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बुधवार, 16 जनवरी 2019

घाटी



      फ्रांस के कलाकार हेनरी मातिस्से के अनुसार, उनके जीवन के अन्त के समय उनके द्वारा बनाई गई कलाकृतियां उनके जीवन की सब से उत्तम प्रतीक थीं। उस समय में उन्होंने चित्र बनाने की एक नई शैली के साथ प्रयोग किया, विशाल तसवीरें बनाना, रंग के साथ नहीं वरन रंगीन कागज़ का उपयोग करने के द्वारा। उन्होंने अपने कमरे की दीवारों को इन चटकीले रंग की तस्वीरों से सजा लिया था। उनके लिए यह महत्वपूर्ण था, क्योंकि तब वे कैंसर पीड़ित थे और अकसर बिस्तर पर ही रहने के लिए बाध्य होते थे।

      बीमार पड़ना, नौकरी खो देना, किसी दुखद स्थिति से होकर निकलना, आदि ऐसे अनुभव हैं जिन्हें कुछ लोग “घाटी के अनुभव” कहते हैं, जहाँ भय अन्य हर बात पर छाया रहता है। परमेश्वर के वचन बाइबल के पुराने नियम खण्ड में हम देखते हैं कि यहूदा के लोगों ने भी ऐसी ही स्थिति का अनुभव किया जब उन्हें पता चला कि तीन बड़ी जातियां एक संयुक्त सेना बनाकर उन पर चढ़ाई करने के लिए आ रही है (2 इतिहास 20: 1-3)। यहूदा के राजा ने परमेश्वर के आगे अपनी विनती रखी, “हे हमारे परमेश्वर, क्या तू उनका न्याय न करेगा? यह जो बड़ी भीड़ हम पर चढ़ाई कर रही है, उसके साम्हने हमारा तो बस नहीं चलता और हमें हुछ सूझता नहीं कि क्या करना चाहिये? परन्तु हमारी आंखें तेरी ओर लगी हैं” (पद 12); और परमेश्वर ने उन्हें उत्तर दिया कि “इस लड़ाई में तुम्हें लड़ना न होगा; हे यहूदा, और हे यरूशलेम, ठहरे रहना, और खड़े रह कर यहोवा की ओर से अपना बचाव देखना। मत डरो, और तुम्हारा मन कच्चा न हो; कल उनका साम्हना करने को चलना और यहोवा तुम्हारे साथ रहेगा” (पद 17)।

      परमेश्वर के कहे अनुसार यहूदा के राजा ने अपनी सेना को युद्ध-भूमि में भेजा, और वे परमेश्वर की स्तुति करते हुए गए (पड़ 20-21)। उन्होंने पाया कि उन्हें किसी युद्ध में नहीं पड़ना पड़ा, वरन उनके विरुद्ध आई सेना के लोग आपस में ही लड़ मरे, और यहूदा की सेना तीन दिन तक उन पर से लूट को जमा करती रही। उन्होंने उस युद्ध-स्थल का नाम “बराका की तराई,” अर्थात “आशीष” रखा।

      हमारे जीवनों के न्यूनतम बिंदुओं में भी परमेश्वर हमारे साथ होता है। उसके साथ होने से हम अपनी घाटी के अनुभव में भी आशीष को पा सकते हैं। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


परमेश्वर बोझ को भी आशीष में बदल देने में माहिर है।

तुम्हारा स्‍वभाव लोभरिहत हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। इसलिये हम बेधड़क हो कर कहते हैं, कि प्रभु, मेरा सहायक है; मैं न डरूंगा; मनुष्य मेरा क्या कर सकता है। - इब्रानियों 13:5-6

