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Thursday, October 31, 2013

अनपेक्षित

   जाने माने अमेरीकी अखबार, वॉशिंगटन पोस्ट के एक लेखक ने लोगों द्वारा पहचाने जाने के बारे में एक परीक्षण किया। उस लेखक ने एक बहुत प्रसिद्ध वायलिन वादक को राष्ट्रीय राजधानी के एक रेलवे स्टेशन पर एक प्रातः कुछ समय के लिए वायलिन बजाने को कहा। हज़ारों लोग उस वादक के सामने से निकल गए, केवल कुछ ही ने रुक कर उसका वायलिन वादन सुना, और लगभग 45 मिनिट के इस परीक्षण में कुल मिलाकर 32 डॉलर ही लोगों ने उसकी झोली में डाले। केवल दो दिन पहले ही यही वादक - जोशुआ बेल ने उसी 35 लाख डॉलर कीमत के वायलिन को बजाते हुए एक संगीत सभा में कार्यक्रम दिया था जहाँ उसका वायलिन वादन सुनने के लिए लोगों ने 100 डॉलर प्रति सीट का टिकिट खरीदा था और माँग इतनी थी कि सभी टिकिट बिक गए थे।

   किसी व्यक्ति का महान होते हुए भी पहचाने ना जाने कोई नयी बात नहीं है। यही प्रभु यीशु के साथ भी हुआ। प्रेरित यूहन्ना ने प्रभु यीशु के सम्बंध में उसकी जीवनी में लिखा: "वह जगत में था, और जगत उसके द्वारा उत्पन्न हुआ, और जगत ने उसे नहीं पहिचाना" (यूहन्ना 1:10)। जबकि उस समय के यहूदी लोग अपने मुक्तिदाता मसीहा की प्रतीक्षा में थे, फिर भी उन्होंने प्रभु यीशु के प्रति इतनी उदासीनता क्यों दिखाई? एक कारण था कि लोग मसीहा की आशा तो रखते थे किंतु विश्वास नहीं, इसलिए प्रभु यीशु का आगमन उनके लिए वैसे ही सर्वथा अनेपक्षित था, और वह भी एक गौशाला में जन्म लेने के द्वारा, जैसे लोग यह कलपना में भी नहीं सोच सकते कि इतना प्रसिद्ध वायलिन वादक एक रेलवे स्टेशन पर खड़े होकर वायलिन बजाता हुआ मिलेगा। अपने मुक्तिदाता के रूप में उन लोगों की अपेक्षा एक राजनैतिक नेता की थी जो उन्हें रोमी साम्राज्य से छुड़ाकर यहूदी राज्य पुनः स्थापित करके दे। वे एक आत्मिक व्यक्ति की तथा स्वर्ग के राज्य की बात करने वाले मसीहा की बाट तो कतई नहीं जोह रहे थे, जो आकर उनसे पापों की क्षमा और पश्चाताप की बात कहे।

   प्रथम ईसवीं के यहूदी लोगों की आँखें, परमेश्वर द्वारा प्रभु यीशु के इस पृथ्वी पर भेजे जाने के उद्देश्य के प्रति बिलकुल बन्द थीं; वे जगत के उद्धारकर्ता की उम्मीद में नहीं थे। लेकिन परमेश्वर का उद्देश्य प्रभु यीशु द्वारा कोई सांसारिक राज्य या सांसारिक गुट बनाने का ना तब था ना अब है। प्रभु यीशु केवल इसलिए आए कि संसार के सभी लोग अपने पापों से मुक्ति और उद्धार का मार्ग पा सकें (यूहन्ना 1:29), और आज भी उनके अनुयायियों द्वारा यही सुसमाचार प्रचार किया जाता है - संसार के राजनैतिक नेता का नहीं वरन सारे जगत के उद्धारकर्ता पर विश्वास द्वारा पापों की क्षमा और सेंत-मेंत उससे मिलने वाले उद्धार का।

   परमेश्वर का यह वरदान आपके लिए अनेपक्षित तो हो सकता है, लेकिन है अति अनिवार्य, और इस संसार से कूच करने के बाद फिर कभी उपलब्ध भी नहीं होगा। यदि आपने आज तक परमेश्वर के इस वरदान को ग्रहण नहीं किया है तो आज ही, अभी ही इसे ग्रहण कर लीजिए - सच्चे पश्चातापी मन से निकली एक छोटी प्रार्थना, "हे प्रभु यीशु मेरे पाप क्षमा कीजिए और मुझे अपनी शरण में ले लीजिए" आपके जीवन को, पृथ्वी के भी और पृथ्वी के बाद के भी, बदल देगी। - सी. पी. हिया


परमेश्वर ने मानव इतिहास में प्रभु यीशु के रूप में प्रवेश किया, जिससे संसार में सभी को अनन्त जीवन का वरदान मिल सके।

दूसरे दिन उसने यीशु को अपनी ओर आते देखकर कहा, देखो, यह परमेश्वर का मेम्ना है, जो जगत के पाप उठा ले जाता है। - यूहन्ना 1:29

