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शनिवार, 18 मई 2013

परिवर्तित


   थॉमस डिबैजियो नामक एक व्यक्ति को जब ज्ञात हुआ कि वह एलज़ाईमर्स रोग से संक्रमित हो चुका है, और यह रोग अभी अपने शुरुआती दौर में ही है तो उसने अपने स्मरण शक्ति के धीरे-धीरे खोते जाने को पुस्तकबद्ध करना आरंभ किया; उसका यह विवरण "Loosing My Mind" (अपना दिमाग खोते जाना) नामक पुस्तक के रूप में प्रकाशित हुआ। यह पुस्तक थॉमस की उस कष्टपूर्ण यात्रा का अभिलेख है जिसमें वह धीरे धीरे अपने भलि-भांति जाने-पहनचाने कार्यों, स्थानों, लोगों आदि सबको भूलता चला गया। एलज़ाईमर्स रोग एक लाइलाज रोग है जिसका रोगी धीरे धीरे अपनी स्मरण शक्ति खोता चला जाता है। इस रोग से ग्रसित व्यक्ति के मस्तिष्क में स्नायु कोषिकाएं धीरे धीरे क्षतिग्रस्त होती चली जाती हैं जिससे रोगी की स्मरण शक्ति क्षीण होती जाती है, वह उलझा या चक्राया हुआ रहने लगता है और उसके लिए समय-स्थान-व्यक्ति का बोध रखना असंभव हो जाता है। एक समय में पूर्ण रूप से चैतन्य और कार्यकारी व्यक्ति को धीरे धीरे अपने मित्रों और प्रीय जनों को भूलते हुए देखना, जाने-पहचाने स्थानों पर भी अनजान होकर घूमते हुए देखना, उसका कपड़े तक ठीक से ना पहन पाने से भी अनजान होते जाना आदि देखना बहुत कष्टदायक होता है; इस पीड़ा को और भी अधिक बढ़ा देती है यह मजबूरी कि अपने प्रीय जन की इस बद से बदतर होती स्थिति को हम बेबस होकर बस उसे देखते ही रह सकते हैं किंतु उसके लिए कुछ कर नहीं सकते। यह मृत्यु से पूर्व ही प्रीय जन को खो देने के समान है।

   स्मरण शक्ति की हानि अन्य कारणों से भी हो सकती है, जैसे किसी चोट अथवा गहरे सदमे के द्वारा। और हम में से जो वृद्धावस्था में जाते हैं उनके शरीरों और शरीर की क्षमताओं का क्षीण होना अवश्यंभावी है। लेकिन चाहे स्मरण शक्ति की हानि हो या शरीर के अन्य किसी अंग या क्षमता की, प्रत्येक मसीही विश्वासी के पास यह आशा है कि एक दिन वे बिलकुल सिद्ध, स्वस्थ और निरोग अवस्था में होंगे - जब पुनरुत्थान के समय वे अपनी महिमाय देह को पाएंगे (1 कुरिन्थियों 5:1-5)। इसके साथ ही स्वर्ग में वे अपने उद्धारकर्ता प्रभु यीशु को भी देखेंगे जिसने उन्हें उद्धार देने के लिए अपने शरीर को यातना सहने के लिए दे दिया, उनके सन्ति अपमानजनक मृत्यु की पीड़ा सह ली और अनन्त काल के लिए अपने महिमाय शरीर में भी क्रूस की उस यातना के चिन्ह लिए हुए है (यूहन्ना 20:25; 1 कुरिन्थियों 13:12)।

   इस पृथ्वी पर हम शरीर और मन के रोगों से त्रस्त हो सकते हैं, हमारी देह क्षीण और अयोग्य हो सकती है; लेकिन उस स्वर्गीय देह में हम अपने प्रभु के समान ही होंगे, यह प्रभु यीशु का अपने प्रत्येक विश्वासी से वायदा है: "हे प्रियों, अभी हम परमेश्वर की सन्तान हैं, और अब तक यह प्रगट नहीं हुआ, कि हम क्या कुछ होंगे! इतना जानते हैं, कि जब वह प्रगट होगा तो हम भी उसके समान होंगे, क्योंकि उसको वैसा ही देखेंगे जैसा वह है" (1 यूहन्ना 3:2)।


पलक झपकते ही ... हम बदल जाएंगे! - प्रेरित पौलुस

क्योंकि अवश्य है, कि यह नाशमान देह अविनाश को पहिन ले, और यह मरनहार देह अमरता को पहिन ले। और जब यह नाशमान अविनाश को पहिन लेगा, और यह मरनहार अमरता को पहिन लेगा, तब वह वचन जो लिखा है, पूरा हो जाएगा, कि जय ने मृत्यु को निगल लिया। - 1 कुरिन्थियों 15:53-54 

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 4:16 - 5:8
2 Corinthians 4:16 इसलिये हम हियाव नहीं छोड़ते; यद्यपि हमारा बाहरी मनुष्यत्‍व नाश भी होता जाता है, तौभी हमारा भीतरी मनुष्यत्‍व दिन प्रतिदिन नया होता जाता है।
2 Corinthians 4:17 क्योंकि हमारा पल भर का हल्का सा क्‍लेश हमारे लिये बहुत ही महत्‍वपूर्ण और अनन्त महिमा उत्पन्न करता जाता है।
2 Corinthians 4:18 और हम तो देखी हुई वस्‍तुओं को नहीं परन्तु अनदेखी वस्‍तुओं को देखते रहते हैं, क्योंकि देखी हुई वस्तुएं थोड़े ही दिन की हैं, परन्तु अनदेखी वस्तुएं सदा बनी रहती हैं।
2 Corinthians 5:1 क्योंकि हम जानते हैं, कि जब हमारा पृथ्वी पर का डेरा सरीखा घर गिराया जाएगा तो हमें परमेश्वर की ओर से स्वर्ग पर एक ऐसा भवन मिलेगा, जो हाथों से बना हुआ घर नहीं परन्तु चिरस्थाई है।
2 Corinthians 5:2 इस में तो हम कराहते, और बड़ी लालसा रखते हैं; कि अपने स्‍वर्गीय घर को पहिन लें।
2 Corinthians 5:3 कि इस के पहिनने से हम नंगे न पाए जाएं।
2 Corinthians 5:4 और हम इस डेरे में रहते हुए बोझ से दबे कराहते रहते हैं; क्योंकि हम उतारना नहीं, वरन और पहिनना चाहते हैं, ताकि वह जो मरनहार है जीवन में डूब जाए।
2 Corinthians 5:5 और जिसने हमें इसी बात के लिये तैयार किया है वह परमेश्वर है, जिसने हमें बयाने में आत्मा भी दिया है।
2 Corinthians 5:6 सो हम सदा ढाढ़स बान्‍धे रहते हैं और यह जानते हैं; कि जब तक हम देह में रहते हैं, तब तक प्रभु से अलग हैं।
2 Corinthians 5:7 क्योंकि हम रूप को देखकर नहीं, पर विश्वास से चलते हैं।
2 Corinthians 5:8 इसलिये हम ढाढ़स बान्‍धे रहते हैं, और देह से अलग हो कर प्रभु के साथ रहना और भी उत्तम समझते हैं।

