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बुधवार, 23 दिसंबर 2020

धन्यवादी

 

          एैन वोक्स्कैम्प की पुस्तक, One Thousand Gifts (एक हज़ार उपहार) पाठकों को प्रोत्साहित करती है कि वे अपन जीवनों में प्रतिदिन खोजें कि उस दिन में प्रभु ने उनके लिए क्या कुछ किया है। उस में वह प्रति दिन परमेश्वर की उसके प्रति उदारता को छोटे और बड़े उपहारों में देखती है, जो साधारण से साबुन के बुलबुलों में चमकती हुई सुन्दरता से लेकर उसके तथा हमारे जैसे पापियों के अद्भुत उद्धार में दिखाई देती है। एैन का कहना है कि कृतज्ञ होना ही जीवन के सबसे परेशान करने वाले पलों में भी परमेश्वर की उपस्थिति को देख पाने की कुंजी है।

          परमेश्वर के वचन बाइबल का एक चरित्र, अय्यूब, उसके जीवन के दुःख से भरे होने के लिए विख्यात है। उसे जो हानि उठानी और सहनी पड़ी, वह गिनती और दुःख की गहराई, दोनों में ही बहुत अधिक थी। उसे ज्ञात हुआ कि अचानक ही उसके सारे पशु लूट लिए गए, पशुओं की देखभाल करने वाले उसके सेवक भी मार डाले गए हैं, और इसके तुरंत ही बाद उसे यह भी पता चला कि उसके दसों बच्चे भी मर गए हैं। अय्यूब का घोर दुःख उसके प्रत्युत्तर से पता चलता है; उसने अपना बागा फाड़ा और सिर मुंडवाया (1:20)। उस अत्यधिक दुःख की घड़ी में अय्यूब जो शब्द प्रयोग करता है वे दिखाते हैं कि वह परमेश्वर के प्रति कृतज्ञ रहने का अभ्यस्त था, क्योंकि वह तब भी यही अंगीकार करता है कि उसके पास जो भी था, वह सब परमेश्वर ही के द्वारा दिया हुआ था, उसका अपना नहीं था। इतने अभिभूत कर देने वाले दुःख के समय में भी वह और कैसे आराधना करने पाता, यदि वह परमेश्वर के प्रति कृतज्ञ रहना नहीं जानता होता?

          हमारे दुःख और हानि के समयों में हमारे प्रतिदिन परमेश्वर के प्रति धन्यवादी और कृतज्ञ होने के अभ्यास के द्वारा हमारी पीड़ा मिट तो नहीं जाती है। जैसा कि शेष पुस्तक में लिखा है, अय्यूब अपनी इस पीड़ा और हानि के साथ जूझता रहता है। परन्तु हमारे प्रति परमेश्वर की भलाइयों को, छोटे से छोटे रूप में भी, पहचानने और स्मरण करते रहने के द्वारा हम हमारे सर्वसामर्थी परमेश्वर के सामने झुक कर अपने जीवन के सबसे अंधियारे समयों में भी उसकी आराधना करने के लिए तैयार किए जा सकते हैं, यदि हम उसके धन्यवादी बने रहने के अभ्यस्त रहते हैं तो। - कर्स्टन होल्मबर्ग

 

जीवन में परमेश्वर के प्रति धन्यवादी होने के विषयों की सूची बनाना आरंभ कीजिए; 

और देखिए कि इससे जीवन कैसे परिवर्तित होता है।

किसी भी बात की चिन्ता मत करो: परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख उपस्थित किए जाएं। - फिलिप्पियों 4:6

बाइबल पाठ अय्यूब 1:13-22

अय्यूब 1:13 एक दिन अय्यूब के बेटे-बेटियां बड़े भाई के घर में खाते और दाखमधु पी रहे थे;

अय्यूब 1:14 तब एक दूत अय्यूब के पास आकर कहने लगा, हम तो बैलों से हल जोत रहे थे, और गदहियां उनके पास चर रही थी,

अय्यूब 1:15 कि शबा के लोग धावा कर के उन को ले गए, और तलवार से तेरे सेवकों को मार डाला; और मैं ही अकेला बचकर तुझे समाचार देने को आया हूँ।

अय्यूब 1:16 वह अभी यह कह ही रहा था कि दूसरा भी आकर कहने लगा, कि परमेश्वर की आग आकाश से गिरी और उस से भेड़-बकरियां और सेवक जलकर भस्म हो गए; और मैं ही अकेला बचकर तुझे समाचार देने को आया हूँ।

