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Saturday, March 31, 2012

क्षमा का सौन्दर्य

   लैरी और मेरी गेर्बेन्स पीछले १० वर्षों से परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु द्वारा लूका १५ में दिए गए "उड़ाऊ पुत्र" के दृष्टांत से संबंधित कलाकृतियों का संग्रह कर रहे हैं। उनके संग्रह में रेंब्रां और अन्य विख्यात चित्रकारों तथा कलाकरों की कृतियाँ मौजूद हैं जो इस दृष्टांत के विभिन्न पहलुओं पर आधारित हैं। जो कला संग्रह के रूप में आरंभ हुआ था, अब गेर्बेन्स दंपति के लिए प्रभु की सेवकाई का माध्यम बन गया है।

   गेर्बेन्स दंपति ने अपना यह संग्रह एक स्थानीय कॉलेज में प्रदर्शनी के लिए लगा रखा है। लैरी का कहना है कि, "कलाकारों ने हमारी सेवा करी है, हम चाहते हैं कि उनकी कलाकृतियाँ दुसरों की भी सेवा करें।"

   जब मैं उनकी प्रदर्शनी को देखती जा रही थी, मुझे उस उड़ाऊ पुत्र के मन की गहराईयों की आवश्यक्ता, उसके सच्चे पश्चाताप और उसके पिता द्वारा उसे क्षमा किए जाने की सुन्दरता को विभिन्न कलाकृतियों में व्यक्त देखा जिसने मेरे दिल को छू लिया।

   इस दृष्टांत के इस पुत्र के समान, जिसके पास अपने जीवन के लिए अपने पिता की इच्छा से भिन्न योजनाएं थीं और जिन्हें वह किसी भी कीमत पर पूरा करने के लिए ढीठ था, हम सब भी ढीठ रहे हैं। हम सब ने अपने परमेश्वर पिता से मूँह मोड़कर अपने ही मार्ग ले लिए हैं (रोमियों ३:१०-१२)। किंतु उस दृष्टांत के पिता के समान ही हमारा परमेश्वर पिता पश्चाताप के साथ लौट के आने वाले हर जन को क्षमा करने को तैयार बैठा है, प्रतीक्षा में है।

   यदि आप भी सच्चे पश्चाताप के साथ उस सच्चे परमेश्वर पिता को हृदय की गहराईयों से पुकारेंगे, "पिता जी मैं ने स्‍वर्ग के विरोध में और तेरी दृष्‍टि में पाप किया है" (लूका १५:१८), तो आप भी उसकी क्षमा के सौन्दर्य को देखने और अनुभव करने पाएंगे।

   यदि आज आप उस सच्चे परमेश्वर से दूर जाकर खड़े हैं, तो आज और अभी उसके पास लौट आएं; वह आपकी प्रतीक्षा में है। उसके प्रेम और क्षमा के आनन्द को स्वयं अनुभव कर के देखें। - ऐनी सेटास


जब परमेश्वर क्षमा करता है तो साथ ही वह पाप का दोष भी हटा देता है और आत्मा को भी बहाल कर देता है।

...वह अभी दूर ही था, कि उसके पिता ने उसे देखकर तरस खाया, और दौड़कर उसे गले लगाया, और बहुत चूमा। - लूका १५:२०
बाइबल पाठ: लूका १५:११-२४
Luk 15:11  फिर उस ने कहा, किसी मनुष्य के दो पुत्र थे।
Luk 15:12  उन में से छुटके ने पिता से कहा कि हे पिता संपत्ति में से जो भाग मेरा हो, वह मुझे दे दीजिए। उस ने उन को अपनी संपत्ति बांट दी।
Luk 15:13  और बहुत दिन न बीते थे कि छुटका पुत्र सब कुछ इकट्ठा करके एक दूर देश को चला गया और वहां कुकर्म में अपनी संपत्ति उड़ा दी।
Luk 15:14  जब वह सब कुछ खर्च कर चुका, तो उस देश में बड़ा अकाल पड़ा, और वह कंगाल हो गया।
Luk 15:15  और वह उस देश के निवासियों में से एक के यहां जा पड़ा : उस ने उसे अपने खेतों में सूअर चराने के लिये भेजा।
Luk 15:16 और वह चाहता था, कि उन फलियों से जिन्‍हें सूअर खाते थे अपना पेट भरे; और उसे कोई कुछ नहीं देता था।
Luk 15:17  जब वह अपने आपे में आया, तब कहने लगा, कि मेरे पिता के कितने ही मजदूरों को भोजन से अधिक रोटी मिलती है, और मैं यहां भूखा मर रहां हूं।
Luk 15:18 मैं अब उठ कर अपने पिता के पास जाऊंगा और उस से कहूंगा कि पिता जी मैं ने स्‍वर्ग के विरोध में और तेरी दृष्‍टि में पाप किया है।
Luk 15:19  अब इस योग्य नहीं रहा कि तेरा पुत्र कहलाऊं, मुझे अपने एक मजदूर की नाईं रख ले।
Luk 15:20  तब वह उठ कर, अपने पिता के पास चला: वह अभी दूर ही था, कि उसके पिता ने उसे देख कर तरस खाया, और दौड़ कर उसे गले लगाया, और बहुत चूमा।
Luk 15:21  पुत्र न उस से कहा; पिता जी, मैं ने स्‍वर्ग के विरोध में और तेरी दृष्‍टि में पाप किया है, और अब इस योग्य नहीं रहा, कि तेरा पुत्र कहलाऊं।
Luk 15:22  परन्‍तु पिता ने अपने दासों से कहा; झट अच्‍छे से अच्‍छा वस्‍त्र निकाल कर उसे पहिनाओ, और उसके हाथ में अंगूठी, और पांवों में जूतियां पहिनाओ।
Luk 15:23  और पला हुआ बछड़ा लाकर मारो ताकि हम खांए और आनन्‍द मनावें।
Luk 15:24  क्‍योंकि मेरा यह पुत्र मर गया था, फिर जी गया है : खो गय था, अब मिल गया है: और वे आनन्‍द करने लगे।
एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों ११-१२ 
  • लूका ६:१-२६

