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बुधवार, 21 जुलाई 2021

विलंब

 

          मेरी सास को दिल का दौरा पड़ा, और उस चिंताजनक समय में वह सौभाग्यशाली रही कि उसे तुरंत ही सही चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध हो गई। बाद में मुझे डॉक्टर ने बताया कि यदि दिल का दौरा पड़ने के पंद्रह मिनिट के अन्दर सही उपचार आरंभ हो जाता है तो बचने का दर 33% होता है, किन्तु इससे अधिक विलम्ब हो जाए तो केवल 5% लोग ही बच पाते हैं।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि प्रभु यीशु याईर की बहुत बीमार और गंभीर हालत में पड़ी बेटी की सहायता के लिए उसके घर जा रहे थे, जिसे निःसंदेह तुरंत ही चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता थी। लेकिन प्रभु ने चलते चलते वह किया जो उस परिस्थिति में बिलकुल अनपेक्षित था; वे अचानक ही रुक गए (मरकुस 5:30); वे पता करना चाह रहे थे उन्हें किस ने छूआ था! जब तक उन्हें छूने वाली स्त्री सामने नहीं आ गई, और प्रभु ने उससे कृपा तथा ढाढ़स के साथ बात नहीं कर ली, वे आगे नहीं बढ़े। आप सोच सकते हैं कि ऐसे में याईर क्या सोच रहा होगा, ‘प्रभु, इस सब के लिए अभी समय नहीं है; मेरी बेटी मरने को है! और फिर वह हो गया जिसका याईर को भय था – उसके घर से समाचार आया कि उसकी बेटी का देहांत हो गया है (पद 35); शायद प्रभु ने अनावश्यक विलंब कर दिया था।

          लेकिन प्रभु ने याईर की ओर मुड़कर उसे प्रोत्साहित करते हुए, जो बात वे कह रहे थे, उसको यीशु ने अनसुनी कर के, आराधनालय के सरदार से कहा; मत डर; केवल विश्वास रख” (पद 36)। और फिर उपस्थित लोगों के उपहास की अवहेलना करते हुए, वह शांत भाव में याईर के घर गया, उसकी बेटी के पास जाकर उससे बात की, और वह जी उठी! प्रभु ने दिखा दिया की वह कभी विलंब से नहीं होता है। जो वह करना चाहता है, और जो वो कर सकता है, समय उसके लिए प्रभु को सीमित नहीं कर सकता है।

          कितनी ही बार हम भी याईर के समान सोचते हैं, कि प्रभु ने हमारी सहायता करने में अनुचित विलम्ब कर दिया है; अब बात बिगाड़ गई है, और जो हम चाहते थे अब वह नहीं होने पाएगा। किन्तु हमारे प्रभु परमेश्वर के लिए विलंब नाम की कोई बात नहीं है। हमारे जीवनों में अपने भले और कृपालु कार्य को करने में वह कोई विलम्ब नहीं करता है। - पीटर चिन

 

प्रभु, मैं यह कभी न भूलूँ, कि आप समय के भी स्वामी हैं।


छोटे से छोटा एक हजार हो जाएगा और सब से दुर्बल एक सामर्थी जाति बन जाएगा। मैं यहोवा हूं; ठीक समय पर यह सब कुछ शीघ्रता से पूरा करूंगा। - यशायाह 60:22

बाइबल पाठ: मरकुस 5:35-43

मरकुस 5:35 वह यह कह ही रहा था, कि आराधनालय के सरदार के घर से लोगों ने आकर कहा, कि तेरी बेटी तो मर गई; अब गुरु को क्यों दुख देता है?

मरकुस 5:36 जो बात वे कह रहे थे, उसको यीशु ने अनसुनी कर के, आराधनालय के सरदार से कहा; मत डर; केवल विश्वास रख।

मरकुस 5:37 और उसने पतरस और याकूब और याकूब के भाई यूहन्ना को छोड़, और किसी को अपने साथ आने न दिया।

मरकुस 5:38 और आराधनालय के सरदार के घर में पहुंचकर, उसने लोगों को बहुत रोते और चिल्लाते देखा।

मरकुस 5:39 तब उसने भीतर जा कर उस से कहा, तुम क्यों हल्ला मचाते और रोते हो? लड़की मरी नहीं, परन्तु सो रही है।

मरकुस 5:40 वे उस की हंसी करने लगे, परन्तु उसने सब को निकाल कर लड़की के माता-पिता और अपने साथियों को ले कर, भीतर जहां लड़की पड़ी थी, गया।

मरकुस 5:41 और लड़की का हाथ पकड़कर उस से कहा, ‘तलीता कूमी’; जिस का अर्थ यह है कि ‘हे लड़की, मैं तुझ से कहता हूं, उठ’।

मरकुस 5:42 और लड़की तुरन्त उठ कर चलने फिरने लगी; क्योंकि वह बारह वर्ष की थी। और इस पर लोग बहुत चकित हो गए।

मरकुस 5:43 फिर उसने उन्हें चिताकर आज्ञा दी कि यह बात कोई जानने न पाए और कहा; कि उसे कुछ खाने को दिया जाए।

 

एक साल में बाइबल: 

  • भजन 29-30
  • प्रेरितों 23:1-15

गुरुवार, 31 अगस्त 2017

विलंब


   कई वर्षों से मैं अपने चचेरे भाई के साथ हमारे जीवनों में पापों की क्षमा और उद्धारकर्ता की आवश्यकता के बारे में बात किया करता था। जब हाल ही में वह मुझ से मिलने आया तो मैंने एक बार फिर उससे आग्रह किया कि वह मसीह यीशु को ग्रहण कर ले; तुरंत ही उसका प्रत्युत्तर था: "मैं यीशु को ग्रहण करना और चर्च आना तो चाहता हूँ, परन्तु अभी नहीं। मैं अन्य धर्मों को मानने वालों के मध्य रहता हूँ। जब तक किसी नए स्थान पर जाकर न बस जऊँ, मैं अपने मसीही विश्वास को भली-भांति निभा नहीं पाऊँगा।" उसने संभावित सताव, उपहास, और साथियों से आने वाले दबाव का हवाला देकर अपना निर्णय टालने को उचित ठहराना चाहा।

   उसके ये सब भय सही थे, परन्तु मैंने उसे आश्वस्त किया कि चाहे कोई भी परिस्थिति क्यों न आ जाए, प्रभु यीशु उसे कभी अकेला नहीं छोड़ेगा। मैंने उसे प्रोत्साहित किया कि वह निर्णय लेने में विलंब न करे, वरन प्रभु परमेश्वर पर भरोसा करे कि वह उसकी सहायता करेगा, उसे सुरक्षा प्रदान करेगा। मेरे भाई ने टालना बन्द करके प्रभु यीशु से पापों की क्षमा की बात को स्वीकार किया, अपना जीवन उसे समर्पित करके प्रभु को अपना निज उद्धारकर्ता स्वीकार कर लिया।

   जब प्रभु यीशु ने लोगों को अपने पीछे हो लेने के लिए आमंत्रित किया, तब उन लोगों ने भी निर्णय टालने के लिए बहाने बनाए - संसार की बातों और ज़िम्मेदारियों में व्यस्त होने के (लूका 9:59-62)। जो उत्तर प्रभु यीशु ने तब उन लोगों को दिया था (पद 60-62) वह आज हम सब से भी आग्रह करता है कि जीवन के सबसे महत्वपूर्ण और अनन्तकाल का प्रभाव रखने वाले इस निर्णय को लेने में विलंब न करें। हमारी आत्माओं के उद्धार से महत्वपूर्ण और कोई विषय नहीं है।

