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मंगलवार, 14 जनवरी 2014

चुनाव


   यदि आप को पता चले कि आपके बटुए से पैसे रहस्यमय रीति से गायब हो रहे हैं तो आप क्रोधित होंगे। लेकिन यदि तहकीकात से पता चले कि आपके बटुए से चोरी करने वाला और कोई नहीं वरन आपका पुत्र ही है तो आपका क्रोध शोक में बदल जाएगा। शोक शब्द की एक व्याख्या है वह भावना जो हम तब अनुभव करते हैं जब किसी निकट के प्रीय जन से हमें अनेपक्षित रीति से निराश और दुखी होते हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भी शोक शब्द का प्रयोग इस रूप में किया गया है। प्रेरित पौलुस ने लिखा: "और परमेश्वर के पवित्र आत्मा को शोकित मत करो, जिस से तुम पर छुटकारे के दिन के लिये छाप दी गई है" (इफिसियों 4:30)। प्रेरित पौलुस यह समझाना चाह रहा है कि जिसे परमेश्वर ने हमारी सहायता के लिए दिया है और जो हमसे प्रेम करता है, हम उसे शोकित ना करें। प्रभु यीशु ने अपने चेलों से वायदा किया था: "परन्तु सहायक अर्थात पवित्र आत्मा जिसे पिता मेरे नाम से भेजेगा, वह तुम्हें सब बातें सिखाएगा, और जो कुछ मैं ने तुम से कहा है, वह सब तुम्हें स्मरण कराएगा" (यूहन्ना 14:26); अर्थात परमेश्वर का पवित्र आत्मा प्रत्येक मसीही विश्वासी को परमेश्वर की ओर से उसे मसीही विश्वास में आते ही उसके उस विश्वास के जीवन के सुचारू निर्वाह में सहायता करने के लिए परमेश्वर द्वारा दिया जाता है। पवित्र आत्मा प्रत्येक मसीही विश्वासी को सिखाता है, प्रभु यीशु की शिक्षाएं और आज्ञाएं स्मरण कराता है, और सही दिशा में चलते रहने के लिए मार्गदर्शन करता है।

   जब परमेश्वर का पवित्र आत्मा हमारे कार्यों या व्यवहार से शोकित होता है तो इसके परिणाम हमारे लिए बहुत तनाव ला सकते हैं, क्योंकि परमेश्वर का आत्मा हमें एक दिशा में जाने के लिए कहता और खींचता है और हमारे शरीर की अभिलाषाएं हमें उससे विपरीत दिशा में खींचती हैं। प्रेरित पौलुस ने इस खींच-तान के लिए लिखा: "क्योंकि शरीर आत्मा के विरोध में, और आत्मा शरीर के विरोध में लालसा करती है, और ये एक दूसरे के विरोधी हैं; इसलिये कि जो तुम करना चाहते हो वह न करने पाओ" (गलतियों 5:17)। यदि हम अपने जीवन में शरीर की अभिलाषाओं की पूर्ति के चुनाव करते रहेंगे, तो यह द्वन्द हमारे अन्दर बना रहेगा और शीघ्र ही हम जीवन से असंतुष्ट और दोषी अनुभव करने लगेंगे, हमारे जीवन का आननद और स्फूर्ती जाती रहेगी और एक आलस और उदासी हमें घेर लेगी (भजन 32:3-4)।

   इसलिए, इस बात का ध्यान रखना कि परमेश्वर का पवित्र आत्मा हम मसीही विश्वासियों के जीवन से शोकित ना हो, हमारे मसीही विश्वास के जीवन के सुचारू निर्वाह के लिए बहुत आवश्यक है। इसके लिए आवश्यक है कि हम अपनी शरीर की अभिलाषाओं से वशिभूत होकर उन अभिलाषाओं की पूर्ति के लिए गलत चुनाव ना करें (इफिसियों 4:31), वरन हम से प्रेम करने और हमारी भलाई के लिए सब कुछ करने वाले परमेश्वर के साथ वफादारी और उसकी आज्ञाकारिता में जीवन व्यतीत करने के पक्ष में ही अपने चुनाव करें। - एलबर्ट ली


प्रत्येक मसीही विश्वासी का हृदय परमेश्वर के पवित्र आत्मा का मन्दिर है।

और मैं पिता से बिनती करूंगा, और वह तुम्हें एक और सहायक देगा, कि वह सर्वदा तुम्हारे साथ रहे। - यूहन्ना 14:16

बाइबल पाठ: इफिसियों 4:25-32
Ephesians 4:25 इस कारण झूठ बोलना छोड़कर हर एक अपने पड़ोसी से सच बोले, क्योंकि हम आपस में एक दूसरे के अंग हैं। 
Ephesians 4:26 क्रोध तो करो, पर पाप मत करो: सूर्य अस्‍त होने तक तुम्हारा क्रोध न रहे। 
Ephesians 4:27 और न शैतान को अवसर दो। 
Ephesians 4:28 चोरी करनेवाला फिर चोरी न करे; वरन भले काम करने में अपने हाथों से परिश्रम करे; इसलिये कि जिसे प्रयोजन हो, उसे देने को उसके पास कुछ हो। 
Ephesians 4:29 कोई गन्‍दी बात तुम्हारे मुंह से न निकले, पर आवश्यकता के अनुसार वही जो उन्नति के लिये उत्तम हो, ताकि उस से सुनने वालों पर अनुग्रह हो। 
Ephesians 4:30 और परमेश्वर के पवित्र आत्मा को शोकित मत करो, जिस से तुम पर छुटकारे के दिन के लिये छाप दी गई है। 
Ephesians 4:31 सब प्रकार की कड़वाहट और प्रकोप और क्रोध, और कलह, और निन्‍दा सब बैरभाव समेत तुम से दूर की जाए। 
Ephesians 4:32 और एक दूसरे पर कृपाल, और करूणामय हो, और जैसे परमेश्वर ने मसीह में तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 43-46


