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रविवार, 28 फ़रवरी 2021

प्रेम और दया

 

          स्थानीय समाचार पत्र में छपा लेख छोटा, किन्तु हृदय-स्पर्शी था। बंदी-गृह में कैदियों के लिए आयोजित किए गए एक कार्यक्रम में, जिसमें मसीही विश्वास पर आधारित होकर अच्छे और दृढ़ पारिवारिक संबंध बनाने के बारे में बताया गया, उस कार्यक्रम में भाग लेने वाले कैदियों के लिए एक विशेष प्रयोजन किया गया – उन्हें काँच की दीवारों के पीछे से नहीं वरन खुले में अपने परिवारों से मिलने का समय दिया गया। उन में से कुछ ऐसे थे जिन्होंने अपने बच्चों को वर्षों से नहीं देखा था। परिवारों के लोगों को एक दूसरे से गले मिलने, एक-दूसरे को छूने, उनके हाथ थामने का यह एक अभूतपूर्व अवसर था। ऐसा करने में वे लोग बे-झिझक होकर, खुलकर रो रहे थे; वहाँ से बहुत से परिवार के लोग परस्पर एक-दूसरे के निकट आने लगे और मनों के घाव भरने आरंभ हुए।

          समाचार-पत्र के अधिकांश पाठकों के लिए यह घटना एक कहानी-मात्र थी; परन्तु इन परिवारों के लिए, एक-दूसरे को छूना और मिलना, जीवन परिवर्तन करने वाली घटना थी – और कुछ लोगों के लिए क्षमा और मेल-मिलाप की प्रक्रिया के आरंभ होने का समय था।

          परमेश्वर के वचन बाइबल हमें बताती है कि प्रभु यीशु मसीह में विश्वास लाने के द्वारा हमें पापों से क्षमा प्रदान करने और उसके साथ मेल-मिलाप कर लेने के लिए जो मार्ग परमेश्वर ने बना कर दिया है, वह मसीही विश्वास का एक तथ्य मात्र ही नहीं है। समाचार पत्र के उस लेख में मेल-मिलाप होने का समाचार हमें स्मरण करवाता है कि प्रभु यीशु का बलिदान एक अति महान समाचार है, न केवल मेरे और आप के लिए, वरन समस्त संसार के लिए भी।

           जब हम अपने आप को, स्वयं द्वारा किए गए किसी गलत कार्य के दोष के एहसास से अभिभूत अनुभव करते हैं, प्रभु यीशु के हमारे लिए दिए गए बलिदान की बात, वह दृढ़ चट्टान होती है जिस पर आकर हम अपने आप को स्थिर कर सकते हैं। यही वह समय होता है जब परमेश्वर की कभी अन्त न होने वाली दया का तथ्य हमारे लिए व्यक्तिगत हो जाता है। क्योंकि प्रभु यीशु ने हमारे पापों की कीमत कलवरी के क्रूस पर पूर्णतः चुका दी है, इसलिए अब प्रभु में होकर हम पिता के सामने धुले हुए, शुद्ध, और “हिम से भी श्वेत” (भजन 51:7) होकर आ सकते हैं। ऐसे समयों में भी, जब हम जानते हैं कि हम परमेश्वर की दया के योग्य नहीं हैं, हम इस एक बात को फिर भी बिना किसी संदेह के थामे रह सकते हैं – प्रभु यीशु मसीह में होकर हमारे प्रति परमेश्वर का कभी न टलने वाला प्रेम और उसकी सदैव उपलब्ध रहने वाली दया। - लेसली कोह

 

प्रभु यीशु में पापों की क्षमा केवल महान समाचार ही नहीं है; 

यह अद्भुत, जीवन बदलने वाला सुसमाचार है।


परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा। सो जब कि हम, अब उसके लहू के कारण धर्मी ठहरे, तो उसके द्वारा क्रोध से क्यों न बचेंगे? - रोमियों 5:8-9

बाइबल पाठ: भजन 51:1-7

भजन 51:1 हे परमेश्वर, अपनी करुणा के अनुसार मुझ पर अनुग्रह कर; अपनी बड़ी दया के अनुसार मेरे अपराधों को मिटा दे।

भजन 51:2 मुझे भली भांति धोकर मेरा अधर्म दूर कर, और मेरा पाप छुड़ाकर मुझे शुद्ध कर!

