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शनिवार, 28 जनवरी 2012

संपर्क

   आज की जीवन शैली का एक मुख्य भाग ’संपर्क में रहना’ हो गया है। ऐसे अनेक लोग हैं जो अपने साथ सदा अपना मोबाइल फोन, लैप्टॉप, आईपौड या अन्य कोई ऐसा उपकरण रखते हैं जिसके द्वारा वे कभी भी कहीं भी दूसरों से संपर्क में रह सकें। अब चौबीसों घंटे उपलब्ध रहना जीवन का उसूल बन गया है। कुछ मनोवैज्ञानिक इस लगातार संपर्क की लालसा को एक व्यसन के रूप में देखते हैं। लेकिन साथ ही ऐसे लोगों की संख्या भी बढ़ती जा रही है जो संपर्क में रहने के इन उपकरणों के अपने प्रयोग को सीमित रखने के प्रयत्न में लगे हैं। वे जीवन में प्रौद्यौगिकी के बढ़ते दख़ल को बढ़ावा देने के बजाए, अपने जीवन में जानकारी और प्रौद्यौगिकी के प्रवाह को सीमित करके, अपना समय शांत रहने में व्यतीत करना चाहते हैं जिससे वे अपने मन-मस्तिष्क को आराम दे सकें।

   एक और भी संपर्क है आज जिसकी अवहेलना होती जा रही है, किंतु जिसका महत्व और जिसकी उपयोगिता संसार के आपसी संपर्क से कहीं अधिक बढ़कर है - परमेश्वर के साथ हमारा नित्यप्रायः संपर्क। मसीही विश्वासी इस बात को पहचानते हैं कि प्रतिदिन परमेश्वर के वचन बाइबल का अध्ययन और परमेश्वर के साथ प्रार्थना में बिताया गया समय न केवल उनके विश्वास के जीवन वरन प्रतिदिन के जीवन में भी में आगे बढ़ने के लिए कितना महत्व रखता है। उनका यह "शांत समय" संसार से ध्यान हटा कर परमेश्वर के साथ संपर्क साधने का समय होता है, जहां वे अपनी दिनचर्या और अपनी गतिविधियों के लिए परमेश्वर से सामर्थ और क्षमता पाते हैं। भजन २३ के दूसरे पद में भजनकार परमेश्वर द्वारा ’हरी चराईयों’ और ’सुखदायी जल के सोतों’ पर ले जाए जाने की बात करता है; यह किसी सुन्दर प्राकृतिक स्थान में ले जाए जाने की बात नहीं है। यह परमेश्वर से बने संपर्क द्वारा हमारे मन को शांत और बहाल किए जाने के स्रोतों पर जाने तथा परमेश्वर के मार्गों में चलने के बारे में है।

   हम में से प्रत्येक परमेश्वर के साथ समय बिता सकता है, लेकिन क्या हम में से प्रत्येक ऐसा करता है या करना भी चाहता है? अपनी पुस्तक "7 Minutes With God" में रौबर्ट फौस्टर इस संपर्क की साधना को आरंभ करने के लिए एक विधि सुझाते हैं: मार्गदर्शन के लिए एक छोटी सी प्रार्थना के साथ आरंभ करें, फिर कुछ मिनिट बाइबल पढ़ने और पढ़े गए पर मनन में बिताएं, और फिर कुछ समय प्रार्थना में बिताएं जिसमें परमेश्वर की आराधना, पापों का अंगीकार, परमेश्वर को धन्यवाद और दूसरों की आवश्यक्ताओं के लिए विनती सम्मिलित हो।

   परमेश्वर के साथ अपने संपर्क को जोड़िए; संसार के साथ के किसी भी संपर्क से यह कहीं अधिक अनिवार्य और अति लाभप्रद है। - डेविड मैककैसलैंड


परमेश्वर के साथ बिताया गया समय, समय का सदुपयोग है।

वह मुझे हरी हरी चराइयों में बैठाता है; वह मुझे सुखदाई जल के झरने के पास ले चलता है; - भजन २३:२

बाइबल पाठ: भजन २३
Psa 23:1  यहोवा मेरा चरवाहा है, मुझे कुछ घटी न होगी।
Psa 23:2  वह मुझे हरी हरी चराइयों में बैठाता है; वह मुझे सुखदाई जल के झरने के पास ले चलता है;
Psa 23:3  वह मेरे जी में जी ले आता है। धर्म के मार्गो में वह अपने नाम के निमित्त अगुवाई करता है।
Psa 23:4  चाहे मैं घोर अन्धकार से भरी हुई तराई में होकर चलूं, तौभी हानि से न डरूंगा, क्योंकि तू मेरे साथ रहता है; तेरे सोंटे और तेरी लाठी से मुझे शान्ति मिलती है।
Psa 23:5  तू मेरे सताने वालों के साम्हने मेरे लिये मेज बिछाता है; तू ने मेरे सिर पर तेल मला है, मेरा कटोरा उमण्ड रहा है।
Psa 23:6  निश्चय भलाई और करूणा जीवन भर मेरे साथ साथ बनी रहेंगी; और मैं यहोवा के धाम में सर्वदा वास करूंगा।
 
