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मंगलवार, 3 दिसंबर 2013

रेत के किले


   जब हमारे बच्चे छोटे थे तब मैं अपने परिवार के साथ फ्लोरिडा के समुद्र तट पर छुट्टियाँ बिताने जाया करता था। यह हमारे लिए एक बहुत अच्छा समय होता जब हम अपने प्रांत मिशिगन की ठंड से निकल कर कुछ समय के लिए एक गर्म इलाके में समुद्र के किनारे आनन्द कर सकते थे। वहाँ जाकर समुद्र तट पर धूप में लेटकर कोई पुस्तक पढ़ना मुझे सबसे प्रीय लगता था, लेकिन मेरे बच्चों को कुछ और ही पसन्द था, वे समुद्र तट की बालु के साथ रेत के किले और घरौंदे बनाना चाहते थे और इसमें मुझ से सहायता चाहते थे। मुझे अपनी पुस्तक को छोड़कर बड़े अनमने भाव से उनकी सहायता के लिए उठना पड़ता तो था, लेकिन कुछ ही समय में मैं उनके साथ रेत के किले बनाने में तल्लीन हो जाता था और मुझे पता ही नहीं चलता था कि कैसे यह करते हुए घंटों बीत जाते थे, और मैं बड़ी मेहनत से बड़े अच्छे दिखने वाले रेत के किले बनाता रहता था, बिना इस बात का विचार करे कि मेरी यह मेहनत व्यर्थ है, क्योंकि किसी भी समय कोई बड़ी लहर आएगी और उन रेत के किलों को धव्स्त कर के बहा कर ले जाएगी, मेरी सारी मेहनत पर पानी फिर जाएगा।

   जीवन में हम यही गलती कई बार करते हैं - बहुत सा समय और बहुत मेहनत व्यर्थ कार्यों में गंवा देते हैं, अपने ही इरादों के सांसारिक ’रेत के किले’ बनाते रहते हैं, अपनी करनी पर और उपलब्धियों पर घमण्ड करते हैं, बिना यह विचारे कि यह सब कितना व्यर्थ है, हमारे ये किले कभी भी ध्वस्त हो सकते हैं, हमारी सारी मेहनत बेकार हो सकती है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु ने अपने चेलों को चुनौती दी कि वे सांसारिक संपत्ति के प्रति उदासीन हों और अपनी सारी संपत्ति बेचकर गरीबों में दान कर दें; प्रभु ने उनसे कहा: "क्योंकि जहां तुम्हारा धन है, वहां तुम्हारा मन भी लगा रहेगा" (लूका 12:34)। प्रभु यीशु के कहने का तात्पर्य था कि हम जिस रीति से अपने समय और संसाधनों का प्रयोग करते हैं वह हमारे अनन्त काल के दृष्टिकोण के प्रति बहुत कुछ बयान कर देता है। यदि हम प्रभु यीशु के अनुयायी होने के बाद भी नाशमान सांसारिक बातों को अपने जीवनों में प्राथमिकता देते हैं, सांसारिक संपत्ति और उपलब्धियों को पाने के लिए ही अपने समय को बिताते हैं, तो यह दिखाता है कि संभवतः हम प्रभु यीशु के प्रति सच्चे मन से समर्पित नहीं हैं।

   एक पुराने मसीही भजन की एक पंक्ति है, "केवल एक ही जीवन, वह भी शीघ्र समाप्त हो जाएगा; केवल जो मसीह के लिए किया वही शेष रह जाएगा!" थोड़ा रुक कर विचार कीजिए, आज आपने मसीह यीशु और उस के स्वर्गीय राज्य की बढोतरी के लिए क्या किया है? आप के जीवन की प्राथमिकताएं क्या हैं? अपना जीवन किस के लिए व्यतीत कर रहे हैं; कहीं रेत के किले बनाने के लिए तो नहीं? - जो स्टोवैल


परमेश्वर चाहता है कि आप उसके द्वारा आपको दी गई योग्यताओं और संसाधनों का प्रयोग उसके स्वर्गीय 
राज्य की बढ़ोतरी के लिए करें ना कि अपनी सांसारिक स्वार्थ-सिद्धी के लिए।

परन्तु अपने लिये स्वर्ग में धन इकट्ठा करो, जहां न तो कीड़ा, और न काई बिगाड़ते हैं, और जहां चोर न सेंध लगाते और न चुराते हैं। - मत्ती 6:20