बाइबल पाठ: यूहन्ना 1:6-13
John 1:6 एक मनुष्य परमेश्वर की ओर से आ उपस्थित हुआ जिस का नाम यूहन्ना था। 
John 1:7 यह गवाही देने आया, कि ज्योति की गवाही दे, ताकि सब उसके द्वारा विश्वास लाएं। 
John 1:8 वह आप तो वह ज्योति न था, परन्तु उस ज्योति की गवाही देने के लिये आया था। 
John 1:9 सच्ची ज्योति जो हर एक मनुष्य को प्रकाशित करती है, जगत में आने वाली थी। 
John 1:10 वह जगत में था, और जगत उसके द्वारा उत्पन्न हुआ, और जगत ने उसे नहीं पहिचाना। 
John 1:11 वह अपने घर आया और उसके अपनों ने उसे ग्रहण नहीं किया। 
John 1:12 परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं। 
John 1:13 वे न तो लोहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 22-23 
  • तीतुस 1


Wednesday, October 30, 2013

झूठ का पिता

   मानवजाति पर शैतान का प्रभाव आरंभ हुआ उसके द्वारा हमारे आदि माता-पिता, आदम और हव्वा के मनों को परमेश्वर के विरुद्ध फेरने से। उसने उनसे यह परमेश्वर के बारे में झूठ बोलकर, तथा उनके मनों को इस झूठ पर विश्वास कर लेने के लिए बरगला कर संभव किया। शैतान ने अदन की वाटिका में आदम और हव्वा से परमेश्वर की भलाई, उसके वचन तथा उनके लिए उसकी भली योजनाओं के बारे में झूठ बोला (उत्पत्ति 3:1-6), और वे उसकी बातों पर विश्वास कर बैठे, पाप में गिर गए, जिसका प्रभाव आज भी मानव जाति पर बना हुआ है।

   शैतान आज भी यही हथकंडा हमें पाप में फंसाने और गिराने के लिए अपनाता है। प्रभु यीशु ने शैतान के विषय में कहा कि, "...वह तो आरम्भ से हत्यारा है, और सत्य पर स्थिर न रहा, क्योंकि सत्य उस में है ही नहीं: जब वह झूठ बोलता, तो अपने स्‍वभाव ही से बोलता है; क्योंकि वह झूठा है, वरन झूठ का पिता है" (यूहन्ना 8:44)। इसलिए यह कोई अनोखी बात नहीं है कि जैसे ही हम किसी परेशानी या विपरीत परिस्थिति में पड़ते हैं तो तुरंत ही शैतान हमारे कानों में परमेश्वर तथा हमारे प्रति परमेश्वर के प्रेम तथा देखभाल के विरुद्ध फुसफुसाना आरंभ कर देता है, और हमें उकसाता है कि हम परमेश्वर के विरुद्ध चलने लगें, उसपर सन्देह करने लगें। जब हम से परमेश्वर के वचन पर बने रहने को कहा जाता है, तो शैतान हमें परमेश्वर के वचन की सत्यता पर ही सन्देह करने को उकसाता है। जब प्रभु यीशु हमें कहता है कि हम पृथ्वी पर धन अर्जित ना करें (मत्ती 6:19), तो शैतान हमें कहता है कि पृथ्वी की धन-संपदा के बिना जीवन का आनन्द कहाँ, ज़िन्दगी के मज़े लेने हैं तो धन तो जमा करना ही पड़ेगा, ऐसे नहीं तो वैसे। वह हमें परमेश्वर की देखभाल और भलाई की योजनाओं पर सन्देह करवा कर निन्यान्वे के फेर में डाल देता है, जहाँ हम जायज़-नाजायाज़ सभी तरीकों से सांसारिक धन अर्जित करने में फंस जाते हैं, परमेश्वर से दूर हो जाते हैं और चाहे पृथ्वी पर धनी हो जाएं लेकिन स्वर्ग में कंगाल हो जाते हैं।

   हमारी समस्या यह है कि हम आदम और हव्वा ही के समान शैतान से बात करने लगते हैं, उसकी बातों में आ जाते हैं और उसके झूठ पर विश्वास करने लगते हैं। जैसे ही हम ऐसा करते हैं, वैसे ही परमेश्वर के प्रति अपनी वफादारी के साथ समझौता कर बैठते हैं, विश्वास से गिर जाते हैं; और शत्रु शैतान हमारा उपहास करते हुए अपने इसी पुराने हथियार द्वारा कोई नया शिकार करने की तलाश में निकल पड़ता है। हम पड़े रह जाते हैं पाप में गिरने से उत्पन अपनी दुर्दशा पर पश्चाताप करने, और इस बात के लिए दुखी होने के लिए कि हमने शैतान की बातों में आकर अपने सच्चे मित्र और वास्तविक शुभचिंतक पर अविश्वास किया, उससे दूर हो गए।

