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शुक्रवार, 5 मार्च 2021

भूमिका

 

          मेरे एक मित्र ने अपने फेसबुक पर पृष्ठ पर, उसे सौंपे गए एक कार्य को सफलतापूर्वक पूरा कर लेने के बारे में लिखा। औरों ने उसे इस बात के लिए बधाइयां दीं, लेकिन उसकी इस सफलता से मेरे दिल पर छुरियाँ चल गईं। वह कार्य मुझे मिलना चाहिए था, उस पर मेरा अधिकार था; लेकिन मेरी अनदेखी करते हुए, वह कार्य मेरे उस मित्र को दे दिया गया, और मुझे पता भी नहीं है कि मेरे साथ ऐसा क्यों किया गया।

          बेचारा यूसुफ! परमेश्वर के वचन बाइबल में परमेश्वर ने उसे नहीं चुना, और वह जानता था कि क्यों। प्रभु यीशु मसीह के मृतकों में से पुनरुत्थान और स्वर्गारोहण के बाद, उसके शिष्यों ने प्रभु को धोखे से पकड़वाने वाले यहूदा इस्करियोती के स्थान पर किसी और को नियुक्त करना चाहा। चेलों ने इसके विषय प्रार्थना की, परमेश्वर से उसकी इच्छा पूछी, और उनके सामने दो नाम, यूसुफ और मत्तियाह आए, और उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि किसे चुनना है। उन्होंने परमेश्वर से प्रार्थना में इसके बारे में पूछा और दोनों के नाम पर चिट्ठी डाली, जिससे फिर मत्तियाह का नाम सामने आया; यूसुफ को वह स्थान नहीं मिला।

          मैं सोचता हूँ, जब शिष्य मत्तियाह को बधाई दे रहे होंगे, तब यूसुफ की क्या प्रतिक्रिया रही होगी? उसने इस चुने न जाने को कैसे लिया होगा? क्या उसने अपने आप को ठुकराया हुआ अनुभव किया होगा? क्या वह अपने आप पर तरस खाकर, अपने को औरों से अलग करके कहीं एक ओर जाकर पड़ गया होगा? या, क्या उसने परमेश्वर पर भरोसा रखते हुए, उसके इस निर्णय को सहर्ष लिया होगा, और दूसरों के साथ मिलकर शिष्यों में अपनी सहायक भूमिका का निर्वाह करता रहा होगा?

          यदि मैं यूसुफ के स्थान पर होता तो मैं यह जानता हूँ कि मेरे लिए कौन सा विकल्प सर्वोत्तम होता, और मैं कौन सा विकल्प लेता। मैं तो कहता ‘ठीक है; मुझे शर्मिंदा किया गया है। यदि तुम्हें मेरे महत्व का एहसास नहीं है, तो न सही! अब देखते हैं कि अब से तुम्हारे साथ मेरे न रहने के बाद तुम लोग कार्य कैसे करने पाते हो?’ यह भावना रखना स्वयं को अच्छा तो लग सकता है, परन्तु केवल इसलिए क्योंकि यह स्वार्थी भावना है।

          पवित्र शास्त्र में यूसुफ का फिर कहीं कोई उल्लेख नहीं आया है, इसलिए हमें नहीं पता है कि उसकी वास्तविक प्रतिक्रिया क्या थी। लेकिन हमारे लिए अधिक महत्वपूर्ण यह है कि यदि किसी बात के लिए हमारी अनदेखी की जाती है, तब हम क्या प्रतिक्रिया देते हैं? हम कभी इस बात को न भूलें के सबसे अधिक महत्व प्रभु यीशु के राज्य और कार्य का है, न कि हमारी व्यक्तिगत सफलता अथवा प्रशंसा का। इसलिए वह हमें जो भी भूमिका निभाने के लिए देता है, हम सहर्ष उसे स्वीकार करें और पूरी लगन तथा आनन्द के साथ उस भूमिका को निभाएं। हमारे प्रतिफल उसके हाथों में हैं। - माइक व्हिटमर

 

हे प्रभु परमेश्वर, चाहे कोई भी भूमिका हो, मैं सदा आपके लिए कार्य कर सकूँ।


देख, मैं शीघ्र आने वाला हूं; और हर एक के काम के अनुसार बदला देने के लिये प्रतिफल मेरे पास है। - प्रकाशितवाक्य 22:12

बाइबल पाठ: प्रेरितों 1:15-26

प्रेरितों 1:15 और उन्‍हीं दिनों में पतरस भाइयों के बीच में जो एक सौ बीस व्यक्ति के लगभग इकट्ठे थे, खड़ा हो कर कहने लगा।

प्रेरितों 1:16 हे भाइयों, अवश्य था कि पवित्र शास्त्र का वह लेख पूरा हो, जो पवित्र आत्मा ने दाऊद के मुख से यहूदा के विषय में जो यीशु के पकड़ने वालों का अगुवा था, पहिले से कही थीं।

प्रेरितों 1:17 क्योंकि वह तो हम में गिना गया, और इस सेवकाई में सहभागी हुआ।

प्रेरितों 1:18 (उसने अधर्म की कमाई से एक खेत मोल लिया; और सिर के बल गिरा, और उसका पेट फट गया, और उस की सब अन्‍तडिय़ां निकल पड़ी।

प्रेरितों 1:19 और इस बात को यरूशलेम के सब रहने वाले जान गए, यहां तक कि उस खेत का नाम उन की भाषा में हकलदमा अर्थात लहू का खेत पड़ गया।)

प्रेरितों 1:20 क्योंकि भजन संहिता में लिखा है, कि उसका घर उजड़ जाए, और उस में कोई न बसे और उसका पद कोई दूसरा ले ले।

प्रेरितों 1:21 इसलिये जितने दिन तक प्रभु यीशु हमारे साथ आता जाता रहा, अर्थात यूहन्ना के बपतिस्मा से ले कर उसके हमारे पास से उठाए जाने तक, जो लोग बराबर हमारे साथ रहे।

प्रेरितों 1:22 उचित है कि उन में से एक व्यक्ति हमारे साथ उसके जी उठने का गवाह हो जाए।

प्रेरितों 1:23 तब उन्होंने दो को खड़ा किया, एक यूसुफ को, जो बर-सबा कहलाता है, जिस का उपनाम यूसतुस है, दूसरा मत्तिय्याह को।

प्रेरितों 1:24 और यह कहकर प्रार्थना की; कि हे प्रभु, तू जो सब के मन जानता है, यह प्रगट कर कि इन दोनों में से तू ने किस को चुना है।

प्रेरितों 1:25 कि वह इस सेवकाई और प्रेरिताई का पद ले जिसे यहूदा छोड़ कर अपने स्थान को गया।

प्रेरितों 1:26 तब उन्होंने उन के बारे में चिट्ठियां डालीं, और चिट्ठी मत्तिय्याह के नाम पर निकली, सो वह उन ग्यारह प्रेरितों के साथ गिना गया।

 

एक साल में बाइबल: 

  • गिनती 34-36
  • मरकुस 9:30-50

सोमवार, 15 जून 2020

प्रेम के योग्य


     मेरी बेटी एक प्रातः तैयार हो रही थी, और अचानक ही बड़े उत्साह और आनन्द के साथ ऊँची आवाज़ में बोली “Lovable (प्रेम-योग्य);” मुझे समझ नहीं आया उसका अभिप्राय क्या था। मेरे चहरे के भाव को देखकर उसने अपनी टी-शर्ट पर लिखे हुए शब्द की ओर संकेत किया, जहाँ पर बड़े अक्षरों में लिखा था, “Lovable (प्रेम के योग्य)।” मैंने उसे गले से लगाया, और वह आनन्द से मुस्कुराने लगी, और जब मैंने उस से कहा, “तुम प्रेम के योग्य हो” तो उसकी मुस्कराहट और भी बड़ी हो गई; और वह इस शब्द को बारंबार दोहराती हुई कूदती हुई बाहर चली गई।

     मैं कोई सिद्ध पिता तो नहीं हूँ, परन्तु वह पल सिद्ध पल था। उस स्वाभाविक, मनोहर वार्तालाप में मैंने अपने बेटी के दमकते हुए चेहरे में देखा कि बिना किसी शर्त के मिलने वाले प्रेम को प्राप्त करना कैसा होता है: वह पूर्ण आनन्द की छवि थी। वह अच्छे से समझ रही थी कि उस की शर्ट पर लिखी बात उसके प्रति उसके पिता की भावनाओं से पूर्णतः मेल खा रही थी।