अय्यूब 1:17 वह अभी यह कह ही रहा था, कि एक और भी आकर कहने लगा, कि कसदी लोग तीन गोल बान्ध कर ऊंटों पर धावा कर के उन्हें ले गए, और तलवार से तेरे सेवकों को मार डाला; और मैं ही अकेला बचकर तुझे समाचार देने को आया हूँ।

अय्यूब 1:18 वह अभी यह कह ही रहा था, कि एक और भी आकर कहने लगा, तेरे बेटे-बेटियां बड़े भाई के घर में खाते और दाखमधु पीते थे,

अय्यूब 1:19 कि जंगल की ओर से बड़ी प्रचण्ड वायु चली, और घर के चारों कोनों को ऐसा झोंका मारा, कि वह जवानों पर गिर पड़ा और वे मर गए; और मैं ही अकेला बचकर तुझे समाचार देने को आया हूँ।

अय्यूब 1:20 तब अय्यूब उठा, और बागा फाड़, सिर मुंड़ाकर भूमि पर गिरा और दण्डवत कर के कहा,

अय्यूब 1:21 मैं अपनी मां के पेट से नंगा निकला और वहीं नंगा लौट जाऊंगा; यहोवा ने दिया और यहोवा ही ने लिया; यहोवा का नाम धन्य है।

अय्यूब 1:22 इन सब बातों में भी अय्यूब ने न तो पाप किया, और न परमेश्वर पर मूर्खता से दोष लगाया।

 

एक साल में बाइबल: 

  • नहूम 1-3
  • प्रकाशितवाक्य 14

मंगलवार, 22 दिसंबर 2020

रणनीति

 

          मैं जब यह लिखने बैठा हूँ, उस समय तक मेरी पसंद की फुटबॉल टीम एक के बाद एक आठ खेल हार चुकी है, और हर हार के बाद उनके लिए इस वर्ष की खेल श्रृंखला में कोई स्थान प्राप्त कर पाना असंभव सा होता जा रहा है। उनके प्रशिक्षक ने हर सप्ताह परिवर्तन किए हैं, परन्तु उनसे जीत नहीं मिलाने पाई है। अपने साथ के सहकर्मियों के साथ बात करते हुए मैंने मज़ाक में कहा है, केवल एक भिन्न परिणाम की आशा रखना ही उसे पा लेने की कोई गारंटी नहीं है; केवल आशा रखना ही कोई रणनीति नहीं है।

          मेरी कही यह बात फुटबॉल के लिए तो सत्य है, परन्तु हमारे आत्मिक जीवनों में, इसका बिलकुल विपरीत ही सत्य है। न केवल परमेश्वर में आशा बनाए रखना एक उत्तम रणनीति है, वरन, भरोसे के साथ उससे लिपटे रहने और उस पर विश्वास बनाए रखना ही सफलता की एकमात्र रणनीति होती है। यह संसार हमें अकसर निराश करता है, परन्तु आशा हमें परमेश्वर के सत्य और सामर्थ्य में दृढ़ करती है और कठिन समयों को पार करने में सहायक होती है।

          मीका नबी ने इस वास्तविकता को समझा था। इस्राएल के लोगों के, परमेश्वर से विमुख हो जाने से वह बहुत दुखी था; उसने कहा, हाय मुझ पर! ... भक्त लोग पृथ्वी पर से नाश हो गए हैं, और मनुष्यों में एक भी सीधा नहीं जन नहीं रहा” (मीका 7:1-2)। लेकिन फिर उसने अपने ध्यान को फिर से अपनी उस सच्ची आशा पर केन्द्रित किया: “परन्तु मैं यहोवा की ओर ताकता रहूंगा, मैं अपने उद्धारकर्ता परमेश्वर की बाट जोहता रहूंगा; मेरा परमेश्वर मेरी सुनेगा” (पद 7)।

          कठिन समयों में आशा को बनाए रखने के लिए क्या चाहिए होता है? मीका हमें दिखाता है: बाट जोहना; प्रतीक्षा करना; प्रार्थना करना; स्मरण करते रहना। चाहे हमारी परिस्थितियाँ अभिभूत करने वाली भी हों, परमेश्वर फिर भी हमारी प्रार्थनाओं को सुनता है। ऐसे समयों में, आशा को थामे रहना और परमेश्वर पर भरोसा बनाए रखना, उससे लिपटे रहना ही हमारे रणनीति होनी चाहिए – एकमात्र रणनीति जो हमें जीवन की आँधियों से पार लगाएगी। - एडम होल्ज़

 

