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रविवार, 10 फ़रवरी 2013

शुभकामनाएं


   सिंगापुर में चीनी नव वर्ष के सामाजिक एवं व्यावसायिक सामूहिक प्रीतिभोज अधिकांशतः एक विशेष प्रकार के भोजन से आरंभ होते हैं जो बिना पकाए ही कई वस्तुओं को एक साथ मिलाकर बनाया जाता है। परंपरा है कि जितने लोग भोज में उपस्थित होते हैं वे सब मिलकर इन सब वस्तुओं को एक बर्तन में एक साथ मिलाते हैं और ऐसा करते हुए एक दूसरे के लिए नववर्ष में सौभाग्य लाने के लिए कुछ बातों को बोलते रहते हैं। इस भोजन पदार्थ का नाम है यू शेंग जो कि चीनी भाषा में ’समृद्धि का वर्ष’ कहे जाने के जैसा ही सुनाई पड़ता है।

   हमारे शब्द आते समयों के लिए हमारी भावनाओं और आशाओं को व्यक्त कर सकते हैं लेकिन वे शब्द किसी के जीवन में समृद्धि ला नहीं सकते। यह सामर्थ तो केवल परमेश्वर के पास है, इसलिए अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि हम विचार करें और जानें कि परमेश्वर हम से आते समयों के लिए क्या आशा रखता है।

   फिलिप्पी के विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में पौलुस ने उनसे कहा, "मैं यह प्रार्थना करता हूं, कि तुम्हारा प्रेम, ज्ञान और सब प्रकार के विवेक सहित और भी बढ़ता जाए" (फिलिप्पियों १:९)। फिलिप्पी की मण्डली पौलुस के साथ सहभागी रही थी और वह भी उनसे बहुत प्रेम करता था (फिलिप्पियों १:५, ७) लेकिन पौलुस यह भी चाहता था कि वे परस्पर प्रेम में भी और अधिक बढ़ते जाएं। पौलुस केवल उनसे परमेश्वर के ज्ञान में ही बढ़ने की आशा नहीं रखता था लेकिन उस परमेश्वरीय प्रेम में भी जो कि परमेश्वर के साथ निकट संबंध होने से आता है। परमेश्वर को निकटता से जानने से ही हम सही और गलत के भेद को समझने और फिर उसे जीवनों में लागू करने में सक्षम होने पाते हैं।

   नववर्ष में लोगों को अपनी शुभकामनाएं देना भला है, लेकिन हमारी हार्दिक इच्छा परमेश्वरीय प्रेम में बढ़ते जाने की होनी चाहिए जिससे हमारे जीवन धार्मिकता के फलों से सुसज्जित होकर परमेश्वर की महिमा का कारण ठहरें (फिलिप्पियों १:११)। - सी. पी. हिया


जिनके पास परमेश्वर के लिए दिल होता है वे दिल में लोगों को जगह देना भी जानते हैं।

मैं यह प्रार्थना करता हूं, कि तुम्हारा प्रेम, ज्ञान और सब प्रकार के विवेक सहित और भी बढ़ता जाए। - फिलिप्पियों १:९

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों १:३-१२
Philippians1:3 मैं जब जब तुम्हें स्मरण करता हूं, तब तब अपने परमेश्वर का धन्यवाद करता हूं।
Philippians1:4 और जब कभी तुम सब के लिये बिनती करता हूं, तो सदा आनन्द के साथ बिनती करता हूं।
Philippians1:5 इसलिये, कि तुम पहिले दिन से ले कर आज तक सुसमाचार के फैलाने में मेरे सहभागी रहे हो।
Philippians1:6 और मुझे इस बात का भरोसा है, कि जिसने तुम में अच्छा काम आरम्भ किया है, वही उसे यीशु मसीह के दिन तक पूरा करेगा।
Philippians1:7 उचित है, कि मैं तुम सब के लिये ऐसा ही विचार करूं क्योंकि तुम मेरे मन में आ बसे हो, और मेरी कैद में और सुसमाचार के लिये उत्तर और प्रमाण देने में तुम सब मेरे साथ अनुग्रह में सहभागी हो।
Philippians1:8 इस में परमेश्वर मेरा गवाह है, कि मैं मसीह यीशु की सी प्रीति कर के तुम सब की लालसा करता हूं।
Philippians1:9 और मैं यह प्रार्थना करता हूं, कि तुम्हारा प्रेम, ज्ञान और सब प्रकार के विवेक सहित और भी बढ़ता जाए।
Philippians1:10 यहां तक कि तुम उत्तम से उत्तम बातों को प्रिय जानो, और मसीह के दिन तक सच्चे बने रहो; और ठोकर न खाओ।
Philippians1:11 और उस धामिर्कता के फल से जो यीशु मसीह के द्वारा होते हैं, भरपूर होते जाओ जिस से परमेश्वर की महिमा और स्‍तुति होती रहे।
Philippians1:12 हे भाइयों, मैं चाहता हूं, कि तुम यह जान लो, कि मुझ पर जो बीता है, उस से सुसमाचार ही की बढ़ती हुई है।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था ८-१० 
  • मत्ती २५:३१-४६


