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Saturday, August 31, 2013

सीखने वाली आत्मा

   एक दिन हमारे चर्च में आराधना आरंभ होने से थोड़ा सा ही पहले मैंने एक युवक को अपनी माँ के साथ वार्तालाप करते सुना। वे दोनों चर्च के सूचना पटल पर लगी सूचनाएं पढ़ रहे थे जिनमें से एक थी कि चर्च में आने वाले लोग जुलाई और अगस्त के महीनों में प्रतिदिन परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन नामक पुस्तक का एक अध्याय पढ़ने की चुनौती लें; नीतिवचन में 31 अध्याय हैं। उस युवक ने अपनी माँ से पूछा, अगस्त के अन्त पर आकर लोग क्या करेंगे, अगस्त में तो 30 ही दिन होते हैं? उसकी माँ ने उत्तर दिया, नहीं अगस्त में भी 31 दिन होते हैं, वह फिर बोला नहीं, 30 ही दिन होते हैं!

   जब आराधना के समय हमारा एक दूसरे से मिलने और अभिनंदन करने का समया आया तो मैंने पीछे मुड़कर उस जवान से हाथ मिलाया, उसे "हैलो" कहा और मुस्कुराते हुए यह भी कहा कि अगस्त में वास्तव में 31 दिन होते हैं। वह फिर अपनी बात पर अड़ गया और बोला, नहीं, 31 दिन नहीं होते; एक के बाद एक कोई भी दो महीनों में 31 दिन कैसे हो सकते हैं? इतने में आराधना में स्तुति गीत आरंभ हो गया, और मैं मुस्कुराते हुए फिर सामने की ओर मुड़ गई।

   उस छोटे सी मुलाकात और वार्तालाप ने मुझे सोचने पर मजबूर किया कि एक सीखने वाली आत्मा को विकसित करना हमारे लिए कितना आवश्यक है, अन्यथा हम कभी अपने ही विचारों की सीमाओं के आगे नहीं बढ़ पाएंगे। नीतिवचन के लेखक राजा सुलेमान ने आरंभिक अध्यायों में यही बात समझाई है, एक नम्रता का मन और सीखने वाली आत्मा को अपने अन्दर बनाए रखना जिससे अपने बुज़र्गों के अनुभवों और शिक्षाओं से तथा परमेश्वर और उसके वचन से हम उत्तम बातें सीख सकें: "हे मेरे पुत्र, यदि तू मेरे वचन ग्रहण करे, और मेरी आज्ञाओं को अपने हृदय में रख छोड़े" (नीतिवचन 2:1); "क्योंकि बुद्धि यहोवा ही देता है; ज्ञान और समझ की बातें उसी के मुंह से निकलती हैं" (नीतिवचन 2:6); "अपनी दृष्टि में बुद्धिमान न होना; यहोवा का भय मानना, और बुराई से अलग रहना" (नीतिवचन 3:7)।

   अगस्त में 30 ही दिन होते हैं या 31 दिन, यह जानना चाहे कोई विशेष महत्व ना रखता हो, लेकिन नम्रता का मन और सीखने वाली आत्मा रखना बहुत महत्व रखता है, क्योंकि तभी हम दूसरों से तथा परमेश्वर से सीखने वाले हो सकेंगे। और परमेश्वर से सीखने के लिए प्रतिदिन नीतिवचन से एक अध्याय पढ़ना, उत्तम शिक्षा पाने के लिए एक अच्छा आरंभ है - क्या कल से आरंभ हो रहे नए माह से आप यह करने का संकल्प लेंगे, और उस संकल्प को पूरा भी करेंगे? - ऐनी सेटास


सच्ची बुद्धिमता परमेश्वर से ही आरंभ होती है और उसी पर अन्त भी होती है।

तू अपनी समझ का सहारा न लेना, वरन सम्पूर्ण मन से यहोवा पर भरोसा रखना। उसी को स्मरण कर के सब काम करना, तब वह तेरे लिये सीधा मार्ग निकालेगा। - नीतिवचन 3:5-6

बाइबल पाठ: नीतिवचन 2:1-9
Proverbs 2:1 हे मेरे पुत्र, यदि तू मेरे वचन ग्रहण करे, और मेरी आज्ञाओं को अपने हृदय में रख छोड़े,
Proverbs 2:2 और बुद्धि की बात ध्यान से सुने, और समझ की बात मन लगा कर सोचे;
Proverbs 2:3 और प्रवीणता और समझ के लिये अति यत्न से पुकारे,
Proverbs 2:4 ओर उसको चान्दी की नाईं ढूंढ़े, और गुप्त धन के समान उसी खोज में लगा रहे;
Proverbs 2:5 तो तू यहोवा के भय को समझेगा, और परमेश्वर का ज्ञान तुझे प्राप्त होगा।
Proverbs 2:6 क्योंकि बुद्धि यहोवा ही देता है; ज्ञान और समझ की बातें उसी के मुंह से निकलती हैं।
Proverbs 2:7 वह सीधे लोगों के लिये खरी बुद्धि रख छोड़ता है; जो खराई से चलते हैं, उनके लिये वह ढाल ठहरता है।
Proverbs 2:8 वह न्याय के पथों की देख भाल करता, और अपने भक्तों के मार्ग की रक्षा करता है।
Proverbs 2:9 तब तू धर्म और न्याय, और सीधाई को, निदान सब भली-भली चाल समझ सकेगा;