सोमवार, 13 जनवरी 2014

खुले द्वार


   प्रभु यीशु ने अपने चेलों पर यह स्पष्ट कर दिया कि वह ही मार्ग, सत्य और जीवन है (यूहन्ना 14:6); केवल वह ही परमेश्वर पिता तक पहुँचने का एकमात्र माध्यम है। इस बात के लिए प्रभु यीशु पर किया गया हमारा विश्वास और उसके प्रति समर्पण हमारे मनों में उसके प्रति प्रेम और आज्ञाकारिता लाता है और हमें परमेश्वर के साथ हमारे अनन्तकाल के स्वर्गीय निवास स्थान का अडिग और अटल आश्वसन देता है।

   बेलारूस देश के मिंस्क नगर की एक बाइबल कॉलेज की छात्रा क्रिस्टीना ने अपने मसीही जीवन की यह गवाही लिखी: "प्रभु यीशु ने संसार के प्रत्येक जन के लिए मृत्यु सही, सबसे घोर और आशाहीन पापी के लिए भी। संसार का कोई अपराधी ऐसा नहीं, चाहे वह कितना भी निकृष्ट क्यों ना हो, जो यदि विश्वास से प्रभु यीशु के पास आए तो उसे क्षमा और नए जीवन का उपहार सेंत-मेंत ना मिले। एक बहुत लंबे समय तक प्रभु यीशु मेरे दिल के द्वार पर खटखटा रहा था। एक रीति से देखा जाए तो मेरे हृदय का द्वार उसके लिए खुला हुआ था, मैं मसीही थी, लेकिन मेरा उसके प्रति समर्पण अधूरा था। मैंने अपना जीवन पूर्णत्या उसको नहीं सौंपा था। मेरे हृद्य का द्वार खुला अवश्य था किन्तु एक सीमित तौर से, मैंने उस द्वार की भीतरी सुरक्षा कड़ी नहीं खोली थी इसलिए किसी का भी उस द्वार से अन्दर प्रवेश करना संभव नहीं था।"

   क्रिस्टीना जानती थी कि उसका यह रवैया ठीक नहीं था, और परमेश्वर उसे बदलने तथा पूर्ण समर्पण के लिए कह रहा था। अन्ततः क्रिस्टीना ने परमेश्वर की बात को मान लिया, अपने हृद्य के द्वार की सुरक्षा कड़ी खोल दी, प्रभु यीशु को भीतर आकर अपने हृद्य के सिंहासन पर विराजमान हो लेने दिया, उसके प्रति पूर्ण समर्पण कर दिया और उसकी आज्ञाकारिता में जीवन व्यतीत करने का निर्णय ले लिया। यही सच्चे और समर्पित मसीही विश्वासी की पहचान है - प्रभु यीशु के प्रति समर्पण में कोई अधूरापन नहीं; खुले द्वार को सीमित रखने के लिए कोई सुरक्षा कड़ी नहीं, बच निकलने का कोई छिपा द्वार नहीं, जीवन का कोई भाग ऐसा नहीं जो प्रभु को ना सौंप दिया हो, कोई छिपा पाप नहीं और प्रभु यीशु की आज्ञाकारिता में कोई आनाकानी नहीं।

   क्रिस्टीना के समान ही यदि परमेश्वर आपको भी बुला रहा है, और आप उसकी इस बुलाहट को नज़रंदाज़ कर रहे हैं, तो यह समय है परमेश्वर की बात को मान लेने का, क्रिस्टीना के समान ही अपने जीवन की समपूर्ण कमान उसे सौंप देने का। अपने जीवन के द्वार को प्रभु यीशु के लिए पूरी तौर से खोल दीजिए और उसके आज्ञाकारी हो कर जीवन व्यतीत करने की आशीषों के आनन्द को अनुभव करना आरंभ कर दीजिए। आपको अपने इस निर्णय के लिए कभी पछतावा नहीं होगा। - डेव एगनर


परमेश्वर को समर्पित जीवन से अधिक सुरक्षित और कोई जीवन हो नहीं सकता।

यीशु ने उस से कहा, मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता। - यूहन्ना 14:6

