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Saturday, April 30, 2016

बहुत देर


   ऐसा लगभग प्रत्येक सत्र में होता है; मैं कॉलेज में प्रवेश लेने वाले आरंभिक विद्यार्थियों की कक्षा को यह बड़े स्पष्ट रीति से बताता और समझाता हूँ कि स्त्र के अंत में उत्तीर्ण होने के लिए उन्हें घर पर करने के लिए दिए जाने वाले उन अनेक लेखन कार्यों को समय से पूरा करते तथा आँकलन के लिए समय से जमा करते रहना होगा। लेकिन लगभग प्रत्येक सत्र में कुछ विद्यार्थी ऐसे होते हैं जो मेरी बात पर विश्वास नहीं करते, अपना कार्य समय रहते पूरा करके आँकलन के लिए जमा नहीं करते, और फिर सत्र की अन्तिम कक्षा के बाद वे मुझे विन्ती और मजबूरी के ईमेल भेज कर मुझे समझाने के प्रयास करते हैं कि वे क्यों अपना कार्य समय रहते पूरा नहीं करने पाए। मुझे ऐसा करना बिलकुल अच्छा नहीं लगता, किंतु मुझे उन्हें कहना पड़ता है कि, "क्षमा करें; अब बहुत देर हो चुकी हैं, समय निकल गया और आप इस सत्र में अनुत्तीर्ण हो गए हैं।"

   एक नए विद्यार्थी के लिए यह एहसास, कि उसके हज़ारों डॉलर और समय खर्च भी हो गए और व्यर्थ भी हो गए काफी बुरा है; लेकिन इससे भी कहीं अधिक गंभीर और अटल वह बात है जब अपनी अंतिम श्वास के समय तक लोग परमेश्वर के साथ अपने पापों और अपने संबंधों का समाधान नहीं करते, जबकि परमेश्वर बारंबार उन्हें इसका अवसर और उपाय देता रहता है। जो लोग इस जीवन में परमेश्वर के साथ रहने का निर्णय नहीं लेते, वे फिर अनन्तकाल तक कभी परमेश्वर के साथ रहने नहीं पाएंगे, वरन उनका भाग अनन्तकाल तक परमेश्वर से दूर ही रहेगा।

   उस व्यक्ति के लिए वह कितना भयानक पल होता है जब वह परमेश्वर प्रभु यीशु के सामने अपने जीवन का हिसाब देने को खड़ा हो, और प्रभु को उससे कहना पड़े, "तब मैं उन से खुलकर कह दूंगा कि मैं ने तुम को कभी नहीं जाना, हे कुकर्म करने वालों, मेरे पास से चले जाओ" (मत्ती 7:23)। परमेश्वर के वचन बाइबल का लेखक इब्रानियों के नाम लिखी पत्री में पाठकों को सचेत करता है कि वे उस अनन्त विश्राम और आनन्द से जो परमेश्वर अपने लोगों को देना चाहता है वंचित ना रह जाएं (इब्रानियों 4:1)। आज और अभी भी आपके लिए ’बहुत देर’ नहीं हुई है; यदि अभी तक आपने अपने पापों के लिए क्षमा माँग कर अपना जीवन प्रभु यीशु को समर्पित नहीं किया है, तो ऐसा अभी कर लें; प्रभु यीशु सारे संसार के सभी लोगों को सेंत-मेंत क्षमा और उद्धार दे रहा है। आज उसके इस प्रस्ताव को ठुकराना, बाद में अनन्तकाल की पीड़ा को स्वीकारना है। कहीं ऐसा ना हो कि जब तक यह बात समझ में आए, आप के लिए बहुत देर हो चुकी हो। - डेव ब्रैनन


कलवरी के क्रूस पर प्रभु यीशु का बलिदान और तीसरे दिन उसका मृतकों में से पुनरुत्थान, 
पापों की गंभीरता और परमेश्वर की क्षमा तथा प्रेम की वास्तविकता का प्रमाण है।

जैसा कहा जाता है, कि यदि आज तुम उसका शब्द सुनो, तो अपने मनों को कठोर न करो, जैसा कि क्रोध दिलाने के समय किया था। - इब्रानियों 3:15

