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मंगलवार, 21 जनवरी 2020

प्रतिज्ञाएं


      मेरी सबसे छोटी बेटी और मैं कभी-कभी एक खेल खेलते हैं, जिसे हम “चुटकी” कहते हैं। खेल बहुत साधारण सा है – जब वह सीढ़ी चढ़ रही होती है तो मैं उसके पीछे भागकर, उस तक पहुंचकर, उसे एक हल्की सी चुटकी काटता हूँ; किन्तु यदि मेरे पहुँचने से पहले वह सीढ़ी चढ़कर ऊपर पहुँच जाती है, तो फिर वह सुरक्षित है, मैं चुटकी नहीं काट सकता हूँ। किन्तु कभी ऐसा भी होता है जब वह खेलने के मूड में नहीं होती है, और तब वह मुझ से कहने लगती है, “चुटकी नहीं”, “चुटकी नहीं”; और मेरा प्रत्युत्तर होता है, “अच्छा चुटकी नहीं। मेरा वायदा।”

      अब कहने को तो मेरी यह प्रतिज्ञा छोटी से बात लगती है, परन्तु जब मैं वही करता हूँ जो मैं उस से कहता हूँ, तो मेरी बेटी मेरे बारे में सीखती है, मेरे चरित्र को समझने लगती है। वह समझने लगती है कि मैं अपनी बात पर पक्का हूँ और वह मुझ पर भरोसा रख सकती है। मेरा यह प्रतिज्ञा निभाना छोटी सी बात हो सकती है, परन्तु इसी प्रकार से अपनी बातों पर बने रहना और उन्हें निभाना ही संबंधों को बनाए रखने का आधार है। इसी से रिश्तों में प्रेम और भरोसे की नींव पड़ती है।

      मुझे लगता है कि परमेश्वर के वचन बाइबल में भी पतरस का यही अभिप्राय था जब उसने कहा कि परमेश्वर की प्रतिज्ञाएं हमें “ईश्वरीय स्वभाव में सहभागी बनाती हैं” (2 पतरस 1:4)। हम जब परमेश्वर की कही बात पर भरोसा करते हैं, जो वह अपने बारे में और हमारे बारे में कहता है, उस पर विश्वास करते हैं, तो हम हमारे प्रति उसकी भावनाओं को समझने पाते हैं। जब हम उसकी बातों और वचन पर निर्भर तथा दृढ़ बने रहते हैं, तो उसे भी अपने आप को हमारे प्रति विश्वासयोग्य प्रमाणित करने के अवसर मिलते हैं।

      मैं प्रभु परमेश्वर का धन्यवादी हूँ कि उसका वचन हमारे लिए उसकी प्रतिज्ञाओं से भरा पड़ा है; और ये प्रतिज्ञाएं दृढ़ स्मृतियाँ हैं कि उसकी करुणा सदा नई होती रहती है, कभी टलती नहीं है (विलापगीत 3:22-23)।

परमेश्वर का वचन उसके मन को प्रगट करता है।

हम मिट नहीं गए; यह यहोवा की महाकरुणा का फल है, क्योंकि उसकी दया अमर है। प्रति भोर वह नई होती रहती है; तेरी सच्चाई महान है। - विलापगीत 3:22-23

बाइबल पाठ: 2 पतरस 1:1-9
2 Peter 1:1 शमौन पतरस की और से जो यीशु मसीह का दास और प्रेरित है, उन लोगों के नाम जिन्होंने हमारे परमेश्वर और उद्धारकर्ता यीशु मसीह की धामिर्कता से हमारा सा बहुमूल्य विश्वास प्राप्त किया है।
2 Peter 1:2 परमेश्वर के और हमारे प्रभु यीशु की पहचान के द्वारा अनुग्रह और शान्‍ति तुम में बहुतायत से बढ़ती जाए।
2 Peter 1:3 क्योंकि उसके ईश्वरीय सामर्थ ने सब कुछ जो जीवन और भक्ति से सम्बन्‍ध रखता है, हमें उसी की पहचान के द्वारा दिया है, जिसने हमें अपनी ही महिमा और सद्गुण के अनुसार बुलाया है।
2 Peter 1:4 जिन के द्वारा उसने हमें बहुमूल्य और बहुत ही बड़ी प्रतिज्ञाएं दी हैं: ताकि इन के द्वारा तुम उस सड़ाहट से छूट कर जो संसार में बुरी अभिलाषाओं से होती है, ईश्वरीय स्‍वभाव के समभागी हो जाओ।
2 Peter 1:5 और इसी कारण तुम सब प्रकार का यत्‍न कर के, अपने विश्वास पर सद्गुण, और सद्गुण पर समझ।
2 Peter 1:6 और समझ पर संयम, और संयम पर धीरज, और धीरज पर भक्ति।
2 Peter 1:7 और भक्ति पर भाईचारे की प्रीति, और भाईचारे की प्रीति पर प्रेम बढ़ाते जाओ।
2 Peter 1:8 क्योंकि यदि ये बातें तुम में वर्तमान रहें, और बढ़ती जाएं, तो तुम्हें हमारे प्रभु यीशु मसीह के पहचानने में निकम्मे और निष्‍फल न होने देंगी।
2 Peter 1:9 और जिस में ये बातें नहीं, वह अन्‍धा है, और धुन्‍धला देखता है, और अपने पूर्वकाली पापों से धुल कर शुद्ध होने को भूल बैठा है।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 1-3
  • मत्ती 14: 1-21


