ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

अनेपक्षित लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
अनेपक्षित लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शनिवार, 7 जून 2014

अनियंत्रित अनेपक्षित


   जीवन आक्समिक और आश्चर्यचकित कर देने वाली बातों से भरा हुआ है, जिनमें से कुछ जीवन की धारा को ही किसी अप्रीय दिशा में मोड़ देती हैं। मुझे अभी तक वह सदमा स्मरण है जो कई दशक पहले हमारे पिताजी को नौकरी से निकाले जाने के कारण हमें लगा था, जबकि पिताजी की कोई गलती भी नहीं थी। अब घर चलाने और बच्चों की परवरिश करने का साधन अचानक ही जाता रहा था, और यह हम सब के लिए एक बड़ा आघात था। लेकिन यद्यपि पिताजी की नौकरी जाना उनके नियंत्रण के बिलकुल बाहर था और पूर्णतः अनेपक्षित था, फिर भी वे यह जानते और विश्वास रखते थे कि वे परमेश्वर पर अपने भविष्य के लिए निर्भर रह सकते हैं।

   हम मसीही विश्वासियों को भी यह स्मरण रखना चाहिए कि जीवन में कई बातें हमारे नियंत्रण से बाहर और अनेपक्षित होती हैं। ऐसी परिस्थितियों का सामना करने में सहायाता प्रदान करने के लिए परमेश्वर के वचन बाइबल में याकूब की पत्री में कुछ बातें लिखी हैं: "तुम जो यह कहते हो, कि आज या कल हम किसी और नगर में जा कर वहां एक वर्ष बिताएंगे, और व्यापार कर के लाभ उठाएंगे। और यह नहीं जानते कि कल क्या होगा: सुन तो लो, तुम्हारा जीवन है ही क्या? तुम तो मानो भाप समान हो, जो थोड़ी देर दिखाई देती है, फिर लोप हो जाती है। इस के विपरीत तुम्हें यह कहना चाहिए, कि यदि प्रभु चाहे तो हम जीवित रहेंगे, और यह या वह काम भी करेंगे" (याकूब 4:13-15)। याकूब ने जिन लोगों को यह पत्री लिखी थी वे अपनी योजनाएं तो बना रहे थे किंतु इस बात का ध्यान नहीं रख रहे थे कि परमेश्वर ही उनके भविष्य को निर्धारित करने वाला है।

   तो क्या फिर भविष्य के लिए योजनाएं बनाना गलत है? जी नहीं, बिल्कुल नहीं; लेकिन यह बात नज़रंदाज़ कर देना कि परमेश्वर कुछ "अनियंत्रित और अनेपक्षित" भी कर सकता है, गलत है। परमेश्वर अपने बच्चों के लिए और उनके जीवन में जो भी करता है, होने देता है, वह अन्ततः उनके भले के लिए ही होता है; चाहे उस समय वह भला दिखाई ना भी दे। इसलिए अपनी हर योजना में परमेश्वर को स्थान और नियंत्रण देना और उसकी ओर से आने वाली हर परिस्थिति को विश्वास के साथ स्वीकार करना हमारे लिए भला है, चाहे वह "अनियंत्रित और अनेपक्षित" ही क्यों ना हो। - बिल क्राउडर


चाहे हम मसीही विश्वासी यह नहीं जानते कि भविष्य में क्या होगा; लेकिन हम उसे जानते हैं जो भविष्य को निर्धारित करता है।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ: याकूब 4:13-17
James 4:13 तुम जो यह कहते हो, कि आज या कल हम किसी और नगर में जा कर वहां एक वर्ष बिताएंगे, और व्यापार कर के लाभ उठाएंगे। 
James 4:14 और यह नहीं जानते कि कल क्या होगा: सुन तो लो, तुम्हारा जीवन है ही क्या? तुम तो मानो भाप समान हो, जो थोड़ी देर दिखाई देती है, फिर लोप हो जाती है। 
James 4:15 इस के विपरीत तुम्हें यह कहना चाहिए, कि यदि प्रभु चाहे तो हम जीवित रहेंगे, और यह या वह काम भी करेंगे। 
James 4:16 पर अब तुम अपनी ड़ींग पर घमण्‍ड करते हो; ऐसा सब घमण्‍ड बुरा होता है। 
James 4:17 इसलिये जो कोई भलाई करना जानता है और नहीं करता, उसके लिये यह पाप है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 40-42


शुक्रवार, 10 जनवरी 2014

अनेपक्षित


   परमेश्वर के वचन बाइबल के पुराने नियम खण्ड में रूत की पुस्तक एक अद्भुत सच्ची जीवन गाथा है। यह पुस्तक है तो छोटी सी, लेकिन इस में परमेश्वर का एक अनोखा चित्रण है, उसके अनुग्रह की एक विलक्षण कहानी है, बार बार उसका नाम लिया गया है।