   क्या आज आप परमेश्वर की वाणी को आपको पापों की क्षमा तथा उद्धार पाने के लिए बुलाते हुए सुन रहे हैं - तो विलंब कदापि न करें; जब तक अवसर है समय का सदुपयोग करें और अपना अनन्तकाल सुरक्षित कर लें: "क्योंकि वह तो कहता है, कि अपनी प्रसन्नता के समय मैं ने तेरी सुन ली, और उद्धार के दिन मैं ने तेरी सहायता की: देखो, अभी वह प्रसन्नता का समय है; देखो, अभी उद्धार का दिन है" (2 कुरिन्थियों 6:2)। - लॉरेंस दरमानी

आज ही उद्धार का दिन है।

वरन जिस दिन तक आज का दिन कहा जाता है, हर दिन एक दूसरे को समझाते रहो, ऐसा न हो, कि तुम में से कोई जन पाप के छल में आकर कठोर हो जाए। - इब्रानियों 3:13

बाइबल पाठ: लूका 9:57-62
Luke 9:57 जब वे मार्ग में चले जाते थे, तो किसी न उस से कहा, जहां जहां तू जाएगा, मैं तेरे पीछे हो लूंगा। 
Luke 9:58 यीशु ने उस से कहा, लोमडिय़ों के भट और आकाश के पक्षियों के बसेरे होते हैं, पर मनुष्य के पुत्र को सिर धरने की भी जगह नहीं। 
Luke 9:59 उसने दूसरे से कहा, मेरे पीछे हो ले; उसने कहा; हे प्रभु, मुझे पहिले जाने दे कि अपने पिता को गाड़ दूं। 
Luke 9:60 उसने उस से कहा, मरे हुओं को अपने मुरदे गाड़ने दे, पर तू जा कर परमेश्वर के राज्य की कथा सुना। 
Luke 9:61 एक और ने भी कहा; हे प्रभु, मैं तेरे पीछे हो लूंगा; पर पहिले मुझे जाने दे कि अपने घर के लोगों से विदा हो आऊं। 
Luke 9:62 यीशु ने उस से कहा; जो कोई अपना हाथ हल पर रखकर पीछे देखता है, वह परमेश्वर के राज्य के योग्य नहीं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 132-134
  • 1 कुरिन्थियों 11:17-34


मंगलवार, 6 जून 2017

आगे


   फ्रांस में नौरमंडी के तट पर जून 6, 1944 को तीन अमरीकी सैनिकों ने जब अपने आप को बम फटने से बने गढ़हे में पड़ा पाया, तो उन्हें एहसास हुआ कि लहरें उन्हें बहा कर गलत स्थान पर ले आई हैं। उस गढ़हे में उन तीनों ने तात्कालिक निर्णय लिया, "हम युध्द यहीं से आरंभ करेंगे।" प्रारंभ करने के उस कठिन स्थान से उन्हें अब आगे बढ़ना था।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पाते हैं कि शाऊल (प्रेरित पौलुस का पहला नाम) ने दमिशक के मार्ग पर प्रभु यीशु के साथ हुई मुलाकात के बाद अपने आप को एक कठिन परिस्थिति में पाया (प्रेरितों 9:1-20)। अब अचानक ही उसे अपना पिछला जीवन और जीवन की दिशा एक भूल लग रही थी और संभवतः व्यर्थ भी। अब जहाँ वह था वहाँ से आगे बढ़ना न केवल कठिन था, वरन आगे बढ़ना उसे बहुत कठिन तथा कष्टप्रद परिश्रम लग रहा था, जहाँ उसे उन परिवारों का भी सामना करना पड़ सकता था जिन्हें उसने उजाड़ा था। परन्तु फिर भी उसने प्रभु की आज्ञा को नहीं टाला और वहीं गया जहाँ प्रभु चाहता था कि वह जाए (प्रेरितों 9:6)।

   बहुधा हम अपने आप को ऐसे स्थान या परिस्थिति में पा सकते हैं जहाँ होने के संबंध में हमने कभी सोचा भी नहीं था और न ही चाहा था। हो सकता है हम कर्ज़ में दबे जा रहे हों, या किन्ही सीमाओं से बाधित हो रहे हों, या पाप और उसके दुषपरिणामों के दबाव में पड़े हों। आज मसीह यीशु हमें चाहे बन्दीगृह में पाए या किसी महल में; चाहे वह हमें टूटा और कर्ज़ में दबा पाए या हमारी अपनी किसी स्वार्थी अभिलाषा में पड़ा हुआ पाए; परमेश्वर का वचन हमें सिखाता है कि हम पौलुस की सलाह को मानें, और जो बीत गया उसे पीछे छोड़ कर मसीह यीशु की ओर आगे बढ़ें (फिलिप्पियों 3:13-14)।

   हमारे मसीह यीशु की ओर, मसीह यीशु के साथ आगे बढ़ने के लिए, हमारा अतीत कोई बाधा नहीं है; यह मसीह यीशु का आश्वासन है। - रैंडी किलगोर


मसीह यीशु के साथ नया आरंभ करने के लिए कभी कोई विलंब नहीं है।

हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। - मत्ती 11:28

बाइबल पाठ: प्रेरितों 9:1-9, 17-22
Acts 9:1 और शाऊल जो अब तक प्रभु के चेलों को धमकाने और घात करने की धुन में था, महायाजक के पास गया। 
Acts 9:2 और उस से दमिश्क की अराधनालयों के नाम पर इस अभिप्राय की चिट्ठियां मांगी, कि क्या पुरूष, क्या स्त्री, जिन्हें वह इस पंथ पर पाए उन्हें बान्‍ध कर यरूशलेम में ले आए। 
Acts 9:3 परन्तु चलते चलते जब वह दमिश्क के निकट पहुंचा, तो एकाएक आकाश से उसके चारों ओर ज्योति चमकी। 
Acts 9:4 और वह भूमि पर गिर पड़ा, और यह शब्द सुना, कि हे शाऊल, हे शाऊल, तू मुझे क्यों सताता है? 
Acts 9:5 उसने पूछा; हे प्रभु, तू कौन है? उसने कहा; मैं यीशु हूं; जिसे तू सताता है। 
Acts 9:6 परन्तु अब उठ कर नगर में जा, और जो कुछ करना है, वह तुझ से कहा जाएगा। 
Acts 9:7 जो मनुष्य उसके साथ थे, वे चुपचाप रह गए; क्योंकि शब्द तो सुनते थे, परन्तु किसी को दखते न थे। 
Acts 9:8 तब शाऊल भूमि पर से उठा, परन्तु जब आंखे खोलीं तो उसे कुछ दिखाई न दिया और वे उसका हाथ पकड़के दमिश्क में ले गए। 
Acts 9:9 और वह तीन दिन तक न देख सका, और न खाया और न पीया।

Acts 9:17 तब हनन्याह उठ कर उस घर में गया, और उस पर अपना हाथ रखकर कहा, हे भाई शाऊल, प्रभु, अर्थात यीशु, जो उस रास्‍ते में, जिस से तू आया तुझे दिखाई दिया था, उसी ने मुझे भेजा है, कि तू फिर दृष्टि पाए और पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हो जाए। 
Acts 9:18 और तुरन्त उस की आंखों से छिलके से गिरे, और वह देखने लगा और उठ कर बपतिस्मा लिया; फिर भोजन कर के बल पाया।
Acts 9:19 और वह कई दिन उन चेलों के साथ रहा जो दमिश्क में थे। 
Acts 9:20 और वह तुरन्त आराधनालयों में यीशु का प्रचार करने लगा, कि वह परमेश्वर का पुत्र है। 
Acts 9:21 और सब सुनने वाले चकित हो कर कहने लगे; क्या यह वही व्यक्ति नहीं है जो यरूशलेम में उन्हें जो इस नाम को लेते थे नाश करता था, और यहां भी इसी लिये आया था, कि उन्हें बान्‍ध कर महायाजकों के पास ले आए? 
Acts 9:22 परन्तु शाऊल और भी सामर्थी होता गया, और इस बात का प्रमाण दे देकर कि मसीह यही है, दमिश्क के रहने वाले यहूदियों का मुंह बन्‍द करता रहा।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 25-27
  • यूहन्ना 16