एक साल में बाइबल: 

  • भजन 132-134 
  • 1 कुरिन्थियों 11:17-34


Friday, August 30, 2013

निर्भर

   आयर्नमैन ट्राएथलन एक बहुत ही कठिन और असाधारण स्पर्धा है। इस स्पर्धा में भाग लेने वाले को 2.4 मील तक तैरना होता है, 112 मील तक साईकिल चलानी होती है और 26.2 मील की दूरी दौड़ कर तय करनी होती है। किसी भी व्यक्ति के लिए इसे पूरा कर पाना सरल नहीं है। लेकिन फिर भी डिक होयट ने इसमें अपने विकलांग पुत्र रिक के साथ भाग लिया और पूरा भी किया। जब डिक तैर रहा था तो अपने बेटे रिक को एक छोटी नाव में बैठा कर खींच भी रहा था, जब उसे साईकिल चलानी थी तो रिक को अपने साथ साईकिल पर सवार कर रखा था, और जब दौड़ना था तब रिक को पहिए वाली कुर्सी पर बैठा कर उसे धक्का देते हुए वह दौड़ता रहा। इस पूरी स्पर्धा को पूरा करने के लिए रिक पूर्णतया अपने पिता डिक पर निर्भर था; अपने पिता के बिना रिक कुछ भी नहीं कर सकता था, परन्तु पिता के साथ तथा उनकी सामर्थ से रिक ने असंभव को संभव कर लिया।

   डिक और रिक की इस कहानी से हम मसीही विश्वासी अपने मसीही जीवन के लिए एक महत्वपूर्ण शिक्षा ले सकते हैं। जैसे रिक अपने पिता पर स्पर्धा पूरी करने के लिए पूर्णतया निर्भर था, हम मसीही विश्वासी भी अपने उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह पर अपनी जीवन दौड़ सफलतापूर्वक पूरी करने के लिए पूर्णतया निर्भर हैं। परमेश्वर को भाता हुआ जीवन जीने के प्रयास में, चाहे हमारे उद्देश्य, संकल्प और प्रयास कितने ही दृढ़ और उत्तम क्यों ना हों, फिर भी हम अनेक बार ठोकर खाते हैं, चूक जाते हैं, गिर जाते हैं। हम केवल अपनी ही सामर्थ से कुछ भी नहीं कर सकते; हमें अपने प्रभु की सहायता की आवश्यकता है ही।

   आनन्द की बात यह है कि हमारे प्रेमी परमेश्वर पिता द्वारा यह सहायता हमारे माँगने से पहले ही हमारे लिए उपलब्ध करा दी गई है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने लिखा: "मैं मसीह के साथ क्रूस पर चढ़ाया गया हूं, और अब मैं जीवित न रहा, पर मसीह मुझ में जीवित है: और मैं शरीर में अब जो जीवित हूं तो केवल उस विश्वास से जीवित हूं, जो परमेश्वर के पुत्र पर है, जिसने मुझ से प्रेम किया, और मेरे लिये अपने आप को दे दिया" (गलतियों 2:20)। प्रत्येक मसीही विश्वासी के लिए कितना प्रेर्णादायक और उत्साहवर्धक है यह आश्वासन - "अब मैं जीवित न रहा, पर मसीह मुझ में जीवित है"। जब मसीह मुझे में जीवित है तो मसीह की सामर्थ भी मुझ में कार्यकारी है, और यदि मसीह यीशु, अर्थात परमेश्वर की सामर्थ मुझे में कार्यकारी है तो फिर ऐसा क्या है जो उसकी सामर्थ की सहायता से मैं कर नहीं सकता?

   हम अपनी मसीही जीवन दौड़ अपनी सामर्थ से पूरी नहीं कर सकते; परन्तु यदि हम मसीह यीशु पर निर्भर रहेंगे, अर्थात, हर बात में उसके आज्ञाकारी रहेंगे, उसे अपने जीवन में प्रथम स्थान देंगे, अपने जीवन से उसे महिमा देंगे, उसके गवाह बन कर संसार के सामने उस में सेंत-मेंत सबके लिए उपलब्ध पापों की क्षमा और उद्धार का सुसमाचार सुनाने वाले होंगे, तो उसकी सामर्थ भी स्वतः ही हमारे अन्दर कार्यकारी रहेगी और हमें हर बात, हर परिस्थिति पर एक जयवन्त जीवन प्रदान करती रहेगी। - एलबर्ट ली