बाइबल पाठ: यूहन्ना 14:15-24
John 14:15 यदि तुम मुझ से प्रेम रखते हो, तो मेरी आज्ञाओं को मानोगे। 
John 14:16 और मैं पिता से बिनती करूंगा, और वह तुम्हें एक और सहायक देगा, कि वह सर्वदा तुम्हारे साथ रहे। 
John 14:17 अर्थात सत्य का आत्मा, जिसे संसार ग्रहण नहीं कर सकता, क्योंकि वह न उसे देखता है और न उसे जानता है: तुम उसे जानते हो, क्योंकि वह तुम्हारे साथ रहता है, और वह तुम में होगा। 
John 14:18 मैं तुम्हें अनाथ न छोडूंगा, मैं तुम्हारे पास आता हूं। 
John 14:19 और थोड़ी देर रह गई है कि फिर संसार मुझे न देखेगा, परन्तु तुम मुझे देखोगे, इसलिये कि मैं जीवित हूं, तुम भी जीवित रहोगे। 
John 14:20 उस दिन तुम जानोगे, कि मैं अपने पिता में हूं, और तुम मुझ में, और मैं तुम में। 
John 14:21 जिस के पास मेरी आज्ञा है, और वह उन्हें मानता है, वही मुझ से प्रेम रखता है, और जो मुझ से प्रेम रखता है, उस से मेरा पिता प्रेम रखेगा, और मैं उस से प्रेम रखूंगा, और अपने आप को उस पर प्रगट करूंगा। 
John 14:22 उस यहूदा ने जो इस्करियोती न था, उस से कहा, हे प्रभु, क्या हुआ की तू अपने आप को हम पर प्रगट किया चाहता है, और संसार पर नहीं। 
John 14:23 यीशु ने उसको उत्तर दिया, यदि कोई मुझ से प्रेम रखे, तो वह मेरे वचन को मानेगा, और मेरा पिता उस से प्रेम रखेगा, और हम उसके पास आएंगे, और उसके साथ वास करेंगे। 
John 14:24 जो मुझ से प्रेम नहीं रखता, वह मेरे वचन नहीं मानता, और जो वचन तुम सुनते हो, वह मेरा नहीं वरन पिता का है, जिसने मुझे भेजा।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 40-42


रविवार, 12 जनवरी 2014

मार्गदर्शक


   मेरी सहेली एन्ना के साथ एक बात अकसर होती रहती है, लोग उसके पास आकर अपने गन्तव्य स्थान को जाने के लिए उससे मार्ग की जानकारी लेते रहते हैं। उसके साथ ऐसा केवल उसके इलाके में ही नहीं होता, जब वह किसी विदेश यात्रा पर होती है तब भी उस विदेश में लोग उसके पास इसी उद्देश्य से आते रहते हैं। एन्ना सोचती है कि ऐसा इस कारण होता है क्योंकि वह लोगों को विश्वासयोग्य और इमानदार लगती है। मेरा विचार है कि शायद यह इसलिए होता है क्योंकि उसके हाव-भाव से यह प्रगट होता है कि वह भली भाँति जानती है कि वह कहाँ है और कहाँ जा रही है। हमारी एक अन्य सहेली का मानना है कि शायद इसका कारण यह है कि एन्ना में खोए हुओं को आकर्षित करने का गुण है।

   आत्मिक रीति से देखा जाए तो यह तीनों ही गुण हम मसीही विश्वासियों में पाए जाने चाहिएं। मसीही विश्वासी होने के नाते हमारे जीवनों का निश्चित उद्देश्य और दिशा है, हम भली भाँति जानते हैं कि हमारा गन्तव्य स्थान क्या है, हम कहीं अनिश्चितता में भटक नहीं रहे हैं वरन हम जानते हैं कि हम वहाँ कैसे पहुँचेंगे। ये सभी बातें हमें परमेश्वर की बुलाहट के अनुसार कार्य करने का भरोसा देती हैं, और जब लोग हमारे जीवनों में यह विश्वास देखते हैं तो जो भटका हुआ अनुभव करते हैं वे भी मार्गदर्शन के लिए हमारी ओर आकर्षित होते हैं।

   परमेश्वर ने कभी मनुष्य को अकेला नहीं छोड़ा है, परमेश्वर ने सदा ही अपनी उपस्थिति इस पृथ्वी पर बनाई रखी है जिससे जो मनुष्य उसे खोजना चाहते हैं वे उस तक पहुँच सकें। इस संसार को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए परमेश्वर की पहली ज्योति इस्त्राएल राष्ट्र था (यशायाह 42:6) और इस्त्राएल के महान राजा सुलेमान ने प्रार्थना करी कि परमेश्वर का महान नाम लोगों को परमेश्वर की ओर आकर्षित करे (1 राजा 8:41-43)। इस्त्राएल राष्ट्र की ज्योति की पराकाष्ठता प्रभु यीशु थे जो जगत की ज्योति बनकर आए थे (यूहन्ना 9:5)। और अब प्रभु यीशु ने यह कार्य अपने अनुयायियों, अर्थात हम मसीही विश्वासियों को सौंप रखा है कि वे जगत की ज्योति हों (मत्ती 5:14) जिससे संसार के लोग परमेश्वर तक पहुँचने का मार्गदर्शन पा सकें।
   इस लिए यह हम मसीही विश्वासियों का कर्तव्य है कि संसार के लोगों के लिए सच्चे परमेश्वर से मेल-मिलाप कर लेने के मार्गदर्शक बनें (2 कुरिन्थियों 5:18)। विचार कीजिए, क्या परमेश्वर का यह उद्देश्य आपके जीवन से पूरा हो रहा है? - जूली ऐकैरमैन लिंक


दूसरों को पाप के अन्धकार से बाहर निकालने के लिए उन पर अपने जीवन की ज्योति को प्रगट करें।

मैं जगत में ज्योति हो कर आया हूं ताकि जो कोई मुझ पर विश्वास करे, वह अन्धकार में न रहे। - यूहन्ना 12:46

