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गुरुवार, 20 दिसंबर 2018

आनन्द



      जब जैनेट अंग्रजी की शिक्षिका बनकर विदेश के एक स्कूल में गई तो उसने पाया कि वहाँ का वातावरण निराशाजनक और उदासीन था। लोग अपने कार्य तो करते थे परन्तु कोई प्रसन्न नहीं लगता था। वे न तो एक दूसरे को प्रोत्साहित करते थे और न ही एक दूसरे की सहायता करते थे। परन्तु जैनेट, परमेश्वर के प्रति उसके प्रावधानों के लिए अपनी कृतज्ञता को अपने प्रत्येक कार्य द्वारा व्यक्त करती थी। वह मुस्कुराती थी; वह मित्रवत रहती थी; वह आगे बढ़कर लोगों की सहायता करती थी; और वह भजन गाती या गुनगुनाती रहती थी।

      जैनेट अपने आनन्द को लोगों के साथ बांटती रही और धीरे-धीरे करके स्कूल का वातावरण बदलने लगा। एक-एक करके लोग मुस्कुराने लगे और एक दूसरे की सहायता करने लगे। जब एक प्रशासनिक अधिकारी ने अपने दौरे के समय स्कूल के प्रधानाचार्य से पूछा कि उसका स्कूल औरों से इतना भिन्न क्यों है, तो उस प्रधानाचार्य ने, जो प्रभु यीशु में विश्वासी नहीं था, उत्तर दिया, “यीशु आनन्द लाता है।” जैनेट प्रभु यीशु के आनन्द से भरपूर थी और वह आनन्द उसके चारों ओर के लोगों पर छलक रहा था, प्रभु के द्वारा बदले हुए जैनेट के जीवने से प्रभु की गवाही दे रहा था।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में लूका रचित सुसमाचार हमें बताता है कि परमेश्वर ने स्वर्गदूतों को साधारण चरवाहों के पास असाधारण समाचार को लेकर भेजा। स्वर्गदूत ने चकित कर देने वाली घोषणा की, कि वह नवजात शिशु “सबके लिए आनन्द लेकर आएगा” (लूका 2:10), और उसने ऐसा ही किया भी।

      तब से लेकर अब तक, सदियों से यह समाचार, प्रभु यीशु के अनुयायियों के द्वारा सारे सँसार के सभी लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। प्रभु के लोगों में वास करने वाले परमेश्वर पवित्र आत्मा की अगुवाई में हम प्रभु यीशु के अनुयायी, प्रभु में मिलने वाले पापों की क्षमा और उद्धार के आनन्द के समाचार को दूसरों तक पहुंचाते हैं, और प्रभु के उदाहरण का अनुसरण करते हुए औरों की सेवा तथा सहायता करते हैं। - जूली एकरमैन लिंक


क्रिसमस के आनन्द को अपने साथ प्रतिदिन लेकर चलें।

तब स्वर्गदूत ने उन से कहा, मत डरो; क्योंकि देखो मैं तुम्हें बड़े आनन्द का सुसमाचार सुनाता हूं जो सब लोगों के लिये होगा। - लूका 2:10

बाइबल पाठ: यूहन्ना 16:16-24
John 16:16 थोड़ी देर तुम मुझे न देखोगे, और फिर थोड़ी देर में मुझे देखोगे।
John 16:17 तब उसके कितने चेलों ने आपस में कहा, यह क्या है, जो वह हम से कहता है, कि थोड़ी देर में तुम मुझे न देखोगे, और फिर थोड़ी देर में मुझे देखोगे? और यह इसलिये कि मैं पिता के पास जाता हूं?
John 16:18 तब उन्होंने कहा, यह थोड़ी देर जो वह कहता है, क्या बात है? हम नहीं जानते, कि क्या कहता है।
John 16:19 यीशु ने यह जानकर, कि वे मुझ से पूछना चाहते हैं, उन से कहा, क्या तुम आपस में मेरी इस बाते के विषय में पूछ पाछ करते हो, कि थोड़ी देर में तुम मुझे न देखोगे, और फिर थोड़ी देर में मुझे देखोगे।
John 16:20 मैं तुम से सच सच कहता हूं; कि तुम रोओगे और विलाप करोगे, परन्तु संसार आनन्द करेगा: तुम्हें शोक होगा, परन्तु तुम्हारा शोक आनन्द बन जाएगा।
John 16:21 जब स्त्री जनने लगती है तो उसको शोक होता है, क्योंकि उस की दु:ख की घड़ी आ पहुंची, परन्तु जब वह बालक जन्म चुकी तो इस आनन्द से कि जगत में एक मनुष्य उत्पन्न हुआ, उस संकट को फिर स्मरण नहीं करती।
John 16:22 और तुम्हें भी अब तो शोक है, परन्तु मैं तुम से फिर मिलूंगा और तुम्हारे मन में आनन्द होगा; और तुम्हारा आनन्द कोई तुम से छीन न लेगा।
John 16:23 उस दिन तुम मुझ से कुछ न पूछोगे: मैं तुम से सच सच कहता हूं, यदि पिता से कुछ मांगोगे, तो वह मेरे नाम से तुम्हें देगा।
John 16:24 अब तक तुम ने मेरे नाम से कुछ नहीं मांगा; मांगो तो पाओगे ताकि तुम्हारा आनन्द पूरा हो जाए।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • मीका 1-3
  • प्रकाशितवाक्य 11



