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सोमवार, 11 जनवरी 2021

आयाम

 

          मैं शांत होकर उस मशीन में लगे स्ट्रेचर पर लेटी हुई थी, और जब मुझसे कहा जाता था, मैंने अपनी साँस रोक लेती थी, और वह मेरे चारों ओर मशीन घरघराती हुई घूमने लगती थी। मैं जानती थी के अन्य बहुत से लोगों ने एमआरआई जाँच करवाई है; परन्तु मैं कम स्थान वाली जगहों से बहुत घबराती थी, इसलिए इस अनुभव से होकर निकालने के लिए मुझे किसी अन्य बात पर अपना ध्यान केन्द्रित रखने की आवश्यकता थी – कुछ, या कोई, जो मुझ से बहुत अधिक बड़ा हो।

          मेरे मन में परमेश्वर के वचन बाइबल में से एक वाक्य,सब पवित्र लोगों के साथ भली भांति समझने की शक्ति पाओ; कि उसकी चौड़ाई, और लम्बाई, और ऊंचाई, और गहराई कितनी है” (इफिसियों 3:18) उस मशीन की आवाज़ के साथ साथ गूँज रहा था। पौलुस द्वारा इफिसियों की मण्डली के लिए की गई प्रार्थना में, उसने परमेश्वर के प्रेम और उपस्थिति के अनन्त होने पर बल देने के लिए उसका चार आयामों में वर्णन किया था।

          मेरे एमआरआई के लिए उस मशीन में लेटे होने ने उन आयामों के प्रति मेरी समझ को एक नया स्वरूप प्रदान किया। चौड़ाई: मेरे शरीर के साथ लगा कर बांधी गई मेरी बाँहों और दोनों ओर मेरे और मशीन के मध्य का छः-छः इंच का स्थान। लंबाई: उस मशीन में जिस स्ट्रेचर पर मैं लेटी थी उसके एक से दूसरे छोर तक की दूरी। ऊँचाई: मेरी नाक से लेकर ऊपर की ओर मशीन तक की छः इंच की दूरी। गहराई: मेरे नीचे के फर्श से लेकर उस मशीन में मेरे लेटे होने तक की दूरी। परमेश्वर की उपस्थिति के चार आयाम जो मुझे घेरे हुए और संभाले हुए थे, जिनके सहारे मैं उस एमआरआई मशीन में लेटी हुई थी, तथा जीवन के हर परिस्थिति में बनी हुई थी।

          परमेश्वर का प्रेम हमारे चारों ओर है। चौड़ाई: वह अपनी बाँहों को फैलाता है कि सारे संसार के सभी लोगों तक पहुँच सके। लंबाई: उसके प्रेम का कोई अन्त ही नहीं है। ऊँचाई: वह हमें ऊँचे पर उठाए रहता है। गहराई: वह नीचे झुक कर हमें हर परिस्थिति में सहारा दिए हुए और संभाले रहता है।

          परमेश्वर के प्रेम से हमें कोई अलग नहीं कर सकता है (रोमियों 8:38-39)। - एलिसा मॉर्गन

 

हर परिस्थिति में अपने साथ परमेश्वर के प्रेम और उपस्थिति पर भरोसा रखें।


क्योंकि मैं निश्चय जानता हूं, कि न मृत्यु, न जीवन, न स्वर्गदूत, न प्रधानताएं, न वर्तमान, न भविष्य, न सामर्थ्य, न ऊंचाई, न गहराई और न कोई और सृष्टि, हमें परमेश्वर के प्रेम से, जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी। - रोमियों 8:38-39

बाइबल पाठ: इफिसियों 3:16-21

इफिसियों 3:16 कि वह अपनी महिमा के धन के अनुसार तुम्हें यह दान दे, कि तुम उसके आत्मा से अपने भीतरी मनुष्यत्व में सामर्थ्य पाकर बलवन्‍त होते जाओ।

इफिसियों 3:17 और विश्वास के द्वारा मसीह तुम्हारे हृदय में बसे कि तुम प्रेम में जड़ पकड़ कर और नेव डाल कर।

इफिसियों 3:18 सब पवित्र लोगों के साथ भली भांति समझने की शक्ति पाओ; कि उसकी चौड़ाई, और लम्बाई, और ऊंचाई, और गहराई कितनी है।

इफिसियों 3:19 और मसीह के उस प्रेम को जान सको जो ज्ञान से परे है, कि तुम परमेश्वर की सारी भरपूरी तक परिपूर्ण हो जाओ।

इफिसियों 3:20 अब जो ऐसा सामर्थी है, कि हमारी बिनती और समझ से कहीं अधिक काम कर सकता है, उस सामर्थ्य के अनुसार जो हम में कार्य करता है,