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 5:12-21
2 Corinthians 5:12 हम फिर भी अपनी बड़ाई तुम्हारे साम्हने नहीं करते वरन हम अपने विषय में तुम्हें घमण्‍ड करने का अवसर देते हैं, कि तुम उन्हें उत्तर दे सको, जो मन पर नहीं, वरन दिखवटी बातों पर घमण्‍ड करते हैं।
2 Corinthians 5:13 यदि हम बेसुध हैं, तो परमेश्वर के लिये; और यदि चैतन्य हैं, तो तुम्हारे लिये हैं। 
2 Corinthians 5:14 क्योंकि मसीह का प्रेम हमें विवश कर देता है; इसलिये कि हम यह समझते हैं, कि जब एक सब के लिये मरा तो सब मर गए। 
2 Corinthians 5:15 और वह इस निमित्त सब के लिये मरा, कि जो जीवित हैं, वे आगे को अपने लिये न जीएं परन्तु उसके लिये जो उन के लिये मरा और फिर जी उठा। 
2 Corinthians 5:16 सो अब से हम किसी को शरीर के अनुसार न समझेंगे, और यदि हम ने मसीह को भी शरीर के अनुसार जाना था, तौभी अब से उसको ऐसा नहीं जानेंगे। 
2 Corinthians 5:17 सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं। 
2 Corinthians 5:18 और सब बातें परमेश्वर की ओर से हैं, जिसने मसीह के द्वारा अपने साथ हमारा मेल-मिलाप कर लिया, और मेल-मिलाप की सेवा हमें सौंप दी है। 
2 Corinthians 5:19 अर्थात परमेश्वर ने मसीह में हो कर अपने साथ संसार का मेल मिलाप कर लिया, और उन के अपराधों का दोष उन पर नहीं लगाया और उसने मेल मिलाप का वचन हमें सौंप दिया है। 
2 Corinthians 5:20 सो हम मसीह के राजदूत हैं; मानो परमेश्वर हमारे द्वारा समझाता है: हम मसीह की ओर से निवेदन करते हैं, कि परमेश्वर के साथ मेल मिलाप कर लो। 
2 Corinthians 5:21 जो पाप से अज्ञात था, उसी को उसने हमारे लिये पाप ठहराया, कि हम उस में हो कर परमेश्वर की धामिर्कता बन जाएं।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 37-39


शनिवार, 11 जनवरी 2014

सेवार्थ


   मेरा एक मित्र नौकरी पाने के लिए एक साक्षात्कार में गया। वहाँ उससे पूछे गए प्रश्नों में से एक था, "आपके पास हमारे लायक कौन सी योग्यताएं हैं?" प्रश्न पूछने का उद्देश्य था यह आंकलन करना कि मेरा वह मित्र उस कंपनी में किस स्तर और किस प्रकार के कार्य के लिए उपयुक्त हो सकता था। मेरे मित्र ने तुरंत मन ही मन अपनी योग्यताओं और गुणों को दोहराया, और कंपनी द्वारा विज्ञापित नौकरी की आवश्यकतानुसार उपयुक्त बातें उन्हें बता दीं। संसार के कार्यों के लिए तो हमें योग्यताएं और गुण सीखने, बनाने, बढ़ाने और बताने पड़ते हैं परन्तु परमेश्वर के लिए कार्य करने के लिए केवल एक ही गुण चाहिए - परमेश्वर के प्रति संपूर्ण समर्पण। हमारे परमेश्वर को समर्पण का स्तर ही परमेश्वर के प्रति हमारे विश्वास के स्तर को निर्धारित करता है, और हमारे विश्वास का स्तर हमारे परमेश्वर के लिए उपयोगी होने की क्षमता को निर्धारित करता है।

   परमेश्वर ने अपनी प्रत्येक सन्तान को कुछ आत्मिक वरदान प्रदान किए हैं। यह वरदान हमारे अनुभवों, हमारे प्रशिक्षण और हमारी स्वाभाविक योग्यताओं के साथ मिलकर हमें एक अद्वितीय व्यक्तित्व बनाते हैं; एक ऐसा जन जो परमेश्वर द्वारा हमारे लिए पहले से निर्धारित भले कार्यों को करने के लिए सर्वथा उपयुक्त है। यदि परमेश्वर आपसे कुछ कार्य लेना चाहता है, तो वह पहले आपको उस कार्य के लिए तैयार भी करेगा और आवश्यक गुण तथा योग्यताएं भी देगा। उसका चुनाव संसार के समान नहीं है जहाँ हम अपनी योग्यताओं के आधार पर संसार के अधिकारियों को प्रभावित करने का प्रयास करते हैं। परमेश्वर हमें हम से अधिक भली रीति से जानता है। वह जानता है कि हम क्या कुछ कर सकते हैं और वह हमें उसके द्वारा निर्धारित सेवकाई के लिए तैयार करके ही वह ज़िम्मेदारी सौंपता है। उसे केवल एक ही बात हमसे चाहिए, कि हम उसके प्रति विश्वासयोग्य बने रहें: "फिर यहां भण्‍डारी में यह बात देखी जाती है, कि विश्वासयोग्य निकले" (1 कुरिन्थियों 4:2)। इसलिए यदि परमेश्वर आपको किसी कार्य के लिए बुला रहा है तो विश्वास रखिए कि उसने आप को उस कार्य के लिए आवश्यक योग्यताओं से परिपूर्ण किया है और आप की सफलता के लिए मार्ग तथा सहायता वह ही प्रदान करेगा।

   क्या परमेश्वर ने आपको अपनी सेवार्थ बुलाया है? कार्य, कठिनाईयों या परिस्थितियों से ना घबराएं; कार्य को पूरा करने के लिए आपका सहायक, आपको सामर्थ देने वाला, आपका मार्गदर्शन करने वाला स्वयं परमेश्वर ही है। बस विश्वास में आगे बढ़ते जाएं। - सिंडी हैस कैसपर