बुधवार, 19 दिसंबर 2018

प्रेम



      जब 1950 में कोरिया में युद्ध छिड़ गया, तो पन्द्रह वर्षीय किम चिन-क्युंग ने दक्षिणी कोरिया की सेना में भर्ती ली कि अपने गृहभूमि की रक्षा करे। परन्तु उसने शीघ्र ही जान लिया कि वह युद्ध के विभीषिका के लिए तैयार नहीं था। अपने चारों ओर अपने युवा साथियों को मरते हुए देखकर उसने परमेश्वर से अपने प्राणों को बचाने की विनती की और प्रतिज्ञा की, कि यदि उसे जीने दिया जाता है, तो वह अपने शत्रुओं से भी प्रेम करना सीखेगा।

      पैंसठ वर्ष पश्चात, डॉ० किम ने उस उत्तर पाई हुई प्रार्थना के विषय विचार किया। दशकों से अनाथों की देखभाल करने तथा उत्तरी कोरिया एवँ चीन के युवाओं की शिक्षा में सहायक होने ने उन्हें उन लोगों में अनेकों मित्र दिए हैं, जिन्हें वे कभी अपने शत्रु समझते थे। आज वे किसी भी राजनितिक उपनाम से बच कर रहते हैं, और अपने आप को केवल प्रेम करने वाला कहा जाना पसन्द करते हैं।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में योना भविष्यद्वक्ता ने एक भिन्न प्रकार की स्मृति छोड़ी है। एक विशाल मछली के पेट से नाटकीय रीति से बचाए जाने ने भी उसके हृदय को नहीं बदला। यद्यपि उसने अन्ततः परमेश्वर की आज्ञा को मान लिया परन्तु फिर भी उसका कहना था कि वह प्रभु द्वारा उसके शत्रुओं को दया दिखाते हुए देखने के स्थान पर मरना अधिक पसन्द करेगा (योना 4:1-2, 8)।

      हम केवल अनुमान ही लगा सकते हैं कि क्या कभी योना ने निनवे के लोगों के प्रति प्रेम करना सीखा भी कि नहीं। परन्तु हमें अपने विषय भी विचार करना चाहिए – जिनसे हम भय रखते हैं या घृणा करते हैं, उनके प्रति कहीं हमारा भी योना के समान रवैया तो नहीं है? क्या हम डॉ० किम के समान परमेश्वर से प्रार्थना करते हैं कि हम अपने शत्रुओं के प्रति वैसे ही प्रेम दिखा सकें जैसा प्रेम प्रभु परमेश्वर ने हमारे प्रति दिखाया है? – मार्ट डीहॉन


प्रेम सब पर विजयी होता है।

यदि तुम अपने प्रेम रखने वालों के साथ प्रेम रखो, तो तुम्हारी क्या बड़ाई? क्योंकि पापी भी अपने प्रेम रखने वालों के साथ प्रेम रखते हैं। - लूका 6:32

