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गुरुवार, 6 मई 2021

संतुष्टि

 

          मैंने अपने घर के पीछे के आँगन के बाड़े के ऊपर से झाँक कर देखा; हमारे घर के पीछे बने पार्क और उसमें बने दौड़ने के ट्रैक पर कई लोग चल, भाग, और टहल रहे थे। मेरे मन में विचार आया, जब मेरे शरीर में शक्ति थी तब मैं भी वहाँ यही किया करता था; और तुरंत मुझे निराशा की एक लहर ने घेर लिया।

          बाद में जब मैं परमेश्वर के वचन बाइबल में से पढ़ रहा था, मेरा ध्यान यशायाह 55:1 “अहो सब प्यासे लोगों, पानी के पास आओ” पर गया और मुझे एहसास हुआ कि प्यास – असंतुष्टि जीवन का नियम है, अपवाद नहीं। इस संसार की कोई भी बात, चाहे वह कोई भली वस्तु ही क्यों न हो, हमें पूर्णतः संतुष्ट कर नहीं सकती है। चाहे मेरे शरीर में भरपूर शक्ति भी होती, और मैं उन लोगों के साथ उन बातों में सम्मिलित हो जाता, फिर भी जीवन में और भी कुछ होता जिसे लेकर मैं असंतुष्ट अनुभव करता।

          हमें संसार की संस्कृति निरंतर कहती रहती है कि हमारे कुछ करने, खरीदने, पहनने, शरीर पर लगाने, कुछ देखने, कहीं जाने, कुछ चलाने, आदि से हमें पूरी संतुष्टि और अमिट आनन्द मिलेगा। परन्तु यह झूठ है। इस संसार में ऐसा कुछ भी नहीं है, और न ही हम कुछ ऐसा कर सकते हैं जो हमें पूर्ण और स्थाई संतुष्टि प्रदान करे।

          वरन यशायाह में होकर परमेश्वर हमें निमंत्रण देता है कि हर बात के लिए, बारंबार परमेश्वर के पास आते रहें, हर बात के बारे में परमेश्वर से सुनते रहें कि वह उसके बारे में हम से क्या कहना चाहता है। परमेश्वर की इच्छा और योजनाओं में ही पूर्ण शान्ति और संतुष्टि है। - डेविड एच. रोपर

 

प्रभु केवल आप ही हमारी प्यास को तृप्त कर सकते हैं।


हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। - मत्ती 11:28

बाइबल पाठ: यशायाह 55:1-6

यशायाह 55:1 अहो सब प्यासे लोगों, पानी के पास आओ; और जिनके पास रुपया न हो, तुम भी आकर मोल लो और खाओ! दाखमधु और दूध बिन रुपए और बिना दाम ही आकर ले लो।

यशायाह 55:2 जो भोजन वस्तु नहीं है, उसके लिये तुम क्यों रुपया लगाते हो, और, जिस से पेट नहीं भरता उसके लिये क्यों परिश्रम करते हो? मेरी ओर मन लगाकर सुनो, तब उत्तम वस्तुएं खाने पाओगे और चिकनी चिकनी वस्तुएं खाकर सन्तुष्ट हो जाओगे।

यशायाह 55:3 कान लगाओ, और मेरे पास आओ; सुनो, तब तुम जीवित रहोगे; और मैं तुम्हारे साथ सदा की वाचा बान्धूंगा अर्थात दाऊद पर की अटल करुणा की वाचा।

यशायाह 55:4 सुनो, मैं ने उसको राज्य राज्य के लोगों के लिये साक्षी और प्रधान और आज्ञा देने वाला ठहराया है।

यशायाह 55:5 सुन, तू ऐसी जाति को जिसे तू नहीं जानता बुलाएगा, और ऐसी जातियां जो तुझे नहीं जानतीं तेरे पास दौड़ी आएंगी, वे तेरे परमेश्वर यहोवा और इस्राएल के पवित्र के निमित्त यह करेंगी, क्योंकि उसने तुझे शोभायमान किया है।

यशायाह 55:6 जब तक यहोवा मिल सकता है तब तक उसकी खोज में रहो, जब तक वह निकट है तब तक उसे पुकारो;

 

एक साल में बाइबल: 

  • 1 राजाओं 21-22
  • लूका 23:26-56

सोमवार, 8 अक्टूबर 2018

पीने योग्य



      क्योंकि सँसार के अनेकों भागों में पीने योग्य स्वच्छ पानी मिलना बहुत कठिन है, इसलिए एक संस्था  Water is Life ने एक अद्भुत संसाधन, “The Drinkable Book” (पीने योग्य पुस्तक) विकसित किया है। इस पुस्तक के कागज़ पर चांदी के अति-सूक्ष्म कणों की परत चढी हुई है, और ये कण लगभग 99.9% हानिकारक जीवाणुओं को साफ़ कर देते हैं! साथ ही प्रत्येक पन्ने को बारंबार प्रयोग करके लगभग 100 लीटर पानी साफ़ किया जा सकता है।