आत्मिक वरदान परमेश्वर की सेवकाई में उपयोग के लिए हैं, अपनी प्रशंसा पाने के लिए नहीं।

यह बात सच है, और मैं चाहता हूं, कि तू इन बातों के विषय में दृढ़ता से बोले इसलिये कि जिन्हों ने परमेश्वर की प्रतीति की है, वे भले-भले कामों में लगे रहने का ध्यान रखें: ये बातें भली, और मनुष्यों के लाभ की हैं। - तीतुस 3:8

बाइबल पाठ: इफिसियों 2:1-10
Ephesians 2:1 और उसने तुम्हें भी जिलाया, जो अपने अपराधों और पापों के कारण मरे हुए थे। 
Ephesians 2:2 जिन में तुम पहिले इस संसार की रीति पर, और आकाश के अधिकार के हाकिम अर्थात उस आत्मा के अनुसार चलते थे, जो अब भी आज्ञा न मानने वालों में कार्य करता है। 
Ephesians 2:3 इन में हम भी सब के सब पहिले अपने शरीर की लालसाओं में दिन बिताते थे, और शरीर, और मन की मनसाएं पूरी करते थे, और और लोगों के समान स्‍वभाव ही से क्रोध की सन्तान थे। 
Ephesians 2:4 परन्तु परमेश्वर ने जो दया का धनी है; अपने उस बड़े प्रेम के कारण, जिस से उसने हम से प्रेम किया। 
Ephesians 2:5 जब हम अपराधों के कारण मरे हुए थे, तो हमें मसीह के साथ जिलाया; (अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है।) 
Ephesians 2:6 और मसीह यीशु में उसके साथ उठाया, और स्‍वर्गीय स्थानों में उसके साथ बैठाया। 
Ephesians 2:7 कि वह अपनी उस कृपा से जो मसीह यीशु में हम पर है, आने वाले समयों में अपने अनुग्रह का असीम धन दिखाए। 
Ephesians 2:8 क्योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है, और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर का दान है। 
Ephesians 2:9 और न कर्मों के कारण, ऐसा न हो कि कोई घमण्‍ड करे। 
Ephesians 2:10 क्योंकि हम उसके बनाए हुए हैं; और मसीह यीशु में उन भले कामों के लिये सृजे गए जिन्हें परमेश्वर ने पहिले से हमारे करने के लिये तैयार किया।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 33-36


शुक्रवार, 10 जनवरी 2014

अनेपक्षित


   परमेश्वर के वचन बाइबल के पुराने नियम खण्ड में रूत की पुस्तक एक अद्भुत सच्ची जीवन गाथा है। यह पुस्तक है तो छोटी सी, लेकिन इस में परमेश्वर का एक अनोखा चित्रण है, उसके अनुग्रह की एक विलक्षण कहानी है, बार बार उसका नाम लिया गया है।

   यह पुस्तक आरंभ होती है इस्त्राएल के बेतलेहम में पड़े अकाल और इस अकाल से पीड़ित एक परिवार के साथ। अकाल से बचने के लिए पति, पत्नी और दो बेटों का यह परिवार अपना स्थान और भूमि छोडकर एक दूसरे देश मोआब को चला जाता है। वहाँ पर दोनो बेटों की शादियाँ उस देश की स्त्रियों के साथ हो जाती हैं, और कुछ समय में पति और दोनों बेटों की मृत्यु भी हो जाती है। अब केवल पत्नी, जिसका नाम नाओमी है अपनी दो बहुओं के साथ बचती है और वह वापस बेतलेहम लौट जाने की योजना बनाती है और अपनी दोनों निसन्तान बहुओं से कहती है कि वे अपने ही देश मोआब में बनी रहें और अपने घर फिर बसाएं। एक बहु तो उसकी बात मानकर वहीं रुक जाती है किन्तु दूसरी, जिसका नाम रूत है, अपनी सास के साथ ही इस्त्राएल के बेतलेहम जाने की ठान लेती है, और अपनी सास नाओमी के साथ ही बेतलेहम आ जाती है।

   नाओमी शायद यह सोच कर बेतलेहम से गई थी कि वह जब लौटेगी तो समृद्ध और संपन्न होगी, लेकिन हुआ बिलकुल विपरीत और अनेपक्षित; इसलिए उसके लौटने पर जब लोग उससे बातचीत करते हैं तो, "उसने उन से कहा, मुझे नाओमी (अर्थात मनोहर) न कहो, मुझे मारा (अर्थात कड़ुवाहट) कहो, क्योंकि सर्वशक्तिमान्‌ ने मुझ को बड़ा दु:ख दिया है" (रूत 1:20)। लेकिन यह कहानी का अन्त नहीं है। थोड़े ही समय में नाओमी परमेश्वर के अद्भुत हाथ को अपने और रूत के जीवन में कार्यरत देखती है, और वह जो उन दोनों को जीवन का एक दुखद अन्त प्रतीत हो रहा था वास्तव में एक नई और आशीषित शुरुआत का प्रवेश द्वार बन जाता है। आगे चलकर रूत का विवाह एक संपन्न और संभ्रांत जन के साथ होता है और उससे उत्पन्न होने वाली सन्तान के वंश से राजा दाऊद और फिर प्रभु यीशु का जन्म होता है।