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन १९-२० 
  • मत्ती १८:२१-३५

शुक्रवार, 27 जनवरी 2012

प्रभाव

   माना जाता है कि विलियम एडम्स (१५६४-१६२०) जापान पहुंचने वाले प्रथम ब्रिटिश नागरिक थे। उनके व्यवहार से प्रसन्न होकर जापान के तत्कालीन शासक ने उन्हें अपना निज दुभाषिया और पश्चिमी ताकतों के प्रति निर्णयों के लिए अपना सलाहकार बना लिया। आगे चलकर उनकी सेवा के लिए शासक ने उन्हें दो तलवारें भेंट करीं और ’समुराई’ का दर्जा दिया, जो जापान के शासकों के अति विशिष्ट योद्धा और विश्वासपात्र होते थे। क्योंकि एडम्स ने अपने विदेशी राजा की सेवा वफादारी और भली-भांति करी, इसलिए उन्हें और अधिक प्रभावी और आदर्णीय होने के अवसर मिले।

   इससे भी सदियों पहले, एक अन्य व्यक्ति, नहेम्याह ने भी, अपने विदेशी राजा पर बहुत प्रभाव डाला था। नहेम्याह एक यहूदी था जो दास बनाकर लाए गए इस्त्राएलीयों में से था; वह फारसी राजा अर्तक्षत्र को प्याला देनेहारा नियुक्त किया गया था (नहेम्याह १:११)। राजा के दरबार में, राजा को दाखरस देने से पहले उसे पीकर जाँचना और फिर राजा को देना उसका काम था। यह जोखिम भरा भी था, क्योंकि दाखरस में कोई ज़हर भी मिला सकता था, किंतु यह राजा के विश्वासपात्र होने और उसपर प्रभाव डाल पाने की स्थिति में होने का भी प्रमाण था। नहेम्याह की ईमानदारी, प्रशासनीय कार्यकुशलता और बुद्धिमानी ने उसे राजा का विश्वासपात्र और प्रीय बना दिया था। अपने इन ही गुणों के कारण वह राजा से यरुशलेम की टूटी हुई दीवारों के पुनःर्निर्माण के लिए अनुमति और संसाधन उपलब्ध करवा सका।

   नहेम्याह ही के समान हम में से प्रत्येक को कुछ गुण और प्रभाव का क्षेत्र दिया गया है। यह बच्चों का पालन-पोषण, हमारी नौकरी की ज़िम्मेदारियां, चर्च तथा सेवकाई के कार्य आदि कुछ भी ऐसा हो सकता है जिसके द्वारा हम दूसरों पर प्रभाव डालने वाले होते हैं। यह प्रभाव भला भी हो सकता है और बुरा भी; अन्ततः परिणाम ही उस प्रभाव की व्याख्या करते हैं।

   अपने आस-पास देखिए, परमेश्वर ने आप के जीवन में किसे दिया है जिसपर आप का प्रभाव पड़ रहा है - सुनिश्चित कीजिए कि यह प्रभाव भला ही हो। - डेनिस फिशर


एक छोटा उदाहरण भी मसीह के लिए बड़ा प्रभावी हो सकता है।

राजा ने मुझ से पूछा, फिर तू क्या मांगता है? - नहेम्याह २:४

बाइबल पाठ: नहेम्याह २:१-९
Neh 2:1  अर्तक्षत्र राजा के बीसवें वर्ष के नीसान नाम महीने में, जब उसके साम्हने दाखमधु था, तब मैं ने दाखमधु उठाकर राजा को दिया। इस से पहिले मैं उसके साम्हने कभी उदास न हुआ था।
Neh 2:2  तब राजा ने मुझ से पूछा, तू तो रोगी नहीं है, फिर तेरा मुंह क्यों उतरा है? यह तो मन ही की उदासी होगी।
Neh 2:3  तब मैं अत्यन्त डर गया। और राजा से कहा, राजा सदा जीवित रहे ! जब वह नगर जिस में मेरे पुरखाओं की कबरें हैं, उजाड़ पड़ा है और उसके फाटक जले हुए हैं, तो मेरा मुंह क्यों न उतरे?
Neh 2:4  राजा ने मुझ से पूछा, फिर तू क्या मांगता है? तब मैं ने स्वर्ग के परमेश्वर से प्रार्थना करके, राजा से कहा;
Neh 2:5  यदि राजा को भाए, और तू अपने दास से प्रसन्न हो, तो मुझे यहूदा और मेरे पुरखाओं की कबरों के नगर को भेज, ताकि मैं उसे बनाऊं।
Neh 2:6  तब राजा ने जिसके पास रानी भी बैठी थी, मुझ से पूछा, तू कितने दिन तक यात्रा में रहेगा? और कब लैटेगा? सो राजा मुझे भेजने को प्रसन्न हुआ; और मैं ने उसके लिये एक समय नियुक्त किया।
Neh 2:7  फिर मैं ने राजा से कहा, यदि राजा को भाए, तो महानद के पार के अधिपतियों के लिये इस आशय की चिट्ठियां मुझे दी जाएं कि जब तक मैं यहूदा को न पहुंचूं, तब तक वे मुझे अपने अपने देश में से होकर जाने दें।
Neh 2:8  और सरकारी जंगल के रखवाले आसाप के लिये भी इस आशय की चिट्ठी मुझे दी जाए ताकि वह मुझे भवन से लगे हुए राजगढ़ की कडिय़ों के लिये, और शहरपनाह के, और उस घर के लिये, जिस में मैं जाकर रहूंगा, लकड़ी दे। मेरे परमेश्वर की कृपादृष्टि मुझ पर थी, इसलिये राजा ने यह बिनती ग्रहण किया।
Neh 2:9  तब मैं ने महानद के पार के अधिपतियों के पास जाकर उन्हें राजा की चिट्ठियां दीं। राजा ने मेरे संग सेनापति और सवार भी भेजे थे। 
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन १६-१८ 
  • मत्ती १८:१-२०