बाइबल पाठ: लूका 12:22-34
Luke 12:22 फिर उसने अपने चेलों से कहा; इसलिये मैं तुम से कहता हूं, अपने प्राण की चिन्‍ता न करो, कि हम क्या खाएंगे; न अपने शरीर की कि क्या पहिनेंगे। 
Luke 12:23 क्योंकि भोजन से प्राण, और वस्‍त्र से शरीर बढ़कर है। 
Luke 12:24 कौवों पर ध्यान दो; वे न बोते हैं, न काटते; न उन के भण्‍डार और न खत्ता होता है; तौभी परमेश्वर उन्हें पालता है; तुम्हारा मूल्य पक्षियों से कहीं अधिक है। 
Luke 12:25 तुम में से ऐसा कौन है, जो चिन्‍ता करने से अपनी अवस्था में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है? 
Luke 12:26 इसलिये यदि तुम सब से छोटा काम भी नहीं कर सकते, तो और बातों के लिये क्यों चिन्‍ता करते हो? 
Luke 12:27 सोसनों के पेड़ों पर ध्यान करो कि वे कैसे बढ़ते हैं; वे न परिश्रम करते, न कातते हैं: तौभी मैं तुम से कहता हूं, कि सुलैमान भी, अपने सारे वैभव में, उन में से किसी एक के समान वस्‍त्र पहिने हुए न था। 
Luke 12:28 इसलिये यदि परमेश्वर मैदान की घास को जो आज है, और कल भाड़ में झोंकी जाएगी, ऐसा पहिनाता है; तो हे अल्प विश्वासियों, वह तुम्हें क्यों न पहिनाएगा? 
Luke 12:29 और तुम इस बात की खोज में न रहो, कि क्या खाएंगे और क्या पीएंगे, और न सन्‍देह करो। 
Luke 12:30 क्योंकि संसार की जातियां इन सब वस्‍तुओं की खोज में रहती हैं: और तुम्हारा पिता जानता है, कि तुम्हें इन वस्‍तुओं की आवश्यकता है। 
Luke 12:31 परन्तु उसके राज्य की खोज में रहो, तो ये वस्‍तुऐं भी तुम्हें मिल जाएंगी। 
Luke 12:32 हे छोटे झुण्ड, मत डर; क्योंकि तुम्हारे पिता को यह भाया है, कि तुम्हें राज्य दे। 
Luke 12:33 अपनी संपत्ति बेचकर दान कर दो; और अपने लिये ऐसे बटुए बनाओ, जो पुराने नहीं होते, अर्थात स्वर्ग पर ऐसा धन इकट्ठा करो जो घटता नहीं और जिस के निकट चोर नहीं जाता, और कीड़ा नहीं बिगाड़ता। 
Luke 12:34 क्योंकि जहां तुम्हारा धन है, वहां तुम्हारा मन भी लगा रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 45-46 
  • 1 यूहन्ना 2


सोमवार, 2 दिसंबर 2013

सदा तत्पर


   मेरी बहन के घर में कुछ किराएदार रहते हैं। एक रात एक किराएदार के यहाँ चोर घुसने का प्रयास करने लगे। उस किराएदार ने पुलिस को फोन कर के बताया कि चोर उसके घर में घुसने का प्रयास कर रहे हैं और उसे तुरंत सहायता की आवश्यकता है। दूसरी ओर से फोन का उत्तर देने वाले व्यक्ति की प्रतिक्रिया सुन कर वह किराएदार दंग रह गई; पुलिस की ओर से फोन सुनने वाले ने कहा, "हम अभी बहुत व्यसत हैं; कृपया प्रातः पुनः फोन करें!" यह प्रत्युत्तर वास्तव में बहुत परेशान करने वाला था। उस किराएदार ने पुलिस से सहायता माँगकर सही कार्य किया था लेकिन किसी कारणवश उसकी सहायता की पुकार को अनसुना कर दिया गया। उन से, जिन्हें तुरंत और हर समय सहायता देने के लिए तैयार और तत्पर मिलना चाहिए, इस प्रकार का उत्तर पाना वास्तव में बहुत निराशाजनक होता है।

   लेकिन इस प्रकार का उत्तर और सहायता की पुकार के प्रति उदासीनता परमेश्वर के साथ कभी देखने को नहीं मिलती। चाहे हमें यह लगे कि परमेश्वर हमारी सुन नहीं रहा है, लेकिन वह सदा सुनता है। वह हमारी चिंता करता है, देखभाल करता है और हमारी पुकार का उत्तर अवश्य देता है। परमेश्वर का वचन बाइबल हमें आश्वस्त करता है कि हमारा परमेश्वर पिता हमारे हृदय की चिन्ताओं से अवगत रहता है और उनके समाधान के मार्ग देता है: "जितने यहोवा को पुकारते हैं, अर्थात जितने उसको सच्चाई से पुकारते हें; उन सभों के वह निकट रहता है" (भजन 145:18)। जब कभी हम उसे पुकारते हैं, तो उससे कभी हमें उदासीनता का प्रत्युत्तर नहीं मिलता।

   हमारी सहायता की पुकार सुनकर वह अपने आप को हमसे दूर नहीं कर लेता, वरन हमारा परमेश्वर पिता हमारे और समीप आ जाता है, हमें शांति और सांत्वना देता है। वह अपने बच्चों की प्रार्थनाओं का उत्तर देने के लिए कभी ’अति-व्यस्त’ नहीं होता - वह सुनते ही उत्तर देता है। - बिल क्राउडर


