ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

सार्थक लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
सार्थक लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

गुरुवार, 5 अक्टूबर 2017

समय


   मेरे मित्र बॉब बोर्डमैन ने लिखा, "यदि मनुष्य की संभावित सामान्य आयु को 70 वर्ष मानकर, उसे 24 घंटे के एक दिन में सीमित कर दिया जाए तो मेरे जीवन में अभी संध्या के 8:30 बज रहे हैं...समय बड़ी तेज़ी से निकलता चला जा रहा है।"

   इस तथ्य को मान लेने की कठिनाई ने कि पृथ्वी पर हमारा समय बहुत सीमित है, और जो है वह बहुत तेज़ी से बीतता चला जा रहा है, "टिक्कर" नामक कलाई-घड़ी को बनाने की प्रेरणा दी, जो आपके जीवन का अनुमानित शेष समय बताती है। इसे बनाने वाले इसके प्रचार के लिए दिए गए विज्ञापन में इसके विषय में कहते हैं कि "यह वह घड़ी है जो आपके जीवन के पल गिनती है, जिससे आप हर पल का महत्व जान सकें।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में, भजन 39 में दाऊद ने जीवन के अल्पकालीन होने का सामना किया। दाऊद ने कहा, "हे यहोवा ऐसा कर कि मेरा अन्त मुझे मालुम हो जाए, और यह भी कि मेरी आयु के दिन कितने हैं; जिस से मैं जान लूं कि कैसा अनित्य हूं" (पद 4)। उसने अपने जीवन काल को एक हाथ की बालिश्त भर का बताया, परमेश्वर के समक्ष क्षण भर का, और मात्र एक श्वास कहा (पद 5)। दाऊद का निष्कर्ष था, "और अब हे प्रभु, मैं किस बात की बाट जोहूं? मेरी आशा तो तेरी ओर लगी है" (पद 7)

   समय बीत रहा है। परमेश्वर हमें जिस प्रकार के लोग देखना चाहता है वैसे होने के लिए परमेश्वर की सामर्थ्य को खोजने, तथा उसकी सहायता से वैसे बन जाने का समय अभी है। हमारे शाश्वत प्रभु परमेश्वर यीशु मसीह में सच्चे पश्चाताप और समर्पण द्वारा अपनी अनन्त आशा को सुदृढ़ कर लेना ही हमारे जीवनों को सार्थक बना सकता है। - डेविड मैक्कैसलैंड


प्रभु यीशु के लिए जीवन जीने का समय अभी है।

हे भाइयो, चौकस रहो, कि तुम में ऐसा बुरा और अविश्वासी मन न हो, जो जीवते परमेश्वर से दूर हट जाए। वरन जिस दिन तक आज का दिन कहा जाता है, हर दिन एक दूसरे को समझाते रहो, ऐसा न हो, कि तुम में से कोई जन पाप के छल में आकर कठोर हो जाए। - इब्रानियों 3:12-13

