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सोमवार, 27 जनवरी 2014

चट्टान


   इंग्लैण्ड का एक युवा प्रचारक, अगस्टुस टॉपलेडी, खुले मैदानी इलाकों से होकर जा रहा था और अचानक ही एक तूफान ने उसे आ घेरा। उसने तूफान से बचने के लिए कोई स्थान देखने के लिए अपनी नज़रें इधर-उधर घुमाईं और उसे एक बड़ी चट्टान दिखाई दी जिसमें एक दरार थी; वह उस दरार में जाकर बैठ गया और तूफान के गुज़र जाने की प्रतीक्षा करने लगा। वहाँ बैठे बैठे उसे अपनी इस वर्तमान शारीरिक परिस्थिति और अपने जीवन में आने वाले आत्मिक तूफानों में परमेश्वर में मिलनी वाली शरण का ध्यान आया और वह इस पर विचार करने लगा। अपने विचारों को लिखने के लिए उसके पास कोई कागज़ नहीं था, इसलिए वहाँ ज़मीन पर पड़े एक ताश के पत्ते पर उसने अपने विचारों को एक स्तुति गीत के रूप में लिखना आरंभ कर दिया।

   सन 1775 के एक तूफानी दिन में एक चट्टान की दरार में ताश के पत्ते पर लिखा गया वह भजन - Rock of Ages तब से लेकर आज तक अनगिनित लोगों के लिए बल और सांत्वना का स्त्रोत रहा है। उस गीत का एक छन्द कुछ इस प्रकार से है: हे अनन्तकालीन चट्टान जो मेरे लिए तोड़ी गई, मुझे अपनी दरार में छुपा रख; तेरी छेदी गई छाती से बहे लहू और जल द्वारा मेरे पापों को धो डाल और मुझे पाप के दण्ड से छुड़ाकर शुद्ध और पवित्र बना दे।

   अपने जीवन के संघर्षों के बारे में विचार कीजिए; क्या आपको जीवन के तूफानों से छिपने का स्थान चाहिए? क्या आपको किसी ऐसे जन का साथ चाहिए जो सदा आपके साथ रहे और जीवन के प्रहारों से आपकी रक्षा करता रहे? क्या आपको पापों से क्षमा का अनुभव और निश्चय चाहिए? जैसे अगुस्टुस टॉपलेडी ने पाया, आप भी प्रभु यीशु में यह सब पा सकते हैं।

   जीवन के तूफानों में अकेले खड़े ना रहें; परमेश्वर को अपन आश्रय-स्थल बना लें। उसकी सुरक्षा में आ जाएं; अपने जीवन में उससे मिलने वाली क्षमा को सुनिश्चित कर लें। उस अनन्तकालीन चट्टान में आ जाएं, क्योंकि उससे अधिक सुरक्षित स्थान और कोई है ही नहीं। - डेव ब्रैनन


संसार और जीवन के प्रहारों से आपको सुरक्षित रखने वाली वह स्थिर और अडिग चट्टान केवल परमेश्वर ही है। 

यहोवा मेरी चट्टान, और मेरा गढ़ और मेरा छुड़ाने वाला है; मेरा ईश्वर, मेरी चट्टान है, जिसका मैं शरणागत हूं, वह मेरी ढ़ाल और मेरी मुक्ति का सींग, और मेरा ऊँचा गढ़ है। - भजन 18:2

बाइबल पाठ: भजन 18:30-36
Psalms 18:30 ईश्वर का मार्ग सच्चाई; यहोवा का वचन ताया हुआ है; वह अपने सब शरणागतों की ढाल है।
Psalms 18:31 यहोवा को छोड़ क्या कोई ईश्वर है? हमारे परमेश्वर को छोड़ क्या और कोई चट्टान है? 
Psalms 18:32 यह वही ईश्वर है, जो सामर्थ से मेरा कटिबन्ध बान्धता है, और मेरे मार्ग को सिद्ध करता है। 
Psalms 18:33 वही मेरे पैरों को हरिणियों के पैरों के समान बनाता है, और मुझे मेरे ऊंचे स्थानों पर खड़ा करता है। 
Psalms 18:34 वह मेरे हाथों को युद्ध करना सिखाता है, इसलिये मेरी बाहों से पीतल का धनुष झुक जाता है। 
Psalms 18:35 तू ने मुझ को अपने बचाव की ढाल दी है, तू अपने दाहिने हाथ से मुझे सम्भाले हुए है, और मेरी नम्रता ने महत्व दिया है। 
Psalms 18:36 तू ने मेरे पैरों के लिये स्थान चौड़ा कर दिया, और मेरे पैर नहीं फिसले।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 38-40


