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गुरुवार, 18 अक्टूबर 2012

सतत सेवार्थ


   इस श्रंखला के मूल कार्यस्थल RBC Ministries में, जो Our Daily Bread के मूल संचालक तथा प्रकाशक हैं, एक स्वयं-सेवी कार्यक्रम भी है जिस के द्वारा लोगों को अपने समय और कौशल को परमेश्वर की सेवकाई के लिए दान करने का अवसर मिलता है, और हम जो इस कार्यक्रम के संचालक हैं उन्हें अपने उद्देश्य "बाइबल के जीवन बदलने वाले ज्ञान को सभी के लिए उपलब्ध और सहज बनाना" पूरा करने में सहायता मिलती है।

   हमारे कुछ स्वयं-सेवी तो कार्य से अवकाश प्राप्त लोग हैं जो अपने बुढ़ापे की तकलीफों और मजबूरियों के बावजूद प्रतिदिन नियमित रूप से आते हैं, प्रसन्नता पूर्वक कार्य में भाग लेते हैं, ज़िम्मेदारियां पूरी करते हैं और विविध कार्यों में हाथ बंटाते हैं। इस कार्यक्रम के आरंभ होने से लेकर सन २००९ तक, ऐसे स्वयं-सेवियों ने, कुल मिलाकर १००,००० घंटों का कार्य पूरा कर लिया था। ये स्वयं-सेवी बस कार्य में लगे ही रहते हैं, उन्हें रुक जाने की इच्छा नहीं होती।

   उनका उदाहरण इस बात को स्मरण कराता है कि हमारे पार्थिव जीवन में परमेश्वर की सेवकाई कर पाने के लिए उम्र का कोई बन्धन नहीं है। परमेश्वर का वचन परमेश्वर के विश्वासियों के लिए कोई अवकाश लेने की उम्र निर्धारित नहीं करता है। पौलुस प्रेरित ने लिखा कि परमेश्वर ने अपनी मण्डली में "...कितनों को भविष्यद्वकता नियुक्त करके, और कितनों को सुसमाचार सुनाने वाले नियुक्त करके, और कितनों को रखवाले और उपदेशक नियुक्त करके दे दिया। जिस से पवित्र लोग सिद्ध जो जाएं, और सेवा का काम किया जाए, और मसीह की देह उन्नति पाए" (इफिसीयों ४:११-१२)। यही हम विश्वासियों का उद्देश्य है कि मसीह की देह अर्थात उसकी मण्डली उन्नति पाए; और इस कार्य की लगन हमें सतत सेवा के लिए प्रेरित करती रहती है। - डेव ब्रैनन


जवान हों या बुज़ुर्ग, यदि आप तैयार हैं तो परमेश्वर अपनी सेवकाई में आपको उपयोगी बना सकता है।

और जो कुछ तुम करते हो, तन मन से करो, यह समझकर कि मनुष्यों के लिये नहीं परन्‍तु प्रभु के लिये करते हो। - कुलुस्सियों ३:२३

बाइबल पाठ:
Eph 4:7  पर हम में से हर एक को मसीह के दान के परिमाण से अनुग्रह मिला है। 
Eph 4:8  इसलिये वह कहता है, कि वह ऊंचे पर चढ़ा, और बन्‍धुवाई को बान्‍ध ले गया, और मनुष्यों को दान दिए। 
Eph 4:9  (उसके चढ़ने से, और क्‍या पाया जाता है केवल यह, कि वह पृथ्वी की निचली जगहों में उतरा भी था। 
Eph 4:10  और जो उतर गया यह वही है जो सारे आकाश के ऊपर चढ़ भी गया, कि सब कुछ परिपूर्ण करे)। 
Eph 4:11  और उस ने कितनों को भविष्यद्वकता नियुक्त करके, और कितनों को सुसमाचार सुनाने वाले नियुक्त करके, और कितनों को रखवाले और उपदेशक नियुक्त करके दे दिया। 
Eph 4:12  जिस से पवित्र लोग सिद्ध जो जाएं, और सेवा का काम किया जाए, और मसीह की देह उन्नति पाए। 
Eph 4:13  जब तक कि हम सब के सब विश्वास, और परमेश्वर के पुत्र की पहिचान में एक न हो जाएं, और एक सिद्ध मनुष्य न बन जाएं और मसीह के पूरे डील डौल तक न बढ़ जाएं।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह ५३-५५ 
  • २ थिस्सलुनीकियों १

बुधवार, 17 अक्टूबर 2012

सदा सुरक्षित

   दुकान से सामान लेकर निकलते हुए मैंने बस यूँ ही गैस से भरा एक बड़ा सा लाल गुब्बारा खरीद लिया जिस पर लिखा था "मैं तुमसे प्रेम करता हूँ।" मैं अपनी खरीददारी का सामान अपनी कार में रख रही थी कि गुब्बारे के धागे पर मेरी पकड़ ढीली हो गई और वह मेरे हाथों से फिसल गया। मैं वहां खड़ी उसे ऊपर की ओर उड़ते हुए देखती रह गई; थोड़ी सी देर ही में वह एक छोटा सा बिंदु मात्र बनकर रह गया और फिर अन्ततः केवल एक याद।