      परमेश्वर का वचन बाइबल भी एक “पीने योग्य” पुस्तक है। हम बाइबल में यूहन्ना 4 में एक विशेष प्रकार की प्यास और एक विशेष प्रकार के पानी के बारे में देखते हैं। कुएँ पर पानी भरने आई उस महिला को न केवल अपनी भौतिक प्यास बुझाने के लिए स्वच्छ साफ़ जल की आवश्यकता थी, वरन उसे “जीवित जल” के स्त्रोत को जानने की भी आवश्यकता थी। उसे परमेश्वर के उस अनुग्रह और क्षमा की आवश्यकता थी जो केवल प्रभु यीशु मसीह में होकर प्राप्त हो सकती है।

      परमेश्वर का वचन बाइबल ही वह एकमात्र “पीने योग्य” पुस्तक है जो “जीवित जल” के स्त्रोत प्रभु यीशु मसीह के पास आने और उससे अनुग्रह तथा पापों की क्षमा पाने का मार्ग बताती है। और जो प्रभु यीशु से उस “जीवित जल” को ग्रहण करते हैं, उसके लिए प्रभु ने कहा, “...वह उस में एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा” (पद 14)। - सिंडी हैस कैस्पर


जीवित जल का एकमात्र स्त्रोत प्रभु यीशु मसीह ही हैं।

फिर पर्व के अंतिम दिन, जो मुख्य दिन है, यीशु खड़ा हुआ और पुकार कर कहा, यदि कोई प्यासा हो तो मेरे पास आकर पीए। जो मुझ पर विश्वास करेगा, जैसा पवित्र शास्त्र में आया है उसके हृदय में से जीवन के जल की नदियां बह निकलेंगी। - यूहन्ना 7:37-38

बाइबल पाठ: यूहन्ना  4:7-15
John 4:7 इतने में एक सामरी स्त्री जल भरने को आई: यीशु ने उस से कहा, मुझे पानी पिला।
John 4:8 क्योंकि उसके चेले तो नगर में भोजन मोल लेने को गए थे।
John 4:9 उस सामरी स्त्री ने उस से कहा, तू यहूदी हो कर मुझ सामरी स्त्री से पानी क्यों मांगता है? (क्योंकि यहूदी सामरियों के साथ किसी प्रकार का व्यवहार नहीं रखते)।
John 4:10 यीशु ने उत्तर दिया, यदि तू परमेश्वर के वरदान को जानती, और यह भी जानती कि वह कौन है जो तुझ से कहता है; मुझे पानी पिला तो तू उस से मांगती, और वह तुझे जीवन का जल देता।
John 4:11 स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, तेरे पास जल भरने को तो कुछ है भी नहीं, और कूआं गहिरा है: तो फिर वह जीवन का जल तेरे पास कहां से आया?
John 4:12 क्या तू हमारे पिता याकूब से बड़ा है, जिसने हमें यह कूआं दिया; और आप ही अपने सन्तान, और अपने ढोरों समेत उस में से पीया?
John 4:13 यीशु ने उसको उत्तर दिया, कि जो कोई यह जल पीएगा वह फिर प्यासा होगा।
John 4:14 परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर अनन्तकाल तक प्यासा न होगा: वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उस में एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा।
John 4:15 स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, वह जल मुझे दे ताकि मैं प्यासी न होऊं और न जल भरने को इतनी दूर आऊं।


एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 30-31
  • फिलिप्पियों 4



रविवार, 28 फ़रवरी 2016

स्त्रोत


   अमेरिका के मिशिगन प्रांत के ऊपरी प्रायद्वीप में एक अद्भुत प्राकृतिक अजूबा है - एक कुण्ड जो लगभग 40 फीट गहरा और 300 फीट चौड़ा है। उस इलाके के मूल निवासी उसे "किच-इटी- किपि" अर्थात "बड़ा ठण्डा पानी" कहते थे। आज यह कुण्ड "बड़ा झरना" कहलाता है। इस कुण्ड का स्त्रोत धरती के अन्दर से चट्टानों में होकर आने वाला पानी है जो 10,000 गैलन प्रति मिनिट की गति से इसमें आता रहता है। इसकी एक और विलक्षण बात है इसका निरन्तर एक समान रहने वाला तापमान - हर ऋतु में इस झरने के जल का तापमान 45 डिग्री फैरन्हाईट ही बना रहता है; इसलिए उस इलाके की भीषण ठण्ड में भी इसका पानी जमता नहीं और सैलानी सारे वर्ष इसका आनन्द ले सकते हैं।

   जब प्रभु यीशु का, सामरिया के एक गाँव में स्थित याकूब के कुएं पर, एक स्त्री से वार्तालाप हुआ तो प्रभु ने उस स्त्री को एक सदा सन्तुष्ट करने वाले जल-स्त्रोत के बारे में बताया। लेकिन यह जल-स्त्रोत कोई झरना, कुण्ड, नदी या तालाब नहीं था, और ना ही कोई सामान्य दिखने वाला जल था। प्रभु यीशु ने उस स्त्री से जीवन के जल की बात करी जो अनन्त जीवन के लिए था: "परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर अनन्तकाल तक प्यासा न होगा: वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उस में एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा" (यूहन्ना 4:14)।