Friday, March 30, 2012

राज्य और राज

   १९७७ में १५ वर्षीय केविन बौह और उसके एक और किशोर मित्र ने अपने मनोरंजन के लिए अपना ही एक राज्य बनाने का निर्णय लिया। उन्होंने एक नक्शा बनाया, एक झंडा बनाया और अपने राज्य में चलने वाले पैसे भी छपवाए; और मोलोशिया गणतंत्र की स्थापना कर ली। आज भी केविन बौह अपने छोटे से राष्ट्र को चलाते हैं, उसी उद्देश्य से जिसके साथ वह स्थापित किया गया - केवल अपने मनोरंजन के लिए। जब एक पत्रकार ने नेवाडा प्रांत में उनके उस १.३ एकड़ में फैले राज्य का दौरा किया, तो केविन ने उसे आश्वासन दिया कि वह अमेरिका को अपने सभी कर देते हैं, जिन्हें वे अमेरिका को दी गई "विदेशी सहायता" कहते हैं। केविन बौह ने माना कि यह सब केवल उनके मनोरंजन का साधन है, उनके व्यक्तिगत आनन्द के लिए ही है।

   हम में से शायद ही कोई होगा जो इस प्रकार का कोई सांसारिक राज्य अपने लिए बनाएगा, किंतु हम सब अपने अन्दर, अपने मन में एक राज्य बनाए रहते हैं, जिसपर किसका राज होगा, इसका निर्णय भी हम ही करते हैं। जो हमारे मन के राज्य पर राज करता है, वही हमारे जीवन को भी निर्देषित करता है और हमारे जीवनों में प्रगट होता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पतरस ने लिखा: "पर मसीह को प्रभु जानकर अपने अपने मन में पवित्र समझो..." (१ पतरस ३:१५), अर्थात अपने अपने मन पर यीशु ही को अपना प्रभु मानो, उस ही को अपने मन पर राज करने दो।

   हम सबके अन्दर एक शक्ति है जो हमारे जीवनों को नियंत्रित करना चाहती है, हमें अपनी मन-मर्ज़ी करने के लिए उकसाती रहती है; चाहे वह हमारे मन का एक छोटा सा कोना ही हो जिसमें हम अपनी आत्मिक स्वतंत्रता अनुभव करना चाहते हैं और जहाँ हम किसी अन्य को बिलकुल भी जवाबदेह होना नहीं चाहते।

   किंतु वास्तविक स्वतंत्रता अपने मन को संपूर्णतः प्रभु यीशु के राज के आधीन कर देने में ही है, क्योंकि जहाँ प्रभु यीशु का राज है वहाँ उसकी शांति है, वहाँ भय नहीं है, वहाँ पवित्रता है, वहाँ उसकी सामर्थ है, वहाँ सर्वशक्तिमान द्वारा निर्देषित सामर्थी जीवन है।

