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मंगलवार, 29 जून 2021

तृप्ति

 

          मेरे बच्चे तो रोमांचित थे, लेकिन मैं बहुत आशंकित थी। छुट्टियाँ मनाने के समय में हम एक मछली-घर घूमने गए थे, और वहाँ एक विशेष टैंक में छोटी शार्क मछलियाँ भी थीं, जिन्हें दर्शक छू सकते थे, दुलार से थपथपा सकते थे। मैंने वहाँ के सहायक से पूछा कि क्या ये शार्क कभी किसी को काटती या पकड़ती नहीं हैं? उसने उत्तर दिया कि इन शार्क मछलियों को अभी कुछ देर पहले ही भरपेट भोजन करवाया गया है, और फिर उसके ऊपर कुछ और अतिरिक्त भी खिला दिया गया है। क्योंकि अब उन्हें भूख नहीं थी, उनके पेट भरे हुए थे, इसलिए वे काटेंगी भी नहीं।

          मैंने जो शार्क को छूने और थपथपाने के विषय में उस दिन सीखा, वह परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन में लिखी बात, “सन्तुष्ट होने पर मधु का छत्ता भी फीका लगता है, परन्तु भूखे को सब कड़वी वस्तुएं भी मीठी जान पड़ती हैं” (नीतिवचन 27:7) के अनुसार है। भूख – वह अन्दर से खालीपन का भाव – हमारे सही निर्णय करने की बुद्धिमत्ता को क्षीण बना सकती है। भूखा होना या तृप्त न होना हमें ऐसा कुछ भी स्वीकार करने के लिए बाध्य कर सकता है, जिसके द्वारा हमें लगता है कि हमारी भूख शांत हो सकेगी, हमें तृप्ति मिल सकेगी – चाहे उसके लिए हमें किसी और का कोई भाग ही काटना या छीनना क्यों न पड़े।

          परमेश्वर नहीं चाहता है कि हम अपनी भूख या तृप्त होने की भावना से बाध्य होकर जीवन जीएँ। वह चाहता है कि हम मसीह यीशु के प्रेम से भर जाएँ जिससे हम जो भी करें वह उस शान्ति और स्थिरता के साथ हो जो वह हमें प्रदान करता है। इस बात का निरंतर एहसास कि हमें बिना किसी भी शर्त के लगातार प्रेम किया जाता है, हमें इसके लिए भरोसा देता है। इस प्रेम में स्थिर और दृढ़ होने के द्वारा हम हमारी ओर आने वाले प्रत्येक “अच्छी” प्रतीत होने वाली वस्तु को स्वीकार करने के स्थान पर, अपने लिए अपनी संपत्ति, संबंधों, सामग्री के विषय जाँच-परख कर सही चुनाव कर सकते हैं।

          केवल प्रभु यीशु मसीह के साथ एक सही संबंध ही हमें पूर्ण संतुष्टि दे सकता है, हमें तृप्त रख सकता है। हम अपने लिए उसके अनुपम, अद्भुत प्रेम को समझें, और अपनी तथा औरों की तृप्ति के लिए “...परमेश्वर की सारी भरपूरी तक परिपूर्ण हो जाएँ” (इफिसियों 3:19)। - जेनिफर बेनसन शुल्ट

 

जो प्रभु यीशु को जीवन की रोटी के रूप में देखते हैं, वे कभी भूखे नहीं होंगे।


जीवन की रोटी जो स्वर्ग से उतरी मैं हूं। यदि कोई इस रोटी में से खाए, तो सर्वदा जीवित रहेगा और जो रोटी मैं जगत के जीवन के लिये दूंगा, वह मेरा मांस है। - यूहन्ना 6:51

बाइबल पाठ: नीतिवचन 27:1-10

नीतिवचन 27:1 कल के दिन के विषय में मत फूल, क्योंकि तू नहीं जानता कि दिन भर में क्या होगा।

नीतिवचन 27:2 तेरी प्रशंसा और लोग करें तो करें, परन्तु तू आप न करना; दूसरा तुझे सराहे तो सराहे, परन्तु तू अपनी सराहना न करना।

नीतिवचन 27:3 पत्थर तो भारी है और बालू में बोझ है, परन्तु मूढ का क्रोध उन दोनों से भी भारी है।

नीतिवचन 27:4 क्रोध तो क्रूर, और प्रकोप धारा के समान होता है, परन्तु जब कोई जल उठता है, तब कौन ठहर सकता है?