   ज़रा विचार कीजिए, आप किस की आवाज़ सुनने में लगे हुए हैं? कहीं उस झूठ के पिता ने आपको तो सच्चे परमेश्वर के विमुख नहीं कर दिया? - जो स्टोवैल


शैतान के झूठ की ताकत का एकमात्र तोड़ परमेश्वर के वचन का सत्य है।

परन्तु मैं डरता हूं कि जैसे सांप ने अपनी चतुराई से हव्‍वा को बहकाया, वैसे ही तुम्हारे मन उस सीधाई और पवित्रता से जो मसीह के साथ होनी चाहिए कहीं भ्रष्‍ट न किए जाएं। और यह कुछ अचम्भे की बात नहीं क्योंकि शैतान आप भी ज्योतिमर्य स्वर्गदूत का रूप धारण करता है। सो यदि उसके सेवक भी धर्म के सेवकों का सा रूप धरें, तो कुछ बड़ी बात नहीं परन्तु उन का अन्‍त उन के कामों के अनुसार होगा। 
 - 2 कुरिन्थियों 11:3, 14-15 

बाइबल पाठ: यूहन्ना 8:37-47
John 8:37 मैं जानता हूं कि तुम इब्राहीम के वंश से हो; तौभी मेरा वचन तुम्हारे हृदय में जगह नहीं पाता, इसलिये तुम मुझे मार डालना चाहते हो। 
John 8:38 मैं वही कहता हूं, जो अपने पिता के यहां देखा है; और तुम वही करते रहते हो जो तुमने अपने पिता से सुना है। 
John 8:39 उन्होंने उन को उत्तर दिया, कि हमारा पिता तो इब्राहीम है: यीशु ने उन से कहा; यदि तुम इब्राहीम के सन्तान होते, तो इब्राहीम के समान काम करते। 
John 8:40 परन्तु अब तुम मुझ ऐसे मनुष्य को मार डालना चाहते हो, जिसने तुम्हें वह सत्य वचन बताया जो परमेश्वर से सुना, यह तो इब्राहीम ने नहीं किया था। 
John 8:41 तुम अपने पिता के समान काम करते हो: उन्होंने उस से कहा, हम व्यभिचार से नहीं जन्मे; हमारा एक पिता है अर्थात परमेश्वर। 
John 8:42 यीशु ने उन से कहा; यदि परमेश्वर तुम्हारा पिता होता, तो तुम मुझ से प्रेम रखते; क्योंकि मैं परमेश्वर में से निकल कर आया हूं; मैं आप से नहीं आया, परन्तु उसी ने मुझे भेजा। 
John 8:43 तुम मेरी बात क्यों नहीं समझते? इसलिये कि मेरा वचन सुन नहीं सकते। 
John 8:44 तुम अपने पिता शैतान से हो, और अपने पिता की लालसाओं को पूरा करना चाहते हो। वह तो आरम्भ से हत्यारा है, और सत्य पर स्थिर न रहा, क्योंकि सत्य उस में है ही नहीं: जब वह झूठ बोलता, तो अपने स्‍वभाव ही से बोलता है; क्योंकि वह झूठा है, वरन झूठ का पिता है। 
John 8:45 परन्तु मैं जो सच बोलता हूं, इसीलिये तुम मेरी प्रतीति नहीं करते। 
John 8:46 तुम में से कौन मुझे पापी ठहराता है? और यदि मैं सच बोलता हूं, तो तुम मेरी प्रतीति क्यों नहीं करते? 
John 8:47 जो परमेश्वर से होता है, वह परमेश्वर की बातें सुनता है; और तुम इसलिये नहीं सुनते कि परमेश्वर की ओर से नहीं हो।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 20-21 
  • 2 तीमुथियुस 4


Tuesday, October 29, 2013

मीठा और स्वादिष्ट

   हाँलांकि मेरी पकाने की कला कुछ खास विकसित नहीं है, फिर भी मैं कभी-कभी एक अच्छा केक बना लेता हूँ, जबकि केक में पड़ने वाले सामान और उन के परस्पर के अनुपात का मुझे कुछ पता नहीं है। मैं तो बस पहले सही अनुपात में मिला कर डब्बे में बन्द करके बेचे गए केक के पाउडर को लेता हूँ, उसमें निर्देशानुसार अण्डे, घी और पानी डाल कर अच्छे से फेंट लेता हूँ और फिर उस मिश्रण को पकाने वाले डब्बे में डाल कर तन्दूर में निर्धारित समय के लिए रख देता हूँ; कुछ ही समय में मीठा और स्वादिष्ट केक तैयार हो जाता है!

