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शनिवार, 13 सितंबर 2014

अकेले


   मई 20-21, 1927 वायु यान द्वारा उड़ान के इतिहास में एक ’मील का पत्थर’ है। इसी दिन चार्ल्स लिंडरबर्घ ने प्रशान्त महासागर को अपने वायुयान की उड़ान द्वारा अकेले ही पार किया था। इससे पहले और भी उड़ाने थीं जो प्रशान्त महासागर के एक से दूसरे छोर तक हुईं थीं, लेकिन चार्ल्स लिंडरबर्घ की वह उड़ान इसलिए अनूठी थी क्योंकि उन्होंने अकेले ही ऐसा किया था; यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी। जब लिंडरबर्घ फ्रांस में पैरिस के हवाई अड्डे पर उतरे तो हज़ारों की भीड़ ने उनका स्वागत किया, उनकी सफलता की सराहना करी। जब वे वापस अमेरिका लौटे तो वहाँ भी उनका भव्य स्वागत हुआ, उनके व्यक्तिगत साहस तथा उनकी उपलब्धि के लिए उन्हें पुरस्कार दिए गए, उनके लिए जलूस निकाले गए।

   इसमें कोई दो राय नहीं कि चार्ल्स लिंडरबर्घ यह कारनामा वास्तव में जोखिम भरा और साहसी था, लेकिन आज हमारे लिए पाप से भरे इस संसार में सुरक्षित बने रहना उससे भी अधिक खतरनाक हो सकता है। लेकिन मसीही विश्वासियों को इस बात को लेकर चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है, वे आश्वस्त और प्रोत्साहित रह सकते हैं कि उन्हें अपने जीवन में कभी अकेले रहना तथा अपनी ही सामर्थ से खतरों का सामना नहीं करना पड़ेगा। अपने क्रूस पर चढ़ाए जाने के लिए पकड़वाए जाने से पहले प्रभु यीशु ने अपने चेलों को आश्वस्त किया कि वे उन्हें अकेला कदापि नहीं छोड़ेंगे, वे अपनी पवित्र आत्मा को चेलों के साथ तथा चेलों में निवास करने को भेजेंगे (यूहन्ना 14:16-17)। बाद में प्रेरित पौलुस ने इस बात की पुष्टि करते हुए अपनी पत्री में लिखा, "क्या तुम नहीं जानते, कि तुम परमेश्वर का मन्दिर हो, और परमेश्वर का आत्मा तुम में वास करता है?" (1 कुरिन्थियों 3:16)।

   परेशानी और निराशा से भरे इस संसार में हम मसीही विश्वासी इस बात से साहस प्राप्त कर सकते हैं कि परमेश्वर का पवित्र आत्मा सदा ही हम में और हमारे साथ बना रहता है, अपनी शान्ति तथा ढाढ़स हमें देता रहता है (यूहन्ना 14:26-27)। यदि आप ने प्रभु यीशु से पाप क्षमा माँग कर उसे अपना उद्धारकर्ता माना है, अपना जीवन उसे समर्पित किया है, तो निश्चिंत रहिए; जीवन की किसी भी परिस्थिति में, किसी भी समय, आप कभी अकेले नहीं होंगे, परमेश्वर पवित्र आत्मा आपके साथ तथा आप में सदा बना रहेगा, आपको संभाले रहेगा, आपको मार्गदर्शन, शांति और सांत्वना देता रहेगा। - बिल क्राउडर


हम मसीही विश्वासियों के अन्दर बसने वाला पवित्र आत्मा इस बात की निश्चितता है कि हम कभी अकेले नहीं हैं।

क्या तुम नहीं जानते, कि तुम्हारी देह पवित्रात्मा का मन्दिर है; जो तुम में बसा हुआ है और तुम्हें परमेश्वर की ओर से मिला है, और तुम अपने नहीं हो? - 1 कुरिन्थियों 6:19