बाइबल पाठ: योना 3:10-4:11
Jonah 3:10 जब परमेश्वर ने उनके कामों को देखा, कि वे कुमार्ग से फिर रहे हैं, तब परमेश्वर ने अपनी इच्छा बदल दी, और उनकी जो हानि करने की ठानी थी, उसको न किया।
Jonah 4:1 यह बात योना को बहुत ही बुरी लगी, और उसका क्रोध भड़का।
Jonah 4:2 और उसने यहोवा से यह कह कर प्रार्थना की, हे यहोवा जब मैं अपने देश में था, तब क्या मैं यही बात न कहता था? इसी कारण मैं ने तेरी आज्ञा सुनते ही तर्शीश को भाग जाने के लिये फुर्ती की; क्योंकि मैं जानता था कि तू अनुग्रहकारी और दयालु परमेश्वर है, विलम्ब से कोप करने वाला करूणानिधान है, और दु:ख देने से प्रसन्न नहीं होता।
Jonah 4:3 सो अब हे यहोवा, मेरा प्राण ले ले; क्योंकि मेरे लिये जीवित रहने से मरना ही भला है।
Jonah 4:4 यहोवा ने कहा, तेरा जो क्रोध भड़का है, क्या वह उचित है?
Jonah 4:5 इस पर योना उस नगर से निकल कर, उसकी पूरब ओर बैठ गया; और वहां एक छप्पर बना कर उसकी छाया में बैठा हुआ यह देखने लगा कि नगर को क्या होगा?
Jonah 4:6 तब यहोवा परमेश्वर ने एक रेंड़ का पेड़ लगा कर ऐसा बढ़ाया कि योना के सिर पर छाया हो, जिस से उसका दु:ख दूर हो। योना उस रेंड़ के पेड़ के कारण बहुत ही आनन्दित हुआ।
Jonah 4:7 बिहान को जब पौ फटने लगी, तब परमेश्वर ने एक कीड़े को भेजा, जिसने रेंड़ का पेड़ ऐसा काटा कि वह सूख गया।
Jonah 4:8 जब सूर्य उगा, तब परमेश्वर ने पुरवाई बहा कर लू चलाई, और घाम योना के सिर पर ऐसा लगा कि वह मूर्च्छा खाने लगा; और उसने यह कह कर मृत्यु मांगी, मेरे लिये जीवित रहने से मरना ही अच्छा है।
Jonah 4:9 परमेश्वर ने योना से कहा, तेरा क्रोध, जो रेंड़ के पेड़ के कारण भड़का है, क्या वह उचित है? उसने कहा, हां, मेरा जो क्रोध भड़का है वह अच्छा ही है, वरन क्रोध के मारे मरना भी अच्छा होता।
Jonah 4:10 तब यहोवा ने कहा, जिस रेंड़ के पेड़ के लिये तू ने कुछ परिश्रम नहीं किया, न उसको बढ़ाया, जो एक ही रात में हुआ, और एक ही रात में नाश भी हुआ; उस पर तू ने तरस खाया है।
Jonah 4:11 फिर यह बड़ा नगर नीनवे, जिस में एक लाख बीस हजार से अधिक मनुष्य हैं, जो अपने दाहिने बाएं हाथों का भेद नहीं पहिचानते, और बहुत घरेलू पशु भी उस में रहते हैं, तो क्या मैं उस पर तरस न खाऊं?
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • योना 1-4
  • प्रकाशितवाक्य 10



मंगलवार, 18 दिसंबर 2018

कौन?



      अखबार Saturday Evening Post को सन 1929 में दिए गए एक साक्षात्कार में प्रसिद्ध वैज्ञानिक एल्बर्ट आइंस्टाइन ने कहा, “बचपन में मुझे बाइबल और तालमूद (यहूदी धर्म साहित्य) दोनों ही की शिक्षा दी गई। मैं यहूदी हूँ, परन्तु मैं नासरी (यीशु) के ज्योतिर्मय व्यक्तित्व से मंत्रमुग्ध हूँ...कोई भी सुसमाचारों को पढ़ते हुए यीशु की उपस्थिति का एहसास किए बिना नहीं रहा सकता है। उसका व्यक्तित्व प्रत्येक शब्द में धड़कता है। कोई भी मिथक ऐसे जीवन से भरा नहीं हो सकता है।”

      परमेश्वर के वचन बाइबल के नए नियम खण्ड में हमें प्रभु यीशु के साथी निवासियों के अन्य उदाहरण मिलते हैं जिन्हें इसका आभास हुआ कि प्रभु यीशु में कुछ विशेष है। जब प्रभु यीशु ने अपने अनुयायियों से पूछा, “लोग मनुष्य के पुत्र को क्या कहते हैं?” तो उन्होंने उत्तर दिया कि कुछ यूहन्ना बपतिस्मा देने वाला, कुछ एल्लियाह, और अन्य उसे यिर्मयाह या कोई अन्य भविष्यद्वक्ता समझते हैं (मत्ती 16:13-14)। इस्राएल के महान भविष्यद्वक्ताओं में से एक कहलाया जाना निश्चय ही बड़े सम्मान की बात थी, परन्तु प्रभु यीशु किसी सम्मान की खोज में नहीं थे। वे उनकी समझ और विश्वास को परख रहे थे। इसलिए उन्होंने एक दूसरा प्रश्न पूछा: “परन्तु तुम मुझे क्या कहते हो?” (पद 15)?

