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रविवार, 17 सितंबर 2017

परिप्रेक्ष्य


   ऐसा क्यों होता है कि नशे में धुत वाहन चालक दुर्घटना होने पर बिना किसी गंभीर चोट के बच जाता है, जबकि बिना कोई नशा किए हुए उस दुर्घटना का शिकार होने वाला व्यक्ति गंभीर चोटों के साथ जान बचाने के संघर्ष में चला जाता है? क्यों बुरे लोग फलते-फूलते हैं, जबकि भले लोग दुःख उठाते हैं? आपके साथ ऐसा कितनी बार हुआ है कि आप अपने जीवन में हो रही बातों को लेकर उलझनों में पड़ जाते हैं, और पुकार कर परमेश्वर से पूछते हैं, ""क्या परमेश्वर चिंता नहीं करता है?"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पाते हैं कि परमेश्वर का एक भविष्यद्वक्ता हबक्कूक, इसी प्रश्न से जूझ रहा था, क्योंकि वह अपने चारों ओर परमेश्वर के लोगों, यहूदा, में व्याप्त दुराचार और अन्याय को लेकर परेशान था (हबक्कूक 1:1-4)। उसकी इस उलझन ने उसे बाध्य किया कि वह परमेश्वर से पूछे कि परमेश्वर इस परिस्थिति को कब सुधारेगा? परन्तु परमेश्वर का उत्तर भी कम उलझन उत्पन्न करने वाला नहीं था।

   परमेश्वर ने कहा कि वह यहूदा को सुधारने के लिए कसदियों का उपयोग करेगा। हबक्कूक के लिए यह असमंजस की बात थी क्योंकि कसदी अपनी क्रूरता के लिए जाने जाते थे (पद 7)। वे हिंसक प्रवृत्ति के थे (पद 9), और वे न तो किसी मानवीय अधिकार को और न ही परमेश्वर को, वरन केवल अपनी सैन्य सामर्थ्य को मानते थे (पद 10-11)।

   जब भी ऐसे पल आएं जब हम परमेश्वर के मार्गों को समझ नहीं पाएं, तब हमें उसके भले, सिध्द और अपरिवर्तनीय चरित्र पर भरोसा बनाए रखना चाहिए। हबक्कूक ने भी यही किया; उसने विश्वास किया कि परमेश्वर न्याय, करुणा और सत्य का परमेश्वर है: "तेरे सिंहासन का मूल, धर्म और न्याय है; करूणा और सच्चाई तेरे आगे आगे चलती है" (भजन 89:14)। ऐसा करने से वह अपनी परिस्थितियों को एक नए परिप्रेक्ष्य से देख सका। उसने परमेश्वर के चरित्र को अपनी परिस्थितियों में होकर समझने के स्थान पर, परिस्थितियों को परमेश्वर के चरित्र में होकर समझना सीखा। ऐसा करने पर वह इस निषकर्ष पर पहुँचा कि, "यहोवा परमेश्वर मेरा बलमूल है, वह मेरे पांव हरिणों के समान बना देता है, वह मुझ को मेरे ऊंचे स्थानों पर चलाता है" (हबक्कूक 3:19)। - पो फैंग चिया


परमेश्वर के परिप्रेक्ष्य से हमें हमारी परिस्थितियाँ बहुत भिन्न दिखाई देंगी।

क्योंकि यहोवा कहता है, मेरे विचार और तुम्हारे विचार एक समान नहीं है, न तुम्हारी गति और मेरी गति एक सी है। क्योंकि मेरी और तुम्हारी गति में और मेरे और तुम्हारे सोच विचारों में, आकाश और पृथ्वी का अन्तर है। - यशायाह 55:8-9