   किसी भी प्राकृतिक जल के स्त्रोत से मिलने वाली तृप्ति बढ़कर वह तृप्ति है जो प्रभु यीशु मसीह से हमें मिलती है। केवल प्रभु यीशु से मिलने वाले जीवन के जल से ही हमारी अनन्त जीवन की प्यास बुझ सकती है, और ना केवल वह जीवन जल हमारी प्यास बुझाता है वरन हम में होकर औरों तक भी पहुँचता है उनकी भी प्यास बुझाता है। संसार के सभी लोगों के लिए प्रभु यीशु ही जीवन-जल का कभी ना समाप्त होने वाला स्त्रोत है। - बिल क्राउडर


जीवन की प्यास बुझाने का एकमात्र सच्चा स्त्रोत है प्रभु यीशु मसीह।

यीशु ने उन से कहा, जीवन की रोटी मैं हूं: जो मेरे पास आएगा वह कभी भूखा न होगा और जो मुझ पर विश्वास करेगा, वह कभी प्यासा न होगा। - यूहन्ना 6:35

बाइबल पाठ: यूहन्ना 4:5-14
John 4:5 सो वह सूखार नाम सामरिया के एक नगर तक आया, जो उस भूमि के पास है, जिसे याकूब ने अपने पुत्र यूसुफ को दिया था। 
John 4:6 और याकूब का कूआं भी वहीं था; सो यीशु मार्ग का थका हुआ उस कूएं पर यों ही बैठ गया, और यह बात छठे घण्टे के लगभग हुई। 
John 4:7 इतने में एक सामरी स्त्री जल भरने को आई: यीशु ने उस से कहा, मुझे पानी पिला। 
John 4:8 क्योंकि उसके चेले तो नगर में भोजन मोल लेने को गए थे। 
John 4:9 उस सामरी स्त्री ने उस से कहा, तू यहूदी हो कर मुझ सामरी स्त्री से पानी क्यों मांगता है? (क्योंकि यहूदी सामरियों के साथ किसी प्रकार का व्यवहार नहीं रखते)। 
John 4:10 यीशु ने उत्तर दिया, यदि तू परमेश्वर के वरदान को जानती, और यह भी जानती कि वह कौन है जो तुझ से कहता है; मुझे पानी पिला तो तू उस से मांगती, और वह तुझे जीवन का जल देता। 
John 4:11 स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, तेरे पास जल भरने को तो कुछ है भी नहीं, और कूआं गहिरा है: तो फिर वह जीवन का जल तेरे पास कहां से आया? 
John 4:12 क्या तू हमारे पिता याकूब से बड़ा है, जिसने हमें यह कूआं दिया; और आप ही अपने सन्तान, और अपने ढोरों समेत उस में से पीया? 
John 4:13 यीशु ने उसको उत्तर दिया, कि जो कोई यह जल पीएगा वह फिर प्यासा होगा। 
John 4:14 परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर अनन्तकाल तक प्यासा न होगा: वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उस में एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 20-22
  • मरकुस 7:1-13


शुक्रवार, 27 नवंबर 2015

जीवन जल


   पृथ्वी के सबसे निर्जल स्थानों में से एक है पूर्वी अफ्रीका; इसीलिए उस इलाके के एक शहर का नाम "नैरिबी" होना बहुत रोचक बात है। यह नाम उस इलाके के एक कबीले, मसाई, की भाषा के एक वाक्यंश, जिसका अर्थ होता है "ठंडा पानी" से लिया गया है और नैरोबी का अर्थ है "जल का स्थान"।

   संसार के इतिहास में जल की उपस्थिति सदैव ही जीवन-दायक और सामरिक रही है। चाहे कोई निर्जल रेगिस्तान में रहे या फिर वर्षा-वन में, जीवन के लिए पानी का कोई विकल्प नहीं है; बिना जल के जीवन संभव नहीं है। किसी सूखे पर्यावरण वाले उजाड़ स्थान पर पानी के स्त्रोत का पता होना जीवन और मृत्यु को निर्धारित करता है।

   हमारे आत्मिक जीवन में भी कुछ बातें हैं जिनका कोई विकल्प नहीं है। इसीलिए जब एक कुएं पर प्रभु यीशु का साक्षात्कार एक आत्मिक रीति से प्यासी स्त्री से हुआ तो उन्होंने उससे कहा कि जिस जीवन जल की उसे आवश्यकता है वह जल उसे केवल वे ही दे सकते हैं। प्रभु ने उस स्त्री से कहा, "परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर अनन्तकाल तक प्यासा न होगा: वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उस में एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा" (यूहन्ना 4:14)।