इफिसियों 3:21 कलीसिया में, और मसीह यीशु में, उस की महिमा पीढ़ी से पीढ़ी तक युगानुयुग होती रहे। आमीन।

 

एक साल में बाइबल: 

  • उत्पत्ति 27-28
  • मत्ती 8:18-34

रविवार, 10 जनवरी 2021

सभी

 

          हमारे चर्च की सभाएं एक पुराने प्राथमिक विद्यालय में होती हैं। सन 1958 में, अफ्रीकी मूल के विद्यार्थियों को भी श्वेत अमरीकी विद्यार्थियों के साथ बैठकर समान शिक्षा पाने का अधिकार रखने के अमेरिका के न्यायालय के आदेश का पालन करने की बजाए स्कूल के प्रबंधकों ने उसे बन्द कर देना अधिक उत्तम समझा। इससे अगले वर्ष वह स्कूल फिर से खोला गया, और उस समय, हमारे चर्च की एक वर्तमान अश्वेत सदस्य, एलवा,उसमें एक अश्वेत विद्यार्थी हुई। एलवा याद करती है, “मुझे अपने सुरक्षित समाज और उन शिक्षकों के पास से जो हमारे जीवन का भाग थे, निकाल कर एक डरावने वातावरण में डाल दिया गया, एक ऐसी कक्षा में जिसमें मेरे अतिरिक्त  केवल एक ही और अश्वेत विद्यार्थी था।” अपने अश्वेत रंग के कारण एलवा को बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, परन्तु वह साहस रखने वाली, मसीही विश्वास रखने और क्षमा करने वाली स्त्री बनी।

          उसकी गवाही बहुत गंभीर है, उस सभी बुराई के कारण जो उसे समाज के कुछ ऐसे लोगों के हाथों सहन करनी पड़ी, जो इस सत्य को स्वीकार नहीं करते थे कि परमेश्वर सभी से प्रेम करता है, वे चाहे किसी भी रंग,जाति, स्तर के क्यों न हों।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में भी हम देखते हैं कि प्रारंभिक कलीसिया के कुछ सदस्यों को इसी तथ्य के साथ जूझना पड़ा था कि परमेश्वर सभी से समान प्रेम करता है; जबकि उनकी अपनी धारणा थी कि कुछ लोग जन्म से ही परमेश्वर के प्रेम के लिए विशिष्ट होते हैं, परमेश्वर उन्हीं से प्रेम करता है, और शेष सभी को अस्वीकार करता है। किन्तु परमेश्वर से दिव्य-दर्शन पाने के बाद जब पतरस प्रेरित ने यह तथ्य सभी मसीही विश्वासियों को बताया, तो सभी भौंचक्के रह गए। पतरस ने कहा,अब मुझे निश्चय हुआ, कि परमेश्वर किसी का पक्ष नहीं करता, वरन हर जाति में जो उस से डरता और धर्म के काम करता है, वह उसे भाता है” (प्रेरितों 10:35 )।

          परमेश्वर ने अपने प्रेम को संसार के सभी लोगों को बिना किसी भेदभाव के प्रदान करने के लिए अपनी बाहें कलवरी के क्रूस पर फैला दीं। हमें भी उसी के समान, बिना किसी भी प्रकार के भेदभाव के, सभी से प्रेम करना है। - विन्न कोलियर

 

हम में लोगों को दूर धकेल देने की प्रवृत्ति हो सकती है; 

परन्तु परमेश्वर का प्रेम सभी के लिए सदैव उपलब्ध रहता है।


और मन के जांचने वाले परमेश्वर ने उन को भी हमारे समान पवित्र आत्मा देकर उन की गवाही दी। और विश्वास के द्वारा उन के मन शुद्ध कर के हम में और उन में कुछ भेद न रखा। - प्रेरितों 15:8-9

बाइबल पाठ: प्रेरितों 10:34-38

प्रेरितों के काम 10:34 तब पतरस ने मुंह खोल कर कहा;

प्रेरितों के काम 10:35 अब मुझे निश्चय हुआ, कि परमेश्वर किसी का पक्ष नहीं करता, वरन हर जाति में जो उस से डरता और धर्म के काम करता है, वह उसे भाता है।

प्रेरितों के काम 10:36 जो वचन उसने इस्राएलियों के पास भेजा, जब कि उसने यीशु मसीह के द्वारा (जो सब का प्रभु है) शान्ति का सुसमाचार सुनाया।

प्रेरितों के काम 10:37 वह बात तुम जानते हो जो यूहन्ना के बपतिस्मा के प्रचार के बाद गलील से आरम्भ कर के सारे यहूदिया में फैल गई।

प्रेरितों के काम 10:38 कि परमेश्वर ने किस रीति से यीशु नासरी को पवित्र आत्मा और सामर्थ्य से अभिषेक किया: वह भलाई करता, और सब को जो शैतान के सताए हुए थे, अच्छा करता फिरा; क्योंकि परमेश्वर उसके साथ था।