परमेश्वर की प्रार्थना लाइन पर ’व्यस्त’ होने का संकेत आपको कभी नहीं मिलेगा।

यहोवा टूटे मन वालों के समीप रहता है, और पिसे हुओं का उद्धार करता है। - भजन 34:18

बाइबल पाठ: भजन 145:8-21
Psalms 145:8 यहोवा अनुग्रहकारी और दयालु, विलम्ब से क्रोध करने वाला और अति करूणामय है। 
Psalms 145:9 यहोवा सभों के लिये भला है, और उसकी दया उसकी सारी सृष्टि पर है।
Psalms 145:10 हे यहोवा, तेरी सारी सृष्टि तेरा धन्यवाद करेगी, और तेरे भक्त लोग तुझे धन्य कहा करेंगे! 
Psalms 145:11 वे तेरे राज्य की महिमा की चर्चा करेंगे, और तेरे पराक्रम के विषय में बातें करेंगे; 
Psalms 145:12 कि वे आदमियों पर तेरे पराक्रम के काम और तेरे राज्य के प्रताप की महिमा प्रगट करें। 
Psalms 145:13 तेरा राज्य युग युग का और तेरी प्रभुता सब पीढ़ियों तक बनी रहेगी।
Psalms 145:14 यहोवा सब गिरते हुओं को संभालता है, और सब झुके हुओं को सीधा खड़ा करता है। 
Psalms 145:15 सभों की आंखें तेरी ओर लगी रहती हैं, और तू उन को आहार समय पर देता है। 
Psalms 145:16 तू अपनी मुट्ठी खोल कर, सब प्राणियों को आहार से तृप्त करता है। 
Psalms 145:17 यहोवा अपनी सब गति में धर्मी और अपने सब कामों में करूणामय है। 
Psalms 145:18 जितने यहोवा को पुकारते हैं, अर्थात जितने उसको सच्चाई से पुकारते हें; उन सभों के वह निकट रहता है। 
Psalms 145:19 वह अपने डरवैयों की इच्छा पूरी करता है, ओर उनकी दोहाई सुन कर उनका उद्धार करता है। 
Psalms 145:20 यहोवा अपने सब प्रेमियों की तो रक्षा करता, परन्तु सब दुष्टों को सत्यानाश करता है।
Psalms 145:21 मैं यहोवा की स्तुति करूंगा, और सारे प्राणी उसके पवित्र नाम को सदा सर्वदा धन्य कहते रहें।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 42-44 
  • 1 यूहन्ना 1


रविवार, 1 दिसंबर 2013

आगमन विषय


   मैं मानती हूँ कि परमेश्वर के वचन बाइबल का हर भाग परस्पर संबंधित है और समस्त पवित्र-शास्त्र प्रासंगिक तथा महत्वपूर्ण है। लेकिन फिर भी मुझे अचरज हुआ जब नवंबर माह के मेरे बाइबल पाठ में पतरस प्रेरित द्वारा लिखित प्रथम पत्री में से मैंने पाया कि प्रभु यीशु के आगमन से संबंधित चारों विषयों के बारे में पतरस ने एक ही पत्री में एक साथ ही लिखा है। दिसंबर माह से लोग प्रभु यीशु के पहले आगमन - उस पहले क्रिसमस कि यादें ताज़ा करने की तैयारी में लग जाते हैं और साथ ही उसके दूसरे आगमन की भविष्यवाणी को भी स्मरण करते हैं। आगमन के स्मरण का यह समय होता है परमेश्वर द्वारा प्रभु यीशु में होकर संसार के लिए भेजी गई आशा, आनन्द, प्रेम और शांति पर ध्यान करना।

   प्रेरित पतरस की प्रथम पत्री में हम प्रभु यीशु के आगमन से संबंधित इन चारों विषयों को भी पाते हैं
  • आशा: स्वर्ग में हम मसीही विश्वासियों की अजर मीरास सुरक्षित है, जो मसीह यीशु के पुनरुत्थान के द्वारा है (1 पतरस 1:3-5)।
  • आनन्द: मसीही विश्वासियों के पास एक अवर्णनीय आनन्द है, चाहे उनका विश्वास क्लेषों द्वारा परखा भी जाए, लेकिन उस विश्वास का अन्त आत्माओं का उद्धार है (1 पतरस 1:6-9) जो अन्य किसी रीति से कतई संभव नहीं है, और जिस उद्धार का प्रतिफल यह अवर्णनीय आनन्द है।
  • प्रेम: मसीही विश्वासी एक शुद्ध हृदय से सभी लोगों के साथ प्रेम कर सकते हैं, क्योंकि उन्होंने परमेश्वर के वचन पर विश्वास द्वारा एक नया जन्म पाया है और परमेश्वर का यह वचन अब उनमें बसा रहता है, उनके स्वभाव और दृष्टिकोण को सांसारिक से परिवर्तित कर के स्वर्गीय बना देता है (1 पतरस 1:22-23)।
  • शांति: क्योंकि परमेश्वर अपने लोगों पर ध्यान बनाए रखता है, उनकी प्रार्थनाएं सुनता है, इसलिए मसीही विश्वासियों के जीवन में परमेश्वर की शांति बनी रहती है (1 पतरस 3:10-12)।

   मसीह यीशु के प्रथम आगमन के कारण, जितने उस पर विश्वास लाते हैं, वे सब उसके दुसरे आगमन तक आशा, आनन्द, प्रेम और शांति के साथ जीवन व्यतीत कर सकते हैं। - जूली ऐकैरमैन लिंक


यदि आप आशा, आनन्द, प्रेम और शांति के खोजी हैं तो प्रभु यीशु के पास आईए।

इस कारण अपनी अपनी बुद्धि की कमर बान्‍धकर, और सचेत रहकर उस अनुग्रह की पूरी आशा रखो, जो यीशु मसीह के प्रगट होने के समय तुम्हें मिलने वाला है। - 1 पतरस 1:13