   नाओमी और रूत की कहानी से परमेश्वर हमें स्मरण दिलाता है कि परमेश्वर के मार्ग और उपाय अद्भुत हैं और वह अनेक अनेपक्षित विधियों द्वारा हमारे लिए कार्य करता रहता है, हमें आशीषित करता रहता है। वह कठिन, दुखदायी और समझ से बाहर परिस्थितियों और घटनाओं को भी अन्ततः हमारी भलाई और उन्नति के लिए प्रयोग कर लेता है। परमेश्वर की दया अपने बच्चों पर सदा बनी रहती है और उसके अनेपक्षित कार्य उनके जीवनों को संभालते और संवारते रहते हैं। इसलिए यदि आप प्रभु यीशु में मिली पापों की क्षमा और उद्धार द्वारा परमेश्वर की सन्तान हो गए हैं तो विपरीत परिस्थितियों के कारण कभी अपना हियाव ना छोड़ें; अनेपक्षित घटनाएं परमेश्वर की भलाईयों के आने के मार्ग हैं। - डेविड मैक्कैसलैंड


परमेश्वर के प्रत्यक्ष प्रावधान हमें परमेश्वर के परोक्ष उद्देश्यों पर विश्वास रखने को प्रेरित करते हैं।

नाओमी ने अपनी बहू से कहा, वह यहोवा की ओर से आशीष पाए, क्योंकि उसने न तो जीवित पर से और न मरे हुओं पर से अपनी करूणा हटाई! - रूत 2:20

बाइबल पाठ: रूत 2:17-23
Ruth 2:17 सो वह सांझ तक खेत में बीनती रही; तब जो कुछ बीन चुकी उसे फटका, और वह कोई एपा भर जौ निकला। 
Ruth 2:18 तब वह उसे उठा कर नगर में गई, और उसकी सास ने उसका बीना हुआ देखा, और जो कुछ उसने तृप्त हो कर बचाया था उसको उसने निकाल कर अपनी सास को दिया। 
Ruth 2:19 उसकी सास ने उस से पूछा, आज तू कहां बीनती, और कहां काम करती थी? धन्य वह हो जिसने तेरी सुधि ली है। तब उसने अपनी सास को बता दिया, कि मैं ने किस के पास काम किया, और कहा, कि जिस पुरूष के पास मैं ने आज काम किया उसका नाम बोअज है। 
Ruth 2:20 नाओमी ने अपनी बहू से कहा, वह यहोवा की ओर से आशीष पाए, क्योंकि उसने न तो जीवित पर से और न मरे हुओं पर से अपनी करूणा हटाई! फिर नाओमी ने उस से कहा, वह पुरूष तो हमारा कुटुम्बी है, वरन उन में से है जिन को हमारी भूमि छुड़ाने का अधिकार है। 
Ruth 2:21 फिर रूत मोआबिन बोली, उसने मुझ से यह भी कहा, कि जब तक मेरे सेवक मेरी कटनी पूरी न कर चुकें तब तक उन्हीं के संग संग लगी रह। 
Ruth 2:22 नाओमी ने अपनी बहु रूत से कहा, मेरी बेटी यह अच्छा भी है, कि तू उसी की दासियों के साथ साथ जाया करे, और वे तुझ को दूसरे के खेत में न मिलें। 
Ruth 2:23 इसलिये रूत जौ और गेहूं दोनों की कटनी के अन्त तक बीनने के लिये बोअज की दासियों के साथ साथ लगी रही; और अपनी सास के यहां रहती थी।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 30-32


गुरुवार, 9 जनवरी 2014

बाधा या आशीष?


   यदि आप का जीवन भी मेरे जीवन के समान है तो आप समझ सकते हैं कि पूरे दिन के कार्य को पहले से योजनाबद्ध रखने का क्या तात्पर्य है। मेरा एक कैलेण्डर है जो मुझे सारे दिन में मेरे समय पर कब किस का अधिकार है बताता है - कब किससे कितनी देर के लिए मिलना है, कब क्या करना है, आदि सब उसमें दर्ज रहता है। लेकिन साथ ही अवश्य ही कोई ना कोई बाधा या अनेपक्षित बात मेरे इस योजनाबद्ध दिन को अस्त-व्यस्त कर देती है। अकसर ये बातें और बाधाएं खिसिया देने वाली होती हैं, लेकिन कभी कभी वे उपयोगी और लाभकारी भी हो जाती हैं।

   परमेश्वर का वचन बाइबल हमें दिखाती है कि परमेश्वर द्वारा किए गए अनेक महान कार्य, लोगों के जीवन में ऐसी ’बाधा’ बनकर आए जिसने उनके सामन्य चल रहे जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया। उदाहरणस्वरूप मरियम के जीवन को ही देखिए। मरियम एक कुँवारी कन्या थी जिसकी मंगनी हो गई थी, इसलिए जब परमेश्वर के स्वर्गदूत ने आकर उसे सन्देश दिया कि वह गर्भवती होगी और पुत्र जनेगी जिसका नाम यीशु रखा जाएगा तो निस्सन्देह उसके सामान्य रूप से चल रहे जीवन के लिए यह बहुत बेचैन करने वाला और चिंता का विषय था (लूका 1:26-31)। इसी प्रकार आरंभिक मसीही विश्वास और विश्वासियों के कट्टर विरोधी उन्मादी शाउल को ही लीजिए, जो और मसीही विश्वासियों को पकड़ कर लाने के लिए दमिश्क की ओर जा रहा था जब उसका सामना प्रभु यीशु मसीह से हुआ (प्रेरितों 9:1-9); इस जीवन परिवर्तन कर देने वाली बाधा ने मसीह यीशु विरोधी उन्मादी शाउल को मसीह यीशु का अडिग विश्वासी प्रेरित पौलुस बना दिया जो मसीही विश्वास की बढ़ोतरी और परमेश्वर के वचन की कई पुस्तकों और पत्रियों के लिखे जाने का कारण हुआ।