सोमवार, 20 जनवरी 2020

सहायता



      सुविख्यात ब्रुकलिन टैबरनैक्ल क्वौयर ने कई दशकों से बहुतेरे लोगों को अपने आत्म-विभोर करने वाले मसीही भजनों के द्वारा आशीषित किया है। इसका एक उदाहरण है परमेश्वर के वचन बाइबल में से भजन 121 से की गई उनकी एक रिकॉर्डिंग, जिसका शीर्षक है “मेरी सहायता”।

      भजन 121 का आरंभ प्रभु परमेश्वर, जो सारी सृष्टि का सृष्टिकर्ता है, में व्यक्तिगत विश्वास के अंगीकार से होती है, वही भजनकार की सहायता का स्त्रोत भी था (पद 1-2)। इसका क्या अर्थ है? इसका अर्थ है परमेश्वर से मिलने वाली स्थिरता (पद 3), हर समय उपलब्ध उसकी देखभाल (पद 3-4), उसकी सदा साथ बनी रहने वाली उपस्थिति और सुरक्षा (पद 5-6), और अनन्तकाल के लिए हर प्रकार की बुराई से बचाव (पद 7-8)।

      परमेश्वर के वचन से प्रेरित होकर परमेश्वर के लोगों ने अपने भजनों में सदा ही परमेश्वर को ही अपनी सुरक्षा तथा सहायता का स्त्रोत बताया है। मेरा अपना अनुभव भी यही है, जिसके अंतर्गत मैंने भी आराधना में चार्ल्स वेस्ली द्वारा लिखित भजन “हे पिता, मैं अपने हाथ आपकी ओर बढ़ाता हूँ, क्योंकि मैं और किसी सहायता को नहीं जानता हूँ; यदि आप मुझसे दूर हो जाएंगे, तो मुझे नहीं पता कि मैं फिर कहाँ जाऊँगा” को गाया है; तथा इसी प्रकार से महान सुधारक मार्टिन लूथर ने भी सही कहा जब उन्होंने लिखा, “हमारा परमेश्वर एक अत्यंत मज़बूत गढ़ है; एक ऐसी दीवार जो कभी नहीं ढहती है; वही हमारे चारों ओर आई हुई नश्वर संसार की बुराईयों की बाढ़ में हमारा सहायक है” और मैंने इसका भी अपने जीवन में अनुभव किया है।

      क्या आप अपने आप को अकेला, त्यागा हुआ, निष्कासित, और असमंजस में पड़ा हुआ अनुभव करते हैं? भजन 121 के शब्दों पर मनन करें, और इन शब्दों को अपने मन और आत्मा में विशवास और साहस को भरने दें। क्योंकि आप अकेले नहीं हैं, इसलिए जीवन में अकेले ही प्रयत्न करते रहने के प्रयास न करें। वरन जैसा परमेश्वर पिता ने प्रभु यीशु मसीह के जीवन, मृत्यु, पुनरुत्थान, और स्वर्गारोहण के द्वारा आपके लिए अपनी सहायता को प्रमाणित किया है, उसमें भरोसा बनाए रखें तथा आनन्दित बने रहें। जीवन का अगला जो भी कदम उठाना हो, उसे प्रभु परमेश्वर की सहायता से ही उठाएँ। - आर्थर जैक्सन