बाइबल पाठ: भजन 39
Psalms 39:1 मैं ने कहा, मैं अपनी चाल चलन में चौकसी करूंगा, ताकि मेरी जीभ से पाप न हो; जब तक दुष्ट मेरे साम्हने है, तब तक मैं लगाम लगाए अपना मुंह बन्द किए रहूंगा। 
Psalms 39:2 मैं मौन धारण कर गूंगा बन गया, और भलाई की ओर से भी चुप्पी साधे रहा; और मेरी पीड़ा बढ़ गई, 
Psalms 39:3 मेरा हृदय अन्दर ही अन्दर जल रहा था। सोचते सोचते आग भड़क उठी; तब मैं अपनी जीभ से बोल उठा; 
Psalms 39:4 हे यहोवा ऐसा कर कि मेरा अन्त मुझे मालुम हो जाए, और यह भी कि मेरी आयु के दिन कितने हैं; जिस से मैं जान लूं कि कैसा अनित्य हूं! 
Psalms 39:5 देख, तू ने मेरे आयु बालिश्त भर की रखी है, और मेरी अवस्था तेरी दृष्टि में कुछ है ही नहीं। सचमुच सब मनुष्य कैसे ही स्थिर क्यों न हों तौभी व्यर्थ ठहरे हैं। 
Psalms 39:6 सचमुच मनुष्य छाया सा चलता फिरता है; सचमुच वे व्यर्थ घबराते हैं; वह धन का संचय तो करता है परन्तु नहीं जानता कि उसे कौन लेगा! 
Psalms 39:7 और अब हे प्रभु, मैं किस बात की बाट जोहूं? मेरी आशा तो तेरी ओर लगी है। 
Psalms 39:8 मुझे मेरे सब अपराधों के बन्धन से छुड़ा ले। मूढ़ मेरी निन्दा न करने पाए। 
Psalms 39:9 मैं गूंगा बन गया और मुंह न खोला; क्योंकि यह काम तू ही ने किया है। 
Psalms 39:10 तू ने जो विपत्ति मुझ पर डाली है उसे मुझ से दूर कर दे, क्योंकि मैं तो तरे हाथ की मार से भस्म हुआ जाता हूं। 
Psalms 39:11 जब तू मनुष्य को अधर्म के कारण डाँट डपटकर ताड़ना देता है; तब तू उसकी सुन्दरता को पतंगे की नाईं नाश करता है; सचमुच सब मनुष्य व्यर्थ अभिमान करते हैं।
Psalms 39:12 हे यहोवा, मेरी प्रार्थना सुन, और मेरी दोहाई पर कान लगा; मेरा रोना सुनकर शांत न रह! क्योंकि मैं तेरे संग एक परदेशी यात्री के समान रहता हूं, और अपने सब पुरखाओं के समान परदेशी हूं। 
Psalms 39:13 आह! इस से पहिले कि मैं यहां से चला जाऊं और न रह जाऊं, मुझे बचा ले जिस से मैं प्रदीप्त जीवन प्राप्त करूं!

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 23-25
  • फिलिप्पियों 1


गुरुवार, 14 सितंबर 2017

कार्यकारी शब्द


   कॉलेज में मेरी कक्षा के उस छात्र का वह ईमेल सहायता की शीघ्र कार्यवाही के निवेदन से भरा था। सेमेस्टर का अन्त आ रहा था, और उसे यह एहसास हुआ था कि खेलों में भागीदारी के लिए उसे कुछ बेहतर अंक चाहिएं। अब वह क्या कर सकता था? उसने अपने कुछ गृहकार्य पूरे नहीं किए थे, इसलिए मैंने उसे अवसर दिया कि वह दो दिन में उन कार्यों को पूरा कर के आँकलन के लिए सौंप दे जिससे उन कार्यों पर मिलने वाले अंकों से उसके कुल अंक सुधर सकें। उसका प्रत्युत्तर था: "बहुत धन्यवाद। मैं यह काम पूरा कर के दे दूँगा।" दो दिन भी बीत गए परन्तु उसकी ओर से कोई कार्य आँकलन के लिए सौंपा नहीं गया। उस युवक ने अपने शब्दों की पुष्टि अपने कार्यों से नहीं की।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भी हम पाते हैं कि प्रभु यीशु मसीह ने एक ऐसे ही युवक के बारे में बताया था। उस युवक के पिता ने उससे कहा कि वह जाकर उसकी दाख़ की बारी [अँगूरों का खेत] में कुछ काम करे। उस युवक ने वह कार्य करने के लिए पिता को आश्वस्त किया (मत्ती 21:30), परन्तु जाकर काम नहीं किया। वह केवल बात कहना जानता था, उन शब्दों के अनुरूप कार्य करना नहीं। इस दृष्टांत पर टिप्पणी करते हुए प्रसिध्द बाइबल टीकाकार, मैथ्यु हेनरी ने कहा, "कलियाँ और फूल, फल नहीं होते हैं।" जब तक हमारे शब्दों की कलियाँ और फूल, जिन से होने वाले कार्य की प्रत्याशा होती है, उस प्रत्याशा के अनुरूप कार्यों के फल नहीं लाते हैं, वे खोखले और निरर्थक हैं। इस दृष्टांत को सुनाने में प्रभु यीशु का आश्य मुख्यतः उस समय के उन धर्मगुरुओं के प्रति था जो परमेश्वर के बारे में बड़ी-बड़ी बातें तो बोलते थे, परन्तु स्वयं उन बातों के आज्ञाकरी नहीं थे, अपने पापों से पश्चाताप नहीं करते थे। परन्तु प्रभु यीशु के शब्द आज हमारे लिए भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। बिना खोखले दावे किए, जब हम अपने शब्दों को कार्यकारी करते हैं (1 यूहन्ना 3:18), तब हम अपने प्रभु परमेश्वर तथा उद्धारकर्ता का आदर करते हैं।