विश्वास हमारी दुर्बलता को परमेश्वर की सामर्थ से जोड़ कर हमें सबल बना देता है।

तुम मुझ में बने रहो, और मैं तुम में: जैसे डाली यदि दाखलता में बनी न रहे, तो अपने आप से नहीं फल सकती, वैसे ही तुम भी यदि मुझ में बने न रहो तो नहीं फल सकते। मैं दाखलता हूं: तुम डालियां हो; जो मुझ में बना रहता है, और मैं उस में, वह बहुत फल फलता है, क्योंकि मुझ से अलग हो कर तुम कुछ भी नहीं कर सकते। - यूहन्ना 15:4-5

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 4:4-13
Philippians 4:4 प्रभु में सदा आनन्‍दित रहो; मैं फिर कहता हूं, आनन्‍दित रहो।
Philippians 4:5 तुम्हारी कोमलता सब मनुष्यों पर प्रगट हो: प्रभु निकट है।
Philippians 4:6 किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं।
Philippians 4:7 तब परमेश्वर की शान्‍ति, जो समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरिक्षत रखेगी।
Philippians 4:8 निदान, हे भाइयों, जो जो बातें सत्य हैं, और जो जो बातें आदरणीय हैं, और जो जो बातें उचित हैं, और जो जो बातें पवित्र हैं, और जो जो बातें सुहावनी हैं, और जो जो बातें मनभावनी हैं, निदान, जो जो सदगुण और प्रशंसा की बातें हैं, उन्‍हीं पर ध्यान लगाया करो।
Philippians 4:9 जो बातें तुम ने मुझ से सीखीं, और ग्रहण की, और सुनी, और मुझ में देखीं, उन्‍हीं का पालन किया करो, तब परमेश्वर जो शान्‍ति का सोता है तुम्हारे साथ रहेगा।
Philippians 4:10 मैं प्रभु में बहुत आनन्‍दित हूं कि अब इतने दिनों के बाद तुम्हारा विचार मेरे विषय में फिर जागृत हुआ है; निश्‍चय तुम्हें आरम्भ में भी इस का विचार था, पर तुम्हें अवसर न मिला।
Philippians 4:11 यह नहीं कि मैं अपनी घटी के कारण यह कहता हूं; क्योंकि मैं ने यह सीखा है कि जिस दशा में हूं, उसी में सन्‍तोष करूं।
Philippians 4:12 मैं दीन होना भी जानता हूं और बढ़ना भी जानता हूं: हर एक बात और सब दशाओं में तृप्‍त होना, भूखा रहना, और बढ़ना-घटना सीखा है।
Philippians 4:13 जो मुझे सामर्थ देता है उस में मैं सब कुछ कर सकता हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 129-131 
  • 1 कुरिन्थियों 11:1-16


Thursday, August 29, 2013

दृष्टिकोण

   अनेक बार यह प्रश्न किया जाता है: "अरे भई आप समस्या का भाग हैं या समस्या के समाधान का?" चाहे यह प्रश्न किसी व्यावासयिक चर्चा में उठे या पारिवारिक विचार-विमर्श में, या फिर किसी चर्च समिति की बैठक में, या अन्य किसी भी गोष्ठी में, इस प्रश्न के पूछने वाले का भाव रोशपूर्ण और तात्पर्य यह जानने का प्रयास करना होता है कि जिस व्यक्ति से यह प्रश्न किया जा रहा है उसने वह बात वैसे क्यों करी या कही जिस के कारण यह प्रश्न उठा। और अधिकाँशतः इस प्रश्न का कोई सीधा या स्पष्ट उत्तर भी नहीं होता क्योंकि उत्तर का वाजिब होना उत्तर सुनने वाले के दृष्टिकोण पर निर्धर करता है।

   यदि हम उन इस्त्राएलियों में होते जो 400 वर्ष की ग़ुलामी के बाद मिस्त्र से निकल कर जा रहे थे, तो हमारे दृष्टिकोण से निसन्देह मिस्त्र का अधिपति, फिरौन, समस्या ही का भाग होता - और वह था भी। लेकिन परमेश्वर का दृष्टिकोण भिन्न था।

   इस्त्राएलियों को समझ नहीं आया जब परमेश्वर ने उन्हें वापस मिस्त्र देश की ओर मुड़कर अपने डेरे लाल समुद्र के किनारे लगाने को कहा, जिससे फिरौन द्वारा उन पर हमला करना सरल हो गया (निर्गमन 14:1-3)। फिरौन को सेना सहित हमले के लिए आता देखकर इस्त्राएलियों ने समझा कि बस अब उनका अन्त आ गया और वे अत्यंत घबरा गए; लेकिन परमेश्वर का उत्तर था कि इस विकट और जान-लेवा दिखने वाली परिस्थिति में भी फिरौन और उसकी सेना के द्वारा उसे महिमा और आदर मिलेगा, तथा "तब मिस्री जान लेंगे कि मैं यहोवा हूं" (निर्गमन 14:4, 17-18), और अन्ततः ऐसा ही हुआ।