बाइबल पाठ: 1 पतरस 1:3-9, 18-23; 3:10-12
1 Peter 1:3 हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर और पिता का धन्यवाद दो, जिसने यीशु मसीह के हुओं में से जी उठने के द्वारा, अपनी बड़ी दया से हमें जीवित आशा के लिये नया जन्म दिया। 
1 Peter 1:4 अर्थात एक अविनाशी और निर्मल, और अजर मीरास के लिये। 
1 Peter 1:5 जो तुम्हारे लिये स्वर्ग में रखी है, जिन की रक्षा परमेश्वर की सामर्थ से, विश्वास के द्वारा उस उद्धार के लिये, जो आने वाले समय में प्रगट होने वाली है, की जाती है। 
1 Peter 1:6 और इस कारण तुम मगन होते हो, यद्यपि अवश्य है कि अब कुछ दिन तक नाना प्रकार की परीक्षाओं के कारण उदास हो। 
1 Peter 1:7 और यह इसलिये है कि तुम्हारा परखा हुआ विश्वास, जो आग से ताए हुए नाशमान सोने से भी कहीं, अधिक बहुमूल्य है, यीशु मसीह के प्रगट होने पर प्रशंसा, और महिमा, और आदर का कारण ठहरे। 
1 Peter 1:8 उस से तुम बिन देखे प्रेम रखते हो, और अब तो उस पर बिन देखे भी विश्वास कर के ऐसे आनन्‍दित और मगन होते हो, जो वर्णन से बाहर और महिमा से भरा हुआ है। 
1 Peter 1:9 और अपने विश्वास का प्रतिफल अर्थात आत्माओं का उद्धार प्राप्त करते हो। 
1 Peter 1:18 क्योंकि तुम जानते हो, कि तुम्हारा निकम्मा चाल-चलन जो बाप दादों से चला आता है उस से तुम्हारा छुटकारा चान्दी सोने अर्थात नाशमान वस्‍तुओं के द्वारा नहीं हुआ। 
1 Peter 1:19 पर निर्दोष और निष्‍कलंक मेम्ने अर्थात मसीह के बहुमूल्य लोहू के द्वारा हुआ। 
1 Peter 1:20 उसका ज्ञान तो जगत की उत्‍पत्ति के पहिले ही से जाना गया था, पर अब इस अन्‍तिम युग में तुम्हारे लिये प्रगट हुआ। 
1 Peter 1:21 जो उसके द्वारा उस परमेश्वर पर विश्वास करते हो, जिसने उसे मरे हुओं में से जिलाया, और महिमा दी; कि तुम्हारा विश्वास और आशा परमेश्वर पर हो। 
1 Peter 1:22 सो जब कि तुम ने भाईचारे की निष्‍कपट प्रीति के निमित्त सत्य के मानने से अपने मनों को पवित्र किया है, तो तन मन लगा कर एक दूसरे से अधिक प्रेम रखो। 
1 Peter 1:23 क्योंकि तुम ने नाशमान नहीं पर अविनाशी बीज से परमेश्वर के जीवते और सदा ठहरने वाले वचन के द्वारा नया जन्म पाया है। 
1 Peter 3:8 निदान, सब के सब एक मन और कृपामय और भाईचारे की प्रीति रखने वाले, और करूणामय, और नम्र बनो। 
1 Peter 3:9 बुराई के बदले बुराई मत करो; और न गाली के बदले गाली दो; पर इस के विपरीत आशीष ही दो: क्योंकि तुम आशीष के वारिस होने के लिये बुलाए गए हो। 
1 Peter 3:10 क्योंकि जो कोई जीवन की इच्छा रखता है, और अच्‍छे दिन देखना चाहता है, वह अपनी जीभ को बुराई से, और अपने होंठों को छल की बातें करने से रोके रहे। 
1 Peter 3:11 वह बुराई का साथ छोड़े, और भलाई ही करे; वह मेल मिलाप को ढूंढ़े, और उस के यत्‍न में रहे। 
1 Peter 3:12 क्योंकि प्रभु की आंखे धर्मियों पर लगी रहती हैं, और उसके कान उन की बिनती की ओर लगे रहते हैं, परन्तु प्रभु बुराई करने वालों के विमुख रहता है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 40-41 
  • 2 पतरस 3


शनिवार, 30 नवंबर 2013

कार्य के परिणाम


   नवम्बर 24, 1971 को एक व्यक्ति, जिसे आज डी. बी. कूपर के नाम से जाना जाता है, ने एक वायुयान का अपहरण किया और धमकी दी कि यदि उसे 200,000 अमिरीकी डॉलर नहीं दिए गए तो वह वायुयान को उड़ा देगा। इस रकम को प्राप्त करने के लिए वायुयान को एक हवाई अड्डे पर उतारा गया, और फिर रकम लेकर कूपर ने पुनः वायुयान को ऊपर हवा में ले जाने को कहा। वायुयान के ऊपर जाने के बाद उसने पिछले दरवाज़े को खुलवाया और रकम लेकर पैराशूट से रात्रि के अन्धकार में कूद गया। इसके बाद उसका कभी कोई अता-पता नहीं चला, वह पकड़ा नहीं गया और आज तक यह गुत्थी अनसुल्झी ही है। लेकिन उस व्यक्ति के एक कार्य के परिणाम हम सब को झेलने पड़ रहे हैं, क्योंकि उस के इस कार्य के बाद हवाई अड्डों पर लोगों पर विश्वास करने का दौर समाप्त हो गया, उसके स्थान पर अविश्वास तथा भय आ गया और सुरक्षा बढ़ा दी गई, जिसके कारण आज हम सब को यात्रा आरंभ होने से लंबा समय पहले आकर सुरक्षा जाँच आदि करवाना होता है और अनेक प्रकार कि असुविधा का सामना करना पड़ता है।

   परमेश्वर का वचन बाइबल भी दो ऐसे कार्यों का विवरण देती है जिनके परिणामों ने संसार को उपरोक्त घटना से भी कहीं अधिक प्रभावी रीति से बदल डाला। पहली घटना थी हमारे आदि माता-पिता, आदम और हव्वा द्वारा परमेश्वर की अवज्ञा का निर्णय जिसके कारण पाप और मृत्यु ने इस संसार में प्रवेश किया, "इसलिये जैसा एक मनुष्य के द्वारा पाप जगत में आया, और पाप के द्वारा मृत्यु आई, और इस रीति से मृत्यु सब मनुष्यों में फैल गई, इसलिये कि सब ने पाप किया" (रोमियों 5:12)। दूसरी घटना थी प्रभु यीशु द्वारा इस पाप के प्रभाव के समाधान के लिए अपना जीवन बलिदान करना और फिर मृतकों में से जी उठना, "इसलिये जैसा एक अपराध सब मनुष्यों के लिये दण्ड की आज्ञा का कारण हुआ, वैसा ही एक धर्म का काम भी सब मनुष्यों के लिये जीवन के निमित धर्मी ठहराए जाने का कारण हुआ" (रोमियों 5:18)।