एक साल में बाइबल: 

  • 1 इतिहास 4-6 
  • यूहन्ना 6:1-21




शुक्रवार, 17 मई 2013

प्रतिशोध का विकल्प


   एक इतवार को चर्च में सन्देश देते समय, एक पास्टर पर हमला हुआ और उसे मारा-पीटा गया। पास्टर ने प्रत्युत्तर में उस व्यक्ति को कुछ नहीं कहा, बस अपना सन्देश पूरा किया और फिर उस व्यक्ति के लिए प्रार्थना भी करी। बाद में वह हमलावर पकड़ा गया और उसे हिरासत में रखा गया। जब पास्टर को मालूम पड़ा तो वह पुलिस थाने में उससे मिलने भी गया और उसके लिए प्रार्थना कर के भी आया। संसार में दिखने वाले सामान्य व्यवहार की तुलना में, अपने प्रति अनादार तथा अत्याचार का अनूठा प्रत्युत्तर देने का यह एक अनुपम और आदर्श उदाहरण था।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में परमेश्वर के लोगों को अपना बदला आप ना लेने की शिक्षा दी गई है। आत्म-रक्षा वर्जित नहीं है, किन्तु प्रतिशोध वर्जित है; पुराने नियम में भी और नए नियम में भी। बाइबल में लैव्यवस्था की पुस्तक इस्त्राएल, अर्थात परमेश्वर के लोगों को, परमेश्वर द्वारा दिए गए नियमों की पुस्तक है। इस पुस्तक में एक स्थान पर लिखा है: "अपने मन में एक दूसरे के प्रति बैर न रखना; अपने पड़ोसी को अवश्य डांटना; नहीं तो उसके पाप का भार तुझ को उठाना पड़ेगा। पलटा न लेना, और न अपने जाति भाइयों से बैर रखना, परन्तु एक दूसरे से अपने समान प्रेम रखना; मैं यहोवा हूं" (लैव्यवस्था 19:17-18)। एक अन्य स्थान पर परमेश्वर ने इस्त्राएल को निर्देश दिया कि "पलटा लेना और बदला देना मेरा ही काम है..." (व्यवस्थाविवरण 32:35)। नए नियम में भी प्रभु यीशु मसीह और उनके अनुयायियों की शिक्षाएं पलटा ना लेने और अपना न्याय परमेश्वर के हाथ में छोड़ देने के लिए ही थीं (मत्ती 5:38-45; रोमियों 12:17; 1 पतरस 3:9)।

   यद्यपि पुराने नियम में हम "जैसे को तैसा" के सिद्धांत के नियम भी पाते हैं (निर्गमन 21:23-25; व्यवस्थाविवरण 19:21), लेकिन ये नियम केवल इसलिए थे जिससे प्रत्येक आताताई उचित दण्ड का भागी हो और सब को सही न्याय मिले। ये नियम व्यक्तिगत रीति से बदला लेने के लिए नहीं थे; इन नियमों का उपयोग समाज के निर्धारित न्याय अधिकारीयों को ही करना था। उचित न्याय मिलना सब का अधिकार था, लेकिन न्याय करना या तो परमेश्वर या फिर परमेश्वर के निर्देषों के अनुसार नियुक्त किए गए न्यायियों का ही कार्य था। व्यक्तिगत प्रतिशोध की कोई अनुमति नहीं थी।

   आज हम मसीही विश्वासियों को भी अपने परमेश्वर पिता द्वारा दिए गए प्रेमपूर्ण व्यवहार के निर्देषों को अपने जीवन से जी कर दिखाना है। बजाए अत्याचार या अपमान के बदले में वही कड़ुवाहट वापस लौटाने के, अपने अन्दर बसने वाले परमेश्वर के पवित्र आत्मा की सामर्थ से तथा मसीह यीशु के नाम को आदर देने वाले भले विकलपों को अपने प्रत्युत्तर और व्यवहार में प्रदर्शित करना है। जहाँ तक बन पड़े, सब के साथ शान्ति से रहें (रोमियों 12:18) और आपसी विवादों को सुलझाने के लिए एक आत्मिक मध्यस्थ की सहायता लें तथा उसके आधीन रहें (1 कुरिन्थियों 6:1-6), और अपने न्याय को निर्धारित न्याय अधिकारीयों तथा सबसे बढ़कर उस सच्चे और निष्पक्ष न्यायी, अपने परमेश्वर पिता के हाथों में छोड़ दें। - मारविन विलियम्स


अन्तिम न्याय सच्चे और निष्पक्ष न्यायी परमेश्वर के हाथों में ही है।

हे प्रियो अपना पलटा न लेना; परन्तु क्रोध को अवसर दो, क्योंकि लिखा है, पलटा लेना मेरा काम है, प्रभु कहता है मैं ही बदला दूंगा। - रोमियों 12:19

बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण 19:16-21; मत्ती 5:38-45
Deuteronomy 19:16 यदि कोई झूठी साक्षी देने वाला किसी के विरुद्ध यहोवा से फिर जाने की साक्षी देने को खड़ा हो,
Deuteronomy 19:17 तो वे दोनों मनुष्य, जिनके बीच ऐसा मुकद्दमा उठा हो, यहोवा के सम्मुख, अर्थात उन दिनों के याजकों और न्यायियों के साम्हने खड़े किए जाएं;
Deuteronomy 19:18 तब न्यायी भली भांति पूछपाछ करें, और यदि यह निर्णय पाए कि वह झूठा साक्षी है, और अपने भाई के विरुद्ध झूठी साक्षी दी है
Deuteronomy 19:19 तो अपने भाई की जैसी भी हानि करवाने की युक्ति उसने की हो वैसी ही तुम भी उसकी करना; इसी रीति से अपने बीच में से ऐसी बुराई को दूर करना।
Deuteronomy 19:20 और दूसरे लोग सुनकर डरेंगे, और आगे को तेरे बीच फिर ऐसा बुरा काम नहीं करेंगे।
Deuteronomy 19:21 और तू बिलकुल तरस न खाना; प्राण की सन्ती प्राण का, आंख की सन्ती आंख का, दांत की सन्ती दांत का, हाथ की सन्ती हाथ का, पांव की सन्ती पांव का दण्ड देना।
Matthew 5:38 तुम सुन चुके हो, कि कहा गया था, कि आंख के बदले आंख, और दांत के बदले दांत।
Matthew 5:39 परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि बुरे का सामना न करना; परन्तु जो कोई तेरे दाहिने गाल पर थप्पड़ मारे, उस की ओर दूसरा भी फेर दे।
Matthew 5:40 और यदि कोई तुझ पर नालिश कर के तेरा कुरता लेना चाहे, तो उसे दोहर भी ले लेने दे।
Matthew 5:41 और जो कोई तुझे कोस भर बेगार में ले जाए तो उसके साथ दो कोस चला जा।
Matthew 5:42 जो कोई तुझ से मांगे, उसे दे; और जो तुझ से उधार लेना चाहे, उस से मुंह न मोड़।
Matthew 5:43 तुम सुन चुके हो, कि कहा गया था; कि अपने पड़ोसी से प्रेम रखना, और अपने बैरी से बैर।
Matthew 5:44 परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि अपने बैरियों से प्रेम रखो और अपने सताने वालों के लिये प्रार्थना करो।
Matthew 5:45 जिस से तुम अपने स्‍वर्गीय पिता की सन्तान ठहरोगे क्योंकि वह भलों और बुरों दोनों पर अपना सूर्य उदय करता है, और धर्मियों और अधर्मियों दोनों पर मेंह बरसाता है।

एक साल में बाइबल: 

  • 1 इतिहास 1-3 
  • यूहन्ना 5:25-47



गुरुवार, 16 मई 2013

सही दृष्टिकोण


   क्या आपको कभी लगा कि जीवन न्यायी नहीं है? जो संसार के स्वामी तथा उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह में विश्वास नहीं करते और उसकी कोई परवाह भी नहीं करते, उनकी समृद्धि और सामर्थ देख कर हम मसीही विश्वासियों को कई बार कुण्ठित एवं निराश होना बहुत स्वभाविक लगता है। एक अविश्वासी व्यवसायी बेईमानी करता है लेकिन फिर भी बड़े ठेके और दौलत उसे मिलते हैं; एक ऐसा जन जो भोग-विलास का जीवन बिताता है, स्वस्थ बना रहता है - जबकि हमें या हमारे रिश्तेदारों को आर्थिक तथा स्वास्थ्य संबंधित परेशानियों से जूझते रहना पड़ता है, मानो हम ही दोषी और अयोग्य रहे हों और वे सब भले!

   यदि आप ने ऐसा अनुभव किया है या फिर कर रहे हैं तो आप अच्छी संगति में हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 73 का लेखक भी ऐसी ही भावना से होकर निकल रहा था; उसने दुराचारियों को फलते-फूलते देखा, और सोचने लगा कि "निश्चय, मैं ने अपने हृदय को व्यर्थ शुद्ध किया और अपने हाथों को निर्दोषता में धोया है;" (भजन 73:13)। लेकिन यह तब तक ही रहा, "जब तक कि मैं ने ईश्वर के पवित्र स्थान में जा कर उन लोगों के परिणाम को न सोचा" (भजन 73:17); जब उसने परमेश्वर की उपस्थिति में और परमेश्वर के दृष्टिकोण से उन दुराचारियों को देखा तो उसके विचार एकदम बदल गए और शेष भजन में उन लोगों के अन्त और परमेश्वर के लोगों की उत्तम स्थिति को पहचान कर वह परमेश्वर का धन्यवादी हो गया।

   जब हम परमेश्वर के साथ समय बिताते हैं और उसके दृष्टिकोण से परिस्थितियों और बातों का आंकलन करते हैं, तब हमारा जीवन और जीवन की परिस्थितियों के प्रति रवैया बिलकुल बदल जाता है। हम आज मसीही अविश्वासियों की समृद्धि को देख कर उनसे ईर्ष्या कर सकते हैं लेकिन अन्तिम न्याय के समय ऐसा नहीं रहेगा। यदि एक छोटी लड़ाई जीत कर भी पूरा युद्ध हार जाएं, तो उस छोटी जीत का क्या लाभ? संसार में कुछ समय की सुख-समृद्धि पाकर अनन्त जीवन कष्ट में बिताने के लिए खाली हाथ प्रवेश करें तो फिर क्या पाया और क्या कमाया? और फिर हमारा यह दुख उठाना व्यर्थ तो नहीं, परमेश्वर हमारी हर एक बात का हिसाब रख रहा है और स्वर्ग में हमारे लिए एक बड़ा प्रतिफल तैयार हो रहा है जिसका आनन्द हम अनन्त काल तक लेते रहेंगे।

   भजन 73 के लेखक के समान ही हम भी अपने दृष्टिकोण को सही करें और परमेश्वर कि प्रशंसा और धन्यावाद करें कि वह ना केवल आते जीवन में हमारे साथ होगा, वरन इस जीवन में भी है और हर परिस्थिति, हर परेशानी में हमारे साथ बना रहता है। जीवन के अनुचित और अन्यायी प्रतीत होने वाले व्यवहार में भी यदि परमेश्वर हमारे साथ बना है और हमारा सहारा है तो फिर और किसी बात की आवश्यकता नहीं है। - जो स्टोवैल


परमेश्वर के साथ समय बिताने से सब बातों के प्रति दृष्टिकोण सही हो जाता है।

क्योंकि जब मैं दुष्टों का कुशल देखता था, तब उन घमण्डियों के विषय डाह करता था। - भजन 73:3 