   जब हम यह समझ ना पाएं कि क्यों परमेश्वर हमारे जीवनों में ऐसी कठिन परिस्थितयाँ आने देता है जिनसे हम अपने को खतरे में तथा परिस्थितियों से अभिभूतित अनुभव करते हैं, तो यह ध्यान रखना सदा सहायक होता है कि हर बात और परिस्थिति के द्वारा परमेश्वर केवल हमारी भलाई ही चाहता है और हर बात के द्वारा वह अपनी महिमा करवा सकता है। जब हम मसीही विश्वासियों का दृष्टिकोण भी परमेश्वर के दृष्टिकोण के समान ही होगा, तो हम पूरे मन और विश्वास के साथ हर परिस्थिति में यह प्रार्थना कर सकेंगे: "हे पिता, इस परिस्थिति में भी मैं आप पर अपना विश्वास बनाए रखूँ और आपको आदर तथा महिमा देने वाला हो सकूँ"। तब परिस्थितियाँ हमें विचिलित करने वाली नहीं रहेंगी, परमेश्वर कि अद्भुत शांति हमारे जीवनों में बनी रहेगी और हमारे जीवन परमेश्वर के लिए और भी अधिक उपयोगी तथा एक गवाही हो जाएंगे। - डेविड मैक्कैसलैंड


विश्वास हमें वह स्वीकार करने में सहायता करता है जिसे हम बुद्धि से समझ नहीं पाते।

तब मैं फिरौन के मन को कठोर कर दूंगा, और वह उनका पीछा करेगा, तब फिरौन और उसकी सारी सेना के द्वारा मेरी महिमा होगी; और मिस्री जान लेंगे कि मैं यहोवा हूं। और उन्होंने वैसा ही किया। -निर्गमन 14:4

बाइबल पाठ: निर्गमन 14:1-18
Exodus 14:1 यहोवा ने मूसा से कहा,
Exodus 14:2 इस्राएलियों को आज्ञा दे, कि वे लौटकर मिगदोल और समुद्र के बीच पीहहीरोत के सम्मुख, बालसपोन के साम्हने अपने डेरे खड़े करें, उसी के साम्हने समुद्र के तट पर डेरे खड़े करें।
Exodus 14:3 तब फिरौन इस्राएलियों के विषय में सोचेगा, कि वे देश के उलझनों में बझे हैं और जंगल में घिर गए हैं।
Exodus 14:4 तब मैं फिरौन के मन को कठोर कर दूंगा, और वह उनका पीछा करेगा, तब फिरौन और उसकी सारी सेना के द्वारा मेरी महिमा होगी; और मिस्री जान लेंगे कि मैं यहोवा हूं। और उन्होंने वैसा ही किया।
Exodus 14:5 जब मिस्र के राजा को यह समाचार मिला कि वे लोग भाग गए, तब फिरौन और उसके कर्मचारियों का मन उनके विरुद्ध पलट गया, और वे कहने लगे, हम ने यह क्या किया, कि इस्राएलियों को अपनी सेवकाई से छुटकारा देकर जाने दिया?
Exodus 14:6 तब उसने अपना रथ जुतवाया और अपनी सेना को संग लिया।
Exodus 14:7 उसने छ: सौ अच्छे से अच्छे रथ वरन मिस्र के सब रथ लिये और उन सभों पर सरदार बैठाए।
Exodus 14:8 और यहोवा ने मिस्र के राजा फिरौन के मन को कठोर कर दिया। सो उसने इस्राएलियों का पीछा किया; परन्तु इस्राएली तो बेखटके निकले चले जाते थे।
Exodus 14:9 पर फिरौन के सब घोड़ों, और रथों, और सवारों समेत मिस्री सेना ने उनका पीछा कर के उन्हें, जो पीहहीरोत के पास, बालसपोन के साम्हने, समुद्र के तीर पर डेरे डाले पड़े थे, जा लिया।
Exodus 14:10 जब फिरौन निकट आया, तब इस्राएलियों ने आंखे उठा कर क्या देखा, कि मिस्री हमारा पीछा किए चले आ रहे हैं; और इस्राएली अत्यन्त डर गए, और चिल्लाकर यहोवा की दोहाई दी।
Exodus 14:11 और वे मूसा से कहने लगे, क्या मिस्र में कबरें न थीं जो तू हम को वहां से मरने के लिये जंगल में ले आया है? तू ने हम से यह क्या किया, कि हम को मिस्र से निकाल लाया?
Exodus 14:12 क्या हम तुझ से मिस्र में यही बात न कहते रहे, कि हमें रहने दे कि हम मिस्रियों की सेवा करें? हमारे लिये जंगल में मरने से मिस्रियों की सेवा करनी अच्छी थी।
Exodus 14:13 मूसा ने लोगों से कहा, डरो मत, खड़े खड़े वह उद्धार का काम देखो, जो यहोवा आज तुम्हारे लिये करेगा; क्योंकि जिन मिस्रियों को तुम आज देखते हो, उन को फिर कभी न देखोगे।
Exodus 14:14 यहोवा आप ही तुम्हारे लिये लड़ेगा, इसलिये तुम चुपचाप रहो।
Exodus 14:15 तब यहोवा ने मूसा से कहा, तू क्यों मेरी दोहाई दे रहा है? इस्राएलियों को आज्ञा दे कि यहां से कूच करें।
Exodus 14:16 और तू अपनी लाठी उठा कर अपना हाथ समुद्र के ऊपर बढ़ा, और वह दो भाग हो जाएगा; तब इस्राएली समुद्र के बीच हो कर स्थल ही स्थल पर चले जाएंगे।
Exodus 14:17 और सुन, मैं आप मिस्रियों के मन को कठोर करता हूं, और वे उनका पीछा कर के समुद्र में घुस पड़ेंगे, तब फिरौन और उसकी सेना, और रथों, और सवारों के द्वारा मेरी महिमा होगी, तब मिस्री जान लेंगे कि मैं यहोवा हूं।
Exodus 14:18 और जब फिरौन, और उसके रथों, और सवारों के द्वारा मेरी महिमा होगी, तब मिस्री जान लेंगे कि मैं यहोवा हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 126-128 
  • 1 कुरिन्थियों 10:19-33


