कई दफा हमें थोड़ा देकर परखता है कि हम बड़ा कैसे संभालेंगे।

क्योंकि तेरे आंगनों में का एक दिन और कहीं के हजार दिन से उत्तम है। दुष्टों के डेरों में वास करने से अपने परमेश्वर के भवन की डेवढ़ी पर खड़ा रहना ही मुझे अधिक भावता है। - भजन ८४:१०
 
बाइबल पाठ: भजन ८४
    Psa 84:1  हे सेनाओं के यहोवा, तेरे निवास क्या ही प्रिय हैं!
    Psa 84:2  मेरा प्राण यहोवा के आंगनों की अभिलाषा करते करते मूर्च्छित हो चला; मेरा तन मन दोंनो जीवते ईश्वर को पुकार रहे।
    Psa 84:3  हे सेनाओं के यहोवा, हे मेरे राजा, और मेरे परमेश्वर, तेरी वेदियों में गौरैया ने अपना बसेरा और शूपाबेनी ने घोंसला बना लिया है जिस में वह अपने बच्चे रखे।
    Psa 84:4  क्या ही धन्य हैं वे, जो तेरे भवन में रहते हैं; वे तेरी स्तुति निरन्तर करते रहेंगे।
    Psa 84:5  क्या ही धन्य है, वह मनुष्य जो तुझ से शक्ति पाता है, और वे जिनको सिय्योन की सड़क की सुधि रहती है।
    Psa 84:6  वें रोने की तराई में जाते हुए उस को सोतों का स्थान बनाते हैं, फिर बरसात की अगली वृष्टि उसमें आशीष ही आशीष उपजाती है।
    Psa 84:7  वे बल पर बल पाते जाते हैं; उन में से हर एक जन सिय्योन में परमेश्वर को अपना मुंह दिखाएगा।
    Psa 84:8  हे सेनाओं के परमेश्वर यहोवा, मेरी प्रार्थना सुन, हे याकूब के परमेश्वर, कान लगा!
    Psa 84:9  हे परमेश्वर, हे हमारी ढ़ाल, दृष्टि कर; और अपने अभिषिक्ति का मुख देख!
    Psa 84:10  क्योंकि तेरे आंगनों में का एक दिन और कहीं के हजार दिन से उत्तम है। दुष्टों के डेरों में वास करने से अपने परमेश्वर के भवन की डेवढ़ी पर खड़ा रहना ही मुझे अधिक भावता है।
    Psa 84:11  क्योंकि यहोवा परमेश्वर सूर्य और ढाल है; यहोवा अनुग्रह करेगा, और महिमा देगा; और जो लोग खरी चाल चलते हैं उन से वह कोई अच्छा पदार्थ रख न छोड़ेगा।
    Psa 84:12  हे सेनाओं के यहोवा, क्या ही धन्य वह मनुष्य है, जो तुझ पर भरोसा रखता है!
 
एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह ५९-६१ 
  • २ थिस्सलुनिकियों ३

बुधवार, 19 अक्टूबर 2011

विश्वासयोग्य फीबी

   जब किसी ने एक बाइबल शिक्षक से पूछा कि उनका बाइबल का प्रीय भाग कौन सा है तो उन्हों ने उत्तर दिया, "रोमियों की पत्री का अन्तिम अध्याय।" प्रश्नकर्ता ने अश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा, "बड़ी विचित्र बात है, उस अध्याय में तो अधिकांशतः नामों की सूची ही है।" प्रचारक ने उत्तर दिया, "जी हां; जिनके नाम वहां लिखे हैं वे सब अलग अलग व्यक्तित्व के लोग हैं, किंतु प्रत्येक ने अपनी सेवकाई द्वारा विशिष्ट योगदान दिया। परमेश्वर के पवित्र आत्मा ने उनके नाम वहां दर्ज करवाए जिससे हमें यह ज्ञात हो सके कि परमेश्वर उन सब से प्रेम करता था और उनके कार्य का आदर करता है।"

   पौलुस प्रेरित ने रोमियों के अन्तिम अध्याय का आरंभ फीबी की प्रशंसा से किया। उसने अपने समकालीन विश्वासियों से कहा कि जब कभी आवश्यक्ता हो तो वे फीबी की सहायता करें "क्‍योंकि वह भी बहुतों की वरन मेरी भी उपकारिणी हुई है" (रोमियों १६:२)।