     हम में से कितने हैं जो अपने हृदय से इस बात पर पूर्ण विश्वास रखते हैं कि हमारा स्वर्गीय परमेश्वर पिता हमें असीम और अनंतकालीन प्रेम करता है? कभी-कभी हम इस सत्य को लेकर संघर्ष करते हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि इस्राएलियों ने भी किया। वे सोचने लगे कि क्या उन की परीक्षाओं का यह अर्थ है कि अब परमेश्वर उन से प्रेम नहीं करता है। परन्तु यिर्मयाह 31:3 में भविष्यद्वक्ता ने उन्हें वह स्मरण करवाया जो परमेश्वर ने उन से पहले ही कह रखा था, “मैंने तुझ से सदा प्रेम रखता आया हूँ।”

     हमारी भी लालसा ऐसे ही सिद्ध प्रेम को पाने की होती है। परन्तु जो घाव, निराशाएं और गलतियाँ हम अनुभव करते हैं, वे हमें अपने आप को उस ‘प्रेम के योग्य’ समझ पाने में आड़े आती हैं। परन्तु हमारा प्रभु परमेश्वर अपनी बाहें फैलाए हमें अपने पास आ कर उस प्रेम को अनुभव करने और उसके सिद्ध प्रेम में विश्राम करने के लिए आमंत्रित करता है। - एडम होल्ज़

 

हमारे परमेश्वर पिता के समान कोई हम से प्रेम नहीं कर सकता है।


मेरी दृष्टि में तू अनमोल और प्रतिष्ठित ठहरा है और मैं तुझ से प्रेम रखता हूं, इस कारण मैं तेरी सन्ती मनुष्यों को और तेरे प्राण के बदले में राज्य राज्य के लोगों को दे दूंगा। - यशायाह 43:4

बाइबल पाठ: यिर्मयाह 31:1-6

यिर्मयाह 31:1 उन दिनों में मैं सारे इस्राएली कुलों का परमेश्वर ठहरूंगा और वे मेरी प्रजा ठहरेंगे, यहोवा की यही वाणी है।

यिर्मयाह 31:2 यहोवा यों कहता है: जो प्रजा तलवार से बच निकली, उन पर जंगल में अनुग्रह हुआ; मैं इस्राएल को विश्राम देने के लिये तैयार हुआ।

यिर्मयाह 31:3 यहोवा ने मुझे दूर से दर्शन देकर कहा है। मैं तुझ से सदा प्रेम रखता आया हूँ; इस कारण मैं ने तुझ पर अपनी करुणा बनाए रखी है।

यिर्मयाह 31:4 हे इस्राएली कुमारी कन्या! मैं तुझे फिर बसाऊंगा; वहां तू फिर सिंगार कर के डफ बजाने लगेगी, और आनन्द करने वालों के बीच में नाचती हुई निकलेगी।

यिर्मयाह 31:5 तू शोमरोन के पहाड़ों पर अंगूर की बारियां फिर लगाएगी; और जो उन्हें लगाएंगे, वे उनके फल भी खाने पाएंगे।

यिर्मयाह 31:6 क्योंकि ऐसा दिन आएगा, जिस में एप्रैम के पहाड़ी देश के पहरुए पुकारेंगे: उठो, हम अपने परमेश्वर यहोवा के पास सिय्योन को चलें।    

 

एक साल में बाइबल: 

  • नहेम्याह 1-3
  • प्रेरितों 2:1-21


मंगलवार, 12 जून 2018

भावनाएं



   पिछले वर्ष एक सम्मलेन के समय मैं अपने कुछ मित्रों से मिली, जिनसे मैं बहुत लंबे समय से नहीं मिली थी। मिलने और साथ होने के आनन्द में हम सब बहुत प्रसन्न हुए, एक साथ हँसे; परन्तु एक दूसरे को देखकर हम रोए भी इस एहसास के कारण कि हमने एक-दूसरे के आभाव को कितना महसूस किया था।

   अपने साथ होने के समय के अंतिम दिन में हमने एक साथ प्रभु-भोज में भाग लिया, जो और आनन्द तथा आंसुओं का समय था! हम परमेश्वर के उस महान अनुग्रह के लिए आनन्दित थे जिसके अन्तर्गत उसने हमें पापों की क्षमा और अनन्त जीवन  दिया था, तथा अपने मित्रों के साथ बिताए गए ये खुशी के दिन भी। परन्तु हमें यह आनन्द और अनन्त जीवन देने के लिए जो कीमत प्रभु यीशु को चुकानी पड़ी थी उसे स्मरण कर के मेरे आँसू भी निकल पड़े थे।

   मैंने परमेश्वर के वचन बाइबल में एज्रा याजक और यरूशलेम के उस अद्भुत दिन के बारे में विचार किया। निर्वासित लोग बाबुल की बन्धुआई से निकलकर यरूशलेम लौट कर आए थे, और परमेश्वर के मंदिर के पुनर्निर्माण हेतु मंदिर की नेव डाली ही थी। तब लोगों ने आनन्द के कारण स्तुति-गीत गाए, परन्तु कुछ वृद्ध याजक रोने लगे (एज्रा 3:10-12) – वे या तो बन्धुआई में जाने के समय ध्वस्त करके लूट लिए गए सुलेमान के मंदिर और उसके वैभव को याद कर रहे थे, या फिर अपने पापों को स्मरण करके दुखी हो रहे थे जिनके कारण उन्हें बन्धुआई में जाना पड़ा था। इस्राएली गा भी रहे थे और रो भी रहे थे, और इस सब की मिली-जुली आवाज़ दूर तक सुनाई दे रही थी (पद 13)।

   कभी-कभी जब हम परमेश्वर को काम करते देखते हैं तो हम कई प्रकार की भावनाओं का अनुभव करते हैं – परमेश्वर के अद्भुत आश्चर्यजनक कार्यों को देखकर आनन्द और अपने पापों तथा उन पापों के कारण जो बलिदान प्रभु यीशु मसीह को देना पड़ा, उसे स्मरण कर के शोक और दुःख। उन इस्राएलियों के समान ही हमारी भावनाएँ भी प्रभु परमेश्वर के प्रति हमारे प्रेम और आराधना की अभिव्यक्ति, और दूसरों के सामने एक गवाही हो जाएँ। - कीला ओकोआ


परमेश्वर की प्रशंसा, हमारे आनन्द और आँसुओं, दोनों ही से हो सकती है।

परन्तु जितने तुझ पर भरोसा रखते हैं वे सब आनन्द करें, वे सर्वदा ऊंचे स्वर से गाते रहें; क्योंकि तू उनकी रक्षा करता है, और जो तेरे नाम के प्रेमी हैं तुझ में प्रफुल्लित हों। - भजन 5:11

बाइबल पाठ: एज्रा 3:7-13
Ezra 3:7 तब उन्होंने पत्थर गढ़ने वालों और कारीगरों को रुपया, और सीदोनी और सोरी लोगों को खाने-पीने की वस्तुएं और तेल दिया, कि वे फारस के राजा कुस्रू के पत्र के अनुसार देवदार की लकड़ी लबानोन से जापा के पास के समुद्र में पहुंचाएं।
Ezra 3:8 उनके परमेश्वर के भवन में, जो यरूशलेम में है, आने के दूसरे वर्ष के दूसरे महीने में, शालतीएल के पुत्र जरुब्बाबेल ने और योसादाक के पुत्र येशू ने और उनके और भाइयों ने जो याजक और लेवीय थे, और जितने बन्धुआई से यरूशलेम में आए थे उन्होंने भी काम को आरम्भ किया, और बीस वर्ष अथवा उस से अधिक अवस्था के लेवियों को यहोवा के भवन का काम चलाने के लिये नियुक्त किया।
Ezra 3:9 तो येशू और उसके बेटे और भाई और कदमीएल और उसके बेटे, जो यहूदा की सन्तान थे, और हेनादाद की सन्तान और उनके बेटे परमेश्वर के भवन में कारीगरों का काम चलाने को खड़े हुए।
Ezra 3:10 और जब राजों ने यहोवा के मन्दिर की नेव डाली तब अपने वस्त्र पहिने हुए, और तुरहियां लिये हुए याजक, और झांझ लिये हुए आसाप के वंश के लेवीय इसलिये नियुक्त किए गए कि इस्राएलियों के राजा दाऊद की चलाई हुई रीति के अनुसार यहोवा की स्तुति करें।
Ezra 3:11 सो वे यह गा गाकर यहोवा की स्तुति और धन्यवाद करने लगे, कि वह भला है, और उसकी करुणा इस्राएल पर सदैव बनी है। और जब वे यहोवा की स्तुति करने लगे तब सब लोगों ने यह जान कर कि यहोवा के भवन की नेव अब पड़ रही है, ऊंचे शब्द से जयजयकार किया।
Ezra 3:12 परन्तु बहुतेरे याजक और लेवीय और पूर्वजों के घरानों के मुख्य पुरुष, अर्थात वे बूढ़े जिन्होंने पहिला भवन देखा था, जब इस भवन की नेव उनकी आंखों के साम्हने पड़ी तब फूट फूटकर रोने लगे, और बहुतेरे आनन्द के मारे ऊंचे शब्द से जयजयकार कर रहे थे।
Ezra 3:13 इसलिये लोग, आनन्द के जयजयकार का शब्द, लोगों के रोने के शब्द से अलग पहिचान न सके, क्योंकि लोग ऊंचे शब्द से जयजयकार कर रहे थे, और वह शब्द दूर तक सुनाई देता था।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • एज्रा 3-5
  • यूहन्ना 20