बाइबल पाठ: भजन 73
Psalms 73:1 सचमुच इस्त्राएल के लिये अर्थात शुद्ध मन वालों के लिये परमेश्वर भला है।
Psalms 73:2 मेरे डग तो उखड़ना चाहते थे, मेरे डग फिसलने ही पर थे।
Psalms 73:3 क्योंकि जब मैं दुष्टों का कुशल देखता था, तब उन घमण्डियों के विषय डाह करता था।
Psalms 73:4 क्योंकि उनकी मृत्यु में वेदनाएं नहीं होतीं, परन्तु उनका बल अटूट रहता है।
Psalms 73:5 उन को दूसरे मनुष्यों की नाईं कष्ट नहीं होता; और और मनुष्यों के समान उन पर विपत्ति नहीं पड़ती।
Psalms 73:6 इस कारण अहंकार उनके गले का हार बना है; उनका ओढ़ना उपद्रव है।
Psalms 73:7 उनकी आंखें चर्बी से झलकती हैं, उनके मन की भवनाएं उमण्डती हैं।
Psalms 73:8 वे ठट्ठा मारते हैं, और दुष्टता से अन्धेर की बात बोलते हैं;
Psalms 73:9 वे डींग मारते हैं। वे मानों स्वर्ग में बैठे हुए बोलते हैं, और वे पृथ्वी में बोलते फिरते हैं।
Psalms 73:10 तौभी उसकी प्रजा इधर लौट आएगी, और उन को भरे हुए प्याले का जल मिलेगा।
Psalms 73:11 फिर वे कहते हैं, ईश्वर कैसे जानता है? क्या परमप्रधान को कुछ ज्ञान है?
Psalms 73:12 देखो, ये तो दुष्ट लोग हैं; तौभी सदा सुभागी रहकर, धन संपत्ति बटोरते रहते हैं।
Psalms 73:13 निश्चय, मैं ने अपने हृदय को व्यर्थ शुद्ध किया और अपने हाथों को निर्दोषता में धोया है;
Psalms 73:14 क्योंकि मैं दिन भर मार खाता आया हूं और प्रति भोर को मेरी ताड़ना होती आई है।
Psalms 73:15 यदि मैं ने कहा होता कि मैं ऐसा ही कहूंगा, तो देख मैं तेरे लड़कों की सन्तान के साथ क्रूरता का व्यवहार करता,
Psalms 73:16 जब मैं सोचने लगा कि इसे मैं कैसे समझूं, तो यह मेरी दृष्टि में अति कठिन समस्या थी,
Psalms 73:17 जब तक कि मैं ने ईश्वर के पवित्र स्थान में जा कर उन लोगों के परिणाम को न सोचा।
Psalms 73:18 निश्चय तू उन्हें फिसलने वाले स्थानों में रखता है; और गिराकर सत्यानाश कर देता है।
Psalms 73:19 अहा, वे क्षण भर में कैसे उजड़ गए हैं! वे मिट गए, वे घबराते घबराते नाश हो गए हैं।
Psalms 73:20 जैसे जागने हारा स्वप्न को तुच्छ जानता है, वैसे ही हे प्रभु जब तू उठेगा, तब उन को छाया सा समझ कर तुच्छ जानेगा।
Psalms 73:21 मेरा मन तो चिड़चिड़ा हो गया, मेरा अन्त:करण छिद गया था,
Psalms 73:22 मैं तो पशु सरीखा था, और समझता न था, मैं तेरे संग रह कर भी, पशु बन गया था।
Psalms 73:23 तौभी मैं निरन्तर तेरे संग ही था; तू ने मेरे दाहिने हाथ को पकड़ रखा।
Psalms 73:24 तू सम्मति देता हुआ, मेरी अगुवाई करेगा, और तब मेरी महिमा कर के मुझ को अपने पास रखेगा।
Psalms 73:25 स्वर्ग में मेरा और कौन है? तेरे संग रहते हुए मैं पृथ्वी पर और कुछ नहीं चाहता।
Psalms 73:26 मेरे हृदय और मन दोनों तो हार गए हैं, परन्तु परमेश्वर सर्वदा के लिये मेरा भाग और मेरे हृदय की चट्टान बना है।
Psalms 73:27 जो तुझ से दूर रहते हैं वे तो नाश होंगे; जो कोई तेरे विरुद्ध व्यभिचार करता है, उसको तू विनाश करता है।
Psalms 73:28 परन्तु परमेश्वर के समीप रहना, यही मेरे लिये भला है; मैं ने प्रभु यहोवा को अपना शरणस्थान माना है, जिस से मैं तेरे सब कामों का वर्णन करूं।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजा 24-25 
  • यूहन्ना 5:1-24


बुधवार, 15 मई 2013

सुनिश्चित कीजिए


एक पुस्तक जिसका शीर्षक है "UnChristian" (गैरमसीही) उन कारणों को बताती है जिनके कारण बहुत से ऐसे लोग जो प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास नहीं रखते, मसीह यीशु पर विश्वास रखने वालों से चिढ़ते हैं। दिए गए कारणों में प्रमुख है मसीही अविश्वासियों के प्रति मसीही विश्वासियों का व्यवहार। इस पुस्तक के लिए किए गए शोध में पाया गया कि मसीह यीशु पर विश्वास ना रखने वालों की दृष्टि में मसीही विश्वासी पाखण्डी, आलोचनात्मक एवं ऊँगुली उठाने वाले, कठोर, और अपने समान विश्वास ना रखने वालों के प्रति प्रेम या सहिषुण्ता ना दिखाने वाले होते हैं।