गुरुवार, 29 दिसंबर 2016

आश्चर्यकर्म


   मेरे बेटों एन्गस और डेविड के जन्मदिन दिसंबर माह में आते हैं। अपनी बाल्यावस्था में ही उन्होंने अपने अनुभवों से सीख लिया था कि यदि एन्गस को दिसंबर माह के आरंभ में अपने जन्म दिन के अवसर पर उसकी पसन्द का खिलौना नहीं मिला है तो वह उसके क्रिसमस के उपहार में होगा। और डेविड को जो उसके क्रिसमिस के उपहार में नहीं मिला, वह 4 दिन बाद आने वाले उसके जन्म दिन के अवसर पर आ जाएगा। विलंब का अर्थ इन्कार नहीं था।

   जब मार्था और मरियम का भाई लाज़र, जिससे प्रभु यीशु प्रेम करते थे, गंभीर रूप से बीमार हुआ, तो उन्होंने प्रभु यीशु को आने का सन्देश भेजा (यूहन्ना 11:1-3)। संभवतः वे आशा और आशंका के साथ मार्ग की ओर प्रभु यीशु के आने की आँखें लगाए उसकी बाट जोहते रहे होंगे, परन्तु प्रभु यीशु नहीं आए। अन्तिम क्रियाकर्म को हुए भी 4 दिन बीत गए थे जब अन्ततः यीशु नगर में आए (पद 17)।

   मार्था उनसे मिलने गई और कुण्ठित होकर कहा, "...हे प्रभु, यदि तू यहां होता, तो मेरा भाई कदापि न मरता" (पद 21), और फिर उसका विश्वास पुनः जागृत हुआ और वह आगे बोली, "और अब भी मैं जानती हूं, कि जो कुछ तू परमेश्वर से मांगेगा, परमेश्वर तुझे देगा" (पद 22)। मैं सोचता हूँ कि उसने किस आशा के साथ यह कहा होगा? लाज़र अब मर चुका था, और वह उसकी कब्र को खोलने के लिए राज़ी नहीं थी (पद 39)। परन्तु फिर भी, प्रभु यीशु के एक कहने पर लाज़र की आत्मा उसके सड़ते हुए शरीर में वापस आ गई (पद 41-44)। प्रभु यीशु ने अपने बीमार मित्र को केवल चँगा कर देने की बजाए उससे भी बड़ा आश्चर्यकर्म करने के लिए विलंब किया था, कि उसे मृतकों में से वापस ला सके। उसके इस विलंब का परिणाम यह भी हुआ कि इस आश्चर्यकर्म के कारण अनेकों यहूदियों ने उस पर विश्वास किया (पद 45)।

   परमेश्वर के समय और विधि की धैर्य के साथ प्रतीक्षा करना, हमारे जीवनों में भी हमारी आशा से कहीं बढ़कर आश्चर्यकर्म ला सकता है। - मेरियन स्ट्राउड


परमेश्वर के लिए प्रतीक्षा में लगाया गया समय कभी गँवाया हुआ नहीं होता।

वरन जितने तेरी बाट जोहते हैं उन में से कोई लज्जित न होगा; परन्तु जो अकारण विश्वासघाती हैं वे ही लज्जित होंगे। हे यहोवा अपने मार्ग मुझ को दिखला; अपना पथ मुझे बता दे। मुझे अपने सत्य पर चला और शिक्षा दे, क्योंकि तू मेरा उद्धार करने वाला परमेश्वर है; मैं दिन भर तेरी ही बाट जोहता रहता हूं। - भजन 25:3-5

बाइबल पाठ: यूहन्ना 11:20-45
John 11:20 सो मारथा यीशु के आने का समचार सुनकर उस से भेंट करने को गई, परन्तु मरियम घर में बैठी रही। 
John 11:21 मारथा ने यीशु से कहा, हे प्रभु, यदि तू यहां होता, तो मेरा भाई कदापि न मरता।
John 11:22 और अब भी मैं जानती हूं, कि जो कुछ तू परमेश्वर से मांगेगा, परमेश्वर तुझे देगा। 
John 11:23 यीशु ने उस से कहा, तेरा भाई जी उठेगा। 
John 11:24 मारथा ने उस से कहा, मैं जानती हूं, कि अन्‍तिम दिन में पुनरुत्थान के समय वह जी उठेगा। 
John 11:25 यीशु ने उस से कहा, पुनरुत्थान और जीवन मैं ही हूं, जो कोई मुझ पर विश्वास करता है वह यदि मर भी जाए, तौभी जीएगा। 
John 11:26 और जो कोई जीवता है, और मुझ पर विश्वास करता है, वह अनन्तकाल तक न मरेगा, क्या तू इस बात पर विश्वास करती है? 
John 11:27 उसने उस से कहा, हां हे प्रभु, मैं विश्वास कर चुकी हूं, कि परमेश्वर का पुत्र मसीह जो जगत में आनेवाला था, वह तू ही है। 
John 11:28 यह कहकर वह चली गई, और अपनी बहिन मरियम को चुपके से बुलाकर कहा, गुरू यहीं है, और तुझे बुलाता है। 
John 11:29 वह सुनते ही तुरन्त उठ कर उसके पास आई। 
John 11:30 (यीशु अभी गांव में नहीं पहुंचा था, परन्तु उसी स्थान में था जहां मारथा ने उस से भेंट की थी।) 
John 11:31 तब जो यहूदी उसके साथ घर में थे, और उसे शान्‍ति दे रहे थे, यह देखकर कि मरियम तुरन्त उठके बाहर गई है और यह समझकर कि वह कब्र पर रोने को जाती है, उसके पीछे हो लिये। 
John 11:32 जब मरियम वहां पहुंची जहां यीशु था, तो उसे देखते ही उसके पांवों पर गिर के कहा, हे प्रभु, यदि तू यहां होता तो मेरा भाई न मरता। 
John 11:33 जब यीशु न उसको और उन यहूदियों को जो उसके साथ आए थे रोते हुए देखा, तो आत्मा में बहुत ही उदास हुआ, और घबरा कर कहा, तुम ने उसे कहां रखा है? 
John 11:34 उन्होंने उस से कहा, हे प्रभु, चलकर देख ले। 
John 11:35 यीशु के आंसू बहने लगे। 
John 11:36 तब यहूदी कहने लगे, देखो, वह उस से कैसी प्रीति रखता था। 
John 11:37 परन्तु उन में से कितनों ने कहा, क्या यह जिसने अन्धे की आंखें खोली, यह भी न कर सका कि यह मनुष्य न मरता?
John 11:38 यीशु मन में फिर बहुत ही उदास हो कर कब्र पर आया, वह एक गुफा थी, और एक पत्थर उस पर धरा था। 
John 11:39 यीशु ने कहा; पत्थर को उठाओ: उस मरे हुए की बहिन मारथा उस से कहने लगी, हे प्रभु, उस में से अब तो र्दुगंध आती है क्योंकि उसे मरे चार दिन हो गए। 
John 11:40 यीशु ने उस से कहा, क्या मैं ने तुझ से न कहा था कि यदि तू विश्वास करेगी, तो परमेश्वर की महिमा को देखेगी। 
John 11:41 तब उन्होंने उस पत्थर को हटाया, फिर यीशु ने आंखें उठा कर कहा, हे पिता, मैं तेरा धन्यवाद करता हूं कि तू ने मेरी सुन ली है। 
John 11:42 और मैं जानता था, कि तू सदा मेरी सुनता है, परन्तु जो भीड़ आस पास खड़ी है, उन के कारण मैं ने यह कहा, जिस से कि वे विश्वास करें, कि तू ने मुझे भेजा है। 
John 11:43 यह कहकर उसने बड़े शब्द से पुकारा, कि हे लाजर, निकल आ। 
John 11:44 जो मर गया था, वह कफन से हाथ पांव बन्‍धे हुए निकल आया और उसका मुंह अंगोछे से लिपटा हुआ था। यीशु ने उन से कहा, उसे खोल कर जाने दो।
John 11:45 तब जो यहूदी मरियम के पास आए थे, और उसका यह काम देखा था, उन में से बहुतों ने उस पर विश्वास किया।

