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Saturday, March 31, 2012

क्षमा का सौन्दर्य

   लैरी और मेरी गेर्बेन्स पीछले १० वर्षों से परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु द्वारा लूका १५ में दिए गए "उड़ाऊ पुत्र" के दृष्टांत से संबंधित कलाकृतियों का संग्रह कर रहे हैं। उनके संग्रह में रेंब्रां और अन्य विख्यात चित्रकारों तथा कलाकरों की कृतियाँ मौजूद हैं जो इस दृष्टांत के विभिन्न पहलुओं पर आधारित हैं। जो कला संग्रह के रूप में आरंभ हुआ था, अब गेर्बेन्स दंपति के लिए प्रभु की सेवकाई का माध्यम बन गया है।

   गेर्बेन्स दंपति ने अपना यह संग्रह एक स्थानीय कॉलेज में प्रदर्शनी के लिए लगा रखा है। लैरी का कहना है कि, "कलाकारों ने हमारी सेवा करी है, हम चाहते हैं कि उनकी कलाकृतियाँ दुसरों की भी सेवा करें।"

   जब मैं उनकी प्रदर्शनी को देखती जा रही थी, मुझे उस उड़ाऊ पुत्र के मन की गहराईयों की आवश्यक्ता, उसके सच्चे पश्चाताप और उसके पिता द्वारा उसे क्षमा किए जाने की सुन्दरता को विभिन्न कलाकृतियों में व्यक्त देखा जिसने मेरे दिल को छू लिया।

   इस दृष्टांत के इस पुत्र के समान, जिसके पास अपने जीवन के लिए अपने पिता की इच्छा से भिन्न योजनाएं थीं और जिन्हें वह किसी भी कीमत पर पूरा करने के लिए ढीठ था, हम सब भी ढीठ रहे हैं। हम सब ने अपने परमेश्वर पिता से मूँह मोड़कर अपने ही मार्ग ले लिए हैं (रोमियों ३:१०-१२)। किंतु उस दृष्टांत के पिता के समान ही हमारा परमेश्वर पिता पश्चाताप के साथ लौट के आने वाले हर जन को क्षमा करने को तैयार बैठा है, प्रतीक्षा में है।

   यदि आप भी सच्चे पश्चाताप के साथ उस सच्चे परमेश्वर पिता को हृदय की गहराईयों से पुकारेंगे, "पिता जी मैं ने स्‍वर्ग के विरोध में और तेरी दृष्‍टि में पाप किया है" (लूका १५:१८), तो आप भी उसकी क्षमा के सौन्दर्य को देखने और अनुभव करने पाएंगे।

   यदि आज आप उस सच्चे परमेश्वर से दूर जाकर खड़े हैं, तो आज और अभी उसके पास लौट आएं; वह आपकी प्रतीक्षा में है। उसके प्रेम और क्षमा के आनन्द को स्वयं अनुभव कर के देखें। - ऐनी सेटास


जब परमेश्वर क्षमा करता है तो साथ ही वह पाप का दोष भी हटा देता है और आत्मा को भी बहाल कर देता है।

...वह अभी दूर ही था, कि उसके पिता ने उसे देखकर तरस खाया, और दौड़कर उसे गले लगाया, और बहुत चूमा। - लूका १५:२०
बाइबल पाठ: लूका १५:११-२४
Luk 15:11  फिर उस ने कहा, किसी मनुष्य के दो पुत्र थे।
Luk 15:12  उन में से छुटके ने पिता से कहा कि हे पिता संपत्ति में से जो भाग मेरा हो, वह मुझे दे दीजिए। उस ने उन को अपनी संपत्ति बांट दी।
Luk 15:13  और बहुत दिन न बीते थे कि छुटका पुत्र सब कुछ इकट्ठा करके एक दूर देश को चला गया और वहां कुकर्म में अपनी संपत्ति उड़ा दी।
Luk 15:14  जब वह सब कुछ खर्च कर चुका, तो उस देश में बड़ा अकाल पड़ा, और वह कंगाल हो गया।
Luk 15:15  और वह उस देश के निवासियों में से एक के यहां जा पड़ा : उस ने उसे अपने खेतों में सूअर चराने के लिये भेजा।
Luk 15:16 और वह चाहता था, कि उन फलियों से जिन्‍हें सूअर खाते थे अपना पेट भरे; और उसे कोई कुछ नहीं देता था।
Luk 15:17  जब वह अपने आपे में आया, तब कहने लगा, कि मेरे पिता के कितने ही मजदूरों को भोजन से अधिक रोटी मिलती है, और मैं यहां भूखा मर रहां हूं।
Luk 15:18 मैं अब उठ कर अपने पिता के पास जाऊंगा और उस से कहूंगा कि पिता जी मैं ने स्‍वर्ग के विरोध में और तेरी दृष्‍टि में पाप किया है।
Luk 15:19  अब इस योग्य नहीं रहा कि तेरा पुत्र कहलाऊं, मुझे अपने एक मजदूर की नाईं रख ले।
Luk 15:20  तब वह उठ कर, अपने पिता के पास चला: वह अभी दूर ही था, कि उसके पिता ने उसे देख कर तरस खाया, और दौड़ कर उसे गले लगाया, और बहुत चूमा।
Luk 15:21  पुत्र न उस से कहा; पिता जी, मैं ने स्‍वर्ग के विरोध में और तेरी दृष्‍टि में पाप किया है, और अब इस योग्य नहीं रहा, कि तेरा पुत्र कहलाऊं।
Luk 15:22  परन्‍तु पिता ने अपने दासों से कहा; झट अच्‍छे से अच्‍छा वस्‍त्र निकाल कर उसे पहिनाओ, और उसके हाथ में अंगूठी, और पांवों में जूतियां पहिनाओ।
Luk 15:23  और पला हुआ बछड़ा लाकर मारो ताकि हम खांए और आनन्‍द मनावें।
Luk 15:24  क्‍योंकि मेरा यह पुत्र मर गया था, फिर जी गया है : खो गय था, अब मिल गया है: और वे आनन्‍द करने लगे।
एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों ११-१२ 
  • लूका ६:१-२६

Friday, March 30, 2012

राज्य और राज

   १९७७ में १५ वर्षीय केविन बौह और उसके एक और किशोर मित्र ने अपने मनोरंजन के लिए अपना ही एक राज्य बनाने का निर्णय लिया। उन्होंने एक नक्शा बनाया, एक झंडा बनाया और अपने राज्य में चलने वाले पैसे भी छपवाए; और मोलोशिया गणतंत्र की स्थापना कर ली। आज भी केविन बौह अपने छोटे से राष्ट्र को चलाते हैं, उसी उद्देश्य से जिसके साथ वह स्थापित किया गया - केवल अपने मनोरंजन के लिए। जब एक पत्रकार ने नेवाडा प्रांत में उनके उस १.३ एकड़ में फैले राज्य का दौरा किया, तो केविन ने उसे आश्वासन दिया कि वह अमेरिका को अपने सभी कर देते हैं, जिन्हें वे अमेरिका को दी गई "विदेशी सहायता" कहते हैं। केविन बौह ने माना कि यह सब केवल उनके मनोरंजन का साधन है, उनके व्यक्तिगत आनन्द के लिए ही है।

   हम में से शायद ही कोई होगा जो इस प्रकार का कोई सांसारिक राज्य अपने लिए बनाएगा, किंतु हम सब अपने अन्दर, अपने मन में एक राज्य बनाए रहते हैं, जिसपर किसका राज होगा, इसका निर्णय भी हम ही करते हैं। जो हमारे मन के राज्य पर राज करता है, वही हमारे जीवन को भी निर्देषित करता है और हमारे जीवनों में प्रगट होता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पतरस ने लिखा: "पर मसीह को प्रभु जानकर अपने अपने मन में पवित्र समझो..." (१ पतरस ३:१५), अर्थात अपने अपने मन पर यीशु ही को अपना प्रभु मानो, उस ही को अपने मन पर राज करने दो।

   हम सबके अन्दर एक शक्ति है जो हमारे जीवनों को नियंत्रित करना चाहती है, हमें अपनी मन-मर्ज़ी करने के लिए उकसाती रहती है; चाहे वह हमारे मन का एक छोटा सा कोना ही हो जिसमें हम अपनी आत्मिक स्वतंत्रता अनुभव करना चाहते हैं और जहाँ हम किसी अन्य को बिलकुल भी जवाबदेह होना नहीं चाहते।

   किंतु वास्तविक स्वतंत्रता अपने मन को संपूर्णतः प्रभु यीशु के राज के आधीन कर देने में ही है, क्योंकि जहाँ प्रभु यीशु का राज है वहाँ उसकी शांति है, वहाँ भय नहीं है, वहाँ पवित्रता है, वहाँ उसकी सामर्थ है, वहाँ सर्वशक्तिमान द्वारा निर्देषित सामर्थी जीवन है।

   आपके मन के राज्य पर कौन राज करता है? क्या प्रभु यीशु? - डेविड मैक्कैसलैंड


जब यीशु हमारे जीवन का प्रभु होगा, तो हमारे पाँव उसके मार्गों पर चलेंगे।

पर मसीह को प्रभु जान कर अपने अपने मन में पवित्र समझो... - १ पतरस ३:१५
बाइबल पाठ: १ पतरस ३:८-१८
1Pe 3:8  निदान, सब के सब एक मन और कृपामय और भाईचारे की प्रीति रखने वाले, और करूणामय, और नम्र बनो।
1Pe 3:9 बुराई के बदले बुराई मत करो, और न गाली के बदले गाली दो; पर इस के विपरीत आशीष ही दो: क्‍योंकि तुम आशीष के वारिस होने के लिये बुलाए गए हो।
1Pe 3:10 क्‍योंकि जो कोई जीवन की इच्‍छा रखता है, और अच्‍छे दिन देखना चाहता है, वह अपनी जीभ को बुराई से, और अपने होंठों को छल की बातें करने से रोके रहे।
1Pe 3:11 वह बुराई का साथ छोड़े, और भलाई की करे; वह मेल मिलाप को ढूंढ़े, और उस के यत्‍न में रहे।
1Pe 3:12 क्‍योंकि प्रभु की आंखे धमिर्यों पर लगी रहती हैं, और उसके कान उन की विनती की ओर लगे रहते हैं, परन्‍तु प्रभु बुराई करने वालों के विमुख रहता है।
1Pe 3:13  और यदि तुम भलाई करने में उत्तेजित रहो तो तुम्हारी बुराई करने वाला फिर कौन है?
1Pe 3:14  और यदि तुम धर्म के कारण दुख भी उठाओ, तो धन्य हो; पर उन के डराने से मत डरो, और न घबराओ।
1Pe 3:15  पर मसीह को प्रभु जान कर अपने अपने मन में पवित्र समझो, और जो कोई तुम से तुम्हारी आशा के विषय में कुछ पूछे, तो उसे उत्तर देने के लिये सर्वदा तैयार रहो, पर नम्रता और भय के साथ।
1Pe 3:16 और विवेक भी शुद्ध रखो, इसलिये कि जिन बातों के विषय में वे जो तुम्हारे मसीही अच्‍छे चालचलन का अपमान करते हैं लज्ज़ित हों।
1Pe 3:17 क्‍योंकि यदि परमेश्वर की यही इच्‍छा हो, कि तुम भलाई करने के कारण दुख उठाओ, तो यह बुराई करने के कारण दुख उठाने से उत्तम है।
1Pe 3:18 इसलिये कि मसीह ने भी, अर्थात अधमिर्यों के लिये धर्मी ने पापों के कारण एक बार दुख उठाया, ताकि हमें परमेश्वर के पास पहुंचाए: वह शरीर के भाव से तो घात किया गया, पर आत्मा के भाव से जिलाया गया।
एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों ९-१० 
  • लूका ५:१७-३९

Thursday, March 29, 2012

धन्यवादी

   हमारे मानव-संसाधन दल ने RBC Ministries में परस्पर संबंधों को प्रगाढ़ करने और उत्साहित करने के लिए एक कार्यक्रम बनाया है जो प्रभावी है, प्रोत्साहित करता है और कृतज्ञकता पर आधारित है।

   जब भी कोई कर्मचारी किसी दूसरे कर्मचारी को कोई अच्छा कार्य करते देखता है, तो वह हमारे मानव-संसाधन द्ल द्वारा बनाया गया एक विशेष धन्यवादी कार्ड लेकर अपनी प्रशंसा और प्रोत्साहन के कुछ शब्द लिखकर उसे दे देता है। जब हम प्रातः अपने अपने कार्य पर पहुँचते हैं और अपने लिए कोई धन्यवाद का कार्ड पाते हैं तो यह एक बहुत सुखद अनुभव होता है, प्रोत्साहित करता है और आपसी सम्बंधों को सुधारता है।

   क्या आपको नहीं लगता कि किसी अच्छे प्रकार से किए गए कार्य के लिए प्रशंसा मिलना भली बात है? क्या दूसरों से गर्मजोशी के साथ मिला धन्यवाद और प्रोत्साहन आपके दिन को संवार नहीं देता? क्या यह धन्यवाद, उस धन्यवाद देने वाले के साथ आपके संबंधों को कुछ बेहतर नहीं कर देता?

   धन्यवाद मिलना हर किसी को पसन्द आता है, परमेश्वर को भी। हमारा परमेश्वर पिता, उसके प्रति हमारे धन्यवाद की अभिव्यक्तियों से प्रसन्न होता है। यह उसकी इच्छा भी है कि उसके बच्चे उसके धन्यवादी रहें। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने अपनी पत्रियों में लिखा: "हर बात में धन्यवाद करो: क्‍योंकि तुम्हारे लिये मसीह यीशु में परमेश्वर की यहीं इच्‍छा है" (१ थिस्सलुनीकियों ५:१८); और परमेश्वर के प्रति धन्यावादी होने को परमेश्वर की शांति प्राप्त करने का माध्यम बताया "किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्‍तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और विनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं। तब परमेश्वर की शान्‍ति, जो समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सु्रक्षित रखेगी" (फिलिप्पियों ४:६, ७)।

   धन्यवाद वह कुंजी है जो बेहतर संबंधों के लिए द्वार खोलती है, मनुष्यों और परमेश्वर दोनो के साथ। धन्यवादी होने के अवसर ढूँढ़ते रहें, अपने सम्बंधों को बेहतर करते रहें, परमेश्वर से भी और मनुष्यों से भी।

   परमेश्वर का आदर करने, उसकी आराधना करने का सबसे बुनियादी तरीका है हर बात और हर परिस्थिति में उसके प्रति धन्यवादी होना और धन्यवादी बने रहना। - डेव ब्रैनन


परमेश्वर को ग्रहणयोग्य आराधना वही है जो उसके प्रति धन्यवादी और समर्पित मन से निकली हो।

यहोवा का धन्यवाद करो, उस से प्रार्थना करो, देश देश के लोगों में उसके कामों का प्रचार करो! - भजन १०५:१
बाइबल पाठ: भजन १०५:१-५
Psa 105:1  यहोवा का धन्यवाद करो, उस से प्रार्थना करो, देश देश के लोगों में उसके कामों का प्रचार करो!
Psa 105:2  उसके लिये गीत गाओ, उसके लिये भजन गाओ, उसके सब आश्चर्यकर्मों पर ध्यान करो!
Psa 105:3  उसके पवित्र नाम की बड़ाई करो; यहोवा के खोजियों का हृदय आनन्दित हो!
Psa 105:4  यहोवा और उसकी सामर्थ को खोजो, उसके दर्शन के लगातार खोजी बने रहो!
Psa 105:5  उसके किए हुए आश्चर्यकर्म स्मरण करो, उसके चमत्कार और निर्णय स्मरण करो!
एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों ७-८ 
  • लूका ५:१-१६

Wednesday, March 28, 2012

परिपक्व प्रेम

   एक जवान ने अपने पिता से कहा, "पिताजी, मैं शादी करने जा रहा हूँ।" पिता ने पूछा, "रॉन, तुम कैसे जानने पाए कि तुम शादी के लिए तैयार हो? क्या तुम्हें किसी से प्रेम हुआ है?" रॉन ने उत्तर दिया, "जी हाँ, निःसन्देह ही, मुझे प्रेम हुआ है।" पिता ने फिर पूछा, "रॉन, तुमने यह कैसे जाना कि तुम्हें वास्तव में प्रेम हुआ है?" रॉन का उत्तर था, "पिताजी कल रात जब मैं अपनी प्रेमिका को चूमकर उससे विदा ले रहा था, तो उसके कुत्ते ने मुझे टांग पर काट लिया, किंतु उस काटे का दर्द मुझे वापस घर पहुँचने के बाद ही अनुभव हुआ!"