   आपके मन के राज्य पर कौन राज करता है? क्या प्रभु यीशु? - डेविड मैक्कैसलैंड


जब यीशु हमारे जीवन का प्रभु होगा, तो हमारे पाँव उसके मार्गों पर चलेंगे।

पर मसीह को प्रभु जान कर अपने अपने मन में पवित्र समझो... - १ पतरस ३:१५
बाइबल पाठ: १ पतरस ३:८-१८
1Pe 3:8  निदान, सब के सब एक मन और कृपामय और भाईचारे की प्रीति रखने वाले, और करूणामय, और नम्र बनो।
1Pe 3:9 बुराई के बदले बुराई मत करो, और न गाली के बदले गाली दो; पर इस के विपरीत आशीष ही दो: क्‍योंकि तुम आशीष के वारिस होने के लिये बुलाए गए हो।
1Pe 3:10 क्‍योंकि जो कोई जीवन की इच्‍छा रखता है, और अच्‍छे दिन देखना चाहता है, वह अपनी जीभ को बुराई से, और अपने होंठों को छल की बातें करने से रोके रहे।
1Pe 3:11 वह बुराई का साथ छोड़े, और भलाई की करे; वह मेल मिलाप को ढूंढ़े, और उस के यत्‍न में रहे।
1Pe 3:12 क्‍योंकि प्रभु की आंखे धमिर्यों पर लगी रहती हैं, और उसके कान उन की विनती की ओर लगे रहते हैं, परन्‍तु प्रभु बुराई करने वालों के विमुख रहता है।
1Pe 3:13  और यदि तुम भलाई करने में उत्तेजित रहो तो तुम्हारी बुराई करने वाला फिर कौन है?
1Pe 3:14  और यदि तुम धर्म के कारण दुख भी उठाओ, तो धन्य हो; पर उन के डराने से मत डरो, और न घबराओ।
1Pe 3:15  पर मसीह को प्रभु जान कर अपने अपने मन में पवित्र समझो, और जो कोई तुम से तुम्हारी आशा के विषय में कुछ पूछे, तो उसे उत्तर देने के लिये सर्वदा तैयार रहो, पर नम्रता और भय के साथ।
1Pe 3:16 और विवेक भी शुद्ध रखो, इसलिये कि जिन बातों के विषय में वे जो तुम्हारे मसीही अच्‍छे चालचलन का अपमान करते हैं लज्ज़ित हों।
1Pe 3:17 क्‍योंकि यदि परमेश्वर की यही इच्‍छा हो, कि तुम भलाई करने के कारण दुख उठाओ, तो यह बुराई करने के कारण दुख उठाने से उत्तम है।
1Pe 3:18 इसलिये कि मसीह ने भी, अर्थात अधमिर्यों के लिये धर्मी ने पापों के कारण एक बार दुख उठाया, ताकि हमें परमेश्वर के पास पहुंचाए: वह शरीर के भाव से तो घात किया गया, पर आत्मा के भाव से जिलाया गया।
एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों ९-१० 
  • लूका ५:१७-३९

Thursday, March 29, 2012

धन्यवादी

   हमारे मानव-संसाधन दल ने RBC Ministries में परस्पर संबंधों को प्रगाढ़ करने और उत्साहित करने के लिए एक कार्यक्रम बनाया है जो प्रभावी है, प्रोत्साहित करता है और कृतज्ञकता पर आधारित है।

   जब भी कोई कर्मचारी किसी दूसरे कर्मचारी को कोई अच्छा कार्य करते देखता है, तो वह हमारे मानव-संसाधन द्ल द्वारा बनाया गया एक विशेष धन्यवादी कार्ड लेकर अपनी प्रशंसा और प्रोत्साहन के कुछ शब्द लिखकर उसे दे देता है। जब हम प्रातः अपने अपने कार्य पर पहुँचते हैं और अपने लिए कोई धन्यवाद का कार्ड पाते हैं तो यह एक बहुत सुखद अनुभव होता है, प्रोत्साहित करता है और आपसी सम्बंधों को सुधारता है।

   क्या आपको नहीं लगता कि किसी अच्छे प्रकार से किए गए कार्य के लिए प्रशंसा मिलना भली बात है? क्या दूसरों से गर्मजोशी के साथ मिला धन्यवाद और प्रोत्साहन आपके दिन को संवार नहीं देता? क्या यह धन्यवाद, उस धन्यवाद देने वाले के साथ आपके संबंधों को कुछ बेहतर नहीं कर देता?