शनिवार, 9 फ़रवरी 2013

आनन्द एवं शोक


   इस्त्राएल राष्ट्र के आरंभिक वर्षों में गोल्डा मेयर वहाँ की प्रधानमंत्री बनीं। गोल्डा मेयर ने अपने जीवन में बहुत से संघर्षों तथा उतार चढ़ावों को देखा था। अपने प्रधानमंत्री काल में भी उन्होंने नवजात इस्त्राएल राष्ट्र को अनेक संघर्षों, हानिकारक प्रसंगों एवं कुछ आनन्द के अवसरों से होकर निकलते हुए देखा। आनन्द और शोक के समयों के विषय में उन्होंने कहा, "जो अपने संपूर्ण हृदय से विलाप करना नहीं जानते, वे दिल खोल कर हँसना भी नहीं जान सकते।"

   परमेश्वर के जन प्रेरित पौलुस ने परमेश्वर के वचन बाइबल में विलाप और आनन्द करने की बात एक अनोखे रूप में कही है। रोम के विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में वह अपने पाठकों को अपने व्यक्तिगत अनुभवों एवं संदर्भ से बाहर निकल कर इन विषयों के लिए दूसरों की ओर देखने को कहता है। पौलुस ने कहा: "आनन्द करने वालों के साथ आनन्द करो; और रोने वालों के साथ रोओ" (रोमियों १२:१५)।

   यदि हम केवल अपने दुखों और असफलताओं पर ही विलाप करें तो हम दूसरों के कटु अनुभवों में उनके साथ होने, उनके साथ सहृदयता दिखाने और उनके प्रति संवेदनशील होने के अवसर गवाँ देंगे। यदि हम केवल अपने ही सुखों में और केवल अपनी ही सफलताओं में आनन्दित होते हैं तो हम प्रभु की सामर्थ के अद्भुत प्रगटिकरण के अवसरों में सम्मिलित नहीं हो पाते क्योंकि प्रभु अपनी सामर्थ और उद्देश्य अन्य लोगों के जीवनों में होकर भी प्रगट करता है।

   प्रत्येक जीवन आनन्द एवं शोक, सफलता एवं असफलता दोनो ही प्रकार के अनुभवों से भरा है। हम मसीही विश्वासियों को यह सौभाग्य दिया गया है कि हम लोगों के जीवनों में इन दोनो प्रकार के अनुभवों में सम्मिलित हो सकें और परमेश्वर के अनुग्रह को कार्यकारी होते हुए देख सकें। इस अवसर को व्यर्थ ना जाने दें; लोगों के जीवनों में सम्मिलित हों, उनके दुख भी बांटें और उनके सुखों में भी उनके साथ आनन्दित हों। - बिल क्राउडर


दूसरों की आवश्यकताओं का ध्यान रखना मसीह को आदर देता है।

आनन्द करने वालों के साथ आनन्द करो; और रोने वालों के साथ रोओ। - रोमियों १२:१५

बाइबल पाठ: रोमियों १२:९-१६
Romans12:9 प्रेम निष्कपट हो; बुराई से घृणा करो; भलाई मे लगे रहो।
Romans12:10 भाईचारे के प्रेम से एक दूसरे पर दया रखो; परस्पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलो।
Romans12:11 प्रयत्न करने में आलसी न हो; आत्मिक उन्माद में भरो रहो; प्रभु की सेवा करते रहो।
Romans12:12 आशा मे आनन्दित रहो; क्लेश मे स्थिर रहो; प्रार्थना मे नित्य लगे रहो।
Romans12:13 पवित्र लोगों को जो कुछ अवश्य हो, उस में उन की सहायता करो; पहुनाई करने मे लगे रहो।
Romans12:14 अपने सताने वालों को आशीष दो; आशीष दो श्राप न दो।
Romans12:15 आनन्द करने वालों के साथ आनन्द करो; और रोने वालों के साथ रोओ।
Romans12:16 आपस में एक सा मन रखो; अभिमानी न हो; परन्तु दीनों के साथ संगति रखो; अपनी दृष्टि में बुद्धिमान न हो।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था ६-७ 
  • मत्ती २५:१-३०


शुक्रवार, 8 फ़रवरी 2013

प्रशिक्षण स्थल


   अंतरिक्ष यात्रियों में से अनेक अपने बचपन में स्काउट हुआ करते थे। स्काउटिंग प्रशिक्षण युवकों को अनुशासित जीवन जीना सिखाता है जो आगे चलकर उन्हें उनके लक्ष्य प्राप्त करने में बहुत सहायक होता है, चाहे वह लक्ष्य अंतरिक्ष यात्रा ही क्यों ना हो। युवक स्काऊट्स की एक सभा के दौरान उन्हें २० जुलाई १९६९ को एक वरिष्ठ ईगल स्काउट से मिले एक संदेश ने रोमांचित कर दिया; वह ईगल स्काऊट थे नील आर्मस्ट्रॉन्ग जिन्होंने बाह्य अंतरिक्ष से, उस सभा के दौरान, उन्हें अपना अभिवादन भेजा।

