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गुरुवार, 9 जुलाई 2020

शान्त


     एक माँ की कल्पना कीजिए, अपने छोटे से बच्चे पर प्रेम के साथ झुकी हुई, उसकी ऊँगली हलके से बच्चे की नाक और होठों पर रखी हुई है, और वह नम्र आवाज़ में बच्चे से कह रही है “श्श!, शांत!”, कोमलता से उसे सान्तवना दे रही है। उस माँ का हाव-भाव, और साधारण शब्द, उस बच्चे की निराशा, परेशानी, या दुःख के समय में उसकी व्याकुलता को शांत करने के लिए हैं। इस प्रकार के दृश्य सभी स्थानों पर देखे जाते हैं, सदा देखे जाते हैं, और हम में से अधिकाँश ने या तो यह किया है, या ऐसे प्रेम भरी अभिव्यक्तियों से शान्ति पाई है। जब मैं परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 131 पर विचार करता हूँ, तो मेरे मन में यही चित्रण उभर कर आता है।

     इस भजन की भाषा और शैली यही संकेत देते हैं कि भजनकार दाऊद ने कुछ ऐसा अनुभव किया था, जिसके कारण उसे कुछ गंभीर विचार करना पड़ा था। क्या आपने किसी ऐसी निराशा, पराजय, या असफलता का सामना किया है, जिसके कारण आप ने गंभीर, विचारमग्न, आंकलन करने वाली प्रार्थना की हो? जब आप किसी परीक्षा में असफल रहते हैं, आपकी कोई नौकरी जाती रहती है, या कोई संबंध टूट जाता है? दाऊद ने अपने मन की बात खुलकर परमेश्वर के सामने रख दी, और ऐसा करते समय उसने अपने मन को भी इमानदारी से टटोला, और मन की बातों को प्रकट किया (भजन 131:1)। अपनी परिस्थितियों के साथ शान्ति स्थापित करने में, उसे वैसी ही संतुष्टि प्राप्त हुई, जैसी उस छोटे बच्चे को अपने माँ के साथ होने से मिलती है (पद 2)।

     जीवन की परिस्थितियाँ बदलती रहती हैं, और कभी कभी वे हमें झुका देती हैं। किन्तु फिर भी हम आशावान और संतुष्ट रह सकते हैं, इस बात में स्थिर और सुदृढ़ कि हमारा परमेश्वर पिता हमें कभी नहीं छोड़ेगा या त्यागेगा। हम शांत होक उस पर सम्पूर्ण भरोसा रख सकते हैं। - आर्थर जैक्सन

 

केवल मसीह यीशु ही में हमें संतुष्टि मिलती है।


चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं! सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है। - भजन 46:10-11

बाइबल पाठ: भजन 131

भजन संहिता 131:1 हे यहोवा, न तो मेरा मन गर्व से और न मेरी दृष्टि घमण्ड से भरी है; और जो बातें बड़ी और मेरे लिये अधिक कठिन हैं, उन से मैं काम नहीं रखता।

भजन संहिता 131:2 निश्चय मैं ने अपने मन को शान्त और चुप कर दिया है, जैसे दूध छुड़ाया हुआ लड़का अपनी मां की गोद में रहता है, वैसे ही दूध छुड़ाए हुए लड़के के समान मेरा मन भी रहता है।

भजन संहिता 131:3 हे इस्राएल, अब से ले कर सदा सर्वदा यहोवा ही पर आशा लगाए रह!      

 

एक साल में बाइबल: 

  • अय्यूब 38-40
  • प्रेरितों 16:1-21


सोमवार, 4 मार्च 2019

समझता



      कभी-कभी मैं और मेरी पत्नि, हम एक दूसरे के वाक्यों को पूरा कर देते हैं। तीस वर्ष से अधिक के विवाहित जीवन में साथ रहते-रहते हम एक दूसरे के विचार और बात करने के बारे में बहुत अच्छे से परिचित हैं। कभी-कभी तो हमें वाक्य को पूरा भी नहीं करना पड़ता है; केवल एक शब्द या एक-दूसरे की ओर एक झलक ही हमारी सोच को एक दूसरे से व्यक्त करने के लिए पर्याप्त होती है।

