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बुधवार, 7 अप्रैल 2021

नम्र

 

          एक शनिवार की दोपहर को मेरे चर्च के युवा समूह के कुछ सदस्य एक दूसरे से फिलिप्पियों 2:3-4 “विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो। हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्ता करे” पर आधारित कुछ कठिन प्रश्न पूछने के लिए एकत्रित हुए। उनके द्वारा पूछे गए उन कठिन प्रश्नों में से कुछ थे: औरों में आप कितनी बार रुचि लेते हैं? कोई आपको क्या कहेगा – नम्र या घमण्डी; और क्यों? आदि। उनकी बातें सुनते हुए मैं उनके ईमानदार उत्तरों से प्रभावित हुई। वे किशोर इस बात से सहमत थे कि अपनी कमियों को स्वीकार कर लेना तो सहज है, किन्तु बदलना, या फिर, बदलने की इच्छा भी रखना, बहुत कठिन होता है। एक किशोर ने बड़े खेदित भाव से यह भी कहा, “स्वार्थी होना तो मेरे खून में है।”

          अपने ही ऊपर ध्यान केन्द्रित किए रहने के स्थान पर औरों की सेवा करने पर ध्यान लगाना केवल हम में निवास करने वाले प्रभु यीशु के आत्मा के द्वारा ही संभव है। इसीलिए, परमेश्वर के वचन बाइबल में, पौलुस प्रेरित ने भी यही बात फिलिप्पी की मसीही मण्डली को समझाई कि वे उन बातों पर ध्यान लगाएँ जो परमेश्वर ने उनके लिए की हैं, तथा संभव कर के दी हैं। परमेश्वर ने अपने बड़े अनुग्रह में उन्हें गोद ले लिया, अपने प्रेम से उन्हें सांत्वना दी, और सदा उनकी सहायता करते रहने के लिए उन्हें अपना पवित्र आत्मा दिया है (फिलिप्पियों 2:1-2)। और परमेश्वर ने यह न केवल फिलिप्पी के उन मसीही विश्वासियों के लिए किया, वरन संसार के प्रत्येक मसीही विश्वासी के लिए किया है। तो फिर ऐसे अनुग्रह के प्रति कोई भी मसीही विश्वासी सिवाए स्वभाव में विनम्र और व्यवहार में दीन हो जाने के और कोई भी प्रत्युत्तर कैसे दे सकता है?

          जी हाँ; परमेश्वर ही हमारे लिए बदल जाने का कारण है, और केवल वह ही हमें बदल सकता है: “क्योंकि परमेश्वर ही है, जिस न अपनी सुइच्‍छा निमित्त तुम्हारे मन में इच्छा और काम, दोनों बातों के करने का प्रभाव डाला है” (फिलिप्पियों 2:13)। जब हम इन बातों पर ध्यान लगाए रखते हैं, तब हम अपने ध्यान को अपने ऊपर कम और दूसरों की सेवा करने के लिए नम्र होने पर अधिक लगा सकते हैं। - पोह फेंग चिया

 

विनम्रता के साथ परमेश्वर की इच्छा को समर्पित हो जाना हमारी ज़िम्मेदारी है।


इसलिये परमेश्वर के चुने हुओं के समान जो पवित्र और प्रिय हैं, बड़ी करुणा, और भलाई, और दीनता, और नम्रता, और सहनशीलता धारण करो। और यदि किसी को किसी पर दोष देने को कोई कारण हो, तो एक दूसरे की सह लो, और एक दूसरे के अपराध क्षमा करो: जैसे प्रभु ने तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी करो। - कुलुस्सियों 3:12-13

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 2:1-11

फिलिप्पियों 2:1 सो यदि मसीह में कुछ शान्ति और प्रेम से ढाढ़स और आत्मा की सहभागिता, और कुछ करुणा और दया है।

फिलिप्पियों 2:2 तो मेरा यह आनन्द पूरा करो कि एक मन रहो और एक ही प्रेम, एक ही चित्त, और एक ही मनसा रखो।

फिलिप्पियों 2:3 विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो।

फिलिप्पियों 2:4 हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्ता करे।

फिलिप्पियों 2:5 जैसा मसीह यीशु का स्वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्वभाव हो।

फिलिप्पियों 2:6 जिसने परमेश्वर के स्वरूप में हो कर भी परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्तु न समझा।

फिलिप्पियों 2:7 वरन अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया।

फिलिप्पियों 2:8 और मनुष्य के रूप में प्रगट हो कर अपने आप को दीन किया, और यहां तक आज्ञाकारी रहा, कि मृत्यु, हां, क्रूस की मृत्यु भी सह ली।

फिलिप्पियों 2:9 इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्ठ है।

फिलिप्पियों 2:10 कि जो स्वर्ग में और पृथ्वी पर और जो पृथ्वी के नीचे है; वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें।

फिलिप्पियों 2:11 और परमेश्वर पिता की महिमा के लिये हर एक जीभ अंगीकार कर ले कि यीशु मसीह ही प्रभु है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • 1 शमूएल 7-9
  • लूका 9:18-36

शुक्रवार, 25 दिसंबर 2020

शान्ति

 

          सर्दियों में मैं अकसर जब सुबह उठती हूँ तो मेरे आस-पास का संसार, रात में पड़ी हुई बर्फ से ढका हुआ, शांत और शान्ति के साथ होता है। वह बर्फ बहुत शान्ति से रात में किसी समय गिर चुकी होती है; जबकि बसंत की आँधियाँ शोर और गर्जन के साथ पानी बरसाती हैं।