 

एक साल में बाइबल: 

  • उत्पत्ति 25-26
  • मत्ती 8:1-17

शनिवार, 9 जनवरी 2021

विश्वास

 

          पिछले वर्ष, मैंने और मेरे मित्रों ने तीन महिलाओं की चंगाई के लिए, जो कैंसर से जूझ रही थीं, प्रार्थनाएँ कीं। हम जानते थे कि परमेश्वर के पास यह करने की शक्ति है, और हमने प्रतिदिन उससे ऐसा करने के लिए निवेदन किया। हमने बीते समय में उसे कार्य करते देखा था, और हमें विश्वास था कि वह अब भी यह कर सकता है। तीनों के जीवन में ऐसे दिन भी आए जब लगा कि उन्हें चंगाई मिल गई है, और हम इससे आनन्दित हुए। परन्तु उस वर्ष की पतझड़ में, उन तीनों की मृत्यु हो गई। किसी ने कहा कि अन्ततः उन्हें सभी दुखों से ‘पूर्ण चंगाई मिल गई; एक प्रकार से यह ठीक भी था। किन्तु उनके देहांत से हम सभी को बहुत दुःख हुआ। हम तो चाहते थे कि परमेश्वर अभी और यहाँ, हमारे सामने उन्हें पूरी चंगाई दे, परन्तु किसी समझ में न आने वाले कारण से ऐसा कोई आश्चर्यकर्म नहीं हुआ; उन्हें वह चंगाई नहीं मिली जिसके लिए हम सभी प्रार्थनाएँ कर रहे थे।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि प्रभु यीशु के पीछे चलने वालों में से कुछ ऐसे थे जो उन आश्चर्यकर्मों के कारण जो वह करता था, और उसके द्वारा उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति मिलने के लिए, प्रभु के पीछे चलते थे (यूहन्ना 6:2, 26)। जबकि कुछ प्रभु को केवल बढ़ई का बेटा समझते थे (मत्ती 13:55-58), और कुछ उसे अपना राजनीतिक नेता बनाना चाहते थे (लूका 19:37-38)। कुछ अन्य उसे एक महान शिक्षक समझते थे; जबकि कुछ अन्य ने उसके पीछे चलना इसलिए छोड़ दिया क्योंकि उसकी शिक्षाओं को समझना और उनका पालन करना उन्हें कठिन लगता था (यूहन्ना 6:66)।

          प्रभु यीशु आज भी हम सभी की सारी अपेक्षाओं को पूरा नहीं करता है। परन्तु फिर भी वह हमारी समस्त कल्पनाओं से कहीं अधिक बढ़कर है। वही अनन्त जीवन का देने वाला है (पद 47-48)। वह भला है, बुद्धिमान है, हम से प्रेम करता है, हमें क्षमा करता है, हमारे निकट बना रहता है, और हमें शान्ति प्रदान करता है।

          प्रभु यीशु जो और जैसा है, हम वैसे ही उसमें विश्वास करते रहें, और भरोसे के साथ उसका अनुसरण करते रहें। - ऐनी सेटास

 

परन्तु हे यहोवा मैं ने तो तुझी पर भरोसा रखा है, मैं ने कहा, तू मेरा परमेश्वर है। - भजन 31:14

बाइबल पाठ: यूहन्ना 6:47-51, 60-66

यूहन्ना 6:47 मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि जो कोई विश्वास करता है, अनन्त जीवन उसी का है।

यूहन्ना 6:48 जीवन की रोटी मैं हूं।

यूहन्ना 6:49 तुम्हारे बाप दादों ने जंगल में मन्ना खाया और मर गए।

यूहन्ना 6:50 यह वह रोटी है जो स्वर्ग से उतरती है ताकि मनुष्य उस में से खाए और न मरे।

यूहन्ना 6:51 जीवन की रोटी जो स्वर्ग से उतरी मैं हूं। यदि कोई इस रोटी में से खाए, तो सर्वदा जीवित रहेगा और जो रोटी मैं जगत के जीवन के लिये दूंगा, वह मेरा मांस है।

यूहन्ना 6:60 इसलिये उसके चेलों में से बहुतों ने यह सुनकर कहा, कि यह बात नागवार है; इसे कौन सुन सकता है?

यूहन्ना 6:61 यीशु ने अपने मन में यह जान कर कि मेरे चेले आपस में इस बात पर कुड़कुड़ाते हैं, उन से पूछा, क्या इस बात से तुम्हें ठोकर लगती है?

यूहन्ना 6:62 और यदि तुम मनुष्य के पुत्र को जहां वह पहिले था, वहां ऊपर जाते देखोगे, तो क्या होगा?