      इसमें ऐसी सुख-शान्ति है जैसे पैरों में अच्छे से आ जाने वाले पुराने जूतों की जोड़ी को पहनने में मिलती है। हम कभी-कभी एक दूसरे को प्यार से “मेरी पुरानी जूती” भी कह देते हैं – जो ऐसा अभिवादन है जिसे तब तक समझ पाना कठिन है जब तक आप हमें अच्छे से नहीं जानते हों। वर्षों के साथ में हमारे संबंध की एक अपनी ही भाषा विक्सित हो गई है, जिनमें ऐसी अभिव्यक्तियाँ हैं जो दशकों के प्रेम और भरोसे का परिणाम हैं।

      ऐसे ही इस जानकारी में संतोष और सुख है कि परमेश्वर हमें भली-भांति जानता है और हमसे प्रेम बहुत करता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार दाऊद ने लिखा, “हे यहोवा, मेरे मुंह में ऐसी कोई बात नहीं जिसे तू पूरी रीति से न जानता हो” (भजन 139:4)। कल्पना कीजिए प्रभु यीशु के साथ बिना कुछ बोले वार्तालाप करने की, जिस में आप अपने हृदय की सभी बातें उससे निःसंकोच कहना चाहते हैं। परन्तु इससे पहले कि आप अपनी बात को शब्दों में लाने पाएँ, प्रभु आपकी ओर देखकर मुस्कुराता है और जो आप कहना चाहते हैं उसे व्यक्त कर देता है। यह जानने में कितना संतोष है कि हमें प्रभु परमेश्वर से वार्तालाप करने के लिए सही शब्दों का उपयोग करने की मजबूरी नहीं है। वह हमें जानता है, हमें अच्छे से समझता है। - जेम्स बैंक्स


परमेश्वर हमारे शब्दों से बढ़कर हमारे हृदयों को देखता है।

और हे मेरे पुत्र सुलैमान! तू अपने पिता के परमेश्वर का ज्ञान रख, और खरे मन और प्रसन्न जीव से उसकी सेवा करता रह; क्योंकि यहोवा मन को जांचता और विचार में जो कुछ उत्पन्न होता है उसे समझता है। यदि तू उसकी खोज में रहे, तो वह तुझ को मिलेगा; परन्तु यदि तू उसको त्याग दे तो वह सदा के लिये तुझ को छोड़ देगा। - 1 इतिहास 28:9

बाइबल पाठ: भजन 139:1-12
Psalms 139:1 हे यहोवा, तू ने मुझे जांच कर जान लिया है।
Psalms 139:2 तू मेरा उठना बैठना जानता है; और मेरे विचारों को दूर ही से समझ लेता है।
Psalms 139:3 मेरे चलने और लेटने की तू भली भांति छानबीन करता है, और मेरी पूरी चालचलन का भेद जानता है।
Psalms 139:4 हे यहोवा, मेरे मुंह में ऐसी कोई बात नहीं जिसे तू पूरी रीति से न जानता हो।
Psalms 139:5 तू ने मुझे आगे पीछे घेर रखा है, और अपना हाथ मुझ पर रखे रहता है।
Psalms 139:6 यह ज्ञान मेरे लिये बहुत कठिन है; यह गम्भीर और मेरी समझ से बाहर है।
Psalms 139:7 मैं तेरे आत्मा से भाग कर किधर जाऊं? वा तेरे साम्हने से किधर भागूं?
Psalms 139:8 यदि मैं आकाश पर चढूं, तो तू वहां है! यदि मैं अपना बिछौना अधोलोक में बिछाऊं तो वहां भी तू है!
Psalms 139:9 यदि मैं भोर की किरणों पर चढ़ कर समुद्र के पार जा बसूं,
Psalms 139:10 तो वहां भी तू अपने हाथ से मेरी अगुवाई करेगा, और अपने दाहिने हाथ से मुझे पकड़े रहेगा।
Psalms 139:11 यदि मैं कहूं कि अन्धकार में तो मैं छिप जाऊंगा, और मेरे चारों ओर का उजियाला रात का अन्धेरा हो जाएगा,
Psalms 139:12 तौभी अन्धकार तुझ से न छिपाएगा, रात तो दिन के तुल्य प्रकाश देगी; क्योंकि तेरे लिये अन्धियारा और उजियाला दोनों एक समान हैं।  


एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 31-33
  • मरकुस 9:1-29



बुधवार, 11 जुलाई 2018

संतुष्टि



      मेरी विधवा थी, और स्वास्थ्य संबंधित गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही थी; उसकी पुत्री ने उसे अपने घर के साथ लगे हुए एक वृद्धों के निवास-स्थान में रहने के लिए बुलाया। यद्यपि उस स्थान पर जाने का अर्थ होता अपने मित्रों, और अन्य परिवार जनों को छोड़कर बहुत दूर जाना, परन्तु मेरी ने परमेश्वर के इस प्रावधान के लिए उसका धन्यवाद किया, और आनदित हुई।

      नए स्थान पर रहते हुए छः माह बीतते-बीतते मेरी का आरंभिक आनन्द और संतुष्टि जाने लगे और वह अपने अन्दर कुड़कुड़ाने लगी और उसे संदेह होने लगे कि उसका यहाँ नए स्थान पर आना क्या वास्तव में परमेश्वर की सिद्ध इच्छा के अनुसार था। उसे अपने मसीही विश्वासी मित्रों की कमी खलती थी, और वह नया चर्च जहाँ उसे जाना होता था, उसके अकेले जाने के लिए बहुत दूर था।

      फिर उसने 19वीं शताब्दी के महान मसीही प्रचारक चार्ल्स स्पर्जन की लिखी कुछ बात पढ़ी; स्पर्जन ने लिखा था, “अब संतोष स्वर्ग का एक पुष्प है, और इसे पनपाने के लिए प्रयास और धैर्य आवश्यक है।” स्पर्जन ने आगे लिखा कि “पौलुस कहता है...’मैंने संतुष्ट होना सीखा है’(फिलिप्पियों 4:11), मानो एक समय पर वह संतुष्ट होना नहीं जानता था।”

      मेरी ने निष्कर्ष निकाला कि यदि पौलुस के समान एक समर्पित और दृढ़ मसीही प्रचारक, जो कैदखाने में बन्द था, मित्रों द्वारा अकेला छोड़ दिया गया था, और मृत्यु दण्ड के पूरा किए जाने की प्रतीक्षा कर रहा था, यदि संतुष्ट होना सीख सकता था, तो वो भी सीख सकती है।

      मेरी ने बताया, “मुझे एहसास हुआ कि जब तक मैं संतुष्टि का यह पाठ नहीं सीख लेती, मैं उन बातों का आनन्द नहीं लेने पाऊँगी, जिनकी योजनाएँ परमेश्वर ने मेरे लिए बनाई हैं। इसलिए मैंने अपने कुड़कुड़ाने की गलती को प्रभु परमेश्वर के सामने मान लिया, और उससे अपनी गलती के लिए क्षमा याचना की। संतुष्टि के इस पाठ को सीखने के कुछ ही समय के बाद, हाल ही में सेवा निवृत हुई एक महिला ने मुझ से चाहा के मैं प्रार्थना करने में उसकी सहयोगी बनूँ, और अन्य लोग चर्च ले जाने के लिए मुझे अपने साथ चलने के निमंत्रण देने लगे। एक अंतरंग मित्र के मिलने और आने-जाने में आसानी होने की मेरी आवश्यकताएं अद्भुत रीति से पूरी हो गईं।” – मेरियन स्ट्राउड


परमेश्वर सदा हमारी परिस्थितियों को तो नहीं बदलता है, 
परन्तु वह हमें ही बदल देता है।

