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मंगलवार, 15 जनवरी 2013

स्वतंत्र


   सैन फ्रांसिस्को के अल्काट्रैज़ टापू पर स्थित और अब बन्द कर दिए गए कैदखाने के भ्रमण से लौटने के बाद वहां की कुछ अविस्मरणीय यादें मेरे साथ रह गईं। जब हम नौका से वहां पहुंचे तो मैं जान सका कि क्यों उस अधिकतम सुरक्षा प्राप्त स्थान को "चट्टान" कह कर संबोधित किया जाता था।

   अन्दर भ्रमण करते समय, मैंने वहां के चर्चित "बड़े घर" के अन्दर रौशनी की किरणों को मोटी सलाखों लगी खिड़कियों से होकर आते हुए देखा। फिर एक के बाद एक कोठरियों की कतारों को देखा जिनमें कई कुख्यात अपराधी कैद रखे गए थे। लेकिन एक अन्य बात ने एक बहुत गहरी छाप मुझ पर छोड़ी - एक खाली कोठरी में प्रवेश करने पर मैंने वहां की एक दिवार पर लिखा हुआ देखा "यीशु" और एक अन्य कोठरी की ताक में एक बाइबल रखी हुई थी। इन दोनों बातों ने मुझसे शांत भाव से सबसे बड़ी स्वतंत्रता के बारे में बातें कीं।

   प्रेरित पौलुस भी, जब वह कैदखाने की कोठरी में पड़ा अपने मृत्यु दण्ड के पूरा किए जाने की प्रतीक्षा कर रहा था तो इस स्वतंत्रता के बारे में जानता था। अपने आप को "मसीह का कैदी" जानकर उसने अपने कैद के समय का उपयोग अन्य कैदियों तक पाप से अनन्त काल की क्षमा पाने तथा परमेश्वर के परिवार का सदस्य बनने और मसीह में स्वतंत्र होने के सुसमाचार को पहुंचाने के लिए बिताया।

   सलाखें लगे दरवाज़े और खिड़कियां एक प्रकार की कैद के प्रतीक हैं। शरीर में लकवे का रोगी होना, अपरिहार्य दरिद्रता, लंबे अर्से की बेरोज़गारी इत्यादि एक अन्य प्रकार की कैद के प्रतीक हैं। संभव है कि आप किसी अन्य प्रकार की कैद सहन कर रहे हों। इनमें से कोई भी कैद वांछनीय नहीं है - लेकिन जिसने मसीह के प्रेम और उससे मिलने वाली सामर्थ को जान लिया है वह मसीह का कैदी होने के बदले में मसीह के बिना स्वतंत्र रहने की कल्पना भी नहीं कर सकता क्योंकि मसीह की कैद ही जीवन की वास्तविक स्वतंत्रता है। - मार्ट डी हॉन


मसीह के नियंत्रण में रहना ही स्वतंत्रता में रहना है।

मैं अपने बच्‍चे उनेसिमुस के लिये जो मुझ से मेरी कैद में जन्मा है तुझ से बिनती करता हूं। - फिलेमॉन १:१०