   उस गुब्बारे को खो देने से मुझे याद आय कि कैसे हमारे जीवनों से प्रेम कभी कभी अनायास ही जाता रहता है। हमारे बच्चे विद्रोह करके अलग हो जाते हैं; कभी जीवन-साथी अलग हो कर अपनी अलग राह चल निकलते हैं; संबंधी और प्रीय जन दूर हो जाते हैं, अकेला छोड़ देते हैं; घनिष्ठ मित्र संपर्क में रहना छोड़ देते हैं।

   ऐसे में मैं बहुत धन्यवादी हूँ कि परमेश्वर का प्रेम सदा स्थिर बना रहता है और जब संसार के लोगों का प्रेम हमें अकेला छोड़ देता है, तो उसका प्रेम फिर भी हमारे साथ रहता है, हमें थामे रहता है। इसीलिए प्रभु यीशु ने संसार के सभी लोगों को निमंत्रण दिया है कि उसके प्रेम में बने रहें: "जैसा पिता ने मुझ से प्रेम रखा, मेरे प्रेम में बने रहो। यदि तुम मेरी आज्ञाओं को मानोगे, तो मेरे प्रेम में बने रहोगे: जैसा कि मैं ने अपने पिता की आज्ञाओं को माना है, और उसके प्रेम में बना रहता हूं। मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि मेरा आनन्‍द तुम में बना रहे, और तुम्हारा आनन्‍द पूरा हो जाए" (युहन्ना १५:९-११)। वह चाहता है कि उसके प्रेम के आनन्द में सब आनन्दित रहें।

   हम सब परमेश्वर के प्रेम आलिंगन में स्थिर बने रह सकते हैं, क्योंकि जैसे पौलुस प्रेरित ने लिखा: "क्‍योंकि मैं निश्‍चय जानता हूं, कि न मृत्यु, न जीवन, न स्‍वर्गदूत, न प्रधानताएं, न वर्तमान, न भविष्य, न सामर्थ, न ऊंचाई, न गहिराई और न कोई और सृष्‍टि, हमें परमेश्वर के प्रेम से, जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी" (रोमियों ८:३८-३९)। एक बार जब हम प्रभु यीशु को अपने उद्धारकर्ता के रूप में स्वीकार कर लेते हैं, तो उसमें होकर मिलने वाला परमेश्वर का प्रेम हमारे लिए एक अटल, स्थाई, अनन्तकाल की निश्चितता हो जाता है।

   क्या आपने अपने जीवन से संसार के किसी प्रेम को जाते हुए अनुभव किया है? परमेश्वर के प्रेम में शरण तथा विश्राम लें, क्योंकि अपने बच्चों के प्रति उसकी सदा बनी रहने वाली देख-भाल आपके मन को उसके प्रेम, शांति और सुरक्षा में बनाए रखेगी। - जैनिफर बेन्सन शुल्ट


क्योंकि परमेश्वर का वचन अटल और सदा के लिए है इसीलिए हमारा उद्धार भी अटल और सदा के लिए है।

जैसा पिता ने मुझ से प्रेम रखा, मेरे प्रेम में बने रहो। - युहन्ना १५:९

बाइबल पाठ: रोमियों ८:३५-३९
Rom 8:35  कौन हम को मसीह के प्रेम से अलग करेगा? क्‍या क्‍लेश, या संकट, या उपद्रव, या अकाल, या नंगाई, या जोखिम, या तलवार? 
Rom 8:36   जैसा लिखा है, कि तेरे लिये हम दिन भर घात किए जाते हैं; हम वध होने वाली भेंडों की नाई गिने गए हैं। 
Rom 8:37  परन्‍तु इन सब बातों में हम उसके द्वारा जिस ने हम से प्रेम किया है, जयवन्‍त से भी बढ़कर हैं। 
Rom 8:38  क्‍योंकि मैं निश्‍चय जानता हूं, कि न मृत्यु, न जीवन, न स्‍वर्गदूत, न प्रधानताएं, न वर्तमान, न भविष्य, न सामर्थ, न ऊंचाई, 
Rom 8:39  न गहिराई और न कोई और सृष्‍टि, हमें परमेश्वर के प्रेम से, जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह ५०-५२ 
  • १ थिस्सलुनीकियों ५

मंगलवार, 16 अक्टूबर 2012

"परमेश्वर ने कहा है!"


   स्पष्ट लिखने के मेरे भरसक प्रयास के बावजूद भी कभी कभी मेरे लिखे हुए का गलत अर्थ निकाला जाता है। मुझे इस बात से दुख होता है और मैं एक लेखक के रूप में अपने आप को असफल अनुभव करती हूँ और प्रयास करती हूँ कि अपनी गलतियां सुधार कर और स्पष्ट लिख सकूँ। लेकिन पाठक कभी मेरे शब्दों को संदर्भ से बाहर निकाल कर प्रयोग करते हैं तो कभी उन शब्दों में वह पढ़ते हैं जो मैंने वहां ना लिखा और जो ना मेरा तात्पर्य था। यह बहुत कुण्ठित करता है क्योंकि एक बार लेख के छपने के बाद लोग उसको किस रीति से प्रयोग करेंगे यह निरधारित या नियंत्रित नहीं किया जा सकता।

