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गुरुवार, 28 जून 2012

विषाक्त जीवन

   अमेरिका के ओक्लोहोमा प्रांत का पिचर नगर अब नहीं रहा। मध्य-२००९ में २०,००० की आबादी वाला यह व्यवसायिक नगर बरबाद हो गया। २०वीं श्ताबदी के आरंभ में पिचर बहुतायत का नगर था, क्योंकि वहां की धरती में सीसा और जस्ता पाया जाता था और दोनो विश्वयुद्धों में अमेरिका के हथियार बनाने के उद्योग को इन दोनो ही खनीज़ों की आवश्यक्ता थी। मज़दूर वहां की खानों में काम करते और अयस्क को निकालते थे, खानों के मालिक भरपूरी से पैसा कमाते थे।

   कुछ समय बाद जब धरती से सीसा और जस्ता समाप्त होने लगे तो नगर की अर्थव्यवस्था भी बैठने लगी और नगर शिथिल पड़ने लगा। लेकिन सबसे बड़ी समस्या, जो नगर की बरबादी का कारण बनी, वह थी प्रदूषण। जो बात नगर की उन्नति का कारण बनी, वही उसके पतन का भी कारण बन गई। नगर के व्यवसाय और भरपूरी के समय में सीसा और जस्ता निकालते समय होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने और उसका निवारण करने की सुद्धि किसी ने नहीं ली; फलस्वरूप खानों के खाली होते होते, पिचर नगर और उसके आस-पास का इलाका एक विषाक्त मरुस्थल बन गया और अन्ततः सरकार को उसे विषाक्त तथा रहने के लिए अयोग्य घोषित करके, उसे बन्द कर देना पड़ा।

   जो पिचर के साथ हुआ, वही लोगों के साथ भी हो सकता है। संपन्नता इतनी मनमोहक हो सकती है कि उसके संभावित दुषपरिणामों की ओर ध्यान भी नहीं जाता, और सफलता तथा संपन्नता के नशे में ऐसे शारीरिक और आत्मिक कार्य बड़ी लापरवाही से स्वीकार कर लिए जाते हैं जो आते समयों में जीवन में गंभीर परेशानियां उत्पन्न करते हैं। यदि समय रहते इन दुषपरिणामों का उपाय नहीं किया जाता, तो अन्त बरबादी ही होता है।

   यही इस्त्राएल के प्रथम राजा, शाऊल के साथ भी हुआ। उसका आरंभ एक अच्छे राजा के रूप में था, लेकिन सफलता की लालसा में उसने पहले परमेश्वर कि आज्ञाकारिता फिर परमेश्वर की चेतावनियों, अन्ततः अपने किए के दुषपरिणामों को भी नज़रंदाज़ किया। वह परमेश्वर से विमुख हो गया, उसने "मूर्खता का काम" किया (१ शमूएल १३:१३) और अपना राजपद गंवा बैठा (पद १४)।

   सफल होने के अपने प्रयासों और लालसाओं में हमें भी यह ध्यान रखना चाहिए कि कहीं हम परमेश्वर के वचन की शिक्षाओं को नज़रंदाज़ करके अपने जीवन में आत्मिक प्रदूषण तो उत्पन्न नहीं कर रहे जो आगे चल कर हमें परमेश्वर से विमुख करके हमारी बरबादी का कारण बन जाएगा। परमेश्वर के भय और आज्ञाकारिता में जीना ही विषाक्त जीवन का उपाय और निवार्ण है। - डेव ब्रैनन


परमेश्वर के बिना कोई भी सही अर्थ में सफल नहीं हो सकता।


शमूएल ने शाऊल से कहा, तू ने मूर्खता का काम किया है; तू ने अपने परमेश्वर यहोवा की आज्ञा को नहीं माना; नहीं तो यहोवा तेरा राज्य इस्राएलियों के ऊपर सदा स्थिर रखता। - १ शमूएल १३:१३

बाइबल पाठ: १ शमूएल १३:७-१४
1Sa 13:7  और कितने इब्री यरदन पार होकर गाद और गिलाद के देशों में चले गए, परन्तु शाऊल गिलगाल ही में रहा, और सब लोग थरथराते हुए उसके पीछे हो लिए।
1Sa 13:8  वह शमूएल के ठहराए हुए समय, अर्थात सात दिन तक बाट जोहता रहा; परन्तु शमूएल गिलगाल में न आया, और लोग उसके पास से इधर उधर होने लगे।
1Sa 13:9  तब शाऊल ने कहा, होमबलि और मेलबलि मेरे पास लाओ। तब उस ने होमबलि को चढ़ाया।
1Sa 13:10  ज्योंही वह होमबलि को चढ़ा चुका, तो क्या देखता है कि शमूएल आ पहुंचा, और शाऊल उस से मिलने और नमस्कार करने को निकला।
1Sa 13:11  शमूएल ने पूछा, तू ने क्या किया? शाऊल ने कहा, जब मैं ने देखा कि लोग मेरे पास से इधर उधर हो चले हैं, और तू ठहराए हुए दिनों के भीतर नहीं आया, और पलिश्ती मिकमाश में इकट्ठे हुए हैं,
1Sa 13:12  तब मैं ने सोचा कि पलिश्ती गिलगाल में मुझ पर अभी आ पड़ेंगे, और मैं ने यहोवा से बिनती भी नहीं की है; सो मैं ने अपनी इच्छा न रहते भी होमबलि चढ़ाया।
1Sa 13:13  शमूएल ने शाऊल से कहा, तू ने मूर्खता का काम किया है; तू ने अपने परमेश्वर यहोवा की आज्ञा को नहीं माना; नहीं तो यहोवा तेरा राज्य इस्राएलियों के ऊपर सदा स्थिर रखता।
1Sa 13:14  परन्तु अब तेरा राज्य बना न रहेगा; यहोवा ने अपने लिये एक ऐसे पुरूष को ढूंढ़ लिया है जो उसके मन के अनुसार है; और यहोवा ने उसी को अपनी प्रजा पर प्रधान होने को ठहराया है, क्योंकि तू ने यहोवा की आज्ञा को नहीं माना।