शनिवार, 21 अप्रैल 2018

प्रतिज्ञा



   मैं एक पुस्तक पढ़ने में लीन थी, तभी मेरी एक सहेली ने मेरे कंधे की ऊपर से झाँक कर देखा कि मैं क्या पढ़ रही हूँ। देखते ही वह तुरंत ही चौंक कर, यह कहते हुए पीछे हट गई, “कितना उदासीन शीर्षक है”। जो मैं पढ़ रही थी वह कहानियों के लोकप्रिय संकलन “Grimm’s Fairy Tales” की एक कहानी, “The Glass Coffin” थी, और शब्द ‘Coffin’ अर्थात ‘ताबूत, या शव रखने की पेटी’ ने उसे विचलित किया था। हम में से अधिकांश को यह पसन्द नहीं है कि हमें हमारी नश्वरता का स्मरण कराया जाए, परन्तु वास्तविकता यही है कि हम सभी को एक न एक दिन मरना ही है।

   मृत्यु का उल्लेख सदा ही एक गहरी भावनात्मक प्रतिक्रिया को उत्पन्न करता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में हम प्रभु यीशु के विषय देखते हैं कि अपने एक निकट मित्र, लाजार, की मृत्यु के पश्चात प्रभु यीशु ने गहरी भावनाएँ व्यक्त कीं। जब उसने लाजार की बहन मरियम और उन यहूदियों को जो उसके साथ आए थे रोते हुए देखा तो वह “...आत्मा में बहुत ही उदास हुआ, और घबरा कर कहा, तुम ने उसे कहां रखा है?” (यूहन्ना 11:33)। एक अन्य अंग्रेज़ी अनुवाद में आया है “उसके अन्दर से एक गहरा क्रोध उभर कर आया” (NLT)।

   प्रभु यीशु विचलित हुए, क्रोधित भी हुए – परन्तु किस पर? संभवतः वे पाप और उसके परिणामों पर क्रुद्ध थे। परमेश्वर ने सृष्टि की रचना करते समय बीमारी, कष्ट और दुःख से भरे सँसार की रचना नहीं की थी। परन्तु पाप को प्रवेश मिलने के बाद, पाप ने परमेश्वर की सुन्दर रचना तथा योजना को बिगाड़ दिया।

   लेकिन हमारे दुःख के समय में हमारा प्रभु परमेश्वर हमारे निकट रहता है, हमारे दुःख में हमारे साथ दुखी भी होता है (पद 35)। लेकिन इस सब से बढ़कर सांत्वना देने वाला तथ्य है कि हमारे स्थान पर मारे जाने और मृतकों में से जी उठने के द्वारा प्रभु यीशु ने पाप और मृत्यु को पराजित कर दिया है (1 कुरिन्थियों 15:55-57)। प्रभु यीशु की अपने अनुयायियों से प्रतिज्ञा है कि “यीशु ने उस से कहा, पुनरुत्थान और जीवन मैं ही हूं, जो कोई मुझ पर विश्वास करता है वह यदि मर भी जाए, तौभी जीएगा” (यूहन्ना 11:25)। आज प्रभु यीशु के विश्वासी इस जीवन में उसके साथ संगति का आनन्द लेते हैं, और उस अनन्त काल की प्रतीक्षा में हैं जहाँ मृत्योपरांत वे उसके साथ सदा काल के लिए निवास करेंगे, और वहाँ कोई आँसू, दर्द, बीमारी, या मृत्यु नहीं होगी। - पोह फैंग चिया


प्रभु यीशु की खाली कब्र मृत्यु पर विजय की निश्चितता और प्रमाण है।

हे मृत्यु तेरी जय कहां रही? हे मृत्यु तेरा डंक कहां रहा? मृत्यु का डंक पाप है; और पाप का बल व्यवस्था है। परन्तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, जो हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा हमें जयवन्‍त करता है। - 1 कुरिन्थियों 15:55-7

बाइबल पाठ: यूहन्ना 11:1-4; 38-44
John 11:1 मरियम और उस की बहिन मारथा के गांव बैतनिय्याह का लाजर नाम एक मनुष्य बीमार था।
John 11:2 यह वही मरियम थी जिसने प्रभु पर इत्र डालकर उसके पांवों को अपने बालों से पोंछा था, इसी का भाई लाजर बीमार था।
John 11:3 सो उस की बहिनों ने उसे कहला भेजा, कि हे प्रभु, देख, जिस से तू प्रीति रखता है, वह बीमार है।
John 11:4 यह सुनकर यीशु ने कहा, यह बीमारी मृत्यु की नहीं, परन्तु परमेश्वर की महिमा के लिये है, कि उसके द्वारा परमेश्वर के पुत्र की महिमा हो।
John 11:38 यीशु मन में फिर बहुत ही उदास हो कर कब्र पर आया, वह एक गुफा थी, और एक पत्थर उस पर धरा था।
John 11:39 यीशु ने कहा; पत्थर को उठाओ: उस मरे हुए की बहिन मारथा उस से कहने लगी, हे प्रभु, उस में से अब तो र्दुगंध आती है क्योंकि उसे मरे चार दिन हो गए।
John 11:40 यीशु ने उस से कहा, क्या मैं ने तुझ से न कहा था कि यदि तू विश्वास करेगी, तो परमेश्वर की महिमा को देखेगी।
John 11:41 तब उन्होंने उस पत्थर को हटाया, फिर यीशु ने आंखें उठा कर कहा, हे पिता, मैं तेरा धन्यवाद करता हूं कि तू ने मेरी सुन ली है।
John 11:42 और मैं जानता था, कि तू सदा मेरी सुनता है, परन्तु जो भीड़ आस पास खड़ी है, उन के कारण मैं ने यह कहा, जिस से कि वे विश्वास करें, कि तू ने मुझे भेजा है।
John 11:43 यह कहकर उसने बड़े शब्द से पुकारा, कि हे लाजर, निकल आ।
John 11:44 जो मर गया था, वह कफन से हाथ पांव बन्‍धे हुए निकल आया और उसका मुंह अंगोछे से लिपटा हुआ तें यीशु ने उन से कहा, उसे खोल कर जाने दो।


एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 12-13
  • लूका 16



सोमवार, 15 मई 2017

प्रेम


   एक डूबते हुए जहाज़ से बचाए जाने के पश्चात, एक 71 वर्षीय महिला आत्म-ग्लानि से परेशान रहने लगी। अस्पताल के अपने बिस्तर पर लेटे लेटे वह कह रही थी कि उसे समझ नहीं आ रहा है कि जब उस त्रासदी में इतने लोगों की, जो उससे कम आयु के थे, मृत्यु हो गई, तो उसके लिए जीवित बच जाना सही कैसे हो सकता है? उसे इस बात का भी खेद था कि वह उस नौजवान व्यक्ति का नाम भी नहीं जानती थी जिसने उसे पानी में से खींच कर निकाला था, जबकि वह सारी आशा छोड़ चुकी थी। वह चाहती थी कि उस नौजवान को वह कम से कम एक बार भोजन करवा दे, उसका हाथ पकड़कर उसे धन्यवाद कह सके, उसे गले लगा सके।

   उस वृध्द महिला की भावनाओं से मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस का ध्यान आया। वह अपने पड़ौसियों और देशवासियों के लिए इतना चिंतित था कि यदि संभव होता तो वह उन्हें बचाने के लिए मसीह के साथ के अपने संबंध का सौदा कर लेता: "क्योंकि मैं यहां तक चाहता था, कि अपने भाईयों, के लिये जो शरीर के भाव से मेरे कुटुम्बी हैं, आप ही मसीह से शापित हो जाता" (रोमियों 9:3)।