   स्काउट प्रशिक्षण शिविर के समान एक मसीही घर को भी आत्मिक अनुशासन सिखाने और उसमें बढ़ते रहने का प्रशिक्षण देना का स्थान होना चाहिए। परमेश्वर का वचन बाइबल अभिभावकों से कहती है कि वे बच्चों के सही विकास के लिए अपने बच्चों को घरों में एक सकारात्मक वातावरण प्रदान करें और बच्चों को "...प्रभु की शिक्षा, और चितावनी देते हुए, उन का पालन-पोषण करो" (इफिसीयों ६:४)। अर्थात बच्चों की शारीरिक, मानसिक और आत्मिक आवश्यक्ताओं की पूर्ति सही रीति से होने पाए; उनके विकास के सभी पहलुओं का ध्यान रखा जाए और प्रत्येक बच्चे कि आवश्यकतानुसार उचित शब्दों तथा व्यवहार द्वारा उसका सही मार्गदर्शन किया जाए जिससे वह समुचित विकास के साथ एक अच्छा और ईमानदार नागरिक तथा मसीह का विश्वासी बनने पाए।

   यह हम मसीही विश्वासियों की ज़िम्मेवारी है कि हम अपने घरों को प्रेम तथा अनुशासन का ऐसा प्रशिक्षण स्थल बनाएं जो हमारे बच्चों को समाज में सकारात्मक योगदान देने वाले, समाज की उन्नति एवं परमेश्वर की महिमा के कारण बनें। - डेनिस फिशर


जो आज आप बच्चों के हृदय में डालेंगे हैं वही कल उनके चरित्र को निर्धारित करेगा।

हे बच्‍चे वालों अपने बच्‍चों को रिस न दिलाओ परन्तु प्रभु की शिक्षा, और चितावनी देते हुए, उन का पालन-पोषण करो। - इफिसीयों ६:४

बाइबल पाठ: इफिसीयों ६:१-४
Ephesians6:1 हे बालकों, प्रभु में अपने माता पिता के आज्ञाकारी बनो, क्योंकि यह उचित है।
Ephesians6:2 अपनी माता और पिता का आदर कर (यह पहिली आज्ञा है, जिस के साथ प्रतिज्ञा भी है)।
Ephesians6:3 कि तेरा भला हो, और तू धरती पर बहुत दिन जीवित रहे।
Ephesians6:4 और हे बच्‍चे वालों अपने बच्‍चों को रिस न दिलाओ परन्तु प्रभु की शिक्षा, और चितावनी देते हुए, उन का पालन-पोषण करो।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था ४-५ 
  • मत्ती २४:२९-५१

गुरुवार, 7 फ़रवरी 2013

रक्षक स्वर्गदूत


   जब हमारी नातिन जूलिया एक छोटी बच्ची थी तो हम उसे अपने साथ पहाड़ों की एक यात्रा पर लेकर गए। घुमावदार पहाड़ी मार्गों से होकर निकलने, गहरी घाटियों और गगनचुंबी चट्टानों को देखने के बाद जूलिया और उसकी नानी आपस में यात्रा के संबंध में बातचीत कर रहे थे; मेरी पत्नी ने जूलिया से कहा, "जब तुम्हारे नाना गाड़ी चला रहे होते हैं तो मुझे डर नहीं लगता क्योंकि मेरा मानना है कि उनके ऊपर एक रक्षक स्वर्गदूत रखा गया है।" यात्रा मार्ग से प्रभावित जूलिया ने तपाक से उत्तर दिया, "लेकिन मेरा मानना है कि एक नहीं रक्षक स्वर्गदूतों की पूरी सेना उन्हें संभालती होगी।"

   अनजाने में ही उस छोटी बच्ची के मुँह से परमेश्वर के वचन का तथ्य निकल गया। भजनकार ने कहा: "परमेश्वर के रथ बीस हजार, वरन हजारों हजार हैं; प्रभु उनके बीच में है, जैसे वह सीनै पवित्र स्थान में है" (भजन ६८:१७)। पवित्र बाइबल में परमेश्वर को ’सेनाओं का यहोवा’ कह के भी संबोधित किया गया है, और स्वर्गदूत परमेश्वर की सेना है। प्रभु यीशु को पकड़वाए जाने के समय प्रभु ने इसी तथ्य के संदर्भ में अपने चेले पतरस से कहा था: "क्या तू नहीं समझता, कि मैं अपने पिता से बिनती कर सकता हूं, और वह स्‍वर्गदूतों की बारह पलटन से अधिक मेरे पास अभी उपस्थित कर देगा?" (मत्ती २६:५३) परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि परमेश्वर ने अपने इन्हीं स्वर्गदूतों को हम मसीही विश्वासियों की सेवा-टहल करने वाली आत्माएं कर दिया है (इब्रानियों १:१३-१४)।