एक साल में बाइबल: 

  • अय्युब ११-१३ 
  • प्रेरितों ९:१-२१

बुधवार, 27 जून 2012

प्यास

   क्या आप कभी वास्तव में प्यासे, बहुत प्यासे हुए हैं? बहुत वर्ष पहले की बात है, मैं पश्चिमी अफ्रीका के माली देश में अपनी बहन कैथी से मिलने गई। एक दिन घूमने फिरने के बाद जब दोपहर में तापमान १००  डिगरी फैरन्हाइट से भी अधिक हो गया था, मुझे बहुत प्यास लगी और मैंने अपनी बहन से पानी मांगा। तब कैथी ने उत्तर दिया कि वह फिलटर किया हुआ पानी तो लाना भूल ही गई। मैं प्यास से परेशान होने लगी, और घर पहुंचने में जितना समय बीतता जा रहा था, प्यास के कारण मुझे मर जाने का भय और मेरी बेचैनी बढ़ते जा रहे थे।

   अचानक कैथी ने कहा, "मुझे पता है कि हमें कहां जाना चाहिए" और एक दूतावास में गाड़ी मोड़ ली। उस दूतावास के अन्दर आते ही मेरे सामने एक अति सुन्दर दृश्य था - पीने के पानी का एक कूलर। मैंने वहां रखे छोटे प्याले को लिया और कूलर से उसे भर भर के स्वच्छ ठंडा पानी पीने लगी, और पीती रही जब तक मेरी प्यास बुझ नहीं गई। मेरा शरीर बहुत देर से पानी के बिना था, और अब पानी की कमी को पूरी करने के लिए उसे बहुत पानी की आवश्यक्ता पड़ी।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार ने परमेश्वर के लिए अपनी आत्मिक प्यास को शारीरिक प्यास से समझाया है: "जैसे हरिणी नदी के जल के लिये हांफती है, वैसे ही, हे परमेश्वर, मैं तेरे लिये हांफता हूं। जीवते ईश्वर परमेश्वर का मैं प्यासा हूं, मैं कब जाकर परमेश्वर को अपना मुंह दिखाऊंगा?" (भजन ४२:१-२)। उसकी परमेश्वर के लिए लालसा एक तीव्र प्यास के समान था जिसका निवारण केवल परमेश्वर की उपस्थिति में होने के द्वारा ही संभव था।

   क्या आप में भी कोई ऐसी कोई प्यास है जो यह संसार और संसार की बातें बुझा नहीं पा रहे हैं? यदि हां, तो परमेश्वर के लिए यह आपकी आत्मा की प्यास है। केवल परमेश्वर ही है जो इस आत्मा की प्यास को बुझा सकता है, "क्योंकि वह अभिलाषी जीव को सन्तुष्ट करता है, और भूखे को उत्तम पदार्थों से तृप्त करता है" (भजन १०७:९); उसी के पास जाईए, संतुष्टि केवल उसी के पास मिलेगी। - सिंडी हैस कैस्पर


केवल जीवन का जल, प्रभु यीशु, ही आत्मा की प्यास बुझा सकता है।

जैसे हरिणी नदी के जल के लिये हांफती है, वैसे ही, हे परमेश्वर, मैं तेरे लिये हांफता हूं। - भजन ४२:१