एक साल में बाइबल: 
  • ज़कर्याह 9-12
  • प्रकाशितवाक्य 20


मंगलवार, 22 मार्च 2016

जल्द ही


   यह घोषणा कि "जल्द ही आ रहा है" किसी आने वाले मनोरंजन कार्यक्रम या खेल कार्यक्रम, या किसी नए उत्पाद की पूर्वघोषणा होती है। इसका उद्देश्य होता है लोगों में एक उत्सुक्ता और प्रत्याशा को उत्पन्न करना जिससे वे उस बात के प्रति आकर्षित रहें, चाहे उसका आना अभी महीनों दूर हो, और अधिक से अधिक संख्या में उसका लाभ उठाएं अथवा उसमें सम्मिलित हों।

   परमेश्वर के वचन बाइबल की अन्तिम पुस्तक, प्रकाशितवाक्य, को पढ़ते समय मैं उस पुस्तक में व्याप्त इस "जल्द ही" के भाव से बहुत प्रभावित हुआ। यह कहने की बजाए कि, "दूर के भविष्य में किसी दिन प्रभु यीशु का दोबारा पृथ्वी पर आगमन होगा", इस पुस्तक में अनेकों बार दर्शाया गया है कि यह शीघ्र होने वाला है, समय निकट है, और पुस्तक के अन्तिम अध्याय में तीन बार प्रभु यीशु कहते हैं कि "मैं शीघ्र आने वाला हूँ।"

   जबकि इन बातों को लिखे लगभग 2000 वर्ष बीत चुके हैं तो फिर यह कैसे संभव है? हमारे अपने समय आंकलन के अनुसार यहाँ कहे गए "जल्द ही" का कोई खास महत्व प्रतीत नहीं होता है। लेकिन परमेश्वर का समय आंकलन हमारे आंकलन से भिन्न है; जो हमें विलंब लगता है वह वास्तव में परमेश्वर का धैर्य है कि अधिक से अधिक लोग प्रभु यीशु में विश्वास लाकर अपने पापों से क्षमा और अनन्त जीवन को पा सकें (2 पतरस 3:8-9)। परमेश्वर ने हमें प्रभु यीशु के पुनःआगमन की कोई तिथि नहीं दी है जिससे हम प्रतिदिन इस आशा के साथ व्यतीत करें कि संभवतः प्रभु का पुनःआगमन आज ही हो जाए: "और उस धन्य आशा की अर्थात अपने महान परमेश्वर और उद्धारकर्ता यीशु मसीह की महिमा के प्रगट होने की बाट जोहते रहें" (तीतुस 2:13), और उसके लिए अपने आप को तैयार रखें, उसके अनुरूप जीवन जीते रहें। - डेविड मैक्कैसलैंड


ऐसे जीएं मानो प्रभु यीशु का पुनःआगमन आज ही होने वाला है।

सब बातों का अन्‍त तुरन्त होने वाला है; इसलिये संयमी हो कर प्रार्थना के लिये सचेत रहो। - 1 पतरस 4:7

बाइबल पाठ: 2 पतरस 3:3-15
2 Peter 3:3 और यह पहिले जान लो, कि अन्‍तिम दिनों में हंसी ठट्ठा करने वाले आएंगे, जो अपनी ही अभिलाषाओं के अनुसार चलेंगे। 
2 Peter 3:4 और कहेंगे, उसके आने की प्रतिज्ञा कहां गई? क्योंकि जब से बाप-दादे सो गए हैं, सब कुछ वैसा ही है, जैसा सृष्‍टि के आरम्भ से था? 
2 Peter 3:5 वे तो जान बूझ कर यह भूल गए, कि परमेश्वर के वचन के द्वारा से आकाश प्राचीन काल से वर्तमान है और पृथ्वी भी जल में से बनी और जल में स्थिर है। 
2 Peter 3:6 इन्‍हीं के द्वारा उस युग का जगत जल में डूब कर नाश हो गया। 
2 Peter 3:7 पर वर्तमान काल के आकाश और पृथ्वी उसी वचन के द्वारा इसलिये रखे हैं, कि जलाए जाएं; और वह भक्तिहीन मनुष्यों के न्याय और नाश होने के दिन तक ऐसे ही रखे रहेंगे। 
2 Peter 3:8 हे प्रियों, यह एक बात तुम से छिपी न रहे, कि प्रभु के यहां एक दिन हजार वर्ष के बराबर है, और हजार वर्ष एक दिन के बराबर हैं। 
2 Peter 3:9 प्रभु अपनी प्रतिज्ञा के विषय में देर नहीं करता, जैसी देर कितने लोग समझते हैं; पर तुम्हारे विषय में धीरज धरता है, और नहीं चाहता, कि कोई नाश हो; वरन यह कि सब को मन फिराव का अवसर मिले। 
2 Peter 3:10 परन्तु प्रभु का दिन चोर की नाईं आ जाएगा, उस दिन आकाश बड़ी हड़हड़ाहट के शब्द से जाता रहेगा, और तत्‍व बहुत ही तप्‍त हो कर पिघल जाएंगे, और पृथ्वी और उस पर के काम जल जाऐंगे। 
2 Peter 3:11 तो जब कि ये सब वस्तुएं, इस रीति से पिघलने वाली हैं, तो तुम्हें पवित्र चाल चलन और भक्ति में कैसे मनुष्य होना चाहिए। 
2 Peter 3:12 और परमेश्वर के उस दिन की बाट किस रीति से जोहना चाहिए और उसके जल्द आने के लिये कैसा यत्‍न करना चाहिए; जिस के कारण आकाश आग से पिघल जाएंगे, और आकाश के गण बहुत ही तप्‍त हो कर गल जाएंगे। 
2 Peter 3:13 पर उस की प्रतिज्ञा के अनुसार हम एक नए आकाश और नई पृथ्वी की आस देखते हैं जिन में धामिर्कता वास करेगी। 
2 Peter 3:14 इसलिये, हे प्रियो, जब कि तुम इन बातों की आस देखते हो तो यत्‍न करो कि तुम शान्‍ति से उसके साम्हने निष्‍कलंक और निर्दोष ठहरो। 
2 Peter 3:15 और हमारे प्रभु के धीरज को उद्धार समझो, जैसे हमारे प्रिय भाई पौलुस ने भी उस ज्ञान के अनुसार जो उसे मिला, तुम्हें लिखा है। 