   बाइबल में राजाओं के वृतान्त में हम पढ़ते हैं कि अराम देश कि सेना ने परमेश्वर के भविष्यद्वकता एलीशा के नगर को घेर लिया; एलीशा निश्चिंत था किंतु उसका सेवक घबरा कर पूछने लगा "हाय! मेरे स्वामी, हम क्या करें?" तब एलिशा ने उत्तर दिया, "मत डर; क्योंकि जो हमारी ओर हैं, वह उन से अधिक हैं, जो उनकी ओर हैं" और फिर एलीशा की प्रार्थना पर परमेश्वर ने उस सेवक की आँखें खोल दीं कि वह आलौकिक को देख सके और तब सेवक ने देखा कि "एलीशा के चारों ओर का पहाड़ अग्निमय घोड़ों और रथों से भरा हुआ है" (२ राजा ६:१५-१७) - सेनाओं के यहोवा की सेना उसके जन के साथ विद्यमान थी।

   चाहे हम उन्हें अपनी शारीरिक आँखों से नहीं देख पाते लेकिन हम मसीही विश्वासी इस बात से सदा आश्वस्त रह सकते हैं कि परमेश्वर ने अपने स्वर्गदूतों को हमारे चारों ओर नियुक्त किया हुआ है और हमें आभास भी नहीं होने पाता कि हमारे विरुद्ध होने वाले शत्रु शैतान के कितने और कैसे कैसे हमले वे विफल कर देते हैं। परमेश्वर की आज्ञा के बिना और उसकी निर्धारित सीमा के बाहर कोई भी शक्ति हमें छू भी नहीं सकती यह हम अय्युब की पुस्तक के १ एवं २ अध्याय में स्पष्ट देखते हैं।

   हम मसीही विश्वासियों के जीवनों में जो भी होता है वह हमारी भलाई तथा जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु की महिमा के लिए ही होता है। इसलिए यदि दुख-क्लेषों से होकर निकलना भी पड़े तो लेश-मात्र भी विचलित ना हों वरन उनमें भी परमेश्वर की महिमा करें। - डेविड रोपर


परमेश्वर के लोग परमेश्वर के स्वर्गदूतों के संरक्षण में रहते हैं।

क्योंकि वह अपने दूतों को तेरे निमित्त आज्ञा देगा, कि जहां कहीं तू जाए वे तेरी रक्षा करें। - भजन ९१:११

बाइबल पाठ: २ राजा ६:८-१७
2 Kings6:8 ओैर अराम का जाजा इस्राएल से युद्ध कर रहा था, और सम्मति कर के अपने कर्मचारियों से कहा, कि अमुक स्थान पर मेरी छावनी होगी।
2 Kings6:9 तब परमेश्वर के भक्त ने इस्राएल के राजा के पास कहला भेजा, कि चौकसी कर और अमुक स्थान से हो कर न जाना क्योंकि वहां अरामी चढ़ाई करने वाले हैं।
2 Kings6:10 तब इस्राएल के राजा ने उस स्थान को, जिसकी चर्चा कर के परमेश्वर के भक्त ने उसे चिताया था, भेज कर, अपनी रक्षा की; और उस प्रकार एक दो बार नहीं वरन बहुत बार हुआ।
2 Kings6:11 इस कारण अराम के राजा का मन बहुत घबरा गया; सो उसने अपने कर्मचारियों को बुला कर उन से पूछा, क्या तुम मुझे न बताओगे कि हम लोगों में से कौन इस्राएल के राजा की ओर का है? उसके एक कर्मचारी ने कहा, हे मेरे प्रभु! हे राजा! ऐसा नहीं,
2 Kings6:12 एलीशा जो इस्राएल में भविष्यद्वक्ता है, वह इस्राएल के राजा को वे बातें भी बताया करता है, जो तू शयन की कोठरी में बोलता है।
2 Kings6:13 राजा ने कहा, जा कर देखो कि वह कहां है, तब मैं भेज कर उसे पकड़वा मंगाऊंगा। और उसको यह समाचार मिला कि वह दोतान में है।
2 Kings6:14 तब उसने वहां घोड़ों और रथों समेत एक भारी दल भेजा, और उन्होंने रात को आकर नगर को घेर लिया।
2 Kings6:15 भोर को परमेश्वर के भक्त का टहलुआ उठा और निकल कर क्या देखता है कि घोड़ों और रथों समेत एक दल नगर को घेरे हुए पड़ा है। और उसके सेवक ने उस से कहा, हाय! मेरे स्वामी, हम क्या करें?
2 Kings6:16 उसने कहा, मत डर; क्योंकि जो हमारी ओर हैं, वह उन से अधिक हैं, जो उनकी ओर हैं।
2 Kings6:17 तब एलीशा ने यह प्रार्थना की, हे यहोवा, इसकी आंखें खोल दे कि यह देख सके। तब यहोवा ने सेवक की आंखें खोल दीं, और जब वह देख सका, तब क्या देखा, कि एलीशा के चारों ओर का पहाड़ अग्निमय घोड़ों और रथों से भरा हुआ है।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था १-३ 
  • मत्ती २४:१-२८