यूहन्ना 6:63 आत्मा तो जीवनदायक है, शरीर से कुछ लाभ नहीं: जो बातें मैं ने तुम से कहीं हैं वे आत्मा है, और जीवन भी हैं।

यूहन्ना 6:64 परन्तु तुम में से कितने ऐसे हैं जो विश्वास नहीं करते: क्योंकि यीशु तो पहिले ही से जानता था कि जो विश्वास नहीं करते, वे कौन हैं और कौन मुझे पकड़वाएगा।

यूहन्ना 6:65 और उसने कहा, इसी लिये मैं ने तुम से कहा था कि जब तक किसी को पिता की ओर यह वरदान न दिया जाए तक वह मेरे पास नहीं आ सकता।

यूहन्ना 6:66 इस पर उसके चेलों में से बहुतेरे उलटे फिर गए और उसके बाद उसके साथ न चले।

 

एक साल में बाइबल: 

  • उत्पत्ति 23-24
  • मत्ती 7

शुक्रवार, 8 जनवरी 2021

विकल्प

 

          एक ईमानदार और नियम-व्यवस्था का पालन करने वाले नागरिक के पास एक मौखिक सन्देश उसके वौइस् मेल के द्वारा पहुँचा, “मैं पुलिस विभाग से अधिकारी ‘----‘ हूँ; मुझ से इस नंबर पर संपर्क करें।” तुरंत ही वह व्यक्ति चिंतित हो गया – उसे भय था कि कहीं उसने कुछ गलत कर दिया होगा; इसलिए उसने वापस कॉल भी नहीं करी। वह विभिन्न संभावनाओं के बारे में सोचते हुए, रातों को ठीक से सो भी नहीं पाता था; उसे लगता था कि वह किसी प्रकार की मुसीबत में है। यद्यपि उसे उस पुलिस अधिकारी से फिर और कोई सन्देश नहीं आया, किन्तु उसकी चिंताओं को शांत होते कई सप्ताह लग गए।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु ने चिंता के बारे में एक रोचक प्रश्न पूछा: “तुम में कौन है, जो चिन्ता कर के अपनी अवस्था में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है?” (मत्ती 6:27)। चिंता के बारे में हमारी सोच को सुधारने में यह प्रश्न कारगर हो सकता है, क्योंकि इस प्रश्न का स्वाभाविक उत्तर है कि चिंता के द्वारा हमारी परिस्थिति में कोई सुधर नहीं होता है।

          जब हमारे लिए परिस्थितियाँ बिगाड़ रही होती हैं, तब हम इन दो कदमों को उठा सकते हैं: उचित कार्य करें; और परमेश्वर पर भरोसा रखें। यदि हम समस्या से बचने के लिए कुछ कर सकते हैं तो वह करें। हम परमेश्वर से प्रार्थना कर सकते हैं कि जो हमें करना चाहिए उसके बारे में वह हमारा मार्गदर्शन करे। किन्तु यदि ऐसा कुछ नहीं है जो हम कर सकते हैं, तो हम इस बात से ढाढ़स बांधें कि परमेश्वर कभी हमारे समान मजबूर नहीं होता है; उसके पास हर बात, हर परिस्थिति के लिए सदा ही कोई योजना,कोई विकल्प होता है, जो भला ही होता है। क्योंकि वह सदा ही हमारे पक्ष में होकर कार्य करता है इसलिए हम हर परिस्थिति को उसके हाथों में सौंप कर उस पर भरोसा रख सकते हैं, उसके विकल्पों और कार्यों के प्रति निश्चिंत हो सकते हैं।

          जब ऐसा लगे कि यह चिंतित होने का समय है, तब हम ईश्वरीय प्रेरणा के द्वारा राजा दाऊद के लिखे शब्दों से हिम्मत पा सकते हैं, जो कठिनाइयों और परेशानियों का सामना करने पर इसी निष्कर्ष पर पहुँचा  अपना बोझ यहोवा पर डाल दे वह तुझे सम्हालेगा; वह धर्मी को कभी टलने न देगा” (भजन 55:22)। चिंतित होने का यह कितना बेहतर और अद्भुत विकल्प है। - डेव ब्रैनन

 

आज आपको कौन सी चिंताओं को परमेश्वर को सौंप देना है?


और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ: मत्ती 6:25-34

मत्ती 6:25 इसलिये मैं तुम से कहता हूं, कि अपने प्राण के लिये यह चिन्ता न करना कि हम क्या खाएंगे? और क्या पीएंगे? और न अपने शरीर के लिये कि क्या पहनेंगे? क्या प्राण भोजन से, और शरीर वस्त्र से बढ़कर नहीं?

मत्ती 6:26 आकाश के पक्षियों को देखो! वे न बोते हैं, न काटते हैं, और न खत्तों में बटोरते हैं; तौभी तुम्हारा स्वर्गीय पिता उन को खिलाता है; क्या तुम उन से अधिक मूल्य नहीं रखते।

मत्ती 6:27 तुम में कौन है, जो चिन्ता कर के अपनी अवस्था में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है?