जीवन के कठिन समयों में परमेश्वर के संबंध में सर्वोत्तम उपाय 

बाट जोहना; प्रतीक्षा करना; प्रार्थना करना; स्मरण करते रहना ही है।

परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों के समान उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे। - यशायाह 40:31

बाइबल पाठ: मीका 7:1-7

मीका 7:1 हाय मुझ पर! क्योंकि मैं उस जन के समान हो गया हूं जो धूपकाल के फल तोड़ने पर, या रही हुई दाख बीनने के समय के अन्त में आ जाए, मुझे तो पक्की अंजीरों की लालसा थी, परन्तु खाने के लिये कोई गुच्छा नहीं रहा।

मीका 7:2 भक्त लोग पृथ्वी पर से नाश हो गए हैं, और मनुष्यों में एक भी सीधा नहीं जन नहीं रहा; वे सब के सब हत्या के लिये घात लगाते, और जाल लगा कर अपने अपने भाई का अहेर करते हैं।

मीका 7:3 वे अपने दोनों हाथों से मन लगा कर बुराई करते हैं; हाकिम घूस मांगता, और न्यायी घूस लेने को तैयार रहता है, और रईस अपने मन की दुष्टता वर्णन करता है; इसी प्रकार से वे सब मिल कर जालसाजी करते हैं।

मीका 7:4 उन में से जो सब से उत्तम है, जो सब से सीधा है, वह कांटे वाले बाड़े से भी बुरा है। तेरे पहरुओं का कहा हुआ दिन, अर्थात तेरे दण्ड का दिन आ गया है। अब वे शीघ्र चौंधिया जाएंगे।

मीका 7:5 मित्र पर विश्वास मत करो, परम-मित्र पर भी भरोसा मत रखो; वरन अपनी अर्द्धांगिनी से भी संभल कर बोलना।

मीका 7:6 क्योंकि पुत्र पिता का अपमान करता, और बेटी माता के, और पतोहू सास के विरुद्ध उठती है; मनुष्य के शत्रु उसके घर ही के लोग होते हैं।

मीका 7:7 परन्तु मैं यहोवा की ओर ताकता रहूंगा, मैं अपने उद्धारकर्ता परमेश्वर की बाट जोहता रहूंगा; मेरा परमेश्वर मेरी सुनेगा।

 

एक साल में बाइबल: 

  • मीका 6-7
  • प्रकाशितवाक्य 13

सोमवार, 21 दिसंबर 2020

डर

 

          परमेश्वर के वचन बाइबल में जब भी कहीं कोई स्वर्गदूत प्रगट होता है, लगभग हर बार जो पहला वाक्य वह कहता है, होता है “डरो मत!” और इसमें कोई अचरज की बात नहीं है। जब भी कुछ अलौकिक पृथ्वी के लोगों के साथ संपर्क में आता है, पृथ्वी के लोग डर में मारे औंधे मुँह गिर पड़ते हैं। परन्तु लूका परमेश्वर के एक ऐसे स्वरूप में प्रगट होने के बारे में बताता है जिससे डर नहीं लगता है। प्रभु यीशु को जन्म के बाद चरनी में लेटाया गया, और इसमें डरने की क्या बात हो सकती है? एक नवजात शिशु से कोई क्यों डरेगा?

          पृथ्वी पर यीशु परमेश्वर और मनुष्य दोनों ही हैं। परमेश्वर होने के नाते वे आश्चर्यकर्म कर सकते हैं, पापों को क्षमा कर सकते हैं, मृत्यु पर जय पा सकते हैं, और भविष्य बता सकते हैं। परन्तु यहूदियों के लिए जिनके मन में परमेश्वर एक चमकीले बादल या आग के खम्भे के समान था, यीशु बहुत असमंजस का कारण हैं। उनके विचारों के सन्दर्भ में, बैतलहम का एक शिशु, एक बढ़ई का पुत्र, नासरत का एक व्यक्ति, कैसे परमेश्वर का उद्धारकर्ता मसीहा हो सकता था?

