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शनिवार, 1 फ़रवरी 2014

तृप्ति के सोते


   प्रायः देखा जाता है कि लोगों में परोपकार, भलाई और उदारता की अभिव्यक्ति जो दिसंबर महीने में दिखाई देती है वह कुछ ही समय में धूमिल पड़ने लगती है और लोग कहने लगते हैं कि, "काश हम क्रिसमस का उत्साह साल भरे बनाए रख सकते।" ऐसा क्यों होता है कि भलाई, परोपकार, उदारता, दया आदि भावनाएं केवल त्यौहारों के साथ ही जुड़ी दिखाई देती हैं मानों इन्हें किसी दिन विशेष के साथ जोड़ कर रखा गया हो? क्या इन त्यौहारों और पर्वों के साथ जुड़ी इस छिछली दया भावना के अतिरिक्त कोई ऐसा गहरा बहने वाला दया का सोता है जो अविराल साल-ब-साल बहता रहता हो, लोगों को तृप्त करता रहता हो?

   परमेश्वर के वचन बाइबल में लूका रचित सुसमाचार के पहले दो अध्यायों में परमेश्वर के पवित्र आत्मा का सात बार वर्णन आया है। पवित्र आत्मा को पाँच लोगों के जीवन में कार्य करते दिखाया गया है - यूहन्ना बप्तिसमा देने वाला (1:15), मरियम (1:35), इलीशिबा (1:41), ज़कर्याह (1:67) और शमौन (2:25-27)। इस खण्ड में, जिसे हम आम तौर से "क्रिसमस की कहानी" के नाम से जानते हैं, हम ऐसा नहीं पाते कि इन लोगों को अचानक ही कुछ ध्यान आया हो या उन्होंने अपने अन्दर कुछ विचित्र होता हुआ अनुभव किया हो। इसके स्थान पर हम पाते हैं कि वे बहुत साधारण और सामान्य लोग थे जो अपनी दिनचर्या का निर्वाह कर रहे थे और उनके ऐसा करते हुए ही पवित्र आत्मा ने शमौन का मार्गदर्शन किया, ज़कर्याह और इलीशिबा पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हुए और पवित्र आत्मा की सामर्थ से मरियम की कोख में प्रभु यीशु का आगमन हुआ। इन सब ने पवित्र आत्मा के कार्य को अपने अन्दर अनुभव किया, उसकी सामर्थ को पहचाना।

   क्या आज हमारे अन्दर यह अनुभूति है कि उपरोक्त लोगों के समान ही हम भी अपने जीवन में पवित्र आत्मा के कार्य को पहचानें और संसार की अन्य सब आवाज़ों से अलग उसकी आवाज़ पर ध्यान लगाएं? क्या हम पवित्र आत्मा द्वारा उकसाए और प्रोत्साहित किए जाने के प्रति सचेत और उसकी आज्ञा मानने को तत्पर तथा तैयार रहते हैं? क्या हमने पवित्र आत्मा को यह आदर दिया है कि वह अपनी गर्माहट से हमारे हृदय भर दे और फिर उसे हमारे हाथों से दूसरों के जीवनों में प्रवाहित हो लेने दे?

   आज हम मसीही विश्वासियों के साथ पवित्र आत्मा की उपस्थिति और उसके द्वारा प्रभु यीशु की सामर्थ हमारे जीवनों में बनी रहती है, जिसे वह हमारे अन्दर से साल-ब-साल बहते रहने वाले तृप्ति के सोते के रूप में संसार में प्रवाहित करना चाहता है, किसी दिन अथवा त्यौहार विशेष पर ही नहीं, कुछ खास लोगों ही के लिए नहीं, वरन सदा-सर्वदा संसार के प्रत्येक जन के लिए, "क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए" (यूहन्ना 3:16)। - डेविड मैक्कैसलैण्ड


प्रभु यीशु में विश्वास हमारी आत्मा को पाप के दाग़ से शुद्ध और हमारी देह को पवित्र आत्मा का मन्दिर बना देता है।