मत्ती 6:28 और वस्त्र के लिये क्यों चिन्ता करते हो? जंगली सोसनों पर ध्यान करो, कि वे कैसे बढ़ते हैं, वे न तो परिश्रम करते हैं, न कातते हैं।

मत्ती 6:29 तौभी मैं तुम से कहता हूं, कि सुलैमान भी, अपने सारे वैभव में उन में से किसी के समान वस्त्र पहने हुए न था।

मत्ती 6:30 इसलिये जब परमेश्वर मैदान की घास को, जो आज है, और कल भाड़ में झोंकी जाएगी, ऐसा वस्त्र पहनाता है, तो हे अल्पविश्वासियों, तुम को वह क्योंकर न पहनाएगा?

मत्ती 6:31 इसलिये तुम चिन्ता कर के यह न कहना, कि हम क्या खाएंगे, या क्या पीएंगे, या क्या पहनेंगे?

मत्ती 6:32 क्योंकि अन्यजाति इन सब वस्तुओं की खोज में रहते हैं, और तुम्हारा स्वर्गीय पिता जानता है, कि तुम्हें ये सब वस्तुएं चाहिए।

मत्ती 6:33 इसलिये पहिले तुम उसके राज्य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्तुएं भी तुम्हें मिल जाएंगी।

मत्ती 6:34 सो कल के लिये चिन्ता न करो, क्योंकि कल का दिन अपनी चिन्ता आप कर लेगा; आज के लिये आज ही का दुख बहुत है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • उत्पत्ति 20-22
  • मत्ती 6:19-34

गुरुवार, 7 जनवरी 2021

योजनाएँ

 

          विलियम केरी, इंग्लैंड में नार्थअमप्टन में एक साधारण से परिवार में जन्मा लड़का था जो अधिकतर रोगी रहता था। उसका भविष्य कुछ विशेष उज्ज्वल प्रतीत नहीं होता था; परन्तु परमेश्वर के पास उसके लिए योजनाएँ थीं। समस्त बाधाओं के बावजूद, वह अनपेक्षित रीति से भारत आया, जहाँ उसने अभूतपूर्व कार्य किया, अनेकों सामाजिक परिवर्तन किए, और परमेश्वर के वचन बाइबल को कई भारतीय भाषाओं में अनुवाद किया। वह परमेश्वर तथा लोगों से प्रेम करता था, और उसने परमेश्वर के लिए बहुत से कार्य किए।

          बाइबल का एक प्रमुख पात्र, दाऊद, एक साधारण सा युवक था, अपने परिवार में सबसे छोटा था। वह बैतलहम की पहाड़ियों पर परिवार के पशुओं को चराने वाला एक साधारण सा चरवाहा था (1 शमूएल 16:11-12)। परन्तु परमेश्वर ने दाऊद के हृदय को देखा; उसके पास दाऊद के लिए एक योजना थी। परमेश्वर ने राजा शाऊल को उसकी अनाज्ञाकारिता के कारण अस्वीकार कर दिया था। जब शमूएल भविष्यद्वक्ता शाऊल के गलत चुनावों को लेकर दुखी था, परमेश्वर ने शमूएल को कहा कि यिशै के पुत्रों में से एक को जाकर राजा होने के लिए अभिषेक करे।

          जब शमूएल ने अच्छे डील-डौल वाले और सुन्दर दिखने वाले एलीआब को देखा, तो उसने स्वाभाविक रीति से सोचा,निश्चय जो यहोवा के सामने है वही उसका अभिषिक्त होगा” (आयत 6)। किन्तु राजा को चुनने के लिए परमेश्वर की योजना शमूएल की योजना से बहुत भिन्न थी। परमेश्वर ने यिशै के सभी पुत्रों को अस्वीकार कर दिया, सिवाय सबसे छोटे – दाऊद के। पहले नज़र में ऐसा लगता है कि दाऊद को राजा होने के लिए चुनना परमेश्वर द्वारा सोच-विचार कर किया गया कार्य नहीं था। एक चरवाहा युवक अपने देश और जाति के लिए क्या कर पाएगा? परन्तु दाऊद इस्राएल का श्रेष्ठतम राजा हुआ, और उसी के वंश से जगत का
उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह आया।

          यह हमारे लिए कितने ढाढ़स की बात है कि परमेश्वर हमारे हृदयों को जानता है, और उसके पास हम सभी के लिए योजनाएँ हैं। - एस्तेरा पिरोसका एस्कोबार

 