बुधवार, 6 फ़रवरी 2013

पक्षपात


   समाचार पत्र वॉशिंगटन पोस्ट में पूर्वधारणा एवं पक्षपात पर एक लेख प्रकाशित हुआ जिसमें बताया गया कि शोध कर्ताओं ने पाया है कि लगभग सभी लोग किसी न किसी रूप में और कुछ न कुछ मात्रा में पूर्वधारणा एवं पक्षपात रखते हैं और यह रवैया उनमें भी पाया जाता है जो इसके विरोधी हैं। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि हमारे स्वाभिमान का प्रमुख भाग उस भावना से आता है जो हमारे एक विशेष समुदाय अथवा वर्ग से जुड़े होने के कारण हमें अपने आप को दूसरों से बेहतर आँकने देती है। पक्षपात को पराजित करना सरल नहीं है - परमेश्वर के लोगों और समुदाय में भी नहीं!

   प्रेरित पौलुस द्वारा परमेश्वर के वचन बाइबल में कुलुस्से के मसीही विश्वासियों को लिखे शब्द हम मसीही विश्वासियों को आज भी निर्देषित करते हैं कि हमारे व्यवहार और हमारे शब्दों में किसी भी प्रकार का कोई भेदभाव दिखाई नहीं देना चाहिए क्योंकि मसीह यीशु में हर भेदभाव मिट गया है और हम मसीह के स्वरूप में ढाले जा रहे हैं: "और नए मनुष्यत्‍व को पहिन लिया है जो अपने सृजनहार के स्‍वरूप के अनुसार ज्ञान प्राप्त करने के लिये नया बनता जाता है। उस में न तो यूनानी रहा, न यहूदी, न खतना, न खतनारिहत, न जंगली, न स्‍कूती, न दास और न स्‍वतंत्र: केवल मसीह सब कुछ और सब में है" (कुलुस्सियों ३:१०-११)। इसलिए बड़े-छोटे या ऊँच-नीच अथवा पक्षपात की बजाए हमारे परस्पर व्यवहार में करुणा, दया, नम्रता, कोमलता और धीरज दिखाई देने चाहिएं (पद १२) और इन सब के ऊपर प्रेम जो सिद्धता का कटिबन्ध है (पद १४) विद्यमान होना चाहिए।

   मसीह यीशु की देह अर्थात उसकी मण्डली में जाति, वर्ग, वर्ण, रंग अथवा राष्ट्रीयता के आधार पर किसी को कोई वरियता नहीं है क्योंकि क्रूस के द्वारा मसीह यीशु ने हम सब को अपने आप में एक कर दिया है ताकि हम एक दूसरे के साथ सदैव ही ईमानदारी, आदर और प्रेम में व्यवहार करें। मसीही विश्वासियों को अपनी नहीं वरन परमेश्वर के पुत्र एवं अपने तथा जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु की महिमा के लिए प्रयत्नशील रहना चाहिए। - डेविड मैक्कैसलैंड


पक्षपात प्रकट को विकृत कर देता है, वार्तालाप में असत्य मिला देता है और जहाँ कार्यान्वित होता है वहाँ विनाश ले आता है।

उस में न तो यूनानी रहा, न यहूदी, न खतना, न खतनारिहत, न जंगली, न स्‍कूती, न दास और न स्‍वतंत्र: केवल मसीह सब कुछ और सब में है। - कुलुस्सियों ३:११

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों ३:८-१७
Colossians3:8 पर अब तुम भी इन सब को अर्थात क्रोध, रोष, बैरभाव, निन्‍दा, और मुंह से गालियां बकना ये सब बातें छोड़ दो।
Colossians3:9 एक दूसरे से झूठ मत बोलो क्योंकि तुम ने पुराने मनुष्यत्‍व को उसके कामों समेत उतार डाला है।
Colossians3:10 और नए मनुष्यत्‍व को पहिन लिया है जो अपने सृजनहार के स्‍वरूप के अनुसार ज्ञान प्राप्त करने के लिये नया बनता जाता है।
Colossians3:11 उस में न तो यूनानी रहा, न यहूदी, न खतना, न खतनारिहत, न जंगली, न स्‍कूती, न दास और न स्‍वतंत्र: केवल मसीह सब कुछ और सब में है।
Colossians3:12 इसलिये परमेश्वर के चुने हुओं की नाईं जो पवित्र और प्रिय हैं, बड़ी करूणा, और भलाई, और दीनता, और नम्रता, और सहनशीलता धारण करो।
Colossians3:13 और यदि किसी को किसी पर दोष देने को कोई कारण हो, तो एक दूसरे की सह लो, और एक दूसरे के अपराध क्षमा करो: जैसे प्रभु ने तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी करो।
Colossians3:14 और इन सब के ऊपर प्रेम को जो सिद्धता का कटिबन्‍ध है बान्‍ध लो।
Colossians3:15 और मसीह की शान्‍ति जिस के लिये तुम एक देह हो कर बुलाए भी गए हो, तुम्हारे हृदय में राज्य करे, और तुम धन्यवादी बने रहो।
Colossians3:16 मसीह के वचन को अपने हृदय में अधिकाई से बसने दो; और सिद्ध ज्ञान सहित एक दूसरे को सिखाओ, और चिताओ, और अपने अपने मन में अनुग्रह के साथ परमेश्वर के लिये भजन और स्‍तुतिगान और आत्मिक गीत गाओ।
Colossians3:17 और वचन से या काम से जो कुछ भी करो सब प्रभु यीशु के नाम से करो, और उसके द्वारा परमेश्वर पिता का धन्यवाद करो।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन ३९-४० 
  • मत्ती २३:२३-३९


