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सोमवार, 25 सितंबर 2017

अनुभव


   मेरे एक मित्र ने मुझे उत्साहवर्धक समाचार सुनाने के लिए रोका, और अगले दस मिनट तक अपने 1 वर्षीय भतीजे का चलने के लिए पहला कदम लेने का वर्णन करता रहा, उसने चलना आरंभ कर दिया! बाद में मुझे एहसास हुआ कि यदि कोई और हमारे वार्तालाप को सुन रहा होता तो उसे यह सब सुनना कैसा विचित्र लगता। अधिकांश लोग चल सकते हैं; इसमें क्या बड़ी बात है?

   मुझे यह भी एहसास हुआ कि बचपन बातों के विशेष होने के ऐसे अवसर प्रदान करता है जो बाद में लगभग लुप्त हो जाते हैं। अपने बच्चों का पालन-पोषण करने के अनुभव के बारे में सोचते हुए मैं इस बात की और भी अधिक अधिक सराहना कर सका कि परमेश्वर हमारे और उसके बीच के संबंध को समझाने के लिए, बच्चों के साथ हमारे संबंध का सहारा लेता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में नए नियम खण्ड में परमेश्वर कहता है कि हम मसीही विश्वासी उसके पुत्र और पुत्रियाँ हैं, सारे अधिकारों और सुविधाओं सहित उसके वारिस हैं (रोमियों 8:16-17)। परमेश्वर का एकलौता पुत्र, प्रभु यीशु मसीह, संसार में इसलिए आया कि हमें पापों की क्षमा और हमारे उध्दार उपलब्ध करवाने के द्वारा, हमारा परमेश्वर के परिवार में लेपालक संतान हो जाना संभव कर सके।

   मेरा मानना है कि मसिही विश्वास के जीवन में मेरा हर लड़खड़ाता हुआ कदम लेना परमेश्वर की दृष्टि में वैसा ही है जैसे माता-पिता अपने बच्चों को चलना सीखते हुए देखकर आनन्दित होते हैं। संभवतः जब सृष्टि के रहस्य खुलेंगे, तब ही हम बच्चों को बढ़ते हुए देख पाने के अनुभव के महत्व को समझने पाएंगे। हो सकता है कि परमेश्वर ने हमें बच्चों से संबंधित ये अनुभव लेना इसलिए संभव किया है जिससे कि हम हमारे प्रति उसके असीम प्रेम की विशेषता के प्रति संवेदनशील हो सकें। हमारे ये अनुभव उसके अद्भुत प्रेम की भरपूरी की झलक मात्र हैं। - फिलिप यैन्सी


हम परमेश्वर के प्रेम के पात्र हैं।

परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं। वे न तो लोहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं। - यूहन्ना 1:12-13

बाइबल पाठ: रोमियों 8:14-17
Romans 8:14 इसलिये कि जितने लोग परमेश्वर के आत्मा के चलाए चलते हैं, वे ही परमेश्वर के पुत्र हैं। 
Romans 8:15 क्योंकि तुम को दासत्व की आत्मा नहीं मिली, कि फिर भयभीत हो परन्तु लेपालकपन की आत्मा मिली है, जिस से हम हे अब्बा, हे पिता कह कर पुकारते हैं। 
Romans 8:16 आत्मा आप ही हमारी आत्मा के साथ गवाही देता है, कि हम परमेश्वर की सन्तान हैं। 
Romans 8:17 और यदि सन्तान हैं, तो वारिस भी, वरन परमेश्वर के वारिस और मसीह के संगी वारिस हैं, जब कि हम उसके साथ दुख उठाएं कि उसके साथ महिमा भी पाएं।

एक साल में बाइबल: 
  • श्रेष्टगीत 6-8
  • गलतियों 4


रविवार, 31 अक्टूबर 2010

पवित्रता के लिये पृथक

अमेरिका में अक्तूबर महीने का यह अन्तिम दिन "हैलोवीन दिवस" कहकर मनाया जाता है, जिसमें बच्चे भेस बदल कर और थैले लिये घर घर जाते हैं और घर वाले उन्हें उनके थैलों में मिठाइयां देते हैं। "हैलोवीन" अंग्रज़ी के hallow [हैलो] शब्द से आया है, जिसका अर्थ होता है पवित्र। आज कल यह शब्द बहुत कम प्रयोग होता है, और जब होता है तो इसके विभिन्न अर्थ हो जाते हैं।

