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सोमवार, 14 सितंबर 2020

संतुष्टि

 

         हमारे बाइबल स्कूल के एक कार्यक्रम के दौरान हमने बच्चों में नाश्ता बांटा, और हम ने देखा कि एक बच्चे ने अपने नाश्ते को बहुत जल्दी से खा लिया, और फिर अन्य बच्चों के द्वारा मेज़ छोड़े गए नाश्ते को भी उठाकर खा लिया। फिर मैंने उस पौपकौर्ण का एक पैकेट और दे दिया, किन्तु भी वह संतुष्ट नहीं था। हम आयोजक चिंतित थे कि यह छोटा बच्चा इतना भूखा क्यों था।

         मुझे बाद में विचार आया कि हम भी उस बालक के समान हो सकते हैं, जब बात हमारी गहरी लालसाओं की होती है। हम उन लालसाओं की संतुष्टि के तरीके तो ढूँढ़ते हैं, परन्तु हमें वह नहीं मिलता है जो हमें पूर्णतः संतुष्ट करता है।

         परमेश्वर के वचन बाइबल में यशायाह भविष्यद्वक्ता उन्हें जो भूखे और प्यासे हैं, आमंत्रित करता है, आओ ... मोल लो और खाओ” (यशायाह 55:1)। परन्तु फिर वह पूछता है, जो भोजन वस्तु नहीं है, उसके लिये तुम क्यों रुपया लगाते हो, और, जिस से पेट नहीं भरता उसके लिये क्यों परिश्रम करते हो?” (पद 2)। यहाँ पर यशायाह मात्र शारीरिक भूख के बारे में ही बात नहीं कर रहा है। परमेश्वर हमारी आत्मिक और भावनात्मक भूख को भी अपनी उपस्थिति की प्रतिज्ञा के द्वारा संतुष्ट कर सकता है। पद 3 की “सदा की वाचा” परमेश्वर द्वारा दाऊद से 2 शमूएल 7:8-16 में की गई प्रतिज्ञा को स्मरण कराती है। दाऊद के वंश से एक उद्धारकर्ता ने आना था जो मनुष्यों का परमेश्वर के साथ फिर से मेल-मिलाप करवा देगा। बाद में यूहन्ना 6:35 और 7:37 में, प्रभु यीशु ने भी उसी निमंत्रण को दिया जो यशायाह ने दिया था, और इस प्रकार अपनी पहचान उसी उद्धारकर्ता के रूप में करवाई जिसके विषय यशायाह और अन्य भविष्यद्वक्ताओं ने भविष्यवाणियाँ की थीं।

         परमेश्वर का निमंत्रण आज भी सभी के लिए खुला है, कि उसके पास पश्चाताप और समर्पण में आएँ और उससे पूर्ण संतुष्टि पाएं। - लिंडा वॉशिंगटन

 

केवल परमेश्वर ही हमारी आत्मिक भूख की संतुष्टि प्रदान कर सकता है।


यीशु ने उन से कहा, जीवन की रोटी मैं हूं: जो मेरे पास आएगा वह कभी भूखा न होगा और जो मुझ पर विश्वास करेगा, वह कभी प्यासा न होगा। - यूहन्ना 6:35

बाइबल पाठ: यशायाह 55:1-7

यशायाह 55:1 अहो सब प्यासे लोगों, पानी के पास आओ; और जिनके पास रुपया न हो, तुम भी आकर मोल लो और खाओ! दाखमधु और दूध बिन रुपए और बिना दाम ही आकर ले लो।

यशायाह 55:2 जो भोजन वस्तु नहीं है, उसके लिये तुम क्यों रुपया लगाते हो, और, जिस से पेट नहीं भरता उसके लिये क्यों परिश्रम करते हो? मेरी ओर मन लगाकर सुनो, तब उत्तम वस्तुएं खाने पाओगे और चिकनी चिकनी वस्तुएं खाकर सन्तुष्ट हो जाओगे।

यशायाह 55:3 कान लगाओ, और मेरे पास आओ; सुनो, तब तुम जीवित रहोगे; और मैं तुम्हारे साथ सदा की वाचा बान्धूंगा अर्थात दाऊद पर की अटल करुणा की वाचा।

यशायाह 55:4 सुनो, मैं ने उसको राज्य राज्य के लोगों के लिये साक्षी और प्रधान और आज्ञा देने वाला ठहराया है।

