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बुधवार, 28 अगस्त 2019

ध्यान



      जौन न्यूटन ने लिखा था, “यदि घर जाते समय मुझे मार्ग में कोई ऐसा बच्चा मिले जिसका छोटा सिक्का गिर कर खो गया है, और उसे मैं अपनी ओर से एक सिक्का दे कर उसके आँसू पोंछ सकता हूँ, तो मैं समझूँगा कि मैंने कुछ विशेष किया है। मुझे तो इससे भी बड़े काम करने से खुश होना चाहिए; परन्तु मैं यह छोटा काम भी करता रहूँगा।”

      इन दिनों में ऐसे लोगों की कोई कमी नहीं है जिन्हें कुछ सांतवना और शान्ति की आवश्यकता है। उदाहरण के लिए, चिंताओं से दबा हुआ किराने की दूकान में काम करने वाला खजांची, जिसे घर का खर्च चलाने के लिए दो नौकरियां करनी पड़ रही हैं; एक शरणार्थी जिसे घर की तलाश है; एक अकेली माँ जिसकी चिंताओं के बोझ ने उसकी आशा को धूमिल कर दिया है; एक अकेला वृद्ध व्यक्ति जिसे लगता है कि अब उसकी उपयोगिता समाप्त हो गई है; इत्यादि।

      ऐसे में हमें क्या करना चाहिए? परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार दाऊद ने लिखा, “क्या ही धन्य है वह, जो कंगाल की सुधि रखता है” (भजन 41:1)। हम जिनके संपर्क में आते हैं, चाहे हम उनकी गरीबी को हटा न सकें, हम उनकी सुधि रख सकते हैं – सुधि रखना एक क्रिया है जिसका अर्थ होता है उनका ध्यान रखना।

      हम लोगों को अवगत करवा सकते हैं कि हम उनका ध्यान रखते हैं – हम उन्हें आदर और नम्रता का व्यवहार दिखा सकते हैं, चाहे वे चिड़चिड़े और उबा देने वाले ही क्यों न हों। हम उनकी बातों को रुचि के साथ सुन सकते हैं। और हम उनके साथ या उनके लिए प्रार्थना कर सकते हैं – जो सबसे अधिक सहायतापूर्ण और चँगा करने वाला कार्य है।

      प्रभु यीशु द्वारा कही गई विरोधाभास वाली बात “लेने से देना धन्य है” (प्रेरितों 20:35) को स्मरण रखें। ध्यान देने, सुधि रखने से हमारा ही भला होता है क्योंकि हम जितना अपने आप को औरों के लिए खर्च करेंगे, हम उतने अधिक आनन्दित रहेंगे। निर्धनों का ध्यान रखें। - डेविड रोपर


प्रेम के लिए औरों को दिया गया जीवन ही जीने योग्य जीवन है। - फ्रेड्रिक ब्युक्नर

हमारे परमेश्वर और पिता के निकट शुद्ध और निर्मल भक्ति यह है, कि अनाथों और विधवाओं के क्‍लेश में उन की सुधि लें, और अपने आप को संसार से निष्‍कलंक रखें। - याकूब 1:27

बाइबल पाठ: भजन 41:1-3
Psalms 41:1 क्या ही धन्य है वह, जो कंगाल की सुधि रखता है! विपत्ति के दिन यहोवा उसको बचाएगा।
Psalms 41:2 यहोवा उसकी रक्षा कर के उसको जीवित रखेगा, और वह पृथ्वी पर भाग्यवान होगा। तू उसको शत्रुओं की इच्छा पर न छोड़।
Psalms 41:3 जब वह व्याधि के मारे सेज पर पड़ा हो, तब यहोवा उसे सम्भालेगा; तू रोग में उसके पूरे बिछौने को उलटकर ठीक करेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 123-125
  • 1 कुरिन्थियों 10:1-18