परमेश्वर हमारे हृदयों को देखता है।


सब से अधिक अपने मन की रक्षा कर; क्योंकि जीवन का मूल स्रोत वही है। - नीतिवचन 4:23

बाइबल पाठ: 1 शमूएल 16:1-7

1 शमूएल 16:1 और यहोवा ने शमूएल से कहा, मैं ने शाऊल को इस्राएल पर राज्य करने के लिये तुच्छ जाना है, तू कब तक उसके विषय विलाप करता रहेगा? अपने सींग में तेल भर के चल; मैं तुझ को बैतलहमवासी यिशै के पास भेजता हूं, क्योंकि मैं ने उसके पुत्रों में से एक को राजा होने के लिये चुना है।

1 शमूएल 16:2 शमूएल बोला, मैं क्योंकर जा सकता हूं? यदि शाऊल सुन लेगा, तो मुझे घात करेगा। यहोवा ने कहा, एक बछिया साथ ले जा कर कहना, कि मैं यहोवा के लिये यज्ञ करने को आया हूं।

1 शमूएल 16:3 और यज्ञ पर यिशै को न्योता देना, तब मैं तुझे जता दूंगा कि तुझ को क्या करना है; और जिस को मैं तुझे बताऊं उसी को मेरी ओर से अभिषेक करना।

1 शमूएल 16:4 तब शमूएल ने यहोवा के कहने के अनुसार किया, और बैतलहम को गया। उस नगर के पुरनिये थरथराते हुए उस से मिलने को गए, और कहने लगे, क्या तू मित्र भाव से आया है कि नहीं?

1 शमूएल 16:5 उसने कहा, हां, मित्र भाव से आया हूं; मैं यहोवा के लिये यज्ञ करने को आया हूं; तुम अपने अपने को पवित्र कर के मेरे साथ यज्ञ में आओ। तब उसने यिशै और उसके पुत्रों को पवित्र कर के यज्ञ में आने का न्योता दिया।

1 शमूएल 16:6 जब वे आए, तब उसने एलीआब पर दृष्टि कर के सोचा, कि निश्चय जो यहोवा के सामने है वही उसका अभिषिक्त होगा।

1 शमूएल 16:7 परन्तु यहोवा ने शमूएल से कहा, न तो उसके रूप पर दृष्टि कर, और न उसके डील की ऊंचाई पर, क्योंकि मैं ने उसे अयोग्य जाना है; क्योंकि यहोवा का देखना मनुष्य का सा नहीं है; मनुष्य तो बाहर का रूप देखता है, परन्तु यहोवा की दृष्टि मन पर रहती है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • उत्पत्ति 18-19
  • मत्ती 6:1-18

बुधवार, 6 जनवरी 2021

महिमा

 

          कैसर अगस्तुस को रोमी साम्राज्य के प्रथम और सबसे महान सम्राट के रूप में स्मरण किया जाता है। उसने राजनीतिक कौशल तथा सैन्य शक्ति के द्वारा अपने शत्रुओं को नाश किया, साम्राज्य का विस्तार किया, और रोम को गंदी बस्तियों के समूह से उठाकर संगमरमर की मूर्तियों और मंदिरों का शहर बना दिया। उसे प्रेम और सम्मान देने वाले रोमी नागरिकों ने उसे दैवीय पिता और मानवजाति का रक्षक कहा। जब चालीस वर्ष राज्य करने के बाद वह अपने अन्त समय की ओर आया, तो आधिकारिक रूप से उसके द्वारा कहे गए अंतिम शब्द थे, “मैंने रोम को गारे और मिट्टी का शहर प्राप्त किया था और उसे संगमरमर का शहर छोड़ कर जा रहा हूँ।” किन्तु उसकी पत्नी के अनुसार, वास्तव में उसके अंतिम शब्द थे, “क्या मैंने अपनी भूमिका सही निभाई है? यदि हाँ तो मेरी विदाई के समय मेरी सराहना करना।”

          अगस्तुस को जो बात पता नहीं थी, वह थी कि उसे एक बहुत महान कहानी में एक छोटी सी सहायक भूमिका दी गई थी। उसके राज्य के समय में, एक बढ़ई के घर में एक बालक ने जन्म लिया, जो रोमी शासन के महानतम सैनिक विजय, मंदिर, अखाड़े, या अन्य किसी भी स्थान अथवा बात से कहीं बढ़कर कुछ प्रकट करने वाला था (लूका 2:1)।

          लेकिन उस महिमा को कौन समझ सकता था जिसके लिए प्रभु यीशु ने अपने पकड़वाए जाने की रात में प्रार्थना की थी, जब उसके देशवासी रोमी शासन से उसे क्रूस पर चढ़ाए जाने की माँग कर रहे थे (यूहन्ना 17:4-5)। कौन प्रभु के उस बलिदान में छुपे हुए अचरज को देखने या समझने पाता, जिसकी पृथ्वी और स्वर्ग पर सदा ही सराहना होती रहेगी?