भजन 51:3 मैं तो अपने अपराधों को जानता हूं, और मेरा पाप निरन्तर मेरी दृष्टि में रहता है।

भजन 51:4 मैं ने केवल तेरे ही विरुद्ध पाप किया, और जो तेरी दृष्टि में बुरा है, वही किया है, ताकि तू बोलने में धर्मी और न्याय करने में निष्कलंक ठहरे।

भजन 51:5 देख, मैं अधर्म के साथ उत्पन्न हुआ, और पाप के साथ अपनी माता के गर्भ में पड़ा।

भजन 51:6 देख, तू हृदय की सच्चाई से प्रसन्न होता है; और मेरे मन ही में ज्ञान सिखाएगा।

भजन 51:7 जूफा से मुझे शुद्ध कर, तो मैं पवित्र हो जाऊंगा; मुझे धो, और मैं हिम से भी अधिक श्वेत बनूंगा।

 

एक साल में बाइबल: 

  • गिनती 20-22
  • मरकुस 7:1-13

गुरुवार, 20 दिसंबर 2018

आनन्द



      जब जैनेट अंग्रजी की शिक्षिका बनकर विदेश के एक स्कूल में गई तो उसने पाया कि वहाँ का वातावरण निराशाजनक और उदासीन था। लोग अपने कार्य तो करते थे परन्तु कोई प्रसन्न नहीं लगता था। वे न तो एक दूसरे को प्रोत्साहित करते थे और न ही एक दूसरे की सहायता करते थे। परन्तु जैनेट, परमेश्वर के प्रति उसके प्रावधानों के लिए अपनी कृतज्ञता को अपने प्रत्येक कार्य द्वारा व्यक्त करती थी। वह मुस्कुराती थी; वह मित्रवत रहती थी; वह आगे बढ़कर लोगों की सहायता करती थी; और वह भजन गाती या गुनगुनाती रहती थी।

      जैनेट अपने आनन्द को लोगों के साथ बांटती रही और धीरे-धीरे करके स्कूल का वातावरण बदलने लगा। एक-एक करके लोग मुस्कुराने लगे और एक दूसरे की सहायता करने लगे। जब एक प्रशासनिक अधिकारी ने अपने दौरे के समय स्कूल के प्रधानाचार्य से पूछा कि उसका स्कूल औरों से इतना भिन्न क्यों है, तो उस प्रधानाचार्य ने, जो प्रभु यीशु में विश्वासी नहीं था, उत्तर दिया, “यीशु आनन्द लाता है।” जैनेट प्रभु यीशु के आनन्द से भरपूर थी और वह आनन्द उसके चारों ओर के लोगों पर छलक रहा था, प्रभु के द्वारा बदले हुए जैनेट के जीवने से प्रभु की गवाही दे रहा था।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में लूका रचित सुसमाचार हमें बताता है कि परमेश्वर ने स्वर्गदूतों को साधारण चरवाहों के पास असाधारण समाचार को लेकर भेजा। स्वर्गदूत ने चकित कर देने वाली घोषणा की, कि वह नवजात शिशु “सबके लिए आनन्द लेकर आएगा” (लूका 2:10), और उसने ऐसा ही किया भी।

      तब से लेकर अब तक, सदियों से यह समाचार, प्रभु यीशु के अनुयायियों के द्वारा सारे सँसार के सभी लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। प्रभु के लोगों में वास करने वाले परमेश्वर पवित्र आत्मा की अगुवाई में हम प्रभु यीशु के अनुयायी, प्रभु में मिलने वाले पापों की क्षमा और उद्धार के आनन्द के समाचार को दूसरों तक पहुंचाते हैं, और प्रभु के उदाहरण का अनुसरण करते हुए औरों की सेवा तथा सहायता करते हैं। - जूली एकरमैन लिंक