...यीशु खड़ा हुआ और पुकार कर कहा, यदि कोई प्यासा हो तो मेरे पास आकर पीए। जो मुझ पर विश्वास करेगा, जैसा पवित्र शास्त्र में आया है उसके हृदय में से जीवन के जल की नदियां बह निकलेंगी। उसने यह वचन उस आत्मा के विषय में कहा, जिसे उस पर विश्वास करने वाले पाने पर थे...। - यूहन्ना 7:37-39 

बाइबल पाठ: लूका 1:31-41
Luke 1:31 और देख, तू गर्भवती होगी, और तेरे एक पुत्र उत्पन्न होगा; तू उसका नाम यीशु रखना। 
Luke 1:32 वह महान होगा; और परमप्रधान का पुत्र कहलाएगा; और प्रभु परमेश्वर उसके पिता दाऊद का सिंहासन उसको देगा। 
Luke 1:33 और वह याकूब के घराने पर सदा राज्य करेगा; और उसके राज्य का अन्‍त न होगा। 
Luke 1:34 मरियम ने स्वर्गदूत से कहा, यह क्योंकर होगा? मैं तो पुरूष को जानती ही नहीं। 
Luke 1:35 स्वर्गदूत ने उसको उत्तर दिया; कि पवित्र आत्मा तुझ पर उतरेगा, और परमप्रधान की सामर्थ तुझ पर छाया करेगी इसलिये वह पवित्र जो उत्पन्न होने वाला है, परमेश्वर का पुत्र कहलाएगा। 
Luke 1:36 और देख, और तेरी कुटुम्बिनी इलीशिबा के भी बुढ़ापे में पुत्र होने वाला है, यह उसका, जो बांझ कहलाती थी छठवां महीना है। 
Luke 1:37 क्योंकि जो वचन परमेश्वर की ओर से होता है वह प्रभावरिहत नहीं होता। 
Luke 1:38 मरियम ने कहा, देख, मैं प्रभु की दासी हूं, मुझे तेरे वचन के अनुसार हो: तब स्वर्गदूत उसके पास से चला गया। 
Luke 1:39 उन दिनों में मरियम उठ कर शीघ्र ही पहाड़ी देश में यहूदा के एक नगर को गई। 
Luke 1:40 और जकरयाह के घर में जा कर इलीशिबा को नमस्‍कार किया। 
Luke 1:41 ज्योंही इलीशिबा ने मरियम का नमस्‍कार सुना, त्योंही बच्‍चा उसके पेट में उछला, और इलीशिबा पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हो गई।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 14-16


सोमवार, 29 अगस्त 2011

जीवन का जल

एक स्वस्थ वृक्ष की संरचना का लगभग ८०% भाग नमी होती है। पानी की यह बड़ी मात्रा, वृक्ष भूमि में फैली अपनी जड़ों द्वारा, ओस और वर्षा से एकत्रित करता है। अपनी पुस्तक As a Tree Grows में लेखक फिलिप केलर कहते हैं,"वृक्ष यह सारा जल अपने लिए एकत्रित नहीं करते। धरती कि सतह के नीचे फैली उनकी जड़ों का विशाल जाल, जो शायद धरती के ऊपर उनके तने, शाखाओं और पत्तियों से भी अधिक व्यापक होता है, यह सारा जल एकत्रित करके ऊपर पत्तों तक भेज देता है, जहाँ से वह ऑक्सिजन के साथ वायुमण्डल में विसर्जित होता रहता है। जल और ऑकसिजन का यह उत्सर्जन ही जंगल में मिलनी वाली हवा को ठण्डक और ताज़गी देने वाली बनाता है।"