बाइबल पाठ: 2 इतिहास 20:1, 12-22
2 Chronicles 20:1 इसके बाद मोआबियों और अम्मोनियों ने और उनके साथ कई मूनियों ने युद्ध करने के लिये यहोशापात पर चढ़ाई की।
2 Chronicles 20:12 हे हमारे परमेश्वर, क्या तू उनका न्याय न करेगा? यह जो बड़ी भीड़ हम पर चढ़ाई कर रही है, उसके साम्हने हमारा तो बस नहीं चलता और हमें हुछ सूझता नहीं कि क्या करना चाहिये? परन्तु हमारी आंखें तेरी ओर लगी हैं।
2 Chronicles 20:13 और सब यहूदी अपने अपने बाल-बच्चों, स्त्रिीयों और पुत्रों समेत यहोवा के सम्मुख खड़े रहे।
2 Chronicles 20:14 तब आसाप के वंश में से यहजीएल नाम एक लेवीय जो जकर्याह का पुत्र और बनायाह का पोता और मत्तन्याह के पुत्र यीएल का परपोता था, उस में मण्डली के बीच यहोवा का आत्मा समाया।
2 Chronicles 20:15 और वह कहने लगा, हे सब यहूदियो, हे यरूशलेम के रहनेवालो, हे राजा यहोशापात, तुम सब ध्यान दो; यहोवा तुम से यों कहता है, तुम इस बड़ी भीड़ से मत डरो और तुम्हारा मन कच्चा न हो; क्योंकि युद्ध तुम्हारा नहीं, परमेश्वर का है।
2 Chronicles 20:16 कल उनका साम्हना करने को जाना। देखो वे सीस की चढ़ाई पर चढ़े आते हैं और यरूएल नाम जंगल के साम्हने नाले के सिरे पर तुम्हें मिलेंगे।
2 Chronicles 20:17 इस लड़ाई में तुम्हें लड़ना न होगा; हे यहूदा, और हे यरूशलेम, ठहरे रहना, और खड़े रह कर यहोवा की ओर से अपना बचाव देखना। मत डरो, और तुम्हारा मन कच्चा न हो; कल उनका साम्हना करने को चलना और यहोवा तुम्हारे साथ रहेगा।
2 Chronicles 20:18 तब यहोशापात भूमि की ओर मुंह कर के झुका और सब यहूदियों और यरूशलेम के निवासियों ने यहोवा के साम्हने गिर के यहोवा को दण्डवत किया।
2 Chronicles 20:19 और कहातियों और कोरहियों में से कुछ लेवीय खड़े हो कर इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की स्तुति अत्यन्त ऊंचे स्वर से करने लगे।
2 Chronicles 20:20 बिहान को वे सबेरे उठ कर तकोआ के जंगल की ओर निकल गए; और चलते समय यहोशापात ने खड़े हो कर कहा, हे यहूदियो, हे यरूशलेम के निवासियो, मेरी सुनो, अपने परमेश्वर यहोवा पर विश्वास रखो, तब तुम स्थिर रहोगे; उसके नबियों की प्रतीत करो, तब तुम कृतार्थ हो जाओगे।
2 Chronicles 20:21 तब उसने प्रजा के साथ सम्मति कर के कितनों को ठहराया, जो कि पवित्रता से शोभायमान हो कर हथियारबन्दों के आगे आगे चलते हुए यहोवा के गीत गाएं, और यह कहते हुए उसकी स्तुति करें, कि यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि उसकी करुणा सदा की है।
2 Chronicles 20:22 जिस समय वे गाकर स्तुति करने लगे, उसी समय यहोवा ने अम्मोनियों, मोआबियों और सेईर के पहाड़ी देश के लोगों पर जो यहूदा के विरुद्ध आ रहे थे, घातकों को बैठा दिया और वे मारे गए।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 39-40
  • मत्ती 11



मंगलवार, 15 जनवरी 2019

सेवा



      मैंने जब अपने अँगरेज़ मंगेतर से विवाह किया था और उसके साथ इंग्लैण्ड आई, तो मेरा विचार था कि यह विदेशी भूमि पर लगभग पाँच वर्ष तक का रोमाँच होगा। मैंने कभी यह कल्पना भी नहीं की थी कि बीस वर्ष पश्चात भी मैं यहीं पर रह रही होऊंगी। न ही मुझे इस बात का बोध था कि अपने पुराने मित्रों, परिवार जनों, और जीवन की परिचित परिस्थियों को छोड़ आने के द्वारा कभी-कभी मुझे ऐसा लगेगा मानों मैंने अपने जीवन को खो दिया है। परन्तु उस पुराने जीवन को खो देने के द्वारा मैंने एक और भी अधिक अच्छे जीवन को पाया है।

      प्रभु यीशु ने अपने शिष्यों से ऐसे ही उलट-पुलट के जीवन की प्रतिज्ञा की थी, जब उसने उनसे कहा कि उसके लिए अपना जीवन खो देने के द्वारा ही वे नया और उत्तम जीवन पाएँगे। परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पाते हैं कि जब प्रभु ने अपने शिष्यों को सुसमाचार प्रचार के लिए भेजा, तो उनसे कहा कि वे उससे अपने माता-पिता, और बच्चों से भी अधिक प्रेम रखें (मत्ती 10:37)। उसने ये शब्द ऐसे समाज और संस्कृति में कहे थे जहाँ परिवार ही समाज की नींव और बहुमूल्य माना जाता था। परन्तु उसने उन्हें यह भी आश्वासन दिया कि यदि वे उसके लिए अपना जीवन खो भी देंगे, तो भी उसे पा लेंगे (पद 39)।