बाइबल पाठ: भजन ४२:१-११
Psa 42:1  जैसे हरिणी नदी के जल के लिये हांफती है, वैसे ही, हे परमेश्वर, मैं तेरे लिये हांफता हूं।
Psa 42:2  जीवते ईश्वर परमेश्वर का मैं प्यासा हूं, मैं कब जाकर परमेश्वर को अपना मुंह दिखाऊंगा?
Psa 42:3  मेरे आंसू दिन और रात मेरा आहार हुए हैं, और लोग दिन भर मुझ से कहते रहते हैं, तेरा परमेश्वर कहां है?
Psa 42:4  मैं भीड़ के संग जाया करता था, मैं जयजयकार और धन्यवाद के साथ उत्सव करने वाली भीड़ के बीच में परमेश्वर के भवन को धीरे धीरे जाया करता था; यह स्मरण करके मेरा प्राण शोकित हो जाता है।
Psa 42:5  हे मेरे प्राण, तू क्यों गिरा जाता है? और तू अन्दर ही अन्दर क्यों व्याकुल है? परमेश्वर पर आशा लगाए रह; क्योंकि मैं उसके दर्शन से उद्धार पाकर फिर उसका धन्यवाद करूंगा।
Psa 42:6  हे मेरे परमेश्वर, मेरा प्राण मेरे भीतर गिरा जाता है, इसलिये मैं यर्दन के पास के देश से और हर्मोन के पहाड़ों और मिसगार की पहाड़ी के ऊपर से तुझे स्मरण करता हूं।
Psa 42:7  तेरी जलधाराओं का शब्द सुनकर जल, जल को पुकारता है; तेरी सारी तरंगों और लहरों में मैं डूब गया हूं।
Psa 42:8  तौभी दिन को यहोवा अपनी शक्ति और करूणा प्रगट करेगा, और रात को भी मैं उसका गीत गाऊंगा, और अपने जीवनदाता ईश्वर से प्रार्थना करूंगा।
Psa 42:9  मैं ईश्वर से जो मेरी चट्टान है कहूंगा, तू मुझे क्यों भूल गया? मैं शत्रु के अन्धेर के मारे क्यों शोक का पहिरावा पहिने हुए चलता फिरता हूं?
Psa 42:10  मेरे सताने वाले जो मेरी निन्दा करते हैं मानो उस में मेरी हडि्डयां चूर चूर होती हैं, मानो कटार से छिदी जाती हैं, क्योंकि वे दिन भर मुझ से कहते रहते हैं, तेरा परमेश्वर कहां है?
Psa 42:11  हे मेरे प्राण तू क्यों गिरा जाता है? तू अन्दर ही अन्दर क्यों व्याकुल है? परमेश्वर पर भरोसा रख; क्योंकि वह मेरे मुख की चमक और मेरा परमेश्वर है, मैं फिर उसका धन्यवाद करूंगा।


एक साल में बाइबल: 

  • अय्युब ८-१० 
  • प्रेरितों ८:२६-४०

मंगलवार, 26 जून 2012

दोषी

   एक व्यक्ति नौकरी के लिए आवेदन पत्र भर रहा था। उस पत्र में एक प्रश्न आया "क्या आप कभी गिफ्तार हुए हैं?" उस व्यक्ति ने उत्तर भरा "नहीं"; इससे अगला प्रश्न था "किस कारण से?" यह उन लोगों के लिए था जिन्होंने गिरफ्तारी के लिए उत्तर "हाँ" में दिया हो; लेकिन इस व्यक्ति ने इस बात का ध्यान रखे बिना वहां अपना उत्तर भर दिया "क्योंकि कभी पकड़ा नहीं गया"। उसका यह उत्तर इस बात का प्रमाण था कि वह जानता था कि चाहे वह गिरफ्तार ना भी हुआ हो, तो भी वह दोषी तो है।

   यही स्थिति प्रेरित पौलुस की थी। वह जानता था कि उसने गलतियां और परमेश्वर के विरुद्ध पाप किए हैं। इसीलिए वह लिखता है "मैं तो पहिले निन्‍दा करने वाला, और सताने वाला, और अन्‍धेर करने वाला था..."  (१ तिमुथियुस १:१३); और फिर वह अपने आप को "सबसे बड़ा पापी" बताता है (पद १५)।

   हम में से प्रत्येक मसीही विश्वासी यह भली भांति जानता है कि एक समय हम भी अपने पापों और अपराधों के कारण परमेश्वर से दूर और परमेश्वर के बैरी थे (रोमियों ५:१०; कुलुस्सियों १:२१), लेकिन जब हमने अपने पाप मान लिए, प्रभु यीशु को समर्पण के साथ उससे उन पापों की क्षमा मांग ली तो उसने हमें क्षमा किया और सब पापों के दोष से मुक्त किया, शुद्ध किया और एक नया जीवन दिया - मानो हमारा "नया जन्म" हो गया।

   हम मसीही विश्वासियों में से वे जो बहुत वर्षों से प्रभु के इस अनुग्रह में जी रहे हैं संभवतः यह भूल बैठे हों कि प्रभु यीशु ने हमें हमारी किस दशा से छुड़ाया था। इसीलिए प्रत्येक मसीही विश्वासी को अपने जीवन की गवाही दुसरों के साथ बांटते रहना चाहिए, क्योंकि ऐसा करना ना केवल हमें दीन और नम्र रखता है, वरन हमें शैतान पर विजयी भी रखता है (प्रकाशितवाक्य १२:११)। जब हम अपनी पिछली तथा वर्तमान गलतियों का स्मरण बनाए रखते हैं और उनके लिए परमेश्वर से मिले अनुग्रह और क्षमा का बयान करते रहते हैं, तो हमारे अन्दर स्वधार्मिकता या अन्य किसी घमण्ड की कोई संभावना नहीं रहती। साथ ही जिनके सामने हम अपने जीवन और जीवन में हुए प्रभु के कार्य की गवाही रखते हैं, वे भी हमें किसी भी अन्य साधारण सामन्य मनुष्य ही के समान जानने पाते हैं ना कि किसी बहुत "धर्मी और पहुंच से परे" धर्मात्मा या किसी पाखंडी के समान, और देख-समझ पाते हैं कि परमेश्वर की क्षमा और अनुग्रह कैसे किसी के जीवन को बदल देता है।