          ऑड्रे अस्सद ने “Winter Snow Song” में गाया कि प्रभु यीशु पृथ्वी पर बवंडर के समान सामर्थ्य प्रदर्शित करते हुए भी आ सकते थे, परन्तु उन्होंने शान्ति के साथ, मेरी खिड़की के बाहर की उस बर्फ के समान आना चुना।

          प्रभु यीशु के आगमन से बहुत से लोग आश्चर्यचकित तथा शांत रह गए। किसी राजमहल में जन्म लेने की बजाए, वे एक बहुत ही अनपेक्षित स्थान, बैतलहम के बाहर एक विनीत स्थान में पैदा हुए। और वे उस एकमात्र उपलब्ध बिस्तर, चरनी में सोए (लूका 2:7)। उनके स्वागत, सेवा और देखभाल के लिए राजसी लोग या उच्च अधिकारी उपस्थित नहीं थे, प्रभु यीशु का स्वागत तो साधारण चरवाहों ने किया (पद 15-16)। उनके पास धन-संपत्ति नहीं थी; जब व्यवस्था के अनुसार मंदिर में बलिदान चढ़ाने का समय आया तब उनके माता-पिता केवल दो पक्षियों के सस्ते बलिदान को ही चढ़ा सके (पद 24)।

          प्रभु यीशु के संसार में इस विनम्र प्रवेश के बारे में यशायाह भविष्यद्वक्ता पहले ही लिख चुका था। यशायाह ने भविष्यवाणी की थी कि आने वाला उद्धारकर्ता चिल्लाएगा नहीं (यशायाह 42:2), और न ही वह सामर्थ्य के प्रदर्शन के साथ आएगा जिससे कोई कुचला हुआ सरकंडा टूट जाए या टिमटिमाती बत्ती बुझ जाए (पद 3)। वरन वह शान्ति के साथ आया कि हमें परमेश्वर के साथ शान्ति में ले आने के प्रस्ताव के साथ अपनी ओर आकर्षित करे।

          उसका यह शान्ति का प्रस्ताव सारे संसार के सभी लोगों को आज भी उपलब्ध है; उस प्रत्येक व्यक्ति के लिए है जो चरनी में जन्मे जगत के उद्धारकर्ता पर विश्वास लाता है और उससे अपने पापों की क्षमा मांगकर उसे अपना व्यक्तिगत उद्धारकर्ता स्वीकार कर लेता है, उसकी शान्ति को ग्रहण कर लेता है। - लीसा सामरा

 

यह अद्भुत उपहार कितनी शान्ति से संसार को दिया गया।


वह कुचले हुए सरकण्डे को न तोड़ेगा; और धुआं देती हुई बत्ती को न बुझाएगा, जब तक न्याय को प्रबल न कराए। - मत्ती 12:20

बाइबल पाठ: यशायाह 42:1-4

यशायाह 42:1 मेरे दास को देखो जिसे मैं संभाले हूं, मेरे चुने हुए को, जिस से मेरा जी प्रसन्न है; मैं ने उस पर अपना आत्मा रखा है, वह अन्यजातियों के लिये न्याय प्रगट करेगा।

यशायाह 42:2 न वह चिल्लाएगा और न ऊंचे शब्द से बोलेगा, न सड़क में अपनी वाणी सुनायेगा।

यशायाह 42:3 कुचले हुए नरकट को वह न तोड़ेगा और न टिमटिमाती बत्ती को बुझाएगा; वह सच्चाई से न्याय चुकाएगा।

यशायाह 42:4 वह न थकेगा और न हियाव छोड़ेगा जब तक वह न्याय को पृथ्वी पर स्थिर न करे; और द्वीपों के लोग उसकी व्यवस्था की बाट जोहेंगे।

 

एक साल में बाइबल: 

  • सपन्याह 1-3
  • प्रकाशितवाक्य 16

रविवार, 20 दिसंबर 2020

नेतृत्व

 

          हमारे घर के ऊपर, आकाश में तीन सैन्य जेट विमान शोर करते हुए निकले, तीनों एक-दूसरे के इतने निकट थे कि वे एक प्रतीत हो रहे थे। यह देखकर मैंने अपने पति से कहा, “वाह! प्रभावशाली” और वे भी मेरी इस बात से सहमत हुए। हमारा घर एक एयर फ़ोर्स अड्डे के निकट स्थित है, इसलिए इस प्रकार के दृश्य देखना कोई असामान्य बात नहीं है।

          किन्तु जितनी बार ये जेट विमान ऐसे उड़ते हैं, मेरे मन में एक ही प्रश्न उठता है, ‘ऐसा कैसे है कि बिना नियंत्रण खोए ये इतनी निकट एक साथ उड़ सकते हैं?’ एक स्पष्ट कारण जो मुझे पता चला, वह है दीनता और भरोसा! जो पायलेट आगे वाला जेट उड़ा रहा है, उसके नेतृत्व पर भरोसा रखते हुए, दोनों ओर के दोनों पायलेट उसके द्वारा निर्धारित गति और दिशा तथा मुड़ने के निर्देशों का पालन करते हैं। जब वे दोनों अपना नेतृत्व करने वाले के मार्गदर्शन के अनुसार उसके साथ मिलकर उड़ते हैं, तो एक सशक्त और प्रभावी टीम बन जाती है।

          प्रभु यीशु मसीह के अनुयायियों के लिए भी ऐसा ही है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु ने कहा,यदि कोई मेरे पीछे आना चाहे, तो अपने आप से इनकार करे और प्रति दिन अपना क्रूस उठाए हुए मेरे पीछे हो ले” (लूका 9:23)।