      हमें अपने आप को मसीह यीशु में पा लेने के लिए विदेश जाने के आवश्यकता नहीं है। जैसे उन शिष्यों ने प्रभु के सुसमाचार प्रचार के लिए जाने के प्रति अपनी आज्ञाकारिता और समर्पण को दिखाया, उसकी सेवा के प्रति उसी प्रकार का समर्पण और आज्ञाकारिता रखने के द्वारा हम भी पाएँगे कि प्रभु के लिए हम जितना गंवाएंगे, हमारे प्रति उसके उदार प्रेम और अद्भुत आशीषों में होकर हम उससे भी कहीं अधिक प्रभु से पा लेंगे।

      यह सत्य है कि वह हमसे सदा ही अपार प्रेम करता है, हम चाहे उसकी कितनी भी सेवा करते हों। किन्तु जब हम उसकी आज्ञाकारिता में होकर औरों की सेवा करते हैं तो अपने जीवनों में संतुष्टि, सार्थकता और तृप्ति पाते हैं। - एमी बाउचर पाई


छोड़ी गई प्रत्येक बात के रिक्त स्थान में परमेश्वर अपनी उपस्थिति से कुछ भर देता है।

यीशु ने कहा, मैं तुम से सच कहता हूं, कि ऐसा कोई नहीं, जिसने मेरे और सुसमाचार के लिये घर या भाइयों या बहिनों या माता या पिता या लड़के-बालों या खेतों को छोड़ दिया हो। और अब इस समय सौ गुणा न पाए, घरों और भाइयों और बहिनों और माताओं और लड़के-बालों और खेतों को पर उपद्रव के साथ और परलोक में अनन्त जीवन। - मरकुस 10:29-30

बाइबल पाठ: मत्ती 10:37-42
Matthew 10:37 जो माता या पिता को मुझ से अधिक प्रिय जानता है, वह मेरे योग्य नहीं और जो बेटा या बेटी को मुझ से अधिक प्रिय जानता है, वह मेरे योग्य नहीं।
Matthew 10:38 और जो अपना क्रूस ले कर मेरे पीछे न चले वह मेरे योग्य नहीं।
Matthew 10:39 जो अपने प्राण बचाता है, वह उसे खोएगा; और जो मेरे कारण अपना प्राण खोता है, वह उसे पाएगा।
Matthew 10:40 जो तुम्हें ग्रहण करता है, वह मुझे ग्रहण करता है; और जो मुझे ग्रहण करता है, वह मेरे भेजने वाले को ग्रहण करता है।
Matthew 10:41 जो भविष्यद्वक्ता को भविष्यद्वक्ता जानकर ग्रहण करे, वह भविष्यद्वक्ता का बदला पाएगा; और जो धर्मी जानकर धर्मी को ग्रहण करे, वह धर्मी का बदला पाएगा।
Matthew 10:42 जो कोई इन छोटों में से एक को चेला जानकर केवल एक कटोरा ठंडा पानी पिलाए, मैं तुम से सच कहता हूं, वह किसी रीति से अपना प्रतिफल न खोएगा।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 36-38
  • मत्ती 10:21-42



सोमवार, 14 जनवरी 2019

तनाव



      ऐसे संसार की कल्पना कीजिए जिसमें हवा न चलती हो! तब झीलों पर पानी शान्त रहेगा; पेड़ों से गिरने वाले पत्ते इधर से उधर उड़ते नहीं रहेंगे। किन्तु ऐसे शान्त हवा वाले स्थान में किसे अपेक्षा होगी कि  पेड़ अपने आप अचानक ही टूट कर गिर पड़ेंगे? परन्तु ऐसा ही हुआ – एरिज़ोना में स्थित तीन एकड़ भूमि पर काँच से बने अर्ध-गोलाकार बायोस्फीयर 2 नामक प्रयोगशाला के अन्दर। इस विशाल प्रयोगशाला के अन्दर उगाए जा रहे पेड़, एक ऐसे पर्यावरण में बढ़ रहे थे जहाँ हवा बिलकुल नहीं चलती है। वे पेड़ सामान्य से अधिक गाते से बढ़े और एक दिन अचानक ही अपने ही वज़न के कारण टूट कर गिर गए। तब वैज्ञानिकों को समझ में आया कि हवा चलने से जब पेड़ हिलते, झुकते हैं, तो उस तनाव से उनमें मजबूती आती है जिससे फिर वे अपने वज़न और आँधियों में भी स्थिर खड़े रहने पाते हैं।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि प्रभु यीशु ने अपने शिष्यों को आँधी-तूफ़ान में से होकर जाने दिया, जिससे उनका विश्वास दृढ़ हो सके (मरकुस 4:36-41)। रात्रि के समय, परिचित झील के पानी में नाव ले जाते हुए उन अनुभवी मछुआरों के लिए अचानक से उठने वाली आँधी भारी पड़ने लगी। उन्हीं के साथ यीशु नाव के पिछले भाग में सो रहे थे। आँधी और ऊंची उठती लहरों के कारण उन शिष्यों लगने लगा कि नाव डूब जाएगी। घबरा कर उन शिष्यों ने अपने गुरु को उठाया; क्या उसे चिंता नहीं थी कि वे मरने को हैं? वह क्या सोच रहा था? और तब उन्हें कुछ सीखने को मिला; प्रभु यीशु ने खड़े होकर आँधी और लहरों को शांत हो जाने के लिए कहा, और वे हो गईं। फिर उसने अपने शिष्यों की ओर मुड़कर उनसे पूछा, कि अभी तक वे उसमें विश्वास क्यों नहीं रख पा रहे थे?

