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मंगलवार, 22 दिसंबर 2020

रणनीति

 

          मैं जब यह लिखने बैठा हूँ, उस समय तक मेरी पसंद की फुटबॉल टीम एक के बाद एक आठ खेल हार चुकी है, और हर हार के बाद उनके लिए इस वर्ष की खेल श्रृंखला में कोई स्थान प्राप्त कर पाना असंभव सा होता जा रहा है। उनके प्रशिक्षक ने हर सप्ताह परिवर्तन किए हैं, परन्तु उनसे जीत नहीं मिलाने पाई है। अपने साथ के सहकर्मियों के साथ बात करते हुए मैंने मज़ाक में कहा है, केवल एक भिन्न परिणाम की आशा रखना ही उसे पा लेने की कोई गारंटी नहीं है; केवल आशा रखना ही कोई रणनीति नहीं है।

          मेरी कही यह बात फुटबॉल के लिए तो सत्य है, परन्तु हमारे आत्मिक जीवनों में, इसका बिलकुल विपरीत ही सत्य है। न केवल परमेश्वर में आशा बनाए रखना एक उत्तम रणनीति है, वरन, भरोसे के साथ उससे लिपटे रहने और उस पर विश्वास बनाए रखना ही सफलता की एकमात्र रणनीति होती है। यह संसार हमें अकसर निराश करता है, परन्तु आशा हमें परमेश्वर के सत्य और सामर्थ्य में दृढ़ करती है और कठिन समयों को पार करने में सहायक होती है।

          मीका नबी ने इस वास्तविकता को समझा था। इस्राएल के लोगों के, परमेश्वर से विमुख हो जाने से वह बहुत दुखी था; उसने कहा, हाय मुझ पर! ... भक्त लोग पृथ्वी पर से नाश हो गए हैं, और मनुष्यों में एक भी सीधा नहीं जन नहीं रहा” (मीका 7:1-2)। लेकिन फिर उसने अपने ध्यान को फिर से अपनी उस सच्ची आशा पर केन्द्रित किया: “परन्तु मैं यहोवा की ओर ताकता रहूंगा, मैं अपने उद्धारकर्ता परमेश्वर की बाट जोहता रहूंगा; मेरा परमेश्वर मेरी सुनेगा” (पद 7)।

          कठिन समयों में आशा को बनाए रखने के लिए क्या चाहिए होता है? मीका हमें दिखाता है: बाट जोहना; प्रतीक्षा करना; प्रार्थना करना; स्मरण करते रहना। चाहे हमारी परिस्थितियाँ अभिभूत करने वाली भी हों, परमेश्वर फिर भी हमारी प्रार्थनाओं को सुनता है। ऐसे समयों में, आशा को थामे रहना और परमेश्वर पर भरोसा बनाए रखना, उससे लिपटे रहना ही हमारे रणनीति होनी चाहिए – एकमात्र रणनीति जो हमें जीवन की आँधियों से पार लगाएगी। - एडम होल्ज़

 

जीवन के कठिन समयों में परमेश्वर के संबंध में सर्वोत्तम उपाय 

बाट जोहना; प्रतीक्षा करना; प्रार्थना करना; स्मरण करते रहना ही है।

परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों के समान उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे। - यशायाह 40:31

बाइबल पाठ: मीका 7:1-7

मीका 7:1 हाय मुझ पर! क्योंकि मैं उस जन के समान हो गया हूं जो धूपकाल के फल तोड़ने पर, या रही हुई दाख बीनने के समय के अन्त में आ जाए, मुझे तो पक्की अंजीरों की लालसा थी, परन्तु खाने के लिये कोई गुच्छा नहीं रहा।

मीका 7:2 भक्त लोग पृथ्वी पर से नाश हो गए हैं, और मनुष्यों में एक भी सीधा नहीं जन नहीं रहा; वे सब के सब हत्या के लिये घात लगाते, और जाल लगा कर अपने अपने भाई का अहेर करते हैं।