बुधवार, 27 सितंबर 2017

ध्यान


   वह वर्ष 1780 था, और लंडन में रहने वाले रॉबर्ट रेक्स का मन अपने आस-पास रहने वाले गरीब अनपढ़ बच्चों के लिए कुछ करने को व्याकुल था। उसने देखा था कि उन बच्चों के लिए कुछ भी नहीं किया जा रहा था, इसलिए उसने उनके लिए कुछ करने का बीड़ा उठा लिया। उसने उन बच्चों को पढ़ना सिखाने के लिए इतवार के दिन स्कूल चलाने के लिए कुछ महिलाओं को नियुक्त किया। परमेश्वर के वचन बाइबल को अपनी पाठ्यपुस्तक बनाकर, उन शिक्षिकाओं ने लंडन के सबसे गरीब और अनपढ़ बच्चों को पढ़ना-लिखना सिखाना आरंभ किया, बाइबल की बुध्दिमता से उन बच्चों का परिचय करवाया। शीघ्र ही लगभग 100 बच्चे उन कक्षाओं में आने लगे, और एक सुरक्षित तथा स्वच्छ पर्यावरण में दोपहर का भोजन करने का आनन्द भी लेने लगे।

   ये स्कूल "सन्डे स्कूल" कहलाए जाने लगे, और इनके द्वारा हज़ारों लड़के-लड़कियों के जीवन छूए गए। इंगलैंड ही में, 1831 तक, इन सन्डे स्कूलों में दस लाख बच्चे शिक्षा ले चुके थे - केवल इस कारण क्योंकि एक व्यक्ति ने बाइबल के इस तथ्य को समझा: "धर्मी पुरूष कंगालों के मुकद्दमे [परिस्थिति] में मन लगाता है..." (नीतिवचन 29:7) और उसे व्यावाहरिक रीति से कार्यान्वित किया।

   यह कोई छिपी हुई बात नहीं है कि प्रभु यीशु जीवन के संघर्षों में होकर निकलने वालों की बहुत चिंता करता है। मत्ती के 25वें अध्याय में प्रभु यीशु ने अपने अनुयायियों से कहा कि वे भूखों को भोजन, प्यासों को जल, बेघरों को घर, नंगों को वस्त्र उपलब्ध करवा कर तथा बीमारों और बन्दियों की सुधि लेकर, उन्हें आराम दिलवा कर उसके पुनःआगमन की तैयारी करें (पद 35-36)।

   हम जब यह गवाही रखते हैं कि प्रभु यीशु हमारे हृदयों में हैं, और हम उनके लौट कर आने की बाट जोह रहे हैं, तो जिन लोगों का प्रभु परमेश्वर ध्यान रखवाना चाहता है, उसके निर्देषों के अनुसार उनका ध्यान रख कर, अपने प्रभु का आदर और महिमा करें। - डेव ब्रैनन


करुणा सीखने के लिए परमेश्वर के लिए अपने हृदयों को खोलें; 
सहायता करने के लिए अपने हाथों को खोलें।

क्या ही धन्य है वह, जो कंगाल की सुधि रखता है! विपत्ति के दिन यहोवा उसको बचाएगा। यहोवा उसकी रक्षा कर के उसको जीवित रखेगा, और वह पृथ्वी पर भाग्यवान होगा। तू उसको शत्रुओं की इच्छा पर न छोड़। भजन 41:1-2