   साथ ही पौलुस ने परमेश्वर के प्रति अपना व्यक्तिगत तथा बहुत गहरा आभार भी प्रगट किया। वह जानता था कि वह परमेश्वर के कार्य करने की विधियों और न्याय को कभी पूरी तरह से समझ नहीं सकता है (पद 14-24)। इसलिए सब को मसीह यीशु में मिलने वाले पापों की क्षमा और उध्दार का सुसमाचार सुनाने का भरसक प्रयत्न करते हुए, उसने उस परमेश्वर में अपनी शान्ति और आनन्द को ढूँढ़ा, जिसका हृदय सारे संसार के सभी लोगों के लिए इतने अधिक प्रेम से भरा है, जितना प्रेम हम कभी कर नहीं सकते, जैसे प्रेम की हम कल्पना भी नहीं कर सकते। - मार्ट डीहॉन


परमेश्वर के प्रति कृतज्ञता से परमेश्वर की निकटता में बढ़ोतरी होती है।

वह यह चाहता है, कि सब मनुष्यों का उद्धार हो; और वे सत्य को भली भांति पहिचान लें। क्योंकि परमेश्वर एक ही है: और परमेश्वर और मनुष्यों के बीच में भी एक ही बिचवई है, अर्थात मसीह यीशु जो मनुष्य है। - 1 तिमुथियुस 2:4-5

बाइबल पाठ: रोमियों 9:1-5
Romans 9:1 मैं मसीह में सच कहता हूं, झूठ नहीं बोलता और मेरा विवेक भी पवित्र आत्मा में गवाही देता है। 
Romans 9:2 कि मुझे बड़ा शोक है, और मेरा मन सदा दुखता रहता है। 
Romans 9:3 क्योंकि मैं यहां तक चाहता था, कि अपने भाईयों, के लिये जो शरीर के भाव से मेरे कुटुम्बी हैं, आप ही मसीह से शापित हो जाता। 
Romans 9:4 वे इस्त्राएली हैं; और लेपालकपन का हक और महिमा और वाचाएं और व्यवस्था और उपासना और प्रतिज्ञाएं उन्हीं की हैं। 
Romans 9:5 पुरखे भी उन्हीं के हैं, और मसीह भी शरीर के भाव से उन्हीं में से हुआ, जो सब के ऊपर परम परमेश्वर युगानुयुग धन्य है। आमीन।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजा 22-23
  • यूहन्ना 4:31-54


शुक्रवार, 23 सितंबर 2016

आपात स्थिति


   मार्च 2011 में एक विध्वंसकारी सुनामी जापान के तट से टकराई जिससे समुद्र के किनारे के गाँव तथा नगर उजड़ गए, और लगभग 16000 लोगों की जानें जाती रहीं। लेखिका तथा कवित्री ग्रेटल एर्लिच उस विनाश को देखने जब जापान पहुँची, तो जो कुछ उन्होंने देखा उसका बयान करने के लिए उनके पास शब्द नहीं थे; उन्होंने अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए उस परिस्थिति पर एक कविता लिखी। बाद में समाचार मीडिया को दिए एक टेलिविज़न साक्षात्कार में इस विषय पर बात करते हुए उन्होंने अपने एक दिवंगत मित्र और कवी विलियम स्टैफोर्ड का हवाला देकर कहा: "मेरे पुराने मित्र विलियम स्टैफोर्ड ने कहा था, कविता आत्मा की आपात स्थिति का उद्गार है।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भी गहरी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए, चाहे वे आनन्द से भरा स्तुतिगान हो या हानि से आया गहरा दुःख, हम कविता का भरपूरी से प्रयोग पाते हैं। जब राजा शाउल और उसका पुत्र योनातान युद्ध में मारे गए तो दाउद दुःख से अभिभूत हो गया (2 शमूएल 1:1-2) और अपने इस गहरे दुःख को व्यक्त करने के लिए उसने एक विलापगीत लिखा: "शाऊल और योनातन जीवनकाल में तो प्रिय और मनभाऊ थे, और अपनी मृत्यु के समय अलग न हुए; वे उकाब से भी वेग चलने वाले, और सिंह से भी अधिक पराक्रमी थे। हे इस्राएली स्त्रियो, शाऊल के लिये रोओ, वह तो तुम्हें लाल रंग के वस्त्र पहिनाकर सुख देता, और तुम्हारे वस्त्रों के ऊपर सोने के गहने पहिनाता था। हाय, युद्ध के बीच शूरवीर कैसे काम आए! हे योनातन, हे ऊंचे स्थानों पर जूझे हुए, हे मेरे भाई योनातन, मैं तेरे कारण दु:खित हूँ; तू मुझे बहुत मनभाऊ जान पड़ता था; तेरा प्रेम मुझ पर अद्‌भुत, वरन स्त्रियों के प्रेम से भी बढ़कर था" (1 शमूएल 1:23-26)।

   आज हमें यदि किसी आत्मा की आपात स्थिति का सामना करना पड़े, वह चाहे आनन्द की हो या दुःख की, हमारी प्रार्थना भी एक कविता के समान प्रमेश्वर के सामने हमारी भावनाएं प्रगट करती है; और हम परमेश्वर के वचन बाइबल से भी प्रार्थनाओं की उन कविताओं का प्रयोग अपनी भावना व्यक्त करने के लिए कर सकते हैं। चाहे अपने मन की बात कहने के लिए हमारे पास शब्द ना हों, लेकिन परमेश्वर का आत्मा हमारी सहायता करता है (रोमियों 8:26) और हमारे मन की भावनाओं को परमेश्वर के सामने प्रार्थना में प्रस्तुत करता है। - डेविड मैक्कैसलैंड


परमेश्वर केवल शब्दों को ही नहीं सुनता; वह दिल का हाल भी पढ़ता है।

इसी रीति से आत्मा भी हमारी दुर्बलता में सहायता करता है, क्योंकि हम नहीं जानते, कि प्रार्थना किस रीति से करना चाहिए; परन्तु आत्मा आप ही ऐसी आहें भर भरकर जो बयान से बाहर है, हमारे लिये बिनती करता है। - रोमियों 8:26

बाइबल पाठ: 2 शमूएल 1:17-27
2 Samuel 1:17 (शाऊल और योनातन के लिये दाऊद का बनाया हुआ विलापगीत ) तब दाऊद ने शाऊल और उसके पुत्र योनातन के विषय यह विलापगीत बनाया, 
2 Samuel 1:18 और यहूदियों को यह धनुष नाम गीत सिखाने की आज्ञा दी; यह याशार नाम पुस्तक में लिखा हुआ है; 
2 Samuel 1:19 हे इस्राएल, तेरा शिरोमणि तेरे ऊंचे स्थान पर मारा गया। हाय, शूरवीर क्योंकर गिर पड़े हैं! 
2 Samuel 1:20 गत में यह न बताओ, और न अश्कलोन की सड़कों में प्रचार करना; न हो कि पलिश्ती स्त्रियाँ आनन्दित हों, न हो कि खतनारहित लोगों की बेटियां गर्व करने लगें। 
2 Samuel 1:21 हे गिलबो पहाड़ो, तुम पर न ओस पड़े, और न वर्षा हो, और न भेंट के योग्य उपज वाले खेत पाए जाएं! क्योंकि वहां शूरवीरों की ढालें अशुद्ध हो गई। और शाऊल की ढाल बिना तेल लगाए रह गई। 
2 Samuel 1:22 जूझे हुओं के लोहू बहाने से, और शूरवीरों की चर्बी खाने से, योनातन का धनुष लौट न जाता था, और न शाऊल की तलवार छूछी फिर आती थी। 
2 Samuel 1:23 शाऊल और योनातन जीवनकाल में तो प्रिय और मनभाऊ थे, और अपनी मृत्यु के समय अलग न हुए; वे उकाब से भी वेग चलने वाले, और सिंह से भी अधिक पराक्रमी थे। 
2 Samuel 1:24 हे इस्राएली स्त्रियो, शाऊल के लिये रोओ, वह तो तुम्हें लाल रंग के वस्त्र पहिनाकर सुख देता, और तुम्हारे वस्त्रों के ऊपर सोने के गहने पहिनाता था। 
2 Samuel 1:25 हाय, युद्ध के बीच शूरवीर कैसे काम आए! हे योनातन, हे ऊंचे स्थानों पर जूझे हुए, 
2 Samuel 1:26 हे मेरे भाई योनातन, मैं तेरे कारण दु:खित हूँ; तू मुझे बहुत मनभाऊ जान पड़ता था; तेरा प्रेम मुझ पर अद्‌भुत, वरन स्त्रियों के प्रेम से भी बढ़कर था। 
2 Samuel 1:27 हाय, शूरवीर क्योंकर गिर गए, और युद्ध के हथियार कैसे नाश हो गए हैं!

एक साल में बाइबल: 
  • श्रेष्ठगीत 1-3
  • गलतियों 2


सोमवार, 11 जुलाई 2016

कैसा हो?