गुरुवार, 26 जनवरी 2012

विलंबित परिणाम

   जब मैं बच्चा था, तब मैंने सही व्यवहार परिणामों द्वारा सीखा; जब मैं अच्छा व्यवहार करता था तो व्यसक मुझे पुरुसकार देते थे, यदि बुरा व्यवहार करता था तो डांट या दण्ड मिलता था। क्योंकि मुझे अपने व्यवहार का परिणाम तुरंत ही मिल जाता था इसलिए मुझे भले-बुरे व्यवहार्फ़ में अन्तर सिखाने में यह उपयोगी हुआ। लेकिन मेरे व्यसक होने के बाद जीवन कुछ जटिल हो गया है, और अब मेरे व्यवहार के परिणाम अकसर तुरंत ही नहीं आ जाते हैं। क्योंकि मेरे बुरे व्यवहार के बुरे परिणाम तुरंत मेरे समक्ष नहीं आते इसलिए मुझे यह भी लगने लगा कि मेरे व्यवहार से परमेश्वर को कोई सरोकार नहीं है, और मुझे अपना व्यवहार निरधारित करने की खुली छूट है।

   कुछ ऐसा ही इस्त्राएली लोगों के साथ भी हुआ। जब उन्होंने परमेश्वर की अनाअज्ञाकारिता करी और इसके दुष्परिणाम तुरंत उन पर नहीं आए तो वे लापरवाह हो गए: "...इस्राएल और यहूदा के घरानों का अधर्म अत्यन्त ही अधिक है, यहां तक कि देश हत्या से और नगर अन्याय से भर गया है; क्योंकि वे कहते हें कि यहोवा ने पृथ्वी को त्याग दिया और यहोवा कुछ नहीं देखता" (यहेजकेल ९:९)। किंतु उनका ऐसा सोचना गलत था। अन्ततः उनके अधर्म से उक्ता गया और क्रोधित हुआ: "इसलिये तू उन से कह, प्रभु यहोवा यों कहता है, मेरे किसी वचन के पूरा होने में फिर विलम्ब न होगा, वरन जो वचन मैं कहूं, सो वह निश्चय पूरा होगा, प्रभु यहोवा की यही वाणी है" (यहेजकेल १२:२८)।

   जब परमेश्वर अपने अनुशासन में देरी करता है तो इसका तात्पर्य यह नहीं है कि वह हमारे बुरे व्यवहार और अधर्म को नज़रान्दाज़ कर रहा है या उससे  अनवगत और बेपरवाह है। उसका विलंब उसके प्रेम व्यवहार का अंश है, वह विलंब से कोप करने वाला और करुणामय परमेश्वर है। उसके इस विलंब को बहुतेरे पाप और अधर्म करने के लिए अनुमति मान लेते हैं, किंतु वास्तव में यह विलंब पश्चाताप का अवसर है "क्‍या तू उस की कृपा, और सहनशीलता, और धीरजरूपी धन को तुच्‍छ जानता है और क्या यह नहीं समझता, कि परमेश्वर की कृपा तुझे मन फिराव को सिखाती है" (रोमियों २:४), इससे पहले कि उसके क्रोध की जलजलाहट उनपर टूट पड़े, क्योंकि उसका न्याय खरा और अवश्यंभावी है "वह हर एक को उसके कामों के अनुसार बदला देगा" (रोमियों २:६)। - जूली ऐकरमैन लिंक


अपनी गलती मान कर पश्चाताप कर लेना ही सुधार का एकमात्र उपाय है।

अपने वस्त्र नहीं, अपने मन ही को फाड़कर अपने परमेश्वर यहोवा की ओर फिरो; क्योंकि वह अनुग्रहकारी, दयालु, विलम्ब से क्रोध करने वाला, करूणानिधान और दु:ख देकर पछतानेहारा है।
 
बाइबल पाठ: रोमियों २:१-८
Rom 2:1 सो हे दोष लगानेवाले, तू कोई क्‍यों न हो; तू निरुत्तर है! क्‍योंकि जिस बात में तू दूसरे पर दोष लगाता है, उसी बात में अपने आप को भी दोषी ठहराता है, इसलिये कि तू जो दोष लगाता है, आप ही वही काम करता है।
Rom 2:2 और हम जानते हैं, कि ऐसे ऐसे काम करने वालों पर परमेश्वर की ओर से ठीक ठीक दण्‍ड की आज्ञा होती है।
Rom 2:3 और हे मनुष्य, तू जो ऐसे ऐसे काम करने वालों पर दोष लगाता है, और आप वे ही काम करता है; क्‍या यह समझता है, कि तू परमेश्वर की दण्‍ड की आज्ञा से बच जाएगा?
Rom 2:4 क्‍या तू उस की कृपा, और सहनशीलता, और धीरजरूपी धन को तुच्‍छ जानता है और कया यह नहीं समझता, कि परमेश्वर की कृपा तुझे मन फिराव को सिखाती है?
Rom 2:5 पर अपनी कठोरता और हठीले मन के अनुसार उसके क्रोध के दिन के लिये, जिस में परमेश्वर का सच्‍चा न्याय प्रगट होगा, अपने निमित्त क्रोध कमा रहा है।
Rom 2:6  वह हर एक को उसके कामों के अनुसार बदला देगा।
Rom 2:7 जो सुकर्म में स्थिर रहकर महिमा, और आदर, और अमरता की खोज में है, उन्‍हें अनन्‍त जीवन देगा।
Rom 2:8  पर जो विवादी हैं, और सत्य को नहीं मानते, वरन अधर्म को मानते हैं, उन पर क्रोध और कोप पड़ेगा।
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन १४-१५ 
  • मत्ती १७