नीतिवचन 27:5 खुली हुई डांट गुप्त प्रेम से उत्तम है।

नीतिवचन 27:6 जो घाव मित्र के हाथ से लगें वह विश्वासयोग्य है परन्तु बैरी अधिक चुम्बन करता है।

नीतिवचन 27:7 सन्तुष्ट होने पर मधु का छत्ता भी फीका लगता है, परन्तु भूखे को सब कड़वी वस्तुएं भी मीठी जान पड़ती हैं।

नीतिवचन 27:8 स्थान छोड़ कर घूमने वाला मनुष्य उस चिडिय़ा के समान है, जो घोंसला छोड़ कर उड़ती फिरती है।

नीतिवचन 27:9 जैसे तेल और सुगन्ध से, वैसे ही मित्र के हृदय की मनोहर सम्मति से मन आनन्दित होता है।

नीतिवचन 27:10 जो तेरा और तेरे पिता का भी मित्र हो उसे न छोड़ना; और अपनी विपत्ति के दिन अपने भाई के घर न जाना। प्रेम करने वाला पड़ोसी, दूर रहने वाले भाई से कहीं उत्तम है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • अय्यूब 14-16
  • प्रेरितों 9:22-43


सोमवार, 14 सितंबर 2020

संतुष्टि

 

         हमारे बाइबल स्कूल के एक कार्यक्रम के दौरान हमने बच्चों में नाश्ता बांटा, और हम ने देखा कि एक बच्चे ने अपने नाश्ते को बहुत जल्दी से खा लिया, और फिर अन्य बच्चों के द्वारा मेज़ छोड़े गए नाश्ते को भी उठाकर खा लिया। फिर मैंने उस पौपकौर्ण का एक पैकेट और दे दिया, किन्तु भी वह संतुष्ट नहीं था। हम आयोजक चिंतित थे कि यह छोटा बच्चा इतना भूखा क्यों था।

         मुझे बाद में विचार आया कि हम भी उस बालक के समान हो सकते हैं, जब बात हमारी गहरी लालसाओं की होती है। हम उन लालसाओं की संतुष्टि के तरीके तो ढूँढ़ते हैं, परन्तु हमें वह नहीं मिलता है जो हमें पूर्णतः संतुष्ट करता है।

         परमेश्वर के वचन बाइबल में यशायाह भविष्यद्वक्ता उन्हें जो भूखे और प्यासे हैं, आमंत्रित करता है, “आओ ... मोल लो और खाओ” (यशायाह 55:1)। परन्तु फिर वह पूछता है, “जो भोजन वस्तु नहीं है, उसके लिये तुम क्यों रुपया लगाते हो, और, जिस से पेट नहीं भरता उसके लिये क्यों परिश्रम करते हो?” (पद 2)। यहाँ पर यशायाह मात्र शारीरिक भूख के बारे में ही बात नहीं कर रहा है। परमेश्वर हमारी आत्मिक और भावनात्मक भूख को भी अपनी उपस्थिति की प्रतिज्ञा के द्वारा संतुष्ट कर सकता है। पद 3 की “सदा की वाचा” परमेश्वर द्वारा दाऊद से 2 शमूएल 7:8-16 में की गई प्रतिज्ञा को स्मरण कराती है। दाऊद के वंश से एक उद्धारकर्ता ने आना था जो मनुष्यों का परमेश्वर के साथ फिर से मेल-मिलाप करवा देगा। बाद में यूहन्ना 6:35 और 7:37 में, प्रभु यीशु ने भी उसी निमंत्रण को दिया जो यशायाह ने दिया था, और इस प्रकार अपनी पहचान उसी उद्धारकर्ता के रूप में करवाई जिसके विषय यशायाह और अन्य भविष्यद्वक्ताओं ने भविष्यवाणियाँ की थीं।

         परमेश्वर का निमंत्रण आज भी सभी के लिए खुला है, कि उसके पास पश्चाताप और समर्पण में आएँ और उससे पूर्ण संतुष्टि पाएं। - लिंडा वॉशिंगटन

 

केवल परमेश्वर ही हमारी आत्मिक भूख की संतुष्टि प्रदान कर सकता है।


यीशु ने उन से कहा, जीवन की रोटी मैं हूं: जो मेरे पास आएगा वह कभी भूखा न होगा और जो मुझ पर विश्वास करेगा, वह कभी प्यासा न होगा। - यूहन्ना 6:35

बाइबल पाठ: यशायाह 55:1-7

यशायाह 55:1 अहो सब प्यासे लोगों, पानी के पास आओ; और जिनके पास रुपया न हो, तुम भी आकर मोल लो और खाओ! दाखमधु और दूध बिन रुपए और बिना दाम ही आकर ले लो।