बाइबल पाठ: यूहन्ना 14:15-27
John 14:15 यदि तुम मुझ से प्रेम रखते हो, तो मेरी आज्ञाओं को मानोगे। 
John 14:16 और मैं पिता से बिनती करूंगा, और वह तुम्हें एक और सहायक देगा, कि वह सर्वदा तुम्हारे साथ रहे। 
John 14:17 अर्थात सत्य का आत्मा, जिसे संसार ग्रहण नहीं कर सकता, क्योंकि वह न उसे देखता है और न उसे जानता है: तुम उसे जानते हो, क्योंकि वह तुम्हारे साथ रहता है, और वह तुम में होगा। 
John 14:18 मैं तुम्हें अनाथ न छोडूंगा, मैं तुम्हारे पास आता हूं। 
John 14:19 और थोड़ी देर रह गई है कि फिर संसार मुझे न देखेगा, परन्तु तुम मुझे देखोगे, इसलिये कि मैं जीवित हूं, तुम भी जीवित रहोगे। 
John 14:20 उस दिन तुम जानोगे, कि मैं अपने पिता में हूं, और तुम मुझ में, और मैं तुम में। 
John 14:21 जिस के पास मेरी आज्ञा है, और वह उन्हें मानता है, वही मुझ से प्रेम रखता है, और जो मुझ से प्रेम रखता है, उस से मेरा पिता प्रेम रखेगा, और मैं उस से प्रेम रखूंगा, और अपने आप को उस पर प्रगट करूंगा। 
John 14:22 उस यहूदा ने जो इस्करियोती न था, उस से कहा, हे प्रभु, क्या हुआ की तू अपने आप को हम पर प्रगट किया चाहता है, और संसार पर नहीं। 
John 14:23 यीशु ने उसको उत्तर दिया, यदि कोई मुझ से प्रेम रखे, तो वह मेरे वचन को मानेगा, और मेरा पिता उस से प्रेम रखेगा, और हम उसके पास आएंगे, और उसके साथ वास करेंगे। 
John 14:24 जो मुझ से प्रेम नहीं रखता, वह मेरे वचन नहीं मानता, और जो वचन तुम सुनते हो, वह मेरा नहीं वरन पिता का है, जिसने मुझे भेजा।
John 14:25 ये बातें मैं ने तुम्हारे साथ रहते हुए तुम से कहीं। 
John 14:26 परन्तु सहायक अर्थात पवित्र आत्मा जिसे पिता मेरे नाम से भेजेगा, वह तुम्हें सब बातें सिखाएगा, और जो कुछ मैं ने तुम से कहा है, वह सब तुम्हें स्मरण कराएगा। 
John 14:27 मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 31-33


शुक्रवार, 12 सितंबर 2014

भला और बहुत


   मुझे यह मानना होगा कि मैं मीठा बहुत पसन्द करता हूँ। यदि मेरे पास बहुतायत से टॉफियाँ उपलब्ध हों तो मेरे लिए जीवन बहुत सुखी है; लेकिन यह भी है कि मैं चाहे जितनी टॉफियाँ अपने पास जमा कर लूँ, वे समाप्त होती रहती हैं तथा एक सीमा से अधिक उनका सेवन शरीर पर दुषप्रभाव भी डालता है। जीवन में और भी बहुत सी अच्छी वस्तुएं हैं, लेकिन उन टॉफियों की तरह, वे भी कभी ना कभी समाप्त हो ही जाती हैं; और सर्वोत्तम वस्तुएं भी समाप्त हो जाने के बाद जीवन में खालीपन का आभास या फिर खिन्नता की भावना छोड़ सकती हैं।

   इसलिए परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार द्वारा कही बात "मैं ने परमेश्वर से कहा है, कि तू ही मेरा प्रभु है; तेरे सिवाए मेरी भलाई कहीं नहीं" (भजन 16:2) मेरे अन्दर कौतहूल उत्पन्न करती है - हम सब जानते हैं कि परमेश्वर भला है, लेकिन वह पिछला अवसर कब था जब आपने परमेश्वर को अपने जीवन की सर्वोत्तम भलाई के रूप में ग्रहण किया था?

   भजनकार इसी भजन में यह भी बताता है कि परमेश्वर कितना भला है: वह हमारा रक्षक है (पद 1); हमारा संपूर्ण भलाई करने वाला है (पद 2); हमें सम्मति तथा शिक्षा देने वाला है (पद 7); वह हमारे जीवन का मार्ग और हमें भरपूरी से आनन्द देने वाला है (पद 11)। अब भला ऐसी भलाई और कहाँ मिल सकेगी, और ऐसी भलाई करने वाले से कोई क्योंकर दूर भागे?

   लेकिन यह भी एक कटु सत्य है कि अपने जीवनों में परमेश्वर से मिलने वाली सर्वोत्तम और अनन्त काल की भलाई को नज़रंदाज़ करके हम अन्य छोटी-मोटी सांसारिक खुशियों के पीछे भागते रहते हैं, उन्हें प्रभु यीशु में होकर सारे संसार के सभी लोगों के लिए उपलब्ध करवाई गई परमेश्वर की भलाईयों का स्थान देते रहते हैं। परन्तु यह निश्चित है कि उन टॉफियों के समाप्त होने के समान ही संसार की अन्य सभी अल्पकालीन खुशियाँ भी कभी ना कभी जाती रहेंगी; और संसार की हर बात जीवन में कोई ना कोई दुषप्रभाव छोड़ती ही है। संसार की खुशियों की समाप्त होने पर यदि परमेश्वर और उसकी भलाई - प्रभु यीशु का हमारे जीवन में स्थान नहीं रहा है तो फिर उस आने वाले अनन्त जीवन में खालीपन तथा खिन्नता ही शेष रह जाएगी।

   वास्तव में केवल परमेश्वर ही सदा ही तथा सदाकाल के लिए भला है, और हमारे जीवनों के लिए उस की भलाई बहुत है। - जो स्टोवैल