एक साल में बाइबल: 
  • यहोशु 10-12
  • लूका 1:39-56


सोमवार, 20 अक्टूबर 2014

विलंब और प्रतीक्षा


   परमेश्वर के वचन बाइबल में यशायाह के 18 अध्याय में ऐसा लगता है कि सारा संसार परमेश्वर के लोगों के विरुद्ध युद्ध में उतरने के लिए तैयार है; लेकिन ऐसे में परमेश्वर का प्रत्युत्तर है, "...धूप की तेज गर्मी वा कटनी के समय के ओस वाले बादल की नाईं मैं शान्त हो कर निहारूंगा" (यशायाह 18:4)। ऐसा प्रतीत हो सकता है कि परमेश्वर का यह शान्त होकर बैठना उसके लोगों के विरुद्ध संसार की साज़िश की मूक स्वीकृति है; लेकिन ऐसा था नहीं। परमेश्वर का यह शान्त प्रत्युत्तर इस बात का स्मरण करवाना था कि वह तब कार्य करता है जब समय सही होता है - उसके अनुसार और उसकी इच्छा में।

   प्रभु यीशु मसीह का अपने मित्र लाज़र की मृत्यु के बाद चार दिन तक प्रतीक्षा करते रहने के बारे में विचार कीजिए, जब कि लाज़र कब्र में पड़ा हुआ था (यूहन्ना 11:39)। क्या प्रभु लाज़र कि स्थिति से अनभिज्ञ था? क्या प्रभु को लाज़र की कोई परवाह नहीं थी? प्रभु यीशु को परवाह भी थी और वह लाज़र की स्थिति को अच्छे से जानता भी था, लेकिन उसे उस सही समय की प्रतीक्षा थी जब वह अपनी सामर्थ भी दिखा सके था और उस घटना को लेकर जो शिक्षाएं उसे देनी थीं उन्हें सही रीति से दे भी सके।

   बाइबल में अनेक स्थानों पर ऐसे उल्लेख हैं जहाँ लगता है कि परमेश्वर ने विलंब कर दिया, ऐसी परिस्थितियाँ जिनमें वह विलंब मानवीय दृष्टिकोण से समझ से बाहर है। लेकिन परमेश्वर का प्रत्येक विलंब उसकी बुद्धिमता और प्रेम की गहराइयों से आता है और हमारी भलाई ही के लिए होता है। यदि और कुछ नहीं तो वह विलंब हमें कुछ सदगुण, जैसे कि नम्रता, धैर्य, सहनशीलता, दृढ़ता से डटे रहना इत्यादि सिखाता है, जो संभवतः हम किसी अन्य रीति से सीखने के लिए तैयार नहीं होते।

   क्या आप किसी परेशानी में हैं? क्या आपको लगता है कि परमेश्वर आप से दूर और अलग हो गया है, उसे आपकी परवाह नहीं है? स्मरण तथा विश्वास रखिए कि वह आपके कष्ट से अनभिज्ञ नहीं है और ना ही उसने आपकी प्रार्थनाएं अनसुनी करी हैं। वह अपने उद्देश्यों और समय के पूरा होने की प्रतीक्षा कर रहा है, और फिर सही समय पर वह हस्तक्षेप करेगा और आपके लिए सर्वोत्तम करके देगा। परमेश्वर कभी जल्दबाज़ी में नहीं होता, परन्तु सही समय पर अवश्य होता है। - डेविड रोपर


परमेश्वर का समय सदा सही समय होता है, उसकी प्रतीक्षा करना सर्वोत्तम है।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ: यशायाह 18:1-7
Isaiah 18:1 हाय, पंखों की फड़फड़ाहट से भरे हुए देश, तू जो कूश की नदियों के परे है; 
Isaiah 18:2 और समुद्र पर दूतों को नरकट की नावों में बैठा कर जल के मार्ग से यह कहके भेजता है, हे फुर्तीले दूतो, उस जाति के पास जाओ जिसके लोग बलिष्ट और सुन्दर हैं, जो आदि से अब तक डरावने हैं, जो मापने और रौंदने वाला भी हैं, और जिनका देश नदियों से विभाजित किया हुआ है।
Isaiah 18:3 हे जगत के सब रहने वालों, और पृथ्वी के सब निवासियों, जब झंड़ा पहाड़ों पर खड़ा किया जाए, उसे देखो! जब नरसिंगा फूंका जाए, तब सुनो! 
Isaiah 18:4 क्योंकि यहोवा ने मुझ से यों कहा है, धूप की तेज गर्मी वा कटनी के समय के ओस वाले बादल की नाईं मैं शान्त हो कर निहारूंगा। 
Isaiah 18:5 क्योंकि दाख तोड़ने के समय से पहिले जब फूल फूल चुकें, और दाख के गुच्छे पकने लगें, तब वह टहनियों को हंसुओं से काट डालेगा, और फैली हुई डालियों को तोड़ तोड़कर अलग फेंक देगा। 
Isaiah 18:6 वे पहाड़ों के मांसाहारी पक्षियों और वन-पशुओं के लिये इकट्ठे पड़े रहेंगे। और मांसाहारी पक्षी तो उन को नोचते नोचते धूपकाल बिताएंगे, और सब भांति के वनपशु उन को खाते खाते जाड़ा काटेंगे। 
Isaiah 18:7 उस समय जिस जाति के लोग बलिष्ट और सुन्दर हैं, और जो आदि ही से डरावने होते आए हैं, और मापने और रौंदने वाले हैं, और जिनका देश नदियों से विभाजित किया हुआ है, उस जाति से सेनाओं के यहोवा के नाम के स्थान सिय्योन पर्वत पर सेनाओं के यहोवा के पास भेंट पहुंचाई जाएगी।

एक साल में बाइबल: 
  • मत्ती 26-28


शनिवार, 9 नवंबर 2013

प्रतीक्षा


   मेरे प्रदेश मिशिगन में शरद ऋतु शिकार करने का समय होता है। कुछ सप्ताहों के लिए शिकारी शिकार करने का लाईसेन्स लेकर कुछ प्रकार के वन्य-जीवों का शिकार कर सकते हैं। कुछ शिकारी शिकार के लिए पेड़ों पर मचान बना कर धरती से काफी ऊँचाई पर जाकर बैठ जाते हैं और शांति-पूर्वक किसी शिकार योग्य जानवर के निकट आने की प्रतीक्षा करते रहते हैं। जिन्हें अपने मचान के स्थान पर और अपने शिकार कौशल पर विश्वास होता है वे लंबी प्रतीक्षा कर लेते हैं, जो अभी नए शिकारी हैं, उन्हें लंबी प्रतीक्षा करना कुछ भारी लगता है, वे अधीर रहते हैं।

   जब मैं उन शिकारियों के धैर्य के विषय में सोचती हूँ जो घंटों ऐसे ही बैठे जानवरों के आने की प्रतीक्षा करते रहते हैं, तो मेरा ध्यान इस बात की ओर जाता है कि परमेश्वर को समय देने के लिए हम कितने अधीर हो उठते हैं! हम अकसर प्रतीक्षा को बर्बादी के साथ जोड़ कर देखते हैं। यदि हमें किसी बात की अथवा किसी जन की प्रतीक्षा करनी पड़ती है तो हमें लगता है कि हम कुछ भी नहीं कर पा रहे हैं, और हमारे तुरंत परिणाम एवं उपलब्धि पाने की लालसा रखने वाले समाज में यह प्रतीक्षा समय की बर्बादी मानी जाती है।