      यदि वह आँधी का तनाव न होता तो वे शिष्य कभी नहीं पूछते कि “यह कौन है, कि आन्‍धी और पानी भी उस की आज्ञा मानते हैं?” (मरकुस 4:41)और शिष्यों को अपने प्रभु के बारे में वह पता नहीं चलता जो उस तनाव के कारण उन्होंने सीखा।

      आज, हो सकता है कि हमें सुरक्षित बुलबुले में छिप कर जीवन जीना एक अच्छा विचार लगे, किन्तु हमारा विश्वास कितना दृढ़ होने पाएगा, यदि हम अपने जीवनों में प्रभु का व्यावाहारिक अनुभव नहीं करने पाएँगे, उसके द्वारा परिस्थितियों पर जयवंत होना नहीं सीखेंगे, और उसके “शान्त रह, थम जा” की सामर्थ्य को नहीं देखेंगे? - मार्ट डीहान


परमेश्वर कभी नहीं सोता है।

तू जो प्यादों ही के संग दौड़कर थक गया है तो घोड़ों के संग क्योंकर बराबरी कर सकेगा? और यद्यपि तू शान्ति के इस देश में निडर है, परन्तु यरदन के आसपास के घने जंगल में तू क्या करेगा? – यिर्मयाह 12:5

बाइबल पाठ: मरकुस 4:35-41
Mark 4:35 उसी दिन जब सांझ हुई, तो उसने उन से कहा; आओ, हम पार चलें,
Mark 4:36 और वे भीड़ को छोड़कर जैसा वह था, वैसा ही उसे नाव पर साथ ले चले; और उसके साथ, और भी नावें थीं।
Mark 4:37 तब बड़ी आन्‍धी आई, और लहरें नाव पर यहां तक लगीं, कि वह अब पानी से भरी जाती थी।
Mark 4:38 और वह आप पिछले भाग में गद्दी पर सो रहा था; तब उन्होंने उसे जगाकर उस से कहा; हे गुरू, क्या तुझे चिन्‍ता नहीं, कि हम नाश हुए जाते हैं?
Mark 4:39 तब उसने उठ कर आन्‍धी को डांटा, और पानी से कहा; “शान्‍त रह, थम जा”: और आन्‍धी थम गई और बड़ा चैन हो गया।
Mark 4:40 और उन से कहा; तुम क्यों डरते हो? क्या तुम्हें अब तक विश्वास नहीं?
Mark 4:41 और वे बहुत ही डर गए और आपस में बोले; यह कौन है, कि आन्‍धी और पानी भी उस की आज्ञा मानते हैं?
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 33-35
  • मत्ती 10:1-20



रविवार, 13 जनवरी 2019

भरोसा



      हमारा बेटा सात वर्ष तक नशीले पदार्थों के सेवन की लत से जूझता रहा, और उस समय के दौरान मैंने तथा मेरी पत्नि ने कई प्रकार की कठिनाईयों का सामना किया। उसके इस लत से छूटने और स्वस्थ होने की प्रतीक्षा करते हुए हमने छोटी-छोटी विजयों के लिए आनदित होना सीखा। यदि चौबीस-घंटे के समय में कुछ बुरा नहीं होता था, तो हम एक-दूसरे से “आज दिन अच्छा रहा” कहकर आनन्दित होते थे। यह छोटा सा वाक्य हमारे लिए परमेश्वर के प्रति छोटी-से-छोटी बात के लिए धन्यवादी रहने का स्मरण बन गया।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 126:3 में परमेश्वर की कोमल कृपा का एक और भी उत्तम स्मरण-वाक्य मिलता है, जो यह भी ध्यान दिलाता है कि परमेश्वर की करुणा का हमारे लिए अर्थ क्या है: “यहोवा ने हमारे साथ बड़े बड़े काम किए हैं; और इस से हम आनन्दित हैं” यह कितना अच्छा पद है सदा स्मरण रखने के लिए कि प्रभु यीशु ने अपने प्रेम और अनुग्रह में होकर क्रूस पर हमारे तथा सँसार के प्रत्येक जन के लिए क्या किया है। किसी भी दिन की कठिनाईयां इस तथ्य को बदल नहीं सकती हैं कि चाहे कुछ हो जाए, हमारे प्रभु ने अथाह दयालुता दिखाई है, और हमारे प्रति उसका प्रेम सदा बना रहता है।