केवल परमेश्वर ही भला है; उससे कम को स्वीकार ना करें।

मैं यहोवा के विषय कहूंगा, कि वह मेरा शरणस्थान और गढ़ है; वह मेरा परमेश्वर है, मैं उस पर भरोसा रखूंगा। - भजन 91:2

बाइबल पाठ: भजन 16:1-11
Psalms 16:1 हे ईश्वर मेरी रक्षा कर, क्योंकि मैं तेरा ही शरणागत हूं। 
Psalms 16:2 मैं ने परमेश्वर से कहा है, कि तू ही मेरा प्रभु है; तेरे सिवाए मेरी भलाई कहीं नहीं। 
Psalms 16:3 पृथ्वी पर जो पवित्र लोग हैं, वे ही आदर के योग्य हैं, और उन्हीं से मैं प्रसन्न रहता हूं। 
Psalms 16:4 जो पराए देवता के पीछे भागते हैं उनका दु:ख बढ़ जाएगा; मैं उनके लोहू वाले तपावन नहीं तपाऊंगा और उनका नाम अपने ओठों से नहीं लूंगा।
Psalms 16:5 यहोवा मेरा भाग और मेरे कटोरे का हिस्सा है; मेरे बाट को तू स्थिर रखता है। 
Psalms 16:6 मेरे लिये माप की डोरी मनभावने स्थान में पड़ी, और मेरा भाग मनभावना है।
Psalms 16:7 मैं यहोवा को धन्य कहता हूं, क्योंकि उसने मुझे सम्मत्ति दी है; वरन मेरा मन भी रात में मुझे शिक्षा देता है। 
Psalms 16:8 मैं ने यहोवा को निरन्तर अपने सम्मुख रखा है: इसलिये कि वह मेरे दाहिने हाथ रहता है मैं कभी न डगमगाऊंगा।
Psalms 16:9 इस कारण मेरा हृदय आनन्दित और मेरी आत्मा मगन हुई; मेरा शरीर भी चैन से रहेगा। 
Psalms 16:10 क्योंकि तू मेरे प्राण को अधोलोक में न छोड़ेगा, न अपने पवित्र भक्त को सड़ने देगा।
Psalms 16:11 तू मुझे जीवन का रास्ता दिखाएगा; तेरे निकट आनन्द की भरपूरी है, तेरे दाहिने हाथ में सुख सर्वदा बना रहता है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 28-30


गुरुवार, 11 सितंबर 2014

अनुसरण


   अधिकांश लोग इस बात से सहमत होंगे कि जीवन भले और बुरे का दुखदायी मिश्रण है। यह तथ्य विवाह, मित्रता, परिवार, कार्य और चर्च आदि सभी संबंधों तथा स्थानों पर देखा जाता है। परन्तु फिर भी जब स्वार्थ और अपने आप को ऊँचा उठाने की प्रवृति उन में देखने को मिलती है जो मसीह यीशु की सेवा और आराधना करते हैं तो यह निराश तथा चकित करने वाला होता है।

   जब प्रेरित यूहन्ना ने अपने मित्र गयूस को पत्र लिखा तो उसने उस चर्च की प्रशंसा करी जिस के साथ गयूस जुड़ा हुआ था। यूहन्ना ने उस मसीही मण्डली की प्रशंसा उनके सच्चे जीवन और उदार पहुनाई की भावना के लिए करी (3 यूहन्ना 1:3-8)। परन्तु उसी मण्डली में एक अन्य स्वभाव का व्यक्ति था - दियुत्रिफेस, जो अपने आप को बड़ा ठहराना चाहता था (पद 9), और अपने इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए उसने वहाँ परस्पर बैर का वातावरण बना रखा था।

   यूहन्ना ने उन्हें आश्वासन दिय कि जब वह अगली बार उनसे मिलने आएगा तब दियुत्रिफेस से स्वयं निपटेगा। परन्तु तब तक के लिए उस मण्डली को यूहन्ना का निर्देष था: "हे प्रिय, बुराई के नहीं, पर भलाई के अनुयायी हो, जो भलाई करता है, वह परमेश्वर की ओर से है; पर जो बुराई करता है, उसने परमेश्वर को नहीं देखा" (3 यूहन्ना 1:11)। कुछ ऐसी ही शिक्षा प्रेरित पौलुस ने रोम की मसीही मण्डली को भी दी थी: "बुराई से न हारो परन्तु भलाई से बुराई का जीत लो" (रोमियों 12:21)।

   किसी उत्तेजना पूर्ण विवाद के समय हमें "जैसे को तैसा" वाला सिद्धांत अपनाने का प्रलोभन आ सकता है, परन्तु परमेश्वर का वचन बाइबल हमें सिखाती है कि हम बुराई से मूँह मोड़ कर भलाई का अनुसरण करें। यही वह मार्ग है जो जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह ने हमें सिखाया है, और उसे जी कर के भी दिखाया है। - डेविड मैक्कैसलैंड