   लेकिन प्रतीक्षा कुछ उद्देश्य भी पूरे करती है, जिनमें से एक है हमारे विश्वास को प्रमाणित करना। जिनका विश्वास कमज़ोर होता है वे अधिक प्रतीक्षा नहीं करने पाते, लेकिन जिनका विश्वास दृढ़ होता है वे लंबे समय तक प्रतीक्षा कर लेते हैं - यह बात केवल आत्मिक संदर्भ में ही नहीं, वरन परस्पर मानवीय संबंधों पर भी उतनी ही लागू होती है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में हम लूका के 2 अध्याय में, प्रभु यीशु के जन्म से संबंधित घटनाओं में हम दो जनों शमौन और हन्नाह का उल्लेख पाते हैं, जिन्हें बहुत समय तक प्रतीक्षा करनी पड़ी। उन दोनों को परमेश्वर की ओर से आश्वासन था कि जब तक वे परमेश्वर द्वारा भेजे गए समस्त जगत के उद्धारकर्ता को अपनी आँखों से देख नहीं लेंगे, वे संसार से विदा नहीं होंगे; और प्रभु यीशु के आगमन कि प्रतीक्षा में उन दोनों ने परमेश्वर के मन्दिर में प्रार्थना और धार्मिकता के जीवन के साथ एक लंबी उम्र बिताई। उनकी यह प्रतीक्षा और इस प्रतीक्षा के साथ उनका प्रार्थना तथा धार्मिकता का जीवन अनेक लोगों के लिए गवाही बना, और आज भी मसीही विश्वासियों के लिए शिक्षा का स्त्रोत है।

   प्रार्थना का तुरंत उत्तर ना मिलना विश्वास को छोड़ देने का कारण नहीं होना चाहिए। विश्वास की परिपक्वता प्रतीक्षा को दिए गए समय से भी आँकी जा सकती है। - जूली ऐकैर्मैन लिंक


परमेश्वर के उत्तर की प्रतीक्षा कभी समय की बर्बादी नहीं होती।

तौभी यहोवा इसलिये विलम्ब करता है कि तुम पर अनुग्रह करे, और इसलिये ऊंचे उठेगा कि तुम पर दया करे। क्योंकि यहोवा न्यायी परमेश्वर है; क्या ही धन्य हैं वे जो उस पर आशा लगाए रहते हैं। - यशायाह 30:18

बाइबल पाठ: लूका 2:22-38
Luke 2:22 और जब मूसा की व्यवस्था के अनुसार उन के शुद्ध होने के दिन पूरे हुए तो वे उसे यरूशलेम में ले गए, कि प्रभु के सामने लाएं। 
Luke 2:23 (जैसा कि प्रभु की व्यवस्था में लिखा है कि हर एक पहिलौठा प्रभु के लिये पवित्र ठहरेगा)। 
Luke 2:24 और प्रभु की व्यवस्था के वचन के अनुसार पंडुकों का एक जोड़ा, या कबूतर के दो बच्‍चे ला कर बलिदान करें। 
Luke 2:25 और देखो, यरूशलेम में शमौन नाम एक मनुष्य था, और वह मनुष्य धर्मी और भक्त था; और इस्राएल की शान्‍ति की बाट जोह रहा था, और पवित्र आत्मा उस पर था। 
Luke 2:26 और पवित्र आत्मा से उसको चितावनी हुई थी, कि जब तक तू प्रभु के मसीह को देख ने लेगा, तक तक मृत्यु को न देखेगा। 
Luke 2:27 और वह आत्मा के सिखाने से मन्दिर में आया; और जब माता-पिता उस बालक यीशु को भीतर लाए, कि उसके लिये व्यवस्था की रीति के अनुसार करें। 
Luke 2:28 तो उसने उसे अपनी गोद में लिया और परमेश्वर का धन्यवाद कर के कहा, 
Luke 2:29 हे स्‍वामी, अब तू अपने दास को अपने वचन के अनुसार शान्‍ति से विदा करता है। 
Luke 2:30 क्योंकि मेरी आंखो ने तेरे उद्धार को देख लिया है। 
Luke 2:31 जिसे तू ने सब देशों के लोगों के साम्हने तैयार किया है। 
Luke 2:32 कि वह अन्य जातियों को प्रकाश देने के लिये ज्योति, और तेरे निज लोग इस्राएल की महिमा हो। 
Luke 2:33 और उसका पिता और उस की माता इन बातों से जो उसके विषय में कही जाती थीं, आश्चर्य करते थे। 
Luke 2:34 तब शमौन ने उन को आशीष देकर, उस की माता मरियम से कहा; देख, वह तो इस्राएल में बहुतों के गिरने, और उठने के लिये, और एक ऐसा चिन्ह होने के लिये ठहराया गया है, जिस के विरोध में बातें की जाएगीं -- 
Luke 2:35 वरन तेरा प्राण भी तलवार से वार पार छिद जाएगा-- इस से बहुत हृदयों के विचार प्रगट होंगे। 
Luke 2:36 और अशेर के गोत्र में से हन्नाह नाम फनूएल की बेटी एक भविष्यद्वक्तिन थी: वह बहुत बूढ़ी थी, और ब्याह होने के बाद सात वर्ष अपने पति के साथ रह पाई थी। 
Luke 2:37 वह चौरासी वर्ष से विधवा थी: और मन्दिर को नहीं छोड़ती थी पर उपवास और प्रार्थना कर कर के रात-दिन उपासना किया करती थी। 
Luke 2:38 और वह उस घड़ी वहां आकर प्रभु का धन्यवाद करने लगी, और उन सभों से, जो यरूशलेम के छुटकारे की बाट जोहते थे, उसके विषय में बातें करने लगी।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 46-47 
  • इब्रानियों 6


शनिवार, 26 अक्टूबर 2013

उन्नति के अवसर

   क्या किसी यात्रा के समय आप कभी किसी हवाईआड्डे पर फंसे हैं? वह भी 24 घंटों के लिए? और एक ऐसे स्थान पा जहाँ की भाषा आप नहीं जानते? तथा घर एवं संबंधियों से चार हज़ार मील दूर?

   ऐसा हाल ही में मेरे एक मित्र जौन के साथ हुआ; और इस घटना के लिए उसकी प्रतिक्रीय से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं। जबकि हम में से अधिकांशतः इस असुविधा को असहनीय पाते, मेरे मित्र ने इस अनपेक्षित विलम्ब में परमेश्वर के हाथ को देखा। अपने कार्यक्रम में आई इस रुकावट के समय को वह अपने साथ के अन्य यात्रियों के साथ संबंध बनाने में उपयोग करने लगा। उसे कुछ मसीही विश्वासी यात्री मिले जो भारत से थे, और उनसे बात-चीत करते समय जौन को उनकी मसीही सेवकाई के बारे में जानने का अवसर मिला। क्योंकि जौन के कार्य और रुचि उनकी सेवकाई के समान ही थी, इसलिए उन लोगों ने जौन को निमंत्रण दिया कि वह भारत आए और उनके साथ कुछ समय एक परियोजना में कार्य करे।

   हमें कितनी ही बार विलम्ब, योजनाओं के परिवर्तन या पुनःनिर्धारण आदि का सामना करना पड़ता है, किन्तु अकसर हम इन बातों को नकारात्मक रीति से लेते हैं, कुंठित होते हैं, खिसिया जाते हैं। लेकिन यह भी हो सकता है कि परमेश्वर हमारा मार्ग बदल रहा है जिससे हम कुछ अलग, कुछ नया कर सकें और उसके लिए उपयोगी हो सकें। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरितों 16 में उल्लेखित प्रेरित पौलुस की फिलिप्पी की यात्रा को स्मरण कीजिए। पौलुस मकिदूनिया परमेश्वर से मिले दर्शन के कारण परमेश्वर की सेवकाई करने गया था (पद 9-10)। उसे क्या पता था कि वहाँ वह बन्दीगृह में डाला जाएगा। लेकिन उसका बन्दीगृह में डाला जाना भी परमेश्वर द्वारा निर्धारित था, क्योंकि वहाँ वह बन्‍दीगृह के दारोगा तथा उसके परिवार के उद्धार पाने के लिए उपयोग हुआ (पद 25-34)।

