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शुक्रवार, 25 अक्टूबर 2019

जीवन जल



      1960 के दशक में ‘किंग्स्टन ट्राएओ’ नामक एक गीत मण्डली ने “डेज़र्ट पीट” नामक एक गाना जारी किया जो कि एक कहानी सुनाता है। उस कहानी में रेगिस्तान में यात्रा करने वाले और प्यास से बेहाल एक काओ-ब्वौए के बारे में बताया गया है जिसे एक हैंडपंप मिलता है। उस हैंडपंप के पास ही एक जग में पानी रखा है और साथ ही एक पर्चा रखा है जिस पर डेज़र्ट पीट ने लिख कर रखा है कि उस जग के पानी को पीने की बजाए, उसे पहले हैंडपंप को चलाने के लिए उसमें डालें और फिर हैंडपंप को चलाएँ, तो बहुतायत से ठंडा पेय जल प्राप्त हो जाएगा, और फिर उस जग को भर कर वहीं उस पर्चे के साथ रख दें।

      प्यास से बेहाल उस काओ-ब्वौए के सामने बड़ा प्रलोभन था कि वह उस जग में उपलब्ध जल को पी ले, न कि उसे हैंडपंप में डालकर उपलब्ध जल से भी वंचित हो जाने का जोखिम उठाए। परन्तु वह अपने उस लोभ को दबाकर पर्चे पर लिखे निर्देशानुसार जल को हैंडपंप में डालता है और पंप को चलाना आरंभ करता है। उसकी इस आज्ञाकारिता के परिणामस्वरूप उसे ठंडा पीने योग्य तथा संतुष्टि प्रदान करने वाला स्वच्छ जल बहुतायत से प्राप्त होता है। यदि वह डेज़र्ट पीट की बात पर विश्वास नहीं करता तो उसे बस वह एक जग भर बासी और गर्म पानी ही मिलता।

      यह मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल में दी गई इस्राएल की बियाबान की यात्रा को स्मरण करवाता है। जब वे प्यास से बेहाल होने लगे (निर्गमन 17:1-7), तो मूसा ने परमेश्वर से सहायता माँगी। परमेश्वर ने मूसा से कहा कि वह होरेब की चट्टान पर अपनी लाठी से प्रहार करे। मूसा ने परमेश्वर की बात पर विश्वास किया और आज्ञाकारिता में चट्टान पर मारा, और उस पत्थर से बहुतायत से जल निकल पड़ा।

      परन्तु दुःख की बात है कि इस्राएल ने सदा ही मूसा की आज्ञाकारिता के इस उदाहरण का अनुसरण नहीं किया। अन्ततः “...सुने हुए वचन से उन्हें कुछ लाभ न हुआ; क्योंकि सुनने वालों के मन में विश्वास के साथ नहीं बैठा” (इब्रानियों 4:2)।

      कभी-कभी हमें जीवन मरुभूमि के समान लगने लगता है। परन्तु परमेश्वर हमारी आत्मिक प्यास सबसे अनेपक्षित परिस्थितियों द्वारा भी बुझा सकता है। जब हम विश्वास द्वारा परमेश्वर के वचन की प्रतिज्ञाओं पर भरोसा करते हैं, तो हम जीवन जल की नदियों तथा दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए परमेश्वर के अनुग्रह का अनुभव कर सकते हैं। - डेनिस फिशर

परमेश्वर के लिए हमारी प्यास को केवल प्रभु यीशु, जो जीवन जल का स्त्रोत है, बुझा सकता है।

फिर पर्व के अंतिम दिन, जो मुख्य दिन है, यीशु खड़ा हुआ और पुकार कर कहा, यदि कोई प्यासा हो तो मेरे पास आकर पीए। जो मुझ पर विश्वास करेगा, जैसा पवित्र शास्त्र में आया है उसके हृदय में से जीवन के जल की नदियां बह निकलेंगी। - यूहन्ना 7:37-38