          परमेश्वर ने मनुष्य का स्वरूप क्यों लिया? बारह वर्षीय प्रभु यीशु के मंदिर में रब्बियों के साथ चर्चा करने का दृश्य हमने एक संकेत देता है। लूका बताता है, और जितने उस की सुन रहे थे, वे सब उस की समझ और उसके उत्तरों से चकित थे” (लूका 2:47)। यह पहली बार था कि सामान्य लोग, सीधे से परमेश्वर के प्रत्यक्ष स्वरूप के साथ बात तथा संपर्क कर सकते थे।

          प्रभु यीशु आज भी हम सभी से बात करता है, उसे कभी भी “डरो मत!” कहने की आवश्यकता नहीं होती है। जितने उसके पास नम्रता में विश्वास तथा समर्पण के साथ आते हैं, वह उन सभी से बात करता है। जब हम सच्चे और खरे मन से उसके पास आते हैं, तो हमें उससे बात करने से डरने की आवश्यकता नहीं है। - फिलिप यैन्सी

 

यीशु एक ही व्यक्तित्व में परमेश्वर और मनुष्य दोनों थे, 

जिससे परमेश्वर और मनुष्य दोनों फिर से 

एक साथ आनन्दित रह सकें। - जॉर्ज वाइटफील्ड


जो कुछ पिता मुझे देता है वह सब मेरे पास आएगा, उसे मैं कभी न निकालूंगा। - यूहन्ना 6:37

बाइबल पाठ: लूका 2:42-52

लूका 2:42 जब वह बारह वर्ष का हुआ, तो वे पर्व की रीति के अनुसार यरूशलेम को गए।

लूका 2:43 और जब वे उन दिनों को पूरा कर के लौटने लगे, तो वह लड़का यीशु यरूशलेम में रह गया; और यह उसके माता-पिता नहीं जानते थे।

लूका 2:44 वे यह समझकर, कि वह और यात्रियों के साथ होगा, एक दिन का पड़ाव निकल गए: और उसे अपने कुटुम्बियों और जान-पहचानों में ढूंढ़ने लगे।

लूका 2:45 पर जब नहीं मिला, तो ढूंढ़ते-ढूंढ़ते यरूशलेम को फिर लौट गए।

लूका 2:46 और तीन दिन के बाद उन्होंने उसे मन्दिर में उपदेशकों के बीच में बैठे, उन की सुनते और उन से प्रश्न करते हुए पाया।

लूका 2:47 और जितने उस की सुन रहे थे, वे सब उस की समझ और उसके उत्तरों से चकित थे।

लूका 2:48 तब वे उसे देखकर चकित हुए और उस की माता ने उस से कहा; हे पुत्र, तू ने हम से क्यों ऐसा व्यवहार किया? देख, तेरा पिता और मैं कुढ़ते हुए तुझे ढूंढ़ते थे।

लूका 2:49 उसने उन से कहा; तुम मुझे क्यों ढूंढ़ते थे? क्या नहीं जानते थे, कि मुझे अपने पिता के भवन में होना अवश्य है?

लूका 2:50 परन्तु जो बात उसने उन से कही, उन्होंने उसे नहीं समझा।

लूका 2:51 तब वह उन के साथ गया, और नासरत में आया, और उन के वश में रहा; और उस की माता ने ये सब बातें अपने मन में रखीं।

लूका 2:52 और यीशु बुद्धि और डील-डौल में और परमेश्वर और मनुष्यों के अनुग्रह में बढ़ता गया।

 

एक साल में बाइबल: मीका 4-5; प्रकाशितवाक्य 12

रविवार, 20 दिसंबर 2020

नेतृत्व

 

          हमारे घर के ऊपर, आकाश में तीन सैन्य जेट विमान शोर करते हुए निकले, तीनों एक-दूसरे के इतने निकट थे कि वे एक प्रतीत हो रहे थे। यह देखकर मैंने अपने पति से कहा, “वाह! प्रभावशाली” और वे भी मेरी इस बात से सहमत हुए। हमारा घर एक एयर फ़ोर्स अड्डे के निकट स्थित है, इसलिए इस प्रकार के दृश्य देखना कोई असामान्य बात नहीं है।

          किन्तु जितनी बार ये जेट विमान ऐसे उड़ते हैं, मेरे मन में एक ही प्रश्न उठता है, ‘ऐसा कैसे है कि बिना नियंत्रण खोए ये इतनी निकट एक साथ उड़ सकते हैं?’ एक स्पष्ट कारण जो मुझे पता चला, वह है दीनता और भरोसा! जो पायलेट आगे वाला जेट उड़ा रहा है, उसके नेतृत्व पर भरोसा रखते हुए, दोनों ओर के दोनों पायलेट उसके द्वारा निर्धारित गति और दिशा तथा मुड़ने के निर्देशों का पालन करते हैं। जब वे दोनों अपना नेतृत्व करने वाले के मार्गदर्शन के अनुसार उसके साथ मिलकर उड़ते हैं, तो एक सशक्त और प्रभावी टीम बन जाती है।