   परमेश्वर हमारे जीवन की असुविधाओं को भी अपने कार्यों, अपनी महिमा और हमारी उन्नति के अवसर बना सकता है, यदि हम प्रत्येक परिस्थिति को परमेश्वरीय प्रयोजन के रूप में देखने वाले हों। - डेव ब्रैनन


परमेश्वर अवरोधों को भी उन्नति के अवसर बना सकता है।

आधी रात के लगभग पौलुस और सीलास प्रार्थना करते हुए परमेश्वर के भजन गा रहे थे, और बन्‍धुए उन की सुन रहे थे। - प्रेरितों 16:25

बाइबल पाठ: प्रेरितों 16:9-34
Acts 16:9 और पौलुस ने रात को एक दर्शन देखा कि एक मकिदुनी पुरूष खड़ा हुआ, उस से बिनती कर के कहता है, कि पार उतरकर मकिदुनिया में आ; और हमारी सहायता कर। 
Acts 16:10 उसके यह दर्शन देखते ही हम ने तुरन्त मकिदुनिया जाना चाहा, यह समझ कर, कि परमेश्वर ने हमें उन्हें सुसमाचार सुनाने के लिये बुलाया है।
Acts 16:11 सो त्रोआस से जहाज खोल कर हम सीधे सुमात्राके और दूसरे दिन नियापुलिस में आए। 
Acts 16:12 वहां से हम फिलिप्पी में पहुंचे, जो मकिदुनिया प्रान्‍त का मुख्य नगर, और रोमियों की बस्‍ती है; और हम उस नगर में कुछ दिन तक रहे। 
Acts 16:13 सब्त के दिन हम नगर के फाटक के बाहर नदी के किनारे यह समझ कर गए, कि वहां प्रार्थना करने का स्थान होगा; और बैठ कर उन स्‍त्रियों से जो इकट्ठी हुई थीं, बातें करने लगे। 
Acts 16:14 और लुदिया नाम थुआथीरा नगर की बैंजनी कपड़े बेचने वाली एक भक्त स्त्री सुनती थी, और प्रभु ने उसका मन खोला, ताकि पौलुस की बातों पर चित्त लगाए। 
Acts 16:15 और जब उसने अपने घराने समेत बपतिस्मा लिया, तो उसने बिनती की, कि यदि तुम मुझे प्रभु की विश्वासिनी समझते हो, तो चल कर मेरे घर में रहो; और वह हमें मनाकर ले गई।
Acts 16:16 जब हम प्रार्थना करने की जगह जा रहे थे, तो हमें एक दासी मिली जिस में भावी कहने वाली आत्मा थी; और भावी कहने से अपने स्‍वामियों के लिये बहुत कुछ कमा लाती थी। 
Acts 16:17 वह पौलुस के और हमारे पीछे आकर चिल्लाने लगी कि ये मनुष्य परमप्रधान परमेश्वर के दास हैं, जो हमें उद्धार के मार्ग की कथा सुनाते हैं। 
Acts 16:18 वह बहुत दिन तक ऐसा ही करती रही, परन्तु पौलुस दु:खित हुआ, और मुंह फेर कर उस आत्मा से कहा, मैं तुझे यीशु मसीह के नाम से आज्ञा देता हूं, कि उस में से निकल जा और वह उसी घड़ी निकल गई।
Acts 16:19 जब उसके स्‍वामियों ने देखा, कि हमारी कमाई की आशा जाती रही, तो पौलुस और सीलास को पकड़ कर चौक में प्राधानों के पास खींच ले गए। 
Acts 16:20 और उन्हें फौजदारी के हाकिमों के पास ले जा कर कहा; ये लोग जो यहूदी हैं, हमारे नगर में बड़ी हलचल मचा रहे हैं। 
Acts 16:21 और ऐसे व्यवहार बता रहे हैं, जिन्हें ग्रहण करना या मानना हम रोमियों के लिये ठीक नहीं। 
Acts 16:22 तब भीड़ के लोग उन के विरोध में इकट्ठे हो कर चढ़ आए, और हाकिमों ने उन के कपड़े फाड़कर उतार डाले, और उन्हें बेंत मारने की आज्ञा दी। 
Acts 16:23 और बहुत बेंत लगवा कर उन्हें बन्‍दीगृह में डाला; और दारोगा को आज्ञा दी, कि उन्हें चौकसी से रखे। 
Acts 16:24 उसने ऐसी आज्ञा पाकर उन्हें भीतर की कोठरी में रखा और उन के पांव काठ में ठोक दिए। 
Acts 16:25 आधी रात के लगभग पौलुस और सीलास प्रार्थना करते हुए परमेश्वर के भजन गा रहे थे, और बन्‍धुए उन की सुन रहे थे। 
Acts 16:26 कि इतने में एकाएक बड़ा भुईंडोल हुआ, यहां तक कि बन्‍दीगृह की नेंव हिल गईं, और तुरन्त सब द्वार खुल गए; और सब के बन्‍धन खुल पड़े। 
Acts 16:27 और दारोगा जाग उठा, और बन्‍दीगृह के द्वार खुले देखकर समझा कि बन्‍धुए भाग गए, सो उसने तलवार खींचकर अपने आप को मार डालना चाहा। 
Acts 16:28 परन्तु पौलुस ने ऊंचे शब्द से पुकारकर कहा; अपने आप को कुछ हानि न पहुंचा, क्योंकि हम सब यहां हैं। 
Acts 16:29 तब वह दीया मंगवा कर भीतर लपक गया, और कांपता हुआ पौलुस और सीलास के आगे गिरा। 
Acts 16:30 और उन्हें बाहर लाकर कहा, हे साहिबो, उद्धार पाने के लिये मैं क्या करूं? 
Acts 16:31 उन्होंने कहा, प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास कर, तो तू और तेरा घराना उद्धार पाएगा।
Acts 16:32 और उन्होंने उसको, और उसके सारे घर के लोगों को प्रभु का वचन सुनाया। 
Acts 16:33 और रात को उसी घड़ी उसने उन्हें ले जा कर उन के घाव धोए, और उसने अपने सब लोगों समेत तुरन्त बपतिस्मा लिया। 
Acts 16:34 और उसने उन्हें अपने घर में ले जा कर, उन के आगे भोजन रखा और सारे घराने समेत परमेश्वर पर विश्वास कर के आनन्द किया।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मियाह 9-11 
  • 1 तीमुथियुस 6


शुक्रवार, 20 सितंबर 2013

तैयार?