   रॉन के अन्दर वह प्रेम जैसी भावना तो है, किंतु परिपक्वता नहीं। अभी रॉन को परिपक्व होने और प्रेम की वास्तविकता और गहराई को ठीक से समझने की बहुत आवश्यक्ता है। वर्नन ग्राउंड्स ने, जो Our Daily Bread के लिए लेखक रहे हैं और जिनका ७० वर्ष से भी अधिक का वैवाहिक जीवन का अनुभव है, प्रेम के परिपक्व होने के लिए कुछ बातों पर ध्यान रखने और करने के बारे में बताया:
  •    मसीह यीशु में होकर मिलने वाले परमेश्वर के प्रेम के बारे में मनन करो: इस बात पर ध्यान करो कि कैसे उसने आपके लिए अपने जीवन को बलिदान किया। उसकी जीवनी को परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखे सुसमाचारों में पढ़ो और उसका धन्यवाद करो।
  •    परमेश्वर के प्रेम के लिए प्रार्थना करो: परमेश्वर से प्रार्थना करो कि वह अपने प्रेम की समझ आपको दे, और आपको सिखाए कि उस प्रेम को अपने जीवन में, अपनी रिश्तेदारियों में और अपने जीवन साथी के साथ कैसे प्रगट किया जाना चाहिए (१ कुरिन्थियों १३)।
  •    परमेश्वर के प्रेम का अभ्यास करो: जैसे परमेश्वर ने अपने आप को आप के लिए दे दिया, आप भी अपने आप को दुसरों के लिए समर्पित कर दें। एक नवविवाहित पति ने मुझ से कहा, "मेरी ज़िम्मेदारी यह है कि मैं अपनी पत्नी के लिए जीवन सुगम बना सकूँ।" प्रेम के अभ्यास का एक और भी पहलू है, जो आसान नहीं है; वह है एक दुसरे को परमेश्वर की इच्छानुसार जीवन व्यतीत करने के लिए उभारते रहना, चुनौती देते रहना।

   जब हम सच्चे प्रेम पर मनन करेंगे, उसके लिए प्रार्थना करेंगे, उसका अभ्यास अपने जीवनों में करेंगे, तो वह प्रेम हमारे जीवनों में परिपक्व होगा, कार्यकारी होगा, और हमारे कुछ कहे बिना ही हमारे जीवन से प्रगट होगा। - ऐनी सेटास


जैसे जैसे मसीह का प्रेम हम में बढता जाता है, वह हमारे जीवनों से वह प्रेम प्रवाहित भी होता जाता है।
 
वह [प्रेम] अनरीति नहीं चलता, वह अपनी भलाई नहीं चाहता, झुंझलाता नहीं, बुरा नहीं मानता। - १ कुरिन्थियों १३:५
 
बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों १३
1Co 13:1  यदि मैं मनुष्यों, और सवर्गदूतों की बोलियां बोलूं, और प्रेम न रखूं, तो मैं ठनठनाता हुआ पीतल, और झंझनाती हुई झांझ हूं।
1Co 13:2 और यदि मैं भविष्यद्वाणी कर सकूं, और सब भेदों और सब प्रकार के ज्ञान को समझूं, और मुझे यहां तक पूरा विश्वास हो, कि मैं पहाड़ों को हटा दूं, परन्‍तु प्रेम न रखूं, तो मैं कुछ भी नहीं।
1Co 13:3  और यदि मैं अपनी सम्पूर्ण संपत्ति कंगालों को खिला दूं, या अपनी देह जलाने के लिये दे दूं, और प्रेम न रखूं, तो मुझे कुछ भी लाभ नहीं।
1Co 13:4 प्रेम धीरजवन्‍त है, और कृपाल है; प्रेम डाह नहीं करता, प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं।
1Co 13:5  वह अनरीति नहीं चलता, वह अपनी भलाई नहीं चाहता, झुंझलाता नहीं, बुरा नहीं मानता।
1Co 13:6 कुकर्म से आनन्‍दित नहीं होता, परन्‍तु सत्य से आनन्‍दित होता है।
1Co 13:7  वह सब बातें सह लेता है, सब बातों की प्रतीति करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता है।
1Co 13:8 प्रेम कभी टलता नहीं; भविष्यद्वाणियां हों, तो समाप्‍त हो जाएंगी, भाषाएं हो तो जाती रहेंगी, ज्ञान हो, तो मिट जाएगा।
1Co 13:9 क्‍योंकि हमारा ज्ञान अधूरा है, और हमारी भविष्यद्वाणी अधूरी।
1Co 13:10 परन्‍तु जब सवर्सिद्ध आएगा, तो अधूरा मिट जाएगा।
1Co 13:11 जब मैं बालक था, तो मैं बालकों की नाईं बोलता था, बालकों का सा मन था बालकों की सी समझ थी; परन्‍तु सियाना हो गया, तो बालकों की बातें छोड़ दीं।
1Co 13:12 अब हमें दर्पण में धुंधला सा दिखाई देता है; परन्‍तु उस समय आमने साम्हने देखेंगे, इस समय मेरा ज्ञान अधूरा है, परन्‍तु उस समय ऐसी पूरी रीति से पहिचानूंगा, जैसा मैं पहिचाना गया हूं।
1Co 13:13  पर अब विश्वास, आशा, प्रेम ये तीनों स्थाई हैं, पर इन में सब से बड़ा प्रेम है।
 
एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों ४-६ 
  • लूका ४:३१-४४

Tuesday, March 27, 2012

परमेश्वर के प्रति प्रेम

   अपने वैवाहिक जीवन के आरंभिक समय में ही मैंने जान लिया था कि मेरी पत्नि के हृदय तक पहुँचने का सबसे अच्छा मार्ग कौन सा है। दिन भर के कार्य के बाद एक रात मैं एक दर्जन लाल गुलाबों का गुलदस्ता लिए हुए घर पहुँचा, द्वार खोलने की घंटी बजाने के बाद मैंने गुलदस्ता अपनी पीठ के पीछे छुपा लिया, और फिर अन्दर आकर वह गुलदस्ता अपनी पत्नि के हाथों में रख दिया। उसने वे फूल लिए, उन्हें सूंघा, मुझे धन्यवाद दिया और उन्हें लेकर रसोई में चली गई। उसकी प्रतिक्रिया मेरी उम्मीद से कम थी, उसके व्यवहार में मुझे किसी बात की घटी खली।

   यह मेरे लिए एक पाठ था कि मेरी पत्नि के लिए फूलों का गुलदस्ता प्रेम प्रकट करने का प्रभावी माध्यम नहीं था। उसने मेरी भेंट की प्रशंसा करी, उसके लिए धन्यवाद भी किया किंतु मन ही मन वह उनकी कीमत और घर चलाने के खर्च में उससे पड़ने वाले प्रभाव के बारे में सोच रही थी; क्योंकि विद्यार्थी एवं नव-दम्पति होना खर्च पर पाबंदियां तो लगाता ही है। फिर जैसे मैं ने सीखा, मेरी पत्नि के लिए मेरा उसको दिया गया समय और उसका रखा गया ध्यान बहुत अधिक महत्व रखता था। जब भी मैं उसके साथ होते हुए अपना ध्यान किसी अन्य बात में बंटाए बिना उसकी ओर लगाए रखता हूँ, तो इतना ही उसे अपने आप को मेरे प्रेम का पात्र होने के जताने के लिए काफी है।

   क्या कभी आपने इस पर विचार किया कि परमेश्वर क्या चाहता है कि हम उसके प्रति अपने प्रेम की अभिव्यक्ति कैसे करें? इस संबंध में हमें एक इशारा १ यूहन्ना ४:२१ में मिलता है: "...जो कोई अपने परमेश्वर से प्रेम रखता है, वह अपने भाई से भी प्रेम रखे।" कैसी साधारण सी बात है, जब हम मसीह यीशु में अपने भाई-बहिनों के प्रति प्रेम रखते हैं, तो यही इस बात को भी दिखाता है कि हम परमेश्वर से भी प्रेम रखते हैं। जब हमारा आपसी प्रेम ऊपरी दिखावा नहीं वरन वास्तविक होता है तो यह हमारे परमेश्वर पिता को भी प्रसन्न करता है।

   इसलिए सच्चे मन से आपस में अपने प्रेम को अभिव्यक्त करने के अवसरों की तलाश में रहें; यह अभिव्यक्ति परमेश्वेर के प्रति आपके प्रेम की भी अभिव्यक्ति होगी। - जो स्टोवेल


परमेश्वर के प्रति अपने प्रेम को दिखाने के लिए, आपस में प्रेम बाँटते रहें।
हे प्रियों, जब परमेश्वर ने हम से ऐसा प्रेम किया, तो हम को भी आपस में प्रेम रखना चाहिए। - १ यूहन्ना ४:११
 
बाइबल पाठ: १ यूहन्ना ४:७-२१
1Jn 4:7  हे प्रियों, हम आपस में प्रेम रखें; क्‍योंकि प्रेम परमेश्वर से है: और जो कोई प्रेम करता है, वह परमेश्वर से जन्मा है, और परमेश्वर को जानता है।
1Jn 4:8  जो प्रेम नहीं रखता, वह परमेश्वर को नहीं जानता है, क्‍योंकि परमेश्वर प्रेम है।
1Jn 4:9   जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, वह इस से प्रगट हुआ, कि परमेश्वर ने अपने एकलौते पुत्र को जगत में भेजा है, कि हम उसके द्वारा जीवन पाएं।
1Jn 4:10 प्रेम इस में नहीं कि हम ने परमेश्वर ने प्रेम किया, पर इस में है, कि उस ने हम से प्रेम किया; और हमारे पापों के प्रायश्‍चित्त के लिये अपने पुत्र को भेजा।
1Jn 4:11  हे प्रियों, जब परमेश्वर ने हम से ऐसा प्रेम किया, तो हम को भी आपस में प्रेम रखना चाहिए।
1Jn 4:12  परमेश्वर को कभी किसी ने नहीं देखा, यदि हम आपस में प्रेम रखें, तो परमेश्वर हम में बना रहता है, और उसका प्रेम हम में सिद्ध हो गया है।
1Jn 4:13 इसी से हम जानते हैं, कि हम उस में बने रहते हैं, और वह हम में; क्‍योंकि उस ने अपने आत्मा में से हमें दिया है।
1Jn 4:14  और हम ने देख भी लिया और गवाही देते हैं, कि पिता ने पुत्र को जगत का उद्धारकर्ता करके भेजा है।
1Jn 4:15  जो कोई यह मान लेता है, कि यीशु परमेश्वर का पुत्र है: परमेश्वर उस में बना रहता है, और वह परमेश्वर में।
1Jn 4:16  और जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, उस को हम जान गए, और हमें उस की प्रतीति है; परमेश्वर प्रेम है: और जो प्रेम में बना रहता है, वह परमेश्वर में बना रहता है; और परमेश्वर उस में बना रहता है।
1Jn 4:17 इसी से प्रेम हम में सिद्ध हुआ, कि हमें न्याय के दिन हियाव हो; क्‍योंकि जैसा वह है, वैसे ही संसार में हम भी हैं।
1Jn 4:18 प्रेम में भय नहीं होता, वरन सिद्ध प्रेम भय को दूर कर देता है, क्‍योंकि भय से कष्‍ट होता है, और जो भय करता है, वह प्रेम में सिद्ध नहीं हुआ।
1Jn 4:19  हम इसलिये प्रेम करते हैं, कि पहिले उस ने हम से प्रेम किया।
1Jn 4:20 यदि कोई कहे, कि मैं परमेश्वर से प्रेम रखता हूं, और अपने भाई से बैर रखे, तो वह झूठा है: क्‍योंकि जो अपने भाई से, जिसे उस ने देखा है, प्रेम नहीं रखता, तो वह परमेश्वर से भी जिसे उस ने नहीं देखा, प्रेम नहीं रख सकता।
1Jn 4:21  और उस से हमें यह आज्ञा मिली है, कि जो कोई अपने परमेश्वर से प्रेम रखता है, वह अपने भाई से भी प्रेम रखे।
एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों १-३ 
  • लूका ४:१-३०

Monday, March 26, 2012

आदर के योग्य

   एक राष्ट्रीय फुटबाल प्रतियोगिता के आरंभ में, खेल आरंभ होने से ठीक पहले कुर्ट वार्नर को उस वर्ष के सबसे अच्छे फुटबाल खिलाड़ी होने के लिए सम्मानित किया गया और पुरुस्कार दिया गया। यह वह सम्मान और पुरुस्कार था जो ना केवल खेल मैदान में उत्तम खेल के लिए वरन खेल मैदाने से बाहर अच्छे व्यवहार और समाज सेवा में किए गए प्रयासों के आधार पर दिया जाता है। पुरुस्कार ग्रहण करते समय कुर्ट ने, जो एक समर्पित मसीही विश्वासी भी है, कहा: "मैं नतमस्तक हूँ, परमेश्वर ने मुझे ऐसा अद्भुत जीवन दिया है जो दुसरों को प्रभावित करता है। मिल सकने वाले सभी सम्मानों और पुरुस्कारों में यह सम्मान और पुरुस्कार अलग ही स्थान रखता है, क्योंकि जिस बात का यह प्रतीक है, वह अनू्ठी है।" वह पुरुस्कार और सम्मान दूसरों के प्रति समर्पित होने और दूसरों के लिए उपयोगी होने के लिए था।

   जो दूसरों की सेवा करते हैं उनको सम्मानित करना कोई नई बात नहीं है। परमेश्वर के वचन बाइबल में भी इस का कई स्थानों पर वर्णन है। प्रेरित पौलुस ने फिलिप्पियों को लिखी अपनी पत्री में उन्हें स्मरण कराया कि जिन्होंने मसीह यीशु की सेवा के लिए अपने आप को समर्पित किया है उनका आदर करें। उसने उन्हें एक मसीही सेवक इपफ्रुदीतुस का स्मरण कराया, जिसने अपनी जान पर खेल कर मसीही विश्वासियों और फिलिप्पी के निवासियों की सेवा करी थी; और कहा के ऐसे सेवकों को सदा सम्मान और आदर की दृष्टि से देखें (फिलिप्पियों २:२९, ३०)। स्पष्ट है कि जब भी हम उन लोगों के बारे में ध्यान करें जो हमारे उद्धारकर्ता प्रभु यीशु की सेवाकाई में लगे हैं तो उन्हें अपने आदर और प्रशंसा तथा प्रोत्साहन का पात्र भी जाने।

   क्यों ना आज उन सेवकों को स्मरण करें जिन्होंने आपके लिए सेवकाई की है और उन्हें आदर दें, उन्हें अपना आभार प्रकट करें और धन्यवाद दें। - बिल क्राउडर


जब हम उनका आदर करते हैं जो परमेश्वर की सेवा करते हैं, तो हम परमेश्वर का भी आदर करते हैं।

इसलिये तुम प्रभु में उस से बहुत आनन्‍द के साथ भेंट करना, और ऐसों का आदर किया करना। क्‍योंकि वही मसीह के काम के लिये अपने प्राणों पर जोखिम उठा कर मरने के निकट हो गया था... - फिलिप्पियों २:२९, ३०

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों २:१९-३०
Php 2:19  मुझे प्रभु यीशु में आशा है, कि मैं तीमुथियुस को तुम्हारे पास तुरन्‍त भेजूंगा, ताकि तुम्हारी दशा सुनकर मुझे शान्‍ति मिले।
Php 2:20  क्‍योंकि मेरे पास ऐसे स्‍वाभाव का कोई नहीं, जो शुद्ध मन से तुम्हारी चिन्‍ता करे।
Php 2:21  क्‍योंकि सब अपने स्‍वार्थ की खोज में रहते हैं, न कि यीशु मसीह की।
Php 2:22   पर उसको तो तुम ने परखा और जान भी लिया है, कि जैसा पुत्र पिता के साथ करता है, वैसा ही उस ने सुसमाचार के फैलाने में मेरे साथ परिश्रम किया।
Php 2:23  सो मुझे आशा है, कि ज्योंही मुझे जान पड़ेगा कि मेरी क्‍या दशा होगी, त्योंही मैं उसे तुरन्‍त भेज दूंगा।
Php 2:24   और मुझे प्रभु में भरोसा है, कि मैं आप भी शीघ्र आऊंगा।
Php 2:25   पर मैं ने इपफ्रुदीतुस को जो मेरा भाई, और सहकर्मी और संगी योद्धा और तुम्हारा दूत, और आवश्यक बातों में मेरी सेवा टहल करने वाला है, तुम्हारे पास भेजना अवश्य समझा।
Php 2:26  क्‍योंकि उसका मन तुम सब में लगा हुआ था, इस कारण वह व्याकुल रहता था क्‍योंकि तुम ने उस की बीमारी का हाल सुना था।
Php 2:27  और निश्‍चय वह बीमार तो हो गया था, यहां तक कि मरने पर था, परन्‍तु परमेश्वर ने उस पर दया की; और केवल उस ही पर नहीं, पर मुझ पर भी, कि मुझे शोक पर शोक न हो।
Php 2:28  इसलिये मैं ने उसे भेजने का और भी यत्‍न किया कि तुम उस से फिर भेंट करके आनन्‍दित हो जाओ और मेरा शोक घट जाए।
Php 2:29  इसलिये तुम प्रभु में उस से बहुत आनन्‍द के साथ भेंट करना, और ऐसों का आदर किया करना।
Php 2:30  क्‍योंकि वही मसीह के काम के लिये अपने प्राणों पर जोखिम उठाकर मरने के निकट हो गया था, ताकि जो घटी तुम्हारी ओर से मेरी सेवा में हुई, उसे पूरा करे।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू २२-२४ 
  • लूका ३