   यह पुस्तक आरंभ होती है इस्त्राएल के बेतलेहम में पड़े अकाल और इस अकाल से पीड़ित एक परिवार के साथ। अकाल से बचने के लिए पति, पत्नी और दो बेटों का यह परिवार अपना स्थान और भूमि छोडकर एक दूसरे देश मोआब को चला जाता है। वहाँ पर दोनो बेटों की शादियाँ उस देश की स्त्रियों के साथ हो जाती हैं, और कुछ समय में पति और दोनों बेटों की मृत्यु भी हो जाती है। अब केवल पत्नी, जिसका नाम नाओमी है अपनी दो बहुओं के साथ बचती है और वह वापस बेतलेहम लौट जाने की योजना बनाती है और अपनी दोनों निसन्तान बहुओं से कहती है कि वे अपने ही देश मोआब में बनी रहें और अपने घर फिर बसाएं। एक बहु तो उसकी बात मानकर वहीं रुक जाती है किन्तु दूसरी, जिसका नाम रूत है, अपनी सास के साथ ही इस्त्राएल के बेतलेहम जाने की ठान लेती है, और अपनी सास नाओमी के साथ ही बेतलेहम आ जाती है।

   नाओमी शायद यह सोच कर बेतलेहम से गई थी कि वह जब लौटेगी तो समृद्ध और संपन्न होगी, लेकिन हुआ बिलकुल विपरीत और अनेपक्षित; इसलिए उसके लौटने पर जब लोग उससे बातचीत करते हैं तो, "उसने उन से कहा, मुझे नाओमी (अर्थात मनोहर) न कहो, मुझे मारा (अर्थात कड़ुवाहट) कहो, क्योंकि सर्वशक्तिमान्‌ ने मुझ को बड़ा दु:ख दिया है" (रूत 1:20)। लेकिन यह कहानी का अन्त नहीं है। थोड़े ही समय में नाओमी परमेश्वर के अद्भुत हाथ को अपने और रूत के जीवन में कार्यरत देखती है, और वह जो उन दोनों को जीवन का एक दुखद अन्त प्रतीत हो रहा था वास्तव में एक नई और आशीषित शुरुआत का प्रवेश द्वार बन जाता है। आगे चलकर रूत का विवाह एक संपन्न और संभ्रांत जन के साथ होता है और उससे उत्पन्न होने वाली सन्तान के वंश से राजा दाऊद और फिर प्रभु यीशु का जन्म होता है।

   नाओमी और रूत की कहानी से परमेश्वर हमें स्मरण दिलाता है कि परमेश्वर के मार्ग और उपाय अद्भुत हैं और वह अनेक अनेपक्षित विधियों द्वारा हमारे लिए कार्य करता रहता है, हमें आशीषित करता रहता है। वह कठिन, दुखदायी और समझ से बाहर परिस्थितियों और घटनाओं को भी अन्ततः हमारी भलाई और उन्नति के लिए प्रयोग कर लेता है। परमेश्वर की दया अपने बच्चों पर सदा बनी रहती है और उसके अनेपक्षित कार्य उनके जीवनों को संभालते और संवारते रहते हैं। इसलिए यदि आप प्रभु यीशु में मिली पापों की क्षमा और उद्धार द्वारा परमेश्वर की सन्तान हो गए हैं तो विपरीत परिस्थितियों के कारण कभी अपना हियाव ना छोड़ें; अनेपक्षित घटनाएं परमेश्वर की भलाईयों के आने के मार्ग हैं। - डेविड मैक्कैसलैंड


परमेश्वर के प्रत्यक्ष प्रावधान हमें परमेश्वर के परोक्ष उद्देश्यों पर विश्वास रखने को प्रेरित करते हैं।

नाओमी ने अपनी बहू से कहा, वह यहोवा की ओर से आशीष पाए, क्योंकि उसने न तो जीवित पर से और न मरे हुओं पर से अपनी करूणा हटाई! - रूत 2:20

बाइबल पाठ: रूत 2:17-23
Ruth 2:17 सो वह सांझ तक खेत में बीनती रही; तब जो कुछ बीन चुकी उसे फटका, और वह कोई एपा भर जौ निकला। 
Ruth 2:18 तब वह उसे उठा कर नगर में गई, और उसकी सास ने उसका बीना हुआ देखा, और जो कुछ उसने तृप्त हो कर बचाया था उसको उसने निकाल कर अपनी सास को दिया। 
Ruth 2:19 उसकी सास ने उस से पूछा, आज तू कहां बीनती, और कहां काम करती थी? धन्य वह हो जिसने तेरी सुधि ली है। तब उसने अपनी सास को बता दिया, कि मैं ने किस के पास काम किया, और कहा, कि जिस पुरूष के पास मैं ने आज काम किया उसका नाम बोअज है। 
Ruth 2:20 नाओमी ने अपनी बहू से कहा, वह यहोवा की ओर से आशीष पाए, क्योंकि उसने न तो जीवित पर से और न मरे हुओं पर से अपनी करूणा हटाई! फिर नाओमी ने उस से कहा, वह पुरूष तो हमारा कुटुम्बी है, वरन उन में से है जिन को हमारी भूमि छुड़ाने का अधिकार है। 
Ruth 2:21 फिर रूत मोआबिन बोली, उसने मुझ से यह भी कहा, कि जब तक मेरे सेवक मेरी कटनी पूरी न कर चुकें तब तक उन्हीं के संग संग लगी रह। 
Ruth 2:22 नाओमी ने अपनी बहु रूत से कहा, मेरी बेटी यह अच्छा भी है, कि तू उसी की दासियों के साथ साथ जाया करे, और वे तुझ को दूसरे के खेत में न मिलें। 
Ruth 2:23 इसलिये रूत जौ और गेहूं दोनों की कटनी के अन्त तक बीनने के लिये बोअज की दासियों के साथ साथ लगी रही; और अपनी सास के यहां रहती थी।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 30-32