   खोखले तथा निर्थक शब्दों की अपेक्षा परमेश्वर के प्रति अपने वास्तव में कार्यकारी शब्दों के द्वारा हम उसके प्रति अपने प्रेम, आदर और श्रध्दा को कहीं अधिक सार्थक रीति से दिखा सकते हैं। - डेव ब्रैनन


शब्द फूल होते हैं, तो अनुरूप कार्य फल।

हे बालकों, हम वचन और जीभ ही से नहीं, पर काम और सत्य के द्वारा भी प्रेम करें। - 1 यूहन्ना 3:18

बाइबल पाठ: मत्ती 21:28-32
Matthew 21:28 तुम क्या समझते हो? किसी मनुष्य के दो पुत्र थे; उसने पहिले के पास जा कर कहा; हे पुत्र आज दाख की बारी में काम कर। 
Matthew 21:29 उसने उत्तर दिया, मैं नहीं जाऊंगा, परन्तु पीछे पछता कर गया। 
Matthew 21:30 फिर दूसरे के पास जा कर ऐसा ही कहा, उसने उत्तर दिया, जी हां जाता हूं, परन्तु नहीं गया। 
Matthew 21:31 इन दोनों में से किस ने पिता की इच्छा पूरी की? उन्होंने कहा, पहिले ने: यीशु ने उन से कहा, मैं तुम से सच कहता हूं, कि महसूल लेने वाले और वेश्या तुम से पहिले परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करते हैं। 
Matthew 21:32 क्योंकि यूहन्ना धर्म के मार्ग से तुम्हारे पास आया, और तुम ने उस की प्रतीति न की: पर महसूल लेने वालों और वेश्याओं ने उस की प्रतीति की: और तुम यह देखकर पीछे भी न पछताए कि उस की प्रतीति कर लेते।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 19-21
  • 2 कुरिन्थियों 7


शनिवार, 21 मार्च 2015

निर्णय


   कैंसर के साथ अपनी लड़ाई के संबंध में, ऐप्पल कंपनी के सह-संस्थापक, स्टीव जोब्स ने कहा, "जीवन से संबंधित बड़े चुनाव करने के लिए मेरे लिया सबसे महत्वपूर्ण औज़ार बना है इस बात को स्मरण रखना कि मैं शीघ्र ही मर जाऊँगा। क्योंकि बाहरी अन्य सब कुछ, सारी आशाएं, सारा गर्व, सारी शर्मिन्दगी, सभी असफलताएं - इन सब का महत्व मृत्यु की वास्तविकता के सामने जाता रहता है, सामने रह जाता है तो बस वह जो वास्तव में महत्वपूर्ण तथा आवश्यक है।"