Wednesday, August 28, 2013

अनुशासन

   हमारा घर घने वृक्षों से घिरा हुआ है, इसलिए ग्रीष्म ऋतु में भी हमें धूप दिन भर में थोड़े से समय के लिए ही मिल पाती है। हमें ताज़े टमाटर भी बहुत पसन्द हैं, इसलिए मैं ने सोचा कि हम टमाटर गमलों में उगाएंगे और उन गमलों को उन स्थानों पर रख देंगे जहाँ धूप पड़ती है। हमने ऐसा ही किया और टमाटर के पौधे तेज़ी से बढ़ने लगे। मैं उनकी यह तीव्र बढ़ोतरी देख कर बहुत प्रसन्न थी, लेकिन मेरी यह प्रसन्नता थोड़े ही समय की थी, क्योंकि मुझे मालुम पड़ा के टमाटर के वे पौधे अधिक से अधिक धूप पाने के लिए तेज़ी से लंबे तो होते जा रहे हैं, लेकिन उन पौधों के तनों मे उन्हें और उनके वज़न को संभाल पाने की ताकत नहीं है इस कारण वे एक लता के समान टेढ़े मेढ़े होकर ज़मीन पर भी बिछते जा रहे हैं। मैंने कुछ सीधी डंडीयाँ लीं और उन लता रूपी तनों को सहारा देने के लिए उनके साथ लगाया और उन्हें आपस में बांध  कर सीधा करने का प्रयास करने लगी, जिससे पौधे खड़े रहें और अच्छा फल ला सकें। मैंने प्रयास किया कि मैं पौधों को सीधा करने में हाथ हलका ही रखूँ, लेकिन फिर भी एक पौधे का तना टूट ही गया, और अन्य सभी पौधों के तने भी पूरी तरह से सीधे नहीं हो पाए, वे तने टेढ़े ही रहे।

   इस अनुभव से मैंने एक महत्वपूर्ण आत्मिक शिक्षा भी पाई - चरित्र के टेढ़े-मेढ़े होने से पहले ही अनुशासन रखना आवश्यक है, अन्यथा एक बार चरित्र में स्थाई विकृति और इधर-उधर का झुकाव आ गया तो फिर उसे वापस सीधा कर पाना बहुत कठिन हो जाएगा।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में एली नामक एक याजक (पुरोहित) का वृतांत है। एली के दो पुत्र थे, दोनों ही पथ-भ्रष्ट हो गए और एली ने उन्हें समय रहते अनुशासित नहीं किया। जब उन दोनों पुत्रों की दुष्टता इतनी बढ़ गई कि एली उनके दुषकर्मों की और उपेक्षा नहीं कर सका, तो एली ने केवल हलकी सी डाँट लगाकर ही काम चलाना चाहा (1 शमूएल 2:24-25), लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी, वे नहीं सुधरे और अन्ततः परमेश्वर ने उनके विषय में अपना निर्णय सुना दिया: "क्योंकि मैं तो उसको यह कहकर जता चुका हूं, कि मैं उस अधर्म का दण्ड जिसे वह जानता है सदा के लिये उसके घर का न्याय करूंगा, क्योंकि उसके पुत्र आप शापित हुए हैं, और उसने उन्हें नहीं रोका। इस कारण मैं ने एली के घराने के विषय यह शपथ खाई, कि एली के घराने के अधर्म का प्रायश्चित न तो मेलबलि से कभी होगा, और न अन्नबलि से" (1 शमूएल 3:13-14)।