बाइबल पाठ: इब्रानियों 4:1-11
Hebrews 4:1 इसलिये जब कि उसके विश्राम में प्रवेश करने की प्रतिज्ञा अब तक है, तो हमें डरना चाहिए; ऐसा ने हो, कि तुम में से कोई जन उस से रहित जान पड़े। 
Hebrews 4:2 क्योंकि हमें उन्‍हीं की नाईं सुसमाचार सुनाया गया है, पर सुने हुए वचन से उन्हें कुछ लाभ न हुआ; क्योंकि सुनने वालों के मन में विश्वास के साथ नहीं बैठा। 
Hebrews 4:3 और हम जिन्हों ने विश्वास किया है, उस विश्राम में प्रवेश करते हैं; जैसा उसने कहा, कि मैं ने अपने क्रोध में शपथ खाई, कि वे मेरे विश्राम में प्रवेश करने न पाएंगे, यद्यपि जगत की उत्‍पत्ति के समय से उसके काम पूरे हो चुके थे। 
Hebrews 4:4 क्योंकि सातवें दिन के विषय में उसने कहीं यों कहा है, कि परमेश्वर ने सातवें दिन अपने सब कामों को निपटा कर के विश्राम किया। 
Hebrews 4:5 और इस जगह फिर यह कहता है, कि वे मेरे विश्राम में प्रवेश न करने पाएंगे।
Hebrews 4:6 तो जब यह बात बाकी है कि कितने और हैं जो उस विश्राम में प्रवेश करें, और जिन्हें उसका सुसमाचार पहिले सुनाया गया, उन्होंने आज्ञा न मानने के कारण उस में प्रवेश न किया। 
Hebrews 4:7 तो फिर वह किसी विशेष दिन को ठहराकर इतने दिन के बाद दाऊद की पुस्‍तक में उसे आज का दिन कहता है, जैसे पहिले कहा गया, कि यदि आज तुम उसका शब्द सुनो, तो अपने मनों को कठोर न करो। 
Hebrews 4:8 और यदि यहोशू उन्हें विश्राम में प्रवेश कर लेता, तो उसके बाद दूसरे दिन की चर्चा न होती। 
Hebrews 4:9 सो जान लो कि परमेश्वर के लोगों के लिये सब्त का विश्राम बाकी है। 
Hebrews 4:10 क्योंकि जिसने उसके विश्राम में प्रवेश किया है, उसने भी परमेश्वर की नाईं अपने कामों को पूरा कर के विश्राम किया है। 
Hebrews 4:11 सो हम उस विश्राम में प्रवेश करने का प्रयत्न करें, ऐसा न हो, कि कोई जन उन की नाईं आज्ञा न मान कर गिर पड़े।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 राजा 8-9
  • लूका 21:1-19


Friday, April 29, 2016

प्रगट


   प्रसिद्ध चित्रकार रेमब्रांट ने 27 वर्ष की आयु में परमेश्वर के वचन बाइबल में मरकुस 4 में दी गई घटना पर आधारित एक चित्र बनाया, Christ in the Storm on the Sea of Galilee. प्रकाश और छाया के तुलनात्मक उपयोग की उनकी विशिष्ट शैली में बना रेमब्रांट का यह चित्र एक छोटी नाव को प्रचण्ड तूफान में घिरा हुआ दिखाता है। चेले नाव को संभालने में संघर्षरत हैं किंतु प्रभु यीशु शान्त और निश्चिंत सोया हुआ है। लेकिन इस चित्र की सबसे विलक्षण बात है नाव में 13 चेलों का होना; और कला विशेषज्ञों का मानना है कि उस 13वें चेले की शकल स्वयं रेमब्रांट की शक्ल के समान है।

   मरकुस रचित सुसमाचार की यह घटना प्रभु यीशु मसीह के चेलों के लिए प्रभु यीशु मसीह के व्यक्तित्व और सामर्थ का एक जीवन्त पाठ है। जबकि चेले नाव को डूबने से बचाने का कठिन संघर्ष कर रहे हैं, प्रभु यीशु उसी नाव में सो रहा है। क्या प्रभु को चिन्ता नहीं है के वे सब नष्ट होने पर हैं? (पद 38)। प्रभु यीशु ने तूफान को शान्त करके (पद 39), चेलों से तीखा प्रश्न पूछा, "और उन से कहा; तुम क्यों डरते हो? क्या तुम्हें अब तक विश्वास नहीं?" (पद 40)। इस पर वे चेले और भी भयभीत होकर आपस में कहने लगे, "...यह कौन है, कि आन्‍धी और पानी भी उस की आज्ञा मानते हैं?" (पद 41)।

   इस घटना में रेमब्रांट के समान ही आज हम भी अपने आप रख कर उन चेलों के समान ही सीख सकते हैं कि प्रभु यीशु कौन है। उन चेलों के समान ही हम भी यह जान सकते हैं कि जो कोई अपना विश्वास उसमें लाता है, प्रभु यीशु उस पर अपनी उपस्थिति, अनुकंपा और प्रेम प्रगट करते हैं और यह भी प्रगट करते हैं कि जीवन के हर तूफान में सहायता और सुरक्षा के लिए वे अपने प्रत्येक विश्वासी के साथ सदा बने रहते हैं। - डेविड मैक्कैसलैंड


जीवन के तूफानों में हमारा सबसे सुरक्षित और विश्वासयोग्य शरणस्थान प्रभु यीशु मसीह ही है।

परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलने वाला सहायक। इस कारण हम को कोई भय नहीं चाहे पृथ्वी उलट जाए, और पहाड़ समुद्र के बीच में डाल दिए जाएं; चाहे समुद्र गरजे और फेन उठाए, और पहाड़ उसकी बाढ़ से कांप उठें। - भजन 46:1-3

बाइबल पाठ: मरकुस 4:35-41
Mark 4:35 उसी दिन जब सांझ हुई, तो उसने उन से कहा; आओ, हम पार चलें,। 
Mark 4:36 और वे भीड़ को छोड़कर जैसा वह था, वैसा ही उसे नाव पर साथ ले चले; और उसके साथ, और भी नावें थीं। 
Mark 4:37 तब बड़ी आन्‍धी आई, और लहरें नाव पर यहां तक लगीं, कि वह अब पानी से भरी जाती थी। 
Mark 4:38 और वह आप पिछले भाग में गद्दी पर सो रहा था; तब उन्होंने उसे जगाकर उस से कहा; हे गुरू, क्या तुझे चिन्‍ता नहीं, कि हम नाश हुए जाते हैं? 
Mark 4:39 तब उसने उठ कर आन्‍धी को डांटा, और पानी से कहा; “शान्‍त रह, थम जा”: और आन्‍धी थम गई और बड़ा चैन हो गया। 
Mark 4:40 और उन से कहा; तुम क्यों डरते हो? क्या तुम्हें अब तक विश्वास नहीं? 
Mark 4:41 और वे बहुत ही डर गए और आपस में बोले; यह कौन है, कि आन्‍धी और पानी भी उस की आज्ञा मानते हैं?

एक साल में बाइबल: 
  • 1 राजा 6-7
  • लूका 20:27-47


Thursday, April 28, 2016

प्रश्न


   अमेरीकी गृह युद्ध के कुछ वर्ष पश्चात जनरल ल्यु वॉलेस का ट्रेन में यात्रा करते हुए कर्नल रॉबर्ट इन्गरसौल से सामना हुआ। इन्गरसौल 19वीं शताबदी के प्रमुख नास्तिकवादियों में से एक थे, जबकि ल्यु वॉलेस प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास करते थे। परस्पर बातचीत के दौरान, वार्तालाप उनके आपसी आत्मिक मतभेदों की ओर मुड़ी, और वॉलेस को एहसास हुआ कि वे इन्गरसौल द्वारा उठाए जा रहे प्रश्नों और शंकाओं के समुचित उत्तर नहीं दे पा रहे हैं। अपने विश्वास की जानकारी और समझ के बारे में अपनी कमी से शर्मिंदा होकर ल्यु वॉलेस ने उत्तरों को परमेश्वर के वचन बाइबल तथा प्रभु यीशु मसीह के जीवन काल के समय के संबंधित ऐतिहासिक द्स्तावेज़ों से खोजना आरंभ किया। उनकी इस खोज से मिले उत्तरों को उन्होंने एक ऐतिहासिक उपन्यास Ben-Hur: A Tale of Christ के रूप में प्रस्तुत किया और जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह की सच्चाई की विश्वस्त घोषणा करी।

   हमारे मसीही विश्वास को स्वीकार ना करने वाले लोगों द्वारा उठाए जाने वाले प्रश्नों को हमें अपने विश्वास के लिए खतरा या धमकी नहीं समझना चाहिए। वरन इसे अपने मसीही विश्वास को और गहराई से जानने और समझने, तथा किसी अन्य के द्वारा जब ऐसे ही प्रश्न उठाए जाएं तो प्रेम और बुद्दिमता से उनका कैसे उत्तर दिया जाए यह सीखने का एक अवसर समझना चाहिए। बाइबल में प्रेरित पतरस ने परमेश्वर की बातों को सीखते-समझते रहने के लिए लिखा है: "...और जो कोई तुम से तुम्हारी आशा के विषय में कुछ पूछे, तो उसे उत्तर देने के लिये सर्वदा तैयार रहो, पर नम्रता और भय के साथ" (1 पतरस 3:15)।

   ज़रूरी नहीं है कि हमारे पास हर एक के प्रत्येक प्रश्न का उत्तर हो; लेकिन हमारे पास ऐसा विश्वास, हिम्मत और संकल्प अवश्य होना चाहिए जो हमें मसीह यीशु के प्रेम और आशा को दूसरों के साथ बाँटने की सामर्थ देता है। - बिल क्राउडर


जीवन के बड़े-से-बड़े प्रश्न का एकमात्र उत्तर प्रभु यीशु मसीह में है।

क्योंकि उसके ईश्वरीय सामर्थ ने सब कुछ जो जीवन और भक्ति से सम्बन्‍ध रखता है, हमें उसी की पहचान के द्वारा दिया है, जिसने हमें अपनी ही महिमा और सद्गुण के अनुसार बुलाया है। - 2 पतरस 1:3