बाइबल पाठ: निर्गमन 17:1-7
Exodus 17:1 फिर इस्राएलियों की सारी मण्डली सीन नाम जंगल से निकल चली, और यहोवा के आज्ञानुसार कूच कर के रपीदीम में अपने डेरे खड़े किए; और वहां उन लोगों को पीने का पानी न मिला।
Exodus 17:2 इसलिये वे मूसा से वादविवाद कर के कहने लगे, कि हमें पीने का पानी दे। मूसा ने उन से कहा, तुम मुझ से क्यों वादविवाद करते हो? और यहोवा की परीक्षा क्यों करते हो?
Exodus 17:3 फिर वहां लोगों को पानी की प्यास लगी तब वे यह कहकर मूसा पर बुड़बुड़ाने लगे, कि तू हमें लड़के बालों और पशुओं समेत प्यासों मार डालने के लिये मिस्र से क्यों ले आया है?
Exodus 17:4 तब मूसा ने यहोवा की दोहाई दी, और कहा, इन लोगों से मैं क्या करूं? ये सब मुझे पत्थरवाह करने को तैयार हैं।
Exodus 17:5 यहोवा ने मूसा से कहा, इस्राएल के वृद्ध लोगों में से कुछ को अपने साथ ले ले; और जिस लाठी से तू ने नील नदी पर मारा था, उसे अपने हाथ में ले कर लोगों के आगे बढ़ चल।
Exodus 17:6 देख मैं तेरे आगे चलकर होरेब पहाड़ की एक चट्टान पर खड़ा रहूंगा; और तू उस चट्टान पर मारना, तब उस में से पानी निकलेगा जिससे ये लोग पीएं। तब मूसा ने इस्राएल के वृद्ध लोगों के देखते वैसा ही किया।
Exodus 17:7 और मूसा ने उस स्थान का नाम मस्सा और मरीबा रखा, क्योंकि इस्राएलियों ने वहां वादविवाद किया था, और यहोवा की परीक्षा यह कहकर की, कि क्या यहोवा हमारे बीच है वा नहीं?

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 6-8
  • 1 तिमुथियुस 5



गुरुवार, 24 अक्टूबर 2019

सेवा



      मेरी एक सहेली अपनी सास की देखभाल किया करती थी, जो उनके साथ ही घर में रहा करती थी, और चलने फिरने से लाचार थीं। एक दिन मेरी सहेली ने अपनी सास से पूछा कि उनकी कोई इच्छा है; तो सास ने उत्तर दिया कि वे चाहती थीं कि उनके पैर धोए जाएँ। मेरी सहेली ने स्वीकार किया उसे यह करना बहुत बुरा लगता था; जितनी बार भी उसकी सास उसे यह करने के लिए कहती, वह मन में कुड़कुड़ाते हुए यह करती और परमेश्वर से प्रार्थना करती कि उसकी भावनाएँ उसकी सास पर प्रकट न होने पाएँ।

      परन्तु एक दिन उसकी यह कुड़कुड़ाने वाली प्रतिक्रिया, पल भर में ही बदल गई। उस दिन जब वह चिलमची और तौलिया लेकर अपनी सास के पाँव पर झुकी, तो उसने मुँह ऊपर उठाकर अपनी सास की ओर देखा, और उस पल में उसे ऐसा लगा मानो वह प्रभु यीशु के चरण धो रही थी; प्रभु यीशु मानो उसकी सास के वेश में वहाँ उपस्थित थे। उसके बाद से उस सहेली का दृष्टिकोण ही बदल गया, और यह सेवा करना उसके लिए आदर की बात हो गई।

      जब मैंने द्रवित कर देने वाली इस घटना के बारे में सुना तो मुझे प्रभु यीशु द्वारा बताई गई जगत के अन्त के दिन की बात स्मरण हो आई; राजा अपने राज्य में अपने पुत्र और पुत्रियों का स्वागत करता है, उनसे यह कहते हुए कि जब उन्होंने बीमारों की देखभाल की, भूखों को भोजन करवाया, और ऐसे अन्य सेवा के कार्य किए, तो वास्तव में वे सभी कार्य प्रभु के प्रति किए गए (मत्ती 25:40)। जब हम भी आज इस प्रकार से ज़रूरतमंदों की सेवा करते हैं, तो प्रभु की भी सेवा करते हैं।

      आज मेरी वह सहेली जब किसी नए जन से मिलती है, जिसे उसकी सेवा की आवश्यकता होते है, तो उसके मन में यही बात होती है, हो सकता है कि यह भी वेश धरे हुए प्रभु यीशु हैं। हम भी उसके समान दृष्टिकोण रखें और सेवा करने से पीछे न हटें। - एमी बाउचर पाई

जब हम औरों की सेवा करते हैं तो प्रभु यीशु के सेवा करते हैं।

पवित्र लोगों को जो कुछ अवश्य हो, उस में उन की सहायता करो; पहुनाई करने मे लगे रहो। - रोमियों 12:13