बाइबल पाठ: हबक्कूक 1:1-11
Habakkuk 1:1 भारी वचन जिस को हबक्कूक नबी ने दर्शन में पाया।
Habakkuk 1:2 हे यहोवा मैं कब तक तेरी दोहाई देता रहूंगा, और तू न सुनेगा? मैं कब तक तेरे सम्मुख “उपद्रव”, “उपद्रव” चिल्लाता रहूंगा? क्या तू उद्धार नहीं करेगा? 
Habakkuk 1:3 तू मुझे अनर्थ काम क्यों दिखाता है? और क्या कारण है कि तू उत्पात को देखता ही रहता है? मेरे साम्हने लूट-पाट और उपद्रव होते रहते हैं; और झगड़ा हुआ करता है और वादविवाद बढ़ता जाता है। 
Habakkuk 1:4 इसलिये व्यवस्था ढीली हो गई और न्याय कभी नहीं प्रगट होता। दुष्ट लोग धर्मी को घेर लेते हैं; सो न्याय का खून हो रहा है।
Habakkuk 1:5 अन्यजातियों की ओर चित्त लगा कर देखो, और बहुत ही चकित हो। क्योंकि मैं तुम्हारे ही दिनों में ऐसा काम करने पर हूं कि जब वह तुम को बताया जाए तो तुम उसकी प्रतीति न करोगे। 
Habakkuk 1:6 देखो, मैं कसदियों को उभारने पर हूं, वे क्रूर और उतावली करने वाली जाति हैं, जो पराए वासस्थानों के अधिकारी होने के लिये पृथ्वी भर में फैल गए हैं। 
Habakkuk 1:7 वे भयानक और डरावने हैं, वे आप ही अपने न्याय की बड़ाई और प्रशंसा का कारण हैं। 
Habakkuk 1:8 उनके घोड़े, चीतों से भी अधिक वेग चलने वाले हैं, और सांझ को आहेर करने वाले हुंडारों से भी अधिक क्रूर हैं; उनके सवार दूर दूर कूदते-फांदते आते हैं। हां, वे दूर से चले आते हैं; और आहेर पर झपटने वाले उकाब के समान झपट्टा मारते हैं। 
Habakkuk 1:9 वे सब के सब उपद्रव करने के लिये आते हैं; साम्हने की ओर मुख किए हुए वे सीधे बढ़े चले जाते हैं, और बंधुओं को बालू के किनकों के समान बटोरते हैं। 
Habakkuk 1:10 राजाओं को वे ठट्ठों में उड़ाते और हाकिमों का उपहास करते हैं; वे सब दृढ़ गढ़ों को तुच्छ जानते हैं, क्योंकि वे दमदमा बान्ध कर उन को जीत लेते हैं। 
Habakkuk 1:11 तब वे वायु के समान चलते और मर्यादा छोड़ कर दोषी ठहरते हैं, क्योंकि उनका बल ही उनका देवता है।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 27-29
  • 2 कुरिन्थियों 10


शनिवार, 16 सितंबर 2017

त्यागा हुआ


   सुप्रसिध्द मसीही लेखक, सी. एस. ल्युईस की पुस्तक The Screwtape Letters में एक काल्पनिक संवाद है जो शैतान के दो दूतों, एक वरिष्ठ तथा दूसरा कनिष्ठ, के बीच हो रहा है। संवाद का विषय है एक मसीही विश्वासी को भली-भांति प्रलोभन में कैसे लाया जा सकता है, क्योंकि शैतान के वे दोनों दूत मसीही विश्वासियों के परमेश्वर में विश्वास को नष्ट करना चाहते हैं। वरीष्ठ दूत कनिष्ठ को सचेत करते हुए कहता है, "धोखा मत खाना, हमारे प्रयास के लिए सबसे अधिक जोखिम का समय वह होता है जब एक मसीही अपने चारों ओर सृष्टि में परमेश्वर के अस्तित्व के प्रत्येक प्रमाण को लुप्त होता हुआ देखता है, अपने आप को परमेश्वर का त्यागा अनुभव करता है, और फिर भी परमेश्वर पर विश्वास बनाए रखता है, उसका आज्ञाकारी बना रहता है।"

   परमेश्वर का वचन बाइबल हमारे सामने ऐसे लोगों के अनेकों उदाहरण रखती है जिन्होंने अपने आप को परमेश्वर का त्यागा अनुभव तो किया परन्तु फिर भी अपने विश्वास में बने रहे और उसी विश्वास में कार्य करते रहे। अब्राहम को लगा कि परमेश्वर ने वारिस की जो प्रतिज्ञा उससे की थी वह पूरी हुए बिना रह जाएगी (उत्पत्ति 15:2-3)। भजनकार ने अपने कठिन समयों मे अपने आपको उपेक्षित अनुभव किया (भजन 10:1)। अय्युब इतनी कठिन परीक्षाओं में पड़ा कि उसे लगा जैसे परमेश्वर उसके प्राण ही ले लेगा (अय्युब 13:15)। और प्रभु यीशु ने क्रूस पर से चिल्लाकर कहा, "... हे मेरे परमेश्वर, हे मेरे परमेश्वर, तू ने मुझे क्यों छोड़ दिया?" (मत्ती 27:46)। परन्तु हर बार परमेश्वर ही विश्वासयोग्य पाया गया (उत्पत्ति 21:1-7, भजन 10:16-18, अय्युब 38:1-42:17, मत्ती 28:9-20)।

   चाहे शैतान आपको यह सोचने पर बाध्य कर देने का भरसक प्रयास करे कि परमेश्वर ने आपको त्याग दिया है, यह कभी नहीं भूलें कि परमेश्वर सदा आपके निकट बना रहता है; वह अपने बच्चों को कभी नहीं त्यागता है (इब्रानियों 13:5)। इसलिए हम इब्रानियों के लेखक के साथ सहर्ष और निडर होकर कह सकते हैं, "इसलिये हम बेधड़क हो कर कहते हैं, कि प्रभु, मेरा सहायक है; मैं न डरूंगा; मनुष्य मेरा क्या कर सकता है" (इब्रानियों 13:6)। - डेनिस फिशर


हमारे प्रत्येक भय और आशंका के बावजूद, 
परमेश्वर सदा हमारे निकट और साथ बना रहता है।