   इसकी तुलना में प्रेरित पतरस ने अपने पाठकों को उभारना करना चाहा कि वे अपने दुखों का उपयोग अपने अनन्त जीवन को सार्थक बनाने के लिए करें। साथ ही पतरस ने उन्हें इस बात के लिए भी उभारा के वे प्रभु यीशु के दुख उठाने को अपने जीवन में आने वाले आत्मिक संघर्ष तथा सताव को मसीह यीशु में विशवास रखने के परिणाम के रूप में स्वीकार कर लें - क्योंकि वे प्रभु यीशु से प्रेम करते हैं इसलिए दुख उठाना उनके लिए उस विश्वास की स्वाभाविक नियति होगी। प्रभु यीशु का दुख उठाना उनके लिए पाप की लालसाओं को त्यागने और परमेश्वर के प्रति आज्ञाकारी रहने के लिए प्रोत्साहन का कारण होना चाहिए (1 पतरस 4:1-2)। यदि उनके जीवन अनन्त काल के लिए सार्थक होने हैं, तो उन्हें अस्थाई शारीरिक आनन्द की लालसाओं से मन हटाकर परमेश्वर को पसन्द आने वाली बातों पर मन लगाना तथा उन पर जीवन को व्यय करना चाहिए।

   इस बात को स्मरण रखना कि प्रभु यीशु ने हम सभी मनुष्यों के पापों के निवारण के लिए दुख उठाया और सभी के पापों की क्षमा के लिए अपना बलिदान दिया हमारे लिए वह सबसे महत्वपूर्ण वास्तविकता होनी चाहिए जो हमें परमेश्वर की इच्छा के अनुसार तथा अनन्तकाल के लिए उपयोगी निर्णय करने के लिए उभार सके। - मार्विन विलियम्स


प्रभु यीशु की मृत्यु हमारे बीते जीवन के पापों को क्षमा तथा आते जीवन को परमेश्वर के प्रति आज्ञाकारिता प्रदान करती है।

और जो मसीह यीशु के हैं, उन्होंने शरीर को उस की लालसाओं और अभिलाषाओं समेत क्रूस पर चढ़ा दिया है। - गलतियों 5:24 

बाइबल पाठ: 1 पतरस 4:1-8
1 Peter 4:1 सो जब कि मसीह ने शरीर में हो कर दुख उठाया तो तुम भी उस ही मनसा को धारण कर के हथियार बान्‍ध लो क्योंकि जिसने शरीर में दुख उठाया, वह पाप से छूट गया। 
1 Peter 4:2 ताकि भविष्य में अपना शेष शारीरिक जीवन मनुष्यों की अभिलाषाओं के अनुसार नहीं वरन परमेश्वर की इच्छा के अनुसार व्यतीत करो। 
1 Peter 4:3 क्योंकि अन्यजातियों की इच्छा के अनुसार काम करने, और लुचपन की बुरी अभिलाषाओं, मतवालापन, लीलाक्रीड़ा, पियक्कड़पन, और घृणित मूर्तिपूजा में जहां तक हम ने पहिले समय गंवाया, वही बहुत हुआ। 
1 Peter 4:4 इस से वे अचम्भा करते हैं, कि तुम ऐसे भारी लुचपन में उन का साथ नहीं देते, और इसलिये वे बुरा भला कहते हैं। 
1 Peter 4:5 पर वे उसको जो जीवतों और मरे हुओं का न्याय करने को तैयार है, लेखा देंगे। 
1 Peter 4:6 क्योंकि मरे हुओं को भी सुसमाचार इसी लिये सुनाया गया, कि शरीर में तो मनुष्यों के अनुसार उन का न्याय हो, पर आत्मा में वे परमेश्वर के अनुसार जीवित रहें। 
1 Peter 4:7 सब बातों का अन्‍त तुरन्त होने वाला है; इसलिये संयमी हो कर प्रार्थना के लिये सचेत रहो। 
1 Peter 4:8 और सब में श्रेष्ठ बात यह है कि एक दूसरे से अधिक प्रेम रखो; क्योंकि प्रेम अनेक पापों को ढांप देता है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू 7-9
  • लूका 1:21-38