यशायाह 55:2 जो भोजन वस्तु नहीं है, उसके लिये तुम क्यों रुपया लगाते हो, और, जिस से पेट नहीं भरता उसके लिये क्यों परिश्रम करते हो? मेरी ओर मन लगाकर सुनो, तब उत्तम वस्तुएं खाने पाओगे और चिकनी चिकनी वस्तुएं खाकर सन्तुष्ट हो जाओगे।

यशायाह 55:3 कान लगाओ, और मेरे पास आओ; सुनो, तब तुम जीवित रहोगे; और मैं तुम्हारे साथ सदा की वाचा बान्धूंगा अर्थात दाऊद पर की अटल करुणा की वाचा।

यशायाह 55:4 सुनो, मैं ने उसको राज्य राज्य के लोगों के लिये साक्षी और प्रधान और आज्ञा देने वाला ठहराया है।

यशायाह 55:5 सुन, तू ऐसी जाति को जिसे तू नहीं जानता बुलाएगा, और ऐसी जातियां जो तुझे नहीं जानतीं तेरे पास दौड़ी आएंगी, वे तेरे परमेश्वर यहोवा और इस्राएल के पवित्र के निमित्त यह करेंगी, क्योंकि उसने तुझे शोभायमान किया है।

यशायाह 55:6 जब तक यहोवा मिल सकता है तब तक उसकी खोज में रहो, जब तक वह निकट है तब तक उसे पुकारो;

यशायाह 55:7 दुष्ट अपनी चाल चलन और अनर्थकारी अपने सोच विचार छोड़कर यहोवा ही की ओर फिरे, वह उस पर दया करेगा, वह हमारे परमेश्वर की ओर फिरे और वह पूरी रीति से उसको क्षमा करेगा।

 

एक साल में बाइबल: 

  • नीतिवचन 19-21
  • 2 कुरिन्थियों 7

रविवार, 16 अगस्त 2020

भूख

 

         मैं और मेरे पति किसी काम के लिए कार से जा रहे थे, और मेरे पति कार चला रहे थे, जबकि मैं उनके पास बैठी अपने फोन पर अपनी ई-मेल पढ़ रही थे। तभी मुझे एक विज्ञापन मिला, जो वहाँ की एक खाने-पीने के सामान की दुकान का था, और उनके डू-नट्स के बारे में था – और हम उस दुकान के पास से अभी निकले ही थे! डू-नट्स के उस विज्ञापन को देखते ही, मेरा पेट भूख से गुड़गुड़ाने लगा। मुझे अचंभा हुआ कि कैसे टेकनौलोजी ग्राहकों को बेचने वालों की ओर आकर्षित करने, उन्हें आमंत्रित करने की क्षमता रखती है।

         मैंने अपने ई-मेल देखने बन्द किए और विचार करने लगी, परमेश्वर की हमें निरंतर उसकी निकटता में लाने और बनाए रखने की लालसा के बारे में। परमेश्वर को सदा पता होता है कि मैं कहाँ हूँ, क्या सोच रही हूँ, क्या कर रही हूँ, क्या चाहती हूं, इत्यादि; और वह मुझे अपनी निकटता में लाने और रखने के लिए मुझे प्रभावित करते रहता है, पर क्या मैं उसके इन प्रयासों पर ध्यान देती हूँ? मैं सोचने लगी, ‘जिस प्रकार डू-नट्स के विचार से मेरा पेट गुड़गुड़ाने लगा, उसी प्रकार से परमेश्वर का विचार आने पर क्या मेरा हृदय भी उसकी निकटता और आज्ञाकारिता में रहने के लिए लालायित होता है?’

         परमेश्वर के वचन बाइबल में यूहन्ना 6 अध्याय में, पाँच हज़ार से अधिक लोगों को भोजन करवाने के आश्चर्यकर्म के पश्चात, प्रभु यीशु के शिष्यों ने उत्सुकता से उस से सदा जीवन की रोटी देते रहने के लिए कहा (पद 33-34)। तब प्रभु यीशु ने उन्हें उत्तर दिया, “जीवन की रोटी मैं हूं: जो मेरे पास आएगा वह कभी भूखा न होगा और जो मुझ पर विश्वास करेगा, वह कभी प्यासा न होगा” (पद 35)। यह कैसा अद्भुत है कि प्रभु यीशु के साथ संबंध में बने रहना, हमें हमारे जीवनों के लिए निरंतर पोषण प्रदान करता रहता है।

         उस डू-नट्स की दुकान के विज्ञापन ने मेरे शरीर की लालसा को जागृत करने का प्रयास किया, परन्तु परमेश्वर को निरंतर बनी रहने वाली मेरे हृदय की दशा की सम्पूर्ण जानकारी क्या मुझे प्रेरित करती है कि मैं ध्यान रख सकूँ कि मुझे उस की आवश्यकता बनी रहती है; और मैं उस पोषण की भूख को सदा जागृत रखूँ जो केवल उसी से मिल सकता है? - एलिसा मॉर्गन