   भजनकार हमें स्मरण दिलाता है कि "यहोवा अन्य अन्य जातियों की युक्ति को व्यर्थ कर देता है; वह देश देश के लोगों की कल्पनाओं को निष्फल करता है" (भजन 33:10)। लेकिन फिर भी हम अकसर अपने व्यवस्थित और सामान्य चल रहे जीवन में आई बाधाओं के कारण कुंठित हो जाते हैं, उन बाधाओं के कारण खिसियाते हैं, सन्देह करते हैं, डरते हैं। जब भी ऐसी कोई परिस्थिति आए हमें स्मरण रखना चाहिए कि प्रत्येक मसीही विश्वासी का जीवन परमेश्वर के हाथों में सुरक्षित है और वह हर परिस्थिति में अपने जन के लिए केवल भला ही होने देगा। इसलिए बाधाओं से विचिलित ना हों वरन उन्हें आशीषों के अवसर के रूप में देखें - परमेश्वर हमारी योजना के स्थान पर अपनी भली योजना हमारे जीवन में कार्यान्वित कर रहा है। - जो स्टोवैल


अपने जीवन में आने वाली अगली बाधा से खिसियाएं नहीं वरन उसमें परमेश्वर की योजना ढूँढ कर उसे पूरी करने का प्रयास करें।

मनुष्य के मन में बहुत सी कल्पनाएं होती हैं, परन्तु जो युक्ति यहोवा करता है, वही स्थिर रहती है। - नीतिवचन 19:21

बाइबल पाठ: भजन 33:10-15
Psalms 33:10 यहोवा अन्य अन्य जातियों की युक्ति को व्यर्थ कर देता है; वह देश देश के लोगों की कल्पनाओं को निष्फल करता है। 
Psalms 33:11 यहोवा की युक्ति सर्वदा स्थिर रहेगी, उसके मन की कल्पनाएं पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहेंगी। 
Psalms 33:12 क्या ही धन्य है वह जाति जिसका परमेश्वर यहोवा है, और वह समाज जिसे उसने अपना निज भाग होने के लिये चुन लिया हो! 
Psalms 33:13 यहोवा स्वर्ग से दृष्टि करता है, वह सब मनुष्यों को निहारता है; 
Psalms 33:14 अपने निवास के स्थान से वह पृथ्वी के सब रहने वालों को देखता है, 
Psalms 33:15 वही जो उन सभों के हृदयों को गढ़ता, और उनके सब कामों का विचार करता है।

एक साल में बाइबल: 

  • उत्पत्ति 27-29


बुधवार, 8 जनवरी 2014

दान


   मेरे पति का जन्म-दिन निकट ही था, और मैंने उन से पूछा कि जन्म-दिन के उपहार के लिए उन्हें क्या पसन्द होगा। वे बोले कि मुझे कोई उपहार नहीं चाहिए; मैंने अपने मन में सोचा, "हाँ, हाँ, मैं जानती हूँ कि कोई उपहार चाहिए या नहीं!" मैंने उन पर दबाव दिया कि वे अपनी पसन्द की कोई चीज़ बताएं। मेरे इस प्रकार दबाव देने पर वे बोले कि वे चाहते हैं कि जो पैसा हम लोग उनके लिए उपहार खरीदने पर व्यय करने  की योजना बना रहे हैं, उस पैसे को किसी ज़रूरतमन्द को दान कर दिया जाए।

   परमेश्वर का वचन बाइबल हमें सिखाती है कि हमें स्वेच्छा और उदारता से देना चाहिए ना कि अनिच्छा से अथवा केवल औपचारिकता पूरी करने के लिए। हमारा दान परमेश्वर के कार्य और परमेश्वर के सेवकों की सहायता के लिए होना चाहिए (2 कुरिन्थियों 9:7)। इस प्रकार का स्वेच्छा से दिया गया दान, देने वाले के लिए हर्ष का कारण होता है। जब राजा दाऊद ने अपने सोने, चांदी के भण्डार से परमेश्वर का मन्दिर बनवाने के लिए दान दिया, तो अनेक इस्त्राएली अधिकारियों ने भी उसके इस उदार कार्य का अनुसरण किया। उन के द्वारा पीतल, लोहा, मणि और बहुमूल्य धातुओं के दान किए जाने के बाद "तब प्रजा के लोग आनन्दित हुए, क्योंकि हाकिमों ने प्रसन्न हो कर खरे मन और अपनी अपनी इच्छा से यहोवा के लिये भेंट दी थी; और दाऊद राजा बहुत ही आनन्दित हुआ" (1 इतिहास 29:9)।

   उस आनन्द के उत्सव में राजा दाऊद ने परमेश्वर की स्तुति करते हुए कहा "मैं क्या हूँ? और मेरी प्रजा क्या है? कि हम को इस रीति से अपनी इच्छा से तुझे भेंट देने की शक्ति मिले? तुझी से तो सब कुछ मिलता है, और हम ने तेरे हाथ से पाकर तुझे दिया है" (1 इतिहास 29:14)। राजा दाऊद इस तथ्य का अंगीकार कर रहा था कि अन्ततः परमेश्वर ही प्रत्येक वस्तु का वास्तविक स्वामी है। जब दाऊद के समान हम भी इस तथ्य को स्मरण रखते हैं तो हमें दान देने में कोई समस्या नहीं होती क्योंकि हम उसे ही तो वापस लौटा रहे हैं जो उस सब का वास्तविक स्वामी है, अर्थात परमेश्वर।