बाइबल पाठ: फिलेमॉन १:४-१६
Phlm 1:4  मैं तेरे उस प्रेम और विश्वास की चर्चा सुन कर, जो सब पवित्र लोगों के साथ और प्रभु यीशु पर है।
Phlm 1:5  सदा परमेश्वर का धन्यवाद करता हूं; और अपनी प्रार्थनाओं में भी तुझे स्मरण करता हूं।
Phlm 1:6  कि तेरा विश्वास में सहभागी होना तुम्हारी सारी भलाई की पहिचान में मसीह के लिये प्रभावशाली हो।
Phlm 1:7 क्योंकि हे भाई, मुझे तेरे प्रेम से बहुत आनन्द और शान्‍ति मिली, इसलिये, कि तेरे द्वारा पवित्र लोगों के मन हरे भरे हो गए हैं।
Phlm 1:8  इसलिये यद्यपि मुझे मसीह में बड़ा हियाव तो है, कि जो बात ठीक है, उस की आज्ञा तुझे दूं।
Phlm 1:9  तौभी मुझ बूढ़े पौलुस को जो अब मसीह यीशु के लिये कैदी हूं, यह और भी भला जान पड़ा कि प्रेम से बिनती करूं।
Phlm 1:10  मैं अपने बच्‍चे उनेसिमुस के लिये जो मुझ से मेरी कैद में जन्मा है तुझ से बिनती करता हूं।
Phlm 1:11  वह तो पहिले तेरे कुछ काम का न था, पर अब तेरे और मेरे दोनों के बड़े काम का है।
Phlm 1:12  उसी को अर्थात जो मेरे हृदय का टुकड़ा है, मैं ने उसे तेरे पास लौटा दिया है।
Phlm 1:13  उसे मैं अपने ही पास रखना चाहता था कि तेरी ओर से इस कैद में जो सुसमाचार के कारण है, मेरी सेवा करे।
Phlm 1:14  पर मैं ने तेरी इच्छा बिना कुछ भी करना न चाहा कि तेरी यह कृपा दबाव से नहीं पर आनन्द से हो।
Phlm 1:15  क्योंकि क्या जाने वह तुझ से कुछ दिन तक के लिये इसी कारण अलग हुआ कि सदैव तेरे निकट रहे।
Phlm 1:16  परन्तु अब से दास की नाईं नहीं, वरन दास से भी उत्तम, अर्थात भाई के समान रहे जो शरीर में भी और विशेष कर प्रभु में भी मेरा प्रिय हो।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति ३६-३८ 
  • मत्ती १०:२१-४२

सोमवार, 10 जनवरी 2011

पाप का गणित

मैंने कैद में पड़े हुए कैदियों को शोकित होकर अपने सिर हिलाते और यह कहते देखा है कि "मैंने कभी नहीं सोचा था कि बात इस हद तक बिगड़ जाएगी।" जब उन्होंने छोटे छोटे अपराध करने शुरू किये तो बड़े या गंभीर अपराधों में पड़ने का उनका कोई इरादा नहीं था। लेकिन एक के बाद दूसरा अपराध होता गया, वे अपराध के जीवन में फंसते चले गए और अब वे आत्मग्लानि के साथ बन्दीगृह में पड़े हैं।

इन लोगों ने कभी यह नहीं पहचाना कि पाप में सदा पतन ही होता है और उसकी गंभीरता बद से बदतर ही होती है। जब हम जीवन के एक पहलू में परमेश्वर के नियमों को तोड़ते हैं तो जैसे गणित के जोड़ और गुणा के सिद्धांत जीवन में कम करने लग जाते हैं। शीघ्र ही पाप बढ़कर जीवन के अन्य पहलूओं में भी अपने प्रभाव डालने लगता है।

यह सोचना मूर्खता है कि हम बस एक छोटा प्रीय पाप पाल कर रख सकते हैं। वह एक पाप बढ़ता और फैलता रहेगा और हमें पतन की ओर अग्रसर रखेगा जब तक कि हम उसे पूरी तरह अपने से दूर नहीं कर देते। इसीलिये प्रभु यीशु ने पाप करने वाला हाथ काट कर फेंकने और पाप करने वाली आंख निकालने की बात कही (मत्ती १८:८, ९)। ऐसे कठोर शब्द रूपक प्रयोग करने में प्रभु का उद्देश्य यही समझाना था कि पाप को दूर रखने के लिये जो कुछ बन पड़े वह करो।

हम पाप के साथ खिलवाड़ करने का जोखिम नहीं उठा सकते। पौलुस ने रोमियों की पत्री के पहले अध्याय में तीन बार लिखा परमेश्वर ने पाप में बने रहने वालों को उनके दुष्कर्मों पर छोड़ दिया। वह पाप के पतन को उसका समय पूरा होने तक छोड़ देता है ताकि न केवल पापी को पश्चाताप का पूरा अवसर मिले, वरन न्याय को भी पूरा अवसर मिले और जब न्याय का समय आए तो उससे बचने का कोई बहाना न रहे।