क्रिसमस के आनन्द को अपने साथ प्रतिदिन लेकर चलें।

तब स्वर्गदूत ने उन से कहा, मत डरो; क्योंकि देखो मैं तुम्हें बड़े आनन्द का सुसमाचार सुनाता हूं जो सब लोगों के लिये होगा। - लूका 2:10

बाइबल पाठ: यूहन्ना 16:16-24
John 16:16 थोड़ी देर तुम मुझे न देखोगे, और फिर थोड़ी देर में मुझे देखोगे।
John 16:17 तब उसके कितने चेलों ने आपस में कहा, यह क्या है, जो वह हम से कहता है, कि थोड़ी देर में तुम मुझे न देखोगे, और फिर थोड़ी देर में मुझे देखोगे? और यह इसलिये कि मैं पिता के पास जाता हूं?
John 16:18 तब उन्होंने कहा, यह थोड़ी देर जो वह कहता है, क्या बात है? हम नहीं जानते, कि क्या कहता है।
John 16:19 यीशु ने यह जानकर, कि वे मुझ से पूछना चाहते हैं, उन से कहा, क्या तुम आपस में मेरी इस बाते के विषय में पूछ पाछ करते हो, कि थोड़ी देर में तुम मुझे न देखोगे, और फिर थोड़ी देर में मुझे देखोगे।
John 16:20 मैं तुम से सच सच कहता हूं; कि तुम रोओगे और विलाप करोगे, परन्तु संसार आनन्द करेगा: तुम्हें शोक होगा, परन्तु तुम्हारा शोक आनन्द बन जाएगा।
John 16:21 जब स्त्री जनने लगती है तो उसको शोक होता है, क्योंकि उस की दु:ख की घड़ी आ पहुंची, परन्तु जब वह बालक जन्म चुकी तो इस आनन्द से कि जगत में एक मनुष्य उत्पन्न हुआ, उस संकट को फिर स्मरण नहीं करती।
John 16:22 और तुम्हें भी अब तो शोक है, परन्तु मैं तुम से फिर मिलूंगा और तुम्हारे मन में आनन्द होगा; और तुम्हारा आनन्द कोई तुम से छीन न लेगा।
John 16:23 उस दिन तुम मुझ से कुछ न पूछोगे: मैं तुम से सच सच कहता हूं, यदि पिता से कुछ मांगोगे, तो वह मेरे नाम से तुम्हें देगा।
John 16:24 अब तक तुम ने मेरे नाम से कुछ नहीं मांगा; मांगो तो पाओगे ताकि तुम्हारा आनन्द पूरा हो जाए।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • मीका 1-3
  • प्रकाशितवाक्य 11



गुरुवार, 13 दिसंबर 2018

समाचार



      इंटरनैट, टेलिविज़न, रेडियो और मोबाइल उपकरणों से होकर सँसार के समाचारों की बौछार हम तक पहुँचती रहती है। उसमें से अधिकांश समाचार यही बताते हैं कि सँसार में क्या गलत या बुरा हो रहा है – अपराध, आतंकवाद, युद्ध, और आर्थिक समस्याएं। फिर भी ऐसे भी समय होते हैं जब उदासी और निराशा के गहन अन्धकार को चीरते हुए कुछ अच्छे समाचार भी आते हैं – निःस्वार्थ किए गए कार्यों के विवरण, चिकित्सा पद्धति में होनेवाली कोई नई खोज, या युद्ध से बर्बाद स्थानों में शान्ति बहाली की कोई आशा।

      परमेश्वर के पुराने नियम खण्ड में दो लोगों के शब्दों से संघर्ष से व्यथित लोगों को बड़ी राहत मिली।