   जो प्रभु यीशु ने अपने बलिदान तथा फिर मृतकों में से पुनरुत्थान के द्वारा मानव जाति के लिए किया, समस्त संसार के इतिहास में वह अन्य कोई भी, कभी भी, कहीं भी नहीं कर सका है। आज प्रभु यीशु अपने अनुग्रह में होकर समस्त मानव जाति को पापों की क्षमा और अनन्त जीवन का उपहार सेंत-मेंत देने को तैयार है, यदि वे इस उपहार को स्वीकार करने को तैयार हों, "परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं" (यूहन्ना 1:12)।

   क्या आपने प्रभु यीशु के कार्य के परिणाम को अपना लिया है? यदि नहीं, तो अभी अवसर है, अपना लीजिए और अनन्त जीवन के भागी हो जाईए। - डेविड माइक्कैसलैंड


आदम की अनाज्ञाकारिता के परिणाम का समाधान क्रूस पर संपन्न मसीह यीशु की आज्ञाकारिता का कार्य है।

पर जैसा अपराध की दशा है, वैसी अनुग्रह के वरदान की नहीं, क्योंकि जब एक मनुष्य के अपराध से बहुत लोग मरे, तो परमेश्वर का अनुग्रह और उसका जो दान एक मनुष्य के, अर्थात यीशु मसीह के अनुग्रह से हुआ बहुतेरे लागों पर अवश्य ही अधिकाई से हुआ। - रोमियों 5:15

बाइबल पाठ: रोमियों 5:12-19
Romans 5:12 इसलिये जैसा एक मनुष्य के द्वारा पाप जगत में आया, और पाप के द्वारा मृत्यु आई, और इस रीति से मृत्यु सब मनुष्यों में फैल गई, इसलिये कि सब ने पाप किया। 
Romans 5:13 क्योंकि व्यवस्था के दिए जाने तक पाप जगत में तो था, परन्तु जहां व्यवस्था नहीं, वहां पाप गिना नहीं जाता। 
Romans 5:14 तौभी आदम से ले कर मूसा तक मृत्यु ने उन लोगों पर भी राज्य किया, जिन्हों ने उस आदम के अपराध की नाईं जो उस आने वाले का चिन्ह है, पाप न किया। 
Romans 5:15 पर जैसा अपराध की दशा है, वैसी अनुग्रह के वरदान की नहीं, क्योंकि जब एक मनुष्य के अपराध से बहुत लोग मरे, तो परमेश्वर का अनुग्रह और उसका जो दान एक मनुष्य के, अर्थात यीशु मसीह के अनुग्रह से हुआ बहुतेरे लागों पर अवश्य ही अधिकाई से हुआ। 
Romans 5:16 और जैसा एक मनुष्य के पाप करने का फल हुआ, वैसा ही दान की दशा नहीं, क्योंकि एक ही के कारण दण्ड की आज्ञा का फैसला हुआ, परन्तु बहुतेरे अपराधों से ऐसा वरदान उत्पन्न हुआ, कि लोग धर्मी ठहरे। 
Romans 5:17 क्योंकि जब एक मनुष्य के अपराध के कराण मृत्यु ने उस एक ही के द्वारा राज्य किया, तो जो लोग अनुग्रह और धर्म रूपी वरदान बहुतायत से पाते हैं वे एक मनुष्य के, अर्थात यीशु मसीह के द्वारा अवश्य ही अनन्त जीवन में राज्य करेंगे। 
Romans 5:18 इसलिये जैसा एक अपराध सब मनुष्यों के लिये दण्ड की आज्ञा का कारण हुआ, वैसा ही एक धर्म का काम भी सब मनुष्यों के लिये जीवन के निमित धर्मी ठहराए जाने का कारण हुआ। 
Romans 5:19 क्योंकि जैसा एक मनुष्य के आज्ञा न मानने से बहुत लोग पापी ठहरे, वैसे ही एक मनुष्य के आज्ञा मानने से बहुत लोग धर्मी ठहरेंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 37-39 
  • 2 पतरस 2


शुक्रवार, 29 नवंबर 2013

आदर


   मेरे पिताजी हाल ही में 90 वर्ष के हो गए और अब उनकी शारीरिक क्षमताएं कम होती जा रही हैं। उन्हें चलने के लिए वॉकर का सहारा लेना पड़ता है, और अपने भोजन तथा अन्य कार्यों के लिए किसी की सहायता की आवश्यकता पड़ती है। मेरे बड़े भाई स्टीव और उनकी पत्नि जूडी पिताजी के घर के समीप ही रहते थे, इसलिए उन्होंने निर्णय लिया कि वे अब पिताजी के साथ ही उनके घर में रहेंगे और उनकी देखभाल करेंगे।

   मैं भी अपने पिताजी की देखभाल में हाथ बंटाना चाहता हूँ, लेकिन मैं अपने परिवार के साथ देश के दूसरे छोर पर रहता हूँ, इसलिए मैंने और मेरी पत्नि ने कुछ समय का अवकाश लिया और पिताजी के पास आकर उनके साथ रहने लगे, तथा स्टीव और उसकी पत्नि जूडी को भी कुछ समय के लिए कहीं छुट्टी पर जाने को कहा। हमने पिताजी के साथ अच्छा वक्त बिताया और चाहे थोड़े ही दिन के लिए सही, लेकिन पिताजी की देखभाल और स्टीव तथा जूडी की सहायता करना हमें अच्छा लगा।