बाइबल पाठ: मत्ती 25:31-40
Matthew 25:31 जब मनुष्य का पुत्र अपनी महिमा में आएगा, और सब स्वर्ग दूत उसके साथ आएंगे तो वह अपनी महिमा के सिहांसन पर विराजमान होगा। 
Matthew 25:32 और सब जातियां उसके साम्हने इकट्ठी की जाएंगी; और जैसा चरवाहा भेड़ों को बकिरयों से अलग कर देता है, वैसा ही वह उन्हें एक दूसरे से अलग करेगा। 
Matthew 25:33 और वह भेड़ों को अपनी दाहिनी ओर और बकिरयों को बाईं और खड़ी करेगा। 
Matthew 25:34 तब राजा अपनी दाहिनी ओर वालों से कहेगा, हे मेरे पिता के धन्य लोगों, आओ, उस राज्य के अधिकारी हो जाओ, जो जगत के आदि से तुम्हारे लिये तैयार किया हुआ है। 
Matthew 25:35 क्योंकि मैं भूखा था, और तुम ने मुझे खाने को दिया; मैं प्यासा था, और तुम ने मुझे पानी पिलाया, मैं परदेशी था, तुम ने मुझे अपने घर में ठहराया। 
Matthew 25:36 मैं नंगा था, तुम ने मुझे कपड़े पहिनाए; मैं बीमार था, तुम ने मेरी सुधि ली, मैं बन्‍दीगृह में था, तुम मुझ से मिलने आए। 
Matthew 25:37 तब धर्मी उसको उत्तर देंगे कि हे प्रभु, हम ने कब तुझे भूखा देखा और खिलाया? या प्यासा देखा, और पिलाया? 
Matthew 25:38 हम ने कब तुझे परदेशी देखा और अपने घर में ठहराया या नंगा देखा, और कपड़े पहिनाए? 
Matthew 25:39 हम ने कब तुझे बीमार या बन्‍दीगृह में देखा और तुझ से मिलने आए? 
Matthew 25:40 तब राजा उन्हें उत्तर देगा; मैं तुम से सच कहता हूं, कि तुम ने जो मेरे इन छोटे से छोटे भाइयों में से किसी एक के साथ किया, वह मेरे ही साथ किया।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 3-4
  • गलतियों 6


शुक्रवार, 10 फ़रवरी 2017

मुलाकात


   हाल ही में अपने कार्य से सेवानिवृत हुए एक व्यक्ति से मेरे एक मित्र ने पूछा कि अब जब उसके पास सारा दिन करने के लिए कार्य नहीं है तो उसकी दिनचर्या क्या होती है? उस व्यक्ति ने उत्तर दिया, "अब मैं अपने आप को एक मिलने वाला कहता हूँ। मैं अपने चर्च और समाज के लोगों के पास, जो अस्पताल में या सेवा-गृहों में हैं, या अकेले रहते हैं, या जिन्हें किसी ऐसे जन की आवश्यकता होती है जिसके साथ वे बात करके दिल हल्का कर सकें, उनसे मिलने जाता हूँ, उनके साथ प्रार्थना करता हूँ। और मुझे इससे आनन्द मिलता है।" मेरा मित्र उस व्यक्ति के स्पष्ट उद्देश्य और दूसरों की देखभाल करने की भावना से बहुत प्रभावित हुआ।

   अपने क्रूस पर चढ़ाए जाने से कुछ दिन पहले प्रभु यीशु ने अपने चेलों को ज़रूरतमन्दों से मिलने जाने के महत्व को समझाने के लिए एक वृतांत सुनाया, जो परमेश्वर के वचन बाइबल में मत्ती २25:31-46 में दर्ज है। प्रभु यीशु ने जगत के अन्त में सभी मनुष्यों के होने वाले न्याय के संदर्भ में बताया कि कैसे प्रभु परमेश्वर लोगों के जीवनों तथा कार्यों का आँकलन करेगा, और जिन्होंने उसके नाम में लोगों का ध्यान रखा, उनसे मिलने गए, उनकी सहायता की, उसे वह अपने साथ की गई भलाई गिनेगा और उन्हें पुरुस्कृत करेगा; इसकी तुलना में जिन्होंने लोगों की उनकी विपरीत परिस्थितियों में अवहेलना करी, उनकी सुधि लेने से, देखरेख करने से मूँह मोड़ा उसे प्रभु अपनी अवहेलना और अपने से मूँह मोड़ना मानेगा तथा उन्हें दण्ड देगा।

   प्रभु के नाम में लोगों से मिलने जाने और उनकी सुधि लेने तथा सहायता करने के दो लाभार्थी हैं - वह व्यक्ति जिससे हम मुलाकात के लिए जाते हैं, और प्रभु यीशु। किसी व्यक्ति के पास सहायता और प्रोत्साहन के लिए जाना, सीधे-सीधे प्रभु परमेश्वर की सेवा करना है। क्या कोई ऐसा है जिससे आपकी मुलाकात उसके लिए प्रोत्साहन और सहायता हो सकती है? - डेविड मैक्कैसलैंड