   हमारे मन परमेश्वर के लिए वैसे ही प्यासे होने चाहिएं जैसे जल के लिए हाँफने वाली प्यासी हिरणी की उपमा परमेश्वर के वचन बाइबल में दी गई है (भजन 42:1-2)। हमारी आत्मा केवल उस पोषण से ही तृप्त हो सकती है जो हमें प्रभु यीशु से मिलता है; क्योंकि केवल प्रभु यीशु ही जीवन जल का वह स्त्रोत है जो सबके मनों को तरोताज़ा कर सकता है, नया जीवन प्रदान कर सकता है, अनन्तकाल के लिए सन्तुष्ट कर सकता है। - बिल क्राउडर


प्रभु यीशु सारे संसार के सभी लोगों के लिए सेंत-मेंत उपलब्ध जीवन जल का सोता है।

हे परमेश्वर, तू मेरा ईश्वर है, मैं तुझे यत्न से ढूंढूंगा; सूखी और निर्जल ऊसर भूमि पर, मेरा मन तेरा प्यासा है, मेरा शरीर तेरा अति अभिलाषी है। - भजन 63:1

बाइबल पाठ: भजन 42:1-5
Psalms 42:1 जैसे हरिणी नदी के जल के लिये हांफती है, वैसे ही, हे परमेश्वर, मैं तेरे लिये हांफता हूं। 
Psalms 42:2 जीवते ईश्वर परमेश्वर का मैं प्यासा हूं, मैं कब जा कर परमेश्वर को अपना मुंह दिखाऊंगा? 
Psalms 42:3 मेरे आंसू दिन और रात मेरा आहार हुए हैं; और लोग दिन भर मुझ से कहते रहते हैं, तेरा परमेश्वर कहां है? 
Psalms 42:4 मैं भीड़ के संग जाया करता था, मैं जयजयकार और धन्यवाद के साथ उत्सव करने वाली भीड़ के बीच में परमेश्वर के भवन को धीरे धीरे जाया करता था; यह स्मरण कर के मेरा प्राण शोकित हो जाता है। 
Psalms 42:5 हे मेरे प्राण, तू क्यों गिरा जाता है? और तू अन्दर ही अन्दर क्यों व्याकुल है? परमेश्वर पर आशा लगाए रह; क्योंकि मैं उसके दर्शन से उद्धार पाकर फिर उसका धन्यवाद करूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 30-32
  • 1पतरस 4


सोमवार, 6 जुलाई 2015

प्यास


   पिछले कुछ वर्षों में मैं एक-दो बार शरीर में पानी की कमी होने के कारण अस्वस्थ हुआ हूँ। जब भी मेरे शरीर में पानी की कमी हुई, मुझे चक्कर आने लगे, मैं ठीक से दिखने नहीं पा रहा था, मुझे समय स्थान और व्यक्ति को पहचान पाने में बहुत कठिनाई होने लगी, मैं स्पष्ट बोल भी नहीं पा रहा था। अपने उन कष्टदायक अनुभवों से मैंने सीख लिया कि पानी की उचित मात्रा शरीर में रहना कितना आवश्यक है; और मैं दोबारा उस अनुभव से कतई नहीं निकलना चाहता हूँ।

   शरीर में पानी की कमी के इन अनुभवों ने मुझे प्रभु यीशु के एक निमंत्रण के बारे में नया मूल्यांकन दिया है; प्रभु यीशु ने मन्दिर में खड़े होकर सार्वजनिक निमंत्रण दिया: "फिर पर्व के अंतिम दिन, जो मुख्य दिन है, यीशु खड़ा हुआ और पुकार कर कहा, यदि कोई प्यासा हो तो मेरे पास आकर पीए" (यूहन्ना 7:37)। प्रभु द्वारा की गई यह घोषणा, जिस दिन वह करी गई उसके संदर्भ में, नाटकीय थी। यूहन्ना बताता है कि वह यहूदियों के एक बड़े पर्व का अन्तिम एवं मुख्य दिन था। जिस पर्व का यहाँ उल्लेख आया है वह यहूदियों के मिस्त्र की गुलामी से निकलकर वाचा किए हुए कनान देश तक पहुँचने की चालीस वर्षीय जंगल यात्रा को समरण करने का पर्व था। उस पर्व के अन्तिम एवं मुख्य दिन मन्दिर की सीढ़ियों पर जल प्रवाहित किया जाता था जो परमेश्वर द्वारा बियाबान और जंगल की यात्रा में भी उन इस्त्राएलियों को पानी उपलब्ध करवाते रहने को स्मरण करवाता था। उस जल प्रवाह करने के समय, प्रभु यीशु ने अपने आप को सभी के लिए अति आवश्यक जीवन का जल होना घोषित किया और निमंत्रण दिया कि जो प्यासा हो वह स्वेच्छा से आए और उससे जीवन जल भरपूरी से ले।