बाइबल पाठ: 1 पतरस 3:8-17
1 Peter 3:8 निदान, सब के सब एक मन और कृपामय और भाईचारे की प्रीति रखने वाले, और करूणामय, और नम्र बनो। 
1 Peter 3:9 बुराई के बदले बुराई मत करो; और न गाली के बदले गाली दो; पर इस के विपरीत आशीष ही दो: क्योंकि तुम आशीष के वारिस होने के लिये बुलाए गए हो। 
1 Peter 3:10 क्योंकि जो कोई जीवन की इच्छा रखता है, और अच्‍छे दिन देखना चाहता है, वह अपनी जीभ को बुराई से, और अपने होंठों को छल की बातें करने से रोके रहे। 
1 Peter 3:11 वह बुराई का साथ छोड़े, और भलाई ही करे; वह मेल मिलाप को ढूंढ़े, और उस के यत्‍न में रहे। 
1 Peter 3:12 क्योंकि प्रभु की आंखे धर्मियों पर लगी रहती हैं, और उसके कान उन की बिनती की ओर लगे रहते हैं, परन्तु प्रभु बुराई करने वालों के विमुख रहता है।
1 Peter 3:13 और यदि तुम भलाई करने में उत्तेजित रहो तो तुम्हारी बुराई करने वाला फिर कौन है? 
1 Peter 3:14 और यदि तुम धर्म के कारण दुख भी उठाओ, तो धन्य हो; पर उन के डराने से मत डरो, और न घबराओ। 
1 Peter 3:15 पर मसीह को प्रभु जान कर अपने अपने मन में पवित्र समझो, और जो कोई तुम से तुम्हारी आशा के विषय में कुछ पूछे, तो उसे उत्तर देने के लिये सर्वदा तैयार रहो, पर नम्रता और भय के साथ। 
1 Peter 3:16 और विवेक भी शुद्ध रखो, इसलिये कि जिन बातों के विषय में तुम्हारी बदनामी होती है उनके विषय में वे, जो तुम्हारे मसीही अच्‍छे चालचलन का अपमान करते हैं लज्ज़ित हों। 
1 Peter 3:17 क्योंकि यदि परमेश्वर की यही इच्छा हो, कि तुम भलाई करने के कारण दुख उठाओ, तो यह बुराई करने के कारण दुख उठाने से उत्तम है।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 राजा 3-5
  • लूका 20:1-26


Wednesday, April 27, 2016

प्रेम


   जब हैन्स ऐग्डे 1721 में मिशनरी होकर ग्रीनलैंड गए, तब वे वहाँ की स्थानीय इन्युइट लोगों की भाषा नहीं जानते थे। साथ ही, क्योंकि वे स्वभाव से अपना रौब बना कर रखने वाले थे, इस कारण उन्हें स्थानीय लोगों के प्रति प्रेम तथा दया दिखाने के लिए काफी प्रयास करना पड़ता था। सन 1733 में ग्रीनलैंड में चेचक की महामारी फैली जिससे दो तिहाई इन्युइट लोगों का सफाया हो गया; मृतकों में ऐग्डे की पत्नि भी थीं। इन्युइट लोगों के समान ही दुखः भोगने के इस अनुभव ने ऐग्डे के कठोर स्वभाव को पिघला दिया, और वे लोगों की शारीरिक तथा आत्मिक सेवा जी-जान से करने लगे। क्योंकि उनकी यह नई जीवन शैली परमेश्वर के प्रेम की उन बातों के अनुरूप थी जिन्हें वे लोगों को बताते और सुनाते थे, इन्युइट लोग जान और समझ सके कि परमेश्वर उन से भी प्रेम करता है, उनका भला चाहता है। अपने दुखः के समय में भी वे लोग परमेश्वर की ओर मुड़े और उसे ग्रहण किया।

   हो सकता है कि इस घटना के इन्युइट लोगों के समान आप की भी स्थिति हो, और आप अपने आस-पास के लोगों में परमेश्वर और उसके प्रेम को नहीं देख पा रहे हों। या, हो सकता है कि आप हैन्स ऐग्डे के समान हों, जो परमेश्वर के प्रेम को अपने जीवन से ऐसे जी कर दिखाने के लिए संघर्ष कर रहे थे जिससे लोग परमेश्वर की ओर मुड़ें।