   यह बात एक अन्य किंतु और भी गंभीर बात को स्मरण दिलाती है - परमेश्वर के वचन का दुरुपयोग। यर्मियाह भविष्यद्वक्ता के दिनों में भी लोगों ने यह किया। उन्होंने परमेश्वर के नाम से अपने मन की बातें लोगों से कहीं; ऐसी बातें जिन्हें वे लोग स्वयं तो चाहते थे किंतु परमेश्वर की ओर से उन्हें उनके बारे में कोई निर्देश नहीं थे। इसलिए परमेश्वर ने यर्मियाह के द्वारा लोगों को सन्देश दिया: "सेनाओं के यहोवा ने तुम से यों कहा है, इन भविष्यद्वक्ताओं की बातों की ओर जो तुम से भविष्सद्वाणी करते हैं कान मत लगाओ, क्योंकि ये तुम को व्यर्थ बातें सिखाते हैं; ये दर्शन का दावा करके यहोवा के मुख की नहीं, अपने ही मन की बातें कहते हैं" (यर्मियाह २३:१६)। साथ ही परमेश्वर ने उन्हें चेतावनी भी दी और कहा कि जो उसके नाम से अपने मन की बात कहते हैं या फिर उसके वचनों को बिगाड़ कर बताते हैं वह उन्हें त्याग देगा और अपने सामने से निकाल देगा (पद ३६, ३९)।

   उन भविष्यद्वक्ताओं की तुलना पौलुस प्रेरित की जीवन-शैली से कीजिए: "परन्‍तु हम ने लज्ज़ा के गुप्‍त कामों को त्याग दिया, और न चतुराई से चलते, और न परमेश्वर के वचन में मिलावट करते हैं, परन्‍तु सत्य को प्रगट करके, परमेश्वर के साम्हने हर एक मनुष्य के विवेक में अपनी भलाई बैठाते हैं" (२ कुरिन्थियों ४:२)। उसे परमेश्वर के नाम से अपने मन की बात कहने के दुष्परिणाम भली भांति पता थे। यही मनसा हम सभी की भी होनी चाहिए कि परमेश्वर के नाम का दुरुपयोग स्वार्थ सिद्धि के लिए ना होने पाए। परमेश्वर ने अपना वचन बाइबल हमें हमारी शिक्षा के लिए दिया है ना कि उसमें जोड़-तोड़ करके उसका अपनी इच्छानुसार दुरुपयोग करने के लिए। जो ऐसा करते हैं वे सचेत हों क्योंकि ऐसा करने के परिणाम गंभीर हैं: "मैं हर एक को जो इस पुस्‍तक की भविष्यद्वाणी की बातें सुनता है, गवाही देता हूं, कि यदि कोई मनुष्य इन बातों में कुछ बढ़ाए, तो परमेश्वर उन विपत्तियों को जो इस पुस्‍तक में लिखी हैं, उस पर बढ़ाएगा। और यदि कोई इस भविष्यद्वाणी की पुस्‍तक की बातों में से कुछ निकाल डाले, तो परमेश्वर उस जीवन के पेड़ और पवित्र नगर में से जिस की चर्चा इस पुस्‍तक में है, उसका भाग निकाल देगा" (प्रकाशितवाक्य २२:१८-१९)। - जूली ऐकैरमैन लिंक


हमें अपने आप को बाइबल के अनुसार करने का प्रयास करते रहना है, ना कि बाइबल को अपने अनुसार।

क्‍योंकि हम उन बहुतों के समान नहीं, जो परमेश्वर के वचन में मिलावट करते हैं; परन्‍तु मन की सच्‍चाई से, और परमेश्वर की ओर से परमेश्वर को उपस्थित जानकर मसीह में बोलते हैं। - २ कुरिन्थियों २:१७