          परमेश्वर के वचन बाइबल में दी गई प्रभु यीशु की यह जीवनी एक बहुत ही अद्भुत घटना है। हमारे परमेश्वर ने हमें मूर्खतापूर्ण बातों के विषय कल्पनाएँ करते और आपस में लड़ते-झगड़ते पाया; और अपने प्रेम तथा बलिदान के द्वारा हमें एक कर दिया, क्रूस के बलिदान की महिमा की स्तुति और आराधना गाने वाले बना दिया। - मार्ट डीहान

 

जिस महिमा की हमें आवश्यकता है वह क्रूस की महिमा है।


और विश्वास के कर्ता और सिद्ध करने वाले यीशु की ओर ताकते रहें; जिसने उस आनन्द के लिये जो उसके आगे धरा था, लज्जा की कुछ चिन्ता न कर के, क्रूस का दुख सहा; और सिंहासन पर परमेश्वर के दाहिने जा बैठा। - इब्रानियों 12:2

बाइबल पाठ: यूहन्ना 17:1-5, 20-24

यूहन्ना 17:1 यीशु ने ये बातें कहीं और अपनी आँखें आकाश की ओर उठा कर कहा, हे पिता, वह घड़ी आ पहुंची, अपने पुत्र की महिमा कर, कि पुत्र भी तेरी महिमा करे।

यूहन्ना 17:2 क्योंकि तू ने उसको सब प्राणियों पर अधिकार दिया, कि जिन्हें तू ने उसको दिया है, उन सब को वह अनन्त जीवन दे।

यूहन्ना 17:3 और अनन्त जीवन यह है, कि वे तुझ अद्वैत सच्चे परमेश्वर को और यीशु मसीह को, जिसे तू ने भेजा है, जाने।

यूहन्ना 17:4 जो काम तू ने मुझे करने को दिया था, उसे पूरा कर के मैं ने पृथ्वी पर तेरी महिमा की है।

यूहन्ना 17:5 और अब, हे पिता, तू अपने साथ मेरी महिमा उस महिमा से कर जो जगत के होने से पहिले, मेरी तेरे साथ थी।

यूहन्ना 17:20 मैं केवल इन्हीं के लिये बिनती नहीं करता, परन्तु उन के लिये भी जो इन के वचन के द्वारा मुझ पर विश्वास करेंगे, कि वे सब एक हों।

यूहन्ना 17:21 जैसा तू हे पिता मुझ में हैं, और मैं तुझ में हूं, वैसे ही वे भी हम में हों, इसलिये कि जगत प्रतीति करे, कि तू ही ने मुझे भेजा।

यूहन्ना 17:22 और वह महिमा जो तू ने मुझे दी, मैं ने उन्हें दी है कि वे वैसे ही एक हों जैसे की हम एक हैं।

यूहन्ना 17:23 मैं उन में और तू मुझ में कि वे सिद्ध हो कर एक हो जाएं, और जगत जाने कि तू ही ने मुझे भेजा, और जैसा तू ने मुझ से प्रेम रखा, वैसा ही उन से प्रेम रखा।

यूहन्ना 17:24 हे पिता, मैं चाहता हूं कि जिन्हें तू ने मुझे दिया है, जहां मैं हूं, वहां वे भी मेरे साथ हों कि वे मेरी उस महिमा को देखें जो तू ने मुझे दी है, क्योंकि तू ने जगत की उत्पत्ति से पहिले मुझ से प्रेम रखा।

 

एक साल में बाइबल: 

  • उत्पत्ति 16-17
  • मत्ती 5:27-48

मंगलवार, 5 जनवरी 2021

परिवर्तन


          तानी और मोदूपे की परवरिश नाइजीरिया में हुई और वे 1970 के दशक में अध्ययन के लिए इंग्लैंड गए। यद्यपि उन्होंने व्यक्तिगत रीति से अपने जीवन में परमेश्वर के अनुग्रह से आए परिवर्तन को अनुभव किया था, फिर भी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि एक दिन उन्हें इंग्लैंड की सबसे वंचित और पृथक किए गए समुदायों – लिवरपूल के एनफील्ड में ऐसा परिवर्तन लाने के लिए उपयोग किया जाएगा। डॉक्टर तानी और मुदूपे विश्वासयोग्यता के साथ परमेश्वर के खोजी रहे, और अपने समुदाय में सेवा करते रहे, और उनमें होकर परमेश्वर ने अनेकों की आशा को पुनःस्थापित किया। अब वे एक जीवंत चर्च का संचालन करते हैं, और अनेकों सामाजिक परियोजनाएं संचालित करते हैं, जिससे अनगिनत जीवनों में परिवर्तन आए हैं।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में मनश्शे ने अपने समाज को पहले बुराई की ओर और फिर भलाई की ओर परिवर्तित किया। वह बारह वर्ष की आयु में यहूदा का राजा बना था। उसने कई वर्ष तक बहुत सी बुराइयां कीं, और अपनी प्रजा को परमेश्वर से पथभ्रष्ट कर दिया (2 इतिहास 33:1-9)। उन लोगों ने परमेश्वर की चेतावनियों की ओर कोई ध्यान नहीं दिया, इसलिए परमेश्वर ने मनश्शे को बँधुआ बनाकर बेबीलोन ले जाए जाने दिया (पद 10-11)।