      हम जब कठिन समयों से निकलकर आते हैं और ध्यान करते हैं कि परमेश्वर हमारे प्रति विश्वासयोग्य बना रहा है, तो यह हमें उस अगले अनुभव के लिए तैयार करता है जब जीवन की परिस्थतियां फिर से कठिन हो सकती हैं। हम चाहे यह नहीं जानने या समझने पाएँ कि प्रभु परमेश्वर उन कठिन परिस्थितियों में से हमें कैसे सुरक्षित निकाल ले जाएगा, परन्तु बीते समय की उसकी कृपा और अनुग्रह हमें आश्वस्त करता है कि आगे भी ऐसा ही होगा – हम उसपर हर बात के लिए सदा भरोसा रख सकते हैं। - जेम्स बैंक्स


हम चाहे परमेश्वर के हाथ को देखने ना पाएँ, 
किन्तु हम उसके हृदय पर भरोसा रख सकते हैं।

यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है, और उसकी करूणा सदा की है। - भजन 136:1

बाइबल पाठ: भजन 126
Psalms 126:1 जब यहोवा सिय्योन से लौटने वालों को लौटा ले आया, तब हम स्वप्न देखने वाले से हो गए।
Psalms 126:2 तब हम आनन्द से हंसने और जयजयकार करने लगे; तब जाति जाति के बीच में कहा जाता था, कि यहोवा ने, इनके साथ बड़े बड़े काम किए हैं।
Psalms 126:3 यहोवा ने हमारे साथ बड़े बड़े काम किए हैं; और इस से हम आनन्दित हैं।
Psalms 126:4 हे यहोवा, दक्खिन देश के नालों के समान, हमारे बन्धुओं को लौटा ले आ!
Psalms 126:5 जो आंसू बहाते हुए बोते हैं, वे जयजयकार करते हुए लवने पाएंगे।
Psalms 126:6 चाहे बोने वाला बीज ले कर रोता हुआ चला जाए, परन्तु वह फिर पूलियां लिये जयजयकार करता हुआ निश्चय लौट आएगा।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 31-32
  • मत्ती 9:18-38



शनिवार, 12 जनवरी 2019

अनुग्रह



      एक अन्तर्राष्ट्रीय शोध कंपनी ने सन 2015 में बताया कि लोगों पर निगरानी रखने के लिए, सँसार भर में, दो करोड़ पैंतालीस लाख कैमरे लगे हुए हैं, और उनकी संख्या प्रतिवर्ष 15 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। इसके अतिरिक्त, प्रतिदिन करोड़ों लोग अपने मोबाइल फोन के द्वारा अनगिनित फोटो और वीडियो लेते रहते हैं, अपने जन्मदिन की पार्टी से लेकर बैक में की जा रही लूट तक की, हर प्रकार की घटनाओं की, या यूं ही। हम चाहे इस बढ़ती हुई सुरक्षा की सराहना करें, अथवा घटते हुए व्यक्तिगत समय, स्थान और जीवन की निन्दा करें, हम एक ऐसे समाज में रहते हैं जहाँ कैमरे के द्वारा हम निरन्तर निगाहों तथा सर्वेक्षण में बने रहते हैं।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में इब्रानियों की पुस्तक में लिखा है कि हम परमेश्वर के साथ अपने संबंध में उसकी दृष्टि में सदा बने रहते हैं, कैमरों की निगाहों में होने से कहीं अधिक। परमेश्वर का वचन, एक दो-धारी तलवार के समान, हमारे व्यक्तित्व के सबसे गहरे स्थान तक उतर जाता है और “...मन की भावनाओं और विचारों को जांचता है। और सृष्‍टि की कोई वस्तु उस से छिपी नहीं है वरन जिस से हमें काम है, उस की आंखों के साम्हने सब वस्तुएं खुली और बेपरदा हैं” (इब्रानियों 4:12-13)।

      क्योंकि हमारे उद्धारकर्ता प्रभु यीशु ने हमारे समान निर्बलताओं, परिस्थितियों और परीक्षाओं का अनुभव किया किन्तु पाप नहीं किया, इसलिए उसमें होकर हम “...अनुग्रह के सिंहासन के निकट हियाव बान्‍धकर चलें, कि हम पर दया हो, और वह अनुग्रह पाएं, जो आवश्यकता के समय हमारी सहायता करे” (पद 15-16)। हमें प्रभु परमेश्वर से भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है, परन्तु हमें उसमें आश्वस्त रहना चाहिए कि हम जब भी उसके पास आएँगे, उसका अनुग्रह हमारे लिए उपलब्ध एवँ कार्यकारी मिलेगा। - डेविड मैक्कैस्लैंड