Sunday, March 25, 2012

और बेहतर

   पहले कैंसर फिर उसके कठिन इलाज से पास्टर डैन बहुत थक गए थे। अस्पताल में २ सप्ताह के इलाज के बाद अब वे अपने घर वापस जाने की राह देख रहे थे। घर जाने की इस प्रतीक्षा के समय के अपने एक ब्लॉग पोस्ट में उन्होंने लिखा: "आज पहले से बहुत बेहतर है,...अद्भुत बात है कि शरीर में पानी की मात्रा के ठीक होने से कितना फर्क पड़ता है,...इस सप्ताहांत घर जाकर आगे का इलाज वहीं चलाने की प्रतीक्षा में हूँ।"

   पास्टर डैन अपने घर तो पहुँचे, लेकिन कुछ ही दिनों में उनकी शारीरिक यात्रा भी समाप्त हो गई और वे अपने परमेश्वर के पास चले गए जिससे वे अपनी सारी देह और प्राण से प्रेम करते थे। बीमारी से उनकी देह चाहे कितनी भी कमज़ोर क्यों न हो गई हो, लेकिन उनकी आत्मा कभी कमज़ोर नहीं पड़ी, अन्त तक सामर्थी रही।
   उनकी मृत्यु के कुछ दिन पश्चात जब मैंने उनका ब्लॉग खोला तो उनके शब्द "पहले से बहुत बेहतर" जैसे मेरे सामने आकर खड़े हो गए। पढ़ते समय मेरी आँखों में आँसू थे लेकिन चेहरे पर मुस्कान थी; मैं भी जानती थी कि अब अपने परमेश्वर के साथ, पास्टर डैन, फिलिप्पियों १:२३ के समान, "पहले से बहुत बेहतर" स्थान में और दशा में हैं।

   हम सब मसीही विश्वासी एक न एक दिन उस "पहले से बहुत बेहतर" स्थान पर जाएंगे; ऐसा स्थान जिसके लिए हमारे परमेश्वर पिता ने हमसे वायदा किया है कि: "वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं" (प्रकाशितवाक्य २१:४)।

   इस पार्थिव जीवन से आगे भी एक जीवन है। वह जीवन अनन्त काल का है, वहां शरीर और समय-काल की सीमाएं नहीं हैं, और उस जीवन को बिताने के लिए केवल दो ही स्थान हैं, उनमें से एक का चुनाव प्रत्येक जन को यहीं इसी पृथ्वी पर रहते हुए करना है। एक स्थान वह है जो प्रभु परमेश्वर यीशु मसीह ने अपने विश्वासियों के लिए तैयार किया है, जो परमेश्वर की उपस्थिति, संगति और मनुष्य की बुद्धि की समझ से बाहर परम आनन्द की बातों का स्थान है। दूसरा वह जो शैतान और उसके अनुयायियों के लिए तैयार किया गया है, वह परमेश्वर से दूर और मनुष्य की बुद्धि की समझ से बाहर परम पीड़ा और दुख का स्थान है। जिसने अब इस पृथ्वी पर प्रभु यीशु को ग्रहण करके उसके साथ बने रहने को स्वीकार नहीं किया, उसने स्वतः ही इस पार्थिव जीवन के बाद भी प्रभु यीशु के साथ होने के लिए भी इन्कार कर दिया है, और उसके लिए फिर वह दूसरा स्थान ही बचता है।

   क्या आपका चुनाव भी इस जीवन के बाद पास्टर डैन के समान उस "पहले से बहुत बेहतर" स्थान का ही है? - सिंडी हैस कैस्पर


स्वर्ग - वह स्थान जहां ना पीड़ा, ना अन्धकार, ना मृत्यु और ना आँसु हैं।

वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं। - प्रकाशितवाक्य २१:४

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य २१:१-८
Rev 21:1  फिर मैं ने नये आकाश और नयी पृथ्वी को देखा, क्‍योंकि पहिला आकाश और पहिली पृथ्वी जाती रही थी, और समुद्र भी न रहा।
Rev 21:2  फिर मैं ने पवित्र नगर नये यरूशलेम को स्‍वर्ग पर से परमेश्वर के पास से उतरते देखा, और वह उस दुल्हिन के समान थी, जो अपने पति के लिये सिंगार किए हो।
Rev 21:3  फिर मैं ने सिंहासन में से किसी को ऊंचे शब्‍द से यह कहते सुना, कि देख, परमेश्वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है; वह उन के साथ डेरा करेगा, और वे उसके लोग होंगे, और परमेश्वर आप उन के साथ रहेगा, और उन का परमेश्वर होगा।
Rev 21:4  और वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं।
Rev 21:5  और जो सिंहासन पर बैठा था, उस ने कहा, कि देख, मैं सब कुछ नया कर देता हूं: फिर उस ने कहा, कि लिख ले, क्‍योंकि ये वचन विश्वास के योग्य और सत्य हैं।
Rev 21:6  फिर उस ने मुझ से कहा, ये बातें पूरी हो गई हैं, मैं अलफा और ओमेगा, आदि और अन्‍त हूं: मैं प्यासे को जीवन के जल के सोते में से सेंतमेंत पिलाऊंगा।
Rev 21:7  जो जय पाए, वही उन वस्‍तुओं का वारिस होगा; और मैं उसका परमेश्वर होऊंगा, और वह मेरा पुत्र होगा।
Rev 21:8  पर डरपोकों, और अविश्वासियों, और घिनौनों, और हत्यारों, और व्यभिचारियों, और टोन्‍हों, और मूतिर्पूजकों, और सब झूठों का भाग उस झील में मिलेगा, जो आग और गन्‍धक से जलती रहती है: यह दूसरी मृत्यु है।
एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू १९-२१ 
  • लूका २:२५-५२

Saturday, March 24, 2012

सबसे बुरी संभावना

   जब मैं बाइबल स्कूल में पढ़ाता था तो कभी कभी यात्रा के समय अपनी ट्रेन की प्रतीक्षा करते समय, स्टेशन के एक होटल में बैठ कर विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं जांचने में समय व्यतीत करता था। मेरे समान अन्य यात्री भी वहां बैठकर आपने अपने काम में लगे ट्रेन की प्रतीक्षा कर रहे होते थे। ऐसे में एक सामन्य व्यवहार है कि बैठे यात्री दूसरे किसी यात्री की किसी बात पर अपनी प्रतिक्रिया नहीं देते, शांत रहते हैं। एक दिन ऐसे ही काम करते करते असावधानी में मैंने अपना कॉफी का भरा हुआ बड़ा कप अपने खुले हुए ब्रीफकेस में गिरा लिया और वे सारी उत्तर पुस्तिकाएं उस से खराब हो गईं। मेरे पास बैठा एक अन्य यात्री अपने आप को रोक नहीं सका और सुनाई दे सकने वाली आवाज़ में बोल उठा, "सबसे बुरी संभावना घटित हो ही गई!"

   उस यात्री की यह टिप्पणी तो एक अतिश्योक्ति थी, किंतु यह भी सच है कि हम में से हर एक जन किसी न किसी बात से अबसे अधिक डरता है; वह चाहे आर्थिक हानि हो, या परिवार के किसी सदस्य की हानि, या कैंसर जैसी कोई भयानक बिमारी या फिर कोई कठिनाई, इत्यादि। सबके मन में कुछ न कुछ रहता है जिस के घटित होने की आशंका हमारे मन में दुविधा उत्पन्न करती है।

   परमेशवर के वचन बाइबल में अय्युब की पुस्तक इन सबसे बुरी संभावनाओं के एक धर्मी व्यक्ति अय्युब के जीवन में घटित होने का वर्णन है। भयानक दुखों, असहनीय शारीरिक पीड़ाओं और समझ से बाहर परिस्थितियों में भी अय्युब ने परमेश्वर की भूमिका को सही रूप में समझा और कहा: "परन्तु वह जानता है, कि मैं कैसी चाल चला हूँ; और जब वह मुझे ता लेगा तब मैं सोने के समान निकलूंगा" (अय्युब २३:१०)। अय्युब के इस बुद्धिमानी से भरे कथन से हम दो बातें सीख सकते हैं: पहली यह कि हम जिससे सबसे अधिक आशंकित रहते हैं वही हमारे चरित्र कि परीक्षा और हमें सुधारने के लिए प्रयोग किया जा सकता है; और दूसरी यह कि हर परिस्थिति और परेशानी में परमेश्वर अपने बच्चों के साथ है और उस से पार निकल पाने के योग्य सामर्थ तथा सहायता देता है।

   प्रभु यीशु में विश्वास और पापों से पश्चाताप द्वारा परमेश्वर की संतान बनकर परमेश्वर से चिपटे रहें। वह सदा अपने वाय्दों में पक्का और अटल रहा है; उसने अपने बच्चों के पक्ष में होकर और सदैव उनकी भलाई ही के लिए कार्य करने का वायदा किया है, हमारी सबसे बुरी संभावना में भी। - डेनिस फिशर


जीवित परमेश्वर अपने बाचों के जीवन से भय निकालने में सक्षम है।

परन्तु वह जानता है, कि मैं कैसी चाल चला हूँ; और जब वह मुझे ता लेगा तब मैं सोने के समान निकलूंगा। - अय्युब २३:१०
बाइबल पाठ: अय्युब १:१-५,१३-२२
Job 1:1  ऊज़ देश में अय्यूब नाम एक पुरुष था; वह खरा और सीधा था और परमेश्वर का भय मानता और बुराई से परे रहता था।
Job 1:2  उसके सात बेटे और तीन बेटियां उत्पन्न हुई।
Job 1:3  फिर उसके सात हजार भेड़-बकरियां, तीन हजार ऊंट, पांच सौ जोड़ी बैल, और पांच सौ गदहियां, और बहुत ही दास-दासियां थीं; वरन उसके इतनी सम्पत्ति थी, कि पूरबियों में वह सब से बड़ा था।
Job 1:4  उसके बेटे उपने अपने दिन पर एक दूसरे के घर में खाने-पीने को जाया करते थे, और अपनी तीनों बहिनों को अपने संग खाने-पीने के लिये बुलवा भेजते थे।
Job 1:5  और जब जब जेवनार के दिन पूरे हो जाते, तब तब अय्यूब उन्हें बुलवाकर पवित्र करता, और बड़ी भोर उठकर उनकी गिनती के अनुसार होमबलि चढ़ाता था; क्योंकि अय्यूब सोचता था, कि कदाचित्‌ मेरे लड़कों ने पाप करके परमेश्वर को छोड़ दिया हो। इसी रीति अय्यूब सदैव किया करता था।
Job 1:13  एक दिन अय्यूब के बेटे-बेटियां बड़े भाई के घर में खाते और दाखमधु पी रहे थे;
Job 1:14  तब एक दूत अय्यूब के पास आकर कहने लगा, हम तो बैलों से हल जोत रहे थे, और गदहियां उनके पास चर रही थीं,
Job 1:15  कि शबा के लोग धावा करके उनको ले गए, और तलवार से तेरे सेवकों को मार डाला; और मैं ही अकेला बचकर तुझे समाचार देने को आया हूँ।
Job 1:16  वह अभी यह कह ही रहा था कि दूसरा भी आकर कहने लगा, कि परमेश्वर की आग आकाश से गिरी और उस से भेड़-बकरियां और सेवक जलकर भस्म हो गए; और मैं ही अकेला बचकर तुझे समाचार देने को आया हूँ।
Job 1:17  वह अभी यह कह ही रहा था, कि एक और भी आकर कहने लगा, कि कसदी लोग तीन गोल बान्धकर ऊंटों पर धावा करके उन्हें ले गए, और तलवार से तेरे सेवकों को मार डाला; और मैं ही अकेला बचकर तुझे समाचार देने को आया हूँ।
Job 1:18  वह अभी यह कह ही रहा था, कि एक और भी आकर कहने लगा, तेरे बेट-बेटियां बड़े भाई के घर में खाते और दाखमधु पीते थे,
Job 1:19  कि जंगल की ओर से बड़ी प्रचणड वायु चली, और घर के चारों कोनों को ऐसा झोंका मारा, कि वह जवानों पर गिर पड़ा और वे मर गए; और मैं ही अकेला बचकर तुझे समाचार देने को आया हूँ।
Job 1:20 तब अय्यूब उठा, और बागा फाड़, सिर मुंड़ाकर भूमि पर गिरा और दणडवत्‌ करके कहा,
Job 1:21  मैं अपनी मां के पेट से नंगा निकला और वहीं नंगा लौट जाऊंगा; यहोवा ने दिया और यहोवा ही ने लिया, यहोवा का नाम धन्य है।
Job 1:22  इन सब बातों में भी अय्यूब ने न तो पाप किया, और न परमेश्वर पर मूर्खता से दोष लगाया।
एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू १६-१८ 
  • लूका २:१-२४

Friday, March 23, 2012

पहचान गंध

   आप उसे देख नहीं सकते, छू नहीं सकते और ना ही सुन सकते हैं, परन्तु गंध प्रबल और प्रभावी होती है। कुछ फूलों, या इत्रों या किसी वस्तु की गंध तुरंत ही हम में भूतकाल की कुछ ऐसी यादें जगा देती है, कुछ ऐसे लोगों और स्थानों के स्मरण को ताज़ा कर देती है, जिन्हें हम अन्य किसी रीति से शायद स्मरण नहीं कर पाते।

   कुछ प्रसिद्ध लोगों के नाम पर कुछ सुगंधों के नाम रखे जाते हैं। प्रशंसक अपने प्रीय गायक या अभिनेत्री के नाम की सुगंध लगा कर अपनी पहचान उनके साथ बनाते हैं। बहुतेरी स्त्रियाँ किसी विशेष इत्र के प्रयोग के द्वारा अपनी याद लोगों में बैठाना चाहती हैं, उनका प्रयास होता है कि जब लोगों के पास वह सुगंध आए तो लोगों को उन ही की याद आने पाए। गंध के माध्यम से पहचान बनाना एक प्रभावी विधि है; किंतु यह विधि कोई नई बात नहीं है।

   गंध द्वारा पहचान बनाने की बात परमेश्वर ने आरंभ करी थी। परमेश्वर के वचन बाइबल में परमेश्वर ने इस्त्राएलियों के मध्य अपनी आराधना के स्थान पर एक विशेष रीति से तैयार करे गए सुगंधित द्रव्य के लगातार जलाए जाने के लिए कहा (निर्गमन ३०:३४-३५)। इस प्रकार का और इसी गंध का कोई अन्य द्रव्य बनाना लोगों के लिए वर्जित था (निर्गमन ३०:३७-३८), क्योंकि यह विशेष सुगंध लोगों के अन्दर परमेश्वर के स्मरण और उसकी आराधना की पहचान के लिए थी।

   आज संसार में भी एक ऐसी ही विशेष सुगंध के द्वारा परमेश्वर चाहता है कि संसार के लोग उसे पहचाने; एक गंध है जिसे उसने अपनी पहचान गंध बनाया है - उसके लोग, मसीही विश्वासी: "परन्‍तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, जो मसीह में सदा हम को जय के उत्‍सव में लिये फिरता है, और अपने ज्ञान का सुगन्‍ध हमारे द्वारा हर जगह फैलाता है। क्‍योंकि हम परमेश्वर के निकट उद्धार पाने वालों, और नाश होने वालों, दोनो के लिये मसीह के सुगन्‍ध हैं" (२ कुरिन्थियों २:१४-१५)।

   यह तथ्य कि परमेश्वर इतनी प्रभावी रीति से अपनी पहचान हमारे साथ बनाता है, मेरे लिए वास्तव में एक नम्र कर देने वाला तथ्य है। यह मुझे बाध्य करता है कि मैं अपने आप को जांचूँ कि मेरे आस-पास के लोग मुझे और मेरे जीवन तथा व्यवहार को देखकर मेरे परमेश्वर के बारे में क्या सोचते हैं, उसके बारे में क्या धारणा बनाते हैं?