   हमारे आत्मिक स्वास्थ्य और भलाई के लिए हमारा प्रभु यीशु पर ऐसे निर्भर रहना जैसे हम दैनिक जीवन में जल पर निर्भर रहते हैं अति आवश्यक है; अन्यथा आत्मिक जल की कमी के वैसे ही आत्मिक लक्षण हम में दिखने लगेंगे जैसे मैंने शारीरिक जल की कमी के कारण अनुभव किए थे। अपने अन्दर इस आत्मिक जल की मात्रा को बनाए रखने और आत्मिक प्यास को बुझाए रखने के लिए हमें प्रभु के साथ प्रार्थना में बातचीत करते रहना चाहिए, उसके वचन के अध्ययन के द्वारा उसके साथ संपर्क तथा संगति को बनाए रखना चाहिए और अपने प्रत्येक निर्णय में उसकी बुद्धिमता और मार्गदर्शन को प्राप्त करना चाहिए।

   प्रभु यीशु से घनिष्ठता से जुड़े रहें, आपके आत्मा की प्यास को केवल वह ही बुझा सकता है। - जो स्टोवैल


जीवन जल की तरोताज़गी प्राप्त करने के लिए प्रभु यीशु के पास आएं, उसके साथ बने और चलते रहें।

क्योंकि मैं प्यासी भूमि पर जल और सूखी भूमि पर धाराएं बहाऊंगा; मैं तेरे वंश पर अपनी आत्मा और तेरी सन्तान पर अपनी आशीष उण्डेलूंगा। - यशायाह 44:3

बाइबल पाठ: यूहन्ना 7:37-39
John 7:37 फिर पर्व के अंतिम दिन, जो मुख्य दिन है, यीशु खड़ा हुआ और पुकार कर कहा, यदि कोई प्यासा हो तो मेरे पास आकर पीए। 
John 7:38 जो मुझ पर विश्वास करेगा, जैसा पवित्र शास्त्र में आया है उसके हृदय में से जीवन के जल की नदियां बह निकलेंगी। 
John 7:39 उसने यह वचन उस आत्मा के विषय में कहा, जिसे उस पर विश्वास करने वाले पाने पर थे; क्योंकि आत्मा अब तक न उतरा था; क्योंकि यीशु अब तक अपनी महिमा को न पहुंचा था।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्युब 32-33
  • प्रेरितों 14


सोमवार, 11 अगस्त 2014

थके और प्यासे


   मोआब की पहाड़ियों से उस वाचा की हुई भूमि की वह पहली झलक मेरे लिए बहुत निराशाजनक थी। मुझे लग रहा था कि यरदन नदी के पूर्वी तट के दृश्य की अपेक्षा यहाँ का दृश्य बहुत भिन्न होगा, लेकिन मुझे कुछ खास फर्क नज़र नहीं आया। मैंने अपनी गाईड से पूछा, "जब मिस्त्र की गुलामी से निकलकर इस्त्राएली यहाँ पहली बार आए थे तब क्या यह इलाका इससे भिन्न दिखता था?" उसने उत्तर दिया, "नहीं! यह हज़ारों से वर्षों से ऐसा ही दिखाई देता रहा है।" उससे मैंने अपने प्रश्न को दूसरे शब्दों में पूछा, "जब वे इस्त्राएली यहाँ पहुँचे, तब उन्होंने क्या देखा होगा?" उस गाईड का उत्तर था, "संसार का सबसे बड़ा मरुद्दयान!"

   तब मैं समझ गई। मैंने बंजर मरुभूमि की यहाँ तक की यात्रा एक आरामदायक वातानुकूलित बस में बैठकर जिसमें पीने के पानी की ठंडी बोतलें बहुतायत से उपलब्ध थीं करी थी, मेरे लिए पीने लायक मीठे पानी का स्त्रोत, वह मरूद्दयान कोई विशेष बात नहीं थी। लेकिन वे इस्त्राएली एक तपते हुए बंजर मरुभूमि में वर्षों पैदल यात्रा करते रहे थे; उनके लिए दूर से ही फीकी सी हरियाली दिखाने वाला यह स्थान जीवनदायक जल उपलब्ध होने का आश्वासन रहा होगा। वे जब यहाँ पहुँचे थे, तब थक कर चूर थे, जबकि मैं आराम से थी। उन्हें यहाँ पहुँचने में 40 कठिन वर्ष लगे थे, मुझे केवल 4 घंटे।

   जीवनदायक जल के सोते वाले उस मरुद्दयान के समान ही परमेश्वर की भलाई भी कभी कभी सूखे और कठिन स्थानों में ही मिलती है। मैं सोचती हूँ, हम कितनी ही दफा अपने प्रति परमेश्वर की देख-रेख तथा भलाई को देख नहीं पाते क्योंकि हमारी आत्मिक इन्द्रियाँ सुख-विलास के साधनों ने कुन्द कर दी हैं। इसलिए परमेश्वर की यह भलाईयाँ हमें तब ही दिखाई देती हैं जब जीवन यात्रा में हम थके और प्यासे होते हैं। परमेश्वर हमारी यह थकावट और प्यास यूँ ही बनाए रखे जिससे हम उसके प्रति तथा हमारे लिए उसकी भलाईयों के प्रति संवेदन शील होकर सदा ही उसके धन्यवादी तथा उसको समर्पित बने रहें। - जूली ऐकैरमैन लिंक