   मुझे पूरा विश्वास है कि मसीही विश्वासियों के प्रति यह दृष्टिकोण जैसे मुझे कतई पसन्द नहीं आया था, एक मसीही विश्वासी होने के नाते आपको भी यह पसन्द नहीं आएगा। लेकिन प्रश्न मेरी और आपकी पसन्द-नापसन्द का नहीं है; बहुत बार नापसन्द आने वाली बातें भी सत्य होती हैं, और हम मसीही विश्वासियों को सत्य का सच्चाई से सामना करना अवश्य है। प्रभु यीशु के शिष्य प्रेरित यूहन्ना ने अपनी लिखी पहली पत्री में कुछ सशक्त शब्दों का प्रयोग किया है। एक स्थान पर वह लिखता है: "देखो पिता ने हम से कैसा प्रेम किया है, कि हम परमेश्वर की सन्तान कहलाएं, और हम हैं भी: इस कारण संसार हमें नहीं जानता, क्योंकि उसने उसे भी नहीं जाना" (1 यूहन्ना 3:1)। परमेश्वर के साथ एक मसीही विश्वासी के संबंध के आधार को लिखने के बाद यूहन्ना आगे तीक्ष्ण तुलनात्मक अन्तर प्रस्तुत करता है: एक मसीही विश्वासी धार्मिकता से प्रेम करता है, पाप से बचकर रहता है, और अन्य लोगों के प्रति प्रेम में बने रहता है; इसकी तुलना में मसीह में अविश्वासी रहने वालों के जीवन में पाप करने और पाप में बने रहने की प्रवृति, एक दुसरे के प्रति भेद-भाव, तिरिस्कार और नफरत की भावनाएं रहती हैं, और वे अनन्त मृत्यु के भागी हैं।

   यूहन्ना ने बहुत चुभने वाले प्रबल शब्द प्रयोग करे हैं जिससे कि पढ़ने वाले पहचान सकें कि हम या तो प्रभु यीशु में होकर परमेश्वर की सन्तान हैं अन्यथा प्रभु यीशु से दूर रहकर, जानते बूझते हुए या अनजाने में, शैतान की आधीनता में रहने वाले लोग - बीच का या तीसरा कोई स्थान है ही नहीं। साथ ही यूहन्ना यह भी चिताता है कि केवल एक ही मानक है जो प्रमाणित करता है कि हम वास्तव में परमेश्वर की सन्तान हैं - प्रत्यक्ष व्यवहार और जीवन में सर्वविदित प्रेम (यूहन्ना 3:10, 18-19; 4:7-8)। यह नहीं हो सकता कि हम पाप का जीवन भी व्यतीत करें और परमेश्वर की सन्तान होने का दावा भी करें - हमारा प्रचार नहीं वरन हमारा चरित्र और व्यवहार, हमारा आचरण हमारी वास्तविकता को प्रगट करता है।

   आप यदि मसीही विश्वासी हैं तो यह सुनिश्चित करना भी आपका कर्तव्य है कि आपका जीवन और कार्य आपके शब्दों और आपके विश्वास का सजीव उदाहरण हों। अपने जीवन की गवाही से मसीह यीशु के लिए लोगों को ठोकर देने वाले नहीं वरन लोगों को आकर्षित करने वाले बनें। - डेव एग्नर



मसीह यीशु के अनुयायी होने की दो आवश्यकताएं हैं - पहला मसीह यीशु में विश्वास, दूसरा उस विश्वास के अनुरूप आचरण।

इसी से परमेश्वर की सन्तान, और शैतान की सन्तान जाने जाते हैं; जो कोई धर्म के काम नहीं करता, वह परमेश्वर से नहीं, और न वह, जो अपने भाई से प्रेम नहीं रखता। - 1 यूहन्ना 3:10 

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 3:1-10,14-18
1 John 3:1 देखो पिता ने हम से कैसा प्रेम किया है, कि हम परमेश्वर की सन्तान कहलाएं, और हम हैं भी: इस कारण संसार हमें नहीं जानता, क्योंकि उसने उसे भी नहीं जाना।
1 John 3:2 हे प्रियों, अभी हम परमेश्वर की सन्तान हैं, और अब तक यह प्रगट नहीं हुआ, कि हम क्या कुछ होंगे! इतना जानते हैं, कि जब वह प्रगट होगा तो हम भी उसके समान होंगे, क्योंकि उसको वैसा ही देखेंगे जैसा वह है।
1 John 3:3 और जो कोई उस पर यह आशा रखता है, वह अपने आप को वैसा ही पवित्र करता है, जैसा वह पवित्र है।
1 John 3:4 जो कोई पाप करता है, वह व्यवस्था का विरोध करता है; ओर पाप तो व्यवस्था का विरोध है।
1 John 3:5 और तुम जानते हो, कि वह इसलिये प्रगट हुआ, कि पापों को हर ले जाए; और उसके स्‍वभाव में पाप नहीं।
1 John 3:6 जो कोई उस में बना रहता है, वह पाप नहीं करता: जो कोई पाप करता है, उसने न तो उसे देखा है, और न उसको जाना है।
1 John 3:7 हे बालकों, किसी के भरमाने में न आना; जो धर्म के काम करता है, वही उस की नाईं धर्मी है।
1 John 3:8 जो कोई पाप करता है, वह शैतान की ओर से है, क्योंकि शैतान आरम्भ ही से पाप करता आया है: परमेश्वर का पुत्र इसलिये प्रगट हुआ, कि शैतान के कामों को नाश करे।
1 John 3:9 जो कोई परमेश्वर से जन्मा है वह पाप नहीं करता; क्योंकि उसका बीज उस में बना रहता है: और वह पाप कर ही नहीं सकता, क्योंकि परमेश्वर से जन्मा है।
1 John 3:10 इसी से परमेश्वर की सन्तान, और शैतान की सन्तान जाने जाते हैं; जो कोई धर्म के काम नहीं करता, वह परमेश्वर से नहीं, और न वह, जो अपने भाई से प्रेम नहीं रखता।
1 John 3:14 हम जानते हैं, कि हम मृत्यु से पार हो कर जीवन में पहुंचे हैं; क्योंकि हम भाइयों से प्रेम रखते हैं: जो प्रेम नहीं रखता, वह मृत्यु की दशा में रहता है।
1 John 3:15 जो कोई अपने भाई से बैर रखता है, वह हत्यारा है; और तुम जानते हो, कि किसी हत्यारे में अनन्त जीवन नहीं रहता।
1 John 3:16 हम ने प्रेम इसी से जाना, कि उसने हमारे लिये अपने प्राण दे दिए; और हमें भी भाइयों के लिये प्राण देना चाहिए।
1 John 3:17 पर जिस किसी के पास संसार की संपत्ति हो और वह अपने भाई को कंगाल देख कर उस पर तरस न खाना चाहे, तो उस में परमेश्वर का प्रेम क्योंकर बना रह सकता है?
1 John 3:18 हे बालकों, हम वचन और जीभ ही से नहीं, पर काम और सत्य के द्वारा भी प्रेम करें।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजा 22-23 
  • यूहन्ना 4:31-54