बुधवार, 25 जनवरी 2012

सर्वदा आनन्दित

   छठी शाताब्दी में सात घातक पापों की सूचि बनाकर प्रचलित करी गई थी; ये पाप थे: कामुक्ता, पेटुपन या अतिभक्षी होना, लालच, आलस, बदले की भावना, जलन और घमंड या अहंकार। एक और सूची इससे भी पहले चौथी शताब्दी में प्रेषित की गई थी जिसमें उपरोक्त सातों के अतिरिक्त एक और भी पाप गिनाया गया था - उदास रहने का पाप! समय के साथ साथ पापों की गिनती से उदासी या दुखी रहना हट गया।

   कुछ लोगों का स्वभाव सदा प्रसन्न रहने का होता है; वे सदा ही आनन्दित प्रतीत होते हैं। उनके चेहरे पर मुस्कुराहट ऐसे रहती है मानो किसी दन्तमंजन का प्रचार कर रहे हों। लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो हमेशा दुखी ही नज़र आते हैं। उन्हें हर बात में परेशानीयां ही दिखती रहती हैं, वे सदा जीवन और उसकी कठिनाइयों के बारे में शिकायत करते रहते हैं। वे स्वयं भी निराश रहते हैं और दूसरों को भी निराश करते हैं।

   यह ठीक है कि हर किसी के पास जीवन के प्रति स्कारात्मक रवैया नहीं होता, लेकिन मसीही विश्वासी के लिए यह स्मरण रखना आवश्यक है कि प्रभु यीशु द्वारा अपने चेलों से वायदा किए गए वरदानों में से एक है आनन्द। जिस रात प्रभु यीशु को पकड़वाया गए थे, उन्होंने अपने चेलों से कहा था: "...तुम्हारा आनन्‍द कोई तुम से छीन न लेगा। मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि तुम्हें मुझ में शान्‍ति मिले; संसार में तुम्हें क्‍लेश होता है, परन्‍तु ढाढ़स बांधो, मैं ने संसार को जीत लिया है" (यूहन्ना १६:२२; ३३)। यह भी स्मरण रखिए कि आनन्द मसीही विश्वासी के अन्दर बसे हुए पवित्र आत्मा के फलों में से एक है: "पर आत्मा का फल प्रेम, आनन्‍द, मेल, धीरज, और कृपा, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं; ऐसे ऐसे कामों के विरोध में कोई व्यवस्था नहीं" (गलतियों ५:२२, २३)। इसलिए मसीही विश्वासी के लिए यह आवश्यक है कि वह उदासी को अपने ऊपर हावी ना होने दे।

   प्रभु की सामर्थ और सहायता से हम अपने उद्धारकर्ता के समान अपनी परिस्थितियों से आगे देखते रहने वाले हो सकते हैं "और विश्वास के कर्ता और सिद्ध करनेवाले यीशु की ओर से ताकते रहें; जिस ने उस आनन्‍द के लिये जो उसके आगे धरा या, लज्ज़ा की कुछ चिन्‍ता न करके, क्रूस का दुख सहा, और सिंहासन पर परमेश्वर के दाहिने जा बैठा" (इब्रानियों १२:२); ऐसे लोग जो सदा हर परिस्थिति में परमेश्वर में आनन्दित रह सकें क्योंकि मसीही विश्वासी से परमेश्वर का वचन कहता है "...उदास मत रहो, क्योंकि यहोवा का आनन्द तुम्हारा दृढ़ गढ़ है" (नहेम्याह ८:१०)। - वर्नन ग्राउंड्स


आनन्द आत्मा के फलों में से एक है, ऐसे फल जो हर ऋतु में उपलब्ध रहते हैं।

और तुम्हें भी अब तो शोक है, परन्‍तु मैं तुम से फिर मिलूंगा और तुम्हारे मन में आनन्‍द होगा; और तुम्हारा आनन्‍द कोई तुम से छीन न लेगा। - यूहन्ना १६:२२