सृष्टि का सृष्टिकर्ता, अपने लोगों का भी सहायक है।

तुम्हारा स्‍वभाव लोभरिहत हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। इसलिये हम बेधड़क हो कर कहते हैं, कि प्रभु, मेरा सहायक है; मैं न डरूंगा; मनुष्य मेरा क्या कर सकता है। - इब्रानियों 13: 5-6

बाइबल पाठ: भजन 121
Psalms 121:1 मैं अपनी आंखें पर्वतों की ओर लगाऊंगा। मुझे सहायता कहां से मिलेगी?
Psalms 121:2 मुझे सहायता यहोवा की ओर से मिलती है, जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है।
Psalms 121:3 वह तेरे पांव को टलने न देगा, तेरा रक्षक कभी न ऊंघेगा।
Psalms 121:4 सुन, इस्राएल का रक्षक, न ऊंघेगा और न सोएगा।
Psalms 121:5 यहोवा तेरा रक्षक है; यहोवा तेरी दाहिनी ओर तेरी आड़ है।
Psalms 121:6 न तो दिन को धूप से, और न रात को चांदनी से तेरी कुछ हानि होगी।
Psalms 121:7 यहोवा सारी विपत्ति से तेरी रक्षा करेगा; वह तेरे प्राण की रक्षा करेगा।
Psalms 121:8 यहोवा तेरे आने जाने में तेरी रक्षा अब से ले कर सदा तक करता रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 49-50
  • मत्ती 13:31-58



रविवार, 19 जनवरी 2020

पहाड़



      यदि आपके मार्ग में पहाड़ बाधा बना हुआ हो तो आप क्या करेंगे? दशरथ मांझी की कहानी हमें प्रेरणा देती है। क्योंकि वह उसे शीघ्रता से अस्पताल नहीं पहुंचा सका, इसलिए त्वरित चिकित्सा न मिल पाने के कारण मांझी की पत्नी का देहांत हो गया; तब मांझी ने वह किया जो असंभव लगता था। उसने अगले बाईस वर्ष पहाड़ खोद कर मार्ग बनाने में लगाए जिससे अन्य गाँव वालों को उनकी आवश्यकता के समय में अस्पताल जाने और चिकित्सा प्राप्त करने में विलम्ब न हो। उसके देहांत से पहले भारत सरकार ने उसके इस प्रयास की सराहना की और उसकी इस उपलब्धि के लिए उसे सम्मानित किया।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में, जरुब्बाबेल को, जो निर्वासन से लौट कर आने वाले लोगों में से एक तथा इस्राएल का एक अगुवा था, मंदिर के पुनर्निर्माण का कार्य असंभव प्रतीत हुआ होगा। मंदिर के पुनर्निर्माण में लगे लोग, विरोधियों के हमलों के कारण हताश थे, और उनके पास न तो रक्षा के लिए कोई बड़ी सेना थी और न ही निर्माण के लिए कोई विशेष संसाधन। परन्तु परमेश्वर ने जरुब्बाबेल के पास ज़कर्याह नबी को पास भेजा, उसे स्मरण करवाने के लिए कि इस कार्य को पूरा करने के लिए किसी सैन्य बल, व्यक्तिगत सामर्थ्य, या मानवीय संसाधनों से बढ़कर अलौकिक शक्ति की आवश्यकता होगी। इसे पूरा करने के लिए परमेश्वर के पवित्र आत्मा के बल की आवश्यकता होगी (ज़कर्याह 4:6)। जरुब्बाबेल ने परमेश्वर की बात और सहायता पर भरोसा किया, और विश्वास रखा कि परमेश्वर किसी भी प्रकार की कठिनाई के प्रत्येक पहाड़ को हटा देगा, तथा मंदिर का पुनर्निर्माण और इस्राएली समुदाय की पुनःस्थापना को करवा देगा (7); और यही हुआ भी।

      जब हमारे सामने कठिनाइयों या परिस्थितियों के पहाड़ आते हैं, तब हम क्या करते हैं? हमारे सामने दो ही विकल्प होते हैं: या तो हम अपनी सामर्थ्य और कौशल पर भरोसा रखें, या फिर परमेश्वर के आत्मा की अगुवाई में होकर उसके निर्देशानुसार कार्य करें। जब हम परमेश्वर पर भरोसा रखते हैं, उसके कहे के अनुसार चलते हैं, तब या तो वह हमारे उस ‘पहाड़’ को हमारे सामने से हटा देता है, या फिर हमें उस ‘पहाड़’ पर चढ़कर उसे पार करने की सामर्थ्य तथा धैर्य देता है। - मार्विन विलियम्स