रविवार, 26 जनवरी 2014

स्वर्ग


   हाल ही के एक टीवी विज्ञापन में एक परिवार का दृश्य दिखाया गया जो कार में जा रहा है और दोपहर के भोजन के लिए उनमें विवाद चल रहा है। एक बच्चा कहता है कि उसे पिज़्ज़ा खाना है तो दूसरा कहता है कि उसे तो चिकन खाना है, तो माँ उनको शाँत रहने के लिए कहती और निर्णय देती है कि वे सब हैमबर्गर खाने के लिए रुकेंगे। तभी पिता इस समस्या का हल देते हुए एक भोजन स्थान का नाम लेकर कहता है कि हम भोजन के लिए वहाँ रुकेंगे और जिसे जो चाहिए, जितना चाहिए लेकर खा ले क्योंकि उस स्थान पर हर प्रकार का भोजन मिलता है।

   उस विज्ञापन को देखने के बाद मुझे एक और स्थान का स्मरण आया जहाँ पर सबकुछ मिलेगाम किसी को कोई कमी नहीं होगी - स्वर्ग। सबसे पहली बात तो यह कि स्वर्ग में हम परमेश्वर की उपस्थिति में होंगे, जैसा प्रेरित यूहन्ना ने बताया: "और फिर श्राप न होगा और परमेश्वर और मेम्ने का सिंहासन उस नगर में होगा, और उसके दास उस की सेवा करेंगे" (प्रकाशितवाक्य 22:3)। वहाँ परमेश्वर के सिंहासन से बहने वाली जीवन जल की नदी से सभी प्यासी आत्माओं की प्यास बुझ जाएगी (प्रकाशितवाक्य 22:1) क्योंकि परमेश्वर स्वयं उन्हें सेंत-मेंत जीवन का जल पीने को देगा (प्रकाशितवाक्य 21:6)। वहाँ पर जीवन का वृक्ष भी होगा जो सबकी चंगाई के लिए है (प्रकाशितवाक्य 22:2)।

   जो स्वर्ग में नहीं होगा वह है श्राप (प्रकाशितवाक्य 22:3), और साथ ही वहाँ मृत्यु, शोक और आँसु भी नहीं होंगे (प्रकाशितवाक्य 21:4)। हम सभी मसीही विश्वासी वहाँ अनन्तकाल तक एक आनन्द, परिपूर्णता और सन्तुष्टि का जीवन व्यतीत करेंगे। और यह सब हमें प्रभु यीशु से पापों की क्षमा माँग लेने और अपना जीवन उसे समर्पित कर देने के द्वारा परमेश्वर के अनुग्रह से सेंत-मेंत ही मिला है।

   क्या आप ने भी प्रभु यीशु को अपनाकर स्वर्ग की आशीषों को अपने लिए सुनिश्चित कर लिया है? - ऐनी सेटास


पृथ्वी - परीक्षाओं और परेशानियों का स्थान; स्वर्ग - अनन्त आनन्द और सन्तुष्ति का स्थान।

पर उस की प्रतिज्ञा के अनुसार हम एक नए आकाश और नई पृथ्वी की आस देखते हैं जिन में धामिर्कता वास करेगी। - 2 पतरस 3:13

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य 22:1-5
Revelation 22:1 फिर उसने मुझे बिल्लौर की सी झलकती हुई, जीवन के जल की एक नदी दिखाई, जो परमेश्वर और मेंम्ने के सिंहासन से निकल कर उस नगर की सड़क के बीचों बीच बहती थी। 
Revelation 22:2 और नदी के इस पार; और उस पार, जीवन का पेड़ था: उस में बारह प्रकार के फल लगते थे, और वह हर महीने फलता था; और उस पेड़ के पत्तों से जाति जाति के लोग चंगे होते थे। 
Revelation 22:3 और फिर श्राप न होगा और परमेश्वर और मेम्ने का सिंहासन उस नगर में होगा, और उसके दास उस की सेवा करेंगे। 
Revelation 22:4 और उसका मुंह देखेंगे, और उसका नाम उन के माथों पर लिखा हुआ होगा। 
Revelation 22:5 और फिर रात न होगी, और उन्हें दीपक और सूर्य के उजियाले का प्रयोजन न होगा, क्योंकि प्रभु परमेश्वर उन्हें उजियाला देगा: और वे युगानुयुग राज्य करेंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 35-37