बाइबल पाठ: मत्ती 25:31-40
Matthew 25:31 जब मनुष्य का पुत्र अपनी महिमा में आएगा, और सब स्वर्ग दूत उसके साथ आएंगे तो वह अपनी महिमा के सिहांसन पर विराजमान होगा।
Matthew 25:32 और सब जातियां उसके साम्हने इकट्ठी की जाएंगी; और जैसा चरवाहा भेड़ों को बकिरयों से अलग कर देता है, वैसा ही वह उन्हें एक दूसरे से अलग करेगा।
Matthew 25:33 और वह भेड़ों को अपनी दाहिनी ओर और बकिरयों को बाईं और खड़ी करेगा।
Matthew 25:34 तब राजा अपनी दाहिनी ओर वालों से कहेगा, हे मेरे पिता के धन्य लोगों, आओ, उस राज्य के अधिकारी हो जाओ, जो जगत के आदि से तुम्हारे लिये तैयार किया हुआ है।
Matthew 25:35 क्योंकि मैं भूखा था, और तुम ने मुझे खाने को दिया; मैं प्यासा था, और तुम ने मुझे पानी पिलाया, मैं परदेशी था, तुम ने मुझे अपने घर में ठहराया।
Matthew 25:36 मैं नंगा था, तुम ने मुझे कपड़े पहिनाए; मैं बीमार था, तुम ने मेरी सुधि ली, मैं बन्‍दीगृह में था, तुम मुझ से मिलने आए।
Matthew 25:37 तब धर्मी उसको उत्तर देंगे कि हे प्रभु, हम ने कब तुझे भूखा देखा और खिलाया? या प्यासा देखा, और पिलाया?
Matthew 25:38 हम ने कब तुझे परदेशी देखा और अपने घर में ठहराया या नंगा देखा, और कपड़े पहिनाए?
Matthew 25:39 हम ने कब तुझे बीमार या बन्‍दीगृह में देखा और तुझ से मिलने आए?
Matthew 25:40 तब राजा उन्हें उत्तर देगा; मैं तुम से सच कहता हूं, कि तुम ने जो मेरे इन छोटे से छोटे भाइयों में से किसी एक के साथ किया, वह मेरे ही साथ किया।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 3-5
  • 1 तिमुथियुस 4



बुधवार, 23 अक्टूबर 2019

परिवर्तित



      मुझ में और मेरे भाई में एक वर्ष से भी कम की आयु का अन्तर है। बड़े होते समय हम दोनों में बहुत स्पर्धा रहा करती थी (अर्थात, हम लड़ते रहते थे!)। मेरे पिता इस बात को समझते थे, क्योंकि उनके भी और भाई थे; परन्तु मेरी माँ के लिए यह समझना कुछ कठिन था।

      हमारी कहानी परमेश्वर के वचन बाइबल में उत्पत्ति की पुस्तक की कहानियों से मेल खाती थी; इस पुस्तक को एक उपनाम, भाईयों के झगड़ों का संक्षिप्त इतिहास भी दिया जा सकता है। कैन और हाबिल (उत्पत्ति 4); इसहाक और इश्माएल (उत्पत्ति 21:8-10); यूसुफ और अन्य सभी भाई; बिन्यामीन को छोड़कर (उत्पत्ति 37)। परन्तु भाई के प्रति भाई के बैर के लिए याकूब और एसाव की कहानी को कोई मात नहीं दे सकता है।

      एसाव के जुड़वां भाई याकूब ने दो बार उससे छल किया, इसलिए वह याकूब को मार डालना चाहता था (27:41)। दशकों पश्चात, एसाव और याकूब में मेल हो गया (अध्याय 33), परन्तु उनका झगड़ा उनके वंशजों में, जो दो बड़ी जातियाँ – एदोम और इस्राएल हो गए थे, ज़ारी रहा। जब इस्राएल के लोग मिस्र से निकलने के बाद वाचा किए हुए देश में जाने की तैयारी कर रहे थे तो एदोम ने उनका सामना एक सेना और धमकियों के साथ किया (गिनती 20:14-21)। इसके भी बहुत बाद, जब यरूशलेम के लोग आक्रमणकारियों से बचकर भाग रहे थे, तो एदोमियों ने उन शरणार्थियों का संहार किया (ओबद्याह 1:10-14)।

      परन्तु हमारे लिए यह प्रसन्नता की बात है कि बाइबल में न केवल हमारी बुराई और टूटेपन की दुखद कहानी है, वरन परमेश्वर द्वारा प्रदान किए गए छुटकारे के बारे में भी लिखा है। प्रभु यीशु में हो कर सब कुछ बदल गया है; प्रभु ने अपने शिष्यों से कहा, “मैं तुम्हें एक नई आज्ञा देता हूं, कि एक दूसरे से प्रेम रखो: जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा है, वैसा ही तुम भी एक दुसरे से प्रेम रखो” (यूहन्ना 13:34); और फिर अपने आप को हमारे लिए क्रूस पर बलिदान करने के द्वारा इस कथन को निभा कर दिखाया।