मीका 7:3 वे अपने दोनों हाथों से मन लगा कर बुराई करते हैं; हाकिम घूस मांगता, और न्यायी घूस लेने को तैयार रहता है, और रईस अपने मन की दुष्टता वर्णन करता है; इसी प्रकार से वे सब मिल कर जालसाजी करते हैं।

मीका 7:4 उन में से जो सब से उत्तम है, जो सब से सीधा है, वह कांटे वाले बाड़े से भी बुरा है। तेरे पहरुओं का कहा हुआ दिन, अर्थात तेरे दण्ड का दिन आ गया है। अब वे शीघ्र चौंधिया जाएंगे।

मीका 7:5 मित्र पर विश्वास मत करो, परम-मित्र पर भी भरोसा मत रखो; वरन अपनी अर्द्धांगिनी से भी संभल कर बोलना।

मीका 7:6 क्योंकि पुत्र पिता का अपमान करता, और बेटी माता के, और पतोहू सास के विरुद्ध उठती है; मनुष्य के शत्रु उसके घर ही के लोग होते हैं।

मीका 7:7 परन्तु मैं यहोवा की ओर ताकता रहूंगा, मैं अपने उद्धारकर्ता परमेश्वर की बाट जोहता रहूंगा; मेरा परमेश्वर मेरी सुनेगा।

 

एक साल में बाइबल: 

  • मीका 6-7
  • प्रकाशितवाक्य 13

सोमवार, 16 अप्रैल 2018

गैरपारंपरिक



   सन 1980 में, बॉस्टन मैराथन दौड़ के दौरान, एक महिला दौड़ में से निकल कर भूमिगत ट्रेन पर चढ़ गई; इसमें कोई विचित्र बात नहीं है। लेकिन उसी महिला को गवाहों ने दौड़ समाप्त होने की रेखा से एक मील से भी कम दूरी पर ट्रेन से निकलकर फिर से मैराथन दौड़ में सम्मिलित होते देखा! उसे मैराथन भाग कर पूरा करना था, परन्तु अपने इस उनेप्क्षित तरीके से वह अन्य महिला धावकों से बहुत पहले समापन रेखा पर पहुँच गई, और वह न तो हांफ रही थी, न ही उसे कुछ खास पसीना आ रहा था। कुछ समय तक लगा कि वही विजेता है।

   बहुत पहले एक युद्ध में, परमेश्वर के वचन बाइबल में आया है, कुछ ऐसे लोगों ने जो युद्ध को हार जाने की स्थिति में थे, विजय प्राप्त करने का एक आदरपूर्ण और गैरपारंपरिक तरीका अपनाया। जब राजा यहोशापात को समाचार मिला कि एक अति विशाल सेना उस पर चढ़ाई करने के लिए आ रही है, तो वह घबरा गया (2 इतिहास 20:2-3)। परन्तु अपने भय की इस स्थिति में विशिष्ट सैनिक रणनीतियों को अपनाने के स्थान पर यहोशापात परमेश्वर की ओर मुड़ा। उसने अपने भय और असमंजस को तथा परमेश्वर की सामर्थ्य और प्रभुता को स्वीकार किया, “...यह जो बड़ी भीड़ हम पर चढ़ाई कर रही है, उसके साम्हने हमारा तो बस नहीं चलता और हमें हुछ सूझता नहीं कि क्या करना चाहिये? परन्तु हमारी आंखें तेरी ओर लगी हैं” (पद 12)। फिर परमेश्वर के निर्देशानुसार, वह अपनी सेना को युद्ध-भूमि पर ले गया, और उसकी सेना के आगे-आगे स्तुतिगान करने वाले चल रहे थे, जो युद्ध की ललकार के स्थान पर परमेश्वर के प्रेम के विषय में स्तुतिगान कर रहे थे। इस गैरपारंपरिक गतिविधि का परिणाम भौंचका कर देने वाला था; यहोशापात के शत्रु आपस में ही लड़ने लगे, और सभी परस्पर लड़ मरे (पद 22-24)। सब कुछ हो जाने के पश्चात, “यहोशापात के राज्य को चैन मिला, क्योंकि उसके परमेश्वर ने उसको चारों ओर से विश्राम दिया” (पद 30)।