   मुझे स्मरण हैं 1991 में वे टेलिविज़न समाचार रिपोर्ट्स देखना जब मॉस्को की सड़कों पर अहिंसक क्रांति घटित हो रही थी। रूस के वे नागरिक जो अब तक अपने जीवन की हर बात के लिए सरकार द्वारा निर्धारित और नियंत्रित कार्यक्रमों तथा योजनाओं के अनुसार रहा करते थे, अचानक ही स्थान स्थान पर खड़े होकर कहने लगे, "अब हम स्वतंत्र नागरिकों के समान आचरण करेंगे"; सरकार द्वारा पूर्णतः नियंत्रित अपने जीवन के विरोध में वे सड़कों पर आने लगे और सैनिक टैंकों के सामने आकर खड़े होने लगे। भवनों के अन्दर बैठे नेतृत्व करने वाले सरकारी लोगों और बाहर जमा जन समूह के चेहरों पर दिखने वाले भाव यह स्पष्ट दिखा रहे थे कि वास्तव में कौन भयभीत है और कौन स्वतंत्र है।

   फिनलैंड के टेलिविज़न पर दिखाई जा रही मॉस्को के रेड स्कुएयर में घटित होने वाले बातों को देखकर मुझे "मसीही विश्वास" को समझने का एक नया दृष्टिकोण मिला - मसीही विश्वास मानसिक विक्षेप का विपरीतार्थक शब्द है। भय से ग्रस्त मान्सिक विक्षेपित व्यक्ति हर बात में अपने भय के कारण को देखता है और उसी के अनुसार अपने जीवन को संचालित करता है। उसके आस-पास, या उसके साथ जो कुछ भी होता है, वह उसके भय को और बढ़ाता है।

   इसके विपरीत मसीही विश्वास है; मसीह यीशु पर विश्वास करने वाला व्यक्ति अपने जीवन को भय के आधार पर नहीं वरन परमेश्वर पर लाए गए उसके विश्वास के आधार पर संचालित करता है। उसके आस-पास, उसके जीवन में, चाहे कैसी भी अव्यवस्था और परेशान करने वाली परिस्थितियाँ क्यों ना हों, मसीही विश्वासी यह जानता और मानता है कि सब कुछ परमेश्वर के नियंत्रण में है, और परमेश्वर जो कुछ भी उसके जीवन में आने देगा वह उसकी भलाई ही के लिए है (रोमियों 8:28)। एक मसीही विश्वासी होने के नाते मुझे इस बात पर ध्यान केंद्रित नहीं करना चाहिए कि मेरी भावनाएँ मेरी परिस्थितियों को लेकर क्या हैं, वरन मुझे हर समय इस बोध के साथ रहना चाहिए कि परमेश्वर मुझसे प्रेम करता है और मैं परमेश्वर की सन्तान होने के नाते उसके लिए बहुत महत्वपूर्ण हूँ।

   कैसा हो यदि हम मसीही विश्वासी, हम जो परमेश्वर के राज्य के लोग हैं, परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित यूहन्ना द्वारा लिखी गई बात "हे बालको, तुम परमेश्वर के हो: और तुम ने उन पर जय पाई है; क्योंकि जो तुम में है, वह उस से जो संसार में है, बड़ा है" (1 यूहन्ना 4:4) की सच्चाई को अपने जीवनों में पूर्णत्या मानकर लागू कर लें? कैसा हो यदि हम मसीही समाज में सबसे अधिक दोहराई जाने वाली प्रार्थना - परमेश्वर की इच्छा जैसे स्वर्ग में पूरी होती है वैसे ही पृथ्वी पर भी हो को प्रदर्शित करने वाले जीवन जीने लग जाएं? - फिलिप यैन्सी

जब आप प्रभु परमेश्वर में अपने विश्वास को पोषित करने लगेंगे, 
स्वतः ही आपके सभी भय भूखों मरने लगेंगे।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 4:1-6, 4:15-19
1 John 4:1 हे प्रियों, हर एक आत्मा की प्रतीति न करो: वरन आत्माओं को परखो, कि वे परमेश्वर की ओर से हैं कि नहीं; क्योंकि बहुत से झूठे भविष्यद्वक्ता जगत में निकल खड़े हुए हैं। 
1 John 4:2 परमेश्वर का आत्मा तुम इसी रीति से पहचान सकते हो, कि जो कोई आत्मा मान लेती है, कि यीशु मसीह शरीर में हो कर आया है वह परमेश्वर की ओर से है। 
1 John 4:3 और जो कोई आत्मा यीशु को नहीं मानती, वह परमेश्वर की ओर से नहीं; और वही तो मसीह के विरोधी की आत्मा है; जिस की चर्चा तुम सुन चुके हो, कि वह आने वाला है: और अब भी जगत में है। 
1 John 4:4 हे बालको, तुम परमेश्वर के हो: और तुम ने उन पर जय पाई है; क्योंकि जो तुम में है, वह उस से जो संसार में है, बड़ा है। 
1 John 4:5 वे संसार के हैं, इस कारण वे संसार की बातें बोलते हैं, और संसार उन की सुनता है। 
1 John 4:6 हम परमेश्वर के हैं: जो परमेश्वर को जानता है, वह हमारी सुनता है; जो परमेश्वर को नहीं जानता वह हमारी नहीं सुनता; इसी प्रकार हम सत्य की आत्मा और भ्रम की आत्मा को पहचान लेते हैं। 
1 John 4:15 जो कोई यह मान लेता है, कि यीशु परमेश्वर का पुत्र है: परमेश्वर उस में बना रहता है, और वह परमेश्वर में। 
1 John 4:16 और जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, उसको हम जान गए, और हमें उस की प्रतीति है; परमेश्वर प्रेम है: जो प्रेम में बना रहता है, वह परमेश्वर में बना रहता है; और परमेश्वर उस में बना रहता है। 
1 John 4:17 इसी से प्रेम हम में सिद्ध हुआ, कि हमें न्याय के दिन हियाव हो; क्योंकि जैसा वह है, वैसे ही संसार में हम भी हैं। 
1 John 4:18 प्रेम में भय नहीं होता, वरन सिद्ध प्रेम भय को दूर कर देता है, क्योंकि भय से कष्‍ट होता है, और जो भय करता है, वह प्रेम में सिद्ध नहीं हुआ। 
1 John 4:19 हम इसलिये प्रेम करते हैं, कि पहिले उसने हम से प्रेम किया।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 1-3
  • प्रेरितों 17:1-15


मंगलवार, 3 मई 2016

बदला जीवन


   कंप्यूटर को निज प्रयोग के लिए सरल और व्यक्तिगत बनाने में अति प्रमुख भूमिका निभाने वाले पथप्रदर्शक स्टीव जोब का जब 2011 में निधन हुआ तो संसार भर से दस लाख से भी अधिक लोगों ने इंटरनैट द्वारा उन्हें श्र्द्धांजली भेजी। इन श्रद्धांजलियों में एक सामन्य बात थी लोगों द्वारा व्यक्त किए जाना कि कैसे स्टीव जोब के कार्य ने उनके जीवनों को प्रभावित किया और बदल दिया। उन लोगों ने व्यक्त किया कि उसकी रचनात्मक कृतियों के कारण आज वे जीवन भिन्न रीति से जी पा रहे हैं, और इसके लिए वे जोब के लिए अपनी प्रशंसा और उसके निधन पर अपना दुःख व्यक्त करना चाहते हैं। स्टीव जोब द्वारा बनाए गए गए टैबलेट कंप्यूटर iPad को आधार बनाकर एक टैबलेट कंप्यूटर पर बड़े अक्षरों में किसी ने लिख कर कहा: iSad!