यशायाह 55:5 सुन, तू ऐसी जाति को जिसे तू नहीं जानता बुलाएगा, और ऐसी जातियां जो तुझे नहीं जानतीं तेरे पास दौड़ी आएंगी, वे तेरे परमेश्वर यहोवा और इस्राएल के पवित्र के निमित्त यह करेंगी, क्योंकि उसने तुझे शोभायमान किया है।

यशायाह 55:6 जब तक यहोवा मिल सकता है तब तक उसकी खोज में रहो, जब तक वह निकट है तब तक उसे पुकारो;

यशायाह 55:7 दुष्ट अपनी चाल चलन और अनर्थकारी अपने सोच विचार छोड़कर यहोवा ही की ओर फिरे, वह उस पर दया करेगा, वह हमारे परमेश्वर की ओर फिरे और वह पूरी रीति से उसको क्षमा करेगा।

 

एक साल में बाइबल: 

  • नीतिवचन 19-21
  • 2 कुरिन्थियों 7

गुरुवार, 9 जुलाई 2020

शान्त


     एक माँ की कल्पना कीजिए, अपने छोटे से बच्चे पर प्रेम के साथ झुकी हुई, उसकी ऊँगली हलके से बच्चे की नाक और होठों पर रखी हुई है, और वह नम्र आवाज़ में बच्चे से कह रही है “श्श!, शांत!”, कोमलता से उसे सान्तवना दे रही है। उस माँ का हाव-भाव, और साधारण शब्द, उस बच्चे की निराशा, परेशानी, या दुःख के समय में उसकी व्याकुलता को शांत करने के लिए हैं। इस प्रकार के दृश्य सभी स्थानों पर देखे जाते हैं, सदा देखे जाते हैं, और हम में से अधिकाँश ने या तो यह किया है, या ऐसे प्रेम भरी अभिव्यक्तियों से शान्ति पाई है। जब मैं परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 131 पर विचार करता हूँ, तो मेरे मन में यही चित्रण उभर कर आता है।

     इस भजन की भाषा और शैली यही संकेत देते हैं कि भजनकार दाऊद ने कुछ ऐसा अनुभव किया था, जिसके कारण उसे कुछ गंभीर विचार करना पड़ा था। क्या आपने किसी ऐसी निराशा, पराजय, या असफलता का सामना किया है, जिसके कारण आप ने गंभीर, विचारमग्न, आंकलन करने वाली प्रार्थना की हो? जब आप किसी परीक्षा में असफल रहते हैं, आपकी कोई नौकरी जाती रहती है, या कोई संबंध टूट जाता है? दाऊद ने अपने मन की बात खुलकर परमेश्वर के सामने रख दी, और ऐसा करते समय उसने अपने मन को भी इमानदारी से टटोला, और मन की बातों को प्रकट किया (भजन 131:1)। अपनी परिस्थितियों के साथ शान्ति स्थापित करने में, उसे वैसी ही संतुष्टि प्राप्त हुई, जैसी उस छोटे बच्चे को अपने माँ के साथ होने से मिलती है (पद 2)।

     जीवन की परिस्थितियाँ बदलती रहती हैं, और कभी कभी वे हमें झुका देती हैं। किन्तु फिर भी हम आशावान और संतुष्ट रह सकते हैं, इस बात में स्थिर और सुदृढ़ कि हमारा परमेश्वर पिता हमें कभी नहीं छोड़ेगा या त्यागेगा। हम शांत होक उस पर सम्पूर्ण भरोसा रख सकते हैं। - आर्थर जैक्सन

 

केवल मसीह यीशु ही में हमें संतुष्टि मिलती है।


चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं! सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है। - भजन 46:10-11

बाइबल पाठ: भजन 131

भजन संहिता 131:1 हे यहोवा, न तो मेरा मन गर्व से और न मेरी दृष्टि घमण्ड से भरी है; और जो बातें बड़ी और मेरे लिये अधिक कठिन हैं, उन से मैं काम नहीं रखता।

भजन संहिता 131:2 निश्चय मैं ने अपने मन को शान्त और चुप कर दिया है, जैसे दूध छुड़ाया हुआ लड़का अपनी मां की गोद में रहता है, वैसे ही दूध छुड़ाए हुए लड़के के समान मेरा मन भी रहता है।

भजन संहिता 131:3 हे इस्राएल, अब से ले कर सदा सर्वदा यहोवा ही पर आशा लगाए रह!      