प्रभु परमेश्वर की दृष्टि और अनुग्रह से हमारे जीवन की कोई भी बात छुपी नहीं है।

क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए। परमेश्वर ने अपने पुत्र को जगत में इसलिये नहीं भेजा, कि जगत पर दंड की आज्ञा दे परन्तु इसलिये कि जगत उसके द्वारा उद्धार पाए। - यूहन्ना 3:16-17

बाइबल पाठ: इब्रानियों 4:12-16
Hebrews 4:12 क्योंकि परमेश्वर का वचन जीवित, और प्रबल, और हर एक दोधारी तलवार से भी बहुत चोखा है, और जीव, और आत्मा को, और गांठ गांठ, और गूदे गूदे को अलग कर के, वार पार छेदता है; और मन की भावनाओं और विचारों को जांचता है।
Hebrews 4:13 और सृष्‍टि की कोई वस्तु उस से छिपी नहीं है वरन जिस से हमें काम है, उस की आंखों के साम्हने सब वस्तुएं खुली और बेपरदा हैं।
Hebrews 4:14 सो जब हमारा ऐसा बड़ा महायाजक है, जो स्‍वर्गों से हो कर गया है, अर्थात परमेश्वर का पुत्र यीशु; तो आओ, हम अपने अंगीकार को दृढ़ता से थामें रहे।
Hebrews 4:15 क्योंकि हमारा ऐसा महायाजक नहीं, जो हमारी निर्बलताओं में हमारे साथ दुखी न हो सके; वरन वह सब बातों में हमारे समान परखा तो गया, तौभी निष्‍पाप निकला।
Hebrews 4:16 इसलिये आओ, हम अनुग्रह के सिंहासन के निकट हियाव बान्‍धकर चलें, कि हम पर दया हो, और वह अनुग्रह पाएं, जो आवश्यकता के समय हमारी सहायता करे।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 29-30
  • मत्ती 9:1-17



शुक्रवार, 11 जनवरी 2019

मिलकर



      मेरी पत्नि कई प्रकार की सब्जियों को एक साथ मीट के साथ मिलाकर बहुत स्वादिष्ट भोजन बनाती है। वह विभिन्न सब्जियों और मसालों को लेकर, उसमें मीट के टुकड़े डाल कर धीमी आंच पर उन्हें पकने के लिए रख देती है। छः से सात घंटे पकने के पश्चात उस से उठने वाली सुगंध घर में भर जाती है और उस पके हुए भोजन का स्वाद लाजवाब होता है। यह मेरे लिए सदा ही लाभदायक रहता है कि मैं जल्दबाज़ी न करूँ, वरन धैर्य से उन सभी वस्तुओं को एक साथ मिलकर पक जाने दूँ। उनके साथ पक जाने से जो स्वाद और सुगंध आती है वह उनके अकेले-अकेले पकने में कभी नहीं आ पाती है।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में जब पौलुस ने, सताव के परिप्रेक्ष्य में वाक्याँश “सब...मिलकर” का प्रयोग किया तो उसने मूल भाषा में वह शब्द प्रयोग किया जिससे हमें आज सहक्रियता  शब्द मिलता है। रोम के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में पौलुस ने लिखा, “और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं” (रोमियों 8:28)। वह चाहता था कि रोम में रहने वाले वे मसीही विश्वासी जान लें के परमेश्वर, जो उनके सताव का रचियता नहीं था, उनकी समस्त परिस्थितियों को लेकर, उन्हें अपनी ईश्वरीय योजना के साथ सहक्रिय करके, अन्ततः उन सब बातों को मिलाकर उनके लिए अद्भुत भलाई ही उत्पन्न करके देगा। पौलुस जिस भलाई की बात कर रहा था वह भौतिक एवं नाश्मान बातें जैसे स्वास्थ्य, संपदा, प्रसिद्धी, या सफलता आदि नहीं थी वरन परमेश्वर के पुत्र, प्रभु यीशु मसीह के स्वरूप में ढलना था (पद 29)।

      हम भी धैर्य तथा भरोसे के साथ प्रतीक्षा करें, क्योंकि हमारा स्वर्गीय पिता हमारे प्रति लाए जा रहे सारे दुखों, परेशानियों, बुराईयों आदि को लेकर, उन्हें अपनी भलाई के साथ मिलाकर, हमारी भलाई तथा अपनी महिमा के लिए विलक्षण कार्य कर रहा है। वह कार्य जब तैयार होकर हमारे समक्ष आएगा तो उसकी उत्तमता को देखकर हम चकित हो जाएँगे। वह हमें प्रभु यीशु मसीह के स्वरूप में ढाल रहा है। - मार्विन विलियम्स


परमेश्वर के प्रति धैर्य तथा उसके समय की प्रतीक्षा सदा ही हमें उन्नति प्रदान करती है।

परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों की नाईं उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे। - यशायाह 40:31

बाइबल पाठ: रोमियों 8:28-39
Romans 8:28 और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं।
Romans 8:29 क्योंकि जिन्हें उसने पहिले से जान लिया है उन्हें पहिले से ठहराया भी है कि उसके पुत्र के स्वरूप में हों ताकि वह बहुत भाइयों में पहिलौठा ठहरे।
Romans 8:30 फिर जिन्हें उसने पहिले से ठहराया, उन्हें बुलाया भी, और जिन्हें बुलाया, उन्हें धर्मी भी ठहराया है, और जिन्हें धर्मी ठहराया, उन्हें महिमा भी दी है।
Romans 8:31 सो हम इन बातों के विषय में क्या कहें? यदि परमेश्वर हमारी ओर है, तो हमारा विरोधी कौन हो सकता है?
Romans 8:32 जिसने अपने निज पुत्र को भी न रख छोड़ा, परन्तु उसे हम सब के लिये दे दिया: वह उसके साथ हमें और सब कुछ क्योंकर न देगा?
Romans 8:33 परमेश्वर के चुने हुओं पर दोष कौन लगाएगा? परमेश्वर वह है जो उन को धर्मी ठहराने वाला है।
Romans 8:34 फिर कौन है जो दण्ड की आज्ञा देगा? मसीह वह है जो मर गया वरन मुर्दों में से जी भी उठा, और परमेश्वर की दाहिनी ओर है, और हमारे लिये निवेदन भी करता है।
Romans 8:35 कौन हम को मसीह के प्रेम से अलग करेगा? क्या क्लेश, या संकट, या उपद्रव, या अकाल, या नंगाई, या जोखिम, या तलवार?
Romans 8:36 जैसा लिखा है, कि तेरे लिये हम दिन भर घात किए जाते हैं; हम वध होने वाली भेंड़ों के समान गिने गए हैं।
Romans 8:37 परन्तु इन सब बातों में हम उसके द्वारा जिसने हम से प्रेम किया है, जयवन्त से भी बढ़कर हैं।
Romans 8:38 क्योंकि मैं निश्चय जानता हूं, कि न मृत्यु, न जीवन, न स्वर्गदूत, न प्रधानताएं, न वर्तमान, न भविष्य, न सामर्थ्य, न ऊंचाई,
Romans 8:39 न गहिराई और न कोई और सृष्टि, हमें परमेश्वर के प्रेम से, जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 27-28
  • मत्ती 8:18-34



गुरुवार, 10 जनवरी 2019

भलाई



      कुछ लोगों का मानना है कि अमेरिका की लेखिका एन हरबर्ट ने 1982 में एक रेस्टॉरेंट के मेजपोश पर यों ही यह वाक्याँश “निरुद्देश्य ही भलाई के कार्य और बस यूँ ही सुन्दरता के कार्य करते रहें” लिख दिया था। तब से लेकर आज तक इस वाक्यांश का मनोभाव फिल्मों और साहित्य के द्वारा लोकप्रिय किया जाता रहा है, और हमारे वार्तालाप के शब्द संग्रह का एक भाग बन गया है।

      प्रश्न यह है कि “क्यों?” हमें क्यों कृपालु होना या भलाई करनी चाहिए? जो प्रभु यीशु के अनुयायी हैं उनके लिए उत्तर स्पष्ट है: परमेश्वर के कृपालुता और दया को दिखाने के लिए।

      परमेश्वर के वचन बाइबल के पुराने नियम खण्ड में इसका एक अच्छा उदाहरण है, जो रूत की कहानी में मिलता है। रूत एक मोआबी स्त्री थी जिसका विवाह एक इस्राएली पुरुष से हुआ था, किन्तु उनके पतियों का देहांत हो जाने के कारण वह और उसकी विधवा सास अब इस्राएल में रहने वापस आ गए थे। रूत परदेसी थी, जिन लोगों के मध्य अब वह रह रही थी न तो उनकी भाषा जानती थी और न ही उनके रीति-रिवाज़, किन्तु वह इस्राएल के परमेश्वर पर विश्वास करती थी। वे लोग बहुत निर्धन थे और लोगों की कृपा पर निर्भर थे, किन्तु लोग उनका ध्यान कम ही करते थे।