          प्रभु का मार्ग अपने आप का इनकार करने और दूसरों के लिए दुःख उठाने का मार्ग था, जिस पर चलना कठिन हो सकता है। परन्तु उसके प्रभावी शिष्य होने के लिए हमें भी अपने स्वयं की इच्छाओं को त्याग कर प्रतिदिन प्रभु के द्वारा दिए जाने वाले आत्मिक निर्देशों का पालन करना है – जैसे कि अपनी बजाए औरों के सेवा के लिए तत्पर रहना और करना – और उसकी निकटता में होकर चलना है।
          परमेश्वर के साथ इस प्रकार दीन और आज्ञाकारी होकर चलना एक अद्भुत दृश्य एवं अनुभव है। जब हम उसके नेतृत्व में, उसकी निकटता में चलते हैं, तो उसके साथ एक प्रतीत हो सकते हैं। तब लोग हमें नहीं प्रभु को देखने पाएँगे; और उनके मुँह से भी वही निकलेगा जो मैंने कहा था – ‘वाह!’ – पेट्रीशिया रेबोन

 

हमारे जीवन वे झरोखे हैं, जिनमें से लोग मसीह को देख हैं।


उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के सामने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई करें। - मत्ती 5:16

बाइबल पाठ: लूका 9:21-24

लूका 9:21 तब उसने उन्हें चिताकर कहा, कि यह किसी से न कहना।

लूका 9:22 और उसने कहा, मनुष्य के पुत्र के लिये अवश्य है, कि वह बहुत दुख उठाए, और पुरिनए और महायाजक और शास्त्री उसे तुच्छ समझकर मार डालें, और वह तीसरे दिन जी उठे।

लूका 9:23 उसने सब से कहा, यदि कोई मेरे पीछे आना चाहे, तो अपने आप से इनकार करे और प्रति दिन अपना क्रूस उठाए हुए मेरे पीछे हो ले।

लूका 9:24 क्योंकि जो कोई अपना प्राण बचाना चाहेगा वह उसे खोएगा, परन्तु जो कोई मेरे लिये अपना प्राण खोएगा वही उसे बचाएगा।

 

एक साल में बाइबल: 

  • मीका 1-3
  • प्रकाशितवाक्य 11

शुक्रवार, 31 मई 2019

प्रार्थना



      किन्तसुगी एक प्राचीन जापानी कला है, टूटे हुए चीनी-मिट्टी के बर्तनों की मरम्मत करने की। इस मरम्मत के कार्य में राल या धूना के साथ सोने की धूल मिलाकर टूटे हुए टुकड़ों को आपस में जोड़ा जाता है और उनके बीच की दरारों को भरा जाता है, जिससे एक बहुत असाधारण और मजबूत जोड़ बनता है। इस कला के द्वारा मरम्मत को छुपाया नहीं जाता है वरन उस टूटेपन को एक सुन्दर कलाकृति में परिवर्तित कर दिया जाता है।

      परमेश्वर का वचन बाइबल हमें सिखाती है कि यदि हम अपने किसी पाप के प्रति वास्तव में पश्चातापी होते हैं तो परमेश्वर भी हमारे उस टूटेपन की कदर करता है। जब दाऊद ने बतशेबा के साथ व्यभिचार का पाप किया और उसके पति को मरवाने का षडयंत्र रचा, तो नातान नबी ने उसे उसका पाप स्मरण करवाया, और दाऊद ने पश्चाताप किया। इसके बाद दाऊद द्वारा की गई प्रार्थना हमें अंतःदृष्टि प्रदान करती है कि यदि हम पाप कर बैठें तो परमेश्वर हम से क्या चाहता है: “क्योंकि तू मेलबलि से प्रसन्न नहीं होता, नहीं तो मैं देता; होमबलि से भी तू प्रसन्न नहीं होता। टूटा मन परमेश्वर के योग्य बलिदान है; हे परमेश्वर, तू टूटे और पिसे हुए मन को तुच्छ नहीं जानता” (भजन 51:16-17)।

      जब हमारा हृदय किसी पाप को लेकर टूटता है, तो परमेश्वर प्रभु यीशु द्वारा कलवारी के क्रूस पर दिए गए बलिदान से मिलने वाली अमूल्य क्षमा से उस टूटेपन को जोड़ता और भरता है। जब हम अपने आप को उसके सामने दीन करते हैं तो वह हमें प्रेम सहित स्वीकार करता है, और उसके साथ हमारा संबंध बहाल हो जाता है।

      परमेश्वर कितना दयालु है! वह हम से एक दीन और नम्र हृदय चाहता है, जिससे वह अपनी करुणा की सुन्दरता से हमें सुधार और संवार सके। बाइबल की एक अन्य प्रार्थना: “हे ईश्वर, मुझे जांच कर जान ले! मुझे परख कर मेरी चिन्ताओं को जान ले! और देख कि मुझ में कोई बुरी चाल है कि नहीं, और अनन्त के मार्ग में मेरी अगुवाई कर!” (भजन 139:23-24) आज हमारी भी प्रार्थना हो। - जेम्स बैंक्स