 

एक साल में बाइबल: 

  • अय्यूब 38-40
  • प्रेरितों 16:1-21


गुरुवार, 19 सितंबर 2019

रिक्त स्थान



      जब हम छोटे थे तो मैं और मेरा भाई अकसर घर में माँ द्वारा बनाए गए और हमें परोसे गए केक के भाग को लेकर बहस करते थे कि, “उसको मिला भाग मेरे भाग से अधिक है।” एक दिन पिताजी ने भौंहें चढ़ाकर हमारी इस लड़ाई को देखा, और मुस्कुराकर माँ को देखा, फिर अपनी प्लेट उठाकर माँ से कहा, “मुझे अपने हृदय के बराबर का भाग दो।” मेरे भाई और मैंने स्तब्ध होकर खामोशी से देखा कि माँ ने हँसते हुए सबसे बड़ा भाग उठाकर पिताजी को दे दिया।

      यदि हम औरों के भाग पर ध्यान लगाएंगे तो फिर ईर्ष्या उत्पन्न होगी। परन्तु परमेश्वर का वचन बाइबल हमें सांसारिक संपत्ति से कहीं अधिक मूल्यवान वस्तुओं पर आँखें लगाने को कहती है। भजनकार लिखता है, “यहोवा मेरा भाग है; मैं ने तेरे वचनों के अनुसार चलने का निश्चय किया है। मैं ने पूरे मन से तुझे मनाया है; इसलिये अपने वचन के अनुसार मुझ पर अनुग्रह कर” (भजन 119:57-58)। पवित्र आत्मा से प्रेरणा पाकर, लेखक ने इस सत्य को व्यक्त किया कि परमेश्वर की निकटता में होने से बढ़कर और कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं है।

      हमारे प्रेमी और असीम सृजनहार से अधिक बेहतर हमारा और क्या भाग हो सकता है? पृथ्वी की कोई बात उसके तुल्य नहीं है, और उसे हम से अलग कुछ भी नहीं कर सकता है। मानवीय लालसाएँ कभी न भरने वाला रिक्त स्थान हैं; व्यक्ति के पास सँसार का सब कुछ हो सकता है, परन्तु वह फिर भी दुखित रह सकता है। परन्तु जब परमेश्वर हमारे आनन्द का स्त्रोत है, तब हम वास्तव में संतुष्ट रहते हैं।

      हमारे अन्दर एक ऐसा रिक्त स्थान है जिसे केवल परमेश्वर ही भर सकता है; केवल वही हमें वह शान्ति दे सकता है जो हमारे हृदय के रिक्त स्थान को भर सके। - जेम्स बैंक्स

जब हम उसके हैं, तो वह सदा काल के लिए हमारा है। 
हे प्रभु आपने हमें अपने लिए बनाया है।
हमारे हृदय अशांत रहते हैं जब तक आप में शान्ति न पाएँ। - ऑगस्टिन ऑफ हिप्पो

यहोवा मेरा भाग और मेरे कटोरे का हिस्सा है; मेरे बाट को तू स्थिर रखता है। - भजन  16:5

बाइबल पाठ: भजन 73:21-28
Psalms 73:21 मेरा मन तो चिड़चिड़ा हो गया, मेरा अन्त:करण छिद गया था,
Psalms 73:22 मैं तो पशु सरीखा था, और समझता न था, मैं तेरे संग रह कर भी, पशु बन गया था।
Psalms 73:23 तौभी मैं निरन्तर तेरे संग ही था; तू ने मेरे दाहिने हाथ को पकड़ रखा।
Psalms 73:24 तू सम्मति देता हुआ, मेरी अगुवाई करेगा, और तब मेरी महिमा कर के मुझ को अपने पास रखेगा।
Psalms 73:25 स्वर्ग में मेरा और कौन है? तेरे संग रहते हुए मैं पृथ्वी पर और कुछ नहीं चाहता।
Psalms 73:26 मेरे हृदय और मन दोनों तो हार गए हैं, परन्तु परमेश्वर सर्वदा के लिये मेरा भाग और मेरे हृदय की चट्टान बना है।
Psalms 73:27 जो तुझ से दूर रहते हैं वे तो नाश होंगे; जो कोई तेरे विरुद्ध व्यभिचार करता है, उसको तू विनाश करता है।
Psalms 73:28 परन्तु परमेश्वर के समीप रहना, यही मेरे लिये भला है; मैं ने प्रभु यहोवा को अपना शरणस्थान माना है, जिस से मैं तेरे सब कामों का वर्णन करूं।