हम प्रभु यीशु पर विश्वास करके पाप के इस अव्श्यंभावी गणित से बच सकते हैं। आज और अभी हमारे जीवन के किसी भी पाप से बचने के लिये उसकी सामर्थ काफी है। नहीं तो एक समय आएगा जब हमें उसके न्याय का सामना करना पड़ेगा और तब कोई और बचाव का मार्ग या उपाय नहीं होगा। - हर्ब वैन्डर लुग्ट


कोई भी अचानक ही दुष्ट नहीं हो जाता।

यदि तेरा हाथ या तेरा पांव तुझे ठोकर खिलाए, तो काट कर फेंक दे। - मत्ती १८:८


बाइबल पाठ: मत्ती १८:६-९

पर जो कोई इन छोटों में से जो मुझ पर विश्वास करते हैं एक को ठोकर खिलाए, उसके लिये भला होता, कि बड़ी चक्की का पाट उसके गले में लटकाया जाता, और वह गहिरे समुद्र में डुबाया जाता।
ठोकरों के कारण संसार पर हाय! ठोकरों का लगना अवश्य है, पर हाय उस मनुष्य पर जिस के द्वारा ठोकर लगती है।
यदि तेरा हाथ या तेरा पांव तुझे ठोकर खिलाए, तो काट कर फेंक दे। टुण्‍डा या लंगड़ा होकर जीवन में प्रवेश करना तेरे लिये इस से भला है, कि दो हाथ या दो पांव रहते हुए तू अनन्‍त आग में डाला जाए।
और यदि तेरी आंख तुझे ठोकर खिलाए, तो उसे निकालकर फेंक दे।

एक साल में बाइबल:
  • उत्पत्ति २५-२६
  • मत्ती ८:१-१७

मंगलवार, 2 नवंबर 2010

पाप के बन्दी

सयंयुक्त राष्ट्र संघ के नशा और अपराध से संबंधित दफतर की सन २००८ की एक रिपोर्ट में बताया गया कि संसार भर में किसी भी समय औसतन १ करोड़ लोग बन्दीगृहों में कैदी होते हैं। क्योंकि कुछ बन्दी छोड़े जाते हैं और कुछ नए बन्दी बनते हैं, इसलिये औसतन संसार भर में प्रतिवर्ष लगभग ३ करोड़ लोग बन्दी रहते हैं। इस तरह के आंकड़ों के कारण बन्दीयों के लिये काम करने को बहुत से लोग प्रेरित हुए और उनके प्रयासों से, बहुत से देशों में बन्दीगृहों की दशा में और बन्दी बनाये जाने से संबंधित कनूनों में सुधार हो रहे हैं।

आत्मिक दृष्टिकोण से बाइबल इससे भी अधिक गंभीर और झकझोरने वाला आंकड़ा देती है " परन्‍तु पवित्र शास्‍त्र ने सब को पाप के आधीन कर दिया..." (गलतियों ३:२२) - सारा संसार पाप का कैदी है!

एक परिच्छेद में, जिस को समझने में बहुत लोगों को कठिनाई होती है, पौलुस कहता है कि यद्यपि पुराने नियम में दी गई व्यवस्था जीवन नहीं दे सकती थी (गलतियों ३:२१), फिर भी वह एक प्रभावी शिक्षक थी हमें यह दिखाने के लिये कि हमें एक उद्धारकर्ता की आवश्यक्ता है जो जीवन दे सके (गलतियों ३:२४)। भले ही संसार का पाप का बन्दी होना बुरा समाचार है, परन्तु साथ ही, उसी पद में सुसमाचार भी है "... ताकि वह प्रतिज्ञा जिस का आधार यीशु मसीह पर विश्वास करना है, विश्वास करने वालों के लिये पूरी हो जाए" (गलतियों ३:२२)। अर्थात, पाप के बन्दियों [संसार] के लिये प्रभु यीशु मसीह में विश्वास के द्वारा मुक्ति का मार्ग उपलब्ध है और जो कोई विश्वास से इस मार्ग पर चलेगा वह अवश्य मुक्ति पाएगा।