बाइबल पाठ: यर्मियाह २३:१६; ३०-४०
Jer 23:16  सेनाओं के यहोवा ने तुम से यों कहा है, इन भविष्यद्वक्ताओं की बातों की ओर जो तुम से भविष्यद्वाणी करते हैं कान मत लगाओ, क्योंकि ये तुम को व्यर्थ बातें सिखाते हैं; ये दर्शन का दावा करके यहोवा के मुख की नहीं, अपने ही मन की बातें कहते हैं। 
Jer 23:30  यहोवा की यह वाणी है, देखो, जो भविष्यद्वक्ता मेरे वचन औरों से चुरा चुराकर बोलते हैं, मैं उनके विरुद्ध हूँ। 
Jer 23:31  फिर यहोवा की यह भी वाणी है कि जो भविष्यद्वक्ता “उसकी यह वाणी है”, ऐसी झूठी वाणी कहकर अपनी अपनी जीभ डुलाते हैं, मैं उनके भी विरुद्ध हूँ। 
Jer 23:32  यहावा की यह भी वाणी है कि जो बिना मेरे भेजे वा बिना मेरी आज्ञा पाए स्वप्न देखने का झूठा दावा करके भविष्यद्वाणी करते हैं, और उसका वर्णन करके मेरी प्रजा को झूठे घमण्ड में आकर भरमाते हैं, उनके भी मैं विरुद्ध हूँ; और उन से मेरी प्रजा के लोगों का कुछ लाभ न हेगा। 
Jer 23:33  यदि साधारण लोगों में से कोई जन वा कोई भविष्यद्वक्ता वा याजक तुम से पूछे कि यहोवा ने क्या प्रभावशाली वचन कहा है, तो उस से कहना, क्या प्रभावशाली वचन? यहोवा की यह वाणी है, मैं तुम को त्याग दूंगा। 
Jer 23:34  और जो भविष्यद्वक्ता वा याजक वा साधारण मनुष्य “यहोवा का कहा हुआ भारी वचन” ऐसा कहता रहे, उसको घराने समेत मैं दण्ड दूंगा। 
Jer 23:35  तुम लोग एक दूसरे से और अपने अपने भाई से यों पूछना, यहोवा ने क्या उत्तर दिया? 
Jer 23:36  वा, यहोवा ने क्या कहा है? “यहोवा का कहा हुआ भारी वचन”, इस प्रकार तुम भविष्य में न कहना नहीं तो तुम्हारा ऐसा कहना ही दण्ड का कारण हो जाएगा; क्योंकि हमारा परमेश्वर सेनाओं का यहोवा जो जीवित परमेश्वर है, तुम लोगों ने उसके वचन बिगाड़ दिए हैं। 
Jer 23:37  तू भविष्यद्वक्ता से यों पूछ कि यहोवा ने तुझे क्या उत्तर दिया? 
Jer 23:38  वा, यहोवा ने क्या कहा है? यदि तुम “यहोवा का कहा हुआ प्रभावशाली वचन”: इसी प्रकार कहोगे, तो यहोवा का यह वचन सुनो, मैं ने तो तुम्हारे पास कहला भेजा है, भविष्य में ऐसा न कहना कि “यहोवा का कहा हुआ प्रभावशाली वचन।” परन्तु तुम यह कहते ही रहते हो, कि “यहोवा का कहा हुआ प्रभावशाली वचन।” 
Jer 23:39  इस कारण देखो, मैं तुम को बिलकुल भूल जाऊंगा और तुम को और इस नगर को जिसे मैं ने तुम्हारे पुरखाओं को, और तुम को भी दिया है, 
Jer 23:40  त्यागकर अपने साम्हने से दूर कर दूंगा। और मैं ऐसा करूंगा कि तुम्हारी नामधराई और अनादर सदा बना रहेगा; और कभी भूला न जाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह ४७-४९ 
  • १ थिस्सलुनीकियों ४

सोमवार, 15 अक्टूबर 2012

बताएं


   मैं अपने उपचार के लिए अपने चिकित्सक के पास था और वह मुझे एक सुई लगाने की तैयारी में था। मैं जानता था कि वह चिकित्सिक परमेश्वर को नहीं मानता; उसके हाथ में तैयार सुई को देखकर मेरे मन में विचार आया कि यह समय बात करने के लिए उचित नहीं है। परन्तु फिर भी मैंने हिम्मत बांधकर उससे कहा कि अपनी सृष्टि के लिए उसे परमेश्वर का धन्यवादी होना चाहिए। उसने मुझ से पूछा कि क्या मैं वाकई में परमेश्वर पर विश्वास करता हूँ? मैंने उत्तर दिया, "अवश्य; यदि हम परमेश्वर की सृष्टि होने की बजाए अभी भी क्रमिक विकास के सिद्धांत के अनुसार विकास क्रम में ही होते तो आप कैसे निर्धारित करते कि किस व्यक्ति के लिए सुई लगाने की कौन सी जगह सही है, क्योंकि सभी अलग अलग गति और रीति से विकास के कारण एक दुसरे से बहुत भिन्न होते?" बाद में अपनी अस्वस्थता के द्वारा उस चिकित्सक से परमेश्वर के बारे में बातचीत कर पाने के इस अवसर के लिए मैंने परमेश्वर का धन्यवाद किया।

   आज के बाइबल पाठ में पौलुस प्रेरित ने तिमुथियुस को यह ज़िम्मेदारी सौंपी है कि वह लोगों को उद्धारकर्ता की ओर लेकर जाए। पौलुस का कथन "...तू वचन को प्रचार कर..." (२ तिमुथियुस ४:२) केवल प्रचारकों के लिए दिया गया निर्देश नहीं है। मूल भाषा में प्रयुक्त जिस शब्द का अनुवाद प्रचार किया गया है उसका अर्थ है बताएं या सुनाएं। परमेश्वर के विश्वासी जन यह सुसमाचार बताने या सुनाने का कार्य मित्रों के साथ बैठकर कुछ खाते-पीते हुए कर सकते हैं, स्कूल या कॉलेज में अपने संगी विद्यार्थियों के साथ वार्तालाप में कर सकते हैं।

   जो परमेश्वर ने हमारे साथ किया है, या हमारे लिए किया है और कैसे वह हमारे प्रति विश्वासयोग्य रहा है, समस्याओं से हमें निकाला है इत्यादि बातें हम कभी भी, कहीं भी और सुनने के लिए तैयार किसी भी जन के साथ कर सकते हैं। हम उन्हें बता सकते हैं कि हमने परमेश्वर के प्रेम को अनुभव किया है, हमने व्यक्तिगत रीति से जाना है कि परमेश्वर हमारे दुखों, कमज़ोरियों और असफलताओं को जानता है और उसने इन बातों से उभरने में हमारी सहायता करी, हमें इन से निकाला है। हम उन के समक्ष अपने जीवन कि गवाही रख सकते हैं कि कैसे प्रभु यीशु के क्रूस पर दिए गए बलिदान, मारे जाने, गाड़े जाने और तीसरे दिन जी उठने के द्वारा हमने पापों से क्षमा और पापों के बन्धनों से छुटकारा पाया है; और यही क्षमा तथा छुटकारा उन सभों के लिए भी उपलब्ध है जो विश्वास के साथ उसे ग्रहण करते हैं और उसके पीछे चलने का निर्णय लेते। आवश्यकता किसी धर्म परिवर्तन की नहीं वरन पापी मन के परिवर्तन की है।