एक साल में बाइबल: 
  • सभोपदेशक 1-3
  • 2 कुरिन्थियों 11:16-33



मंगलवार, 27 नवंबर 2018

वृद्धावस्था



      कुछ वर्ष पहले मैंने दूसरी ईसवीं के यूनानी लेखक एलियन द्वारा लिखित एक कृति, On The Nature of Animals में मछली पकड़ने की एक विधि को पढ़ा था। एलियन ने लिखा था, “बोरोका और थिस्सलुनीके के मध्य एस्ट्रैकस नामक एक नदी बहती है, और उसमें चितकबरी खाल वाली मछलियाँ (ट्राउट) पाई जाती हैं।” फिर उसने उन मछलियों को पकड़ने की एक विधि का वर्णन किया, जिससे मछलियाँ सरलता से पकड़ी जाती हैं। मछली पकड़ने वाले सुर्ख लाल ऊन को कांटे पर लपेटते हैं और उसमें पक्षियों के दो पंख फंसा देते हैं, और फिर इसे पानी में फेंक देते हैं। मछलियाँ उस सुर्ख रंग से आकर्षित होकर कांटे पर आती हैं और उसमें फंस जाती हैं।

      मछुआरे आज भी 2,200 वर्ष से उपयोग होती आ रही इस विधि का उपयोग करते हैं और मछलियाँ पकड़ने के लिए यह विधि अभी भी कारगर है।

      जब मैंने उस प्राचीन कृति को पढ़ा, तो मेरे मन में विचार आया, सभी पुरानी बातें व्यर्थ नहीं हैं – विशेषकर वृद्ध लोग। यदि संतुष्ट और प्रसन्न वृद्धावस्था के द्वारा हम औरों को परमेश्वर की परिपूर्णता और गंभीरता को प्रदर्शित करने पाते हैं, तो हम अपने दिनों के अन्त तक परमेश्वर के लिए उपयोगी बने रहेंगे। यह आवश्यक नहीं कि वृद्धावस्था का अर्थ ढलता हुआ स्वास्थ्य, और जो कभी था वैसा फिर से हो जाने की लालसा का जीवन जीना हो। वृद्धावस्था, उनके लिए जो परमेश्वर के साथ चलकर वृद्ध हुए हैं, शान्त चित्त, आनन्द, साहस, और दयालुता एवँ कृपा दिखाने का समय भी हो सकता है।

      इसीलिए भजनकार कहता है, “वे यहोवा के भवन में रोपे जा कर, हमारे परमेश्वर के आंगनों में फूले फलेंगे। वे पुराने होने पर भी फलते रहेंगे, और रस भरे और लहलहाते रहेंगे” (भजन 92:13-14)। - डेविड रोपर


आयु बढ़ने के साथ परमेश्वर की विश्वासयोग्यता कई गुणा बढ़ती जाती है।

धन्य है वह पुरुष जो यहोवा पर भरोसा रखता है, जिसने परमेश्वर को अपना आधार माना हो। वह उस वृक्ष के समान होगा जो नदी के तीर पर लगा हो और उसकी जड़ जल के पास फैली हो; जब घाम होगा तब उसको न लगेगा, उसके पत्ते हरे रहेंगे, और सूखे वर्ष में भी उनके विषय में कुछ चिन्ता न होगी, क्योंकि वह तब भी फलता रहेगा। - यिर्मयाह 17:7-8

बाइबल पाठ: भजन 92:12-15
Psalms 92:12 धर्मी लोग खजूर के समान फूले फलेंगे, और लबानोन के देवदार के समान बढ़ते रहेंगे।
Psalms 92:13 वे यहोवा के भवन में रोपे जा कर, हमारे परमेश्वर के आंगनों में फूले फलेंगे।
Psalms 92:14 वे पुराने होने पर भी फलते रहेंगे, और रस भरे और लहलहाते रहेंगे,
Psalms 92:15 जिस से यह प्रगट हो, कि यहोवा सीधा है; वह मेरी चट्टान है, और उस में कुटिलता कुछ भी नहीं।


एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 30-32
  • 1 पतरस 4



शनिवार, 5 सितंबर 2015

संतुष्ट


   भोजन करने के पश्चात जब मैंने रेस्टरॉन्ट के गाड़ी खड़ी करने के स्थल में प्रवेश किया तो देखा कि वहां खड़ी गाड़ियों के बीच में से होकर एक छोटा ट्रक तेज़ी से जा रहा है। उस ट्रक के चालक की लापरवाही पर ध्यान करते हुए मेरा ध्यान ट्रक के आगे लगे स्टिकर पर भी गया जिस पर लिखा था, "लगभग संतुष्ट"। कुछ देर उस स्टिकर के सन्देश पर विचार करने के बाद मैं इस निषकर्ष पर पहुँचा कि "लगभग संतुष्ट" होना संभव नहीं है क्योंकि आप किसी भी बात को लेकर या तो संतुष्ट होंगे अन्यथा असंतुष्ट।

   इसमें कोई दो राय नहीं कि संतुष्ट होना सरल नहीं है। हम ऐसे संसार में रहते हैं जो हमारी इच्छाओं को लगातार और अधिक बढ़ाता रहता है, यहाँ तक कि हम कितना भी पा लें फिर भी असंतुष्ट ही रहते हैं। लेकिन यह कोई नई या आज के समय ही की बात नहीं है। परमेश्वर के वचन बाइबल में इब्रानियों नामक पुस्तक में इस असंतुष्टि का उपाय दिया गया है; इब्रानियों के लेखक द्वारा परमेश्वर के पवित्र आत्मा ने लिखवाया, "तुम्हारा स्‍वभाव लोभरिहत हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा" (इब्रानियों 13:5)। जो लोग संसार से सब कुछ पाने की इच्छा में एक मृगतृषणा के पीछे भागे चले जा रहे हैं, उनकी संतुष्टि का एक ही उपाय है, सच्चे और जीवते प्रभु परमेश्वर की उपस्थिति में मिलने वाली संतुष्टि। प्रभु परमेश्वर ही हमारी प्रत्येक आवश्यकता और अभिलाषा के लिए काफी है; केवल वही हमें शान्ति और संतुष्टि प्रदान कर सकता है; ऐसी संतुष्टि जो हमें इस जीवन और संसार की बातों के पीछे भागने से कभी नहीं प्राप्त हो सकती।

  लगभग संतुष्ट? ऐसी कोई चीज़ नहीं है; केवल प्रभु यीशु मसीह में होकर हमें सच्ची संतुष्टि मिल सकती है। - बिल क्राउडर

संतुष्टि का अर्थ यह नहीं है कि हम जो चाहें वह हमें मिल जाए, 
वरन यह है कि हमारे पास जो है हम उसी में संतोष के साथ रहना सीख सकें।

धर्मी का थोड़ा से माल दुष्टों के बहुत से धन से उत्तम है। - भजन 37:16

बाइबल पाठ: 1 तिमुथियुस 6:6-12
1 Timothy 6:6 पर सन्‍तोष सहित भक्ति बड़ी कमाई है। 
1 Timothy 6:7 क्योंकि न हम जगत में कुछ लाए हैं और न कुछ ले जा सकते हैं। 
1 Timothy 6:8 और यदि हमारे पास खाने और पहिनने को हो, तो इन्‍हीं पर सन्‍तोष करना चाहिए। 
1 Timothy 6:9 पर जो धनी होना चाहते हैं, वे ऐसी परीक्षा, और फंदे और बहुतेरे व्यर्थ और हानिकारक लालसाओं में फंसते हैं, जो मनुष्यों को बिगाड़ देती हैं और विनाश के समुद्र में डूबा देती हैं। 
1 Timothy 6:10 क्योंकि रूपये का लोभ सब प्रकार की बुराइयों की जड़ है, जिसे प्राप्त करने का प्रयत्न करते हुए कितनों ने विश्वास से भटक कर अपने आप को नाना प्रकार के दुखों से छलनी बना लिया है। 
1 Timothy 6:11 पर हे परमेश्वर के जन, तू इन बातों से भाग; और धर्म, भक्ति, विश्वास, प्रेम, धीरज, और नम्रता का पीछा कर। 
1 Timothy 6:12 विश्वास की अच्छी कुश्‍ती लड़; और उस अनन्त जीवन को धर ले, जिस के लिये तू बुलाया, गया, और बहुत गवाहों के साम्हने अच्छा अंगीकार किया था।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 146-147
  • 1 कुरिन्थियों 15:1-28