मंगलवार, 14 मई 2013

धैर्य


   बच्चे स्वभाव से ही अधीर होते हैं; उन्हें हर चीज़ हर उत्तर, हर इच्छा की पूर्ति तुरन्त चाहिए: "लेकिन मैंने तो मिठाई अभी ही खानी है!"; "क्या हम वहाँ पहुँचे कि नहीं? कब पहुँचेंगे?"; "मुझे तो अपने उपहार अभी खोलकर देखने हैं।" आदि कुछ वाक्य हैं जिन्हें बच्चों के मुख से हम आम सुनते हैं। इसकी तुलना में, जैसे जैसे हम बड़े और परिपक्व होते जाते हैं हम प्रतीक्षा करना भी सीखते जाते हैं। डॉक्टर बनने के लिए कई वर्षों के लंबे शिक्षा और प्रशिक्षण काल से होकर गुज़रना पड़ता है। माता-पिता धैर्य रखते हैं कि कभी तो उनका ग़ैरज़िम्मेदार पुत्र अपनी ज़िम्मेदारी को समझेगा और परिवार के प्रति अपने कर्तव्य का पालन करने लगेगा। प्रतीक्षा करना ही हमें धैर्य रखना सीखाता है।

   परमेश्वर समय से बन्धा नहीं है, वह हमसे एक परिपक्व विश्वास की आशा रखता है जिसके अन्तर्गत कार्य करते हुए हमारे दृष्टिकोण से ’विलंब’ आ सकते हैं, जिन्हें हम परीक्षाएं कहकर बुलाते हैं। इस परिपक्वता का एक चिन्ह है धैर्य - एक ऐसा गुण जो समय बीतने के साथ ही सीखा जा सकता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में इस धैर्य और परिपक्वता और इससे संबंधित प्रार्थनाओं के अनेक उदाहरण हैं। जैसे, याकूब ने 7 वर्ष अपनी पत्नि के लिए धैर्य रखकर परिश्रम किया, और फिर पाया कि उसके ससुर ने उसे धोखा देकर एक अन्य से उसकी शादी कर दी; उसने अपनी पसन्द कि पत्नि के लिए पुनः 7 वर्ष फिर से मेहनत करना स्वीकार किया और मेहनत करी। इस्त्राएलियों ने मिस्त्र की ग़ुलामी से छूटने के लिए 4 शताब्दी अपने छुड़ाने वाले की प्रतीक्षा करी। मूसा ने उन इस्त्राएलियों को छुड़ाने का नेतृत्व करने की ज़िम्मेदारी परमेश्वर से मिलने के लिए 4 दशक तक प्रतीक्षा करी; ज़िम्मेदारी मिलने के बाद फिर और 4 दशक तक वह उन्हें बियाबान में लेकर वाचा किए हुए उस देश की ओर लेकर चलता रहा जिसमें उसे प्रवेश नहीं करने की आज्ञा परमेश्वर ने दी थी।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार ने लिखा: "पहरूए जितना भोर को चाहते हैं, हां, पहरूए जितना भोर को चाहते हैं, उस से भी अधिक मैं यहोवा को अपने प्राणों से चाहता हूं" (भजन 130:6); तात्पर्य था कि जैसे पहरुए रात ढलने और अपनी बारी समाप्त होने और घर पहुँचने की प्रतीक्षा करते हैं उससे भी अधिक चाह से भजनकार भी परमेश्वर से मिलने की प्रतीक्षा करता है।

   मैं भी परमेश्वर के पास होने की प्रतीक्षा करता हूँ और प्रार्थना करता हूँ; प्रार्थना करता हूँ कि मैं धरती पर अपने प्रतीक्षा के समय को योग्य रीति से धैर्य के साथ बिता सकूँ, मेरी आशा बनी रहे, मेरा विश्वास कमज़ोर ना पड़े और मैं धैर्य तथा परिपक्वता के साथ अपने उद्धारकर्ता प्रभु यीशु के काम आता रहूँ। - फिलिप यैन्सी


परमेश्वर जल्दबाज़ी में कार्य नहीं करता।

मैं यहोवा की बाट जोहता हूं, मैं जी से उसकी बाट जोहता हूं, और मेरी आशा उसके वचन पर है; - भजन 130:5 

बाइबल पाठ: भजन 130
Psalms 130:1 हे यहोवा, मैं ने गहिरे स्थानों में से तुझ को पुकारा है!
Psalms 130:2 हे प्रभु, मेरी सुन! तेरे कान मेरे गिड़गिड़ाने की ओर ध्यान से लगे रहें!
Psalms 130:3 हे याह, यदि तू अधर्म के कामों का लेखा ले, तो हे प्रभु कौन खड़ा रह सकेगा?
Psalms 130:4 परन्तु तू क्षमा करने वाला है; जिस से तेरा भय माना जाए।
Psalms 130:5 मैं यहोवा की बाट जोहता हूं, मैं जी से उसकी बाट जोहता हूं, और मेरी आशा उसके वचन पर है;
Psalms 130:6 पहरूए जितना भोर को चाहते हैं, हां, पहरूए जितना भोर को चाहते हैं, उस से भी अधिक मैं यहोवा को अपने प्राणों से चाहता हूं।
Psalms 130:7 इस्राएल यहोवा पर आशा लगाए रहे! क्योंकि यहोवा करूणा करने वाला और पूरा छुटकारा देने वाला है।
Psalms 130:8 इस्राएल को उसके सारे अधर्म के कामों से वही छुटकारा देगा।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजा 19-21 
  • यूहन्ना 4:1-30


सोमवार, 13 मई 2013

महत्वपूर्ण अंग


   हाल ही में मैंने एक ऐसे खेल के बारे में सुना जिसकी कल्पना करना भी मेरी सोच के बाहर था - पैर के अँगूठों की कुश्ती! यह मेरी समझ के बाहर है कि कोई इसे खेलने में रुचि कैसे ले सकता है; लेकिन हर साल संसार भर से लोग इंगलैंड आकर इस खेल की अन्तर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेते हैं। प्रतियोगी भूमि पर आमने-सामने बैठते हैं, एक दूसरे के साथ पाँव के अँगूठे फंसाते हैं और फिर जैसे हाथ का पंजा लड़ाने में होता है, वे भी एक दूसरे के पैर को घुमा कर नीचे लगाने का प्रयास करते हैं।