   इस कारण जब आप अगली बार पैसा, सेवा या कोई वस्तु मसीही सेवकाई के लिए दान करें तो दान के प्रति अपनी मनशा और अपने रवैये को भी देख लें - क्या आप स्वेच्छा और उदारता से दे रहे हैं, क्योंकि परमेश्वर ऐसे देने वालों से प्रेम करता है। - जेनिफ़र बेन्सन शुल्ट


हम कितना दान देते हैं से अधिक महत्वपूर्ण है हम कैसे दान देते हैं।

हर एक जन जैसा मन में ठाने वैसा ही दान करे न कुढ़ कुढ़ के, और न दबाव से, क्योंकि परमेश्वर हर्ष से देने वाले से प्रेम रखता है। - 2 कुरिन्थियों 9:7

बाइबल पाठ: 1 इतिहास 29:1-14
1 Chronicles 29:1 फिर राजा दाऊद ने सारी सभा से कहा, मेरा पुत्र सुलैमान सुकुमार लड़का है, और केवल उसी को परमेश्वर ने चुना है; काम तो भारी है, क्योंकि यह भवन मनुष्य के लिये नहीं, यहोवा परमेश्वर के लिये बनेगा। 
1 Chronicles 29:2 मैं ने तो अपनी शक्ति भर, अपने परमेश्वर के भवन के निमित्त सोने की वस्तुओं के लिये सोना, चान्दी की वस्तुओं के लिये चान्दी, पीतल की वस्तुओं के लिये पीतल, लोहे की वस्तुओं के लिये लोहा, और लकड़ी की वस्तुओं के लिये लकड़ी, और सुलैमानी पत्थर, और जड़ने के योग्य मणि, और पच्ची के काम के लिये रंग रंग के नग, और सब भांति के मणि और बहुत संगमर्मर इकट्ठा किया है। 
1 Chronicles 29:3 फिर मेरा मन अपने परमेश्वर के भवन में लगा है, इस कारण जो कुछ मैं ने पवित्र भवन के लिये इकट्ठा किया है, उस सब से अधिक मैं अपना निज धन भी जो सोना चान्दी के रूप में मेरे पास है, अपने परमेश्वर के भवन के लिये दे देता हूँ। 
1 Chronicles 29:4 अर्थात तीन हजार किक्कार ओपीर का सोना, और सात हजार किक्कार तपाई हुई चान्दी, जिस से कोठरियों की भीतें मढ़ी जाएं। 
1 Chronicles 29:5 और सोने की वस्तुओं के लिये सोना, और चान्दी की वस्तुओं के लिये चान्दी, और कारीगरों से बनाने वाले सब प्रकार के काम के लिये मैं उसे देता हूँ। और कौन अपनी इच्छा से यहोवा के लिये अपने को अर्पण कर देता है? 
1 Chronicles 29:6 तब पितरों के घरानों के प्रधानों और इस्राएल के गोत्रों के हाकिमों और सहस्रपतियों और शतपतियों और राजा के काम के अधिकारियों ने अपनी अपनी इच्छा से, 
1 Chronicles 29:7 परमेश्वर के भवन के काम के लिये पांच हजार किक्कार और दस हजार दर्कनोन सोना, दस हजार किक्कार चान्दी, अठारह हजार किक्कार पीतल, और एक लाख किक्कार लोहा दे दिया। 
1 Chronicles 29:8 और जिनके पास मणि थे, उन्होंने उन्हें यहोवा के भवन के खजाने के लिये गेर्शोनी यहीएल के हाथ में दे दिया। 
1 Chronicles 29:9 तब प्रजा के लोग आनन्दित हुए, क्योंकि हाकिमों ने प्रसन्न हो कर खरे मन और अपनी अपनी इच्छा से यहोवा के लिये भेंट दी थी; और दाऊद राजा बहुत ही आनन्दित हुआ। 
1 Chronicles 29:10 तब दाऊद ने सारी सभा के सम्मुख यहोवा का धन्यवाद किया, और दाऊद ने कहा, हे यहोवा! हे हमारे मूल पुरुष इस्राएल के परमेश्वर! अनादिकाल से अनन्तकाल तक तू धन्य है। 
1 Chronicles 29:11 हे यहोवा! महिमा, पराक्रम, शोभा, सामर्थ्य और वैभव, तेरा ही है; क्योंकि आकाश और पृथ्वी में जो कुछ है, वह तेरा ही है; हे यहोवा! राज्य तेरा है, और तू सभों के ऊपर मुख्य और महान ठहरा है। 
1 Chronicles 29:12 धन और महिमा तेरी ओर से मिलती हैं, और तू सभों के ऊपर प्रभुता करता है। सामर्थ्य और पराक्रम तेरे ही हाथ में हैं, और सब लोगों को बढ़ाना और बल देना तेरे हाथ में है। 
1 Chronicles 29:13 इसलिये अब हे हमारे परमेश्वर! हम तेरा ध्न्यवाद और तेरे महिमायुक्त नाम की स्तुति करते हैं। 
1 Chronicles 29:14 मैं क्या हूँ? और मेरी प्रजा क्या है? कि हम को इस रीति से अपनी इच्छा से तुझे भेंट देने की शक्ति मिले? तुझी से तो सब कुछ मिलता है, और हम ने तेरे हाथ से पाकर तुझे दिया है।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 23-26