   धन्यवाद मिलना हर किसी को पसन्द आता है, परमेश्वर को भी। हमारा परमेश्वर पिता, उसके प्रति हमारे धन्यवाद की अभिव्यक्तियों से प्रसन्न होता है। यह उसकी इच्छा भी है कि उसके बच्चे उसके धन्यवादी रहें। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने अपनी पत्रियों में लिखा: "हर बात में धन्यवाद करो: क्‍योंकि तुम्हारे लिये मसीह यीशु में परमेश्वर की यहीं इच्‍छा है" (१ थिस्सलुनीकियों ५:१८); और परमेश्वर के प्रति धन्यावादी होने को परमेश्वर की शांति प्राप्त करने का माध्यम बताया "किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्‍तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और विनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं। तब परमेश्वर की शान्‍ति, जो समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सु्रक्षित रखेगी" (फिलिप्पियों ४:६, ७)।

   धन्यवाद वह कुंजी है जो बेहतर संबंधों के लिए द्वार खोलती है, मनुष्यों और परमेश्वर दोनो के साथ। धन्यवादी होने के अवसर ढूँढ़ते रहें, अपने सम्बंधों को बेहतर करते रहें, परमेश्वर से भी और मनुष्यों से भी।

   परमेश्वर का आदर करने, उसकी आराधना करने का सबसे बुनियादी तरीका है हर बात और हर परिस्थिति में उसके प्रति धन्यवादी होना और धन्यवादी बने रहना। - डेव ब्रैनन


परमेश्वर को ग्रहणयोग्य आराधना वही है जो उसके प्रति धन्यवादी और समर्पित मन से निकली हो।

यहोवा का धन्यवाद करो, उस से प्रार्थना करो, देश देश के लोगों में उसके कामों का प्रचार करो! - भजन १०५:१
बाइबल पाठ: भजन १०५:१-५
Psa 105:1  यहोवा का धन्यवाद करो, उस से प्रार्थना करो, देश देश के लोगों में उसके कामों का प्रचार करो!
Psa 105:2  उसके लिये गीत गाओ, उसके लिये भजन गाओ, उसके सब आश्चर्यकर्मों पर ध्यान करो!
Psa 105:3  उसके पवित्र नाम की बड़ाई करो; यहोवा के खोजियों का हृदय आनन्दित हो!
Psa 105:4  यहोवा और उसकी सामर्थ को खोजो, उसके दर्शन के लगातार खोजी बने रहो!
Psa 105:5  उसके किए हुए आश्चर्यकर्म स्मरण करो, उसके चमत्कार और निर्णय स्मरण करो!
एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों ७-८ 
  • लूका ५:१-१६

Wednesday, March 28, 2012

परिपक्व प्रेम

   एक जवान ने अपने पिता से कहा, "पिताजी, मैं शादी करने जा रहा हूँ।" पिता ने पूछा, "रॉन, तुम कैसे जानने पाए कि तुम शादी के लिए तैयार हो? क्या तुम्हें किसी से प्रेम हुआ है?" रॉन ने उत्तर दिया, "जी हाँ, निःसन्देह ही, मुझे प्रेम हुआ है।" पिता ने फिर पूछा, "रॉन, तुमने यह कैसे जाना कि तुम्हें वास्तव में प्रेम हुआ है?" रॉन का उत्तर था, "पिताजी कल रात जब मैं अपनी प्रेमिका को चूमकर उससे विदा ले रहा था, तो उसके कुत्ते ने मुझे टांग पर काट लिया, किंतु उस काटे का दर्द मुझे वापस घर पहुँचने के बाद ही अनुभव हुआ!"

   रॉन के अन्दर वह प्रेम जैसी भावना तो है, किंतु परिपक्वता नहीं। अभी रॉन को परिपक्व होने और प्रेम की वास्तविकता और गहराई को ठीक से समझने की बहुत आवश्यक्ता है। वर्नन ग्राउंड्स ने, जो Our Daily Bread के लिए लेखक रहे हैं और जिनका ७० वर्ष से भी अधिक का वैवाहिक जीवन का अनुभव है, प्रेम के परिपक्व होने के लिए कुछ बातों पर ध्यान रखने और करने के बारे में बताया:
  •    मसीह यीशु में होकर मिलने वाले परमेश्वर के प्रेम के बारे में मनन करो: इस बात पर ध्यान करो कि कैसे उसने आपके लिए अपने जीवन को बलिदान किया। उसकी जीवनी को परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखे सुसमाचारों में पढ़ो और उसका धन्यवाद करो।
  •    परमेश्वर के प्रेम के लिए प्रार्थना करो: परमेश्वर से प्रार्थना करो कि वह अपने प्रेम की समझ आपको दे, और आपको सिखाए कि उस प्रेम को अपने जीवन में, अपनी रिश्तेदारियों में और अपने जीवन साथी के साथ कैसे प्रगट किया जाना चाहिए (१ कुरिन्थियों १३)।
  •    परमेश्वर के प्रेम का अभ्यास करो: जैसे परमेश्वर ने अपने आप को आप के लिए दे दिया, आप भी अपने आप को दुसरों के लिए समर्पित कर दें। एक नवविवाहित पति ने मुझ से कहा, "मेरी ज़िम्मेदारी यह है कि मैं अपनी पत्नी के लिए जीवन सुगम बना सकूँ।" प्रेम के अभ्यास का एक और भी पहलू है, जो आसान नहीं है; वह है एक दुसरे को परमेश्वर की इच्छानुसार जीवन व्यतीत करने के लिए उभारते रहना, चुनौती देते रहना।