   जो परमेश्वर ने हमारे लिए किया है उसे लोगों को बताएं, घबराएं नहीं। - एलबर्ट ली


सुसमाचार बांटना अर्थात एक व्यक्ति द्वारा दूसरे को परमेश्वर के प्रेम की अच्छी खबर देना।

परन्‍तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा। - रोमियों ५:८

बाइबल पाठ: २ तिमुथियुस ४:१-५
2Ti 4:1  परमेश्वर और मसीह यीशु को गवाह करके, जो जीवतों और मरे हुओं का न्याय करेगा, उसे और उसके प्रगट होने, और राज्य को सुधि दिलाकर मैं तुझे चिताता हूं। 
2Ti 4:2  कि तू वचन को प्रचार कर; समय और असमय तैयार रह, सब प्रकार की सहनशीलता, और शिक्षा के साथ उलाहना दे, और डांट, और समझा। 
2Ti 4:3 क्‍योंकि ऐसा समय आएगा, कि लोग खरा उपदेश न सह सकेंगे पर कानों की खुजली के कारण अपनी अभिलाषाओं के अनुसार अपने लिये बहुतेरे उपदेशक बटोर लेंगे। 
2Ti 4:4  और अपने कान सत्य से फेरकर कथा-कहानियों पर लगाएंगे। 
2Ti 4:5  पर तू सब बातों में सावधान रह, दुख उठा, सुसमाचार प्रचार का काम कर और अपनी सेवा को पूरा कर।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह ४५-४६ 
  • १ थिस्सलुनीकियों ३

रविवार, 14 अक्टूबर 2012

सहायता का हाथ


   सन १९३० की बात है, घुड़दौड़ प्रतिस्पर्धा में घोड़ा दौड़ाते हुए, एक घुड़सवार जौनी लौंगडेन को धक्का लगा और वह अपने घोड़े पर एक तरफ को झुक गया। उसके पीछे अन्य घोड़े तेज़ दौड़ते हुए आ रहे थे जिनसे टकराकर उसकी जान तक जा सकती थी। उसकी गंभीर हालत को देखकर साथ दौड़ रहे एक और घुड़सवार ने उसका हाथ पकड़कर उसे सीधा करने का प्रयास किया, किंतु दुर्भाग्यवश उसके प्रयास में इतना ज़ोर था कि जौनी अब दूसरी तरफ को लटक गया। यह देखकर दूसरी ओर घोड़ा दौड़ा रहे एक और घुड़सवार ने उसे पकड़ा और सीधा होने में सहायता करी। सबसे अधिक आश्चर्य की बात यह रही कि जौनी लौंगडेन वह दौड़ जीत गया! एक समाचार पत्र ने यह समाचार प्रकाशित करते हुए इसे "अविश्वसनीय रीति से असंभव" कहा। उन सहायता के हाथों के कारण ना केवल जौनी की जान बची वरन वह दौड़ भी जीत सका।

   हम मसीही विश्वासियों का भी यह कर्तव्य है कि हम दूसरों की सहायता के लिए अपने हाथ बढ़ाएं। परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन ३१ अध्याय में हम एक सदगुणी स्त्री के चरित्र के बारे में पढ़ते हैं। इस स्त्री का एक गुण है कि "वह दीन के लिये मुट्ठी खोलती है, और दरिद्र के संभालने को हाथ बढ़ाती है" (नीतिवचन ३१:२०)। सदियों से इस स्त्री का चरित्र के अनेकों स्त्री-पुरुषों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत रहा है। यह स्त्री हमें स्मरण दिलाती है कि अपने आप को दुसरों की सहायता के लिए देना बाइबल के अनुसार सभी मसीही विश्वासियों के लिए दिया गया सदगुण है।

   आज इस संसार में ऐसे बहुत से लोग हैं जो जीवन यापन के लिए संघर्ष कर रहे हैं, या कठिन समयों का सामना कर रहे हैं, और उन्हें किसी की सहायता की आवश्यकता है। क्या आप अपने जीवन में किसी ऐसे को जानते हैं जिसे आपकी सहायता के हाथ की आवश्यक्ता है? जीवन की इस दौड़ में किसी को संभालने के लिए अपनी सहायता का हाथ बढ़ायें - यह उसके लिए सफलता-असफलता या जीवन-मरण का अन्तर ला सकता है। - डेनिस फिशर


परमेश्वर अकसर अपनी सहायता मनुष्यों के हाथों भेजता है।

वह दीन के लिये मुट्ठी खोलती है, और दरिद्र के संभालने को हाथ बढ़ाती है। - नीतिवचन ३१:२०