मसीही विश्वास में हैलो का अर्थ पवित्र ही है। जब किसी चीज़ या जन को हैलो किया जाता है, तो उसका तातपर्य होता है कि वह पवित्रता के लिये पृथक किया गया है, जैसा प्रभु की प्रार्थना में परमेश्वर के संदर्भ में इसके प्रयोग से प्रकट है "Hallowed be thy name" - तेरा नाम पवित्र माना जाए। केवल परमेश्वर का नाम ही पवित्र नहीं ठहराया गया है, वरन प्रत्येक मसीही विश्वासी को अपने आप को भी पवित्रता में रखना है, जैसा पौलुस ने तिमुथियुस को सिखाया, कि वह ऐसा पात्र बने जो परमेश्वर के उपयोग के लिये पवित्र हो "तौभी परमेश्वर की पक्की नेव बनी रहती है, और उस पर यह छाप लगी है, कि प्रभु अपनों को पहिचानता है; और जो कोई प्रभु का नाम लेता है, वह अधर्म से बचा रहे। बड़े घर में न केवल सोने-चान्‍दी ही के, पर काठ और मिट्टी के बरतन भी होते हैं; कोई कोई आदर, और कोई कोई अनादर के लिये। यदि कोई अपने आप को इन से शुद्ध करेगा, तो वह आदर का बरतन, और पवित्र ठहरेगा, और स्‍वामी के काम आएगा, और हर भले काम के लिये तैयार होगा। जवानी की अभिलाषाओं से भाग, और जो शुद्ध मन से प्रभु का नाम लेते हैं, उन के साथ धर्म, और विश्वास, और प्रेम, और मेल-मिलाप का पीछा कर। पर मूर्खता, और अविद्या के विवादों से अलग रह क्‍योंकि तू जानता है, कि उन से झगड़े होते हैं" (२ तिमुथियुस २:१९-२३)।

अक्तूबर के इस अन्तिम दिन अमेरिका में बच्चे तो मिठाईयों के थैले लिये घूमते हैं, परन्तु हमें विचार करना है कि हम अपने मन में क्या लिये घूम रहे हैं? हमारे जीवन के पात्र में क्या भरा है? क्या हमारे जीवन द्वेश और कलह की कड़ुवाहट से भरे हैं जिनसे मूर्खता और अविद्या के विवाद उत्पन्न होते हैं, या वे परमेश्वर की आत्मा की मिठास से भरे हैं जिनसे समाज में धार्मिकता, विश्वास, प्रेम और शांति फैलती है?

हम न सिर्फ आज के दिन को, वरन हर दिन अपने आप को परमेश्वर के लिये पवित्र और उपयोगी होने के लिये पृथक और समर्पित कर के, हर दिन को "हैलो" कर सकते हैं। - जूली ऐकरमैन लिंक


मसीही विश्वासी के लिये सबसे बड़े आनन्द की बात है उसका परमेश्वर के लिये उपयोगी होना।

यदि कोई अपने आप को इन से शुद्ध करेगा, तो वह आदर का बरतन, और पवित्र ठहरेगा, और स्‍वामी के काम आएगा, और हर भले काम के लिये तैयार होगा। - २ तिमुथियुस २:२१


बाइबल पाठ: २ तिमुथियुस २:१९-२६

तौभी परमेश्वर की पक्की नेव बनी रहती है, और उस पर यह छाप लगी है, कि प्रभु अपनों को पहिचानता है; और जो कोई प्रभु का नाम लेता है, वह अधर्म से बचा रहे।
बड़े घर में न केवल सोने-चान्‍दी ही के, पर काठ और मिट्टी के बरतन भी होते हैं; कोई कोई आदर, और कोई कोई अनादर के लिये।
यदि कोई अपने आप को इन से शुद्ध करेगा, तो वह आदर का बरतन, और पवित्र ठहरेगा, और स्‍वामी के काम आएगा, और हर भले काम के लिये तैयार होगा।
जवानी की अभिलाषाओं से भाग, और जो शुद्ध मन से प्रभु का नाम लेते हैं, उन के साथ धर्म, और विश्वास, और प्रेम, और मेल-मिलाप का पीछा कर।
पर मूर्खता, और अविद्या के विवादों से अलग रह क्‍योंकि तू जानता है, कि उन से झगड़े होते हैं
और प्रभु के दास को झगड़ालू होना न चाहिए, पर सब के साथ कोमल और शिक्षा में निपुण, और सहनशील हो।
और विरोधियों को नम्रता से समझाए, क्‍या जाने परमेश्वर उन्‍हें मन फिराव का मन दे, कि वे भी सत्य को पहिचानें।
और इस के द्वारा उस की इच्‍छा पूरी करने के लिये सचेत होकर शैतान के फंदे से छूट जाए।

एक साल में बाइबल:
  • यर्मियाह २२, २३
  • तीतुस १