ईश्वरीय पश्चाताप से परम आनन्द की प्राप्ति होती है।

यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है। - 1 यूहन्ना 1:9

बाइबल पाठ: भजन 51
Psalms 51:1 हे परमेश्वर, अपनी करूणा के अनुसार मुझ पर अनुग्रह कर; अपनी बड़ी दया के अनुसार मेरे अपराधों को मिटा दे।
Psalms 51:2 मुझे भलीं भांति धोकर मेरा अधर्म दूर कर, और मेरा पाप छुड़ाकर मुझे शुद्ध कर!
Psalms 51:3 मैं तो अपने अपराधों को जानता हूं, और मेरा पाप निरन्तर मेरी दृष्टि में रहता है।
Psalms 51:4 मैं ने केवल तेरे ही विरुद्ध पाप किया, और जो तेरी दृष्टि में बुरा है, वही किया है, ताकि तू बोलने में धर्मी और न्याय करने में निष्कलंक ठहरे।
Psalms 51:5 देख, मैं अधर्म के साथ उत्पन्न हुआ, और पाप के साथ अपनी माता के गर्भ में पड़ा।
Psalms 51:6 देख, तू हृदय की सच्चाई से प्रसन्न होता है; और मेरे मन ही में ज्ञान सिखाएगा।
Psalms 51:7 जूफा से मुझे शुद्ध कर, तो मैं पवित्र हो जाऊंगा; मुझे धो, और मैं हिम से भी अधिक श्वेत बनूंगा।
Psalms 51:8 मुझे हर्ष और आनन्द की बातें सुना, जिस से जो हडि्डयां तू ने तोड़ डाली हैं वह मगन हो जाएं।
Psalms 51:9 अपना मुख मेरे पापों की ओर से फेर ले, और मेरे सारे अधर्म के कामों को मिटा डाल।
Psalms 51:10 हे परमेश्वर, मेरे अन्दर शुद्ध मन उत्पन्न कर, और मेरे भीतर स्थिर आत्मा नये सिरे से उत्पन्न कर।
Psalms 51:11 मुझे अपने साम्हने से निकाल न दे, और अपने पवित्र आत्मा को मुझ से अलग न कर।
Psalms 51:12 अपने किए हुए उद्धार का हर्ष मुझे फिर से दे, और उदार आत्मा देकर मुझे सम्भाल।
Psalms 51:13 तब मैं अपराधियों को तेरा मार्ग सिखाऊंगा, और पापी तेरी ओर फिरेंगे।
Psalms 51:14 हे परमेश्वर, हे मेरे उद्धारकर्ता परमेश्वर, मुझे हत्या के अपराध से छुड़ा ले, तब मैं तेरे धर्म का जयजयकार करने पाऊंगा।
Psalms 51:15 हे प्रभु, मेरा मुंह खोल दे तब मैं तेरा गुणानुवाद कर सकूंगा।
Psalms 51:16 क्योंकि तू मेलबलि से प्रसन्न नहीं होता, नहीं तो मैं देता; होमबलि से भी तू प्रसन्न नहीं होता।
Psalms 51:17 टूटा मन परमेश्वर के योग्य बलिदान है; हे परमेश्वर, तू टूटे और पिसे हुए मन को तुच्छ नहीं जानता।
Psalms 51:18 प्रसन्न हो कर सिय्योन की भलाई कर, यरूशलेम की शहरपनाह को तू बना,
Psalms 51:19 तब तू धर्म के बलिदानों से अर्थात सर्वांग पशुओं के होमबलि से प्रसन्न होगा; तब लोग तेरी वेदी पर बैल चढ़ाएंगे।

एक साल में बाइबल:  
  • 2 इतिहास 13-14
  • यूहन्ना 12:1-26



रविवार, 28 अगस्त 2016

नम्र और दीन


   ईस्टर के समय में, मेरी पत्नि और मैं एक चर्च सभा में सम्मिलित हुए जिसमें उस सभा में उपस्थित लोगों ने प्रभु यीशु मसीह के क्रूस पर चढ़ाए जाने के लिए पकड़वाए जाने के रात्रि भोज के समय की घटनाओं को सजीव प्रस्तुत किया। उस सभा में उपासना के भाग के रूप में चर्च के कार्यकर्ताओं ने प्रभु यीशु के समान ही सभा के लोगों में से स्वेच्छा से इस कार्य के लिए कुछ लोगों के पाँव धोए। यह देखते समय मैं सोच रहा था कि हमारे आज के समय में क्या अधिक नम्र करने वाला है - किसी के पैर धोना, या फिर किसी से अपने पैर धुलवाना! जो यह सेवा कर रहे थे तथा जो यह सेवा ले रहे थे, दोनों ही नम्र होने के भिन्न पहलु प्रस्तुत कर रहे थे।

   जब प्रभु यीशु और उनके चेले, एक साथ मिलकर किए गए उस अन्तिम भोज के लिए एकत्रित हुए (यूहन्ना 13:1-20), तब प्रभु यीशु ने दीन सेवक की सेवकाई दिखाते हुए चेलों के पाँव धोए थे। लेकिन शमौन पतरस ने प्रभु यीशु द्वारा करे जा रहे इस कार्य का पहले यह कहते हुए विरोध किया कि, "...तू मेरे पांव कभी न धोने पाएगा"; लेकिन प्रभु यीशु ने उसे उत्तर दिया, "...यदि मैं तुझे न धोऊं, तो मेरे साथ तेरा कुछ भी साझा नहीं" (यूहन्ना 13:8)। प्रभु द्वारा उन चेलों के पाँव धोना किसी रीति का पूरा करना नहीं था; ऐसा करके प्रभु यीशु नम्र और दीन होना सिखा रहा था, और साथ ही यह भी कि हमें उससे अपनी मलिनता से स्वच्छ होने की आवश्यकता है - और प्रभु के हाथों हमारा यह स्वच्छ होना तब तक संभव नहीं है जब तक की हम अपने उद्धारकर्ता प्रभु के सामने नम्र और दीन नहीं हो जाते हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में याकूब ने लिखा, "वह तो और भी अनुग्रह देता है; इस कारण यह लिखा है, कि परमेश्वर अभिमानियों से विरोध करता है, पर दीनों पर अनुग्रह करता है" (याकूब 4:6)। जब हम परमेश्वर की महानता को पहचानते हैं, और क्रूस पर उसके नम्र और दीन होने को (फिलिप्पियों 2:5-11) व्यक्तिगत रीति से अपने लिए स्वीकार करते हैं, हम परमेश्वर के अनुग्रह को प्राप्त करते हैं। - बिल क्राउडर