   कृतज्ञता से भावनाओं की अभिव्यक्ति होती है; और यही बात परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 107 में कही गई है: "यहोवा के छुड़ाए हुए ऐसा ही कहें, जिन्हें उसने द्रोही के हाथ से दाम दे कर छुड़ा लिया है" (पद 2)। इस भजन का प्रसंग है बड़ी कठिनाई में पड़े लोगों का परमेश्वर द्वारा बचाया जाना। बचाए गए लोगों में से कुछ बेघर और बेआसरा थे (पद 4-5), कुछ ने परमेश्वर की आज्ञाओं के विरुद्ध बलवा किया था (पद 10-11), कुछ अपनी बुद्धि लगाकर भी निराश ही हुए थे और अन्ततः उन्होंने परमेश्वर को पुकारा (पद 26-27)। उनकी परेशानी और परिस्थिति का कारण चाहे जो भी रहा हो, जब उन्होंने परमेश्वर को पुकारा तो परमेश्वर ने उनकी सहायता भी करी, और उन्हें परिस्थितियों से छुड़ाया भी (पद 8, 15, 21, 31)।

   जब हम परमेश्वर के प्रेम और क्षमा की महानता पर ध्यान करते हैं, प्रभु यीशु को संसार में बलिदान होने और फिर मृतकों में से उसके पुनरुत्थान के लिए भेजने के उसके अनुग्रह के बारे में विचार करते हैं, यह समझते-पहिचानते हैं हैं कि प्रभु ने हमें कैसे हमारे पापों और उनके दुषपरिणामों से छुड़ाया है, तो हम उसकी आराधना और स्तुति करे बिना रह नहीं पाते और प्रभु यीशु में होकर सेंत-मेंत मिलने वाली क्षमा तथा उद्धार के बारे में बताने से और अपने बदले हुए जीवन के बारे में गवाही देने से रह नहीं पाते। - डेविड मैक्कैसलैंड


हमारे उद्धार के लिए प्रभु परमेश्वर के प्रति हमारी कृतज्ञता, 
दूसरों को इस बात कि साक्षी देने को उत्तेजित करती है।

परन्तु पतरस और यूहन्ना ने उन को उत्तर दिया, कि तुम ही न्याय करो, कि क्या यह परमेश्वर के निकट भला है, कि हम परमेश्वर की बात से बढ़कर तुम्हारी बात मानें। क्योंकि यह तो हम से हो नहीं सकता, कि जो हम ने देखा और सुना है, वह न कहें। - प्रेरितों 4:19-20

बाइबल पाठ: भजन 107:1-16
Psalms 107:1 यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; और उसकी करूणा सदा की है! 
Psalms 107:2 यहोवा के छुड़ाए हुए ऐसा ही कहें, जिन्हें उसने द्रोही के हाथ से दाम दे कर छुड़ा लिया है, 
Psalms 107:3 और उन्हें देश देश से पूरब- पश्चिम, उत्तर और दक्खिन से इकट्ठा किया है।
Psalms 107:4 वे जंगल में मरूभूमि के मार्ग पर भटकते फिरे, और कोई बसा हुआ नगर न पाया; 
Psalms 107:5 भूख और प्यास के मारे, वे विकल हो गए। 
Psalms 107:6 तब उन्होंने संकट में यहोवा की दोहाई दी, और उसने उन को सकेती से छुड़ाया; 
Psalms 107:7 और उन को ठीक मार्ग पर चलाया, ताकि वे बसने के लिये किसी नगर को जा पहुंचे। 
Psalms 107:8 लोग यहोवा की करूणा के कारण, और उन आश्चर्यकर्मों के कारण, जो वह मनुष्यों के लिये करता है, उसका धन्यवाद करें! 
Psalms 107:9 क्योंकि वह अभिलाषी जीव को सन्तुष्ट करता है, और भूखे को उत्तम पदार्थों से तृप्त करता है।
Psalms 107:10 जो अन्धियारे और मृत्यु की छाया में बैठे, और दु:ख में पड़े और बेड़ियों से जकड़े हुए थे, 
Psalms 107:11 इसलिये कि वे ईश्वर के वचनों के विरुद्ध चले, और परमप्रधान की सम्मति को तुच्छ जाना। 
Psalms 107:12 तब उसने उन को कष्ट के द्वारा दबाया; वे ठोकर खाकर गिर पड़े, और उन को कोई सहायक न मिला। 
Psalms 107:13 तब उन्होंने संकट में यहोवा की दोहाई दी, और उस ने सकेती से उनका उद्धार किया; 
Psalms 107:14 उसने उन को अन्धियारे और मृत्यु की छाया में से निकाल लिया; और उन के बन्धनों को तोड़ डाला। 
Psalms 107:15 लोग यहोवा की करूणा के कारण, और उन आश्चर्यकर्मों के कारण जो वह मनुष्यों के लिये करता है, उसका धन्यवाद करें! 
Psalms 107:16 क्योंकि उसने पीतल के फाटकों को तोड़ा, और लोहे के बेण्डों को टुकड़े टुकड़े किया।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 राजा 14-15
  • लूका 22:21-46


रविवार, 17 अप्रैल 2016

योग्य सहायक


   अमेरिका के न्यूटाऊन, कनेक्टिकट के एक प्राथमिक स्कूल में हुए गोली-काँड के बाद बहुत से लोगों के अन्दर किसी ना किसी रीति से उस दुर्घटना से प्रभावित लोगों की सहायाता करने की भावना जागृत हुई। इसी भावना के अन्तर्गत, कुछ ने घायलों के इलाज के लिए रक्त-दान किया, कुछ ने अपने रेस्टोरॉन्ट से राहत, बचाव और बहाली का कार्य करने वाले लोगों के लिए मुफ्त भोजन तथा कॉफी परोसी। कुछ ने सांत्वना और प्रोत्साहन के पत्र लिखे तो कुछ ने केवल प्रभावित लोगों को गले लगाकर उन्हें अकेले या निःसहाय नहीं होने का एहसास करवाया। कुछ ने बच्चों के लिए खिलोने और पैसे दान किए, तो कुछ ने निराश लोगों को संभालने और आशा बंधाने के लिए सलाहकारों का कार्य किया। अपने संसाधनों, व्यक्तित्व, योग्यता आदि के अनुसार जिससे जो बन पड़ा उसने किया।

   परमेश्वर के वचन बाइबल की एक घटना दिखाती है कि कैसे बाइबल के एक पात्र यूसुफ ने उसे अनुचित रीति से बन्दी बनाकर रखने वाले लोगों को सात वर्ष के भीषण अकाल से सकुशल निकालने में अपनी योग्यताओं द्वारा एक बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई (उत्पत्ति 41:53-54)। परमेश्वर ने मिस्त्र के राजा फिरौन को स्वपन द्वारा चिताया कि सात वर्ष की भरपूरी और फिर सात वर्ष का भयानक अकाल आने वाला है, किंतु फिरौन अपने स्वपनों को समझ ना सका और परमेश्वर ने यूसुफ को उसे यह समझाने के लिए उपयोग किया। यूसुफ की यह योग्यता और परमेश्वर का साथ देखकर फिरौन ने उसे ही इस आने वाली विपदा से सकुशल निकल पाने की योजना बनाने और उसे कार्यान्वित करने की ज़िम्मेदारी सौंपी। यूसुफ ने परमेश्वर से मिली प्रतिभा और बुद्धिमता के द्वारा यह सभी तैयारी करी (उत्पत्ति 41:39)। फिर जब अकाल का समय आया और लोग त्रस्त होने लगे तब यूसुफ ने अन्न के भण्डार उनके लिए खोल दिए (उत्पत्ति 41:56) और वह अपने परिवार को भी अकाल से बचाने पाया (उत्पत्ति 45:16-18)।

   ये सभी बातें इस संसार के लिए परमेश्वर के मन की भावना को दिखाती हैं। परमेश्वर ने हमें बनाया और सक्षम किया है कि जैसा हम से बन पड़े, हम अन्य लोगों के सहायक हों; और जब हम सहायता के लिए तैयार होकर आगे बढ़ते हैं तब वह योग्य सहायक होने के लिए हमारा मार्गदर्शन भी करता है। - एनी सेटास


करुणा आवश्यकतानुसार जो भी चाहिए होता है वह उपलब्ध करने के लिए प्रेरित करती है।

जिनका भला करना चाहिये, यदि तुझ में शक्ति रहे, तो उनका भला करने से न रुकना। यदि तेरे पास देने को कुछ हो, तो अपने पड़ोसी से न कहना कि जा कल फिर आना, कल मैं तुझे दूंगा। - नीतिवचन 3:27-28