   यह मुझे सिखाता है कि सही अनुपात में सही सामग्री का एक साथ होना तथा उनके उपयोग के लिए सही निर्देशों का मिलना और उनका पालन करना एक अच्छे परिणाम के लिए कितना आवश्यक है। इस से मुझे प्रभु यीशु द्वारा दी गई सबसे महान आज्ञा (मत्ती 22:36-38) और सुसमाचार प्रचार के लिए महान सेवकाई (मत्ती 28:19-20) के बीच का संबंध समझने में भी सहायता मिलती है।

   जब प्रभु यीशु ने अपने चेलों से कहा कि वे जाकर सारे संसार में सुसमाचार प्रचार करें और लोगों को चेला बनाएं, तो उन्होंने इस कार्य के करने में चेलों को किसी अशिष्ट व्यवहार या बेपरवाह होने की कोई छूट नहीं दी। प्रभु द्वारा, सुसमाचार प्रचार कि आज्ञा देने से पहले चेलों के सामने सबसे बड़ी आज्ञा को रखना - कि वे परमेश्वर से अपने सारे मन, प्राण और बुद्धि के साथ प्रेम रखें और इसके साथ ही यह कहना कि साथ ही वे अपने पड़ौसी से अपने समान प्रेम रखें (मत्ती 22:37-39) उनकी नज़र में परमेश्वर और मनुष्यों के प्रति व्यवहार के परस्पर तालमेल की अनिवार्यता को दिखाता है। परमेश्वर के वचन बाइबल के संपूर्ण नए नियम खण्ड में हम प्रभु यीशु द्वारा दिए गए व्यवहार के इसी नमूने को अनेक स्थानों पर भिन्न रीति से व्यक्त किया हुआ पाते हैं, प्रेम के अध्याय 1 कुरिन्थियों 13 में भी।

   दूसरों के साथ प्रभु यीशु में समस्त संसार के सभी लोगों के लिए सेंत-मेंत मिलने वाली पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार को जब हम संसार के लोगों के साथ बाँटते हैं, तो हमें भी इसी नमूने और इसकी दोनों मुख्य ’सामग्रियों’, सुसमाचार की सच्चाई तथा आवश्यकता एवं परमेश्वर द्वार सृजे गए संसार के सभी लोगों के लिए परमेश्वर के प्रेम का प्रगटिकरण, के एक साथ होने और सही अनुपात में होने का विशेष ध्यान रखना चाहिए; साथ ही यह ध्यान भी रखना चाहिए कि इन्हें ठीक रीति से पकाना केवल परमेश्वर के प्रेम की गर्मी से ही संभव है। यदि सामग्री सही होगी, सही अनुपात में होगी और प्रभु यीशु के निर्देशानुसार प्रयोग करी जाएगी तो, नतीजा भी मीठा और स्वादिष्ट होगा। - डेविड मैक्कैसलैंड


उन्हीं की साक्षी सबसे प्रभावी होती है जो अपने जीवन से परमेश्वर के प्रेम और सुसमाचार की साक्षी देते हैं।

पर मसीह को प्रभु जान कर अपने अपने मन में पवित्र समझो, और जो कोई तुम से तुम्हारी आशा के विषय में कुछ पूछे, तो उसे उत्तर देने के लिये सर्वदा तैयार रहो, पर नम्रता और भय के साथ। - 1 पतरस 3:15

बाइबल पाठ: मत्ती 22:34-39; मत्ती 28:16-20
Matthew 22:34 जब फरीसियों ने सुना, कि उसने सदूकियों का मुंह बन्‍द कर दिया; तो वे इकट्ठे हुए। 
Matthew 22:35 और उन में से एक व्यवस्थापक ने परखने के लिये, उस से पूछा। 
Matthew 22:36 हे गुरू; व्यवस्था में कौन सी आज्ञा बड़ी है? 
Matthew 22:37 उसने उस से कहा, तू परमेश्वर अपने प्रभु से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख। 
Matthew 22:38 बड़ी और मुख्य आज्ञा तो यही है। 
Matthew 22:39 और उसी के समान यह दूसरी भी है, कि तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख। 

Matthew 28:16 और ग्यारह चेले गलील में उस पहाड़ पर गए, जिसे यीशु ने उन्हें बताया था। 
Matthew 28:17 और उन्होंने उसके दर्शन पाकर उसे प्रणाम किया, पर किसी किसी को सन्‍देह हुआ। 
Matthew 28:18 यीशु ने उन के पास आकर कहा, कि स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार मुझे दिया गया है। 
Matthew 28:19 इसलिये तुम जा कर सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ और उन्हें पिता और पुत्र और पवित्रआत्मा के नाम से बपतिस्मा दो। 
Matthew 28:20 और उन्हें सब बातें जो मैं ने तुम्हें आज्ञा दी है, मानना सिखाओ: और देखो, मैं जगत के अन्‍त तक सदैव तुम्हारे संग हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 18-19 
  • 2 तीमुथियुस 3


Monday, October 28, 2013

क्या मैं?