शनिवार, 25 जनवरी 2014

प्रयास के पुरस्कार


   एक बार मैंने यह निश्चय किया कि मैं शेक्सपीयर द्वारा लिखित सभी 38 नाटक एक ही वर्ष के अन्दर पढ़ डालूँगा। मुझे आश्चर्य हुआ कि जब मैंने दृढ़ता के साथ ऐसा करना आरंभ किया तो यह मुझे कार्य नहीं वरन मनोरंजन लगने लगा। मैं सोचता था कि उन नाटकों से मैं शेक्सपीयर के समय के लोगों और समाज के बारे में कुछ सीखने पाऊँगा परन्तु मैंने देखा कि शेक्सपीयर तो मुझे मेरे समय के संसार के बारे में ही सिखा रहा था।

   बिलकुल ऐसा ही अनुभव मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल के पुराने नियम नामक खण्ड को पढ़ते हुए हुआ। पहले मैं सोचता था कि पुराने नियम में इतना कुछ मन्दिर, याजकों (पुरोहितों), नियमों और बलिदानों के बारे में दिया है - ऐसी बातें जो आज विद्यमान नहीं हैं, तो फिर मुझे इनके बारे में पढ़ने से क्या लाभ? कैसे हम पुराने नियम को अपने आज के जीवन में लागू कर सकते हैं, या उसका कोई अर्थ पा सकते हैं? जैसे जैसे मैं दृढ़ निश्चय के साथ पुराने नियम को पढ़ने लगा तो आरंभ में कुछ कठिनाईयाँ तो आईं, लेकिन उसे पढ़ते रहने से जो मैंने सीखना आरंभ कर दिया उसने मुझे उसे पढ़ते रहने को प्रेरित किया और फिर मुझे उसे पढ़ते रहने की आवश्यकता भी अनुभव होने लगी। अन्ततः मेरे अन्दर पुराने नियम की सभी 39 पुस्तकों को पढ़ने की लालसा जाग उठी, और उन्हें पढ़ने से मेरे अन्दर की एक ऐसी भूख तृप्त हो सकी जो इससे पहले कभी किसी अन्य से तृप्त नहीं हुई थी। पुराने नियम से मैंने परमेश्वर के साथ जीवन व्यतीत करने के बारे में सीखा।

   बाइबल का पुराना नियम बहुत से लोगों को अटपटा और अप्रासंगिक लगता है और इसलिए वे उसे पढ़ना नहीं चाहते। लेकिन पुराना नियम परमेश्वर के साथ जीवन जीने के लिए एक उन्नत पाठ्यक्रम के समान है जिसे पढ़ने और पूरा करने में प्रयास और समय तो लगता है, लेकिन जब हम ऐसा करते हैं तो वह हमारी परमेश्वर संबंधी भूख को व्यक्तिगत तथा उत्साहवर्धक रीति से तृप्त भी करता है।

   किसी भी प्रयास के पुरस्कार आसानी से नहीं मिलते; प्रत्येक उपल्बधि कठिन मेहनत से ही आती है। इसलिए यदि आप परमेश्वर के वचन के अध्ययन में ढीले पड़ रहे हैं या वह आपको रोचक नहीं लग रहा है, तो भी पढ़ते रहने और उसका अध्ययन करने के प्रयासों से पीछे ना हटें। प्रयास के पुरस्कार अवश्य मिलेंगे, और जो परमेश्वर के वचन बाइबल से मिलेगा वह विलक्षण होगा, ऐसा होगा जो और कहीं नहीं मिलेगा। - फिलिप यैन्सी


बाइबल हमारी वास्तविक तस्वीर हमारे सामने ले आती है।

हर एक पवित्रशास्‍त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है और उपदेश, और समझाने, और सुधारने, और धर्म की शिक्षा के लिये लाभदायक है। ताकि परमेश्वर का जन सिद्ध बने, और हर एक भले काम के लिये तत्‍पर हो जाए। - 2 तिमुथियुस 3:16-17

बाइबल पाठ: भजन 19:7-11
Psalms 19:7 यहोवा की व्यवस्था खरी है, वह प्राण को बहाल कर देती है; यहोवा के नियम विश्वासयोग्य हैं, साधारण लोगों को बुद्धिमान बना देते हैं; 
Psalms 19:8 यहोवा के उपदेश सिद्ध हैं, हृदय को आनन्दित कर देते हैं; यहोवा की आज्ञा निर्मल है, वह आंखों में ज्योति ले आती है; 
Psalms 19:9 यहोवा का भय पवित्र है, वह अनन्तकाल तक स्थिर रहता है; यहोवा के नियम सत्य और पूरी रीति से धर्ममय हैं। 
Psalms 19:10 वे तो सोने से और बहुत कुन्दन से भी बढ़कर मनोहर हैं; वे मधु से और टपकने वाले छत्ते से भी बढ़कर मधुर हैं। 
Psalms 19:11 और उन्हीं से तेरा दास चिताया जाता है; उनके पालन करने से बड़ा ही प्रतिफल मिलता है।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 32-34