   जीवन हमारे सामने अभिभूत कर देने वाली चुनौतियां लेकर आ सकता है। परन्तु हमारे भय और अनिश्चितताएं हमें अवसर प्रदान करते हैं कि उनके समाधान के लिए हम अपने सर्व-सामर्थी परमेश्वर की ओर मुड़ें – वह गैरपारंपरिक विधियों का विशेषज्ञ है। - टिम गुस्ताफासन


हमारे परमेश्वर की कार्य-विधि के विषय 
कभी भविष्यवाणी तो नहीं की जा सकती है, 
परन्तु वह  हमेशा भरोसेमंद रहता है।

मेरी आंखे सदैव यहोवा पर टकटकी लगाए रहती हैं, क्योंकि वही मेरे पांवों को जाल में से छुड़ाएगा। - भजन 25:15

बाइबल पाठ: 2 इतिहास 20:1-13
2 Chronicles 20:1 इसके बाद मोआबियों और अम्मोनियों ने और उनके साथ कई मूनियों ने युद्ध करने के लिये यहोशापात पर चढ़ाई की।
2 Chronicles 20:2 तब लोगों ने आकर यहोशापात को बता दिया, कि ताल के पार से एदोम देश की ओर से एक बड़ी भीड़ तुझ पर चढ़ाई कर रही है; और देख, वह हसासोन्तामार तक जो एनगदी भी कहलाता है, पहुंच गई है।
2 Chronicles 20:3 तब यहोशपात डर गया और यहोवा की खोज में लग गया, और पूरे यहूदा में उपवास का प्रचार करवाया।
2 Chronicles 20:4 सो यहूदी यहोवा से सहायता मांगने के लिये इकट्ठे हुए, वरन वे यहूदा के सब नगरों से यहोवा से भेंट करने को आए।
2 Chronicles 20:5 तब यहोशपात यहोवा के भवन में नये आंगन के साम्हने यहूदियों और यरूशलेमियों की मण्डली में खड़ा हो कर
2 Chronicles 20:6 यह कहने लगा, कि हे हमारे पितरों के परमेश्वर यहोवा! क्या तू स्वर्ग में परमेश्वर नहीं है? और क्या तू जाति जाति के सब राज्यों के ऊपर प्रभुता नहीं करता? और क्या तेरे हाथ में ऐसा बल और पराक्रम नहीं है कि तेरा साम्हना कोई नहीं कर सकता?
2 Chronicles 20:7 हे हमारे परमेश्वर! क्या तू ने इस देश के निवासियों अपनी प्रजा इस्राएल के साम्हने से निकाल कर इन्हें अपने मित्र इब्राहीम के वंश को सदा के लिये नहीं दे दिया?
2 Chronicles 20:8 वे इस में बस गए और इस में तेरे नाम का एक पवित्र स्थान बना कर कहा,
2 Chronicles 20:9 कि यदि तलवार या मरी अथवा अकाल वा और कोई विपत्ति हम पर पड़े, तौभी हम इसी भवन के साम्हने और तेरे साम्हने (तेरा नाम तो इस भवन में बसा है) खड़े हो कर, अपने क्लेश के कारण तेरी दोहाई देंगे और तू सुन कर बचाएगा।
2 Chronicles 20:10 और अब अम्मोनी और मोआबी और सेईर के पहाड़ी देश के लोग जिन पर तू ने इस्राएल को मिस्र देश से आते समय चढ़ाई करने न दिया, और वे उनकी ओर से मुड़ गए और उन को विनाश न किया,
2 Chronicles 20:11 देख, वे ही लोग तेरे दिए हुए अधिकार के इस देश में से जिसका अधिकार तू ने हमें दिया है, हम को निकाल कर कैसा बदला हमें दे रहे हैं।
2 Chronicles 20:12 हे हमारे परमेश्वर, क्या तू उनका न्याय न करेगा? यह जो बड़ी भीड़ हम पर चढ़ाई कर रही है, उसके साम्हने हमारा तो बस नहीं चलता और हमें हुछ सूझता नहीं कि क्या करना चाहिये? परन्तु हमारी आंखें तेरी ओर लगी हैं।
2 Chronicles 20:13 और सब यहूदी अपने अपने बाल-बच्चों, स्त्रिीयों और पुत्रों समेत यहोवा के सम्मुख खड़े रहे।