परमेश्वर के कार्यों को पूरा करने के लिए मानवीय सामर्थ्य अपर्याप्त है।

जो मुझे सामर्थ देता है उस में मैं सब कुछ कर सकता हूं। - फिलिप्पियों 4:13

बाइबल पाठ: ज़कर्याह 4:1-7
Zechariah 4:1 फिर जो दूत मुझ से बातें करता था, उसने आकर मुझे ऐसा जगाया जैसा कोई नींद से जगाया जाए।
Zechariah 4:2 और उसने मुझ से पूछा, तुझे क्या देख पड़ता है? मैं ने कहा, एक दीवट है, जो सम्पूर्ण सोने की है, और उसका कटोरा उसकी चोटी पर है, और उस पर उसके सात दीपक है; जिन के ऊपर बत्ती के लिये सात सात नालियां हैं।
Zechariah 4:3 और दीवट के पास जलपाई के दो वृक्ष हैं, एक उस कटोरे की दाहिनी ओर, और दूसरा उसकी बाईं ओर।
Zechariah 4:4 तब मैं ने उस दूत से जो मुझ से बातें करता था, पूछा, हे मेरे प्रभु, ये क्या हैं?
Zechariah 4:5 जो दूत मुझ से बातें करता था, उसने मुझ को उत्तर दिया, क्या तू नहीं जानता कि ये क्या हैं? मैं ने कहा, हे मेरे प्रभु मैं नहीं जानता।
Zechariah 4:6 तब उसने मुझे उत्तर देकर कहा, जरूब्बाबेल के लिये यहोवा का यह वचन है : न तो बल से, और न शक्ति से, परन्तु मेरे आत्मा के द्वारा होगा, मुझ सेनाओं के यहोवा का यही वचन है।
Zechariah 4:7 हे बड़े पहाड़, तू क्या है? जरूब्बाबेल के साम्हने तू मैदान हो जाएगा; और वह चोटी का पत्थर यह पुकारते हुए आएगा, उस पर अनुग्रह हो, अनुग्रह!

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 46-48
  • मत्ती 13:1-30



शनिवार, 18 जनवरी 2020

विलम्ब


      संसार भर में फैली और परस्पर जुड़ी हुई कंप्यूटर प्रणाली में आई खराबी के कारण संसार भर में अनेकों स्थानों पर हवाई यात्राएं बाधित हो जाती हैं, उन्हें रद्द करना पड़ता है, जिसके कारण हज़ारों यात्री हवाई अड्डों पर फंस जाते हैं, उनकी योजनाएं ठप्प हो जाती हैं। किसी बर्फीले तूफ़ान के कारण सड़कों पर अनेकों गाड़ियों की आपस में भिड़न्त हो जाती है और कई प्रमुख सड़क मार्ग बंद हो जाते हैं, यातायात बंद हो जाता है। जिस व्यक्ति ने वायदा किया था कि वह “तुरंत ही” उत्तर दे देगा, वह ऐसा नहीं करता है, और अनिश्चितता तथा असमंजस की स्थिति बनी रहती है। इन और ऐसी सभी परिस्थितयों के कारण विलम्ब होता है, और विलम्ब होने के कारण अकसर क्रोध और खिसियाहट होती है, जिस के फिर अन्य कई गलत या बुरे परिणाम होते हैं। परन्तु प्रभु यीशु मसीह के अनुयायी होने के नाते, हमारे पास यह विशेषाधिकार और सौभाग्य है कि ऐसी प्रत्येक परिस्थिति में हम प्रभु से सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में धैर्य बनाए रखने वालों के महान उदाहरणों में से एक है यूसुफ, जिसे उसके ईर्ष्यालु भाइयों ने दासों का व्यापार करने वालों को बेच दिया, जिन्होंने फिर उसे मिस्र ले जाकर बेच दिया; वहां उसके स्वामी की पत्नी ने उस पर झूठे आरोप लगा कर उसे बंदीगृह में डलवा दिया। लेकिन परमेश्वर का वचन हमें बताता है कि उन परिस्थितियों में भी “यहोवा यूसुफ के संग संग रहा, और उस पर करूणा की, और बन्दीगृह के दरोगा के अनुग्रह की दृष्टि उस पर हुई” (उत्पत्ति 39: 21)। इसके कई वर्षों के बाद जब यूसुफ ने फिरौन के स्वप्नों का अर्थ बताया तो उसे मिस्र में राजा के बाद का दूसरा सबसे ऊँचा स्थान दिया गया (अध्याय 41)।