बाइबल पाठ: नीतिवचन ३१:१०-३१
Pro 31:10  भली पत्नी कौन पा सकता है? क्योंकि उसका मूल्य मूंगों से भी बहुत अधिक है। उसके पति के मन में उसके प्रति विश्वास है। 
Pro 31:11  और उसे लाभ की घटी नहीं होती। 
Pro 31:12  वह अपने जीवन के सारे दिनों में उस से बुरा नहीं, वरन भला ही व्यवहार करती है। 
Pro 31:13  वह ऊन और सन ढूंढ़ ढूंढ़कर, अपने हाथों से प्रसन्नता के साथ काम करती है। 
Pro 31:14  वह व्योपार के जहाजों की नाईं अपनी भोजनवस्तुएं दूर से मंगवाती हैं। 
Pro 31:15  वह रात ही को उठ बैठती है, और अपने घराने को भोजन खिलाती है और अपनी लौण्डियों को अलग अलग काम देती है। 
Pro 31:16  वह किसी खेत के विषय में सोच विचार करती है और उसे मोल ले लेती है; और अपने परिश्रम के फल से दाख की बारी लगाती है। 
Pro 31:17  वह अपनी कटि को बल के फेंटे से कसती है, और अपनी बाहों को दृढ़ बनाती है। 
Pro 31:18  वह परख लेती है कि मेरा व्योपार लाभदायक है। रात को उसका दिया नहीं बुझता। 
Pro 31:19  वह अटेरन में हाथ लगाती है, और चरखा पकड़ती है। 
Pro 31:20  वह दीन के लिये मुट्ठी खोलती है, और दरिद्र के संभालने को हाथ बढ़ाती है। 
Pro 31:21  वह अपने घराने के लिये हिम से नहीं डरती, क्योंकि उसके घर के सब लोग लाल कपड़े पहिनते हैं। 
Pro 31:22  वह तकिये बना लेती है; उसके वस्त्र सूक्षम सन और बैंजनी रंग के होते हैं। 
Pro 31:23  जब उसका पति सभा में देश के पुरनियों के संग बैठता है, तब उसका सम्मान होता है। 
Pro 31:24  वह सन के वस्त्र बनाकर बेचती है, और व्योपारी को कमरबन्द देती है। 
Pro 31:25  वह बल और प्रताप का पहिरावा पहिने रहती है, और आने वाले काल के विषय पर हंसती है। 
Pro 31:26  वह बुद्धि की बात बोलती है, और उसके वचन कृपा की शिक्षा के अनुसार होते हैं। 
Pro 31:27  वह अपने घराने के चालचलन को ध्यान से देखती है, और अपनी रोटी बिना परिश्रम नहीं खाती। 
Pro 31:28  उसके पुत्र उठ उठकर उसको धन्य कहते हैं, उनका पति भी उठकर उसकी ऐसी प्रशंसा करता है: 
Pro 31:29  बहुत सी स्त्रियों ने अच्छे अच्छे काम तो किए हैं परन्तु तू उन सभों में श्रेष्ट है। 
Pro 31:30  शोभा तो झूठी और सुन्दरता व्यर्थ है, परन्तु जो स्त्री यहोवा का भय मानती है, उसकी प्रशंसा की जाएगी। 
Pro 31:31  उसके हाथों के परिश्रम का फल उसे दो, और उसके कार्यों से सभा में उसकी प्रशंसा होगी।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह ४३-४४ 
  • १ थिस्सलुनीकियों २

शनिवार, 13 अक्टूबर 2012

पोशाक


   एक मसीही मठ के निवासी माइकल सेंट जैक्स ने Hemispheres पत्रिका को दिए गए साक्षात्कार में बताया कि उनकी विशिष्ट पोशाक देखकर लोग उनकी ओर आकर्षित होते हैं। मठ की ओर से यह बाध्य नहीं है कि वे इस पोशाक को पहनें; पहनना या ना पहनना उनका अपना निर्णय है, किंतु वे और मठ के अनेक अनुयायी इसे पहनते हैं क्योंकि इससे लोग उनके साथ बातें करने के लिए आते हैं, मन खोलकर अपने अन्दर की बातें बताते हैं, ऐसी बातें जो वे किसी अन्य के साथ कभी नहीं बांटते। बिलकुल अनजान लोग अपने बीते जीवन की गलतियां स्वीकार कर के पूछते हैं कि क्या परमेश्वर उन्हें क्षमा करेगा? माइकल और उसके साथ के अन्य मठ अनुयायियों की पोशाक ने उन्हें लोगों के लिए सुगम्य बना दिया है। आज के समय में जब किसी जानकार या संबंधी के पास जाकर मन की बात करना भी लोगों को कठिन लगता है, और हम संसार में एक दूसरे से अपने आप को अलग रखने का एक ’कवच’ सा पहने चलते रहते हैं, एक पोशाक से मिली यह सुगमता एक अद्भुत बात है।