   जब हम सच्चे प्रेम पर मनन करेंगे, उसके लिए प्रार्थना करेंगे, उसका अभ्यास अपने जीवनों में करेंगे, तो वह प्रेम हमारे जीवनों में परिपक्व होगा, कार्यकारी होगा, और हमारे कुछ कहे बिना ही हमारे जीवन से प्रगट होगा। - ऐनी सेटास


जैसे जैसे मसीह का प्रेम हम में बढता जाता है, वह हमारे जीवनों से वह प्रेम प्रवाहित भी होता जाता है।
 
वह [प्रेम] अनरीति नहीं चलता, वह अपनी भलाई नहीं चाहता, झुंझलाता नहीं, बुरा नहीं मानता। - १ कुरिन्थियों १३:५
 
बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों १३
1Co 13:1  यदि मैं मनुष्यों, और सवर्गदूतों की बोलियां बोलूं, और प्रेम न रखूं, तो मैं ठनठनाता हुआ पीतल, और झंझनाती हुई झांझ हूं।
1Co 13:2 और यदि मैं भविष्यद्वाणी कर सकूं, और सब भेदों और सब प्रकार के ज्ञान को समझूं, और मुझे यहां तक पूरा विश्वास हो, कि मैं पहाड़ों को हटा दूं, परन्‍तु प्रेम न रखूं, तो मैं कुछ भी नहीं।
1Co 13:3  और यदि मैं अपनी सम्पूर्ण संपत्ति कंगालों को खिला दूं, या अपनी देह जलाने के लिये दे दूं, और प्रेम न रखूं, तो मुझे कुछ भी लाभ नहीं।
1Co 13:4 प्रेम धीरजवन्‍त है, और कृपाल है; प्रेम डाह नहीं करता, प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं।
1Co 13:5  वह अनरीति नहीं चलता, वह अपनी भलाई नहीं चाहता, झुंझलाता नहीं, बुरा नहीं मानता।
1Co 13:6 कुकर्म से आनन्‍दित नहीं होता, परन्‍तु सत्य से आनन्‍दित होता है।
1Co 13:7  वह सब बातें सह लेता है, सब बातों की प्रतीति करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता है।
1Co 13:8 प्रेम कभी टलता नहीं; भविष्यद्वाणियां हों, तो समाप्‍त हो जाएंगी, भाषाएं हो तो जाती रहेंगी, ज्ञान हो, तो मिट जाएगा।
1Co 13:9 क्‍योंकि हमारा ज्ञान अधूरा है, और हमारी भविष्यद्वाणी अधूरी।
1Co 13:10 परन्‍तु जब सवर्सिद्ध आएगा, तो अधूरा मिट जाएगा।
1Co 13:11 जब मैं बालक था, तो मैं बालकों की नाईं बोलता था, बालकों का सा मन था बालकों की सी समझ थी; परन्‍तु सियाना हो गया, तो बालकों की बातें छोड़ दीं।
1Co 13:12 अब हमें दर्पण में धुंधला सा दिखाई देता है; परन्‍तु उस समय आमने साम्हने देखेंगे, इस समय मेरा ज्ञान अधूरा है, परन्‍तु उस समय ऐसी पूरी रीति से पहिचानूंगा, जैसा मैं पहिचाना गया हूं।
1Co 13:13  पर अब विश्वास, आशा, प्रेम ये तीनों स्थाई हैं, पर इन में सब से बड़ा प्रेम है।
 
एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों ४-६ 
  • लूका ४:३१-४४

Tuesday, March 27, 2012

परमेश्वर के प्रति प्रेम

   अपने वैवाहिक जीवन के आरंभिक समय में ही मैंने जान लिया था कि मेरी पत्नि के हृदय तक पहुँचने का सबसे अच्छा मार्ग कौन सा है। दिन भर के कार्य के बाद एक रात मैं एक दर्जन लाल गुलाबों का गुलदस्ता लिए हुए घर पहुँचा, द्वार खोलने की घंटी बजाने के बाद मैंने गुलदस्ता अपनी पीठ के पीछे छुपा लिया, और फिर अन्दर आकर वह गुलदस्ता अपनी पत्नि के हाथों में रख दिया। उसने वे फूल लिए, उन्हें सूंघा, मुझे धन्यवाद दिया और उन्हें लेकर रसोई में चली गई। उसकी प्रतिक्रिया मेरी उम्मीद से कम थी, उसके व्यवहार में मुझे किसी बात की घटी खली।