 

वास्तविक शान्ति देने वाली जीवन की रोटी केवल प्रभु यीशु ही प्रदान कर सकता है।


जीवन की रोटी जो स्वर्ग से उतरी मैं हूं। यदि कोई इस रोटी में से खाए, तो सर्वदा जीवित रहेगा और जो रोटी मैं जगत के जीवन के लिये दूंगा, वह मेरा शरीर है। - यूहन्ना 6:51

बाइबल पाठ: यूहन्ना 6:32-40

यूहन्ना 6:32 यीशु ने उन से कहा, मैं तुम से सच सच कहता हूं कि मूसा ने तुम्हें वह रोटी स्वर्ग से न दी, परन्तु मेरा पिता तुम्हें सच्ची रोटी स्वर्ग से देता है।

यूहन्ना 6:33 क्योंकि परमेश्वर की रोटी वही है, जो स्वर्ग से उतरकर जगत को जीवन देती है।

यूहन्ना 6:34 तब उन्होंने उस से कहा, हे प्रभु, यह रोटी हमें सर्वदा दिया कर।

यूहन्ना 6:35 यीशु ने उन से कहा, जीवन की रोटी मैं हूं: जो मेरे पास आएगा वह कभी भूखा न होगा और जो मुझ पर विश्वास करेगा, वह कभी प्यासा न होगा।

यूहन्ना 6:36 परन्तु मैं ने तुम से कहा, कि तुम ने मुझे देख भी लिया है, तौभी विश्वास नहीं करते।

यूहन्ना 6:37 जो कुछ पिता मुझे देता है वह सब मेरे पास आएगा, उसे मैं कभी न निकालूंगा।

यूहन्ना 6:38 क्योंकि मैं अपनी इच्छा नहीं, वरन अपने भेजने वाले की इच्छा पूरी करने के लिये स्वर्ग से उतरा हूं।

यूहन्ना 6:39 और मेरे भेजने वाले की इच्छा यह है कि जो कुछ उसने मुझे दिया है, उस में से मैं कुछ न खोऊं परन्तु उसे अंतिम दिन फिर जिला उठाऊं।

यूहन्ना 6:40 क्योंकि मेरे पिता की इच्छा यह है, कि जो कोई पुत्र को देखे, और उस पर विश्वास करे, वह अनन्त जीवन पाए; और मैं उसे अंतिम दिन फिर जिला उठाऊंगा।

 

एक साल में बाइबल: 

  • भजन 94-96
  • रोमियों 15:14-33

सोमवार, 12 नवंबर 2018

रोटी



      मैं मेक्सिको के एक छोटे शहर में रहती हूँ, जहाँ प्रति प्रातः और संध्या एक विशेष आवाज़ सुनाई देती है: “रोटी!” एक व्यक्ति, अपनी मोटरसाईकिल पर एक बड़े से टोकरे में कई प्रकार की मीठी और नमकीन रोटी बेचता हुआ निकलता है। पहले मैं एक बड़े शहर में रहती थी, जहाँ रोटी खरीदने के लिए मुझे बेकरी तक जाना पड़ता था, परन्तु अब मैं घर पर ही ताज़ी रोटी प्राप्त करने का मज़ा ले सकती हूँ।

      शारीरिक भूख को मिटाने के विचार से आत्मिक भूख की ओर बढ़ाते हैं; और मुझे प्रभु यीशु द्वारा कहे, परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखे गए शब्द स्मरण आते हैं, “जीवन की रोटी जो स्वर्ग से उतरी मैं हूं। यदि कोई इस रोटी में से खाए, तो सर्वदा जीवित रहेगा...” (यूहन्ना 6:51)।

      किसी ने कहा है कि सुसमाचार प्रचार वास्तव में एक भिखारी के द्वारा किसी अन्य भिखारी को बताना है कि उसे रोटी कहाँ से प्राप्त हुई। हम में से अनेकों कह सकते हैं कि “एक समय पर मैं आत्मिक रूप से भूखा था, अपने पापों के कारण आत्मिक कुपोषण से मर रहा था। फिर मुझे सुसमाचार मिला। किसी ने मुझे बताया कि मुझे जीवन की रोटी कहाँ मिलेगी – प्रभु यीशु में; और प्रभु यीशु में विश्वास लाने, उससे अपने पापों की क्षमा माँगने तथा उसे अपना जीवन समर्पण करने के द्वारा मेरा जीवन बदल गया, मैं अनन्त मृत्यु से अनन्त जीवन में आ गया।”