      यूसुफ के धैर्य रखने का सबसे विलक्षण प्रतिफल तब आया जब वहां पड़े अकाल के समय में उसके वे ईर्ष्यालु भाई, उसकी स्थिति से अनजान, उसके ही पास आए कि उससे अन्न लें और अपने परिवारों को बचाएं। यूसुफ ने उन से कहा, “...मैं तुम्हारा भाई यूसुफ हूं, जिस को तुम ने मिस्र आनेहारों के हाथ बेच डाला था। अब तुम लोग मत पछताओ, और तुम ने जो मुझे यहां बेच डाला, इस से उदास मत हो; क्योंकि परमेश्वर ने तुम्हारे प्राणों को बचाने के लिये मुझे आगे से भेज दिया है।... इस रीति अब मुझ को यहां पर भेजने वाले तुम नहीं, परमेश्वर ही ठहरा” (उत्पत्ति 45:4-5, 8)।

      हमारे जीवनों की प्रत्येक परिस्थिति में, सभी विलंबों में, वह चाहे जितना भी छोटा या लंबा हो, हमें भी यूसुफ के समान धैर्य, सही दृष्टिकोण, और शान्ति के साथ प्रभु में विश्वास को बनाए रखना चाहिए; अन्ततः परिणाम सर्वोत्तम होंगे। - डेविड मैक्कैसलैंड

परमेश्वर में हमारा भरोसा, 
हमें अपने विश्वास को धैर्य के साथ निभाने के लिए सक्षम करता है।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 45:1-8
Genesis 45:1 तब यूसुफ उन सब के साम्हने, जो उसके आस पास खड़े थे, अपने को और रोक न सका; और पुकार के कहा, मेरे आस पास से सब लोगों को बाहर कर दो। भाइयों के साम्हने अपने को प्रगट करने के समय यूसुफ के संग और कोई न रहा।
Genesis 45:2 तब वह चिल्ला चिल्लाकर रोने लगा: और मिस्रियों ने सुना, और फिरौन के घर के लोगों को भी इसका समाचार मिला।
Genesis 45:3 तब यूसुफ अपने भाइयों से कहने लगा, मैं यूसुफ हूं, क्या मेरा पिता अब तब जीवित है? इसका उत्तर उसके भाई न दे सके; क्योंकि वे उसके साम्हने घबरा गए थे।
Genesis 45:4 फिर यूसुफ ने अपने भाइयों से कहा, मेरे निकट आओ। यह सुनकर वे निकट गए। फिर उसने कहा, मैं तुम्हारा भाई यूसुफ हूं, जिस को तुम ने मिस्र आनेहारों के हाथ बेच डाला था।
Genesis 45:5 अब तुम लोग मत पछताओ, और तुम ने जो मुझे यहां बेच डाला, इस से उदास मत हो; क्योंकि परमेश्वर ने तुम्हारे प्राणों को बचाने के लिये मुझे आगे से भेज दिया है।
Genesis 45:6 क्योंकि अब दो वर्ष से इस देश में अकाल है; और अब पांच वर्ष और ऐसे ही होंगे, कि उन में न तो हल चलेगा और न अन्न काटा जाएगा।
Genesis 45:7 सो परमेश्वर ने मुझे तुम्हारे आगे इसी लिये भेजा, कि तुम पृथ्वी पर जीवित रहो, और तुम्हारे प्राणों के बचने से तुम्हारा वंश बढ़े।
Genesis 45:8 इस रीति अब मुझ को यहां पर भेजने वाले तुम नहीं, परमेश्वर ही ठहरा: और उसी ने मुझे फिरौन का पिता सा, और उसके सारे घर का स्वामी, और सारे मिस्र देश का प्रभु ठहरा दिया है।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 43-45
  • मत्ती 12:24-50