          प्रभु यीशु मसीह के अनुयायियों के लिए भी ऐसा ही है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु ने कहा,यदि कोई मेरे पीछे आना चाहे, तो अपने आप से इनकार करे और प्रति दिन अपना क्रूस उठाए हुए मेरे पीछे हो ले” (लूका 9:23)।

          प्रभु का मार्ग अपने आप का इनकार करने और दूसरों के लिए दुःख उठाने का मार्ग था, जिस पर चलना कठिन हो सकता है। परन्तु उसके प्रभावी शिष्य होने के लिए हमें भी अपने स्वयं की इच्छाओं को त्याग कर प्रतिदिन प्रभु के द्वारा दिए जाने वाले आत्मिक निर्देशों का पालन करना है – जैसे कि अपनी बजाए औरों के सेवा के लिए तत्पर रहना और करना – और उसकी निकटता में होकर चलना है।
          परमेश्वर के साथ इस प्रकार दीन और आज्ञाकारी होकर चलना एक अद्भुत दृश्य एवं अनुभव है। जब हम उसके नेतृत्व में, उसकी निकटता में चलते हैं, तो उसके साथ एक प्रतीत हो सकते हैं। तब लोग हमें नहीं प्रभु को देखने पाएँगे; और उनके मुँह से भी वही निकलेगा जो मैंने कहा था – ‘वाह!’ – पेट्रीशिया रेबोन

 

हमारे जीवन वे झरोखे हैं, जिनमें से लोग मसीह को देख हैं।


उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के सामने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई करें। - मत्ती 5:16

बाइबल पाठ: लूका 9:21-24

लूका 9:21 तब उसने उन्हें चिताकर कहा, कि यह किसी से न कहना।

लूका 9:22 और उसने कहा, मनुष्य के पुत्र के लिये अवश्य है, कि वह बहुत दुख उठाए, और पुरिनए और महायाजक और शास्त्री उसे तुच्छ समझकर मार डालें, और वह तीसरे दिन जी उठे।

लूका 9:23 उसने सब से कहा, यदि कोई मेरे पीछे आना चाहे, तो अपने आप से इनकार करे और प्रति दिन अपना क्रूस उठाए हुए मेरे पीछे हो ले।

लूका 9:24 क्योंकि जो कोई अपना प्राण बचाना चाहेगा वह उसे खोएगा, परन्तु जो कोई मेरे लिये अपना प्राण खोएगा वही उसे बचाएगा।

 

एक साल में बाइबल: 

  • मीका 1-3
  • प्रकाशितवाक्य 11

शनिवार, 19 दिसंबर 2020

उपहार

 

          प्रत्येक क्रिसमस पर, मेरा एक मित्र अपनी पत्नी को एक लंबा पत्र लिखता है, जिसमें वह साल भर की घटनाओं की समीक्षा करता है और भविष्य के बारे में सपने देखता है। वह हमेशा उसे बताता है कि वह उससे कितना प्रेम करता है, और क्यों। साथ ही वह अपनी सभी पुत्रियों को भी पत्र लिखता है। प्रेम के उस के ये शब्द उन लोगों के लिए एक अविस्मरणीय उपहार होते हैं।

          हम यह कह सकते हैं कि प्रथम क्रिसमस का मूल प्रेम पत्र प्रभु यीशु मसीह थे, जो देहधारी बनकर इस संसार में आए। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित यूहन्ना ने अपने द्वारा लिखे गए सुसमाचार में इस सत्य को प्रमुख किया: “आदि में वचन था, और वचन परमेश्वर के साथ था, और वचन परमेश्वर था” (यूहन्ना 1:1)। प्राचीन दर्शनशास्त्र में, वचन के लिए यूनानी मूल शब्द ‘लोगोस का अर्थ एक दैवीय मनसा या व्यवस्था जो कि सच्चाई से मिलाती थी, होता था। लेकिन यूहन्ना इस परिभाषा को और विस्तृत कर के वचन को एक व्यक्तित्व – प्रभु यीशु, के रूप में प्रस्तुत करता है; प्रभु यीशु परमेश्वर के पुत्र, जो ‘आदि से परमेश्वर के साथ थे’ (पद 2)। यह वचन, जो पिता का एकलौता पुत्र था, देहधारी हुआ और उसने हमारे मध्य में डेरा किया (पद 14)। वचन यीशु में होकर परमेश्वर अपने आप को पूर्ण रूप से प्रगट करता है।