जैसे उजियाला अन्धकार पर विजयी रहता है, भलाई भी बुराई पर जयवंत रहती है।

परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि अपने बैरियों से प्रेम रखो और अपने सताने वालों के लिये प्रार्थना करो। जिस से तुम अपने स्‍वर्गीय पिता की सन्तान ठहरोगे क्योंकि वह भलों और बुरों दोनों पर अपना सूर्य उदय करता है, और धर्मियों और अधर्मियों दोनों पर मेंह बरसाता है। - मत्ती 5:44-45 

बाइबल पाठ: 3 यूहन्ना 1:1-14
3 John 1:1 मुझ प्राचीन की ओर से उस प्रिय गयुस के नाम, जिस से मैं सच्चा प्रेम रखता हूं।
3 John 1:2 हे प्रिय, मेरी यह प्रार्थना है; कि जैसे तू आत्मिक उन्नति कर रहा है, वैसे ही तू सब बातों मे उन्नति करे, और भला चंगा रहे। 
3 John 1:3 क्योंकि जब भाइयों ने आकर, तेरे उस सत्य की गवाही दी, जिस पर तू सचमुच चलता है, तो मैं बहुत ही आनन्‍दित हुआ। 
3 John 1:4 मुझे इस से बढ़कर और कोई आनन्द नहीं, कि मैं सुनूं, कि मेरे लड़के-बाले सत्य पर चलते हैं। 
3 John 1:5 हे प्रिय, जो कुछ तू उन भाइयों के साथ करता है, जो परदेशी भी हैं, उसे विश्वासी की नाईं करता है। 
3 John 1:6 उन्होंने मण्‍डली के साम्हने तेरे प्रेम की गवाही दी थी: यदि तू उन्हें उस प्रकार विदा करेगा जिस प्रकार परमेश्वर के लोगों के लिये उचित है तो अच्छा करेगा। 
3 John 1:7 क्योंकि वे उस नाम के लिये निकले हैं, और अन्यजातियों से कुछ नहीं लेते। 
3 John 1:8 इसलिये ऐसों का स्‍वागत करना चाहिए, जिस से हम भी सत्य के पक्ष में उन के सहकर्मी हों।
3 John 1:9 मैं ने मण्‍डली को कुछ लिखा था; पर दियुत्रिफेस जो उन में बड़ा बनना चाहता है, हमें ग्रहण नहीं करता। 
3 John 1:10 सो जब मैं आऊंगा, तो उसके कामों की जो वह कर रहा है सुधि दिलाऊंगा, कि वह हमारे विषय में बुरी बुरी बातें बकता है; और इस पर भी सन्‍तोष न कर के आप ही भाइयों को ग्रहण नहीं करता, और उन्हें जो ग्रहण करना चाहते हैं, मना करता है: और मण्‍डली से निकाल देता है। 
3 John 1:11 हे प्रिय, बुराई के नहीं, पर भलाई के अनुयायी हो, जो भलाई करता है, वह परमेश्वर की ओर से है; पर जो बुराई करता है, उसने परमेश्वर को नहीं देखा। 
3 John 1:12 देमेत्रियुस के विषय में सब ने वरन सत्य ने भी आप ही गवाही दी: और हम भी गवाही देते हैं, और तू जानता है, कि हमारी गवाही सच्ची है।
3 John 1:13 मुझे तुझ को बहुत कुछ लिखना तो था; पर सियाही और कलम से लिखना नहीं चाहता। 
3 John 1:14 पर मुझे आशा है कि तुझ से शीघ्र भेंट करूंगा: तब हम आमने सामने बातचीत करेंगे: तुझे शान्‍ति मिलती रहे। यहां के मित्र तुझे नमस्‍कार करते हैं: वहां के मित्रों से नाम ले ले कर नमस्‍कार कह देना।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 25-27


बुधवार, 10 सितंबर 2014

मार्गदर्शन


   कुछ समय पहले की बात है कि मेरी पत्नि की कार को मरम्मत के लिए खींच कर ले जाया जाना था। मैंने गाड़ी खींच कर ले जाने वाले वाहनों की कंपनी को फोन किया और उन्हें अपने घर तक पहुँचने के दिशा निर्देश भी दिए; साथ ही मैंने उन्हें यह भी समझाया कि जो चालक खींचने वाली गाड़ी को लेकर आए वो अपने वाहन में लगे जी.पी.एस. सिस्टम के निर्देश पर निर्भर ना हो क्योंकि जिस गली में हमारा घर था, उस गली के नाम के समान ही नाम वाली एक अन्य गली हमारे घर की गली के निकट ही थी, और इसके कारण लोग अकसर भटक जाते थे। मेरे फोन को सुनने वाले व्यक्ति ने मुझे आश्वस्त किया कि वह यह बात खींचने वाली गाड़ी के चालक को समझा देगा।