करुणा का अर्थ है दूसरों की समस्याओं को समझना 
और लालसा के साथ उनकी सहायता करते रहना।

जिनका भला करना चाहिये, यदि तुझ में शक्ति रहे, तो उनका भला करने से न रुकना। यदि तेरे पास देने को कुछ हो, तो अपने पड़ोसी से न कहना कि जा कल फिर आना, कल मैं तुझे दूंगा। - नीतिवचन 3:27-28

बाइबल पाठ: मत्ती 25:31-46
Matthew 25:31 जब मनुष्य का पुत्र अपनी महिमा में आएगा, और सब स्वर्ग दूत उसके साथ आएंगे तो वह अपनी महिमा के सिहांसन पर विराजमान होगा। 
Matthew 25:32 और सब जातियां उसके साम्हने इकट्ठी की जाएंगी; और जैसा चरवाहा भेड़ों को बकिरयों से अलग कर देता है, वैसा ही वह उन्हें एक दूसरे से अलग करेगा। 
Matthew 25:33 और वह भेड़ों को अपनी दाहिनी ओर और बकिरयों को बाईं और खड़ी करेगा। 
Matthew 25:34 तब राजा अपनी दाहिनी ओर वालों से कहेगा, हे मेरे पिता के धन्य लोगों, आओ, उस राज्य के अधिकारी हो जाओ, जो जगत के आदि से तुम्हारे लिये तैयार किया हुआ है। 
Matthew 25:35 क्योंकि मैं भूखा था, और तुम ने मुझे खाने को दिया; मैं प्यासा था, और तुम ने मुझे पानी पिलाया, मैं परदेशी था, तुम ने मुझे अपने घर में ठहराया। 
Matthew 25:36 मैं नंगा था, तुम ने मुझे कपड़े पहिनाए; मैं बीमार था, तुम ने मेरी सुधि ली, मैं बन्‍दीगृह में था, तुम मुझ से मिलने आए। 
Matthew 25:37 तब धर्मी उसको उत्तर देंगे कि हे प्रभु, हम ने कब तुझे भूखा देखा और खिलाया? या प्यासा देखा, और पिलाया? 
Matthew 25:38 हम ने कब तुझे परदेशी देखा और अपने घर में ठहराया या नंगा देखा, और कपड़े पहिनाए? 
Matthew 25:39 हम ने कब तुझे बीमार या बन्‍दीगृह में देखा और तुझ से मिलने आए? 
Matthew 25:40 तब राजा उन्हें उत्तर देगा; मैं तुम से सच कहता हूं, कि तुम ने जो मेरे इन छोटे से छोटे भाइयों में से किसी एक के साथ किया, वह मेरे ही साथ किया। 
Matthew 25:41 तब वह बाईं ओर वालों से कहेगा, हे श्रापित लोगो, मेरे साम्हने से उस अनन्त आग में चले जाओ, जो शैतान और उसके दूतों के लिये तैयार की गई है। 
Matthew 25:42 क्योंकि मैं भूखा था, और तुम ने मुझे खाने को नहीं दिया, मैं प्यासा था, और तुम ने मुझे पानी नहीं पिलाया। 
Matthew 25:43 मैं परदेशी था, और तुम ने मुझे अपने घर में नहीं ठहराया; मैं नंगा था, और तुम ने मुझे कपड़े नहीं पहिनाए; बीमार और बन्‍दीगृह में था, और तुम ने मेरी सुधि न ली। 
Matthew 25:44 तब वे उत्तर देंगे, कि हे प्रभु, हम ने तुझे कब भूखा, या प्यासा, या परदेशी, या नंगा, या बीमार, या बन्‍दीगृह में देखा, और तेरी सेवा टहल न की? 
Matthew 25:45 तब वह उन्हें उत्तर देगा, मैं तुम से सच कहता हूं कि तुम ने जो इन छोटे से छोटों में से किसी एक के साथ नहीं किया, वह मेरे साथ भी नहीं किया। 
Matthew 25:46 और यह अनन्त दण्‍ड भोगेंगे परन्तु धर्मी अनन्त जीवन में प्रवेश करेंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 8-10
  • मत्ती 25:31-46