   टेढ़े को सीधा करना पीड़ादायक और कठिन होता है, लेकिन टेढ़ा बने रहना ना केवल अपने लिए वरन दूसरों के लिए भी पीड़ादायक होता है और साथ ही विनाशकारी भी होता है। भला है कि अनुशासन के द्वारा आरंभ से ही चरित्र और चाल-चलन सुधार कर रखा जाए, अन्यथा परिणाम बहुत दुखदायी होंगे। - जूली ऐकैरमैन लिंक


परमेश्वर का प्रेम सामना भी करता है और सुधारता भी है।

और वर्तमान में हर प्रकार की ताड़ना आनन्द की नहीं, पर शोक ही की बात दिखाई पड़ती है, तौभी जो उसको सहते सहते पक्के हो गए हैं, पीछे उन्हें चैन के साथ धर्म का प्रतिफल मिलता है। - इब्रानियों 12:11 

बाइबल पाठ: इब्रानियों 12:5-15
Hebrews 12:5 और तुम उस उपदेश को जो तुम को पुत्रों की नाईं दिया जाता है, भूल गए हो, कि हे मेरे पुत्र, प्रभु की ताड़ना को हलकी बात न जान, और जब वह तुझे घुड़के तो हियाव न छोड़।
Hebrews 12:6 क्योंकि प्रभु, जिस से प्रेम करता है, उस की ताड़ना भी करता है; और जिसे पुत्र बना लेता है, उसको कोड़े भी लगाता है।
Hebrews 12:7 तुम दुख को ताड़ना समझकर सह लो: परमेश्वर तुम्हें पुत्र जान कर तुम्हारे साथ बर्ताव करता है, वह कौन सा पुत्र है, जिस की ताड़ना पिता नहीं करता?
Hebrews 12:8 यदि वह ताड़ना जिस के भागी सब होते हैं, तुम्हारी नहीं हुई, तो तुम पुत्र नहीं, पर व्यभिचार की सन्तान ठहरे!
Hebrews 12:9 फिर जब कि हमारे शारीरिक पिता भी हमारी ताड़ना किया करते थे, तो क्या आत्माओं के पिता के और भी आधीन न रहें जिस से जीवित रहें?
Hebrews 12:10 वे तो अपनी अपनी समझ के अनुसार थोड़े दिनों के लिये ताड़ना करते थे, पर यह तो हमारे लाभ के लिये करता है, कि हम भी उस की पवित्रता के भागी हो जाएं।
Hebrews 12:11 और वर्तमान में हर प्रकार की ताड़ना आनन्द की नहीं, पर शोक ही की बात दिखाई पड़ती है, तौभी जो उसको सहते सहते पक्के हो गए हैं, पीछे उन्हें चैन के साथ धर्म का प्रतिफल मिलता है।
Hebrews 12:12 इसलिये ढीले हाथों और निर्बल घुटनों को सीधे करो।
Hebrews 12:13 और अपने पांवों के लिये सीधे मार्ग बनाओ, कि लंगड़ा भटक न जाए, पर भला चंगा हो जाए।
Hebrews 12:14 सब से मेल मिलाप रखने, और उस पवित्रता के खोजी हो जिस के बिना कोई प्रभु को कदापि न देखेगा।
Hebrews 12:15 और ध्यान से देखते रहो, ऐसा न हो, कि कोई परमेश्वर के अनुग्रह से वंचित रह जाए, या कोई कड़वी जड़ फूट कर कष्‍ट दे, और उसके द्वारा बहुत से लोग अशुद्ध हो जाएं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 123-125 
  • 1 कुरिन्थियों 10:1-18


Tuesday, August 27, 2013

विनम्रता

   अपने कॉलेज छात्र होने के दिनों में मैंने जोड़े बनने की अनेकों कहानियाँ सुनी थीं। किसी कन्या के प्रति प्रेम भाव से भरे मेरे मित्रों ने अपने उस प्रेम को व्यक्त करने के लिए चकाचौंध कर देने वाले रेस्टोरेन्ट, पहाड़ की चोटी से सूर्यास्त के मनोहर दृश्य, घोड़ा गाड़ी की सवारी आदि अनेक माध्यमों का उपयोग करा। मुझे एक युवक की विलक्षण कहानी अभी तक स्मरण है, जिसने अपने प्रेम को व्यक्त करने के लिए अपनी प्रेमिका के पैर धोए! उसकी यह ’विनम्रता’ यह दर्शाने के लिए थी कि वह आजीवन वचनबद्धता में विनम्रता के महत्व को समझता था।