शुक्रवार, 24 जनवरी 2014

वास्तविकता


   कार से यात्रा करते हुए मेरा ध्यान मार्ग के किनारे लगे एक संकेत पर गया - वह बेदाग़ सफेद था और बड़े सुन्दर लाल अक्षरों में उस पर लिखा था: "नालियाँ और खिड़कियाँ - उत्कृष्ट कार्य की गरण्टी।" वह संकेत तो बहुत अच्छा था परन्तु मुझे उस पर लिखी बात पर कोई विश्वास नहीं हुआ, क्योंकि जिस घर पर वह लगा था वह घर बड़ी जीर्ण हालत में था और लगता था कभी भी ढह जाएगा, उस घर पर लगा रंग उतर रहा था, वहाँ की खिड़कियाँ टूटी हुई थीं और मुझे कोई नाली वहाँ दिखाई नहीं दी। जिस बात का दावा और विज्ञापन किया जा रहा था वही उस घर में विद्यमान नहीं थी।

   बहुत से ’मसीही’ जीवन भी ऐसे ही होते हैं - मसीह यीशु का विज्ञापन तो बहुत करते हैं परन्तु उनके आत्मिक घर टूटे हुए होते हैं; वे मसीहियत की भाषा तो बोलते हैं, नियमित रीति से चर्च जाते हैं, लोगों से मिलते जुलते भी हैं लेकिन उनमें मसीह यीशु के गुण दिखाई नहीं देते। जब हमारा चाल-चलन हमारे मसीही प्रचार के अनुरूप नहीं होता तो हमारा अच्छा व्यवहार केवल धर्मपरायणता का दिखावा मात्र है। प्रभु यीशु ने फरीसियों अर्थात अपने समय के धर्म के अगुवों को आईना दिखाते हुए कहा: "इसी रीति से तुम भी ऊपर से मनुष्यों को धर्मी दिखाई देते हो, परन्तु भीतर कपट और अधर्म से भरे हुए हो" (मत्ती 23:28)। प्रभु यीशु का यह दो टूक संबोधन केवल फरीसियों के लिए ही नहीं था; उन्होंने अपने चेलों से भी ऐसे ही दो टूक शब्दों में कहा: "सावधान रहो! तुम मनुष्यों को दिखाने के लिये अपने धर्म के काम न करो, नहीं तो अपने स्‍वर्गीय पिता से कुछ भी फल न पाओगे" (मत्ती 6:1)।

   परमेश्वर का वचन बाइबल हमें स्पष्ट शब्दों में कहती है: "आज्ञा का सारांश यह है, कि शुद्ध मन और अच्‍छे विवेक, और कपट रहित विश्वास से प्रेम उत्पन्न हो" (1 तिमुथियुस 1:5)। मसीही जीवन के ये सदगुण हमारी कथनी और करनी दोनो से ही संसार के सामने प्रकट होने चाहिएं (लूका 6:45)। आज अपने आत्मिक जीवन को जाँच के देखें; यदि लोग आपके बाहर के सुन्दर प्रदर्शन से आगे आपके अन्दर के वास्तविक जीवन को देखें तो उन्हें देखने को क्या मिलेगा?

   क्या आपके मसीही जीवन की वास्तविकता मसीह यीशु को स्वीकार योग्य है? - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


परमेश्वर चाहता है कि हमारे कार्य हमारे शुद्ध जीवनों का प्रतिबिंब हों।

भला मनुष्य अपने मन के भले भण्‍डार से भली बातें निकालता है; और बुरा मनुष्य अपने मन के बुरे भण्‍डार से बुरी बातें निकालता है; क्योंकि जो मन में भरा है वही उसके मुंह पर आता है। - लूका 6:45