   कड़ुवा सच यही है कि हम सब परमेश्वर के दोषी हैं, बहुतायत से दोषी हैं; लेकिन साथ ही इस कड़ुवे सच का एक मधुर पहलू भी है - परमेश्वर की क्षमा और अनुग्रह प्रत्येक दोषी के लिए सेंत-मेंत उपलब्ध है। आवश्यक्ता है प्रभु यीशु में विश्वास की, उसे ग्रहण कर लेने और उसकी क्षमा तथा अनुग्रह को जीवन में लागू कर लेने की; "...यीशु मसीह का लोहू हमें सब पापों से शुद्ध करता है" (१ युहन्ना १:७)। - ऐनी सेटास


जो सर्वथा अयोग्य हों उनके लिए सब कुछ उपलब्ध करा देना ही अनुग्रह है।

और हमारे प्रभु का अनुग्रह उस विश्वास और प्रेम के साथ जो मसीह यीशु में है, बहुतायत से हुआ। - १ तिमुथियुस १:१४

बाइबल पाठ: १ तिमुथियुस १:१२-१७
1Ti 1:12  और मैं, अपने प्रभु मसीह यीशु का, जिस ने मुझे सामर्थ दी है, धन्यवाद करता हूं कि उस ने मुझे विश्वासयोग्य समझकर अपनी सेवा के लिये ठहराया।
1Ti 1:13 मैं तो पहिले निन्‍दा करने वाला, और सताने वाला, और अन्‍धेर करने वाला था; तौभी मुझ पर दया हुई, क्‍योंकि मैं ने अविश्वास की दशा में बिन समझे बूझे, ये काम किए थे।
1Ti 1:14  और हमारे प्रभु का अनुग्रह उस विश्वास और प्रेम के साथ जो मसीह यीशु में है, बहुतायत से हुआ।
1Ti 1:15  यह बात सच और हर प्रकार से मानने के योग्य है, कि मसीह यीशु पापियों का उद्धार करने के लिये जगत में आया, जिन में सब से बड़ा मैं हूं।
1Ti 1:16 पर मुझपर इसलिये दया हुई, कि मुझ सब से बड़े पापी में यीशु मसीह अपनी पूरी सहनशीलता दिखाए, कि जो लोग उस पर अनन्‍त जीवन के लिये विश्वास करेंगे, उन के लिये मैं एक आदर्श बनूं।
1Ti 1:17 अब सनातन राजा अर्थात अविनाशी अनदेखे अद्वैत परमेश्वर का आदर और महिमा युगानुयुग होती रहे। आमीन।


एक साल में बाइबल: 

  • अय्युब ५-७ 
  • प्रेरितों ८:१-२५

सोमवार, 25 जून 2012

सही लोग

   एक फिल्म "मिरेकल" १९८० में अमेरिका की बर्फीले मैदान पर खेले जाने वाले हॉकी के खेल में अप्रत्याशित स्वर्ण पदक की ओर बढ़ते दल की सच्ची कहानी दिखाती है। कहानी के आरंभ में दल के मुख्य प्रशिक्षक हर्ब ब्रुक्स को अपने दल के लिए खिलाड़ियों का चुनाव करते हुए दिखाया है। जब वह अपने सहायक प्रशीक्षक, क्रेग पैट्रिक को अपने द्वारा चुने हुए खिलाड़ियों की सूची देता है, तो क्रेग विस्मित होकर कहता है, "आप ने कुछ सबसे अच्छे खिलाड़ियों को तो चुना ही नहीं है।" तब ब्रुक उसको उत्तर देता है, "क्रेग, मैं सबसे अच्छे नहीं केवल सबसे सही खिलाड़ियों की तलाश में हूँ।"

   ब्रुक्स जानते थे कि किसी खिलाड़ी की व्यक्तिगत प्रतिभा, पूरे दल को केवल एक सीमा तक ही ले जा सकती है; किंतु अपनी प्रतिभा से ऊपर उठकर अपने प्रशीक्षक की इच्छा के अनुसार खेलना दल की सहयोग-भावना और एकमनता को बनाए रखने और जीतने का अवसर देने के लिए अनिवार्य है। ब्रुक के लिए पूरे दल की सफलता किसी की व्यक्तिगत प्रतिभा से अधिक महत्वपूर्ण थी।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में परमेश्वर की सेवकाई के लिए दी गई बुलाहट के बारे में भी कुछ ऐसा ही ज़ोर है। परमेश्वर की योजना में, प्रत्येक मसीही विश्वासी को अपना अपना व्यक्तिगत कार्य तो करना है, परन्तु नतीजे सामूहिक हैं। प्रेरित पौलुस ने परमेश्वर की आत्मा के द्वारा मण्डली के सदस्यों को दिए जाने वाले विभिन्न आत्मिक वरदानों में के विष्य में लिखा, "किन्‍तु सब के लाभ पहुंचाने के लिये हर एक को आत्मा का प्रकाश दिया जाता है" (१ कुरिन्थियों १२:७)। जब हम परमेश्वर द्वारा हमें दी गई प्रतिभा का उसकी इच्छानुसार सदुपयोग करते हैं, तो उसके उद्देश्य पूरे होते हैं और उसे महिमा मिलती है।