   प्रेरित पौलुस ने भी विनम्रता के महत्व को समझा और यह भी कि कैसे विनम्रता ही हमें आपस में जोड़ कर रख सकती है। यह बात विवाह संबंध में विशेष रूप से लागू होती है। पौलुस ने चिताया कि संबंधों को प्रगाढ़ बनाए रखने के लिए सबसे पहले निज स्वार्थ की भावनाओं को त्याग देना है: "विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो" (फिलिप्पियों 2:3)। स्वार्थ तथा निज हित के स्थान पर हमें अपने जोड़ीदार को अपने से अधिक महत्व देना चाहिए और उनकी इच्छाओं का ध्यान रखना चाहिए।

   विनम्रता को कार्यकारी रूप में दिखाने का अर्थ है अपने जोड़ीदार की सेवा करना, और कोई भी सेवा छोटी या बड़ी नहीं होती। आखिरकर प्रभु यीशु ने भी "मनुष्य के रूप में प्रगट हो कर अपने आप को दीन किया, और यहां तक आज्ञाकारी रहा, कि मृत्यु, हां, क्रूस की मृत्यु भी सह ली" (फिलिप्पियों 2:8)। प्रभु यीशु का निस्वार्थ स्वभाव हमारे प्रति उसके प्रेम का सूचक है।

   आज अपने किसी प्रीय के लिए आप विनम्रता सहित क्या सेवा कर सकते हैं? हो सकता है कि यह एक साधारण सी बात ही हो, जैसे खाने में परोसे जाने वाली वस्तुओं की सूची से उसको नापसन्द भोजन वस्तुओं को हटा देना; या कोई कठिन बात जैसे किसी लंबी बिमारी के समय उसके पूर्ण स्वास्थ लाभ होने तक उस के साथ बने रहना, उसकी सेवा करते रहना। कार्य कुछ भी हो, लेकिन अपनी आवश्यकताओं से बढ़कर अपने जोड़ीदार की आवश्यकताओं का ध्यान रखना दिखाता है कि हम उसके प्रति वैसी ही विनम्रता सहित वचनबद्ध हैं जैसे हमारा तथा समस्त संसार का उद्धारकर्ता मसीह यीशु अपनी विनम्रता सहित हमारे प्रति वचनबद्ध है। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


यदि आप यह विचार रखते हैं कि किसी प्रीय के प्रति प्रेम अत्याधिक भी हो सकता है, तो संभवतः आपने उससे कभी पर्याप्त प्रेम करा ही नहीं है।

और मनुष्य के रूप में प्रगट हो कर अपने आप को दीन किया, और यहां तक आज्ञाकारी रहा, कि मृत्यु, हां, क्रूस की मृत्यु भी सह ली। - फिलिप्पियों 2:8

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 2:1-11
Philippians 2:1 सो यदि मसीह में कुछ शान्‍ति और प्रेम से ढाढ़स और आत्मा की सहभागिता, और कुछ करूणा और दया है।
Philippians 2:2 तो मेरा यह आनन्द पूरा करो कि एक मन रहो और एक ही प्रेम, एक ही चित्त, और एक ही मनसा रखो।
Philippians 2:3 विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो।
Philippians 2:4 हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्‍ता करे।
Philippians 2:5 जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो।
Philippians 2:6 जिसने परमेश्वर के स्‍वरूप में हो कर भी परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्तु न समझा।
Philippians 2:7 वरन अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्‍वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया।
Philippians 2:8 और मनुष्य के रूप में प्रगट हो कर अपने आप को दीन किया, और यहां तक आज्ञाकारी रहा, कि मृत्यु, हां, क्रूस की मृत्यु भी सह ली।
Philippians 2:9 इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्ठ है।
Philippians 2:10 कि जो स्वर्ग में और पृथ्वी पर और जो पृथ्वी के नीचे है; वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें।
Philippians 2:11 और परमेश्वर पिता की महिमा के लिये हर एक जीभ अंगीकार कर ले कि यीशु मसीह ही प्रभु है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 120-122 
  • 1 कुरिन्थियों 9


Monday, August 26, 2013

भलाई का स्वाद

   कुछ वर्ष पहले मैंने एक अंग्रेज़ नवाब सर जेम्स बैरी द्वारा लिखित लघु निबंध पढ़ा। उस निबंध में सर जेम्स ने अपनी माँ की, जो परमेश्वर से और परमेश्वर के वचन बाइबल से बहुत प्रेम करती थीं, एक अन्तरंग तस्वीर प्रस्तुत करी। सर जेम्स की माँ की बाइबल पढ़ते पढ़ते पुरानी और तार तार हो गई थी, और उनकी माँ ने उस बाइबल को काले धागे से सी रखा था। सर जेम्स ने लिखा, "वह बाइबल अब मेरी है, और मेरे लिए वो काले धागे जिनसे उन्होंने उसे सीया है, उस बाइबल का ही एक अभिन्न भाग हैं।"