मंगलवार, 5 फ़रवरी 2013

स्थिर आधार


   अमेरिका के कैलिफोर्निया प्रांत के हेवर्ड शहर ने सन १९३१ में अपना प्रथम नगरसभा ग्रह बनाया। वह सभा ग्रह बहुत भव्य था, उसमें प्रयुक्त निर्माण शैली अद्भुत थी और उस समय उसकी निर्माण की लागत $१००,००० थी। उस भव्य तथा आलीशान इमारत के साथ एक ही समस्या थी - वह कैलिफोर्निया की हेवर्ड दोष रेखा पर बनी थी और धरती की उस दोष रेखा में चल रही अविरल गतिविधि के कारण वह इमारत धीरे धीरे दो भागों में विभाजित होने लगी। सन १९८९ में आए एक भूकम्प के कारण वह इमारत इस हाल में आ गई है कि अब उससे लगातार बने खतरे के कारण लोगों का वहां जाना वर्जित कर दिया गया है।

   अस्थिर नेंव और आधार पर निर्माण करना बुद्धिमता नहीं है। यह बात केवल भवन निर्माण ही नहीं वरन जीवन निर्माण के लिए भी सत्य है। प्रभु यीशु ने इस सत्य को एक दृष्टांत के द्वारा समझाया: "परन्तु जो कोई मेरी ये बातें सुनता है और उन पर नहीं चलता वह उस निर्बुद्धि मनुष्य की नाईं ठहरेगा जिसने अपना घर बालू पर बनाया। और मेंह बरसा, और बाढ़ें आईं, और आन्‍धियां चलीं, और उस घर पर टक्करें लगीं और वह गिरकर सत्यानाश हो गया" (मत्ती ७:२६-२७)।

   इस संसार के लगातार बदलते नैतिक स्तर और सही-गलत की पहचान लोगों को उल्झनों में डालने और उन्हें भरमाने वाले हो सकते हैं। जो आज के समाज एवं संसकृति के अनुसार सही हैं वे कल गलत कहे जा सकते हैं, जो कल अनुचित था वह आज उचित माना जा सकता है; किंतु परमेश्वर के स्थिर और अटल वचन बाइबल की बातें युगानुयुग कभी नहीं बदलतीं। हम अपने देश और संसार की घटानाओं में, उनके प्रति व्यकत प्रतिक्रीयाओं में, सिनेमा, टी.वी. तथा मनोरंजन के साधनों पर प्रस्तुत कार्यक्रमों में, लोक चर्चाओं आदि में स्पष्ट देखते हैं कि कुछ ही वर्षों में नैतिक, सामाजिक, उचित-अनुचित इत्यादि के स्तर और निर्धारण मानक कैसे बदल गए हैं। लेकिन बाइबल में जो गलत था वह अब भी गलत है और सही था वह अब भी सही है; समय, काल, सभ्यता और संसकृति के साथ बाइबल की कोई बात कभी ना बदली है और ना गलत साबित हुई है। इसीलिए बाइबल की शिक्षाओं और बातों को अपना स्थिर आधार बनाकर उस के अनुसार जीवन निर्माण करना ही बुद्धिमानी है। इसीलिए प्रभु यीशु ने कहा: "इसलिये जो कोई मेरी ये बातें सुनकर उन्हें मानता है वह उस बुद्धिमान मनुष्य की नाईं ठहरेगा जिसने अपना घर चट्टान पर बनाया। और मेंह बरसा और बाढ़ें आईं, और आन्‍धियां चलीं, और उस घर पर टक्करें लगीं, परन्तु वह नहीं गिरा, क्योंकि उस की नेव चट्टान पर डाली गई थी" (मत्ती ७:२४-२५)।

   अन्ततः हम सब को अपने जीवनों का हिसाब देने परमेश्वर के समक्ष खड़े होना ही है और तब परमेश्वर का वचन ही हमारे न्याय का आधार होगा (यूहन्ना १२:४८), तो क्यों ना उस वचन और उसकी शिक्षाओं को अभी से अपने जीवनों में स्थान दें और उनका पालन करें? - डेनिस फिशर