तुम्हारा स्‍वभाव लोभरिहत हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। - इब्रानियों 13:5

बाइबल पाठ: भजन 22:1-21
Psalms 22:1 हे मेरे परमेश्वर, हे मेरे परमेश्वर, तू ने मुझे क्यों छोड़ दिया? तू मेरी पुकार से और मेरी सहायता करने से क्यों दूर रहता है? मेरा उद्धार कहां है? 
Psalms 22:2 हे मेरे परमेश्वर, मैं दिन को पुकारता हूं परन्तु तू उत्तर नहीं देता; और रात को भी मैं चुप नहीं रहता। Psalms 22:3 परन्तु हे तू जो इस्राएल की स्तुति के सिहांसन पर विराजमान है, तू तो पवित्र है। 
Psalms 22:4 हमारे पुरखा तुझी पर भरोसा रखते थे; वे भरोसा रखते थे, और तू उन्हें छुड़ाता था। 
Psalms 22:5 उन्होंने तेरी दोहाई दी और तू ने उन को छुड़ाया वे तुझी पर भरोसा रखते थे और कभी लज्जित न हुए।
Psalms 22:6 परन्तु मैं तो कीड़ा हूं, मनुष्य नहीं; मनुष्यों में मेरी नामधराई है, और लोगों में मेरा अपमान होता है। 
Psalms 22:7 वह सब जो मुझे देखते हैं मेरा ठट्ठा करते हैं, और ओंठ बिचकाते और यह कहते हुए सिर हिलाते हैं, 
Psalms 22:8 कि अपने को यहोवा के वश में कर दे वही उसको छुड़ाए, वह उसको उबारे क्योंकि वह उस से प्रसन्न है। 
Psalms 22:9 परन्तु तू ही ने मुझे गर्भ से निकाला; जब मैं दूधपिउवा बच्चा था, तब ही से तू ने मुझे भरोसा रखना सिखलाया। 
Psalms 22:10 मैं जन्मते ही तुझी पर छोड़ दिया गया, माता के गर्भ ही से तू मेरा ईश्वर है। 
Psalms 22:11 मुझ से दूर न हो क्योंकि संकट निकट है, और कोई सहायक नहीं। 
Psalms 22:12 बहुत से सांढ़ों ने मुझे घेर लिया है, बाशान के बलवन्त सांढ़ मेरे चारों ओर मुझे घेरे हुए हैं। 
Psalms 22:13 वह फाड़ने और गरजने वाले सिंह के समान मुझ पर अपना मुंह पसारे हुए है।
Psalms 22:14 मैं जल के समान बह गया, और मेरी सब हडि्डयों के जोड़ उखड़ गए: मेरा हृदय मोम हो गया, वह मेरी देह के भीतर पिघल गया। 
Psalms 22:15 मेरा बल टूट गया, मैं ठीकरा हो गया; और मेरी जीभ मेरे तालू से चिपक गई; और तू मुझे मारकर मिट्टी में मिला देता है। 
Psalms 22:16 क्योंकि कुत्तों ने मुझे घेर लिया है; कुकर्मियों की मण्डली मेरे चारों ओर मुझे घेरे हुए है; वह मेरे हाथ और मेरे पैर छेदते हैं। 
Psalms 22:17 मैं अपनी सब हडि्डयां गिन सकता हूं; वे मुझे देखते और निहारते हैं; 
Psalms 22:18 वे मेरे वस्त्र आपस में बांटते हैं, और मेरे पहिरावे पर चिट्ठी डालते हैं। 
Psalms 22:19 परन्तु हे यहोवा तू दूर न रह! हे मेरे सहायक, मेरी सहायता के लिये फुर्ती कर! 
Psalms 22:20 मेरे प्राण को तलवार से बचा, मेरे प्राण को कुत्ते के पंजे से बचा ले! 
Psalms 22:21 मुझे सिंह के मुंह से बचा, हां, जंगली सांढ़ों के सींगो में से तू ने मुझे बचा लिया है।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 25-26
  • 2 कुरिन्थियों 9