शुक्रवार, 17 जनवरी 2020

कृतज्ञ



      क्या आप और अधिक कृतज्ञ होने की भावना विकसित करना चाहेंगे? सत्रहवीं शताब्दी के एक ब्रिटिश कवि, जॉर्ज हर्बर्ट ने अपने पाठकों को इस उद्देश्य की ओर प्रोत्साहित करने के लिए एक कविता लिखी थी “Gratefulness” (कृतज्ञता), जिसकी एक पंक्ति है: “आपने मुझे बहुत कुछ दिया है, किन्तु एक चीज़ और दीजिए: एक कृतज्ञ मन।”

      हर्बर्ट ने पहचाना कि उसे कृतज्ञ होने के लिए केवल एक ही चीज़ की आवश्यकता थी – उन आशीषों का बोध रखना और उन्हें पहचानना, जो परमेश्वर उसे पहले ही दे चुका है।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पाते हैं कि रोमियों 11:36 प्रभु यीशु मसीह को सभी आशीषों का स्त्रोत बताता है, जहां लिखा है, “क्योंकि उस की ओर से, और उसी के द्वारा, और उसी के लिये सब कुछ है: उस की महिमा युगानुयुग होती रहे: आमीन” जब “सब कुछ” कहा गया है, तो इसमें जीवन की बहुमूल्य से लेकर सामान्य वस्तुओं तक, सभी कुछ सम्मिलित है। जीवन में हमें जो भी प्राप्त होता है वह हमारे स्वर्गीय पिता से ही आता है (याकूब 1:17), और उन्हें वह हमें स्वेच्छा से, अपने प्रेम में होकर प्रदान करता है।

      अपने जीवन में परमेश्वर की आशीषों के एहसास को और बढ़ाने के लिए, मैं ऐसा मन विकसित कर रही हूँ जो प्रतिदिन के सभी आनंदों के स्त्रोत का हर बात के लिए आभार व्यक्त करता है, विशेषकर उन आनंदों के लिए, जिन्हें मैं अकसर बिना उन पर ध्यान किए यूं ही ले लेती हूँ। आज के इन आनंदों में सम्मिलित है सैर के लिए एक ताज़ा प्रातः, मित्रों के साथ बिताने के लिए एक संध्या, मेरी रसोई में खाने-पीने के समान की भरपूरी, जिससे मैं अपने बेटियों के साथ उनके मन-पसंद भोजन वस्तुओं को बना सकती हूँ, मेरी खिड़की से दिखने वाला सुन्दर संसार का दृश्य, और ताज़ी बनी कॉफ़ी की सुगंध।

      ध्यान कीजिए कि परमेश्वर ने आपको क्या कुछ दे रखा है? उन आशीषों के प्रति जागरूक होना, हमें परमेश्वर के प्रति कृतज्ञ मन विकसित करने में सहायक होगा। - लिसा सामरा

जब भी आप किसी भी भलाई का ध्यान करते हैं, परमेश्वर का धन्यवाद करें।

क्योंकि हर एक अच्छा वरदान और हर एक उत्तम दान ऊपर ही से है, और ज्योतियों के पिता की ओर से मिलता है, जिस में न तो कोई परिवर्तन हो सकता है, ओर न अदल बदल के कारण उस पर छाया पड़ती है। - याकूब 1:17

बाइबल पाठ: रोमियों 11:33-36
Romans 11:33 आहा! परमेश्वर का धन और बुद्धि और ज्ञान क्या ही गंभीर है! उसके विचार कैसे अथाह, और उसके मार्ग कैसे अगम हैं!
Romans 11:34 प्रभु कि बुद्धि को किस ने जाना या उसका मंत्री कौन हुआ?
Romans 11:35 या किस ने पहिले उसे कुछ दिया है जिस का बदला उसे दिया जाए।
Romans 11:36 क्योंकि उस की ओर से, और उसी के द्वारा, और उसी के लिये सब कुछ है: उस की महिमा युगानुयुग होती रहे: आमीन।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 41-42
  • मत्ती 12:1-23



गुरुवार, 16 जनवरी 2020

कृतज्ञ



      क्या आप और अधिक कृतज्ञ होने की भावना विकसित करना चाहेंगे? सत्रहवीं शताब्दी के एक ब्रिटिश कवि, जॉर्ज हर्बर्ट ने अपने पाठकों को इस उद्देश्य की ओर प्रोत्साहित करने के लिए एक कविता लिखी थी “Gratefulness” (कृतज्ञता), जिसकी एक पंक्ति है: “आपने मुझे बहुत कुछ दिया है, किन्तु एक चीज़ और दीजिए: एक कृतज्ञ मन।”