   क्योंकि परमेश्वर जानता है कि हम मनुष्य कमज़ोर और ज़रुरतमन्द हैं, इसलिए अपने प्रेम को हमें दिखाने और समझाने के लिए परमेश्वर ने अपने पुत्र प्रभु यीशु मसीह को हमारे पापों के निवारण के लिए बलिदान होने को भेजा (यूहन्ना 3:16)। हमारी भलाई के लिए अपने निष्पाप और निष्कलंक पुत्र के बलिदान कर देने के द्वारा परमेश्वर ने सप्रमाण दिखाया कि वह हम से कितना प्रेम करता है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में 1 कुरिन्थियों 13 में लिखित प्रेम की व्याख्या का सदेह उदाहरण प्रभु यीशु मसीह हैं। केवल प्रभु यीशु से ही हम सच्चा निस्वार्थ प्रेम करने का अर्थ सीखते हैं और उसे अपना उद्धारकर्ता ग्रहण करने से हम उससे दूसरों के प्रति सच्चा प्रेम करने की सामर्थ पाते हैं। - रैंडी किलगोर


मैं कभी किसी के लिए परमेश्वर के स्वरूप को देखने से बाधित करने वाली बाधा ना बनूँ।

क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए। - यूहन्ना 3:16

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 13:1-13
1 Corinthians 13:1 यदि मैं मनुष्यों, और सवर्गदूतों की बोलियां बोलूं, और प्रेम न रखूं, तो मैं ठनठनाता हुआ पीतल, और झंझनाती हुई झांझ हूं। 
1 Corinthians 13:2 और यदि मैं भविष्यद्वाणी कर सकूं, और सब भेदों और सब प्रकार के ज्ञान को समझूं, और मुझे यहां तक पूरा विश्वास हो, कि मैं पहाड़ों को हटा दूं, परन्तु प्रेम न रखूं, तो मैं कुछ भी नहीं। 
1 Corinthians 13:3 और यदि मैं अपनी सम्पूर्ण संपत्ति कंगालों को खिला दूं, या अपनी देह जलाने के लिये दे दूं, और प्रेम न रखूं, तो मुझे कुछ भी लाभ नहीं। 
1 Corinthians 13:4 प्रेम धीरजवन्‍त है, और कृपाल है; प्रेम डाह नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं। 
1 Corinthians 13:5 वह अनरीति नहीं चलता, वह अपनी भलाई नहीं चाहता, झुंझलाता नहीं, बुरा नहीं मानता। 
1 Corinthians 13:6 कुकर्म से आनन्‍दित नहीं होता, परन्तु सत्य से आनन्‍दित होता है। 
1 Corinthians 13:7 वह सब बातें सह लेता है, सब बातों की प्रतीति करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता है। 
1 Corinthians 13:8 प्रेम कभी टलता नहीं; भविष्यद्वाणियां हों, तो समाप्‍त हो जाएंगी, भाषाएं हो तो जाती रहेंगी; ज्ञान हो, तो मिट जाएगा। 
1 Corinthians 13:9 क्योंकि हमारा ज्ञान अधूरा है, और हमारी भविष्यद्वाणी अधूरी। 
1 Corinthians 13:10 परन्तु जब सवर्सिद्ध आएगा, तो अधूरा मिट जाएगा। 
1 Corinthians 13:11 जब मैं बालक था, तो मैं बालकों की नाईं बोलता था, बालकों का सा मन था बालकों की सी समझ थी; परन्तु सियाना हो गया, तो बालकों की बातें छोड़ दी। 
1 Corinthians 13:12 अब हमें दर्पण में धुंधला सा दिखाई देता है; परन्तु उस समय आमने साम्हने देखेंगे, इस समय मेरा ज्ञान अधूरा है; परन्तु उस समय ऐसी पूरी रीति से पहिचानूंगा, जैसा मैं पहिचाना गया हूं। 
1 Corinthians 13:13 पर अब विश्वास, आशा, प्रेम थे तीनों स्थाई है, पर इन में सब से बड़ा प्रेम है।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 राजा 1-2
  • लूका 19:28-48


Tuesday, April 26, 2016

नम्र


   मैंने एक रोचक वीडियो देखा - एक पिल्ला, डेज़ी, सीढ़ी के ऊपरी छोर पर खड़ा है, भयभीत है और सीढ़ियों से नीचे नहीं आ पा रही है। नीचे बहुत से लोग खड़े उसे बुला रहे हैं, प्रोत्साहित कर रहे हैं किंतु वह नीचे नहीं उतरना समझ नहीं पा रही है। वह चाह तो रही है कि नीचे की ओर आए किंतु उसका भय उसे यह करने नहीं दे रहा है। फिर एक बड़ा कुत्ता, साइमन, डेज़ी की सहायता के लिए आता है। साइमन भाग कर सीढ़ियाँ चढ़ता हुआ डेज़ी के पास आता है और फिर वापस नीचे की ओर जाता है, डेज़ी को दिखाता है कि ऐसा करना कितना सरल है। डेज़ी अभी भी भयभीत है और नहीं कर पा रही है; साइमन फिर से उसके पास आता है और अबकी बार और धीरे से उसे उतर कर दिखाता है, डेज़ी को प्रोत्साहित करता है, किंतु डेज़ी अभी भी हिचकिचा रही है। साइमन फिर से उसके पास जाता है और डेज़ी को नीचे उतरने का तरीका करके दिखाता है। अन्ततः डेज़ी की हिम्मत बंधती है, वह हिम्मत करके अपने पिछले पैरों को अगले पैरों के साथ मिला कर निचली सीढ़ी पर आ जाती है, साइमन उसके साथ ही बना रहता है, फिर ऐसे ही प्रयास करते हुए डेज़ी सीढ़ियाँ उतरना सीख लेती है; और सभी आनन्दित होते हैं।