शुक्रवार, 15 सितंबर 2017

दिशासूचक


   घटना दूसरे विश्वयुध्द की है, जब छोटे कॉम्पास (दिशासूचकों) द्वारा 27 नाविकों की जान तट से 300 मील की दूरी होते हुए भी बच सकी। एक सेवानिवृत व्यापारी नाविक, वॉल्डेमर सेमेनौव, एक जलयान पर कनिष्ठ अभियन्ता का कार्य कर रहा था जब एक जर्मन पनडुब्बी ने उनके जहाज़ पर हमला कर दिया, जिससे जहाज़ में आग लग गई और वह डूबने लगा। सेमेनौव और उनके साथियों ने दिशासूचक यंत्र लगी हुई छोटी नौकाएं पानी में उतारीं और उन दिशासूचकों की सहायता से व्यापारी जहाज़ों के जल मार्गों और किनारे की ओर चल पड़े। तीन दिन के पश्चात उन्हें बचा लिया गया।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार ने परमेश्वर के लोगों को स्मरण करवाया कि परमेश्वर का वचन भी एक विश्वासयोग्य दिशासूचक है। भजनकार के परमेश्वर के वचन को एक दीपक की उपमा दी। जिस समय काल में वह भजन लिखा गया था, उस समय यदि रात में कहीं जाना होता था तो यात्रियों को जैतून के तेल से जलने वाले, और टिमटिमाती ज्योति प्रदान करने वाले छोटे दीपक लेकर चलना होता था, जिन की ज्योति से यात्री को बस अगले कदम तक की दूरी दिखाई देती थी। भजनकार के लिए, परमेश्वर का वचन ऐसा ही एक दीपक था (भजन 119:105), जो परमेश्वर का अनुसरण करने वालों को कदम-ब-कदम मार्ग दिखाता है। भजनकार का विश्वास था कि यदि वह जीवन के अव्यवस्थित मार्गों के अंधकार में भटकने लगेगा, तो परमेश्वर का वचन उसका मार्गदर्शन करेगा, उसे सही दिशा और मार्ग दिखाएगा।

   जब जीवन के मार्गों में हम अपनी दिशा से भटकने लगते हैं तब परमेश्वर अपने अटल और अकाट्य वचन को एक विश्वासयोग्य दिशासूचक के समान प्रयोग करता है और हमें न केवल सही मार्ग दिखाता है, वरन हमें अपने और भी अधिक निकट ले आता है। - मार्विन विलियम्स


परमेश्वर ने अपना वचन हमें दिया है 
जिससे हम उसे जान सकें और उसके मार्गों पर चल सकें।

अपने प्रकाश और अपनी सच्चाई को भेज; वे मेरी अगुवाई करें, वे ही मुझ को तेरे पवित्र पर्वत पर और तेरे निवास स्थान में पहुंचाएँ! - भजन 43:3

बाइबल पाठ: भजन 119:105-112
Psalms 119:105 तेरा वचन मेरे पांव के लिये दीपक, और मेरे मार्ग के लिये उजियाला है। 
Psalms 119:106 मैं ने शपथ खाई, और ठाना भी है कि मैं तेरे धर्ममय नियमों के अनुसार चलूंगा। 
Psalms 119:107 मैं अत्यन्त दु:ख में पड़ा हूं; हे यहोवा, अपने वचन के अनुसार मुझे जिला।
Psalms 119:108 हे यहोवा, मेरे वचनों को स्वेच्छाबलि जान कर ग्रहण कर, और अपने नियमों को मुझे सिखा। 
Psalms 119:109 मेरा प्राण निरन्तर मेरी हथेली पर रहता है, तौभी मैं तेरी व्यवस्था को भूल नहीं गया। 
Psalms 119:110 दुष्टों ने मेरे लिये फन्दा लगाया है, परन्तु मैं तेरे उपदेशों के मार्ग से नहीं भटका। 
Psalms 119:111 मैं ने तेरी चितौनियों को सदा के लिये अपना निज भाग कर लिया है, क्योंकि वे मेरे हृदय के हर्ष का कारण हैं। 
Psalms 119:112 मैं ने अपने मन को इस बात पर लगाया है, कि अन्त तक तेरी विधियों पर सदा चलता रहूं।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 22-24
  • 2 कुरिन्थियों 8


गुरुवार, 14 सितंबर 2017

कार्यकारी शब्द


   कॉलेज में मेरी कक्षा के उस छात्र का वह ईमेल सहायता की शीघ्र कार्यवाही के निवेदन से भरा था। सेमेस्टर का अन्त आ रहा था, और उसे यह एहसास हुआ था कि खेलों में भागीदारी के लिए उसे कुछ बेहतर अंक चाहिएं। अब वह क्या कर सकता था? उसने अपने कुछ गृहकार्य पूरे नहीं किए थे, इसलिए मैंने उसे अवसर दिया कि वह दो दिन में उन कार्यों को पूरा कर के आँकलन के लिए सौंप दे जिससे उन कार्यों पर मिलने वाले अंकों से उसके कुल अंक सुधर सकें। उसका प्रत्युत्तर था: "बहुत धन्यवाद। मैं यह काम पूरा कर के दे दूँगा।" दो दिन भी बीत गए परन्तु उसकी ओर से कोई कार्य आँकलन के लिए सौंपा नहीं गया। उस युवक ने अपने शब्दों की पुष्टि अपने कार्यों से नहीं की।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भी हम पाते हैं कि प्रभु यीशु मसीह ने एक ऐसे ही युवक के बारे में बताया था। उस युवक के पिता ने उससे कहा कि वह जाकर उसकी दाख़ की बारी [अँगूरों का खेत] में कुछ काम करे। उस युवक ने वह कार्य करने के लिए पिता को आश्वस्त किया (मत्ती 21:30), परन्तु जाकर काम नहीं किया। वह केवल बात कहना जानता था, उन शब्दों के अनुरूप कार्य करना नहीं। इस दृष्टांत पर टिप्पणी करते हुए प्रसिध्द बाइबल टीकाकार, मैथ्यु हेनरी ने कहा, "कलियाँ और फूल, फल नहीं होते हैं।" जब तक हमारे शब्दों की कलियाँ और फूल, जिन से होने वाले कार्य की प्रत्याशा होती है, उस प्रत्याशा के अनुरूप कार्यों के फल नहीं लाते हैं, वे खोखले और निरर्थक हैं। इस दृष्टांत को सुनाने में प्रभु यीशु का आश्य मुख्यतः उस समय के उन धर्मगुरुओं के प्रति था जो परमेश्वर के बारे में बड़ी-बड़ी बातें तो बोलते थे, परन्तु स्वयं उन बातों के आज्ञाकरी नहीं थे, अपने पापों से पश्चाताप नहीं करते थे। परन्तु प्रभु यीशु के शब्द आज हमारे लिए भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। बिना खोखले दावे किए, जब हम अपने शब्दों को कार्यकारी करते हैं (1 यूहन्ना 3:18), तब हम अपने प्रभु परमेश्वर तथा उद्धारकर्ता का आदर करते हैं।