      जैसे-जैसे मैं और मेरा भाई आयु में बढ़ते गए, हम एक-दूसरे के निकट होते चले गए। यह परमेश्वर का कार्य है। जब हम उसके द्वारा दी गई क्षमा को ग्रहण करते हैं, तो उसका अनुग्रह हमारी स्पर्धा और लड़ाईयों को भाईचारे के प्रेम में परिवर्तित कर देता है। - टिम गुस्ताफसन

भाई-बहनों में लड़ाईयाँ स्वाभाविक हैं; परमेश्वर का परिवर्तन करने वाला प्रेम अलौकिक है।

सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं। - 2 कुरिन्थियों 5:17

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 33:1-11
Genesis 33:1 और याकूब ने आंखें उठा कर यह देखा, कि ऐसाव चार सौ पुरूष संग लिये हुए चला जाता है। तब उसने लड़के बालों को अलग अलग बांट कर लिआ, और राहेल, और दोनों लौंडियों को सौंप दिया।
Genesis 33:2 और उसने सब के आगे लड़कों समेत लौंडियों को उसके पीछे लड़कों समेत लिआ: को, और सब के पीछे राहेल और यूसुफ को रखा,
Genesis 33:3 और आप उन सब के आगे बढ़ा, और सात बार भूमि पर गिर के दण्डवत की, और अपने भाई के पास पहुंचा।
Genesis 33:4 तब ऐसाव उस से भेंट करने को दौड़ा, और उसको हृदय से लगा कर, गले से लिपट कर चूमा: फिर वे दोनों रो पड़े।
Genesis 33:5 तब उसने आंखे उठा कर स्त्रियों और लड़के बालों को देखा; और पूछा, ये जो तेरे साथ हैं सो कौन हैं? उसने कहा, ये तेरे दास के लड़के हैं, जिन्हें परमेश्वर ने अनुग्रह कर के मुझ को दिया है।
Genesis 33:6 तब लड़कों समेत लौंडियों ने निकट आकर दण्डवत की।
Genesis 33:7 फिर लड़कों समेत लिआ: निकट आई, और उन्होंने भी दण्डवत की: पीछे यूसुफ और राहेल ने भी निकट आकर दण्डवत की।
Genesis 33:8 तब उसने पूछा, तेरा यह बड़ा दल जो मुझ को मिला, उसका क्या प्रयोजन है? उसने कहा, यह कि मेरे प्रभु की अनुग्रह की दृष्टि मुझ पर हो।
Genesis 33:9 ऐसाव ने कहा, हे मेरे भाई, मेरे पास तो बहुत है; जो कुछ तेरा है सो तेरा ही रहे।
Genesis 33:10 याकूब ने कहा, नहीं नहीं, यदि तेरा अनुग्रह मुझ पर हो, तो मेरी भेंट ग्रहण कर: क्योंकि मैं ने तेरा दर्शन पाकर, मानो परमेश्वर का दर्शन पाया है, और तू मुझ से प्रसन्न हुआ है।
Genesis 33:11 सो यह भेंट, जो तुझे भेजी गई है, ग्रहण कर: क्योंकि परमेश्वर ने मुझ पर अनुग्रह किया है, और मेरे पास बहुत है। जब उसने उस को दबाया, तब उस ने भेंट को ग्रहण किया।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 1-2
  • 1 तिमुथियुस 3



मंगलवार, 22 अक्टूबर 2019

प्रेम



      मेरे पसंदीदा चर्चों में से एक ऐसा है जो अनेकों वर्ष पहले उन कैदियों के लिए आरंभ किया गया था जो जेल से छूटने के बाद समाज में पुनः स्थापित होने के प्रयास और प्रक्रिया में थे। आज वह चर्च काफी बढ़ चुका है, और उसमें समाज के सभी वर्गों के लोग आते हैं। मुझे वह चर्च इसलिए पसन्द है क्योंकि वह मुझे ध्यान करवाता है कि स्वर्ग कैसा होगा -  विभिन्न प्रकार के लोगों से भरा हुआ, वे सभी लोग जो पापों के दासत्व से प्रभु यीशु में लाए गए विश्वास और उससे मिलने वाली पापों की क्षमा के द्वारा छुड़ाए गए हैं, और सभी परस्पर प्रभु के प्रेम के द्वारा बंधे हुए हैं।