      अब हमें यह आदर तथा दायित्व है कि इस जीवन की रोटी की ओर औरों को भी आकर्षित करें, उन्हें भी इसकी बारे में बताएँ। हम प्रभु यीशु मसीह के बारे में अपने पड़ौस में, अपने कार्यस्थल में, अपने स्कूल में, अपने मनोरंजन स्थलों पर, बता सकते हैं। हम प्रभु यीशु के विषय बस में, ट्रेन में, प्रतीक्षालय में, बात कर सकते हैं। हम अपने मित्रों के साथ प्रभु यीशु के सुसमाचार को बाँट सकते हैं।

      प्रभु यीशु मसीह ही जीवन की रोटी हैं, और हम मसीही विश्वासियों को यह सुसमाचार सब तक पहुंचाना है। - कीला ओकोआ


जीवन की रोटी को आप जहाँ कहीं भी हों, औरों के साथ बांटें।

नाशमान भोजन के लिये परिश्रम न करो, परन्तु उस भोजन के लिये जो अनन्त जीवन तक ठहरता है, जिसे मनुष्य का पुत्र तुम्हें देगा, क्योंकि पिता, अर्थात परमेश्वर ने उसी पर छाप कर दी है। - यूहन्ना 6:27

बाइबल पाठ: यूहन्ना 6:34-51
John 6:34 तब उन्होंने उस से कहा, हे प्रभु, यह रोटी हमें सर्वदा दिया कर।
John 6:35 यीशु ने उन से कहा, जीवन की रोटी मैं हूं: जो मेरे पास आएगा वह कभी भूखा न होगा और जो मुझ पर विश्वास करेगा, वह कभी प्यासा न होगा।
John 6:36 परन्तु मैं ने तुम से कहा, कि तुम ने मुझे देख भी लिया है, तोभी विश्वास नहीं करते।
John 6:37 जो कुछ पिता मुझे देता है वह सब मेरे पास आएगा, उसे मैं कभी न निकालूंगा।
John 6:38 क्योंकि मैं अपनी इच्छा नहीं, वरन अपने भेजने वाले की इच्छा पूरी करने के लिये स्वर्ग से उतरा हूं।
John 6:39 और मेरे भेजने वाले की इच्छा यह है कि जो कुछ उसने मुझे दिया है, उस में से मैं कुछ न खोऊं परन्तु उसे अंतिम दिन फिर जिला उठाऊं।
John 6:40 क्योंकि मेरे पिता की इच्छा यह है, कि जो कोई पुत्र को देखे, और उस पर विश्वास करे, वह अनन्त जीवन पाए; और मैं उसे अंतिम दिन फिर जिला उठाऊंगा।
John 6:41 सो यहूदी उस पर कुड़कुड़ाने लगे, इसलिये कि उसने कहा था; कि जो रोटी स्वर्ग से उतरी, वह मैं हूं।
John 6:42 और उन्होंने कहा; क्या यह यूसुफ का पुत्र यीशु नहीं, जिस के माता पिता को हम जानते हैं? तो वह क्योंकर कहता है कि मैं स्वर्ग से उतरा हूं।
John 6:43 यीशु ने उन को उत्तर दिया, कि आपस में मत कुड़कुड़ाओ।
John 6:44 कोई मेरे पास नहीं आ सकता, जब तक पिता, जिसने मुझे भेजा है, उसे खींच न ले; और मैं उसको अंतिम दिन फिर जिला उठाऊंगा।
John 6:45 भविष्यद्वक्ताओं के लेखों में यह लिखा है, कि वे सब परमेश्वर की ओर से सिखाए हुए होंगे। जिस किसी ने पिता से सुना और सीखा है, वह मेरे पास आता है।
John 6:46 यह नहीं, कि किसी ने पिता को देखा परन्तु जो परमेश्वर की ओर से है, केवल उसी ने पिता को देखा है।
John 6:47 मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि जो कोई विश्वास करता है, अनन्त जीवन उसी का है।
John 6:48 जीवन की रोटी मैं हूं।
John 6:49 तुम्हारे बाप दादों ने जंगल में मन्ना खाया और मर गए।
John 6:50 यह वह रोटी है जो स्वर्ग से उतरती है ताकि मनुष्य उस में से खाए और न मरे।
John 6:51 जीवन की रोटी जो स्वर्ग से उतरी मैं हूं। यदि कोई इस रोटी में से खाए, तो सर्वदा जीवित रहेगा और जो रोटी मैं जगत के जीवन के लिये दूंगा, वह मेरा मांस है।


एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 51-52
  • इब्रानियों 9



शनिवार, 2 जनवरी 2016

पोषण


   हाल ही में जब मैं ज़ुकाम से अत्याधिक ग्रसित था, तो मेरी भूख भी जाती रही। मैं सारा दिन कुछ विशेष मात्रा में भोजन किए बिना, केवल पानी पीकर ही रह लेता था। लेकिन मुझे अपनी भूख को वापस लाना अनिवार्य था क्योंकि मेरे शरीर को पोषण की आवश्यकता थी जो पानी से नहीं मिल सकता था और जिस पोषण के बिना मैं दुर्बल होने को था।

   जब इस्त्राएल के लोग बाबुल की बन्धुआई से लौट कर आए तो उनकी आत्मिक भूख-प्यास बहुत हलकी हो चुकी थी। वे परमेश्वर और उसके मार्गों से दूर जा चुके थे। उन लोगों के आत्मिक स्वास्थ्य को बहाल करने के लिए नहेम्याह ने परमेश्वर के वचन के पढ़े और सिखाए जाने का आयोजन किया जिसमें एज़्रा परमेश्वर के वचन का शिक्षक था।

   एज़्रा ने, सुबह से लेकर दोपहर तक मूसा की व्यवस्था को पढ़कर सुनाया और लोगों तक परमेश्वर के वचन की सच्चाईयों को पहुँचाया (नहेम्याह 8:3) और लोग ध्यान देकर सुनते थे। इससे परमेश्वर के वचन के लिए उनकी आत्मिक भूख जागृत हुई और परिवारों के अगुवों, याजकों (पुरोहितों) तथा लेवियों (मन्दिर के सेवादारों) ने एज़्रा से आग्रह किया कि उनको व्यवस्था और अधिक विस्तार से सिखाई-समझाई जाए (पद 13)।

   हम जब भी अपने आप को परमेश्वर से दूर और आत्मिक रीति से कमज़ोर अनुभव करें, हम अपने आत्मिक पोषण के लिए परमेश्वर के वचन रूपी निर्मल आत्मिक दूध को पाने के लिए उसके पास जा सकते हैं (1 पतरस 2:2)। परमेश्वर से माँगें कि वह आपके अन्दर उसके साथ संबंध बनाने और उन्हें प्रगाढ़ करने के लिए इच्छा जागृत करे या पुनःजागृत करे, और फिर अपने मन, मस्तिष्क तथा आत्मा को उसके वचन से भरना, उससे आत्मिक पोषण लेना आरंभ कर दें। - पोह फैंग चिया


परमेश्वर के वचन को खाते रहने से हम परमेश्वर में सामर्थी और स्वस्थ बने रहते हैं।

नये जन्मे हुए बच्‍चों की नाईं निर्मल आत्मिक दूध की लालसा करो, ताकि उसके द्वारा उद्धार पाने के लिये बढ़ते जाओ। - 1 पतरस 2:2 