   खोखले तथा निर्थक शब्दों की अपेक्षा परमेश्वर के प्रति अपने वास्तव में कार्यकारी शब्दों के द्वारा हम उसके प्रति अपने प्रेम, आदर और श्रध्दा को कहीं अधिक सार्थक रीति से दिखा सकते हैं। - डेव ब्रैनन


शब्द फूल होते हैं, तो अनुरूप कार्य फल।

हे बालकों, हम वचन और जीभ ही से नहीं, पर काम और सत्य के द्वारा भी प्रेम करें। - 1 यूहन्ना 3:18

बाइबल पाठ: मत्ती 21:28-32
Matthew 21:28 तुम क्या समझते हो? किसी मनुष्य के दो पुत्र थे; उसने पहिले के पास जा कर कहा; हे पुत्र आज दाख की बारी में काम कर। 
Matthew 21:29 उसने उत्तर दिया, मैं नहीं जाऊंगा, परन्तु पीछे पछता कर गया। 
Matthew 21:30 फिर दूसरे के पास जा कर ऐसा ही कहा, उसने उत्तर दिया, जी हां जाता हूं, परन्तु नहीं गया। 
Matthew 21:31 इन दोनों में से किस ने पिता की इच्छा पूरी की? उन्होंने कहा, पहिले ने: यीशु ने उन से कहा, मैं तुम से सच कहता हूं, कि महसूल लेने वाले और वेश्या तुम से पहिले परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करते हैं। 
Matthew 21:32 क्योंकि यूहन्ना धर्म के मार्ग से तुम्हारे पास आया, और तुम ने उस की प्रतीति न की: पर महसूल लेने वालों और वेश्याओं ने उस की प्रतीति की: और तुम यह देखकर पीछे भी न पछताए कि उस की प्रतीति कर लेते।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 19-21
  • 2 कुरिन्थियों 7


बुधवार, 13 सितंबर 2017

स्मरण


   जुलाई 28, 2014, प्रथम विश्व-युध्द के आरंभ की सौवीं जयंती थी। ब्रिटिश मीडिया में, 4 वर्ष तक चलने वाले इस संघर्ष की जयंती के उपलक्ष में, अनेकों चर्चाएं और वृतचित्र प्रसारित किए गए। एक टी.वी. कार्यक्रम Mr. Selfridge में, जो लंडन मे स्थित एक वास्तविक डिपार्टमैन्टल स्टोर पर आधारित है, एक प्रसंग दिखाया जो 1914 के समय पर आधारित था और जिसमें स्टोर में काम करने वाले युवकों का सेना में भरती होने के लिए जाना दिखाया गया था। मैं जब स्वेच्छा से दिए जाने वाले बलिदानों की यह घटनाएं देख रहा था तो मेरा गला रुँध गया। जिन सैनिकों के बारे में दिखाया जा रहा था वे अभी युवा ही थे, किंतु युध्द में जाने के लिए तत्पर थे, यह जानते हुए भी कि उनका उस युध्द से लौट कर आने की संभावना बहुत कम थी।

   यद्यपि प्रभु यीशु मसीह किसी शारीरिक शत्रु को हराने के लिए किसी युध्द में नहीं गए, परन्तु वे हम मनुष्यों के सबसे घातक शत्रु - पाप और मृत्यु को हराने के लिए क्रूस पर अपने जीवन को बलिदान करने के लिए अवश्य गए। प्रभु यीशु इस संसार में परमेश्वर के प्रेम को प्रगट करने के लिए आए थे; उन्होंने संसार के सभी मनुष्यों के पापों की कीमत चुकाने के लिए स्वेच्छा से क्रूस पर एक बहुत ही दर्दनाक मृत्यु सह लेना स्वीकार किया। जिन आताताईयों ने उन्हें कोड़े मारे और क्रूस पर कीलों से ठोक दिया, उन्होंने उन मनुष्यों को भी क्षमा कर दिया (लूका 23:34)। क्रूस पर मारे जाने और कब्र में दफनाए जाने के बाद तीसरे दिन मृतकों में से जी उठने के द्वारा प्रभु यीशु ने मृत्यु पर विजय पाई, और सारी पृथ्वी के सभी मनुष्यों के लिए, प्रभु में लाए गए साधारण विश्वास द्वारा सेंत-मेंत पापों की क्षमा और उद्धार का मार्ग बना कर उपलब्ध कर दिया। अपने विश्वासियों को परमेश्वर की सन्तान होने का अधिकार प्रदान कर दिया (यूहन्ना 3:13-16)।