          धर्मशास्त्री इस मनोहर रहस्य के साथ सदियों से जूझ रहे हैं। हम चाहे इसे समझ पाने में कितने भी अक्षम क्यों न हों, हम इस बात के लिए निश्चित रह सकते हैं कि प्रभु यीशु वचन होने के द्वारा हमारे पाप से अंधियारे हुए संसार को ज्योति प्रदान करते हैं (पद 9)। यदि हम प्रभु यीशु में विश्वास लाएं और उसे अपना व्यक्तिगत उद्धारकर्ता स्वीकार करें, तो हम भी परमेश्वर की संतान होने के अद्भुत उपहार को प्राप्त कर सकते हैं (पद 12)।

          प्रभु यीशु हमारे लिए परमेश्वर का प्रेम पत्र हैं। वे हमारे लिए संसार में आए और अपने विश्वासियों के साथ रहते हैं – हम मनुष्यों के लिए यह कितना अद्भुत उपहार है। - एमी बाउचर पाई

 

परमेश्वर के अद्भुत उपहार प्रभु यीशु को संसार के साथ बाँटें।


देखो पिता ने हम से कैसा प्रेम किया है, कि हम परमेश्वर की सन्तान कहलाएं, और हम हैं भी: इस कारण संसार हमें नहीं जानता, क्योंकि उसने उसे भी नहीं जाना। - 1 यूहन्ना 3:1

बाइबल पाठ: यूहन्ना 1:1-14

यूहन्ना 1:1 आदि में वचन था, और वचन परमेश्वर के साथ था, और वचन परमेश्वर था।

यूहन्ना 1:2 यही आदि में परमेश्वर के साथ था।

यूहन्ना 1:3 सब कुछ उसी के द्वारा उत्पन्न हुआ और जो कुछ उत्पन्न हुआ है, उस में से कोई भी वस्तु उसके बिना उत्पन्न न हुई।

यूहन्ना 1:4 उस में जीवन था; और वह जीवन मनुष्यों की ज्योति थी।

यूहन्ना 1:5 और ज्योति अन्धकार में चमकती है; और अन्धकार ने उसे ग्रहण न किया।

यूहन्ना 1:6 एक मनुष्य परमेश्वर की ओर से आ उपस्थित हुआ जिस का नाम यूहन्ना था।

यूहन्ना 1:7 यह गवाही देने आया, कि ज्योति की गवाही दे, ताकि सब उसके द्वारा विश्वास लाएं।

यूहन्ना 1:8 वह आप तो वह ज्योति न था, परन्तु उस ज्योति की गवाही देने के लिये आया था।

यूहन्ना 1:9 सच्ची ज्योति जो हर एक मनुष्य को प्रकाशित करती है, जगत में आने वाली थी।

यूहन्ना 1:10 वह जगत में था, और जगत उसके द्वारा उत्पन्न हुआ, और जगत ने उसे नहीं पहचाना।

यूहन्ना 1:11 वह अपने घर आया और उसके अपनों ने उसे ग्रहण नहीं किया।

यूहन्ना 1:12 परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं।

यूहन्ना 1:13 वे न तो लहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं।

यूहन्ना 1:14 और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्चाई से परिपूर्ण हो कर हमारे बीच में डेरा किया, और हम ने उस की ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा।

 

एक साल में बाइबल: 

  • योना 1-4
  • प्रकाशितवाक्य 10

शुक्रवार, 18 दिसंबर 2020

घर

 

          जब हमारे बच्चे छोटे थे, उस समय की मेरी कुछ प्रिय स्मृतियाँ हैं। उत्सव के दिनों में हम परिवार के लोगों और मित्रों के साथ एकत्रित हुआ करते थे और हम वयस्क देर रात तक बातें करते रहते थे; हमारे बच्चे खेल से थक कर किसी सोफा या कुर्सी पर सिमट कर सो जाते थे। जब घर वापस जाने का समय होता था तो मैं बच्चों को गोदी में उठाकर उन्हें कार की पिछली सीट पर लेटा देता था, और घर पहुँचने पर कार की सीट से उठाकर उन्हें उनके बिस्तरों में लेटा देता था, और उन्हें चूम कर, शुभ रात्रि बोलकर बत्ती बुझा देता था। प्रातः वे उठकर देखते थे कि वे अपने घर में पहुँच गए हैं।

          यह मेरे लिए एक बहुत सार्थक रूपक बन गया है उस समय का जब, जैसा कि परमेश्वर के वचन बाइबल में व्यक्त किया गया है, हम “प्रभु में सो जाएंगे” ( थिस्सलुनीकियों 4:14)। हमारी आँखें यहाँ इस पृथ्वी पर बन्द होंगी, और हम अपने अनन्तकाल के घर में जाग उठेंगे, जहाँ फिर कोई थकान, चिंता, दुःख, परेशानी इत्यादि नहीं होगी, जो हमारे पृथ्वी के समय पर रहती है।