बाइबल पाठ: प्रेरितों ५:२८-४२
Act 5:28  क्‍या हम ने तुम्हें चिताकर आज्ञा न दी थी, कि तुम इस नाम से उपदेश न करना तौभी देखो, तुम ने सारे यरूशलेम को अपने उपदेश से भर दिया है और उस व्यक्ति का लोहू हमारी गर्दन पर लाना चाहते हो।
Act 5:29  तब पतरस और, और प्रेरितों ने उत्तर दिया, कि मनुष्यों की आज्ञा से बढ़कर परमेश्वर की आज्ञा का पालन करना ही कर्तव्य कर्म है।
Act 5:30  हमारे बाप-दादों के परमेश्वर ने यीशु को जिलाया, जिसे तुम ने क्रूस पर लटका कर मार डाला था।
Act 5:31 उसी को परमेश्वर ने प्रभु और उद्धारक ठहराकर, अपने दाहिने हाथ से सर्वोच्‍च कर दिया, कि वह इस्‍त्राएलियों को मन फिराव की शक्ति और पापों की क्षमा प्रदान करे।
Act 5:32 और हम इन बातों के गवाह हैं, और पवित्र आत्मा भी, जिसे परमेश्वर ने उन्‍हें दिया है, जो उस की आज्ञा मानते हैं।
Act 5:33 यह सुनकर वे जल गए, और उन्‍हें मार डालना चाहा।
Act 5:34 परन्‍तु गमलीएल नाम एक फरीसी ने जो व्यवस्थापक और सब लोगों में माननीय था, न्यायालय में खड़े होकर प्रेरितों को थोड़ी देर के लिये बाहर कर देने की आज्ञा दी।
Act 5:35 तब उस ने कहा, हे इस्‍त्राएलियों, जो कुछ इन मनुष्यों से किया चाहते हो, सोच समझ के करना।
Act 5:36 क्‍योंकि इन दिनों से पहले यियूदास यह कहता हुआ उठा, कि मैं भी कुछ हूं; और कोई चार सौ मनुष्य उसके साथ हो लिये, परन्‍तु वह मारा गया; और जितने लोग उसे मानते थे, सब तित्तर बित्तर हुए और मिट गए।
Act 5:37  उसके बाद नाम लिखाई के दिनों में यहूदा गलीली उठा, और कुछ लोग अपनी ओर कर लिये: वह भी नाश हो गया, और जितने लागे उसे मानते थे, सब तित्तर बित्तर हो गए।
Act 5:38 इसलिये अब मैं तुम से कहता हूं, इन मनुष्यों से दूर ही रहो और उन से कुछ काम न रखो; क्‍योंकि यदि यह धर्म या काम मनुष्यों की ओर से हो तब तो मिट जाएगा।
Act 5:39 परन्‍तु यदि परमेश्वर की ओर से है, तो तुम उन्‍हें कदापि मिटा न सकोगे; कहीं ऐसा न हो, कि तुम परमेश्वर से भी लड़ने वाले ठहरो।
Act 5:40 तब उन्‍होंने उस की बात मान ली और प्रेरितों को बुलाकर पिटवाया; और यह आज्ञा देकर छोड़ दिया, कि यीशु के नाम से फिर बातें न करना।
Act 5:41 वे इस बात से आनन्‍दित होकर महासभा के साम्हने से चले गए, कि हम उसके नाम के लिये निरादर होने के योग्य तो ठहरे।
Act 5:42 और प्रति दिन मन्‍दिर में और घर घर में उपदेश करने, और इस बात का सुसमाचार सुनाने से, कि यीशु ही मसीह है न रूके।
 
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन १२-१३ 
  • मत्ती १६

मंगलवार, 24 जनवरी 2012

सामर्थी वचन

   जब पोह फैंग नामक एक किशोरी ने प्रभु यीशु के अपने प्रति प्रेम के बारे में जाना और उसे अपने निज उद्धारकर्ता के रूप में स्वीकार किया तो उसके माता-पिता को मसीही विश्वास के प्रति कुछ शंकाएं हुईं। उन्होंने पोह फैंग की बड़ी बहन से कहा कि उसके साथ साथ चर्च जाया करे ताकि वह अपनी बहन पर नज़र रख सके और वहां कि गतिविधियों की खबर भी उन तक पहुंचती रहे। लेकिन वहां कुछ अप्रत्याशित हो गया। परमेश्वर के सामर्थी वचन ने बड़ी बहन के मन में भी असर किया और उसने भी प्रभु यीशु को अपना उद्धारकर्ता स्वीकार कर लिया।

   भजनकार ने लिखा कि "मैं तेरे उपदेशों को कभी न भूलूंगा क्योंकि उन्हीं के द्वारा तू ने मुझे जिलाया है" (भजन ११९:९३)। यही गवाही पोह फैंग और उन सभी लोगों की भी है जिन्होंने प्रभु यीशु को अपना निज उद्धारकर्ता जाना है; "क्‍योंकि परमेश्वर का वचन जीवित, और प्रबल, और हर एक दोधारी तलवार से भी बहुत चोखा है, और जीव, और आत्मा को, और गांठ गांठ, और गूदे गूदे को अलग करके, आर पार छेदता है; और मन की भावनाओं और विचारों को जांचता है" (इब्रानियों ४:१२)।