   हाल ही मैं मैने अपने एक मनपसन्द भजन, भजन 131 को एक बार फिर पढ़ा। इस छोटे से, केवल तीन पद वाले भजन को पहले मैं इस बात को मानने के लिए प्रोत्साहित करने वाला समझता था कि रहस्यमय बातें परमेश्वर के चरित्र का एक अंग हैं। पहले यह भजन मुझे शांत बने रहने के लिए उकसाता था, क्योंकि जो कुछ परमेश्वर इस सृष्टि में कर रहा है वह मेरी समझ के बाहर है और मैं इस विषय में परेशान रहने से इन बातों को समझ तो सकता नहीं। लेकिन अब की बार इस भजन को पढ़ने से मेरे समक्ष भजनकार दाऊद की शांत आत्मा का एक अन्य पहलु सामने आया: ना केवल मैं यह समझ पाने में असमर्थ हूँ कि परमेश्वर सृष्टि में क्या कर रहा है वरन मैं वह भी समझ पाने मे असमर्थ हूँ जो परमेश्वर मेरे जीवन में कर रहा है; और ना ही प्रयास करने से कुछ बनने वाला है।

   दाऊद इस भजन में एक समानता का उल्लेख करता है, एक दूध छुड़ाया बच्चा जो पहले बेचैन रहता था लेकिन अब उसे समझ है कि माँ की सुरक्षा होते हुए उसे किसी बात के लिए बेचैन रहने की आवश्यकता नहीं है और एक व्यक्ति जिसने भी यही पाठ सीख लिया है कि परमेश्वर में बने रहने के बाद बेचैन रहने और फड़फड़ाने की कोई आवश्यकता नहीं है। अब यह भजन मेरे लिए हर परिस्थिति में और हर बात के लिए परमेश्वर पर भरोसा बनाए रख कर दीनता, धीरज और सहनशीलता सीखने की बुलाहट है, चाहे उन बातों के लिए परमेश्वर के कारण मेरी समझ में आएं अथवा ना आएं, क्योंकि ईश्वरीय ज्ञान और तर्क मेरी सीमित मानवीय बुद्धि से परे हैं, लेकिन मैं यह भी जानता हूँ कि परमेश्वर सदा मेरे साथ है और केवल मेरी भलाई ही चाहता है।

   यदि मैं बेचैन और परेशान होकर प्रश्न करूँ, "मुझे यह यह पीड़ा क्यूँ?" "मेरे लिए यह व्यथा क्यूँ?" तो परमेश्वर पिता का उत्तर हो सकता है, "मेरे बच्चे शांत होकर और मुझे पर भरोसा रखकर अभी इसे स्वीकार कर लो, क्योंकि मैं समझाऊँ भी तो तुम अभी इसे समझ नहीं पाओगे। बस केवल विश्वास रखो कि जो हो रहा है तुम्हारे भले ही के लिए है, तुम्हारी सामर्थ से बाहर नहीं है और उसमें मैं भी तुम्हारे साथ हूँ (1 कुरिन्थियों 10:13)।

   इन विचारों के साथ मैंने दाऊद के उदाहरण को आधार बना कर अपने आप से पूछा: "क्या मैं, अपनी इन परिस्थितियों में, परमेश्वर पर विश्वास बनाए रखता हूँ?" (पद 3); "विश्वास और धीरज के साथ, बिना बेचैन हुए या फड़फड़ाए, बिना परमेश्वर की बुद्धिमता पर प्रश्नचिन्ह लगाए क्या मैं उसकी योजना और समय की प्रतीक्षा कर सकता हूँ?" "क्या मैं अपने साथ घटित होने वाली हर परिस्थिति में उस पर अपना विश्वास दृढ़ और स्थिर बनाए रख सकता हूँ, उसकी सिद्ध और भली इच्छा के मेरे जीवन में पूरे होने तक?" - डेविड रोपर


अनिश्चितता और रहस्य से भरे इस संसार में यह जानना शांतिदायक है कि परमेश्वर सब कुछ जानता है और वह अपने बच्चों के भले के लिए सब कुछ नियंत्रित करता है।

तुम किसी ऐसी परीक्षा में नहीं पड़े, जो मनुष्य के सहने से बाहर है: और परमेश्वर सच्चा है: वह तुम्हें सामर्थ से बाहर परीक्षा में न पड़ने देगा, वरन परीक्षा के साथ निकास भी करेगा; कि तुम सह सको। - 1 कुरिन्थियों 10:13

बाइबल पाठ: भजन 131
Psalms 131:1 हे यहोवा, न तो मेरा मन गर्व से और न मेरी दृष्टि घमण्ड से भरी है; और जो बातें बड़ी और मेरे लिये अधिक कठिन हैं, उन से मैं काम नहीं रखता। 
Psalms 131:2 निश्चय मैं ने अपने मन को शान्त और चुप कर दिया है, जैसे दूध छुड़ाया हुआ लड़का अपनी मां की गोद में रहता है, वैसे ही दूध छुड़ाए हुए लड़के के समान मेरा मन भी रहता है।
Psalms 131:3 हे इस्राएल, अब से ले कर सदा सर्वदा यहोवा ही पर आशा लगाए रह! 