   प्रभु यीशु के विषय में हम परमेश्वर के वचन बाइबल में पाते हैं कि वह जहां कहीं भी जाते थे, हर तरह के लोग उनके पास बड़ी सहजता से आते थे। लोग प्रभु के पास आते थे कि उनसे सीखें, सहायता प्राप्त करें, बीमारियों से चंगाई पाएं, आत्मियता पाएं और क्षमा प्राप्त करें। जब समाज के कुछ अगुवों ने प्रभु यीशु की इस बात के लिए आलोचना करी कि वे महसूल लेने वालों और पापियों के साथ संगति रखता है तो "यीशु ने यह सुनकर, उन से कहा, भले चंगों को वैद्य की आवश्यकता नहीं, परन्‍तु बीमारों को है: मैं धमिर्यों को नहीं, परन्‍तु पापियों को बुलाने आया हूं" (मरकुस २:१७)।

   हम जो प्रभु यीशु के अनुयायी हैं, हमसे परमेश्वर का वचन कहता है कि "प्रभु यीशु मसीह को पहिन लो, और शरीर की अभिलाषाओं को पूरा करने का उपाय ना करो" (रोमियों १३:१४)। आज हमारे आस-पास के लोग हमें किस रूप में जानते हैं - अलग रहने वाले या मिलनसार और सुगम्य? यदि आज हमारे कार्यों और व्यवहार ने हमें ऐसा व्यस्त कर दिया है कि हमारे पास लोगों के लिए समय नहीं है, हम उनके साथ बैठकर बात नहीं कर सकते, उन्हें शांति और सांत्वना नहीं दे सकते तो हमें अपने बारे में गंभीरता से सोचने और जांचने की आवश्यक्ता कि क्या वास्तव में हमने मसीह यीशु को पहन लिया है? क्या वह वाकई हमारी पोशाक है?

   यदि जगत का उद्धारकर्ता प्रभु यीशु वास्तव में हमारी पोशाक होगा तो लोग हमारी ओर आकर्षित होंगे, सहजता के साथ हमसे बातें करने पाएंगे, अपने मन के बोझ हमारे साथ बांट कर हलके करने पाएंगे और अपने प्रभु के समान हम भी उन्हें वह शांति देने पाएंगे जिसकी उन्हें आवश्यक्ता है। - डेविड माइक्कैसलैंड


दूसरों की सहायता के लिए उपलब्ध रहना मसीह यीशु को आदर देता है।

यीशु ने यह सुनकर, उन से कहा, भले चंगों को वैद्य की आवश्यकता नहीं, परन्‍तु बीमारों को है: मैं धमिर्यों को नहीं, परन्‍तु पापियों को बुलाने आया हूं। - मरकुस २:१७

बाइबल पाठ: मरकुस २:१३-१७
Mar 2:13  वह फिर निकल कर झील के किनारे गया, और सारी भीड़ उसके पास आई, और वह उन्‍हें उपदेश देने लगा। 
Mar 2:14   जाते हुए उस ने हलफई के पुत्र लेवी को चुंगी की चौकी पर बैठे देखा, और उस से कहा, मेरे पीछे हो ले। 
Mar 2:15  और वह उठकर, उसके पीछे हो लिया: और वह उसके घर में भोजन करने बैठे; क्‍योंकि वे बहुत से थे, और उसके पीछे हो लिये थे। 
Mar 2:16  और शास्‍त्रियों और फरीसियों ने यह देखकर, कि वह तो पापियों और चुंगी लेने वालों के साथ भोजन कर रहा है, उसक चेलों से कहा; वह तो चुंगी लेने वालों और पापियों के साथ खाता-पीता है! 
Mar 2:17  यीशु ने यह सुनकर, उन से कहा, भले चंगों को वैद्य की आवश्यकता नहीं, परन्‍तु बीमारों को है: मैं धमिर्यों को नहीं, परन्‍तु पापियों को बुलाने आया हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह ४१-४२ 
  • १ थिस्सलुनीकियों १

शुक्रवार, 12 अक्टूबर 2012

रंग


   पेड़ जो बसन्त और गर्मियों में हरे होते हैं वे शरतकाल में पीले, नारंगी या भूरे क्यों हो जाते हैं? पेड़ों की पत्तियों का हरा रंग उनमें पाए जाने वाले क्लोरोफिल नामक पदर्थ के कारण होता है जो सूर्य की रौशनी से लाल और नीले रंग की किरणें सोख कर उनकी ऊर्जा से हवा की कार्बन-डाई-ऑक्साईड को अपने भोजन के लिए प्रयुक्त करता है और हवा में ऑक्सीजन वापस दे देता है। लाल और नीले रंग की किरणें सोख लेने से बची हुई प्रतिबिंबित हरी किरणें हमें दिखाई देती हैं और इसीलिए हमें पत्ते और पेड़ हरे दिखाई देते हैं। शरत ऋतु में जब दिन छोटे होते हैं तो कम रौशनी के कारण पत्तों में क्लोरोफिल के बनने और कार्य करने में फर्क आता है और उसकी मात्रा भी पत्तों में बदलती जाती है जिससे अलग अलग रंग दिखने लगते हैं।