      पतरस के उत्तर ने प्रभु यीशु के व्यक्तित्व के सत्य को उजागर किया: “तू जीवते परमेश्वर का पुत्र मसीह है” (पद 16)।

      प्रभु यीशु मसीह की लालसा है कि हम और सँसार के सभी लोग उसे तथा उसके उद्धार देने वाले प्रेम को जानें; और जो जान गए हैं वे औरों को उसके बारे में बताएँ। क्योंकि इस प्रश्न का उत्तर और उसके अनुसार किया गया विश्वास प्रत्येक मनुष्य के अनन्तकाल को निर्धारित करता है। इसीलिए हम में से प्रत्येक के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है कि हम जान लें कि यीशु कौन है, और उसके अनुसार अपने जीवन का निर्णय लें। - बिल क्राउडर


अनन्तता के लिए प्रभु यीशु मसीह की पहचान ही केन्द्र-बिंदु है।

और मैं उसको और उसके मृत्युंजय की सामर्थ को, और उसके साथ दुखों में सहभागी हाने के मर्म को जानूँ, और उस की मृत्यु की समानता को प्राप्त करूं। ताकि मैं किसी भी रीति से मरे हुओं में से जी उठने के पद तक पहुंचूं। - फिलिप्पियों 3:10-11

बाइबल पाठ: मत्ती 16:13-20
Matthew 16:13 यीशु कैसरिया फिलिप्पी के देश में आकर अपने चेलों से पूछने लगा, कि लोग मनुष्य के पुत्र को क्या कहते हैं?
Matthew 16:14 उन्होंने कहा, कितने तो यूहन्ना बपतिस्मा देने वाला कहते हैं और कितने एलिय्याह, और कितने यिर्मयाह या भविष्यद्वक्ताओं में से कोई एक कहते हैं।
Matthew 16:15 उसने उन से कहा; परन्तु तुम मुझे क्या कहते हो?
Matthew 16:16 शमौन पतरस ने उत्तर दिया, कि तू जीवते परमेश्वर का पुत्र मसीह है।
Matthew 16:17 यीशु ने उसको उत्तर दिया, कि हे शमौन योना के पुत्र, तू धन्य है; क्योंकि मांस और लोहू ने नहीं, परन्तु मेरे पिता ने जो स्वर्ग में है, यह बात तुझ पर प्रगट की है।
Matthew 16:18 और मैं भी तुझ से कहता हूं, कि तू पतरस है; और मैं इस पत्थर पर अपनी कलीसिया बनाऊंगा: और अधोलोक के फाटक उस पर प्रबल न होंगे।
Matthew 16:19 मैं तुझे स्वर्ग के राज्य की कुंजियां दूंगा: और जो कुछ तू पृथ्वी पर बान्‍धेगा, वह स्वर्ग में बन्‍धेगा; और जो कुछ तू पृथ्वी पर खोलेगा, वह स्वर्ग में खुलेगा।
Matthew 16:20 तब उसने चेलों को चिताया, कि किसी से न कहना! कि मैं मसीह हूं।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • ओबद्याह
  • प्रकाशितवाक्य 9



सोमवार, 17 दिसंबर 2018

ढांपने वाला



      जब हम प्रभु यीशु मसीह में विश्वास की बात करते हैं तो कभी-कभी शब्दों का प्रयोग बिना उन्हें समझे या समझाए कर लेते हैं। ऐसा ही एक शब्द है “धर्मी”। हम कहते हैं परमेश्वर में “धार्मिकता” है और वह लोगों को धर्मी बनाता है, परंतु इस विचार को समझना और स्वीकार करना कठिन हो सकता है।

      चीनी भाषा में जिस प्रकार से “धार्मिकता” को दिखाया जाता है वह इसके तात्पर्य को समझाने में सहायक है। चीनी भाषा में, जो ऊपर से नीचे की ओर लिखी और पढ़ी जाती है, यह शब्द दो शब्दों के मेल से बना है। ऊपर वाला शब्द ‘मेमना’ है, और नीचे वाला शब्द ‘मैं’ है – मेमना व्यक्ति की ऊपर है, उसे ढाँपे हुए है।

      जब प्रभु यीशु इस सँसार में आए तो यूहन्ना बपतिस्मा देने वाले ने उनके विषय कहा, “परमेश्वर का मेमना, जो जगत के पाप उठा ले जाता है!” (यूहन्ना 1:29)। हमें हमारे पापों के निवारण की आवश्यकता है क्योंकि पाप हमें परमेश्वर से, जो सर्वसिद्ध और सदा सही है, पृथक करते हैं। हमारे प्रति परमेश्वर के महान प्रेम के अन्तर्गत, परमेश्वर ने अपने पुत्र प्रभु यीशु को “जो पाप से अज्ञात था, उसी को उसने हमारे लिये पाप ठहराया, कि हम उस में हो कर परमेश्वर की धामिर्कता बन जाएं” (2 कुरिन्थियों 5:21)। परमेश्वर के मेमने, प्रभु यीशु ने हमारे पापों के लिए अपने आप को बलिदान कर दिया, उसके बहाए गए लहू से हम ढाँप दिए गए, हमारे पाप धो दिए गए। इस प्रकार मिली पापों की क्षमा और मुक्ति से हम धर्मी ठहरे, जिससे हमें परमेश्वर के साथ एक सही संबंध में होने का आदर मिलता है।