   यह मेरे लिए एक पाठ था कि मेरी पत्नि के लिए फूलों का गुलदस्ता प्रेम प्रकट करने का प्रभावी माध्यम नहीं था। उसने मेरी भेंट की प्रशंसा करी, उसके लिए धन्यवाद भी किया किंतु मन ही मन वह उनकी कीमत और घर चलाने के खर्च में उससे पड़ने वाले प्रभाव के बारे में सोच रही थी; क्योंकि विद्यार्थी एवं नव-दम्पति होना खर्च पर पाबंदियां तो लगाता ही है। फिर जैसे मैं ने सीखा, मेरी पत्नि के लिए मेरा उसको दिया गया समय और उसका रखा गया ध्यान बहुत अधिक महत्व रखता था। जब भी मैं उसके साथ होते हुए अपना ध्यान किसी अन्य बात में बंटाए बिना उसकी ओर लगाए रखता हूँ, तो इतना ही उसे अपने आप को मेरे प्रेम का पात्र होने के जताने के लिए काफी है।

   क्या कभी आपने इस पर विचार किया कि परमेश्वर क्या चाहता है कि हम उसके प्रति अपने प्रेम की अभिव्यक्ति कैसे करें? इस संबंध में हमें एक इशारा १ यूहन्ना ४:२१ में मिलता है: "...जो कोई अपने परमेश्वर से प्रेम रखता है, वह अपने भाई से भी प्रेम रखे।" कैसी साधारण सी बात है, जब हम मसीह यीशु में अपने भाई-बहिनों के प्रति प्रेम रखते हैं, तो यही इस बात को भी दिखाता है कि हम परमेश्वर से भी प्रेम रखते हैं। जब हमारा आपसी प्रेम ऊपरी दिखावा नहीं वरन वास्तविक होता है तो यह हमारे परमेश्वर पिता को भी प्रसन्न करता है।

   इसलिए सच्चे मन से आपस में अपने प्रेम को अभिव्यक्त करने के अवसरों की तलाश में रहें; यह अभिव्यक्ति परमेश्वेर के प्रति आपके प्रेम की भी अभिव्यक्ति होगी। - जो स्टोवेल


परमेश्वर के प्रति अपने प्रेम को दिखाने के लिए, आपस में प्रेम बाँटते रहें।
हे प्रियों, जब परमेश्वर ने हम से ऐसा प्रेम किया, तो हम को भी आपस में प्रेम रखना चाहिए। - १ यूहन्ना ४:११
 
बाइबल पाठ: १ यूहन्ना ४:७-२१
1Jn 4:7  हे प्रियों, हम आपस में प्रेम रखें; क्‍योंकि प्रेम परमेश्वर से है: और जो कोई प्रेम करता है, वह परमेश्वर से जन्मा है, और परमेश्वर को जानता है।
1Jn 4:8  जो प्रेम नहीं रखता, वह परमेश्वर को नहीं जानता है, क्‍योंकि परमेश्वर प्रेम है।
1Jn 4:9   जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, वह इस से प्रगट हुआ, कि परमेश्वर ने अपने एकलौते पुत्र को जगत में भेजा है, कि हम उसके द्वारा जीवन पाएं।
1Jn 4:10 प्रेम इस में नहीं कि हम ने परमेश्वर ने प्रेम किया, पर इस में है, कि उस ने हम से प्रेम किया; और हमारे पापों के प्रायश्‍चित्त के लिये अपने पुत्र को भेजा।
1Jn 4:11  हे प्रियों, जब परमेश्वर ने हम से ऐसा प्रेम किया, तो हम को भी आपस में प्रेम रखना चाहिए।
1Jn 4:12  परमेश्वर को कभी किसी ने नहीं देखा, यदि हम आपस में प्रेम रखें, तो परमेश्वर हम में बना रहता है, और उसका प्रेम हम में सिद्ध हो गया है।
1Jn 4:13 इसी से हम जानते हैं, कि हम उस में बने रहते हैं, और वह हम में; क्‍योंकि उस ने अपने आत्मा में से हमें दिया है।
1Jn 4:14  और हम ने देख भी लिया और गवाही देते हैं, कि पिता ने पुत्र को जगत का उद्धारकर्ता करके भेजा है।
1Jn 4:15  जो कोई यह मान लेता है, कि यीशु परमेश्वर का पुत्र है: परमेश्वर उस में बना रहता है, और वह परमेश्वर में।
1Jn 4:16  और जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, उस को हम जान गए, और हमें उस की प्रतीति है; परमेश्वर प्रेम है: और जो प्रेम में बना रहता है, वह परमेश्वर में बना रहता है; और परमेश्वर उस में बना रहता है।
1Jn 4:17 इसी से प्रेम हम में सिद्ध हुआ, कि हमें न्याय के दिन हियाव हो; क्‍योंकि जैसा वह है, वैसे ही संसार में हम भी हैं।
1Jn 4:18 प्रेम में भय नहीं होता, वरन सिद्ध प्रेम भय को दूर कर देता है, क्‍योंकि भय से कष्‍ट होता है, और जो भय करता है, वह प्रेम में सिद्ध नहीं हुआ।
1Jn 4:19  हम इसलिये प्रेम करते हैं, कि पहिले उस ने हम से प्रेम किया।
1Jn 4:20 यदि कोई कहे, कि मैं परमेश्वर से प्रेम रखता हूं, और अपने भाई से बैर रखे, तो वह झूठा है: क्‍योंकि जो अपने भाई से, जिसे उस ने देखा है, प्रेम नहीं रखता, तो वह परमेश्वर से भी जिसे उस ने नहीं देखा, प्रेम नहीं रख सकता।
1Jn 4:21  और उस से हमें यह आज्ञा मिली है, कि जो कोई अपने परमेश्वर से प्रेम रखता है, वह अपने भाई से भी प्रेम रखे।
एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों १-३ 
  • लूका ४:१-३०