   मैं अपने घर के सामने खड़ा उस खींचने वाली गाड़ी की प्रतीक्षा कर रहा था और विचार कर रहा था कि उसे आने में इतनी देर क्यों हो रही है, कि मेरे फोन की घंटी बजने लगी। फोन करने वाला खींचने वाली गाड़ी का चालक ही था और कह रहा था कि वह अपने जी.पी.एस. के सहारे दिए गए पते पर पहुँचने का प्रयास कर रहा है किंतु पहुँच नहीं पा रहा है! अब मैंने फिर से उस चालक को घर तक पहुँचने के दिशा निर्देश दिए और समझाया कि अपने जी.पी.एस. पर निर्भर ना रहे, वरन मेरे मार्गदर्शन का पालन करे; और थोड़े ही समय में वह वाहन मेरे घर के सामने था।

   हम मसीही विश्वासियों का भी यह दायित्व है कि हम सभी लोगों का मसीह यीशु में होकर स्वर्ग पहुँचने के बारे में सही मार्गदर्शन करें (यूहन्ना 3:16; 1 कुरिन्थियों 15:1-5)। हमें लोगों को यह समझाना है कि अपनी ही धार्मिक धारणाओं, भले कार्य करने, अच्छा बनने आदि पर निर्भर होने के द्वारा वे परमेश्वर के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकते। यह समझाते समय हमें उनकी धारणाओं के प्रति संवेदनशील भी होना है, किंतु साथ ही प्रभु यीशु मसीह के संसार के पापों के लिए दिए गए बलिदान, उसके मारे जाने, गाड़े जाने और तीसरे दिन मृत्कों में से पुनः जी उठने के सत्य को उनके सामने भली भाँति प्रस्तुत भी करना है जिससे वे भी उद्धार तथा अनन्त जीवन के मार्ग का मार्गदर्शन पा सकें। - डेनिस फिशर


उद्धार तथा स्वर्ग प्रभु यीशु में विश्वास द्वारा है, कर्मों द्वारा नहीं।

यीशु ने उस से कहा, मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता। - यूहन्ना 14:6

बाइबल पाठ: मत्ती 28:16-20
Matthew 28:16 और ग्यारह चेले गलील में उस पहाड़ पर गए, जिसे यीशु ने उन्हें बताया था। 
Matthew 28:17 और उन्होंने उसके दर्शन पाकर उसे प्रणाम किया, पर किसी किसी को सन्‍देह हुआ। 
Matthew 28:18 यीशु ने उन के पास आकर कहा, कि स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार मुझे दिया गया है। 
Matthew 28:19 इसलिये तुम जा कर सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ और उन्हें पिता और पुत्र और पवित्रआत्मा के नाम से बपतिस्मा दो। 
Matthew 28:20 और उन्हें सब बातें जो मैं ने तुम्हें आज्ञा दी है, मानना सिखाओ: और देखो, मैं जगत के अन्‍त तक सदैव तुम्हारे संग हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 22-24


मंगलवार, 9 सितंबर 2014

मुखावरण


   हमारे घर के निकट ही एक फार्म है जहाँ बहुत से घोड़े हैं। कुछ विशेष ऋतुओं में उन घोड़ों की आँखों पर एक मुखावरण पहना दिया जाता है। बहुत समय तक मुझे उन घोड़ों के लिए बुरा लगता था, कि उन्हें देखने से वंचित कर दिया जाता है। लेकिन फिर मुझे पता चला कि उस मुखावरण के बारे में मेरी वह धारणा गलत थी। वे मुखावरण जाली के बने होते हैं जिन में से घोड़ों को दिखाई देता रहता है, लेकिन वे घोड़ों की आँखों को मक्खियों से बचाने के लिए पहनाए जाते हैं जिससे उन्हें नेत्र रोग ना होने पाएं और वे घोड़े अन्धे होने से बचे रह सकें!

   जैसी धारणा मैंने घोड़ों के मुखावरण के बारे में बना ली थी कुछ वैसी ही धारणा अनेक गैर-मसीही परमेश्वर के वचन बाइबल के बारे में बनाए रखते हैं। उन्हें लगता है कि बाइबल परमेश्वर द्वारा मसीही विश्वासियों की आँखों को बन्द कर देने का एक माध्यम है जिससे वे संसार में मिलने वाले अनेकों प्रकार के सुख को देखने ना पाएं। वे मसीही विश्वासियों के लिए यह सोच कर अफसोस करते हैं कि मसीही विश्वासियों का परमेश्वर उन्हें जीवन का आनन्द लेने से वंचित करता है। जैसे मैं घोड़ों के मुखावरण के सत्य से अनजान थी वैसे ही वे लोग भी बाइबल के सत्य से अनभिज्ञ हैं।

   बाइबल की शिक्षाएं हम मसीही विश्वासियों को संसार और साँसारिकता के आनन्दों के प्रति अन्धा नहीं करतीं, वरन वे संसार की झूठी बातों से हमारी रक्षा करती हैं जिस से हम आत्मिक रीति से अन्धे ना हो जाएं। बाइबल हमें संसार और साँसारिकता को सही परिपेक्ष में दिखाती है, हमारे दायित्व और हमारे अन्त के बारे में हमें बताती है, जीवन का सही मार्ग हमें सिखाती है। बाइबल हमें जीवन का आनन्द लेने से वंचित नहीं करती, वरन वह हमें जीवन का सही आनन्द लेने का मार्गदर्शन करती है, जिससे हम इस जीवन में भी और आने वाले जीवन में भी सर्वदा आनन्दित तथा सुखी रह सकें।