      परमेश्वर के साथ सही संबंध में होना, धर्मी होना, हमारे किन्ही कर्मों के द्वारा नहीं वरन प्रभु के अनुग्रह द्वारा हमें प्रदान किया गया उपहार है। मेमना यीशु, हमें ढाँपने के लिए, हमारे पापों के निवारण के लिए परमेश्वर का उपाय है। - ऐनी सेटास


पाप के लिए एकमात्र स्थाई आवरण प्रभु यीशु का लहू है।

परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा। सो जब कि हम, अब उसके लोहू के कारण धर्मी ठहरे, तो उसके द्वारा क्रोध से क्यों न बचेंगे? क्योंकि बैरी होने की दशा में तो उसके पुत्र की मृत्यु के द्वारा हमारा मेल परमेश्वर के साथ हुआ फिर मेल हो जाने पर उसके जीवन के कारण हम उद्धार क्यों न पाएंगे? – रोमियों 5:8-10

बाइबल पाठ: रोमियों 3:19-27
Romans 3:19 हम जानते हैं, कि व्यवस्था जो कुछ कहती है उन्हीं से कहती है, जो व्यवस्था के आधीन हैं: इसलिये कि हर एक मुंह बन्द किया जाए, और सारा संसार परमेश्वर के दण्ड के योग्य ठहरे।
Romans 3:20 क्योंकि व्यवस्था के कामों से कोई प्राणी उसके साम्हने धर्मी नहीं ठहरेगा, इसलिये कि व्यवस्था के द्वारा पाप की पहिचान होती है।
Romans 3:21 पर अब बिना व्यवस्था परमेश्वर की वह धामिर्कता प्रगट हुई है, जिस की गवाही व्यवस्था और भविष्यद्वक्ता देते हैं।
Romans 3:22 अर्थात परमेश्वर की वह धामिर्कता, जो यीशु मसीह पर विश्वास करने से सब विश्वास करने वालों के लिये है; क्योंकि कुछ भेद नहीं।
Romans 3:23 इसलिये कि सब ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं।
Romans 3:24 परन्तु उसके अनुग्रह से उस छुटकारे के द्वारा जो मसीह यीशु में है, सेंत मेंत धर्मी ठहराए जाते हैं।
Romans 3:25 उसे परमेश्वर ने उसके लोहू के कारण एक ऐसा प्रायश्चित्त ठहराया, जो विश्वास करने से कार्यकारी होता है, कि जो पाप पहिले किए गए, और जिन की परमेश्वर ने अपनी सहनशीलता से आनाकानी की; उन के विषय में वह अपनी धामिर्कता प्रगट करे।
Romans 3:26 वरन इसी समय उस की धामिर्कता प्रगट हो; कि जिस से वह आप ही धर्मी ठहरे, और जो यीशु पर विश्वास करे, उसका भी धर्मी ठहराने वाला हो।
Romans 3:27 तो घमण्ड करना कहां रहा उस की तो जगह ही नहीं: कौन सी व्यवस्था के कारण से? क्या कर्मों की व्यवस्था से? नहीं, वरन विश्वास की व्यवस्था के कारण।
                                                                                                                                                        

एक साल में बाइबल: 
  • अमोस 7-9
  • प्रकाशितवाक्य 8



रविवार, 16 दिसंबर 2018

वचन



      वयस्कों के लिए आयोजित हमारे कैम्प की विषय-वस्तु थी “मेरे लोगों को दिलासा दो” और इस विषय पर एक के बाद एक प्रचारकों ने आश्वस्त करने वाले सन्देश दिए। परन्तु अंतिम प्रचारक ने संदेशों के भाव को बिलकुल बदल दिया। उसने अपने सन्देश के लिए परमेश्वर के वचन, बाइबल से यिर्मयाह 7:1-11 को लिया, और उसके सन्देश का शीर्षक था “नींद से जागो।” बिना शब्दों के साथ कोई समझौता किए, किन्तु प्रेम के साथ उसने हमें चुनौती दी कि हम अपनी नींद से जागें और अपने पापों से फिरें।

      उसने यिर्मयाह नबी के समान, आग्रह किया कि हम, “परमेश्वर के अनुग्रह के पीछे छिप कर गुप्त पापों में जीवन व्यतीत नहीं करते रहें। हम गर्व से दावा करते हैं, ‘मैं मसीही विश्वासी हूँ; परमेश्वर मुझसे प्रेम करता है; मैं किसी बुराई से भयभीत नहीं होता हूँ,’ परन्तु फिर भी हम अनेकों प्रकार की बुराईयां करते रहते हैं।”

