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Saturday, September 30, 2017

तराई से प्रार्थना


   एक कविता रूप में परमेश्वर से की गई प्रार्थना है, जो The Valley of Vision के नाम से जानी जाती है। इस प्रार्थना-कविता का विषय पापी मनुष्य और उसके पवित्र परमेश्वर के मध्य की दूरी है। मनुष्य परमेश्वर से कहता है, "आप मुझे दर्शन की तराई में लेकर आए हैं...; चारों ओर पाप के पहाड़ों से घिरा होकर भी मैं ऊपर आपकी महिमा को देखता हूँ।" मनुष्य को अपनी गलतियों का बोध है, परन्तु फिर भी वह आशावादी है। वह आगे कहता है, "गहरे कूओं से भी सितारे दिखाई देते हैं; और कूआँ जितना गहरा होगा, सितारे उतने अधिक चमकीले दिखेंगे।" इस प्रार्थना-कविता का अन्त निवेदन के साथ होता है: "होने दें कि मैं अपने अन्धकार में आपकी ज्योति को...अपनी तराई में आपकी महिमा को पा सकूँ।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पाते हैं कि योना ने परमेश्वर की महिमा को सागर की गहराई में पाया। वह परमेश्वर से बलवा कर के भाग रहा था, और अपने पाप से अभिभूत, वह एक बड़ी मछली के पेट में पहुँच गया। वहाँ से योना ने परमेश्वर को पुकारा: "तू ने मुझे गहिरे सागर में समुद्र की थाह तक डाल दिया...मैं जल से यहां तक घिरा हुआ था कि मेरे प्राण निकले जाते थे" (योना 2:3, 5)। अपनी विकट परिस्थिति के बावजूद योना ने कहा, "जब मैं मूर्छा खाने लगा, तब मैं ने यहोवा को स्मरण किया; और मेरी प्रार्थना तेरे पास वरन तेरे पवित्र मन्दिर में पहुंच गई" (योना 2:7)। परमेश्वर ने योना की प्रार्थना सुनी और उसे मछली के पेट से स्वतंत्र किया।

   यद्यपि हमारे पाप, हमारे तथा परमेश्वर के मध्य दूरी लाते हैं, तो भी अपने जीवन के न्यूनतम स्तर से भी हम परमेश्वर की ओर देख सकते हैं - उसकी पवित्रता, भलाई, और अनुग्रह को, और प्रार्थना में उसे पुकार सकते हैं, और वह सच्चे हृदय से की गई हमारी प्रार्थना को सुनता है। यदि हम सच्चे पश्चाताप के साथ अपने पापों से मन फिराएं, परमेश्वर के समक्ष पापों का अंगीकार कर लें, तो वह हमें क्षमा कर देगा (1 यूहन्ना 1:9)। परमेश्वर तराई से की गई प्रार्थना को भी सुनता है, उसका उत्तर देता है। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


पाप का अन्धकार परमेश्वर के अनुग्रह की ज्योति को 
और अधिक चमकदार बना देता है।

यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है। - 1 यूहन्ना 1:9

बाइबल पाठ: योना 2:1-10
Jonah 2:1 तब योना ने उसके पेट में से अपने परमेश्वर यहोवा से प्रार्थना कर के कहा, 
Jonah 2:2 मैं ने संकट में पड़े हुए यहोवा की दोहाई दी, और उसने मेरी सुन ली है; अधोलोक के उदर में से मैं चिल्ला उठा, और तू ने मेरी सुन ली। 
Jonah 2:3 तू ने मुझे गहिरे सागर में समुद्र की थाह तक डाल दिया; और मैं धाराओं के बीच में पड़ा था, तेरी भड़काई हुई सब तरंग और लहरें मेरे ऊपर से बह गईं। 
Jonah 2:4 तब मैं ने कहा, मैं तेरे साम्हने से निकाल दिया गया हूं; तौभी तेरे पवित्र मन्दिर की ओर फिर ताकूंगा। 
Jonah 2:5 मैं जल से यहां तक घिरा हुआ था कि मेरे प्राण निकले जाते थे; गहिरा सागर मेरे चारों ओर था, और मेरे सिर में सिवार लिपटा हुआ था। 
Jonah 2:6 मैं पहाड़ों की जड़ तक पहुंच गया था; मैं सदा के लिये भूमि में बन्द हो गया था; तौभी हे मेरे परमेश्वर यहोवा, तू ने मेरे प्राणों को गड़हे में से उठाया है। 
Jonah 2:7 जब मैं मूर्छा खाने लगा, तब मैं ने यहोवा को स्मरण किया; और मेरी प्रार्थना तेरे पास वरन तेरे पवित्र मन्दिर में पहुंच गई। 
Jonah 2:8 जो लोग धोखे की व्यर्थ वस्तुओं पर मन लगाते हैं, वे अपने करूणानिधान को छोड़ देते हैं। 
Jonah 2:9 परन्तु मैं ऊंचे शब्द से धन्यवाद कर के तुझे बलिदान चढ़ाऊंगा; जो मन्नत मैं ने मानी, उसको पूरी करूंगा। उद्धार यहोवा ही से होता है। 
Jonah 2:10 और यहोवा ने मच्छ को आज्ञा दी, और उसने योना को स्थल पर उगल दिया।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 9-10
  • इफिसियों 3