प्रभु यीशु ही वह जीवन जल का सोता है जो प्यासी आत्मा को तृप्त कर सकता है।

फिर पर्व के अंतिम दिन, जो मुख्य दिन है, यीशु खड़ा हुआ और पुकार कर कहा, यदि कोई प्यासा हो तो मेरे पास आकर पीए। - यूहन्ना 7:37

बाइबल पाठ: यहोशु 3:1-11
Joshua 3:1 बिहान को यहोशू सबेरे उठा, और सब इस्राएलियों को साथ ले शित्तीम से कूच कर यरदन के किनारे आया; और वे पार उतरने से पहिले वहीं टिक गए। 
Joshua 3:2 और तीन दिन के बाद सरदारों ने छावनी के बीच जा कर 
Joshua 3:3 प्रजा के लोगों को यह आज्ञा दी, कि जब तुम को अपने परमेश्वर यहोवा की वाचा का सन्दूक और उसे उठाए हुए लेवीय याजक भी देख पड़ें, तब अपने स्थान से कूच कर के उसके पीछे पीछे चलना, 
Joshua 3:4 परन्तु उसके और तुम्हारे बीच में दो हजार हाथ के अटकल अन्तर रहे; तुम सन्दूक के निकट न जाना। ताकि तुम देख सको, कि किस मार्ग से तुम को चलना है, क्योंकि अब तक तुम इस मार्ग पर हो कर नहीं चले। 
Joshua 3:5 फिर यहोशू ने प्रजा के लोगों से कहा, तुम अपने आप को पवित्र करो; क्योंकि कल के दिन यहोवा तुम्हारे मध्य में आश्चर्यकर्म करेगा। 
Joshua 3:6 तब यहोशू ने याजकों से कहा, वाचा का सन्दूक उठा कर प्रजा के आगे आगे चलो। तब वे वाचा का सन्दूक उठा कर आगे आगे चले। 
Joshua 3:7 तब यहोवा ने यहोशू से कहा, आज के दिन से मैं सब इस्राएलियों के सम्मुख तेरी प्रशंसा करना आरम्भ करूंगा, जिस से वे जान लें कि जैसे मैं मूसा के संग रहता था वैसे ही मैं तेरे संग भी हूं। 
Joshua 3:8 और तू वाचा के सन्दूक के उठाने वाले याजकों को यह आज्ञा दे, कि जब तुम यरदन के जल के किनारे पहुंचो, तब यरदन में खड़े रहना।
Joshua 3:9 तब यहोशू ने इस्राएलियों से कहा, कि पास आकर अपने परमेश्वर यहोवा के वचन सुनो। 
Joshua 3:10 और यहोशू कहने लगा, कि इस से तुम जान लोगे कि जीवित ईश्वर तुम्हारे मध्य में है, और वह तुम्हारे सामहने से नि:सन्देह कनानियों, हित्तियों, हिव्वियों, परिज्जियों, गिर्गाशियों, एमोरियों, और यबूसियों को उनके देश में से निकाल देगा। 
Joshua 3:11 सुनो, पृथ्वी भर के प्रभु की वाचा का सन्दूक तुम्हारे आगे आगे यरदन में जाने पर है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 46-48


रविवार, 3 नवंबर 2013

जल

   मंगल ग्रह पर पानी ढूँढने के लिए अमेरिका ने लाखों डॉलर खर्च कर दिए हैं। कुछ समय पहले अमेरिकी अन्तरिक्ष संस्था, नासा ने दो रोबोट उपग्रह, मंगल ग्रह पर उतारे, यह जानने के लिए कि वहाँ पानी है या कभी था कि नहीं। अमेरिका ऐसा क्यों कर रहा है? जो वैज्ञानिक उन दोनों रोबोट उपग्रहों से आने वाले आँकड़ों का अध्ययन कर रहें हैं, वे पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि मंगल पर कभी जीवन था कि नहीं; एवं वरतमान में संभव है कि नहीं। जीवन के लिए जल का होना अनिवार्य है, अगर पहले वहाँ जल था तो जीवन भी होने की संभावना है और यदि जल अब भी है तो आगे भी वहाँ जीवन को कायम रखना संभव हो पाएगा।

   लगभग दो हज़ार वर्ष पहले भी दो जन इस्त्राएल स्थित सामारिया के इलाके में जल की खोज में थे। उन में से एक वहीं के गाँव कि एक स्त्री थी और दूसरा गलील के इलाके का एक पुरुष था। उन दोनों की भेंट सुखार नामक एक गाँव के निकट एक कुएँ पर हुई। उस मुलाकात के दौरान उन दोनों में एक वार्तालाप हुआ, जिससे उस पुरुष अर्थात प्रभु यीशु मसीह को वह मिला जो वह ढूँढ रहा था और उस स्त्री को अनन्त जीवन का वह जल मिल गया जिसके, और जिसकी आवश्यकता के बारे में उसे पहले पता भी नहीं था (यूहन्ना 4:5-15)।