   परमेश्वर की सेवकाई में महत्व व्यक्तिगत रीति से ना सबसे उत्तम होने का है, ना सबसे अधिक प्रतिभावान होने का और ना ही सबसे अधिक गुण्वन्त होने का है; महत्व है सही व्यक्ति होने का, ऐसा व्यक्ति जो व्यक्तिगत उपलब्धी और ख्याति के लिए महत्वकांक्षी ना हो वरन परमेश्वर की देह अर्थात उसकी मण्डली में परमेश्वर द्वारा निर्धारित स्थान पर ही विनम्रता और आज्ञाकारिता में रहने तथा मण्डली के अन्य लोगों के साथ मिलकर मण्डली के सामूहिक उत्थान के लिए कार्य करने को तत्पर और तैयार हो। - बिल क्राउडर


प्रभु यीशु की देह अर्थात उसकी मण्डली में कोई जन महत्वहीन नहीं है।

परन्‍तु सचमुच परमेश्वर ने अंगो को अपनी इच्‍छा के अनुसार एक एक कर के देह में रखा है। - १ कुरिन्थियों १२:१८

बाइबल पाठ: - १ कुरिन्थियों १२:७-१८
1Co 12:7  किन्‍तु सब के लाभ पहुंचाने के लिये हर एक को आत्मा का प्रकाश दिया जाता है।
1Co 12:8  क्‍योंकि एक को आत्मा के द्वारा बुद्धि की बातें दी जाती हैं, और दूसरे को उसी आत्मा के अनुसार ज्ञान की बातें।
1Co 12:9   और किसी को उसी आत्मा से विश्वास और किसी को उसी एक आत्मा से चंगा करने का वरदान दिया जाता है।
1Co 12:10  फिर किसी को सामर्थ के काम करने की शक्ति और किसी को भविष्यद्वाणी की और किसी को अनेक प्रकार की भाषा और किसी को भाषाओं का अर्थ बताना।
1Co 12:11  परन्‍तु ये सब प्रभावशाली कार्य वही एक आत्मा करवाता है, और जिसे जो चाहता है वह बांट देता है।
1Co 12:12  क्‍योंकि जिस प्रकार देह तो एक है और उसके अंग बहुत से हैं, और उस एक देह के सब अंग, बहुत होने पर भी सब मिल कर एक ही देह हैं, उसी प्रकार मसीह भी है।
1Co 12:13  क्‍योंकि हम सब ने क्‍या यहूदी हो, क्‍या युनानी, क्‍या दास, क्‍या स्‍वतंत्र एक ही आत्मा के द्वारा एक देह होने के लिये बपतिस्मा लिया, और हम एक को एक ही आत्मा पिलाया गया।
1Co 12:14  इसलिये कि देह में एक ही अंग नहीं, परन्‍तु बहुत से हैं।
1Co 12:15  यदि पांव कहे कि मैं हाथ नहीं, इसलिये देह का नहीं, तो क्‍या वह इस कारण देह का नहीं?
1Co 12:16  और यदि कान कहे कि मैं आंख का नहीं, इसलिये देह का नहीं, तो क्‍या वह इस कारण देह का नहीं?
1Co 12:17  यदि सारी देह आंख की होती तो सुनना कहां से होता? यदि सारी देह कान ही होती तो सूंघना कहां होता?
1Co 12:18  परन्‍तु सचमुच परमेश्वर ने अंगो को अपनी इच्‍छा के अनुसार एक एक कर के देह में रखा है।


एक साल में बाइबल: 

  • अय्युब ३-४ 
  • प्रेरितों ७:४४-६०

रविवार, 24 जून 2012

देने द्वारा जयवंत

   २००८ में दो मसीही कॉलिजों - अज़ूसा पैसिफिक विश्वविद्यालय और वेस्टमौन्ट कॉलेज, के बीच हुई एक फुटबॉल प्रतियोगिता चर्चा का विष्य बन गई, क्योंकि वह केवल प्रतियोगिता जीतने तक ही सीमित नहीं थी, वरन उससे भी कहीं अधिक महत्वपूर्ण थी। प्रतियोगिता से तीन दिन पहले वेस्टमाउन्ट कॉलेज के प्रांगण में भीष्ण आग लग गई थी जिससे वहां की बहुत सी इमारतें, तथा छात्रों और अध्यापकों के रहने स्थान जल कर भस्म हो गए थे, और वेस्टमौन्ट कॉलेज, जिसे इस प्रतियोगिता की मेज़बानी करनी थी, अब मेज़बानी करने तथा प्रतियोगिता आयोजित करवा पाने की स्थिति में नहीं रह गया था। ऐसे में प्रतियोगिता के नियमों के अनुसार वेस्टमौन्ट कॉलेज को अपनी पराजय स्वीकार कर अज़ूसा विश्वविद्यालय को विजेता बना देना था। किंतु अज़ूसा ने वेस्टमौन्ट को अपने प्रांगण में खेलने का निमंत्रण दिया, और अपने प्रतिद्वंदी वेस्टमौन्ट के समर्थक तथा प्रशंसक दर्शकों का भी अपने प्रांगण में निशुल्क स्वागत किया तथा उन्हें बिना कोई कीमत दिए भोजन भी उपलब्ध कराया।