          वहाँ पर अपने कष्ट में मनश्शे परमेश्वर की ओर मुड़ा, और दीन होकर उसे पुकारा; परमेश्वर ने उसकी पुकार को सुना और उसे वापस लौटा कर उसे उसके राज्य पर पुनःस्थापित कर दिया (पद 12-13)। अब परिवर्तित हो चुके राजा ने नगर की दीवारों को बनवाया और पराए देवी-देवताओं को बाहर निकाल फेंका ( 14-15)। लिखा है,तब उसने यहोवा की वेदी की मरम्मत की, और उस पर मेलबलि और धन्यवाद बलि चढ़ाने लगा, और यहूदियों को इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की उपासना करने की आज्ञा दी” (पद 16)। जब लोगों ने मनश्शे के जीवन में यह अद्भुत परिवर्तन देखा, तो वे भी प्रभावित होकर परिवर्तित हो गए (पद 17)।

          जब हम सच्चे मन से परमेश्वर के खोजी होते हैं, और उसकी आज्ञाकारिता में चलते हैं, तो वह हमें परिवर्तित करता है, और हमारे द्वारा हमारे समाज में परिवर्तन लाता है। - रूथ ओरिली-स्मिथ

 

परमेश्वर द्वारा आप में लाया गया परिवर्तन, औरों को भी परिवर्तित करता है।


यहोवा की व्यवस्था खरी है, वह प्राण को बहाल कर देती है; यहोवा के नियम विश्वासयोग्य हैं, साधारण लोगों को बुद्धिमान बना देते हैं; यहोवा के उपदेश सिद्ध हैं, हृदय को आनन्दित कर देते हैं; यहोवा की आज्ञा निर्मल है, वह आंखों में ज्योति ले आती है; - भजन 19:7-8

बाइबल पाठ: 2 इतिहास 33:9-17

2 इतिहास 33:9 और मनश्शे ने यहूदा और यरूशलेम के निवासियों को यहां तक भटका दिया कि उन्होंने उन जातियों से भी बढ़ कर बुराई की, जिन्हें यहोवा ने इस्राएलियों के सामने से विनाश किया था।

2 इतिहास 33:10 और यहोवा ने मनश्शे और उसकी प्रजा से बातें कीं, परन्तु उन्होंने कुछ ध्यान नहीं दिया।

2 इतिहास 33:11 तब यहोवा ने उन पर अश्शूर के सेनापतियों से चढ़ाई कराई, और ये मनश्शे को नकेल डाल कर, और पीतल की बेड़ियों में जकड़ कर, उसे बेबीलोन को ले गए।

2 इतिहास 33:12 तब संकट में पड़ कर वह अपने परमेश्वर यहोवा को मानने लगा, और अपने पूर्वजों के परमेश्वर के सामने बहुत दीन हुआ, और उस से प्रार्थना की।

2 इतिहास 33:13 तब उसने प्रसन्न हो कर उसकी विनती सुनी, और उसको यरूशलेम में पहुंचा कर उसका राज्य लौटा दिया। तब मनश्शे को निश्चय हो गया कि यहोवा ही परमेश्वर है।

2 इतिहास 33:14 इसके बाद उसने दाऊदपुर से बाहर गीहोन के पश्चिम की ओर नाले में मच्छली फाटक तक एक शहरपनाह बनवाई, फिर ओपेल को घेर कर बहुत ऊंचा कर दिया; और यहूदा के सब गढ़ वाले नगरों में सेनापति ठहरा दिए।

2 इतिहास 33:15 फिर उसने पराये देवताओं को और यहोवा के भवन में की मूर्ति को, और जितनी वेदियां उसने यहोवा के भवन के पर्वत पर, और यरूशलेम में बनवाई थीं, उन सब को दूर कर के नगर से बाहर फिंकवा दिया।

2 इतिहास 33:16 तब उसने यहोवा की वेदी की मरम्मत की, और उस पर मेलबलि और धन्यवाद बलि चढ़ाने लगा, और यहूदियों को इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की उपासना करने की आज्ञा दी।

2 इतिहास 33:17 तौभी प्रजा के लोग ऊंचे स्थानों पर बलिदान करते रहे, परन्तु केवल अपने परमेश्वर यहोवा के लिये।

 

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 13-15
  • मत्ती 5:1-26