बाइबल पाठ: मत्ती 23:23-31
Matthew 23:23 हे कपटी शास्‍त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय; तुम पोदीने और सौंफ और जीरे का दसवां अंश देते हो, परन्तु तुम ने व्यवस्था की गम्भीर बातों को अर्थात न्याय, और दया, और विश्वास को छोड़ दिया है; चाहिये था कि इन्हें भी करते रहते, और उन्हें भी न छोड़ते। 
Matthew 23:24 हे अन्धे अगुवों, तुम मच्छर को तो छान डालते हो, परन्तु ऊंट को निगल जाते हो। 
Matthew 23:25 हे कपटी शास्‍त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय, तुम कटोरे और थाली को ऊपर ऊपर से तो मांजते हो परन्तु वे भीतर अन्‍धेर असंयम से भरे हुए हैं। 
Matthew 23:26 हे अन्धे फरीसी, पहिले कटोरे और थाली को भीतर से मांज कि वे बाहर से भी स्‍वच्‍छ हों।
Matthew 23:27 हे कपटी शास्‍त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय; तुम चूना फिरी हुई कब्रों के समान हो जो ऊपर से तो सुन्‍दर दिखाई देती हैं, परन्तु भीतर मुर्दों की हड्डियों और सब प्रकार की मलिनता से भरी हैं। 
Matthew 23:28 इसी रीति से तुम भी ऊपर से मनुष्यों को धर्मी दिखाई देते हो, परन्तु भीतर कपट और अधर्म से भरे हुए हो।
Matthew 23:29 हे कपटी शास्‍त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय; तुम भविष्यद्वक्ताओं की कब्रें संवारते और धर्मियों की कब्रें बनाते हो। 
Matthew 23:30 और कहते हो, कि यदि हम अपने बाप-दादों के दिनों में होते तो भविष्यद्वक्ताओं की हत्या में उन के साझी न होते। 
Matthew 23:31 इस से तो तुम अपने पर आप ही गवाही देते हो, कि तुम भविष्यद्वक्ताओं के घातकों की सन्तान हो।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 28-31


गुरुवार, 23 जनवरी 2014

शान्ति


   बहुत वर्ष पहले मेरा परिचय एक युवक से हुआ जो मोटरसाइकिल पर चलने वाले गुण्डे-मवालियों के एक गुट का सदस्य था। उस युवक का पालन पोषण एक मिशन कार्यक्षेत्र में हुआ था जहाँ उसके माता-पिता कार्य करते थे। जब वह परिवार वापस अमेरिका लौट के आया तो वह युवक वहाँ की परिस्थित्यों के साथ सामन्जस्य स्थापित नहीं कर पाया और बुरी संगति में पड़ गया। उसने एक अशान्त जीवन बिताया और एक प्रतिद्वन्दी गुट के साथ हुई लड़ाई में वह मारा गया।

   मैंने बहुत से अन्तिम संस्कारों में सहायता करी है, किन्तु इस युवक का अन्तिम संस्कार मेरे लिए अविस्मर्णीय रहा है। यह अन्तिम संस्कार एक पार्क में हुआ जिस के मध्य में एक छोटी झील है। उस युवक के साथियों ने अपनी मोटर साइकिलें वहाँ घास के मैदान पर गोलाकार खड़ी करीं और वे सब अपने दिवंगत मित्र के चारों ओर घास पर बैठ गए और मैं ने अन्तिम क्रीया की अगुवाई करी। हमने सरल, सामान्य और संक्षिप्त रीति से परस्पर तथा सामाजिक शान्ति और प्रभु यीशु के प्रेम और उससे मिलने वाली व्यक्तिगत शान्ति के बारे में बात करी। सब समाप्त होने के बाद उस मोटरसाइकिल गुट के एक सदस्य ने मुझे धन्यवाद कहा और चलने लगा; फिर वह पलटा और मेरे पास वापस आया। तब उसने जो कहा, मैं उसके वे शब्द कभी भुला नहीं पाया। उसने कहा, मेरे पास मोटरसाइकिल है, घर है और प्रेमिका है, लेकिन मेरे पास शान्ति नहीं है। फिर हमने प्रभु यीशु के बारे में बात करी जो हमारी शान्ति है और जगत का शान्तिदाता है।

   चाहे हमारे पास हेलिकॉप्टर हो या कीमती कार, रहने के लिए आलीशान महल हो या छोटी सी झोंपड़ी, कोई प्रेम करने वाला हो या ना हो - इनमें से या इनके जैसी किसी बात से कोई फर्क नहीं पड़ता; जहाँ प्रभु यीशु नहीं है वहाँ शान्ति नहीं है। प्रभु यीशु ने कहा, "मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे" (यूहन्ना 14:27)। प्रभु यीशु की अद्भुत शान्ति का यह उपहार प्रत्येक उस व्यक्ति के लिए है जो उसपर विश्वास करता है, उससे पापों की क्षमा माँगकर अपना जीवन उसे समर्पित कर देता है।