सृष्टि के प्रभु के सामने घुटनों पर झुके रहना, संसार में सबसे सामर्थी होना है।

जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो। - फिलिप्पियों 2:5

बाइबल पाठ: यूहन्ना 13:1-11
John 13:1 फसह के पर्व से पहिले जब यीशु ने जान लिया, कि मेरी वह घड़ी आ पहुंची है कि जगत छोड़कर पिता के पास जाऊं, तो अपने लोगों से, जो जगत में थे, जैसा प्रेम वह रखता था, अन्‍त तक वैसा ही प्रेम रखता रहा। 
John 13:2 और जब शैतान शमौन के पुत्र यहूदा इस्करियोती के मन में यह डाल चुका था, कि उसे पकड़वाए, तो भोजन के समय। 
John 13:3 यीशु ने यह जानकर कि पिता ने सब कुछ मेरे हाथ में कर दिया है और मैं परमेश्वर के पास से आया हूं, और परमेश्वर के पास जाता हूं। 
John 13:4 भोजन पर से उठ कर अपने कपड़े उतार दिए, और अंगोछा ले कर अपनी कमर बान्‍धी। 
John 13:5 तब बरतन में पानी भरकर चेलों के पांव धोने और जिस अंगोछे से उस की कमर बन्‍धी थी उसी से पोंछने लगा। 
John 13:6 जब वह शमौन पतरस के पास आया: तब उसने उस से कहा, हे प्रभु, 
John 13:7 क्या तू मेरे पांव धोता है? यीशु ने उसको उत्तर दिया, कि जो मैं करता हूं, तू अब नहीं जानता, परन्तु इस के बाद समझेगा। 
John 13:8 पतरस ने उस से कहा, तू मेरे पांव कभी न धोने पाएगा: यह सुनकर यीशु ने उस से कहा, यदि मैं तुझे न धोऊं, तो मेरे साथ तेरा कुछ भी साझा नहीं। 
John 13:9 शमौन पतरस ने उस से कहा, हे प्रभु, तो मेरे पांव ही नहीं, वरन हाथ और सिर भी धो दे। 
John 13:10 यीशु ने उस से कहा, जो नहा चुका है, उसे पांव के सिवा और कुछ धोने का प्रयोजन नहीं; परन्तु वह बिलकुल शुद्ध है: और तुम शुद्ध हो; परन्तु सब के सब नहीं। 
John 13:11 वह तो अपने पकड़वाने वाले को जानता था इसी लिये उसने कहा, तुम सब के सब शुद्ध नहीं।

एक साल में बाइबल: 

  • भजन 123-125
  • 1 कुरिन्थियों 10:1-18


बुधवार, 30 मार्च 2016

नम्र और दीन


   अंग्रज़ी भाषा के शब्द meek, अर्थात नम्र या दीन, के साथ समस्या है कि वह अंग्रेज़ी के एक अन्य शब्द weak, अर्थात दुर्बल से मेल खाता है, और सामन्यतः लोग इन दोनों शब्दों को एक दूसरे का पर्याय मानते आए हैं। एक प्रसिद्ध शब्दकोष ने meek की और विस्तृत परिभाषा देते हुए उसका अर्थ बताया है, "वह जो बहुत दब्बु है; जिसके ऊपर सरलता से हावी हुआ जा सकता है; जिसमें प्रतिरोध करने की शक्ति नहीं है; जिसमें आत्मसम्मान नहीं है।" ऐसी परिभाषाओं और आँकलन के सामने यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि फिर प्रभु यीशु मसीह ने यह क्यों कहा कि, "धन्य हैं वे, जो नम्र हैं, क्योंकि वे पृथ्वी के अधिकारी होंगे" (मत्ती 5:5)।

   लेकिन प्रभु यीशु मसीह के इस शब्द को प्रयोग करने का तात्पर्य और वास्तविकता इस शब्द को लेकर प्रचलित आम नकारात्मक धारणा से बिलकुल विपरीत है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रयुक्त भाषाओं और शब्दों के प्रसिद्ध विद्वान डब्ल्यु. ई. वाईन इस शब्द के लिए मूल युनानी भाषा में प्रयुक्त हुए शब्द के बारे में बताते हैं कि "यह परमेश्वर के प्रति दिखाए गए रवैये का सूचक है, जिसमें हमारे प्रति परमेश्वर के हर व्यवहार और बर्ताव को हम भला मानकर विश्वास के साथ ग्रहण करते हैं और उसके लिए परमेश्वर से कोई विवाद या विरोध नहीं करते"। इस बात को हम प्रभु यीशु मसीह के जीवन, शिक्षाओं और कार्यों में प्रदर्शित होता देखते हैं; हम देखते हैं कि प्रभु यीशु पिता परमेश्वर की इच्छा को पूरी करने में ही आनन्दित होते थे, यह इच्छापूर्ति ही उनके जीवन का ध्येय था (इब्रानियों 10:7)।