   शिष्यता सिखाने का यह एक बहुत सुन्दर वीडियो था। हम अपना बहुत सा समय दूसरों को ऊपर चढ़ना सिखाने में बिता देते हैं, लेकिन अधिक आवश्यक और अधिक कठिन है दूसरों को सिखाना कि नम्र होकर कैसे अपने आप को नीचा किया जाए। बाइबल में सभी स्थानों पर हम पाते हैं कि परमेश्वर ने अपने लोगों से नम्रता का स्वभाव चाहा है, अनेक स्थानों पर परमेश्वर ने स्वयं अपने आप को नीचा कर के नम्रता का यह पाठ पढ़ाया है (निर्गमन 3:7-8; 19:10-12; मीका 1:3)। और जब जब परमेश्वर के लोग नम्र हुए हैं, परमेश्वर ने उनके अपराधों को क्षमा किया और उनके दण्ड को टाल दिया (2 इतिहास 12:7)। 

    परमेश्वर के वचन बाइबल मात्र में ही हम पाते हैं कि कैसे परमेश्वर ने, प्रभु यीशु के रूप में, अपने ही उदाहराण द्वारा, हमें नम्र होना, सहनशील तथा धैर्यवान होना, दुशमनों तथा विरोधियों के प्रति भी क्षमाशील होना और अपने आप को दूसरों के हित के लिए बलिदान कर देना स्वयं अपने जीवन में करके दिखाया तथा सिखाया है। क्योंकि प्रभु यीशु ने अपने आप को सबसे अधिक दीन और नम्र कर लिया, इसीलिए उसे सृष्टि में सबसे अधिक महिमामय और गौर्वपूर्ण स्थान भी मिला है; अन्ततः उसी के सामने सृष्टि का हर घुटना झुकेगा और और प्रत्येक जीभ उसकी प्रभुता का अंगीकार करेगी (फिलिप्पियों 2:10-11)। - जूली ऐकैरमैन लिंक


जब तक कोई नम्र होना नहीं सीख लेता, वह अन्य कुछ भी नहीं सीख सकता।

जब यहोवा ने देखा कि वे दीन हुए हैं, तब यहोवा का यह वचन शमायाह के पास पहुंचा कि वे दीन हो गए हैं, मैं उन को नष्ट न करूंगा; मैं उनका कुछ बचाव करूंगा, और मेरी जलजलाहट शीशक के द्वारा यरूशलेम पर न भड़केगी। - 2 इतिहास 12:7

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 2:1-11
Philippians 2:1 सो यदि मसीह में कुछ शान्‍ति और प्रेम से ढाढ़स और आत्मा की सहभागिता, और कुछ करूणा और दया है। 
Philippians 2:2 तो मेरा यह आनन्द पूरा करो कि एक मन रहो और एक ही प्रेम, एक ही चित्त, और एक ही मनसा रखो। 
Philippians 2:3 विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो। 
Philippians 2:4 हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्‍ता करे। 
Philippians 2:5 जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो। 
Philippians 2:6 जिसने परमेश्वर के स्‍वरूप में हो कर भी परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्तु न समझा। 
Philippians 2:7 वरन अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्‍वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया। 
Philippians 2:8 और मनुष्य के रूप में प्रगट हो कर अपने आप को दीन किया, और यहां तक आज्ञाकारी रहा, कि मृत्यु, हां, क्रूस की मृत्यु भी सह ली। 
Philippians 2:9 इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्ठ है। 
Philippians 2:10 कि जो स्वर्ग में और पृथ्वी पर और जो पृथ्वी के नीचे है; वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें।
Philippians 2:11 और परमेश्वर पिता की महिमा के लिये हर एक जीभ अंगीकार कर ले कि यीशु मसीह ही प्रभु है।
Philippians 2:11 और परमेश्वर पिता की महिमा के लिये हर एक जीभ अंगीकार कर ले कि यीशु मसीह ही प्रभु है।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 23-24
  • लूका 19:1-27