   कई बार हम सोचते हैं कि सबसे प्रभावी मसीही सेवक वे ही हैं जो किसी सांसारिक काम में लगे बिना केवल मसीही सेवकाई में ही अपना जीवन व्यतीत कर देते हैं; और हम उन अनगिनित लोगों के सेवकाई के कार्यों को सम्मान देने से रह जाते हैं, जिनके नाम प्रसिद्ध नहीं हो पाए। जिनके नाम सेवकाई में प्रसिद्ध हुए हैं उनको आदर देना स्वाभाविक बात है, लेकिन हमें उनका भी ध्यान करना चाहिए, उन्हें भी प्रोत्साहित करना चहिए और उनके लिए भी प्रार्थनाएं करनी चाहिएं जो फीबी के समान हैं।

   प्रभु के कार्य में आपका थोड़ा सा योगदान किसी अन्य संघर्षरत मसीही सेवक के लिए प्रोत्साहन का साधन और संघर्ष मे विजयी होने का कारण बन सकता है। एसी सहायता की कभी अनदेखी नहीं होगी, और परमेश्वर आपका भी नाम फीबी के समान अपने विशिष्ट सेवकों की सूची में प्रतिफल के लिए शामिल कर लेगा। - हेनरी बौश

इस विचार से कि हम कुछ विशेष नहीं कर सकते, कुछ भी न करना बहुत बड़ी बरबादी है।

प्रिसका और अक्‍विला को भी जो यीशु में मेरे सहकर्मी हैं, नमस्‍कार। उन्‍होंने मेरे प्राण के लिये अपना सिर दे रखा था और केवल मैं ही नहीं, वरन अन्यजातियों की सारी कलीसियाएं भी उन का धन्यवाद करती हैं। - रोमियों १६:३, ४

बाइबल पाठ: रोमियों १६:१-१५
    Rom 16:1  मैं तुम से फीबी की, जो हमारी बहिन और किंखिया की कलीसिया की सेविका है, बिनती करता हूं।
    Rom 16:2  कि तुम, जैसा कि पवित्र लोगों को चाहिए, उसे प्रभु में ग्रहण करो, और जिस किसी बात में उस को तुम से प्रयोजन हो, उस की सहायता करो; क्‍योंकि वह भी बहुतों की वरन मेरी भी उपकारिणी हुई है।
    Rom 16:3  प्रिसका और अक्‍विला को भी जो यीशु में मेरे सहकर्मी हैं, नमस्‍कार।
    Rom 16:4  उन्‍होंने मेरे प्राण के लिये अपना सिर दे रखा था और केवल मैं ही नहीं, वरन अन्यजातियों की सारी कलीसियाएं भी उन का धन्यवाद करती हैं।
    Rom 16:5  और उस कलीसिया को भी नमस्‍कार जो उन के घर में है। मेरे प्रिय इपैनितुस को जो मसीह के लिये आसिया का पहिला फल है, नमस्‍कार।
    Rom 16:6  मरियम को जिस ने तुम्हारे लिये बहुत परिश्रम किया, नमस्‍कार।
    Rom 16:7  अन्‍द्रुनीकुस और यूनियास को जो मेरे कुटम्बी हैं, और मेरे साथ कैद हुए थे, और प्रेरितों में नामी हैं, और मुझ से पहिले मसीह में हुए थे, नमस्‍कार।
    Rom 16:8  अम्पलियातुस को, जो प्रभु में मेरा प्रिय है, नमस्‍कार।
    Rom 16:9  उरबानुस को, जो मसीह में हमारा सहकर्मी है, और मेरे प्रिय इस्‍तखुस को नमस्‍कार।
    Rom 16:10  अपिल्लेस को जो मसीह में खरा निकला, नमस्‍कार। अरिस्‍तुबुलुस के घराने को नमस्‍कार।
    Rom 16:11  मेरे कुटुम्बी हेरोदियोन को नमस्‍कार। नरिकयुस के घराने के जो लोग प्रभु में हैं, उन को नमस्‍कार।
    Rom 16:12  त्रूफैना और त्रूफोसा को जो प्रभु में परिश्रम करती हैं, नमस्‍कार। प्रिया परसिस को जिस ने प्रभु में बहुत परिश्रम किया, नमस्‍कार।
    Rom 16:13  रूफुस को जो प्रभु में चुना हुआ है, और उस की माता को जो मेरी भी है, दोनों को नमस्‍कार।
    Rom 16:14  असुक्रितुस और फिलगोन और हिमस ओर पत्रुबास और हिमांस और उन के साथ के भाइयों को नमस्‍कार।
    Rom 16:15  फिलुलुगुस और यूलिया और नेर्युस और उस की बहिन, और उलुम्पास और उन के साथ के सब पवित्र चुम्बन से नमस्‍कार करो: तुम को मसीह की सारी कलीसियाओं की ओर से नमस्‍कार।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह ५६-५८ 
  • २ थिस्सलुनिकियों २