   वाईन आगे कहते हैं कि, "जो दीनता प्रभु यीशु ने दिखाई और अपने अनुयायियों से दिखाने के लिए कहा वह ईश्वरीय सामर्थ का प्रतिफल है। प्रभु यीशु मसीह दीन इसलिए थे क्योंकि स्वर्ग के असीम संसाधन और परमेश्वर की असीम सामर्थ उन्हें उपलब्ध थीं।" यदि प्रभु चाहते तो स्वर्गदूतों की सेना उनके पकड़वाए जाने और क्रुस पर चढ़ाए जाने को कभी भी रोक सकती थीं (मत्ती 26:52-53)। लेकिन उन्होंने अपने संसाधनों और सामर्थ का प्रयोग स्वार्थसिधी अथवा अपनी भलाई के लिए नहीं वरन दूसरों की भलाई के लिए ही किया।

   प्रभु यीशु मसीह ने अपने अनुयायियों से कहा, "मेरा जूआ अपने ऊपर उठा लो; और मुझ से सीखो; क्योंकि मैं नम्र और मन में दीन हूं: और तुम अपने मन में विश्राम पाओगे" (मत्ती 11:29)। वे नम्र और दीन होने के सिद्ध नमूना थे।

   आज भी प्रभु यीशु हमें अपनी नम्रता और दीनता को ग्रहण करके उस से मिलने वाली शांति और सामर्थ का अनुभव करने के लिए बुला रहे हैं। - डेविड मैक्कैसलैंड


परमेश्वर के दो निवास-स्थान हैं, एक स्वर्ग और दूसरा दीन और धन्यवादी हृदय। - वॉल्टन

तब मैं ने कहा, देख, मैं आ गया हूं, (पवित्र शास्त्र में मेरे विषय में लिखा हुआ है) ताकि हे परमेश्वर तेरी इच्छा पूरी करूं। - इब्रानियों 10:7

बाइबल पाठ: मत्ती 5:1-10
Matthew 5:1 वह इस भीड़ को देखकर, पहाड़ पर चढ़ गया; और जब बैठ गया तो उसके चेले उसके पास आए। 
Matthew 5:2 और वह अपना मुंह खोल कर उन्हें यह उपदेश देने लगा, 
Matthew 5:3 धन्य हैं वे, जो मन के दीन हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्‍हीं का है। 
Matthew 5:4 धन्य हैं वे, जो शोक करते हैं, क्योंकि वे शांति पाएंगे। 
Matthew 5:5 धन्य हैं वे, जो नम्र हैं, क्योंकि वे पृथ्वी के अधिकारी होंगे। 
Matthew 5:6 धन्य हैं वे जो धर्म के भूखे और प्यासे हैं, क्योंकि वे तृप्त किये जाएंगे। 
Matthew 5:7 धन्य हैं वे, जो दयावन्‍त हैं, क्योंकि उन पर दया की जाएगी। 
Matthew 5:8 धन्य हैं वे, जिन के मन शुद्ध हैं, क्योंकि वे परमेश्वर को देखेंगे। 
Matthew 5:9 धन्य हैं वे, जो मेल करवाने वाले हैं, क्योंकि वे परमेश्वर के पुत्र कहलाएंगे। 
Matthew 5:10 धन्य हैं वे, जो धर्म के कारण सताए जाते हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्‍हीं का है।

एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों 9-10
  • लूका 5:17-39


बुधवार, 27 नवंबर 2013

दीन और दरिद्र


   किसी ना किसी रीति से हम सभी भजन 86:1 से सहमत हो सकते हैं, जहाँ दाऊद ने कहा, "हे यहोवा कान लगा कर मेरी सुन ले, क्योंकि मैं दीन और दरिद्र हूं"। हम में से सबसे धनी व्यक्ति को भी यह समझ लेना चाहिए कि दरिद्र एवं आवश्यकता में होने का संबंध बटुए से नहीं आत्मा से है। जब रिच डि वोस नामक अरबपति व्यक्ति लोगों के साथ बातचीत करता है, तो उनसे यही कहता है कि "मैं मात्र एक पापी हूँ जो परमेश्वर के अनुग्रह से बचाया गया है।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 86 हमें यह सिखाता है कि जो सहायता परमेश्वर से मिलती है वह किसी आर्थिक बही-खाते के आंकड़ों से मापी नहीं जा सकती। जब हम परमेश्वर के सामने इस बात को मान लेते हैं कि हम दीन और दरिद्र हैं तो इसका यह तात्पर्य नहीं है कि परमेश्वर हमें सांसारिक धन-दौलत से भर देगा। नहीं, हमारा परमेश्वर के सम्मुख स्वीकार करना कि हम दीन और दरिद्र हैं इसलिए होना चाहिए कि वह हमें संसार की दौलत से भी अधिक महत्वपूर्ण और मूल्यवान खज़ानों से भर दे।

   जो परमेश्वर के सम्मुख सच्चे मन से दीन और दरिद्र होते हैं, उस पर भरोसा रखते हैं, परमेश्वर उन की रक्षा करता है, उन्हें बचाता है (पद 2); उन पर अनुग्रह करता है, उन्हें क्षमा करता है (पद 3, 5); वह उनकी सुनता है और उनकी प्रार्थनाओं के उत्तर देता है (पद 6-7)।