   बाइबल हमारे लिए सत्य देखने में बाधा नहीं बनती, वरन झूठ पर विश्वास करने से बचाती है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


जब हम परमेश्वर के वचन बाइबल में होकर संसार को देखते हैं तब हम दोनों की सच्चाई को देखने तथा जानने पाते हैं।

क्योंकि जो कुछ संसार में है, अर्थात शरीर की अभिलाषा, और आंखों की अभिलाषा और जीविका का घमण्‍ड, वह पिता की ओर से नहीं, परन्तु संसार ही की ओर से है। - 1यूहन्ना 2:16 

बाइबल पाठ: भजन 119:33-40
Psalms 119:33 हे यहोवा, मुझे अपनी विधियों का मार्ग दिखा दे; तब मैं उसे अन्त तक पकड़े रहूंगा। 
Psalms 119:34 मुझे समझ दे, तब मैं तेरी व्यवस्था को पकड़े रहूंगा और पूर्ण मन से उस पर चलूंगा। 
Psalms 119:35 अपनी आज्ञाओं के पथ में मुझ को चला, क्योंकि मैं उसी से प्रसन्न हूं। 
Psalms 119:36 मेरे मन को लोभ की ओर नहीं, अपनी चितौनियों ही की ओर फेर दे। 
Psalms 119:37 मेरी आंखों को व्यर्थ वस्तुओं की ओर से फेर दे; तू अपने मार्ग में मुझे जिला। 
Psalms 119:38 तेरा वचन जो तेरे भय मानने वालों के लिये है, उसको अपने दास के निमित्त भी पूरा कर। 
Psalms 119:39 जिस नामधराई से मैं डरता हूं, उसे दूर कर; क्योंकि तेरे नियम उत्तम हैं। 
Psalms 119:40 देख, मैं तेरे उपदेशों का अभिलाषी हूं; अपने धर्म के कारण मुझ को जिला।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 19-21


सोमवार, 8 सितंबर 2014

हृदय की प्रार्थना


   उस दिन मैलकॉम द्वार करी गई वह प्रार्थना मुझे बहुत अच्छी लगी। अन्य 100 बच्चों के सामने खड़े होकर 7 वर्षीय मैलकॉम ने प्रार्थना करी, "प्रभु यीशु, आपका बहुत धन्यवाद कि हमें फुटबॉल खेलने और चर्च जाने का अवसर मिलता है; और इसके लिए भी धन्यवाद कि आप हमें यहाँ सुरक्षित लाए और आपने हमारे पाप क्षमा किए तथा हमें अनन्त जीवन दिया है। हे प्रभु, हम आपसे बहुत प्रेम करते हैं; कृप्या आप कभी यह नहीं भूलना कि हम आपसे कितना प्रेम करते हैं"।

   उस बच्चे का बड़ी मासूमियत और खराई से अपने हृदय को परमेश्वर के सामने खोलना सुनकर मेरी आँखें नम हो गईं। व्यसक होने के कारण हम अपनी प्रार्थनाओं को परमेश्वर के सामने कुछ विशेष शब्दों के प्रयोग द्वारा ’चमकाने’ का प्रयास करते हैं; यह सोच कर कि इस प्रकार वे परमेश्वर को अधिक अच्छी लगेंगी, या फिर इसलिए कि वे हमारे आस-पास के लोगों को सुनने में अच्छी लगें। लेकिन सच तो यह है कि परमेश्वर शब्दों की नहीं हृदय से निकलने वाले खरी बातों तथा भावनाओं की, जैसे मैलकॉम की वह प्रार्थना, कद्र करता है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के एक पात्र नहेम्याह ने जब सुना कि उसकी जन्मभूमि यरुशालेम की शहरपनाह टूटी पड़ी है और वहाँ लोग बड़ी दुर्दशा में हैं, तो उसका हृदय उनके लिए चिंतित हुआ (नहेम्याह 1:3)। उस स्थान और वहाँ के लोगों के लिए कुछ करने के लिए उसने परमेश्वर से प्रार्थना करी। उसने परमेश्वर की आराधना करी (पद 5), उससे पापों के लिए क्षमा माँगी (पद 6), उसकी वाचाओं को स्मरण कराया (पद 9) तथा राजा से भी दया याचना करी (पद 11)। परमेश्वर ने नहेम्याह की प्रार्थना सुनी, उसका उत्तर दिया, उसे आवश्यक संसाधन उपल्बध करवाए और परमेश्वर की सुरक्षा एवं सहायता से नहेम्याह यरुशालेम का पुनर्निमाण करने पाया।

   आज आपके मन में क्या है? परमेश्वर के प्रति धन्यवाद या जीवन के बोझ? जो भी है, अपने हृदय को परमेश्वर के आगे खोल दीजिए। वह आपके हृदय की प्रार्थना को सुनना चाहता है। - ऐनी सेटास