अपने जीवनों को एक मात्र स्थिर आधार - मसीह यीशु पर खड़ा कीजिए।

यीशु मसीह कल और आज और युगानुयुग एकसा है। - इब्रानियों १३:८

बाइबल पाठ: यूहन्ना १२:४४-५०
John12:44 यीशु ने पुकार कर कहा, जो मुझ पर विश्वास करता है, वह मुझ पर नहीं, वरन मेरे भेजने वाले पर विश्वास करता है।
John12:45 और जो मुझे देखता है, वह मेरे भेजने वाले को देखता है।
John12:46 मैं जगत में ज्योति हो कर आया हूं ताकि जो कोई मुझ पर विश्वास करे, वह अन्धकार में न रहे।
John12:47 यदि कोई मेरी बातें सुनकर न माने, तो मैं उसे दोषी नहीं ठहराता, क्योंकि मैं जगत को दोषी ठहराने के लिये नहीं, परन्तु जगत का उद्धार करने के लिये आया हूं।
John12:48 जो मुझे तुच्‍छ जानता है और मेरी बातें ग्रहण नहीं करता है उसको दोषी ठहराने वाला तो एक है: अर्थात जो वचन मैं ने कहा है, वही पिछले दिन में उसे दोषी ठहराएगा।
John12:49 क्योंकि मैं ने अपनी ओर से बातें नहीं कीं, परन्तु पिता जिसने मुझे भेजा है उसी ने मुझे आज्ञा दी है, कि क्या क्या कहूं और क्या क्या बोलूं
John12:50 और मैं जानता हूं, कि उस की आज्ञा अनन्त जीवन है इसलिये मैं जो बोलता हूं, वह जैसा पिता ने मुझ से कहा है वैसा ही बोलता हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन ३६-३८ 
  • मत्ती २३:१-२२


सोमवार, 4 फ़रवरी 2013

परिवर्तन


   मेरे मित्र टिम डेविस को अपने बचपन का वह समय याद है जब वह अपने माता-पिता के साथ ट्रिनिडैड में था, और इंग्लैंड की महारानी इलज़ाबेथ उस छोटे से स्थान पर आईं थीं। टिम भी अपने माता-पिता तथा उस भीड़ के साथ महारानी को देखने गया, और शेष भीड़ के साथ उस मार्ग के किनारे हाथ में झंडा लिए हुए वह भी खड़ा हुआ। जिस मार्ग से होकर महारानी को निकलना था उसे अच्छे से साफ करके खूब सजाया गया था। कुछ समय पश्चात महारानी की सवारी आई, पहले पैदल सैनिक, फिर घोड़ों पर सैनिकों का दस्ता, फिर महारानी की गाड़ी जिस में से महारानी इलज़ाबेथ अपने हाथ हिलाकर भीड़ के अभिवादन को स्वीकार कर रहीं थीं। महारानी और भीड़ एक दुसरे को देखकर मुस्कुरा रहे थे, भीड़ उत्साहित और प्रफुल्लित थी, किंतु भीड़ और महारानी का परस्पर कोई व्यक्तिगत परिचय या संबंध नहीं था। टिम और अन्य लोगों के देखते देखते राजसी सवारी का वह जलूस आगे बढ़ गया और फिर सब अपने अपने घरों और कार्यों को लौट गए। कुछ ही समय के बाद उस मार्ग से सारी सजावट हटा ली गई, मार्ग फिर से पहले के समान हो गया और कुछ समय पश्चात पता भी नहीं चलता था कि महारानी इसी मार्ग पर आईं थीं। टिम ने कहा, "वे राजसी अधिकारी आए और शहर के मार्गों से होकर चले गए; शहर में या लोगों में कोई स्थाई परिवर्तन नहीं आया।"

   हम मसीही विश्वासियों के लिए भी एक दिन वह था जब हमारे व्यक्तिगत निमंत्रण पर परमेश्वर का पुत्र तथा जगत का उद्धाकर्ता हमारे दिलों में आया। कुछ ने उसे अपने दिलों में बैठा लिया और उनके मनों को उसने अपने पवित्र आत्मा का मन्दिर बना लिया (१ कुरिन्थियों ६:१९), उनके मनों को स्वच्छ किया और अब भी करता रहता है, उनके जीवन बदल गए तथा यह सुधार दिन-प्रतिदिन ज़ारी रहता है। लेकिन अनेक ऐसे भी हैं जिन्होंने केवल उसे अपने अन्दर से होकर निकलने भर दिया है, अपने अन्दर रहने और कार्य करने का स्थान तथा अनुमति नहीं दी है; कुछ समय के लिए उनके जीवनों में कुछ भला परिवर्तन दिखाई देता है किंतु समय के साथ सब कुछ फिर से पहले जैसा हो जाता है। ये लोग इसी भ्रम में जीते हैं और संसार के सामने भी इस असत्य को रखते हैं कि वे मसीही विश्वासी हैं, और उनके जीवन मसीही विश्वासी होने का गलत उदहरण संसार के सामने प्रस्तुत करते हैं; जब कि वास्तविकता इस से विपरीत है। इस एक सच्चाई के अनेक अति महत्वपूर्ण आयाम हैं। यदि मसीह यीशु हमारे हृदय में विराजमान है और हमारा मन परमेश्वर की पवित्र आत्मा का मन्दिर है तो अवश्यंभावी है कि उसकी उपस्थिति हमारे जीवनों के अन्दर कुछ स्थायी परिवर्तन लाएगी जो स्वयं हमें तथा हमारे सम्पर्क में आने वाले लोगों पर प्रगट होंगे तथा मसीह की महिमा के कारण ठहरेंगे। हमारी वार्तालाप की विधि विषय और प्रयुक्त शब्द, हमारा व्यवहार विशेषकर जब कोई जानकार हमें देखने वाला ना हो, लोगों के साथ हमारे संबंध और व्यवहार, हमारा अपनी ज़िम्मेवरियों एवं अपने अधिकारियों के प्रति रवैया, सांसारिक उपलब्धियों एवं धन-संपत्ति तथा उन के महत्व तथा उपयोग के प्रति हमारा रवैया, हमारे शत्रुओं के प्रति हमारी मनसा और हमारा व्यवहार इत्यादि; जीवन की हर छोटी बड़ी बात में यह परिवर्तन दिखाई देगा।