      हम श्रोता जानते थे कि वह प्रचारक हमारा हितैशी है, फिर भी हम अपने अपने स्थान पर कसमसा रहे थे, हमारे अन्दर का यिर्मयाह हम से बातें कर रहा था और कह रहा था “परमेश्वर प्रेमी है, परन्तु वह भस्म करने वाली आग भी है! वह पाप के साथ कभी समझौता नहीं करता है! (इब्रानियों 12:29 देखें)।”

      प्राचीन काल के यिर्मयाह ने तब के इस्राएलियों से प्रश्न किया था, “तुम जो चोरी, हत्या और व्यभिचार करते, झूठी शपथ खाते, बाल देवता के लिये धूप जलाते, और दूसरे देवताओं के पीछे जिन्हें तुम पहिले नहीं जानते थे चलते हो, तो क्या यह उचित है कि तुम इस भवन में आओ जो मेरा कहलाता है, और मेरे साम्हने खड़े हो कर यह कहो कि हम इसलिये छूट गए हैं कि ये सब घृणित काम करें?” (7:9-10)।

      इस प्रचारक का “मेरे लोगों को दिलासा दो” अलग ही तरह का दिलासा था, वह परमेश्वर में मिलने वाली दिलासा के एक भिन्न पहलू के विषय था। उसका सन्देश उस कडुवी औषधि के समान था जो अरुचिकर तो होती है किन्तु रोग से चँगा भी करती है; उसके शब्द आत्मिक चंगाई देने वाले थे। जब हम कटु वचन सुनते हैं तो उनसे मुँह फेरकर चले जाने के स्थान पर, हमें उनके चंगाई देने वाले प्रभाव के लिए उन्हें ग्रहण करना चाहिए, अपने आप को सुधारना चाहिए। - लॉरेंस दर्मानी


परमेश्वर का अनुशासन हमें उसके पुत्र के समान बनाने के लिए होता है।

क्योंकि प्रभु, जिस से प्रेम करता है, उस की ताड़ना भी करता है; और जिसे पुत्र बना लेता है, उसको कोड़े भी लगाता है। तुम दुख को ताड़ना समझकर सह लो: परमेश्वर तुम्हें पुत्र जान कर तुम्हारे साथ बर्ताव करता है, वह कौन सा पुत्र है, जिस की ताड़ना पिता नहीं करता? – इब्रानियों 12:6-7

बाइबल पाठ: यिर्मयाह 7:1-11
Jeremiah 7:1 जो वचन यहोवा की ओर से यिर्मयाह के पास पहुंचा वह यह है:
Jeremiah 7:2 यहोवा के भवन के फाटक में खड़ा हो, और यह वचन प्रचार कर, और कह, हे सब यहूदियो, तुम जो यहोवा को दण्डवत करने के लिये इन फाटकों से प्रवेश करते हो, यहोवा का वचन सुनो।
Jeremiah 7:3 सेनाओं का यहोवा जो इस्राएल का परमेश्वर है, यों कहता है, अपनी अपनी चाल और काम सुधारो, तब मैं तुम को इस स्थान में बसे रहने दूंगा।
Jeremiah 7:4 तुम लोग यह कह कर झूठी बातों पर भरोसा मत रखो, कि यही यहोवा का मन्दिर है; यही यहोवा का मन्दिर, यहोवा का मन्दिर।
Jeremiah 7:5 यदि तुम सचमुच अपनी अपनी चाल और काम सुधारो, और सचमुच मनुष्य-मनुष्य के बीच न्याय करो,
Jeremiah 7:6 परदेशी और अनाथ और विधवा पर अन्धेर न करो; इस स्थान में निर्दोष की हत्या न करो, और दूसरे देवताओं के पीछे न चलो जिस से तुम्हारी हानि होती है,
Jeremiah 7:7 तो मैं तुम को इस नगर में, और इस देश में जो मैं ने तुम्हारे पूर्वजों को दिया था, युग युग के लिये रहने दूंगा।
Jeremiah 7:8 देखो, तुम झूठी बातों पर भरोसा रखते हो जिन से कुछ लाभ नहीं हो सकता।
Jeremiah 7:9 तुम जो चोरी, हत्या और व्यभिचार करते, झूठी शपथ खाते, बाल देवता के लिये धूप जलाते, और दूसरे देवताओं के पीछे जिन्हें तुम पहिले नहीं जानते थे चलते हो,
Jeremiah 7:10 तो क्या यह उचित है कि तुम इस भवन में आओ जो मेरा कहलाता है, और मेरे साम्हने खड़े हो कर यह कहो कि हम इसलिये छूट गए हैं कि ये सब घृणित काम करें?
Jeremiah 7:11 क्या यह भवन जो मेरा कहलाता है, तुम्हारी दृष्टि में डाकुओं की गुफ़ा हो गया है? मैं ने स्वयं यह देखा है, यहोवा की यह वाणी है।
                                                                                                                                                        