   सन 2008 की पतझड़ ऋतु के समय से आरंभ होने वाली गंभीर विश्वव्यापि आर्थिक मन्दी से सब अवगत हैं; यह मन्दी सन 1929 की भीष्ण मन्दी के बाद की सर्वाधिक गंभीर मन्दी है, और इसका दुषप्रभाव अभी तक विश्व की अर्थ व्यवस्था पर बना हुआ है, विश्व के किसी भी राष्ट्र की अर्थव्यवस्था इससे अछूती नहीं रही और ना ही अभी तक पूरी रीति से उभरने पाई है। जैसे पहले की मन्दी के लिए सत्य था वैसे ही इस मन्दी के लिए भी सत्य है - इस मन्दी के लिए भी लोग तैयार नहीं थे और इसके आने से बहुत से लोगों की नौकरियाँ जाती रहीं, उनके पूँजीनिवेश समाप्त हो गए और घर उजड़ गए। इस मन्दी के आने के लगभग एक वर्ष बाद बी.बी.सी. को दिए एक साक्षात्कार में अमेरिका मुद्रा संघ के भूतपूर्व अध्यक्ष एलेन स्पैन ने जताया कि सामन्यतः कोई व्यक्ति यह विश्वास नहीं रखता कि ऐसा समय फिर से आएगा; यह मानव प्रवृति है कि लंबी समृद्धि के समय में वे यह मान बैठते हैं कि समृद्धि का यह दौर कभी समाप्त नहीं होगा, सदा ऐसे ही चलता रहेगा।

   यह मान लेना कि जैसे चल रहा है वैसे ही सदा चलता रहेगा केवल 21वीं शताब्दी की सोच नहीं है। यही प्रवृति प्रथम शताब्दी में भी पाई जाती थी। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पतरस ने अपनी दूसरी पत्री में उन लोगों के विषय में लिखा जो यह मान कर चल रहे थे कि जैसे चल रहा है, जीवन वैसे ही चलता रहेगा और प्रभु यीशु मसीह दोबारा वापस नहीं आएंगे। यह मानने वालों का कहना था कि "...उसके आने की प्रतिज्ञा कहां गई? क्योंकि जब से बाप-दादे सो गए हैं, सब कुछ वैसा ही है, जैसा सृष्‍टि के आरम्भ से था?" (2 पतरस 3:4)।

   प्रभु यीशु का यह वायदा है कि वह अपने विश्वासियों को अपने साथ ले जाने के लिए जगत के अन्त और न्याय के समय से ठीक पहले आएगा, लेकिन लोग उसकी बात पर विश्वास करने की बजाए, अविश्वास करके उसकी अवज्ञा में जीवन बिताना अधिक पसन्द करते हैं, यह मानते हुए कि वह कभी नहीं आएगा। लेकिन प्रभु यीशु के दोबारा आने में प्रतीत होने वाला विलंब केवल इस लिए है क्योंकि परमेश्वर प्रत्येक जन को अवसर देना चाहता है कि वे समय समाप्त हो जाने से पहले विश्वास और पश्चाताप कर लें क्योंकि परमेश्वर सब से प्रेम रखता है और "प्रभु अपनी प्रतिज्ञा के विषय में देर नहीं करता, जैसी देर कितने लोग समझते हैं; पर तुम्हारे विषय में धीरज धरता है, और नहीं चाहता, कि कोई नाश हो; वरन यह कि सब को मन फिराव का अवसर मिले" (2 पतरस 3:9)।

   प्रेरित पौलुस ने भी प्रभु यीशु के दूसरे आगमन के प्रति लोगों, विशेषकर मसीही विश्वासियों को, सचेत रहने के लिए चिताते हुए लिखा कि वे मसीह यीशु के आगमन के लिए अपने आप को तैयार रखते हुए "...अभक्ति और सांसारिक अभिलाषाओं से मन फेर कर इस युग में संयम और धर्म और भक्ति से जीवन बिताएं" (तीतुस 2:12)। प्रभु यीशु मसीह ने जगत के अन्त और अपने दूसरे आगमन के चिन्ह अपने चेलों को दिए थे, और वे सब हमारे सामने पूरे होते चले जा रहे हैं। जगत का अन्त और न्याय तथा प्रभु यीशु का पुनःआगमन अवश्यंभावी है। क्या आप उस दिन, प्रभु यीशु के आगमन तथा होने वाले न्याय के लिए तैयार हैं? - सी.पी. हिया


प्रभु यीशु कभी भी आ सकता है; हमें सदा उसके पुनःआगमन के लिए तैयार रहना चाहिए।

वह यह चाहता है, कि सब मनुष्यों का उद्धार हो; और वे सत्य को भली भांति पहिचान लें। - 1 तिमुथियुस 2:4 

बाइबल पाठ: 2 पतरस 3:1-13
2 Peter 3:1 हे प्रियो, अब मैं तुम्हें यह दूसरी पत्री लिखता हूं, और दोनों में सुधि दिला कर तुम्हारे शुद्ध मन को उभारता हूं।
2 Peter 3:2 कि तुम उन बातों को, जो पवित्र भविश्यद्वक्ताओं ने पहिले से कही हैं और प्रभु, और उद्धारकर्ता की उस आज्ञा को स्मरण करो, जो तुम्हारे प्रेरितों के द्वारा दी गई थी।
2 Peter 3:3 और यह पहिले जान लो, कि अन्‍तिम दिनों में हंसी ठट्ठा करने वाले आएंगे, जो अपनी ही अभिलाषाओं के अनुसार चलेंगे।
2 Peter 3:4 और कहेंगे, उसके आने की प्रतिज्ञा कहां गई? क्योंकि जब से बाप-दादे सो गए हैं, सब कुछ वैसा ही है, जैसा सृष्‍टि के आरम्भ से था?
2 Peter 3:5 वे तो जान बूझ कर यह भूल गए, कि परमेश्वर के वचन के द्वारा से आकाश प्राचीन काल से वर्तमान है और पृथ्वी भी जल में से बनी और जल में स्थिर है।
2 Peter 3:6 इन्‍हीं के द्वारा उस युग का जगत जल में डूब कर नाश हो गया।
2 Peter 3:7 पर वर्तमान काल के आकाश और पृथ्वी उसी वचन के द्वारा इसलिये रखे हैं, कि जलाए जाएं; और वह भक्तिहीन मनुष्यों के न्याय और नाश होने के दिन तक ऐसे ही रखे रहेंगे।
2 Peter 3:8 हे प्रियों, यह एक बात तुम से छिपी न रहे, कि प्रभु के यहां एक दिन हजार वर्ष के बराबर है, और हजार वर्ष एक दिन के बराबर हैं।
2 Peter 3:9 प्रभु अपनी प्रतिज्ञा के विषय में देर नहीं करता, जैसी देर कितने लोग समझते हैं; पर तुम्हारे विषय में धीरज धरता है, और नहीं चाहता, कि कोई नाश हो; वरन यह कि सब को मन फिराव का अवसर मिले।
2 Peter 3:10 परन्तु प्रभु का दिन चोर की नाईं आ जाएगा, उस दिन आकाश बड़ी हड़हड़ाहट के शब्द से जाता रहेगा, और तत्‍व बहुत ही तप्‍त हो कर पिघल जाएंगे, और पृथ्वी और उस पर के काम जल जाऐंगे।
2 Peter 3:11 तो जब कि ये सब वस्तुएं, इस रीति से पिघलने वाली हैं, तो तुम्हें पवित्र चाल चलन और भक्ति में कैसे मनुष्य होना चाहिए।
2 Peter 3:12 और परमेश्वर के उस दिन की बाट किस रीति से जोहना चाहिए और उसके जल्द आने के लिये कैसा यत्‍न करना चाहिए; जिस के कारण आकाश आग से पिघल जाएंगे, और आकाश के गण बहुत ही तप्‍त हो कर गल जाएंगे।
2 Peter 3:13 पर उस की प्रतिज्ञा के अनुसार हम एक नए आकाश और नई पृथ्वी की आस देखते हैं जिन में धामिर्कता वास करेगी।

एक साल में बाइबल: 
  • सभोपदेशक 4-6 
  • 2 कुरिन्थियों 12