Friday, September 29, 2017

प्रकाश


   मैंने उन्हें सबसे पहले तब देखा था जब मैं एक कॉलेज विद्यार्थी थी। एक शरद ऋतु की ठंडी संध्या के समय, शहर के प्रकाश से दूर, मैं भूसे से लदी एक गाड़ी पर अपने मित्रों के साथ बैठी, शोर मचाती हुई जा रहा थी कि अचानक ही आकाश प्रकाशमान हो गया और क्षितिज पर रंग चमकने लगे। मैं मंत्रमुग्ध हो गई। उस रात के बाद से मैं इस उत्तरी ध्रूवीय प्रकाश से मोहित रही हूँ। अधिकांशतः यह मेरे निवास स्थान से बहुत उत्तर में ही दिखाई देते हैं, परन्तु कभी-कभी वे थोड़ा सा दक्षिण में भी दिख जाते हैं। उन्हें एक बार देख लेने के पश्चात, मैं उन्हें बारंबार देखने के लिए लालायित रहती हूँ। जब कभी वातावरण की परिस्थितियाँ अनुकूल प्रतीत होती हैं, मैं मेरे समान ही मंत्रमुग्ध अपने मित्रों से कहती हूँ, "शायद आज रात को..."

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रकाश और महिमा को प्रभु के आगमन के वर्णन के साथ जोड़ा गया है। वह समय आ रहा है जब सूर्य और चन्द्रमा की आवश्यकता नहीं रहेगी (यशायाह 60:19)। प्रेरित यूहन्ना ने परमेश्वर के स्वर्गीय सिंहासन पर विराजमान होने के विवरण में लिखा, "और जो उस पर बैठा है, वह यशब और मानिक सा दिखाई पड़ता है, और उस सिंहासन के चारों ओर मरकत सा एक मेघधनुष दिखाई देता है" (प्रकाशितवाक्य 4:3)।

   मरकत सा मेघधनुष उस उत्तरी ध्रुवीय प्रकाश का सटीक वर्णन है। इसलिए मैं जब भी ऊपर आकाश में प्रकाश का महिमामय प्रदर्शन देखती हूँ - चाहे स्वयं, या फिर किसी चित्र अथवा वीडियो में, तो मैं उसे आने वाले प्रकाश और महिमा का पूर्वाभास मानती हूँ, और परमेश्वर की महिमा करती हूँ कि उसका प्रकाश कैसे हमारे अन्धकार को बेध देता है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


प्रभु यीशु पाप के अन्धकार से भरे संसार को 
क्षमा और उध्दार का प्रकाश देने आया था।

उठ, प्रकाशमान हो; क्योंकि तेरा प्रकाश आ गया है, और यहोवा का तेज तेरे ऊपर उदय हुआ है। - यशायाह 60:1

बाइबल पाठ: यशायाह 60:19-22
Isaiah 60:19 फिर दिन को सूर्य तेरा उजियाला न होगा, न चान्दनी के लिये चन्द्रमा परन्तु यहोवा तेरे लिये सदा का उजियाला और तेरा परमेश्वर तेरी शोभा ठहरेगा। 
Isaiah 60:20 तेरा सूर्य फिर कभी अस्त न होगा और न तेरे चन्द्रमा की ज्योति मलिन होगी; क्योंकि यहोवा तेरी सदैव की ज्योति होगा और तरे विलाप के दिन समाप्त हो जाएंगे। 
Isaiah 60:21 और तेरे लोग सब के सब धर्मी होंगे; वे सर्वदा देश के अधिकारी रहेंगे, वे मेरे लगाए हुए पौधे और मेरे हाथों का काम ठहरेंगे, जिस से मेरी महिमा प्रगट हो। 
Isaiah 60:22 छोटे से छोटा एक हजार हो जाएगा और सब से दुर्बल एक सामर्थी जाति बन जाएगा। मैं यहोवा हूं; ठीक समय पर यह सब कुछ शीघ्रता से पूरा करूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 7-8
  • इफिसियों 2