      हर्बर्ट ने पहचाना कि उसे कृतज्ञ होने के लिए केवल एक ही चीज़ की आवश्यकता थी – उन आशीषों का बोध रखना और उन्हें पहचानना, जो परमेश्वर उसे पहले ही दे चुका है।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पाते हैं कि रोमियों 11:36 प्रभु यीशु मसीह को सभी आशीषों का स्त्रोत बताता है, जहां लिखा है, “क्योंकि उस की ओर से, और उसी के द्वारा, और उसी के लिये सब कुछ है: उस की महिमा युगानुयुग होती रहे: आमीन” जब “सब कुछ” कहा गया है, तो इसमें जीवन की बहुमूल्य से लेकर सामान्य वस्तुओं तक, सभी कुछ सम्मिलित है। जीवन में हमें जो भी प्राप्त होता है वह हमारे स्वर्गीय पिता से ही आता है (याकूब 1:17), और उन्हें वह हमें स्वेच्छा से, अपने प्रेम में होकर प्रदान करता है।

      अपने जीवन में परमेश्वर की आशीषों के एहसास को और बढ़ाने के लिए, मैं ऐसा मन विकसित कर रही हूँ जो प्रतिदिन के सभी आनंदों के स्त्रोत का हर बात के लिए आभार व्यक्त करता है, विशेषकर उन आनंदों के लिए, जिन्हें मैं अकसर बिना उन पर ध्यान किए यूं ही ले लेती हूँ। आज के इन आनंदों में सम्मिलित है सैर के लिए एक ताज़ा प्रातः, मित्रों के साथ बिताने के लिए एक संध्या, मेरी रसोई में खाने-पीने के समान की भरपूरी, जिससे मैं अपने बेटियों के साथ उनके मन-पसंद भोजन वस्तुओं को बना सकती हूँ, मेरी खिड़की से दिखने वाला सुन्दर संसार का दृश्य, और ताज़ी बनी कॉफ़ी की सुगंध।

      ध्यान कीजिए कि परमेश्वर ने आपको क्या कुछ दे रखा है? उन आशीषों के प्रति जागरूक होना, हमें परमेश्वर के प्रति कृतज्ञ मन विकसित करने में सहायक होगा। - लिसा सामरा

जब भी आप किसी भी भलाई का ध्यान करते हैं, परमेश्वर का धन्यवाद करें।

क्योंकि हर एक अच्छा वरदान और हर एक उत्तम दान ऊपर ही से है, और ज्योतियों के पिता की ओर से मिलता है, जिस में न तो कोई परिवर्तन हो सकता है, ओर न अदल बदल के कारण उस पर छाया पड़ती है। - याकूब 1:17

बाइबल पाठ: रोमियों 11:33-36
Romans 11:33 आहा! परमेश्वर का धन और बुद्धि और ज्ञान क्या ही गंभीर है! उसके विचार कैसे अथाह, और उसके मार्ग कैसे अगम हैं!
Romans 11:34 प्रभु कि बुद्धि को किस ने जाना या उसका मंत्री कौन हुआ?
Romans 11:35 या किस ने पहिले उसे कुछ दिया है जिस का बदला उसे दिया जाए।
Romans 11:36 क्योंकि उस की ओर से, और उसी के द्वारा, और उसी के लिये सब कुछ है: उस की महिमा युगानुयुग होती रहे: आमीन।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 41-42
  • मत्ती 12:1-23



प्रार्थना



      एक दिन जब मैं अपने एक करीबी मित्र के हित को लेकर बहुत चिंतित थी, तो मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल के पुराने नियम खंड में शमुएल, जो इस्राएलियों का एक्क बुद्धिमान अगुवा था, की कहानी से प्रोत्साहन मिला। जब मैंने पढ़ा कि कैसे शमुएल ने परमेश्वर के लोगों के लिए प्रार्थना की जब वे कठिनाई में पड़े हुए थे, तो इससे मेरे उस करीबी मित्र के लिए प्रार्थना करने के मेरे संकल्प को प्रोत्साहन और बल मिला।