          कुछ दिन पहले मेरे सामने पुराने नियम में से एक पद आया, जिसने मुझे चकित कर दिया। व्यवस्थाविवरण में मूसा के संबंध में एक अंतिम टिप्पणी के समान लिखा है,तब यहोवा के कहने के अनुसार उसका दास मूसा वहीं मोआब देश में मर गया” (34:5)। इस पद के मूल इब्रानी शब्दों का अनुवाद होता है, “मूसा की मृत्यु ... यहोवा के मुँह के साथ हुई”, जिसका अर्थ प्राचीन रब्बियों ने “परमेश्वर के चुम्बन के साथ” हुई बताया है।

          यह उसी प्रकार है जैसे मैं अपने बच्चों बिस्तर में लेटा कर चूमता था, और जब उनकी आँख खुलती थी तब वे अपने घर में होते थे। जॉन डन्न ने इसे बहुत अच्छे से व्यक्त किया है, “एक छोटी सी झपकी, और उसके बाद फिर हम अनंतकाल के लिए जाग उठेंगे” – हम अपने स्थाई, अनन्तकाल के घर में जाग उठेंगे। - डेविड एच. रोपर

 

हमारे लिए मृत्यु, समय से अनंतता में, एक करवट लेने के समान है। - विलियम पेन्न


क्योंकि यदि हम प्रतीति करते हैं, कि यीशु मरा, और जी भी उठा, तो वैसे ही परमेश्वर उन्हें भी जो यीशु में सो गए हैं, उसी के साथ ले आएगा। - 1 थिस्स्लुनीकियों 4:14

बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण 34:1-8

व्यवस्थाविवरण 34:1 फिर मूसा मोआब के अराबा से नबो पहाड़ पर, जो पिसगा की एक चोटी और यरीहो के सामने है, चढ़ गया; और यहोवा ने उसको दान तक का गिलाद नाम सारा देश,

व्यवस्थाविवरण 34:2 और नप्ताली का सारा देश, और एप्रैम और मनश्शे का देश, और पच्छिम के समुद्र तक का यहूदा का सारा देश,

व्यवस्थाविवरण 34:3 और दक्खिन देश, और सोअर तक की यरीहो नाम खजूर वाले नगर की तराई, यह सब दिखाया।

व्यवस्थाविवरण 34:4 तब यहोवा ने उस से कहा, जिस देश के विषय में मैं ने इब्राहीम, इसहाक, और याकूब से शपथ खाकर कहा था, कि मैं इसे तेरे वंश को दूंगा वह यही है। मैं ने इस को तुझे साक्षात दिखला दिया है, परन्तु तू पार हो कर वहां जाने न पाएगा।

व्यवस्थाविवरण 34:5 तब यहोवा के कहने के अनुसार उसका दास मूसा वहीं मोआब देश में मर गया,

व्यवस्थाविवरण 34:6 और उसने उसे मोआब के देश में बेतपोर के सामने एक तराई में मिट्टी दी; और आज के दिन तक कोई नहीं जानता कि उसकी कब्र कहां है।

व्यवस्थाविवरण 34:7 मूसा अपनी मृत्यु के समय एक सौ बीस वर्ष का था; परन्तु न तो उसकी आंखें धुंधली पड़ीं, और न उसका पौरुष घटा था।

व्यवस्थाविवरण 34:8 और इस्राएली मोआब के अराबा में मूसा के लिये तीस दिन तक रोते रहे; तब मूसा के लिये रोने और विलाप करने के दिन पूरे हुए।

 

एक साल में बाइबल: 

  • ओबद्याह
  • प्रकाशितवाक्य 9

गुरुवार, 17 दिसंबर 2020

प्रार्थना

 

          साल का वह समय आ गया है जब परिवार एकत्रित होते हैं और उत्सव मनाते हैं। किन्तु हम में से कुछ लोग अपने उन “चिंतित” रिश्तेदारों से मिलने से संकोच करते हैं जो अटपटे और व्यक्तिगत प्रश्न पूछते हैं, जैसे कि अविवाहित होने या संतान न होने, या अन्य किसी व्यक्तिगत बात के विषय, और यह एहसास करवाते हैं कि हम में कुछ कमी है।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में इलीशिबा की स्थित की कल्पना करें, जो कई वर्ष से विवाहित थे, किन्तु निःसंतान थी। उस समय के समाज की परंपराओं के अनुसार, बाँझ होना परमेश्वर द्वारा उपेक्षित होने का चिह्न समझा जाता था (देखें 1 शमूएल 1:5-6), और लज्जाजनक बात समझी जाती थी। इसलिए यद्यपि इलीशिबा धार्मिकता का जीवन व्यतीत कर रही थी (लूका 1:6), किन्तु संभव है कि उसके पड़ौसी तथा संबंधी कुछ और ही विचार रखते हों।