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 15-17 
  • 2 तीमुथियुस 2


Sunday, October 27, 2013

बोल

   शैला मैक्नाईट ने एक कंपनी में नौकरी के लिए आवेदन दिया; कंपनी की जानकारी लेते समय उसे यह जानकर अचरज हुआ कि उस कंपनी की नीतियों में से एक थी बकवाद के प्रति शून्य सहनशीलता। उस कंपनी के कर्मचारियों को एक दूसरे से बातचीत कर के किसी भी विवादास्पद बात को स्पष्ट कर लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता था; सहकर्मियों की पीठ पीछे कानाफूसी और बकवाद कंपनी में बिलकुल स्वीकार नहीं थी। यदि कोई कर्मचारी ऐसा करते हुए पकड़ा जाता तो पहले तो उसे डाँट के साथ चेतावनी दी जाती; और यदि वे फिर भी ऐसा करते रहते तो उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाता।

   किसी कंपनी के द्वारा ऐसी कोई कार्यनीति लागू करने से हज़ारों वर्ष पहले परमेश्वर ने इन बातों के प्रति अपनी शून्य सहनशीलता अपने लोगों के लिए अपने वचन में दर्ज करवा दी थी (लैव्यवस्था 19:16)। व्यर्थ बातचीत जो जानबूझ कर अथवा मूर्खतापूर्ण कारणों से किसी अन्य व्यक्ति के बारे में अफवाह या बातें फैलाए बिलकुल मना थी, परमेश्वर के लोगों में बिलकुल मना थी।

   राजा सुलेमान ने अपने नीतिवचनों में इस विषय पर कुछ अति महत्वपूर्ण बातें कही और बताया कि दूसरों के बारे में बुरा बोलने के क्या-क्या अनर्थकारी परिणाम हो सकते हैं: ऐसा करना विश्वासघात है (नीतिवचन 11:13); अच्छे मित्रों में फूट डाल देता है (नीतिवचन 16:28; 17:9); व्यर्थ बातें बोलने वाले को शर्मसार करता है, उसकी बदनामी होती है (नीतिवचन 25:9-10); और लगातार झगड़ों के अंगारों को सुलगाए रखने का कार्य करता है (नीतिवचन 26:20-22)।

   हमें परमेश्वर से प्रार्थना में माँगना चाहिए कि हमें ऐसी प्रवृति दे कि हम किसी के बारे में कोई हानिकारक बोल बोलने से बचे रहें। परमेश्वर हमारे मुँह पर पहरा बैठाए कि हम जब बोलें तो दूसरों के लिए भला ही बोलें, उनके बारे में कोई अनर्थकारी बात हमारे मुँह से ना निकले। - मार्विन विलियम्स


बकवाद और कानाफूसी को रोकना है तो उसे नज़रन्दाज़ करना सीखिए।

जैसे लकड़ी न होने से आग बुझती है, उसी प्रकार जहां कानाफूसी करने वाला नहीं वहां झगड़ा मिट जाता है। - नीतिवचन 26:20

बाइबल पाठ: लैव्यवस्था 19:11-18
Leviticus 19:11 तुम चोरी न करना, और एक दूसरे से न तो कपट करना, और न झूठ बोलना। 
Leviticus 19:12 तुम मेरे नाम की झूठी शपथ खाके अपने परमेश्वर का नाम अपवित्र न ठहराना; मैं यहोवा हूं। 
Leviticus 19:13 एक दूसरे पर अन्धेर न करना, और न एक दूसरे को लूट लेना। और मजदूर की मजदूरी तेरे पास सारी रात बिहान तक न रहने पाए। 
Leviticus 19:14 बहिरे को शाप न देना, और न अन्धे के आगे ठोकर रखना; और अपने परमेश्वर का भय मानना; मैं यहोवा हूं। 
Leviticus 19:15 न्याय में कुटिलता न करना; और न तो कंगाल का पक्ष करना और न बड़े मनुष्यों का मुंह देखा विचार करना; उस दूसरे का न्याय धर्म से करना। 
Leviticus 19:16 लूतरा बन के अपने लोगों में न फिरा करना, और एक दूसरे के लोहू बहाने की युक्तियां न बान्धना; मैं यहोवा हूं। 
Leviticus 19:17 अपने मन में एक दूसरे के प्रति बैर न रखना; अपने पड़ोसी को अवश्य डांटना नहीं, तो उसके पाप का भार तुझ को उठाना पड़ेगा। 
Leviticus 19:18 पलटा न लेना, और न अपने जाति भाइयों से बैर रखना, परन्तु एक दूसरे से अपने समान प्रेम रखना; मैं यहोवा हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मियाह 12-14 
  • 2 तीमुथियुस 1


Saturday, October 26, 2013

उन्नति के अवसर

   क्या किसी यात्रा के समय आप कभी किसी हवाईआड्डे पर फंसे हैं? वह भी 24 घंटों के लिए? और एक ऐसे स्थान पा जहाँ की भाषा आप नहीं जानते? तथा घर एवं संबंधियों से चार हज़ार मील दूर?