पर सन्‍तोष सहित भक्ति बड़ी कमाई है। - 1 तिमुथियुस 6:6

बाइबल पाठ: फिलिप्प्यों 4:10-19
Philippians 4:10 मैं प्रभु में बहुत आनन्‍दित हूं कि अब इतने दिनों के बाद तुम्हारा विचार मेरे विषय में फिर जागृत हुआ है; निश्‍चय तुम्हें आरम्भ में भी इस का विचार था, पर तुम्हें अवसर न मिला।
Philippians 4:11 यह नहीं कि मैं अपनी घटी के कारण यह कहता हूं; क्योंकि मैं ने यह सीखा है कि जिस दशा में हूं, उसी में सन्‍तोष करूं।
Philippians 4:12 मैं दीन होना भी जानता हूं और बढ़ना भी जानता हूं: हर एक बात और सब दशाओं में तृप्‍त होना, भूखा रहना, और बढ़ना-घटना सीखा है।
Philippians 4:13 जो मुझे सामर्थ्य देता है उस में मैं सब कुछ कर सकता हूं।
Philippians 4:14 तौभी तुम ने भला किया, कि मेरे क्‍लेश में मेरे सहभागी हुए।
Philippians 4:15 और हे फिलप्‍पियो, तुम आप भी जानते हो, कि सुसमाचार प्रचार के आरम्भ में जब मैं ने मकिदुनिया से कूच किया तब तुम्हें छोड़ और किसी मण्‍डली ने लेने देने के विषय में मेरी सहयता नहीं की।
Philippians 4:16 इसी प्रकार जब मैं थिस्सलुनीके में था; तब भी तुम ने मेरी घटी पूरी करने के लिये एक बार क्या वरन दो बार कुछ भेजा था।
Philippians 4:17 यह नहीं कि मैं दान चाहता हूं परन्तु मैं ऐसा फल चाहता हूं, जो तुम्हारे लाभ के लिये बढ़ता जाए।
Philippians 4:18 मेरे पास सब कुछ है, वरन बहुतायत से भी है: जो वस्तुएं तुम ने इपफ्रुदीतुस के हाथ से भेजी थीं उन्हें पाकर मैं तृप्‍त हो गया हूं, वह तो सुगन्‍ध और ग्रहण करने के योग्य बलिदान है, जो परमेश्वर को भाता है।
Philippians 4:19 और मेरा परमेश्वर भी अपने उस धन के अनुसार जो महिमा सहित मसीह यीशु में है तुम्हारी हर एक घटी को पूरी करेगा।
     

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 1-3
  • प्रेरितों 17:1-15



शनिवार, 5 सितंबर 2015

संतुष्ट


   भोजन करने के पश्चात जब मैंने रेस्टरॉन्ट के गाड़ी खड़ी करने के स्थल में प्रवेश किया तो देखा कि वहां खड़ी गाड़ियों के बीच में से होकर एक छोटा ट्रक तेज़ी से जा रहा है। उस ट्रक के चालक की लापरवाही पर ध्यान करते हुए मेरा ध्यान ट्रक के आगे लगे स्टिकर पर भी गया जिस पर लिखा था, "लगभग संतुष्ट"। कुछ देर उस स्टिकर के सन्देश पर विचार करने के बाद मैं इस निषकर्ष पर पहुँचा कि "लगभग संतुष्ट" होना संभव नहीं है क्योंकि आप किसी भी बात को लेकर या तो संतुष्ट होंगे अन्यथा असंतुष्ट।

   इसमें कोई दो राय नहीं कि संतुष्ट होना सरल नहीं है। हम ऐसे संसार में रहते हैं जो हमारी इच्छाओं को लगातार और अधिक बढ़ाता रहता है, यहाँ तक कि हम कितना भी पा लें फिर भी असंतुष्ट ही रहते हैं। लेकिन यह कोई नई या आज के समय ही की बात नहीं है। परमेश्वर के वचन बाइबल में इब्रानियों नामक पुस्तक में इस असंतुष्टि का उपाय दिया गया है; इब्रानियों के लेखक द्वारा परमेश्वर के पवित्र आत्मा ने लिखवाया, "तुम्हारा स्‍वभाव लोभरिहत हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा" (इब्रानियों 13:5)। जो लोग संसार से सब कुछ पाने की इच्छा में एक मृगतृषणा के पीछे भागे चले जा रहे हैं, उनकी संतुष्टि का एक ही उपाय है, सच्चे और जीवते प्रभु परमेश्वर की उपस्थिति में मिलने वाली संतुष्टि। प्रभु परमेश्वर ही हमारी प्रत्येक आवश्यकता और अभिलाषा के लिए काफी है; केवल वही हमें शान्ति और संतुष्टि प्रदान कर सकता है; ऐसी संतुष्टि जो हमें इस जीवन और संसार की बातों के पीछे भागने से कभी नहीं प्राप्त हो सकती।