बाइबल पाठ: नहेम्याह 8:1-12
Nehemiah 8:1 जब सातवां महीना निकट आया, उस समय सब इस्राएली अपने अपने नगर में थे। तब उन सब लोगों ने एक मन हो कर, जलफाटक के साम्हने के चौक में इकट्ठे हो कर, एज्रा शास्त्री से कहा, कि मूसा की जो व्यवस्था यहोवा ने इस्राएल को दी थी, उसकी पुस्तक ले आ। 
Nehemiah 8:2 तब एज्रा याजक सातवें महीने के पहिले दिन को क्या स्त्री, क्या पुरुष, जितने सुनकर समझ सकते थे, उन सभों के साम्हने व्यवस्था को ले आया। 
Nehemiah 8:3 और वह उसकी बातें भोर से दोपहर तक उस चौक के साम्हने जो जलफाटक के साम्हने था, क्या स्त्री, क्या पुरुष और सब समझने वालों को पढ़कर सुनाता रहा; और लोग व्यवस्था की पुस्तक पर कान लगाए रहे। 
Nehemiah 8:4 एज्रा शास्त्री, काठ के एक मचान पर जो इसी काम के लिये बना था, खड़ा हो गया; और उसकी दाहिनी अलंग मत्तित्याह, शेमा, अनायाह, ऊरिय्याह, हिल्किय्याह और मासेयाह; और बाई अलंग, पदायाह, मीशाएल, मल्किय्याह, हाशूम, हश्बद्दाना, जकर्याह और मशुल्लाम खड़े हुए। 
Nehemiah 8:5 तब एज्रा ने जो सब लोगों से ऊंचे पर था, सभों के देखते उस पुस्तक को खोल दिया; और जब उसने उसको खोला, तब सब लोग उठ खड़े हुए। 
Nehemiah 8:6 तब एज्रा ने महान परमेश्वर यहोवा को धन्य कहा; और सब लोगों ने अपने अपने हाथ उठा कर आमेन, आमेन, कहा; और सिर झुका कर अपना अपना माथा भूमि पर टेक कर यहोवा को दण्डवत किया। 
Nehemiah 8:7 और येशू, बानी, शेरेब्याह, यामीन, अक्कूब, शब्बतै, होदिय्याह, मासेयाह, कलीता, अजर्याह, योजाबाद, हानान और पलायाह नाम लेवीय, लोगों को व्यवस्था समझाते गए, और लोग अपने अपने स्थान पर खड़े रहे। 
Nehemiah 8:8 और उन्होंने परमेश्वर की व्यवस्था की पुस्तक से पढ़कर अर्थ समझा दिया; और लोगों ने पाठ को समझ लिया। 
Nehemiah 8:9 तब नहेमायाह जो अधिपति था, और एज्रा जो याजक और शास्त्री था, और जो लेवीय लोगों को समझा रहे थे, उन्होंने सब लोगों से कहा, आज का दिन तुम्हारे परमेश्वर यहोवा के लिये पवित्र है; इसलिये विलाप न करो और न रोओ। क्योंकि सब लोग व्यवस्था के वचन सुनकर रोते रहे। 
Nehemiah 8:10 फिर उसने उन से कहा, कि जा कर चिकना चिकना भोजन करो और मीठा मीठा रस पियो, और जिनके लिये कुछ तैयार नहीं हुआ उनके पास बैना भेजो; क्योंकि आज का दिन हमारे प्रभु के लिये पवित्र है; और उदास मत रहो, क्योंकि यहोवा का आनन्द तुम्हारा दृढ़ गढ़ है। 
Nehemiah 8:11 यों लेवियों ने सब लोगों को यह कहकर चुप करा दिया, कि चुप रहो क्योंकि आज का दिन पवित्र है; और उदास मत रहो। 
Nehemiah 8:12 तब सब लोग खाने, पीने, बैना भेजने और बड़ा आनन्द मनाने को चले गए, क्योंकि जो वचन उन को समझाए गए थे, उन्हें वे समझ गए थे।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 4-6
  • मत्ती 2


मंगलवार, 3 फ़रवरी 2015

दावत



   आज के इस द्रुत गति के जीवन में बहुत कम लोगों के पास आराम से मित्रों के साथ बैठकर भोजन करने का समय रह गया है। किसी ने इस बात पर व्यंग्य करते हुए कहा, आज के समय में विविध व्यंजनों वाले भोज का स्वाद लेने का एक ही तरीका है; उन सारे व्यंजनों को डबलरोटी के दो स्लाईसों के बीच में एक साथ लगाओ और खाओ!

   इस्त्राएल के बहुत से लोगों के बाबुल की बन्धुवाई से यरुशलेम के मन्दिर और शहरपनाह के पुनःनिर्माण के लिए वापस लौट कर आने के पश्चात एज़्रा ने उन्हें मूसा में होकर मिली परमेश्वर की व्यवस्था की पुस्तक को पढ़कर सुनाया (नहेम्याह 8:1)। वे लोग घंटों तक परमेश्वर के वचन को सुनते थे और वहाँ ऐसे शिक्षक थे जो उन्हें उस पढ़े गए वचन को समझाते थे। जब परमेश्वर के उन वचनों को सुन-समझकर उन लोगों को अपनी कमियों का बोध हुआ, तो वे पश्चाताप और ग्लानि में रोने लगे। तब एज़्रा तथा उस समय के उनके अधिपति नहेम्याह ने उन्हें समझाया कि यह समय रोने का नहीं वरन आनन्दित होने का है; और उन से कहा कि वे एक बड़े भोज की तैयारी करें और उन लोगों के साथ बाँटें जिनके पास कुछ नहीं है, "...क्योंकि यहोवा का आनन्द तुम्हारा दृढ़ गढ़ है। तब सब लोग खाने, पीने, बैना भेजने और बड़ा आनन्द मनाने को चले गए, क्योंकि जो वचन उन को समझाए गए थे, उन्हें वे समझ गए थे" (नहेम्याह 8:10, 12)।

   परमेश्वर ने अपने वचन बाइबल में जो आत्मिक भोजन की दावत हमारे लिए तैयार करके दी है, वह हमारे लिए बड़े आनन्द की बात है। समय निकालकर इस दावत का आनन्द लेना सीखें क्योंकि इस दावत की वस्तुएं स्वादिष्ट भी हैं तथा पौष्टिक भी, और हमें हर परिस्थिति के लिए हृष्ट-पुष्ट बनाती हैं। - डेविड मैक्कैसलैंड