एक साल में बाइबल: 
1 शमूएल 30-31
लूका 13:23-35


बुधवार, 24 फ़रवरी 2016

रणनीति


   ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर लिखे चीनी उपन्यास Romance of the Three Kingdoms में, लेखक ल्यू ग्वँज़ौंग ने "खाली किला" रणनीति, अर्थात शत्रु को छलावा देने के लिए विपरीत मनोविज्ञान के प्रयोग के बारे में बताया है। जब वेई साम्राज्य के 150,000 सैनिकों के साथ उनका सेनापति ज़िंग शहर पहुँचा, जहाँ 2,500 से भी कम सैनिक थे, तो उन्होंने नगर के द्वार को खुला हुआ और वहाँ के सुप्रसिद्ध युद्ध रणनीतिकार ज़ू लियांग को अपने दो बच्चों के साथ बैठे संगीत वाद्य बजाते हुए पाया। ज़ू लियांग के इस बेफिक्र अन्दाज़ को देखकर वेई साम्राज्य का सेनापति घबरा गया, और यह समझकर कि वे किसी भारी षड़यंत्र का शिकार होने वाले हैं, उसने अपने सैनिकों को तुरंत वापस लौट चलने का आदेश दे दिया।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भी ऐसी ही एक रणनीति का उल्लेख है। न्यायियों 7 में परमेश्वर ने गिदोन के 300 आदमियों, घड़ों, तुरहीयों और मशालों का उपयोग टिड्डियों के समान बहुतेरे मिद्यानी सैनिकों और गिनती से परे उनके ऊँटों के विरुद्ध किया। क्या इस्त्राएल ऐसे भारी शत्रु को हरा सकता था, जबकि उनके पास ना तो सैनिक थे और ना ही युद्ध के लिए हथियार? चाहे इस्त्राएल के पास लड़ाई के लिए उपयुक्त समझा जाने वाला कुछ भी नहीं था, लेकिन उनके पास वह एकमात्र था जिस के बाद फिर और किसी की कोई आवश्यकता नहीं थी - परमेश्वर की प्रतिज्ञा: "तब यहोवा ने गिदोन से कहा, इन तीन सौ चपड़ चपड़ कर के पीने वालों के द्वारा मैं तुम को छुड़ाऊंगा, और मिद्यानियों को तेरे हाथ में कर दूंगा; और सब लोग अपने अपने स्थान को लौट जाएं" (न्यायियों 7:7)। और परिणाम - इस्त्राएल की विजय!

   क्या आपके जीवन में कोई कठिन चुनौती है जो आपको परेशान कर रही है? प्रभु परमेश्वर ने कहा है, "तब यहोवा का यह वचन यिर्मयाह के पास पहुंचा, मैं तो सब प्राणियों का परमेश्वर यहोवा हूँ; क्या मेरे लिये कोई भी काम कठिन है?" (यर्मियाह 32:26-27)। परमेश्वर पर रखे गए विश्वास से बेहतर कोई रणनीति नहीं है; अपने विश्वास को बनाए रखें और परमेश्वर को अपने समय तथा विधि से कार्य कर लेने दें; परिणाम अद्भुत होंगे। - पो फ़ैंग चिया


परमेश्वर के साथ सब कुछ संभव है।

किसी को रथों का, और किसी को घोड़ों का भरोसा है, परन्तु हम तो अपने परमेश्वर यहोवा ही का नाम लेंगे। - भजन 20:7