   लेकिन परमेश्वर से मिलने वाली इन आशीषों को हमें केवल लेते रहने वाले नहीं बनना है, वरन कुछ लौटा कर भी देना है। परमेश्वर की आशीषें पा लेने के बाद हमारी ज़िम्मेदारी हो जाती है कि हम परमेश्वर के मार्गों को सीखें, उसके सत्य पर चलें, उसके नाम का भय मानें, उसके नाम का गुणगान और महिमा करें (पद 11-12)।

   यदि आप भी अपने आप को ऐसा दीन और दरिद्र मानते हैं तो आपका परमेश्वर के लोगों के समूह में स्वागत है। परमेश्वर द्वारा दी जाने वाली आशीषों को ना भूलें और ना ही उसके इस अनुग्रह और उदारता के कारण आप पर आने वाली ज़िम्मेदारियों को नज़रंदाज़ करें। - डेव ब्रैनन


सबसे दरिद्र वह है जिसकी दौलत केवल सांसारिक धन ही है।

हे यहोवा कान लगा कर मेरी सुन ले, क्योंकि मैं दीन और दरिद्र हूं। - भजन 86:1

बाइबल पाठ: भजन 86
Psalms 86:1 हे यहोवा कान लगा कर मेरी सुन ले, क्योंकि मैं दीन और दरिद्र हूं। 
Psalms 86:2 मेरे प्राण की रक्षा कर, क्योंकि मैं भक्त हूं; तू मेरा परमेश्वर है, इसलिये अपने दास का, जिसका भरोसा तुझ पर है, उद्धार कर। 
Psalms 86:3 हे प्रभु मुझ पर अनुग्रह कर, क्योंकि मैं तुझी को लगातार पुकारता रहता हूं। 
Psalms 86:4 अपने दास के मन को आनन्दित कर, क्योंकि हे प्रभु, मैं अपना मन तेरी ही ओर लगाता हूं। 
Psalms 86:5 क्योंकि हे प्रभु, तू भला और क्षमा करने वाला है, और जितने तुझे पुकारते हैं उन सभों के लिये तू अति करूणामय है। 
Psalms 86:6 हे यहोवा मेरी प्रार्थना की ओर कान लगा, और मेरे गिड़गिड़ाने को ध्यान से सुन। 
Psalms 86:7 संकट के दिन मैं तुझ को पुकारूंगा, क्योंकि तू मेरी सुन लेगा।
Psalms 86:8 हे प्रभु देवताओं में से कोई भी तेरे तुल्य नहीं, और ने किसी के काम तेरे कामों के बराबर हैं। 
Psalms 86:9 हे प्रभु जितनी जातियों को तू ने बनाया है, सब आ कर तेरे साम्हने दण्डवत करेंगी, और तेरे नाम की महिमा करेंगी। 
Psalms 86:10 क्योंकि तू महान और आश्चर्य कर्म करने वाला है, केवल तू ही परमेश्वर है। 
Psalms 86:11 हे यहोवा अपना मार्ग मुझे दिखा, तब मैं तेरे सत्य मार्ग पर चलूंगा, मुझ को एक चित्त कर कि मैं तेरे नाम का भय मानूं। 
Psalms 86:12 हे प्रभु हे मेरे परमेश्वर मैं अपने सम्पूर्ण मन से तेरा धन्यवाद करूंगा, और तेरे नाम की महिमा सदा करता रहूंगा। 
Psalms 86:13 क्योंकि तेरी करूणा मेरे ऊपर बड़ी है; और तू ने मुझ को अधोलोक की तह में जाने से बचा लिया है। 
Psalms 86:14 हे परमेश्वर अभिमानी लोग तो मेरे विरुद्ध उठे हैं, और बलात्कारियों का समाज मेरे प्राण का खोजी हुआ है, और वे तेरा कुछ विचार नहीं रखते। 
Psalms 86:15 परन्तु प्रभु तू दयालु और अनुग्रहकारी ईश्वर है, तू विलम्ब से कोप करने वाला और अति करूणामय है। 
Psalms 86:16 मेरी ओर फिर कर मुझ पर अनुग्रह कर; अपने दास को तू शक्ति दे, और अपनी दासी के पुत्र का उद्धार कर। 
Psalms 86:17 मुझे भलाई का कोई लक्षण दिखा, जिसे देख कर मेरे बैरी निराश हों, क्योंकि हे यहोवा तू ने आप मेरी सहायता की और मुझे शान्ति दी है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 30-32 
  • 1 पतरस 4


सोमवार, 22 अक्टूबर 2012

दीन और ऊँचा


   उत्तरी अमेरिका के प्रशांत महासागर के तट के पास उगने वाले रेडवुड वृक्ष संसार के सबसे बड़े वृक्षों में से हैं। इनमें जो सबसे ऊँचा नापा गया पेड़ है, उसकी उँचाई धरती से ३७९ फुट ऊपर है। कैलिफोर्निया राज्य के मुयिर राष्ट्रीय उद्यान में इन विशाल वृक्षों के बीच खड़ा होकर मुझे बहुत विसमय हुआ; मेरे लिए यह एक अभिभूत कर देने वाला अनुभव था। ३० मंज़िली इमारत के समान ऊँचाई वाले ये वृक्ष मानो मुझे धरती से जोड़ रहे थे और मेरे विचारों को ऊँचाईयों की ओर ले जा रहे थे।

   इन विशाल वृक्षों की जड़ के पास खड़े होकर जो मैंने अनुभव किया था, उसका स्मरण मुझे उनके आरंभ के बारे में सोचने को बार बार बाध्य करता है। मानव जाति के इतिहास के समान इन विशाल वृक्षों का आरंभ भी उसी सृष्टिकर्ता के साथ जुड़ा है जो अपनी सृष्टि से असीम और अनन्त रूप में महान तथा विशाल है।