   मेरी अपनी माँ भी बाइबल से बहुत प्रेम करती थीं; 60 वर्ष से भी अधिक समय तक वे बाइबल को पढ़ती रहीं और उसके लिखे पर मनन करती रहीं। मैंने भी अपनी माँ की वह बाइबल अपनी किताबों की शेल्फ में एक प्रमुख स्थान पर रखी हुई है। उनकी वह बाइबल बहुत जीर्ण-शीर्ण हो चुकी है, पन्ने फट गए हैं, हर पन्ना धब्बेदार है, लेकिन हर पन्ने पर मेरी माँ की लिखी टिप्पणियाँ और मनन में मिले विचार लिखे हैं। अपने बचपन और लड़कपन में मैं प्रातः जब भी उनके कमरे में जाता था, तो उन्हें उस बाइबल को अपनी गोदी में रखकर खोले बैठे और उसे ध्यान से पढ़ते तथा उसके लेखों पर मनन करते हुए पाता था। वे ऐसा उस दिन तक करती रहीं जब तक उन्हें बाइबल के पन्नों पर लिखे शब्द दिखने बन्द नहीं हो गए, लेकिन तब भी वह बाइबल उनकी सबसे बहुमूल्य और प्रीय चीज़ बनी रही थी।

   सर जेम्स की माँ भी, अपनी वृद्धावस्था में अपनी बाइबल के शब्दों को पढ़ने में असमर्थ हो गईं थीं, लेकिन फिर भी उनके पति नियमित रूप में वह बाइबल उन्हें थमा देते थे और वे उसे बड़े चाव से पकड़ कर बैठी रहती थीं।

   भजनकार ने लिखा, "तेरे वचन मुझ को कैसे मीठे लगते हैं, वे मेरे मुंह में मधु से भी मीठे हैं!" (भजन 119:103 ) क्या आपने परमेश्वर की भलाई का स्वाद चखा है? आज ही अपनी बाइबल खोलिए और उसे अपने जीवन तथा दिनचर्या का अभिन्न अंग बना लीजिए। परमेश्वर की भलाई का स्वाद ना केवल आपको प्राप्त होगा, वरन आप में होकर अन्य अनेकों लोगों को भी मिलेगा। - डेविड रोपर


एक भली भांति पढ़ी गई बाइबल आत्मिक भोजन से तृप्त आत्मा की ओर संकेत करती है।

अहा! मैं तेरी व्यवस्था में कैसी प्रीति रखता हूं! दिन भर मेरा ध्यान उसी पर लगा रहता है। - भजन 119:97

बाइबल पाठ: भजन 119:97-104
Psalms 119:97 अहा! मैं तेरी व्यवस्था में कैसी प्रीति रखता हूं! दिन भर मेरा ध्यान उसी पर लगा रहता है।
Psalms 119:98 तू अपनी आज्ञाओं के द्वारा मुझे अपने शत्रुओं से अधिक बुद्धिमान करता है, क्योंकि वे सदा मेरे मन में रहती हैं।
Psalms 119:99 मैं अपने सब शिक्षकों से भी अधिक समझ रखता हूं, क्योंकि मेरा ध्यान तेरी चितौनियों पर लगा है।
Psalms 119:100 मैं पुरनियों से भी समझदार हूं, क्योंकि मैं तेरे उपदेशों को पकड़े हुए हूं।
Psalms 119:101 मैं ने अपने पांवों को हर एक बुरे रास्ते से रोक रखा है, जिस से मैं तेरे वचन के अनुसार चलूं।
Psalms 119:102 मैं तेरे नियमों से नहीं हटा, क्योंकि तू ही ने मुझे शिक्षा दी है।
Psalms 119:103 तेरे वचन मुझ को कैसे मीठे लगते हैं, वे मेरे मुंह में मधु से भी मीठे हैं!
Psalms 119:104 तेरे उपदेशों के कारण मैं समझदार हो जाता हूं, इसलिये मैं सब मिथ्या मार्गों से बैर रखता हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 119:89-176 
  • 1 कुरिन्थियों 8


Sunday, August 25, 2013

आने दो!

   टेलिविज़न पर दिखाए जाने वाले हिस्ट्री चैनल में एक बार संसार के सबसे दुर्गम हवाई अड्डों पर एक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। जिस हवाई आड्डे ने मेरा ध्यान सबसे अधिक आकर्षित किया वह था हौंग कौंग का काई ताक हवाई अड्डा, जो अब बन्द हो चुका है। मैं उस हवाई अड्डे से होकर यात्रा कर चुका हूँ और यह जानता हूँ कि वह हवाई अड्डा यात्रियों के लिए बहुत रोमाँचक और वायु-यान चालकों के लिए बहुत चुनौती पूर्ण रहा है। उस हवाई अड्डे के एक छोर पर हवाई पट्टी समुद्र के अन्दर को बनी हुई है और वहाँ उसके तीन ओर समुद्र था, और दूसरे छोर पर एक पहाड़ और उस पहाड़ के बाद ऊँची गगन चुँबी इम