मसीही विश्वासी भी जीवन के जल का उपयोग कुछ ऐसे ही करते हैं। प्रभु यीशु ने युहन्ना ७:३८ में कहा कि जो कोई उसपर विश्वास लाएगा, उसके हृदय से जीवन के जल की नदियाँ बह निकलेंगी। इससे प्रभु का तातपर्य पवित्र आत्मा की उस सेवकाई से था जो वह हम में रह कर करता है। जब हम अपने पापों का अंगीकार करके, प्रभु यीशु से उनकी क्षमा माँग कर, अपना जीवन प्रभु को समर्पित कर देते हैं, उसी समय से परमेश्वर का पवित्र आत्मा हमारे अन्दर बस जाता है; वह हमें सामर्थ और स्फूर्ति देता है और इस योग्य करता है कि हम दूसरों की सहायता कर सकें और प्रभु यीशु की ओर लोगों का ध्यान खींच सकें। हमारी ज़िम्मेदारी रहती है कि हम परमेश्वर के वचन का अध्ययन करें, जहाँ जहाँ पवित्र आत्मा हमें कायल करे उन बातों को परमेश्वर के सन्मुख अपने जीवन में ठीक करें, उससे अपनी कमियों-कमज़ोरियों और पापों के लिए क्षमा मांग कर परमेश्वर की आज्ञाकारिता में आगे बढ़ें।

जैसे जैसे हम परमेश्वर द्वारा दिये गए हमारे सहायक - पवित्र आत्मा पर निर्भर रहना सीखेंगे, उसकी अगुवाई में आगे बढ़ेंगे, हमारे जीवनों से भी, हमारे संपर्क में आने वाले लोगों के लाभ के लिए, ठण्डक और ताज़गी देने वाले जीवन जल की नदियाँ प्रवाहित होने लगेंगी। - डेव एग्नर


आत्मा की प्यास केवल जीवन का जल ही बुझा सकता है।

जो मुझ पर विश्वास करेगा, जैसा पवित्र शास्‍त्र में आया है उसके हृदय में से जीवन के जल की नदियां बह निकलेंगी। - यूहन्ना ७:३८


बाइबल पाठ: यूहन्ना ७:३७-४०

Joh 7:37 फिर पर्ब्‍ब के अंतिम दिन, जो मुख्य दिन है, यीशु खड़ा हुआ और पुकार कर कहा, यदि कोई प्यासा हो तो मेरे पास आकर पीए।
Joh 7:38 जो मुझ पर विश्वास करेगा, जैसा पवित्र शास्‍त्र में आया है उसके हृदय में से जीवन के जल की नदियां बह निकलेंगी।
Joh 7:39 उस ने यह वचन उस आत्मा के विषय में कहा, जिसे उस पर विश्वास करने वाले पाने पर थे; क्‍योंकि आत्मा अब तक न उतरा था; क्‍योंकि यीशु अब तक अपनी महिमा को न पहुंचा था।
Joh 7:40 तब भीड़ में से किसी किसी ने ये बातें सुन कर कहा, सचमुच यही वह भविष्यद्वक्ता है।

एक साल में बाइबल:
  • भजन १२६-१२८
  • १ कुरिन्थियों १०:१९-३३

शनिवार, 26 मार्च 2011

जीवन जल

एक छोटे शहर में हो रही सुसमाचार सभा में एक व्यक्ति को अपनी पापमय दशा और प्रभु यीशु को ग्रहण करने की आवश्यक्ता बड़े सशक्त रूप से महसूस हुई, लेकिन उसने अपनी भावनाएं छुपा लीं और अपनी पत्नि तक को नहीं बताया, यद्यपि वह मसीही विश्वासी थी। एक शाम को जब उसकी पत्नि कहीं बाहर गई हुई थी वह अपने पाप बोध को लेकर बहुत बेचैन हुआ और घर के अन्दर इधर से उधर चक्कर काटने लगा। उसकी बेटी ने अपने पिता की बेचैनी देखी तो पूछा कि "क्या हुआ?" पिता ने बात टालने के लिए कहा "कुछ नहीं" और पाप बोध की अपनी बेचैनी छिपाने की कोशिश करने लगा। उस बच्ची ने बड़े सहज भाव से पूछा, "पिताजी, यदि आप प्यासे हैं तो जाकर पानी क्यों नहीं पी लेते?" उसके इन शब्दों ने पिता को चौंका दिया, उसे उस सुसमाचार सभा में कही गई बात याद आ गई कि उद्धार का सुसमाचार मुक्त बहते हुए जल के सोते की तरह है जिससे प्रत्येक प्यासा अपनी प्यास बिना किसी रोक टोक के बुझा सकता है। उसने और संघर्ष नहीं किया, उसी रात उसने अपने पापों की क्षमा माँगकर प्रभु यीशु को अपना उद्धारकर्ता करके ग्रहण कर लिया।