   जब प्रतियोगिता का खेल हुआ, तो वेस्टमौन्ट कॉलेज ने २-० से यह प्रतियोगिता जीत ली, किंतु अज़ुसा विश्वविद्यालय ने लोगों का दिल जीत लिया। इस प्रतियोगिता का ब्यौरा देते हुए लॉस एंजेलेस टाइम्स अखबार में उनके संवाददाता ने लिखा, "दक्षिणी कैलिफोर्निया के खेल जगत में शायद ही कोई ऐसा अवसर आया हो जो खेल भावना का ऐसा अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करता है; अज़ूसा ने प्रतियोगिता जीतने का अपना अवसर गंवाकर, वेस्टमौन्ट को जीतने का अवसर दीया। हालात को ध्यान में रखते हुए, जैसे जीतने वालों की दिलेरी थी वैसी ही हारने वालों की संवेदनशीलता और दयालुता भी थी।"

   जब परमेश्वर का वचन हमें स्वेच्छा और बहुतायत से देने के लिए कहता है, तो हमारा ध्यान अधिकांशतः अपने धन की ओर ही जाता है। लेकिन देना केवल पैसे ही का नहीं है। दुसरों बढ़ने के अवसर देना, उन्हें अपना समय देना, उन्हें जीवन में और उन्नति करने के लिए सहारा देना और प्रोत्साहित करना भी देने में आता है। यह देना ऐसा देना है जो ना केवल प्राप्त करने वाले को, वरन देने वाले को भी जयवंत बना देता है।

   देते रहिए "क्‍योंकि परमेश्वर हर्ष से देने वाले से प्रेम रखता है" (२ कुरिन्थियों ९:७)। - डेविड मैक्कैसलैंड


भेंट से बढ़कर, देने का तरीका, देने वाले के चरित्र को दिखाता है।

...परमेश्वर हर्ष से देने वाले से प्रेम रखता है। - २ कुरिन्थियों ९:७

बाइबल पाठ: - २ कुरिन्थियों ९:६-१५
2Co 9:6  परन्‍तु बात तो यह है, कि जो थोड़ा बोता है वह थोड़ा काटेगा भी; और जो बहुत बोता है, वह बहुत काटेगा।
2Co 9:7  हर एक जन जैसा मन में ठाने वैसा ही दान करे; न कुढ़ कुढ़ के, और न दबाव से, क्‍योंकि परमेश्वर हर्ष से देने वाले से प्रेम रखता है।
2Co 9:8  और परमेश्वर सब प्रकार का अनुग्रह तुम्हें बहुतायत से दे सकता है जिस से हर बात में और हर समय, सब कुछ, जो तुम्हें आवश्यक हो, तुम्हारे पास रहे, और हर एक भले काम के लिये तुम्हारे पास बहुत कुछ हो।
2Co 9:9  जेसा लिखा है, उस ने बिथराया, उस ने कंगालों को दान दिया, उसका धर्म सदा बना रहेगा।
2Co 9:10 सो जो बोने वाले को बीज, और भोजन के लिये रोटी देता है वह तुम्हें बीज देगा, और उसे फलवन्‍त करेगा; और तुम्हारे धर्म के फलों को बढ़ाएगा।
2Co 9:11  कि तुम हर बात में सब प्रकार की उदारता के लिये जो हमारे द्वारा परमेश्वर का धन्यवाद करवाती है, धनवान किए जाओ।
2Co 9:12 क्‍योंकि इस सेवा के पूरा करने से, न केवल पवित्र लोगों की घटियां पूरी होती हैं, परन्‍तु लोगों की ओर से परमेश्वर का बहुत धन्यवाद होता है।
2Co 9:13 क्‍योंकि इस सेवा से प्रमाण लेकर परमेश्वर की महिमा प्रगट करते हैं, कि तुम मसीह के सुसमाचार को मान कर उसके आधीन रहते हो, और उन की, और सब की सहायता करने में उदारता प्रगट करते रहते हो।
2Co 9:14  ओर वे तुम्हारे लिये प्रार्थना करते हैं, और इसलिये कि तुम पर परमेश्वर का बड़ा ही अनुग्रह है, तुम्हारी लालसा करते रहते हैं।
2Co 9:15  परमेश्वर को उसके उस दान के लिये जो वर्णन से बाहर है, धन्यवाद हो।


एक साल में बाइबल: 