          लेकिन इलीशिबा और उसका पति विश्वासयोग्यता से परमेश्वर की सेवा करते रहे। फिर, जब दोनों ही आयु में काफ़ी प्रौढ़ हो गए थे, तो एक आश्चर्यकर्म हुआ। परमेश्वर ने उनकी प्रार्थना को सुना (पद 13)। उसे, अपने समय और योजना के अनुसार, हम पर अपनी कृपा दिखाना पसंद है (पद 25)। और यद्यपि हमें लग सकता है कि वह विलम्ब कर रहा है, किन्तु उसकी बुद्धिमत्ता सदैव सिद्ध होती है और उसका समय सदा सही होता है। इलीशिबा और उसके पति के लिए परमेश्वर के पास एक विशेष उपहार था – वह पुत्र जो जगत के उद्धारकर्ता का अग्रदूत और संसार को मसीहा का परिचय करवाने वाला बनेगा (यशायाह 40:3-5)।

          क्या आपको कभी अपने जीवन में किसी बात की कमी खलती है, और जिसके विषय आप प्रार्थनाएं भी करते रहे हैं – विश्वविद्यालय की कोई डिग्री, विवाह, बच्चा, नौकरी, घर, इत्यादि? परमेश्वर के प्रति विश्वासयोग्य बने रहिए, और भरोसे के साथ उसके कार्य को करता रहिए; उसके समय और योजना की धैर्य के साथ प्रतीक्षा करते रहिए, जैसा कि इलीशिबा ने किया।

          हमारी आवश्यकताएँ तथा परिस्थितियाँ चाहे जो भी हों, परमेश्वर हम में, हमारे द्वारा, और हमारे लिए कार्य कर रहा है। वह हमारे मन की दशा को जानता है। वह हमारी प्रार्थना सुनता है और उत्तर भी देता है। - पोह फैंग चिया

 

परमेश्वर के प्रति वफादारी से कार्य करते रहिए, जीवन व्यतीत करते रहिए।


इसलिये परमेश्वर के बलवन्‍त हाथ के नीचे दीनता से रहो, जिस से वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए। और अपनी सारी चिन्ता उसी पर डाल दो, क्योंकि उसको तुम्हारा ध्यान है। - 1 पतरस 5:6-7

बाइबल पाठ: लूका 1:18-25

लूका 1:18 ज़कर्याह ने स्वर्गदूत से पूछा; यह मैं कैसे जानूं? क्योंकि मैं तो बूढ़ा हूं; और मेरी पत्नी भी बूढ़ी हो गई है।

लूका 1:19 स्वर्गदूत ने उसको उत्तर दिया, कि मैं जिब्राईल हूँ, जो परमेश्वर के सामने खड़ा रहता हूँ; और मैं तुझ से बातें करने और तुझे यह सुसमाचार सुनाने को भेजा गया हूँ।

लूका 1:20 और देख जिस दिन तक ये बातें पूरी न हो लें, उस दिन तक तू मौन रहेगा, और बोल न सकेगा, इसलिये कि तू ने मेरी बातों की जो अपने समय पर पूरी होंगी, प्रतीति न की।

लूका 1:21 और लोग ज़कर्याह की बाट देखते रहे और अचम्भा करने लगे कि उसे मन्दिर में ऐसी देर क्यों लगी?

लूका 1:22 जब वह बाहर आया, तो उन से बोल न सका: सो वे जान गए, कि उसने मन्दिर में कोई दर्शन पाया है; और वह उन से संकेत करता रहा, और गूंगा रह गया।

लूका 1:23 जब उस की सेवा के दिन पूरे हुए, तो वह अपने घर चला गया।

लूका 1:24 इन दिनों के बाद उस की पत्नी इलीशिबा गर्भवती हुई; और पांच महीने तक अपने आप को यह कह के छिपाए रखा।

लूका 1:25 कि मनुष्यों में मेरा अपमान दूर करने के लिये प्रभु ने इन दिनों में कृपा दृष्टि कर के मेरे लिये ऐसा किया है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • आमोस 7-9
  • प्रकाशितवाक्य 8