      किन्तु कभी-कभी मुझे लगता है कि क्या चर्च वास्तव में पापों से क्षमा पाए हुए लोगों के लिए सुरक्षित आश्रय स्थल है अथवा कुछ लोगों का विशिष्ट ‘क्लब’ है; क्योंकि स्वाभाविक रीति से कुछ विशेष स्वभाव एवँ रुचि के लोग एक-दूसरे के साथ एकत्रित होने लगते हैं क्योंकि वे उनके साथ अधिक सुविधाजनक अनुभव करते हैं, और अन्य लोग फिर अपने आप को अलग पड़ा हुआ अनुभव करते हैं। परन्तु जब प्रभु यीशु ने अपने शिष्यों से कहा था कि “मेरी आज्ञा यह है, कि जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा, वैसा ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो” (यूहन्ना 15:12), तो उनका अभिप्राय इस प्रकार के गुट बनाने का कदापि नहीं था। प्रभु की कलीसिया, उसके चर्च को, उसके प्रेम का प्रगटिकर्ण होना था जिसमें सभी जन परस्पर प्रेम में बंधे हुए साथ रहें।

      यदि दुखी, उपेक्षित लोगों को प्रभु यीशु मसीह में क्षमा, सांतवना और शरण मिल सकती है, तो उनका प्रभु की कलीसिया से इससे कुछ भी कम की अपेक्षा रखना कैसे संभव है? इसलिए हमें सभी के प्रति प्रभु यीशु के प्रेम को प्रदर्शित करना है – विशेषकर उनके प्रति जो हमारे समान स्वभाव या रुचि नहीं भी रखते हों। हमारे चारों ओर ऐसे अनेकों लोग हैं जिनके प्रति, प्रभु की अपेक्षा है कि हम उन से प्रेम रखें, उन पर प्रभु के प्रेम को प्रगट करें। यह कितने आनन्द का समय होता है जब लोग मिलकर प्रभु की आराधना करते हैं; परस्पर और प्रभु के प्रति प्रेम व्यक्त करते हैं, और प्रभु के प्रेम को एक दूसरे के साथ बाँटते हैं। यह पृथ्वी पर स्वर्ग के आनन्द को चखने के लिए प्रभु द्वारा हमारे लिए किया गया प्रावधान है। - जो स्टोवैल

प्रभु यीशु के प्रेम को एक-दूसरे के साथ बाँटें।

मैं तुम्हें एक नई आज्ञा देता हूं, कि एक दूसरे से प्रेम रखो: जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा है, वैसा ही तुम भी एक दुसरे से प्रेम रखो। - यूहन्ना 13:34

बाइबल पाठ: यूहन्ना 15:9-17
John 15:9 जैसा पिता ने मुझ से प्रेम रखा, वैसा ही मैं ने तुम से प्रेम रखा, मेरे प्रेम में बने रहो।
John 15:10 यदि तुम मेरी आज्ञाओं को मानोगे, तो मेरे प्रेम में बने रहोगे: जैसा कि मैं ने अपने पिता की आज्ञाओं को माना है, और उसके प्रेम में बना रहता हूं।
John 15:11 मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि मेरा आनन्द तुम में बना रहे, और तुम्हारा आनन्द पूरा हो जाए।
John 15:12 मेरी आज्ञा यह है, कि जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा, वैसा ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो।
John 15:13 इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे।
John 15:14 जो कुछ मैं तुम्हें आज्ञा देता हूं, यदि उसे करो, तो तुम मेरे मित्र हो।
John 15:15 अब से मैं तुम्हें दास न कहूंगा, क्योंकि दास नहीं जानता, कि उसका स्‍वामी क्या करता है: परन्तु मैं ने तुम्हें मित्र कहा है, क्योंकि मैं ने जो बातें अपने पिता से सुनीं, वे सब तुम्हें बता दीं।
John 15:16 तुम ने मुझे नहीं चुना परन्तु मैं ने तुम्हें चुना है और तुम्हें ठहराया ताकि तुम जा कर फल लाओ; और तुम्हारा फल बना रहे, कि तुम मेरे नाम से जो कुछ पिता से मांगो, वह तुम्हें दे।
John 15:17 इन बातें की आज्ञा मैं तुम्हें इसलिये देता हूं, कि तुम एक दूसरे से प्रेम रखो।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 65-66
  • 1 तिमुथियुस 2