   जल आत्मिक और शारीरिक दोनों ही जीवनों के लिए अनिवार्य है। उस स्त्री के लिए प्रभु यीशु मसीह के पास एक अनेपक्षित आश्चर्य था - अनन्त जीवन का जल, अर्थात स्वयं प्रभ यीशु में विश्वास। आत्मिक जीवन के लिए प्रभु यीशु ही वह निर्मल, स्फूर्तिदायक और ताज़गी देने वाला जल है जो अपने पर विश्वास लाने वालों के जीवन को नया कर देता है, अनन्त स्वर्गीय जीवन का अधिकारी बना देता है (यूहन्ना 4:14)।

   क्या आज आप किसी ऐसे को जानते हैं जो जीवन के जल के लिए प्यासा है? कोई ऐसा जिसकी आत्मा की प्यास इस संसार से बुझ नहीं पा रही है? उसका परिचय जीवन के जल, प्रभु यीशु मसीह से करवाईए; आत्मा की प्यास केवल उस जीवन जल से ही बुझ सकती है। - डेव ब्रैनन


केवल प्रभु यीशु जो जीवन जल है आत्मा की प्यास बुझा सकता है।

यीशु ने उन से कहा, जीवन की रोटी मैं हूं: जो मेरे पास आएगा वह कभी भूखा न होगा और जो मुझ पर विश्वास करेगा, वह कभी प्यासा न होगा। - यूहन्ना 6:35

बाइबल पाठ: यूहन्ना 4:1-15
John 4:1 फिर जब प्रभु को मालूम हुआ, कि फरीसियों ने सुना है, कि यीशु यूहन्ना से अधिक चेले बनाता, और उन्हें बपतिस्मा देता है। 
John 4:2 (यद्यपि यीशु आप नहीं वरन उसके चेले बपतिस्मा देते थे)। 
John 4:3 तब यहूदिया को छोड़कर फिर गलील को चला गया। 
John 4:4 और उसको सामरिया से हो कर जाना अवश्य था। 
John 4:5 सो वह सूखार नाम सामरिया के एक नगर तक आया, जो उस भूमि के पास है, जिसे याकूब ने अपने पुत्र यूसुफ को दिया था। 
John 4:6 और याकूब का कूआं भी वहीं था; सो यीशु मार्ग का थका हुआ उस कूएं पर यों ही बैठ गया, और यह बात छठे घण्टे के लगभग हुई। 
John 4:7 इतने में एक सामरी स्त्री जल भरने को आई: यीशु ने उस से कहा, मुझे पानी पिला। 
John 4:8 क्योंकि उसके चेले तो नगर में भोजन मोल लेने को गए थे। 
John 4:9 उस सामरी स्त्री ने उस से कहा, तू यहूदी हो कर मुझ सामरी स्त्री से पानी क्यों मांगता है? (क्योंकि यहूदी सामरियों के साथ किसी प्रकार का व्यवहार नहीं रखते)। 
John 4:10 यीशु ने उत्तर दिया, यदि तू परमेश्वर के वरदान को जानती, और यह भी जानती कि वह कौन है जो तुझ से कहता है; मुझे पानी पिला तो तू उस से मांगती, और वह तुझे जीवन का जल देता। 
John 4:11 स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, तेरे पास जल भरने को तो कुछ है भी नहीं, और कूआं गहिरा है: तो फिर वह जीवन का जल तेरे पास कहां से आया? 
John 4:12 क्या तू हमारे पिता याकूब से बड़ा है, जिसने हमें यह कूआं दिया; और आप ही अपने सन्तान, और अपने ढोरों समेत उस में से पीया? 
John 4:13 यीशु ने उसको उत्तर दिया, कि जो कोई यह जल पीएगा वह फिर प्यासा होगा। 
John 4:14 परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर अनन्तकाल तक प्यासा न होगा: वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उस में एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा। 
John 4:15 स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, वह जल मुझे दे ताकि मैं प्यासी न होऊं और न जल भरने को इतनी दूर आऊं।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 30-31 
  • फिलेमोन


बुधवार, 27 जून 2012

प्यास

   क्या आप कभी वास्तव में प्यासे, बहुत प्यासे हुए हैं? बहुत वर्ष पहले की बात है, मैं पश्चिमी अफ्रीका के माली देश में अपनी बहन कैथी से मिलने गई। एक दिन घूमने फिरने के बाद जब दोपहर में तापमान १००  डिगरी फैरन्हाइट से भी अधिक हो गया था, मुझे बहुत प्यास लगी और मैंने अपनी बहन से पानी मांगा। तब कैथी ने उत्तर दिया कि वह फिलटर किया हुआ पानी तो लाना भूल ही गई। मैं प्यास से परेशान होने लगी, और घर पहुंचने में जितना समय बीतता जा रहा था, प्यास के कारण मुझे मर जाने का भय और मेरी बेचैनी बढ़ते जा रहे थे।