      किन्तु एक इस्राएली, बोअज, ने रूत पर अनुग्रह किया और उसके हृदय को छू लिया (रूत 2:13)। उसने रूत को अनुमति दी कि उस समय चल रही कटनी के समय में वह जाकर उसके खेत में से अनाज की बालियाँ बीन ले, वरन अपने काम करने वालों को निर्देश भी दिए कि वे रूत के बीनने के लिए जान-बूझकर बालियाँ भूमि पर गिरने दें। आगे चलकर, रूत के उत्तम चरित्र और विश्वासयोग्यता से प्रभावित होकर बो बोअज ने रूत से विवाह भी किया, और बो बोअज एवँ रूत की संतानों के वंश से राजा दाऊद और फिर प्रभु यीशु मसीह भी आए; और प्रभु यीशु मसीह सँसार के सभी लोगों के लिए पाप क्षमा और उद्धार का मार्ग बनाकर देने वाले हुए (मत्ती 1:1-16)।

      हम नहीं जानते हैं कि यीशु के नाम में किए गए भलाई और कृपालुता के एक कार्य के दूरगामी परिणाम क्या होंगे, कहाँ तक जाएँगे; बस निरुद्देश्य भलाई करते रहिए। - डेविड रोपर


भलाई करना आरंभ करने में कभी देर नहीं होती है।

मैं तुम से सच कहता हूं, कि तुम ने जो मेरे इन छोटे से छोटे भाइयों में से किसी एक के साथ किया, वह मेरे ही साथ किया। - मत्ती 25:40

बाइबल पाठ: रूत 2: 4-17
Ruth 2:4 और बोअज बेतलेहेम से आकर लवने वालों से कहने लगा, यहोवा तुम्हारे संग रहे, और वे उस से बोले, यहोवा तुझे आशीष दे।
Ruth 2:5 तब बोअज ने अपने उस सेवक से जो लवने वालों के ऊपर ठहराया गया था पूछा, वह किस की कन्या है।
Ruth 2:6 जो सेवक लवने वालों के ऊपर ठहराया गया था उसने उत्तर दिया, वह मोआबिन कन्या है, जो नाओमी के संग मोआब देश से लौट आई है।
Ruth 2:7 उसने कहा था, मुझे लवने वालों के पीछे पीछे पूलों के बीच बीनने और बालें बटोरने दे। तो वह आई, और भोर से अब तक यहीं है, केवल थोड़ी देर तक घर में रही थी।
Ruth 2:8 तब बोअज ने रूत से कहा, हे मेरी बेटी, क्या तू सुनती है? किसी दूसरे के खेत में बीनने को न जाना, मेरी ही दासियों के संग यहीं रहना।
Ruth 2:9 जिस खेत को वे लवतीं हों उसी पर तेरा ध्यान बन्धा रहे, और उन्हीं के पीछे पीछे चला करना। क्या मैं ने जवानों को आज्ञा नहीं दी, कि तुझ से न बोलें? और जब जब तुझे प्यास लगे, तब तब तू बरतनों के पास जा कर जवानों का भरा हुआ पानी पीना।
Ruth 2:10 तब वह भूमि तक झुककर मुंह के बल गिरी, और उस से कहने लगी, क्या कारण है कि तू ने मुझ परदेशिन पर अनुग्रह की दृष्टि कर के मेरी सुधि ली है?
Ruth 2:11 बोअज ने उत्तर दिया, जो कुछ तू ने पति मरने के पीछे अपनी सास से किया है, और तू किस रीति अपने माता पिता और जन्मभूमि को छोड़कर ऐसे लोगों में आई है जिन को पहिले तू ने जानती थी, यह सब मुझे विस्तार के साथ बताया गया है।
Ruth 2:12 यहोवा तेरी करनी का फल दे, और इस्राएल का परमेश्वर यहोवा जिसके पंखों के तले तू शरण लेने आई है तुझे पूरा बदला दे
Ruth 2:13 उसने कहा, हे मेरे प्रभु, तेरे अनुग्रह की दृष्टि मुझ पर बनी रहे, क्योंकि यद्यपि मैं तेरी दासियों में से किसी के भी बराबर नहीं हूं, तौभी तू ने अपनी दासी के मन में पैठनेवाली बातें कहकर मुझे शान्ति दी है।
Ruth 2:14 फिर खाने के समय बोअज ने उस से कहा, यहीं आकर रोटी खा, और अपना कौर सिरके में बोर। तो वह लवने वालों के पास बैठ गई; और उसने उसको भुनी हुई बालें दी; और वह खाकर तृप्त हुई, वरन कुछ बचा भी रखा।
Ruth 2:15 जब वह बीनने को उठी, तब बोअज ने अपने जवानों को आज्ञा दी, कि उसको पूलों के बीच बीच में भी बीनने दो, और दोष मत लगाओ।
Ruth 2:16 वरन मुट्ठी भर जाने पर कुछ कुछ निकाल कर गिरा भी दिया करो, और उसके बीनने के लिये छोड़ दो, और उसे घुड़को मत।
Ruth 2:17 सो वह सांझ तक खेत में बीनती रही; तब जो कुछ बीन चुकी उसे फटका, और वह कोई एपा भर जौ निकला।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 25-26
  • मत्ती 8:1-17