  लगभग संतुष्ट? ऐसी कोई चीज़ नहीं है; केवल प्रभु यीशु मसीह में होकर हमें सच्ची संतुष्टि मिल सकती है। - बिल क्राउडर

संतुष्टि का अर्थ यह नहीं है कि हम जो चाहें वह हमें मिल जाए, 
वरन यह है कि हमारे पास जो है हम उसी में संतोष के साथ रहना सीख सकें।

धर्मी का थोड़ा से माल दुष्टों के बहुत से धन से उत्तम है। - भजन 37:16

बाइबल पाठ: 1 तिमुथियुस 6:6-12
1 Timothy 6:6 पर सन्‍तोष सहित भक्ति बड़ी कमाई है। 
1 Timothy 6:7 क्योंकि न हम जगत में कुछ लाए हैं और न कुछ ले जा सकते हैं। 
1 Timothy 6:8 और यदि हमारे पास खाने और पहिनने को हो, तो इन्‍हीं पर सन्‍तोष करना चाहिए। 
1 Timothy 6:9 पर जो धनी होना चाहते हैं, वे ऐसी परीक्षा, और फंदे और बहुतेरे व्यर्थ और हानिकारक लालसाओं में फंसते हैं, जो मनुष्यों को बिगाड़ देती हैं और विनाश के समुद्र में डूबा देती हैं। 
1 Timothy 6:10 क्योंकि रूपये का लोभ सब प्रकार की बुराइयों की जड़ है, जिसे प्राप्त करने का प्रयत्न करते हुए कितनों ने विश्वास से भटक कर अपने आप को नाना प्रकार के दुखों से छलनी बना लिया है। 
1 Timothy 6:11 पर हे परमेश्वर के जन, तू इन बातों से भाग; और धर्म, भक्ति, विश्वास, प्रेम, धीरज, और नम्रता का पीछा कर। 
1 Timothy 6:12 विश्वास की अच्छी कुश्‍ती लड़; और उस अनन्त जीवन को धर ले, जिस के लिये तू बुलाया, गया, और बहुत गवाहों के साम्हने अच्छा अंगीकार किया था।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 146-147
  • 1 कुरिन्थियों 15:1-28


शनिवार, 18 अक्टूबर 2014

अनुग्रह और प्रेम


   मेरी मुलाकात एक ऐसे व्यक्ति से हुई जिसका यह मानना था कि उसके कार्य इतने बुरे थे कि उनके लिए परमेश्वर उसे कभी क्षमा नहीं कर सकता। एक अन्य व्यसक और परिपक्व जन ने उसे अपने साथ लिया और उसे संभाला, और फिर एक वर्ष बाद जब मैं उससे मिला तब तक वह पहला व्यक्ति प्रभु यीशु में पापों की क्षमा और उद्धार को पा चुका था और बड़ी लगन से परमेश्वर के वचन बाइबल को पढ़ने में लगा हुआ था। लेकिन और तीन वर्ष के बाद जब मेरी उससे बातचीत हुई तो मुझे आभास हुआ कि मसीही विश्वास के जीवन का उसका वह आरंभिक उत्साह अब क्षीण हो गया था, उसके स्थान पर कुड़कुड़ाहट उसके जीवन में आ गई थी; उसने कहा, "मुझे यह समझ नहीं आता कि परमेश्वर कैसे बुराई को पनपने और समृद्ध होने देता है जबकि उसके अपने पुत्र और पुत्रियाँ (उसका संकेत स्वयं अपनी ओर था) जीवन यापन के लिए संघर्ष में लगे हैं।" उसकी कुड़कुड़ाहट ने उसके मसीही विश्वास के आनन्द को समाप्त कर दिया था।