जब हम अपने पापों से पश्चाताप करके, साधारण विश्वास के साथ अपने जीवन प्रभु यीशु को समर्पित करते हैं, जो व्यवस्था की सारी आवश्यक्ताओं को हमारे लिये पूरा कर चुका है, तो वह हमारे पाप क्षमा करके अपनी धार्मिकता हमें दे देता है, और हम पाप के दासत्व से मुक्त हो जाते हैं। ऐसे लोग अब प्रभु की विश्वव्यापी मण्डली के सदस्य हो जाते हैं, जिसमें देश, राष्ट्रियता, रंग, भाषा, धर्म, सामाजिक ओहदे आदि बातों का कोई महत्व नहीं है। उस मण्डली में सब समान रूप से प्रभु के प्रिय तथा परमेश्वर की सन्तान और उसकी आशीशों के वारिस हैं। ऐसी कोई भी बात जो आज संसार के लोगों को विभाजित करती है, वहां महत्व नहीं रखती।

प्रभु यीशु में हम वास्तव में स्वतंत्र हैं! - डेविड मैककैसलैंड


पापों से मुक्ती ही सबसे बड़ी स्वतंत्रता है।

परन्‍तु पवित्र शास्‍त्र ने सब को पाप के आधीन कर दिया, ताकि वह प्रतिज्ञा जिस का आधार यीशु मसीह पर विश्वास करना है, विश्वास करने वालों के लिये पूरी हो जाए। - गलतियों ३:२२


बाइबल पाठ: गलतियों ३:१९-२९

तब फिर व्यवस्था क्या रही? वह तो अपराधों के कारण बाद में दी गई, कि उस वंश के आने तक रहे, जिस की प्रतिज्ञा दी गई थी, और वह स्‍वर्गदूतों के द्वारा एक मध्यस्थ के हाथ ठहराई गई।
मध्यस्थ तो एक का नहीं होता, परन्‍तु परमेश्वर एक ही है।
तो क्‍या व्यवस्था परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं के विरोध में है? कदापि न हो, क्‍योंकि यदि ऐसी व्यवस्था दी जाती जो जीवन दे सकती, तो सचमुच धामिर्कता व्यवस्था से होती।
परन्‍तु पवित्र शास्‍त्र ने सब को पाप के आधीन कर दिया, ताकि वह प्रतिज्ञा जिस का आधार यीशु मसीह पर विश्वास करना है, विश्वास करने वालों के लिये पूरी हो जाए।
पर विश्वास के आने से पहिले व्यवस्था की अधीनता में हमारी रखवाली होती थी, और उस विश्वास के आने तक जो प्रगट होने वाला था, हम उसी के बन्‍धन में रहे।
इसलिये व्यवस्था मसीह तक पहुंचाने को हमारा शिक्षक हुई है, कि हम विश्वास से धर्मी ठहरें।
परन्‍तु जब विश्वास आ चुका, तो हम अब शिक्षक के आधीन न रहे।
क्‍योंकि तुम सब उस विश्वास करने के द्वारा जो मसीह यीशु पर है, परमेश्वर की सन्‍तान हो।
और तुम में से जितनों ने मसीह में बपतिस्मा लिया है उन्‍होंने मसीह को पहिन लिया है।
अब न कोई यहूदी रहा और न यूनानी, न कोई दास, न स्‍वतंत्र, न कोई नर, न नारी; क्‍योंकि तुम सब मसीह यीशु में एक हो।
और यदि तुम मसीह के हो, तो इब्राहीम के वंश और प्रतिज्ञा के अनुसार वारिस भी हो।
एक साल में बाइबल:
  • यर्मियाह २७-२९
  • तीतुस ३