बाइबल पाठ: न्यायियों 7:1-8
Judges 7:1 तब गिदोन जो यरूब्बाल भी कहलाता है और सब लोग जो उसके संग थे सवेरे उठे, और हरोद नाम सोते के पास अपने डेरे खड़े किए; और मिद्यानियों की छावनी उनकी उत्तरी ओर मोरे नाम पहाड़ी के पास तराई में पड़ी थी।
Judges 7:2 तब यहोवा ने गिदोन से कहा, जो लोग तेरे संग हैं वे इतने हैं कि मैं मिद्यानियों को उनके हाथ नहीं कर सकता, नहीं तो इस्राएल यह कहकर मेरे विरुद्ध अपनी बड़ाई मारने लगे, कि हम अपने ही भुजबल के द्वारा बचे हैं। 
Judges 7:3 इसलिये तू जा कर लोगों में यह प्रचार कर के सुना दे, कि जो कोई डर के मारे थरथराता हो, वह गिलाद पहाड़ से लौटकर चला जाए। तब बाईस हजार लोग लौट गए, और केवल दस हजार रह गए। 
Judges 7:4 फिर यहोवा ने गिदोन से कहा, अब भी लोग अधिक हैं; उन्हें सोते के पास नीचे ले चल, वहां मैं उन्हें तेरे लिये परखूंगा; और जिस जिसके विषय में मैं तुझ से कहूं, कि यह तेरे संग चले, वह तो तेरे संग चले; और जिस जिसके विषय मे मैं कहूं, कि यह तेरे संग न जाए, वह न जाए। 
Judges 7:5 तब वह उन को सोते के पास नीचे ले गया; वहां यहोवा ने गिदोन से कहा, जितने कुत्ते की नाईं जीभ से पानी चपड़ चपड़ कर के पीएं उन को अलग रख; और वैसा ही उन्हें भी जो घुटने टेककर पीएं। 
Judges 7:6 जिन्होंने मुंह में हाथ लगा चपड़ चपड़ कर के पानी पिया उनकी तो गिनती तीन सौ ठहरी; और बाकी सब लोगों ने घुटने टेककर पानी पिया। 
Judges 7:7 तब यहोवा ने गिदोन से कहा, इन तीन सौ चपड़ चपड़ कर के पीने वालों के द्वारा मैं तुम को छुड़ाऊंगा, और मिद्यानियों को तेरे हाथ में कर दूंगा; और सब लोग अपने अपने स्थान को लौट जाएं। 
Judges 7:8 तब उन लोगों ने हाथ में सीधा और अपने अपने नरसिंगे लिये; और उसने इस्राएल के सब पुरूषों को अपने अपने डेरे की ओर भेज दिया, परन्तु उन तीन सौ पुरूषों को अपने पास रख छोड़ा; और मिद्यान की छावनी उसके नीचे तराई में पड़ी थी।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 9-11
  • मरकुस 5:1-20


शनिवार, 27 दिसंबर 2014

विजयी रणनीति


   जिन दिनों मैं हाई-स्कूल में बास्केट-बॉल प्रशिक्षक का कार्य किया करता था, मैंने एक बार एक बड़ी गलती कर दी - एक मैच से पहले मैंने अपने प्रतिद्वंदियों के बारे में जानकारी लेने के लिए अपने कुछ खिलाड़ियों को भेज दिया। उन्होंने आकर हमें बताया कि हम उस प्रतिद्वंदी टीम को आसानी से हरा सकते हैं। उनकी इस सूचना से हम अपनी क्षमता और तैयारी के प्रति अतिआश्वस्त हो गए, अपनी तैयारी में ढीले पड़ गए और हम वह मैच हार गए। अपनी क्षमता पर आवश्यकता से अधिक विश्वास रखना और प्रतिद्वंदी को अपने से कमज़ोर समझना अकसर हार के कारण होते हैं - सांसारिक जीवन में भी और आत्मिक जीवन में भी, जिसके लिए शैतान हमें अनेकों तरीकों से गिराने, फंसाने के प्रयास करता रहता है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में ऐसी ही एक घटना का उल्लेख है जिससे हम इस बारे में शिक्षा ले सकते हैं - ऐ के युद्ध में इस्त्राएल की पराजय। कनान की भूमि में प्रवेश के पश्चात इस्त्राएलियों का पहला युद्ध यरीहो के निवासियों से हुआ, जिन्हें इस्त्राएलियों ने बड़ी सरलता से हरा दिया। अगला युद्ध ऐ से था, और इस्त्रएली गुप्तचरों ने समाचार दिया कि यरीहो के मुकाबले ऐ एक छोटा सा स्थान है, जिसे हराना कठिन नहीं होगा। गुप्तचरों के समाचार के अनुसार इस्त्राएलियों की एक छोटी सेना ने ऐ पर धावा बोला, परन्तु विजय के स्थान पर उन्हें पराजय मिली और उनके 36 सैनिक भी मारे गए। ऐ की इस पराजय में केवल गुप्तचरों से मिले आँकलन का दोष नहीं था, कुछ अन्य महत्वपूर्ण बातें भी थीं जिनसे हम आज भी अपने जीवन के लिए शिक्षा ले सकते हैं।