सोमवार, 21 अक्टूबर 2019

सुरक्षा-स्थान



      मेरी बेटी और मैं एक पारिवारिक उत्सव में जाने की तैयारीयां कर रहे थे। क्योंकि वह यात्रा के विषय घबरा रही थी, इसलिए मैंने कार चलाने की पेशकश की। उसने सहमत होते हुए कहा, “ठीक है; परन्तु मुझे अपनी कार में अधिक सुरक्षित लगता है। क्या आप उसे चला सकते हैं?” मुझे लगा कि मेरी छोटी कार की अपेक्षा उसकी अपनी बड़ी कार में अधिक स्थान होने के कारण उसने यह कहा; इसलिए मैंने उससे पूछा, “क्या मेरी कार तुम्हें छोटी और असुविधाजनक लगती है?” उसने उत्तर दिया, “नहीं; किन्तु बस मुझे अपनी कार अपना सुरक्षा स्थान प्रतीत होता है; मुझे वह अधिक सुरक्षित लगती है।”

      उसकी इस बात ने मुझे अपने व्यक्तिगत सुरक्षित स्थान के विषय विचार करने के लिए विवश किया। तुरंत ही मेरा ध्यान परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन 18:10 की ओर गया, जहाँ लिखा है, “यहोवा का नाम दृढ़ गढ़ है; धर्मी उस में भाग कर सब दुर्घटनाओं से बचता है।” पुराने नियम के समय में, किसी शहर की शहर-पनाह और पहरे की मीनार बाहर से आने वाले खतरे के प्रति सचेत करने और शहर के अन्दर रहने वाले निवासियों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए होते थे। नीतिवचन के लेखक का अभिप्राय यह था कि परमेश्वर का नाम, जो उसके चरित्र, व्यक्तित्व, तथा जो कुछ भी वह है, उसका प्रतीक है, उसके लोगों के लिए सच्ची सुरक्षा प्रदान करता है।

      कुछ परिस्थितियों में कुछ ऐसे स्थान होते हैं जो वाँछित सुरक्षा प्रदान करते हैं; जैसे कि किसी तूफ़ान के समय में एक दृढ़ छत; बीमारी के समय में अस्पताल; दुःख के समय में किसी प्रिय जन का आलिंगन और सांतवना, आदि।

      आज आपका ‘सुरक्षा-स्थान’ क्या है? हम जहाँ भी अपनी सुरक्षा को खोजें, उस स्थान में परमेश्वर की उपस्थिति ही है जो हम मसीही विश्वासियों को वह आवश्यक बल और सुरक्षा प्रदान करती है, जिसकी हमें आवश्यकता है। हमारा ‘सुरक्षा-स्थान’ प्रभु परमेश्वर ही है। - एलीसा मौरगन

जीवन के तूफानों में परमेश्वर ही सुरक्षा स्थान होता है।

यहोवा मेरी चट्टान, और मेरा गढ़ और मेरा छुड़ाने वाला है; मेरा ईश्वर, मेरी चट्टान है, जिसका मैं शरणागत हूं, वह मेरी ढ़ाल और मेरी मुक्ति का सींग, और मेरा ऊँचा गढ़ है। - भजन 18:2

बाइबल पाठ: नीतिवचन 18:10-11
Proverbs 18:10 यहोवा का नाम दृढ़ गढ़ है; धर्मी उस में भाग कर सब दुर्घटनाओं से बचता है।
Proverbs 18:11 धनी का धन उसकी दृष्टि में गढ़ वाला नगर, और ऊंचे पर बनी हुई शहरपनाह है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 62-64
  • 1 तिमुथियुस 1



रविवार, 20 अक्टूबर 2019

सुन्दरता



      मुझे ग्रैंड कैनियन निहारना बहुत अच्छा लगता है। जब भी मैं उस घाटी के किनारे खड़े होकर उसे निहारता हूँ, मुझे सृष्टिकर्ता परमेश्वर की उस भव्य कृति में कुछ नए अंश दिखाई देते हैं; यह सब मुझे स्तब्ध कर देते हैं। यद्यपि ग्रैंड कैनियन धरती में बने एक बहुत विशाल ‘गढ्ढे’ के अतिरिक्त और कुछ भी नहीं है, फिर भी वह मुझे स्वर्ग के बारे में विचार करने पर विवश करती है।