   जयंतियाँ और स्मारक हमें महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं तथा बहादुरी के कार्यों का स्मरण करवाते हैं। क्रूस हमें स्मरण करवाता है प्रभु यीशु के उस सर्वोच्च और सबसे महत्वपूर्ण बलिदान का जिसके द्वारा समस्त मानव जाति को पाप से छुटकारे और अनन्त जीवन की आशीष मिलती है। - मेरियन स्ट्राउड


प्रभु यीशु मसीह का क्रूस, परमेश्वर के सर्वोच्च प्रेम का प्रमाण है। - ओस्वॉल्ड चैंबर्स

तब यीशु ने कहा; हे पिता, इन्हें क्षमा कर, क्योंकि ये नहीं जानते कि क्या कर रहें हैं और उन्होंने चिट्ठियां डालकर उसके कपड़े बांट लिए। - लूका 23:34

बाइबल पाठ: यूहन्ना 3:12-21
John 3:12 जब मैं ने तुम से पृथ्वी की बातें कहीं, और तुम प्रतीति नहीं करते, तो यदि मैं तुम से स्वर्ग की बातें कहूं, तो फिर क्योंकर प्रतीति करोगे? 
John 3:13 और कोई स्वर्ग पर नहीं चढ़ा, केवल वही जो स्वर्ग से उतरा, अर्थात मनुष्य का पुत्र जो स्वर्ग में है। 
John 3:14 और जिस रीति से मूसा ने जंगल में सांप को ऊंचे पर चढ़ाया, उसी रीति से अवश्य है कि मनुष्य का पुत्र भी ऊंचे पर चढ़ाया जाए। 
John 3:15 ताकि जो कोई विश्वास करे उस में अनन्त जीवन पाए।
John 3:16 क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए। 
John 3:17 परमेश्वर ने अपने पुत्र को जगत में इसलिये नहीं भेजा, कि जगत पर दंड की आज्ञा दे परन्तु इसलिये कि जगत उसके द्वारा उद्धार पाए। 
John 3:18 जो उस पर विश्वास करता है, उस पर दंड की आज्ञा नहीं होती, परन्तु जो उस पर विश्वास नहीं करता, वह दोषी ठहर चुका; इसलिये कि उसने परमेश्वर के एकलौते पुत्र के नाम पर विश्वास नहीं किया। 
John 3:19 और दंड की आज्ञा का कारण यह है कि ज्योति जगत में आई है, और मनुष्यों ने अन्धकार को ज्योति से अधिक प्रिय जाना क्योंकि उन के काम बुरे थे। 
John 3:20 क्योंकि जो कोई बुराई करता है, वह ज्योति से बैर रखता है, और ज्योति के निकट नहीं आता, ऐसा न हो कि उसके कामों पर दोष लगाया जाए। 
John 3:21 परन्तु जो सच्चाई पर चलता है वह ज्योति के निकट आता है, ताकि उसके काम प्रगट हों, कि वह परमेश्वर की ओर से किए गए हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 16-18
  • 2 कुरिन्थियों 6


मंगलवार, 12 सितंबर 2017

घमण्ड और नम्रता


   कुछ समय पहले की बात है, मैं अपनी पत्नि के साथ कुछ दिन कैम्पिंग के लिए गया, जहाँ हम एक प्राकृतिक खुले इलाके में तंबुओं में रहते थे। एक संध्या को अपने कैम्प की ओर लौटते समय हमने पास के घास के मैदान में दो नर भालुओं को एक दूसरे के साथ लड़ाई करते हुए देखा, और हम थोड़ी देर तक उन्हें लड़ते हुए देखने को रुक गए। वहाँ पहले से उपस्थित एक और व्यक्ति से हमने पूछा कि यह लड़ाई किस कारण हो रही थी; उसने उत्तर दिया, "एक मादा भालू के पीछे?" लेकिन क्योंकि हमें वहाँ और कोई भालू दिखाई नहीं दे रहा था, इसलिए हमने फिर पूछा, "वो कहाँ है?" तो उत्तर मिल, "वह तो लगभग बीस मिनट पहले जंगल की ओर चली गई!" इससे मैंने निषकर्ष निकाला कि वह लड़ाई मादा भालू के कारण नहीं वरन अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिए हो रही थी।