सर्वोच्च कोटि की प्रार्थना एक नम्र हृदय की गहरईयों से निकल कर आती है।

तब मैं अपना मुख परमेश्वर की ओर कर के गिड़गिड़ाहट के साथ प्रार्थना करने लगा, और उपवास कर, टाट पहिन, राख में बैठ कर वरदान मांगने लगा। - दानिय्येल 9:3 

बाइबल पाठ: नहेम्याह 1:1-11
Nehemiah 1:1 हकल्याह के पुत्र नहेम्याह के वचन। बीसवें वर्ष के किसलवे नाम महीने में, जब मैं शूशन नाम राजगढ़ में रहता था, 
Nehemiah 1:2 तब हनानी नाम मेरा एक भाई और यहूदा से आए हुए कई एक पुरुष आए; तब मैं ने उन से उन बचे हुए यहूदियों के विषय जो बन्धुआई से छूट गए थे, और यरूशलेम के विष्य में पूछा। 
Nehemiah 1:3 उन्होंने मुझ से कहा, जो बचे हुए लोग बन्धुआई से छूटकर उस प्रान्त में रहते हैं, वे बड़ी दुर्दशा में पड़े हैं, और उनकी निन्दा होती है; क्योंकि यरूशलेम की शहरपनाह टूटी हुई, और उसके फाटक जले हुए हैं। 
Nehemiah 1:4 ये बातें सुनते ही मैं बैठकर रोने लगा और कितने दिन तक विलाप करता; और स्वर्ग के परमेश्वर के सम्मुख उपवास करता और यह कह कर प्रार्थना करता रहा। 
Nehemiah 1:5 हे स्वर्ग के परमेश्वर यहोवा, हे महान और भययोग्य ईश्वर! तू जो अपने प्रेम रखने वाले और आज्ञा मानने वाले के विष्य अपनी वाचा पालता और उन पर करुणा करता है; 
Nehemiah 1:6 तू कान लगाए और आंखें खोले रह, कि जो प्रार्थना मैं तेरा दास इस समय तेरे दास इस्राएलियों के लिये दिन रात करता रहता हूँ, उसे तू सुन ले। मैं इस्राएलियों के पापों को जो हम लोगों ने तेरे विरुद्ध किए हैं, मान लेता हूँ। मैं और मेरे पिता के घराने दोनों ने पाप किया है। 
Nehemiah 1:7 हम ने तेरे साम्हने बहुत बुराई की है, और जो आज्ञाएं, विधियां और नियम तू ने अपने दास मूसा को दिए थे, उन को हम ने नहीं माना। 
Nehemiah 1:8 उस वचन की सुधि ले, जो तू ने अपने दास मूसा से कहा था, कि यदि तुम लोग विश्वासघात करो, तो मैं तुम को देश देश के लोगों में तितर बितर करूंगा। 
Nehemiah 1:9 परन्तु यदि तुम मेरी ओर फिरो, और मेरी आज्ञाएं मानो, और उन पर चलो, तो चाहे तुम में से निकाले हुए लोग आकाश की छोर में भी हों, तौभी मैं उन को वहां से इकट्ठा कर के उस स्थान में पहुंचाऊंगा, जिसे मैं ने अपने नाम के निवास के लिये चुन लिया है। 
Nehemiah 1:10 अब वे तेरे दास और तेरी प्रजा के लोग हैं जिन को तू ने अपनी बड़ी सामर्थ और बलवन्त हाथ के द्वारा छुड़ा लिया है। 
Nehemiah 1:11 हे प्रभु बिनती यह है, कि तू अपने दास की प्रार्थना पर, और अपने उन दासों की प्रार्थना पर, जो तेरे नाम का भय मानना चाहते हैं, कान लगा, और आज अपने दास का काम सफल कर, और उस पुरुष को उस पर दयालु कर। (मैं तो राजा का पियाऊ था।)

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 15-18


रविवार, 7 सितंबर 2014

महिमा


   बहुत वर्ष पहले की बात है, मैं और मेरे बेटे, अपने आँगन में पीठ के बल लेटे हुए ऊपर उड़ रहे बादलों को, उनके द्वार बन रहे विभिन्न आकारों को, देख रहे थे। मेरे एक बेटे ने पूछा, "पापा, बादल ऐसे उड़ते कैसे रहते हैं?" मैंने अपने ज्ञान बघारने के लहज़े में बोलना आरंभ किया, "देखो बेटा" और फिर मैं चुप हो गया। कुछ पल की खामोशी के पश्चात मैंने स्वीकार किया कि "इसका उत्तर मुझे पता नहीं है, लेकिन मैं पता कर के तुम्हें अवश्य बताऊँगा"। मैंने उत्तर को खोजा और पाया कि वायुमण्डल की नमी ऊपर की ठंड से द्रवित होकर गुरुत्वाकर्षण द्वारा नीचे धरती की ओर आने लगती है, और नीचे धरती से गरम होकर हवा ऊपर की ओर उठती है। उस गर्म हवा के द्वारा वह नमी फिर से भाप बनकर ऊपर उठ जाती है, इसी कारण बादल हवा में उड़ते रहते हैं।