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 41:46-56
Genesis 41:46 जब यूसुफ मिस्र के राजा फिरौन के सम्मुख खड़ा हुआ, तब वह तीस वर्ष का था। सो वह फिरौन के सम्मुख से निकलकर मिस्र के सारे देश में दौरा करने लगा। 
Genesis 41:47 सुकाल के सातों वर्षों में भूमि बहुतायत से अन्न उपजाती रही। 
Genesis 41:48 और यूसुफ उन सातों वर्षों में सब प्रकार की भोजनवस्तुएं, जो मिस्र देश में होती थीं, जमा कर के नगरों में रखता गया, और हर एक नगर के चारों ओर के खेतों की भोजनवस्तुओं को वह उसी नगर में इकट्ठा करता गया। 
Genesis 41:49 सो यूसुफ ने अन्न को समुद्र की बालू के समान अत्यन्त बहुतायत से राशि राशि कर के रखा, यहां तक कि उसने उनका गिनना छोड़ दिया; क्योंकि वे असंख्य हो गईं। 
Genesis 41:50 अकाल के प्रथम वर्ष के आने से पहिले यूसुफ के दो पुत्र, ओन के याजक पोतीपेरा की बेटी आसनत से जन्मे। 
Genesis 41:51 और यूसुफ ने अपने जेठे का नाम यह कहके मनश्शे रखा, कि परमेश्वर ने मुझ से सारा क्लेश, और मेरे पिता का सारा घराना भुला दिया है। 
Genesis 41:52 और दूसरे का नाम उसने यह कहकर एप्रैम रखा, कि मुझे दु:ख भोगने के देश में परमेश्वर ने फुलाया फलाया है। 
Genesis 41:53 और मिस्र देश के सुकाल के वे सात वर्ष समाप्त हो गए। 
Genesis 41:54 और यूसुफ के कहने के अनुसार सात वर्षों के लिये अकाल आरम्भ हो गया। और सब देशों में अकाल पड़ने लगा; परन्तु सारे मिस्र देश में अन्न था। 
Genesis 41:55 जब मिस्र का सारा देश भूखों मरने लगा; तब प्रजा फिरोन से चिल्ला चिल्लाकर रोटी मांगने लगी: और वह सब मिस्रियों से कहा करता था, यूसुफ के पास जाओ: और जो कुछ वह तुम से कहे, वही करो। 
Genesis 41:56 सो जब अकाल सारी पृथ्वी पर फैल गया, और मिस्र देश में काल का भयंकर रूप हो गया, तब यूसुफ सब भण्डारों को खोल खोल के मिस्रियों के हाथ अन्न बेचने लगा। 
Genesis 41:57 सो सारी पृथ्वी के लोग मिस्र में अन्न मोल लेने के लिये यूसुफ के पास आने लगे, क्योंकि सारी पृथ्वी पर भयंकर अकाल था।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 1-2
  • लूका 14:1-24


बुधवार, 9 सितंबर 2015

मार्गदर्शक


   लन्डन के वेस्टमिनिस्टर में स्थित तथा आम तौर से बिगबैन के नाम से विख्यात विशाल घड़ी के घण्टों के शानदार स्वरों से बहुत से लोग परिचित हैं। हम में से कितनों के घरों में ऐसी घड़ियाँ होंगी जो प्रत्येक घण्टे पर उन्ही स्वरों को बजाती हैं। यह माना जाता है कि बिगबैन के वे स्वर संगीतकार जॉर्ज फ्रेड्रिक हैन्डल द्वारा परमेश्वर की स्तुति के लिए लिखे गए संकीर्तन Messaih में से लिए गए हैं। बिगबैन घड़ी से जुड़ी एक अन्य विशेषता है उसके अन्दर के कमरे में खुदे हुए समय की विशेषता के सूचक ये शब्द:
इस पूरे घण्टे भर,
प्रभु मेरा मार्गदर्शक रह;
क्योंकि आपकी सामर्थ से संभाला गया,
कोई पग कभी फिसल नहीं सकता।
ये शब्द हमारे जीवनों के लिए परमेश्वर के मार्गदर्शन की निरन्तर आवश्यकता का एक अच्छा अनुस्मारक हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के एक प्रमुख पात्र राजा दाऊद ने इस बात को पहिचाना कि उसे जीवन की चुनौतियों का सामना करने में निरन्तर परमेश्वर के मार्गदर्शन की आवश्यकता है। दाऊद ने भजन 25 में लिखा, "मुझे अपने सत्य पर चला और शिक्षा दे, क्योंकि तू मेरा उद्धार करने वाला परमेश्वर है; मैं दिन भर तेरी ही बाट जोहता रहता हूं" (भजन 25:5)। दाऊद परमेश्वर से निरन्तर सीखते रहने वाला उसका अनुयायी था, और हर बात में उसकी ओर देखता रहता था। उसके मन की यही इच्छा रहती थी कि वह पूरे भरोसे के साथ सदा परमेश्वर पर निर्भर बना रहे।

   प्रभु परमेश्वर के प्रति ऐसी ही भावना हमारी भी होनी चाहिए। हम अपने दिन का आरंभ तो दिन के लिए परमेश्वर की सहायता माँगकर करते हैं, लेकिन दिन के कार्य आरंभ होने के साथ ही हमारा ध्यान परमेश्वर से हटकर अन्य बातों पर लग जाता है, और फिर हम परमेश्वर के मार्गदर्शन के अनुसार नहीं वरन अपनी या किसी अन्य मनुष्य की समझ के अनुसार निर्णय लेने और कार्य करने लग जाते हैं।

   प्रभु हमारी विनती है आप हमारी सहायता करें जिससे हम सदैव इस बात में बने रहें कि, "प्रभु मेरा मार्गदर्शक रह"। - डेनिस फिशर


प्रातः के आरंभ से लेकर रात्रि के अन्त तक मसीह यीशु को अपने विचारों में प्रथम एवं अन्तिम बनाए रखें।

यहोवा मेरा बल और भजन का विषय है, और वही मेरा उद्धार भी ठहरा है; मेरा ईश्वर वही है, मैं उसी की स्तुति करूंगा, (मैं उसके लिये निवासस्थान बनाऊंगा ), मेरे पूर्वजों का परमेश्वर वही है, मैं उसको सराहूंगा। - निर्गमन 15:2

बाइबल पाठ: भजन 25:1-11
Psalms 25:1 हे यहोवा मैं अपने मन को तेरी ओर उठाता हूं। 
Psalms 25:2 हे मेरे परमेश्वर, मैं ने तुझी पर भरोसा रखा है, मुझे लज्जित होने न दे; मेरे शत्रु मुझ पर जयजयकार करने न पाएं। 
Psalms 25:3 वरन जितने तेरी बाट जोहते हैं उन में से कोई लज्जित न होगा; परन्तु जो अकारण विश्वासघाती हैं वे ही लज्जित होंगे।
Psalms 25:4 हे यहोवा अपने मार्ग मुझ को दिखला; अपना पथ मुझे बता दे। 
Psalms 25:5 मुझे अपने सत्य पर चला और शिक्षा दे, क्योंकि तू मेरा उद्धार करने वाला परमेश्वर है; मैं दिन भर तेरी ही बाट जोहता रहता हूं। 
Psalms 25:6 हे यहोवा अपनी दया और करूणा के कामों को स्मरण कर; क्योंकि वे तो अनन्तकाल से होते आए हैं। 
Psalms 25:7 हे यहोवा अपनी भलाई के कारण मेरी जवानी के पापों और मेरे अपराधों को स्मरण न कर; अपनी करूणा ही के अनुसार तू मुझे स्मरण कर।
Psalms 25:8 यहोवा भला और सीधा है; इसलिये वह पापियों को अपना मार्ग दिखलाएगा। 
Psalms 25:9 वह नम्र लोगों को न्याय की शिक्षा देगा, हां वह नम्र लोगों को अपना मार्ग दिखलाएगा। 
Psalms 25:10 जो यहोवा की वाचा और चितौनियों को मानते हैं, उनके लिये उसके सब मार्ग करूणा और सच्चाई हैं।
Psalms 25:11 हे यहोवा अपने नाम के निमित्त मेरे अधर्म को जो बहुत हैं क्षमा कर।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 6-7
  • 2 कुरिन्थियों 2


रविवार, 1 फ़रवरी 2015

मन और उत्साह



   मुझे खेल प्रतियोगिताएं देखना बहुत अच्छा लगता है। खिलाड़ियों द्वारा उत्साह के साथ खेल मैदान पर जी-जान लगाते देखना मुझे पसन्द है; यह उत्साह उनके खेल के प्रति प्रेम को दिखाता है। इसके विपरीत, जब खेल प्रतियोग्यताओं का समय पूरा हो रहा होता है और कोई खेल टीम हार कर प्रतियोगिता में कोई भी पुरुस्कृत स्थान पाने के अवसर खो चुकी होती है, तो उसके खिलाड़ियों द्वारा शेष बची हुई प्रतियोगिताओं में बिना किसी उत्साह के केवल दिखाने भर के लिए भाग लेना, मेरे जैसे खेल प्रेमी दर्शकों को बड़ा निराशाजनक लगता है।

   हमारे व्यक्तिगत जीवनों में भी किसी कार्य को अच्छे से करने के लिए उत्साह भावना का बड़ा महत्व है और उत्साह का होना परमेश्वर के प्रति हमारे कार्यों और सेवकाई में भी महत्वपूर्ण है। प्रेरित पौलुस ने लिखा कि हमारे दैनिक कार्यों के प्रति हमारा रवैया परमेश्वर के प्रति हमारे रवैये का सूचक भी है। इफिसियों के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में पौलुस ने लिखा: "और मनुष्यों को प्रसन्न करने वालों की नाईं दिखाने के लिये सेवा न करो, पर मसीह के दासों की नाईं मन से परमेश्वर की इच्छा पर चलो। और उस सेवा को मनुष्यों की नहीं, परन्तु प्रभु की जानकर सुइच्‍छा से करो" (इफिसीयों 6:6-7)।