   परमेश्वर का वचन हमें: 
  • हमारे पापों को दिखाता है और उनके परिणाम के लिए कायल करता है: "इसलिये कि सब ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं" (रोमियों ३:२३); " क्‍योंकि पाप की मजदूरी तो मृत्यु है, परन्‍तु परमेश्वर का वरदान हमारे प्रभु यीशु मसीह में अनन्‍त जीवन है" (रोमियों ६:२३)। 
  • वह हमें परमेश्वर के प्रेम और उद्धार के बारे में बताता है: "परन्‍तु परमेश्वर ने जो दया का धनी है, अपने उस बड़े प्रेम के कारण, जिस से उस ने हम से प्रेम किया। जब हम अपराधों के कारण मरे हुए थे, तो हमें मसीह के साथ जिलाया; (अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है)" (इफिसियों २:४, ५)। 
  • वह हमें प्रतिदिन के जीवन के लिए समझ-बूझ और मार्ग दर्शन देता है: "तेरा वचन मेरे पांव के लिये दीपक, और मेरे मार्ग के लिये उजियाला है" (भजन ११९:१०५)।
   हे पिता परमेश्वर आपके प्रबल और सामर्थी वचन के लिए, जो हमें जीवन और जीवन की सही दिशा देता है, आपका कोटि कोटि धन्यवाद हो। - ऐनी सेटास

बहुत सी पुस्तकें हैं जो ज्ञान सिखाती हैं, किंतु बाइबल ही वह एकमात्र पुस्तक है जो मन परिवर्तित कर देती है।

क्‍योंकि परमेश्वर का वचन जीवित, और प्रबल, और हर एक दोधारी तलवार से भी बहुत चोखा है, और जीव, और आत्मा को, और गांठ गांठ, और गूदे गूदे को अलग करके, आर पार छेदता है; और मन की भावनाओं और विचारों को जांचता है। - इब्रानियों ४:१२

बाइबल पाठ: भजन ११९:९७-१०४
Psa 119:97  अहा! मैं तेरी व्यवस्था में कैसी प्रीति रखता हूं! दिन भर मेरा ध्यान उसी पर लगा रहता है।
Psa 119:98  तू अपनी आज्ञाओं के द्वारा मुझे अपने शत्रुओं से अधिक बुद्धिमान करता है, क्योंकि वे सदा मेरे मन में रहती हैं।
Psa 119:99  मैं अपने सब शिक्षकों से भी अधिक समझ रखता हूं, क्योंकि मेरा ध्यान तेरी चितौनियों पर लगा है।
Psa 119:100  मैं पुरनियों से भी समझदार हूं, क्योंकि मैं तेरे उपदेशों को पकड़े हुए हूं।
Psa 119:101  मैं ने अपने पांवों को हर एक बुरे रास्ते से रोक रखा है, जिस से मैं तेरे वचन के अनुसार चलूं।
Psa 119:102  मैं तेरे नियमों से नहीं हटा, क्योंकि तू ही ने मुझे शिक्षा दी है।
Psa 119:103  तेरे वचन मुझ को कैसे मीठे लगते हैं, वे मेरे मुंह में मधु से भी मीठे हैं!
Psa 119:104  तेरे उपदेशों के कारण मैं समझदार हो जाता हूं, इसलिये मैं सब मिथ्या मार्गों से बैर रखता हूं।
 
एक साल में बाइबल:  
  • निर्गमन ९-११ 
  • मत्ती १५:२१-३०

सोमवार, 23 जनवरी 2012

हताश किंतु उपयोगी

   क्या कभी आप ने हताश होकर अपने कार्य अथवा सेवकाई को छोड़ देना चाहा है? परमेश्वर के भविष्यद्वक्ता एलिय्याह ने ऐसा करना चाहा था। इस्त्राएल के सामने यह प्रमाणित करने के लिए कि कोई अन्य देवता नहीं वरन यहोवा ही एकमात्र परमेश्वर है, परमेश्वर ने उसे अभी बड़े सामर्थी रूप में प्रयोग किया ही था (१ राजा १८), कि इसी घटना के कारण रानी इज़ेबेल से मिलने वाली जान की धमकी ने एलिय्याह को भयग्रस्त कर दिया, और वह अपने जीवन में परमेश्वर की सामर्थ के महान प्रमाण को भूलकर, अपनी जान बचाने के लिए १०० मील दक्षिण को भागा (१ राजा १९:३); फिर और १५० मील दक्षिण में परमेश्वर के पर्वत होरेब पर जाकर बैठ गया।

   दो बार परमेश्वर ने एलिय्याह से पूछा कि वह वहाँ क्या कर रहा है (पद ९, १३) और दोनो बार एलिय्याह ने एक ही उत्तर दिया: "मैं अकेला ही रह गया हूँ और वे मेरे प्राण के खोजी हैं" (पद १०, १४)। वह अपने भय से इतना ग्रसित हो गया था कि परमेश्वर ने उसके द्वारा जो कर्मेल पर्वत पर महान सामर्थी काम किया था, उसे वह बिलकुल भूल गया और रानी इज़ेबेल की सामर्थ के सामने केवल अपनी ही सामर्थ पर नज़र गड़ा ली। अपनी ही ओर देखने से, परमेश्वर कि प्रगट सामर्थ और उसके द्वारा उसे मिली महान विजय को भूलकर, एलिय्याह निराशा की गर्त में गिर गया, हताश हो गया और अपनी सेवकाई को छोड़ने की इच्छा करने लगा। हमारे साथ भी ऐसा ही कितनी ही बार हो जाता है, जब हम हममें कार्यकारी पर्मेश्वर की सामर्थ को भू्लाकर संसार, संसार के लोगों और संसार की सामर्थ से अपनी व्यक्तिगत सामर्थ की तुलना करके अपने आप को कमज़ोर और असहाय आंकने लगते हैं, भय ग्रस्त हो जाते हैं, निराश और हताश हो जाते हैं।