Thursday, September 28, 2017

सहायता


   सहायता करने वाले अनेकों धर्मार्थ संस्थान अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए लोगों द्वारा दिए गए आर्थिक दान या उन लोगों के लिए अब अनुपयोगी हो गए कपड़ों या घर के काम की चीज़ों के दान किए जाने पर निर्भर रहते हैं। यह अच्छा है कि हम अनुपयोगी वस्तुओं को उनके लिए दे दें जिनके वे काम आ सकती हैं। परन्तु किसी मूल्यवान या उपयोग में आ रही वस्तु को दान करने में हमें हिचकिचाहट होती है, हम उसे देना नहीं चाहते हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि जब प्रेरित पौलुस अपने मसीही विश्वास के लिए बन्दीगृह में था, तो उसे निरंतर विश्वासयोग्य साथियों की संगति और उनसे उत्साहवर्धन की आवश्यकता थी। परन्तु फिर भी उसने अपने दो सबसे निकट के और उपयोगी साथियों को फिलिप्पी के मसीही विश्वासियों की सहायता के लिए भेजा (फिलिप्पियों 2:19-30)। फिलिप्पी के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में पौलुस ने लिखा, "मुझे प्रभु यीशु में आशा है, कि मैं तीमुथियुस को तुम्हारे पास तुरन्त भेजूंगा, ताकि तुम्हारी दशा सुनकर मुझे शान्‍ति मिले। क्योंकि मेरे पास ऐसे स्‍वाभाव का कोई नहीं, जो शुद्ध मन से तुम्हारी चिन्‍ता करे" (पद 19-20)। और, "पर मैं ने इपफ्रदीतुस को जो मेरा भाई, और सहकर्मी और संगी योद्धा और तुम्हारा दूत, और आवश्यक बातों में मेरी सेवा टहल करने वाला है, तुम्हारे पास भेजना अवश्य समझा" (पद 25)। पौलुस को जिस की सबसे अधिक आवश्यकता थी, उसने उसे ही उनमुक्त भाव से दूसरों की सहायता के लिए दे दिया।

   जिस भी चीज़ को हम अपने जीवनों में "अति आवश्यक" या "बहुमूल्य" समझते हैं, वही हमारे किसी जानकार के लिए भी बहुत लाभकारी या उपयोगी हो सकती है। यह हमारा समय, हमारी मित्रता, हमारा प्रोत्साहन, उनकी बात सुनने के लिए दिया गया समय और ध्यान, या किसी भी अन्य प्रकार की सहायता के लिए बढ़ाया गया हाथ, इत्यादि कुछ भी हो सकता है। जब जो प्रभु ने हमें दिया है, हम उसे दूसरों की सहायता के लिए दे देते हैं, तो हमारे प्रभु परमेश्वर का आदर और महिमा होती है, और हम परमेश्वर से आशीष के पात्र बन जाते हैं। - डेविड मैक्कैसलैंड


खुले दिल से देने से परमेश्वर का आदर, दूसरों की सहायता और हमारी भलाई होती है।

क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए। - युहन्ना 3:16

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 2:19-30
Philippians 2:19 मुझे प्रभु यीशु में आशा है, कि मैं तीमुथियुस को तुम्हारे पास तुरन्त भेजूंगा, ताकि तुम्हारी दशा सुनकर मुझे शान्‍ति मिले। 
Philippians 2:20 क्योंकि मेरे पास ऐसे स्‍वाभाव का कोई नहीं, जो शुद्ध मन से तुम्हारी चिन्‍ता करे। 
Philippians 2:21 क्योंकि सब अपने स्‍वार्थ की खोज में रहते हैं, न कि यीशु मसीह की। 
Philippians 2:22 पर उसको तो तुम ने परखा और जान भी लिया है, कि जैसा पुत्र पिता के साथ करता है, वैसा ही उसने सुसमाचार के फैलाने में मेरे साथ परिश्रम किया। 
Philippians 2:23 सो मुझे आशा है, कि ज्योंही मुझे जान पड़ेगा कि मेरी क्या दशा होगी, त्योंही मैं उसे तुरन्त भेज दूंगा। 
Philippians 2:24 और मुझे प्रभु में भरोसा है, कि मैं आप भी शीघ्र आऊंगा। 
Philippians 2:25 पर मैं ने इपफ्रदीतुस को जो मेरा भाई, और सहकर्मी और संगी योद्धा और तुम्हारा दूत, और आवश्यक बातों में मेरी सेवा टहल करने वाला है, तुम्हारे पास भेजना अवश्य समझा। 
Philippians 2:26 क्योंकि उसका मन तुम सब में लगा हुआ था, इस कारण वह व्याकुल रहता था क्योंकि तुम ने उस की बीमारी का हाल सुना था। 
Philippians 2:27 और निश्‍चय वह बीमार तो हो गया था, यहां तक कि मरने पर था, परन्तु परमेश्वर ने उस पर दया की; और केवल उस ही पर नहीं, पर मुझ पर भी, कि मुझे शोक पर शोक न हो। 
Philippians 2:28 इसलिये मैं ने उसे भेजने का और भी यत्‍न किया कि तुम उस से फिर भेंट कर के आनन्‍दित हो जाओ और मेरा भी शोक घट जाए। 
Philippians 2:29 इसलिये तुम प्रभु में उस से बहुत आनन्द के साथ भेंट करना, और ऐसों का आदर किया करना। 
Philippians 2:30 क्योंकि वही मसीह के काम के लिये अपने प्राणों पर जोखिम उठा कर मर