   हम मसीही विश्वासी ही संसार में अपने उद्धारकर्ता प्रभु यीशु की पहचान गंध हैं। ध्यान रखें कि यह गंध सुगंध ही रहे; हमारे जीवनों मे यह कभी भीनी ना हो, कभी लुप्त ना हो। - जूली ऐकैरमैन लिंक


परमेश्वर के लिए जीया गया जीवन एक मनभावनी सुगंध ही फैलाएगा।

परन्‍तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, जो मसीह में सदा हम को जय के उत्‍सव में लिये फिरता है, और अपने ज्ञान का सुगन्‍ध हमारे द्वारा हर जगह फैलाता है। - २ कुरिन्थियों २:१४
बाइबल पाठ: २ कुरिन्थियों २:१४-१७
2Co 2:14  परन्‍तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, जो मसीह में सदा हम को जय के उत्‍सव में लिये फिरता है, और अपने ज्ञान का सुगन्‍ध हमारे द्वारा हर जगह फैलाता है।
2Co 2:15  क्‍योंकि हम परमेश्वर के निकट उद्धार पाने वालों, और नाश होने वालों, दोनो के लिये मसीह के सुगन्‍ध हैं।
2Co 2:16  कितनो के लिये तो मरने के निमित्त मृन्यु की गन्‍ध, और कितनो के लिये जीवन के निमित्त जीवन की सुगन्‍ध, और इन बातों के योग्य कौन है?
2Co 2:17  क्‍योंकि हम उन बहुतों के समान नहीं, जो परमेश्वर के वचन में मिलावट करते हैं; परन्‍तु मन की सच्‍चाई से, और परमेश्वर की ओर से परमेश्वर को उपस्थित जान कर मसीह में बोलते हैं।
एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू १३-१५ 
  • लूका १:५७-८०

Thursday, March 22, 2012

प्रार्थना

   वॉशिंगटन पोस्ट के एक लेख में बताया गया कि एक लड़की ने एक महीने में अपने मोबाइल फोन द्वारा कुल मिलाकर ६४७३ संदेश भेजे और प्राप्त किए। अपने मित्रों से अपने इस लगातर संपर्क के बारे में उसने कहा कि अगर यह न हो तो वह जी नहीं सकती। शोधकर्ताओं का मानना है कि अमेरिका में मोबाइल फोन द्वारा किशोर युवक और युवतियाँ औसतन प्रति महीने २२०० संदेश भेजते या प्राप्त करते हैं।

   मेरे लिए यह लगातार चलने वाला संपर्क एक अद्भुत नमूना है उस वार्तालाप का जिसे मसीही विश्वासी परमेश्वर से प्रार्थना के रूप में जानते हैं और जिसमें उन्हें इसी प्रकार लगे रहने चाहिए। प्रेरित पौलुस ने अपने जीवन में दूसरों के लिए सदा प्रार्थना करते रहने का रवैया बना रखा था। उसने अपनी विभिन्न पत्रियों में लोगों को इसके बारे में बताया: "इसी लिये जिस दिन से यह सुना है, हम भी तुम्हारे लिये यह प्रा्र्थना करने और विनती करने से नहीं चूकते कि तुम सारे आत्मिक ज्ञान और समझ सहित परमेश्वर की इच्‍छा की पहिचान में परिपूर्ण हो जाओ" (कुलुस्सियों १:९); "और हर समय और हर प्रकार से आत्मा में प्रार्थना, और विनती करते रहो, और इसी लिये जागते रहो, कि सब पवित्र लोगों के लिये लगातार विनती किया करो" (इफिसियों ६:१८); "निरन्‍तर प्रार्थना मे लगे रहो" (१ थिस्सलुनिकीयों ५:१७)।

   मिशनरी फ्रैंक लौबैक ने, जिन लोगों से वह अपनी दिनचर्या में मिलते थे, उनके लिए अपनी लगातार प्रार्थना करते रहने की आदत के बारे में बताया। वे भी उन लोगों के लिए निरंतर परमेश्वर को संदेश भेजते या पाते रहते थे, एक प्रकार से वे परमेश्वर से लगातार संपर्क में बने रहते थे। लौबैक का मानना है कि प्रार्थना संसार में कार्यकारी सबसे सामर्थी शक्ति है, और वे कहते थे कि "मेरा कर्त्वय है कि मैं हर घड़ी परमेश्वर के साथ वार्तालाप में और उसकी इच्छानुसार कार्य करने की प्रतिक्रीया में लगा रहूँ।"

   जब हम मोबाइल फोन पर लगातर चलने वाले लोगों के एक दूसरे से संपर्क के बारे में पढ़ते और जानते हैं तो प्रेरित पौलुस द्वारा दिए गए आवाहन "निरन्‍तर प्रार्थना मे लगे रहो" का पालन करना असंभव नहीं हो सकता; आवश्यक्ता है इसके लिए हमारी इच्छा और सतत प्रयास की। - डेविड मैक्कैसलैंड


मसीही विश्वासी के लिए प्रार्थना करते रहना श्वास लेते रहने के समान ही स्वाभाविक होना चाहिए।

और हर समय और हर प्रकार से आत्मा में प्रार्थना, और विनती करते रहो, और इसी लिये जागते रहो, कि सब पवित्र लोगों के लिये लगातार विनती किया करो। - इफिसियों ६:१८

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों १:२-१४
Col 1:3  हम तुम्हारे लिये नित प्रार्थना करके अपने प्रभु यीशु मसीह के पिता अर्थात परमेश्वर का धन्यवाद करते हैं।
Col 1:4 क्‍योंकि हम ने सुना है, कि मसीह यीशु पर तुम्हारा विश्वास है, और सब पवित्र लोगों से प्रेम रखते हो।
Col 1:5 उस आशा की हुई वस्‍तु के कारण जो तुम्हारे लिये स्‍वर्ग में रखी हुई है, जिस का वर्णन तुम उस सुसमाचार के सत्य वचन में सुन चुके हो।
Col 1:6 जो तुम्हारे पास पहुंचा है और जैसा जगत में भी फल लाता, और बढ़ता जाता है; अर्थात जिस दिन से तुम ने उस को सुना, और सच्‍चाई से परमेश्वर का अनुग्रह पहिचाना है, तुम में भी ऐसा ही करता है।
Col 1:7  उसी की शि्क्षा तुम ने हमारे प्रिय सहकर्मी इपफ्रास से पाई, जो हमारे लिये मसीह का विश्वासयोग्य सेवक है।
Col 1:8  उसी ने तुम्हारे प्रेम को जो आत्मा में है हम पर प्रगट किया।
Col 1:9  इसी लिये जिस दिन से यह सुना है, हम भी तुम्हारे लिये यह प्रार्यना करने और विनती करने से नहीं चूकते कि तुम सारे आत्मिक ज्ञान और समझ सहित परमेश्वर की इच्‍छा की पहिचान में परिपूर्ण हो जाओ।
Col 1:10  ताकि तुम्हारा चाल-चलन प्रभु के योग्य हो, और वह सब प्रकार से प्रसन्न हो, और तुम में हर प्रकार के भले कामों का फल लगे, और परमेश्वर की पहिचान में बढ़ते जाओ।
Col 1:11 और उस की महिमा की शक्ति के अनुसार सब प्रकार की सामर्थ से बलवन्‍त होते जाओ, यहां तक कि आनन्‍द के साथ हर प्रकार से धीरज और सहनशीलता दिखा सको।
Col 1:12  और पिता का धन्यवाद करते रहो, जिस ने हमें इस योग्य बनाया कि ज्योति में पवित्र लोगों के साथ मीरास में समभागी हों।
Col 1:13 उसी ने हमें अन्‍धकार के वश से छुड़ाकर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया।
Col 1:14 जिस से हमें छुटकारा अर्थात पापों की क्षमा प्राप्‍त होती है।
एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू १०-१२ 
  • लूका १:३९-५६

Wednesday, March 21, 2012

निर्मल शिक्षा

   कुछ समय पहले संसार को मालुम पड़ा कि चीन के कुछ दूध उत्पादक दूध में मेलामीन नामक पदार्थ से मिलावट कर रहे थे क्योंकि इस पदार्थ के होने से जांचने के समय दूध में, शरीर की बढ़ोतरी के लिए आवश्यक, प्रोटीन की मात्रा अधिक आंकी जाती थी। किंतु मिलावट वाले उस दूध में यह अधिक प्रोटीन होना भ्रामिक था वास्तविक नहीं, हानिकारक था लाभकारी नहीं। थोड़े समय में बहुत से बच्चे मर गए या गंभीर रूप से बीमार पड़ गए, ऐसी लाइलाज बीमारियों द्वारा जिनका प्रभाव सारी उम्र उनपर रहेगा। इस प्रकार का मिलावट का कार्य को नया नहीं है, कई अन्य देशों मे भी, इसी उद्देश्य से, जानवरों के चारे में मेलामीन पिछले लगभग ४० वर्षों से मिलाया जा रहा है, और इसके प्रभाव भी यही रहे हैं - बीमार अथवा मरे हुए जानवर। परमेश्वर द्वारा दी गई शुद्ध चीज़ों में मनुष्य द्वारा अपनी अक्ल से करी गई मिलावट सदैव ही मनुष्यों की हानि का कारण रही है, चाहे वह शारीरिक बातों में हो या आत्मिक।

   प्रेरित पतरस ने परमेश्वर के वचन को उस शुद्ध निर्मल दूध के समान बताया (१ पतरस २:२) जिसका नियमित प्रयोग आत्मिक शिशुओं की बढ़ोतरी के लिए अनिवार्य है। निर्मल का तात्पर्य है जिसमें कोई मलिनता, किसी दूषित पदार्थ की कोई मिलावट ना हो। आरंभिक मण्डली की स्थापना के साथ ही परमेश्वर के बैरियों और शैतान के लोगों द्वारा परमेश्वर की निर्मल और लाभकारी शिक्षाओं में मिलावट का कार्य आरंभ हो गया था, जो आज भी ज़ारी है। सबसे अधिक प्रयास किया जाता रहा है पश्चाताप द्वारा सेंतमेंत उद्धार की मूल शिक्षा को विधि-विधानों के पालन और भले कर्मों की अनिवार्यता द्वारा दूषित करने का।

   आरंभिक मण्डली में लोग प्रभु यीशु मसीह के क्रूस पर बलिदान और मृतकों में से पुनरुत्थान के साथ यहूदी धर्म के अनुसार खतना कराने को भी उद्धार के लिए आवश्यक कहने लगे थे (प्रेरितों १५:१)। तब प्रभु यीशु के अनुयायी और मित्र प्रेरित पतरस ने इस धारणा की भर्त्सना और खण्डन करते हुए केवल प्रभु यीशु के अनुग्रह ही को उद्धार के लिए आवश्यक बताते हुए कहा: "तो अब तुम क्‍यों परमेश्वर की परीक्षा करते हो कि चेलों की गरदन पर ऐसा जूआ रखो, जिसे न हमारे बापदादे उठा सके थे और न हम उठा सकते। हां, हमारा यह तो निश्‍चय है, कि जिस रीति से वे प्रभु यीशु के अनुग्रह से उद्धार पाएंगे उसी रीति से हम भी पाएंगे" (प्रेरितों १५:१०, ११)।

   प्रेरित पौलुस ने भी गलतिया के विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में उनके प्रभु यीशु के अनुग्रह से हटने के संबंध में लिखा: "मुझे आश्‍चर्य होता है, कि जिस ने तुम्हें मसीह के अनुग्रह से बुलाया उस से तुम इतनी जल्दी फिर कर और ही प्रकार के सुसमाचार की ओर झुकने लगे। परन्‍तु वह दूसरा सुसमाचार है ही नहीं: पर बात यह है, कि कितने ऐसे हैं, जो तुम्हें घबरा देते, और मसीह के सुसमाचार को बिगाड़ना चाहते हैं। परन्‍तु यदि हम या स्‍वर्ग से कोई दूत भी उस सुसमाचार को छोड़ जो हम ने तुम को सुनाया है, कोई और सुसमाचार तुम्हें सुनाए, तो श्रापित हो। जैसा हम पहिले कह चुके हैं, वैसा ही मैं अब फिर कहता हूं, कि उस सुसमाचार को छोड़ जिसे तुम ने ग्रहण किया है, यदि कोई और सुसमाचार सुनाता है, तो श्रापित हो। अब मैं क्‍या मनुष्यों को मानता हूं या परमेश्वर को? क्‍या मैं मनुष्यों को प्रसन्न करना चाहता हूं?" (गलतियों १:६-९)।

   सावधान रहिए; यदि कोई भी शिक्षा परमेश्वर के वचन बाइबल में दी गई परमेश्वर की शिक्षाओं से भिन्न हो, या बाइबल में दी गई शिक्षाओं में कुछ जोड़ती या घटाती हो तो वह परमेश्वर की ओर से नहीं है; वह तो परमेश्वर के निर्मल आत्मिक दूध में घातक मिलावट है। हो सकता है कि मनुष्यों और संसार के पैमाने पर उसमें आपको "भली बातों" की मात्रा अधिक प्रतीत पड़े, परन्तु अन्ततः उन मिलावटी बातों का प्रभाव हानिकारक और विनाषकारी ही होगा।

   "इसलिये सब प्रकार का बैरभाव और छल और कपट और डाह और बदनामी को दूर करके। नये जन्में हुए बच्‍चों की नाईं निर्मल आत्मिक दूध की लालसा करो, ताकि उसके द्वारा उद्धार पाने के लिये बढ़ते जाओ" (१ पतरस २:१, २)। - सी.पी. हिया


परमेश्वर का वचन संपूर्ण है; उसमें किसी बात के जोड़े जाने या घटाए जाने की कोई आवश्यक्ता नहीं है।
नये जन्में हुए बच्‍चों की नाईं निर्मल आत्मिक दूध की लालसा करो, ताकि उसके द्वारा उद्धार पाने के लिये बढ़ते जाओ। - १ पतरस २:२
बाइबल पाठ: प्रेरितों १५:१-११
Act 15:1  फिर कितने लोग यहूदिया से आकर भाइयों को सिखाने लगे कि यदि मूसा की रीति पर तुम्हारा खतना न हो तो तुम उद्धार नहीं पा सकते।
Act 15:2  जब पौलुस और बरनबास का उन से बहुत झगड़ा और वाद-विवाद हुआ तो यह ठहराया गया, कि पौलुस और बरनबास, और हम में से कितने और व्यक्ति इस बात के विषय में यरूशलेम को प्रेरितों और प्राचीनों के पास जांए।
Act 15:3  सो मण्‍डली ने उन्‍हें कुछ दूर तक पहुंचाया; और वे फीनीके ओर सामरिया से होते हुए अन्यजातियों को मन फेरने का समाचार सुनाते गए, और सब भाइयों को बहुत आनन्‍दित किया।
Act 15:4  जब यरूशलेम में पहुंचे, तो कलीसिया और प्रेरित और प्राचीन उन से आनन्‍द के साथ मिले, और उन्‍होंने बताया कि परमेश्वर ने उन के साथ होकर कैसे कैसे काम किए थे।
Act 15:5  परन्‍तु फरीसियों के पंथ में से जिन्‍होंने विश्वास किया था, उन में से कितनों ने उठ कर कहा, कि उन्‍हें खतना कराना और मूसा की व्यवस्था को मानने की आज्ञा देना चाहिए।
Act 15:6   तब प्रेरित और प्राचीन इस बात के विषय में विचार करने के लिये इकट्ठे हुए।
Act 15:7  तब पतरस ने बहुत वाद-विवाद के बाद खड़े होकर उन से कहा; हे भाइयो, तुम जानते हो, कि बहुत दिन हुए, कि परमेश्वर ने तुम में से मुझे चुन लिया, कि मेरे मुंह से अन्यजाति सुसमाचार का वचन सुनकर विश्वास करें।
Act 15:8  और मन के जांचने वाले परमेश्वर ने उन को भी हमारी नाई पवित्र आत्मा देकर उन की गवाही दी।
Act 15:9  और विश्वास के द्वारा उन के मन शुद्ध करके हम में और उन में कुछ भेद न रखा।
Act 15:10  तो अब तुम क्‍यों परमेश्वर की परीक्षा करते हो कि चेलों की गरदन पर ऐसा जूआ रखो, जिसे न हमारे बापदादे उठा सके थे और न हम उठा सकते।
Act 15:11  हां, हमारा यह तो निश्‍चय है, कि जिस रीति से वे प्रभु यीशु के अनुग्रह से उद्धार पाएंगे, उसी रीति से हम भी पाएंगे।
एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू ७-९ 
  • लूका १:२१-३८