Monday, March 26, 2012

आदर के योग्य

   एक राष्ट्रीय फुटबाल प्रतियोगिता के आरंभ में, खेल आरंभ होने से ठीक पहले कुर्ट वार्नर को उस वर्ष के सबसे अच्छे फुटबाल खिलाड़ी होने के लिए सम्मानित किया गया और पुरुस्कार दिया गया। यह वह सम्मान और पुरुस्कार था जो ना केवल खेल मैदान में उत्तम खेल के लिए वरन खेल मैदाने से बाहर अच्छे व्यवहार और समाज सेवा में किए गए प्रयासों के आधार पर दिया जाता है। पुरुस्कार ग्रहण करते समय कुर्ट ने, जो एक समर्पित मसीही विश्वासी भी है, कहा: "मैं नतमस्तक हूँ, परमेश्वर ने मुझे ऐसा अद्भुत जीवन दिया है जो दुसरों को प्रभावित करता है। मिल सकने वाले सभी सम्मानों और पुरुस्कारों में यह सम्मान और पुरुस्कार अलग ही स्थान रखता है, क्योंकि जिस बात का यह प्रतीक है, वह अनू्ठी है।" वह पुरुस्कार और सम्मान दूसरों के प्रति समर्पित होने और दूसरों के लिए उपयोगी होने के लिए था।

   जो दूसरों की सेवा करते हैं उनको सम्मानित करना कोई नई बात नहीं है। परमेश्वर के वचन बाइबल में भी इस का कई स्थानों पर वर्णन है। प्रेरित पौलुस ने फिलिप्पियों को लिखी अपनी पत्री में उन्हें स्मरण कराया कि जिन्होंने मसीह यीशु की सेवा के लिए अपने आप को समर्पित किया है उनका आदर करें। उसने उन्हें एक मसीही सेवक इपफ्रुदीतुस का स्मरण कराया, जिसने अपनी जान पर खेल कर मसीही विश्वासियों और फिलिप्पी के निवासियों की सेवा करी थी; और कहा के ऐसे सेवकों को सदा सम्मान और आदर की दृष्टि से देखें (फिलिप्पियों २:२९, ३०)। स्पष्ट है कि जब भी हम उन लोगों के बारे में ध्यान करें जो हमारे उद्धारकर्ता प्रभु यीशु की सेवाकाई में लगे हैं तो उन्हें अपने आदर और प्रशंसा तथा प्रोत्साहन का पात्र भी जाने।

   क्यों ना आज उन सेवकों को स्मरण करें जिन्होंने आपके लिए सेवकाई की है और उन्हें आदर दें, उन्हें अपना आभार प्रकट करें और धन्यवाद दें। - बिल क्राउडर


जब हम उनका आदर करते हैं जो परमेश्वर की सेवा करते हैं, तो हम परमेश्वर का भी आदर करते हैं।

इसलिये तुम प्रभु में उस से बहुत आनन्‍द के साथ भेंट करना, और ऐसों का आदर किया करना। क्‍योंकि वही मसीह के काम के लिये अपने प्राणों पर जोखिम उठा कर मरने के निकट हो गया था... - फिलिप्पियों २:२९, ३०