एक साल में बाइबल: 
  • अमोस 4-6
  • प्रकाशितवाक्य 7



शनिवार, 15 दिसंबर 2018

निद्रा



      बीते समय के एक स्कॉटिश पास्टर, हेनरी डरबनविले, अपनी कलीसिया की एक वृद्ध महिला की कहानी बताया करते थे, जो स्कॉटलैंड के एक सुदूर क्षेत्र में रहती थी। उसकी बड़ी लालसा थी कि वह एडिनबरा शहर को देखे परन्तु यात्रा करने से डरती थी, क्योंकि यात्रा के दौरान ट्रेन को एक लंबी और अंधेरी सुरंग से होकर निकालना होता था।

      परन्तु एक दिन कुछ परिस्थितियों ने उसे बाध्य कर दिया और उसे एडिनबरा जाना ही पड़ा। जैसे जैसे ट्रेन शहर की ओर बढ़ती जाती थी, उसकी घबराहट भी बढ़ती जाती थी। परन्तु ट्रेन के उस सुरंग तक पहुँचने से पहले ही, वह महिला थकान के मारे सो गई; और जब उसकी आँख ख्हुली तो ट्रेन सुरंग से सुरंग निकल चुकी थी, और वह एडिनबरा शहर में पहुँच चुकी थी।

      यह संभव है कि हम में से कुछ मृत्यु का अनुभव नहीं करेंगे। जब प्रभु यीशु मसीह का आगमन होगा तब जो मसीही विश्वासी जीवित हैं, वे “हवा में प्रभु से मिलेंगे” (1 थिस्सलुनीकियों 4:17)। परन्तु हम में से अधिकांश मृत्यु से होकर स्वर्ग पहुँचेंगे। बहुतेरों के लिए यह विचार बहुत घबराहट उत्पन्न करता है। उन्हें लगता है कि मृत्यु की प्रक्रिया सहन करना उन के लिए बहुत कठिन होगा।

      अपने उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह के आश्वासन द्वारा हम निश्चिन्त रह सकते हैं कि जब भी हम आपनी आँखे मूंद कर मृत्यु से होते हुए स्वर्ग जाएँगे, उस निद्रा से हमारी आंखे हमारे प्रभु परमेश्वर की उपस्थिति में खुलेंगी। जैसा जौन डॉन ने कहा “एक छोटी सी निद्रा के पश्चात हम अनानात्काल के लिए जाग उठेंगे।” – डेविड रोपर


स्वर्ग का सबसे महान आनन्द प्रभु यीशु को देखना, उसके साथ होना, होगा।

इसलिये हम ढाढ़स बान्‍धे रहते हैं, और देह से अलग हो कर प्रभु के साथ रहना और भी उत्तम समझते हैं। - 2 कुरिन्थियों 5:8

बाइबल पाठ: 1 थिस्सलुनीकियों 4:13-18
1 Thessalonians 4:13 हे भाइयों, हम नहीं चाहते, कि तुम उनके विषय में जो सोते हैं, अज्ञात रहो; ऐसा न हो, कि तुम औरों के समान
 शोक करो जिन्हें आशा नहीं।
1 Thessalonians 4:14 क्योंकि यदि हम प्रतीति करते हैं, कि यीशु मरा, और जी भी उठा, तो वैसे ही परमेश्वर उन्हें भी जो यीशु में सो गए हैं, उसी के साथ ले आएगा।
1 Thessalonians 4:15 क्योंकि हम प्रभु के वचन के अनुसार तुम से यह कहते हैं, कि हम जो जीवित हैं, और प्रभु के आने तक बचे रहेंगे तो सोए हुओं से कभी आगे न बढ़ेंगे।
1 Thessalonians 4:16 क्योंकि प्रभु आप ही स्वर्ग से उतरेगा; उस समय ललकार, और प्रधान दूत का शब्द सुनाई देगा, और परमेश्वर की तुरही फूंकी जाएगी, और जो मसीह में मरे हैं, वे पहिले जी उठेंगे।
1 Thessalonians 4:17 तब हम जो जीवित और बचे रहेंगे, उन के साथ बादलों पर उठा लिये जाएंगे, कि हवा में प्रभु से मिलें, और इस रीति से हम सदा प्रभु के साथ रहेंगे।
1 Thessalonians 4:18 सो इन बातों से एक दूसरे को शान्‍ति दिया करो।
                                                                                                                                                        