Tuesday, March 20, 2012

विवाह

   विवाह परमेश्वर की ओर से दिया गया वह संस्थान है जो एक महान मिलन पर आधारित है। यह पवित्र और गंभीर है, स्त्री तथा पुरुष को एक अद्भुत एकता में बांधता है और मानव जाति की बढ़ोतरी, समाज की उन्नति तथा समाज में नैतिक मूल्यों के बने रहने का आधार है। समस्त संसार का इतिहास गवाह है कि जहाँ कहीं विवाह के पवित्र और गंभीर संबंध की अवहेलना करी गई है और इसे हल्के या छिछोरे रूप में लिया गया है, उस परिवार और समाज में गिरावट ही आई है और उस सभ्यता का पतन ही हुआ है। परमेश्वर इस संबंध की गरिमा को कितनी गंभीरता से लेता है, तथा इसकी पवित्रता को कितना बहुमूल्य आंकता है, इस बात का अंदाज़ा हम इसी से लगा सकते हैं कि परमेश्वर ने अपने और अपनी प्रजा के संबंध तथा प्रभु यीशु मसीह और उसकी मण्डली के आपसी संबंध को स्त्री-पुरुष के विवाह के संबंध द्वारा समझाया: "क्योकि तेरा कर्त्ता तेरा पति है, उसका नाम सेनाओं का यहोवा है; और इस्राएल का पवित्र तेरा छुड़ाने वाला है, वह सारी पृथ्वी का भी परमेश्वर कहलाएगा" (यशायाह ५४:५); " हे पतियों, अपनी अपनी पत्‍नी से प्रेम रखो, जैसा मसीह ने भी कलीसिया से प्रेम करके अपने आप को उसके लिये दे दिया" (इफिसियों ५:२५)।

   परमेश्वर का वचन बाइबल हमें इस पवित्र संबंध और इससे जुड़ी परमेश्वर की मनशा के बारे में बहुत कुछ बताती है; उदाहरणस्वरूप:
  •    विवाह दो भिन्न परिवारों से लेकर एक नए परिवार की स्थापना है: "इस कारण मनुष्य माता पिता को छोड़कर अपनी पत्‍नी से मिला रहेगा, और वे दोनों एक तन होंगे" (इफिसियों ५:३१)।
  •    विवाह परमेश्वर द्वारा दी गई शरीर की इच्छा की पूर्ति की पवित्र एवं लाभकारी विधि है: "परन्‍तु व्यभिचार के डर से हर एक पुरूष की पत्‍नी, और हर एक स्त्री का पति हो; तुम एक दूसरे से अलग न रहो, परन्‍तु केवल कुछ समय तक आपस की सम्मति से कि प्रार्थना के लिये अवकाश मिले, और फिर एक साथ रहो, ऐसा न हो, कि तुम्हारे असंयम के कारण शैतान तुम्हें परखे" (१ कुरिन्थियों ७:२, ५)।
  •    विवाह द्वारा एक परस्पर सहायक जोड़ी बनती है "भली पत्नी कौन पा सकता है? क्योंकि उसका मूल्य मूंगों से भी बहुत अधिक है। उसके पति के मन में उसके प्रति विश्वास है।.... वह अपने जीवन के सारे दिनों में उस से बुरा नहीं, वरन भला ही व्यवहार करती है" (नीतिवचन ३१:१०, १२)।
   
विवाह परमेश्वर द्वार दी गई विधि है जिसमें एक स्त्री और एक पुरुष एक साथ लाए जाकर एक ऐसे संबंध में जोड़े जाते हैं जिससे परमेश्वर का आदर और समाज की सहायता तथा उन्नति होती है। परमेश्वर की इच्छानुसार किया गया विवाह परमेश्वर की महिमा के लिए दो व्यक्तियों को जोड़ता है और उसी की महिमा के लिए एक नया परिवार बनाता है।

   अपने जीवन और समाज में विवाह कि पवित्रता और गरिमा को कभी कम ना होने दें। - डेव ब्रैनन

परमेश्वर ने पति और पत्नी को एक दुसरे के पूरक होने के लिए बनाया है।
 
इस कारण मनुष्य माता पिता को छोड़कर अपनी पत्‍नी से मिला रहेगा, और वे दोनों एक तन होंगे। - इफिसियों ५:३१
 
बाइबल पाठ: इफिसियों ५:२१-३३
Eph 5:21  और मसीह के भय से एक दूसरे के आधीन रहो।
Eph 5:22  हे पत्‍नियों, अपने अपने पति के ऐसे अधीन रहो, जैसे प्रभु के।
Eph 5:23  क्‍योंकि पति पत्‍नी का सिर है जैसे कि मसीह कलीसिया का सिर है; और आप ही देह का उद्धारकर्ता है।
Eph 5:24  पर जैसे कलीसिया मसीह के आधीन है, वैसे ही पत्‍नियां भी हर बात में अपने अपने पति के आधीन रहें।
Eph 5:25  हे पतियों, अपनी अपनी पत्‍नी से प्रेम रखो, जैसा मसीह ने भी कलीसिया से प्रेम करके अपने आप को उसके लिये दे दिया।
Eph 5:26  कि उस को वचन के द्वारा जल के स्‍नान से शुद्ध करके पवित्र बनाए।
Eph 5:27  और उसे एक ऐसी तेजस्‍वी कलीसिया बनाकर अपने पास खड़ी करे, जिस में न कलंक, न झुर्री, न कोई ऐसी वस्‍तु हो, वरन पवित्र और निर्दोष हो।
Eph 5:28  इसी प्रकार उचित है, कि पति अपनी अपनी पत्नी से अपनी देह के समान प्रेम रखे, जो अपनी पत्‍नी से प्रेम रखता है, वह अपने आप से प्रेम रखता है।
Eph 5:29  क्‍योंकि किसी ने कभी अपने शरीर से बैर नहीं रखा वरन उसका पालन-पोषण करता है, जैसा मसीह भी कलीसिया के साथ करता है;
Eph 5:30   इसलिये कि हम उस की देह के अंग हैं।
Eph 5:31  इस कारण मनुष्य माता पिता को छोड़कर अपनी पत्‍नी से मिला रहेगा, और वे दोनों एक तन होंगे।
Eph 5:32   यह भेद तो बड़ा है, पर मैं मसीह और कलीसिया के विषय में कहता हूं।
Eph 5:33  पर तुम में से हर एक अपनी पत्‍नी से अपने समान प्रेम रखे, और पत्‍नी भी अपने पति का भय माने।
 
एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू ४-६ 
  • लूका १:१-२०

Monday, March 19, 2012

वास्तविक सौन्दर्य

   मैं जब भी किराने की दुकान से सामान खरीदने जाता हूँ तो पैसे चुकाने के स्थान के साथ रखी हुई पत्रिकाओं के मंच पर लगाई गई पत्रिकाओं के मुख-चित्रों तथा शीर्षकों पर नज़र डालता हूँ। मैंने देखा है कि वे पत्रिकाएं या तो भोजन, शरीर को स्वस्थ और दुरुस्त रखने, शरीर और चेहरे को सुन्दर बनाने, शारीरिक व्यायाम के बारे में होती हैं या आर्थिक विष्यों पर अन्यथा विलास और वासना से संबंधित होती हैं। आत्मिक बातों के लिए कुछ नहीं मिलता।

   यह एक बड़ी समस्या है; लोगों का ध्यान अपने शरीर और उसकी लालसाओं पर इतना अधिक केंद्रित हो गया है कि वे उस से संबंधित सब कुछ पढ़ने मानने को तैयार रहते हैं, चाहे झूठ या मनगढ़ंत, कुछ भी हो। इसी कारण ऐसी पत्रिकाओं की बिकरी है और इन्हें छापने वाले लोगों के पास, दूसरों के अन्ध विश्वास के कारण, धन का कमाने का साधन है। अपने शरीर पर केंद्रित रहने के कारण लोग अपनी तुलना दूसरों से करते हैं, उनके समान दिखने के प्रयास करते हैं और फिर अपने ही जीवन में व्यर्थ बेचैनीयों और निराशाओं का सामना करते हैं।

   कुछ वर्ष पहले मेरे एक मित्र ने एक किशोर युवती के साथ हुई उसकी वार्तालाप के बारे में बताया। मेरे मित्र ने उस किशोरी से कहा, "आप बड़ी आत्मविश्वास से भरी लगती हैं; इसका क्या कारण है?" किशोरी ने उत्तर दिया; "हाँ मैं आत्मविश्वास से भरी हूँ क्योंकि मैं सुडौल और सुन्दर हूँ।" मेरे मित्र ने विलक्षण बुद्धिमता के साथ उसे उत्तर दिया, "क्षमा कीजिए, मुझे यह सुनकर दुख हुआ।" इस बात को सुनकर उस किशोरी ने विसमय से मेरे मित्र से पूछा, "ऐसा क्यों?" मेरे मित्र ने उत्तर दिया, "क्योंकि ऐसा नहीं है कि सदा ही आप ऐसी सुडौल और सुन्दर बनी रहेंगी। कभी भी कुछ भी हो सकता है; जब सुडौल और सुन्दर नहीं रहेंगी तब आपका क्या होगा?"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन की पुस्तक में बताया गया है कि आकर्षक होना मिथिया है और सुन्दरता क्षणिक है (नीतिवचन ३१:३०)। शारीरिक सुन्दरता के जाते रहने में कोई विशेष समय नहीं लगता; कोई उसे बनाए रखने के कितने भी प्रयास क्यों न कर ले, शारीरिक सुन्दरता कभी न कभी समाप्त होती ही है। लेकिन एक और सुन्दरता है जो समय के साथ निखरती जाती है - आत्मा की सुन्दरता; जो ना कभी धूमिल होती है और ना ही कभी समाप्त होती है।

   यही वह वास्तविक सौन्दर्य है जो सदा बना रहता है; क्योंकि यह विश्वास और पश्चाताप द्वारा तथा परमेश्वर के भय में बने रहने वालों को प्रभु यीशु से प्राप्त होता है और अनादि अनन्त परमेश्वर के समान, उन लोगों में अनन्त काल के लिए बना रहता है।

   क्षणिक और मिट जाने वाली शरीरिक सुन्दरता की चिंता छोड़ कर अनन्तकाल तक बनी रहने वाली आत्मिक सुन्दरता को प्रभु यीशु से प्राप्त कर लीजिए। - डेविड रोपर


मन की धार्मिकता चरित्र में सुन्दरता उत्पन्न करती है।

शोभा तो झूठी और सुन्दरता व्यर्थ है, परन्तु जो स्त्री यहोवा का भय मानती है, उसकी प्रशंसा की जाएगी।

बाइबल पाठ: नीतिवचन ३१:२१-३१
Pro 31:21  वह अपने घराने के लिये हिम से नहीं डरती, क्योंकि उसके घर के सब लोग लाल कपड़े पहिनते हैं।
Pro 31:22  वह तकिये बना लेती है, उसके वस्त्र सूक्ष्म सन और बैंजनी रंग के होते हैं।
Pro 31:23  जब उसका पति सभा में देश के पुरनियों के संग बैठता है, तब उसका सम्मान होता है।
Pro 31:24  वह सन के वस्त्र बनाकर बेचती है, और व्योपारी को कमरबन्द देती है।
Pro 31:25  वह बल और प्रताप का पहिरावा पहिने रहती है, और आने वाले काल के विषय पर हंसती है।
Pro 31:26  वह बुद्धि की बात बोलती है, और उसके वचन कृपा की शिक्षा के अनुसार होते हैं।
Pro 31:27  वह अपने घराने के चालचलन को ध्यान से देखती है, और अपनी रोटी बिना परिश्रम नहीं खाती।
Pro 31:28  उसके पुत्र उठ उठकर उसको धन्य कहते हैं, उनका पति भी उठकर उसकी ऐसी प्रशंसा करता है:
Pro 31:29  बहुत सी स्त्रियों ने अच्छे अच्छे काम तो किए हैं परन्तु तू उन सभों में श्रेष्ट है।
Pro 31:30  शोभा तो झूठी और सुन्दरता व्यर्थ है, परन्तु जो स्त्री यहोवा का भय मानती है, उसकी प्रशंसा की जाएगी।
Pro 31:31  उसके हाथों के परिश्रम का फल उसे दो, और उसके कार्यों से सभा में उसकी प्रशंसा होगी।


एक साल में बाइबल: 

  • यहोशू १-३ 
  • मरकुस १६

Sunday, March 18, 2012

आप कौन हैं?

   यदि कोई आपसे पुछे कि "आप कौन हैं?", तो मेरा अंदाज़ा है कि आप अपने बारे में कुछ शब्द कहकर बताएंगे कि आप क्या कार्य करते हैं, जैसे कि "मैं एक नर्स हूँ" या "मैं बिजली मकैनिक हुँ" आदि। लेकिन वास्तव में यह तो वह है जो आप करते हैं, ना कि वह जो आप हैं! ज़रा सोचिए, जब आप वह करना छोड़ देंगे जो आप कर रहे हैं तो आप क्या होंगे? क्या आपका व्यवसाय आपकी पहचान बदलाता रहेगा? क्या व्यवसाय ना होने पर आपकी पहचान भी नहीं रहेगी?

   एक मसीही विश्वासी के लिए उसकी पहचान प्रभु यीशु के साथ उसके संबंध से है; और यही संबंध उसके व्यवहार को तय करता है। उदाहरण के लिए परमेश्वर के वचन बाइबल के एक चरित्र मत्ती को लीजिए। मत्ती, प्रभु यीशु के समय में, रोमी राज्य में एक रोमी कर्मचारी था और रोमी शासकों के लिए, अपने लोगों - यहूदियों से, कर वसूल करता था। उसके इस व्यवसाय ने उसे लालची और स्वार्थी बना रखा था और इस कारण वह अपने ही लोगों में तुच्छ समझा जाता था। लेकिन जिस दिन प्रभु यीशु उसके जीवन में आया, उसके लिए सब कुछ बदल गया। अब उसका व्यवहार भिन्न था, उसकी प्राथमिकताएं भिन्न थीं, उसका लालच जाता रहा, समाज में उसकी एक नई पहचान हो गई - प्रभु यीशु का अनुयायी। मत्ती ही ऐसा अकेला व्यक्ति नहीं था। परमेश्वर के वचन बाइबल में मत्ती रचित सुसमाचार में हम चार अन्य व्यक्तियों - पतरस, अन्द्रियास, याकूब और यूहन्ना के विष्य में भी पढ़ते हैं जो मछुआरे थे और सब कुछ छोड़कर प्रभु यीशु के पीछे हो लिए, और उनके जीवन बिलकुल बदल गए, प्रभु यीशु के अनुयायी के रूप में उनकी भी नई पहचान हो गई। तब से लेकर आज तक यह नई पहचान और नए व्यवहार का सिलसिला जारी है, हर उस व्यक्ति के लिए जो प्रभु यीशु पर विश्वास लाता है और अपने आप को उसे समर्पित कर देता है।

   प्रभु यीशु का व्यक्तित्व बाध्य कर देने वाला व्यक्तित्व है; प्रभु आज भी अनुयायीयों की खोज में है। जो उसके निमंत्रण को स्वीकार कर लेते हैं, स्वेच्छा से उसके पीछे चलने की ठान लेते हैं, वह उनके जीवन को एक नई पहचान, एक नया आयाम दे देता है। अब वे "प्रभु यीशु के अनुयायी" के रूप में जाने जाते हैं। इस नई पहचान के लिए किसी को अपना व्यवसाय बदलने की आवश्यक्ता नहीं है, वरन अनुयायी बनने के बाद उस व्यवसाय को करने की उनकी विधि में स्वतः ही परिवर्तन आने लग जाते हैं; क्योंकि अब वे लोग वही कार्य अपने प्रभु और उद्धारकर्ता यीशु के नाम और महिमा के लिए करने लगते हैं। अब उनके जीवन की प्राथमिकता अपने प्रभु और उद्धारकर्ता की आज्ञाकारिता में बने रहना और उसे ही महिमा देते रहना हो जाता है।

   यदि अगली बार कोई आपसे पूछे कि "आप कौन हैं?" तो क्या आप कहेंगे कि "मैं प्रभु यीशु का अनुयायी हूँ" ? - जो स्टोवेल


यदि आप प्रभु यीशु के अनुयायी हैं तो जीवन में आपको और किसी पहचान की कोई आवश्यक्ता नहीं है।

और [यीशु ने] उन से कहा, मेरे पीछे चले आओ, तो मैं तुम को मनुष्यों के पकड़ने वाले बनाऊंगा। - मत्ती ४:१९