Monday, April 25, 2016

जीवन का दान


   मुझे शीघ्र ही पता चल गया कि समुद्री मछलियों को पालने के लिए समुद्री जल के अक्वेरियम की देख-रेख करना कोई सरल कार्य नहीं है। मुझे इसके लिए एक रासयनिक प्रयोगशाला बना कर रखनी पड़ी जिसमें पानी के विभिन्न तत्वों और लवणों की मात्रा बारंबार जाँची जाती और उसके अनुसार आवश्यक तत्व और लवण समय-समय पर पानी में मिलाए जाते। पानी को साफ और मछलियों को स्वस्थ रखने के लिए पानी में आवश्यकतानुसार विटामिन, एन्ज़ाईम्स, और किटाणुरोधक एन्टिबायोटिक्स तथा सल्फा ड्रग्स मिलाए जाते; पानी को विभिन्न प्रकार की रासायनिक छलनियों से निकाला जाता जिससे वह छनकर साफ हो जाए और उसमें यदि कोई हानिकारक वस्तु विद्यमान हो तो वह निकल जाए।

   इतनी मेहनत करने के पश्चात आप सोचेंगे कि मेरी पालतु समुद्री मछलियाँ मेरे प्रति आभारी रहती होंगी; जी नहीं! उन्हें खाना डालने के लिए जैसे ही मेरी परछाईं भी उनके पानी पर पड़ती वे सबसे निकट के कोने या पत्थर के पीछे छिपने के लिए भाग लेतीं। मेरा आकार उनके लिए बहुत बड़ा था और मेरी गतिविधियां बहुत रहस्यमय तथा उनकी समझ के बाहर थीं। वे नहीं पहचान पा रही थीं कि मेरे सभी कार्य उनके प्रति मेरे प्रेम के कारण थे, उनकी भलाई के लिए थे। मेरे प्रति उनकी गलतफहमियों को दूर करने के लिए मुझे उनके समान बनकर, उनके मध्य में जाकर, उनसे उन्हीं की भाषा में बात करनी थी, लेकिन ऐसा कर पाना मेरे लिए असंभव है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के अनुसार, इस सृष्टि के सृष्टिकर्ता परमेश्वर ने यही असंभव कार्य हमारे लिए करा। वह हमारे लिए मानव रूप में, एक शिशु बनकर आ गया। यूहन्ना लिखता है कि "वह जगत में था, और जगत उसके द्वारा उत्पन्न हुआ, और जगत ने उसे नहीं पहिचाना" (यूहन्ना 1:10) इसलिए उसी परमेश्वर ने जिसने सब कुछ रचा था, स्वयं अपनी रचना का स्वरूप ले लिया; मानों एक नाटककार स्वयं अपने ही नाटक का पात्र बन गया "और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्चाई से परिपूर्ण हो कर हमारे बीच में डेरा किया..." (यूहन्ना 1:14)। परमेश्वर ने प्रभु यीशु के रूप में हमसे बातें करीं, हमें अपनी योजना और कार्यविधि समझाई, हमारे पापों के निवारण के लिए अपना बलिदान दिया और तीसरे दिन मृतकों में से पुनः जीवित हो उठा; और आज वह जीवित परमेश्वर हमारी प्रतीक्षा कर रहा है कि हम पश्चाताप और समर्पण के साथ उसके पास स्वेच्छा से आएं और उससे उद्धार एवं अनन्त जीवन का दान पाएं। - फिलिप यैन्सी


परमेश्वर ने मानव इतिहास में प्रवेश किया ताकि मानव जाति को उद्धार और अनन्त जीवन मिल सके।

और किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं; क्योंकि स्वर्ग के नीचे मनुष्यों में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया, जिस के द्वारा हम उद्धार पा सकें। - प्रेरितों 4:12

बाइबल पाठ: यूहन्ना 1:6-14
John 1:6 एक मनुष्य परमेश्वर की ओर से आ उपस्थित हुआ जिस का नाम यूहन्ना था। 
John 1:7 यह गवाही देने आया, कि ज्योति की गवाही दे, ताकि सब उसके द्वारा विश्वास लाएं। 
John 1:8 वह आप तो वह ज्योति न था, परन्तु उस ज्योति की गवाही देने के लिये आया था। 
John 1:9 सच्ची ज्योति जो हर एक मनुष्य को प्रकाशित करती है, जगत में आनेवाली थी। 
John 1:10 वह जगत में था, और जगत उसके द्वारा उत्पन्न हुआ, और जगत ने उसे नहीं पहिचाना। 
John 1:11 वह अपने घर आया और उसके अपनों ने उसे ग्रहण नहीं किया। 
John 1:12 परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं। 
John 1:13 वे न तो लोहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं। 
John 1:14 और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्चाई से परिपूर्ण हो कर हमारे बीच में डेरा किया, और हम ने उस की ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 21-22
  • लूका 18:24-43