   इस सृष्टिकर्ता परमेश्वर की एक झलक यशायाह भविष्यद्वक्ता ने एक दर्शन में देखी। इस दर्शन में यशायाह ने मसीह के राज्य और नई धरती तथा नए स्वर्ग को देखा जहां आकाश परमेश्वर का सिंहासन और पृथ्वी उसके पांव तले की चौकी है (यशायाह ६६:१)। यशायाह ने दर्शन में इससे भी अधिक अचरज की बात देखी - एक ऐसा परमेश्वर जो चाहता है कि उसकी प्रजा उसकी सृष्टि में सदा हर्षित और मगन रहे (यशायाह ६५:१८) और वह उन लोगों की ओर ध्यान लगाए रखता है जो खेदित मन रखते हैं और उसके वचन का भय मानते हैं (यशायाह ६६:२)।

   यही परमेश्वर संसार को पापों से मुक्ति देने के लिए संसार में प्रभु यीशु के रूप में एक साधारण मनुष्य के समान आया; ऐसा मनुष्य "जिस ने परमेश्वर के स्‍वरूप में होकर भी परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्‍तु न समझा। वरन अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्‍वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया। और मनुष्य के रूप में प्रगट होकर अपने आप को दीन किया, और यहां तक आज्ञाकारी रहा, कि मृत्यु, हां, क्रूस की मृत्यु भी सह ली। इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्‍ठ है। कि जो स्‍वर्ग में और पृथ्वी पर और जो पृथ्वी के नीचे हैं वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें। और परमेश्वर पिता की महिमा के लिये हर एक जीभ अंगीकार कर ले कि यीशु मसीह ही प्रभु है" (फिलिप्पियों २:५-११)। आज जो अपने आप को उसके सामने दीन कर देता है, उसे वह सदा काल के लिए स्वर्ग की ऊँचाईयों तक उठा देता है। - मार्ट डी हॉन


परमेश्वर की सृष्टि उसे समर्पण और उसकी आराधना के लिए प्ररित करती है।

...क्योंकि मेरी प्रजा की आयु वृक्षों की सी होगी, और मेरे चुने हुए अपने कामों का पूरा लाभ उठाएंगे। - यशायाह ६५:२२

बाइबल पाठ: यशायाह ६५:१७-६६:२
Isa 65:17  क्योंकि देखो, मैं नया आकाश और नई पृथ्वी उत्पन्न करने पर हूं, और पहिली बातें स्मरण न रहेंगी और सोच विचार में भी न आएंगी। 
Isa 65:18  इसलिये जो मैं उत्पन्न करने पर हूं, उसके कारण तुम हषिर्त हो और सदा सर्वदा मगन रहो; क्योंकि देखो, मैं यरूशलेम को मगन और उसकी प्रजा को आनन्दित बनाऊंगा। 
Isa 65:19  मैं आप यरूशलेम के कारण मगन, और अपनी प्रजा के हेतु हषिर्त हूंगा; उस में फिर रोने वा चिल्लाने का शब्द न सुनाई पड़ेगा। 
Isa 65:20  उस में फिर न तो थोड़े दिन का बच्चा, और न ऐसा बूढ़ा जाता रहेगा जिस ने अपनी आयु पूरी न की हो; क्योंकि जो लड़कपन में मरने वाला है वह सौ वर्ष का होकर मरेगा, परन्तु पापी सौ वर्ष का होकर श्रापित ठहरेगा। 
Isa 65:21  वे घर बनाकर उन में बसेंगे; वे दाख की बारियां लगाकर उनका फल खाएंगे। 
Isa 65:22  ऐसा नहीं होगा कि वे बनाएं और दूसरा बसे; वा वे लगाएं, और दूसरा खाए; क्योंकि मेरी प्रजा की आयु वृक्षों की सी होगी, और मेरे चुने हुए अपने कामों का पूरा लाभ उठाएंगे। 
Isa 65:23  उनका परिश्रम व्यर्थ न होगा, न उनके बालक घबराहट के लिये उत्पन्न होंगे; क्योंकि वे यहोवा के धन्य लोगों का वंश ठहरेंगे, और उनके बालबच्चे उन से अलग न होंगे। 
Isa 65:24  उनके पुकारने से पहिले ही मैं उनको उत्तर दूंगा, और उनके मांगते ही मैं उनकी सुन लूंगा। 
Isa 65:25  भेडिय़ा और मेम्ना एक संग चरा करेंगे, और सिंह बैल की नाईं भूसा खाएगा; और सर्प का आहार मिट्टी ही रहेगा। मेरे सारे पवित्र पर्वत पर न तो कोई किसी को दु:ख देगा और न कोई किसी की हानि करेगा, यहोवा का यही वचन है।
Isa 66:1  यहोवा यों कहता है, आकाश मेरा सिंहासन और पृथ्वी मेरे चरणों की चौकी है; तुम मेरे लिये कैसा भवन बनाओगे, और मेरे विश्राम का कौन सा स्थान होगा? 
Isa 66:2  यहोवा की यह वाणी है, ये सब वस्तुएं मेरे ही हाथ की बनाई हुई हैं, सो ये सब मेरी ही हैं। परन्तु मैं उसी की ओर दृष्टि करूंगा जो दीन और खेदित मन का हो, और मेरा वचन सुनकर थरथराता हो।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह ६५-६६ 
  • १ तिमुथियुस २