   ऐ से पहले यरीहो पर मिली विजय इसलिए संभव हुई थी क्योंकि इस्त्राएल के सेनानायक यहोशु को उस युद्ध के लिए परमेश्वर की योजना का पता था; लेकिन ऐ के युद्ध से पहले कहीं ऐसा वर्णन नहीं है कि यहोशु ने परमेश्वर से इस के बारे में कुछ पूछा या जाना हो; उसने केवल मनुष्यों से मिली सूचना और आँकलन पर ही विश्वास किया और उसके अनुसार योजना बनाई तथा कार्य किया। यरीहो के युद्ध से पहले इस्त्राएल के लोगों ने अपने आप को परमेश्वर के वचन के अनुसार तैयार किया था, उसकी आज्ञाकारिता में रही कमी की पूर्ति करी थी (यहोशू 5:2-8) लेकिन ऐ के युद्ध से पहले कहीं यह देखने को नहीं मिलता कि उन्होंने अपने आप को परमेश्वर के सम्मुख जाँचा हो, उसे अपना समर्पण किया हो, आत्मिक रीति से तैयार हुए हों। ऐ की पराजय का कारण इस्त्राएल की छावनी में छुपा पाप था - एक इस्त्राएली सैनिक, आकान ने यरीहो की लूट में से अर्पण की हुई वस्तुओं में से चुरा कर अपने डेरे में उसे छुपा लिया था (यहोशू 7:1)। जब तक वह पाप उनके मध्य था, इसत्राएली विजयी नहीं हो सकते थे; उस पाप का प्रगट किया जाना, उसके दोष से मुक्त होना और पुनः अपने आप को परमेश्वर के प्रति समर्पित करना आवश्यक था (यहोशू 7:16-26)। जब इस्त्राएलियों ने ऐसा किया, तत्पश्चात ही परमेश्वर ने उन्हें ऐ पर विजयी होने की रणनीति बताई (यहोशू 8:1-7)।

   प्रतिदिन के जीवन में हमें अपने कार्यों तथा ज़िम्मेदारियों में अनेकों निर्णय लेने की ’युद्धस्थितियों’ से होकर निकलना पड़ता है और कई बार निराशाओं तथा अनापेक्षित परिणामों का सामना भी करना पड़ता है। परमेश्वर की आज्ञाकारिता, उसके प्रति समर्पण तथा उसके सम्मुख पापों का अंगीकार एवं उनके लिए उससे क्षमा प्रार्थना ही हमें दैनिक जीवन के लिए परमेश्वर से मिलने वाली विजयी रणनीति प्रदान करवाती रहेंगी। - डेव ब्रैनन


मन की पवित्रता जीवन में सामर्थ्य प्रदान करवाती है।

सुनो, यहोवा का हाथ ऐसा छोटा नहीं हो गया कि उद्धार न कर सके, न वह ऐसा बहिरा हो गया है कि सुन न सके; परन्तु तुम्हारे अधर्म के कामों ने तुम को तुम्हारे परमेश्वर से अलग कर दिया है, और तुम्हारे पापों के कारण उस का मुँह तुम से ऐसा छिपा है कि वह नहीं सुनता। - यशायाह 59:1-2