एक साल में बाइबल: 
  • अमोस 1-3
  • प्रकाशितवाक्य 6



शुक्रवार, 14 दिसंबर 2018

ज्योति



      वह अंधकारमय सुबह थी; आकाश पर बादल छाए हुए थे, और वातावरण अन्धेरा होने के कारण मुझे पुस्तक पढ़ने के लिए बत्ती जलानी पड़ी। मैंने पढ़ना आरंभ ही किया था, कि कमरे में रौशनी भर गई। मैंने आँखें उठाकर देखा तो पाया कि हवा बादलों को उड़ा ले जा रही थी, आकाश खुलने लगा था और चमकते हुए सूरज की ज्योति छाने लग गई थी।

      मैं यह दृश्य देखने के लिए खिड़की तक गया, और मेरे मन में एक विचार आया: मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित यूहन्ना द्वारा अपनी पहली पत्री में लिखा एक पद स्मरण हो आया – “...क्योंकि अन्धकार मिटता जाता है और सत्य की ज्योति अभी चमकने लगी है” (1 यूहन्ना 2:8)। प्रेरित ने ये शब्द मसीही विश्वासियों को प्रोत्साहित करने के लिए लिखे थे। उसने आगे कहा, “जो कोई अपने भाई से प्रेम रखता है, वह ज्योति में रहता है, और ठोकर नहीं खा सकता” (पद 10)। इसकी तुलना में उसने लोगों से घृणा करने को अन्धकार में भटकने के समान कहा। घृणा दिशा को भ्रमित कर देने वाली होती है: वह हमारे नैतिक दिशा बोध को बिगाड़ देती है।

      लोगों से प्रेम करना सदा ही सरल नहीं होता है। खिड़की से बाहर देखते हुए मुझे ध्यान आया कि कुंठा, क्षमा, और विश्वासयोग्यता सभी परमेश्वर के प्रेम और ज्योति के साथ गहन संपर्क बनाए रखने के भाग हैं। जब हम घृणा के स्थान पर प्रेम का चुनाव करते हैं, तब हम उसके साथ अपने संबंध को दिखाते हैं, और उसकी ज्योति को अपने चारों ओर के सँसार पर प्रतिबिंबित करते हैं: “जो समाचार हम ने उस से सुना, और तुम्हें सुनाते हैं, वह यह है; कि परमेश्वर ज्योति है: और उस में कुछ भी अन्धकार नहीं” (1 यूहन्ना 1:5)। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


लोगों से प्रेम करने का चुनाव करना सँसार को दिखाता है कि परमेश्वर कैसा है।

हे बालकों, हम वचन और जीभ ही से नहीं, पर कार्य और सत्य के द्वारा भी प्रेम करें। - 1 यूहन्ना 3:18

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 2:3-11
1 John 2:3 यदि हम उस की आज्ञाओं को मानेंगे, तो इस से हम जान लेंगे कि हम उसे जान गए हैं।
1 John 2:4 जो कोई यह कहता है, कि मैं उसे जान गया हूं, और उस की आज्ञाओं को नहीं मानता, वह झूठा है; और उस में सत्य नहीं।
1 John 2:5 पर जो कोई उसके वचन पर चले, उस में सचमुच परमेश्वर का प्रेम सिद्ध हुआ है: हमें इसी से मालूम होता है, कि हम उस में हैं।
1 John 2:6 सो कोई यह कहता है, कि मैं उस में बना रहता हूं, उसे चाहिए कि आप भी वैसा ही चले जैसा वह चलता था।
1 John 2:7 हे प्रियों, मैं तुम्हें कोई नई आज्ञा नहीं लिखता, पर वही पुरानी आज्ञा जो आरम्भ से तुम्हें मिली है; यह पुरानी आज्ञा वह वचन है, जिसे तुम ने सुना है।
1 John 2:8 फिर मैं तुम्हें नई आज्ञा लिखता हूं; और यह तो उस में और तुम में सच्ची ठहरती है; क्योंकि अन्धकार मिटता जाता है और सत्य की ज्योति अभी चमकने लगी है।
1 John 2:9 जो कोई यह कहता है, कि मैं ज्योति में हूं; और अपने भाई से बैर रखता है, वह अब तक अन्धकार ही में है।
1 John 2:10 जो कोई अपने भाई से प्रेम रखता है, वह ज्योति में रहता है, और ठोकर नहीं खा सकता।
1 John 2:11 पर जो कोई अपने भाई से बैर रखता है, वह अन्धकार में है, और अन्धकार में चलता है; और नहीं जानता, कि कहां जाता है, क्योंकि अन्धकार ने उस की आंखे अन्‍धी कर दी हैं।
                                                                                                                                                        

एक साल में बाइबल: 
  • योएल 1-3
  • प्रकाशितवाक्य 5