      एक क्रूर और बलवान देश पर आने वाले परमेश्वर के न्याय का वर्णन करते हुए नहूम ने कहा, “देखो, पहाड़ों पर शुभसमाचार का सुनाने वाला और शान्ति का प्रचार करने वाला आ रहा है!” (नहूम 1:15)। इस समाचार से उस क्रूरता से त्रस्त सभी लोगों में आशा का संचार हुआ।

      ऐसे ही शब्द यशायाह की पुस्तक में भी मिलते हैं: “पहाड़ों पर उसके पांव क्या ही सुहावने हैं जो शुभ समाचार लाता है, जो शान्ति की बातें सुनाता है और कल्याण का शुभ समाचार और उद्धार का सन्देश देता है” (यशायाह 52:7)।

      नहूम और यशायाह द्वारा की गई आशा की भविष्यवाणियों की परिपूर्णता अन्ततः उस पहले क्रिसमस के समय हुई जब, “तब स्वर्गदूत ने उन से कहा, मत डरो; क्योंकि देखो मैं तुम्हें बड़े आनन्द का सुसमाचार सुनाता हूं जो सब लोगों के लिये होगा। कि आज दाऊद के नगर में तुम्हारे लिये एक उद्धारकर्ता जन्मा है, और यही मसीह प्रभु है” (लूका 2:10-11)।

      प्रतिदिन हमारे जीवनों के लिए सबसे महत्वपूर्ण समाचार वही सर्वोत्तम सुसमाचार है – प्रभु यीशु ही सारे जगत का उद्धारकर्ता है! – डेविड मैक्कैस्लैंड


प्रभु यीशु के जन्म का समाचार ही वह सर्वोत्तम समाचार है जो सँसार ने कभी भी सुना है।

और किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं; क्योंकि स्वर्ग के नीचे मनुष्यों में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया, जिस के द्वारा हम उद्धार पा सकें। - प्रेरितों 4:12

बाइबल पाठ: नहूम 1:7-15
Nahum 1:7 यहोवा भला है; संकट के दिन में वह दृढ़ गढ़ ठहरता है, और अपने शरणागतों की सुधी रखता है।
Nahum 1:8 परन्तु वह उमड़ती हुई धारा से उसके स्थान का अन्त कर देगा, और अपने शत्रुओं को खदेड़ कर अन्धकार में भगा देगा।
Nahum 1:9 तुम यहोवा के विरुद्ध क्या कल्पना कर रहे हो? वह तुम्हारा अन्त कर देगा; विपत्ति दूसरी बार पड़ने न पाएगी।
Nahum 1:10 क्योंकि चाहे वे कांटों से उलझे हुए हों, और मदिरा के नशे में चूर भी हों, तौभी वे सूखी खूंटी के समान भस्म किए जाएंगे।
Nahum 1:11 तुझ में से एक निकला है, जो यहोवा के विरुद्ध कल्पना करता और नीचता की युक्ति बान्धता है।
Nahum 1:12 यहोवा यों कहता है, चाहे वे सब प्रकार के सामर्थी हों, और बहुत भी हों, तौभी पूरी रीति से काटे जाएंगे और शून्य हो जाएंगे। मैं ने तुझे दु:ख दिया है, परन्तु फिर न दूंगा।
Nahum 1:13 क्योंकि अब मैं उसका जूआ तेरी गर्दन पर से उतार कर तोड़ डालूंगा, और तेरा बन्धन फाड़ डालूंगा।
Nahum 1:14 यहोवा ने तेरे विषय में यह आज्ञा दी है कि आगे को तेरा वंश न चले; मैं तेरे देवालयों में से ढली और गढ़ी हुई मूरतों को काट डालूंगा, मैं तेरे लिये कबर खोदूंगा, क्योंकि तू नीच है।
Nahum 1:15 देखो, पहाड़ों पर शुभसमाचार का सुनाने वाला और शान्ति का प्रचार करने वाला आ रहा है! अब हे यहूदा, अपने पर्व मान, और अपनी मन्नतें पूरी कर, क्योंकि वह ओछा फिर कभी तेरे बीच में हो कर न चलेगा, और पूरी रीति से नाश हुआ है।