      इस्राएलियों के सामने पलिश्तियों का सामना करने का ख़तरा था, और पलिश्ती परमेश्वर के लोगों को पहले भी हरा चुके थे जब इस्राएलियों ने परमेश्वर पर भरोसा नहीं रखा था (देखें 1 शमुएल 4)। अपने पापों से पश्चाताप करने के बाद उन्हें पता चला कि पलिश्ती उन पर आक्रमण करने वाले हैं। किन्तु इस बार इस्राएलियों ने शमुएल से निवेदन किया कि वह उनके लिए प्रार्थना करता रहे (7:8)। और परमेश्वर ने उन प्रार्थनाओं का उत्तर दिया, शत्रु को घबरा दिया (पद 10)। चाहे वे पलिश्ती इस्राएलियों से अधिक शक्तिशाली रहे होंगे, परन्तु प्रभु परमेश्वर सबसे शक्तिशाली है।

      जब हमारे प्रीय जनों को जिन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, तो उन्हें लेकर हम दुखी होते हैं, हमें लगता है कि उनकी परिस्थिति सुधरेगी नहीं, और संदेह होता है कि क्या प्रभु कार्य करेगा। परन्तु हमें कभी भी प्रार्थना की सामर्थ्य को हलका नहीं समझाना चाहिए, क्योंकि हमारा प्रेमी परमेश्वर पिता हमारी प्रार्थनाओं को सुनता है। हम यह तो नहीं जानते हैं कि हमारी प्रार्थनाओं के उत्तर में वह कैसे कार्य करेगा, परन्तु हम यह जानते हैं कि हमारा पिता होने के नाते वह चाहता है कि हम उसके प्रेम को अपना लें और उसकी विश्वासयोग्यता में भरोसा बनाए रखें।

      क्या कोई ऐसा है जिसे आपकी प्रार्थनाओं की आवश्यकता है? – एमी बाउचर पाई

परमेश्वर सुनता है जब हम प्रार्थना करते हैं।

निरन्‍तर प्रार्थना मे लगे रहो। - 1 थिस्सलुनीकियों 5:17

बाइबल पाठ: 1 शमुएल 7:7-14
1 Samuel 7:7 जब पलिश्तियों ने सुना कि इस्राएली मिस्पा में इकट्ठे हुए हैं, तब उनके सरदारों ने इस्राएलियों पर चढ़ाई की। यह सुनकर इस्राएली पलिश्तियों से भयभीत हुए।
1 Samuel 7:8 और इस्राएलियों ने शमूएल से कहा, हमारे लिये हमारे परमेश्वर यहोवा की दोहाई देना न छोड़, जिस से वह हम को पलिश्तियों के हाथ से बचाए।
1 Samuel 7:9 तब शमूएल ने एक दूधपिउवा मेम्ना ले सर्वांग होमबलि कर के यहोवा को चढ़ाया; और शमूएल ने इस्राएलियों के लिये यहोवा की दोहाई दी, और यहोवा ने उसकी सुन ली।
1 Samuel 7:10 और जिस समय शमूएल होमबलि हो चढ़ा रहा था उस समय पलिश्ती इस्राएलियों के संग युद्ध करने के लिये निकट आ गए, तब उसी दिन यहोवा ने पलिश्तियों के ऊपर बादल को बड़े कड़क के साथ गरजाकर उन्हें घबरा दिया; और वे इस्राएलियों से हार गए।
1 Samuel 7:11 तब इस्राएली पुरूषों ने मिस्पा से निकलकर पलिश्तियों को खदेड़ा, और उन्हें बेतकर के नीचे तक मारते चले गए।
1 Samuel 7:12 तब शमूएल ने एक पत्थर ले कर मिस्पा और शेन के बीच में खड़ा किया, और यह कहकर उसका नाम एबेनेज़ेर रखा, कि यहां तक यहोवा ने हमारी सहायता की है।
1 Samuel 7:13 तब पलिश्ती दब गए, और इस्राएलियों के देश में फिर न आए, और शमूएल के जीवन भर यहोवा का हाथ पलिश्तियों के विरुद्ध बना रहा।
1 Samuel 7:14 और एक्रोन और गत तक जितने नगर पलिश्तियों ने इस्राएलियों के हाथ से छीन लिये थे, वे फिर इस्राएलियों के वश में आ गए; और उनका देश भी इस्राएलियों ने पलिश्तियों के हाथ से छुड़ाया। और इस्राएलियों और एमोरियों के बीच भी सन्धि हो गई।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 39-40
  • मत्ती 11