   परमेश्वर का वचन बाइबल हमें सिखाती है कि, "अपनी माता और पिता का आदर कर (यह पहिली आज्ञा है, जिस के साथ प्रतिज्ञा भी है)" (इफिसियों 6:2)। इस पद पर टिप्पणी करते हुए एक टीकाकार ने लिखा, किसी का आदर करने से तात्पर्य है कि, "उसके साथ सम्मान, आदर, श्रद्धा, दयालुता, शिष्टाचार और आज्ञाकारिता के साथ ऐसा पेश आना जो उसके जीवन की अवस्था के अनुसार है।"

   छोटे बच्चों के लिए इसका अर्थ है, माता-पिता के आज्ञाकारी होना; युवकों के लिए यह दिखाता है कि माता-पिता का आदर करें चाहे उन्हें यह लगे कि वे माता-पिता से अधिक जानते हैं। जवान लोगों के लिए यह माता-पिता को अपने जीवन का अंग बनाए रखने की बुलाहट है और अधेड़ या उससे अधिक उम्र वालों के लिए यह इस बात का ध्यान करने की बात है कि माता-पिता की उम्र भी बढ़ रही है, तथा स्वास्थ्य घट रहा है और उन्हें सहायता तथा देखभाल की आवश्यकता है।

   विचार कीजिए, क्या आप अपनी व्यस्त दिनचर्या में अपने माता-पिता को यथोचित समय तथा आदर देते हैं? - डेनिस फिशर


माता-पिता का आदर करने के लिए उम्र कोई सीमा नहीं है।

शापित हो वह जो अपने पिता वा माता को तुच्छ जाने। तब सब लोग कहें, आमीन। - व्यवस्थाविवरण 27:16

बाइबल पाठ: निर्गमन 20:1-17
Exodus 20:1 तब परमेश्वर ने ये सब वचन कहे, 
Exodus 20:2 कि मैं तेरा परमेश्वर यहोवा हूं, जो तुझे दासत्व के घर अर्थात मिस्र देश से निकाल लाया है।
Exodus 20:3 तू मुझे छोड़ दूसरों को ईश्वर कर के न मानना।
Exodus 20:4 तू अपने लिये कोई मूर्ति खोदकर न बनाना, न किसी की प्रतिमा बनाना, जो आकाश में, वा पृथ्वी पर, वा पृथ्वी के जल में है। 
Exodus 20:5 तू उन को दण्डवत न करना, और न उनकी उपासना करना; क्योंकि मैं तेरा परमेश्वर यहोवा जलन रखने वाला ईश्वर हूं, और जो मुझ से बैर रखते है, उनके बेटों, पोतों, और परपोतों को भी पितरों का दण्ड दिया करता हूं, 
Exodus 20:6 और जो मुझ से प्रेम रखते और मेरी आज्ञाओं को मानते हैं, उन हजारों पर करूणा किया करता हूं।
Exodus 20:7 तू अपने परमेश्वर का नाम व्यर्थ न लेना; क्योंकि जो यहोवा का नाम व्यर्थ ले वह उसको निर्दोष न ठहराएगा।
Exodus 20:8 तू विश्रामदिन को पवित्र मानने के लिये स्मरण रखना। 
Exodus 20:9 छ: दिन तो तू परिश्रम कर के अपना सब काम काज करना; 
Exodus 20:10 परन्तु सातवां दिन तेरे परमेश्वर यहोवा के लिये विश्रामदिन है। उस में न तो तू किसी भांति का काम काज करना, और न तेरा बेटा, न तेरी बेटी, न तेरा दास, न तेरी दासी, न तेरे पशु, न कोई परदेशी जो तेरे फाटकों के भीतर हो। 
Exodus 20:11 क्योंकि छ: दिन में यहोवा ने आकाश, और पृथ्वी, और समुद्र, और जो कुछ उन में है, सब को बनाया, और सातवें दिन विश्राम किया; इस कारण यहोवा ने विश्रामदिन को आशीष दी और उसको पवित्र ठहराया।
Exodus 20:12 तू अपने पिता और अपनी माता का आदर करना, जिस से जो देश तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे देता है उस में तू बहुत दिन तक रहने पाए।
Exodus 20:13 तू खून न करना।
Exodus 20:14 तू व्यभिचार न करना।
Exodus 20:15 तू चोरी न करना।
Exodus 20:16 तू किसी के विरुद्ध झूठी साक्षी न देना।
Exodus 20:17 तू किसी के घर का लालच न करना; न तो किसी की स्त्री का लालच करना, और न किसी के दास-दासी, वा बैल गदहे का, न किसी की किसी वस्तु का लालच करना।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 35-36 
  • 2 पतरस 1


गुरुवार, 28 नवंबर 2013

क्षमा दान


   प्रतिवर्ष, नवम्बर माह के अन्त में अमेरिका के राष्ट्रपति एक प्रथा के अन्तर्गत, ’राष्ट्रीय धन्यवादी टर्की’ को क्षमा दान प्रदान करते हैं। इस विनोदात्मक रस्म को पूरा करते समय एक राष्ट्रपति ने क्षमा दान पाने वाली उस टर्की के विषय में चुटकी ली: "हमारे सम्मनित अतिथि कुछ घबराए हुए से प्रतीत हो रहे हैं; शायद किसी ने इन से कहा नहीं है कि मैं इन्हें आज क्षमा करने जा रहा हूँ!" बेचारी उस टर्की के लिए वास्तव में घबराने की बात तो थी ही, क्योंकि यदि वह क्षमा नहीं पाती तो मारी जाती और रात्रि के धन्यवादी भोज के लिए पकाने को दे दी जाती।