   अचानक कैथी ने कहा, "मुझे पता है कि हमें कहां जाना चाहिए" और एक दूतावास में गाड़ी मोड़ ली। उस दूतावास के अन्दर आते ही मेरे सामने एक अति सुन्दर दृश्य था - पीने के पानी का एक कूलर। मैंने वहां रखे छोटे प्याले को लिया और कूलर से उसे भर भर के स्वच्छ ठंडा पानी पीने लगी, और पीती रही जब तक मेरी प्यास बुझ नहीं गई। मेरा शरीर बहुत देर से पानी के बिना था, और अब पानी की कमी को पूरी करने के लिए उसे बहुत पानी की आवश्यक्ता पड़ी।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार ने परमेश्वर के लिए अपनी आत्मिक प्यास को शारीरिक प्यास से समझाया है: "जैसे हरिणी नदी के जल के लिये हांफती है, वैसे ही, हे परमेश्वर, मैं तेरे लिये हांफता हूं। जीवते ईश्वर परमेश्वर का मैं प्यासा हूं, मैं कब जाकर परमेश्वर को अपना मुंह दिखाऊंगा?" (भजन ४२:१-२)। उसकी परमेश्वर के लिए लालसा एक तीव्र प्यास के समान था जिसका निवारण केवल परमेश्वर की उपस्थिति में होने के द्वारा ही संभव था।

   क्या आप में भी कोई ऐसी कोई प्यास है जो यह संसार और संसार की बातें बुझा नहीं पा रहे हैं? यदि हां, तो परमेश्वर के लिए यह आपकी आत्मा की प्यास है। केवल परमेश्वर ही है जो इस आत्मा की प्यास को बुझा सकता है, "क्योंकि वह अभिलाषी जीव को सन्तुष्ट करता है, और भूखे को उत्तम पदार्थों से तृप्त करता है" (भजन १०७:९); उसी के पास जाईए, संतुष्टि केवल उसी के पास मिलेगी। - सिंडी हैस कैस्पर


केवल जीवन का जल, प्रभु यीशु, ही आत्मा की प्यास बुझा सकता है।

जैसे हरिणी नदी के जल के लिये हांफती है, वैसे ही, हे परमेश्वर, मैं तेरे लिये हांफता हूं। - भजन ४२:१

बाइबल पाठ: भजन ४२:१-११
Psa 42:1  जैसे हरिणी नदी के जल के लिये हांफती है, वैसे ही, हे परमेश्वर, मैं तेरे लिये हांफता हूं।
Psa 42:2  जीवते ईश्वर परमेश्वर का मैं प्यासा हूं, मैं कब जाकर परमेश्वर को अपना मुंह दिखाऊंगा?
Psa 42:3  मेरे आंसू दिन और रात मेरा आहार हुए हैं, और लोग दिन भर मुझ से कहते रहते हैं, तेरा परमेश्वर कहां है?
Psa 42:4  मैं भीड़ के संग जाया करता था, मैं जयजयकार और धन्यवाद के साथ उत्सव करने वाली भीड़ के बीच में परमेश्वर के भवन को धीरे धीरे जाया करता था; यह स्मरण करके मेरा प्राण शोकित हो जाता है।
Psa 42:5  हे मेरे प्राण, तू क्यों गिरा जाता है? और तू अन्दर ही अन्दर क्यों व्याकुल है? परमेश्वर पर आशा लगाए रह; क्योंकि मैं उसके दर्शन से उद्धार पाकर फिर उसका धन्यवाद करूंगा।
Psa 42:6  हे मेरे परमेश्वर, मेरा प्राण मेरे भीतर गिरा जाता है, इसलिये मैं यर्दन के पास के देश से और हर्मोन के पहाड़ों और मिसगार की पहाड़ी के ऊपर से तुझे स्मरण करता हूं।
Psa 42:7  तेरी जलधाराओं का शब्द सुनकर जल, जल को पुकारता है; तेरी सारी तरंगों और लहरों में मैं डूब गया हूं।
Psa 42:8  तौभी दिन को यहोवा अपनी शक्ति और करूणा प्रगट करेगा, और रात को भी मैं उसका गीत गाऊंगा, और अपने जीवनदाता ईश्वर से प्रार्थना करूंगा।
Psa 42:9  मैं ईश्वर से जो मेरी चट्टान है कहूंगा, तू मुझे क्यों भूल गया? मैं शत्रु के अन्धेर के मारे क्यों शोक का पहिरावा पहिने हुए चलता फिरता हूं?
Psa 42:10  मेरे सताने वाले जो मेरी निन्दा करते हैं मानो उस में मेरी हडि्डयां चूर चूर होती हैं, मानो कटार से छिदी जाती हैं, क्योंकि वे दिन भर मुझ से कहते रहते हैं, तेरा परमेश्वर कहां है?
Psa 42:11  हे मेरे प्राण तू क्यों गिरा जाता है? तू अन्दर ही अन्दर क्यों व्याकुल है? परमेश्वर पर भरोसा रख; क्योंकि वह मेरे मुख की चमक और मेरा परमेश्वर है, मैं फिर उसका धन्यवाद करूंगा।


एक साल में बाइबल: 

  • अय्युब ८-१० 
  • प्रेरितों ८:२६-४०