   क्या आपके पास यह अद्भुत शान्ति है? - डेविड रोपर


प्रभु यीशु ने हमारे लिए अपने प्राण बलिदान किए ताकि हम शान्ति पा सकें।

मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे। - यूहन्ना 14:27

बाइबल पाठ: यूहन्ना 14:25-31
John 14:25 ये बातें मैं ने तुम्हारे साथ रहते हुए तुम से कहीं। 
John 14:26 परन्तु सहायक अर्थात पवित्र आत्मा जिसे पिता मेरे नाम से भेजेगा, वह तुम्हें सब बातें सिखाएगा, और जो कुछ मैं ने तुम से कहा है, वह सब तुम्हें स्मरण कराएगा। 
John 14:27 मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे। 
John 14:28 तुम ने सुना, कि मैं ने तुम से कहा, कि मैं जाता हूं, और तुम्हारे पास फिर आता हूं: यदि तुम मुझ से प्रेम रखते, तो इस बात से आनन्‍दित होते, कि मैं पिता के पास जाता हूं क्योंकि पिता मुझ से बड़ा है। 
John 14:29 और मैं ने अब इस के होने से पहिले तुम से कह दिया है, कि जब वह हो जाए, तो तुम प्रतीति करो।
John 14:30 मैं अब से तुम्हारे साथ और बहुत बातें न करूंगा, क्योंकि इस संसार का सरदार आता है, और मुझ में उसका कुछ नहीं। 
John 14:31 परन्तु यह इसलिये होता है कि संसार जाने कि मैं पिता से प्रेम रखता हूं, और जिस तरह पिता ने मुझे आज्ञा दी, मैं वैसे ही करता हूं: उठो, यहां से चलें।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 25-27


बुधवार, 22 जनवरी 2014

संगीत


   परमेश्वर के वचन बाइबल में संगीत का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। बाइबल की प्रथम पुस्तक, उत्पत्ति, से लेकर अन्तिम पुस्तक, प्रकाशितवाक्य, तक संगीत का उल्लेख और उपयोग है। परमेश्वर ने अनेक स्थानों पर संगीतकारों को अपने किसी कार्य करने के लिए चुना और उपयोग किया है। परमेश्वर ने कहीं संगीत द्वारा आराधना के लिए लोगों को बुलाया, तो कहीं वाद्यों की ध्वनि द्वारा उन्हें कूच करने को कहा, चाहे वह डेरा उठाकर किसी नए स्थान के लिए निकलना हो या फिर युद्ध के लिए हो। कहीं संगीत का प्रयोग विचलित और आहत मनोभावों को शान्त करने के लिए हुआ है तो कहीं लोगों में एक आत्मिक उन्माद जागृत करने के लिए। कभी संगीत किसी विजय का पर्व मनाने के लिए है तो कहीं किसी हानि के शोक को प्रकट करने के लिए।

   संगीत सभी अवसरों और सभी लोगों के लिए कला का एक वृहत रूप है। संगीत में अगुवे भी होते हैं और अनुयायी भी। सरल गीत भी होते हैं और कठिन भी; सरल वाद्य यंत्र भी होते हैं और जटिल भी। धुनें भी होती हैं और सुर भी; तेज़ गति की लय भी होती है और धीमी गति की लय भी; उसमें तीव्र स्वर भी हैं और मध्यम भी। संगीत मसीही मण्डली का एक अच्छा रूपक है - जैसे संगीत मण्डली में बहुत से भिन्न लोग और बहुत से भिन्न वाद्य मिलकर एक साथ वह करते हैं जो वे व्यक्तिगत रीति से सबसे अच्छा कर सकते हैं और कुल मिलकर एक मधुर संगीत बनता है, वैसे ही मसीही मण्डली में भी भिन्न लोग परमेश्वर द्वारा उन्हें दी गई भिन्न क्षमताओं और वरदानों के प्रयोग से परमेश्वर के एक ही उद्देश्य की पूर्ति के लिए कार्य करते हैं। इसलिए हम जितना अधिक अपने संचालक, अर्थात प्रभु यीशु पर नज़र बनाए रखेंगे और जितना अधिक अपने कार्य तथा भाग के बारे में जानकारी रखेंगे, उतना बेहतर अपनी ज़िम्मेदारी को निभाने पाएंगे।

   संगीत का सबसे उत्तम प्रयोग है परमेश्वर की स्तुति। जब राजा सुलेमान द्वारा बनवाया गया परमेश्वर का मन्दिर संपूर्ण हुआ तो परमेश्वर को उस मन्दिर के समर्पण के समय संगीतकारों ने संगीत बजाया और परमेश्वर को आराधना अर्पित करी; जब वे ऐसा कर रहे थे तब, "तो जब तुरहियां बजाने वाले और गाने वाले एक स्वर से यहोवा की स्तुति और धन्यवाद करने लगे, और तुरहियां, झांझ आदि बाजे बजाते हुए यहोवा की यह स्तुति ऊंचे शब्द से करने लगे, कि वह भला है और उसकी करुणा सदा की है, तब यहोवा के भवन में बादल छा गया, और बादल के कारण याजक लोग सेवा-टहल करने को खड़े न रह सके, क्योंकि यहोवा का तेज परमेश्वर के भवन में भर गया था" (2 इतिहास 5:13-14)।