      एक बार एक बारह वर्षीय लड़के ने बड़ी ईमानदारी से मुझसे पूछा, “क्या स्वर्ग उबाऊ नहीं होगा? क्या आप को नहीं लगता कि सारे समय परमेश्वर की प्रशंसा करते-करते हम थक जाएँगे?” परन्तु जब धरती में बना एक ‘गढ्ढा’ इतना आकर्षक और सुन्दर हो सकता है कि हम उसे निहारते हुए नहीं थकते हैं, तो हम उस आनन्द की तो केवल कल्पना ही कर सकते हैं जब हम सृष्टि और उसकी सारी सुन्दरता के स्त्रोत, हमारे प्रेमी स्वर्गीय पिता परमेश्वर को देखेंगे – एक नई सृष्टि की अद्भुत कारीगरी के साथ।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में दाऊद ने इस लालसा को व्यक्त किया जब उसने लिखा, “एक वर मैं ने यहोवा से मांगा है, उसी के यत्न में लगा रहूंगा; कि मैं जीवन भर यहोवा के भवन में रहने पाऊं, जिस से यहोवा की मनोहरता पर दृष्टि लगाए रहूं, और उसके मन्दिर में ध्यान किया करूं” (भजन 27:4)। परमेश्वर की उपस्थिति से बढ़कर सुन्दर और कुछ है ही नहीं, जब हम प्रभु यीशु में लाए गए विश्वास के साथ उसके खोजी होते हैं, तो उसकी उपस्थिति में होने की इच्छा हमें इस पृथ्वी पर उसकी ओर खींचती है, और उसे आमने-सामने देखने की लालसा हमारे अन्दर जागृत करती है।

      तब हम अपने अद्भुत प्रभु परमेश्वर की आराधना और सराहना करते हुए कभी नहीं थकेंगे, क्योंकि उसकी भलाईयों और उसके हाथों की सृष्टि के अचरजों का कोई अन्त नहीं होगा, वे सदा नए होते रहेंगे; और उसकी उपस्थिति सदा काल तक हमारे लिए उसकी सुन्दरता और उसके प्रेम का स्तब्ध कर देने वाला प्रगटीकरण करती ही रहेगी। - जेम्स बैंक्स

हमारी सृष्टि अनन्तकाल के लिए परमेश्वर का आनन्द लेने के लिए हुई है।

क्योंकि तेरी करूणा जीवन से भी उत्तम है मैं तेरी प्रशंसा करूंगा। इसी प्रकार मैं जीवन भर तुझे धन्य कहता रहूंगा; और तेरा नाम ले कर अपने हाथ उठाऊंगा। - भजन 63:3-4

बाइबल पाठ: भजन 27:1-4
Psalms 27:1 यहोवा परमेश्वर मेरी ज्योति और मेरा उद्धार है; मैं किस से डरूं? यहोवा मेरे जीवन का दृढ़ गढ़ ठहरा है, मैं किस का भय खाऊं?
Psalms 27:2 जब कुकर्मियों ने जो मुझे सताते और मुझी से बैर रखते थे, मुझे खा डालने के लिये मुझ पर चढ़ाई की, तब वे ही ठोकर खाकर गिर पड़े।
Psalms 27:3 चाहे सेना भी मेरे विरुद्ध छावनी डाले, तौभी मैं न डरूंगा; चाहे मेरे विरुद्ध लड़ाई ठन जाए, उस दशा में भी मैं हियाव बान्धे निशचिंत रहूंगा।
Psalms 27:4 एक वर मैं ने यहोवा से मांगा है, उसी के यत्न में लगा रहूंगा; कि मैं जीवन भर यहोवा के भवन में रहने पाऊं, जिस से यहोवा की मनोहरता पर दृष्टि लगाए रहूं, और उसके मन्दिर में ध्यान किया करूं।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 59-61
  • 2 थिस्सलुनीकियों 3



शनिवार, 19 अक्टूबर 2019

सामर्थी


      उस तेज कड़कड़ाने की धवनि ने मुझे चौंका दिया। उस आवाज़ को पहचानते हुए मैं दौड़ कर रसोई में गई। मैंने गलती से खाली पड़ी कॉफी बनाने वाली मशीन के बटन को चालू कर दिया था। मशीन के तार को बिजली के पलग से निकालकर, मैंने उसे उसके हैंडल से उठाया और उसकी ताली को छूकर देखा कि वह मेज़ पर रखने के लिए कहीं बहुत गरम तो नहीं है। उसकी गरम तली को छूते ही मेरी उंगलियां जल गईं और जहाँ छूआ था वहाँ छाले बन गए।

      जब मेरे पति मेरी उँगलियों की मरहमपट्टी कर रहे थे, तो मैं बैठी सर हिला रही थी। मैं जानती थी कि उसकी तली गरम होगी, “मुझे वास्तव में नहीं पता कि मैंने उसे क्यों छूआ” मैंने कहा।

      यह गलती करने के पश्चात के मेरे इस प्रत्युत्तर ने मुझे पवित्र शास्त्र, परमेश्वर के वचन बाइबल में, पौलुस प्रेरित की प्रतिक्रिया की याद दिलाई, जो उसने एक गंभीर विषय – पाप का स्वभाव, के लिए की थी।