बाइबल पाठ: मत्ती ४:१७-२५


Mat 4:17  उस समय से यीशु ने प्रचार करना और यह कहना आरम्भ किया, कि मन फिराओ क्‍योंकि स्‍वर्ग का राज्य निकट आया है।
Mat 4:18  उस ने गलील की झील के किनारे फिरते हुए दो भाइयों अर्थात शमौन को जो पतरस कहलाता है, और उसके भाई अन्‍द्रियास को झील में जाल डालते देखा, क्‍योंकि वे मछवे थे।
Mat 4:19   और उन से कहा, मेरे पीछे चले आओ, तो मैं तुम को मनुष्यों के पकड़ने वाले बनाऊंगा।
Mat 4:20  वे तुरन्‍त जालों को छोड़कर उसके पीछे हो लिए।
Mat 4:21  और वहां से आगे बढ़कर, उस ने और दो भाइयों अर्थात जब्‍दी के पुत्र याकूब और उसके भाई यूहन्ना को अपने पिता जब्‍दी के साथ नाव पर अपने जालों को सुधारते देखा, और उन्‍हें भी बुलाया
Mat 4:22  वे तुरन्‍त नाव और अपने पिता को छोड़कर उसके पीछे हो लिए।
Mat 4:23   और यीशु सारे गलील में फिरता हुआ उन की सभाओं में उपदेश करता और राज्य का सुसमाचार प्रचार करता, और लोगों की हर प्रकार की बीमारी और र्दुबलता को दूर करता रहा।
Mat 4:24  और सारे सूरिया में उसका यश फैल गया; और लोग सब बीमारों को, जो नाना प्रकार की बीमारियों और दुखों में जकड़े हुए थे, और जिन में दुष्‍टात्क़ाएं थीं और मिर्गी वालों और झोले के मारे हुओं को उसके पास लाए और उस ने उन्‍हें चंगा किया।
Mat 4:25  और गलील और दिकापुलिस और यरूशलेम और यहूदिया से और यरदन के पार से भीड़ की भीड़ उसके पीछे हो ली।


एक साल में बाइबल: 

  • व्यवस्थाविवरण ३२-३४ 
  • मरकुस १५:२६-४७

Saturday, March 17, 2012

भला परमेश्वर

   जब मेरा बहनोई चक, पश्चिमी अफ्रीका के माली देश में मिशनरी था तो वह एक सड़क दुर्घटना में घायल हो गया। चक अपनी मोटरसाइकिल पर जा रहा था कि अचानक सड़क पर उसके सामने एक आदमी आ गया। ब्रेक लगाते और बचाते बचाते हुए भी मोटरसाइकिल उस आदमी से टकराई और चक तथा उसकी मोटरसाइकिल सड़क पर २०० मीटर तक घिसटते चले गए। चक को बेहोशी की हालत में उठाकर अस्पताल लाया गया। कुछ समय बाद जब चक को होश आया तो डॉक्टर ने उससे कहा कि वह सचमुच सौभाग्यशाली है कि किसी गंभीर चोट से बच गया और जिससे टकराया था उसे भी कोई गंभीर चोट नहीं लगी। चक ने मुस्कुराते हुए कहा, "परमेश्वर भला है"।

   बाद में जब चक उस दिन की घटना पर विचार कर रहा था, और सोच रहा था कि अच्छा हुआ कि ना तो उसे ही कोई गंभीर चोट आई और ना ही उस व्यक्ति को जिस से वह टकराया था, तो उसके मन में बात उठी, "क्या होता यदि दोनों में से किसी एक की मृत्यु हो जाती? क्या तब भी वह परमेश्वर को भला ही कहता? क्या ऐसा होने से परमेश्वर के भले होने पर प्रश्न चिन्ह लग जाता?"

   जब हम किसी दुर्घटना या त्रासदी में पड़ें, तो परमेश्वर की भलाई पर सन्देह आना स्वाभाविक सा लगता है। क्या परमेश्वर सदा ही भला रहता है? जी हाँ, परमेश्वर सदा ही भला रहता है। परमेश्वर ने कभी यह वायदा नहीं किया कि उसके विश्वासियों पर कभी कोई तकलीफ या क्लेष नहीं होगा, लेकिन उसने यह वायदा अवश्य किया है कि हर तकलीफ और क्लेष में वह हमारे साथ ही होगा ( भजन ४६:७)। परमेश्वर ने कभी यह नहीं कहा कि उसके विश्वासियों को किसी विपत्ति का या भयानक परिस्थिति का सामना नहीं करना पड़ेगा, लेकिन यह अवश्य कहा है कि ऐसी हर परिस्थिति में उसका जन कभी अकेला नहीं होगा, उस जन की सहायता और सांत्वना के लिए वह भी उसके साथ उपस्थित रहेगा ( भजन २३:४)।

   परमेश्वर सदा ही भला है, हम चाहे जैसी भी परेशानी और दुख में से होकर निकल रहे हों। चाहे परिस्थिति हमारी समझ से बिल्कुल बाहर हो और हमें उसमें कुछ भी भला नज़र नहीं आ रहा हो, फिर भी परमेश्वर अन्ततः उस में से भी हमारे लिए भला ही करेगा, क्योंकि अपने बच्चों के लिए भले के अलावा वह और कुछ कर ही नहीं सकता, उनकी भलाई करने के अलावा और कुछ करना उसके चरित्र में ही नहीं है। इसलिए प्रत्येक मसीही विश्वासी परमेश्वर के वचन बाइबल के भविष्यद्वकता हबक्कूक के साथ मिलकर कह सकता है: "क्योंकि चाहे अंजीर के वृक्षों में फूल न लगें, और न दाखलताओं में फल लगें, जलपाई के वृक्ष से केवल धोखा पाया जाए और खेतों में अन्न न उपजे, भेड़शालाओं में भेड़-बकरियां न रहें, और न थानों में गाय बैल हों, तौभी मैं यहोवा के कारण आनन्दित और मगन रहूंगा, और अपने उद्धारकर्ता परमेश्वर के द्वारा अति प्रसन्न रहूंगा। यहोवा परमेश्वर मेरा बलमूल है, वह मेरे पांव हरिणों के समान बना देता है, वह मुझ को मेरे ऊंचे स्थानों पर चलाता है" (हबक्कूक३:१७-१९)।


परमेश्वर हमारे विश्वास को परखता है जिससे हम उसकी विश्वासयोग्यता पर विश्वास रख सकें।

यहोवा पिसे हुओं के लिये ऊंचा गढ़ ठहरेगा, वह संकट के समय के लिये भी ऊंचा गढ़ ठहरेगा। - भजन ९:९


बाइबल पाठ: भजन ४६
Psa 46:1  परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलनेवाला सहायक।
Psa 46:2  इस कारण हम को कोई भय नहीं चाहे पृथ्वी उलट जाए, और पहाड़ समुद्र के बीच में डाल दिए जाएं;
Psa 46:3  चाहे समुद्र गरजे और फेन उठाए, और पहाड़ उसकी बाढ़ से कांप उठें।
Psa 46:4  एक नदी है जिसकी नहरों से परमेश्वर के नगर में अर्थात परमप्रधान के पवित्र निवास भवन में आनन्द होता है।
Psa 46:5  परमेश्वर उस नगर के बीच में है, वह कभी टलने का नहीं; पौ फटते ही परमेश्वर उसकी सहायता करता है।
Psa 46:6  जाति जाति के लोग झल्ला उठे, राज्य राज्य के लोग डगमगाने लगे; वह बोल उठा, और पृथ्वी पिघल गई।
Psa 46:7  सेनाओं का यहोवा हमारे संगे है, याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है।
Psa 46:8  आओ, यहोवा के महाकर्म देखो, कि उस ने पृथ्वी पर कैसा कैसा उजाड़ किया है।
Psa 46:9  वह पृथ्वी की छोर तक लड़ाइयों को मिटाता है, वह धनुष को तोड़ता, और भाले को दो टुकड़े कर डालता है, और रथों को आग में झोंक देता है!
Psa 46:10  चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान् हूं, मैं पृथ्वी भर में महान् हूं!
Psa 46:11  सेनाओं का यहोवा हमारे संग है, याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है।


एक साल में बाइबल: 

  • व्यवस्थाविवरण ३०-३१ 
  • मरकुस १५:१-२५

Friday, March 16, 2012

वास्तविक नायक

   लूई बी. न्यूमिल्लर अपनी नम्रता, ईमानदारी और गुणवन्ता के प्रति समर्पण के लिए विख्यात थे। Caterpillar Tractor Company के अध्यक्ष के रूप में सन १९४१-५४ तक उन्होंने दूसरे विश्वयुद्ध के चुनौती भरे समय के दौरान ज़मीन-ढुलाई के लिए भारी मशीनें बनाने वाली अपनी कंपनी का कुशल नेतृत्व किया और विश्व स्तर पर उसके कार्य को बढ़ाया। अपनी पुस्तक In Their Time: The Greatest Buisness Leaders of the Twentieth Century में लेखक मेयो और नौहिरा ने लूई न्यूमिल्लर के नेतृत्व को "सफल - बैग़र धूमधाम के" कहा। उन लेखकों के अनुसार, न्यूमिल्लर की महानता का चिन्ह था कि उन्होंने अपने व्यवसाय में से अपनी पहचान मिटा दी थी, बस अपनी कंपनी ही को पहचान और प्रशंसा का पात्र बना दिया था; उन्होंने नायक होने का गौरव कंपनी को दे दिया ना कि अपने लिए रखा।

   ऐसी ही निस्वार्थ सेवा का गुण हम परमेश्वर के वचन बाइबल के एक नायक यूहन्ना बप्तिस्मा देने वाले में पाते हैं। यूहन्ना एक गतिशील और प्रबल प्रचारक था किंतु उसने कभी अपने प्रचार और जीवन के उद्देश्य से नज़र नहीं हटाई। बार बार उसने अपने अनुयायियों और लोगों से कहा कि वह प्रभु यीशु मसीहे के लिए मार्ग तैयार करने आया है; वह मसीह नहीं है। जब यूहन्ना के अनुयायियों ने आकर यूहन्ना से शिकायत करी कि वह यीशु जिसे उसने बप्तिस्मा दिया अब स्वयं लोगों को बप्तिस्मा दे रहा है और चेले बना रहा है, तो यूहन्ना ने उन को उत्तर दिया: "तुम तो आप ही मेरे गवाह हो, कि मैं ने कहा, मैं मसीह नहीं, परन्‍तु उसके आगे भेजा गया हूं। अवश्य है कि वह बढ़े और मैं घटूं" (यूहन्ना ३:२८, ३०)।

   प्रभु यीशु मसीह के अनुयायी होने के नाते हम मसीही विश्वासियों के जीवन का उद्देश्य है कि हम अपने जीवनों द्वारा प्रभु यीशु को ऊँचे पर उठाएं, उसे ही महिमा दें ना कि मसीह के नाम में अपने लिए आदर और महिमा पाने की लालसा रखें। यदि मसीह के कार्य में और उसके लिए गवाही के जीवन में संसार में हमारी या हमारे कामों की पहचान नहीं भी होती है या अनदेखी होती है, तौ भी इससे खिन्न होने की बजाए, हमें फिर भी आनन्दित रहना चाहिए कि हमारे प्रभु के नाम को आदर और महिमा प्राप्त हुई; क्योंकि वास्तविक और हम सब का नायक तो वही है। हमारा प्रभु हमारे प्रत्येक कार्य और प्रत्येक बात को जानता है और समय आने पर हमें उनके योग्य प्रतिफल भी देगा, जो संसार से मिलने वाली किसी भी ख्याती से कहीं अधिक बढ़कर होंगे।

   संसार में उस वास्तविक नायक प्रभु यीशु मसीह को आदर और महिमा देना, उसके सच्चे और निस्वार्थ गवाह बनना और उसके समय की प्रतीक्षा करना ही हमारी महानता का चिन्ह है। - डेविड मैक्कैसलैंड


महान मसीही विश्वासी वही है जो अपने आप को गौण करके अपने जीवन में सारा आदर, महिमा और महानता सदा प्रभु यीशु को देता है।

अवश्य है कि वह बढ़े और मैं घटूं। - यूहन्ना ३:३०

बाइबल पाठ: यूहन्ना ३:२२-३१
Joh 3:22  इस के बाद यीशु और उसके चेले यहूदिया देश में आए, और वह वहां उन के साथ रहकर बपतिस्मा देने लगा।
Joh 3:23 और यूहन्ना भी शालेम् के निकट ऐनोन में बपतिस्मा देता था। क्‍योंकि वहां बहुत जल था और लोग आकर बपतिस्मा लेते थे।
Joh 3:24 क्‍योंकि यूहन्ना उस समय तक जेलखाने में नहीं डाला गया था।
Joh 3:25  वहां यूहन्ना के चेलों का किसी यहूदी के साथ शुद्धि के विषय में वाद-विवाद हुआ।
Joh 3:26 और उन्‍होंने यूहन्ना के पास आकर उस से कहा, हे रब्‍बी, जो व्यक्ति यरदन के पार तेरे साथ था, और जिस की तू ने गवाही दी है देख, वह बपतिस्मा देता है, और सब उसके पास आते हैं।
Joh 3:27 यूहन्ना ने उत्तर दिया, जब तक मनुष्य को स्‍वर्ग से न दिया जाए तब तक वह कुछ नहीं पा सकता।
Joh 3:28 तुम तो आप ही मेरे गवाह हो, कि मैं ने कहा, मैं मसीह नहीं, परन्‍तु उसके आगे भेजा गया हूं।
Joh 3:29 जिस की दुलहिन है, वही दूल्हा है: परन्‍तु दूल्हे का मित्र जो खड़ा हुआ उस की सुनता है, दूल्हे के शब्‍द से बहुत हर्षित होता है; अब मेरा यह हर्ष पूरा हुआ है।
Joh 3:30  अवश्य है कि वह बढ़े और मैं घटूं।
Joh 3:31 जो ऊपर से आता है, वह सर्वोत्तम है, जो पृथ्वी से आता है वह पृथ्वी का है, और पृथ्वी की ही बातें कहता है: जो स्‍वर्ग से आता है, वह सब के ऊपर है।


एक साल में बाइबल: 

  • व्यवस्थाविवरण २८-२९ 
  • मरकुस १४:५४-७२

Thursday, March 15, 2012

प्रतिरक्षा की अंतिम पंक्ति

   अमेरिका के गृह युद्ध में गेट्सीबर्ग, पेन्सिलवेनिया की लड़ाई वह निर्णायक लड़ाई मानी जाती है जिसने युद्ध की दिशा अमेरिका के राष्ट्रवादियों के पक्ष में मोड़ दी थी। उस युद्ध का एक केंद्र बिन्दु था एक चट्टानी क्षेत्र में लड़ा गया युद्ध जहां कर्नल जोशुआ लौरेंस चैम्बरलेन और उनकी सेना २०वीं मेइन इन्फेन्ट्री ने मोर्चा संभाला हुआ था। यदि कॉनफैडेरेट सेना चेम्बरलेन की २०वीं मेइन इन्फेन्ट्री से पार हो पाते तो इतिहासकारों का मानना है कि फिर राष्ट्रवादियों की सेना कॉनफैडरेट सेनाओं से घिर जाती और सम्भवतः फिर वे युद्ध हार जाते। २०वीं मेइन इन्फेन्ट्री उस युद्ध में प्रतिरक्षा की अंतिम पंक्ति साबित हुई जिसने युद्ध को राष्ट्रवादियों के पक्ष में कर दिया।

   मसीह यीशु के अनुयायी भी एक महत्वपूर्ण युद्ध में लगे हैं - शैतान और उसकी सेनाओं और युक्तियों के साथ (इफिसियों ६:११)। इस युद्ध में खड़े रहने के लिए हमें हमारे सेनापति परमेश्वर से उसके हथियार बांध लेने का आवाहन है (इफिसियों ६:१०-१८)।

   गेट्सीबर्ग के उस युद्ध में मनुष्यों कि एक महान किंतु हार सकने की संभावना रखने वाली सेना प्रतिरक्षा की अंतिम पंक्ति बन कर खड़ी हुई थी, किंतु हमारे इस आत्मिक युद्ध में प्रतिरक्षा की हमारी अंतिम पंक्ति भी वही है जो आरंभिक पंक्ति है। हमारी प्रतिरक्षा ऐसी सामर्थ के द्वारा है सृष्टि में जिसका सामना कर सकने वाली और कोई सामर्थ नहीं है। प्रेरित पौलुस रोमियों ८:३१-३९ में बयान करता है कि हमारा एकमात्र और अडिग सहारा है प्रभु यीशु मसीह का हमारे प्रति प्रेम। यह प्रेम हमारा ऐसा सुरक्षाकवच है कि सृष्टि में ऐसी कोई सामर्थ नहीं है जो "हमें परमेश्वर के प्रेम से, जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी" (रोमियों ८:३९)।

   जब कभी शत्रु अति प्रबल नज़र आए और ऐसा लगे कि अब कुछ नहीं हो सकता, तो प्रत्येक मसीही विश्वासी को स्मरण कर लेना चाहिए कि उसकी सुरक्षा की अंतिम पंक्ति इस सृष्टि का सृजनहार है, समस्त सृष्टि में जिसकी सामर्थ से बढ़कर कोई सामर्थ नहीं है, और हम उसके द्वारा जिस ने "हम से प्रेम किया है, जयवन्‍त से भी बढ़कर हैं" (रोमियों ८:३७)। - बिल क्राउडर