   बहुतेरे अन्य लोगों के समान ही, वह भी यह भूल गया था कि एक समय वह स्वयं भी उस बुराई में पड़ा था, और यह केवल मसीह यीशु में होकर उपलब्ध परमेश्वर का अनुग्रह ही था जिसके द्वारा उसका जीवन बदला और वह पापों से छूट सका। आज वह उस पाप क्षमा और उद्धार के लिए अपनी आरंभिक कृतज्ञता को भूल गया था, उसने अपने प्रति प्रभु के अनुग्रह का मूल्यांकन करने और अपना जीवन प्रभु के समक्ष बिताने की बजाए दूसरों का मूल्यांकन करने और अपनी तुलना उनसे करना आरंभ कर दिया था, जिससे उसका दृष्टिकोण बदल गया और उसका आनन्द जाता रहा। उसके इस व्यवहार से मुझे प्रभु यीशु द्वारा दाख की बारी में काम करने के लिए मज़दुरों को बुलाए जाने वाले दृष्टांत (मत्ती 20:1-16) की याद आई। स्वामी ने जिन्हें उस बारी में कार्य करने के लिए बुलाय था, उनमें से कुछ अपने कर्त्वय को भूल कर दुसरों के बारे में सोचने लग गए थे (पद 10-12), और परिणाम दुखदायी था।

   परमेश्वर हम में से किसी का भी, किसी भी रीति से, किसी भी बात के लिए लेशमात्र भी कर्ज़दार नहीं है। यदि हमारे पापों के बावजूद वह हमें अपनी पृथ्वी पर बने रहने देता है, हमें खाने-पीने-रहने-ओढ़ने को देता है, हमारे जीवनों में आनन्द के अवसर आने देता है, तो यह सब उसका हमारे प्रति अनुग्रह और प्रेम ही है। लेकिन इससे भी बढ़कर उसका प्रेम इसमें प्रदर्शित होता है कि वह संसार के सभी लोगों को प्रभु यीशु में होकर सेंत-मेंत उद्धार उपलब्ध कराता है, उनके पाप क्षमा करने को तैयार रहता है, उन्हें अपने परिवार में जोड़ने को लालायित रहता है। वह चाहता है कि हम सब उसके साथ अनन्तकाल तक स्वर्ग में निवास करें, और जो कोई प्रभु यीशु में होकर उसके पास आता है, उसके अन्दर वह अपना आत्मा निवास करने को देता है जिससे वह व्यक्ति उस अनन्तकाल के जीवन के लिए तैयार किया जा सके।

   किसी के भी जीवन में आने वाले उतार-चढ़ाव उसके प्रति परमेश्वर के इस महान अनुग्रह और प्रेम को किसी रीति से कमतर नहीं आँक सकते। जब तक हमारी नज़रें अपने उद्धारकर्ता प्रभु परमेश्वर यीशु मसीह पर लगी रहेंगी, और हम उसके वचन की रौशनी में स्वयं अपना आँकलन उसके समक्ष करते रहेंगे, हम उसके अनुग्रह के महत्व तथा हमारे प्रति उसके प्रेम की महानता को समझते रहेंगे। फिर हमारे जीवन में ना तो कुड़कुड़ाने का कोई अवसर होगा और ना ही प्रभु में हमारा आनन्द कभी छिन्न हो सकेगा। - रैन्डी किल्गोर


जीवन में तृप्त और आनन्दित रहने के लिए कभी यह ना भूलें कि परमेश्वर भला है और अपने बच्चों के लिए सदा भला ही करता है।

हे भाइयों, एक दूसरे पर दोष न लगाओ ताकि तुम दोषी न ठहरो, देखो, हाकिम द्वार पर खड़ा है। - याकूब 5:9