   ऐसी ही परिस्थिति हमारे पापों के कारण हम मनुष्यों पर भी लागू है। परमेश्वर का वचन बाइबल बताती है कि, "इसलिये कि सब ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं" (रोमियों 3:23); इसलिए यदि हम परमेश्वर से पापों के लिए क्षमा दान प्राप्त नहीं करेंगे तो हमारे पापों के कारण हमारा विनाश तय है। लेकिन परमेश्वर ने समस्त मानव जाति के लिए सेंत-मेंत यह क्षमा दान पाने का उपाय किया है - उसने सभी मनुष्यों के पापों के लिए अपने पुत्र प्रभु यीशु मसीह को बलिदान हो जाने दिया, जिसने अपनी मृत्यु से सब के पापों के लिए दण्ड सह लिया है। अब जो कोई साधारण विश्वास के साथ प्रभु यीशु के इस बलिदान को स्वीकार कर लेता है, उससे अपने पापों की क्षमा माँग कर अपना जीवन उसे समर्पित कर देता है, वह परमेश्वर के क्षमा दान को पा लेता है और अनन्त जीवन में प्रवेश कर जाता है, क्योंकि प्रभु यीशु का लहू हमें सब पापों से शुद्ध करता है (1 यूहन्ना 1:7)।

   पापों से क्षमा पाने के लिए किसी को स्वयं कोई प्रयास या प्रायश्चित करने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि परमेश्वर ने अपने महान अनुग्रह में सब के लिए उपाय कर के दे दिया है, आवश्यकता है केवल परमेश्वर के उपाय को स्वीकार करने और उस पर विश्वास करने की। क्या आज आपको अपने पापों का बोध और उनके भयानक परिणाम का एहसास है? क्या आप उस परिणाम को लेकर चिंतित हैं? प्रभु यीशु पर विश्वास कीजिए और अपने पापों का बोझ उसे सौंप दीजिए, और उससे उनका क्षमा दान प्राप्त कर लीजिए - वह कभी किसी को इन्कार नहीं करता। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


मसीह यीशु पर विश्वास द्वारा हम परमेश्वर का क्षमा दान पाते हैं और पापों के दण्ड से बच जाते हैं।

सो अब जो मसीह यीशु में हैं, उन पर दण्ड की आज्ञा नहीं: क्योंकि वे शरीर के अनुसार नहीं वरन आत्मा के अनुसार चलते हैं। - रोमियों 8:1

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 1:1-10
1 John 1:1 उस जीवन के वचन के विषय में जो आदि से था, जिसे हम ने सुना, और जिसे अपनी आंखों से देखा, वरन जिसे हम ने ध्यान से देखा; और हाथों से छूआ। 
1 John 1:2 (यह जीवन प्रगट हुआ, और हम ने उसे देखा, और उस की गवाही देते हैं, और तुम्हें उस अनन्त जीवन का समाचार देते हैं, जो पिता के साथ था, और हम पर प्रगट हुआ)।
1 John 1:3 जो कुछ हम ने देखा और सुना है उसका समाचार तुम्हें भी देते हैं, इसलिये कि तुम भी हमारे साथ सहभागी हो; और हमारी यह सहभागिता पिता के साथ, और उसके पुत्र यीशु मसीह के साथ है। 
1 John 1:4 और ये बातें हम इसलिये लिखते हैं, कि हमारा आनन्द पूरा हो जाए।
1 John 1:5 जो समाचार हम ने उस से सुना, और तुम्हें सुनाते हैं, वह यह है; कि परमेश्वर ज्योति है: और उस में कुछ भी अन्धकार नहीं। 
1 John 1:6 यदि हम कहें, कि उसके साथ हमारी सहभागिता है, और फिर अन्धकार में चलें, तो हम झूठे हैं: और सत्य पर नहीं चलते। 
1 John 1:7 पर यदि जैसा वह ज्योति में है, वैसे ही हम भी ज्योति में चलें, तो एक दूसरे से सहभागिता रखते हैं; और उसके पुत्र यीशु का लोहू हमें सब पापों से शुद्ध करता है। 
1 John 1:8 यदि हम कहें, कि हम में कुछ भी पाप नहीं, तो अपने आप को धोखा देते हैं: और हम में सत्य नहीं। 
1 John 1:9 यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है। 
1 John 1:10 यदि कहें कि हम ने पाप नहीं किया, तो उसे झूठा ठहराते हैं, और उसका वचन हम में नहीं है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 33-34 
  • 1 पतरस 5


बुधवार, 27 नवंबर 2013

दीन और दरिद्र


   किसी ना किसी रीति से हम सभी भजन 86:1 से सहमत हो सकते हैं, जहाँ दाऊद ने कहा, "हे यहोवा कान लगा कर मेरी सुन ले, क्योंकि मैं दीन और दरिद्र हूं"। हम में से सबसे धनी व्यक्ति को भी यह समझ लेना चाहिए कि दरिद्र एवं आवश्यकता में होने का संबंध बटुए से नहीं आत्मा से है। जब रिच डि वोस नामक अरबपति व्यक्ति लोगों के साथ बातचीत करता है, तो उनसे यही कहता है कि "मैं मात्र एक पापी हूँ जो परमेश्वर के अनुग्रह से बचाया गया है।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 86 हमें यह सिखाता है कि जो सहायता परमेश्वर से मिलती है वह किसी आर्थिक बही-खाते के आंकड़ों से मापी नहीं जा सकती। जब हम परमेश्वर के सामने इस बात को मान लेते हैं कि हम दीन और दरिद्र हैं तो इसका यह तात्पर्य नहीं है कि परमेश्वर हमें सांसारिक धन-दौलत से भर देगा। नहीं, हमारा परमेश्वर के सम्मुख स्वीकार करना कि हम दीन और दरिद्र हैं इसलिए होना चाहिए कि वह हमें संसार की दौलत से भी अधिक महत्वपूर्ण और मूल्यवान खज़ानों से भर दे।