एक साल में बाइबल: 
  • होशे 12-14
  • प्रकाशितवाक्य 4



बुधवार, 20 सितंबर 2017

हाथों में


   मैं अस्पताल में ऑपरेशन के स्थान के प्रतीक्षालय में बैठा हुआ था; मेरे पास विचार करने के लिए समय था। कुछ समय पहले भी मैं यहीं पर था, और तब हमें हिला देने वाला समाचार दिया गया था, मेरा एकलौता भाई, जो मुझ से बहुत छोटा था, उसके मस्तिष्क ने काम करना बन्द कर दिया था। आज मैं यहाँ अपनी पत्नि के लिए बैठा हुआ था जिसे एक गंभीर ऑपरेशन से होकर निकलना पड़ रहा था, और मैं उसके परिणाम को सुनने के लिए वहाँ प्रतीक्षा में था, परमेश्वर की शान्त वाणी को सुन रहा था।

   अचानक ही समाचार आया; ऑपरेशन करने वाला सर्जन मुझ से मिलना चाहता था। मैं मिलने के उस एकान्त कमरे में गया। वहाँ मेज़ पर टिशू के दो डिब्बे रखे हुए थे। वे केवल बहती नाक पोंछने के लिए नहीं रखे गए थे, वरन उन कठोर भयावह वाक्यांशों के लिए रखे गए थे, जैसे कि मुझे तब सुनने पड़े थे जब मेरे भाई की मृत्यु हुई थी - "मस्तिष्क मर गया है", "हम कुछ नहीं कर सकते हैं।"

   दुःख और अनिश्चितता के ऐसे समयों में, परमेश्वर का वचन बाइबल दिलासा का अनुपम स्त्रोत है, विशेषकर उसमें भजन संहिता नामक खण्ड। ऐसी स्थिति में खराई से लिखे गए उन भजनों की ओर मुड़ना स्वाभाविक है। ऐसा ही एक भजन है, भजन 31, जो दाऊद द्वारा घोर दुःख के समय में लिखा गया है। दाऊद लिखता है, "मेरा जीवन शोक के मारे और मेरी अवस्था कराहते कराहते घट चली है" (पद 10); उसके इस दुःख को और अधिक बढ़ा देने वाली बात थी कि उसके मित्रों और पड़ौसियों ने उसे छोड़ दिया था (पद 11)।

   परन्तु दाऊद का दृढ़ भरोसा उस सच्चे और जीवते परमेश्वर पर था, जिसके हाथों में उसने अपने आप को छोड़ दिया था: "परन्तु हे यहोवा मैं ने तो तुझी पर भरोसा रखा है, मैं ने कहा, तू मेरा परमेश्वर है। मेरे दिन तेरे हाथ में है;" (पद 14-15)। इस कारण दुःखों का उसका विलाप, एक उत्साह और आशा की पुकार के साथ समाप्त होता है: "हे यहोवा पर आशा रखने वालों हियाव बान्धो और तुम्हारे हृदय दृढ़ रहें!" (भजन 31:24)।

   अब की बार, उस प्रतीक्षालय में सर्जन ने हमें अच्छा समाचार दिया: मेरी पत्नि के पूर्णतः ठीक होने की संभावना थी। परन्तु चाहे यह समाचार न भी आता, फिर भी हम जानते और मानते हैं कि हमारा समस्त समय परमेश्वर के सबल हाथों में सर्वदा सुरक्षित है। - टिम गुस्टाफसन


जब हम अपनी समस्याएं परमेश्वर के हाथों में डाल देते हैं, 
तब वह अपनी शान्ति हमारे हृदयों में डाल देता है।

अपना बोझ यहोवा पर डाल दे वह तुझे संभालेगा; वह धर्मी को कभी टलने न देगा। - भजन 55:22 