परमेश्वर की हर योजना विजय ही की योजना है।

परन्‍तु इन सब बातों में हम उसके द्वारा जिस ने हम से प्रेम किया है, जयवन्‍त से भी बढ़कर हैं। - रोमियों ८:३७
 
बाइबल पाठ: रोमियों ८:३१-३९
Rom 8:31  सो हम इन बातों के विषय में क्‍या कहें यदि परमेश्वर हमारी ओर है, तो हमारा विरोधी कौन हो सकता है
Rom 8:32  जिस ने अपने निज पुत्र को भी न रख छोड़ा, परन्‍तु उसे हम सब के लिये दे दिया: वह उसके साथ हमें और सब कुछ क्‍योंकर न देगा?
Rom 8:33  परमेश्वर के चुने हुओं पर दोष कौन लगाएगा? परमेश्वर वह है जो उनको धर्मी ठहराने वाला है।
Rom 8:34  फिर कौन है जो दण्‍ड की आज्ञा देगा? मसीह वह है जो मर गया वरन मुर्दों में से जी भी उठा, और परमेश्वर की दाहिनी ओर है, और हमारे लिये निवेदन भी करता है।
Rom 8:35  कौन हम को मसीह के प्रेम से अलग करेगा? क्‍या क्‍लेश, या संकट, या उपद्रव, या अकाल, या नंगाई, या जोखिम, या तलवार?
Rom 8:36  जैसा लिखा है, कि तेरे लिये हम दिन भर घात किए जाते हैं; हम वध होने वाली भेंडों की नाईं गिने गए हैं।
Rom 8:37  परन्‍तु इन सब बातों में हम उसके द्वारा जिस ने हम से प्रेम किया है, जयवन्‍त से भी बढ़कर हैं।
Rom 8:38  क्‍योंकि मैं निश्‍चय जानता हूं, कि न मृत्यु, न जीवन, न स्‍वर्गदूत, न प्रधानताएं, न वर्तमान, न भविष्य, न सामर्य, न ऊंचाई,
Rom 8:39  न गहिराई और न कोई और सृष्‍टि, हमें परमेश्वर के प्रेम से, जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी।
एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण २६-२७ 
  • मरकुस १४:२७-५३

Wednesday, March 14, 2012

बेजोड़ विशेषाधिकार

   अमेरिका के भूतपूर्व राष्ट्रपति John F. Kennedy के पुत्र John F. Kennedy Jr. और उनका एक मित्र बिल्ली को अमेरीकी नौसेना के युद्धपोत USS John F. Kennedy पर आने का निमंत्रण मिला। युद्धपोत को दिखने और उसके बारे में बताने के लिए नौसेना का एक कर्मचारी भी उअन्के साथ मार्गदर्शक के रूप में था। घूमते घूमते वे तीनों अनायास हि पोत के एक ऐसे क्षेत्र में पहुँच गए जो दर्शको के लिए वर्जित है। जब एक नौसेना अधिकारी ने उन्हें वहां रोका तो उनके मार्गदर्शक ने John F. Kennedy Jr. की ओर सम्केत करते हुए उस अधिकारी से कहा, "यह इनके पिताजी का पोत है।" यह सुनते ही वह अफसर "सावधान" की मुद्रा में खड़ा हो गया और John F. Kennedy Jr. को सलाम किया। उनके मार्गदर्शक ने बताया कि नौसेना में प्रथा है कि यदि किसी पोत का नाम किसी व्यक्ति के नाम पर रखा जाता है तो वह पोत उसि व्यक्ति का माना जाता है जिसके नाम पर उस पोत का नाम रखा गया। इस कारण क्योंकि उस पोत का नाम John F. Kennedy Jr. के पिता भूतपूर्व राष्ट्रपति John F. Kennedy के नाम पर रखा गया था इस लिए John F. Kennedy Jr. को उस पोत पर कुछ बेजोड़ विशेषाधिकार प्राप्त थे।

   यह एक महत्वपुर्ण आत्मिक सिद्धांत को भी दिखाता है। प्रेरित पौलुस ने लिखा कि मसीही विश्वासी होने के नाते हम, "... यीशु मसीह के द्वारा हम उसके लेपालक पुत्र हों" (इफिसियों १:४-५)। पापों से पश्चाताप और प्रभु यीशु में किए गए विश्वास के बाद जब हम उद्धार प्राप्त करके परमेश्वर के परिवार में सम्मिलित हो जाते हैं तो हम मसीही विश्वासियों को भी परमेश्वर की संतान होने के बेजोड़ विशेषाधिकार मिल जाते हैं। अब हमारी देह परमेश्वर के पवित्र आत्मा का मंदिर हो जाती है, और वह हम में वास करता है (१ कुरिन्थियों ६:१९-२०); हमें परमेश्वर को "हे अब्बा, हे पिता" कहकर पुकारने का अधिकार मिल जाता है (रोमियों ८:१५); हम मसीह यीशु के संगी वारिस बनाए गए हैं (रोमियों ८:१७); अब जो हम में है वह उस से जो संसार में है बड़ा है (१ युहन्ना ४:४); परमेश्वर सदा ही हमें मसीह यीशु में जय के उत्सव में लिए चलता है (२ कुरिन्थियों २:१४) और परमेश्वर के स्वर्गदूत हमारी सेवा-टहल करने वाली आत्माएं बन जाते हैं (इब्रानियों १:१३-१४)।

   जीवन की चुनौतियों से भरी राह में हम इन सभी बातों से सामर्थ ले सकते हैं तथा किसी भी मसीही विश्वासी को कभी निराशा का जीवन जीने या हारा हुआ महसूस करने की कोई आवश्यक्ता नहीं है। - डेनिस फिशर


मसीही विश्वासी की मीरास अनन्त काल के लिए निश्चित है।
और अपनी इच्‍छा की सुमति के अनुसार हमें अपने लिये पहिले से ठहराया, कि यीशु मसीह के द्वारा हम उसके लेपालक पुत्र हों - इफिसियों १:५
बाइबल पाठ: रोमियों ८:१२-१७
Rom 8:12  सो हे भाइयो, हम शरीर के कर्जदार नहीं, ताकि शरीर के अनुसार दिन काटें।
Rom 8:13 क्‍योंकि यदि तुम शरीर के अनुसार दिन काटोगे, तो मरोगे, यदि आत्मा से देह की क्रियाओं को मारोगे, तो जीवित रहोगे।
Rom 8:14  इसलिये कि जितने लोग परमेश्वर के आत्मा के चलाए चलते हैं, वे ही परमेश्वर के पुत्र हैं।
Rom 8:15 क्‍योंकि तुम को दासत्‍व की आत्मा नहीं मिली, कि फिर भयभीत हो परन्‍तु लेपालकपन की आत्मा मिली है, जिस से हम हे अब्‍बा, हे पिता कहकर पुकारते हैं।
Rom 8:16 आत्मा आप ही हमारी आत्मा के साथ गवाही देता है, कि हम परमेश्वर की सन्‍तान हैं।
Rom 8:17 और यदि सन्‍तान हैं, तो वारिस भी, वरन परमेश्वर के वारिस और मसीह के संगी वारिस हैं, जब कि हम उसके साथ दुख उठाएं कि उसके साथ महिमा भी पाएं।
एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण २३-२५ 
  • मरकुस १४:१-२६

Tuesday, March 13, 2012

सुरक्षित हाथ


   मैनचेस्टर युनाइटिड फुटबॉल टीम के गोलरक्षक एडविन वैन डर सार के हाथ बहुत सुरक्षित हाथ थे। उसने अपनी टीम के गोल में गेंद को १०३२ मिनिट तक जाने नहीं दिया, जो एक ही फुटबॉल खेलने के समय-काल में बनाया गया विश्व रिकॉर्ड है। इसका अर्थ है कि एडविन ने ९० मिनिट के खेल वाले लगभग १५ खेलों में गेंद को अपने गोल में आने नहीं दिया, यानि, उतने समय तक कोई उसकी टीम के खिलाफ एक भी गोल नहीं कर सका। उसका यह रिकॉर्ड तब टूटा जब मार्च २००६ में प्रतिद्वन्दी टीम एक गोल करने पाई।

   भजनकार दाउद ने भी सबसे सुरक्षित हाथों में सांत्वना पाई - परमेश्वर के हाथों में। उसने भजन १३८ में परमेश्वर से मिलने वाली सुरक्षा के बारे में लिखा: "चाहे मैं संकट के बीच में रहूं तौभी तू मुझे जिलाएगा, तू मेरे क्रोधित शत्रुओं के विरूद्ध हाथ बढ़ाएगा, और अपने दाहिने हाथ से मेरा उद्धार करेगा" (भजन १३८:७)। दाउद के समान हम भी परमेश्वर की ओर देख सकते हैं, उसके सबसे सुरक्षित हाथों में प्रत्येक खतरे और पराजय के भय से बच कर रह सकते हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु ने भी उन सुरक्षित हाथों के विष्य में अपने चेलों को आश्वस्त किया: "मेरी भेड़ें मेरा शब्‍द सुनती हैं, और मैं उन्‍हें जानता हूं, और वे मेरे पीछे पीछे चलती हैं। और मैं उन्‍हें अनन्‍त जीवन देता हूं, और वे कभी नाश नहीं होंगी, और कोई उन्‍हें मेरे हाथ से छीन न लेगा। मैं और पिता एक हैं" (यूहन्ना १०:२७-३०)।

   प्रभु यीशु के एक अन्य चेले यहूदा ने भी अपनी पत्री में लिखा: "अब जो तुम्हें ठोकर खाने से बचा सकता है, और अपनी महिमा की भरपूरी के साम्हने मगन और निर्दोष करके खड़ा कर सकता है। उस अद्वैत परमेश्वर हमारे उद्धारकर्ता की महिमा, और गौरव, और पराक्रम, और अधिकार, हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा जैसा सनातन काल से है, अब भी हो और युगानुयुग रहे। आमीन" (यहूदा १:२४-२५)। इसका यह तात्पर्य नहीं है कि हम मसीही विश्वासियों को कभी कोई ठोकर नहीं लगेगी, वरन यह कि संसार हमें चाहे जैसे भी गिराने या नुकसान पहुँचाने की कोशिश करे, हम परमेश्वर के सुरक्षित हाथों के बाहर कभी नहीं जा सकते, हमारा स्थाई नुकसान कभी नहीं हो सकता, कोई हमें परमेश्वर से दूर नहीं कर सकता।

   परमेश्वर के सुरक्षित हाथ वे हाथ हैं जो कभी असफल नहीं हो सकते; कभी नहीं, किसी हाल नहीं। क्या आपने अपने आप को उन सुरक्षित हाथों की सुरक्षा में समर्पित कर दिया है? - सी.पी.हीया


परमेश्वर के हाथों से अधिक सुरक्षित और कोई स्थान नहीं है।


चाहे मैं संकट के बीच में रहूं तौभी तू मुझे जिलाएगा, तू मेरे क्रोधित शत्रुओं के विरूद्ध हाथ बढ़ाएगा, और अपने दाहिने हाथ से मेरा उद्धार करेगा। - भजन १३८:७


बाइबल पाठ: भजन १३८
Psa 138:1  मैं पूरे मन से तेरा धन्यवाद करूंगा, देवताओं के साम्हने भी मैं तेरा भजन गाऊंगा।
Psa 138:2  मैं तेरे पवित्र मन्दिर की ओर दण्डवत् करूंगा, और तेरी करूणा और सच्चाई के कारण तेरे नाम का धन्यवाद करूंगा; क्योंकि तू ने अपने वचन को अपने बड़े नाम से अधिक महत्व दिया है।
Psa 138:3  जिस दिन मैं ने पुकारा, उसी दिन तू ने मेरी सुन ली, और मुझ में बल देकर हियाव बन्धाया।
Psa 138:4  हे यहोवा, पृथ्वी के सब राजा तेरा धन्यवाद करेंगे, क्योंकि उन्होंने तेरे वचन सुने हैं;
Psa 138:5  और वे यहोवा की गति के विषय में गाएंगे, क्योंकि यहोवा की महिमा बड़ी है।
Psa 138:6  यद्यपि यहोवा महान है, तौभी वह नम्र मनुष्य की ओर दृष्टि करता है, परन्तु अहंकारी को दूर ही से पहिचानता है।
Psa 138:7  चाहे मैं संकट के बीच में रहूं तौभी तू मुझे जिलाएगा, तू मेरे क्रोधित शत्रुओं के विरूद्ध हाथ बढ़ाएगा, और अपने दाहिने हाथ से मेरा उद्धार करेगा।
Psa 138:8  यहोवा मेरे लिये सब कुछ पूरा करेगा; हे यहोवा, तेरी करूणा सदा की है। तू अपने हाथों के कार्यों को त्याग न दे।


एक साल में बाइबल: 

  • व्यवस्थाविवरण २०-२२ 
  • मरकुस १३:२१-३७

Monday, March 12, 2012

सामूहिक लक्ष्य

   अमेरिका में उल्लू की एक जाति Spotted Owl लुप्त होती जा रही है। पहले सोचा जा रहा था कि ऐसा पुराने पेड़ों के काटे जाने के कारण है, क्योंकि उनके खोखलों में उल्लु अपना घोंसला बनाते हैं। किंतु नए शोध से जो बात सामने आई वह बिलकुल भिन्न है। इन उल्लुओं के लुप्त होने का कारण उनकी ही एक और जाति कि उपस्थिति है। पिछले १५ वर्षों से उल्लु की एक और जाति Barred Owl तेज़ी से पश्चिम की ओर बढ़ रही है, उसी इलाके में जहाँ Spotted Owl पहले से ही रहते आए हैं। ये नए आगंतुक Barred Owl, वो ही भोजन लेते हैं जो वहाँ पहले ही से रहने वाले Spotted Owl लेते हैं; क्योंकि ये नए आगंतुक स्वभाव में पुराने बसने वाले उल्लुओं से अधिक आक्रमणकारी हैं और अपने आप को परिस्थितियों के अनुसार ढालने में अधिक सक्षम हैं, इसलिए वे पुरानों से अधिक भोजन पा लेते हैं और इस कारण पुराने रहने वाले Spotted Owl भोजन के आभाव में घटते जा रहे हैं। उल्लुओं की यह परस्पर सपर्धा चाहे एक के लिए लाभकारी हो किंतु दूसरे के लिए विनाशकारी होती जा रही है, और अन्ततः कुल मिलाकर नुकसान उल्लु जाति का ही हो रहा है।

   इसी प्रकार से, मसीही विश्वासियों में भी, उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती चर्च के बाहर के लोगों से नहीं वरन अन्य विश्वासियों ही से आती है, जब वे आपसी तालमेल में कार्य करने की बजाए एक दूसरे से स्पर्धा करने लगते हैं, एक दुसरे के कार्य क्षेत्र में दखलांदाज़ी करने लगते हैं।

   ऐसा ही कुछ कुरिन्थुस की कलीसिया में भी हो रहा था। प्रेरित पौलुस ने उन्हें इस विभाजन और मतभेद की आत्मा में होकर कार्य करने के बारे में लिखा और चिताया, जो उस मण्डली की एकता और बढोतरी को प्रभावित कर रही थी। उसने उन्हें समझाया कि आवश्यक्ता है कि सब लोग आवश्यक बातों पर ध्यान लगा कर उनके पालन में एक होकर रहें ना कि अनावश्यक बातों पर ध्यान और समय बरबाद करके अकारण आपसी विवाद और मतभेदों में पड़ें।

   कुरिन्थुस के लोगों ने विभिन्न मसीही अगुवों के नाम पर अपने आप को बाँट लिया था। कोई अपने आप को पौलुस का अनुयायी कहता था तो कोई अपौलुस का तो कोई अन्य अपने आप को पतरस का अनुयायी कहता था, कोई कोई मसीह का अनुयायी होने की भी बात कर लेता था। ऐसा कर के वे अपने मनपसन्द अगुवे को अपने उद्धारकर्ता मसीह यीशु से भी प्रमुख स्थान देने लगे थे और मसीह में एक होकर मसीह के लिए कार्य करने की बजाए, अपने अगुवों के नाम पर गुटबाज़ी करके अपनी प्राथमिकताएं मसीह के कार्य से हटाने लगे थे।

   पौलुस ने उन्हें समझाया कि वह एक अनिवार्य कार्य जो प्रत्येक मसीही विश्वासी के लिए है, सुसमाचार का प्रचार है। यही हमारा सामूहिक उद्देश्य है, इसी के लिए हम सब मसीही विश्वासी हैं और इसी से मसीही मण्डली की बढ़ोतरी है। आपसी विभाजन से इस कार्य में बाधा आएगी, सुसमाचार प्रचार रुक जाएगा और मसीही विश्वासियों की बढ़ोतरी भी रुक जाएगी।