मसीह यीशु जो जीवन की रोटी है, अपने जीवते वचन से हमारी आत्मिक भूख-प्यास तृप्त करता है।

यीशु ने उन से कहा, जीवन की रोटी मैं हूं: जो मेरे पास आएगा वह कभी भूखा न होगा और जो मुझ पर विश्वास करेगा, वह कभी प्यासा न होगा। - यूहन्ना 6:35

बाइबल पाठ: नहेम्याह 8:1-12
Nehemiah 8:1 जब सातवां महीना निकट आया, उस समय सब इस्राएली अपने अपने नगर में थे। तब उन सब लोगों ने एक मन हो कर, जलफाटक के साम्हने के चौक में इकट्ठे हो कर, एज्रा शास्त्री से कहा, कि मूसा की जो व्यवस्था यहोवा ने इस्राएल को दी थी, उसकी पुस्तक ले आ। 
Nehemiah 8:2 तब एज्रा याजक सातवें महीने के पहिले दिन को क्या स्त्री, क्या पुरुष, जितने सुनकर समझ सकते थे, उन सभों के साम्हने व्यवस्था को ले आया। 
Nehemiah 8:3 और वह उसकी बातें भोर से दो पहर तक उस चौक के साम्हने जो जलफाटक के साम्हने था, क्या स्त्री, क्या पुरुष और सब समझने वालों को पढ़कर सुनाता रहा; और लोग व्यवस्था की पुस्तक पर कान लगाए रहे। 
Nehemiah 8:4 एज्रा शास्त्री, काठ के एक मचान पर जो इसी काम के लिये बना था, खड़ा हो गया; और उसकी दाहिनी अलंग मत्तित्याह, शेमा, अनायाह, ऊरिय्याह, हिल्किय्याह और मासेयाह; और बाई अलंग, पदायाह, मीशाएल, मल्किय्याह, हाशूम, हश्बद्दाना,जकर्याह और मशुल्लाम खड़े हुए। 
Nehemiah 8:5 तब एज्रा ने जो सब लोगों से ऊंचे पर था, सभों के देखते उस पुस्तक को खोल दिया; और जब उसने उसको खोला, तब सब लोग उठ खड़े हुए। 
Nehemiah 8:6 तब एज्रा ने महान परमेश्वर यहोवा को धन्य कहा; और सब लोगों ने अपने अपने हाथ उठा कर आमेन, आमेन, कहा; और सिर झुका कर अपना अपना माथा भूमि पर टेक कर यहोवा को दण्डवत किया। 
Nehemiah 8:7 और येशू, बानी, शेरेब्याह, यामीन, अक्कूब, शब्बतै, होदिय्याह, मासेयाह, कलीता, अजर्याह, योजाबाद, हानान और पलायाह नाम लेवीय, लोगों को व्यवस्था समझाते गए, और लोग अपने अपने स्थान पर खड़े रहे। 
Nehemiah 8:8 और उन्होंने परमेश्वर की व्यवस्था की पुस्तक से पढ़कर अर्थ समझा दिया; और लोगों ने पाठ को समझ लिया। 
Nehemiah 8:9 तब नहेम्याह जो अधिपति था, और एज्रा जो याजक और शास्त्री था, और जो लेवीय लोगों को समझा रहे थे, उन्होंने सब लोगों से कहा, आज का दिन तुम्हारे परमेश्वर यहोवा के लिये पवित्र है; इसलिये विलाप न करो और न रोओ। क्योंकि सब लोग व्यवस्था के वचन सुनकर रोते रहे। 
Nehemiah 8:10 फिर उसने उन से कहा, कि जा कर चिकना चिकना भोजन करो और मीठा मीठा रस पियो, और जिनके लिये कुछ तैयार नहीं हुआ उनके पास बैना भेजो; क्योंकि आज का दिन हमारे प्रभु के लिये पवित्र है; और उदास मत रहो, क्योंकि यहोवा का आनन्द तुम्हारा दृढ़ गढ़ है। 
Nehemiah 8:11 यों लेवियों ने सब लोगों को यह कहकर चुप करा दिया, कि चुप रहो क्योंकि आज का दिन पवित्र है; और उदास मत रहो। 
Nehemiah 8:12 तब सब लोग खाने, पीने, बैना भेजने और बड़ा आनन्द मनाने को चले गए, क्योंकि जो वचन उन को समझाए गए थे, उन्हें वे समझ गए थे।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 31-33
  • मत्ती 22:1-22