   लेकिन परमेश्वर ने एलिय्याह का ’इस्तीफा’ स्वीकार नहीं किया, परमेश्वर ने एलिय्याह को समझाया कि वह अकेला नहीं है, उसके समान ७००० अन्य लोग हैं जो परमेश्वर की सामर्थ ही से बाल देवता के आगे घुटने टेकने से बचे हुए हैं (पद १८); और उसे फिर से परमेश्वर के विरोद्धियों के नाश के लिए तीन बड़ी ज़िम्मेदारियां सौंपने के द्वारा (पद १५-१७) आश्वस्त किया कि वह अभी भी परमेश्वर के लिए उतना ही उपयोगी है।

   हो सकता है कि एलिय्याह के समान आप भी अपने जीवन की परिस्थितियों और निराशाओं के कारण हताश हो गए हों और सब कुछ छोड़ देना चाहते हों। एलिय्याह के समान ही, कुछ और करने से पहले, परमेश्वर आपसे क्या कह रहा है वह सुन लीजिए (पद१२)। परमेश्वर आपको बताएगा कि उसकी सामर्थ के साथ आप क्या कुछ कर सकते हैं; वह आपको हताश होकर बैठ जाने और सब कुछ छोड़ देने नहीं देगा; उसकी सन्तान होने के कारण आप परमेश्वर के लिए बहुत बहुमूल्य और उपयोगी हैं और उसकी सामर्थ सदैव आपके साथ है। - सी. पी. हीया


यदि आप यीशु के लिए कार्यरत हैं तो कभी भी घबरा कर उस कार्य से पीछे हट जाना या उसे छोड़ देना जल्दबाज़ी में किया गया गलत निर्णय है।

...मैं ही अकेला रह गया हूँ; और वे मेरे प्राणों के भी खोजी हैं। - १ राजा १९:१०

बाइबल पाठ: १ राजा १९:११-१८
1Ki 19:11  उस ने कहा, निकलकर यहोवा के सम्मुख पर्वत पर खड़ा हो। और यहोवा पास से होकर चला, और यहोवा के साम्हने एक बड़ी प्रचणड आन्धी से पहाड़ फटने और चट्टानें टूटने लगीं, तौभी यहोवा उस आन्धी में न था; फिर आन्धी के बाद भूंईडोल हूआ, तौभी यहोवा उस भूंईडोल में न था।
1Ki 19:12  फिर भूंईडोल के बाद आग दिखाई दी, तौभी यहोवा उस आग में न था; फिर आग के बाद एक दबा हुआ धीमा शब्द सुनाई दिया।
1Ki 19:13  यह सुनते ही एलिय्याह ने अपना मुंह चद्दर से ढांपा, और बाहर जाकर गुफा के द्वार पर खड़ा हुआ। फिर एक शब्द उसे सुनाई दिया, कि हे एलिय्याह तेरा यहां क्या काम?
1Ki 19:14  उस ने कहा, मुझे सेनाओं के परमेश्वर यहोवा के निमित्त बड़ी जलन हुई, क्योंकि इस्राएलियों ने तेरी वाचा टाल दी, और तेरी वेदियों को गिरा दिया है और तेरे नबियों को तलवार से घात किया है; और मैं ही अकेला रह गया हूँ, और वे मेरे प्राणों के भी खोजी हैं।
1Ki 19:15  यहोवा ने उस से कहा, लौटकर दमिश्क के जंगल को जा, और वहां पहुंचकर अराम का राजा होने के लिये हजाएल का,
1Ki 19:16  और इस्राएल का राजा होने को निमशी के पोते येहू का, और अपने स्थान पर नबी होने के लिये आबेलमहोला के शापात के पुत्र एलीशा का अभिषेक करना।
1Ki 19:17  और हजाएल की तलवार से जो कोई बच जाए उसको येहू मार डालेगा, और जो कोई येहू की तलवार से बच जाए उसको एलीशा मार डालेगा।
1Ki 19:18  तौभी मैं सात हजार इस्राएलियों को बचा रखूंगा। ये तो वे सब हैं, जिन्होंने न तो बाल के आगे घुटने टेके, और न मुंह से उसे चूमा है।
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन ७-८ 
  • मत्ती १५:१-२०

रविवार, 22 जनवरी 2012

पुनर्मिलन

   चीनी समाज में चाँद पर आधारित कलैण्डर के अनुसार आरंभ होने वाले नववर्ष की संध्या को परंपरागत पारिवारिक पुनर्मिलन और प्रीति भोज आयोजित करने का बहुत महत्व है। यह आयोजन माता-पिता के घर या सबसे बड़े भाई के घर किया जाता है। जो चीनी लोग विदेशों में रह रहे होते हैं, उन्हें इस आयोजन में सम्मिलित होने के लिए बहुत पहले ही से यात्रा के अपने प्रबन्ध कर लेने होते हैं अन्यथा बाद में यात्रा के लिए बसों या वायुयानों में स्थान मिल पाना कठिन हो जाता है। यदि पहले से यह प्रबन्ध नहीं किया गया, तो इसका नतीजा इस पारिवारिक पुनर्मिलन से वंचित रह जाना होता है।