   यह इस तथ्य का वैज्ञानिक स्पष्टिकरण है। लेकिन यह वैज्ञानिक स्पष्टिकरण ही संपूर्ण उत्तर हो ऐसा आवश्यक नहीं। इस वैज्ञानिक स्पष्टिकरण को आधार देने वाली एक और बुनियादी बात भी है - परमेश्वर ने अपनी बुद्धिमानी और विद्वता में सृष्टि के संचालन के लिए ऐसे नियम बनाए हैं जो उसके सर्वज्ञानी होने और सिद्ध ज्ञान रखने को प्रकट करते हैं। बादल और उनका हवा में उड़ते रहना हमारे लिए एक चिन्ह एवं प्रमाण है सृष्टि में होकर दिखाई देने वाली परमेश्वर की भलाई, अनुग्रह, सामर्थ और बुद्धिमता का।

   इसलिए यह स्मरण रखिए कि जिसने बादलों को बनाया, उनके कार्य को निर्धारित किया और जो सृष्टि की हर बात का रचने तथा संचालित करने वाला है, उसकी सच्चाई को पहिचानना तथा उसके सच्चे स्वरूप में उसकी आराधना एवं महिमा करना हम सभी का कर्तव्य है। उसने अपने आप को गुप्त, या केवल कुछ ही लोगों के विशेष प्रयासों द्वारा खोजे सकने वाला नहीं रखा है, वरन अपनी सृष्टि में अपने गुण और कार्य प्रकट किए हैं (रोमियों 1:20); "आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है; और आकशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है" (भजन 19:1)। -डेविड रोपर


सृष्टि, सृष्टिकर्ता की ओर संकेत करने वाले चिन्हों से भरी पड़ी है।

क्योंकि उसके अनदेखे गुण, अर्थात उस की सनातन सामर्थ, और परमेश्वरत्व जगत की सृष्टि के समय से उसके कामों के द्वारा देखने में आते है, यहां तक कि वे निरुत्तर हैं। - रोमियों 1:20  

बाइबल पाठ: अय्युब 37:1-16
Job 37:1 फिर इस बात पर भी मेरा हृदय कांपता है, और अपने स्थान से उछल पड़ता है। 
Job 37:2 उसके बोलने का शब्द तो सुनो, और उस शब्द को जो उसके मुंह से निकलता है सुनो। 
Job 37:3 वह उसको सारे आकाश के तले, और अपनी बिजली को पृथ्वी की छोर तक भेजता है। 
Job 37:4 उसके पीछे गरजने का शब्द होता है; वह अपने प्रतापी शब्द से गरजता है, और जब उसका शब्द सुनाईं देता है तब बिजली लगातार चमकने लगती है। 
Job 37:5 ईश्वर गरज कर अपना शब्द अद्भूत रीति से सुनाता है, और बड़े बड़े काम करता है जिन को हम नहीं समझते। 
Job 37:6 वह तो हिम से कहता है, पृथ्वी पर गिर, और इसी प्रकार मेंह को भी और मूसलाधार वर्षा को भी ऐसी ही आज्ञा देता है। 
Job 37:7 वह सब मनुष्यों के हाथ पर मुहर कर देता है, जिस से उसके बनाए हुए सब मनुष्य उसको पहचानें। 
Job 37:8 तब वन पशु गुफाओं में घुस जाते, और अपनी अपनी मांदों में रहते हैं। 
Job 37:9 दक्खिन दिशा से बवण्डर और उतरहिया से जाड़ा आता है। 
Job 37:10 ईश्वर की श्वास की फूंक से बरफ पड़ता है, तब जलाशयों का पाट जम जाता है। 
Job 37:11 फिर वह घटाओं को भाफ़ से लादता, और अपनी बिजली से भरे हुए उजियाले का बादल दूर तक फैलाता है। 
Job 37:12 वे उसकी बुद्धि की युक्ति से इधर उधर फिराए जाते हैं, इसलिये कि जो आज्ञा वह उन को दे, उसी को वे बसाई हुई पृथ्वी के ऊपर पूरी करें। 
Job 37:13 चाहे ताड़ना देने के लिये, चाहे अपनी पृथ्वी की भलाई के लिये वा मनुष्यों पर करुणा करने के लिये वह उसे भेजे। 
Job 37:14 हे अय्यूब! इस पर कान लगा और सुन ले; चुपचाप खड़ा रह, और ईश्वर के आश्चर्यकर्मों का विचार कर। 
Job 37:15 क्या तू जानता है, कि ईश्वर क्योंकर अपने बादलों को आज्ञा देता, और अपने बादल की बिजली को चमकाता है? 
Job 37:16 क्या तू घटाओं का तौलना, वा सर्वज्ञानी के आश्चर्यकर्म जानता है?

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 12-14