   मेरे लिए पौलुस द्वारा कही इस बात का मुख्य बिंदु है "मन से"। मेरा ऐसा प्रेमी परमेश्वर पिता है जिसने अपने पूरे मन से मुझ से इतना प्रेम किया कि मेरे साथ मेल-मिलाप कर पाने के लिए उस ने अपने पुत्र प्रभु यीशु को बलिदान होने संसार में भेज दिया। जिस परमेश्वर ने मेरे लिए अपना सर्वोत्तम बलिदान होने के लिए दे दिया, उसके लिए मैं अपने सर्वोत्तम से कम कुछ कैसे कर सकता हूँ? जिस परमेश्वर पिता ने हमारे लिए सब कुछ कर के दे दिया, उसके लिए पूरे मन और उत्साह के साथ अपना सर्वोत्तम करने की भावना और लालसा उसके प्रति हमारे प्रेम का सूचक है। - बिल क्राउडर


परमेश्वर का प्रेम हमें उत्साहित करता है कि हम परमेश्वर के लिए जीवन व्यतीत करें।

और जो कुछ तुम करते हो, तन मन से करो, यह समझ कर कि मनुष्यों के लिये नहीं परन्तु प्रभु के लिये करते हो। - कुलुस्सियों 3:23

बाइबल पाठ: इफिसीयों 6:5-9
Ephesians 6:5 हे दासों, जो लोग शरीर के अनुसार तुम्हारे स्‍वामी हैं, अपने मन की सीधाई से डरते, और कांपते हुए, जैसे मसीह की, वैसे ही उन की भी आज्ञा मानो। 
Ephesians 6:6 और मनुष्यों को प्रसन्न करने वालों की नाईं दिखाने के लिये सेवा न करो, पर मसीह के दासों की नाईं मन से परमेश्वर की इच्छा पर चलो। 
Ephesians 6:7 और उस सेवा को मनुष्यों की नहीं, परन्तु प्रभु की जानकर सुइच्‍छा से करो। 
Ephesians 6:8 क्योंकि तुम जानते हो, कि जो कोई जैसा अच्छा काम करेगा, चाहे दास हो, चाहे स्‍वतंत्र; प्रभु से वैसा ही पाएगा। 
Ephesians 6:9 और हे स्‍वामियों, तुम भी धमकियां छोड़कर उन के साथ वैसा ही व्यवहार करो, क्योंकि जानते हो, कि उन का और तुम्हारा दोनों का स्‍वामी स्वर्ग में है, और वह किसी का पक्ष नहीं करता।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 27-28
  • मत्ती 21:1-22



गुरुवार, 11 दिसंबर 2014

प्रेम व्यवहार


   कुछ वर्ष पहले की बात हैं मैं अपने एक मित्र के साथ परमेश्वर के वचन बाइबल से मत्ती 26 अध्याय पढ़ रहा था, जिसमें प्रभु यीशु के क्रूस पर चढ़ाए जाने के लिए पकड़वाए जाने से ठीक पहले की घटनाक्रम लिखा गया है। जब हम पढ़ते पढ़ते उस खण्ड पर आए जिसमें प्रभु यीशु तीन बार अपने चेलों से अपने लिए प्रार्थना करने को कहता है, और हर बार उन्हें प्रार्थना करते नहीं वरन सोते हुए पाता है, तो क्रोधावेश में होकर वह मित्र बोला, "यदि तब प्रभु यीशु के साथ मैं होता तो कभी नहीं सोता, मैं प्रभु का पूरा-पूरा साथ देता। कोई कैसे सो सकता है जबकि बारंबार प्रभु उन से कह रहा है कि वह बहुत व्याकुल है? प्रभु तो उनसे निवेदन कर रहा था।"

   यह जानते और समझते हुए कि हमारे परिवारजन हमारे कार्य करते रहने की व्यस्तता और लंबी दिनचर्या को लेकर कैसे संघर्ष करते हैं, मैंने अपने उस मित्र से कहा, "ऐसा कितनी बार हुआ है कि हमारे बच्चे स्कूल के किसी कार्यक्रम में, वहाँ बैठे अन्य अभिभावकों के मध्य हमें ढूँढ़ रहे होते हैं लेकिन हम वहाँ उनके लिए, उनके साथ नहीं होते? क्या हमारे बच्चों को कभी कभी अकेले ही परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ता? हमारे परिवार और मित्रजनों को अनेक बार हमारी ओर से मिलने वाले व्यक्तिगत ध्यान और परवाह की आवश्यकता होती है; जैसे प्रभु यीशु की अपने चेलों से, वैसे ही हमारे परिवार और मित्रजनों की हम से उनका साथ निभाने की आशा रहती है, परन्तु जैसे प्रभु को अपने चेलों से वैसे ही उन्हें भी हम से निराशा ही मिलती है।"

   जीवन की माँगों और हम से जुड़ी लोगों की आशाओं के बीच तालमेल बैठा कर दोनों को निभाते रहना कोई सरल कार्य नहीं है, परन्तु ऐसा ना करना भावनाओं के साथ विश्वासघात भी है। उन चेलों द्वारा प्रभु यीशु को उस रात निराश करने की बात हमें उकसाती है कि हम आज अपने जीवनों में झाँक कर देखें कि हम अपने प्रभु और अपने प्रीय जनों को कितनी बार और कैसे-कैसे निराश करते रहते हैं; और फिर प्रभु यीशु से सहायता माँगें कि वह हमारा मार्गदर्शन करे कि हम वह प्रेम व्यवहार प्रदर्शित कर सकें जो हमें करना चाहिए। - रैन्डी किल्गोर


दूसरों की आवश्यकता के प्रति हमारी संवेदनशीलता, प्रभु यीशु के प्रति हमारे प्रेम का एक माप है।

इसलिये जागते रहो और हर समय प्रार्थना करते रहो कि तुम इन सब आने वाली घटनाओं से बचने, और मनुष्य के पुत्र के साम्हने खड़े होने के योग्य बनो। - लूका 21:36

बाइबल पाठ: मत्ती 26:36-46
Matthew 26:36 तब यीशु ने अपने चेलों के साथ गतसमनी नाम एक स्थान में आया और अपने चेलों से कहने लगा कि यहीं बैठे रहना, जब तक कि मैं वहां जा कर प्रार्थना करूं। 
Matthew 26:37 और वह पतरस और जब्‍दी के दोनों पुत्रों को साथ ले गया, और उदास और व्याकुल होने लगा। 
Matthew 26:38 तब उसने उन से कहा; मेरा जी बहुत उदास है, यहां तक कि मेरे प्राण निकला चाहते: तुम यहीं ठहरो, और मेरे साथ जागते रहो। 
Matthew 26:39 फिर वह थोड़ा और आगे बढ़कर मुंह के बल गिरा, और यह प्रार्थना करने लगा, कि हे मेरे पिता, यदि हो सके, तो यह कटोरा मुझ से टल जाए; तौभी जैसा मैं चाहता हूं वैसा नहीं, परन्तु जैसा तू चाहता है वैसा ही हो। 
Matthew 26:40 फिर चेलों के पास आकर उन्हें सोते पाया, और पतरस से कहा; क्या तुम मेरे साथ एक घड़ी भी न जाग सके? 
Matthew 26:41 जागते रहो, और प्रार्थना करते रहो, कि तुम परीक्षा में न पड़ो: आत्मा तो तैयार है, परन्तु शरीर दुर्बल है। 
Matthew 26:42 फिर उसने दूसरी बार जा कर यह प्रार्थना की; कि हे मेरे पिता, यदि यह मेरे पीए बिना नहीं हट सकता तो तेरी इच्छा पूरी हो। 
Matthew 26:43 तब उसने आकर उन्हें फिर सोते पाया, क्योंकि उन की आंखें नींद से भरी थीं। 
Matthew 26:44 और उन्हें छोड़कर फिर चला गया, और वही बात फिर कहकर, तीसरी बार प्रार्थना की। 
Matthew 26:45 तब उसने चेलों के पास आकर उन से कहा; अब सोते रहो, और विश्राम करो: देखो, घड़ी आ पहुंची है, और मनुष्य का पुत्र पापियों के हाथ पकड़वाया जाता है। 
Matthew 26:46 उठो, चलें; देखो, मेरा पकड़वाने वाला निकट आ पहुंचा है।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 तिमुथियुस 1-4