      प्रेरित ने स्वीकार किया कि उसे नहीं पता कि वह उन कामों को क्यों कर देता है जिनके विषय वह जानता है कि उसे नहीं करने चाहिएँ और न ही वह करना चाहता है, फिर भी कर देता है (रोमियों 7:15)। इसकी पुष्टि करते हुए कि पवित्र शास्त्र ही निर्धारित करता है कि क्या सही है और क्या गलत (पद 7), उसने उस जटिल संघर्ष को भी स्वीकार किया जो लगातार पाप के विरुद्ध आत्मा और शरीर में चलता रहता है (पद 15-23)। अपनी दुर्बलताओं को स्वीकार करते हुए, फिर वह अब और सदा काल के लिए विजयी होनी की आशा को प्रस्तुत करता है (पद 24-25)।

      जब हम अपने जीवन प्रभु यीशु मसीह को समर्पित कर देते हैं, तो वह हमें अपनी पवित्र आत्मा देता है, जो हमें सही चुनाव एवँ कार्य करने के लिए सामर्थी करता है (8:8-10)। जब हम परमेश्वर पवित्र आत्मा की अगुवाई में परमेश्वर के वचनों का पालन करते हैं, तो हम उस झुलसाने वाले पाप से बच सकते हैं जो हमें उस बहुतायत के जीवन की आशीषों से रोक कर रखता है, जिनकी परमेश्वर ने उन्हें प्रतिज्ञा की है जो उससे प्रेम करते हैं। - जोशील डिक्सन

पवित्र आत्मा अपने प्रेम और अनुग्रह के द्वारा हमें रूपांतरित करता है।

क्या तुम नहीं जानते, कि तुम्हारी देह पवित्रात्मा का मन्दिर है; जो तुम में बसा हुआ है और तुम्हें परमेश्वर की ओर से मिला है, और तुम अपने नहीं हो? क्योंकि दाम देकर मोल लिये गए हो, इसलिये अपनी देह के द्वारा परमेश्वर की महिमा करो। - 1 कुरिन्थियों 6:19-20

बाइबल पाठ: रोमियों 7:14-25
Romans 7:14 क्योंकि हम जानते हैं कि व्यवस्था तो आत्मिक है, परन्तु मैं शरीरिक और पाप के हाथ बिका हुआ हूं।
Romans 7:15 और जो मैं करता हूं, उसको नहीं जानता, क्योंकि जो मैं चाहता हूं, वह नहीं किया करता, परन्तु जिस से मुझे घृणा आती है, वही करता हूं।
Romans 7:16 और यदि, जो मैं नहीं चाहता वही करता हूं, तो मैं मान लेता हूं, कि व्यवस्था भली है।
Romans 7:17 तो ऐसी दशा में उसका करने वाला मैं नहीं, वरन पाप है, जो मुझ में बसा हुआ है।
Romans 7:18 क्योंकि मैं जानता हूं, कि मुझ में अर्थात मेरे शरीर में कोई अच्छी वस्तु वास नहीं करती, इच्छा तो मुझ में है, परन्तु भले काम मुझ से बन नहीं पड़ते।
Romans 7:19 क्योंकि जिस अच्छे काम की मैं इच्छा करता हूं, वह तो नहीं करता, परन्तु जिस बुराई की इच्छा नहीं करता वही किया करता हूं।
Romans 7:20 परन्तु यदि मैं वही करता हूं, जिस की इच्छा नहीं करता, तो उसका करने वाला मैं न रहा, परन्तु पाप जो मुझ में बसा हुआ है।
Romans 7:21 सो मैं यह व्यवस्था पाता हूं, कि जब भलाई करने की इच्छा करता हूं, तो बुराई मेरे पास आती है।
Romans 7:22 क्योंकि मैं भीतरी मनुष्यत्व से तो परमेश्वर की व्यवस्था से बहुत प्रसन्न रहता हूं।
Romans 7:23 परन्तु मुझे अपने अंगो में दूसरे प्रकार की व्यवस्था दिखाई पड़ती है, जो मेरी बुद्धि की व्यवस्था से लड़ती है, और मुझे पाप की व्यवस्था के बन्धन में डालती है जो मेरे अंगों में है।
Romans 7:24 मैं कैसा अभागा मनुष्य हूं! मुझे इस मृत्यु की देह से कौन छुड़ाएगा?
Romans 7:25 मैं अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर का धन्यवाद करता हूं: निदान मैं आप बुद्धि से तो परमेश्वर की व्यवस्था का, परन्तु शरीर से पाप की व्यवस्था का सेवन करता हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 56-58
  • 2 थिस्सलुनीकियों 2