   प्रभु यीशु में साधारण विश्वास और पापों से पश्चाताप द्वारा सेंतमेंत मिलने उद्धार का प्रचार ही प्रत्येक मसीही विशवासी का निर्धारित लक्ष्य है। इस सामूहिक लक्ष्य की प्राप्ति में किसी व्यक्तिगत बात या अहं को आड़े ना आने दें; अन्यथा एक के बढ़ने और दूसरे के घटने से भी अन्ततः नुकसान मसीही विश्वासियों ही का होगा। - मार्विन विलियम्स


संगठित विश्वासी मण्डली ही सक्षम और सामर्थी मण्डली भी है।

हे भाइयो, मैं तुम से यीशु मसीह जो हमारा प्रभु है उसके नाम के द्वारा बिनती करता हूं, कि तुम सब एक ही बात कहो; और तुम में फूट न हो, परन्‍तु एक ही मन और एक ही मत होकर मिले रहो। - १ कुरिन्थियों १:१०


बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों १:९-१८
1Co 1:9 परमेश्वर सच्‍चा है, जिस ने तुम को अपने पुत्र हमारे प्रभु यीशु मसीह की संगति में बुलाया है।
1Co 1:10 हे भाइयो, मैं तुम से यीशु मसीह जो हमारा प्रभु है उसके नाम के द्वारा बिनती करता हूं, कि तुम सब एक ही बात कहो; और तुम में फूट न हो, परन्‍तु एक ही मन और एक ही मत होकर मिले रहो।
1Co 1:11 क्‍योंकि हे मेरे भाइयों, खलोए के घराने के लोगों ने मुझे तुम्हारे विषय में बताया है, कि तुम में झगड़े हो रहे हैं।
1Co 1:12  मेरा कहना यह है, कि तुम में से कोई तो अपने आप को पौलुस का, कोई अपुल्लोस का, कोई कैफा का, कोई मसीह का कहता है।
1Co 1:13 क्‍या मसीह बंट गया? क्‍या पौलुस तुम्हारे लिये क्रूस पर चढ़ाया गया या तुम्हें पौलुस के नाम पर बपतिस्मा मिला?
1Co 1:14 मैं परमेश्वर का धन्यवाद करता हूं, कि क्रिस्‍पुस और गयुस को छोड़, मैं ने तुम में से किसी को भी बपतिस्मा नहीं दिया।
1Co 1:15  कहीं ऐसा न हो, कि कोई कहे, कि तुम्हें मेरे नाम पर बपतिस्मा मिला।
1Co 1:16 और मैं ने स्‍तिफनास के घराने को भी बपतिस्मा दिया; इन को छोड़, मैं नहीं जानता कि मैं ने और किसी को बपतिस्मा दिया।
1Co 1:17 क्‍योंकि मसीह ने मुझे बपतिस्मा देने को नहीं, वरन सुसमाचार सुनाने को भेजा है, और यह भी शब्‍दों के ज्ञान के अनुसार नहीं, ऐसा न हो कि मसीह का क्रूस व्यर्थ ठहरे।
1Co 1:18  क्‍योंकि क्रूस की कथा नाश होने वालों के निकट मूर्खता है, परन्‍तु हम उद्धार पाने वालों के निकट परमेश्वर की सामर्थ है।


एक साल में बाइबल: 

  • व्यवस्थाविवरण १७-१९ 
  • मरकुस १३:१-२०

Sunday, March 11, 2012

परमेश्वर की करुणा

   "परमेश्वर की छोटी से छोटी करुणा के भी अयोग्य" - ये वे शब्द थे तो १७वीं सदी के कवि और पादरी जौर्ज हर्बर्ट ने अपनी अंगूठी पर खुदवा रखे थे, और यही वाक्यांश था जिसके प्रयोग के साथ वह अपनी पुस्तकें और पत्र हस्ताक्षरित करता था। ये शब्द परमेश्वर के वचन बाइबल के एक नायक याकूब द्वारा कहे गए शब्दों पर आधारित हैं। याकूब ने अपने पाप और शर्मनाक व्यवहार के बावजुद जब अपने प्रति परमेश्वर कि बनी हुई करुणा पर विचार किया तो कहा: "...हे यहोवा, हे मेरे दादा इब्राहीम के परमेश्वर, तू ने तो मुझ से कहा, कि अपने देश और जन्मभूमि में लौट जा, और मैं तेरी भलाई करूंगा; तू ने जो जो काम अपनी करूणा और सच्चाई से अपने दास के साथ किए हैं, कि मैं जो अपनी छड़ी ही लेकर इस यरदन नदी के पार उतर आया, सो अब मेरे दो दल हो गए हैं, तेरे ऐसे ऐसे कामों में से मैं एक के भी योग्य तो नहीं हूं" (उत्पत्ति ३२:९-१०)।

   करुणा के लिए मूल इब्रानी भाषा में जो शब्द याकूब ने प्रयोग किया था वह है chesed, जिसका तात्पर्य परमेश्वर के लगातार बने रहने प्रेम और दया से है। यह महत्वपूर्ण है कि यह बात ऐसे मनुष्य के हृदय से निकली जो अपने आप को इसके लिए सर्वथा अयोग्य जानता था।

   परमेश्वर के प्रेम पर पूर्ण्तया आधारित होकर याकूब इससे अगले ही वाक्य में पुकारता है, "मुझे छुड़ा ले!" विचारों का कैसा विरोधाभास - एक ओर वह अपने आप को परमेश्वर कि करुणा के सर्वथा अयोग्य कह रहा है, किंतु साथ ही उस से ही विपत्तियों से अपने छुड़ाए जाने की गुहार भी लगा रहा है। याकूब जानता था कि उसके पाप ने सब कुछ जो उसके पास है उसे परमेश्वर के उपयोग के लिए दूषित और अयोग्य कर दिया है; उसके पास ऐसा कुछ भी नहीं है जिसके आधार पर वह परमेश्वर को अपनी सहायता के लिए मना सके। उसने अपने आप को परमेश्वर की करुणा और अनुग्रह के अयोग्य व्यक्ति स्वीकार कर लिया। लेकिन परमेश्वर को लगाई गई उसकी गुहार उसकी अपनी किसी योग्यता पर आधारित नहीं थी वरन परमेश्वर की प्रतिज्ञा पर आधारित थी कि वह हर उस व्यक्ति पर अनुग्रह करेगा जो उसकी करुणा के आसरे पर अपने आप को छोड़ देता है। नम्रता और टूटा तथा पिसा हुआ मन ही वह कुंजी है जो परमेश्वर के हृदय द्वार को खोल देती है।

   जैसे उसने याकूब के साथ किया, आज परमेश्वर हमारी पुकार भी सुनता है, जब हम अपनी किसी योग्यता या किसी सामर्थ या किसी उपलब्धि के सहारे नहीं वरन नम्र और दीन होकर, अपने पापों तथा अयोग्यता को स्वीकार करते हुए, उसकी करुणा पर अपने आप को छोड़ देते हैं, क्षमा याचना के साथ उसके अनुग्रह की गुहार लगाते हैं। - डेविड रोपर


अनुग्रह, परमेश्वर द्वारा, उसके सर्वथा अयोग्य व्यक्ति को दिया जाने वाला वह दान है जो वह व्यक्ति किसी रीति से कभी कमा नहीं सकता।

...तेरे ऐसे ऐसे कामों में से मैं एक के भी योग्य तो नहीं हूं। - उत्पत्ति ३२:१०
बाइबल पाठ: उत्पत्ति ३२:३-१३
Gen 32:3 तब याकूब ने सेईर देश में, अर्थात एदोम देश में, अपने भाई एसाव के पास अपने आगे दूत भेज दिए।
Gen 32:4  और उस ने उन्हें यह आज्ञा दी, कि मेरे प्रभु एसाव से यों कहना; कि तेरा दास याकूब तुझ से यों कहता है, कि मैं लाबान के यहां परदेशी होकर अब तक रहा;
Gen 32:5  और मेरे पास गाय-बैल, गदहे, भेड़-बकरियां, और दास-दासियां है: सो मैं ने अपने प्रभु के पास इसलिये संदेशा भेजा है, कि तेरी अनुग्रह की दृष्टि मुझ पर हो।
Gen 32:6  वे दूत याकूब के पास लौट के कहने लगे, हम तेरे भाई एसाव के पास गए थे, और वह भी तुझ से भेंट करने को चार सौ पुरूष संग लिये हुए चला आता है।
Gen 32:7  तब याकूब निपट डर गया, और संकट में पड़ा : और यह सोचकर, अपने संगवालों के, और भेड़-बकरियों, और गाय-बैलों, और ऊंटो के भी अलग अलग दो दल कर लिये,
Gen 32:8  कि यदि एसाव आकर पहिले दल को मारने लगे, तो दूसरा दल भाग कर बच जाएगा।
Gen 32:9  फिर याकूब ने कहा, हे यहोवा, हे मेरे दादा इब्राहीम के परमेश्वर, तू ने तो मुझ से कहा, कि अपने देश और जन्मभूमि में लौट जा, और मैं तेरी भलाई करूंगा :
Gen 32:10  तू ने जो जो काम अपनी करूणा और सच्चाई से अपने दास के साथ किए हैं, कि मैं जो अपनी छड़ी ही लेकर इस यरदन नदी के पार उतर आया, सो अब मेरे दो दल हो गए हैं, तेरे ऐसे ऐसे कामों में से मैं एक के भी योग्य तो नहीं हूं।
Gen 32:11  मेरी बिनती सुनकर मुझे मेरे भाई एसाव के हाथ से बचा : मैं तो उस से डरता हूं, कहीं ऐसा ने हो कि वह आकर मुझे और मां समेत लड़कों को भी मार डाले।
Gen 32:12  तू ने तो कहा है, कि मैं निश्चय तेरी भलाई करूंगा, और तेरे वंश को समुद्र की बालू के किनकों के समान बहुत करूंगा, जो बहुतायत के मारे गिने नहीं जो सकते।

एक साल में बाइबल: 

  • व्यवस्थाविवरण १४-१६ 
  • मरकुस १२:२८-४४




Saturday, March 10, 2012

याद्दाश्त

   जिल प्राईस की याद्दाश्त विलक्षण है और वैज्ञानिक उससे चकित हैं। सन २००६ में एक वैज्ञानिक पत्रिका में उसकी विलक्षण याद्दाश्त के बारे में लेख छपा: "A Case of Unusual Autobiographical Remembering" (असाधारण आपबीती बातों को स्मरण रखने की क्षमता)। जिल प्राइस के पास शब्दों, संख्याओं, घटनाओं या भाषाओं को याद करने की कोई विशेष क्षमता नहीं है। लेकिन पिछले ३० वर्षों में जो भी उसके साथ किसी भी दिन हुआ है, वह उसे पूर्णतः याद रहता है। आप कोई भी तारीख बोल दीजिए, जिल उसका स्पताह का दिन, उस दिन का मौसम, उस दिन उसने क्या खाया था, कौन से टी.वी. प्रोग्राम देखे थे, किन लोगों से क्या बातचीत करी थी, सब कुछ सही सही बता देगी।

   हम में से शायद ही कोई होगा जिसके पास ऐसी याद्दाश्त है। इसीलिए हमें अपने कार्यों को करने, अपने कार्य के लिए किए गए समय निर्धारण आदि को स्मरण दिलाने के लिए सहायता की आवश्यक्ता रहती है। यह स्मरण दिलाने की बात और भी आवश्यक हो जाती है जब बात आत्मिक सच्चाईयों की हो। प्रेरित पतरस ने दिखाया कि वह इस आत्मिक बातों के स्मरण दिलाए जाने की आवश्यक्ता को भली प्रकार से समझता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में उसने अपनी पत्री में लिखा: "इसलिये यद्यपि तुम ये बातें जानते हो, और जो सत्य वचन तुम्हें मिला है, उस में बने रहते हो, तौभी मैं तुम्हें इन बातों की सुधि दिलाने को सर्वदा तैयार रहूंगा। और मैं यह अपने लिये उचित समझता हूं, कि जब तक मैं इस डेरे में हूं, तब तक तुम्हें सुधि दिलाकर उभारता रहूं" (२ पतरस १:१२-१३)।

   हमारी याद्दाश्त चाहे जैसी भी हो, परमेश्वर के वचन और बातें स्मरण दिलाए जाते रहने की आवश्यक्ता हमें सदा रहेगी। परमेश्वर के वचन का अध्ययन - प्रतिदिन व्यक्तिगत रीति से एवं समयानुसार छोटे से गुट के साथ सामूहिक रूप में, किसी स्थानीय चर्च के कार्यों में अपने आप को सम्मिलित करना आदि वे सहायक हैं जो हमें परमेश्वर के वचन की अत्यन्त आवश्यक बातों को स्मरण दिलाते रहेंगे और परमेश्वर की संगति में बनाए रखेंगे।

   यही हमारे उद्धारकर्ता प्रभु यीशु से हमारे प्रेम का सच्चा प्रगटीकरण भी है, जैसा उसने स्वयं कहा: "जिस के पास मेरी आज्ञा है, और वह उन्‍हें मानता है, वही मुझ से प्रेम रखता है, और जो मुझ से प्रेम रखता है, उस से मेरा पिता प्रेम रखेगा, और मैं उस से प्रेम रखूंगा, और अपने आप को उस पर प्रगट करूंगा। यीशु ने उस को उत्तर दिया, यदि कोई मुझ से प्रेम रखे, तो वह मेरे वचन को मानेगा, और मेरा पिता उस से प्रेम रखेगा, और हम उसके पास आएंगे, और उसके साथ वास करेंगे" (यूहन्ना १४:२१, २३)। - डेनिस फिशर



होने दें कि परमेश्वर का वचन आपकी याद्दाश्त में भर जाए, आपके हृदय पर राज्य करे और आपके कदमों का मार्गदर्शन करता रहे।

इसलिये यद्यपि तुम ये बातें जानते हो, और जो सत्य वचन तुम्हें मिला है, उस में बने रहते हो, तौभी मैं तुम्हें इन बातों की सुधि दिलाने को सर्वदा तैयार रहूंगा। - २ पतरस १:१२

बाइबल पाठ: २ पतरस १:५-१६
2Pe 1:5 और इसी कारण तुम सब प्रकार का यत्‍न करके, अपने विश्वास पर सद्गुण, और सद्गुण पर समझ।
2Pe 1:6  और समझ पर संयम, और संयम पर धीरज, और धीरज पर भक्ति।
2Pe 1:7  और भक्ति पर भाईचारे की प्रीति, और भाईचारे की प्रीति पर प्रेम बढ़ाते जाओ।
2Pe 1:8 क्‍योंकि यदि ये बातें तुम में वर्तमान रहें, और बढ़ती जाएं, तो तुम्हें हमारे प्रभु यीशु मसीह के पहचानने में निकम्मे और निष्‍फल न होने देंगी।
2Pe 1:9 और जिस में ये बातें नहीं, वह अन्‍धा है, और धुन्‍धला देखता है, और अपने पूर्वकाली पापों से धुलकर शुद्ध होने को भूल बैठा है।
2Pe 1:10 इस कारण हे भाइयों, अपने बुलाए जाने, और चुन लिये जाने को सिद्ध करने का भली भांति यत्‍न करते जाओ, क्‍योंकि यदि ऐसा करोगे, तो कभी भी ठोकर न खाओगे।
2Pe 1:11 वरन इस रीति से तुम हमारे प्रभु और उद्धारकर्ता यीशु मसीह के अनन्‍त राज्य में बड़े आदर के साथ प्रवेश करने पाओगे।
2Pe 1:12  इसलिये यद्यपि तुम ये बातें जानते हो, और जो सत्य वचन तुम्हें मिला है, उस में बने रहते हो, तौभी मैं तुम्हें इन बातों की सुधि दिलाने को सर्वदा तैयार रहूंगा।
2Pe 1:13  और मैं यह अपने लिये उचित समझता हूं, कि जब तक मैं इस डेरे में हूं, तब तक तुम्हें सुधि दिला कर उभारता रहूं।
2Pe 1:14  क्‍योंकि यह जानता हूं, कि मसीह के वचन के अनुसार मेरे डेरे के गिराए जाने का समय शीघ्र आने वाला है।
2Pe 1:15  इसलिये मैं ऐसा यत्‍न करूंगा, कि मेरे कूच करने के बाद तुम इन सब बातों को सर्वदा स्मरण कर सको।
2Pe 1:16  क्‍योंकि जब हम ने तुम्हें अपने प्रभु यीशु मसीह की सामर्थ का, और आगमन का समाचार दिया था तो वह चतुराई से गढ़ी हुई कहानियों का अनुकरण नहीं किया था वरन हम ने आप ही उसके प्रताप को देखा था।
 
एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण ११-१३ 
  • मरकुस १२:१-२७