   ऐसा हाल ही में मेरे एक मित्र जौन के साथ हुआ; और इस घटना के लिए उसकी प्रतिक्रीय से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं। जबकि हम में से अधिकांशतः इस असुविधा को असहनीय पाते, मेरे मित्र ने इस अनपेक्षित विलम्ब में परमेश्वर के हाथ को देखा। अपने कार्यक्रम में आई इस रुकावट के समय को वह अपने साथ के अन्य यात्रियों के साथ संबंध बनाने में उपयोग करने लगा। उसे कुछ मसीही विश्वासी यात्री मिले जो भारत से थे, और उनसे बात-चीत करते समय जौन को उनकी मसीही सेवकाई के बारे में जानने का अवसर मिला। क्योंकि जौन के कार्य और रुचि उनकी सेवकाई के समान ही थी, इसलिए उन लोगों ने जौन को निमंत्रण दिया कि वह भारत आए और उनके साथ कुछ समय एक परियोजना में कार्य करे।

   हमें कितनी ही बार विलम्ब, योजनाओं के परिवर्तन या पुनःनिर्धारण आदि का सामना करना पड़ता है, किन्तु अकसर हम इन बातों को नकारात्मक रीति से लेते हैं, कुंठित होते हैं, खिसिया जाते हैं। लेकिन यह भी हो सकता है कि परमेश्वर हमारा मार्ग बदल रहा है जिससे हम कुछ अलग, कुछ नया कर सकें और उसके लिए उपयोगी हो सकें। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरितों 16 में उल्लेखित प्रेरित पौलुस की फिलिप्पी की यात्रा को स्मरण कीजिए। पौलुस मकिदूनिया परमेश्वर से मिले दर्शन के कारण परमेश्वर की सेवकाई करने गया था (पद 9-10)। उसे क्या पता था कि वहाँ वह बन्दीगृह में डाला जाएगा। लेकिन उसका बन्दीगृह में डाला जाना भी परमेश्वर द्वारा निर्धारित था, क्योंकि वहाँ वह बन्‍दीगृह के दारोगा तथा उसके परिवार के उद्धार पाने के लिए उपयोग हुआ (पद 25-34)।

   परमेश्वर हमारे जीवन की असुविधाओं को भी अपने कार्यों, अपनी महिमा और हमारी उन्नति के अवसर बना सकता है, यदि हम प्रत्येक परिस्थिति को परमेश्वरीय प्रयोजन के रूप में देखने वाले हों। - डेव ब्रैनन


परमेश्वर अवरोधों को भी उन्नति के अवसर बना सकता है।

आधी रात के लगभग पौलुस और सीलास प्रार्थना करते हुए परमेश्वर के भजन गा रहे थे, और बन्‍धुए उन की सुन रहे थे। - प्रेरितों 16:25