   हम परमेश्वर का धन्यवाद करते हैं मनमोहक संगीत के लिए और उसमें होकर मिलने वाली स्वर्ग की एक झलक के लिए जहाँ परमेश्वर का तेज और महिमा सदा वास करेंगी और जहाँ कभी परमेश्वर की स्तुति और आराधना का अन्त नहीं होगा। - जूली ऐकैरमैन लिंक


जो पृथ्वी पर परमेश्वर की आराधना और स्तुति करते रहते हैं उन्हें स्वर्ग जाना-पहिचाना अनुभव होगा।

तो जब तुरहियां बजाने वाले और गाने वाले एक स्वर से यहोवा की स्तुति और धन्यवाद करने लगे, और तुरहियां, झांझ आदि बाजे बजाते हुए यहोवा की यह स्तुति ऊंचे शब्द से करने लगे, कि वह भला है और उसकी करुणा सदा की है, तब यहोवा के भवन में बादल छा गया, और बादल के कारण याजक लोग सेवा-टहल करने को खड़े न रह सके, क्योंकि यहोवा का तेज परमेश्वर के भवन में भर गया था। - 2 इतिहास 5:13-14

बाइबल पाठ: 2 इतिहास 5:7-14
2 Chronicles 5:7 तब याजकों ने यहोवा की वाचा का सन्दूक उसके स्थान में, अर्थात भवन की भीतरी कोठरी में जो परमपवित्र स्थान है, पहुंचा कर, करूबों के पंखों के तले रख दिया। 
2 Chronicles 5:8 सन्दूक के स्थान के ऊपर करूब तो पंख फैलाए हुए थे, जिससे वे ऊपर से सन्दूक और उसके डणडों को ढांपे थे। 
2 Chronicles 5:9 डणडे तो इतने लम्बे थे, कि उनके सिरे सन्दूक से निकले हुए भीतरी कोठरी के साम्हने देख पड़ते थे, परन्तु बाहर से वे दिखाई न पड़ते थे। वे आज के दिन तक वहीं हैं। 
2 Chronicles 5:10 सन्दूक में पत्थर की उन दो पटियाओं को छोड़ कुछ न था, जिन्हें मूसा ने होरेब में उसके भीतर उस समय रखा, जब यहोवा ने इस्राएलियों के मिस्र से निकलने के बाद उनके साथ वाचा बान्धी थी। 
2 Chronicles 5:11 जब याजक पवित्रस्थान से निकले (जितने याजक उपस्थित थे, उन सभों ने तो अपने अपने को पवित्र किया था, और अलग अलग दलों में हो कर सेवा न करते थे; 
2 Chronicles 5:12 और जितने लेवीय गवैये थे, वे सब के सब अर्थात पुत्रों और भाइयों समेत आसाप, हेमान और यदूतून सन के वस्त्र पहिने झांझ, सारंगियां और वीणाएं लिये हुए, वेदी के पूर्व अलंग में खड़े थे, और उनके साथ एक सौ बीस याजक तुरहियां बजा रहे थे।) 
2 Chronicles 5:13 तो जब तुरहियां बजाने वाले और गाने वाले एक स्वर से यहोवा की स्तुति और धन्यवाद करने लगे, और तुरहियां, झांझ आदि बाजे बजाते हुए यहोवा की यह स्तुति ऊंचे शब्द से करने लगे, कि वह भला है और उसकी करुणा सदा की है, तब यहोवा के भवन मे बादल छा गया, 
2 Chronicles 5:14 और बादल के कारण याजक लोग सेवा-टहल करने को खड़े न रह सके, क्योंकि यहोवा का तेज परमेश्वर के भवन में भर गया था।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 21-24


मंगलवार, 21 जनवरी 2014

सच्चा मित्र


   अंग्रेज़ी भाषा के उन विशेषज्ञों ने, जो शब्दों के बदलते हुए अर्थों पर शोध करते रहते हैं, कुछ वर्ष पहले अंग्रेज़ी शब्द "unfriend" को New Oxford American Dictionary का उस वर्ष का खिताबी शब्द चुना। उन्होंने इस शब्द "unfriend" की परिभाषा एक क्रीया के रूप में इस प्रकार करी: "किसी को सोशल नेटवर्किंग साईट जैसे फेसबुक से अपने मित्रों की सूची से हटा देना।" ऐसी वेब साईट्स पर जो लोग मित्र सूची में सम्मिलित होते हैं वे अपने ’मित्रों’ की व्यक्तिगत जानकारियाँ देख सकते हैं, उनपर टिप्पणी कर सकते हैं। संभव है कि वे परस्पर एक दूसरे से कभी मिले भी ना हों और ना ही उन्होंने कभी कोई अभिवादन एक दूसरे से बाँटा हो, लेकिन उस साईट पर वे अपने मित्र की व्यक्तिगत जानकारी देख सकते हैं, उसे प्रयोग कर सकते हैं, और सरलता से एक दूसरे को मित्र सूची से हटा भी सकते हैं। आज के संसार में व्याप्त इंटरनैट पर परस्पर पहचान की अविश्वसनीयता और अस्थिरता ने लोगों को इस बात का एहसास दिलाया है कि वास्तविक और सच्चे मित्र रखना कितना अर्थपूर्ण है।