बाइबल पाठ: यहोशू 7:1-13
Joshua 7:1 परन्तु इस्राएलियों ने अर्पण की वस्तु के विषय में विश्वासघात किया; अर्थात यहूदा के गोत्र का आकान, जो जेरहवंशी जब्दी का पोता और कर्म्मी का पुत्र था, उसने अर्पण की वस्तुओं में से कुछ ले लिया; इस कारण यहोवा का कोप इस्राएलियों पर भड़क उठा।
Joshua 7:2 और यहोशू ने यरीहो से ऐ नाम नगर के पास, जो बेतावेन से लगा हुआ बेतेल की पूर्व की ओर है, कितने पुरूषों को यह कहकर भेजा, कि जा कर देश का भेद ले आओ। और उन पुरूषों ने जा कर ऐ का भेद लिया।
Joshua 7:3 और उन्होंने यहोशू के पास लौटकर कहा, सब लोग वहां न जाएं, कोई दो वा तीन हजार पुरूष जा कर ऐ को जीत सकते हैं; सब लोगों को वहां जाने का कष्ट न दे, क्योंकि वे लोग थोड़े ही हैं। 
Joshua 7:4 इसलिये कोई तीन हजार पुरूष वहां गए; परन्तु ऐ के रहने वालों के साम्हने से भाग आए, 
Joshua 7:5 तब ऐ के रहने वालों ने उन में से कोई छत्तीस पुरूष मार डाले, और अपने फाटक से शबारीम तक उनका पीछा कर के उतराई में उन को मारते गए। तब लोगों का मन पिघलकर जल सा बन गया। 
Joshua 7:6 तब यहोशू ने अपने वस्त्र फाड़े, और वह और इस्राएली वृद्ध लोग यहोवा के सन्दूक के साम्हने मुंह के बल गिरकर पृथ्वी पर सांझ तक पड़े रहे; और उन्होंने अपने अपने सिर पर धूल डाली। 
Joshua 7:7 और यहोशू ने कहा, हाय, प्रभु यहोवा, तू अपनी इस प्रजा को यरदन पार क्यों ले आया? क्या हमें एमोरियों के वश में कर के नष्ट करने के लिये ले आया है? भला होता कि हम संतोष कर के यरदन के उस पार रह जाते। 
Joshua 7:8 हाय, प्रभु मैं क्या कहूं, जब इस्राएलियों ने अपने शत्रुओं को पीठ दिखाई है! 
Joshua 7:9 क्योंकि कनानी वरन इस देश के सब निवासी यह सुनकर हम को घेर लेंगे, और हमारा नाम पृथ्वी पर से मिटा डालेंगे; फिर तू अपने बड़े नाम के लिये क्या करेगा? 
Joshua 7:10 यहोवा ने यहोशू से कहा, उठ, खड़ा हो जा, तू क्यों इस भांति मुंह के बल पृथ्वी पर पड़ा है? 
Joshua 7:11 इस्राएलियों ने पाप किया है; और जो वाचा मैं ने उन से अपने साथ बन्धाई थी उसको उन्होंने तोड़ दिया है, उन्होंने अर्पण की वस्तुओं में से ले लिया, वरन चोरी भी की, और छल कर के उसको अपने सामान में रख लिया है। 
Joshua 7:12 इस कारण इस्राएली अपने शत्रुओं के साम्हने खड़े नहीं रह सकते; वे अपने शत्रुओं को पीठ दिखाते हैं, इसलिये कि वे आप अर्पण की वस्तु बन गए हैं। और यदि तुम अपने मध्य में से अर्पण की वस्तु को सत्यानाश न कर डालोगे, तो मैं आगे को तुम्हारे संग नहीं रहूंगा। 
Joshua 7:13 उठ, प्रजा के लोगों को पवित्र कर, उन से कह; कि बिहान तक अपने अपने को पवित्र कर रखो; क्योंकि इस्राएल का परमेश्वर यहोवा यह कहता है, कि हे इस्राएल, तेरे मध्य में अर्पण की वस्तु है; इसलिये जब तक तू अर्पण की वस्तु को अपने मध्य में से दूर न करे तब तक तू अपने शत्रुओं के साम्हने खड़ा न रह सकेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • प्रकाशितवाक्य 4-8