   हम मनुष्यों के साथ भी ऐसा ही होता है। हमारे अधिकांश परस्पर झगड़े सही नीति और सिध्दांत, या सही अथवा गलत को लेकर नहीं होते हैं; वे हमारे घमण्ड के कारण होते हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन का बुध्दिमान लेखक यह बात बड़ी स्पष्टता से लिखता है: "झगड़े रगड़े केवल अंहकार ही से होते हैं, परन्तु जो लोग सम्मति मानते हैं, उनके पास बुद्धि रहती है" (नीतिवचन 13:10)। अहंकार ही झगड़ों का ईंधन है; हम अपने आप को सही दिखाने के लिए, अपनी इच्छानुसार कार्य करवाने के लिए, अपना अधिकार-क्षेत्र बनाए रखने के लिए, अपने अहम को ऊँचा बनाए रखने के लिए झगड़ा करने से नहीं हिचकिचाते हैं।

   जबकि बाइबल यह भी बताती है कि इसके विपरीत, बुध्दिमता उनके साथ होती है जो भला परामर्श स्वीकार करते हैं, जो दूसरों की सुनने को, उनसे सीखने को, औरों की भली बातों को मानने को तैयार रहते हैं। जो अपने आप को नम्र बनाते हैं; जो अपनी स्वार्थी अभिलाषाओं को छोड़ना जानते हैं; जो अपनी समझ की सीमा को पहचानते हैं; जो औरों के दृष्टिकोण को भी जानने की इच्छा रखते हैं; जो अपने विचारों में सुधार स्वीकार कर लेते हैं, उनमें बुध्दिमता वास करती है।

   घमण्ड को दूर कर के नम्रता के साथ जीवन बिताना परमेश्वर से बुध्दिमता लाता है, जिसका परिणाम सदा शान्ति ही होता है। - डेविड रोपर


नम्रता से बुध्दिमता आती है।

इसलिये कि जहां डाह और विरोध होता है, वहां बखेड़ा और हर प्रकार का दुष्‍कर्म भी होता है। पर जो ज्ञान ऊपर से आता है वह पहिले तो पवित्र होता है फिर मिलनसार, कोमल और मृदुभाव और दया, और अच्‍छे फलों से लदा हुआ और पक्षपात और कपट रहित होता है। - याकूब 3:16-17

बाइबल पाठ: नीतिवचन 13:9-21
Proverbs 13:9 धर्मियों की ज्योति आनन्द के साथ रहती है, परन्तु दुष्टों का दिया बुझ जाता है। 
Proverbs 13:10 झगड़े रगड़े केवल अंहकार ही से होते हैं, परन्तु जो लोग सम्मति मानते हैं, उनके पास बुद्धि रहती है। 
Proverbs 13:11 निर्धन के पास माल नहीं रहता, परन्तु जो अपने परिश्रम से बटोरता, उसकी बढ़ती होती है। 
Proverbs 13:12 जब आशा पूरी होने में विलम्ब होता है, तो मन शिथिल होता है, परन्तु जब लालसा पूरी होती है, तब जीवन का वृक्ष लगता है। 
Proverbs 13:13 जो वचन को तुच्छ जानता, वह नाश हो जाता है, परन्तु आज्ञा के डरवैये को अच्छा फल मिलता है। 
Proverbs 13:14 बुद्धिमान की शिक्षा जीवन का सोता है, और उसके द्वारा लोग मृत्यु के फन्दों से बच सकते हैं। 
Proverbs 13:15 सुबुद्धि के कारण अनुग्रह होता है, परन्तु विश्वासघातियों का मार्ग कड़ा होता है। 
Proverbs 13:16 सब चतुर तो ज्ञान से काम करते हैं, परन्तु मूर्ख अपनी मूढ़ता फैलाता है। 
Proverbs 13:17 दुष्ट दूत बुराई में फंसता है, परन्तु विश्वासयोग्य दूत से कुशल क्षेम होता है।
Proverbs 13:18 जो शिक्षा को सुनी-अनसुनी करता वह निर्धन होता और अपमान पाता है, परन्तु जो डांट को मानता, उसकी महिमा होती है। 
Proverbs 13:19 लालसा का पूरा होना तो प्राण को मीठा लगता है, परन्तु बुराई से हटना, मूर्खों के प्राण को बुरा लगता है। 
Proverbs 13:20 बुद्धिमानों की संगति कर, तब तू भी बुद्धिमान हो जाएगा, परन्तु मूर्खों का साथी नाश हो जाएगा।
Proverbs 13:21 बुराई पापियों के पीछे पड़ती है, परन्तु धर्मियों को अच्छा फल मिलता है।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 13-15
  • 2 कुरिन्थियों 5