बाइबल पाठ: मत्ती 20:1-16
Matthew 20:1 स्वर्ग का राज्य किसी गृहस्थ के समान है, जो सबेरे निकला, कि अपने दाख की बारी में मजदूरों को लगाए। 
Matthew 20:2 और उसने मजदूरों से एक दीनार रोज पर ठहराकर, उन्हें अपने दाख की बारी में भेजा। 
Matthew 20:3 फिर पहर एक दिन चढ़े, निकल कर, और औरों को बाजार में बेकार खड़े देखकर, 
Matthew 20:4 उन से कहा, तुम भी दाख की बारी में जाओ, और जो कुछ ठीक है, तुम्हें दूंगा; सो वे भी गए। 
Matthew 20:5 फिर उसने दूसरे और तीसरे पहर के निकट निकलकर वैसा ही किया। 
Matthew 20:6 और एक घंटा दिन रहे फिर निकलकर औरों को खड़े पाया, और उन से कहा; तुम क्यों यहां दिन भर बेकार खड़े रहे? उन्हों ने उस से कहा, इसलिये, कि किसी ने हमें मजदूरी पर नहीं लगाया। 
Matthew 20:7 उसने उन से कहा, तुम भी दाख की बारी में जाओ। 
Matthew 20:8 सांझ को दाख बारी के स्‍वामी ने अपने भण्‍डारी से कहा, मजदूरों को बुलाकर पिछलों से ले कर पहिलों तक उन्हें मजदूरी दे दे। 
Matthew 20:9 सो जब वे आए, जो घंटा भर दिन रहे लगाए गए थे, तो उन्हें एक एक दीनार मिला। 
Matthew 20:10 जो पहिले आए, उन्होंने यह समझा, कि हमें अधिक मिलेगा; परन्तु उन्हें भी एक ही एक दीनार मिला। 
Matthew 20:11 जब मिला, तो वह गृहस्थ पर कुडकुड़ा के कहने लगे। 
Matthew 20:12 कि इन पिछलों ने एक ही घंटा काम किया, और तू ने उन्हें हमारे बराबर कर दिया, जिन्हों ने दिन भर का भार उठाया और घाम सहा? 
Matthew 20:13 उसने उन में से एक को उत्तर दिया, कि हे मित्र, मैं तुझ से कुछ अन्याय नहीं करता; क्या तू ने मुझ से एक दीनार न ठहराया? 
Matthew 20:14 जो तेरा है, उठा ले, और चला जा; मेरी इच्छा यह है कि जितना तुझे, उतना ही इस पिछले को भी दूं। 
Matthew 20:15 क्या उचित नहीं कि मैं अपने माल से जो चाहूं सो करूं? क्या तू मेरे भले होने के कारण बुरी दृष्टि से देखता है? 
Matthew 20:16 इसी रीति से जो पिछले हैं, वह पहिले होंगे, और जो पहिले हैं, वे पिछले होंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • मत्ती 20-22


बुधवार, 24 सितंबर 2014

डाह का समाधान


   एक कहानी है, दो दुकानदार, जिनकी दुकानें आमने-सामने थीं एक दुसरे के कटु प्रतिरोधी थे; वे सदा ही एक-दूसरे को नीचा दिखाने या नुकसान करने के प्रयास में लगे रहते थे। एक रात एक दुकानदार को स्वपन में एक स्वर्गदूत ने दर्शन दिया और कहा कि तुम्हारी कोई भी एक इच्छा मैं पूरी करूंगा, परन्तु शर्त यह है कि जो भी तुम मांगोगे वही चीज़ दोगुनी मात्रा में तुम्हारे सामने वाले दुकानदार को भी मिल जाएगी। उस स्वर्गदूत की बात सुनकर वह दुकानदार कुछ समय तक सोचता रहा, फिर स्वर्गदूत से बोला - मेरी एक आँख फोड़कर मुझे काना कर दो! डाह का कैसा भयानक प्रगटिकरण उस दुकानदार ने किया।

