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Thursday, October 31, 2013

अनपेक्षित

   जाने माने अमेरीकी अखबार, वॉशिंगटन पोस्ट के एक लेखक ने लोगों द्वारा पहचाने जाने के बारे में एक परीक्षण किया। उस लेखक ने एक बहुत प्रसिद्ध वायलिन वादक को राष्ट्रीय राजधानी के एक रेलवे स्टेशन पर एक प्रातः कुछ समय के लिए वायलिन बजाने को कहा। हज़ारों लोग उस वादक के सामने से निकल गए, केवल कुछ ही ने रुक कर उसका वायलिन वादन सुना, और लगभग 45 मिनिट के इस परीक्षण में कुल मिलाकर 32 डॉलर ही लोगों ने उसकी झोली में डाले। केवल दो दिन पहले ही यही वादक - जोशुआ बेल ने उसी 35 लाख डॉलर कीमत के वायलिन को बजाते हुए एक संगीत सभा में कार्यक्रम दिया था जहाँ उसका वायलिन वादन सुनने के लिए लोगों ने 100 डॉलर प्रति सीट का टिकिट खरीदा था और माँग इतनी थी कि सभी टिकिट बिक गए थे।

   किसी व्यक्ति का महान होते हुए भी पहचाने ना जाने कोई नयी बात नहीं है। यही प्रभु यीशु के साथ भी हुआ। प्रेरित यूहन्ना ने प्रभु यीशु के सम्बंध में उसकी जीवनी में लिखा: "वह जगत में था, और जगत उसके द्वारा उत्पन्न हुआ, और जगत ने उसे नहीं पहिचाना" (यूहन्ना 1:10)। जबकि उस समय के यहूदी लोग अपने मुक्तिदाता मसीहा की प्रतीक्षा में थे, फिर भी उन्होंने प्रभु यीशु के प्रति इतनी उदासीनता क्यों दिखाई? एक कारण था कि लोग मसीहा की आशा तो रखते थे किंतु विश्वास नहीं, इसलिए प्रभु यीशु का आगमन उनके लिए वैसे ही सर्वथा अनेपक्षित था, और वह भी एक गौशाला में जन्म लेने के द्वारा, जैसे लोग यह कलपना में भी नहीं सोच सकते कि इतना प्रसिद्ध वायलिन वादक एक रेलवे स्टेशन पर खड़े होकर वायलिन बजाता हुआ मिलेगा। अपने मुक्तिदाता के रूप में उन लोगों की अपेक्षा एक राजनैतिक नेता की थी जो उन्हें रोमी साम्राज्य से छुड़ाकर यहूदी राज्य पुनः स्थापित करके दे। वे एक आत्मिक व्यक्ति की तथा स्वर्ग के राज्य की बात करने वाले मसीहा की बाट तो कतई नहीं जोह रहे थे, जो आकर उनसे पापों की क्षमा और पश्चाताप की बात कहे।

   प्रथम ईसवीं के यहूदी लोगों की आँखें, परमेश्वर द्वारा प्रभु यीशु के इस पृथ्वी पर भेजे जाने के उद्देश्य के प्रति बिलकुल बन्द थीं; वे जगत के उद्धारकर्ता की उम्मीद में नहीं थे। लेकिन परमेश्वर का उद्देश्य प्रभु यीशु द्वारा कोई सांसारिक राज्य या सांसारिक गुट बनाने का ना तब था ना अब है। प्रभु यीशु केवल इसलिए आए कि संसार के सभी लोग अपने पापों से मुक्ति और उद्धार का मार्ग पा सकें (यूहन्ना 1:29), और आज भी उनके अनुयायियों द्वारा यही सुसमाचार प्रचार किया जाता है - संसार के राजनैतिक नेता का नहीं वरन सारे जगत के उद्धारकर्ता पर विश्वास द्वारा पापों की क्षमा और सेंत-मेंत उससे मिलने वाले उद्धार का।

   परमेश्वर का यह वरदान आपके लिए अनेपक्षित तो हो सकता है, लेकिन है अति अनिवार्य, और इस संसार से कूच करने के बाद फिर कभी उपलब्ध भी नहीं होगा। यदि आपने आज तक परमेश्वर के इस वरदान को ग्रहण नहीं किया है तो आज ही, अभी ही इसे ग्रहण कर लीजिए - सच्चे पश्चातापी मन से निकली एक छोटी प्रार्थना, "हे प्रभु यीशु मेरे पाप क्षमा कीजिए और मुझे अपनी शरण में ले लीजिए" आपके जीवन को, पृथ्वी के भी और पृथ्वी के बाद के भी, बदल देगी। - सी. पी. हिया


परमेश्वर ने मानव इतिहास में प्रभु यीशु के रूप में प्रवेश किया, जिससे संसार में सभी को अनन्त जीवन का वरदान मिल सके।

दूसरे दिन उसने यीशु को अपनी ओर आते देखकर कह