  • अय्युब १-२ 
  • प्रेरितों ७:२२-४३

शनिवार, 23 जून 2012

कंटीली झाड़ियां

   इस वसन्त ऋतु में परमेश्वर ने हमें अच्छी बारिश दी, इस कारण हमारे घर के पिछवाड़े में उगने वाली जंगली कंटीली झाड़ीयां और जंगली फूल भी बहुतायात से हुए। बटरकप फूलों की छटा तो देखे ही बनती थी, वे आकार में बड़े और बहुत सुन्दर थे। इससे पहले कि वे मुर्झा जाएं, मैंने चाहा कि उनकी फोटो उतार कर रख लूँ। लेकिन उनके निकट पहुंचना कठिन था, क्योंकि वे कीचड़ और कंटीली झाड़ियों में उगे हुए थे। एक दोपहर को मैंने फोटो लेने की ठान ही ली, और अपनी तैयारी कर के मैं उन फूलों की ओर चल पड़ी। उन बटरकप फूलों तक पहुँचने से पहले ही मेरे पांव कीचड़ में लथपथ हो गए, मेरे हाथ-पैरों पर झाड़ियों से खरोंचें आ गईं और मुझे कई जगह पर कीड़ों ने भी काट लिया; परन्तु उन फूलों की सुन्दरता को निकट से देख तथा निहार पाने के आनन्द ने मेरे उन सभी कष्टों को भुला दिया; उन सुन्दर फूलों की ली गई फोटो के द्वारा आते समय में दूसरों तक उनकी सुन्दरता को पहुँचा पाने और उनके जीवनों को भी आनन्दित कर पाने के आनन्द के सामने मेरे वे कष्ट कुछ भी नहीं थे।

   हमारे जीवन का अधिकांश भाग उन परेशानियों और परीक्षाओं से निकलने में व्यतीत होता है जिनका होना इस पाप से भरे संसार में अवश्यंभावी है। इन्ही परीक्षाओं में से एक है सताव। प्रभु यीशु के चेलों ने भी इस बात को अपने जीवनों में सत्य पाया। वे चेले उन भली बातों और आशीषों को जानते थे जो परमेश्वर ने उनके लिए रख छोड़ी हैं, परन्तु जब परमेश्वर द्वारा पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार को उन्होंने संसार को बताना चाहा तो चेलों को बहुत प्रतिरोध और सताव का सामना करना पड़ा (प्रेरितों १४:५); और यही तब से लेकर आज तक भी होता आ रहा है।

   जिन मसीही विश्वासियों ने परमेश्वर के कार्य को करना ठान रखा है, और जो जानते हैं कि परमेश्वर का मार्ग ही सबसे उत्तम मार्ग है (१ कुरिन्थियों १२:३१), वे यह भी जानते हैं कि इस मार्ग पर चलने के लिए उन्हें अनेक कष्टों का सामना करना पड़ेगा, बहुत दुख उठाने पड़ेंगे और इस मार्ग में वे ’कंटिली झाड़ियों’ द्वारा घायल भी होंगे। लेकिन इस मार्ग पर चलने से मिलने वाली आशीषों के सामने ये दुख कुछ भी नहीं हैं; दूसरों के जीवनों में परमेश्वर की करुणा, क्षमा और शांति के आनन्द को ला पाने के सुख के सामने संसार से मिलने वाले ये दुख बहुत ही गौण हैं। और फिर जो प्रतिफल स्वर्ग में हमारे लिए हमारे उद्धारकर्ता प्रभु यीशु ने रखा हुआ है, उसके सामने तो इन दुखों की कोई हस्ती ही नहीं है।

   मार्ग की कंटिली झाड़ियों की ओर नहीं, अन्त के सुख पर अपनी नज़रें लगाइये और बिना विचिलित हुए परमेश्वर के कार्य को पूरा करने में लगे रहिए। - जूली ऐकैरमैन लिंक


पृथ्वी - परीक्षाओं का स्थान; स्वर्ग - प्रतिफलों का स्थान।


और चेलों के मन को स्थिर करते रहे और यह उपदेश देते थे, कि हमें बड़े क्‍लेश उठाकर परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना होगा। - प्रेरितों १४:२२

बाइबल पाठ: प्रेरितों १४:१-७, १९-२२
Act 14:1  इकुनियुम में ऐसा हुआ कि वे यहूदियों की आराधनालय में साथ साथ गए, और ऐसी बातें की, कि यहूदियों और यूनानियों दोनों में से बहुतों ने विश्वास किया।
Act 14:2 परन्‍तु न मानने वाले यहूदियों ने अन्यजातियों के मन भाइयों के विरोध में उकसाए, और बिगाड़ कर दिए।
Act 14:3 और वे बहुत दिन तक वहां रहे, और प्रभु के भरोसे पर हियाव से बातें करते थे: और वह उन के हाथों से चिन्‍ह और अद्भुत काम करवाकर अपने अनुग्रह के वचन पर गवाही देता था।
Act 14:4 परन्‍तु नगर के लोगों में फूट पड़ गई थी; इस से कितने तो यहूदियों की ओर, और कितने प्रेरितों की ओर हो गए।
Act 14:5 परन्‍तु जब अन्यजाति और यहूदी उन का अपमान और उन्‍हें पत्थरवाह करने के लिये अपने सरदारों समेत उन पर दौड़े।
Act 14:6 तो वे इस बात को जान गए, और लुकाउनिया के लुस्‍त्रा और दिरबे नगरों में, और आसपास के देश में भाग गए।
Act 14:7  और वहां सुसमाचार सुनाने लगे।
Act 14:19 परन्‍तु कितने यहूदियों ने अन्‍ताकिया और इकुनियम से आकर लोगों को अपनी ओर कर लिया, और पौलुस को पत्थरवाह किया, और मरा समझकर उसे नगर के बाहर घसीट ले गए।
Act 14:20  पर जब चेले उस की चारों ओर आ खड़े हुए, तो वह उठकर नगर में गया और दूसरे दिन बरनबास के साथ दिरबे को चला गया।
Act 14:21 और वे उस नगर के लोगों को सुसमाचार सुनाकर, और बहुत से चेले बनाकर, लुस्‍त्रा और इकुनियम और अन्‍ताकिया को लौट आए।
Act 14:22 और चेलों के मन को स्थिर करते रहे और यह उपदेश देते थे, कि हमें बड़े क्‍लेश उठाकर परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना होगा।