   हम रंगों को जीवन की बातों से जोड़ कर देखते हैं, जैसे हरे रंग को नवजीवन और सही का सूचक होने, लाल रंग को खतरे का सूचक, सफेद को सादगी, ईमानदारी और पवित्रता का सूचक इत्यादि। हमारे द्वारा पहने हुए वस्त्रों का रंग भी हमारे मन की स्थिति को दर्शाता है और देखने वालों को हमारे बारे में एक मूक सन्देश देता है। यदि कोई किसी बात में लिप्त हो जाता है, तो उसके लिए हम कहते हैं कि यह तो उस रंग में रंग गया है। जैसे रंग बिना शब्दों के बहुत कुछ कह जाते हैं और उन्हें देखकर समझने वाले बहुत कुछ समझ सकते हैं, वैसे ही प्रकृति की अन्य वस्तुएं भी परमेश्वर के अस्तित्व, उसकी सामर्थ और उसकी महिमा के बारे में बहुत कुछ कहती रहती हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में पौलुस प्रेरित ने रोमियों के विश्वासियों को इस संदर्भ में लिखा: "...उसके अनदेखे गुण, अर्थात उस की सनातन सामर्थ, और परमेश्वरत्‍व जगत की सृष्‍टि के समय से उसके कामों के द्वारा देखने में आते हैं..." (रोमियों १:२०)।

   परमेश्वर ने अपने आप को हम पर अनेक रीति से प्रकट किया है। वह हमारे मनों में भी अपनी बातों को डालता है: "इसलिये कि परमेश्वर के विषय में ज्ञान उन के मनों में प्रगट है, क्‍योंकि परमेश्वर ने उन पर प्रगट किया है" (रोमियों १:१९); वह अपनी सृष्टि में होकर भी हमसे बातें करता है; उसने अपना जीवित वचन भी हमारे हाथों में रखा है; और "इन दिनों के अन्‍त में हम से पुत्र के द्वारा बातें की, जिसे उस ने सारी वस्‍तुओं का वारिस ठहराया और उसी के द्वारा उस ने सारी सृष्‍टि रची है" (इब्रानियों १:२)।

   अपने चारों ओर शांत मन से देखिए और विचार कीजिए। परमेश्वर अपने आप को प्रकट कर रहा है और आप से बातें करना चाहता है। जैसे हम सामन्य रीति से अपने जीवन और कार्यों से संबंधित बातों का विशलेषण करते हैं और उन्हें जांचने तथा परखने के बाद उन्हें स्वीकार या अस्वीकार करते हैं, वैसे ही परमेश्वर की सृष्टि की बातों का विशलेषण करके देखिए। सृष्टि का ताना-बाना और उसका अविराल सुचारू रूप से कार्य करते रहना उसके सृष्टिकर्ता की ओर इशारा कर रहा है। अविश्वास के रंग में ना रंगें, परमेश्वर पर विश्वास करें क्योंकि उसके रंग हर ओर विद्यमान हैं।


परमेश्वर की महिमा उसकी सृष्टि से विदित है।

आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है; और आकशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है। - भजन १९:१

बाइबल पाठ: भजन १९:१-१४
Psa 19:1  आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है; और आकशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है। 
Psa 19:2  दिन से दिन बातें करता है, और रात को रात ज्ञान सिखाती है। 
Psa 19:3  न तो कोई बोली है और न कोई भाषा जहां उनका शब्द सुनाई नहीं देता है। 
Psa 19:4  उनका स्वर सारी पृथ्वी पर गूंज गया है, और उनके वचन जगत की छोर तक पहुंच गए हैं। उन में उस ने सूर्य के लिये एक मण्डप खड़ा किया है, 
Psa 19:5  जो दुल्हे के समान अपने महल से निकलता है। वह शूरवीर की नाईं अपनी दौड़ दौड़ने को हर्षित होता है। 
Psa 19:6  वह आकाश की एक छोर से निकलता है, और वह उसकी दूसरी छोर तक चक्कर मारता है; और उसकी गर्मी सबको पहुंचती है।
Psa 19:7  यहोवा की व्यवस्था खरी है, वह प्राण को बहाल कर देती है; यहोवा के नियम विश्वासयोग्य हैं, साधारण लोगों को बुद्धिमान बना देते हैं; 
Psa 19:8  यहोवा के उपदेश सिद्ध हैं, हृदय को आनन्दित कर देते हैं; यहोवा की आज्ञा निर्मल है, वह आंखों में ज्योति ले आती है; 
Psa 19:9  यहोवा का भय पवित्र है, वह अनन्तकाल तक स्थिर रहता है; यहोवा के नियम सत्य और पूरी रीति से धर्ममय हैं। 
Psa 19:10  वे तो सोने से और बहुत कुन्दन से भी बढ़कर मनोहर हैं; वे मधु से और टपकने वाले छत्ते से भी बढ़कर मधुर हैं। 
Psa 19:11  और उन्हीं से तेरा दास चिताया जाता है; उनके पालन करने से बड़ा ही प्रतिफल मिलता है। 
Psa 19:12  अपनी भूलचूक को कौन समझ सकता है? मेरे गुप्त पापों से तू मुझे पवित्र कर। 
Psa 19:13  तू अपने दास को ढिठाई के पापों से भी बचाए रख; वह मुझ पर प्रभुता करने न पाएं! तब मैं सिद्ध हो जाऊंगा, और बड़े अपराधों से बचा रहूंगा।
Psa 19:14  मेरे मुंह के वचन और मेरे हृदय का ध्यान तेरे सम्मुख ग्रहण योग्य हों, हे यहोवा परमेश्वर, मेरी चट्टान और मेरे उद्धार करनेवाले!

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह ३९-४० 
  • कुलुस्सियों ४