   यदि आप मसीही विश्वासी हैं तो अपने जीवन को जाँच के देखिए कि मसीह यीशु को अपने जीवन में आमंत्रित करने के बाद क्या आपके जीवन में स्थाई रूप से कुछ बदला है, और क्या यह परिवर्तन ज़ारी है? क्या आपके आस-पास के लोग और आपके प्रीय जन इस परिवर्तन को अनुभव करते हैं? यदि नहीं तो गंभीरता से विचार कीजिए और जांचिए कि कहीं ऐसा तो नहीं है कि आपने मसीह यीशु को हृदय में स्थान देने की बजाए उसे अपने अन्दर से होकर जाने भर का केवल समय और मार्ग भर दिया हो। आपके निमंत्रण पर वह आया और उसके साथ ही थोड़े समय का भला परिवर्तन भी आया; फिर ठहरने के स्थाई स्थान और आपके जीवन को स्वच्छ तथा परिवर्तित करने के कार्य की अनुमति के अभाव में उसे आगे बढ़ जाना पड़ा और आप उसे आगे विदा करके अपने जीवन में पहले जैसे ही रह गए?

   मसीह यीशु को आमंत्रित करके अपने मनों में उसे स्थाई स्थान दीजिए और वह आपके जीवन में स्थाई परिवर्तन ले आएगा। - जो स्टोवैल


यदि मसीह यीशु ने हमारे अन्दर स्थाई निवास पाया है तो संसार और सांसारिकता को हमारे अन्दर स्थान नहीं मिलेगा।

क्या तुम नहीं जानते, कि तुम्हारी देह पवित्रात्मा का मन्दिर है; जो तुम में बसा हुआ है और तुम्हें परमेश्वर की ओर से मिला है, और तुम अपने नहीं हो? - १ कुरिन्थियों ६:१९

बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों ६:१२-२०
1 Corinthians6:12 सब वस्तुएं मेरे लिये उचित तो हैं, परन्तु सब वस्तुएं लाभ की नहीं, सब वस्तुएं मेरे लिये उचित हैं, परन्तु मैं किसी बात के आधीन न हूंगा।
1 Corinthians6:13 भोजन पेट के लिये, और पेट भोजन के लिये है, परन्तु परमेश्वर इस को और उसको दोनों को नाश करेगा, परन्तु देह व्यभिचार के लिये नहीं, वरन प्रभु के लिये; और प्रभु देह के लिये है।
1 Corinthians6:14 और परमेश्वर ने अपनी सामर्थ से प्रभु को जिलाया, और हमें भी जिलाएगा।
1 Corinthians6:15 क्या तुम नहीं जानते, कि तुम्हारी देह मसीह के अंग हैं? सो क्या मैं मसीह के अंग ले कर उन्हें वेश्या के अंग बनाऊं? कदापि नहीं।
1 Corinthians6:16 क्या तुम नहीं जानते, कि जो कोई वेश्या से संगति करता है, वह उसके साथ एक तन हो जाता है? क्योंकि वह कहता है, कि वे दोनों एक तन होंगे।
1 Corinthians6:17 और जो प्रभु की संगति में रहता है, वह उसके साथ एक आत्मा हो जाता है।
1 Corinthians6:18 व्यभिचार से बचे रहो: जितने और पाप मनुष्य करता है, वे देह के बाहर हैं, परन्तु व्यभिचार करने वाला अपनी ही देह के विरुद्ध पाप करता है।
1 Corinthians6:19 क्या तुम नहीं जानते, कि तुम्हारी देह पवित्रात्मा का मन्दिर है; जो तुम में बसा हुआ है और तुम्हें परमेश्वर की ओर से मिला है, और तुम अपने नहीं हो?
1 Corinthians6:20 क्योंकि दाम देकर मोल लिये गए हो, इसलिये अपनी देह के द्वारा परमेश्वर की महिमा करो।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन ३४-३५ 
  • मत्ती २२:२३-४६