   परमेश्वर का वचन बाइबल हमें इससे भी कहीं अधिक महत्वपूर्ण पारिवारिक मिलन और भोज के बारे में बताती है जो स्वर्ग में आयोजित होने वाला है। प्रकाशितवाक्य १९:९ इसे "मेम्ने के ब्याह के भोज" की संज्ञा देता है। चीनी समाज के पारिवारिक मिलन के भोज के विपरीत, सिवाए परमेश्वर के इस भोज का समय कोई नहीं जानता (मत्ती २४:३६); कभी भी परमेश्वर की ओर से परमेश्वर की सन्तान को इसके लिए बुलावा आ सकता है। इस भोज में सम्मिलित होने के लिए भी अभी से ही अपनी तैयारी करनी आवश्यक है - यात्रा के माध्यम के लिए नहीं वरन भोज में निमंत्रित होने की।

   कौन हैं जो इस स्वर्गीय भोज में सम्मिलित होंगे? वे सब जो इस पृथ्वी पर परमेश्वर के परिवार में सम्मिलित हो जाते हैं, वे जो प्रभु यीशु को अपना व्यक्तिगत उद्धारकर्ता मान कर उस पर विश्वास करते हैं: "परन्‍तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उस ने उन्‍हें परमेश्वर के सन्‍तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्‍हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं। वे न तो लोहू से, न शरीर की इच्‍छा से, न मनुष्य की इच्‍छा से, परन्‍तु परमेश्वर से उत्‍पन्न हुए हैं" (यूहन्ना १:१२, १३) केवल वे ही वहां उस भोज में सम्मिलित हो सकेंगे।

   क्या आपका नाम और स्थान उस भोज में सम्मिलित होने वालों में है? यदि नहीं, तो आप अभी यह सुनिश्चित कर सकते हैं; सच्चे मन से करी गई एक समर्पण की प्रार्थना, "प्रभु यीशु मेरे पापों को क्षमा करें और मुझे अपनी शरण में ले लें" आपका वर्तमान तथा भविष्य दोनो बना देगी तथा आपको उस भोज में परमेश्वर के परिवार के सदस्य के रूप में सम्मिलित करवा देगी। जो उस पारिवारिक पुनर्मिलन के भोज में सम्मिलित होने की तैयारी इस पृथ्वी पर रहते हुए नहीं करेंगे उन्हें फिर अनन्त काल के लिए परमेश्वर के परिवार और संगति के आनन्द से वंचित ही रहना पड़ेगा। - सी. पी. हीया


मसीह पर किया गया विश्वास अनन्त काल के लिए उद्धार और स्वर्ग में निवास सुनिश्चित कर देता है।

उस ने मुझ से कहा, यह लिख, कि धन्य वे हैं, जो मेम्ने के ब्याह के भोज में बुलाए गए हैं; फिर उस ने मुझ से कहा, ये वचन परमेश्वर के सत्य वचन हैं। - प्रकाशितवाक्य १९:९

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य १९:१-९
Rev 19:1  इस के बाद मैं ने स्‍वर्ग में मानो बड़ी भीड़ को ऊंचे शब्‍द से यह कहते सुना, कि हल्लिलूय्याह उद्धार, और महिमा, और सामर्थ हमारे परमेश्वर ही की है।
Rev 19:2  क्‍योंकि उसके निर्णय सच्‍चे और ठीक हैं, इसलिये कि उस ने उस बड़ी वेश्या का जो अपने व्यभिचार से पृथ्वी को भ्रष्‍ट करती थी, न्याय किया, और उस से अपने दासों के लोहू का पलटा लिया है।
Rev 19:3  फिर दूसरी बार उन्‍होंने हल्लिलूय्याह कहा: और उसके जलने का धुआं युगानुयुग उठता रहेगा।
Rev 19:4  और चौबीसों प्राचीनों और चारों प्राणियों ने गिरकर परमेश्वर को दण्‍डवत किया; जो सिंहासन पर बैठा था, और कहा, आमीन, हल्लिलूय्याह।
Rev 19:5  और सिंहासन में से एक शब्‍द निकला, कि हे हमारे परमेश्वर से सब डरनेवाले दासों, क्‍या छोटे, क्‍या बड़े; तुम सब उस की स्‍तुति करो।
Rev 19:6  फिर मैं ने बड़ी भीड़ का सा, और बहुत जल का सा शब्‍द, और गर्जनों का सा बड़ा शब्‍द सुना, कि हल्लिलूय्याह, इसलिये कि प्रभु हमारा परमेश्वर, सर्वशक्तिमान राज्य करता है।
Rev 19:7  आओ, हम आनन्‍दित और मगन हों, और उस की स्‍तुति करें; क्‍योंकि मेम्ने का ब्याह आ पहुंचा: और उस की पत्‍नी ने अपने आप को तैयार कर लिया है।
Rev 19:8  और उस को शुद्ध और चमकदार महीन मलमल पहिनने का अधिकार दिया गया, क्‍योंकि उस महीन मलमल का अर्थ पवित्र लोगों के धर्म के काम है।
Rev 19:9  और उस ने मुझ से कहा, यह लिख, कि धन्य वे हैं, जो मेम्ने के ब्याह के भोज में बुलाए गए हैं; फिर उस ने मुझ से कहा, ये वचन परमेश्वर के सत्य वचन हैं।
 
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन ४-६ 
  • मत्ती १४:२२-३६