सोमवार, 11 सितंबर 2017

समर्पण


   मेरे पुरखे मिशिगन प्रांत में आकर बस जाने वालों आरंभिक लोगों में से थे। उन्होंने भूमि को साफ किया, खेती की, बग़ीचे उगाए, जिससे वे अपने परिवार और बच्चों का भरण-पोषण कर सकें। मेरे परिवार में खेती-बाड़ी के प्रति यह रुझान पीढ़ियों से चला आ रहा है। मेरे पिता का जन्म और पालन-पोषण भी मिशिगन के एक किसानी करने वाले परिवार में हुआ था और उन्हें बाग़बानी का शौक था। संभवतं इसी कारण मुझे भी बाग़बानी का और उपजाऊ मिट्टी की गन्ध का शौक है। मुझे सुगन्धित फूलों वाले पौधे और गुलाब के पौधे उगाना और उनकी देखभाल करना बहुत पसन्द है। यदि यह करने में खर-पतवार न हों तो बहुत अच्छा हो; परन्तु समय-समय पर मुझे खर-पतवार को निकालना होता है, बग़ीचे की सफाई करनी होती है।

   जब मुझे इस खर-पतवार के साथ जूझना पड़ता है तो मुझे एक और बाग़ स्मरण हो आता है - अदन की वाटिका। परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि वह परमेश्वर द्वारा लगाया गया सिध्द बाग़ था, जब तक कि आदम और हव्व द्वारा परमेश्वर की अनाज्ञाकारिता के पाप ने उसे बिगाड़ नहीं दिया। वहीं से आदम और हव्वा तथा उनके बाद के प्रत्येक बाग़बान के लिए खर-पतवार समस्या बन गए (उत्पत्ति 3:17-18)।

   इसके अतिरिक्त बाइबल एक और बाग़ के बारे में भी बताती है - गतसमनी का बाग़, जहाँ अदन की वाटिका में आरंभ हुए पाप के दुषपरिणामों को उलट देने के लिए प्रभु यीशु मसीह ने प्रार्थना में परमेश्वर पिता के समक्ष संघर्ष किया, और विनती की कि यदि संभव हो तो मनुष्यों के पाप के दोष को हटा देने के लिए कोई और मार्ग मिल सके। गतसमनी के बाग़ में प्रभु यीशु मसीह ने परमेश्वर पिता के आगे आज्ञाकारिता में सर झुका कर क्रूस पर मृत्यु की घोर यातना सहना स्वीकार करते हुए कहा, "तेरी इच्छा पूरी हो" (मत्ती 26:42)।

   क्योंकि प्रभु यीशु ने गतसमनी के बाग़ में समर्पण किया था, इसलिए आज संसार भर में सभी मनुष्यों के पास परमेश्वर के अनुग्रह में साधारण विश्वास द्वारा पापों की क्षमा और अनन्त आशीष के जीवन का मार्ग उपलब्ध है। आज जो भी सच्चे मन और स्वेच्छा से प्रभु परमेश्वर को अपना जीवन समर्पण करता है, परमेश्वर उसके जीवन से खर-पतवार निकाल कर, सफाई करके, उसे अपनी स्वर्गीय आशीषों से भर देता है। - जो स्टोवैल


समर्पण तथा विश्वास के बोने और उगाए जाने से, 
आत्मिक उन्नति और आशीष की फसल मिलती है।

तब मैं ने कहा, देख, मैं आ गया हूं, (पवित्र शास्त्र में मेरे विषय में लिखा हुआ है) ताकि हे परमेश्वर तेरी इच्छा पूरी करूं। - इब्रानियों 10:7 

बाइबल पाठ: मत्ती 26:36-42
Matthew 26:36 तब यीशु ने अपने चेलों के साथ गतसमनी नाम एक स्थान में आया और अपने चेलों से कहने लगा कि यहीं बैठे रहना, जब तक कि मैं वहां जा कर प्रार्थना करूं। 
Matthew 26:37 और वह पतरस और जब्‍दी के दोनों पुत्रों को साथ ले गया, और उदास और व्याकुल होने लगा। 
Matthew 26:38 तब उसने उन से कहा; मेरा जी बहुत उदास है, यहां तक कि मेरे प्राण निकला चाहते: तुम यहीं ठहरो, और मेरे साथ जागते रहो। 
Matthew 26:39 फिर वह थोड़ा और आगे बढ़कर मुंह के बल गिरा, और यह प्रार्थना करने लगा, कि हे मेरे पिता, यदि हो सके, तो यह कटोरा मुझ से टल जाए; तौभी जैसा मैं चाहता हूं वैसा नहीं, परन्तु जैसा तू चाहता है वैसा ही हो। 
Matthew 26:40 फिर चेलों के पास आकर उन्हें सोते पाया, और पतरस से कहा; क्या तुम मेरे साथ एक घड़ी भी न जाग सके? 
Matthew 26:41 जागते रहो, और प्रार्थना करते रहो, कि तुम परीक्षा में न पड़ो: आत्मा तो तैयार है, परन्तु शरीर दुर्बल है। 
Matthew 26:42 फिर उसने दूसरी बार जा कर यह प्रार्थना की; कि हे मेरे पिता, यदि यह मेरे पीए बिना नहीं हट सकता तो तेरी इच्छा पूरी हो।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 10-12
  • 2 कुरिन्थियों 4