बाइबल पाठ: भजन 31:9-18
Psalms 31:9 हे यहोवा, मुझ पर अनुग्रह कर क्योंकि मैं संकट में हूं; मेरी आंखे वरन मेरा प्राण और शरीर सब शोक के मारे घुले जाते हैं। 
Psalms 31:10 मेरा जीवन शोक के मारे और मेरी अवस्था कराहते कराहते घट चली है; मेरा बल मेरे अधर्म के कारण जाता रह, और मेरी हडि्डयां घुल गई।
Psalms 31:11 अपने सब विरोधियों के कारण मेरे पड़ोसियों में मेरी नामधराई हुई है, अपने जान पहिचान वालों के लिये डर का कारण हूं; जो मुझ को सड़क पर देखते है वह मुझ से दूर भाग जाते हैं। 
Psalms 31:12 मैं मृतक के समान लोगों के मन से बिसर गया; मैं टूटे बर्तन के समान हो गया हूं। 
Psalms 31:13 मैं ने बहुतों के मुंह से अपना अपवाद सुना, चारों ओर भय ही भय है! जब उन्होंने मेरे विरुद्ध आपस में सम्मति की तब मेरे प्राण लेने की युक्ति की।
Psalms 31:14 परन्तु हे यहोवा मैं ने तो तुझी पर भरोसा रखा है, मैं ने कहा, तू मेरा परमेश्वर है। 
Psalms 31:15 मेरे दिन तेरे हाथ में है; तू मुझे मेरे शत्रुओं और मेरे सताने वालों के हाथ से छुड़ा। 
Psalms 31:16 अपने दास पर अपने मुंह का प्रकाश चमका; अपनी करूणा से मेरा उद्धार कर।
Psalms 31:17 हे यहोवा, मुझे लज्जित न होने दे क्योंकि मैं ने तुझ को पुकारा है; दुष्ट लज्जित हों और वे पाताल में चुपचाप पड़े रहें। 
Psalms 31:18 जो अंहकार और अपमान से धर्मी की निन्दा करते हैं, उनके झूठ बोलने वाले मुंह बन्द किए जाएं।

एक साल में बाइबल: 
  • सभोपदेशक 4-6
  • 2 कुरिन्थियों 12


रविवार, 10 अगस्त 2014

उद्देश्य


   लैक्लैन मेक्युएरी सन 1810-1821 तक न्यू साऊथ वेल्स के राज्यपाल रहे थे; उनके शासन करने का तरीका ऐसा था कि उस नए बसाए गए स्थान में सब को यह लगता था कि सभी निवासियों का समानता का एक ही स्तर है। वे ऊँच-नीच में विश्वास नहीं रखते थे और ना ही किसी को असमानता या अलग होने का व्यवहार करने देते थे। जब "संभ्रांत" लोगों (अर्थात उन्होंने जो स्वतः ही आकर वहाँ बसने लगे थे, जो शासन से संबंधित लोग थे या जो सेना से थे), ने "मुक्त किए हुए" लोगों (अर्थात देश निकाला मिले हुए लोग जिन्हें कुछ शर्तों पर बाहर रहने की अनुमति मिली थी), के समुदाय से अपने आप को अलग रखने का प्रयास किया तब राज्यपाल लैक्लैन मेक्युएरी ने इस बात पर बल दिया कि सबको बिना किसी भेद-भाव के एक साथ ही रहना है और समाज में किसी के साथ कोई ऊँच-नीच का व्यवहार नहीं होगा।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भी हम पाते हैं कि प्रभु यीशु मसीह ने समाज के द्वारा तिरस्कृत चुँगी लेने वाले व्यक्ति ज़क्कई में रुचि दिखाई और उसे भी समस्त संसार के उद्धार की अपनी योजना में बराबरी से सम्मिलित किया (लूका 19:1-10)। अपने व्यवसाय के कारण अपने ही यहूदी समाज से अलग किए हुए और घृणा के पात्र ज़क्कई के मन में तीव्र लालसा थी कि वह एक बार प्रभु यीशु को देखे। लेकिन नाटा होने के कारण वह भीड़ से घिरे हुए प्रभु यीशु को देख नहीं पाता था; इसलिए वह प्रभु यीशु के मार्ग में लगे एक वृक्ष पर चढ़ गया कि प्रभु यीशु की एक झलक देख सके। जब प्रभु यीशु उस वृक्ष के नीचे पहुँचे तो उन्होंने रुककर ज़क्कई को नीचे बुलाया, उससे प्रेम का व्यवहार किया और उसके घर जाकर भोजन भी किया। प्रभु यीशु से मिले इस प्रेम-व्यवहार ने ज़क्कई का जीवन बदल दिया; उसने अपने पापों का सार्वजनिक अंगीकार किया, उनके लिए पश्चाताप किया और जिनसे उसने बेईमानी से लिया था, उन्हें सब लौटा देने का वायदा किया। उस दिन ज़क्कई के घर उद्धार आया।