   चलो, पैर के अँगूठों को भी कोई पहचान, कुछ मान-सम्मान तो मिला! अन्यथा पैर के अँगूठे की याद तो तभी आती है जब उस पर कुछ भारी चीज़ गिर जाए या फिर उसे ठेस लग जाए और पीड़ा की लहर शरीर में दौड़ जाए। हमारे पैर और पैर के अँगूठे-अँगुलियाँ हमारे शरीर के महत्वपूर्ण अंग तो हैं, लेकिन जब तक उनमें कोई दिक्कत या पीड़ा ना हो हम उनका ध्यान कम ही करते हैं। लेकिन परमेश्वर के वचन बाइबल में इनका उल्लेख भी उनके महत्व को समझाने के लिए हुआ है। प्रेरित पौलुस ने अपनी एक पत्री में मसीह यीशु की देह अर्थात उसके विश्वासीयों की मण्डली में एक दूसरे के परस्पर महत्व को समझाने के लिए एक मानव देह के अंगों तथा उनके परस्पर महत्व का उदाहरण दिया और लिखा: "यदि पांव कहे कि मैं हाथ नहीं, इसलिये देह का नहीं, तो क्या वह इस कारण देह का नहीं?" (1 कुरन्थियों 12:15)।

   परमेश्वर चाहता है कि हम यह एहसास रखें कि जैसे शरीर में हर एक अंग महत्वपूर्ण है और शरीर के सुचारू रीति से कार्य करने के लिए हर एक अंग के योगदान की आवश्यकता है, वैसे ही मसीह के देह अर्थात उसकी मण्डली में कोई छोटा या महत्वहीन नहीं है; सब महत्वपूर्ण हैं और सबके परस्पर मिल कर कार्य करने से ही मण्डली सुचारू रूप से चल सकती है। साथ ही जैसे शरीर के एक अंग के तकलीफ में होने से सारे शरीर पर प्रभाव आता है और शरीर के अन्य अंग मिल कर उस अंग की सहायता करते हैं, वैसे ही मसीही मण्डली में भी यह हमारा दायित्व है कि हम एक दूसरे की दिक्कतों और परेशानियों में सहायता करें।

   चाहे आप अपने आप को मसीही मण्डली में सबसे गौण और सबसे उपेक्षित सदस्य समझें, लेकिन परमेश्वर की दृष्टि में आप ना गौण हैं और ना ही महत्वहीन - उसने आप के लिए भी कुछ आवश्यक तय कर रखा है और आपके योगदान के बिना उसकी मण्डली अपना पूरी क्षमता के साथ कार्य नहीं कर पाएगी। परमेश्वर द्वारा आपको दिए गए महत्व और अनुपम कौशल को पहचानिए, उसे कार्यान्वित कीजिए और अपने योगदान द्वारा परमेश्वर को आदर तथा महिमा दीजिए। - बिल क्राउडर


परमेश्वर छोटे औज़ारों से बड़े-बड़े कार्य करवा लेता है।

यदि पांव कहे कि मैं हाथ नहीं, इसलिये देह का नहीं, तो क्या वह इस कारण देह का नहीं? - 1 कुरन्थियों 12:15

बाइबल पाठ: 1 कुरन्थियों 12:12-27
1 Corinthians 12:12 क्योंकि जिस प्रकार देह तो एक है और उसके अंग बहुत से हैं, और उस एक देह के सब अंग, बहुत होने पर भी सब मिलकर एक ही देह हैं, उसी प्रकार मसीह भी है।
1 Corinthians 12:13 क्योंकि हम सब ने क्या यहूदी हो, क्या युनानी, क्या दास, क्या स्‍वतंत्र एक ही आत्मा के द्वारा एक देह होने के लिये बपतिस्मा लिया, और हम सब को एक ही आत्मा पिलाया गया।
1 Corinthians 12:14 इसलिये कि देह में एक ही अंग नहीं, परन्तु बहुत से हैं।
1 Corinthians 12:15 यदि पांव कहे कि मैं हाथ नहीं, इसलिये देह का नहीं, तो क्या वह इस कारण देह का नहीं?
1 Corinthians 12:16 और यदि कान कहे; कि मैं आंख नहीं, इसलिये देह का नहीं, तो क्या वह इस कारण देह का नहीं?
1 Corinthians 12:17 यदि सारी देह आंख ही होती तो सुनना कहां से होता? यदि सारी देह कान ही होती तो सूंघना कहां होता?
1 Corinthians 12:18 परन्तु सचमुच परमेश्वर ने अंगो को अपनी इच्छा के अनुसार एक एक कर के देह में रखा है।
1 Corinthians 12:19 यदि वे सब एक ही अंग होते, तो देह कहां होती?
1 Corinthians 12:20 परन्तु अब अंग तो बहुत से हैं, परन्तु देह एक ही है।
1 Corinthians 12:21 आंख हाथ से नहीं कह सकती, कि मुझे तेरा प्रयोजन नहीं, और न सिर पांवों से कह सकता है, कि मुझे तुम्हारा प्रयोजन नहीं।
1 Corinthians 12:22 परन्तु देह के वे अंग जो औरों से निर्बल देख पड़ते हैं, बहुत ही आवश्यक हैं।
1 Corinthians 12:23 और देह के जिन अंगो को हम आदर के योग्य नहीं समझते हैं उन्‍ही को हम अधिक आदर देते हैं; और हमारे शोभाहीन अंग और भी बहुत शोभायमान हो जाते हैं।
1 Corinthians 12:24 फिर भी हमारे शोभायमान अंगो को इस का प्रयोजन नहीं, परन्तु परमेश्वर ने देह को ऐसा बना दिया है, कि जिस अंग को घटी थी उसी को और भी बहुत आदर हो।
1 Corinthians 12:25 ताकि देह में फूट न पड़े, परन्तु अंग एक दूसरे की बराबर चिन्‍ता करें।
1 Corinthians 12:26 इसलिये यदि एक अंग दु:ख पाता है, तो सब अंग उसके साथ दु:ख पाते हैं; और यदि एक अंग की बड़ाई होती है, तो उसके साथ सब अंग आनन्द मनाते हैं।
1 Corinthians 12:27 इसी प्रकार तुम सब मिल कर मसीह की देह हो, और अलग अलग उसके अंग हो।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजा 17-18 
  • यूहन्ना 3:19-36