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों २:१९-३०
Php 2:19  मुझे प्रभु यीशु में आशा है, कि मैं तीमुथियुस को तुम्हारे पास तुरन्‍त भेजूंगा, ताकि तुम्हारी दशा सुनकर मुझे शान्‍ति मिले।
Php 2:20  क्‍योंकि मेरे पास ऐसे स्‍वाभाव का कोई नहीं, जो शुद्ध मन से तुम्हारी चिन्‍ता करे।
Php 2:21  क्‍योंकि सब अपने स्‍वार्थ की खोज में रहते हैं, न कि यीशु मसीह की।
Php 2:22   पर उसको तो तुम ने परखा और जान भी लिया है, कि जैसा पुत्र पिता के साथ करता है, वैसा ही उस ने सुसमाचार के फैलाने में मेरे साथ परिश्रम किया।
Php 2:23  सो मुझे आशा है, कि ज्योंही मुझे जान पड़ेगा कि मेरी क्‍या दशा होगी, त्योंही मैं उसे तुरन्‍त भेज दूंगा।
Php 2:24   और मुझे प्रभु में भरोसा है, कि मैं आप भी शीघ्र आऊंगा।
Php 2:25   पर मैं ने इपफ्रुदीतुस को जो मेरा भाई, और सहकर्मी और संगी योद्धा और तुम्हारा दूत, और आवश्यक बातों में मेरी सेवा टहल करने वाला है, तुम्हारे पास भेजना अवश्य समझा।
Php 2:26  क्‍योंकि उसका मन तुम सब में लगा हुआ था, इस कारण वह व्याकुल रहता था क्‍योंकि तुम ने उस की बीमारी का हाल सुना था।
Php 2:27  और निश्‍चय वह बीमार तो हो गया था, यहां तक कि मरने पर था, परन्‍तु परमेश्वर ने उस पर दया की; और केवल उस ही पर नहीं, पर मुझ पर भी, कि मुझे शोक पर शोक न हो।
Php 2:28  इसलिये मैं ने उसे भेजने का और भी यत्‍न किया कि तुम उस से फिर भेंट करके आनन्‍दित हो जाओ और मेरा शोक घट जाए।
Php 2:29  इसलिये तुम प्रभु में उस से बहुत आनन्‍द के साथ भेंट करना, और ऐसों का आदर किया करना।
Php 2:30  क्‍योंकि वही मसीह के काम के लिये अपने प्राणों पर जोखिम उठाकर मरने के निकट हो गया था, ताकि जो घटी तुम्हारी ओर से मेरी सेवा में हुई, उसे पूरा करे।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू २२-२४ 
  • लूका ३

Sunday, March 25, 2012

और बेहतर

   पहले कैंसर फिर उसके कठिन इलाज से पास्टर डैन बहुत थक गए थे। अस्पताल में २ सप्ताह के इलाज के बाद अब वे अपने घर वापस जाने की राह देख रहे थे। घर जाने की इस प्रतीक्षा के समय के अपने एक ब्लॉग पोस्ट में उन्होंने लिखा: "आज पहले से बहुत बेहतर है,...अद्भुत बात है कि शरीर में पानी की मात्रा के ठीक होने से कितना फर्क पड़ता है,...इस सप्ताहांत घर जाकर आगे का इलाज वहीं चलाने की प्रतीक्षा में हूँ।"

   पास्टर डैन अपने घर तो पहुँचे, लेकिन कुछ ही दिनों में उनकी शारीरिक यात्रा भी समाप्त हो गई और वे अपने परमेश्वर के पास चले गए जिससे वे अपनी सारी देह और प्राण से प्रेम करते थे। बीमारी से उनकी देह चाहे कितनी भी कमज़ोर क्यों न हो गई हो, लेकिन उनकी आत्मा कभी कमज़ोर नहीं पड़ी, अन्त तक सामर्थी रही।
   उनकी मृत्यु के कुछ दिन पश्चात जब मैंने उनका ब्लॉग खोला तो उनके शब्द "पहले से बहुत बेहतर" जैसे मेरे सामने आकर खड़े हो गए। पढ़ते समय मेरी आँखों में आँसू थे लेकिन चेहरे पर मुस्कान थी; मैं भी जानती थी कि अब अपने परमेश्वर के साथ, पास्टर डैन, फिलिप्पियों १:२३ के समान, "पहले से बहुत बेहतर" स्थान में और दशा में हैं।

   हम सब मसीही विश्वासी एक न एक दिन उस "पहले से बहुत बेहतर" स्थान पर जाएंगे; ऐसा स्थान जिसके लिए हमारे परमेश्वर पिता ने हमसे वायदा किया है कि: "वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं" (प्रकाशितवाक्य २१:४)।

   इस पार्थिव जीवन से आगे भी एक जीवन है। वह जीवन अनन्त काल का है, वहां शरीर और समय-काल की सीमाएं नहीं हैं, और उस जीवन को बिताने के लिए केवल दो ही स्थान हैं, उनमें से एक का चुनाव प्रत्येक जन को यहीं इस