इस संसार के सोते तो केवल प्यास बढ़ाते ही हैं, मनुष्य की आत्मिक प्यास केवल प्रभु यीशु ही बुझा सकता है। प्रभु यीशु ने बड़े सीधे और स्पष्ट शब्दों में सुसमाचार प्रस्तुत किया; उन्होंने हमारे प्रतिदिन के जीवन से जुड़ी बातों, जैसे भोजन, जल, स्वीकृति आदि द्वारा उद्धार के सुसमाचार को समझाया। यीशु ने कहा "परन्‍तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर अनन्‍तकाल तक प्यासा न होगा: वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उस में एक सोता बन जाएगा जो अनन्‍त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा।" (यूहन्ना ४:१४) - पौल वैन गोर्डर


सांसारिक उपलब्धियों के कुओं से जितना चाहे पी लो, प्यास बढ़ती ही है, कभी तृप्ति नहीं मिलती।

...यीशु खड़ा हुआ और पुकार कर कहा, यदि कोई प्यासा हो तो मेरे पास आकर पीए। - यूहन्ना ७:३७

बाइबल पाठ: यूहन्ना ४:५-१५

Joh 4:5 सो वह सूखार नाम सामरिया के एक नगर तक आया, जो उस भूमि के पास है, जिस याकूब ने अपने पुत्र यूसुफ को दिया था।
Joh 4:6 और याकूब का कूआं भी वहीं था; सो यीशु मार्ग का थका हुआ उस कूएं पर यों ही बैठ गया, और यह बात छठे घण्‍टे के लगभग हुई।
Joh 4:7 इतने में एक सामरी स्त्री जल भरने को आई: यीशु ने उस से कहा, मुझे पानी पिला।
Joh 4:8 क्‍योंकि उसके चेले तो नगर में भोजन मोल लेने को गए थे।
Joh 4:9 उस सामरी स्त्री ने उस से कहा, तू यहूदी होकर मुझ सामरी स्त्री से पानी क्‍यों मांगता है? (क्‍योंकि यहूदी सामरियों के साथ किसी प्रकार का व्यवहार नहीं रखते)।
Joh 4:10 यीशु ने उत्तर दिया, यदि तू परमेश्वर के वरदान को जानती, और यह भी जानती कि वह कौन है जो तुझ से कहता है मुझे पानी पिला तो तू उस से मांगती, और वह तुझे जीवन का जल देता।
Joh 4:11 स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, तेरे पास जल भरने को तो कुछ है भी नहीं, और कूआं गहिरा है: तो फिर वह जीवन का जल तेरे पास कहां से आया?
Joh 4:12 क्‍या तू हमारे पिता याकूब से बड़ा है, जिस ने हमें यह कूआं दिया, और आप ही अपने सन्‍तान, और अपने ढारों समेत उस में से पीया?
Joh 4:13 यीशु ने उस को उत्तर दिया, कि जो कोई यह जल पीएगा वह फिर पियासा होगा।
Joh 4:14 परन्‍तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर अनन्‍त काल तक पियासा न होगा: वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उस में एक सोता बन जाएगा जो अनन्‍त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा।
Joh 4:15 स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, वह जल मुझे दे ताकि मैं प्यासी न होऊं और न जल भरने को इतनी दूर आऊं।

एक साल में बाइबल:
  • यहोशू २२-२४
  • लूका ३