रविवार, 12 मई 2013

पूर्ण भरोसा


   झाड़ी में एक घोंसला था और उसमें से चिड़िया के बच्चों के चहचहाने की आवाज़ें आ रही थीं। मैं अपना कैमरा लेकर गई कि उनकी फोटो खींच सकूँ; जैसे ही मैंने झाड़ी में जगह बनाकर कैमरा उन बच्चों के पास किया, तुरंत ही उन बच्चों ने अपनी आँखें खोले बिना ही बड़ा सा मूँह खोल दिया और पूरे ज़ोर से आवाज़ करने लगे, मानो अपनी माँ से भोजन की गुहार कर रहे हों। चिड़िया के वे बच्चे अपनी माँ द्वारा भोजन खिलाए जाने के इतने आदि थे कि झाड़ी में डालियाँ हिलने की आवाज़ सुनते ही वे समझते थे कि माँ आई है, भोजन लाई है और बिना देखे ही वे अपना मूँह खोलकर भोजन लेने को तैयार हो जाते थे। यह उस भरोसे का प्रतीक है जो प्रेमी माताएं अपने बच्चों में भर देती हैं।

   मैं बहुत धन्य हूँ कि ऐसी ही माँ मेरी भी है। अपने बचपन से लड़कपन की ओर बढ़ती उम्र में माँ द्वारा परोसा हुआ कोई भी भोजन मैं बेधड़क खा लेती थी, मुझे पूरा भरोसा था कि उससे मुझे कोई नुकसान नहीं होगा। यद्यपि माँ द्वारा परोसी गई हर चीज़ मुझे पसन्द नहीं थी, और वह मेरी नापसन्द चीज़ों को भी मुझे खाने के लिए विवश करती थी, लेकिन मुझे यह भी भरोसा था कि वह ऐसा केवल इसलिए करती है क्योंकि वे सब चीज़ें मेरे लिए लाभप्रद हैं। मेरी ज़िद पूरी करने या कम मेहनत करने और अपनी आसानी के लिए माँ ने कभी मुझे अपौष्टिक अथवा नुकसानदेह भोजन, ’जंक फूड’ नहीं खाने दिया। वह मुझे मज़े लेने से वंचित नहीं कर रही थी, वरन मुझे में अच्छी आदतें डालने और मेरे अच्छे स्वास्थ्य के लिए परिश्रम कर रही थी; मेरा पूरा भरोसा था कि वह हर बात में केवल मेरा भला ही चाहती थी।

   कुछ ऐसा ही संबंध हर मसीही विश्वासी का अपने प्रेमी परमेश्वर पिता के साथ भी होता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में, एक स्थान पर प्रमेश्वर ने अपनी तुलना एक माँ से करी है: "जिस प्रकार माता अपने पुत्र को शान्ति देती है, वैस ही मैं भी तुम्हें शान्ति दुंगा; तुम को यरूशलेम ही में शान्ति मिलेगी" (यशायाह 66:13)। परमेश्वर की सन्तान होने के नाते हमें किसी बात में किसी नुकसान के होने की चिंता नहीं करनी है और ना ही संसार के लोगों को देख कर किसी बात की ईर्ष्या करनी चाहिए: "कुकर्मियों के कारण मत कुढ़, कुटिल काम करने वालों के विषय डाह न कर!" (भजन 37:1)। परमेश्वर हर परिस्थिति में और हर रीति से केवल हमारा भला ही चाहता है और हमें केवल वह ही देता है जो हमारे लिए भला है। हर-हमेशा उसके चुनाव और उसकी देखभाल पर हम आँखें मूँदकर भी पूर्ण भरोसा रख सकते हैं। - जूली ऐकैरमैन लिंक


परमेश्वर हर समय हमें अपनी देखरेख में बनाए रखता है।

यहोवा पर भरोसा रख, और भला कर; देश में बसा रह, और सच्चाई में मन लगाए रह। - भजन 37:3 

बाइबल पाठ: भजन 37:1-11
Psalms 37:1 कुकर्मियों के कारण मत कुढ़, कुटिल काम करने वालों के विषय डाह न कर!
Psalms 37:2 क्योंकि वे घास की नाईं झट कट जाएंगे, और हरी घास की नाईं मुर्झा जाएंगे।
Psalms 37:3 यहोवा पर भरोसा रख, और भला कर; देश में बसा रह, और सच्चाई में मन लगाए रह।
Psalms 37:4 यहोवा को अपने सुख का मूल जान, और वह तेरे मनोरथों को पूरा करेगा।
Psalms 37:5 अपने मार्ग की चिन्ता यहोवा पर छोड़; और उस पर भरोसा रख, वही पूरा करेगा।
Psalms 37:6 और वह तेरा धर्म ज्योति की नाईं, और तेरा न्याय दोपहर के उजियाले की नाईं प्रगट करेगा।
Psalms 37:7 यहोवा के साम्हने चुपचाप रह, और धीरज से उसका आसरा रख; उस मनुष्य के कारण न कुढ़, जिसके काम सफल होते हैं, और वह बुरी युक्तियों को निकालता है!
Psalms 37:8 क्रोध से परे रह, और जलजलाहट को छोड़ दे! मत कुढ़, उस से बुराई ही निकलेगी।
Psalms 37:9 क्योंकि कुकर्मी लोग काट डाले जाएंगे; और जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वही पृथ्वी के अधिकारी होंगे।
Psalms 37:10 थोड़े दिन के बीतने पर दुष्ट रहेगा ही नहीं; और तू उसके स्थान को भली भांति देखने पर भी उसको न पाएगा।
Psalms 37:11 परन्तु नम्र लोग पृथ्वी के अधिकारी होंगे, और बड़ी शान्ति के कारण आनन्द मनाएंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजा 15-16 
  • यूहन्ना 3:1-18