   जो परमेश्वर के सम्मुख सच्चे मन से दीन और दरिद्र होते हैं, उस पर भरोसा रखते हैं, परमेश्वर उन की रक्षा करता है, उन्हें बचाता है (पद 2); उन पर अनुग्रह करता है, उन्हें क्षमा करता है (पद 3, 5); वह उनकी सुनता है और उनकी प्रार्थनाओं के उत्तर देता है (पद 6-7)।

   लेकिन परमेश्वर से मिलने वाली इन आशीषों को हमें केवल लेते रहने वाले नहीं बनना है, वरन कुछ लौटा कर भी देना है। परमेश्वर की आशीषें पा लेने के बाद हमारी ज़िम्मेदारी हो जाती है कि हम परमेश्वर के मार्गों को सीखें, उसके सत्य पर चलें, उसके नाम का भय मानें, उसके नाम का गुणगान और महिमा करें (पद 11-12)।

   यदि आप भी अपने आप को ऐसा दीन और दरिद्र मानते हैं तो आपका परमेश्वर के लोगों के समूह में स्वागत है। परमेश्वर द्वारा दी जाने वाली आशीषों को ना भूलें और ना ही उसके इस अनुग्रह और उदारता के कारण आप पर आने वाली ज़िम्मेदारियों को नज़रंदाज़ करें। - डेव ब्रैनन


सबसे दरिद्र वह है जिसकी दौलत केवल सांसारिक धन ही है।

हे यहोवा कान लगा कर मेरी सुन ले, क्योंकि मैं दीन और दरिद्र हूं। - भजन 86:1

बाइबल पाठ: भजन 86
Psalms 86:1 हे यहोवा कान लगा कर मेरी सुन ले, क्योंकि मैं दीन और दरिद्र हूं। 
Psalms 86:2 मेरे प्राण की रक्षा कर, क्योंकि मैं भक्त हूं; तू मेरा परमेश्वर है, इसलिये अपने दास का, जिसका भरोसा तुझ पर है, उद्धार कर। 
Psalms 86:3 हे प्रभु मुझ पर अनुग्रह कर, क्योंकि मैं तुझी को लगातार पुकारता रहता हूं। 
Psalms 86:4 अपने दास के मन को आनन्दित कर, क्योंकि हे प्रभु, मैं अपना मन तेरी ही ओर लगाता हूं। 
Psalms 86:5 क्योंकि हे प्रभु, तू भला और क्षमा करने वाला है, और जितने तुझे पुकारते हैं उन सभों के लिये तू अति करूणामय है। 
Psalms 86:6 हे यहोवा मेरी प्रार्थना की ओर कान लगा, और मेरे गिड़गिड़ाने को ध्यान से सुन। 
Psalms 86:7 संकट के दिन मैं तुझ को पुकारूंगा, क्योंकि तू मेरी सुन लेगा।
Psalms 86:8 हे प्रभु देवताओं में से कोई भी तेरे तुल्य नहीं, और ने किसी के काम तेरे कामों के बराबर हैं। 
Psalms 86:9 हे प्रभु जितनी जातियों को तू ने बनाया है, सब आ कर तेरे साम्हने दण्डवत करेंगी, और तेरे नाम की महिमा करेंगी। 
Psalms 86:10 क्योंकि तू महान और आश्चर्य कर्म करने वाला है, केवल तू ही परमेश्वर है। 
Psalms 86:11 हे यहोवा अपना मार्ग मुझे दिखा, तब मैं तेरे सत्य मार्ग पर चलूंगा, मुझ को एक चित्त कर कि मैं तेरे नाम का भय मानूं। 
Psalms 86:12 हे प्रभु हे मेरे परमेश्वर मैं अपने सम्पूर्ण मन से तेरा धन्यवाद करूंगा, और तेरे नाम की महिमा सदा करता रहूंगा। 
Psalms 86:13 क्योंकि तेरी करूणा मेरे ऊपर बड़ी है; और तू ने मुझ को अधोलोक की तह में जाने से बचा लिया है। 
Psalms 86:14 हे परमेश्वर अभिमानी लोग तो मेरे विरुद्ध उठे हैं, और बलात्कारियों का समाज मेरे प्राण का खोजी हुआ है, और वे तेरा कुछ विचार नहीं रखते। 
Psalms 86:15 परन्तु प्रभु तू दयालु और अनुग्रहकारी ईश्वर है, तू विलम्ब से कोप करने वाला और अति करूणामय है। 
Psalms 86:16 मेरी ओर फिर कर मुझ पर अनुग्रह कर; अपने दास को तू शक्ति दे, और अपनी दासी के पुत्र का उद्धार कर। 
Psalms 86:17 मुझे भलाई का कोई लक्षण दिखा, जिसे देख कर मेरे बैरी निराश हों, क्योंकि हे यहोवा तू ने आप मेरी सहायता की और मुझे शान्ति दी है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 30-32 
  • 1 पतरस 4