   जब प्रभु यीशु ने अपने चेलों को "मित्र" कहा (यूहन्ना 15:15) तो उसने एक अनूठे आपसी संबंध के संदर्भ में यह कहा, एक ऐसा संबंध जो एक दूसरे के प्रति विशवास और कटिबद्धता पर आधारित है। कुछ ही घंटों में प्रभु यीशु अपने प्राण बलिदान करने वाले थे (पद 13), और उन्होंने चेलों से कहा कि उनकी आज्ञाकारिता में बने रहकर वे अपनी मित्रता को प्रदर्शित करें (पद 15)। प्रभु यीशु द्वारा इस वार्तालाप में कहा गया एक कथन बहुत अद्भुत है: "अब से मैं तुम्हें दास न कहूंगा, क्योंकि दास नहीं जानता, कि उसका स्‍वामी क्या करता है: परन्तु मैं ने तुम्हें मित्र कहा है, क्योंकि मैं ने जो बातें अपने पिता से सुनीं, वे सब तुम्हें बता दीं" (यूहन्ना 15:15)।

   जब मित्रता सच्ची होती है तो एक मित्र दूसरे को उसकी आवश्यकता के समयों में सहारा दे कर निराश या भयभीत होने से बचाए रखता है। यही प्रभु यीशु उनके साथ करता है जो उसके साथ संबंध जोड़कर उसके मित्र हो जाते हैं - वह उनका सदा काल तक पूर्णतया विश्वासयोग्य एवं सच्चा मित्र बना रहता है, उन्हें कभी नहीं छोड़ता, उनकी चिंता करता है, उनकी सहायता करता है। क्या आपने प्रभु यीशु को अपना मित्र बनाया है? - डेविड मैक्कैसलैंड


इस संसार का हमारा सबसे अच्छा मित्र, प्रभु यीशु की मित्रता की तुलना में एक छाया मात्र ही है।

अब से मैं तुम्हें दास न कहूंगा, क्योंकि दास नहीं जानता, कि उसका स्‍वामी क्या करता है: परन्तु मैं ने तुम्हें मित्र कहा है, क्योंकि मैं ने जो बातें अपने पिता से सुनीं, वे सब तुम्हें बता दीं। - यूहन्ना 15:15

बाइबल पाठ: यूहन्ना 15:9-17
John 15:9 जैसा पिता ने मुझ से प्रेम रखा, वैसा ही मैं ने तुम से प्रेम रखा, मेरे प्रेम में बने रहो। 
John 15:10 यदि तुम मेरी आज्ञाओं को मानोगे, तो मेरे प्रेम में बने रहोगे: जैसा कि मैं ने अपने पिता की आज्ञाओं को माना है, और उसके प्रेम में बना रहता हूं। 
John 15:11 मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि मेरा आनन्द तुम में बना रहे, और तुम्हारा आनन्द पूरा हो जाए। 
John 15:12 मेरी आज्ञा यह है, कि जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा, वैसा ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो। 
John 15:13 इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे। 
John 15:14 जो कुछ मैं तुम्हें आज्ञा देता हूं, यदि उसे करो, तो तुम मेरे मित्र हो। 
John 15:15 अब से मैं तुम्हें दास न कहूंगा, क्योंकि दास नहीं जानता, कि उसका स्‍वामी क्या करता है: परन्तु मैं ने तुम्हें मित्र कहा है, क्योंकि मैं ने जो बातें अपने पिता से सुनीं, वे सब तुम्हें बता दीं। 
John 15:16 तुम ने मुझे नहीं चुना परन्तु मैं ने तुम्हें चुना है और तुम्हें ठहराया ताकि तुम जा कर फल लाओ; और तुम्हारा फल बना रहे, कि तुम मेरे नाम से जो कुछ पिता से मांगो, वह तुम्हें दे। 
John 15:17 इन बातें की आज्ञा मैं तुम्हें इसलिये देता हूं, कि तुम एक दूसरे से प्रेम रखो।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 18-20