एक साल में बाइबल: 

  • एस्तेर ९-१० 
  • प्रेरितों ७:१-२१

शुक्रवार, 22 जून 2012

भली विरासत

   मार्टिन लूथर ने, परमेश्वर के वचन बाइबल में सभोपदेशक ९:१५ पर अपनी टिप्पणी में एक युनानी सैनिक, थैमिस्टोक्लिस की कहानी बताई, जो एथेन्स में तैनात युनानी सेना का अधिकारी था। अपनी बुद्धिमता और युद्ध कौशल के कारण थैमिस्टोक्लिस ने सालामिस का युद्ध जीता, युनानी धरती से फारसी सेना को भगाया और अपने नगर को बचाया। इसके कुछ समय बाद वह अपने लोगों की नज़रों से गिर गया, और एथेन्स से बहिष्कृत कर दिया गया। मार्टिन लूथर ने कहानी का अन्त करते हुए लिखा, "थैमिस्टोक्लिस ने अपने नगर के लिए बहुत भला किया, किंतु प्रत्युत्तर में उसे उनसे बहुत कृतघ्नता ही मिली।"

   सामान्यतः यह देखा गया है कि ना जाने क्यों, लोग किसी गरीब या दीन जन द्वारा अपनी बुद्धिमता से किया गया भला कार्य शीघ्र ही भुला देते हैं। परवाह नहीं; चाहे दीन जन की बुद्धिमता तुच्छ जानी जाए तो भी वह पराक्रम से अधिक सामर्थी होती है "यद्यपि दरिद्र की बुद्धि तुच्छ समझी जाती है और उसका वचन कोई नहीं सुनता तौभी पराक्रम से बुद्धि उत्तम है" (सभोपदेशक ९:१६)। किसी अभिमानी, डींगमार मूर्ख व्यक्ति की बजाए एक नम्र, शांत और ईमानदार व्यक्ति होना बहुत भला है, जो चाहे लोगों द्वारा भुला भी दिया जाए, किंतु अपने पीछे एक भली विरासात छोड़ जाता है।

   अन्ततः जो बात महत्व रखती है वह लोगों से मिलने वाली प्रसिद्धी और वाहवाही नहीं, वरन वे भलाई और धार्मिकता के बीज हैं जो हम अपने नेक चरित्र द्वारा नम्र आत्माओं में बोकर जाते हैं, और जो आते समय में अपने फल अवश्य लाएंगे; वे समाज के लिए हमारी भली विरासत हैं। इसे दुसरे रूप में कहें तो, "पर ज्ञान अपनी सब सन्‍तानों से सच्‍चा ठहराया गया है" (लूका ७:३५)।

   क्या आपने अपने जीवन में प्रदर्शित परमेश्वर के भय और नेक चरित्र द्वारा किसी के जीवन में कोई भला बीज बोया है; क्या आपने कोई भली विरासत समाज के लिए छोड़ी है? - डेविड रोपर


बुद्धिमान व्यक्ति, अपने पृथ्वी के जीवन से ही, स्वर्गीय आशीषों को अपना लक्ष्य रखता है।


परन्तु उस में एक दरिद्र बुद्धिमान पुरूष पाया गया, और उस ने उस नगर को अपनी बुद्धि के द्वारा बचाया। तौभी किसी ने उस दरिद्र का स्मरण न रखा। - सभोपदेशक ९:१५

बाइबल पाठ: सभोपदेशक ९:१३-१८
Ecc 9:13  मैं ने सूर्य के नीचे इस प्रकार की बुद्धि की बात भी देखी है, जो मुझे बड़ी जान पड़ी।
Ecc 9:14  एक छोटा सा नगर था, जिस में थोड़े ही लोग थे, और किसी बड़े राजा ने उस पर चढ़ाई करके उसे घेर लिया, और उसके विरूद्ध बड़े बड़े धुस बनवाए।
Ecc 9:15  परन्तु उस में एक दरिद्र बुद्धिमान पुरूष पाया गया, और उस ने उस नगर को अपनी बुद्धि के द्वारा बचाया। तौभी किसी ने उस दरिद्र का स्मरण न रखा।
Ecc 9:16  तब मैं ने कहा, यद्यपि दरिद्र की बुद्धि तुच्छ समझी जाती है और उसका वचन कोई नहीं सुनता तौभी पराक्रम से बुद्धि उत्तम है।
Ecc 9:17  बुद्धिमानों के वचन जो धीमे धीमे कहे जाते हैं वे मूर्खों के बीच प्रभुता करने वाले के चिल्ला चिल्लाकर कहने से अधिक सुने जाते हैं।
Ecc 9:18  लड़ाई के हथियारों से बुद्धि उत्तम है, परन्तु एक पापी बहुत भलाई नाश करता है।


एक साल में बाइबल: 

  • एस्तेर ६-८ 
  • प्रेरितों ६