   प्रभु यीशु का उद्देश्य बहुत साधारण था - बिना किसी भी भेद-भाव के, पाप में खोए हुओं को ढूंढ़ना और उन्हें पाप क्षमा तथा उद्धार पाने की परमेश्वर की योजना प्रस्तुत करना, चाहे उनका सामाजिक स्तर कुछ भी क्यों ना हो। प्रभु यीशु के अनुयायी होने के कारण आज हम मसीही विश्वासियों को भी प्रभु यीशु ने यही उद्देश्य सौंपा है - सारे संसार में सभी के लिए पाप क्षमा और उद्धार की परमेश्वर की योजना का समाचार सभी को देना (मत्ती 28:18-20)।


जो मसीह यीशु का उद्देश्य था वही मसीह यीशु के अनुयायियों का भी है।

यीशु ने उन के पास आकर कहा, कि स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार मुझे दिया गया है। इसलिये तुम जा कर सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ और उन्हें पिता और पुत्र और पवित्रआत्मा के नाम से बपतिस्मा दो। और उन्हें सब बातें जो मैं ने तुम्हें आज्ञा दी है, मानना सिखाओ: और देखो, मैं जगत के अन्‍त तक सदैव तुम्हारे संग हूं। - मत्ती 28:18-20

बाइबल पाठ: लूका 19:1-10
Luke 19:1 वह यरीहो में प्रवेश कर के जा रहा था। 
Luke 19:2 और देखो, ज़क्कई नाम एक मनुष्य था जो चुंगी लेने वालों का सरदार और धनी था। 
Luke 19:3 वह यीशु को देखना चाहता था कि वह कौन सा है परन्तु भीड़ के कारण देख न सकता था। क्योंकि वह नाटा था। 
Luke 19:4 तब उसको देखने के लिये वह आगे दौड़कर एक गूलर के पेड़ पर चढ़ गया, क्योंकि वह उसी मार्ग से जाने वाला था। 
Luke 19:5 जब यीशु उस जगह पहुंचा, तो ऊपर दृष्टि कर के उस से कहा; हे ज़क्कई झट उतर आ; क्योंकि आज मुझे तेरे घर में रहना अवश्य है। 
Luke 19:6 वह तुरन्त उतर कर आनन्द से उसे अपने घर को ले गया। 
Luke 19:7 यह देख कर सब लोगे कुड़कुड़ा कर कहने लगे, वह तो एक पापी मनुष्य के यहां जा उतरा है। 
Luke 19:8 ज़क्कई ने खड़े हो कर प्रभु से कहा; हे प्रभु, देख मैं अपनी आधी सम्पत्ति कंगालों को देता हूं, और यदि किसी का कुछ भी अन्याय कर के ले लिया है तो उसे चौगुना फेर देता हूं। 
Luke 19:9 तब यीशु ने उस से कहा; आज इस घर में उद्धार आया है, इसलिये कि यह भी इब्राहीम का एक पुत्र है। 
Luke 19:10 क्योंकि मनुष्य का पुत्र खोए हुओं को ढूंढ़ने और उन का उद्धार करने आया है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 43-45