बाइबल पाठ: प्रेरितों 16:9-34
Acts 16:9 और पौलुस ने रात को एक दर्शन देखा कि एक मकिदुनी पुरूष खड़ा हुआ, उस से बिनती कर के कहता है, कि पार उतरकर मकिदुनिया में आ; और हमारी सहायता कर। 
Acts 16:10 उसके यह दर्शन देखते ही हम ने तुरन्त मकिदुनिया जाना चाहा, यह समझ कर, कि परमेश्वर ने हमें उन्हें सुसमाचार सुनाने के लिये बुलाया है।
Acts 16:11 सो त्रोआस से जहाज खोल कर हम सीधे सुमात्राके और दूसरे दिन नियापुलिस में आए। 
Acts 16:12 वहां से हम फिलिप्पी में पहुंचे, जो मकिदुनिया प्रान्‍त का मुख्य नगर, और रोमियों की बस्‍ती है; और हम उस नगर में कुछ दिन तक रहे। 
Acts 16:13 सब्त के दिन हम नगर के फाटक के बाहर नदी के किनारे यह समझ कर गए, कि वहां प्रार्थना करने का स्थान होगा; और बैठ कर उन स्‍त्रियों से जो इकट्ठी हुई थीं, बातें करने लगे। 
Acts 16:14 और लुदिया नाम थुआथीरा नगर की बैंजनी कपड़े बेचने वाली एक भक्त स्त्री सुनती थी, और प्रभु ने उसका मन खोला, ताकि पौलुस की बातों पर चित्त लगाए। 
Acts 16:15 और जब उसने अपने घराने समेत बपतिस्मा लिया, तो उसने बिनती की, कि यदि तुम मुझे प्रभु की विश्वासिनी समझते हो, तो चल कर मेरे घर में रहो; और वह हमें मनाकर ले गई।
Acts 16:16 जब हम प्रार्थना करने की जगह जा रहे थे, तो हमें एक दासी मिली जिस में भावी कहने वाली आत्मा थी; और भावी कहने से अपने स्‍वामियों के लिये बहुत कुछ कमा लाती थी। 
Acts 16:17 वह पौलुस के और हमारे पीछे आकर चिल्लाने लगी कि ये मनुष्य परमप्रधान परमेश्वर के दास हैं, जो हमें उद्धार के मार्ग की कथा सुनाते हैं। 
Acts 16:18 वह बहुत दिन तक ऐसा ही करती रही, परन्तु पौलुस दु:खित हुआ, और मुंह फेर कर उस आत्मा से कहा, मैं तुझे यीशु मसीह के नाम से आज्ञा देता हूं, कि उस में से निकल जा और वह उसी घड़ी निकल गई।
Acts 16:19 जब उसके स्‍वामियों ने देखा, कि हमारी कमाई की आशा जाती रही, तो पौलुस और सीलास को पकड़ कर चौक में प्राधानों के पास खींच ले गए। 
Acts 16:20 और उन्हें फौजदारी के हाकिमों के पास ले जा कर कहा; ये लोग जो यहूदी हैं, हमारे नगर में बड़ी हलचल मचा रहे हैं। 
Acts 16:21 और ऐसे व्यवहार बता रहे हैं, जिन्हें ग्रहण करना या मानना हम रोमियों के लिये ठीक नहीं। 
Acts 16:22 तब भीड़ के लोग उन के विरोध में इकट्ठे हो कर चढ़ आए, और हाकिमों ने उन के कपड़े फाड़कर उतार डाले, और उन्हें बेंत मारने की आज्ञा दी। 
Acts 16:23 और बहुत बेंत लगवा कर उन्हें बन्‍दीगृह में डाला; और दारोगा को आज्ञा दी, कि उन्हें चौकसी से रखे। 
Acts 16:24 उसने ऐसी आज्ञा पाकर उन्हें भीतर की कोठरी में रखा और उन के पांव काठ में ठोक दिए। 
Acts 16:25 आधी रात के लगभग पौलुस और सीलास प्रार्थना करते हुए परमेश्वर के भजन गा रहे थे, और बन्‍धुए उन की सुन रहे थे। 
Acts 16:26 कि इतने में एकाएक बड़ा भुईंडोल हुआ, यहां तक कि बन्‍दीगृह की नेंव हिल गईं, और तुरन्त सब द्वार खुल गए; और सब के बन्‍धन खुल पड़े। 
Acts 16:27 और दारोगा जाग उठा, और बन्‍दीगृह के द्वार खुले देखकर समझा कि बन्‍धुए भाग गए, सो उसने तलवार खींचकर अपने आप को मार डालना चाहा। 
Acts 16:28 परन्तु पौलुस ने ऊंचे शब्द से पुकारकर कहा; अपने आप को कुछ हानि न पहुंचा, क्योंकि हम सब यहां हैं। 
Acts 16:29 तब वह दीया मंगवा कर भीतर लपक गया, और कांपता हुआ पौलुस और सीलास के आगे गिरा। 
Acts 16:30 और उन्हें बाहर लाकर कहा, हे साहिबो, उद्धार पाने के लिये मैं क्या करूं? 
Acts 16:31 उन्होंने कहा, प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास कर, तो तू और तेरा घराना उद्धार पाएगा।
Acts 16:32 और उन्होंने उसको, और उसके सारे घर के लोगों को प्रभु का वचन सुनाया। 
Acts 16:33 और रात को उसी घड़ी उसने उन्हें ले जा कर उन के घाव धोए, और उसने अपने सब लोगों समेत तुरन्त बपतिस्मा लिया। 
Acts 16:34 और उसने उन्हें अपने घर में ले जा कर, उन के आगे भोजन रखा और सारे घराने समेत परमेश्वर पर विश्वास कर के आनन्द किया।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मियाह 9-11 
  • 1 तीमुथियुस 6


Friday, October 25, 2013

खरा न्याय

   प्रकाशन में मेरा एक पूर्व सहकर्मी लगभग एक वर्ष तक इसी भय में जीता और कार्य करता रहा कि बस अब उसकी नौकरी गई। ऐसा इसलिए क्योंकि उस विभाग में आया एक नया अधिकारी, अनजाने कारणों से मेरे मित्र की व्यक्तिगत फाईल में उसके विरुद्ध नकारात्मक बातें भरता जा रहा था। फिर एक दिन ऐसा आया जब मेरे मित्र को लगा कि बस आज तो मेरी नौकरी गई ही समझो; उस दिन नौकरी तो गई, लेकिन मेरे मित्र की नहीं वरन उस अधिकारी की जो मेरे मित्र के विरुद्ध कार्य कर रहा था।

   एक ऐसी ही घटना हम परमेश्वर के वचन बाइबल के पुराने नियम नामक खण्ड में एस्तेर की पुस्तक में दर्ज पाते हैं। जब इस्त्राएलियों को बन्धुआ बनाकर बेबिलोन ले जाया गया, तो मोर्देकै