Sunday, April 24, 2016

सदा साथ


   बचपन का मेरा एक बहुत पसन्दीदा खेल था घर के निकट के एक पार्क में सीसौ पर खेलना। एक बच्चा, बीच में घिरनी लगे लंबे से लकड़ी के तख्ते के एक किनारे पर बैठता, और दूसरा बच्चा दूसरे किनारे पर, और दोनों एक दूसरे को बारी-बारी ऊपर उछालते। कभी-कभी जो नीचे होता वह तख्ते के अपने छोर नीचे ही रखे रहता और दूसरे छोर पर जो ऊपर होता वह नीचे लाए जाने के लिए चिल्लाता रहता। लेकिन इससे भी क्रूर तब होता था जब नीचे के छोर वाल तख्ते से एकदम हट जाता और ऊपर के छोर वाला धड़ाम से नीचे आकर धरती से टकराता, चोटिल हो जाता था।

   कभी-कभी हमें लगता है कि प्रभु यीशु ने भी हमारे साथ ऐसा ही किया है। हमने उसपर विश्वास किया कि वह सदा हमारे साथ बना रहेगा, जीवन के उतार-चढ़ाव में हमारा साथ देता रहेगा; लेकिन ऐसा भी होता है कि जीवन अनायास ही कोई अनेपक्षित मोड़ ले लेता है और हम दुःखी तथा चोटिल हो कर रह जाते हैं; हमें लगता है कि प्रभु हमारे जीवनों को छोड़कर चला गया है और हम धड़ाम से नीचे गिर गए हैं।

   लेकिन परमेश्वर के वचन बाइबल में विलापगीत का तीसरा अध्याय हमें स्मरण दिलाता है, "हम मिट नहीं गए; यह यहोवा की महाकरुणा का फल है, क्योंकि उसकी दया अमर है" (विलापगीत 3:22); अर्थात, परमेश्वर हमारे प्रति हर बात में हर समय विश्वासयोग्य है, चाहे हमें लगे कि सब कुछ समाप्त होता जा रहा है। चाहे हम अपने आप को अकेला अनुभव करें, दुःख में पाएं, तो भी हम अकेले कभी नहीं हैं। चाहे हम उसकी उपस्थिति को अनुभव ना भी करें, तो भी हमारा प्रभु परमेश्वर हमारे साथ बना रहता है, वह हमारा परमविश्वासयोग्य साथी है जो हमें छोड़ कर कभी नहीं जाता, जो कभी हमें नीचे गिरने नहीं देता। - जो स्टोवैल


चाहे सभी साथ छोड़ दें, किंतु प्रभु यीशु कभी साथ नहीं छोड़ता।

तू हियाव बान्ध और दृढ़ हो, उन से न डर और न भयभीत हो; क्योंकि तेरे संग चलने वाला तेरा परमेश्वर यहोवा है; वह तुझ को धोखा न देगा और न छोड़ेगा। व्यवस्थाविवरण 31:6

बाइबल पाठ: विलापगीत 3:13-26
Lamentations 3:13 उसने अपनी तीरों से मेरे हृदय को बेध दिया है; 
Lamentations 3:14 सब लोग मुझ पर हंसते हैं और दिन भर मुझ पर ढालकर गीत गाते हैं, 
Lamentations 3:15 उसने मुझे कठिन दु:ख से भर दिया, और नागदौना पिलाकर तृप्त किया है। 
Lamentations 3:16 उसने मेरे दांतों को कंकरी से तोड़ डाला, और मुझे राख से ढांप दिया है; 
Lamentations 3:17 और मुझ को मन से उतार कर कुशल से रहित किया है; मैं कल्याण भूल गया हूँ; 
Lamentations 3:18 इसलिऐ मैं ने कहा, मेरा बल नाश हुआ, और मेरी आश जो यहोवा पर थी, वह टूट गई है। 
Lamentations 3:19 मेरा दु:ख और मारा मारा फिरना, मेरा नागदौने और-और विष का पीना स्मरण कर! 
Lamentations 3:20 मैं उन्हीं पर सोचता रहता हूँ, इस से मेरा प्राण ढला जाता है। 
Lamentations 3:21 परन्तु मैं यह स्मरण करता हूँ, इसीलिये मुझे आाशा है: 
Lamentations 3:22 हम मिट नहीं गए; यह यहोवा की महाकरुणा का फल है, क्योंकि उसकी दया अमर है। 
Lamentations 3:23 प्रति भोर वह नई होती रहती है; तेरी सच्चाई महान है। 
Lamentations 3:24 मेरे मन ने कहा, यहोवा मेरा भाग है, इस कारण मैं उस में आशा रखूंगा। 
Lamentations 3:25 जो यहोवा की बाट जोहते और उसके पास जाते हैं, उनके लिये यहोवा भला है। 
Lamentations 3:26 यहोवा से उद्धार पाने की आशा रख कर चुपचाप रहना भला है।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 19-20
  • लूका 18:1-23