   डाह की भावना लोगों के जीवनों को बर्बाद कर देती है - वे चाहते हैं दूसरे के जीवन को बर्बाद करना परन्तु उनका अपना जीवन ही बर्बाद होता रहता है। कुरिन्थुस की मसीही मण्डली में भी डाह का प्रभाव आने लगा था; उन लोगों ने प्रभु यीशु में उद्धार के सुसमाचार को ग्रहण तो किया था परन्तु परमेश्वर के पवित्र आत्मा को अपने जीवन में संपूर्ण रीति से कार्यकारी नहीं होने दिया था। परिणाम स्वरूप उनमें वे पुरानी भावनाएं अभी भी विद्यमान थीं और वह मसीही मण्डली डाह के कारण विभाजित होने लगी थी। प्रेरित पौलुस ने उनके इस व्यवहार को साँसारिकता तथा अपरिपक्वता का सूचक बताया, क्योंकि ये मसीही विश्वासी मसीह में विश्वास द्वारा होने वाले परिवर्तित जीवन को प्रदर्शित नहीं कर रहे थे।

   परमेश्वर का पवित्र आत्मा हम मसीही विश्वासियों के जीवन में कार्यकारी है, इस बात का सबसे स्पष्ट प्रमाण है हमारे जीवन में दिखने वाला संतोष और जो कुछ भी हमारे पास है उसके लिए परमेश्वर के प्रति धन्यवादी रहना। जब हम इस भावना के साथ जीवन जीना सीख जाएंगे तो फिर परस्पर डाह या द्वेश नहीं वरन दूसरों को मिलने वाली आशीषों तथा वरदानों के लिए हम धन्यवादी हो जाएंगे, उनकी उपलब्धियों में उनके साथ आनन्दित रहेंगे और सच्चे मसीही प्रेम को प्रदर्शित करेंगे, और यही डाह का स्थाई समाधान है। - मार्विन विलियम्स


परमेश्वर के प्रति धन्यवादी बने रहना ही डाह का समाधान है।

इसलिये कि जहां डाह और विरोध होता है, वहां बखेड़ा और हर प्रकार का दुष्‍कर्म भी होता है। - याकूब 3:16 

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 3:1-10
1 Corinthians 3:1 हे भाइयों, मैं तुम से इस रीति से बातें न कर सका, जैसे आत्मिक लोगों से; परन्तु जैसे शारीरिक लोगों से, और उन से जो मसीह में बालक हैं। 
1 Corinthians 3:2 मैं ने तुम्हें दूध पिलाया, अन्न न खिलाया; क्योंकि तुम उसको न खा सकते थे; वरन अब तक भी नहीं खा सकते हो। 
1 Corinthians 3:3 क्योंकि अब तक शारीरिक हो, इसलिये, कि जब तुम में डाह और झगड़ा है, तो क्या तुम शारीरिक नहीं? और मनुष्य की रीति पर नहीं चलते? 
1 Corinthians 3:4 इसलिये कि जब एक कहता है, कि मैं पौलुस का हूं, और दूसरा कि मैं अपुल्लोस का हूं, तो क्या तुम मनुष्य नहीं? 
1 Corinthians 3:5 अपुल्लोस क्या है? और पौलुस क्या है? केवल सेवक, जिन के द्वारा तुम ने विश्वास किया, जैसा हर एक को प्रभु ने दिया। 
1 Corinthians 3:6 मैं ने लगाया, अपुल्लोस ने सींचा, परन्तु परमेश्वर ने बढ़ाया। 
1 Corinthians 3:7 इसलिये न तो लगाने वाला कुछ है, और न सींचने वाला, परन्तु परमेश्वर जो बढ़ाने वाला है।
1 Corinthians 3:8 लगाने वाला और सींचने वाला दानों एक हैं; परन्तु हर एक व्यक्ति अपने ही परिश्रम के अनुसार अपनी ही मजदूरी पाएगा। 
1 Corinthians 3:9 क्योंकि हम परमेश्वर के सहकर्मी हैं; तुम परमेश्वर की खेती और परमेश्वर की रचना हो। 
1 Corinthians 3:10 परमेश्वर के उस अनुग्रह के अनुसार, जो मुझे दिया गया, मैं ने बुद्धिमान राजमिस्री की नाईं नेव डाली, और दूसरा उस पर रद्दा रखता है; परन्तु हर एक मनुष्य चौकस रहे, कि वह उस पर कैसा रद्दा रखता है।

एक साल में बाइबल: 
  • होशे 5-7